४९

अल-हुजुरात

मदनी १८ आयतें पारा २६
الحجرات
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४९:१
يَـٰٓأَيُّهَا O you who believe yāayyuhā
O you who believe
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
لَا (Do) not
(Do) not
تُقَدِّمُوا۟ ना तुम क़दम बढ़ाओ tuqaddimū
ना तुम क़दम बढ़ाओ
بَيْنَ before Allah bayna
before Allah
يَدَىِ आगे yadayi
आगे
ٱللَّهِ अल्लाह से l-lahi
अल्लाह से
وَرَسُولِهِۦ ۖ और उसके रसूल से warasūlihi
और उसके रसूल से
وَٱتَّقُوا۟ और डरो wa-ittaqū
और डरो
ٱللَّهَ ۚ अल्लाह से l-laha
अल्लाह से
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
سَمِيعٌ ख़ूब सुनने वाला है samīʿun
ख़ूब सुनने वाला है
عَلِيمٌۭ ख़ूब जानने वाला है ʿalīmun
ख़ूब जानने वाला है
١ (1)
(1)
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढ़ो1 और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
४९:२
يَـٰٓأَيُّهَا O you who believe yāayyuhā
O you who believe
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
لَا (Do) not
(Do) not
تَرْفَعُوٓا۟ ना तुम ऊँचा करो tarfaʿū
ना तुम ऊँचा करो
أَصْوَٰتَكُمْ अपनी आवाज़ों को aṣwātakum
अपनी आवाज़ों को
فَوْقَ ऊपर fawqa
ऊपर
صَوْتِ आवाज़ के ṣawti
आवाज़ के
ٱلنَّبِىِّ नबी की l-nabiyi
नबी की
وَلَا और ना walā
और ना
تَجْهَرُوا۟ तुम बुलन्द आवाज़ से करो tajharū
तुम बुलन्द आवाज़ से करो
لَهُۥ उनसे lahu
उनसे
بِٱلْقَوْلِ बात bil-qawli
बात
كَجَهْرِ मानिन्द बुलन्द करने के kajahri
मानिन्द बुलन्द करने के
بَعْضِكُمْ तुम्हारे बाज़ के baʿḍikum
तुम्हारे बाज़ के
لِبَعْضٍ बाज़ के लिए libaʿḍin
बाज़ के लिए
أَن कि an
कि
تَحْبَطَ (ना) ज़ाया हो जाऐं taḥbaṭa
(ना) ज़ाया हो जाऐं
أَعْمَـٰلُكُمْ आमाल तुम्हारे aʿmālukum
आमाल तुम्हारे
وَأَنتُمْ और तुम wa-antum
और तुम
لَا (do) not
(do) not
تَشْعُرُونَ ना शऊर रखते हो tashʿurūna
ना शऊर रखते हो
٢ (2)
(2)
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अपनी आवाज़ें, नबी की आवाज़ से ऊँची न करो और न आपसे ऊँची आवाज़ में बात करो, जैसे तुम एक-दूसरे से ऊँची आवाज़ में बात करते हो। ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म व्यर्थ हो जाएँ और तुम्हें पता (भी) न हो।
४९:३
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जो alladhīna
वो जो
يَغُضُّونَ पस्त रखते हैं yaghuḍḍūna
पस्त रखते हैं
أَصْوَٰتَهُمْ अपनी आवाज़ों को aṣwātahum
अपनी आवाज़ों को
عِندَ पास ʿinda
पास
رَسُولِ (of the) Messenger of Allah rasūli
(of the) Messenger of Allah
ٱللَّهِ रसूल अल्लाह के l-lahi
रसूल अल्लाह के
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही वो लोग हैं ulāika
यही वो लोग हैं
