१२

यूसुफ़

मक्की १११ आयतें पारा १२
يوسف
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१२:१
الٓر ۚ अलीफ़ लाम रा alif-lam-ra
अलीफ़ लाम रा
تِلْكَ ये til'ka
ये
ءَايَـٰتُ आयात हैं āyātu
आयात हैं
ٱلْكِتَـٰبِ (of) the Book l-kitābi
(of) the Book
ٱلْمُبِينِ वाज़ेह किताब की l-mubīni
वाज़ेह किताब की
١ (1)
(1)
अलिफ़, लाम, रा। ये स्पष्ट किताब की आयतें हैं।
१२:२
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
أَنزَلْنَـٰهُ नाज़िल किया हमने उसे anzalnāhu
नाज़िल किया हमने उसे
قُرْءَٰنًا क़ुरआन qur'ānan
क़ुरआन
عَرَبِيًّۭا अरबी ʿarabiyyan
अरबी
لَّعَلَّكُمْ ताकि तुम laʿallakum
ताकि तुम
تَعْقِلُونَ तुम समझ सको taʿqilūna
तुम समझ सको
٢ (2)
(2)
निःसंदेह हमने इस क़ुरआन को अरबी में उतारा है, ताकि तुम समझो।1
१२:३
نَحْنُ हम naḥnu
हम
نَقُصُّ हम बयान करते हैं naquṣṣu
हम बयान करते हैं
عَلَيْكَ आप पर ʿalayka
आप पर
أَحْسَنَ बेहतरीन aḥsana
बेहतरीन
ٱلْقَصَصِ क़िस्सों में से l-qaṣaṣi
क़िस्सों में से
بِمَآ इस वजह से कि bimā
इस वजह से कि
أَوْحَيْنَآ वही किया हमने awḥaynā
वही किया हमने
إِلَيْكَ तरफ़ आपके ilayka
तरफ़ आपके
هَـٰذَا ये hādhā
ये
ٱلْقُرْءَانَ क़ुरआन l-qur'āna
क़ुरआन
وَإِن और बेशक wa-in
और बेशक
كُنتَ थे आप kunta
थे आप
مِن before it min
before it
قَبْلِهِۦ इससे पहले qablihi
इससे पहले
لَمِنَ surely among lamina
surely among
ٱلْغَـٰفِلِينَ अलबत्ता बेख़बरों में से l-ghāfilīna
अलबत्ता बेख़बरों में से
٣ (3)
(3)
(ऐ नबी!) हम आपकी ओर इस क़ुरआन की वह़्य करके, आपके सामने एक बहुत अच्छा क़िस्सा बयान कर रहे हैं। निश्चय ही आप इससे पूर्व अनजानों में से थे।
१२:४
إِذْ जब idh
जब
قَالَ कहा qāla
कहा
يُوسُفُ यूसुफ़ ने yūsufu
यूसुफ़ ने
لِأَبِيهِ अपने वालिद से li-abīhi
अपने वालिद से
يَـٰٓأَبَتِ ऐ मेरे अब्बा जान yāabati
ऐ मेरे अब्बा जान
إِنِّى बेशक मैं innī
बेशक मैं
رَأَيْتُ देखा मैंने (ख़्वाब में) ra-aytu
देखा मैंने (ख़्वाब में)
أَحَدَ eleven aḥada
eleven
عَشَرَ ग्यारह ʿashara
ग्यारह
كَوْكَبًۭا सितारों को kawkaban
सितारों को
وَٱلشَّمْسَ और सूरज wal-shamsa
और सूरज
وَٱلْقَمَرَ और चाँद को wal-qamara
और चाँद को
رَأَيْتُهُمْ देखा मैंने उन्हें ra-aytuhum
देखा मैंने उन्हें
لِى मुझे
मुझे
سَـٰجِدِينَ सजदा करते हुए sājidīna
सजदा करते हुए
٤ (4)
(4)
जब यूसुफ़ ने अपने पिता से कहा : ऐ मेरे पिता! मैंने सपना देखा है कि ग्यारह सितारे, सूर्य तथा चाँद मुझे सजदा कर रहे हैं।
१२:५
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
يَـٰبُنَىَّ ऐ मेरे बेटे yābunayya
ऐ मेरे बेटे
لَا (Do) not
(Do) not
تَقْصُصْ ना तुम बयान करना taqṣuṣ
ना तुम बयान करना
رُءْيَاكَ ख़्वाब अपना ru'yāka
ख़्वाब अपना
عَلَىٰٓ to ʿalā
to
إِخْوَتِكَ अपने भाईयों पर ikh'watika
अपने भाईयों पर
فَيَكِيدُوا۟ पस वो चाल चलेंगे fayakīdū
पस वो चाल चलेंगे
لَكَ तेरे लिए laka
तेरे लिए
كَيْدًا ۖ एक चाल kaydan
एक चाल
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلشَّيْطَـٰنَ शैतान l-shayṭāna
शैतान
لِلْإِنسَـٰنِ इन्सान के लिए lil'insāni
इन्सान के लिए
عَدُوٌّۭ दुश्मन है ʿaduwwun
दुश्मन है
مُّبِينٌۭ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला
٥ (5)
(5)
उसने कहा : ऐ मेरे बेटे! अपना स्वप्न अपने भाइयों को न बताना1, अन्यथा वे तेरे विरुद्ध कोई चाल चलेंगे। निःसंदेह शैतान इनसान का खुला दुश्मन है।
१२:६
وَكَذَٰلِكَ और इसी तरह wakadhālika
और इसी तरह
يَجْتَبِيكَ चुन लेगा तुझे yajtabīka
चुन लेगा तुझे
رَبُّكَ रब तेरा rabbuka
रब तेरा
وَيُعَلِّمُكَ और वो सिखाएगा तुझे wayuʿallimuka
और वो सिखाएगा तुझे
مِن of min
of
تَأْوِيلِ हक़ीक़त में से tawīli
हक़ीक़त में से
ٱلْأَحَادِيثِ बातों की l-aḥādīthi
बातों की
وَيُتِمُّ और वो पूरा कर देगा wayutimmu
और वो पूरा कर देगा
نِعْمَتَهُۥ अपनी नेअमत को niʿ'matahu
अपनी नेअमत को
عَلَيْكَ तुझ पर ʿalayka
तुझ पर
وَعَلَىٰٓ and on waʿalā
and on
ءَالِ (the) family āli
(the) family
يَعْقُوبَ और आले याक़ूब पर yaʿqūba
और आले याक़ूब पर
كَمَآ जैसा कि kamā
जैसा कि
أَتَمَّهَا उसने पूरा किया उसे atammahā
उसने पूरा किया उसे
عَلَىٰٓ on ʿalā
on
أَبَوَيْكَ तेरे दो बापों पर abawayka
तेरे दो बापों पर
مِن before min
before
قَبْلُ इससे पहले qablu
इससे पहले
إِبْرَٰهِيمَ इब्राहीम ib'rāhīma
इब्राहीम
وَإِسْحَـٰقَ ۚ और इसहाक़ पर wa-is'ḥāqa
और इसहाक़ पर
إِنَّ बेशक inna
बेशक
رَبَّكَ रब तेरा rabbaka
रब तेरा
عَلِيمٌ बहुत इल्म वाला है ʿalīmun
बहुत इल्म वाला है
حَكِيمٌۭ ख़ूब हिकमत वाला है ḥakīmun
ख़ूब हिकमत वाला है
٦ (6)
(6)
और ऐसे ही तेरा पालनहार तुझे चुन लेगा तथा तुझे बातों (सपनों) का अर्थ सिखाएगा और तुझपर और याक़ूब के घराने पर अपना अनुग्रह1 पूरा करेगा, जिस तरह उसने इससे पहले उसे तेरे बाप-दादा इबराहीम और इसह़ाक़ पर पूरा किया था। निःसंदेह तेरा पालनहार सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
१२:७
۞ لَّقَدْ अलबत्ता तहक़ीक़ laqad
अलबत्ता तहक़ीक़
كَانَ हैं kāna
हैं
فِى in
in
يُوسُفَ यूसुफ़ में yūsufa
यूसुफ़ में
وَإِخْوَتِهِۦٓ और उसके भाईयों में wa-ikh'watihi
और उसके भाईयों में
ءَايَـٰتٌۭ निशानियाँ āyātun
निशानियाँ
لِّلسَّآئِلِينَ सवाल करने वालों के लिए lilssāilīna
सवाल करने वालों के लिए
٧ (7)
(7)
वास्तव में, यूसुफ़ और उसके भाइयों (की कहानी) में पूछने वालों1 के लिए कई निशानियाँ हैं।
१२:८
إِذْ जब idh
जब
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
لَيُوسُفُ बिला शुबाह यूसुफ़ layūsufu
बिला शुबाह यूसुफ़
وَأَخُوهُ और उसका भाई wa-akhūhu
और उसका भाई
أَحَبُّ ज़्यादा प्यारे हैं aḥabbu
ज़्यादा प्यारे हैं
إِلَىٰٓ to ilā
to
أَبِينَا हमारे वालिद को abīnā
हमारे वालिद को
مِنَّا हम से minnā
हम से
وَنَحْنُ हालाँकि हम wanaḥnu
हालाँकि हम
عُصْبَةٌ एक जत्था हैं ʿuṣ'batun
एक जत्था हैं
إِنَّ बेशक inna
बेशक
أَبَانَا वालिद हमारे abānā
वालिद हमारे
لَفِى (is) surely in lafī
(is) surely in
ضَلَـٰلٍۢ अलबत्ता भूल में हैं ḍalālin
अलबत्ता भूल में हैं
مُّبِينٍ वाज़ेह mubīnin
वाज़ेह
٨ (8)
(8)
जब उन (भाइयों) ने कहा : यूसुफ़ और उसका भाई हमारे पिता को, हमसे अधिक प्रिय हैं। जबकि हम एक गिरोह हैं। वास्तव में, हमारे पिता खुली गुमराही में हैं।
१२:९
ٱقْتُلُوا۟ क़त्ल कर दो uq'tulū
क़त्ल कर दो
يُوسُفَ यूसुफ़ को yūsufa
यूसुफ़ को
أَوِ या awi
या
ٱطْرَحُوهُ फेंक दो इसे iṭ'raḥūhu
फेंक दो इसे
أَرْضًۭا किसी ज़मीन में arḍan
किसी ज़मीन में
يَخْلُ ख़ाली हो जाएगा yakhlu
ख़ाली हो जाएगा
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
وَجْهُ चेहरा wajhu
चेहरा
أَبِيكُمْ तुम्हारे वालिद का abīkum
तुम्हारे वालिद का
وَتَكُونُوا۟ और तुम हो जाना watakūnū
और तुम हो जाना
مِنۢ after that min
after that
بَعْدِهِۦ बाद इसके baʿdihi
बाद इसके
قَوْمًۭا लोग qawman
लोग
صَـٰلِحِينَ नेक ṣāliḥīna
नेक
٩ (9)
(9)
यूसुफ़ को मार डालो या उसे किसी धरती में फेंक आओ। ताकि तुम्हारे पिता का ध्यान केवल तुम्हारी तरफ हो जाए और इसके बाद तुम नेक बन जाओ।
१२:१०
قَالَ कहा qāla
कहा
قَآئِلٌۭ एक कहने वाले ने qāilun
एक कहने वाले ने
مِّنْهُمْ उन्हीं में से min'hum
उन्हीं में से
لَا (Do) not
(Do) not
تَقْتُلُوا۟ ना तुम क़त्ल करो taqtulū
ना तुम क़त्ल करो
يُوسُفَ यूसुफ़ को yūsufa
यूसुफ़ को
وَأَلْقُوهُ और डाल दो उसे wa-alqūhu
और डाल दो उसे
فِى in
in
غَيَـٰبَتِ गहराई में ghayābati
गहराई में
ٱلْجُبِّ कुएँ की l-jubi
कुएँ की
يَلْتَقِطْهُ उठा लेगा उसे yaltaqiṭ'hu
उठा लेगा उसे
بَعْضُ कोई baʿḍu
कोई
ٱلسَّيَّارَةِ क़ाफ़िला l-sayārati
क़ाफ़िला
إِن अगर in
अगर
كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम
فَـٰعِلِينَ करने वाले fāʿilīna
करने वाले
١٠ (10)
(10)
उनमें से एक कहने वाले ने कहा : यूसुफ़ का वध न करो। उसे किसी गहरे कुएँ के अंदर डाल दो। उसे कोई कारवाँ निकाल ले जाएगा, यदि कुछ करने वाले हो।
१२:११
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
يَـٰٓأَبَانَا ऐ हमारे अब्बा जान yāabānā
ऐ हमारे अब्बा जान
مَا क्या है
क्या है
لَكَ आपको laka
आपको
لَا not
not
تَأْمَ۫نَّا नहीं आप भरोसा करते हम पर tamannā
नहीं आप भरोसा करते हम पर
عَلَىٰ with ʿalā
with
يُوسُفَ यूसुफ़ के मामले में yūsufa
यूसुफ़ के मामले में
وَإِنَّا हालाँकि बेशक हम wa-innā
हालाँकि बेशक हम
لَهُۥ उसके लिए lahu
उसके लिए
لَنَـٰصِحُونَ यक़ीनन ख़ैरख़्वाह हैं lanāṣiḥūna
यक़ीनन ख़ैरख़्वाह हैं
١١ (11)
(11)
उन्होंने कहा : ऐ हमारे पिता! क्या बात है कि यूसुफ़ के विषय में आप हमपर विश्वास नहीं करते? जबकि हम लोग उसका भला चाहने वाले हैं।
१२:१२
أَرْسِلْهُ भेज दीजिए उसे arsil'hu
भेज दीजिए उसे
مَعَنَا साथ हमारे maʿanā
साथ हमारे
غَدًۭا कल ghadan
कल
يَرْتَعْ ख़ूब खाए पिए yartaʿ
ख़ूब खाए पिए
وَيَلْعَبْ और खेले wayalʿab
और खेले
وَإِنَّا और बेशक हम wa-innā
और बेशक हम
لَهُۥ उसकी lahu
उसकी
لَحَـٰفِظُونَ अलबत्ता हिफ़ाज़त करने वाले हैं laḥāfiẓūna
अलबत्ता हिफ़ाज़त करने वाले हैं
١٢ (12)
(12)
उसे कल हमारे साथ भेज दें, वह खाए-पिए और खेले-कूदे, और निःसंदेह हम उसकी रक्षा करने वाले हैं।
१२:१३
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
إِنِّى बेशक मैं innī
बेशक मैं
لَيَحْزُنُنِىٓ अलबत्ता ग़मगीन करता है मुझे layaḥzununī
अलबत्ता ग़मगीन करता है मुझे
أَن कि an
कि
تَذْهَبُوا۟ तुम ले जाओ tadhhabū
तुम ले जाओ
بِهِۦ उसे bihi
उसे
وَأَخَافُ और मैं डरता हूँ wa-akhāfu
और मैं डरता हूँ
أَن कि an
कि
يَأْكُلَهُ खा जाए उसे yakulahu
खा जाए उसे
ٱلذِّئْبُ भेड़िया l-dhi'bu
भेड़िया
وَأَنتُمْ जबकि तुम wa-antum
जबकि तुम
عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे
غَـٰفِلُونَ ग़ाफ़िल हो ghāfilūna
ग़ाफ़िल हो
١٣ (13)
(13)
उस (याक़ूब) ने कहा : यह मेरे लिए दुःख की बात है कि तुम उसे ले जाओ, तथा मैं इस बात से (भी) डरता हूँ कि उसे भेड़िया खा जाए और तुम उसका ध्यान न रख सको।
१२:१४
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
لَئِنْ अलबत्ता अगर la-in
अलबत्ता अगर
أَكَلَهُ खा जाए उसे akalahu
खा जाए उसे
ٱلذِّئْبُ भेड़िया l-dhi'bu
भेड़िया
وَنَحْنُ जब कि हम wanaḥnu
जब कि हम
عُصْبَةٌ एक जत्था हैं ʿuṣ'batun
एक जत्था हैं
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
إِذًۭا तब idhan
तब
لَّخَـٰسِرُونَ अलबत्ता ख़सारा पाने वाले है lakhāsirūna
अलबत्ता ख़सारा पाने वाले है
١٤ (14)
(14)
उन्होंने कहा : यदि उसे भेड़िया खा गया, जबकि हम एक गिरोह हैं, तो वास्तव में, हम बड़े घाटे वाले हैं।
१२:१५
فَلَمَّا तो जब falammā
तो जब
ذَهَبُوا۟ वो ले गए dhahabū
वो ले गए
بِهِۦ उसे bihi
उसे
وَأَجْمَعُوٓا۟ और उन्होंने तय कर लिया wa-ajmaʿū
और उन्होंने तय कर लिया
أَن कि an
कि
يَجْعَلُوهُ वो डालेंगे उसे yajʿalūhu
वो डालेंगे उसे
فِى in
in
غَيَـٰبَتِ गहराई में ghayābati
गहराई में
ٱلْجُبِّ ۚ कुएँ की l-jubi
कुएँ की
وَأَوْحَيْنَآ और वही की हमने wa-awḥaynā
और वही की हमने
إِلَيْهِ तरफ़ उसके ilayhi
तरफ़ उसके
لَتُنَبِّئَنَّهُم अलबत्ता तू ज़रूर आगाह करेगा उन्हें latunabbi-annahum
अलबत्ता तू ज़रूर आगाह करेगा उन्हें
بِأَمْرِهِمْ उनके काम के बारे में bi-amrihim
उनके काम के बारे में
هَـٰذَا इस hādhā
