११

हूद

मक्की १२३ आयतें पारा ११
هود

सूरह हूद (هود) पवित्र क़ुरआन का ११ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें १२३ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
११:१
الٓر ۚअलिफ़ लाम राalif-lam-raكِتَـٰبٌएक किताब हैkitābunأُحْكِمَتْपुख़्ता की गई हैंuḥ'kimatءَايَـٰتُهُۥआयात उसकीāyātuhuثُمَّफिरthummaفُصِّلَتْखोल कर बयान की गईंfuṣṣilatمِنfrom (he One Who)minلَّدُنْतरफ़ सेladunحَكِيمٍबहुत हिकमत वालेḥakīminخَبِيرٍख़ूब बाख़बर केkhabīrin١
अलिफ, लाम, रा। यह एक पुस्तक है, जिसकी आयतें सुदृढ़ की गईं, फिर उन्हें सविस्तार स्पष्ट किया गया एक पूर्ण हिकमत वाले की ओर से जो पूरी ख़बर रखने वाला है।
११:२
أَلَّاकि नाallāتَعْبُدُوٓا۟तुम इबादत करोtaʿbudūإِلَّاमगरillāٱللَّهَ ۚअल्लाह कीl-lahaإِنَّنِىबेशक मैंinnanīلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْهُउसकी तरफ़ सेmin'huنَذِيرٌۭडराने वालाnadhīrunوَبَشِيرٌۭऔर ख़ुश ख़बरी देने वाला हूँwabashīrun٢
यह कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से एक डराने वाला तथा शुभ सूचना देने वाला हूँ।
११:३
وَأَنِऔर ये किwa-aniٱسْتَغْفِرُوا۟तुम बख़्शिश माँगोis'taghfirūرَبَّكُمْअपने रब सेrabbakumثُمَّफिरthummaتُوبُوٓا۟तुम तौबा करोtūbūإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiيُمَتِّعْكُمवो फ़ायदा देगा तुम्हेंyumattiʿ'kumمَّتَـٰعًاफ़ायदाmatāʿanحَسَنًاअच्छाḥasananإِلَىٰٓforilāأَجَلٍۢएक मुद्दत तकajalinمُّسَمًّۭىमुक़र्ररmusammanوَيُؤْتِऔर वो देगाwayu'tiكُلَّहरkullaذِىownerdhīفَضْلٍۢसाहिबे फ़ज़ल कोfaḍlinفَضْلَهُۥ ۖफ़ज़ल उसकाfaḍlahuوَإِنऔर अगरwa-inتَوَلَّوْا۟तुम मुँह फेरोगेtawallawفَإِنِّىٓतो बेशक मैंfa-innīأَخَافُमैं डरता हूँakhāfuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaيَوْمٍۢ(of) a Great Dayyawminكَبِيرٍबड़े दिन केkabīrin٣
और यह कि अपने पालनहार से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ। वह तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक उत्तम सामग्री प्रदान करेगा और प्रत्येक अतिरिक्त सत्कर्म करने वाले को उसका अतिरिक्त बदला देगा और यदि तुम फिर गह, तो मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
११:४
إِلَىToilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह ही केl-lahiمَرْجِعُكُمْ ۖलौटना है तुम्हाराmarjiʿukumوَهُوَऔर वोwahuwaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun٤
अल्लाह ही की ओर तुम्हारा लौटना है और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
११:५
أَلَآख़बरदारalāإِنَّهُمْबेशक वोinnahumيَثْنُونَवो दोहरे करते हैंyathnūnaصُدُورَهُمْसीने अपनेṣudūrahumلِيَسْتَخْفُوا۟ताकि वो छुप सकेंliyastakhfūمِنْهُ ۚउससेmin'huأَلَاख़बरदारalāحِينَजिस वक़्तḥīnaيَسْتَغْشُونَवो ढाँपते हैंyastaghshūnaثِيَابَهُمْकपड़े अपनेthiyābahumيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजोيُسِرُّونَवो छुपाते हैंyusirrūnaوَمَاऔर जोwamāيُعْلِنُونَ ۚवो ज़ाहिर करते हैंyuʿ'linūnaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuعَلِيمٌۢख़ूब जानने वाला हैʿalīmunبِذَاتِof whatbidhātiٱلصُّدُورِसीनों वाले (भेद)l-ṣudūri٥
सुन लो! निःसंदेह वे अपने सीनों को मोड़ते हैं, ताकि उस (अल्लाह) से छिपे रहें। सुन लो! जब वे अपने कपड़े ख़ूब लपेट लेते हैं, वह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ प्रकट करते हैं। निःसंदेह वह सीनों की बातों को भली-भाँति जानने वाला है।1
११:६
۞ وَمَاऔर नहींwamāمِنanyminدَآبَّةٍۢकोई जानदारdābbatinفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiإِلَّاमगरillāعَلَىonʿalāٱللَّهِअल्लाह ही पर हैl-lahiرِزْقُهَاरिज़्क़ उसकाriz'quhāوَيَعْلَمُऔर वो जानता हैwayaʿlamuمُسْتَقَرَّهَاठिकाना उसकाmus'taqarrahāوَمُسْتَوْدَعَهَا ۚऔर सौंपे जाने की जगह उसकीwamus'tawdaʿahāكُلٌّۭसब कुछkullunفِى(is) inكِتَـٰبٍۢa Recordkitābinمُّبِينٍۢएक वाज़ेह किताब में हैmubīnin٦
और धरती पर चलने-फिरने वाला जो भी प्राणी है, उसकी रोज़ी अल्लाह के ज़िम्मे है। वह उसके ठहरने के स्थान तथा उसके सौंपे जाने के स्थान को जानता है। सब कुछ एक स्पष्ट पुस्तक में (अंकित) है।1
११:७
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजिसनेalladhīخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaفِىinسِتَّةِsixsittatiأَيَّامٍۢछः दिनों मेंayyāminوَكَانَऔर थाwakānaعَرْشُهُۥअर्श उसकाʿarshuhuعَلَىonʿalāٱلْمَآءِपानी परl-māiلِيَبْلُوَكُمْताकि वो आज़माए तुम्हेंliyabluwakumأَيُّكُمْकौन तुम में सेayyukumأَحْسَنُज़्यादा अच्छा हैaḥsanuعَمَلًۭا ۗअमल मेंʿamalanوَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inقُلْتَकहें आपqul'taإِنَّكُمबेशक तुमinnakumمَّبْعُوثُونَउठाए जाने वाले होmabʿūthūnaمِنۢafterminبَعْدِबादbaʿdiٱلْمَوْتِमौत केl-mawtiلَيَقُولَنَّअलबत्ता ज़रूर कहेंगेlayaqūlannaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوٓا۟कुफ़्र कियाkafarūإِنْनहींinهَـٰذَآयेhādhāإِلَّاमगरillāسِحْرٌۭजादूsiḥ'runمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun٧
और वही है, जिसने आकाशों तथा धरती को छः दिनों में पैदा किया। उस समय उसका सिंहासन पानी पर था। ताकि तुम्हारी परीक्षा ले कि तुममें किसका कर्म सबसे उत्तम है। और (ऐ नबी!) यदि आप उनसे कहें कि निःसंदेह तुम मरने के बाद पुनः जीवित किए जाओगे, तो जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे अवश्य कहेंगे कि यह तो खुला जादू है।
११:८
وَلَئِنْऔर अलबत्ता अगरwala-inأَخَّرْنَاमुअख़्ख़र कर दें हमakharnāعَنْهُمُउनसेʿanhumuٱلْعَذَابَअज़ाब कोl-ʿadhābaإِلَىٰٓforilāأُمَّةٍۢएक मुद्दत तकummatinمَّعْدُودَةٍۢशुमार की हुईmaʿdūdatinلَّيَقُولُنَّअलबत्ता वो ज़रूर कहेंगेlayaqūlunnaمَاकिस चीज़ नेيَحْبِسُهُۥٓ ۗरोक रखा है उसेyaḥbisuhuأَلَاख़बरदारalāيَوْمَजिस दिनyawmaيَأْتِيهِمْवो आ जाएगा उनके पासyatīhimلَيْسَनहींlaysaمَصْرُوفًاफेरा जाएगाmaṣrūfanعَنْهُمْउनसेʿanhumوَحَاقَऔर घेर लेगाwaḥāqaبِهِمउन्हेंbihimمَّاजोكَانُوا۟थे वोkānūبِهِۦजिसकाbihiيَسْتَهْزِءُونَवो मज़ाक़ उड़ातेyastahziūna٨
और यदि हम एक गिनी-चुनी अवधि तक उनसे यातना को विलंबित कर दें, तो अवश्य कहेंगे कि किस चीज़ ने उसे रोक रखा है? सुन लो! वह जिस दिन उनपर आ जाएगी, तो उनपर से टाली नहीं जाएगी। और वह (यातना) उन्हें घेर लेगी, जिसकी वे हँसी उड़ाया करते थे।
११:९
وَلَئِنْऔर अलबत्ता अगरwala-inأَذَقْنَاचखाऐं हमadhaqnāٱلْإِنسَـٰنَइन्सान कोl-insānaمِنَّاअपनी तरफ़ सेminnāرَحْمَةًۭरहमतraḥmatanثُمَّफिरthummaنَزَعْنَـٰهَاछीन लें हम उसकोnazaʿnāhāمِنْهُउससेmin'huإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَيَـُٔوسٌۭअलबत्ता बहुत मायूस होने वालाlayaūsunكَفُورٌۭबहुत नाशुक्रा हैkafūrun٩
और यदि हम मनुष्य को अपनी तरफ़ से किसी दया (नेमत) का स्वाद चखा दें, फिर उसे उससे छीन लें, तो निश्चय ही वह अति निराश, बड़ा नाशुक्रा हो जाता है।
११:१०
وَلَئِنْऔर अलबत्ता अगरwala-inأَذَقْنَـٰهُचखाऐं हम उसेadhaqnāhuنَعْمَآءَआसाइशnaʿmāaبَعْدَबादbaʿdaضَرَّآءَतकलीफ़ केḍarrāaمَسَّتْهُजो पहुँची उसेmassathuلَيَقُولَنَّअलबत्ता वो ज़रूर कहेगाlayaqūlannaذَهَبَदूर हो गईंdhahabaٱلسَّيِّـَٔاتُबुराईयाँ (तकालीफ़)l-sayiātuعَنِّىٓ ۚमुझसेʿannīإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَفَرِحٌۭअलबत्ता बहुत इतराने वालाlafariḥunفَخُورٌबहुत फ़ख़्र करने वाला हैfakhūrun١٠
और यदि हम उसे विपत्ति पहुँचने के बाद कोई नेमत चखाएँ, तो निश्चय ही वह अवश्य कहेगा : समस्त विपत्तियाँ मुझसे दूर हो गईं। निःसंदेह वह बहुत इतराने वाला, बहुत गर्व करने वाला है।1
११:११
إِلَّاसिवायillāٱلَّذِينَउनके जिन्होंनेalladhīnaصَبَرُوا۟सब्र कियाṣabarūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaلَهُمउनके लिए हैlahumمَّغْفِرَةٌۭबख़्शिशmaghfiratunوَأَجْرٌۭऔर अजरwa-ajrunكَبِيرٌۭबहुत बड़ाkabīrun١١
परन्तु जिन लोगों ने धैर्य से काम लिया और अच्छे कर्म करते रहे, ऐस लोगों के लिए क्षमा और बड़ा प्रतिफल है।
११:१२
فَلَعَلَّكَतो शायद आपfalaʿallakaتَارِكٌۢछोड़ने वाले हैंtārikunبَعْضَबाज़ हिस्साbaʿḍaمَاउसका जोيُوحَىٰٓवही किया गयाyūḥāإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaوَضَآئِقٌۢऔर तंग होने वाला हैwaḍāiqunبِهِۦसाथ उसकेbihiصَدْرُكَसीना आपकाṣadrukaأَنकिanيَقُولُوا۟वो कहेंगेyaqūlūلَوْلَآक्यों नहींlawlāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaعَلَيْهِइस परʿalayhiكَنزٌकोई ख़ज़ानाkanzunأَوْयाawجَآءَआयाjāaمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuمَلَكٌ ۚकोई फ़रिश्ताmalakunإِنَّمَآबेशकinnamāأَنتَआप तोantaنَذِيرٌۭ ۚडराने वाले हैंnadhīrunوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinوَكِيلٌनिगरान हैwakīlun١٢
तो (ऐ नबी!) संभवतः आप अपनी ओर की जाने वाली वह़्य के कुछ भाग (का प्रसार) छोड़ देने वाले हैं, और उसके (प्रसार के) कारण आपका सीना तंग हो रहा है कि वे कहेंगे कि इसपर कोई ख़ज़ाना क्यों नहीं उतारा गया या इसके साथ कोई फरिश्ता क्यों नहीं आया? (तो सुनिए) आप केवल सचेत करने वाले हैं और अल्लाह ही प्रत्येक चीज़ का संरक्षक है।
११:१३
أَمْक्याamيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaافْتَرَاهُ ۖउसने गढ़ लिया उसेif'tarāhuقُلْकह दीजिएqulفَأْتُوا۟पस ले आओfatūبِعَشْرِदसbiʿashriسُوَرٍۢसूरतेंsuwarinمِّثْلِهِۦमानिन्द इसकेmith'lihiمُفْتَرَيَـٰتٍۢगढ़ी हुईmuf'tarayātinوَٱدْعُوا۟और बुला लोwa-id'ʿūمَنِउन्हें जिनकीmaniٱسْتَطَعْتُمइस्तिताअत रखते हो तुमis'taṭaʿtumمِّنbesides Allahminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna١٣
बल्कि क्या वे कहते हैं कि उसने इस (क़ुरआन) को स्वयं गढ़ लिया है? आप कह दें कि इस जैसी गढ़ी हुई दस सूरतें ले आओ1 और अल्लाह के सिवा, जिसे बुला सकते हो, बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।
११:१४
فَإِلَّمْफिर अगर नाfa-illamيَسْتَجِيبُوا۟वो जवाब देंyastajībūلَكُمْतुम्हेंlakumفَٱعْلَمُوٓا۟तो जान लोfa-iʿ'lamūأَنَّمَآकि बेशकannamāأُنزِلَये नाज़िल किया गया हैunzilaبِعِلْمِwith the knowledge of Allahbiʿil'miٱللَّهِअल्लाह के इल्म सेl-lahiوَأَنऔर ये किwa-anلَّآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَ ۖवो हीhuwaفَهَلْतो क्याfahalأَنتُمतुमantumمُّسْلِمُونَइस्लाम लाने वाले होmus'limūna١٤
फिर यदि वे तुम्हारी मांग पूरी न करें, तो जान लो कि यह (क़ुरआन) अल्लाह के ज्ञान के साथ उतारा गया है और यह कि उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम मुसलमान होते हो?
