५०

क़ाफ़

मक्की ४५ आयतें पारा २६
ق

सूरह क़ाफ़ (ق) पवित्र क़ुरआन का ५० वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ४५ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५०:१
قٓ ۚقqafوَٱلْقُرْءَانِक़सम है क़ुरआन कीwal-qur'āniٱلْمَجِيدِजो बड़ी शान वाला हैl-majīdi١
क़ाफ़। क़सम है सम्मानित क़ुरआन की!
५०:२
بَلْबल्किbalعَجِبُوٓا۟उन्हें ताअज्जुब हुआʿajibūأَنकिanجَآءَهُمआ गया उनके पासjāahumمُّنذِرٌۭएक डराने वालाmundhirunمِّنْهُمْउन्हीं में सेmin'humفَقَالَतो कहाfaqālaٱلْكَـٰفِرُونَकाफ़िरों नेl-kāfirūnaهَـٰذَاयेhādhāشَىْءٌएक चीज़ हैshayonعَجِيبٌअजीबʿajībun٢
बल्कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनके पास उन्हीं में से एक डराने वाला आया। तो काफ़िरों ने कहा : यह बड़ी विचित्र बात है।1
५०:३
أَءِذَاक्या जबa-idhāمِتْنَاमर जाऐंगे हमmit'nāوَكُنَّاऔर हो जाऐंगे हमwakunnāتُرَابًۭا ۖमिट्टीturābanذَٰلِكَयेdhālikaرَجْعٌۢपलटना हैrajʿunبَعِيدٌۭबहुत दूर काbaʿīdun٣
क्या जब हम मर गए और मिट्टी हो गए (तो दोबारा उठाए जाएँगे)? यह पलटना तो बहुत दूर की बात है।
५०:४
قَدْतहक़ीक़qadعَلِمْنَاजान लिया हमनेʿalim'nāمَاजोتَنقُصُकम करती हैtanquṣuٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuمِنْهُمْ ۖउनमें सेmin'humوَعِندَنَاऔर हमारे पासwaʿindanāكِتَـٰبٌएक किताब हैkitābunحَفِيظٌۢख़ूब हिफ़ाज़त करने वालीḥafīẓun٤
निश्चय हमें मालूम है जो कुछ धरती उनमें से कम करती है और हमारे पास एक पुस्तक1 है, जो ख़ूब सुरक्षित रखने वाली है।
५०:५
بَلْबल्किbalكَذَّبُوا۟उन्होंने झुठलायाkadhabūبِٱلْحَقِّहक़ कोbil-ḥaqiلَمَّاजबlammāجَآءَهُمْवो आ गया उनके पासjāahumفَهُمْतो वोfahumفِىٓ(are) inأَمْرٍۢएक मामले में हैamrinمَّرِيجٍउलझे हुएmarījin٥
बल्कि उनहोंने सत्य को झुठला दिया, जब वह उनके पास आया। अतः वे एक उलझे हुए मामले में हैं।
५०:६
أَفَلَمْक्या भला नहींafalamيَنظُرُوٓا۟उन्होंने देखाyanẓurūإِلَىatilāٱلسَّمَآءِतरफ़ आसमान केl-samāiفَوْقَهُمْअपने ऊपरfawqahumكَيْفَकिस तरहkayfaبَنَيْنَـٰهَاबनाया हमने उसेbanaynāhāوَزَيَّنَّـٰهَاऔर मुज़य्यन किया हमने उसेwazayyannāhāوَمَاऔर नहीं हैwamāلَهَاउसमेंlahāمِنanyminفُرُوجٍۢकोई शगाफ़furūjin٦
तो क्या उन्होंने अपने ऊपर आकाश की ओर नहीं देखा कि हमने उसे कैसे बनाया और उसे सजाया और उसमें कोई दरार नहीं है?
