४८
अल-फ़त्ह
الفتح
सूरह अल-फ़त्ह (الفتح) पवित्र क़ुरआन का ४८ वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें २९ आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४८:१
إِنَّاबेशक हमinnāفَتَحْنَاफ़तह अता की हमनेfataḥnāلَكَआपकोlakaفَتْحًۭاफ़तहfatḥanمُّبِينًۭاखुलीmubīnan١
निःसंदेह हमने आपको एक स्पष्ट विजय1 प्रदान की।
४८:२
لِّيَغْفِرَताकि बख़्श देliyaghfiraلَكَआपके लिएlakaٱللَّهُअल्लाहl-lahuمَاजोmāتَقَدَّمَपहले हुआtaqaddamaمِنofminذَنۢبِكَआपके क़ुसूर में सेdhanbikaوَمَاऔर जोwamāتَأَخَّرَबाद में हुआta-akharaوَيُتِمَّऔर वो पूरा कर देwayutimmaنِعْمَتَهُۥअपनी नेअमत कोniʿ'matahuعَلَيْكَआप परʿalaykaوَيَهْدِيَكَऔर वो रहनुमाई करे आपकीwayahdiyakaصِرَٰطًۭا(तरफ़) रास्तेṣirāṭanمُّسْتَقِيمًۭاसीधे केmus'taqīman٢
ताकि अल्लाह आपके अगले और पिछले गुनाहों को क्षमा1 कर दे तथा आपपर अपनी अनुकंपा पूर्ण कर दे और आपको सीधे मार्ग पर चलाए।
४८:३
وَيَنصُرَكَऔर मदद फ़रमाए आपकीwayanṣurakaٱللَّهُअल्लाहl-lahuنَصْرًاमददnaṣranعَزِيزًاज़बरदस्तʿazīzan٣
तथा अल्लाह आपकी भरपूर सहायता करे।
४८:४
هُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىٓजिसनेalladhīأَنزَلَनाज़िल कीanzalaٱلسَّكِينَةَसकीनतl-sakīnataفِىin(to)fīقُلُوبِदिलों मेंqulūbiٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों केl-mu'minīnaلِيَزْدَادُوٓا۟ताकि वो बढ़ जाऐंliyazdādūإِيمَـٰنًۭاईमान मेंīmānanمَّعَसाथmaʿaإِيمَـٰنِهِمْ ۗअपने ईमान केīmānihimوَلِلَّهِऔर अल्लाह ही के लिए हैंwalillahiجُنُودُलश्करjunūduٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन केwal-arḍiوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلِيمًاबहुत इल्म वालाʿalīmanحَكِيمًۭاख़ूब हिकमत वालाḥakīman٤
वही है, जिसने ईमान वालों के दिलों में शांति उतारी, ताकि वे अपने ईमान के साथ ईमान में और बढ़ जाएँ। और आकाशों तथा धरती की सेनाएँ अल्लाह ही की हैं। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
४८:५
لِّيُدْخِلَताकि वो दाख़िल करेliyud'khilaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिन मर्दोंl-mu'minīnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتِऔर मोमिन औरतों कोwal-mu'minātiجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَاउसमेंfīhāوَيُكَفِّرَऔर वो दूर कर देwayukaffiraعَنْهُمْउनसेʿanhumسَيِّـَٔاتِهِمْ ۚबुराइयाँ उनकीsayyiātihimوَكَانَऔर हैwakānaذَٰلِكَयेdhālikaعِندَwithʿindaٱللَّهِअल्लाह के नज़दीकl-lahiفَوْزًاकामयाबीfawzanعَظِيمًۭاबहुत बड़ीʿaẓīman٥
ताकि वह ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों को ऐसे बागों में दाखिल करे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, वे उनमें सदैव रहेंगे। तथा उनसे उनकी बुराइयाँ दूर कर दे और यह अल्लाह के निकट हमेशा बड़ी कामयाबी है।
४८:६