११:१५
مَنजो कोईmanكَانَहैkānaيُرِيدُचाहताyurīduٱلْحَيَوٰةَज़िन्दगीl-ḥayataٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāوَزِينَتَهَاऔर ज़ीनत उसकीwazīnatahāنُوَفِّहम पूरा-पूरा देंगेnuwaffiإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimأَعْمَـٰلَهُمْउनके आमाल (का अजर)aʿmālahumفِيهَاउसमेंfīhāوَهُمْऔर वोwahumفِيهَاउसमेंfīhāلَاwill not be lessenedيُبْخَسُونَना वो कमी किए जाऐंगेyub'khasūna١٥
जो व्यक्ति सांसारिक जीवन तथा उसकी शोभा चाहता हो, हम ऐसे लोगों को उनके कर्मों का बदला इसी (दुनिया) में दे देते हैं और इसमें उनका कोई हक़ नहीं मारा जाता।
११:१६
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaلَيْسَनहीं हैlaysaلَهُمْउनके लिएlahumفِىinٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiإِلَّاमगरillāٱلنَّارُ ۖआगl-nāruوَحَبِطَऔर ज़ाया हो गयाwaḥabiṭaمَاजोصَنَعُوا۟उन्होंने कियाṣanaʿūفِيهَاउसमेंfīhāوَبَـٰطِلٌۭऔर बातिल हैwabāṭilunمَّاजो कुछكَانُوا۟थे वोkānūيَعْمَلُونَवो अमल करतेyaʿmalūna١٦
यही वे लोग हैं, जिनके लिए आख़िरत में आग के सिवा कुछ नहीं है और उनके दुनिया में किए हुए समस्त कार्य व्यर्थ हो जाएँगे और उनका सारा किया-धरा अकारथ होकर रह जाएगा।
११:१७
أَفَمَنक्या भला वो शख़्स जोafamanكَانَहोkānaعَلَىٰonʿalāبَيِّنَةٍۢएक वाज़ेह दलील परbayyinatinمِّنfromminرَّبِّهِۦअपने रब की तरफ़ सेrabbihiوَيَتْلُوهُऔर पीछे आता हो उसकेwayatlūhuشَاهِدٌۭएक गवाहshāhidunمِّنْهُउसकी तरफ़ सेmin'huوَمِنand before itwaminقَبْلِهِۦऔर उससे पहले थीqablihiكِتَـٰبُकिताबkitābuمُوسَىٰٓमूसा कीmūsāإِمَامًۭاइमाम/रहनुमाimāmanوَرَحْمَةً ۚऔर रहमतwaraḥmatanأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaيُؤْمِنُونَजो ईमान रखते हैंyu'minūnaبِهِۦ ۚउस परbihiوَمَنऔर जो कोईwamanيَكْفُرْकुफ़्र करेगाyakfurبِهِۦउसकाbihiمِنَamongminaٱلْأَحْزَابِगिरोहों में सेl-aḥzābiفَٱلنَّارُतो आगfal-nāruمَوْعِدُهُۥ ۚउसकी वादागाह हैmawʿiduhuفَلَاपस नाfalāتَكُहों आपtakuفِىinمِرْيَةٍۢकिसी शक मेंmir'yatinمِّنْهُ ۚउससेmin'huإِنَّهُबेशक वोinnahuٱلْحَقُّहक़ हैl-ḥaquمِنfromminرَّبِّكَआपके रब की तरफ़ सेrabbikaوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَअक्सरaktharaٱلنَّاسِलोगl-nāsiلَا(do) notيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūna١٧
तो क्या वह व्यक्ति जो अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण1 रखता हो और उसके बाद अल्लाह की ओर से एक गवाह2 भी आ जाए, तथा उससे पहले मूसा की पुस्तक मार्गदर्शक और दया के रूप में उपस्थित रही हो (वह गुमराही में पड़े हुए लोगों के समान हो सकता है?) ऐसे ही लोग इस (क़ुरआन) पर ईमान रखते हैं। और इन समूहों में से जो व्यक्ति भी इसका इनकार करेगा, तो उसके वादा की जगह (ठिकाना) दोज़ख है। अतः आप इसके बारे में किसी संदेह में न पड़ें। निःसंदेह यह आपके पालनहार की ओर से सत्य है। परंतु अधिकतर लोग ईमान (विश्वास) नहीं रखते।
११:१८
وَمَنْऔर कौनwamanأَظْلَمُबड़ा ज़ालिम हैaẓlamuمِمَّنِउससे जोmimmaniٱفْتَرَىٰगढ़ लेif'tarāعَلَىagainstʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiكَذِبًا ۚझूठkadhibanأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaيُعْرَضُونَजो पेश किए जाऐंगेyuʿ'raḍūnaعَلَىٰbeforeʿalāرَبِّهِمْअपने रब परrabbihimوَيَقُولُऔर कहेंगेwayaqūluٱلْأَشْهَـٰدُगवाहl-ashhāduهَـٰٓؤُلَآءِये हैंhāulāiٱلَّذِينَवो लोग जिन्होंनेalladhīnaكَذَبُوا۟झूठ बोलाkadhabūعَلَىٰagainstʿalāرَبِّهِمْ ۚअपने रब परrabbihimأَلَاख़बरदारalāلَعْنَةُलानत हैlaʿnatuٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiعَلَى(is) onʿalāٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों परl-ẓālimīna١٨
और उससे बड़ा अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े? ऐसे लोग अपने पालनहार के समक्ष प्रस्तुत किए जाएँगे और गवाही देने वाले कहेंगे कि यही वे लोग हैं जिन्होंने अपने पालनहार पर झूठ गढ़ा था। सुन लो! अत्याचारियों पर अल्लाह की धिक्कार है।
११:१९
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيَصُدُّونَरोकते हैंyaṣuddūnaعَنfromʿanسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते सेl-lahiوَيَبْغُونَهَاऔर तलाश करते हैं उस मेंwayabghūnahāعِوَجًۭاटेढ़ा पनʿiwajanوَهُمऔर वोwahumبِٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत केbil-ākhiratiهُمْवो हीhumكَـٰفِرُونَइन्कारी हैंkāfirūna١٩
जो अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं और उसे टेढ़ा बनाना चाहते हैं और वही आख़िरत का इनकार करने वाले हैं।
११:२०
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोगulāikaلَمْनाlamيَكُونُوا۟वो थेyakūnūمُعْجِزِينَआजिज़ करने वालेmuʿ'jizīnaفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَمَاऔर नहींwamāكَانَथाkānaلَهُمउनके लिएlahumمِّنbesidesminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمِنْanyminأَوْلِيَآءَ ۘकोई मददगारawliyāaيُضَـٰعَفُदोगुना किया जाएगाyuḍāʿafuلَهُمُउनके लिएlahumuٱلْعَذَابُ ۚअज़ाबl-ʿadhābuمَاनाكَانُوا۟थे वोkānūيَسْتَطِيعُونَवो इस्तिताअत रखतेyastaṭīʿūnaٱلسَّمْعَसुनने कीl-samʿaوَمَاऔर ना हीwamāكَانُوا۟थे वोkānūيُبْصِرُونَवो देखतेyub'ṣirūna٢٠
वे धरती में अल्लाह की यातना से बचकर भाग नहीं सकते और न उनका अल्लाह के सिवा कोई सहायक है। उनके लिए यातना दुगुनी कर दी जाएगी। वे (दुनिया में) न सुन सकते थे, न देख सकते थे।
११:२१
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaخَسِرُوٓا۟ख़सारे में डालाkhasirūأَنفُسَهُمْअपनी जानों कोanfusahumوَضَلَّऔर गुम हो गयाwaḍallaعَنْهُمउनसेʿanhumمَّاजो कुछكَانُوا۟थे वोkānūيَفْتَرُونَवो गढ़ा करतेyaftarūna٢١
ये वही लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला और वह सब कुछ उनसे खो गया, जो वे झूठ गढ़ा करते थे।
११:२२
لَاNoجَرَمَनहीं कोई शकjaramaأَنَّهُمْबेशक वोannahumفِىinٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiهُمُवो ही हैंhumuٱلْأَخْسَرُونَजो सब से ज़्यादा ख़सारा पाने वाले हैंl-akhsarūna٢٢
इसमें कोई संदेह नहीं कि यही लोग आख़िरत में सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैं।
११:२३
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiوَأَخْبَتُوٓا۟और उन्होंने आजिज़ी कीwa-akhbatūإِلَىٰbeforeilāرَبِّهِمْतरफ़ अपने रब केrabbihimأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaأَصْحَـٰبُसाथीaṣḥābuٱلْجَنَّةِ ۖजन्नत केl-janatiهُمْवोhumفِيهَاउसमेंfīhāخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वाले हैंkhālidūna٢٣
निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, तथा अपने पालनहार के सामने विनम्रता प्रकट की, वही लोग जन्नत वाले हैं। वे उसमें हमेशा रहेंगे।
११:२४
۞ مَثَلُमिसालmathaluٱلْفَرِيقَيْنِदो गिरोहों कीl-farīqayniكَٱلْأَعْمَىٰमानिन्द अँधेkal-aʿmāوَٱلْأَصَمِّऔर बहरे के हैwal-aṣamiوَٱلْبَصِيرِऔर देखने वालेwal-baṣīriوَٱلسَّمِيعِ ۚऔर सुनने वाले के हैwal-samīʿiهَلْक्याhalيَسْتَوِيَانِये दोनों बराबर हो सकते हैंyastawiyāniمَثَلًا ۚमिसाल मेंmathalanأَفَلَاक्या भला नहींafalāتَذَكَّرُونَतुम नसीहत पकड़तेtadhakkarūna٢٤
दोनों पक्षों का उदाहरण अंधे और बहरे तथा देखने और सुनने वाले की तरह है। क्या ये दोनों उदाहरण में बराबर हो सकते हैं? क्या तुम (इससे) नसीहत नहीं पकड़ते?
११:२५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāنُوحًاनूह कोnūḥanإِلَىٰतरफ़ilāقَوْمِهِۦٓउसकी क़ौम केqawmihiإِنِّىबेशक मैंinnīلَكُمْतुम्हारे लिएlakumنَذِيرٌۭडराने वाला हूँnadhīrunمُّبِينٌखुल्लम-खुल्लाmubīnun٢٥
और हमने नूह़ को उसकी जाति की ओर रसूल बनाकर भेजा। (उन्होंने कहा :) निःसंदेह मैं तुम्हें साफ़-साफ़ सावधान करने वाला हूँ।
११:२६
أَنकिanلَّا(do) notتَعْبُدُوٓا۟ना तुम इबादत करोtaʿbudūإِلَّاमगरillāٱللَّهَ ۖअल्लाह कीl-lahaإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَخَافُमैं डरता हूँakhāfuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaيَوْمٍ(of) a Dayyawminأَلِيمٍۢदर्दनाक दिन केalīmin٢٦
कि तुम केवल अल्लाह की इबादत करो। निःसंदेह मैं तुमपर एक दर्दनाक दिन की यातना से डरता हूँ।
११:२७
فَقَالَतो कहाfaqālaٱلْمَلَأُसरदारों नेl-mala-uٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र किया थाkafarūمِنfromminقَوْمِهِۦउसकी क़ौम में सेqawmihiمَاनहींنَرَىٰكَहम देखते तुझेnarākaإِلَّاमगरillāبَشَرًۭاएक इन्सानbasharanمِّثْلَنَاअपने जैसाmith'lanāوَمَاऔर नहींwamāنَرَىٰكَहम देखते तुझेnarākaٱتَّبَعَكَकि पैरवी की तेरीittabaʿakaإِلَّاमगरillāٱلَّذِينَउन लोगों ने जोalladhīnaهُمْवोhumأَرَاذِلُنَاकमतर हैं हमसेarādhilunāبَادِىَबज़ाहिरbādiyaٱلرَّأْىِदेखने मेंl-rayiوَمَاऔर नहींwamāنَرَىٰहम देखतेnarāلَكُمْतुम्हारे लिएlakumعَلَيْنَاअपने ऊपरʿalaynāمِنanyminفَضْلٍۭकोई फ़जीलतfaḍlinبَلْबल्किbalنَظُنُّكُمْहम समझते हैं तुम्हेंnaẓunnukumكَـٰذِبِينَझूठेkādhibīna٢٧
तो उनकी जाति के उन प्रमुखों ने कहा, जिन्होंने कुफ्र किया था : हम तो तुम्हें अपने ही जैसा इनसान समझते हैं और हम देख रहे हैं कि तुम्हारा अनुसरण केवल वही लोग कर रहे हैं, जो हम में नीच हैं, जिन्होंने बिना सोचे-समझे तुम्हारी पैरवी की है।और हम अपने ऊपर तुम्हारी कोई श्रेष्ठता भी नहीं देखते। बल्कि हम तो तुम्हें झूठा समझते हैं।
११:२८
قَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiأَرَءَيْتُمْक्या देखा तुमनेara-aytumإِنअगरचेinكُنتُहूँ मैंkuntuعَلَىٰonʿalāبَيِّنَةٍۢएक वाज़ेह दलील परbayyinatinمِّنfromminرَّبِّىअपने रब की तरफ़ सेrabbīوَءَاتَىٰنِىऔर उसने दी हो मुझेwaātānīرَحْمَةًۭरहमतraḥmatanمِّنْfromminعِندِهِۦअपने पास सेʿindihiفَعُمِّيَتْफिर वो छुपा दी गई होfaʿummiyatعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumأَنُلْزِمُكُمُوهَاक्या हम लाज़िम कर दें उसेanul'zimukumūhāوَأَنتُمْजबकि तुमwa-antumلَهَاउसेlahāكَـٰرِهُونَनापसंद करने वाले होkārihūna٢٨
नूह़ ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने इस बात पर विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपने पास से दया1 प्रदान की हो, फिर वह तुम्हें सुझाई न दे, तो क्या हम तुम्हें उसको मानने पर मजबूर2 कर सकते हैं, जबकि तुम उसे नापसंद करते हो?
११:२९
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiلَآnotأَسْـَٔلُكُمْनहीं मैं सवाल करता तुमसेasalukumعَلَيْهِइस परʿalayhiمَالًا ۖकिसी माल काmālanإِنْनहींinأَجْرِىَअजर मेराajriyaإِلَّاमगरillāعَلَىfromʿalāٱللَّهِ ۚअल्लाह परl-lahiوَمَآऔर नहींwamāأَنَا۠मैंanāبِطَارِدِदूर करने वालाbiṭāridiٱلَّذِينَउन्हें जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ ۚईमान लाएāmanūإِنَّهُمबेशक वोinnahumمُّلَـٰقُوا۟मुलाक़ात करने वाले हैंmulāqūرَبِّهِمْअपने रब सेrabbihimوَلَـٰكِنِّىٓऔर लेकिन मैंwalākinnīأَرَىٰكُمْदेखता हूँ तुम्हेंarākumقَوْمًۭاऐसे लोगqawmanتَجْهَلُونَकि तुम जहालत बरत रहे होtajhalūna٢٩
और ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं इस (संदेश के प्रचार) पर तुमसे कोई धन नहीं माँगता। मेरा बदला बस अल्लाह के ऊपर है। और मैं (अपने यहाँ से) उन लोगों को दूर नहीं हटा सकता, जो ईमान लाए हैं। निःसंदेह वे अपने पालनहार से मिलने वाले हैं। परन्तु मैं देख रहा हूँ कि तुम जाहिलों जैसी बातें कर रहे हो।
११:३०
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiمَنकौनmanيَنصُرُنِىमदद करेगा मेरीyanṣurunīمِنَagainstminaٱللَّهِअल्लाह से (बचाने में)l-lahiإِنअगरinطَرَدتُّهُمْ ۚदूर कर दिया मैंने उन्हेंṭaradttuhumأَفَلَاक्या भला नहींafalāتَذَكَّرُونَतुम नसीहत पकड़तेtadhakkarūna٣٠
और ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह के मुक़ाबले में कौन मेरी सहायता1 करेगा, यदि मैं उन्हें अपने पास से निष्कासित कर दूँ? क्या तुम विचार नहीं करते?