इस
وَهُمْ जब कि वो wahum
जब कि वो
لَا (do) not
(do) not
يَشْعُرُونَ वो शऊर ना रखते होंगे yashʿurūna
वो शऊर ना रखते होंगे
١٥ (15)
(15)
फिर जब वे उसे ले गए और निश्चय कर लिया कि उसे गहरे कुएँ के अंदर डाल देंगे और हमने उस (यूसुफ़) की ओर वह़्य कर दी कि तुम अवश्य इन्हें इनके इस कर्म के बारे में बताओगे और वे कुछ जानते न होंगे।
१२:१६
وَجَآءُوٓ और वो आ गए wajāū
और वो आ गए
أَبَاهُمْ अपने वालिद के पास abāhum
अपने वालिद के पास
عِشَآءًۭ इशा के वक़्त ʿishāan
इशा के वक़्त
يَبْكُونَ रोते हुए yabkūna
रोते हुए
١٦ (16)
(16)
और वे इशा के वक़्त रोते हुए अपने पिता के पास आए।
१२:१७
قَالُوا۟ कहने लगे qālū
कहने लगे
يَـٰٓأَبَانَآ ऐ हमारे अब्बा जान yāabānā
ऐ हमारे अब्बा जान
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
ذَهَبْنَا चले गए हम dhahabnā
चले गए हम
نَسْتَبِقُ दौड़ का मुक़ाबला करते हुए nastabiqu
दौड़ का मुक़ाबला करते हुए
وَتَرَكْنَا और छोड़ गए हम wataraknā
और छोड़ गए हम
يُوسُفَ यूसुफ़ को yūsufa
यूसुफ़ को
عِندَ पास ʿinda
पास
مَتَـٰعِنَا अपने सामान के matāʿinā
अपने सामान के
فَأَكَلَهُ फिर खा गया उसे fa-akalahu
फिर खा गया उसे
ٱلذِّئْبُ ۖ भेड़िया l-dhi'bu
भेड़िया
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَنتَ आप anta
आप
بِمُؤْمِنٍۢ यक़ीन करने वाले bimu'minin
यक़ीन करने वाले
لَّنَا हम पर lanā
हम पर
وَلَوْ और अगरचे walaw
और अगरचे
كُنَّا हों हम kunnā
हों हम
صَـٰدِقِينَ सच बोलने वाले ṣādiqīna
सच बोलने वाले
١٧ (17)
(17)
उन्होंने कहा : ऐ हमारे पिता! हम आपस में दौड़ का मुक़ाबला करने लगे और यूसुफ़ को अपने सामान के पास छोड़ दिया। इतने में उसे भेड़िया खा गया। और आप तो हमारा विश्वास करने वाले नहीं हैं, यद्यपि हम सच ही क्यों न बोल रहे हों।
१२:१८
وَجَآءُو और वो लाए wajāū
और वो लाए
عَلَىٰ upon ʿalā
upon
قَمِيصِهِۦ उसकी क़मीज़ पर qamīṣihi
उसकी क़मीज़ पर
بِدَمٍۢ ख़ून bidamin
ख़ून
كَذِبٍۢ ۚ झूठा kadhibin
झूठा
قَالَ कहा qāla
कहा
بَلْ बल्कि bal
बल्कि
سَوَّلَتْ अच्छा कर के दिखाया sawwalat
अच्छा कर के दिखाया
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
أَنفُسُكُمْ तुम्हारे नफ़्सों ने anfusukum
तुम्हारे नफ़्सों ने
أَمْرًۭا ۖ एक काम को amran
एक काम को
فَصَبْرٌۭ तो सब्र ही faṣabrun
तो सब्र ही
جَمِيلٌۭ ۖ अच्छा है jamīlun
अच्छा है
وَٱللَّهُ और अल्लाह ही है wal-lahu
और अल्लाह ही है
ٱلْمُسْتَعَانُ जिस से मदद तलब की जाती है l-mus'taʿānu
जिस से मदद तलब की जाती है
عَلَىٰ against ʿalā
against
مَا उस पर जो
उस पर जो
تَصِفُونَ तुम बयान कर रहे हो taṣifūna
तुम बयान कर रहे हो
١٨ (18)
(18)
और वे उस (यूसुफ़) के कुर्ते पर झूठा रक्त1 लगाकर लाए। उस (याक़ूब) ने कहा : बल्कि तुम्हारे मन ने तुम्हारे लिए एक चीज़ को सुंदर बना दिया है! सो अब (मेरा काम) बेहतर सब्र करना है और जो बात तुम बना रहे हो, उसपर अल्लाह ही सहायक है।
१२:१९
وَجَآءَتْ और आया wajāat
और आया
سَيَّارَةٌۭ एक क़ाफ़िला sayyāratun
एक क़ाफ़िला
فَأَرْسَلُوا۟ तो उन्होंने भेजा fa-arsalū
तो उन्होंने भेजा
وَارِدَهُمْ अपना पानी लाने वाला wāridahum
अपना पानी लाने वाला
فَأَدْلَىٰ तो उसने डाला fa-adlā
तो उसने डाला
دَلْوَهُۥ ۖ डोल अपना dalwahu
डोल अपना
قَالَ बोला qāla
बोला
يَـٰبُشْرَىٰ वाह ख़ुश ख़बरी yābush'rā
वाह ख़ुश ख़बरी
هَـٰذَا ये तो hādhā
ये तो
غُلَـٰمٌۭ ۚ एक लड़का है ghulāmun
एक लड़का है
وَأَسَرُّوهُ और उन्होंने छुपा लिया उसे wa-asarrūhu
और उन्होंने छुपा लिया उसे
بِضَـٰعَةًۭ ۚ सरमाया (समझकर) biḍāʿatan
सरमाया (समझकर)
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
عَلِيمٌۢ ख़ूब जानने वाला है ʿalīmun
ख़ूब जानने वाला है
بِمَا उसे जो bimā
उसे जो
يَعْمَلُونَ वो अमल कर रहे थे yaʿmalūna
वो अमल कर रहे थे
١٩ (19)
(19)
और एक क़ाफ़िला आया। उसने अपने पानी भरने वाले को भेजा, उसने अपना डोल डाला, तो पुकार उठा : अरे, कितनी खुशी की बात है! यह तो एक बालक है। और उन्होंने उसे व्यापार का माल समझकर छिपा लिया और वे जो कुछ कर रहे थे अल्लाह उसे ख़ूब जानने वाला है।
१२:२०
وَشَرَوْهُ और उन्होंने बेच डाला उसे washarawhu
और उन्होंने बेच डाला उसे
بِثَمَنٍۭ क़ीमत पर bithamanin
क़ीमत पर
بَخْسٍۢ कम bakhsin
कम
دَرَٰهِمَ दरहमों में darāhima
दरहमों में
مَعْدُودَةٍۢ गिने चुने maʿdūdatin
गिने चुने
وَكَانُوا۟ और थे वो wakānū
और थे वो
فِيهِ उसमें fīhi
उसमें
مِنَ of mina
of
ٱلزَّٰهِدِينَ बेरग़बत लोगों में से l-zāhidīna
बेरग़बत लोगों में से
٢٠ (20)
(20)
और उन्होंने उसे थोड़े से मूल्य; गिनती के कुछ दिरहमों में बेच दिया और वे उसके बारे में कुछ अधिक की इच्छा नहीं रखते थे।
१२:२१
وَقَالَ और कहा उस शख़्स ने waqāla
और कहा उस शख़्स ने
ٱلَّذِى जिसने alladhī
जिसने
ٱشْتَرَىٰهُ ख़रीदा था उसे ish'tarāhu
ख़रीदा था उसे
مِن of min
of
مِّصْرَ मिस्र से miṣ'ra
मिस्र से
لِٱمْرَأَتِهِۦٓ अपनी बीवी को li-im'ra-atihi
अपनी बीवी को
أَكْرِمِى बाइज़्ज़त कर akrimī
बाइज़्ज़त कर
مَثْوَىٰهُ ठिकाना इसका mathwāhu
ठिकाना इसका
عَسَىٰٓ उम्मीद है ʿasā
उम्मीद है
أَن कि an
कि
يَنفَعَنَآ वो नफ़ा देगा हमें yanfaʿanā
वो नफ़ा देगा हमें
أَوْ या aw
या
نَتَّخِذَهُۥ हम बना लेंगे उसे nattakhidhahu
हम बना लेंगे उसे
وَلَدًۭا ۚ बेटा waladan
बेटा
وَكَذَٰلِكَ और इसी तरह wakadhālika
और इसी तरह
مَكَّنَّا जगह दी हमने makkannā
जगह दी हमने
لِيُوسُفَ यूसुफ को liyūsufa
यूसुफ को
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
وَلِنُعَلِّمَهُۥ और ताकि हम सिखाऐं उसे walinuʿallimahu
और ताकि हम सिखाऐं उसे
مِن (the) interpretation of min
(the) interpretation of
تَأْوِيلِ हक़ीक़त में से tawīli
हक़ीक़त में से
ٱلْأَحَادِيثِ ۚ बातों की l-aḥādīthi
बातों की
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
غَالِبٌ ग़ालिब है ghālibun
ग़ालिब है
عَلَىٰٓ over ʿalā
over
أَمْرِهِۦ अपने काम पर amrihi
अपने काम पर
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
أَكْثَرَ अक्सर akthara
अक्सर
ٱلنَّاسِ लोग l-nāsi
लोग
لَا (do) not
(do) not
يَعْلَمُونَ नहीं वो इल्म रखते yaʿlamūna
नहीं वो इल्म रखते
٢١ (21)
(21)
और मिस्र के जिस व्यक्ति ने उसे खरीदा था, उसने अपनी पत्नी से कहा : इसे आदर-मान से रखो। संभव है यह हमें लाभ पहुँचाए, अथवा हम इसे अपना पुत्र बना लें। इस प्रकार उस भूभाग में हमने यूसुफ़ के लिए क़दम जमाने की राह निकाली और ताकि उसे बातों (सपनों) का अर्थ सिखाएँ। और अल्लाह अपना आदेश पूरा करके रहता है। परन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते।
१२:२२
وَلَمَّا और जब walammā
और जब
بَلَغَ वो पहुँचा balagha
वो पहुँचा
أَشُدَّهُۥٓ अपनी जवानी को ashuddahu
अपनी जवानी को
ءَاتَيْنَـٰهُ दिया हमने उसे ātaynāhu
दिया हमने उसे
حُكْمًۭا क़ुव्वते फ़ैसला ḥuk'man
क़ुव्वते फ़ैसला
وَعِلْمًۭا ۚ और इल्म waʿil'man
और इल्म
وَكَذَٰلِكَ और इसी तरह wakadhālika
और इसी तरह
نَجْزِى हम बदला देते हैं najzī
हम बदला देते हैं
ٱلْمُحْسِنِينَ एहसान करने वालों को l-muḥ'sinīna
एहसान करने वालों को
٢٢ (22)
(22)
और जब वह अपनी जवानी को पहुँचा और मज़बूत व तवाना हो गया, तो हमने उसे प्रबोध तथा ज्ञान प्रदान किया और इसी प्रकार हम सदाचारियों को बदला देते हैं।
१२:२३
وَرَٰوَدَتْهُ और फुसलाना चाहा उसे warāwadathu
और फुसलाना चाहा उसे
ٱلَّتِى उस औरत ने जो allatī
उस औरत ने जो
هُوَ वो (था) huwa
वो (था)
فِى in
in
بَيْتِهَا घर में जिसके baytihā
घर में जिसके
عَن from ʿan
from
نَّفْسِهِۦ उसके नफ़्स से nafsihi
उसके नफ़्स से
وَغَلَّقَتِ और उसने अच्छी तरह बन्द कर लिए waghallaqati
और उसने अच्छी तरह बन्द कर लिए
ٱلْأَبْوَٰبَ दरवाज़े l-abwāba
दरवाज़े
وَقَالَتْ और वो कहने लगी waqālat
और वो कहने लगी
هَيْتَ Come on hayta
Come on
لَكَ ۚ आ जाओ तुम laka
आ जाओ तुम
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
مَعَاذَ पनाह maʿādha
पनाह
ٱللَّهِ ۖ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
رَبِّىٓ मेरा रब है rabbī
मेरा रब है
أَحْسَنَ उसने अच्छा बनाया aḥsana
उसने अच्छा बनाया
مَثْوَاىَ ۖ ठिकाना मेरा mathwāya
ठिकाना मेरा
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
لَا not
not
يُفْلِحُ नहीं वो फ़लाह पाते yuf'liḥu
नहीं वो फ़लाह पाते
ٱلظَّـٰلِمُونَ जो ज़ालिम हैं l-ẓālimūna
जो ज़ालिम हैं
٢٣ (23)
(23)
और उस स्त्री1 ने उसके मन को रिझाया, जिसके घर में वह था। और द्वार बंद कर लिए और बोली : आ जाओ। उसने कहा : अल्लाह की पनाह! वह मेरा मालिक है। उसने मेरे निवास को अच्छा बनाया। वास्तव में, ज़ालिम लोग सफल नहीं होते।
१२:२४
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
هَمَّتْ उस औरत ने इरादा किया hammat
उस औरत ने इरादा किया
بِهِۦ ۖ उसका bihi
उसका
وَهَمَّ और वो इरादा कर लेता wahamma
और वो इरादा कर लेता
بِهَا उसका bihā
उसका
لَوْلَآ अगर ना होता lawlā
अगर ना होता
أَن कि an
कि
رَّءَا वो देखता raā
वो देखता
بُرْهَـٰنَ बुरहान/रोशन दलील bur'hāna
बुरहान/रोशन दलील
رَبِّهِۦ ۚ अपने रब की rabbihi
अपने रब की
كَذَٰلِكَ इसी तरह (हुआ) kadhālika
इसी तरह (हुआ)
لِنَصْرِفَ ताकि हम फेर दें linaṣrifa
ताकि हम फेर दें
عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे
ٱلسُّوٓءَ बुराई को l-sūa
बुराई को
وَٱلْفَحْشَآءَ ۚ और बेहयाई को wal-faḥshāa
और बेहयाई को
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
مِنْ (was) of min
(was) of
عِبَادِنَا हमारे बन्दों में से था ʿibādinā
हमारे बन्दों में से था
ٱلْمُخْلَصِينَ जो ख़ालिस किए हुए हैं l-mukh'laṣīna
जो ख़ालिस किए हुए हैं
٢٤ (24)
(24)
और निश्चय ही वह स्त्री उसकी इच्छा कर चुकी थी। और वह (यूसुफ़) भी उसकी इच्छा कर लेता, यदि अपने पालनहार का प्रमाण न देख लेता।1 हमने ऐसा इसलिए किया ताकि बुराई एवं अश्लीलता को उससे दूर रखें। वास्तव में, वह हमारे चुने हुए बंदों में से था।
१२:२५
وَٱسْتَبَقَا और वो दोनों दौड़े wa-is'tabaqā
और वो दोनों दौड़े
ٱلْبَابَ दरवाज़े की तरफ़ l-bāba
दरवाज़े की तरफ़
وَقَدَّتْ और उस औरत ने फाड़ दी waqaddat
और उस औरत ने फाड़ दी
قَمِيصَهُۥ क़मीज़ उसकी qamīṣahu
क़मीज़ उसकी
مِن from min
from
دُبُرٍۢ पीछे से duburin
पीछे से
وَأَلْفَيَا और उन दोनों ने पाया wa-alfayā
और उन दोनों ने पाया
سَيِّدَهَا उसके आक़ा को sayyidahā
उसके आक़ा को
لَدَا पास ladā
पास
ٱلْبَابِ ۚ दरवाज़े के l-bābi
दरवाज़े के
قَالَتْ वो कहने लगी qālat
वो कहने लगी
مَا क्या
क्या
جَزَآءُ बदला हो jazāu
बदला हो
مَنْ उसका जो man
उसका जो
أَرَادَ इरादा करे arāda
इरादा करे
بِأَهْلِكَ तेरी घर वाली के साथ bi-ahlika
तेरी घर वाली के साथ
سُوٓءًا बुराई का sūan
बुराई का
إِلَّآ मगर illā
मगर
أَن कि an
कि
يُسْجَنَ वो क़ैद किया जाए yus'jana
वो क़ैद किया जाए
أَوْ या aw
या
عَذَابٌ सज़ा (दिया जाए) ʿadhābun
सज़ा (दिया जाए)
أَلِيمٌۭ दर्दनाक alīmun
दर्दनाक
٢٥ (25)
(25)
और दोनों दरवाज़े की ओर दौड़े और उस (स्त्री) ने यूसुफ़ का कुर्ता पीछे से फाड़ डाला और दोनों ने उस (स्त्री) के पति को दरवाज़े के पास पाया। उस (स्त्री) ने कहा : जिसने तेरी पत्नी के साथ बुराई का इरादा किया, उसकी सज़ा इसके सिवा क्या हो सकती है कि उसे बंदी बनाया जाए या उसे दर्दनाक सज़ा (दी जाए)?