५०:७
وَٱلْأَرْضَऔर ज़मीनwal-arḍaمَدَدْنَـٰهَاफैलाया हमने उसेmadadnāhāوَأَلْقَيْنَاऔर डाले हमनेwa-alqaynāفِيهَاउसमेंfīhāرَوَٰسِىَपहाड़rawāsiyaوَأَنۢبَتْنَاऔर उगाए हमनेwa-anbatnāفِيهَاउसमेंfīhāمِنofminكُلِّहर क़िस्म केkulliزَوْجٍۭजोड़ेzawjinبَهِيجٍۢबारौनक़bahījin٧
और हमने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत डाल दिए और उसमें हर प्रकार की सुंदर चीज़ें उगाईं।
५०:८
تَبْصِرَةًۭबतौर बसीरतtabṣiratanوَذِكْرَىٰऔर नसीहतwadhik'rāلِكُلِّfor everylikulliعَبْدٍۢवास्ते हर बन्देʿabdinمُّنِيبٍۢरुजूअ करने वाले केmunībin٨
हर उस बंदे को दिखाने और याद दिलाने के लिए, जो (अपने पालनहार की ओर) लौटने वाला है।
५०:९
وَنَزَّلْنَاऔर उतारा हमनेwanazzalnāمِنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۭपानीmāanمُّبَـٰرَكًۭاबरकत वालाmubārakanفَأَنۢبَتْنَاफिर उगाए हमनेfa-anbatnāبِهِۦसाथ उसकेbihiجَنَّـٰتٍۢबाग़ातjannātinوَحَبَّऔर अनाजwaḥabbaٱلْحَصِيدِकटी हुई खेती केl-ḥaṣīdi٩
तथा हमने आकाश से बहुत बरकत वाला पानी उतारा, फिर हमने उसके द्वारा बाग़ तथा काटी जाने वाली (खेती) के दाने उगाए।
५०:१०
وَٱلنَّخْلَऔर खजूर के दरख़्तwal-nakhlaبَاسِقَـٰتٍۢबुलन्द व बालाbāsiqātinلَّهَاउनके लिएlahāطَلْعٌۭख़ोशे हैंṭalʿunنَّضِيدٌۭतह ब तह/ऊपर नीचेnaḍīdun١٠
तथा खजूरों के लंबे-लंबे ऊँचे पेड़, जिनके गुच्छे परत दर परत हैं।
५०:११
رِّزْقًۭاरिज़्क़ हैriz'qanلِّلْعِبَادِ ۖबन्दों के लिएlil'ʿibādiوَأَحْيَيْنَاऔर ज़िन्दा किया हमनेwa-aḥyaynāبِهِۦसाथ उसकेbihiبَلْدَةًۭशहरbaldatanمَّيْتًۭا ۚमुर्दा कोmaytanكَذَٰلِكَइसी तरह होगाkadhālikaٱلْخُرُوجُनिकलनाl-khurūju١١
बंदों को रोज़ी देने के लिए। तथा हमने उसके साथ एक मुर्दा शहर को जीवित कर दिया। इसी प्रकार निकलना है।
५०:१२
كَذَّبَتْझुठलायाkadhabatقَبْلَهُمْउनसे क़ब्लqablahumقَوْمُक़ौमेqawmuنُوحٍۢनूहnūḥinوَأَصْحَـٰبُand (the) companionswa-aṣḥābuٱلرَّسِّऔर असहाबे-रसl-rasiوَثَمُودُऔर समूद नेwathamūdu١٢
इनसे पहले नूह की जाति ने और कुएँ वालों ने और समूद ने झुठलाया।
५०:१३
وَعَادٌۭऔर आदwaʿādunوَفِرْعَوْنُऔर फ़िरऔनwafir'ʿawnuوَإِخْوَٰنُand (the) brotherswa-ikh'wānuلُوطٍۢऔर लूत के भाइयों नेlūṭin١٣
तथा आद और फ़िरऔन ने और लूत के भाइयों ने।
५०:१४
وَأَصْحَـٰبُAnd (the) companionswa-aṣḥābuٱلْأَيْكَةِऔर असहाबे ऐका(जंगल वालों)l-aykatiوَقَوْمُand (the) peoplewaqawmuتُبَّعٍۢ ۚऔर क़ौमे तुब्बअ नेtubbaʿinكُلٌّۭसब नेkullunكَذَّبَझुठलायाkadhabaٱلرُّسُلَरसूलों कोl-rusulaفَحَقَّतो साबित हो गईfaḥaqqaوَعِيدِवईद मेरीwaʿīdi١٤
तथा ''ऐका'' के वासियों ने और ''तुब्बा''1 की जाति ने। प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया।2 तो उनपर मेरे अज़ाब का वादा साबित हो गया।