ٱلَّذِينَ जो alladhīna
जो
ٱمْتَحَنَ आज़मा लिए im'taḥana
आज़मा लिए
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
قُلُوبَهُمْ दिल उनके qulūbahum
दिल उनके
لِلتَّقْوَىٰ ۚ तक़्वा के लिए lilttaqwā
तक़्वा के लिए
لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए
مَّغْفِرَةٌۭ बख़्शिश है maghfiratun
बख़्शिश है
وَأَجْرٌ और अजर है wa-ajrun
और अजर है
عَظِيمٌ बहुत बड़ा ʿaẓīmun
बहुत बड़ा
٣ (3)
(3)
निःसंदेह जो लोग अल्लाह के रसूल के पास अपनी आवाज़ें धीमी रखते हैं, यही लोग हैं, जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँच लिया है। उनके लिए बड़ी क्षमा तथा महान प्रतिफल है।
४९:४
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
يُنَادُونَكَ आवाज़ देते हैं आपको yunādūnaka
आवाज़ देते हैं आपको
مِن from min
from
وَرَآءِ बाहर से warāi
बाहर से
ٱلْحُجُرَٰتِ हुजरों के l-ḥujurāti
हुजरों के
أَكْثَرُهُمْ अक्सर उनके aktharuhum
अक्सर उनके
لَا (do) not
(do) not
يَعْقِلُونَ नहीं वो अक़्ल रखते yaʿqilūna
नहीं वो अक़्ल रखते
٤ (4)
(4)
निःसंदेह जो लोग आपको कमरों के बाहर से पुकारते1 हैं, उनमें से अधिकांश नहीं समझते।
४९:५
وَلَوْ और अगर walaw
और अगर
أَنَّهُمْ ये कि वो annahum
ये कि वो
صَبَرُوا۟ वो सब्र करते ṣabarū
वो सब्र करते
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
تَخْرُجَ आप निकलते takhruja
आप निकलते
إِلَيْهِمْ तरफ़ उनके ilayhim
तरफ़ उनके
لَكَانَ अलबत्ता होता lakāna
अलबत्ता होता
خَيْرًۭا बेहतर khayran
बेहतर
لَّهُمْ ۚ उनके लिए lahum
उनके लिए
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
غَفُورٌۭ बहुत बख़्शने वाला है ghafūrun
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌۭ निहायत रहम करने वाला है raḥīmun
निहायत रहम करने वाला है
٥ (5)
(5)
और यदि वे धैर्य1 रखते, यहाँ तक कि आप खुद ही उनकी ओर निकलकर आते, तो निश्चय यह उनके लिए बेहतर होता। तथा अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
४९:६
يَـٰٓأَيُّهَا O you who believe yāayyuhā
O you who believe
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
إِن अगर in
अगर
جَآءَكُمْ लाए तुम्हारे पास jāakum
लाए तुम्हारे पास
فَاسِقٌۢ कोई फ़ासिक़ fāsiqun
कोई फ़ासिक़
بِنَبَإٍۢ किसी ख़बर को binaba-in
किसी ख़बर को
فَتَبَيَّنُوٓا۟ तो तहक़ीक़ कर लिया करो fatabayyanū
तो तहक़ीक़ कर लिया करो
أَن कि an
कि
تُصِيبُوا۟ (ना) तुम तक्लीफ़ पहुँचाओ tuṣībū
(ना) तुम तक्लीफ़ पहुँचाओ
قَوْمًۢا किसी क़ौम को qawman
किसी क़ौम को
بِجَهَـٰلَةٍۢ जिहालत से bijahālatin
जिहालत से
فَتُصْبِحُوا۟ फिर तुम हो जाओ fatuṣ'biḥū
फिर तुम हो जाओ
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
