४९

अल-हुजुरात

मदनी १८ आयतें पारा २६
الحجرات

सूरह अल-हुजुरात (الحجرات) पवित्र क़ुरआन का ४९ वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें १८ आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४९:१
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notتُقَدِّمُوا۟ना तुम क़दम बढ़ाओtuqaddimūبَيْنَbefore Allahbaynaيَدَىِआगेyadayiٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiوَرَسُولِهِۦ ۖऔर उसके रसूल सेwarasūlihiوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَ ۚअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaسَمِيعٌख़ूब सुनने वाला हैsamīʿunعَلِيمٌۭख़ूब जानने वाला हैʿalīmun١
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढ़ो1 और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
४९:२
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notتَرْفَعُوٓا۟ना तुम ऊँचा करोtarfaʿūأَصْوَٰتَكُمْअपनी आवाज़ों कोaṣwātakumفَوْقَऊपरfawqaصَوْتِआवाज़ केṣawtiٱلنَّبِىِّनबी कीl-nabiyiوَلَاऔर नाwalāتَجْهَرُوا۟तुम बुलन्द आवाज़ से करोtajharūلَهُۥउनसेlahuبِٱلْقَوْلِबातbil-qawliكَجَهْرِमानिन्द बुलन्द करने केkajahriبَعْضِكُمْतुम्हारे बाज़ केbaʿḍikumلِبَعْضٍबाज़ के लिएlibaʿḍinأَنकिanتَحْبَطَ(ना) ज़ाया हो जाऐंtaḥbaṭaأَعْمَـٰلُكُمْआमाल तुम्हारेaʿmālukumوَأَنتُمْऔर तुमwa-antumلَا(do) notتَشْعُرُونَना शऊर रखते होtashʿurūna٢
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अपनी आवाज़ें, नबी की आवाज़ से ऊँची न करो और न आपसे ऊँची आवाज़ में बात करो, जैसे तुम एक-दूसरे से ऊँची आवाज़ में बात करते हो। ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म व्यर्थ हो जाएँ और तुम्हें पता (भी) न हो।
४९:३
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيَغُضُّونَपस्त रखते हैंyaghuḍḍūnaأَصْوَٰتَهُمْअपनी आवाज़ों कोaṣwātahumعِندَपासʿindaرَسُولِ(of the) Messenger of Allah rasūliٱللَّهِरसूल अल्लाह केl-lahiأُو۟لَـٰٓئِكَयही वो लोग हैंulāikaٱلَّذِينَजोalladhīnaٱمْتَحَنَआज़मा लिएim'taḥanaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuقُلُوبَهُمْदिल उनकेqulūbahumلِلتَّقْوَىٰ ۚतक़्वा के लिएlilttaqwāلَهُمउनके लिएlahumمَّغْفِرَةٌۭबख़्शिश हैmaghfiratunوَأَجْرٌऔर अजर हैwa-ajrunعَظِيمٌबहुत बड़ाʿaẓīmun٣
निःसंदेह जो लोग अल्लाह के रसूल के पास अपनी आवाज़ें धीमी रखते हैं, यही लोग हैं, जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँच लिया है। उनके लिए बड़ी क्षमा तथा महान प्रतिफल है।
४९:४
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيُنَادُونَكَआवाज़ देते हैं आपकोyunādūnakaمِنfromminوَرَآءِबाहर सेwarāiٱلْحُجُرَٰتِहुजरों केl-ḥujurātiأَكْثَرُهُمْअक्सर उनकेaktharuhumلَا(do) notيَعْقِلُونَनहीं वो अक़्ल रखतेyaʿqilūna٤
निःसंदेह जो लोग आपको कमरों के बाहर से पुकारते1 हैं, उनमें से अधिकांश नहीं समझते।
४९:५
وَلَوْऔर अगरwalawأَنَّهُمْये कि वोannahumصَبَرُوا۟वो सब्र करतेṣabarūحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāتَخْرُجَआप निकलतेtakhrujaإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimلَكَانَअलबत्ता होताlakānaخَيْرًۭاबेहतरkhayranلَّهُمْ ۚउनके लिएlahumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٥