११:३१
وَلَآऔर नहींwalāأَقُولُमैं कहताaqūluلَكُمْतुम्हेंlakumعِندِىमेरे पासʿindīخَزَآئِنُख़ज़ाने हैंkhazāinuٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَلَآऔर नाwalāأَعْلَمُमैं जानता हूँaʿlamuٱلْغَيْبَग़ैब कोl-ghaybaوَلَآऔर नाwalāأَقُولُमैं कहता हूँaqūluإِنِّىकि मैंinnīمَلَكٌۭकोई फ़रिश्ता हूँmalakunوَلَآऔर नाwalāأَقُولُमैं कहता हूँaqūluلِلَّذِينَउनके लिए जिन्हेंlilladhīnaتَزْدَرِىٓहक़ीर समझती हैंtazdarīأَعْيُنُكُمْनिगाहें तुम्हारीaʿyunukumلَنकि हरगिज़ नाlanيُؤْتِيَهُمُदेगा उन्हेंyu'tiyahumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuخَيْرًا ۖकोई भलाईkhayranٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَعْلَمُख़ूब जानता हैaʿlamuبِمَاउसे जोbimāفِىٓ(is) inأَنفُسِهِمْ ۖउनके नफ़्सों में हैanfusihimإِنِّىٓबेशक मैंinnīإِذًۭاतबidhanلَّمِنَ(will be) surely oflaminaٱلظَّـٰلِمِينَज़रूर ज़ालिमों में से हूँगाl-ẓālimīna٣١
और मैं तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं और न मुझे परोक्ष का ज्ञान है और न मैं यह कहता हूँ कि निःसंदेह मैं एक फ़रिश्ता हूँ और न ही मैं उन लोगों के बारे में जिन्हें तुम्हारी आँखें तुच्छ समझती हैं, यह कहता हूँ कि अल्लाह उन्हें हरगिज़ कोई भलाई नहीं देगा। अल्लाह अधिक जानता है, जो कुछ उनके दिलों में है। (यदि मैं ऐसा कहूँ,) तो निश्चय ही मैं अत्याचारियों में से हो जाऊँगा।
११:३२
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰنُوحُऐ नूहyānūḥuقَدْतहक़ीक़qadجَـٰدَلْتَنَاझगड़ा किया तूने हमसेjādaltanāفَأَكْثَرْتَफिर कसरत से किया तूनेfa-akthartaجِدَٰلَنَاझगड़ा हमसेjidālanāفَأْتِنَاपस ले आ हमारे पासfatināبِمَاवो जिसकाbimāتَعِدُنَآतू वादा देता है हमेंtaʿidunāإِنअगरinكُنتَहै तूkuntaمِنَofminaٱلصَّـٰدِقِينَसच्चों में सेl-ṣādiqīna٣٢
उन लोगों ने कहा : ऐ नूह़! तुमने हमसे झगड़ा किया और बहुत झगड़ लिया। अतः अब वह (यातना) हम पर ले आओ, जिसका तुम हमसे वादा करते हो, यदि तुम सच्चे हो।
११:३३
قَالَउसने कहाqālaإِنَّمَاबेशकinnamāيَأْتِيكُمलाएगा तुम परyatīkumبِهِउसकोbihiٱللَّهُअल्लाहl-lahuإِنअगरinشَآءَवो चाहेshāaوَمَآऔर नहींwamāأَنتُمतुमantumبِمُعْجِزِينَआजिज़ करने वालेbimuʿ'jizīna٣٣
उसने कहा : उसे तो तुम्हारे पास अल्लाह ही लाएगा, यदि वह चाहेगा और तुम (उसे) विवश करने वाले नहीं हो।
११:३४
وَلَاऔर नहींwalāيَنفَعُكُمْफ़ायदा देगी तुम्हेंyanfaʿukumنُصْحِىٓख़ैरख़्वाही मेरीnuṣ'ḥīإِنْअगरinأَرَدتُّमैं चाहूँaradttuأَنْकिanأَنصَحَमैं ख़ैरख़्वाही करूँanṣaḥaلَكُمْतुम्हारीlakumإِنअगरinكَانَहैkānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuيُرِيدُचाहताyurīduأَنकिanيُغْوِيَكُمْ ۚवो भटका दे तुम्हेंyugh'wiyakumهُوَवोhuwaرَبُّكُمْरब है तुम्हाराrabbukumوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसी केwa-ilayhiتُرْجَعُونَतुम लौटाए जाओगेtur'jaʿūna٣٤
और मेरा उपदेश करना तुम्हें कोई लाभ नहीं देगा, अगर मैं तुम्हें उपदेश करना चाहूँ, जबकि अल्लाह तुम्हें गुमराह करना चाहता हो। वही तुम्हारा पालनहार है और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
११:३५
أَمْक्याamيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaٱفْتَرَىٰهُ ۖउसने गढ़ लिया है उसेif'tarāhuقُلْकह दीजिएqulإِنِअगरiniٱفْتَرَيْتُهُۥगढ़ा है मैंने उसेif'taraytuhuفَعَلَىَّतो मुझ ही पर हैfaʿalayyaإِجْرَامِىजुर्म करना मेराij'rāmīوَأَنَا۠और मैंwa-anāبَرِىٓءٌۭबरी उज़ ज़िम्मा हूँbarīonمِّمَّاउससे जोmimmāتُجْرِمُونَतुम जुर्म करते होtuj'rimūna٣٥
क्या वे कहते हैं कि उसने इसे गढ़ लिया है? तुम कह दो कि यदि मैंने इसे गढ़ लिया है, तो मेरा अपराध मुझी पर है और मैं उससे निर्दोष हूँ, जो अपराध तुम कर रहे हो।
११:३६
وَأُوحِىَऔर वही की गईwaūḥiyaإِلَىٰtoilāنُوحٍतरफ़ नूह केnūḥinأَنَّهُۥकि बेशक वोannahuلَنहरगिज़ नाlanيُؤْمِنَईमान लाएगाyu'minaمِنfromminقَوْمِكَतेरी क़ौम में सेqawmikaإِلَّاसिवायillāمَنउसके जोmanقَدْतहक़ीक़qadءَامَنَईमान ला चुकाāmanaفَلَاतो नाfalāتَبْتَئِسْतू ग़म करtabta-isبِمَاबवजह उसके जोbimāكَانُوا۟हैं वोkānūيَفْعَلُونَवो करतेyafʿalūna٣٦
और नूह़ की ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई कि तुम्हारी जाति में से जो लोग ईमान ला चुके हैं, अब उनके सिवा कोई ईमान नहीं लाएगा। अतः वे जो कुछ कर रहे हैं, उससे तुम दुःखी न हो।
११:३७
وَٱصْنَعِऔर तू बनाwa-iṣ'naʿiٱلْفُلْكَकश्तीl-ful'kaبِأَعْيُنِنَاहमारी निगाहों के सामनेbi-aʿyunināوَوَحْيِنَاऔर हमारी वही के मुताबिक़wawaḥyināوَلَاऔर नाwalāتُخَـٰطِبْنِىतू मुख़ातिब होना मुझसेtukhāṭib'nīفِىconcerningٱلَّذِينَउनके बारे में जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوٓا۟ ۚज़ुल्म कियाẓalamūإِنَّهُمबेशक वोinnahumمُّغْرَقُونَग़र्क़ किए जाने वाले हैंmugh'raqūna٣٧
और हमारी आँखों के सामने और हमारी वह़्य के अनुसार एक नाव बनाओ और मुझसे उन लोगों के बारे में कुछ1 न कहना, जिन्होंने अत्याचार किया है। निःसंदेह वे डुबाए जाने वाले हैं।
११:३८
وَيَصْنَعُऔर वो बना रहा थाwayaṣnaʿuٱلْفُلْكَकश्तीl-ful'kaوَكُلَّمَاऔर जब कभीwakullamāمَرَّगुज़रतेmarraعَلَيْهِउस परʿalayhiمَلَأٌۭसरदारmala-onمِّنofminقَوْمِهِۦउसकी क़ौम में सेqawmihiسَخِرُوا۟वो मज़ाक़ करतेsakhirūمِنْهُ ۚउससेmin'huقَالَवो कहताqālaإِنअगरinتَسْخَرُوا۟तुम मज़ाक़ करते होtaskharūمِنَّاहम सेminnāفَإِنَّاतो बेशक हम भीfa-innāنَسْخَرُहम मज़ाक़ करेंगेnaskharuمِنكُمْतुमसेminkumكَمَاजैसा किkamāتَسْخَرُونَतुम मज़ाक़ करते होtaskharūna٣٨
और वह नाव बनाने लगा। और जब भी उसकी जाति के प्रमुख लोग उसके पास से गुज़रते, तो उसकी हँसी उड़ाते। नूह़ ने कहा : यदि तुम हमारी हँसी उड़ाते हो, तो हम भी ऐसे ही (एक दिन) तुम्हारी हँसी उड़ाएँगे।
११:३९
فَسَوْفَपस अनक़रीबfasawfaتَعْلَمُونَतुम जान लोगेtaʿlamūnaمَنकौन है जोmanيَأْتِيهِआएगा उसके पासyatīhiعَذَابٌۭअज़ाबʿadhābunيُخْزِيهِजो रुस्वा कर देगा उसेyukh'zīhiوَيَحِلُّऔर उतरेगाwayaḥilluعَلَيْهِउस परʿalayhiعَذَابٌۭअज़ाबʿadhābunمُّقِيمٌदाइमीmuqīmun٣٩
फिर तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि किसपर अपमानकारी यातना आती है और किसपर स्थायी यातना उतरती है?
११:४०
حَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāجَآءَआ गयाjāaأَمْرُنَاहुक्म हमाराamrunāوَفَارَऔर जोश माराwafāraٱلتَّنُّورُतन्नूर नेl-tanūruقُلْنَاकहा हमनेqul'nāٱحْمِلْसवार कर लेiḥ'milفِيهَاइसमेंfīhāمِنofminكُلٍّۢहर (क़िस्म) सेkullinزَوْجَيْنِजोड़ेzawjayniٱثْنَيْنِदो (नर,मादा)ith'nayniوَأَهْلَكَऔर अपने घर वालों कोwa-ahlakaإِلَّاसिवायillāمَنउसके जोmanسَبَقَगुज़र चुकीsabaqaعَلَيْهِउस परʿalayhiٱلْقَوْلُबातl-qawluوَمَنْऔर उनको जोwamanءَامَنَ ۚईमान लाएāmanaوَمَآऔर नहींwamāءَامَنَईमान लाएāmanaمَعَهُۥٓसाथ उसकेmaʿahuإِلَّاमगरillāقَلِيلٌۭबहुत थोड़ेqalīlun٤٠
यहाँ तक कि जब हमारा आदेश आ गया और तन्नूर उबलने लगा, तो हमने (नूह़ से) कहा : "उसमें प्रत्येक प्रकार के जीवों में से जोड़े-जोड़े चढ़ा लो और अपने परिजनों को (भी चढ़ा लो) सिवाय उसके जिसके बारे में पहले ही बता दिया गाय है और उन लोगों को (भी चढ़ा लो) जो ईमान लाए हैं।" और उसके साथ थोड़े लोग ही ईमान लाए थे।
११:४१
۞ وَقَالَऔर उसने कहाwaqālaٱرْكَبُوا۟सवार हो जाओir'kabūفِيهَاइसमेंfīhāبِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمَجْر۪ىٰهَاचलना है उसकाmajrahāوَمُرْسَىٰهَآ ۚऔर ठहरना है उसकाwamur'sāhāإِنَّबेशकinnaرَبِّىमेरा रबrabbīلَغَفُورٌۭअलबत्ता बहुत बख़्शने वाला हैlaghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٤١
और नूह़ ने कहा : इसमें सवार हो जाओ। अल्लाह के नाम ही से इसका चलना तथा इसका ठहरना है। निःसंदेह मेरा पालनहार बड़ा क्षमाशील, दयावान् है।
११:४२
وَهِىَऔर वोwahiyaتَجْرِىचल रही थीtajrīبِهِمْसाथ उनकेbihimفِىonمَوْجٍۢमौज/लहर मेंmawjinكَٱلْجِبَالِपहाड़ों जैसीkal-jibāliوَنَادَىٰऔर पुकाराwanādāنُوحٌनूह नेnūḥunٱبْنَهُۥअपने बेटे कोib'nahuوَكَانَऔर था वोwakānaفِى[in]مَعْزِلٍۢअलग जगह मेंmaʿzilinيَـٰبُنَىَّऐ मेरे बेटेyābunayyaٱرْكَبसवार हो जाओir'kabمَّعَنَاसाथ हमारेmaʿanāوَلَاऔर नाwalāتَكُنतुम होtakunمَّعَwithmaʿaٱلْكَـٰفِرِينَसाथ काफ़िरों केl-kāfirīna٤٢
और वह उन्हें लिए पर्वतों जैसी ऊँची लहरों में चलती रही। और नूह़ ने अपने बेटे को, जो (उनसे) अलग-थलग था, पुकारा : ऐ मेरे बेटे! मेरे साथ सवार हो जा और काफ़िरों के साथ न रह।
११:४३
قَالَवो बोलाqālaسَـَٔاوِىٓअनक़रीब मैं पनाह ले लूँगाsaāwīإِلَىٰtoilāجَبَلٍۢतरफ़ एक पहाड़ केjabalinيَعْصِمُنِىवो बचा लेगा मुझेyaʿṣimunīمِنَfromminaٱلْمَآءِ ۚपानी सेl-māiقَالَकहाqālaلَا(There is) noعَاصِمَनहीं कोई बचाने वालाʿāṣimaٱلْيَوْمَआज के दिनl-yawmaمِنْfromminأَمْرِहुक्म सेamriٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِلَّاमगरillāمَنजिस परmanرَّحِمَ ۚवो रहम करेraḥimaوَحَالَऔर हाइल हो गईwaḥālaبَيْنَهُمَاदर्मियान उन दोनों केbaynahumāٱلْمَوْجُएक मौजl-mawjuفَكَانَतो हो गया वोfakānaمِنَamongminaٱلْمُغْرَقِينَग़र्क़ होने वालों में सेl-mugh'raqīna٤٣
उसने कहा : मैं किसी पर्वत की ओर शरण ले लूँगा, जो मुझे पानी से बचा लेगा। नूह़ ने कहा : आज अल्लाह के आदेश (यातना) से कोई बचाने वाला नहीं। यह और बात है कि किसी पर उसकी दया हो जाए। और (इतने ही में) दोनों के बीच एक लहर आ गई और वह डूबने वालों में से हो गया।
११:४४
وَقِيلَऔर कह दिया गयाwaqīlaيَـٰٓأَرْضُऐ ज़मीनyāarḍuٱبْلَعِىनिगल जाib'laʿīمَآءَكِपानी अपनाmāakiوَيَـٰسَمَآءُऔर ऐ आसमानwayāsamāuأَقْلِعِىथम जाaqliʿīوَغِيضَऔर ख़ुश्क कर दिया गयाwaghīḍaٱلْمَآءُपानीl-māuوَقُضِىَऔर फ़ैसला कर दिया गयाwaquḍiyaٱلْأَمْرُमामले काl-amruوَٱسْتَوَتْऔर जा ठहरी (कश्ती)wa-is'tawatعَلَىonʿalāٱلْجُودِىِّ ۖजूदी परl-jūdiyiوَقِيلَऔर कह दिया गयाwaqīlaبُعْدًۭاदूरी हैbuʿ'danلِّلْقَوْمِउन लोगों के लिएlil'qawmiٱلظَّـٰلِمِينَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimīna٤٤
और कहा गया : ऐ धरती! अपना पानी निगल जा और ऐ आकाश! थम जा और पानी उतर गया और आदेश पूरा कर दिया गया और नाव 'जूदी'1 पर ठहर गई और कहा गया कि अत्याचारियों के लिए (अल्लाह की दया से) दूरी है।
११:४५
وَنَادَىٰऔर पुकाराwanādāنُوحٌۭनूह नेnūḥunرَّبَّهُۥअपने रब कोrabbahuفَقَالَतो कहाfaqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiإِنَّबेशकinnaٱبْنِىमेरा बेटाib'nīمِنْ(is) ofminأَهْلِىमेरे घर वालों मे से हैahlīوَإِنَّऔर बेशकwa-innaوَعْدَكَवादा तेराwaʿdakaٱلْحَقُّसच्चा हैl-ḥaquوَأَنتَऔर तूwa-antaأَحْكَمُबेहतर हाकिम हैaḥkamuٱلْحَـٰكِمِينَसब हाकिमों सेl-ḥākimīna٤٥
तथा नूह़ ने अपने पालनहार को पुकारा और कहा : मेरे पालनहार! मेरा बेटा मेरे घर वालों में से है और निःसंदेह तेरा वचन सत्य है तथा तू ही सबसे अच्छा निर्णय करने वाला है।
११:४६