وَيُعَذِّبَऔर वो अज़ाब देwayuʿadhibaٱلْمُنَـٰفِقِينَमुनाफ़िक़ मर्दोंl-munāfiqīnaوَٱلْمُنَـٰفِقَـٰتِऔर मुनाफ़िक़ औरतों कोwal-munāfiqātiوَٱلْمُشْرِكِينَऔर मुशरिक मर्दोंwal-mush'rikīnaوَٱلْمُشْرِكَـٰتِऔर मुशरिक औरतों कोwal-mush'rikātiٱلظَّآنِّينَजो गुमान करने वाले हैंl-ẓānīnaبِٱللَّهِअल्लाह के बारे मेंbil-lahiظَنَّगुमानẓannaٱلسَّوْءِ ۚबुराl-sawiعَلَيْهِمْउन्हीं पर हैʿalayhimدَآئِرَةُगर्दिशdāiratuٱلسَّوْءِ ۖबुरीl-sawiوَغَضِبَऔर ग़ज़बनाक हुआwaghaḍibaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَيْهِمْउन परʿalayhimوَلَعَنَهُمْऔर उसने लानत की उन परwalaʿanahumوَأَعَدَّऔर उसने तैयार कर रखा हैwa-aʿaddaلَهُمْउनके लिएlahumجَهَنَّمَ ۖजहन्नम कोjahannamaوَسَآءَتْऔर वो बहुत ही बुराwasāatمَصِيرًۭاठिकाना हैmaṣīran٦
और (ताकि) उन मुनाफ़िक़ पुरुषों एवं मुनाफ़िक़ स्त्रियों तथा मुश्रिक पुरुषों एवं मुश्रिक स्त्रियों को यातना दे, जो अल्लाह के संबंध में बुरा गुमान रखते हैं। बुराई का फेरा उन्हीं पर है। उनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ और उसने उनपर लानत की तथा उनके लिए जहन्नम तैयार कर रखी है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
४८:७
وَلِلَّهِऔर अल्लाह ही के लिए हैंwalillahiجُنُودُलश्करjunūduٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन केwal-arḍiوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَزِيزًاबहुत ज़बरदस्तʿazīzanحَكِيمًاख़ूब हिकमत वालाḥakīman٧
तथा अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती की सेनाएँ हैं और अल्लाह हमेशा से सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।1
४८:८
إِنَّآबेशक हमinnāأَرْسَلْنَـٰكَभेजा हमने आपकोarsalnākaشَـٰهِدًۭاगवाही देने वालाshāhidanوَمُبَشِّرًۭاऔर ख़ुशख़बरी देने वालाwamubashiranوَنَذِيرًۭاऔर डराने वाला बनाकरwanadhīran٨
निःसंदेह हमने आपको गवाही देने वाला और खुशख़बरी देने वाला और सावधान करने वाला बनाकर भेजा है।
४८:९
لِّتُؤْمِنُوا۟ताकि तुम ईमान लाओlitu'minūبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَرَسُولِهِۦऔर उसके रसूल परwarasūlihiوَتُعَزِّرُوهُऔर तुम क़ुव्वत दो उसेwatuʿazzirūhuوَتُوَقِّرُوهُऔर तुम ताज़ीम करो उसकीwatuwaqqirūhuوَتُسَبِّحُوهُऔर तुम तस्बीह बयान करोwatusabbiḥūhuبُكْرَةًۭसुबहbuk'ratanوَأَصِيلًاऔर शामwa-aṣīlan٩
ताकि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसका सम्मान करो और दिन के आरंभ एवं अंत में उसकी पवित्रता का गान करो।
४८:१०
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيُبَايِعُونَكَबैअत करते हैं आपसेyubāyiʿūnakaإِنَّمَاबेशकinnamāيُبَايِعُونَवो बैअत करते हैyubāyiʿūnaٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaيَدُहाथyaduٱللَّهِअल्लाह काl-lahiفَوْقَऊपर हैfawqaأَيْدِيهِمْ ۚउनके हाथों केaydīhimفَمَنतो जो कोईfamanنَّكَثَअहद तोड़ देnakathaفَإِنَّمَاतो बेशकfa-innamāيَنكُثُवो अहद तोड़ता हैyankuthuعَلَىٰagainstʿalāنَفْسِهِۦ ۖअपने ही नफ़्स परnafsihiوَمَنْऔर जो कोईwamanأَوْفَىٰपूरा करेawfāبِمَاउसे जोbimāعَـٰهَدَअहद किया था उसनेʿāhadaعَلَيْهُउस परʿalayhuٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaفَسَيُؤْتِيهِतो अनक़रीब वो देगा उसेfasayu'tīhiأَجْرًاअजरajranعَظِيمًۭاबहुत बड़ाʿaẓīman١٠