और यदि वे धैर्य1 रखते, यहाँ तक कि आप खुद ही उनकी ओर निकलकर आते, तो निश्चय यह उनके लिए बेहतर होता। तथा अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
४९:६
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِنअगरinجَآءَكُمْलाए तुम्हारे पासjāakumفَاسِقٌۢकोई फ़ासिक़fāsiqunبِنَبَإٍۢकिसी ख़बर कोbinaba-inفَتَبَيَّنُوٓا۟तो तहक़ीक़ कर लिया करोfatabayyanūأَنकिanتُصِيبُوا۟(ना) तुम तक्लीफ़ पहुँचाओtuṣībūقَوْمًۢاकिसी क़ौम कोqawmanبِجَهَـٰلَةٍۢजिहालत सेbijahālatinفَتُصْبِحُوا۟फिर तुम हो जाओfatuṣ'biḥūعَلَىٰऊपरʿalāمَاउसके जोفَعَلْتُمْकिया तुमनेfaʿaltumنَـٰدِمِينَनादिमnādimīna٦
ऐ ईमान वालो! यदि कोई दुराचारी (अवज्ञाकारी)1 तुम्हारे पास कोई सूचना लेकर आए, तो उसकी अच्छी तरह जाँच-पड़ताल कर लिया करो। ऐसा न हो कि तुम किसी समुदाय को अज्ञानता के कारण हानि पहुँचा दो, फिर अपने किए पर पछताओ।
४९:७
وَٱعْلَمُوٓا۟और जान लोwa-iʿ'lamūأَنَّबेशकannaفِيكُمْतुम मेंfīkumرَسُولَरसूल हैंrasūlaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiلَوْअगरlawيُطِيعُكُمْवो कहा मानें तुम्हाराyuṭīʿukumفِىinكَثِيرٍۢबहुत सेkathīrinمِّنَofminaٱلْأَمْرِमामलात मेंl-amriلَعَنِتُّمْअलबत्ता मुश्किल में पड़ जाओ तुमlaʿanittumوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaٱللَّهَअल्लाह नेl-lahaحَبَّبَमहबूब बना दियाḥabbabaإِلَيْكُمُतुम्हारे लिएilaykumuٱلْإِيمَـٰنَईमान कोl-īmānaوَزَيَّنَهُۥऔर उसने मुज़य्यन कर दिया उसेwazayyanahuفِىinقُلُوبِكُمْतुम्हारे दिलों मेंqulūbikumوَكَرَّهَऔर उसने नापसंदीदा कर दियाwakarrahaإِلَيْكُمُतुम्हारी तरफ़ilaykumuٱلْكُفْرَकुफ़्रl-kuf'raوَٱلْفُسُوقَऔर गुनाहwal-fusūqaوَٱلْعِصْيَانَ ۚऔर नाफ़रमानी कोwal-ʿiṣ'yānaأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaهُمُवोhumuٱلرَّٰشِدُونَजो हिदायत याफ़्ता हैंl-rāshidūna٧
तथा जान लो कि तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल मौजूद हैं। यदि वह बहुत-से विषयों में तुम्हारी बात मान लें, तो तुम कठिनाई में पड़ जाओ। परंतु अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे दिलों में सुशोभित कर दिया तथा तुम्हारे लिए कुफ़्र और पाप और अवज्ञा को अप्रिय बना दिया, यही लोग हिदायत पर चलने वाले हैं।
४९:८
فَضْلًۭاफ़ज़ल हैfaḍlanمِّنَfrom Allahminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiوَنِعْمَةًۭ ۚऔर नेअमतwaniʿ'matanوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunحَكِيمٌۭख़ूब हिकमत वाला हैḥakīmun٨
अल्लाह की कृपा और अनुग्रह के कारण और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
४९:९