قَالَफ़रमायाqālaيَـٰنُوحُऐ नूहyānūḥuإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَيْسَनहीं हैlaysaمِنْofminأَهْلِكَ ۖतेरे घर वालों में सेahlikaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuعَمَلٌएक अमल हैʿamalunغَيْرُग़ैरghayruصَـٰلِحٍۢ ۖसालेहṣāliḥinفَلَاतो नाfalāتَسْـَٔلْنِतू सवाल कर मुझसेtasalniمَاउसका जोلَيْسَनहींlaysaلَكَतुझेlakaبِهِۦजिसकाbihiعِلْمٌ ۖकोई इल्मʿil'munإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَعِظُكَमैं नसीहत करता हूँ तुझेaʿiẓukaأَنकिanتَكُونَ(ना) तू हो जाtakūnaمِنَamongminaٱلْجَـٰهِلِينَजाहिलों में सेl-jāhilīna٤٦
(अल्लाह ने) कहा : ऐ नूह़! वह तेरे घर वालों में से नहीं है। यह माँग उचित नहीं है। अतः मुझसे उस चीज़ का प्रश्न न कर, जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं। मैं तुझे समझाता हूँ कि अज्ञानियों में से न हो जा।
११:४७
قَالَउसने कहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَعُوذُseek refugeaʿūdhuبِكَमैं पनाह लेता हूँ तेरीbikaأَنْकिanأَسْـَٔلَكَमैं सवाल करूँ तुझसेasalakaمَاउसका जोلَيْسَनहींlaysaلِىमुझेبِهِۦउसकाbihiعِلْمٌۭ ۖकोई इल्मʿil'munوَإِلَّاऔर अगर नाwa-illāتَغْفِرْYou forgivetaghfirلِىतूने बख़्शा मुझेوَتَرْحَمْنِىٓऔर (ना) तूने रहम किया मुझ परwatarḥamnīأَكُنमैं हो जाऊँगाakunمِّنَamongminaٱلْخَـٰسِرِينَख़सारा पाने वालों में सेl-khāsirīna٤٧
नूह़ ने कहा : मेरे पालनहार! मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि मैं तुझसे ऐसी चीज़ का प्रश्न करूँ, जिस (की वास्तविक्ता) का मुझे कोई ज्ञान नहीं1 और यदि तूने मुझे क्षमा नहीं किया और मुझपर दया नहीं की, तो मैं नुक़सान उठाने वालों में से हो जाऊँगा।
११:४८
قِيلَकहा गयाqīlaيَـٰنُوحُऐ नूहyānūḥuٱهْبِطْउतर जाih'biṭبِسَلَـٰمٍۢसाथ सलामती केbisalāminمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāوَبَرَكَـٰتٍऔर बरकतों केwabarakātinعَلَيْكَतुझ परʿalaykaوَعَلَىٰٓand onwaʿalāأُمَمٍۢऔर जमाअतों परumaminمِّمَّنउनमें से जोmimmanمَّعَكَ ۚसाथ हैं तेरेmaʿakaوَأُمَمٌۭऔर कई जमाअतेंwa-umamunسَنُمَتِّعُهُمْअनक़रीब हम फ़ायदा देंगे उन्हेंsanumattiʿuhumثُمَّफिरthummaيَمَسُّهُمपहुँचेगा उन्हेंyamassuhumمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāعَذَابٌअज़ाबʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٤٨
कहा गया : ऐ नूह़! हमारी ओर से सुरक्षा और बरकतों के साथ उतर जाओ, जो तुम पर और उन समूहो पर हैं जो तुम्हारे साथ हैं। तथा कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्हें हम (दुनिया में) जीवन-यापन सामग्री प्रदान करेंगें, फिर उन्हें हमारी ओर से कष्टदायक यातना पहुँचेगी।
११:४९
تِلْكَयेtil'kaمِنْ(is) fromminأَنۢبَآءِख़बरों में से हैanbāiٱلْغَيْبِग़ैब कीl-ghaybiنُوحِيهَآहम वही कर रहे हैं उन्हेंnūḥīhāإِلَيْكَ ۖतरफ़ आपकेilaykaمَاनाكُنتَथे आपkuntaتَعْلَمُهَآआप जानते उन्हेंtaʿlamuhāأَنتَआपantaوَلَاऔर ना हीwalāقَوْمُكَक़ौम आपकीqawmukaمِنfromminقَبْلِbeforeqabliهَـٰذَا ۖइससे पहलेhādhāفَٱصْبِرْ ۖपस सब्र कीजिएfa-iṣ'birإِنَّबेशकinnaٱلْعَـٰقِبَةَअन्जामl-ʿāqibataلِلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों के लिए हैlil'muttaqīna٤٩
ये ग़ैब (परोक्ष) की कुछ बातें हैं, जिन्हें (ऐ नबी!) हम आपकी ओर वह़्य कर रहे हैं। इससे पूर्व न तो आप इन्हें जानते थे और न आपकी जाति के लोग। अतः आप सब्र करें। निःसंदेह अच्छा परिणाम तक़वा वालों के लिए है।
११:५०
وَإِلَىٰऔर तरफ़wa-ilāعَادٍआद केʿādinأَخَاهُمْउनके भाईakhāhumهُودًۭا ۚहूद को (भेजा)hūdanقَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaمَاनहींلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْanyminإِلَـٰهٍकोई इलाह (बरहक़)ilāhinغَيْرُهُۥٓ ۖउसके सिवाghayruhuإِنْनहींinأَنتُمْतुमantumإِلَّاमगरillāمُفْتَرُونَझूठ गढ़ने वालेmuf'tarūna٥٠
और 'आद' (जाति) की ओर उनके भाई हूद को भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (उपासना) करो। उसके अलावा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तुम तो केवल झूठी बातें गढ़ने वाले लोग हो।1
११:५१
يَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiلَآनहींأَسْـَٔلُكُمْमैं सवाल करता तुमसेasalukumعَلَيْهِइस परʿalayhiأَجْرًا ۖकिसी अजर काajranإِنْनहींinأَجْرِىَअजर मेराajriyaإِلَّاमगरillāعَلَىउस परʿalāٱلَّذِىजिसनेalladhīفَطَرَنِىٓ ۚपैदा किया मुझेfaṭaranīأَفَلَاक्या फिर नहींafalāتَعْقِلُونَतुम अक़्ल से काम लेतेtaʿqilūna٥١
ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं तुमसे इस (उपदेश) पर कोई बदला नहीं चाहता; मेरा पारिश्रमिक (बदला) उसी (अल्लाह) पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम (इसे) नहीं समझते?
११:५२
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiٱسْتَغْفِرُوا۟बख़्शिश माँगोis'taghfirūرَبَّكُمْअपने रब सेrabbakumثُمَّफिरthummaتُوبُوٓا۟तौबा करोtūbūإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiيُرْسِلِवो भेजेगाyur'siliٱلسَّمَآءَआसमान कोl-samāaعَلَيْكُمतुम परʿalaykumمِّدْرَارًۭاबहुत बरसने वालाmid'rāranوَيَزِدْكُمْऔर वो ज़्यादा देगा तुम्हेंwayazid'kumقُوَّةًक़ुव्वतquwwatanإِلَىٰतरफ़ilāقُوَّتِكُمْतुम्हारी क़ुव्वत केquwwatikumوَلَاऔर नाwalāتَتَوَلَّوْا۟तुम मुँह फेरोtatawallawمُجْرِمِينَमुजरिम बनकरmuj'rimīna٥٢
ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने पालनहार से क्षमा याचना करो। फिर उसकी ओर पलट आओ। वह आकाश से तुमपर खूब बारिश बरसाएगा और तुम्हारी शक्ति और अधिक बढ़ा देगा और विमुख हो कर अपराधी न बनो।
११:५३
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰهُودُऐ हूदyāhūduمَاनहींجِئْتَنَاलाया तू हमारे पासji'tanāبِبَيِّنَةٍۢकोई वाज़ेह दलीलbibayyinatinوَمَاऔर नहीं हैंwamāنَحْنُहमnaḥnuبِتَارِكِىٓछोड़ने वालेbitārikīءَالِهَتِنَاअपने इलाहों कोālihatināعَنonʿanقَوْلِكَतेरी बात सेqawlikaوَمَاऔर नहीं हैंwamāنَحْنُहमnaḥnuلَكَतुझ परlakaبِمُؤْمِنِينَईमान लाने वालेbimu'minīna٥٣
उन्होंने कहा : ऐ हूद! तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण लेकर नहीं आए तथा हम तुम्हारी बात के कारण अपने पूज्यों को छोड़ने वाले नहीं हैं और न हम तुम्हारा विश्वास करने वाले हैं।
११:५४
إِنनहींinنَّقُولُहम कहतेnaqūluإِلَّاमगरillāٱعْتَرَىٰكَ(ये कि) मुब्तिला कर दिया है तुम्हेंiʿ'tarākaبَعْضُबाज़baʿḍuءَالِهَتِنَاहमारे इलाहों नेālihatināبِسُوٓءٍۢ ۗसाथ किसी तकलीफ़ केbisūinقَالَउसने कहाqālaإِنِّىٓबेशक मैंinnīأُشْهِدُमैं गवाह बनाता हूँush'hiduٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaوَٱشْهَدُوٓا۟और तुम गवाह रहोwa-ish'hadūأَنِّىबेशक मैंannīبَرِىٓءٌۭबरी उज़ ज़िम्मा हूँbarīonمِّمَّاउनसे जिन्हेंmimmāتُشْرِكُونَतुम शरीक करते होtush'rikūna٥٤
हम तो यही कहेंगे कि हमारे किसी देवता ने तुझे पागल बना दिया है। हूद ने कहा : मैं अल्लाह को (गवाह) बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं उस शिर्क से बरी हूँ, जो तुम कर रहे हो।
११:५५
مِنOther than Himminدُونِهِۦ ۖउसके सिवाdūnihiفَكِيدُونِىपस चाल चलो मेरे ख़िलाफ़fakīdūnīجَمِيعًۭاसबके सबjamīʿanثُمَّफिरthummaلَا(do) notتُنظِرُونِना तुम मोहलत दो मुझेtunẓirūni٥٥
उस (अल्लाह) के सिवा। अतः तुम सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो, फिर मुझे मोहलत न दो।1
११:५६
إِنِّىबेशक मैंinnīتَوَكَّلْتُतवक्कल किया मैंनेtawakkaltuعَلَىuponʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiرَبِّىजो रब है मेराrabbīوَرَبِّكُم ۚऔर रब है तुम्हाराwarabbikumمَّاनहींمِنof a moving creatureminدَآبَّةٍकोई जानदारdābbatinإِلَّاमगरillāهُوَवोhuwaءَاخِذٌۢपकड़ने वाला हैākhidhunبِنَاصِيَتِهَآ ۚपेशानी उसकीbināṣiyatihāإِنَّबेशकinnaرَبِّىरब मेराrabbīعَلَىٰ(is) onʿalāصِرَٰطٍۢऊपर रास्तेṣirāṭinمُّسْتَقِيمٍۢसीधे के हैmus'taqīmin٥٦
निःसंदेह मैंने अपने पालनहार और तुम्हारे पालनहार, अल्लाह पर भरोसा किया है। कोई चलने वाला जीव नहीं, परंतु वह उसके माथे के बालों को पकड़े हुए है। निश्चय ही मेरा पालनहार सीधे रास्ते1 पर है।
११:५७
فَإِنफिर अगरfa-inتَوَلَّوْا۟तुम मुँह फेरते होtawallawفَقَدْतो तहक़ीक़faqadأَبْلَغْتُكُمपहुँचा दिया मैंने तुम्हेंablaghtukumمَّآवो जोأُرْسِلْتُमैं भेजा गया हूँur'sil'tuبِهِۦٓसाथ उसकेbihiإِلَيْكُمْ ۚतरफ़ तुम्हारेilaykumوَيَسْتَخْلِفُऔर जानशीन बनाएगाwayastakhlifuرَبِّىरब मेराrabbīقَوْمًاएक क़ौम कोqawmanغَيْرَكُمْतुम्हारे अलावाghayrakumوَلَاऔर नहींwalāتَضُرُّونَهُۥतुम नुक़सान दे सकोगे उसेtaḍurrūnahuشَيْـًٔا ۚकुछ भीshayanإِنَّबेशकinnaرَبِّىरब मेराrabbīعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍचीज़ केshayinحَفِيظٌۭख़ूब निगरान हैḥafīẓun٥٧
फिर यदि तुम मुँह फेरो, तो मैं तुम्हें वह संदेश पहुँचा चुका, जिसे देकर मुझे तुम्हारी ओर भेजा गया था। और मेरा पालनहार तुम्हारे स्थान पर किसी अन्य जाति को ले आएगा1 और तुम उसे कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकोगे। निःसंदेह मेरा पालनहार प्रत्येक चीज़ पर संरक्षक है।
११:५८
وَلَمَّاऔर जबwalammāجَآءَआ गयाjāaأَمْرُنَاफ़ैसला हमाराamrunāنَجَّيْنَاनिजात दी हमनेnajjaynāهُودًۭاहूद कोhūdanوَٱلَّذِينَऔर उनको जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuبِرَحْمَةٍۢसाथ रहमत केbiraḥmatinمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāوَنَجَّيْنَـٰهُمऔर निजात दी हमने उन्हेंwanajjaynāhumمِّنْfromminعَذَابٍअज़ाब सेʿadhābinغَلِيظٍۢसख़्तghalīẓin٥٨
और जब हमारा आदेश आ पहुँचा, तो हमने हूद और उसके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया से बचा लिया। तथा हमने उन्हें एक कठोर यातना से छुटकारा दिया।
११:५९
وَتِلْكَऔर ये थेwatil'kaعَادٌۭ ۖआदʿādunجَحَدُوا۟उन्होंने इन्कार कियाjaḥadūبِـَٔايَـٰتِआयात काbiāyātiرَبِّهِمْअपने रब कीrabbihimوَعَصَوْا۟और उन्होंने नाफ़रमानी कीwaʿaṣawرُسُلَهُۥउसके रसूलों कीrusulahuوَٱتَّبَعُوٓا۟और उन्होंने पैरवी कीwa-ittabaʿūأَمْرَहुक्म कीamraكُلِّहरkulliجَبَّارٍसरकशjabbārinعَنِيدٍۢज़िद्दी कीʿanīdin٥٩
ये वही 'आद' (जाति) के लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार की आयतों (निशानियों) का इनकार किया और उसके रसूलों की बात नहीं मानी और हर ऐसे व्यक्ति के पीछे चलते रहे, जो अभिमानी, उद्दंड हो।
११:६०
وَأُتْبِعُوا۟और उनके पीछे लगा दी गईwa-ut'biʿūفِىinهَـٰذِهِthishādhihiٱلدُّنْيَاइस दुनिया मेंl-dun'yāلَعْنَةًۭलानतlaʿnatanوَيَوْمَऔर दिनwayawmaٱلْقِيَـٰمَةِ ۗक़यामत के (भी)l-qiyāmatiأَلَآख़बरदारalāإِنَّबेशकinnaعَادًۭاआद नेʿādanكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūرَبَّهُمْ ۗअपने रब काrabbahumأَلَاख़बरदारalāبُعْدًۭاदूरी हैbuʿ'danلِّعَادٍۢआद के लिएliʿādinقَوْمِजो क़ौम थीqawmiهُودٍۢहूद कीhūdin٦٠
और इस संसार में उनके साथ धिक्कार लगा दी गई तथा क़ियामत के दिन भी लगी रहेगी। सुनो! आद ने अपने पालनहार का इनकार किया। सुनो! हूद की जाति आद के लिए दूरी1 हो!