५०:१५
أَفَعَيِينَاक्या भला थक गए हमafaʿayīnāبِٱلْخَلْقِwith the creationbil-khalqiٱلْأَوَّلِ ۚपहली तख़लीक़ सेl-awaliبَلْबल्किbalهُمْवोhumفِى(are) inلَبْسٍۢशक में हैंlabsinمِّنْaboutminخَلْقٍۢa creationkhalqinجَدِيدٍۢनई पैदाइश सेjadīdin١٥
तो क्या हम प्रथम बार पैदा करके थक गए हैं? बल्कि वे नए पैदा किए जाने के बारे में संदेह में पड़े हुए हैं।
५०:१६
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلْإِنسَـٰنَइन्सान कोl-insānaوَنَعْلَمُऔर हम जानते हैंwanaʿlamuمَاजोتُوَسْوِسُवस्वसा डालता हैtuwaswisuبِهِۦउसेbihiنَفْسُهُۥ ۖनफ़्स उसकाnafsuhuوَنَحْنُऔर हमwanaḥnuأَقْرَبُज़्यादा क़रीब हैंaqrabuإِلَيْهِउसकेilayhiمِنْthanminحَبْلِ(his) jugular veinḥabliٱلْوَرِيدِशह रग सेl-warīdi١٦
निःसंदेह हमने मनुष्य को पैदा किया और हम जानते हैं जो कुछ विचार उसके मन में आता है और हम उसके गले की उस नस से भी अधिक क़रीब हैं जो दिल से जुड़ी होती है।
५०:१७
إِذْजबidhيَتَلَقَّىले लेते हैंyatalaqqāٱلْمُتَلَقِّيَانِदो लेने वालेl-mutalaqiyāniعَنِonʿaniٱلْيَمِينِदाईं तरफ़ सेl-yamīniوَعَنِand onwaʿaniٱلشِّمَالِऔर बाईं तरफ़ सेl-shimāliقَعِيدٌۭबैठे हुएqaʿīdun١٧
जब दो लेने वाले (उसके हर कथन और कर्म को) लेते हैं, जो दाहिनी और बाईं ओर बैठे हैं।1
५०:१८
مَّاनहींيَلْفِظُवो बोलताyalfiẓuمِنanyminقَوْلٍकोई बातqawlinإِلَّاमगरillāلَدَيْهِउसके पास हैladayhiرَقِيبٌएक मुहाफ़िज़/निगरानraqībunعَتِيدٌۭतैयारʿatīdun١٨
वह कोई बात नहीं बोलता, परंतु उसके पास एक निरीक्षक तैयार रहता है।
५०:१९
وَجَآءَتْऔर आ गईwajāatسَكْرَةُबेहोशीsakratuٱلْمَوْتِमौत कीl-mawtiبِٱلْحَقِّ ۖसाथ हक़ केbil-ḥaqiذَٰلِكَयही हैdhālikaمَاवो जोكُنتَथा तूkuntaمِنْهُउस सेmin'huتَحِيدُतू भागताtaḥīdu١٩
और मौत की बेहोशी सत्य के साथ आ गई। यही है वह जिससे तू भागता था।
५०:२०
وَنُفِخَऔर फूँका जाएगाwanufikhaفِى[in]ٱلصُّورِ ۚसूर मेंl-ṣūriذَٰلِكَयेdhālikaيَوْمُदिन हैyawmuٱلْوَعِيدِवादे काl-waʿīdi٢٠
और सूर में फूँक दिया गया। यही यातना के वादे का दिन है।
५०:२१
وَجَآءَتْऔर आएगाwajāatكُلُّहरkulluنَفْسٍۢनफ़्सnafsinمَّعَهَاउसके साथ(होगा)maʿahāسَآئِقٌۭएक हाँकने वालाsāiqunوَشَهِيدٌۭऔर एक गवाही देने वालाwashahīdun٢١
तथा प्रत्येक व्यक्ति इस दशा में आएगा कि उसके साथ एक हाँकने वाला1 और एक गवाह होगा।
५०:२२
لَّقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadكُنتَथा तूkuntaفِىinغَفْلَةٍۢगफ़लत मेंghaflatinمِّنْofminهَـٰذَاउससेhādhāفَكَشَفْنَاतो हटा दिया हमनेfakashafnāعَنكَतुझ सेʿankaغِطَآءَكَपर्दा तेराghiṭāakaفَبَصَرُكَतो निगाह तेरीfabaṣarukaٱلْيَوْمَआजl-yawmaحَدِيدٌۭबहुत तेज़ हैḥadīdun٢٢
निःसंदेह तू इससे बड़ी ग़फ़लत में था। सो हमने तुझसे तेरा परदा हटा दिया। तो तेरी दृष्टि आज बड़ी पैनी है।