وَإِنऔर अगरwa-inطَآئِفَتَانِदो गिरोहṭāifatāniمِنَamongminaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों में सेl-mu'minīnaٱقْتَتَلُوا۟वो बाहम लड़ पड़ेंiq'tatalūفَأَصْلِحُوا۟तो सुलह करा दोfa-aṣliḥūبَيْنَهُمَا ۖदर्मियान उन दोनों केbaynahumāفَإِنۢफिर अगरfa-inبَغَتْज़्यादती करेbaghatإِحْدَىٰهُمَاउन दोनों में से एकiḥ'dāhumāعَلَىonʿalāٱلْأُخْرَىٰदूसरे परl-ukh'rāفَقَـٰتِلُوا۟तो लड़ोfaqātilūٱلَّتِىउससे जोallatīتَبْغِىज़्यादती करेtabghīحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāتَفِىٓءَवो पलट आएtafīaإِلَىٰٓतरफ़ilāأَمْرِ(the) commandamriٱللَّهِ ۚअल्लाह के हुक्म केl-lahiفَإِنफिर अगरfa-inفَآءَتْवो पलट आएfāatفَأَصْلِحُوا۟तो सुलह करा दोfa-aṣliḥūبَيْنَهُمَاदर्मियान उन दोनों केbaynahumāبِٱلْعَدْلِसाथ अदल केbil-ʿadliوَأَقْسِطُوٓا۟ ۖऔर इन्साफ़ करोwa-aqsiṭūإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيُحِبُّवो पसंद करता हैyuḥibbuٱلْمُقْسِطِينَइन्साफ़ करने वालों कोl-muq'siṭīna٩
और यदि ईमान वालों के दो गिरोह आपस में लड़ पड़ें, तो उनके बीच सुलह करा दो। फिर यदि दोनों में से एक, दूसरे पर अत्याचार करे, तो उस गिरोह से लड़ो, जो अत्याचार करता है, यहाँ तक कि वह अल्लाह के आदेश की ओर पलट आए। फिर यदि वह पलट1 आए, तो उनके बीच न्याय के साथ सुलह करा दो, तथा न्याय करो। निःसंदेह अल्लाह न्याय करने वालों से प्रेम करता है।
४९:१०
إِنَّمَاबेशकinnamāٱلْمُؤْمِنُونَमोमिन तोl-mu'minūnaإِخْوَةٌۭभाई-भाई हैंikh'watunفَأَصْلِحُوا۟तो सुलह करा दोfa-aṣliḥūبَيْنَदर्मियानbaynaأَخَوَيْكُمْ ۚअपने दो भाइयों केakhawaykumوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتُرْحَمُونَतुम रहम किए जाओtur'ḥamūna١٠
निःसंदेह ईमान वाले तो भाई ही हैं। अतः अपने दो भाइयों के बीच सुलह करा दो। तथा अल्लाह से डरो, ताकि तुम पर दया की जाए।
४९:११
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Let) notيَسْخَرْना मज़ाक़ उड़ाएyaskharقَوْمٌۭकोई क़ौमqawmunمِّن[of]minقَوْمٍकिसी क़ौम काqawminعَسَىٰٓहो सकता हैʿasāأَنकिanيَكُونُوا۟हों वोyakūnūخَيْرًۭاबेहतरkhayranمِّنْهُمْउनसेmin'humوَلَاऔर नाwalāنِسَآءٌۭऔरतेंnisāonمِّن[of]minنِّسَآءٍऔरतों काnisāinعَسَىٰٓहो सकता हैʿasāأَنकिanيَكُنَّहों वोyakunnaخَيْرًۭاबेहतरkhayranمِّنْهُنَّ ۖउनसेmin'hunnaوَلَاऔर नाwalāتَلْمِزُوٓا۟तुम ऐब लगाओtalmizūأَنفُسَكُمْअपनों कोanfusakumوَلَاऔर नाwalāتَنَابَزُوا۟तुम चिढ़ाओ एक दूसरे कोtanābazūبِٱلْأَلْقَـٰبِ ۖसाथ(बुरे) अलक़ाब केbil-alqābiبِئْسَकितना बुरा हैbi'saٱلِٱسْمُनामl-s'muٱلْفُسُوقُफ़िस्क़ मेंl-fusūquبَعْدَबादbaʿdaٱلْإِيمَـٰنِ ۚईमान केl-īmāniوَمَنऔर जो कोईwamanلَّمْनाlamيَتُبْतौबा करेyatubفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلظَّـٰلِمُونَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimūna١١
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! एक जाति दूसरी जाति का उपहास न करे, हो सकता है कि वे उनसे बेहतर हों। और न कोई स्त्रियाँ अन्य स्त्रियों की हँसी उड़ाएँ, हो सकता है कि वे उनसे अच्छी हों। और न अपनों पर दोष लगाओ, और न एक-दूसरे को बुरे नामों से पुकारो। ईमान के बाद अवज्ञाकारी होना बुरा नाम है। और जिसने तौबा न की, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
४९:१२