११:६१
۞ وَإِلَىٰऔर तरफ़wa-ilāثَمُودَसमूद केthamūdaأَخَاهُمْउनके भाईakhāhumصَـٰلِحًۭا ۚसालेह को (भेजा)ṣāliḥanقَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaمَاनहींلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْanyminإِلَـٰهٍकोई इलाह (बरहक़)ilāhinغَيْرُهُۥ ۖसिवाय इसकेghayruhuهُوَवो ही हैhuwaأَنشَأَكُمजिसने पैदा किया तुम्हेंansha-akumمِّنَfromminaٱلْأَرْضِज़मीन सेl-arḍiوَٱسْتَعْمَرَكُمْऔर जिसने आबाद किया तुम्हेंwa-is'taʿmarakumفِيهَاउसमेंfīhāفَٱسْتَغْفِرُوهُपस बख़्शिश माँगो उससेfa-is'taghfirūhuثُمَّफिरthummaتُوبُوٓا۟तौबा करोtūbūإِلَيْهِ ۚतरफ़ उसकेilayhiإِنَّबेशकinnaرَبِّىमेरा रबrabbīقَرِيبٌۭबहुत क़रीब हैqarībunمُّجِيبٌۭजवाब देने बाला हैmujībun٦١
और समूद1 की ओर उनके भाई सालेह़ को भेजा। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (पूजा) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है। उसी ने तुम्हें धरती से पैदा किया और तुम्हें उसमें बसाया। अतः उससे क्षमा माँगो; फिर उसकी ओर पलट आओ। निःसंदेह मेरा पालनहार निकट है (और प्रार्थनाओं को) स्वीकार करने वाला है।2
११:६२
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰصَـٰلِحُऐ सालेहyāṣāliḥuقَدْतहक़ीक़qadكُنتَथा तूkuntaفِينَاहमारे दर्मियानfīnāمَرْجُوًّۭاजिससे उम्मीद रखी गईmarjuwwanقَبْلَक़ब्लqablaهَـٰذَآ ۖइसकेhādhāأَتَنْهَىٰنَآक्या तू रोकता है हमेंatanhānāأَنकिanنَّعْبُدَहम इबादत करेंnaʿbudaمَاजिसकीيَعْبُدُइबादत करते थेyaʿbuduءَابَآؤُنَاआबा ओ अजदाद हमारेābāunāوَإِنَّنَاऔर बेशक हमwa-innanāلَفِىsurely (are) inlafīشَكٍّۢअलबत्ता शक में हैंshakkinمِّمَّاउससे जोmimmāتَدْعُونَآतुम बुलाते हो हमेंtadʿūnāإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiمُرِيبٍۢजो बेचैन कर देने वाला हैmurībin٦٢
उन्होंने कहा : ऐ सालेह! हमें इससे पहले तुझसे बड़ी आशाएँ थीं। क्या तू हमें उन (बुतों) की पूजा करने से रोक रहा है, जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए हैं? तू जिस चीज़ की ओर हमें बुला रहा है, निःसंदेह उसके बारे में हमें (ऐसा) संदेह है, जो हमें दुविधा में डाले हुए है।
११:६३
قَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiأَرَءَيْتُمْक्या देखा तुमनेara-aytumإِنअगरinكُنتُहूँ मैंkuntuعَلَىٰonʿalāبَيِّنَةٍۢएक वाज़ेह दलील परbayyinatinمِّنfromminرَّبِّىअपने रब की तरफ़ सेrabbīوَءَاتَىٰنِىऔर उसने दी हो मुझेwaātānīمِنْهُअपनी तरफ़ सेmin'huرَحْمَةًۭरहमतraḥmatanفَمَنतो कौनfamanيَنصُرُنِىमदद करेगा मेरीyanṣurunīمِنَagainstminaٱللَّهِअल्लाह से (बचाने में)l-lahiإِنْअगरinعَصَيْتُهُۥ ۖनाफ़रमानी की मैंने उसकीʿaṣaytuhuفَمَاतो नहींfamāتَزِيدُونَنِىतुम ज़्यादा करोगे मुझेtazīdūnanīغَيْرَसिवायghayraتَخْسِيرٍۢख़सारा देने केtakhsīrin٦٣
उस (सालेह़) ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपनी दया प्रदान की हो, फिर मैं उसकी अवज्ञा करूँ, तो कौन है, जो अल्लाह के मुक़ाबले में मेरी सहायता करेगा? तुम मुझे घाटे में डालने के सिवा कुछ नहीं करोगे।
११:६४
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiهَـٰذِهِۦयेhādhihiنَاقَةُऊँटनी हैnāqatuٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiلَكُمْतुम्हारे लिएlakumءَايَةًۭएक निशानीāyatanفَذَرُوهَاपस छोड़ दो उसेfadharūhāتَأْكُلْवो खाती फिरेtakulفِىٓinأَرْضِज़मीन मेंarḍiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiوَلَاऔर नाwalāتَمَسُّوهَاतुम छुओ उसेtamassūhāبِسُوٓءٍۢसाथ बुराई केbisūinفَيَأْخُذَكُمْपस पकड़ लेगा तुम्हेंfayakhudhakumعَذَابٌۭअज़ाबʿadhābunقَرِيبٌۭक़रीबीqarībun٦٤
और ऐ मेरी जाति के लोगो! यह अल्लाह की ऊँटनी1 तुम्हारे लिए एक निशानी है। अतः इसे छोड़ दो, अल्लाह की धरती में चरती फिरे और इसे कोई कष्ट न पहुँचाओ, अन्यथा तुम्हें अति शीघ्र यातना पकड़ लेगी।
११:६५
فَعَقَرُوهَاतो उन्होंने कूँचें काट डालीं उसकीfaʿaqarūhāفَقَالَतो उसने कहाfaqālaتَمَتَّعُوا۟तुम फ़ायदा उठाओtamattaʿūفِىinدَارِكُمْअपने घरों मेंdārikumثَلَـٰثَةَतीनthalāthataأَيَّامٍۢ ۖदिनayyāminذَٰلِكَयेdhālikaوَعْدٌवादा हैwaʿdunغَيْرُनाghayruمَكْذُوبٍۢझूटा होने वालाmakdhūbin٦٥
तो उन्होंने उसे मार डाला। तब सालेह़ ने कहा : तुम अपने नगर में तीन दिन अपने जीवन का आनंद लो! यह वचन झूठा सिद्ध होने वाला नहीं है।
११:६६
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَआ गयाjāaأَمْرُنَاहुक्म हमाराamrunāنَجَّيْنَاनिजात दी हमनेnajjaynāصَـٰلِحًۭاसालेह कोṣāliḥanوَٱلَّذِينَऔर उनको जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuبِرَحْمَةٍۢसाथ रहमत केbiraḥmatinمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāوَمِنْand fromwaminخِزْىِऔर रुस्वाई से (भी)khiz'yiيَوْمِئِذٍ ۗउस दिन कीyawmi-idhinإِنَّबेशकinnaرَبَّكَरब आपकाrabbakaهُوَवो ही हैhuwaٱلْقَوِىُّबहुत क़ुव्वत वालाl-qawiyuٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzu٦٦
फिर जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने सालेह़ को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे, अपनी दया से बचा लिया और उस दिन के अपमान से भी (उन्हें सुरक्षित रखा)। निःसंदेह आपका पालनहार ही शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है।
११:६७
وَأَخَذَऔर पकड़ लियाwa-akhadhaٱلَّذِينَउन्हें जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म किया थाẓalamūٱلصَّيْحَةُचिंघाड़ नेl-ṣayḥatuفَأَصْبَحُوا۟तो सुबह की उन्होंनेfa-aṣbaḥūفِىinدِيَـٰرِهِمْअपने घरों मेंdiyārihimجَـٰثِمِينَऔंधे मुँह गिरने वाले होकरjāthimīna٦٧
और अत्याचारियों को भयंकर आवाज़ (चीत्कार) ने पकड़ लिया और वे अपने घरों में औंधे पड़े रह गए।
११:६८
كَأَنगोया किka-anلَّمْनहींlamيَغْنَوْا۟वो बसे थेyaghnawفِيهَآ ۗउसमेंfīhāأَلَآख़बरदारalāإِنَّबेशकinnaثَمُودَا۟समूद नेthamūdāكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūرَبَّهُمْ ۗअपने रब सेrabbahumأَلَاख़बरदारalāبُعْدًۭاदूरी हैbuʿ'danلِّثَمُودَसमूद के लिएlithamūda٦٨
जैसै वे वहाँ कभी बसे ही नहीं थे। सावधान! समूद ने अपने पालनहार का इनकार किया। सुन लो! समूद के लिए (अल्लाह की दया से) दूरी हो।
११:६९
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَآءَتْआएjāatرُسُلُنَآहमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते)rusulunāإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम के पासib'rāhīmaبِٱلْبُشْرَىٰसाथ ख़ुशख़बरी केbil-bush'rāقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūسَلَـٰمًۭا ۖसलाम होsalāmanقَالَउसने कहाqālaسَلَـٰمٌۭ ۖसलाम होsalāmunفَمَاपस नाfamāلَبِثَवो ठहराlabithaأَنमगरanجَآءَवो ले आयाjāaبِعِجْلٍएक बछड़ाbiʿij'linحَنِيذٍۢभुना हुआḥanīdhin٦٩
और हमारे फ़रिश्ते इबराहीम के पास शुभ सूचना लेकर आए। उन्होंने सलाम कहा, तो इबराहीम ने सलाम का जवाब दिया। फिर देर न हुई कि वह एक भुना हुआ वछड़ा1 ले आया।
११:७०
فَلَمَّاफिर जबfalammāرَءَآउसने देखाraāأَيْدِيَهُمْहाथ उनकेaydiyahumلَاnotتَصِلُनही वो पहुँचतेtaṣiluإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiنَكِرَهُمْउसने अजनबी समझा उन्हेंnakirahumوَأَوْجَسَऔर उसने महसूस कियाwa-awjasaمِنْهُمْउनसेmin'humخِيفَةًۭ ۚख़ौफ़khīfatanقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūلَا(Do) notتَخَفْना तुम डरोtakhafإِنَّآबेशक हमinnāأُرْسِلْنَآभेजे गए हैं हमur'sil'nāإِلَىٰtoilāقَوْمِतरफ़ क़ौमेqawmiلُوطٍۢलूत केlūṭin٧٠
फिर जब देखा कि उनके हाथ खाने की ओर नहीं बढ़ रहे हैं, तो उनके प्रति अचंभे में पड़ गए और दिल में उनसे भय महसूस किया। उन्होंने कहा : भय न करो। दरअसल हम लूत1 की जाति की ओर भेजे गए हैं।
११:७१
وَٱمْرَأَتُهُۥऔर बीवी उसकीwa-im'ra-atuhuقَآئِمَةٌۭखड़ी थीqāimatunفَضَحِكَتْतो वो हँस दीfaḍaḥikatفَبَشَّرْنَـٰهَاपस ख़ुशख़बरी दी हमने उसेfabasharnāhāبِإِسْحَـٰقَइसहाक़ कीbi-is'ḥāqaوَمِنand afterwaminوَرَآءِऔर पीछे/बादwarāiإِسْحَـٰقَइसहाक़ केis'ḥāqaيَعْقُوبَयाक़ूब कीyaʿqūba٧١
और उस (इबराहीम) की पत्नी खड़ी थी। चुनाँचे वह हँस पड़ी1, तो हमने उसे इसह़ाक़ की और इसह़ाक़ के बाद याक़ूब की शुभ सूचना2 दी।
११:७२
قَالَتْवो कहने लगीqālatيَـٰوَيْلَتَىٰٓऐ ख़राबी मेरीyāwaylatāءَأَلِدُक्या मैं जन्म दूँगीa-aliduوَأَنَا۠जबकि मैंwa-anāعَجُوزٌۭबुढ़िया हूँʿajūzunوَهَـٰذَاऔर येwahādhāبَعْلِىशौहर मेराbaʿlīشَيْخًا ۖबूढ़ा हैshaykhanإِنَّबेशकinnaهَـٰذَاये तोhādhāلَشَىْءٌअलबत्ता चीज़ हैlashayonعَجِيبٌۭअजीबʿajībun٧٢
वह बोली : हाय मेरा दुर्भाग्य! क्या मेरी संतान होगी, जबकि मैं बूढ़ी हो चुकी हूँ और मेरा यह पति भी बूढ़ा है? वास्तव में, यह बड़े आश्चर्य की बात है।
११:७३
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūأَتَعْجَبِينَक्या तू ताज्जुब करती हैataʿjabīnaمِنْatminأَمْرِहुक्म सेamriٱللَّهِ ۖअल्लाह केl-lahiرَحْمَتُरहमत होraḥmatuٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiوَبَرَكَـٰتُهُۥऔर बरकतें हों उसकीwabarakātuhuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumأَهْلَpeopleahlaٱلْبَيْتِ ۚऐ अहले बैतl-baytiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuحَمِيدٌۭबहुत तारीफ़ वाला हैḥamīdunمَّجِيدٌۭबड़ी शान वाला हैmajīdun٧٣
फ़रिश्तों ने कहा : क्या तू अल्लाह के आदेश पर आश्चर्य करती है? ऐ घर वालो! तुम सब पर अल्लाह की दया तथा बरकतों की वर्षा हो। निःसंदेह वह अति प्रशंसित, गौरवशाली है।
११:७४
فَلَمَّاतो जबfalammāذَهَبَचला गयाdhahabaعَنْfromʿanإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम सेib'rāhīmaٱلرَّوْعُख़ौफ़l-rawʿuوَجَآءَتْهُऔर आ गई उसके पासwajāathuٱلْبُشْرَىٰख़ुशख़बरीl-bush'rāيُجَـٰدِلُنَاवो झगड़ने लगा हमसेyujādilunāفِىconcerningقَوْمِthe peopleqawmiلُوطٍक़ौमे लूत के बारे मेंlūṭin٧٤
फिर जब इबराहीम का भय दूर हो गया और उसे शुभ सूचना मिल गई, तो वह हमसे लूत की जाति के बारे में झगड़ने लगा।1
११:७५
إِنَّबेशकinnaإِبْرَٰهِيمَइब्राहीमib'rāhīmaلَحَلِيمٌबिलाशुबा निहायत बुर्दबारlaḥalīmunأَوَّٰهٌۭबहुत आह व ज़ारी करने वालाawwāhunمُّنِيبٌۭरुजूअ करने वाला थाmunībun٧٥
निःसंदेह इबराहीम बड़ा सहनशील, बहुत विलाप करने वाला और हर मामले में अल्लाह की ओर पलटने वाला था।
११:७६
يَـٰٓإِبْرَٰهِيمُऐ इब्राहीमyāib'rāhīmuأَعْرِضْऐराज़ करोaʿriḍعَنْfromʿanهَـٰذَآ ۖइस (बात ) सेhādhāإِنَّهُۥबेशक वोinnahuقَدْतहक़ीक़qadجَآءَआ चुकाjāaأَمْرُहुक्मamruرَبِّكَ ۖतेरे रब काrabbikaوَإِنَّهُمْऔर बेशक वोwa-innahumءَاتِيهِمْआने वाला है उन परātīhimعَذَابٌअज़ाबʿadhābunغَيْرُनाghayruمَرْدُودٍۢफेरा जाने वालाmardūdin٧٦
(फ़रिश्तों ने कहा :) ऐ इबराहीम! इस बात को रहने दो। निःसंदेह तुम्हारे पालनहार का आदेश1 आ चुका तथा उनपर ऐसी यातना आने वाली है, जो हटाई जाने वाली नहीं।
११:७७
وَلَمَّاऔर जबwalammāجَآءَتْआएjāatرُسُلُنَاहमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते)rusulunāلُوطًۭاलूत के पासlūṭanسِىٓءَवो ग़मगीन हुआsīaبِهِمْउनके बारे मेंbihimوَضَاقَऔर वो तंग हुआwaḍāqaبِهِمْउनके बारे मेंbihimذَرْعًۭاदिल मेंdharʿanوَقَالَऔर कहाwaqālaهَـٰذَاयेhādhāيَوْمٌदिन हैyawmunعَصِيبٌۭबड़ा सख़्तʿaṣībun٧٧
और जब हमारे फ़रिश्ते लूत के पास आए, तो उनका आना उसे बुरा लगा और उनके कारण व्याकुल1 हो गया और कहा : यह तो बड़ा कठोर दिन है।
११:७८
وَجَآءَهُۥऔर आए उसके पासwajāahuقَوْمُهُۥउसकी क़ौम (के लोग)qawmuhuيُهْرَعُونَतेज़ दौड़ते हुएyuh'raʿūnaإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiوَمِنand beforewaminقَبْلُऔर उससे पहलेqabluكَانُوا۟थे वोkānūيَعْمَلُونَवो अमल करतेyaʿmalūnaٱلسَّيِّـَٔاتِ ۚबुरेl-sayiātiقَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiهَـٰٓؤُلَآءِये हैंhāulāiبَنَاتِىबेटियाँ मेरीbanātīهُنَّयेhunnaأَطْهَرُज़्यादा पाकीज़ा हैंaṭharuلَكُمْ ۖतुम्हारे लिएlakumفَٱتَّقُوا۟पस डरोfa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَلَاऔर नाwalāتُخْزُونِतुम रुस्वा करो मुझेtukh'zūniفِىconcerningضَيْفِىٓ ۖमेरे मेहमानों मेंḍayfīأَلَيْسَक्या नहीं हैalaysaمِنكُمْतुम मेंminkumرَجُلٌۭकोई आदमीrajulunرَّشِيدٌۭसमझदारrashīdun٧٨
और उसकी जाति के लोग दौड़ते हुए उसके पास आ गए और वे पहले से कुकर्म1 किया करते थे। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! ये मेरी2 बेटियाँ हैं, ये तुम्हारे लिए अधिक पवित्र हैं। अतः अल्लाह से डरो और मुझे मेरे अतिथियों में अपमानित न करो। क्या तुममें कोई भला आदमी नहीं?