५०:२३
وَقَالَऔर कहेगाwaqālaقَرِينُهُۥसाथी(फ़रिश्ता) उसकाqarīnuhuهَـٰذَاये हैhādhāمَاजोلَدَىَّमेरे पास हैladayyaعَتِيدٌतैयारʿatīdun٢٣
तथा उसका साथी1 कहेगा : यह है (उसके कर्मों का विवरण) जो मेरे पास तैयार है।
५०:२४
أَلْقِيَاतुम दोनों डाल दोalqiyāفِىin (to)جَهَنَّمَजहन्नम मेंjahannamaكُلَّहरkullaكَفَّارٍबहुत नाशुक्रेkaffārinعَنِيدٍۢबहुत अनाद रखने वाले कोʿanīdin٢٤
तुम दोनों नरक में फेंक दो हर बड़े कृतघ्न को, जो (सत्य से) बहुत दुराग्रह रखने वाला है।
५०:२५
مَّنَّاعٍۢबहुत रोकने वाले कोmannāʿinلِّلْخَيْرِख़ैर सेlil'khayriمُعْتَدٍۢहद से निकलने वालेmuʿ'tadinمُّرِيبٍशक में पड़े हुए कोmurībin٢٥
जो भलाई को बहुत रोकने वाला, सीमा को लाँघने वाला, संदेह करने वाला है।
५०:२६
ٱلَّذِىजिसनेalladhīجَعَلَबना लियाjaʿalaمَعَसाथmaʿaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِلَـٰهًاएक इलाहilāhanءَاخَرَदूसराākharaفَأَلْقِيَاهُपस तुम दोनों डाल दो उसेfa-alqiyāhuفِىin(to)ٱلْعَذَابِthe punishmentl-ʿadhābiٱلشَّدِيدِशदीद अज़ाब मेंl-shadīdi٢٦
जिसने अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बना लिया। अतः तुम दोनों उसे कठोर यातना में डाल दो।
५०:२७
۞ قَالَकहेगाqālaقَرِينُهُۥसाथी (शैतान) उसकाqarīnuhuرَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāمَآनहींأَطْغَيْتُهُۥसरकश बनाया मैं ने उसेaṭghaytuhuوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinكَانَथा वोkānaفِىinضَلَـٰلٍۭगुमराही मेंḍalālinبَعِيدٍۢबहुत दूर कीbaʿīdin٢٧
उसका साथी (शैतान) कहेगा : ऐ हमारे पालनहार! मैंने उसे सरकश नहीं बनाया। परंतु वह खुद ही दूर की गुमराही में था।
५०:२८
قَالَवो फ़रमायगाqālaلَا(Do) notتَخْتَصِمُوا۟ना तुम झगड़ा करोtakhtaṣimūلَدَىَّमेरे पासladayyaوَقَدْहालाँकि तहक़ीक़waqadقَدَّمْتُपहले भेज दी मैं नेqaddamtuإِلَيْكُمतरफ़ तुम्हारेilaykumبِٱلْوَعِيدِवईदbil-waʿīdi٢٨
(अल्लाह ने) फरमाया : मेरे पास झगड़ा मत करो। हालाँकि मैंने तो तुम्हारी ओर चेतावनी का संदेश पहले ही भेज दिया था।
५०:२९
مَاनहींيُبَدَّلُबदली जातीyubaddaluٱلْقَوْلُबातl-qawluلَدَىَّमेरे पासladayyaوَمَآऔर नहीं हूँwamāأَنَا۠मैंanāبِظَلَّـٰمٍۢकोई ज़ुल्म करने वालाbiẓallāminلِّلْعَبِيدِबन्दों परlil'ʿabīdi٢٩
मेरे यहाँ बात बदली नहीं जाती1 तथा मैं बंदों पर कदापि कोई अत्याचार करने वाला नहीं।
५०:३०
يَوْمَजिस दिनyawmaنَقُولُहम कहेंगेnaqūluلِجَهَنَّمَजहन्नम सेlijahannamaهَلِक्याhaliٱمْتَلَأْتِभर गई तूim'talatiوَتَقُولُऔर वो कहेगीwataqūluهَلْक्या हैhalمِن(there) anyminمَّزِيدٍۢकुछ मज़ीदmazīdin٣٠
जिस दिन हम जहन्नम से कहेंगे : क्या तू भर गया? और वह कहेगा : क्या कुछ और है?