مَا उसके जो
उसके जो
فَعَلْتُمْ किया तुमने faʿaltum
किया तुमने
نَـٰدِمِينَ नादिम nādimīna
नादिम
٦ (6)
(6)
ऐ ईमान वालो! यदि कोई दुराचारी (अवज्ञाकारी)1 तुम्हारे पास कोई सूचना लेकर आए, तो उसकी अच्छी तरह जाँच-पड़ताल कर लिया करो। ऐसा न हो कि तुम किसी समुदाय को अज्ञानता के कारण हानि पहुँचा दो, फिर अपने किए पर पछताओ।
४९:७
وَٱعْلَمُوٓا۟ और जान लो wa-iʿ'lamū
और जान लो
أَنَّ बेशक anna
बेशक
فِيكُمْ तुम में fīkum
तुम में
رَسُولَ रसूल हैं rasūla
रसूल हैं
ٱللَّهِ ۚ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
لَوْ अगर law
अगर
يُطِيعُكُمْ वो कहा मानें तुम्हारा yuṭīʿukum
वो कहा मानें तुम्हारा
فِى in
in
كَثِيرٍۢ बहुत से kathīrin
बहुत से
مِّنَ of mina
of
ٱلْأَمْرِ मामलात में l-amri
मामलात में
لَعَنِتُّمْ अलबत्ता मुश्किल में पड़ जाओ तुम laʿanittum
अलबत्ता मुश्किल में पड़ जाओ तुम
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
ٱللَّهَ अल्लाह ने l-laha
अल्लाह ने
حَبَّبَ महबूब बना दिया ḥabbaba
महबूब बना दिया
إِلَيْكُمُ तुम्हारे लिए ilaykumu
तुम्हारे लिए
ٱلْإِيمَـٰنَ ईमान को l-īmāna
ईमान को
وَزَيَّنَهُۥ और उसने मुज़य्यन कर दिया उसे wazayyanahu
और उसने मुज़य्यन कर दिया उसे
فِى in
in
قُلُوبِكُمْ तुम्हारे दिलों में qulūbikum
तुम्हारे दिलों में
وَكَرَّهَ और उसने नापसंदीदा कर दिया wakarraha
और उसने नापसंदीदा कर दिया
إِلَيْكُمُ तुम्हारी तरफ़ ilaykumu
तुम्हारी तरफ़
ٱلْكُفْرَ कुफ़्र l-kuf'ra
कुफ़्र
وَٱلْفُسُوقَ और गुनाह wal-fusūqa
और गुनाह
وَٱلْعِصْيَانَ ۚ और नाफ़रमानी को wal-ʿiṣ'yāna
और नाफ़रमानी को
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही लोग हैं ulāika
यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلرَّٰشِدُونَ जो हिदायत याफ़्ता हैं l-rāshidūna
जो हिदायत याफ़्ता हैं
٧ (7)
(7)
तथा जान लो कि तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल मौजूद हैं। यदि वह बहुत-से विषयों में तुम्हारी बात मान लें, तो तुम कठिनाई में पड़ जाओ। परंतु अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे दिलों में सुशोभित कर दिया तथा तुम्हारे लिए कुफ़्र और पाप और अवज्ञा को अप्रिय बना दिया, यही लोग हिदायत पर चलने वाले हैं।
४९:८
فَضْلًۭا फ़ज़ल है faḍlan
फ़ज़ल है
مِّنَ from Allah mina
from Allah
ٱللَّهِ अल्लाह की तरफ़ से l-lahi
अल्लाह की तरफ़ से
وَنِعْمَةًۭ ۚ और नेअमत waniʿ'matan
और नेअमत
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
عَلِيمٌ ख़ूब इल्म वाला है ʿalīmun
ख़ूब इल्म वाला है
حَكِيمٌۭ ख़ूब हिकमत वाला है ḥakīmun
ख़ूब हिकमत वाला है
٨ (8)
(8)
अल्लाह की कृपा और अनुग्रह के कारण और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