१२:२६
قَالَ कहा qāla
कहा
هِىَ इसी ने hiya
इसी ने
رَٰوَدَتْنِى फुसलाना चाहा मुझे rāwadatnī
फुसलाना चाहा मुझे
عَن about ʿan
about
نَّفْسِى ۚ मेरे नफ़्स से nafsī
मेरे नफ़्स से
وَشَهِدَ और गवाही दी washahida
और गवाही दी
شَاهِدٌۭ एक गवाह ने shāhidun
एक गवाह ने
مِّنْ of min
of
أَهْلِهَآ उस (औरत) के घर वालों में से ahlihā
उस (औरत) के घर वालों में से
إِن अगर in
अगर
كَانَ है kāna
है
قَمِيصُهُۥ क़मीज़ उसकी qamīṣuhu
क़मीज़ उसकी
قُدَّ फाड़ी गई qudda
फाड़ी गई
مِن from min
from
قُبُلٍۢ सामने से qubulin
सामने से
فَصَدَقَتْ तो वो सच्ची है faṣadaqat
तो वो सच्ची है
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
مِنَ (is) of mina
(is) of
ٱلْكَـٰذِبِينَ झूठों में से है l-kādhibīna
झूठों में से है
٢٦ (26)
(26)
उसने कहा : इसी ने मुझे रिझाना चाहा था और उस स्त्री के घराने से एक गवाह ने गवाही दी कि यदि उसका कुर्ता आगे से फाड़ा गया है, तो वह (महिला) सच्ची है और वह झूठा है।
१२:२७
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
كَانَ है kāna
है
قَمِيصُهُۥ क़मीज़ उसकी qamīṣuhu
क़मीज़ उसकी
قُدَّ फाड़ी गई qudda
फाड़ी गई
مِن from min
from
دُبُرٍۢ पीछे से duburin
पीछे से
فَكَذَبَتْ तो वो झूठी है fakadhabat
तो वो झूठी है
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
مِنَ (is) of mina
(is) of
ٱلصَّـٰدِقِينَ सच्चों में से है l-ṣādiqīna
सच्चों में से है
٢٧ (27)
(27)
और यदि उसका कुर्ता पीछे से फाड़ा गया है, तो वह (महिला) झूठी और वह (यूसुफ़) सच्चा है।
१२:२८
فَلَمَّا तो जब falammā
तो जब
رَءَا उसने देखा raā
उसने देखा
قَمِيصَهُۥ उसकी क़मीज़ को qamīṣahu
उसकी क़मीज़ को
قُدَّ फाड़ी गई है qudda
फाड़ी गई है
مِن from min
from
دُبُرٍۢ पीछे से duburin
पीछे से
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
إِنَّهُۥ बेशक ये innahu
बेशक ये
مِن (is) of min
(is) of
كَيْدِكُنَّ ۖ तुम्हारी चाल में से है kaydikunna
तुम्हारी चाल में से है
إِنَّ बेशक inna
बेशक
كَيْدَكُنَّ चाल तुम औरतों की kaydakunna
चाल तुम औरतों की
عَظِيمٌۭ बहुत बड़ी है ʿaẓīmun
बहुत बड़ी है
٢٨ (28)
(28)
फिर जब उस (अज़ीज़) ने देखा कि उसका कुर्ता पीछे से फाड़ा गया है, तो बोला : निःसंदेह ये तुम स्त्रियों की चाल है और निश्चय ही तुम्हारी चाल बड़ी घोर होती है।
१२:२९
يُوسُفُ ऐ यूसुफ़ yūsufu
ऐ यूसुफ़
أَعْرِضْ दरगुज़र करो aʿriḍ
दरगुज़र करो
عَنْ from ʿan
from
هَـٰذَا ۚ इससे hādhā
इससे
وَٱسْتَغْفِرِى और तू बख़्शिश माँग wa-is'taghfirī
और तू बख़्शिश माँग
لِذَنۢبِكِ ۖ अपने गुनाह की lidhanbiki
अपने गुनाह की
إِنَّكِ बेशक तू innaki
बेशक तू
كُنتِ है तू kunti
है तू
مِنَ of mina
of
ٱلْخَاطِـِٔينَ ख़ताकारों में से l-khāṭiīna
ख़ताकारों में से
٢٩ (29)
(29)
ऐ यूसुफ़! तुम इस बात को जाने दो और (ऐ स्त्री!) तू अपने पाप की क्षमा माँग। निःसंदेह तू ही पापियों में से है।
१२:३०
۞ وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
نِسْوَةٌۭ औरतों ने nis'watun
औरतों ने
فِى in
in
ٱلْمَدِينَةِ शहर में l-madīnati
शहर में
ٱمْرَأَتُ औरत im'ra-atu
औरत
ٱلْعَزِيزِ अज़ीज़ की l-ʿazīzi
अज़ीज़ की
تُرَٰوِدُ वो फुसलाती है turāwidu
वो फुसलाती है
فَتَىٰهَا अपने ग़ुलाम को fatāhā
अपने ग़ुलाम को
عَن about ʿan
about
نَّفْسِهِۦ ۖ उसके नफ़्स से nafsihi
उसके नफ़्स से
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
شَغَفَهَا वो उसके दिल में दाख़िल हो गया है shaghafahā
वो उसके दिल में दाख़िल हो गया है
حُبًّا ۖ मोहब्बत की रू से ḥubban
मोहब्बत की रू से
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
لَنَرَىٰهَا अलबत्ता हम देखती हैं उसे lanarāhā
अलबत्ता हम देखती हैं उसे
فِى in
in
ضَلَـٰلٍۢ गुमराही में ḍalālin
गुमराही में
مُّبِينٍۢ खुली-खुली mubīnin
खुली-खुली
٣٠ (30)
(30)
नगर की कुछ स्त्रियों ने कहा : अज़ीज़ (प्रमुख अधिकारी) की पत्नी, अपने दास को रिझा रही है! उसे उसके प्रेम ने मुग्ध कर दिया है। हमारे विचार में वह खुली गुमराही में है।
१२:३१
فَلَمَّا तो जब falammā
तो जब
سَمِعَتْ उसने सुना samiʿat
उसने सुना
بِمَكْرِهِنَّ मकर उन औरतों का bimakrihinna
मकर उन औरतों का
أَرْسَلَتْ उसने भेजा arsalat
उसने भेजा
إِلَيْهِنَّ उनकी तरफ़ (दावत नामा) ilayhinna
उनकी तरफ़ (दावत नामा)
وَأَعْتَدَتْ और तैयार कीं wa-aʿtadat
और तैयार कीं
لَهُنَّ उनके लिए lahunna
उनके लिए
مُتَّكَـًۭٔا मसनदें muttaka-an
मसनदें
وَءَاتَتْ और दी waātat
और दी
كُلَّ हर kulla
हर
وَٰحِدَةٍۢ एक औरत को wāḥidatin
एक औरत को
مِّنْهُنَّ उनमें से min'hunna
उनमें से
سِكِّينًۭا एक छुरी sikkīnan
एक छुरी
وَقَالَتِ और कहने लगी waqālati
और कहने लगी
ٱخْرُجْ निकल आ ukh'ruj
निकल आ
عَلَيْهِنَّ ۖ इन पर ʿalayhinna
इन पर
فَلَمَّا तो जब falammā
तो जब
رَأَيْنَهُۥٓ उन औरतों ने देखा उसे ra-aynahu
उन औरतों ने देखा उसे
أَكْبَرْنَهُۥ मरऊब हो गईं उससे akbarnahu
मरऊब हो गईं उससे
وَقَطَّعْنَ और काट लिए waqaṭṭaʿna
और काट लिए
أَيْدِيَهُنَّ हाथ अपने aydiyahunna
हाथ अपने
وَقُلْنَ और वो कहने लगीं waqul'na
और वो कहने लगीं
حَـٰشَ Forbid ḥāsha
Forbid
لِلَّهِ हाशा लिल्लाह lillahi
हाशा लिल्लाह
مَا नहीं है
नहीं है
هَـٰذَا ये hādhā
ये
بَشَرًا कोई इन्सान basharan
कोई इन्सान
إِنْ नहीं है in
नहीं है
هَـٰذَآ ये hādhā
ये
إِلَّا मगर illā
मगर
مَلَكٌۭ फ़रिश्ता malakun
फ़रिश्ता
كَرِيمٌۭ मुअज़्ज़िज़ karīmun
मुअज़्ज़िज़
٣١ (31)
(31)
चुनाँचे जब उसने उन स्त्रियों की छलकपट की बात सुनी, तो उन्हें बुला भेजा और उनके लिए गाव-तकिए लगवाए और प्रत्येक स्त्री को एक छुरी दे दी।1 और उसने (यूसुफ़ से) कहा : इनके सामने आ जाओ। फिर जब उन स्त्रियों ने उसे देखा, तो उन्होंने उसे बहुत बड़ा समझा और अपने हाथ काट डाले तथा बोल उठीं : अल्लाह की पनाह! यह मनुष्य नहीं है। यह तो कोई सम्मानित फ़रिश्ता है।
१२:३२
قَالَتْ वो कहने लगी qālat
वो कहने लगी
فَذَٰلِكُنَّ तो ये है fadhālikunna
तो ये है
ٱلَّذِى वो शख़्स जो alladhī
वो शख़्स जो
لُمْتُنَّنِى तुम मलामत करती हो मुझे lum'tunnanī
तुम मलामत करती हो मुझे
فِيهِ ۖ जिस (के बारे) में fīhi
जिस (के बारे) में
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
رَٰوَدتُّهُۥ मैंने फुसलाना चाहा उसे rāwadttuhu
मैंने फुसलाना चाहा उसे
عَن [from] ʿan
[from]
نَّفْسِهِۦ उसके नफ़्स के बारे में nafsihi
उसके नफ़्स के बारे में
فَٱسْتَعْصَمَ ۖ पस वो बच निकला fa-is'taʿṣama
पस वो बच निकला
وَلَئِن और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
لَّمْ ना lam
ना
يَفْعَلْ उसने किया yafʿal
उसने किया
مَآ जो
जो
ءَامُرُهُۥ मैं हुक्म देती हूँ उसे āmuruhu
मैं हुक्म देती हूँ उसे
لَيُسْجَنَنَّ अलबत्ता वो ज़रूर क़ैद किया जाएगा layus'jananna
अलबत्ता वो ज़रूर क़ैद किया जाएगा
وَلَيَكُونًۭا और अलबत्ता वो हो जाएगा walayakūnan
और अलबत्ता वो हो जाएगा
مِّنَ of mina
of
ٱلصَّـٰغِرِينَ ज़लील होने वालों में से l-ṣāghirīna
ज़लील होने वालों में से
٣٢ (32)
(32)
वह बोली : यह वही है, जिसके बारे में तुम मेरी निंदा कर रही थीं। वास्तव में, मैंने ही उसे रिझाया था, मगर वह बच निकला। और यदि वह मेरी बात न मानेगा, तो अवश्य ही बंदी बना दिया जाएगा और अवश्य ही अपमानित होगा।
१२:३३
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
رَبِّ ऐ मेरे रब rabbi
ऐ मेरे रब
ٱلسِّجْنُ क़ैद ख़ाना l-sij'nu
क़ैद ख़ाना
أَحَبُّ ज़्यादा महबूब है aḥabbu
ज़्यादा महबूब है
إِلَىَّ मुझे ilayya
मुझे
مِمَّا उससे जो mimmā
उससे जो
يَدْعُونَنِىٓ वो बुलाती हैं मुझे yadʿūnanī
वो बुलाती हैं मुझे
إِلَيْهِ ۖ तरफ़ जिसके ilayhi
तरफ़ जिसके
وَإِلَّا और अगर नहीं wa-illā
और अगर नहीं
تَصْرِفْ तू फेरेगा taṣrif
तू फेरेगा
عَنِّى मुझसे ʿannī
मुझसे
كَيْدَهُنَّ चाल उनकी kaydahunna
चाल उनकी
أَصْبُ मैं माइल हो जाऊँगा aṣbu
मैं माइल हो जाऊँगा
إِلَيْهِنَّ तरफ़ उनके ilayhinna
तरफ़ उनके
وَأَكُن और मैं हो जाऊँगा wa-akun
और मैं हो जाऊँगा
مِّنَ of mina
of
ٱلْجَـٰهِلِينَ जाहिलों में से l-jāhilīna
जाहिलों में से
٣٣ (33)
(33)
यूसुफ़ ने प्रार्थना की : ऐ मेरे पालनहार! मुझे क़ैद उससे अधिक प्रिय है, जिसकी ओर ये औरतें मुझे बुला रही हैं। और यदि तूने मुझसे इनके छल को दूर नहीं किया, तो मैं इनकी ओर झुक जाऊँगा और अज्ञानियों में से हो जाऊँगा।
१२:३४
فَٱسْتَجَابَ पस (दुआ) क़ुबूल कर ली fa-is'tajāba
पस (दुआ) क़ुबूल कर ली
لَهُۥ उसकी lahu
उसकी
رَبُّهُۥ उसके रब ने rabbuhu
उसके रब ने
فَصَرَفَ तो उसने फेर दी faṣarafa
तो उसने फेर दी
عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे
كَيْدَهُنَّ ۚ चाल उन औरतों की kaydahunna
चाल उन औरतों की
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلسَّمِيعُ ख़ूब सुनने वाला l-samīʿu
ख़ूब सुनने वाला
ٱلْعَلِيمُ ख़ूब जानने वाला l-ʿalīmu
ख़ूब जानने वाला
٣٤ (34)
(34)
तो उसके पालनहार ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उससे उनके छल को दूर कर दिया। निःसंदेह वह बड़ा सुनने वाला, बड़ा जानने वाला है।
१२:३५
ثُمَّ फिर thumma
फिर
بَدَا ज़ाहिर हो गया badā
ज़ाहिर हो गया
لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए
مِّنۢ after min
after
بَعْدِ बाद उसके baʿdi
बाद उसके
مَا जो
जो
رَأَوُا۟ उन्होंने देखी ra-awū
उन्होंने देखी
ٱلْـَٔايَـٰتِ निशानियाँ l-āyāti
निशानियाँ
لَيَسْجُنُنَّهُۥ अलबत्ता वो ज़रूर क़ैद कर दें उसे layasjununnahu
अलबत्ता वो ज़रूर क़ैद कर दें उसे
حَتَّىٰ until ḥattā
until
حِينٍۢ एक वक़्त तक ḥīnin
एक वक़्त तक
٣٥ (35)
(35)
फिर उन लोगों1 ने निशानियाँ2 देख लेने के बाद यही उचित समझा कि उस (यूसुफ़) को एक अवधि तक के लिए जेल में रखें।
१२:३६
وَدَخَلَ और दाख़िल हुए wadakhala
और दाख़िल हुए
مَعَهُ साथ उसके maʿahu
साथ उसके
ٱلسِّجْنَ क़ैद ख़ाने में l-sij'na
क़ैद ख़ाने में
فَتَيَانِ ۖ दो जवान fatayāni
दो जवान
قَالَ कहा qāla
कहा
أَحَدُهُمَآ उन दोनों में से एक ने aḥaduhumā
उन दोनों में से एक ने
إِنِّىٓ बेशक मैं innī
बेशक मैं
أَرَىٰنِىٓ मैं देखता हूँ ख़ुद को arānī
मैं देखता हूँ ख़ुद को
أَعْصِرُ मैं निचोड़ रहा हूँ aʿṣiru
मैं निचोड़ रहा हूँ
خَمْرًۭا ۖ शराब khamran
शराब
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱلْـَٔاخَرُ दूसरे ने l-ākharu
दूसरे ने
إِنِّىٓ बेशक मैं innī
बेशक मैं
أَرَىٰنِىٓ मैं देखता हूँ ख़ुद को arānī
मैं देखता हूँ ख़ुद को
أَحْمِلُ मैं उठाए हुए हूँ aḥmilu
मैं उठाए हुए हूँ
فَوْقَ over fawqa
over
رَأْسِى अपने सर के ऊपर rasī
अपने सर के ऊपर
خُبْزًۭا रोटी khub'zan
रोटी
تَأْكُلُ खाते हैं takulu
खाते हैं
ٱلطَّيْرُ परिन्दे l-ṭayru
परिन्दे
مِنْهُ ۖ उससे min'hu
उससे
نَبِّئْنَا बताओ हमें nabbi'nā
बताओ हमें
بِتَأْوِيلِهِۦٓ ۖ ताबीर उसकी bitawīlihi
ताबीर उसकी
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
نَرَىٰكَ हम देखते हैं तुझे narāka
हम देखते हैं तुझे
مِنَ of mina
of
ٱلْمُحْسِنِينَ मोहसिनीन में से l-muḥ'sinīna
मोहसिनीन में से
٣٦ (36)
(36)
और क़ैदखाने में उसके साथ दो युवक दाख़िल हुए। उनमें से एक ने कहा : मैंने स्वप्न देखा है कि शराब निचोड़ रहा हूँ। और दूसरे ने कहा : मैंने स्वप्न देखा है कि अपने सिर के ऊपर रोटी उठाए हुए हूँ, जिसमें से पक्षी खा रहे हैं। हमें इसका अर्थ बता दीजिए। हम देख रहे हैं कि आप सदाचारियों में से हैं।
१२:३७
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
لَا Not
Not
يَأْتِيكُمَا नहीं आएगा तुम दोनों के पास yatīkumā
नहीं आएगा तुम दोनों के पास
طَعَامٌۭ खाना ṭaʿāmun
खाना
تُرْزَقَانِهِۦٓ तुम दोनों दिए जाते हो उसे tur'zaqānihi
तुम दोनों दिए जाते हो उसे
إِلَّا मगर illā
मगर
نَبَّأْتُكُمَا मैं बता दूँगा तुम दोनों को nabbatukumā
मैं बता दूँगा तुम दोनों को
بِتَأْوِيلِهِۦ ताबीर bitawīlihi
ताबीर
قَبْلَ इससे पहले qabla
इससे पहले
أَن कि an
कि
يَأْتِيَكُمَا ۚ वो आए तुम दोनों के पास yatiyakumā
वो आए तुम दोनों के पास
ذَٰلِكُمَا ये dhālikumā
ये
مِمَّا उसमें से है जो mimmā
उसमें से है जो
عَلَّمَنِى सिखाया मुझे ʿallamanī
सिखाया मुझे
رَبِّىٓ ۚ मेरे रब ने rabbī
मेरे रब ने
إِنِّى बेशक मैं innī
बेशक मैं
تَرَكْتُ छोड़ दिया मैंने taraktu
छोड़ दिया मैंने
مِلَّةَ दीन millata
दीन
قَوْمٍۢ उन लोगों का qawmin
उन लोगों का
لَّا not
not
يُؤْمِنُونَ जो नहीं ईमान रखते yu'minūna
जो नहीं ईमान रखते
بِٱللَّهِ अल्लाह पर bil-lahi
अल्लाह पर
وَهُم और वो wahum
और वो
بِٱلْـَٔاخِرَةِ साथ आख़िरत के bil-ākhirati
साथ आख़िरत के
هُمْ वो ही hum
वो ही
كَـٰفِرُونَ कुफ़्र करने वाले हैं kāfirūna
कुफ़्र करने वाले हैं
٣٧ (37)
(37)
यूसुफ़ ने कहा : तुम दोनों के पास जो भोजन आता है, उसके तुम्हारे पास आने से पहले ही मैं तुम्हें उसकी हक़ीक़त बता दूँगा; यह उन बातों में से है, जो मेरे पालनहार ने मुझे सिखाई हैं। मैंने उन लोगों का धर्म त्याग दिया है, जो अल्लाह पर ईमान नहीं रखते और जो आख़िरत का इनकार करने वाले हैं।
१२:३८
وَٱتَّبَعْتُ और मैंने पैरवी की wa-ittabaʿtu
और मैंने पैरवी की
مِلَّةَ दीन की millata
दीन की
ءَابَآءِىٓ अपने आबा ओ अजदाद के ābāī
अपने आबा ओ अजदाद के
إِبْرَٰهِيمَ इब्राहीम ib'rāhīma
इब्राहीम
وَإِسْحَـٰقَ और इसहाक़ wa-is'ḥāqa
और इसहाक़
وَيَعْقُوبَ ۚ और याक़ूब के wayaʿqūba
और याक़ूब के
مَا नहीं
नहीं
كَانَ है kāna
है
لَنَآ हमारे लिए lanā
हमारे लिए
أَن कि an
कि
نُّشْرِكَ हम शरीक ठहराऐं nush'rika
हम शरीक ठहराऐं
بِٱللَّهِ साथ अल्लाह के bil-lahi
साथ अल्लाह के
مِن any min
any
شَىْءٍۢ ۚ किसी चीज़ को shayin
किसी चीज़ को
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
مِن (is) from min
(is) from
فَضْلِ फ़ज़ल में से है faḍli
फ़ज़ल में से है
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर
وَعَلَى and upon waʿalā
and upon
ٱلنَّاسِ और लोगों पर l-nāsi
और लोगों पर
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
أَكْثَرَ अक्सर akthara
अक्सर
ٱلنَّاسِ लोग l-nāsi
लोग
لَا (are) not
(are) not
يَشْكُرُونَ वो शुक्र अदा नहीं करते yashkurūna
वो शुक्र अदा नहीं करते
٣٨ (38)
(38)
और मैंने अपने बाप-दादाओं; इबराहीम, इसह़ाक़ और याक़ूब के धर्म का अनुसरण किया है। हमारे लिए वैध नहीं कि हम किसी चीज़ को अल्लाह का साझी बनाएँ। यह हमपर और लोगों पर अल्लाह की कृपा है। लेकिन अधिकतर लोग शुक्रिया अदा नहीं करते।1
१२:३९
يَـٰصَـٰحِبَىِ ऐ मेरे दो साथियो yāṣāḥibayi
ऐ मेरे दो साथियो
ٱلسِّجْنِ क़ैद ख़ाने के l-sij'ni
क़ैद ख़ाने के
ءَأَرْبَابٌۭ क्या बहुत से रब a-arbābun
क्या बहुत से रब
مُّتَفَرِّقُونَ मुतफ़र्रिक़/जुदा-जुदा mutafarriqūna
मुतफ़र्रिक़/जुदा-जुदा
خَيْرٌ बेहतर हैं khayrun
बेहतर हैं
أَمِ या ami
या
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
ٱلْوَٰحِدُ जो एक है l-wāḥidu
जो एक है
ٱلْقَهَّارُ बहुत ज़बरदस्त है l-qahāru
बहुत ज़बरदस्त है
٣٩ (39)
(39)
ऐ मेरे जेल के दोनों साथियो! क्या अलग-अलग अनेक पूज्य बेहतर हैं या एक प्रभुत्वशाली अल्लाह?