११:७९
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūلَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadعَلِمْتَजानता है तूʿalim'taمَاनहींلَنَاहमारे लिएlanāفِىconcerningبَنَاتِكَतेरी बेटियों मेंbanātikaمِنْanyminحَقٍّۢकोई हक़ (दिलचस्पी)ḥaqqinوَإِنَّكَऔर बेशक तूwa-innakaلَتَعْلَمُअलबत्ता तू जानता हैlataʿlamuمَاजोنُرِيدُहम चाहते हैंnurīdu٧٩
उन लोगों ने कहा : निश्चय तुम तो जानते हो कि हमें तुम्हारी बेटियों से कोई मतलब नहीं।1 तथा निःसंदेह तुम भली-भाँति जानते हो कि हम क्या चाहते हैं।
११:८०
قَالَउसने कहाqālaلَوْकाशlawأَنَّकि बेशकannaلِىमेरे लिए (होती)بِكُمْतुम परbikumقُوَّةًकोई क़ुव्वतquwwatanأَوْयाawءَاوِىٓमैं पनाह ले सकताāwīإِلَىٰinilāرُكْنٍۢतरफ़ सहारेruk'ninشَدِيدٍۢमज़बूत केshadīdin٨٠
लूत ने कहा : काश, मेरे पास तुमसे मुक़ाबले की शक्ति होती या मैं किसी मज़बूत सहारे की शरण लेता!
११:८१
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰلُوطُऐ लूतyālūṭuإِنَّاबेशक हमinnāرُسُلُभेजे हुए हैंrusuluرَبِّكَतेरे रब केrabbikaلَنहरगिज़ नाlanيَصِلُوٓا۟वो पहुँच सकेंगेyaṣilūإِلَيْكَ ۖतुझ तकilaykaفَأَسْرِपस ले चलfa-asriبِأَهْلِكَअपने घर वालों कोbi-ahlikaبِقِطْعٍۢएक टुकड़े मेंbiqiṭ'ʿinمِّنَofminaٱلَّيْلِरात केal-layliوَلَاऔर नाwalāيَلْتَفِتْपलट कर देखेyaltafitمِنكُمْतुम में सेminkumأَحَدٌकोई एकaḥadunإِلَّاमगरillāٱمْرَأَتَكَ ۖबीवी तुम्हारीim'ra-atakaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuمُصِيبُهَاपहुँचने वाला है उसे (भी)muṣībuhāمَآजोأَصَابَهُمْ ۚपहुँचेगा उन्हेंaṣābahumإِنَّबेशकinnaمَوْعِدَهُمُउनके वादे का वक़्तmawʿidahumuٱلصُّبْحُ ۚसुबह हैl-ṣub'ḥuأَلَيْسَक्या नहीं हैalaysaٱلصُّبْحُसुबहl-ṣub'ḥuبِقَرِيبٍۢक़रीब हीbiqarībin٨١
फ़रिश्तों ने कहा : ऐ लूत! हम तेरे पालनहार के भेजे हुए (फ़रिश्ते) हैं। वे कदापि तेरे पास नहीं पहुँच सकेंगे। अतः तू रात के किसी हिस्से में अपने घरवालों को लेकर निकल जा और तुममें से कोई पीछे मुड़कर न देखे, सिवाय तेरी पत्नी के। उसपर भी वही बीतने वाला है, जो उनपर बीतेगा। उनकी यातना का निर्धारित समय प्रातः काल है। क्या प्रातः काल निकट नहीं है?
११:८२
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَआ गयाjāaأَمْرُنَاहुक्म हमाराamrunāجَعَلْنَاकर दिया हमनेjaʿalnāعَـٰلِيَهَاऊपर वाला उसकाʿāliyahāسَافِلَهَاनिचला उसकाsāfilahāوَأَمْطَرْنَاऔर बरसाए हमनेwa-amṭarnāعَلَيْهَاउस परʿalayhāحِجَارَةًۭपत्थरḥijāratanمِّنofminسِجِّيلٍۢकंकर में सेsijjīlinمَّنضُودٍۢतह -ब-तहmanḍūdin٨٢
फिर जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने उस बस्ती को तहस-नहस कर दिया और उनपर कंकरियों की ताबड़-तोड़ बारिश कर दी।
११:८३
مُّسَوَّمَةًनिशान ज़दाmusawwamatanعِندَपास सेʿindaرَبِّكَ ۖआपके रब केrabbikaوَمَاऔर नहींwamāهِىَवोhiyaمِنَ(is) fromminaٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों सेl-ẓālimīnaبِبَعِيدٍۢकुछ दूरbibaʿīdin٨٣
जो तेरे पालनहार के यहाँ चिह्न लगाई हुई थीं और वह1 अत्याचारियों2 से कुछ दूर नहीं।
११:८४
۞ وَإِلَىٰऔर तरफ़wa-ilāمَدْيَنَमदयन केmadyanaأَخَاهُمْउनके भाईakhāhumشُعَيْبًۭا ۚशुऐब को (भेजा)shuʿaybanقَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaمَاनहींلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْanyminإِلَـٰهٍकोई इलाह (बरहक़)ilāhinغَيْرُهُۥ ۖसिवाय उसकेghayruhuوَلَاऔर नाwalāتَنقُصُوا۟तुम कम करोtanquṣūٱلْمِكْيَالَनापl-mik'yālaوَٱلْمِيزَانَ ۚऔर तौलwal-mīzānaإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَرَىٰكُمमैं देखता हूँ तुम्हेंarākumبِخَيْرٍۢअच्छी हालत मेंbikhayrinوَإِنِّىٓऔर बेशक मैंwa-innīأَخَافُमैं डरता हूँakhāfuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaيَوْمٍۢ(of) a Dayyawminمُّحِيطٍۢघेर लेने वाले दिन केmuḥīṭin٨٤
और मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को भेजा। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (उपासना) करो, उसके सिवा कोई तुम्हारा पूज्य नहीं और नाप-तौल में कमी न करो।1 निःसंदेह मैं तुम्हें अच्छी स्थिति में देख रहा हूँ। और निःसंदेह मैं तुमपर एक घेर लेने वाले दिन की यातना से डरता हूँ।
११:८५
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiأَوْفُوا۟पूरा करोawfūٱلْمِكْيَالَनापl-mik'yālaوَٱلْمِيزَانَऔर तौलwal-mīzānaبِٱلْقِسْطِ ۖसाथ इन्साफ़ केbil-qis'ṭiوَلَاऔर नाwalāتَبْخَسُوا۟तुम कम दोtabkhasūٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaأَشْيَآءَهُمْचीज़ें उनकीashyāahumوَلَاऔर नाwalāتَعْثَوْا۟तुम फ़साद करोtaʿthawفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiمُفْسِدِينَमुफ़सिद बनकरmuf'sidīna٨٥
ऐ मेरी जाति के लोगो! न्याय के साथ नाप और तौल को पूरा रखो और लोगों को उनकी चीज़ें कम न दो तथा धरती में उपद्रव फैलाते न फिरो।
११:८६
بَقِيَّتُबाक़ी मान्दाbaqiyyatuٱللَّهِअल्लाह काl-lahiخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumإِنअगरinكُنتُمहो तुमkuntumمُّؤْمِنِينَ ۚईमान लाने वालेmu'minīnaوَمَآऔर नहींwamāأَنَا۠मैंanāعَلَيْكُمतुम परʿalaykumبِحَفِيظٍۢकोई निगहबानbiḥafīẓin٨٦
अल्लाह की दी हुई बचत, तुम्हारे लिए अच्छी है, यदि तुम ईमान वाले हो और मैं तुमपर कोई संरक्षक नहीं हूँ।
११:८७
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰشُعَيْبُऐ शुऐबyāshuʿaybuأَصَلَوٰتُكَक्या नमाज़ तेरीaṣalatukaتَأْمُرُكَहुक्म देती है तुझेtamurukaأَنकिanنَّتْرُكَहम छोड़ देंnatrukaمَاउन्हें जिनकीيَعْبُدُइबादत करते थेyaʿbuduءَابَآؤُنَآआबा ओ अजदाद हमारेābāunāأَوْयाawأَنये किanنَّفْعَلَ(ना) हम करेंnafʿalaفِىٓconcerningأَمْوَٰلِنَاअपने मालों मेंamwālināمَاजोنَشَـٰٓؤُا۟ ۖहम चाहेंnashāuإِنَّكَबेशक तूinnakaلَأَنتَअलबत्ता तू ही हैla-antaٱلْحَلِيمُनिहायत बुर्दबारl-ḥalīmuٱلرَّشِيدُसमझदारl-rashīdu٨٧
उन्होंने कहा : ऐ शुऐब! क्या तेरी नमाज़ (इबादत) तुझे आदेश दे रही है कि हम उसे त्याग दें, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए हैं? अथवा अपने धन में वह न करें जो करना चाहें? वास्तव में, तू बड़ा ही सहनशील तथा भला व्यक्ति है!