४९:९
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
طَآئِفَتَانِ दो गिरोह ṭāifatāni
दो गिरोह
مِنَ among mina
among
ٱلْمُؤْمِنِينَ मोमिनों में से l-mu'minīna
मोमिनों में से
ٱقْتَتَلُوا۟ वो बाहम लड़ पड़ें iq'tatalū
वो बाहम लड़ पड़ें
فَأَصْلِحُوا۟ तो सुलह करा दो fa-aṣliḥū
तो सुलह करा दो
بَيْنَهُمَا ۖ दर्मियान उन दोनों के baynahumā
दर्मियान उन दोनों के
فَإِنۢ फिर अगर fa-in
फिर अगर
بَغَتْ ज़्यादती करे baghat
ज़्यादती करे
إِحْدَىٰهُمَا उन दोनों में से एक iḥ'dāhumā
उन दोनों में से एक
عَلَى on ʿalā
on
ٱلْأُخْرَىٰ दूसरे पर l-ukh'rā
दूसरे पर
فَقَـٰتِلُوا۟ तो लड़ो faqātilū
तो लड़ो
ٱلَّتِى उससे जो allatī
उससे जो
تَبْغِى ज़्यादती करे tabghī
ज़्यादती करे
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
تَفِىٓءَ वो पलट आए tafīa
वो पलट आए
إِلَىٰٓ तरफ़ ilā
तरफ़
أَمْرِ (the) command amri
(the) command
ٱللَّهِ ۚ अल्लाह के हुक्म के l-lahi
अल्लाह के हुक्म के
فَإِن फिर अगर fa-in
फिर अगर
فَآءَتْ वो पलट आए fāat
वो पलट आए
فَأَصْلِحُوا۟ तो सुलह करा दो fa-aṣliḥū
तो सुलह करा दो
بَيْنَهُمَا दर्मियान उन दोनों के baynahumā
दर्मियान उन दोनों के
بِٱلْعَدْلِ साथ अदल के bil-ʿadli
साथ अदल के
وَأَقْسِطُوٓا۟ ۖ और इन्साफ़ करो wa-aqsiṭū
और इन्साफ़ करो
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
يُحِبُّ वो पसंद करता है yuḥibbu
वो पसंद करता है
ٱلْمُقْسِطِينَ इन्साफ़ करने वालों को l-muq'siṭīna
इन्साफ़ करने वालों को
٩ (9)
(9)
और यदि ईमान वालों के दो गिरोह आपस में लड़ पड़ें, तो उनके बीच सुलह करा दो। फिर यदि दोनों में से एक, दूसरे पर अत्याचार करे, तो उस गिरोह से लड़ो, जो अत्याचार करता है, यहाँ तक कि वह अल्लाह के आदेश की ओर पलट आए। फिर यदि वह पलट1 आए, तो उनके बीच न्याय के साथ सुलह करा दो, तथा न्याय करो। निःसंदेह अल्लाह न्याय करने वालों से प्रेम करता है।
४९:१०
إِنَّمَا बेशक innamā
बेशक
ٱلْمُؤْمِنُونَ मोमिन तो l-mu'minūna
मोमिन तो
إِخْوَةٌۭ भाई-भाई हैं ikh'watun
भाई-भाई हैं
فَأَصْلِحُوا۟ तो सुलह करा दो fa-aṣliḥū
तो सुलह करा दो
بَيْنَ दर्मियान bayna
दर्मियान
أَخَوَيْكُمْ ۚ अपने दो भाइयों के akhawaykum
अपने दो भाइयों के
وَٱتَّقُوا۟ और डरो wa-ittaqū
और डरो
ٱللَّهَ अल्लाह से l-laha
अल्लाह से
لَعَلَّكُمْ ताकि तुम laʿallakum
ताकि तुम
تُرْحَمُونَ तुम रहम किए जाओ tur'ḥamūna
तुम रहम किए जाओ
١٠ (10)
(10)
निःसंदेह ईमान वाले तो भाई ही हैं। अतः अपने दो भाइयों के बीच सुलह करा दो। तथा अल्लाह से डरो, ताकि तुम पर दया की जाए।
४९:११
يَـٰٓأَيُّهَا O you who believe yāayyuhā
O you who believe
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