१२:४०
مَا नहीं
नहीं
تَعْبُدُونَ तुम इबादत करते taʿbudūna
तुम इबादत करते
مِن besides Him min
besides Him
دُونِهِۦٓ उसके सिवा dūnihi
उसके सिवा
إِلَّآ मगर illā
मगर
أَسْمَآءًۭ चन्द नामों की asmāan
चन्द नामों की
سَمَّيْتُمُوهَآ नाम रख लिए तुमने उनके sammaytumūhā
नाम रख लिए तुमने उनके
أَنتُمْ तुमने antum
तुमने
وَءَابَآؤُكُم और तुम्हारे आबा ओ अजदाद ने waābāukum
और तुम्हारे आबा ओ अजदाद ने
مَّآ नहीं
नहीं
أَنزَلَ उतारी anzala
उतारी
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
بِهَا उनकी bihā
उनकी
مِن any min
any
سُلْطَـٰنٍ ۚ कोई दलील sul'ṭānin
कोई दलील
إِنِ नहीं ini
नहीं
ٱلْحُكْمُ हुक्म l-ḥuk'mu
हुक्म
إِلَّا मगर illā
मगर
لِلَّهِ ۚ अल्लाह ही के लिए lillahi
अल्लाह ही के लिए
أَمَرَ उसने हुक्म दिया है amara
उसने हुक्म दिया है
أَلَّا कि ना allā
कि ना
تَعْبُدُوٓا۟ तुम इबादत करो taʿbudū
तुम इबादत करो
إِلَّآ मगर illā
मगर
إِيَّاهُ ۚ सिर्फ़ उसी की iyyāhu
सिर्फ़ उसी की
ذَٰلِكَ ये है dhālika
ये है
ٱلدِّينُ दीन l-dīnu
दीन
ٱلْقَيِّمُ दुरुस्त l-qayimu
दुरुस्त
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
أَكْثَرَ अक्सर akthara
अक्सर
ٱلنَّاسِ लोग l-nāsi
लोग
لَا (do) not
(do) not
يَعْلَمُونَ नहीं वो जानते yaʿlamūna
नहीं वो जानते
٤٠ (40)
(40)
तुम अल्लाह के सिवा जिनकी इबादत (पूजा) करते हो, वे केवल नाम हैं, जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने उनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। आदेश तो केवल अल्लाह का चलता है। उसने आदेश दिया है कि तुम एकमात्र उसी की इबादत (उपासना) करो। यही सीधा धर्म है। परन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते।
१२:४१
يَـٰصَـٰحِبَىِ ऐ मेरे दो साथियो yāṣāḥibayi
ऐ मेरे दो साथियो
ٱلسِّجْنِ क़ैद ख़ाने के l-sij'ni
क़ैद ख़ाने के
أَمَّآ रहा ammā
रहा
أَحَدُكُمَا तुम दोनों में से एक aḥadukumā
तुम दोनों में से एक
فَيَسْقِى पस वो पिलाएगा fayasqī
पस वो पिलाएगा
رَبَّهُۥ अपने आक़ा को rabbahu
अपने आक़ा को
خَمْرًۭا ۖ शराब khamran
शराब
وَأَمَّا और रहा wa-ammā
और रहा
ٱلْـَٔاخَرُ दूसरा l-ākharu
दूसरा
فَيُصْلَبُ पस वो सूली चढ़ाया जाएगा fayuṣ'labu
पस वो सूली चढ़ाया जाएगा
فَتَأْكُلُ तो खाऐंगे fatakulu
तो खाऐंगे
ٱلطَّيْرُ परिन्दे l-ṭayru
परिन्दे
مِن from min
from
رَّأْسِهِۦ ۚ उसके सर से rasihi
उसके सर से
قُضِىَ फ़ैसला कर दिया गया quḍiya
फ़ैसला कर दिया गया
ٱلْأَمْرُ मामले का l-amru
मामले का
ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो
فِيهِ जिस (के बारे) में fīhi
जिस (के बारे) में
تَسْتَفْتِيَانِ तुम दोनों पूछते हो tastaftiyāni
तुम दोनों पूछते हो
٤١ (41)
(41)
ऐ मेरे जेल के दोनों साथियो! तुम दोनो में से एक तो अपने मालिक को शराब पिलाएगा, और रहा दूसरा तो उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा, फिर पक्षी उसके सिर में से खाएँगे। जिसके संबंध में तुम दोनों पूछ रहे हो, उसका निर्णय किया जा चुका है।
१२:४२
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
لِلَّذِى उसे जिसका lilladhī
उसे जिसका
ظَنَّ उसे यक़ीन था ẓanna
उसे यक़ीन था
أَنَّهُۥ कि बेशक वो annahu
कि बेशक वो
نَاجٍۢ निजात पाने वाला है nājin
निजात पाने वाला है
مِّنْهُمَا उन दोनों में से min'humā
उन दोनों में से
ٱذْكُرْنِى ज़िक्र करना मेरा udh'kur'nī
ज़िक्र करना मेरा
عِندَ पास ʿinda
पास
رَبِّكَ अपने आक़ा के rabbika
अपने आक़ा के
فَأَنسَىٰهُ तो भुला दिया उसे fa-ansāhu
तो भुला दिया उसे
ٱلشَّيْطَـٰنُ शैतान ने l-shayṭānu
शैतान ने
ذِكْرَ ज़िक्र करना dhik'ra
ज़िक्र करना
رَبِّهِۦ अपने आक़ा से rabbihi
अपने आक़ा से
فَلَبِثَ तो वो ठहरा रहा falabitha
तो वो ठहरा रहा
فِى in
in
ٱلسِّجْنِ क़ैद ख़ाने में l-sij'ni
क़ैद ख़ाने में
بِضْعَ चन्द biḍ'ʿa
चन्द
سِنِينَ साल sinīna
साल
٤٢ (42)
(42)
और (यूसुफ़ ने) उन दोनों में से जिसके बारे में समझा था कि वह रिहा होने वाला है, उससे कहा : अपने मालिक के पास मेरा ज़िक्र करना। परंतु शैतान ने उसे अपने मालिक के पास उसकी चर्चा करने की बात भुला दी। अतः वह (यूसुफ़) कई वर्ष तक जेल ही में रहा।
१२:४३
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱلْمَلِكُ बादशाह ने l-maliku
बादशाह ने
إِنِّىٓ बेशक मैं innī
बेशक मैं
أَرَىٰ मैं देखता हूँ arā
मैं देखता हूँ
سَبْعَ सात sabʿa
सात
بَقَرَٰتٍۢ गायें baqarātin
गायें
سِمَانٍۢ मोटी simānin
मोटी
يَأْكُلُهُنَّ खा रही हैं उन्हें yakuluhunna
खा रही हैं उन्हें
سَبْعٌ सात sabʿun
सात
عِجَافٌۭ दुबली ʿijāfun
दुबली
وَسَبْعَ और सात wasabʿa
और सात
سُنۢبُلَـٰتٍ बालियाँ sunbulātin
बालियाँ
خُضْرٍۢ सरसब्ज़ khuḍ'rin
सरसब्ज़
وَأُخَرَ और दूसरी wa-ukhara
और दूसरी
يَابِسَـٰتٍۢ ۖ ख़ुश्क yābisātin
ख़ुश्क
يَـٰٓأَيُّهَا O yāayyuhā
O
ٱلْمَلَأُ ऐ सरदारो l-mala-u
ऐ सरदारो
أَفْتُونِى जवाब दो मुझे aftūnī
जवाब दो मुझे
فِى about
about
رُءْيَـٰىَ मेरे ख़्वाब के बारे में ru'yāya
मेरे ख़्वाब के बारे में
إِن अगर in
अगर
كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम
لِلرُّءْيَا ख़्वाब की lilrru'yā
ख़्वाब की
تَعْبُرُونَ तुम ताबीर करते taʿburūna
तुम ताबीर करते
٤٣ (43)
(43)
और (एक दिन) राजा ने कहा : निःसंदेह मैं (सपने में) सात मोटी गायों को देखता हूँ, जिनको सात दुबली गाएँ खा रही हैं और सात हरी बालियाँ हैं और दूसरी सात सूखी हैं। ऐ प्रमुखो! यदि तुम स्वप्न का अर्थ बता सकते हो, तो मुझे मेरे स्वप्न के संबंध में बताओ?
१२:४४
قَالُوٓا۟ उन्हों कहा qālū
उन्हों कहा
أَضْغَـٰثُ परेशान aḍghāthu
परेशान
أَحْلَـٰمٍۢ ۖ ख़्वाब हैं aḥlāmin
ख़्वाब हैं
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
نَحْنُ हम naḥnu
हम
بِتَأْوِيلِ ताबीर को bitawīli
ताबीर को
ٱلْأَحْلَـٰمِ ख़्वाबों की l-aḥlāmi
ख़्वाबों की
بِعَـٰلِمِينَ जानने वाले biʿālimīna
जानने वाले
٤٤ (44)
(44)
उन्होंने कहा : ये तो उलझे सपनों का मिश्रण है और हम ऐसे सपनों के अर्थ से अवगत नहीं हैं।
१२:४५
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱلَّذِى उस शख़्स ने जो alladhī
उस शख़्स ने जो
نَجَا निजात पा गया था najā
निजात पा गया था
مِنْهُمَا उन दोनों में से min'humā
उन दोनों में से
وَٱدَّكَرَ और उसे याद आ गया wa-iddakara
और उसे याद आ गया
بَعْدَ बाद baʿda
बाद
أُمَّةٍ एक मुद्दत के ummatin
एक मुद्दत के
أَنَا۠ मैं anā
मैं
أُنَبِّئُكُم मैं बताता हूँ तुम्हें unabbi-ukum
मैं बताता हूँ तुम्हें
بِتَأْوِيلِهِۦ ताबीर इसकी bitawīlihi
ताबीर इसकी
فَأَرْسِلُونِ पस भेजो मुझे fa-arsilūni
पस भेजो मुझे
٤٥ (45)
(45)
और उन दोनों में से जो रिहा हुआ था और उसे एक अवधि के बाद याद आया, उसने कहा : मैं तुम्हें इसका अर्थ बताऊँगा। अतः मुझे भेजो।1
१२:४६
يُوسُفُ यूसुफ़ yūsufu
यूसुफ़
أَيُّهَا O ayyuhā
O
ٱلصِّدِّيقُ ऐ बहुत सच्चे l-ṣidīqu
ऐ बहुत सच्चे
أَفْتِنَا बताओ हमें aftinā
बताओ हमें
فِى about
about
سَبْعِ (the) seven sabʿi
(the) seven
بَقَرَٰتٍۢ सात गायों के बारे में baqarātin
सात गायों के बारे में
سِمَانٍۢ मोटी simānin
मोटी
يَأْكُلُهُنَّ खा रही हैं उन्हें yakuluhunna
खा रही हैं उन्हें
سَبْعٌ सात sabʿun
सात
عِجَافٌۭ दुबली ʿijāfun
दुबली
وَسَبْعِ और सात wasabʿi
और सात
سُنۢبُلَـٰتٍ बालियाँ sunbulātin
बालियाँ
خُضْرٍۢ सरसब्ज़ khuḍ'rin
सरसब्ज़
وَأُخَرَ और दूसरी wa-ukhara
और दूसरी
يَابِسَـٰتٍۢ ख़ुश्क yābisātin
ख़ुश्क
لَّعَلِّىٓ ताकि मैं laʿallī
ताकि मैं
أَرْجِعُ मैं लौटूँ arjiʿu
मैं लौटूँ
إِلَى to ilā
to
ٱلنَّاسِ तरफ़ लोगों के l-nāsi
तरफ़ लोगों के
لَعَلَّهُمْ शायद कि वो laʿallahum
शायद कि वो
يَعْلَمُونَ वो जान लें yaʿlamūna
वो जान लें
٤٦ (46)
(46)
ऐ यूसुफ़! ऐ सत्यवादी! हमें सात मोटी गायों के बारे में बताओ, जिन्हें सात दुबली गाएँ खा रही हैं और सात हरी बालियाँ हैं और सात सूखी, ताकि मैं लोगों के पास वापस जाऊँ, ताकि वे जान लें।1
१२:४७
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
تَزْرَعُونَ तुम खेती-बाड़ी करोगे tazraʿūna
तुम खेती-बाड़ी करोगे
سَبْعَ सात sabʿa
सात
سِنِينَ साल sinīna
साल
دَأَبًۭا मुतावातिर da-aban
मुतावातिर
فَمَا पस जो famā
पस जो
حَصَدتُّمْ काट लो तुम ḥaṣadttum
काट लो तुम
فَذَرُوهُ तो छोड़ देना उसे fadharūhu
तो छोड़ देना उसे
فِى in
in
سُنۢبُلِهِۦٓ उसकी बाली में sunbulihi
उसकी बाली में
إِلَّا मगर illā
मगर
قَلِيلًۭا थोड़ा qalīlan
थोड़ा
مِّمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो
تَأْكُلُونَ तुम खाओ takulūna
तुम खाओ
٤٧ (47)
(47)
यूसुफ़ ने कहा : तुम सात वर्षों तक निरंतर खेती करोगे। चुनाँचे तुम जो (फ़सल) काटो, उसे उसकी बालियों ही में रहने दो सिवाय थोड़ी (मात्रा) के जो तुम खाओ।
१२:४८
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يَأْتِى आऐंगे yatī
आऐंगे
مِنۢ after min
after
بَعْدِ after baʿdi
after
ذَٰلِكَ बाद इसके dhālika
बाद इसके
سَبْعٌۭ सात (साल) sabʿun
सात (साल)
شِدَادٌۭ सख़्त shidādun
सख़्त
يَأْكُلْنَ खा जाऐंगे yakul'na
खा जाऐंगे
مَا जो
जो
قَدَّمْتُمْ पहले रखा तुमने qaddamtum
पहले रखा तुमने
لَهُنَّ उनके लिए lahunna
उनके लिए
إِلَّا मगर illā
मगर
قَلِيلًۭا थोड़ा qalīlan
थोड़ा
مِّمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो
تُحْصِنُونَ तुम महफ़ूज़ रखोगे tuḥ'ṣinūna
तुम महफ़ूज़ रखोगे
٤٨ (48)
(48)
फिर इसके बाद सात कठिन वर्ष आएँगे, जो उसे खा जाएँगे, जो तुमने उनके लिए पहले से इकट्ठा कर रखा होगा, सिवाय उस थोड़े-से हिस्से के जो तुम सुरक्षित कर लोगे।
१२:४९
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يَأْتِى आएगा yatī
आएगा
مِنۢ after min
after
بَعْدِ after baʿdi
after
ذَٰلِكَ बाद इसके dhālika
बाद इसके
عَامٌۭ एक साल ʿāmun
एक साल
فِيهِ जिसमें fīhi
जिसमें
يُغَاثُ बारिश दिए जाऐंगे yughāthu
बारिश दिए जाऐंगे
ٱلنَّاسُ लोग l-nāsu
लोग
وَفِيهِ और इसमें wafīhi
और इसमें
يَعْصِرُونَ वो रस निचोड़ेंगे yaʿṣirūna
वो रस निचोड़ेंगे
٤٩ (49)
(49)
फिर उसके बाद एक ऐसा वर्ष आएगा, जिसमें लोगों पर बारिश होगी तथा वे उसमें (रस) निचोड़ेंगे।
१२:५०
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱلْمَلِكُ बादशाह ने l-maliku
बादशाह ने
ٱئْتُونِى लाओ मेरे पास i'tūnī
लाओ मेरे पास
بِهِۦ ۖ उसे bihi
उसे
فَلَمَّا तो जब falammā
तो जब
جَآءَهُ आया उसके पास jāahu
आया उसके पास
ٱلرَّسُولُ पैग़ाम लाने वाला l-rasūlu
पैग़ाम लाने वाला
قَالَ कहा (यूसुफ़ ने) qāla
कहा (यूसुफ़ ने)
ٱرْجِعْ वापस जाओ ir'jiʿ
वापस जाओ
إِلَىٰ to ilā
to
رَبِّكَ तरफ़ अपने आक़ा के rabbika
तरफ़ अपने आक़ा के
فَسْـَٔلْهُ फिर उससे पूछो fasalhu
फिर उससे पूछो
مَا क्या
क्या
بَالُ हाल है bālu
हाल है
ٱلنِّسْوَةِ उन औरतों का l-nis'wati
उन औरतों का
ٱلَّـٰتِى जिन्होंने allātī
जिन्होंने
قَطَّعْنَ काट लिए थे qaṭṭaʿna
काट लिए थे
أَيْدِيَهُنَّ ۚ हाथ अपने aydiyahunna
हाथ अपने
إِنَّ बेशक inna
बेशक
رَبِّى रब मेरा rabbī
रब मेरा
بِكَيْدِهِنَّ उनकी चाल से bikaydihinna
उनकी चाल से
عَلِيمٌۭ ख़ूब वाक़िफ़ है ʿalīmun
ख़ूब वाक़िफ़ है
٥٠ (50)
(50)
और राजा ने कहा : उसे मेरे पास लाओ। फिर जब दूत यूसुफ़ के पास पहुँचा, तो उन्होंने (उससे) कहा : अपने मालिक के पास वापस जाओ1 और उससे पूछो कि उन स्त्रियों का क्या मामला है, जिन्होंने अपने हाथ काट लिए थे? निःसंदेह मेरा पालनहार उन स्त्रियों के छल से भली-भाँति अवगत है।
१२:५१
قَالَ कहा (बादशाह ने) qāla
कहा (बादशाह ने)
مَا क्या
क्या
خَطْبُكُنَّ मामला है तुम्हारा khaṭbukunna
मामला है तुम्हारा
إِذْ जब idh
जब
رَٰوَدتُّنَّ तुमने फुसलाना चाहा था rāwadttunna
तुमने फुसलाना चाहा था
يُوسُفَ यूसुफ़ को yūsufa
यूसुफ़ को
عَن from ʿan
from
نَّفْسِهِۦ ۚ उसके नफ़्स से nafsihi
उसके नफ़्स से
قُلْنَ कहने लगीं qul'na
कहने लगीं
حَـٰشَ Allah forbid ḥāsha
Allah forbid
لِلَّهِ हाशा लिल्लाह lillahi
हाशा लिल्लाह
مَا नहीं
नहीं
عَلِمْنَا जाना हमने ʿalim'nā
जाना हमने
عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर
مِن any min
any
سُوٓءٍۢ ۚ किसी बुराई को sūin
किसी बुराई को
قَالَتِ कहने लगी qālati
कहने लगी
ٱمْرَأَتُ औरत im'ra-atu
औरत
ٱلْعَزِيزِ अज़ीज़ की l-ʿazīzi
अज़ीज़ की
ٱلْـَٔـٰنَ अब l-āna
अब
حَصْحَصَ ज़ाहिर हो गया ḥaṣḥaṣa
ज़ाहिर हो गया
ٱلْحَقُّ हक़ l-ḥaqu
हक़
أَنَا۠ मैंने anā
मैंने
رَٰوَدتُّهُۥ फुसलाया था मैंने उसे rāwadttuhu
फुसलाया था मैंने उसे
عَن from ʿan
from
نَّفْسِهِۦ उसके नफ़्स से nafsihi
उसके नफ़्स से
وَإِنَّهُۥ और बेशक वो wa-innahu
और बेशक वो
لَمِنَ (is) surely of lamina
(is) surely of
ٱلصَّـٰدِقِينَ अलबत्ता सच्चों में से है l-ṣādiqīna
अलबत्ता सच्चों में से है
٥١ (51)
(51)
राजा ने (उन स्त्रियों से) पूछा : तुम्हारा क्या मामला था, जब तुमने यूसुफ़ के मन को रिझाया था? उन्होंने कहा : अल्लाह की पनाह! हमने उसमें कोई बुराई नहीं देखी। तब अज़ीज़ की पत्नी बोल उठी : अब सत्य खूब उजागर हो गया। मैंने ही उसके मन को रिझाया था और निःसंदेह वह सच्चा में से है।1
१२:५२
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
لِيَعْلَمَ ताकि वो जान ले liyaʿlama
ताकि वो जान ले
أَنِّى बेशक मैं annī
बेशक मैं
لَمْ not lam
not
أَخُنْهُ नहीं ख़यानत की मैंने उसकी akhun'hu
नहीं ख़यानत की मैंने उसकी
بِٱلْغَيْبِ ग़ायबाना bil-ghaybi
ग़ायबाना
وَأَنَّ और बेशक wa-anna
और बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
لَا (does) not
(does) not
يَهْدِى नहीं वो राह दिखाता yahdī
नहीं वो राह दिखाता
كَيْدَ मकर को kayda
मकर को
ٱلْخَآئِنِينَ ख़यानत करने वालों की l-khāinīna
ख़यानत करने वालों की
٥٢ (52)
(52)
(मैंने) यह इसलिए किया, ताकि वह जान ले कि मैंने उसकी अनुपस्थिति में उसके साथ विश्वासघात नहीं किया और निःसंदेह अल्लाह विश्वासघातियों के चाल को (सफलता का) मार्ग नहीं दिखाता।
१२:५३
۞ وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أُبَرِّئُ मैं बरी करता/करती ubarri-u
मैं बरी करता/करती
نَفْسِىٓ ۚ अपने नफ़्स को nafsī
अपने नफ़्स को
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلنَّفْسَ नफ़्स l-nafsa
नफ़्स
لَأَمَّارَةٌۢ अलबत्ता बहुत हुक्म देने वाला है la-ammāratun
अलबत्ता बहुत हुक्म देने वाला है
بِٱلسُّوٓءِ बुराई का bil-sūi
बुराई का
إِلَّا मगर illā
मगर
مَا जिस पर
जिस पर
رَحِمَ रहम करे raḥima
रहम करे
رَبِّىٓ ۚ मेरा रब rabbī
मेरा रब
إِنَّ बेशक inna
बेशक
رَبِّى मेरा रब rabbī
मेरा रब
غَفُورٌۭ बहुत बख़्शने वाला है ghafūrun
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ निहायत रहम करने वाला है raḥīmun
निहायत रहम करने वाला है
٥٣ (53)
(53)
और मैं खुद को बरी नहीं करती, निःसंदेह मन तो बुराई का बहुत आदेश देने वाला है, सिवाय उसके जिसपर मेरा पालनहार दया करे। निःसंदेह मेरा पालनहार अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
१२:५४
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱلْمَلِكُ बादशाह ने l-maliku
बादशाह ने
ٱئْتُونِى लाओ मेरे पास i'tūnī
लाओ मेरे पास
بِهِۦٓ उसे bihi
उसे
أَسْتَخْلِصْهُ मैं उसे ख़ास कर लूँ astakhliṣ'hu
मैं उसे ख़ास कर लूँ
لِنَفْسِى ۖ अपनी ज़ात के लिए linafsī
अपनी ज़ात के लिए
فَلَمَّا फिर जब falammā
फिर जब
كَلَّمَهُۥ उसने बात-चीत की उससे kallamahu
उसने बात-चीत की उससे
قَالَ कहा qāla
कहा
إِنَّكَ बेशक तू innaka
बेशक तू
ٱلْيَوْمَ आज से l-yawma
आज से
لَدَيْنَا हमारे यहाँ ladaynā
हमारे यहाँ
مَكِينٌ मर्तबे वाला makīnun
मर्तबे वाला
أَمِينٌۭ अमानतदार है amīnun
अमानतदार है
٥٤ (54)
(54)
और राजा ने कहा : उसे मेरे पास लाओ, उसे मैं अपने लिए विशेष कर लूँ और जब (राजा ने) उन (यूसुफ़) से बात की, तो कहा : निःसंदेह आप आज हमारे यहाँ पदाधिकारी, विश्वसनीय हैं।
१२:५५
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
ٱجْعَلْنِى मुक़र्रर कर दीजिए मुझे ij'ʿalnī
मुक़र्रर कर दीजिए मुझे
عَلَىٰ over ʿalā
over
خَزَآئِنِ ख़ज़ानों पर khazāini
ख़ज़ानों पर
ٱلْأَرْضِ ۖ ज़मीन के l-arḍi
ज़मीन के
إِنِّى बेशक मैं हूँ innī
बेशक मैं हूँ
حَفِيظٌ बहुत हिफ़ाज़त करने वाला ḥafīẓun
बहुत हिफ़ाज़त करने वाला
عَلِيمٌۭ ख़ूब इल्म रखने वाला ʿalīmun
ख़ूब इल्म रखने वाला
٥٥ (55)
(55)
(यूसुफ़) ने कहा : मुझे इस देश के ख़ज़ानों पर नियुक्त कर दीजिए। निःसंदेह मैं संरक्षण करने वाला, बड़ा जानकार हूँ।
१२:५६
وَكَذَٰلِكَ और इसी तरह wakadhālika
और इसी तरह
مَكَّنَّا इक़्तिदार दिया हमने makkannā
इक़्तिदार दिया हमने
لِيُوسُفَ यूसुफ़ को liyūsufa
यूसुफ़ को
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
يَتَبَوَّأُ वो रहता yatabawwa-u
वो रहता
مِنْهَا उसमें min'hā
उसमें
حَيْثُ जहाँ ḥaythu
जहाँ
يَشَآءُ ۚ वो चाहता yashāu
वो चाहता
نُصِيبُ हम पहुँचाते हैं nuṣību
हम पहुँचाते हैं
بِرَحْمَتِنَا अपनी रहमत को biraḥmatinā
अपनी रहमत को
مَن जिसे man
जिसे
نَّشَآءُ ۖ हम चाहते हैं nashāu
हम चाहते हैं
وَلَا और नहीं walā
और नहीं
نُضِيعُ हम ज़ाया करते nuḍīʿu
हम ज़ाया करते
أَجْرَ अजर ajra
अजर
ٱلْمُحْسِنِينَ एहसान करने वालों का l-muḥ'sinīna
एहसान करने वालों का
٥٦ (56)
(56)
और इसी प्रकार, हमने यूसुफ़ को उस धरती (देश) में अधिकार प्रदान किया। वह उसमें जहाँ चाहते, रहते थे। हम अपनी दया जिसे चाहें, प्रदान करते हैं और हम सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करते।
१२:५७
وَلَأَجْرُ और यक़ीनन अजर wala-ajru
और यक़ीनन अजर
ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत का l-ākhirati
आख़िरत का
خَيْرٌۭ बेहतर है khayrun
बेहतर है
لِّلَّذِينَ उनके लिए जो lilladhīna
उनके लिए जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَكَانُوا۟ और हैं वो wakānū
और हैं वो
يَتَّقُونَ वो तक़वा करते/डरते yattaqūna
वो तक़वा करते/डरते
٥٧ (57)
(57)
और निश्चय आख़िरत का बदला उन लोगों के लिए अधिक बेहतर है, जो ईमान लाए और अल्लाह से डरते रहे।
१२:५८
وَجَآءَ और आए wajāa
और आए
إِخْوَةُ भाई ikh'watu
भाई
يُوسُفَ यूसुफ़ के yūsufa
यूसुफ़ के
فَدَخَلُوا۟ फिर वो दाख़िल हुए fadakhalū
फिर वो दाख़िल हुए
عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर
فَعَرَفَهُمْ पस उसने पहचान लिया उन्हें faʿarafahum
पस उसने पहचान लिया उन्हें
وَهُمْ जबकि वो wahum
जबकि वो
لَهُۥ उससे lahu
उससे
مُنكِرُونَ नावाक़िफ़ थे munkirūna
नावाक़िफ़ थे
٥٨ (58)
(58)
और यूसुफ़ के भाई आए1, फिर वे उसके पास गए, तो उसने उन्हें पहचान लिया, जबकि वे उसे पहचान नहीं सके।
१२:५९
وَلَمَّا और जब walammā
और जब
جَهَّزَهُم उसने तैयार करके दिया उन्हें jahhazahum
उसने तैयार करके दिया उन्हें
بِجَهَازِهِمْ सामान उनका bijahāzihim
सामान उनका
قَالَ कहा qāla
कहा
ٱئْتُونِى लाना मेरे पास i'tūnī
लाना मेरे पास
بِأَخٍۢ भाई को bi-akhin
भाई को
لَّكُم अपने lakum
अपने
مِّنْ from min
from
أَبِيكُمْ ۚ अपने बाप की तरफ़ से abīkum
अपने बाप की तरफ़ से
أَلَا क्या नहीं alā
क्या नहीं
تَرَوْنَ तुम देखते tarawna
तुम देखते
أَنِّىٓ बेशक मैं annī
बेशक मैं
أُوفِى मैं पूरा-पूरा देता हूँ ūfī
मैं पूरा-पूरा देता हूँ
ٱلْكَيْلَ पैमाना (ग़ल्ला) l-kayla
पैमाना (ग़ल्ला)
وَأَنَا۠ और मैं wa-anā
और मैं
خَيْرُ बेहतर हूँ khayru
बेहतर हूँ
ٱلْمُنزِلِينَ सब मेज़बानी करने वालों से l-munzilīna
सब मेज़बानी करने वालों से
٥٩ (59)
(59)
और जब उनका सामान तैयार कर दिया, तो कहा : मेरे पास अपने उस भाई1 को लेकर आना जो तुम्हारे बाप की ओर से है। क्या तुम नहीं देखते कि मैं पूरी माप देता हूँ तथा मैं उत्तम अतिथि-सत्कार करने वाला हूँ?
