१०३

अल-अस्र

मक्की ३ आयतें पारा १
العصر
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१०३:१
وَٱلْعَصْرِ क़सम है ज़माने की wal-ʿaṣri
क़सम है ज़माने की
١ (1)
(1)
अस्र के समय की क़सम!
१०३:२
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلْإِنسَـٰنَ इन्सान l-insāna
इन्सान
لَفِى (is) surely, in lafī
(is) surely, in
خُسْرٍ यक़ीनन ख़सारे में है khus'rin
यक़ीनन ख़सारे में है
٢ (2)
(2)
निःसंदेह इनसान घाटे में है।1
१०३:३
إِلَّا सिवाए illā
सिवाए
ٱلَّذِينَ उन लोगों के जो alladhīna
उन लोगों के जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
وَتَوَاصَوْا۟ और एक दूसरे तो तलक़ीन की watawāṣaw
और एक दूसरे तो तलक़ीन की
بِٱلْحَقِّ हक़ की bil-ḥaqi
हक़ की
وَتَوَاصَوْا۟ और एक दूसरे को तलक़ीन की watawāṣaw
और एक दूसरे को तलक़ीन की
بِٱلصَّبْرِ सब्र की bil-ṣabri
सब्र की
٣ (3)
(3)
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए और एक-दूसरे को सत्य की ताकीद की और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की।1