لَا (Let) not
(Let) not
يَسْخَرْ ना मज़ाक़ उड़ाए yaskhar
ना मज़ाक़ उड़ाए
قَوْمٌۭ कोई क़ौम qawmun
कोई क़ौम
مِّن [of] min
[of]
قَوْمٍ किसी क़ौम का qawmin
किसी क़ौम का
عَسَىٰٓ हो सकता है ʿasā
हो सकता है
أَن कि an
कि
يَكُونُوا۟ हों वो yakūnū
हों वो
خَيْرًۭا बेहतर khayran
बेहतर
مِّنْهُمْ उनसे min'hum
उनसे
وَلَا और ना walā
और ना
نِسَآءٌۭ औरतें nisāon
औरतें
مِّن [of] min
[of]
نِّسَآءٍ औरतों का nisāin
औरतों का
عَسَىٰٓ हो सकता है ʿasā
हो सकता है
أَن कि an
कि
يَكُنَّ हों वो yakunna
हों वो
خَيْرًۭا बेहतर khayran
बेहतर
مِّنْهُنَّ ۖ उनसे min'hunna
उनसे
وَلَا और ना walā
और ना
تَلْمِزُوٓا۟ तुम ऐब लगाओ talmizū
तुम ऐब लगाओ
أَنفُسَكُمْ अपनों को anfusakum
अपनों को
وَلَا और ना walā
और ना
تَنَابَزُوا۟ तुम चिढ़ाओ एक दूसरे को tanābazū
तुम चिढ़ाओ एक दूसरे को
بِٱلْأَلْقَـٰبِ ۖ साथ(बुरे) अलक़ाब के bil-alqābi
साथ(बुरे) अलक़ाब के
بِئْسَ कितना बुरा है bi'sa
कितना बुरा है
ٱلِٱسْمُ नाम l-s'mu
नाम
ٱلْفُسُوقُ फ़िस्क़ में l-fusūqu
फ़िस्क़ में
بَعْدَ बाद baʿda
बाद
ٱلْإِيمَـٰنِ ۚ ईमान के l-īmāni
ईमान के
وَمَن और जो कोई waman
और जो कोई
لَّمْ ना lam
ना
يَتُبْ तौबा करे yatub
तौबा करे
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ तो यही लोग हैं fa-ulāika
तो यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلظَّـٰلِمُونَ जो ज़ालिम हैं l-ẓālimūna
जो ज़ालिम हैं
١١ (11)
(11)
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! एक जाति दूसरी जाति का उपहास न करे, हो सकता है कि वे उनसे बेहतर हों। और न कोई स्त्रियाँ अन्य स्त्रियों की हँसी उड़ाएँ, हो सकता है कि वे उनसे अच्छी हों। और न अपनों पर दोष लगाओ, और न एक-दूसरे को बुरे नामों से पुकारो। ईमान के बाद अवज्ञाकारी होना बुरा नाम है। और जिसने तौबा न की, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
४९:१२
يَـٰٓأَيُّهَا O you who believe yāayyuhā
O you who believe
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
ٱجْتَنِبُوا۟ इज्तिनाब करो /बचो ij'tanibū
इज्तिनाब करो /बचो
كَثِيرًۭا बहुत ज़्यादा kathīran
बहुत ज़्यादा
مِّنَ of mina
of
ٱلظَّنِّ गुमान करने से l-ẓani
गुमान करने से
إِنَّ बेशक inna
बेशक
بَعْضَ बाज़ baʿḍa
बाज़
ٱلظَّنِّ गुमान l-ẓani
गुमान
إِثْمٌۭ ۖ गुनाह हैं ith'mun
गुनाह हैं
وَلَا और ना walā
और ना
تَجَسَّسُوا۟ तुम तजस्सुस करो tajassasū
तुम तजस्सुस करो
وَلَا और ना walā
और ना
يَغْتَب ग़ीबत करे yaghtab
ग़ीबत करे
بَّعْضُكُم बाज़ तुम्हारा baʿḍukum
बाज़ तुम्हारा
بَعْضًا ۚ बाज़ की baʿḍan
बाज़ की
أَيُحِبُّ क्या पसंद करता है ayuḥibbu
क्या पसंद करता है
أَحَدُكُمْ तुम में से कोई एक aḥadukum
तुम में से कोई एक