५०:३१
وَأُزْلِفَتِऔर क़रीब लाई जाएगीwa-uz'lifatiٱلْجَنَّةُजन्नतl-janatuلِلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों के लिएlil'muttaqīnaغَيْرَnotghayraبَعِيدٍकुछ दूर ना होगीbaʿīdin٣١
तथा जन्नत परहेज़गारों के लिए निकट कर दी जाएगी, जो कुछ दूर न होगी।
५०:३२
هَـٰذَاये हैhādhāمَاवो जोتُوعَدُونَतुम वादा किए जाते थेtūʿadūnaلِكُلِّवास्ते हरlikulliأَوَّابٍबहुत रुजूअ करने वालेawwābinحَفِيظٍۢबहुत हिफ़ाज़त करने वाले केḥafīẓin٣٢
यही है जिसका तुमसे वादा किया जाता था, हर उस व्यक्ति के लिए जो (अपने रब की ओर) बहुत लौटने वाला, (उसके आदेशों की) रक्षा करने वाला हो।
५०:३३
مَّنْजोmanخَشِىَडराkhashiyaٱلرَّحْمَـٰنَरहमान सेl-raḥmānaبِٱلْغَيْبِग़ायबाना/ बिन देखेbil-ghaybiوَجَآءَऔर वो लायाwajāaبِقَلْبٍۢदिलbiqalbinمُّنِيبٍरुजूअ करने वालाmunībin٣٣
जो 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) से बिन देखे डरा तथा (उसकी ओर बहुत ज़्यादा) लौटने वाला दिल लेकर आया।
५०:३४
ٱدْخُلُوهَاदाख़िल हो जाओ उसमेंud'khulūhāبِسَلَـٰمٍۢ ۖसाथ सलामती केbisalāminذَٰلِكَयेdhālikaيَوْمُदिन हैyawmuٱلْخُلُودِहमेशगी काl-khulūdi٣٤
इसमें शांति के साथ दाख़िल हो जाओ। यही हमेशा रहने का दिन है।
५०:३५
لَهُمउनके लिए होगाlahumمَّاजोيَشَآءُونَवो चाहेंगेyashāūnaفِيهَاउसमेंfīhāوَلَدَيْنَاऔर हमारे पासwaladaynāمَزِيدٌۭमज़ीद हैmazīdun٣٥
उनके लिए उसमें वह सब कुछ होगा, जो वे चाहेंगे। तथा हमारे पास और भी बहुत कुछ है।1
५०:३६
وَكَمْऔर कितनी हीwakamأَهْلَكْنَاहलाक कीं हमनेahlaknāقَبْلَهُمउनसे पहलेqablahumمِّنofminقَرْنٍउम्मतेंqarninهُمْवोhumأَشَدُّज़्यादा शदीद थींashadduمِنْهُمउनसेmin'humبَطْشًۭاपकड़ मेंbaṭshanفَنَقَّبُوا۟तो उन्होंने छान मारा थाfanaqqabūفِىthroughoutٱلْبِلَـٰدِमुल्कों कोl-bilādiهَلْक्या हैhalمِنanyminمَّحِيصٍकोई जाए पनाहmaḥīṣin٣٦
तथा हमने इनसे पहले बहुत-से समुदायों को विनष्ट कर दिया, जो शक्ति में इनसे कहीं बढ़-चढ़कर थे। तो उन्होंने नगरों को छान मारा, क्या भागने की कोई जहग है?