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūٱجْتَنِبُوا۟इज्तिनाब करो /बचोij'tanibūكَثِيرًۭاबहुत ज़्यादाkathīranمِّنَofminaٱلظَّنِّगुमान करने सेl-ẓaniإِنَّबेशकinnaبَعْضَबाज़baʿḍaٱلظَّنِّगुमानl-ẓaniإِثْمٌۭ ۖगुनाह हैंith'munوَلَاऔर नाwalāتَجَسَّسُوا۟तुम तजस्सुस करोtajassasūوَلَاऔर नाwalāيَغْتَبग़ीबत करेyaghtabبَّعْضُكُمबाज़ तुम्हाराbaʿḍukumبَعْضًا ۚबाज़ कीbaʿḍanأَيُحِبُّक्या पसंद करता हैayuḥibbuأَحَدُكُمْतुम में से कोई एकaḥadukumأَنकिanيَأْكُلَवो खाएyakulaلَحْمَगोश्तlaḥmaأَخِيهِअपने भाईakhīhiمَيْتًۭاमुर्दा काmaytanفَكَرِهْتُمُوهُ ۚपस तुम नापसंद करते हो उसेfakarih'tumūhuوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَ ۚअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaتَوَّابٌۭबहुत तौबा क़ुबूल करने वाला हैtawwābunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun١٢
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! बहुत-से गुमानों से बचो। निश्चय ही कुछ गुमान पाप हैं। और जासूसी न करो, और न तुममें से कोई दूसरे की ग़ीबत1 करे। क्या तुममें से कोई पसंद करता है कि अपने भाई का मांस खाए, जबकि वह मरा हुआ हो? सो तुम उसे नापसंद करते हो। तथा अल्लाह से डरो। निश्चय अल्लाह बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयालु है।
४९:१३
يَـٰٓأَيُّهَاO mankindyāayyuhāٱلنَّاسُऐ लोगोl-nāsuإِنَّاबेशक हमinnāخَلَقْنَـٰكُمपैदा किया हमने तुम्हेंkhalaqnākumمِّنfromminذَكَرٍۢएक मर्द सेdhakarinوَأُنثَىٰऔर एक औरत सेwa-unthāوَجَعَلْنَـٰكُمْऔर बनाया तुम्हेंwajaʿalnākumشُعُوبًۭاक़ौमेंshuʿūbanوَقَبَآئِلَऔर क़बीलेwaqabāilaلِتَعَارَفُوٓا۟ ۚताकि तुम एक दूसरे को पहचानोlitaʿārafūإِنَّबेशकinnaأَكْرَمَكُمْतुम में सब से ज़्यादा इज़्ज़त वालाakramakumعِندَnearʿindaٱللَّهِअल्लाह के नज़दीकl-lahiأَتْقَىٰكُمْ ۚतुम में सब से ज़्यादा तक़्वा वाला हैatqākumإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunخَبِيرٌۭख़ूब ख़बर रखने वाला हैkhabīrun١٣
ऐ मनुष्यो! हमने तुम्हें एक नर और एक मादा से पैदा किया तथा हमने तुम्हें जातियों और क़बीलों में कर दिए, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। निःसंदेह अल्लाह के निकट तुममें सबसे अधिक सम्मान वाला वह है, जो तुममें सबसे अधिक तक़्वा वाला है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूरी ख़बर रखने वाला है।
४९:१४
۞ قَالَتِकहाqālatiٱلْأَعْرَابُदेहातियों / बदवियों नेl-aʿrābuءَامَنَّا ۖईमान लाए हमāmannāقُلकह दीजिएqulلَّمْनहींlamتُؤْمِنُوا۟तुम ईमान लाएtu'minūوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinقُولُوٓا۟कहोqūlūأَسْلَمْنَاइस्लाम लाए हमaslamnāوَلَمَّاऔर अभी तक नहींwalammāيَدْخُلِदाख़िल हुआyadkhuliٱلْإِيمَـٰنُईमानl-īmānuفِىinقُلُوبِكُمْ ۖतुम्हारे दिलों मेंqulūbikumوَإِنऔर अगरwa-inتُطِيعُوا۟तुम इताअत करोगेtuṭīʿūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल कीwarasūlahuلَاnotيَلِتْكُمनहीं वो कमी करेगा तुमसेyalit'kumمِّنْofminأَعْمَـٰلِكُمْतुम्हारे आमाल में सेaʿmālikumشَيْـًٔا ۚकुछ भीshayanإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun١٤