أَن कि an
कि
يَأْكُلَ वो खाए yakula
वो खाए
لَحْمَ गोश्त laḥma
गोश्त
أَخِيهِ अपने भाई akhīhi
अपने भाई
مَيْتًۭا मुर्दा का maytan
मुर्दा का
فَكَرِهْتُمُوهُ ۚ पस तुम नापसंद करते हो उसे fakarih'tumūhu
पस तुम नापसंद करते हो उसे
وَٱتَّقُوا۟ और डरो wa-ittaqū
और डरो
ٱللَّهَ ۚ अल्लाह से l-laha
अल्लाह से
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
تَوَّابٌۭ बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला है tawwābun
बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला है
رَّحِيمٌۭ निहायत रहम करने वाला है raḥīmun
निहायत रहम करने वाला है
١٢ (12)
(12)
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! बहुत-से गुमानों से बचो। निश्चय ही कुछ गुमान पाप हैं। और जासूसी न करो, और न तुममें से कोई दूसरे की ग़ीबत1 करे। क्या तुममें से कोई पसंद करता है कि अपने भाई का मांस खाए, जबकि वह मरा हुआ हो? सो तुम उसे नापसंद करते हो। तथा अल्लाह से डरो। निश्चय अल्लाह बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयालु है।
४९:१३
يَـٰٓأَيُّهَا O mankind yāayyuhā
O mankind
ٱلنَّاسُ ऐ लोगो l-nāsu
ऐ लोगो
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
خَلَقْنَـٰكُم पैदा किया हमने तुम्हें khalaqnākum
पैदा किया हमने तुम्हें
مِّن from min
from
ذَكَرٍۢ एक मर्द से dhakarin
एक मर्द से
وَأُنثَىٰ और एक औरत से wa-unthā
और एक औरत से
وَجَعَلْنَـٰكُمْ और बनाया तुम्हें wajaʿalnākum
और बनाया तुम्हें
شُعُوبًۭا क़ौमें shuʿūban
क़ौमें
وَقَبَآئِلَ और क़बीले waqabāila
और क़बीले
لِتَعَارَفُوٓا۟ ۚ ताकि तुम एक दूसरे को पहचानो litaʿārafū
ताकि तुम एक दूसरे को पहचानो
إِنَّ बेशक inna
बेशक
أَكْرَمَكُمْ तुम में सब से ज़्यादा इज़्ज़त वाला akramakum
तुम में सब से ज़्यादा इज़्ज़त वाला
عِندَ near ʿinda
near
ٱللَّهِ अल्लाह के नज़दीक l-lahi
अल्लाह के नज़दीक
أَتْقَىٰكُمْ ۚ तुम में सब से ज़्यादा तक़्वा वाला है atqākum
तुम में सब से ज़्यादा तक़्वा वाला है
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
عَلِيمٌ ख़ूब इल्म वाला है ʿalīmun
ख़ूब इल्म वाला है
خَبِيرٌۭ ख़ूब ख़बर रखने वाला है khabīrun
ख़ूब ख़बर रखने वाला है
١٣ (13)
(13)
ऐ मनुष्यो! हमने तुम्हें एक नर और एक मादा से पैदा किया तथा हमने तुम्हें जातियों और क़बीलों में कर दिए, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। निःसंदेह अल्लाह के निकट तुममें सबसे अधिक सम्मान वाला वह है, जो तुममें सबसे अधिक तक़्वा वाला है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूरी ख़बर रखने वाला है।
४९:१४
۞ قَالَتِ कहा qālati
कहा
ٱلْأَعْرَابُ देहातियों / बदवियों ने l-aʿrābu
देहातियों / बदवियों ने