१२:६०
فَإِن फिर अगर fa-in
फिर अगर
لَّمْ ना lam
ना
تَأْتُونِى तुम लाए मेरे पास tatūnī
तुम लाए मेरे पास
بِهِۦ उसे bihi
उसे
فَلَا तो नहीं falā
तो नहीं
كَيْلَ कोई पैमाना (ग़ल्ला) kayla
कोई पैमाना (ग़ल्ला)
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
عِندِى मेरे पास ʿindī
मेरे पास
وَلَا और ना walā
और ना
تَقْرَبُونِ तुम क़रीब आना मेरे taqrabūni
तुम क़रीब आना मेरे
٦٠ (60)
(60)
फिर यदि तुम उसे मेरे पास न लाए, तो तुम्हारे लिए मेरे पास न कोई माप होगा और न तुम मेरे पास आना।
१२:६१
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
سَنُرَٰوِدُ ज़रूर हम आमादा करेंगे sanurāwidu
ज़रूर हम आमादा करेंगे
عَنْهُ उसके बारे में ʿanhu
उसके बारे में
أَبَاهُ उसके वालिद को abāhu
उसके वालिद को
وَإِنَّا और बेशक हम wa-innā
और बेशक हम
لَفَـٰعِلُونَ ज़रूर करने वाले हैं lafāʿilūna
ज़रूर करने वाले हैं
٦١ (61)
(61)
वे बोले : हम उसके पिता को इसके लिए राज़ी करने का पूरा प्रयास करेंगे और हम अवश्य ऐसा करने वाले हैं।
१२:६२
وَقَالَ और उसने कहा waqāla
और उसने कहा
لِفِتْيَـٰنِهِ अपने ग़ुलामों को lifit'yānihi
अपने ग़ुलामों को
ٱجْعَلُوا۟ रख दो ij'ʿalū
रख दो
بِضَـٰعَتَهُمْ पूँजी/सरमाया इनका biḍāʿatahum
पूँजी/सरमाया इनका
فِى in
in
رِحَالِهِمْ उनके सामाने सफ़र में riḥālihim
उनके सामाने सफ़र में
لَعَلَّهُمْ शायद कि वो laʿallahum
शायद कि वो
يَعْرِفُونَهَآ वो उसे पहचान जाऐं yaʿrifūnahā
वो उसे पहचान जाऐं
إِذَا जब idhā
जब
ٱنقَلَبُوٓا۟ वो पलटें inqalabū
वो पलटें
إِلَىٰٓ to ilā
to
أَهْلِهِمْ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihim
तरफ़ अपने घर वालों के
لَعَلَّهُمْ शायद कि वो laʿallahum
शायद कि वो
يَرْجِعُونَ वो लौट आऐं yarjiʿūna
वो लौट आऐं
٦٢ (62)
(62)
और यूसुफ़ ने अपने सेवकों को आदेश दिया : उनका मूलधन1 उनकी बोरियों में रख दो। ताकि वे उसे पहचान लें, जब वे अपने परिजनों की ओर वापस जाएँ, शायद वे फिर आ जाएँ।
१२:६३
فَلَمَّا तो जब falammā
तो जब
رَجَعُوٓا۟ वो लौटे rajaʿū
वो लौटे
إِلَىٰٓ to ilā
to
أَبِيهِمْ तरफ़ अपने वालिद के abīhim
तरफ़ अपने वालिद के
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
يَـٰٓأَبَانَا ऐ हमारे अब्बा जान yāabānā
ऐ हमारे अब्बा जान
مُنِعَ रोक दिया गया muniʿa
रोक दिया गया
مِنَّا हमसे minnā
हमसे
ٱلْكَيْلُ पैमाना (ग़ल्ला) l-kaylu
पैमाना (ग़ल्ला)
فَأَرْسِلْ तो भेज दें fa-arsil
तो भेज दें
مَعَنَآ साथ हमारे maʿanā
साथ हमारे
أَخَانَا हमारे भाई को akhānā
हमारे भाई को
نَكْتَلْ हम नाप भर ग़ल्ला लाऐं naktal
हम नाप भर ग़ल्ला लाऐं
وَإِنَّا और बेशक हम wa-innā
और बेशक हम
لَهُۥ उसकी lahu
उसकी
لَحَـٰفِظُونَ अलबत्ता हिफ़ाज़त करने वाले हैं laḥāfiẓūna
अलबत्ता हिफ़ाज़त करने वाले हैं
٦٣ (63)
(63)
फिर जब वे अपने पिता के पास लौटे, तो कहा : ऐ हमारे पिता! हमसे (भविष्य में) माप रोक लिया गया है। अतः हमारे साथ हमारे भाई को भेजें कि हम माप (ग़ल्ला) लेकर आएँ और निःसंदेह हम उसकी अवश्य रक्षा करने वाले हैं।
१२:६४
قَالَ कहा qāla
कहा
هَلْ नहीं hal
नहीं
ءَامَنُكُمْ मैं ऐतबार कर सकता तुम पर āmanukum
मैं ऐतबार कर सकता तुम पर
عَلَيْهِ इसके मामले में ʿalayhi
इसके मामले में
إِلَّا मगर illā
मगर
كَمَآ जैसा कि kamā
जैसा कि
أَمِنتُكُمْ ऐतबार किया था मैंने तुम पर amintukum
ऐतबार किया था मैंने तुम पर
عَلَىٰٓ with ʿalā
with
أَخِيهِ उसके भाई के मामले में akhīhi
उसके भाई के मामले में
مِن before min
before
قَبْلُ ۖ इससे क़ब्ल qablu
इससे क़ब्ल
فَٱللَّهُ पस अल्लाह fal-lahu
पस अल्लाह
خَيْرٌ बेहतरीन khayrun
बेहतरीन
حَـٰفِظًۭا ۖ हिफ़ाज़त करने वाला है ḥāfiẓan
हिफ़ाज़त करने वाला है
وَهُوَ और वो ही wahuwa
और वो ही
أَرْحَمُ सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है arḥamu
सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है
ٱلرَّٰحِمِينَ रहम करने वालों से l-rāḥimīna
रहम करने वालों से
٦٤ (64)
(64)
(याक़ूब अलैहिस्सलाम) ने कहा : क्या मैं इसके बारे में तुम्हारा वैसे ही विश्वास करूँ, जैसे इससे पहले इसके भाई (यूसुफ़) के बारे में तुम्हारा विश्वास किया था? तो अल्लाह ही बेहतर संरक्षण करने वाला है और वह सब दया करने वालों से अधिक दया करने वाला है।
१२:६५
وَلَمَّا और जब walammā
और जब
فَتَحُوا۟ उन्होंने खोला fataḥū
उन्होंने खोला
مَتَـٰعَهُمْ सामान अपना matāʿahum
सामान अपना
وَجَدُوا۟ उन्होंने पाया wajadū
उन्होंने पाया
بِضَـٰعَتَهُمْ अपनी पूँजी को biḍāʿatahum
अपनी पूँजी को
رُدَّتْ जो लौटा दी गई है ruddat
जो लौटा दी गई है
إِلَيْهِمْ ۖ तरफ़ उनके ilayhim
तरफ़ उनके
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
يَـٰٓأَبَانَا ऐ हमारे अब्बा जान yāabānā
ऐ हमारे अब्बा जान
مَا क्या (और)
क्या (और)
نَبْغِى ۖ हम चाहते हैं nabghī
हम चाहते हैं
هَـٰذِهِۦ ये है hādhihi
ये है
بِضَـٰعَتُنَا पूँजी हमारी biḍāʿatunā
पूँजी हमारी
رُدَّتْ जो लौटा दी गई है ruddat
जो लौटा दी गई है
إِلَيْنَا ۖ तरफ़ हमारे ilaynā
तरफ़ हमारे
وَنَمِيرُ और हम ग़ल्ला लाऐंगे wanamīru
और हम ग़ल्ला लाऐंगे
أَهْلَنَا अपने घर वालों के लिए ahlanā
अपने घर वालों के लिए
وَنَحْفَظُ और हम हिफ़ाज़त करेंगे wanaḥfaẓu
और हम हिफ़ाज़त करेंगे
أَخَانَا अपने भाई की akhānā
अपने भाई की
وَنَزْدَادُ और हम ज़्यादा लेंगे wanazdādu
और हम ज़्यादा लेंगे
كَيْلَ पैमाना (ग़ल्ला) kayla
पैमाना (ग़ल्ला)
بَعِيرٍۢ ۖ एक ऊँट का baʿīrin
एक ऊँट का
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
كَيْلٌۭ पैमाना (ग़ल्ला) है kaylun
पैमाना (ग़ल्ला) है
يَسِيرٌۭ बहुत आसान yasīrun
बहुत आसान
٦٥ (65)
(65)
और जब उन्होंने अपना सामान खोला, तो देखा कि उनका मूलधन उन्हें लौटा दिया गया है। वे बोल उठे : पिता जी! हमें और क्या चाहिए? यह हमारा धन हमें वापस कर दिया गया है। (अब) हम अपने घर वालों के लिए ग़ल्ला लाएँगे और अपने भाई की रक्षा करेंगे और एक ऊँट के बोझभर (ग़ल्ला) अधिक1 लाएँगे। यह माप तो बहुत आसान है।
१२:६६
قَالَ कहा qāla
कहा
لَنْ हरगिज़ नहीं lan
हरगिज़ नहीं
أُرْسِلَهُۥ मैं भेजूँगा उसे ur'silahu
मैं भेजूँगा उसे
مَعَكُمْ साथ तुम्हारे maʿakum
साथ तुम्हारे
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
تُؤْتُونِ तुम दो मुझे tu'tūni
तुम दो मुझे
مَوْثِقًۭا पुख़्ता वादा mawthiqan
पुख़्ता वादा
مِّنَ by mina
by
ٱللَّهِ अल्लाह (के नाम) से l-lahi
अल्लाह (के नाम) से
لَتَأْتُنَّنِى अलबत्ता तुम ज़रूर लाओगे मेरे पास latatunnanī
अलबत्ता तुम ज़रूर लाओगे मेरे पास
بِهِۦٓ उसे bihi
उसे
إِلَّآ मगर illā
मगर
أَن ये कि an
ये कि
يُحَاطَ घेर लिया जाए yuḥāṭa
घेर लिया जाए
بِكُمْ ۖ तुम्हें bikum
तुम्हें
فَلَمَّآ फिर जब falammā
फिर जब
ءَاتَوْهُ उन्होंने दिया उसे ātawhu
उन्होंने दिया उसे
مَوْثِقَهُمْ पुख़्ता वादा अपना mawthiqahum
पुख़्ता वादा अपना
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
عَلَىٰ उस पर ʿalā
उस पर
مَا जो
जो
نَقُولُ हम कहते है naqūlu
हम कहते है
وَكِيلٌۭ निगहबान है wakīlun
निगहबान है
٦٦ (66)
(66)
उस (याक़ूब) ने कहा : मैं उसे तुम्हारे साथ हरगिज़ नहीं भेजूँगा, यहाँ तक कि तुम मुझसे अल्लाह के नाम पर प्रतिज्ञा करो कि उसे मेरे पास अवश्य लाओगे, सिवाय इसके कि तुम (सब) को घेर लिया1 जाए। फिर जब उन्होंने उसे अपना दृढ़ वचन दिया, तो उस (याक़ूब) ने कहा : हम जो कुछ कह रहे हैं, उसपर अल्लाह निरीक्षक (गवाह) है।
१२:६७
وَقَالَ और उसने कहा waqāla
और उसने कहा
يَـٰبَنِىَّ ऐ मेरे बेटो yābaniyya
ऐ मेरे बेटो
لَا (Do) not
(Do) not
تَدْخُلُوا۟ ना तुम दाख़िल होना tadkhulū
ना तुम दाख़िल होना
مِنۢ from min
from
بَابٍۢ दरवाज़े से bābin
दरवाज़े से
وَٰحِدٍۢ एक ही wāḥidin
एक ही
وَٱدْخُلُوا۟ और तुम दाख़िल होना wa-ud'khulū
और तुम दाख़िल होना
مِنْ from min
from
أَبْوَٰبٍۢ दरवाज़ों से abwābin
दरवाज़ों से
مُّتَفَرِّقَةٍۢ ۖ मुख़्तलिफ़ mutafarriqatin
मुख़्तलिफ़
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أُغْنِى मैं बचा सकता ugh'nī
मैं बचा सकता
عَنكُم तुम्हें ʿankum
तुम्हें
مِّنَ against mina
against
ٱللَّهِ अल्लाह से l-lahi
अल्लाह से
مِن any min
any
شَىْءٍ ۖ कुछ भी shayin
कुछ भी
إِنِ नहीं ini
नहीं
ٱلْحُكْمُ फ़ैसला l-ḥuk'mu
फ़ैसला
إِلَّا मगर illā
मगर
لِلَّهِ ۖ अल्लाह ही के लिए lillahi
अल्लाह ही के लिए
عَلَيْهِ उसी पर ʿalayhi
उसी पर
تَوَكَّلْتُ ۖ तवक्कल किया मैंने tawakkaltu
तवक्कल किया मैंने
وَعَلَيْهِ और उसी पर waʿalayhi
और उसी पर
فَلْيَتَوَكَّلِ पस चाहिए कि तवक्कल करें falyatawakkali
पस चाहिए कि तवक्कल करें
ٱلْمُتَوَكِّلُونَ तवक्कल करने वाले l-mutawakilūna
तवक्कल करने वाले
٦٧ (67)
(67)
और (जब वे जाने लगे) तो याक़ूब ने कहा : ऐ मेरे बेटो! तुम एक ही द्वार से (मिस्र में) प्रवेश न करना, बल्कि अलग-अलग द्वारों से प्रवेश करना। और मैं तुम्हें अल्लाह की ओर से (आने वाली) किसी चीज़ से नहीं बचा सकता। आदेश तो केवल अल्लाह का चलता है। मैंने उसी पर भरोसा किया और भरोसा करने वालों को उसी पर भरोसा करना चाहिए।
१२:६८
وَلَمَّا और जब walammā
और जब
دَخَلُوا۟ वो दाख़िल हुए dakhalū
वो दाख़िल हुए
مِنْ from min
from
حَيْثُ जहाँ से ḥaythu
जहाँ से
أَمَرَهُمْ हुक्म दिया था उन्हें amarahum
हुक्म दिया था उन्हें
أَبُوهُم उनके वालिद ने abūhum
उनके वालिद ने
مَّا ना
ना
كَانَ था कि kāna
था कि
يُغْنِى काम आता yugh'nī
काम आता
عَنْهُم उन्हें ʿanhum
उन्हें
مِّنَ against mina
against
ٱللَّهِ अल्लाह से l-lahi
अल्लाह से
مِن any min
any
شَىْءٍ कुछ भी shayin
कुछ भी
إِلَّا मगर illā
मगर
حَاجَةًۭ एक हाजत थी ḥājatan
एक हाजत थी
فِى of
of
نَفْسِ दिल में nafsi
दिल में
يَعْقُوبَ याक़ूब के yaʿqūba
याक़ूब के
قَضَىٰهَا ۚ उसने पूरा किया जिसे qaḍāhā
उसने पूरा किया जिसे
وَإِنَّهُۥ और बेशक वो wa-innahu
और बेशक वो
لَذُو (was) a possessor ladhū
(was) a possessor
عِلْمٍۢ अल्बत्ता इल्म वाला था ʿil'min
अल्बत्ता इल्म वाला था
لِّمَا बवजह उसके जो limā
बवजह उसके जो
عَلَّمْنَـٰهُ सिखाया था हमने उसे ʿallamnāhu
सिखाया था हमने उसे
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
أَكْثَرَ अक्सर akthara
अक्सर
ٱلنَّاسِ लोग l-nāsi
लोग
لَا (do) not
(do) not
يَعْلَمُونَ नहीं वो इल्म रखते yaʿlamūna
नहीं वो इल्म रखते
٦٨ (68)
(68)
और जब उन्होंने (मिस्र में उस तरह) प्रवेश किया, जैसे उनके पिता ने उन्हें आदेश दिया था, वह उन्हें अल्लाह की ओर से आने वाली किसी चीज़ से नहीं बचा सकते थे; परंतु याक़ूब के दिल में एक इच्छा थी, जो उन्होंने पूरी कर ली।1 और निःसंदेह वह बड़े ज्ञानवान थे, इस वजह से कि हमने उन्हें ज्ञान प्रदान किया था। लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते।
१२:६९
وَلَمَّا और जब walammā
और जब
دَخَلُوا۟ वो दाख़िल हुए dakhalū
वो दाख़िल हुए
عَلَىٰ upon ʿalā
upon
يُوسُفَ यूसुफ़ पर yūsufa
यूसुफ़ पर
ءَاوَىٰٓ उसने जगह दी āwā
उसने जगह दी
إِلَيْهِ अपने पास ilayhi
अपने पास
أَخَاهُ ۖ अपने भाई को akhāhu
अपने भाई को
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
إِنِّىٓ बेशक मैं innī
बेशक मैं
أَنَا۠ मैं ही anā
मैं ही
أَخُوكَ तेरा भाई हूँ akhūka
तेरा भाई हूँ
فَلَا पस ना falā
पस ना
تَبْتَئِسْ तू रंज कर tabta-is
तू रंज कर
بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَعْمَلُونَ वो अमल करते yaʿmalūna
वो अमल करते
٦٩ (69)
(69)
और जब वे यूसुफ़ के पास प्रवेश किए, तो उन्होंने अपने भाई को अपने पास जगह दी।(और) कहा : निःसंदेह मैं तुम्हारा भाई (यूसुफ़) हूँ। अतः जो (दुर्व्यवहार) वे करते रहे हैं उसपर दुःखी न हो।
१२:७०
فَلَمَّا फिर जब falammā
फिर जब
جَهَّزَهُم उसने तैयार करके दिया उन्हें jahhazahum
उसने तैयार करके दिया उन्हें
بِجَهَازِهِمْ सामान उनका bijahāzihim
सामान उनका
جَعَلَ उसने रख दिया jaʿala
उसने रख दिया
ٱلسِّقَايَةَ प्याला l-siqāyata
प्याला
فِى in
in
رَحْلِ सामान में raḥli
सामान में
أَخِيهِ अपने भाई के akhīhi
अपने भाई के
ثُمَّ फिर thumma
फिर
أَذَّنَ पुकारा adhana
पुकारा
مُؤَذِّنٌ एक पुकारने वाले ने mu-adhinun
एक पुकारने वाले ने
أَيَّتُهَا O you ayyatuhā
O you
ٱلْعِيرُ ऐ क़ाफ़िले वालो l-ʿīru
ऐ क़ाफ़िले वालो
إِنَّكُمْ बेशक तुम innakum
बेशक तुम
لَسَـٰرِقُونَ अलबत्ता चोर हो lasāriqūna
अलबत्ता चोर हो
٧٠ (70)
(70)
फिर जब उसने उन्हें उनके सामान के साथ तैयार कर दिया, तो (अनाज) मापने का बर्तन अपने भाई के सामान में रख दिया। फिर एक पुकारने वाले ने पुकारा : ऐ क़ाफ़िले वालो! निःसंदेह तुम निश्चय चोर हो!