(कुछ) बद्दुओं ने कहा : हम ईमान ले आए। आप कह दें : तुम ईमान नहीं लाए। परंतु यह कहो कि हम इस्लाम लाए (आज्ञाकारी हो गए)। और अभी तक ईमान तुम्हारे दिलों में प्रवेश नहीं किया। और यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करोगे, तो वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी कमी नहीं करेगा। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।1
४९:१५
إِنَّمَاबेशकinnamāٱلْمُؤْمِنُونَमोमिन तोl-mu'minūnaٱلَّذِينَवो लोग हैं जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَرَسُولِهِۦऔर उसके रसूल परwarasūlihiثُمَّफिरthummaلَمْनहींlamيَرْتَابُوا۟वो शक में पड़ेyartābūوَجَـٰهَدُوا۟और उन्होंने जिहाद कियाwajāhadūبِأَمْوَٰلِهِمْसाथ अपने मालों केbi-amwālihimوَأَنفُسِهِمْऔर अपनी जानों केwa-anfusihimفِىinسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِ ۚअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaهُمُवोhumuٱلصَّـٰدِقُونَजो सच्चे हैl-ṣādiqūna١٥
निःसंदेह मोमिन तो वही लोग हैं, जो अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाए, फिर उन्होंने संदेह नहीं किया तथा उन्होंने अपने धनों और अपने प्राणों से अल्लाह की राह में जिहाद किया। यही लोग सच्चे हैं।
४९:१६
قُلْकह दीजिएqulأَتُعَلِّمُونَक्या तुम बताते होatuʿallimūnaٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaبِدِينِكُمْअपना दीनbidīnikumوَٱللَّهُहालाँकि अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजो कुछفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَاऔर जो कुछwamāفِى(is) inٱلْأَرْضِ ۚज़मीन में हैl-arḍiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ काshayinعَلِيمٌۭख़ूब इल्म रखने वाला हैʿalīmun١٦
आप कह दें : क्या तुम अल्लाह को अपने धर्म से अवगत करा रहे हो? हालाँकि अल्लाह जानता है, जो कुछ आकाशों में है और जो धरती में है। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है।
४९:१७
يَمُنُّونَवो एहसान जताते हैyamunnūnaعَلَيْكَआप परʿalaykaأَنْकिanأَسْلَمُوا۟ ۖवो इस्लाम ले आएaslamūقُلकह दीजिएqulلَّا(Do) notتَمُنُّوا۟ना तुम एहसान जताओtamunnūعَلَىَّमुझ परʿalayyaإِسْلَـٰمَكُم ۖअपने इस्लाम काis'lāmakumبَلِबल्किbaliٱللَّهُअल्लाहl-lahuيَمُنُّवो एहसान करता हैyamunnuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumأَنْकिanهَدَىٰكُمْउसने हिदायत दी तुम्हेंhadākumلِلْإِيمَـٰنِइमान के लिएlil'īmāniإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna١٧
वे आपपर एहसान जताते हैं कि वे इस्लाम ले आए। आप कह दें : मुझपर अपने इस्लाम का एहसान न जताओ। बल्कि अल्लाह तुमपर एहसान रखता है कि उसने तुम्हें ईमान की तरफ़ हिदायत दी, यदि तुम सच्चे हो।
४९:१८
إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuغَيْبَग़ैबghaybaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन केwal-arḍiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuبَصِيرٌۢख़ूब जानने वाला हैbaṣīrunبِمَاउसे जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūna١٨
निःसंदेह अल्लाह आकाशों तथा धरती की छिपी चीज़ों को जानता है। और अल्लाह ख़ूब देखने वाला है जो कुछ तुम करते हो।