ءَامَنَّا ۖ ईमान लाए हम āmannā
ईमान लाए हम
قُل कह दीजिए qul
कह दीजिए
لَّمْ नहीं lam
नहीं
تُؤْمِنُوا۟ तुम ईमान लाए tu'minū
तुम ईमान लाए
وَلَـٰكِن और लेकिन walākin
और लेकिन
قُولُوٓا۟ कहो qūlū
कहो
أَسْلَمْنَا इस्लाम लाए हम aslamnā
इस्लाम लाए हम
وَلَمَّا और अभी तक नहीं walammā
और अभी तक नहीं
يَدْخُلِ दाख़िल हुआ yadkhuli
दाख़िल हुआ
ٱلْإِيمَـٰنُ ईमान l-īmānu
ईमान
فِى in
in
قُلُوبِكُمْ ۖ तुम्हारे दिलों में qulūbikum
तुम्हारे दिलों में
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
تُطِيعُوا۟ तुम इताअत करोगे tuṭīʿū
तुम इताअत करोगे
ٱللَّهَ अल्लाह की l-laha
अल्लाह की
وَرَسُولَهُۥ और उसके रसूल की warasūlahu
और उसके रसूल की
لَا not
not
يَلِتْكُم नहीं वो कमी करेगा तुमसे yalit'kum
नहीं वो कमी करेगा तुमसे
مِّنْ of min
of
أَعْمَـٰلِكُمْ तुम्हारे आमाल में से aʿmālikum
तुम्हारे आमाल में से
شَيْـًٔا ۚ कुछ भी shayan
कुछ भी
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
غَفُورٌۭ बहुत बख़्शने वाला है ghafūrun
बहुत बख़्शने वाला है
رَّحِيمٌ निहायत रहम करने वाला है raḥīmun
निहायत रहम करने वाला है
١٤ (14)
(14)
(कुछ) बद्दुओं ने कहा : हम ईमान ले आए। आप कह दें : तुम ईमान नहीं लाए। परंतु यह कहो कि हम इस्लाम लाए (आज्ञाकारी हो गए)। और अभी तक ईमान तुम्हारे दिलों में प्रवेश नहीं किया। और यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करोगे, तो वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी कमी नहीं करेगा। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।1
४९:१५
إِنَّمَا बेशक innamā
बेशक
ٱلْمُؤْمِنُونَ मोमिन तो l-mu'minūna
मोमिन तो
ٱلَّذِينَ वो लोग हैं जो alladhīna
वो लोग हैं जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
بِٱللَّهِ अल्लाह पर bil-lahi
अल्लाह पर
وَرَسُولِهِۦ और उसके रसूल पर warasūlihi
और उसके रसूल पर
ثُمَّ फिर thumma
फिर
لَمْ नहीं lam
नहीं
يَرْتَابُوا۟ वो शक में पड़े yartābū
वो शक में पड़े
وَجَـٰهَدُوا۟ और उन्होंने जिहाद किया wajāhadū
और उन्होंने जिहाद किया
بِأَمْوَٰلِهِمْ साथ अपने मालों के bi-amwālihim
साथ अपने मालों के
وَأَنفُسِهِمْ और अपनी जानों के wa-anfusihim
और अपनी जानों के
فِى in
in
سَبِيلِ (the) way sabīli
(the) way
ٱللَّهِ ۚ अल्लाह के रास्ते में l-lahi
अल्लाह के रास्ते में
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही लोग हैं ulāika
यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلصَّـٰدِقُونَ जो सच्चे है l-ṣādiqūna
जो सच्चे है
١٥ (15)
(15)
निःसंदेह मोमिन तो वही लोग हैं, जो अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाए, फिर उन्होंने संदेह नहीं किया तथा उन्होंने अपने धनों और अपने प्राणों से अल्लाह की राह में जिहाद किया। यही लोग सच्चे हैं।