५०:३७
إِنَّयक़ीननinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَذِكْرَىٰअलबत्ता नसीहत हैladhik'rāلِمَنवास्ते उसके जोlimanكَانَहोkānaلَهُۥउसके लिएlahuقَلْبٌदिलqalbunأَوْयाawأَلْقَىवो लगाएalqāٱلسَّمْعَकानl-samʿaوَهُوَजबकि वोwahuwaشَهِيدٌۭहाज़िर होshahīdun٣٧
निःसंदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए निश्चय नसीहत है, जिसके पास दिल हो, या वह कान लगाए, इस हाल में कि उसका दिल उपस्थित हो।
५०:३८
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَمَاऔर जोwamāبَيْنَهُمَاदर्मियान है उन दोनों केbaynahumāفِىinسِتَّةِsixsittatiأَيَّامٍۢछ: दिनों मेंayyāminوَمَاऔर नहींwamāمَسَّنَاछुआ हमेंmassanāمِنanyminلُّغُوبٍۢकिसी थकावट नेlughūbin٣٨
तथा निश्चय हमने आकाशों एवं धरती को और जो कुछ उन दोनों के बीच है, छह दिनों में पैदा किया और हमें कोई थकान नहीं हुई।
५०:३९
فَٱصْبِرْपस सब्र कीजिएfa-iṣ'birعَلَىٰऊपरʿalāمَاउसके जोيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaوَسَبِّحْऔर तस्बीह कीजिएwasabbiḥبِحَمْدِसाथ हम्द केbiḥamdiرَبِّكَअपने रब कीrabbikaقَبْلَपहलेqablaطُلُوعِतुलूअ होने सेṭulūʿiٱلشَّمْسِसूरज केl-shamsiوَقَبْلَऔर पहलेwaqablaٱلْغُرُوبِग़ुरूब होने सेl-ghurūbi٣٩
अतः जो कुछ वे कहते हैं, उसपर सब्र से काम लें तथा सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त से पहले1 अपने रब की प्रशंसा के साथ पवित्रता बयान करें।
५०:४०
وَمِنَAnd ofwaminaٱلَّيْلِऔर रात में सेal-layliفَسَبِّحْهُपस तस्बीह कीजिए उसकीfasabbiḥ'huوَأَدْبَـٰرَऔर बादwa-adbāraٱلسُّجُودِसजदों केl-sujūdi٤٠
तथा रात के कुछ भाग में फिर उसकी पवित्रता का वर्णन करें और सजदे के बाद की घड़ियों में भी।
५०:४१
وَٱسْتَمِعْऔर ग़ौर से सुनिएwa-is'tamiʿيَوْمَजिस दिनyawmaيُنَادِपुकारेगाyunādiٱلْمُنَادِपुकारने वालाl-munādiمِنfromminمَّكَانٍۢएक जगह सेmakāninقَرِيبٍۢक़रीब कीqarībin٤١
तथा कान लगाकर सुनें, जिस दिन पुकारने वाला1 एक निकट स्थान से पुकारेगा।
५०:४२
يَوْمَजिस दिनyawmaيَسْمَعُونَवो सुनेंगेyasmaʿūnaٱلصَّيْحَةَचिंघाड़ कोl-ṣayḥataبِٱلْحَقِّ ۚसाथ हक़ केbil-ḥaqiذَٰلِكَये होगाdhālikaيَوْمُदिनyawmuٱلْخُرُوجِनिकलने काl-khurūji٤٢
जिस दिन वे भयंकर आवाज़ को सत्य के साथ सुनेंगे। यह निकलने का दिन है।
५०:४३
إِنَّاबेशक हमinnāنَحْنُहम हीnaḥnuنُحْىِۦहम ज़िन्दा करते हैंnuḥ'yīوَنُمِيتُऔर हम मौत देते हैंwanumītuوَإِلَيْنَاऔर तरफ़ हमारे हीwa-ilaynāٱلْمَصِيرُलौटना हैl-maṣīru٤٣
निश्चय हम ही जीवन देते हैं और हम ही मारते हैं और हमारी ही ओर लौटकर आना है।
५०:४४
يَوْمَजिस दिनyawmaتَشَقَّقُशक़ हो जाएगीtashaqqaquٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuعَنْهُمْउनसेʿanhumسِرَاعًۭا ۚतेज़ दौड़ने वाले होंगेsirāʿanذَٰلِكَये हैdhālikaحَشْرٌइकट्ठा करना / हशरḥashrunعَلَيْنَاहम परʿalaynāيَسِيرٌۭबहुत आसानyasīrun٤٤
जिस दिन धरती उनसे फट जाएगी, जबकि वे तेज़ दौड़ने वाले होंगे। यह एकत्र करना हमारे लिए बहुत सरल है।
५०:४५
نَّحْنُहमnaḥnuأَعْلَمُज़्यादा जानते हैंaʿlamuبِمَاउसे जोbimāيَقُولُونَ ۖवो कहते हैंyaqūlūnaوَمَآऔर नहींwamāأَنتَआपantaعَلَيْهِمउन परʿalayhimبِجَبَّارٍۢ ۖज़बरदस्ती करने वालेbijabbārinفَذَكِّرْपस नसीहत कीजिएfadhakkirبِٱلْقُرْءَانِसाथ क़ुरआन केbil-qur'āniمَنउसे जोmanيَخَافُडरता होyakhāfuوَعِيدِमेरी वईद सेwaʿīdi٤٥
हम उसे अधिक जानने वाले हैं, जो कुछ वे कहते हैं। और आप उनपर कोई ज़बरदस्ती करने वाले नहीं हैं। अतः आप क़ुरआन द्वारा उस व्यक्ति को उपदेश दें, जो मेरे अज़ाब के वादे से डरता है।