१२:७१
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
وَأَقْبَلُوا۟ जबकि वो मुतावज्जेह हुए wa-aqbalū
जबकि वो मुतावज्जेह हुए
عَلَيْهِم उनकी तरफ़ ʿalayhim
उनकी तरफ़
مَّاذَا क्या चीज़ mādhā
क्या चीज़
تَفْقِدُونَ तुम गुम पाते हो tafqidūna
तुम गुम पाते हो
٧١ (71)
(71)
वे उनकी ओर मुतवज्जेह होकर बोले : तुम्हारी क्या चीज़ खो गई है?
१२:७२
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
نَفْقِدُ हम गुम पाते हैं nafqidu
हम गुम पाते हैं
صُوَاعَ पैमाना ṣuwāʿa
पैमाना
ٱلْمَلِكِ बादशाह का l-maliki
बादशाह का
وَلِمَن और उसके लिए जो waliman
और उसके लिए जो
جَآءَ लाए jāa
लाए
بِهِۦ उसे bihi
उसे
حِمْلُ बोझ है ḥim'lu
बोझ है
بَعِيرٍۢ एक ऊँट का baʿīrin
एक ऊँट का
وَأَنَا۠ और मैं wa-anā
और मैं
بِهِۦ उसका bihi
उसका
زَعِيمٌۭ ज़ामिन हूँ zaʿīmun
ज़ामिन हूँ
٧٢ (72)
(72)
उन्होंने कहा : हमें राजा का मापक नहीं मिल रहा है। और जो उसे ले आए, उसके लिए एक ऊँट का बोझ (ग़ल्ला) है और मैं उसके लिए गारंटी1 देता हूँ।
१२:७३
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
تَٱللَّهِ क़सम अल्लाह की tal-lahi
क़सम अल्लाह की
لَقَدْ अलबत्ता तहक़ीक़ laqad
अलबत्ता तहक़ीक़
عَلِمْتُم जान लिया तुमने ʿalim'tum
जान लिया तुमने
مَّا नहीं
नहीं
جِئْنَا आए थे हम ji'nā
आए थे हम
لِنُفْسِدَ कि हम फ़साद करें linuf'sida
कि हम फ़साद करें
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
كُنَّا हैं हम kunnā
हैं हम
سَـٰرِقِينَ चोरी करने वाले sāriqīna
चोरी करने वाले
٧٣ (73)
(73)
उन्होंने कहा : अल्लाह की क़सम! निश्चय तुम जान चुके हो कि हम इस देश में बिगाड़ पैदा करने नहीं आए हैं और न हम कभी चोर थे।
१२:७४
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
فَمَا तो क्या famā
तो क्या
جَزَٰٓؤُهُۥٓ बदला है उसका jazāuhu
बदला है उसका
إِن अगर in
अगर
كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम
كَـٰذِبِينَ झूठे kādhibīna
झूठे
٧٤ (74)
(74)
उन लोगों ने कहा : फिर उसका1 क्या दंड है, यदि तुम झूठे निकले?
१२:७५
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
جَزَٰٓؤُهُۥ बदला उसका jazāuhu
बदला उसका
مَن वो है जो man
वो है जो
وُجِدَ वो पाया गया wujida
वो पाया गया
فِى in
in
رَحْلِهِۦ उसके सामान में raḥlihi
उसके सामान में
فَهُوَ तो वो ही fahuwa
तो वो ही
جَزَٰٓؤُهُۥ ۚ बदला है उसका jazāuhu
बदला है उसका
كَذَٰلِكَ इस तरह kadhālika
इस तरह
نَجْزِى हम बदला देते हैं najzī
हम बदला देते हैं
ٱلظَّـٰلِمِينَ ज़ालिमों को l-ẓālimīna
ज़ालिमों को
٧٥ (75)
(75)
उन्होंने कहा : उसका दंड यह है कि जिसके सामान में वह पाया जाए, वही व्यक्ति उसका दंड है। हम अत्याचारियों को इसी प्रकार दंड देते हैं।1
१२:७६
فَبَدَأَ पस उसने शुरू किया fabada-a
पस उसने शुरू किया
بِأَوْعِيَتِهِمْ उनके थैलों/ख़ुरजियों से bi-awʿiyatihim
उनके थैलों/ख़ुरजियों से
قَبْلَ पहले qabla
पहले
وِعَآءِ थैले/ख़ुरजी से wiʿāi
थैले/ख़ुरजी से
أَخِيهِ अपने भाई के akhīhi
अपने भाई के
ثُمَّ फिर thumma
फिर
ٱسْتَخْرَجَهَا उसने निकाल लिया उसे is'takhrajahā
उसने निकाल लिया उसे
مِن from min
from
وِعَآءِ थैले/ख़ुरजी से wiʿāi
थैले/ख़ुरजी से
أَخِيهِ ۚ अपने भाई के akhīhi
अपने भाई के
كَذَٰلِكَ इसी तरह kadhālika
इसी तरह
كِدْنَا तदबीर की हमने kid'nā
तदबीर की हमने
لِيُوسُفَ ۖ यूसुफ़ के लिए liyūsufa
यूसुफ़ के लिए
مَا ना
ना
كَانَ था वो kāna
था वो
لِيَأْخُذَ कि वो पकड़ सके liyakhudha
कि वो पकड़ सके
أَخَاهُ अपने भाई को akhāhu
अपने भाई को
فِى by
by
دِينِ दीन/क़ानून में dīni
दीन/क़ानून में
ٱلْمَلِكِ बादशाह के l-maliki
बादशाह के
إِلَّآ मगर illā
मगर
أَن ये कि an
ये कि
يَشَآءَ जो चाहे yashāa
जो चाहे
ٱللَّهُ ۚ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
نَرْفَعُ हम बुलंद करते हैं narfaʿu
हम बुलंद करते हैं
دَرَجَـٰتٍۢ दरजात darajātin
दरजात
مَّن जिसके man
जिसके
نَّشَآءُ ۗ हम चाहते हैं nashāu
हम चाहते हैं
وَفَوْقَ और ऊपर wafawqa
और ऊपर
كُلِّ हर kulli
हर
ذِى possessor dhī
possessor
عِلْمٍ इल्म वाले के ʿil'min
इल्म वाले के
عَلِيمٌۭ एक ख़ूब इल्म वाला है ʿalīmun
एक ख़ूब इल्म वाला है
٧٦ (76)
(76)
चुनाँचे उसने अपने (सगे) भाई के थैले से पहले, उनके थैलों की तलाशी शुरू की। फिर उसे अपने भाई के थैले से निकाला। इस प्रकार, हमने यूसुफ़ के लिए उपाय किया।1 वह राजा के नियम के अनुसार अपने भाई को नहीं रख सकते थे, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। हम जिसके चाहते हैं, पद ऊँचे कर देते हैं और प्रत्येक ज्ञानवान से ऊपर एक बड़ा ज्ञानवान है।2
१२:७७
۞ قَالُوٓا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
إِن अगर in
अगर
يَسْرِقْ इसने चोरी की है yasriq
इसने चोरी की है
فَقَدْ तो तहक़ीक़ faqad
तो तहक़ीक़
سَرَقَ चोरी की थी saraqa
चोरी की थी
أَخٌۭ भाई ने akhun
भाई ने
لَّهُۥ इसके lahu
इसके
مِن before min
before
قَبْلُ ۚ इससे क़ब्ल qablu
इससे क़ब्ल
فَأَسَرَّهَا तो छुपा लिया इस बात को fa-asarrahā
तो छुपा लिया इस बात को
يُوسُفُ यूसुफ़ ने yūsufu
यूसुफ़ ने
فِى within
within
نَفْسِهِۦ अपने दिल में nafsihi
अपने दिल में
وَلَمْ और नहीं walam
और नहीं
يُبْدِهَا उसने ज़ाहिर किया उसे yub'dihā
उसने ज़ाहिर किया उसे
لَهُمْ ۚ उनके लिए lahum
उनके लिए
قَالَ कहा qāla
कहा
أَنتُمْ तुम antum
तुम
شَرٌّۭ बुरे हो sharrun
बुरे हो
مَّكَانًۭا ۖ मक़ाम में makānan
मक़ाम में
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
أَعْلَمُ ख़ूब जानता है aʿlamu
ख़ूब जानता है
بِمَا उसे जो bimā
उसे जो
تَصِفُونَ तुम बयान कर रहे हो taṣifūna
तुम बयान कर रहे हो
٧٧ (77)
(77)
उन्होंने कहा : यदि इसने चोरी की है, तो निःसंदेह इससे पहले इसके एक भाई ने भी चोरी की थी। तो यूसुफ़ ने इस बात को अपने दिल ही में रखा और उनके सामने प्रकट नहीं किया। (यूसुफ़ ने अपने मन में) कहा : तुम सबसे बुरे स्थान वाले हो और जो कुछ तुम वर्णन कर रहे हो, अल्लाह उसे सबसे अधिक जानता है।
१२:७८
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
يَـٰٓأَيُّهَا O yāayyuhā
O
ٱلْعَزِيزُ ऐ अज़ीज़ l-ʿazīzu
ऐ अज़ीज़
إِنَّ बेशक inna
बेशक
لَهُۥٓ इसका lahu
इसका
أَبًۭا बाप aban
बाप
شَيْخًۭا बूढ़ा shaykhan
बूढ़ा
كَبِيرًۭا बड़ी उम्र का है kabīran
बड़ी उम्र का है
فَخُذْ पस तू रख ले fakhudh
पस तू रख ले
أَحَدَنَا हम में से किसी एक को aḥadanā
हम में से किसी एक को
مَكَانَهُۥٓ ۖ इसकी जगह makānahu
इसकी जगह
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
نَرَىٰكَ हम देखते हैं तुझे narāka
हम देखते हैं तुझे
مِنَ of mina
of
ٱلْمُحْسِنِينَ मोहसिनीन में से l-muḥ'sinīna
मोहसिनीन में से
٧٨ (78)
(78)
उन्होंने कहा : ऐ अज़ीज़! इसका एक बहुत बूढ़ा पिता है। इसलिए आप हममें से किसी को इसके स्थान पर रख लीजिए। निःसंदेह हम आपको उपकारी देखते हैं।
१२:७९
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
مَعَاذَ पनाह maʿādha
पनाह
ٱللَّهِ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
أَن कि an
कि
نَّأْخُذَ हम पकड़ें nakhudha
हम पकड़ें
إِلَّا मगर illā
मगर
مَن उसको man
उसको
وَجَدْنَا पाया हमने wajadnā
पाया हमने
مَتَـٰعَنَا सामान अपना matāʿanā
सामान अपना
عِندَهُۥٓ पास जिसके ʿindahu
पास जिसके
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
إِذًۭا तब idhan
तब
لَّظَـٰلِمُونَ अलबत्ता ज़ालिम होंगे laẓālimūna
अलबत्ता ज़ालिम होंगे
٧٩ (79)
(79)
यूसुफ़ ने कहा : अल्लाह की शरण चाहते हैं कि हम उसके अतिरिक्त किसी को पकड़ें, जिसके पास हमने अपना सामान पाया है! निश्चय उस समय तो हम अत्याचारी ठहरेंगे।
१२:८०
فَلَمَّا फिर जब falammā
फिर जब
ٱسْتَيْـَٔسُوا۟ वो मायूस हो गए is'tayasū
वो मायूस हो गए
مِنْهُ उस से min'hu
उस से
خَلَصُوا۟ वो अलग हुए khalaṣū
वो अलग हुए
نَجِيًّۭا ۖ सरगोशी के लिए najiyyan
सरगोशी के लिए
قَالَ कहा qāla
कहा
كَبِيرُهُمْ उनके बड़े ने kabīruhum
उनके बड़े ने
أَلَمْ क्या नहीं alam
क्या नहीं
تَعْلَمُوٓا۟ तुम जानते taʿlamū
तुम जानते
أَنَّ कि बेशक anna
कि बेशक
أَبَاكُمْ तुम्हारे वालिद ने abākum
तुम्हारे वालिद ने
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
أَخَذَ लिया था akhadha
लिया था
عَلَيْكُم तुम से ʿalaykum
तुम से
مَّوْثِقًۭا पुख़्ता वादा mawthiqan
पुख़्ता वादा
مِّنَ by mina
by
ٱللَّهِ अल्लाह (के नाम) से l-lahi
अल्लाह (के नाम) से
وَمِن and before wamin
and before
قَبْلُ और इससे पहले qablu
और इससे पहले
مَا जो
जो
فَرَّطتُمْ कोताही कर चुके तुम farraṭtum
कोताही कर चुके तुम
فِى concerning
concerning
يُوسُفَ ۖ यूसुफ़ के मामले में yūsufa
यूसुफ़ के मामले में
فَلَنْ तो हरगिज़ ना falan
तो हरगिज़ ना
أَبْرَحَ मैं टलूँगा abraḥa
मैं टलूँगा
ٱلْأَرْضَ (इस) ज़मीन से l-arḍa
(इस) ज़मीन से
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
يَأْذَنَ इजाज़त दे yadhana
इजाज़त दे
لِىٓ मुझे
मुझे
أَبِىٓ मेरा वालिद abī
मेरा वालिद
أَوْ या aw
या
يَحْكُمَ फ़ैसला कर दे yaḥkuma
फ़ैसला कर दे
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لِى ۖ मेरे लिए
मेरे लिए
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
خَيْرُ बेहतर है khayru
बेहतर है
ٱلْحَـٰكِمِينَ सब फ़ैसला करने वालों से l-ḥākimīna
सब फ़ैसला करने वालों से
٨٠ (80)
(80)
फिर जब वे उनसे बिल्कुल निराश हो गए, तो परामर्श करते हुए अलग जा बैठे। उनके बड़े ने कहा : क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारे पिता ने तुमसे अल्लाह को गवाह बनाकर दृढ़ वचन लिया है? और इससे पहले तुमने यूसुफ़ के बारे में जो कोताही की? (अब) मैं इस धरती (मिस्र) से हरगिज़ नहीं हिलूँगा, यहाँ तक कि मेरे पिता मुझे अनुमति प्रदान कर दें, या अल्लाह मेरे लिए फैसला कर दे और वह सब फैसला करने वालों से बेहतर है।
१२:८१
ٱرْجِعُوٓا۟ लौट जाओ ir'jiʿū
लौट जाओ
إِلَىٰٓ to ilā
to
أَبِيكُمْ तरफ़ अपने वालिद के abīkum
तरफ़ अपने वालिद के
فَقُولُوا۟ फिर कहो faqūlū
फिर कहो
يَـٰٓأَبَانَآ ऐ हमारे अब्बा जान yāabānā
ऐ हमारे अब्बा जान
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱبْنَكَ आपके बेटे ने ib'naka
आपके बेटे ने
سَرَقَ चोरी की थी saraqa
चोरी की थी
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
شَهِدْنَآ गवाही दी हमने shahid'nā
गवाही दी हमने
إِلَّا मगर illā
मगर
بِمَا वो जिस का bimā
वो जिस का
عَلِمْنَا इल्म था हमें ʿalim'nā
इल्म था हमें
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
كُنَّا थे हम kunnā
थे हम
لِلْغَيْبِ ग़ैब की lil'ghaybi
ग़ैब की
حَـٰفِظِينَ हिफ़ाज़त करने वाले ḥāfiẓīna
हिफ़ाज़त करने वाले
٨١ (81)
(81)
तुम अपने पिता के पास लौट जाओ और कहो, ऐ हमारे पिता! आपके पुत्र ने चोरी की है और हमने वही कहा, जो हमने जाना1 और हम ग़ैब जानने वाले नहीं थे।2
१२:८२
وَسْـَٔلِ और पूछ लें wasali
और पूछ लें
ٱلْقَرْيَةَ बस्ती वालों से l-qaryata
बस्ती वालों से
ٱلَّتِى वो जो allatī
वो जो
كُنَّا थे हम kunnā
थे हम
فِيهَا जिस में fīhā
जिस में
وَٱلْعِيرَ और क़ाफ़िले वालों से wal-ʿīra
और क़ाफ़िले वालों से
ٱلَّتِىٓ वो जो allatī
वो जो
أَقْبَلْنَا आए हैं हम aqbalnā
आए हैं हम
فِيهَا ۖ जिस में fīhā
जिस में
وَإِنَّا और बेशक हम wa-innā
और बेशक हम
لَصَـٰدِقُونَ अलबत्ता सच्चे हैं laṣādiqūna
अलबत्ता सच्चे हैं
٨٢ (82)
(82)
आप उस बस्ती वालों से पूछ लें, जिसमें हम थे और उस क़ाफ़िले से भी, जिसके साथ हम आए हैं। और निःसंदेह हम बिलकुल सच्चे हैं।
१२:८३
قَالَ कहा qāla
कहा
بَلْ बल्कि bal
बल्कि
سَوَّلَتْ अच्छा कर दिखाया sawwalat
अच्छा कर दिखाया
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
أَنفُسُكُمْ तुम्हारे नफ़्सों ने anfusukum
तुम्हारे नफ़्सों ने