११:८८
قَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiأَرَءَيْتُمْक्या देखा तुमनेara-aytumإِنअगरinكُنتُहूँ मैंkuntuعَلَىٰonʿalāبَيِّنَةٍۢएक वाज़ेह दलील परbayyinatinمِّنfromminرَّبِّىअपने रब की तरफ़ सेrabbīوَرَزَقَنِىऔर उसने दिया हो मुझेwarazaqanīمِنْهُअपने पास सेmin'huرِزْقًاरिज़्क़riz'qanحَسَنًۭا ۚअच्छाḥasananوَمَآऔर नहींwamāأُرِيدُमैं चाहताurīduأَنْकिanأُخَالِفَكُمْमैं मुख़ालफ़त करुँ तुम्हारीukhālifakumإِلَىٰतरफ़ilāمَآउसके जोأَنْهَىٰكُمْमैं रोकता हूँ तुम्हेंanhākumعَنْهُ ۚजिस सेʿanhuإِنْनहींinأُرِيدُमैं चाहताurīduإِلَّاमगरillāٱلْإِصْلَـٰحَइस्लाहl-iṣ'lāḥaمَاजितनीٱسْتَطَعْتُ ۚमैं इस्तिताअत रखता हूँis'taṭaʿtuوَمَاऔर नहींwamāتَوْفِيقِىٓतौफ़ीक़ मेरीtawfīqīإِلَّاमगरillāبِٱللَّهِ ۚसाथ अल्लाह केbil-lahiعَلَيْهِउसी परʿalayhiتَوَكَّلْتُतवक्कल किया मैंनेtawakkaltuوَإِلَيْهِऔर उसी की तरफ़wa-ilayhiأُنِيبُमैं रुजूअ करता हूँunību٨٨
शुऐब ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम बताओ, यदि मैं अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अच्छी जीविका प्रदान की हो, (तो कैसे तुम्हारा साथ दूँ?) मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा विरोध करते हुए वह कार्य करूँ, जिससे तुम्हें रोक रहा हूँ। मैं जहाँ तक हो सके, सुधार ही चाहता हूँ और यह जो कुछ करना चाहता हूँ, मुझे इसका सामर्थ्य अल्लाह ही से मिलेगा। मैंने उसी पर भरोसा किया है और उसी की ओर लौटता हूँ।
११:८९
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiلَا(Let) not cause you to sinيَجْرِمَنَّكُمْहरगिज़ ना आमादा करे तुम्हेंyajrimannakumشِقَاقِىٓमुख़ालफ़त /ज़िद मेरीshiqāqīأَنकिanيُصِيبَكُمपहुँचे तुम्हें (भी)yuṣībakumمِّثْلُमानिन्द उसकेmith'luمَآजोأَصَابَपहुँचाaṣābaقَوْمَक़ौमेqawmaنُوحٍनूह कोnūḥinأَوْयाawقَوْمَक़ौमेqawmaهُودٍहूद कोhūdinأَوْयाawقَوْمَक़ौमेqawmaصَـٰلِحٍۢ ۚसालेह कोṣāliḥinوَمَاऔर नहींwamāقَوْمُक़ौमेqawmuلُوطٍۢलूतlūṭinمِّنكُمतुम सेminkumبِبَعِيدٍۢकुछ दूरbibaʿīdin٨٩
ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम्हें मेरा विरोध इस बात पर न उभारे कि तुमपर वैसी ही यातना आ पड़े, जो नूह़ की जाति, या हूद की जाति, या सालेह़ की जाति पर आई। और लूत की जाति तुमसे कुछ दूर नहीं है।
११:९०
وَٱسْتَغْفِرُوا۟और बख़्शिश माँगोwa-is'taghfirūرَبَّكُمْअपने रब सेrabbakumثُمَّफिरthummaتُوبُوٓا۟तौबा करोtūbūإِلَيْهِ ۚतरफ़ उसकेilayhiإِنَّबेशकinnaرَبِّىमेरा रबrabbīرَحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmunوَدُودٌۭबहुत मोहब्बत करने वाला हैwadūdun٩٠
और अपने पालनहार से क्षमा माँगो, फिर उसी की ओर पलट आओ। निःसंदेह मेरा पालनहार अति दयालु तथा प्रेम करने वाला है।
११:९१
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰشُعَيْبُऐ शुऐबyāshuʿaybuمَاनहींنَفْقَهُहम समझ पातेnafqahuكَثِيرًۭاबहुत साkathīranمِّمَّاउसमें से जोmimmāتَقُولُतुम कहते कोtaqūluوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَنَرَىٰكَअलबत्ता हम देखते हैं तुझेlanarākaفِينَاअपने मेंfīnāضَعِيفًۭا ۖबहुत कमज़ोरḍaʿīfanوَلَوْلَاऔर अगर ना होताwalawlāرَهْطُكَक़बीला तेराrahṭukaلَرَجَمْنَـٰكَ ۖअलबत्ता संगसार कर देते हम तुझेlarajamnākaوَمَآऔर नहींwamāأَنتَतूantaعَلَيْنَاहम परʿalaynāبِعَزِيزٍۢकुछ ग़ालिबbiʿazīzin٩١
उन्होंने कहा : ऐ शुऐब! तुम्हारी बहुत-सी बातें हम नहीं समझते और हम तुम्हें अपने बीच निर्बल देख रहे हैं। और यदि तुम्हारा क़बीला (हमारे धर्म पर) न होता, तो हम तुम्हें पथराव करके मार डालते और तुम हमारी नज़र में प्रतिष्ठित भी नहीं हो।
११:९२
قَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiأَرَهْطِىٓक्या क़बीला मेराarahṭīأَعَزُّज़्यादा ज़ोर वाला हैaʿazzuعَلَيْكُمतुम परʿalaykumمِّنَthanminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiوَٱتَّخَذْتُمُوهُऔर बना लिया तुमने उसेwa-ittakhadhtumūhuوَرَآءَكُمْपीछे अपनीwarāakumظِهْرِيًّا ۖपुश्त केẓih'riyyanإِنَّबेशकinnaرَبِّىमेरा रबrabbīبِمَاउसे जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaمُحِيطٌۭघेरे हुए हैmuḥīṭun٩٢
उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या मेरा क़बीला तुम्हारे निकट अल्लाह से अधिक प्रभावशाली है?! और तुमने उस (अल्लाह) को पीठ पीछे डाल दिया है।1 निःसंदेह मेरा पालनहार उसे घेरे में लिए हुए है, जो कुछ तुम कर रहे हो।
११:९३
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiٱعْمَلُوا۟अमल करोiʿ'malūعَلَىٰ(according) toʿalāمَكَانَتِكُمْअपनी जगह परmakānatikumإِنِّىबेशक मैंinnīعَـٰمِلٌۭ ۖअमल करने वाला हूँʿāmilunسَوْفَअनक़रीबsawfaتَعْلَمُونَतुम जान लोगेtaʿlamūnaمَنकौन है किmanيَأْتِيهِआता है उस परyatīhiعَذَابٌۭअज़ाबʿadhābunيُخْزِيهِजो रुस्वा कर देगा उसेyukh'zīhiوَمَنْऔर कौन हैwamanهُوَवो जोhuwaكَـٰذِبٌۭ ۖझूठा हैkādhibunوَٱرْتَقِبُوٓا۟और इन्तिज़ार करोwa-ir'taqibūإِنِّىबेशक मैंinnīمَعَكُمْसाथ तुम्हारेmaʿakumرَقِيبٌۭइन्तिज़ार करने वाला हूँraqībun٩٣
और ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने तरीक़े पर काम करो, मैं (भी अपने तरीक़े पर) काम कर रहा हूँ। तुम्हें बहुत जल्द पता चल जाएगा कि किसपर अपमानित कर देने वाली यातना आती है और कौन झूठा है? तथा तुम प्रतीक्षा करो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वाला हूँ।
११:९४
وَلَمَّاऔर जबwalammāجَآءَआ गयाjāaأَمْرُنَاफ़ैसला हमाराamrunāنَجَّيْنَاनिजात दी हमनेnajjaynāشُعَيْبًۭاशुऐब कोshuʿaybanوَٱلَّذِينَऔर उनको जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuبِرَحْمَةٍۢसाथ रहमत केbiraḥmatinمِّنَّاअपनी तरफ़ सेminnāوَأَخَذَتِऔर पकड़ लियाwa-akhadhatiٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म किया थाẓalamūٱلصَّيْحَةُचिंघाड़ नेl-ṣayḥatuفَأَصْبَحُوا۟तो उन्होने सुबह कीfa-aṣbaḥūفِىinدِيَـٰرِهِمْअपने घरों मेंdiyārihimجَـٰثِمِينَऔंधे मुँह पड़े हुएjāthimīna٩٤
और जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने शुऐब को और उसके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया से बचा लिया और अत्याचारियों को भयंकर आवाज़ (चीत्कार) ने पकड़ लिया। फिर वे अपने घरों में औंधे मुँह पड़े रह गए।
११:९५
كَأَنगोया किka-anلَّمْनाlamيَغْنَوْا۟वो बसे थेyaghnawفِيهَآ ۗउनमेंfīhāأَلَاख़बरदारalāبُعْدًۭاदूरी हैbuʿ'danلِّمَدْيَنَमदयन के लिएlimadyanaكَمَاजैसा किkamāبَعِدَتْदूर हुएbaʿidatثَمُودُसमूदthamūdu٩٥
जैसै वे वहाँ कभी बसे ही नहीं थे। सुन लो! मदयन वाले भी वैसे ही (अल्लाह की दया से) दूर कर दिए गए, जैसे समूद जाति के लोग दूर कर दिए गए।
११:९६
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāمُوسَىٰमूसा कोmūsāبِـَٔايَـٰتِنَاसाथ अपनी आयात केbiāyātināوَسُلْطَـٰنٍۢऔर दलीलwasul'ṭāninمُّبِينٍवाज़ेह केmubīnin٩٦
और हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कार) तथा स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा।
११:९७
إِلَىٰToilāفِرْعَوْنَतरफ़ फ़िरऔनfir'ʿawnaوَمَلَإِي۟هِۦऔर उसके सरदारों केwamala-ihiفَٱتَّبَعُوٓا۟तो उन्होने पैरवी कीfa-ittabaʿūأَمْرَहुक्म कीamraفِرْعَوْنَ ۖफ़िरऔन केfir'ʿawnaوَمَآऔर ना (था)wamāأَمْرُहुक्मamruفِرْعَوْنَफ़िरऔन काfir'ʿawnaبِرَشِيدٍۢभलाई वालाbirashīdin٩٧
फ़िरऔन और उसके प्रमुखों की ओर। तो उन्होंने फ़िरऔन के आदेश का पालन किया। जबकि फ़िरऔन का आदेश सटीक नहीं था।
११:९८
يَقْدُمُवो आगे होगाyaqdumuقَوْمَهُۥअपनी क़ौम केqawmahuيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiفَأَوْرَدَهُمُफिर वो ले आएगा उन्हेंfa-awradahumuٱلنَّارَ ۖआग परl-nāraوَبِئْسَऔर कितनी बुरी हैwabi'saٱلْوِرْدُघाटl-wir'duٱلْمَوْرُودُजो वारिद होने की जगह हैl-mawrūdu٩٨
वह क़ियामत के दिन अपनी जाति के आगे-आगे चलेगा और उनको नरक में उतारेगा और वह क्या ही बुरा उतरने का स्थान है!
११:९९
وَأُتْبِعُوا۟और वो पीछे लगाए गएwa-ut'biʿūفِىinهَـٰذِهِۦइस (दुनिया) मेंhādhihiلَعْنَةًۭलानतlaʿnatanوَيَوْمَऔर दिनwayawmaٱلْقِيَـٰمَةِ ۚक़यामत के (भी)l-qiyāmatiبِئْسَकितना बुरा हैbi'saٱلرِّفْدُइनआमl-rif'duٱلْمَرْفُودُजो दिया गयाl-marfūdu٩٩
और इस दुनिया में उनके पीछे लानत (धिक्कार) लगा दी गई और क़ियामत के दिन भी। कैसा बुरा पुरस्कार है, जो उन्हें दिया जाएगा!
११:१००
ذَٰلِكَयेdhālikaمِنْ(is) fromminأَنۢبَآءِकुछ ख़बरें हैंanbāiٱلْقُرَىٰबस्तियों कीl-qurāنَقُصُّهُۥहम बयान करते हैं उन्हेंnaquṣṣuhuعَلَيْكَ ۖआप परʿalaykaمِنْهَاउनमें सेmin'hāقَآئِمٌۭकुछ क़ायम हैंqāimunوَحَصِيدٌۭऔर कुछ जड़ से कट चुकी हैंwaḥaṣīdun١٠٠
(ऐ नबी!) ये बस्तियों के समाचार हैं, जिनका वर्णन हम आपके सामने कर रहे हैं। उनमें से कुछ खड़ी हैं और कुछ उजड़ चुकी हैं।
११:१०१
وَمَاऔर नहींwamāظَلَمْنَـٰهُمْज़ुल्म किया हमने उन परẓalamnāhumوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinظَلَمُوٓا۟उन्होंने ज़ुल्म कियाẓalamūأَنفُسَهُمْ ۖअपने नफ़्सों परanfusahumفَمَآतो नाfamāأَغْنَتْकाम आएaghnatعَنْهُمْउन्हेंʿanhumءَالِهَتُهُمُइलाह उनकेālihatuhumuٱلَّتِىजिन्हेंallatīيَدْعُونَवो पुकारते थेyadʿūnaمِنother than Allahminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمِنanyminشَىْءٍۢकुछ भीshayinلَّمَّاजबlammāجَآءَआ गयाjāaأَمْرُहुक्मamruرَبِّكَ ۖआपके रब काrabbikaوَمَاऔर नहींwamāزَادُوهُمْउन्होंने ज़्यादा किया उन्हेंzādūhumغَيْرَसिवायghayraتَتْبِيبٍۢहलाकत केtatbībin١٠١
और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परंतु उन्होंने स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया। जब आपके पालनहार का आदेश आ गया, तो उनके वे पूज्य, जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारा करते थे, उनके कुछ भी काम न आए और उन्होंने केवल उन्हें हानि ही पहुँचाया।1
११:१०२
وَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaأَخْذُपकड़ हैakhdhuرَبِّكَआपके रब कीrabbikaإِذَآजबidhāأَخَذَवो पकड़ता हैakhadhaٱلْقُرَىٰबस्तियों कोl-qurāوَهِىَजबकि वोwahiyaظَـٰلِمَةٌ ۚज़ालिम होती हैंẓālimatunإِنَّबेशकinnaأَخْذَهُۥٓपकड़ना उसकाakhdhahuأَلِيمٌۭदर्दनाक हैalīmunشَدِيدٌशदीद हैshadīdun١٠٢
और तेरे पालनहार की पकड़ ऐसी ही होती है, जब वह अत्याचार करने वाली बस्तियों को पकड़ता है। निःसंदेह उसकी पकड़ बहुत दर्दनाक, बहुत कठोर होती है।1
११:१०३
إِنَّबेशकinnaفِىinذَٰلِكَउसमेंdhālikaلَـَٔايَةًۭअलबत्ता एक निशानी हैlaāyatanلِّمَنْउसके लिए जोlimanخَافَडरेkhāfaعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaٱلْـَٔاخِرَةِ ۚआख़िरत केl-ākhiratiذَٰلِكَये हैdhālikaيَوْمٌۭदिनyawmunمَّجْمُوعٌۭजमा किए जाऐंगेmajmūʿunلَّهُउसके लिएlahuٱلنَّاسُलोगl-nāsuوَذَٰلِكَऔर ये हैwadhālikaيَوْمٌۭदिनyawmunمَّشْهُودٌۭहाज़िरी काmashhūdun١٠٣
निश्चय ही इसमें उसके लिए एक निशानी है, जो आख़िरत की यातना से डरे। वह ऐसा दिन होगा, जिसके लिए सभी लोग एकत्रित किए जाएँगे तथा उस दिन सभी लोग उपस्थित होंगे।
११:१०४
وَمَاऔर नहींwamāنُؤَخِّرُهُۥٓहम मुअख़्ख़र कर रहे उसेnu-akhiruhuإِلَّاमगरillāلِأَجَلٍۢएक मुद्दत के लिएli-ajalinمَّعْدُودٍۢगिनी चुनीmaʿdūdin١٠٤
और हम उसे केवल एक निर्धारित अवधि के लिए पीछे कर रहे हैं।
११:१०५
يَوْمَजिस दिनyawmaيَأْتِवो आ जाएगीyatiلَاnotتَكَلَّمُना कलाम करेगाtakallamuنَفْسٌकोई नफ़्सnafsunإِلَّاमगरillāبِإِذْنِهِۦ ۚउसके इज़्न केbi-idh'nihiفَمِنْهُمْतो उनमें से कोईfamin'humشَقِىٌّۭबदबख़्त होगाshaqiyyunوَسَعِيدٌۭऔर कोई नेकबख़्त होगाwasaʿīdun١٠٥