४९:१६
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
أَتُعَلِّمُونَ क्या तुम बताते हो atuʿallimūna
क्या तुम बताते हो
ٱللَّهَ अल्लाह को l-laha
अल्लाह को
بِدِينِكُمْ अपना दीन bidīnikum
अपना दीन
وَٱللَّهُ हालाँकि अल्लाह wal-lahu
हालाँकि अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
مَا जो कुछ
जो कुछ
فِى (is) in
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों में है l-samāwāti
आसमानों में है
وَمَا और जो कुछ wamā
और जो कुछ
فِى (is) in
(is) in
ٱلْأَرْضِ ۚ ज़मीन में है l-arḍi
ज़मीन में है
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
بِكُلِّ हर bikulli
हर
شَىْءٍ चीज़ का shayin
चीज़ का
عَلِيمٌۭ ख़ूब इल्म रखने वाला है ʿalīmun
ख़ूब इल्म रखने वाला है
١٦ (16)
(16)
आप कह दें : क्या तुम अल्लाह को अपने धर्म से अवगत करा रहे हो? हालाँकि अल्लाह जानता है, जो कुछ आकाशों में है और जो धरती में है। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है।
४९:१७
يَمُنُّونَ वो एहसान जताते है yamunnūna
वो एहसान जताते है
عَلَيْكَ आप पर ʿalayka
आप पर
أَنْ कि an
कि
أَسْلَمُوا۟ ۖ वो इस्लाम ले आए aslamū
वो इस्लाम ले आए
قُل कह दीजिए qul
कह दीजिए
لَّا (Do) not
(Do) not
تَمُنُّوا۟ ना तुम एहसान जताओ tamunnū
ना तुम एहसान जताओ
عَلَىَّ मुझ पर ʿalayya
मुझ पर
إِسْلَـٰمَكُم ۖ अपने इस्लाम का is'lāmakum
अपने इस्लाम का
بَلِ बल्कि bali
बल्कि
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
يَمُنُّ वो एहसान करता है yamunnu
वो एहसान करता है
عَلَيْكُمْ तुम पर ʿalaykum
तुम पर
أَنْ कि an
कि
هَدَىٰكُمْ उसने हिदायत दी तुम्हें hadākum
उसने हिदायत दी तुम्हें
لِلْإِيمَـٰنِ इमान के लिए lil'īmāni
इमान के लिए
إِن अगर in
अगर
كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम
صَـٰدِقِينَ सच्चे ṣādiqīna
सच्चे
١٧ (17)
(17)
वे आपपर एहसान जताते हैं कि वे इस्लाम ले आए। आप कह दें : मुझपर अपने इस्लाम का एहसान न जताओ। बल्कि अल्लाह तुमपर एहसान रखता है कि उसने तुम्हें ईमान की तरफ़ हिदायत दी, यदि तुम सच्चे हो।
४९:१८
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
غَيْبَ ग़ैब ghayba
ग़ैब
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ ۚ और ज़मीन के wal-arḍi
और ज़मीन के
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
بَصِيرٌۢ ख़ूब जानने वाला है baṣīrun
ख़ूब जानने वाला है
بِمَا उसे जो bimā
उसे जो
تَعْمَلُونَ तुम अमल करते हो taʿmalūna
तुम अमल करते हो
١٨ (18)
(18)
निःसंदेह अल्लाह आकाशों तथा धरती की छिपी चीज़ों को जानता है। और अल्लाह ख़ूब देखने वाला है जो कुछ तुम करते हो।