أَمْرًۭا ۖ एक काम को amran
एक काम को
فَصَبْرٌۭ तो सब्र ही faṣabrun
तो सब्र ही
جَمِيلٌ ۖ अच्छा है jamīlun
अच्छा है
عَسَى उम्मीद है ʿasā
उम्मीद है
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
أَن कि an
कि
يَأْتِيَنِى वो ले आएगा मेरे पास yatiyanī
वो ले आएगा मेरे पास
بِهِمْ उन को bihim
उन को
جَمِيعًا ۚ सबके सबको jamīʿan
सबके सबको
إِنَّهُۥ क्योंकि वो innahu
क्योंकि वो
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلْعَلِيمُ बहुत इल्म वाला l-ʿalīmu
बहुत इल्म वाला
ٱلْحَكِيمُ ख़ूब हिकमत वाला l-ḥakīmu
ख़ूब हिकमत वाला
٨٣ (83)
(83)
याक़ूब ने कहा : (ऐसा नहीं है), बल्कि तुम्हारे दिलों ने एक बात बना ली है। इसलिए मेरा काम उत्तम सब्र है। आशा है कि अल्लाह उन सब को मेरे पास ले आएगा। निःसंदेह वही सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
१२:८४
وَتَوَلَّىٰ और उसने मुँह फेर लिया watawallā
और उसने मुँह फेर लिया
عَنْهُمْ उनसे ʿanhum
उनसे
وَقَالَ और बोला waqāla
और बोला
يَـٰٓأَسَفَىٰ हाय अफ़सोस yāasafā
हाय अफ़सोस
عَلَىٰ over ʿalā
over
يُوسُفَ यूसुफ़ पर yūsufa
यूसुफ़ पर
وَٱبْيَضَّتْ और सफ़ेद हो गईं wa-ib'yaḍḍat
और सफ़ेद हो गईं
عَيْنَاهُ दोनों आँखें उसकी ʿaynāhu
दोनों आँखें उसकी
مِنَ from mina
from
ٱلْحُزْنِ ग़म की वजह से l-ḥuz'ni
ग़म की वजह से
فَهُوَ पस वो fahuwa
पस वो
كَظِيمٌۭ ग़म से भरा हुआ था kaẓīmun
ग़म से भरा हुआ था
٨٤ (84)
(84)
और वह उनसे वापस फिरा और कहा : हाय अफ़सोस, यूसुफ़ की जुदाई पर! और उसकी दोनों आँखें शोक के कारण सफेद हो गईं। तो वह शोक से भरा हुआ था।
१२:८५
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
تَٱللَّهِ क़सम अल्लाह की tal-lahi
क़सम अल्लाह की
تَفْتَؤُا۟ आप हमेशा रहते हैं tafta-u
आप हमेशा रहते हैं
تَذْكُرُ आप याद करते tadhkuru
आप याद करते
يُوسُفَ यूसुफ़ को yūsufa
यूसुफ़ को
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
تَكُونَ आप हो जाऐं takūna
आप हो जाऐं
حَرَضًا बीमार ḥaraḍan
बीमार
أَوْ या aw
या
تَكُونَ आप हो जाऐं takūna
आप हो जाऐं
مِنَ of mina
of
ٱلْهَـٰلِكِينَ हलाक होने वालों में से l-hālikīna
हलाक होने वालों में से
٨٥ (85)
(85)
उन्होंने कहा : अल्लाह की क़सम! आप बराबर यूसुफ़ को याद करते रहेंगे, यहाँ तक कि (शोक से) घुल जाएँ या अपना विनाश कर लें।
१२:८६
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
إِنَّمَآ बेशक innamā
बेशक
أَشْكُوا۟ मैं शिकायत करता हूँ ashkū
मैं शिकायत करता हूँ
بَثِّى अपनी बेक़रारी की bathī
अपनी बेक़रारी की
وَحُزْنِىٓ और अपने ग़म की waḥuz'nī
और अपने ग़म की
إِلَى to ilā
to
ٱللَّهِ तरफ़ अल्लाह के l-lahi
तरफ़ अल्लाह के
وَأَعْلَمُ और मैं जानता हूँ wa-aʿlamu
और मैं जानता हूँ
مِنَ from mina
from
ٱللَّهِ अल्लाह की तरफ़ से l-lahi
अल्लाह की तरफ़ से
مَا जो
जो
لَا not
not
تَعْلَمُونَ नहीं तुम जानते taʿlamūna
नहीं तुम जानते
٨٦ (86)
(86)
उन्होंने कहा : मैं तो अपने दुःख तथा शोक की शिकायत केवल अल्लाह से करता हूँ और मैं अल्लाह की ओर से वह (बात) जानता हूँ, जो तुम नहीं जानते।
१२:८७
يَـٰبَنِىَّ ऐ मेरे बेटो yābaniyya
ऐ मेरे बेटो
ٱذْهَبُوا۟ जाओ idh'habū
जाओ
فَتَحَسَّسُوا۟ पस सुराग़ लगाओ fataḥassasū
पस सुराग़ लगाओ
مِن about min
about
يُوسُفَ यूसुफ़ का yūsufa
यूसुफ़ का
وَأَخِيهِ और उसके भाई का wa-akhīhi
और उसके भाई का
وَلَا और ना walā
और ना
تَا۟يْـَٔسُوا۟ तुम मायूस हो tāy'asū
तुम मायूस हो
مِن of min
of
رَّوْحِ रहमत से rawḥi
रहमत से
ٱللَّهِ ۖ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
إِنَّهُۥ क्योंकि वो innahu
क्योंकि वो
لَا none
none
يَا۟يْـَٔسُ नहीं मायूस होते yāy'asu
नहीं मायूस होते
مِن of min
of
رَّوْحِ रहमत से rawḥi
रहमत से
ٱللَّهِ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلْقَوْمُ वो लोग l-qawmu
वो लोग
ٱلْكَـٰفِرُونَ जो काफ़िर हैं l-kāfirūna
जो काफ़िर हैं
٨٧ (87)
(87)
ऐ मेरे बेटो! जाओ और यूसुफ़ तथा उसके भाई का पता लगाओ। और अल्लाह की दया से निराश न हो। वास्तव में, अल्लाह की दया से वही निराश होते हैं, जो काफ़िर हैं।
१२:८८
فَلَمَّا फिर जब falammā
फिर जब
دَخَلُوا۟ वो दाख़िल हुए dakhalū
वो दाख़िल हुए
عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर
قَالُوا۟ वो कहने लगे qālū
वो कहने लगे
يَـٰٓأَيُّهَا O Aziz yāayyuhā
O Aziz
ٱلْعَزِيزُ ऐ अज़ीज़ l-ʿazīzu
ऐ अज़ीज़
مَسَّنَا पहुँची हमें massanā
पहुँची हमें
وَأَهْلَنَا और हमारे घर वालों को wa-ahlanā
और हमारे घर वालों को
ٱلضُّرُّ तकलीफ़ l-ḍuru
तकलीफ़
وَجِئْنَا और लाए हैं हम waji'nā
और लाए हैं हम
بِبِضَـٰعَةٍۢ पूँजी/सरमाया bibiḍāʿatin
पूँजी/सरमाया
مُّزْجَىٰةٍۢ हक़ीर muz'jātin
हक़ीर
فَأَوْفِ पस पूरा-पूरा दे दीजिए fa-awfi
पस पूरा-पूरा दे दीजिए
لَنَا हमें lanā
हमें
ٱلْكَيْلَ पैमाना/ग़ल्ला l-kayla
पैमाना/ग़ल्ला
وَتَصَدَّقْ और सदक़ा कीजिए wataṣaddaq
और सदक़ा कीजिए
عَلَيْنَآ ۖ हम पर ʿalaynā
हम पर
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
يَجْزِى वो बदला देता है yajzī
वो बदला देता है
ٱلْمُتَصَدِّقِينَ सदक़ा करने वालों को l-mutaṣadiqīna
सदक़ा करने वालों को
٨٨ (88)
(88)
फिर जब (यूसुफ़ के भाई) उनके पास (मिस्र) गए, तो कहा : ऐ अज़ीज़! हमपर और हमारे घर वालों पर विपत्ति (अकाल) आ पड़ी है और हम थोड़ा-सा धन (मूल्य) लाए हैं। लेकिन हमें पूरी-पूरी माप प्रदान करें और हमें दान (भी) दें। निःसंदेह अल्लाह दान करने वालों को बदला देता है।
१२:८९
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
هَلْ क्या hal
क्या
عَلِمْتُم जानते हो तुम ʿalim'tum
जानते हो तुम
مَّا जो
जो
فَعَلْتُم किया था तुमने faʿaltum
किया था तुमने
بِيُوسُفَ साथ यूसुफ़ के biyūsufa
साथ यूसुफ़ के
وَأَخِيهِ और उसके भाई के wa-akhīhi
और उसके भाई के
إِذْ जब idh
जब
أَنتُمْ तुम antum
तुम
جَـٰهِلُونَ नादान थे jāhilūna
नादान थे
٨٩ (89)
(89)
यूसुफ़ ने कहा : क्या तुम्हें ज्ञात है कि तुमने यूसुफ़ तथा उसके भाई के साथ क्या कुछ किया, जब तुम नासमझ थे?
१२:९०
قَالُوٓا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
أَءِنَّكَ क्या बेशक तू a-innaka
क्या बेशक तू
لَأَنتَ अलबत्ता तू है la-anta
अलबत्ता तू है
يُوسُفُ ۖ यूसुफ़ yūsufu
यूसुफ़
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
أَنَا۠ मैं हूँ anā
मैं हूँ
يُوسُفُ यूसुफ़ yūsufu
यूसुफ़
وَهَـٰذَآ और ये है wahādhā
और ये है
أَخِى ۖ मेरा भाई akhī
मेरा भाई
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
مَنَّ एहसान किया manna
एहसान किया
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
عَلَيْنَآ ۖ हम पर ʿalaynā
हम पर
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
مَن जो man
जो
يَتَّقِ तक़वा करे yattaqi
तक़वा करे
وَيَصْبِرْ और वो सब्र करे wayaṣbir
और वो सब्र करे
فَإِنَّ तो यक़ीनन fa-inna
तो यक़ीनन
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
لَا (does) not
(does) not
يُضِيعُ नहीं वो ज़ाया करता yuḍīʿu
नहीं वो ज़ाया करता
أَجْرَ अजर ajra
अजर
ٱلْمُحْسِنِينَ मोहसिनीन का l-muḥ'sinīna
मोहसिनीन का
٩٠ (90)
(90)
उन्होंने कहा : क्या निश्चय वास्तव में आप ही यूसुफ़ हैं? यूसुफ़ ने कहा : मैं यूसुफ़ हूँ और यह मेरा भाई है। निश्चय अल्लाह ने हमपर उपकार किया है। निःसंदेह जो (अल्लाह से) डरता है तथा धैर्य रखता है, तो अल्लाह सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करता।
१२:९१
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
تَٱللَّهِ क़सम अल्लाह की tal-lahi
क़सम अल्लाह की
لَقَدْ अलबत्ता तहक़ीक़ laqad
अलबत्ता तहक़ीक़
ءَاثَرَكَ तरजीह दी तुझे ātharaka
तरजीह दी तुझे
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर
وَإِن और बेशक wa-in
और बेशक
كُنَّا थे हम kunnā
थे हम
لَخَـٰطِـِٔينَ यक़ीनन ख़ताकार lakhāṭiīna
यक़ीनन ख़ताकार
٩١ (91)
(91)
उन्होंने कहा : अल्लाह की क़सम! निश्चय अल्लाह ने आपको हमपर श्रेष्ठता प्रदान की है। निःसंदेह हम वास्तव में दोषी थे।
१२:९२
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
لَا No
No
تَثْرِيبَ नहीं कोई मलामत tathrība
नहीं कोई मलामत
عَلَيْكُمُ तुम पर ʿalaykumu
तुम पर
ٱلْيَوْمَ ۖ आज के दिन l-yawma
आज के दिन
يَغْفِرُ माफ़ कर दे yaghfiru
माफ़ कर दे
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لَكُمْ ۖ तुम्हें lakum
तुम्हें
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
أَرْحَمُ सब से ज़्यादा रहम करने वाला है arḥamu
सब से ज़्यादा रहम करने वाला है
ٱلرَّٰحِمِينَ सब रहम करने वालों से l-rāḥimīna
सब रहम करने वालों से
٩٢ (92)
(92)
यूसुफ़ ने कहा : आज तुम्हारी कोई भर्त्सना नहीं की जाएगी। अल्लाह तुम्हें क्षमा करे। वह दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है।
१२:९३
ٱذْهَبُوا۟ ले जाओ idh'habū
ले जाओ
بِقَمِيصِى क़मीज़ मेरी biqamīṣī
क़मीज़ मेरी
هَـٰذَا ये hādhā
ये
فَأَلْقُوهُ फिर डाल दो इसे fa-alqūhu
फिर डाल दो इसे
عَلَىٰ over ʿalā
over
وَجْهِ चेहरे पर wajhi
चेहरे पर
أَبِى मेरे वालिद के abī
मेरे वालिद के
يَأْتِ वो हो जाएगा yati
वो हो जाएगा
بَصِيرًۭا देखने वाला baṣīran
देखने वाला
وَأْتُونِى और ले आओ मेरे पास watūnī
और ले आओ मेरे पास
بِأَهْلِكُمْ अपने घर वालों को bi-ahlikum
अपने घर वालों को
أَجْمَعِينَ सबके सबको ajmaʿīna
सबके सबको
٩٣ (93)
(93)
मेरा यह कुर्ता ले जाओ और उसे मेरे पिता के चेहरे पर डाल दो, वह देखने लगेंगे। और अपने सभी घर वालों को मेरे पास ले आओ।
१२:९४
وَلَمَّا और जब walammā
और जब
فَصَلَتِ जुदा हुआ faṣalati
जुदा हुआ
ٱلْعِيرُ क़फ़िला l-ʿīru
क़फ़िला
قَالَ कहा qāla
कहा
أَبُوهُمْ उनके वालिद ने abūhum
उनके वालिद ने
إِنِّى बेशक मैं innī
बेशक मैं
لَأَجِدُ अलबत्ता मैं पाता हूँ la-ajidu
अलबत्ता मैं पाता हूँ
رِيحَ ख़ुशबू/हवा rīḥa
ख़ुशबू/हवा
يُوسُفَ ۖ यूसुफ़ की yūsufa
यूसुफ़ की
لَوْلَآ अगर ना lawlā
अगर ना
أَن ये कि an
ये कि
تُفَنِّدُونِ तुम बहका हुआ कहो मुझे tufannidūni
तुम बहका हुआ कहो मुझे
٩٤ (94)
(94)
और जब क़ाफ़िला चल पड़ा, तो उनके पिता ने कहा : निःसंदेह मुझे यूसुफ़ की सुगंध आ रही है, यदि तुम मुझे बहका हुआ न समझो।
१२:९५
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
تَٱللَّهِ क़सम अल्लाह की tal-lahi
क़सम अल्लाह की
إِنَّكَ बेशक आप innaka
बेशक आप
لَفِى surely (are) in lafī
surely (are) in
ضَلَـٰلِكَ अलबत्ता ग़लती में हैं अपनी ḍalālika
अलबत्ता ग़लती में हैं अपनी
ٱلْقَدِيمِ पुरानी l-qadīmi
पुरानी
٩٥ (95)
(95)
उन लोगों1 ने कहा : अल्लाह की क़सम! निश्चय आप अपनी पुरानी भ्रांति ही में पड़े हुए हैं।
१२:९६
فَلَمَّآ फिर जब falammā
फिर जब
أَن ये कि an
ये कि
جَآءَ आ गया jāa
आ गया
ٱلْبَشِيرُ ख़ुशख़बरी देने वाला l-bashīru
ख़ुशख़बरी देने वाला
أَلْقَىٰهُ उसने डाला उसे alqāhu
उसने डाला उसे
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
وَجْهِهِۦ उसके चेहरे के wajhihi
उसके चेहरे के
فَٱرْتَدَّ तो हो गया वो fa-ir'tadda
तो हो गया वो
بَصِيرًۭا ۖ देखने वाला baṣīran
देखने वाला
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
أَلَمْ क्या नहीं alam
क्या नहीं
أَقُل मैंने कहा था aqul
मैंने कहा था
لَّكُمْ तुम्हें lakum
तुम्हें
إِنِّىٓ बेशक मैं innī
बेशक मैं
أَعْلَمُ मैं जानता हूँ aʿlamu
मैं जानता हूँ
مِنَ from mina
from
ٱللَّهِ अल्लाह की तरफ़ से l-lahi
अल्लाह की तरफ़ से
مَا जो
जो
لَا not
not
تَعْلَمُونَ नहीं तुम जानते taʿlamūna
नहीं तुम जानते
٩٦ (96)
(96)
फिर जैसे ही शुभ सूचना देने वाला आया, उसने वह (कुर्ता) उनके मुख पर डाल दिया तो वह फिर से देखने लगे। कहने लगे : क्या मैंने तुमसे कहा नहीं था कि निःसंदेह मैं अल्लाह की ओर से जो जानता हूँ, तुम नहीं जानते?