जिस दिन वह आ जाएगा, तो अल्लाह की अनुमति के बिना कोई प्राणी बात नहीं कर सकेगा, फिर उनमें से कुछ अभागे होंगे और कुछ भाग्यशाली होंगे।
११:१०६
فَأَمَّاतो रहेfa-ammāٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaشَقُوا۟बदबख़्त हुएshaqūفَفِىthen (they will be) infafīٱلنَّارِतो आग में होंगेl-nāriلَهُمْउनके लिएlahumفِيهَاउसमेंfīhāزَفِيرٌۭचीख़ो पुकार होगीzafīrunوَشَهِيقٌऔर दहाड़ना होगाwashahīqun١٠٦
चुनाँचे जो लोग अभागे होंगे, वे नरक में होंगे, उसमें उन्हें चीखना और चिल्लाना होगा।
११:१०७
خَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَاउसमेंfīhāمَاas long as remainدَامَتِजब तक क़ायम हैंdāmatiٱلسَّمَـٰوَٰتُआसमानl-samāwātuوَٱلْأَرْضُऔर ज़मीनwal-arḍuإِلَّاमगरillāمَاजोشَآءَचाहेshāaرَبُّكَ ۚरब आपकाrabbukaإِنَّबेशकinnaرَبَّكَरब आपकाrabbakaفَعَّالٌۭकर गुज़रने वाला हैfaʿʿālunلِّمَاउसे जोlimāيُرِيدُवो चाहता हैyurīdu١٠٧
वे उसमें हमेशा रहेंगे, जब तक आकाश तथा धरती अवस्थित हैं। परन्तु यह कि आपका पालनहार कुछ और चाहे। निःसंदेह आपका पालनहार जो चाहे, करने वाला है।
११:१०८
۞ وَأَمَّاऔर रहेwa-ammāٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaسُعِدُوا۟नेकबख़्त हुएsuʿidūفَفِىthen (they will be) infafīٱلْجَنَّةِतो जन्नत में होंगेl-janatiخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَاउसमेंfīhāمَاas long as remainsدَامَتِजब तक क़ायम हैंdāmatiٱلسَّمَـٰوَٰتُआसमानl-samāwātuوَٱلْأَرْضُऔर ज़मीनwal-arḍuإِلَّاमगरillāمَاजोشَآءَचाहेshāaرَبُّكَ ۖरब आपकाrabbukaعَطَآءًबख़्शिश हैʿaṭāanغَيْرَनाghayraمَجْذُوذٍۢख़त्म होने वालीmajdhūdhin١٠٨
लेकिन जो भाग्यशाली हैं, तो (वे) स्वर्ग में होंगे, वे उसमें सदैव रहेंगे जब तक आकाश तथा धरती विद्यमान् हैं। परन्तु यह कि आपका पालनहार कुछ और चाहे। यह एक अनंत प्रदान है।
११:१०९
فَلَاपस नाfalāتَكُहों आपtakuفِىinمِرْيَةٍۢशक मेंmir'yatinمِّمَّاउस से जिसकीmimmāيَعْبُدُइबादत करते हैंyaʿbuduهَـٰٓؤُلَآءِ ۚये लोगhāulāiمَاनहींيَعْبُدُونَवो इबादत करतेyaʿbudūnaإِلَّاमगरillāكَمَاजैसा किkamāيَعْبُدُइबादत करते थेyaʿbuduءَابَآؤُهُمआबा ओ अजदाद उनकेābāuhumمِّنbeforeminقَبْلُ ۚइससे पहलेqabluوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَمُوَفُّوهُمْअलबत्ता पूरा-पूरा देने वाले हैं उन्हेंlamuwaffūhumنَصِيبَهُمْहिस्सा उनकाnaṣībahumغَيْرَबग़ैरghayraمَنقُوصٍۢकमी किएmanqūṣin١٠٩
अतः (ऐ नबी!) आप उसके बारे में किसी संदेह में न रहें, जिसे ये पूजते हैं। ये उसी प्रकार पूजते हैं, जैसे इनसे पहले इनके बाप-दादा पूजते1 थे। निःसंदेह हम इन्हें इनका हिस्सा बिना किसी कमी के पूरा-पूरा देने वाले हैं।
११:११०
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadءَاتَيْنَاदी हमनेātaynāمُوسَىमूसा कोmūsāٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaفَٱخْتُلِفَपस इख़्तिलाफ़ किया गयाfa-ukh'tulifaفِيهِ ۚउसमेंfīhiوَلَوْلَاऔर अगर ना होतीwalawlāكَلِمَةٌۭएक बातkalimatunسَبَقَتْजो गुज़र चुकीsabaqatمِنfromminرَّبِّكَआपके रब की तरफ़ सेrabbikaلَقُضِىَअलबत्ता फ़ैसला कर दिया जाताlaquḍiyaبَيْنَهُمْ ۚदर्मियान उनकेbaynahumوَإِنَّهُمْऔर बेशक वोwa-innahumلَفِىsurely (are) inlafīشَكٍّۢअलबत्ता शक में हैंshakkinمِّنْهُउसकी तरफ़ सेmin'huمُرِيبٍۢबेचैन करने वालेmurībin١١٠
और हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की। तो उसमें विभेद किया गया। और यदि आपके पालनहार ने पहले से एक बात1 निश्चित न की होती, तो उनके बीच निर्णय कर दिया गया होता। और निःसंदेह वे2 उस (क़ुरआन) के बारे में असमंजस में डाल देनेवाले संदेह में पड़े हुए हैं।
११:१११
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaكُلًّۭاहर एक कोkullanلَّمَّاजब (वक़्त आएगा)lammāلَيُوَفِّيَنَّهُمْअलबत्ता ज़रूर पूरा-पूरा देगा उन्हेंlayuwaffiyannahumرَبُّكَरब आपकाrabbukaأَعْمَـٰلَهُمْ ۚउनके आमाल (का बदला)aʿmālahumإِنَّهُۥबेशक वोinnahuبِمَاउससे जोbimāيَعْمَلُونَवो अमल करते हैंyaʿmalūnaخَبِيرٌۭख़ूब बाख़बर हैkhabīrun١١١
और निःसंदेह आपका पालनहार अवश्य प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा। निश्चित रूप से वह उनके कर्मों से सूचित है।
११:११२
فَٱسْتَقِمْपस क़ायम रहिएfa-is'taqimكَمَآजैसा किkamāأُمِرْتَहुक्म दिए गए आपumir'taوَمَنऔर वो (भी) जोwamanتَابَतौबा करेtābaمَعَكَआपके साथmaʿakaوَلَاऔर नाwalāتَطْغَوْا۟ ۚतुम सरकशी करोtaṭghawإِنَّهُۥबेशक वोinnahuبِمَاउसे जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaبَصِيرٌۭख़ूब देखने वाला हैbaṣīrun١١٢
अतः (ऐ नबी!) आप सुदृढ़ रहें जैसा आपको आदेश दिया गया है और वे लोग भी जिन्होंने आपके साथ तौबा की। तथा तुम सीमा का उल्लंघन1 न करो, निःसंदेह वह (अल्लाह) जो कुछ तुम कर रहे हो, उसे ख़ूब देखने वाला है।
११:११३
وَلَاऔर नाwalāتَرْكَنُوٓا۟तुम झुको/माइल होtarkanūإِلَىtoilāٱلَّذِينَतरफ़ उनके जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūفَتَمَسَّكُمُवरना छू लेगी तुम्हेंfatamassakumuٱلنَّارُआगl-nāruوَمَاऔर नहीं (होगा)wamāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنbesides Allahminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمِنْanyminأَوْلِيَآءَकोई दोस्तawliyāaثُمَّफिरthummaلَاnotتُنصَرُونَना तुम मदद दिए जाओगेtunṣarūna١١٣
और अत्याचारियों की ओर न झुक पड़ो। अन्यथा तुम्हें भी आग पकड़ लेगी और अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई सहायक नहीं होगा (जो तुम्हें बचा सके)। फिर तुम्हारी सहायता नहीं की जाएगी।
११:११४
وَأَقِمِऔर क़ायम कीजिएwa-aqimiٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataطَرَفَىِदोनों किनारों परṭarafayiٱلنَّهَارِदिन केl-nahāriوَزُلَفًۭاऔर कुछ हिस्साwazulafanمِّنَofminaٱلَّيْلِ ۚरात में सेal-layliإِنَّबेशकinnaٱلْحَسَنَـٰتِनेकियाँl-ḥasanātiيُذْهِبْنَले जाती हैंyudh'hib'naٱلسَّيِّـَٔاتِ ۚबुराइयों कोl-sayiātiذَٰلِكَयेdhālikaذِكْرَىٰयाद दिहानी हैdhik'rāلِلذَّٰكِرِينَयाद रखने वालों के लिएlildhākirīna١١٤
तथा आप दिन के दोनों सिरों में और रात के कुछ क्षणों1 में नमाज़ क़ायम करें। निःसंदेह नेकियाँ बुराइयों को दूर कर देती2 हैं। यह एक शिक्षा है, शिक्षा ग्रहण करने वालों के लिए।
११:११५
وَٱصْبِرْऔर सब्र कीजिएwa-iṣ'birفَإِنَّपस बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَا(does) notيُضِيعُनहीं वो ज़ाया करताyuḍīʿuأَجْرَअजरajraٱلْمُحْسِنِينَएहसान करने वालों काl-muḥ'sinīna١١٥
तथा आप धैर्य से काम लें, क्योंकि अल्लाह सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करता।
११:११६
فَلَوْلَاफिर क्यों नाfalawlāكَانَहुएkānaمِنَofminaٱلْقُرُونِउन उम्मतों में सेl-qurūniمِنbefore youminقَبْلِكُمْजो तुमसे पहले थींqablikumأُو۟لُوا۟those possessing a remnantulūبَقِيَّةٍۢअन्जाम पर नज़र रखने वालेbaqiyyatinيَنْهَوْنَजो रोकतेyanhawnaعَنِfromʿaniٱلْفَسَادِफ़साद सेl-fasādiفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiإِلَّاमगरillāقَلِيلًۭاबहुत थोड़ेqalīlanمِّمَّنْउनमें सेmimmanأَنجَيْنَاनिजात दी हमनेanjaynāمِنْهُمْ ۗउनमें सेmin'humوَٱتَّبَعَऔर पीछे लगेwa-ittabaʿaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūمَآउसके जोأُتْرِفُوا۟वो ऐश व आराम दिए गए थेut'rifūفِيهِजिस मेंfīhiوَكَانُوا۟और थे वोwakānūمُجْرِمِينَमुजरिमmuj'rimīna١١٦
फिर तुमसे पहले गुज़रे हुए समुदायों में ऐसे बचे खुचे भले-समझदार लोग क्यों न हुए, जो धरती में बिगाड़ से रोकते? सिवाय उन थोड़े-से लोगों के, जिन्हें हमने उनमें से बचा लिया। और अत्याचारी लोग तो उसी सुख-सामग्री के पीछे पड़े रहे, जिसमें वे रखे गए थे और वे तो थे ही अपराधी।
११:११७
وَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaرَبُّكَरब आपकाrabbukaلِيُهْلِكَकि वो हलाक कर देliyuh'likaٱلْقُرَىٰबस्तियों कोl-qurāبِظُلْمٍۢज़ुल्म सेbiẓul'minوَأَهْلُهَاजबकि बाशिन्दे उसकेwa-ahluhāمُصْلِحُونَइस्लाह करने वाले होंmuṣ'liḥūna١١٧
और आपका पालनहार ऐसा नहीं है कि वह बस्तियों को अन्यायपूर्वक विनष्ट कर दे, जबकि उनके निवासी सुधार करने वाले हों।
११:११८
وَلَوْऔर अगरwalawشَآءَचाहताshāaرَبُّكَरब आपकाrabbukaلَجَعَلَअलबत्ता वो बना देताlajaʿalaٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaأُمَّةًۭउम्मतummatanوَٰحِدَةًۭ ۖएक हीwāḥidatanوَلَاbut notwalāيَزَالُونَजबकि वो हमेशा रहेंगेyazālūnaمُخْتَلِفِينَइख़्तिलाफ़ करने वालेmukh'talifīna١١٨
और यदि आपका पालनहार चाहता, तो सब लोगों को एक ही समुदाय बना देता और वे सदैव विभेद करते ही रहेंगे।
११:११९
إِلَّاमगरillāمَنजिस परmanرَّحِمَरहम करेraḥimaرَبُّكَ ۚरब आपकाrabbukaوَلِذَٰلِكَऔर इसी लिएwalidhālikaخَلَقَهُمْ ۗउसने पैदा किया उन्हेंkhalaqahumوَتَمَّتْऔर पूरी हो गईwatammatكَلِمَةُबातkalimatuرَبِّكَआपके रब कीrabbikaلَأَمْلَأَنَّअलबत्ता मैं ज़रूर भर दूँगाla-amla-annaجَهَنَّمَजहन्नम कोjahannamaمِنَwithminaٱلْجِنَّةِजिन्नों सेl-jinatiوَٱلنَّاسِऔर इन्सानों सेwal-nāsiأَجْمَعِينَसबके सबajmaʿīna١١٩
सिवाय उसके, जिसपर आपका पालनहार दया करे और इसी के लिए उसने उन्हें पैदा किया।1 और आपके पालनहार की बात पूरी हो गई कि मैं नरक को सब जिन्नों तथा इनसानों से अवश्य भर दूँगा।2
११:१२०
وَكُلًّۭاऔर सब कुछwakullanنَّقُصُّहम बयान करते हैंnaquṣṣuعَلَيْكَआप परʿalaykaمِنْofminأَنۢبَآءِबाज़ ख़बरेंanbāiٱلرُّسُلِरसूलों कीl-rusuliمَاवो जोنُثَبِّتُहम मज़बूत करते हैंnuthabbituبِهِۦसाथ उसकेbihiفُؤَادَكَ ۚआपके दिल कोfuādakaوَجَآءَكَऔर आ गया आपके पासwajāakaفِىinهَـٰذِهِउसमेंhādhihiٱلْحَقُّहक़l-ḥaquوَمَوْعِظَةٌۭऔर नसीहतwamawʿiẓatunوَذِكْرَىٰऔर याद दिहानीwadhik'rāلِلْمُؤْمِنِينَईमान लाने वालों के लिएlil'mu'minīna١٢٠
और हम रसूलों की खबरों में से आपको हर वह खबर सुनाते हैं, जिसके द्वारा हम आपके दिल को सुदृढ़ रखते हैं। और इसमें आपके पास सत्य आ गया है और ईमान वालों के लिए उपदेश और अनुस्मरण भी।
११:१२१
وَقُلऔर कह दीजिएwaqulلِّلَّذِينَउन लेगों को जोlilladhīnaلَا(do) notيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūnaٱعْمَلُوا۟अमल करोiʿ'malūعَلَىٰ(according) toʿalāمَكَانَتِكُمْअपनी जगह परmakānatikumإِنَّاबेशक हम (भी)innāعَـٰمِلُونَअमल करने वाले हैंʿāmilūna١٢١
और (ऐ नबी!) आप उनसे कह दें, जो ईमान नहीं लाते कि तुम अपने रास्ते पर काम करते रहो। निःसंदेह हम (भी) काम करने वाले हैं।
११:१२२
وَٱنتَظِرُوٓا۟और इन्तिज़ार करोwa-intaẓirūإِنَّاबेशक हम (भी)innāمُنتَظِرُونَइन्तिज़ार करने वाले हैंmuntaẓirūna١٢٢
तथा तुम प्रतीक्षा1 करो, निःसंदेह हम भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।
११:१२३
وَلِلَّهِऔर अल्लाह ही के लिए हैwalillahiغَيْبُग़ैबghaybuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों काl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन काwal-arḍiوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसी केwa-ilayhiيُرْجَعُलौटाया जाता हैyur'jaʿuٱلْأَمْرُमामलाl-amruكُلُّهُۥसारे का साराkulluhuفَٱعْبُدْهُपस इबादत कीजिए उसकीfa-uʿ'bud'huوَتَوَكَّلْऔर तवक्कल कीजिएwatawakkalعَلَيْهِ ۚउस परʿalayhiوَمَاऔर नहींwamāرَبُّكَरब आपकाrabbukaبِغَـٰفِلٍग़ाफ़िलbighāfilinعَمَّاउससे जोʿammāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūna١٢٣
अल्लाह ही के पास आकाशों तथा धरती की छिपी हुई चीज़ों का ज्ञान है और सभी मामले उसी की ओर लौटाए जाते हैं। अतः आप उसी की इबादत (उपासना) करें और उसी पर भरोसा करें। और आपका पालनहार उससे अनभिज्ञ नहीं है, जो तुम कर रहे हो।