१२:९७
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
يَـٰٓأَبَانَا ऐ हमारे अब्बा जान yāabānā
ऐ हमारे अब्बा जान
ٱسْتَغْفِرْ बख़्शिश माँगिए is'taghfir
बख़्शिश माँगिए
لَنَا हमारे लिए lanā
हमारे लिए
ذُنُوبَنَآ हमारे गुनाहों की dhunūbanā
हमारे गुनाहों की
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
كُنَّا थे हम ही kunnā
थे हम ही
خَـٰطِـِٔينَ ख़ताकार khāṭiīna
ख़ताकार
٩٧ (97)
(97)
उन्होंने कहा : ऐ हमारे पिता! हमारे लिए हमारे पापों की क्षमा के लिए प्रार्थना करें। निश्चय हम ही दोषी थे।
१२:९८
قَالَ कहा qāla
कहा
سَوْفَ ज़रूर sawfa
ज़रूर
أَسْتَغْفِرُ मैं बख़्शिश मागूँगा astaghfiru
मैं बख़्शिश मागूँगा
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
رَبِّىٓ ۖ अपने रब से rabbī
अपने रब से
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلْغَفُورُ बहुत बख़्शने वाला l-ghafūru
बहुत बख़्शने वाला
ٱلرَّحِيمُ निहायत रहम करने वाला l-raḥīmu
निहायत रहम करने वाला
٩٨ (98)
(98)
उस (याक़ूब) ने कहा : मैं तुम्हारे लिए अपने पालनहार से क्षमा की प्रार्थना करूँगा। निःसंदेह वही अत्यंत क्षमा करने वाला, असीम दयावान् है।
१२:९९
فَلَمَّا फिर जब falammā
फिर जब
دَخَلُوا۟ वो दाख़िल हुए dakhalū
वो दाख़िल हुए
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
يُوسُفَ यूसुफ़ के yūsufa
यूसुफ़ के
ءَاوَىٰٓ उसने ठिकाना दिया āwā
उसने ठिकाना दिया
إِلَيْهِ अपनी तरफ़ ilayhi
अपनी तरफ़
أَبَوَيْهِ अपने वालिदैन को abawayhi
अपने वालिदैन को
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱدْخُلُوا۟ दाख़िल हो जाओ ud'khulū
दाख़िल हो जाओ
مِصْرَ मिस्र में miṣ'ra
मिस्र में
إِن अगर in
अगर
شَآءَ चाहा shāa
चाहा
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
ءَامِنِينَ अमन वाले होकर āminīna
अमन वाले होकर
٩٩ (99)
(99)
फिर जब वे यूसुफ़ के पास पहुँचे, तो उन्होंने अपने माता-पिता को अपने पास जगह दी और कहा : सुरक्षित वि निश्चिंत मिस्र में प्रवेश करो, यदि अल्लाह ने चाहा।
१२:१००
وَرَفَعَ और ऊपर बिठाया warafaʿa
और ऊपर बिठाया
أَبَوَيْهِ अपने वालिदैन को abawayhi
अपने वालिदैन को
عَلَى upon ʿalā
upon
ٱلْعَرْشِ तख़्त पर l-ʿarshi
तख़्त पर
وَخَرُّوا۟ और वो सब गिर पड़े wakharrū
और वो सब गिर पड़े
لَهُۥ उसके लिए lahu
उसके लिए
سُجَّدًۭا ۖ सजदा करते हुए sujjadan
सजदा करते हुए
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
يَـٰٓأَبَتِ ऐ मेरे अब्बा जान yāabati
ऐ मेरे अब्बा जान
هَـٰذَا ये है hādhā
ये है
تَأْوِيلُ ताबीर tawīlu
ताबीर
رُءْيَـٰىَ मेरे ख़्वाब की ru'yāya
मेरे ख़्वाब की
مِن (of) before min
(of) before
قَبْلُ पहले के qablu
पहले के
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
جَعَلَهَا कर दिया उसे jaʿalahā
कर दिया उसे
رَبِّى मेरे रब ने rabbī
मेरे रब ने
حَقًّۭا ۖ सच्चा ḥaqqan
सच्चा
وَقَدْ और तहक़ीक़ waqad
और तहक़ीक़
أَحْسَنَ उसने एहसान किया aḥsana
उसने एहसान किया
بِىٓ साथ मेरे
साथ मेरे
إِذْ जब idh
जब
أَخْرَجَنِى उसने निकाला मुझे akhrajanī
उसने निकाला मुझे
مِنَ of mina
of
ٱلسِّجْنِ क़ैद ख़ाने से l-sij'ni
क़ैद ख़ाने से
وَجَآءَ और वो ले आया wajāa
और वो ले आया
بِكُم तुम्हें bikum
तुम्हें
مِّنَ from mina
from
ٱلْبَدْوِ सेहरा से l-badwi
सेहरा से
مِنۢ after min
after
بَعْدِ बाद इसके baʿdi
बाद इसके
أَن कि an
कि
نَّزَغَ फ़साद डाला nazagha
फ़साद डाला
ٱلشَّيْطَـٰنُ शैतान ने l-shayṭānu
शैतान ने
بَيْنِى दर्मियान मेरे baynī
दर्मियान मेरे
وَبَيْنَ और दर्मियान wabayna
और दर्मियान
إِخْوَتِىٓ ۚ मेरे भाईयों के ikh'watī
मेरे भाईयों के
إِنَّ बेशक inna
बेशक
رَبِّى रब मेरा rabbī
रब मेरा
لَطِيفٌۭ बेहतरीन तदबीर करने वाला है laṭīfun
बेहतरीन तदबीर करने वाला है
لِّمَا उसकी जो limā
उसकी जो
يَشَآءُ ۚ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلْعَلِيمُ बहुत इल्म वाला l-ʿalīmu
बहुत इल्म वाला
ٱلْحَكِيمُ ख़ूब हिकमत वाला l-ḥakīmu
ख़ूब हिकमत वाला
١٠٠ (100)
(100)
तथा उसने अपने माता-पिता को सिंहासन पर ऊँचा बिठाया और सब उन (यूसुफ़) के आगे सजदे में गिर गए और यूसुफ़ ने कहा : ऐ मेरे पिता! यह मेरे पहले के स्वप्न का अर्थ है। निःसंदेह मेरे पालनहार ने उसे सच कर दिया। तथा निःसंदेह उसने मुझपर उपकार किया, जब मुझे कारावास से निकाला और आप लोगों को गाँव से ले आया, इसके पश्चात् कि शैतान ने मेरे तथा मेरे भाइयों के बीच झगड़ा डाल दिया। निःसंदेह मेरा पालनहार जो चाहे, उसका सूक्ष्म उपाय करने वाला है। निश्चय वही सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
१२:१०१
۞ رَبِّ ऐ मेरे रब rabbi
ऐ मेरे रब
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
ءَاتَيْتَنِى दिया तूने मुझे ātaytanī
दिया तूने मुझे
مِنَ of mina
of
ٱلْمُلْكِ बादशाहत में से l-mul'ki
बादशाहत में से
وَعَلَّمْتَنِى और सिखाया तूने मुझे waʿallamtanī
और सिखाया तूने मुझे
مِن of min
of
تَأْوِيلِ हक़ीक़त में से tawīli
हक़ीक़त में से
ٱلْأَحَادِيثِ ۚ बातों की l-aḥādīthi
बातों की
فَاطِرَ ऐ पैदा करने वाले fāṭira
ऐ पैदा करने वाले
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ और ज़मीन के wal-arḍi
और ज़मीन के
أَنتَ तू ही anta
तू ही
وَلِىِّۦ मेरा दोस्त है waliyyī
मेरा दोस्त है
فِى in
in
ٱلدُّنْيَا दुनिया में l-dun'yā
दुनिया में
وَٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ और आख़िरत में wal-ākhirati
और आख़िरत में
تَوَفَّنِى तू फ़ौत करना मुझे tawaffanī
तू फ़ौत करना मुझे
مُسْلِمًۭا मुसलमान mus'liman
मुसलमान
وَأَلْحِقْنِى और मिला देना मुझे wa-alḥiq'nī
और मिला देना मुझे
بِٱلصَّـٰلِحِينَ सालिहीन से bil-ṣāliḥīna
सालिहीन से
١٠١ (101)
(101)
ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे राज्य में से हिस्सा प्रदान किया तथा बातों के अर्थ (असल तथ्य) में से कुछ सिखाया। ऐ आकाशों तथा धरती के पैदा करने वाले! दुनिया तथा आख़िरत में तू ही मेरा संरक्षक है। मुझे मुसलमान होने की अवस्था में मृत्यु दे और मुझे सदाचारियों से मिला दे।
१२:१०२
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
مِنْ (is) from min
(is) from
أَنۢبَآءِ कुछ ख़बरें हैं anbāi
कुछ ख़बरें हैं
ٱلْغَيْبِ ग़ैब की l-ghaybi
ग़ैब की
نُوحِيهِ हम वही करते हैं उसे nūḥīhi
हम वही करते हैं उसे
إِلَيْكَ ۖ तरफ़ आपके ilayka
तरफ़ आपके
وَمَا और ना wamā
और ना
كُنتَ थे आप kunta
थे आप
لَدَيْهِمْ पास उनके ladayhim
पास उनके
إِذْ जब idh
जब
أَجْمَعُوٓا۟ उन्होंने इत्तिफ़ाक़ किया ajmaʿū
उन्होंने इत्तिफ़ाक़ किया
أَمْرَهُمْ अपने मामले पर amrahum
अपने मामले पर
وَهُمْ और वो wahum
और वो
يَمْكُرُونَ वो चालें चल रहे थे yamkurūna
वो चालें चल रहे थे
١٠٢ (102)
(102)
(ऐ नबी!) ये ग़ैब (परोक्ष) के कुछ समाचार हैं, जो हम आपकी ओर वह़्य करते हैं। और आप उन (भाइयों) के पास नहीं थे, जब उन्होंने अपने काम का दृढ़ निश्चय किया और वे गुप्त उपाय कर रहे थे।
१२:१०३
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَكْثَرُ अक्सर aktharu
अक्सर
ٱلنَّاسِ लोग l-nāsi
लोग
وَلَوْ और अगरचे walaw
और अगरचे
حَرَصْتَ हिर्स करें आप ḥaraṣta
हिर्स करें आप
بِمُؤْمِنِينَ ईमान लाने वाले bimu'minīna
ईमान लाने वाले
١٠٣ (103)
(103)
और अधिकांश लोग, अगरचे आप उत्सुक हों, हरगिज़ ईमान लाने वाले नहीं हैं।
१२:१०४
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
تَسْـَٔلُهُمْ आप सवाल करते उनसे tasaluhum
आप सवाल करते उनसे
عَلَيْهِ इस पर ʿalayhi
इस पर
مِنْ any min
any
أَجْرٍ ۚ किसी अजर का ajrin
किसी अजर का
إِنْ नहीं है in
नहीं है
هُوَ वो huwa
वो
إِلَّا मगर illā
मगर
ذِكْرٌۭ एक ज़िक्र dhik'run
एक ज़िक्र
لِّلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहान वालों के लिए lil'ʿālamīna
तमाम जहान वालों के लिए
١٠٤ (104)
(104)
हालाँकि आप उनसे इस (धर्म प्रचार) पर कोई पारिश्रमिक नहीं माँगते। यह (क़ुरआन) तो संसार वालों के लिए मात्र एक उपदेश है।
१२:१०५
وَكَأَيِّن और कितनी ही waka-ayyin
और कितनी ही
مِّنْ of min
of
ءَايَةٍۢ निशानियाँ हैं āyatin
निशानियाँ हैं
فِى in
in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों में l-samāwāti
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ और ज़मीन में wal-arḍi
और ज़मीन में
يَمُرُّونَ वो गुज़रते हैं yamurrūna
वो गुज़रते हैं
عَلَيْهَا उन पर ʿalayhā
उन पर
وَهُمْ और वो wahum
और वो
عَنْهَا उनसे ʿanhā
उनसे
مُعْرِضُونَ ऐराज़ करने वाले हैं muʿ'riḍūna
ऐराज़ करने वाले हैं
١٠٥ (105)
(105)
तथा आकाशों और धरती में कितनी ही निशानियाँ1 हैं, जिनपर से वे गुज़रते हैं और वे उनपर ध्यान नहीं देते।2
१२:१०६
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
يُؤْمِنُ ईमान लाते yu'minu
ईमान लाते
أَكْثَرُهُم अक्सर उनके aktharuhum
अक्सर उनके
بِٱللَّهِ अल्लाह पर bil-lahi
अल्लाह पर
إِلَّا मगर illā
मगर
وَهُم इस हाल में कि वो wahum
इस हाल में कि वो
مُّشْرِكُونَ मुशरिक हैं mush'rikūna
मुशरिक हैं
١٠٦ (106)
(106)
और उनमें से अधिकांश अल्लाह पर ईमान नहीं रखते, परंतु इस हाल में कि वे साझी ठहराने1 वाले होते हैं।
१२:१०७
أَفَأَمِنُوٓا۟ क्या भला वो अमन में आ गए afa-aminū
क्या भला वो अमन में आ गए
أَن कि an
कि
تَأْتِيَهُمْ आ जाए उनके पास tatiyahum
आ जाए उनके पास
غَـٰشِيَةٌۭ एक छा जाने वाली (आफ़त) ghāshiyatun
एक छा जाने वाली (आफ़त)
مِّنْ [of] min
[of]
عَذَابِ अज़ाब से ʿadhābi
अज़ाब से
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
أَوْ या aw
या
تَأْتِيَهُمُ आ जाए उनके पास tatiyahumu
आ जाए उनके पास
ٱلسَّاعَةُ क़यामत l-sāʿatu
क़यामत
بَغْتَةًۭ अचानक baghtatan
अचानक
وَهُمْ और वो wahum
और वो
لَا (do) not
(do) not
يَشْعُرُونَ ना वो शऊर रखते हों yashʿurūna
ना वो शऊर रखते हों
١٠٧ (107)
(107)
तो क्या वे निर्भय हो गए हैं कि उनपर अल्लाह की यातना में से कोई ढांक लेने वाली विपत्ति आ पड़े, या उनपर अचानक क़ियामत आ जाए और वे सोचते भी न हों?
१२:१०८
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
هَـٰذِهِۦ ये है hādhihi
ये है
سَبِيلِىٓ रास्ता मेरा sabīlī
रास्ता मेरा
أَدْعُوٓا۟ मैं बुलाता हूँ adʿū
मैं बुलाता हूँ
إِلَى to ilā
to
ٱللَّهِ ۚ तरफ़ अल्लाह के l-lahi
तरफ़ अल्लाह के
عَلَىٰ with ʿalā
with
بَصِيرَةٍ बसीरत पर baṣīratin
बसीरत पर
أَنَا۠ मैं anā
मैं
وَمَنِ और जो कोई wamani
और जो कोई
ٱتَّبَعَنِى ۖ पैरवी करे मेरी ittabaʿanī
पैरवी करे मेरी
وَسُبْحَـٰنَ और पाक है wasub'ḥāna
और पाक है
ٱللَّهِ अल्लाह l-lahi
अल्लाह
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَنَا۠ मैं anā
मैं
مِنَ of mina
of
ٱلْمُشْرِكِينَ शिर्क करने वालों में से l-mush'rikīna
शिर्क करने वालों में से
١٠٨ (108)
(108)
(ऐ नबी!) आप कह दें : यही मेरा रास्ता है। मैं और मेरा अनुसरण करने वाले पूर्ण अंतर्दृष्टि तथा स्पष्ट प्रमाण के साथ अल्लाह की ओर बुलाते हैं। तथा अल्लाह पवित्र है और मैं मुश्रिकों (बहुदेववादियों) में से नहीं हूँ।
१२:१०९
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَرْسَلْنَا भेजा हमने arsalnā
भेजा हमने
مِن before you min
before you
قَبْلِكَ आपसे पहले qablika
आपसे पहले
إِلَّا मगर illā
मगर
رِجَالًۭا मर्दों को rijālan
मर्दों को
نُّوحِىٓ हम वही करते थे nūḥī
हम वही करते थे
إِلَيْهِم तरफ़ उनके ilayhim
तरफ़ उनके
مِّنْ from (among) min
from (among)
أَهْلِ (the) people ahli
(the) people
ٱلْقُرَىٰٓ ۗ बस्ती वालों में से l-qurā
बस्ती वालों में से
أَفَلَمْ क्या फिर नहीं afalam
क्या फिर नहीं
يَسِيرُوا۟ वो चले-फिरे yasīrū
वो चले-फिरे
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
فَيَنظُرُوا۟ तो वो देखते fayanẓurū
तो वो देखते
كَيْفَ किस तरह kayfa
किस तरह
كَانَ हुआ kāna
हुआ
عَـٰقِبَةُ अंजाम ʿāqibatu
अंजाम
ٱلَّذِينَ उनका जो alladhīna
उनका जो
مِن (were) before them min
(were) before them
قَبْلِهِمْ ۗ उनसे पहले थे qablihim
उनसे पहले थे
وَلَدَارُ और अलबत्ता घर waladāru
और अलबत्ता घर
ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत का l-ākhirati
आख़िरत का
خَيْرٌۭ बेहतर है khayrun
बेहतर है
لِّلَّذِينَ उनके लिए जो lilladhīna
उनके लिए जो
ٱتَّقَوْا۟ ۗ तक़वा करें ittaqaw
तक़वा करें
أَفَلَا क्या फिर नहीं afalā
क्या फिर नहीं
تَعْقِلُونَ तुम अक़्ल से काम लेते taʿqilūna
तुम अक़्ल से काम लेते
١٠٩ (109)
(109)
और हमने आपसे पहले बस्तियों के रहने वालों में से केवल पुरुषों1 को नबी बनाकर भेजे, जिनकी ओर हम वह़्य किया करते थे। तो क्या ये धरती में चले-फिरे नहीं, कि देखते उनका परिणाम कैसा हुआ, जो इनसे पहले थे? और निश्चय आख़िरत (परलोक) का घर उनके लिए उत्तम है, जो अल्लाह से डरते रहे। तो क्या तुम समझते नहीं?
१२:११०
حَتَّىٰٓ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
إِذَا जब idhā
जब
ٱسْتَيْـَٔسَ ना उम्मीद हो गए is'tayasa
ना उम्मीद हो गए
ٱلرُّسُلُ रसूल l-rusulu
रसूल
وَظَنُّوٓا۟ और उन्होंने समझा waẓannū
और उन्होंने समझा
أَنَّهُمْ कि बेशक वो annahum
कि बेशक वो
قَدْ यक़ीनन qad
यक़ीनन
كُذِبُوا۟ वो झूठ बोले गए kudhibū
वो झूठ बोले गए
جَآءَهُمْ आ गई उनके पास jāahum
आ गई उनके पास
نَصْرُنَا मदद हमारी naṣrunā
मदद हमारी
فَنُجِّىَ तो बचा लिया गया fanujjiya
तो बचा लिया गया
مَن उसको जिसे man
उसको जिसे
نَّشَآءُ ۖ हम चाहते थे nashāu
हम चाहते थे
وَلَا और नहीं walā
और नहीं
يُرَدُّ फेरा जाता yuraddu
फेरा जाता
بَأْسُنَا अज़ाब हमारा basunā
अज़ाब हमारा
عَنِ from ʿani
from
ٱلْقَوْمِ उन लोगों से l-qawmi
उन लोगों से
ٱلْمُجْرِمِينَ जो मुजरिम हैं l-muj'rimīna
जो मुजरिम हैं
١١٠ (110)
(110)
यहाँ तक कि जब रसूल बिलकुल निराश हो गए और लोगों को विश्वास हो गया कि निश्चय उनसे झूठ बोला गया था, तो उनके पास हमारी सहायता आ गई। फिर हम जिसे चाहते थे, उसे बचा लिया गया। और हमारी यातना अपराधियों से हटाई नहीं जाती।
१२:१११
لَقَدْ अलबत्ता तहक़ीक़ laqad
अलबत्ता तहक़ीक़
كَانَ है kāna
है
فِى in
in
قَصَصِهِمْ उनके क़िस्सों में qaṣaṣihim
उनके क़िस्सों में
عِبْرَةٌۭ इबरत ʿib'ratun
इबरत
لِّأُو۟لِى for men li-ulī
for men
ٱلْأَلْبَـٰبِ ۗ अक़्ल वालों के लिए l-albābi
अक़्ल वालों के लिए
مَا नहीं
नहीं
كَانَ है ये kāna
है ये
حَدِيثًۭا ऐसी बात ḥadīthan
ऐसी बात
يُفْتَرَىٰ जो गढ़ ली गई yuf'tarā
जो गढ़ ली गई
وَلَـٰكِن और लेकिन walākin
और लेकिन
تَصْدِيقَ तसदीक़ taṣdīqa
तसदीक़
ٱلَّذِى उस चीज़ की जो alladhī
उस चीज़ की जो
بَيْنَ (was) before it bayna
(was) before it
يَدَيْهِ उससे पहले है yadayhi
उससे पहले है
وَتَفْصِيلَ और तफ़सील है watafṣīla
और तफ़सील है
كُلِّ हर kulli
हर
شَىْءٍۢ चीज़ की shayin
चीज़ की
وَهُدًۭى और हिदायत wahudan
और हिदायत
وَرَحْمَةًۭ और रहमत है waraḥmatan
और रहमत है
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يُؤْمِنُونَ जो ईमान लाते हों yu'minūna
जो ईमान लाते हों
١١١ (111)
(111)
निःसंदेह उनकी कहानियों में, बुद्धिमानों के लिए बड़ी शिक्षा है। यह (क़ुरआन) हरगिज़ ऐसी बात नहीं, जो गढ़ ली जाए। लेकिन इससे पहले की पुस्तकों की पुष्टि करने वाला और प्रत्येक वस्तु का विवरण (ब्योरा) है, तथा उन लोगों के लिए, जो ईमान (विश्वास) रखते हैं, मार्गदर्शन और दया है।