निःसंदेह वे लोग, जो आपसे बैअत करते हैं, वे असल में अल्लाह से बैअत1 करते हैं, अल्लाह का हाथ उनके हाथों के ऊपर है। फिर जिस किसी ने वचन तोड़ा, तो वह अपने आप ही पर वचन तोड़ता है। तथा जिसने, अल्लाह से जो वादा किया था, उसे पूरा किया, तो वह जल्द ही उसे बहुत बड़ा प्रतिफल देगा।
४८:११
سَيَقُولُअनक़रीब कहेंगेsayaqūluلَكَआपकोlakaٱلْمُخَلَّفُونَपीछे रहने वालेl-mukhalafūnaمِنَofminaٱلْأَعْرَابِदेहाती/ बदवियों में सेl-aʿrābiشَغَلَتْنَآकि मश्ग़ूल कर लिया हमेंshaghalatnāأَمْوَٰلُنَاहमारे मालों नेamwālunāوَأَهْلُونَاऔर हमारे घर वालों नेwa-ahlūnāفَٱسْتَغْفِرْपस बख़्शिश माँगिएfa-is'taghfirلَنَا ۚहमारे लिएlanāيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaبِأَلْسِنَتِهِمअपनी ज़बानों सेbi-alsinatihimمَّاजोmāلَيْسَनहींlaysaفِىinfīقُلُوبِهِمْ ۚउनके दिलों मेंqulūbihimقُلْकह दीजिएqulفَمَنपस कौनfamanيَمْلِكُमालिक होगाyamlikuلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنَagainstminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiشَيْـًٔاकिसी चीज़ कshayanإِنْअगरinأَرَادَउसने इरादा कियाarādaبِكُمْतुम्हारे साथbikumضَرًّاकिसी नुक़्सान काḍarranأَوْयाawأَرَادَउसने इरादा कियाarādaبِكُمْतुम्हारे साथbikumنَفْعًۢا ۚकिसी नफ़ा काnafʿanبَلْबल्किbalكَانَहैkānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِمَاउससे जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaخَبِيرًۢاपूरा बाख़बरkhabīran١١
शीघ्र ही देहातियों में से पीछे छोड़ दिए जाने वाले1 लोग आपसे कहेंगे : हमारे धन और हमारे घरवालों ने हमें व्यस्त रखा। अतः आप हमारे लिए क्षमा की प्रार्थना करें। वे अपनी ज़बानों से वह बात कहते हैं, जो उनके दिलों में नहीं है। आप कह दीजिए कि कौन है, जो अल्लाह के मुकाबले में तुम्हारे लिए किसी चीज़ का अधिकार रखता है, यदि वह तुम्हें कोई हानि पहुँचाना चाहे या तुम्हें कोई लाभ पहुँचाने का इरादा करे? बल्कि तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह हमेशा से उसकी खबर रखता है।
४८:१२
بَلْबल्किbalظَنَنتُمْगुमान किया तुमनेẓanantumأَنकिanلَّنहरगिज़ नहींlanيَنقَلِبَपलट कर आऐंगेyanqalibaٱلرَّسُولُरसूलl-rasūluوَٱلْمُؤْمِنُونَऔर मोमिनwal-mu'minūnaإِلَىٰٓtoilāأَهْلِيهِمْतरफ़ अपने घर वालों केahlīhimأَبَدًۭاकभी भीabadanوَزُيِّنَऔर मुज़य्यन कर दी गईwazuyyinaذَٰلِكَये (बात)dhālikaفِىinfīقُلُوبِكُمْतुम्हारे दिलों मेंqulūbikumوَظَنَنتُمْऔर गुमान किया तुमनेwaẓanantumظَنَّगुमानẓannaٱلسَّوْءِबुराl-sawiوَكُنتُمْऔर हो तुमwakuntumقَوْمًۢاलोगqawmanبُورًۭاहलाक होने वालेbūran١٢
बल्कि, तुमने सोचा था कि रसूल और ईमान वाले अपने परिजनों की ओर कभी वापस ही नहीं आएँगे, और यह बात तुम्हारे दिलों में सुंदर बना दी गई। और तुमने बहुत बुरा गुमान किया, और तुम नाश होने वाले लोग थे।
४८:१३
وَمَنऔर जो कोईwamanلَّمْनाlamيُؤْمِنۢवो ईमान लायाyu'minبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَرَسُولِهِۦऔर उसके रसूल परwarasūlihiفَإِنَّآतो बेशक हमfa-innāأَعْتَدْنَاतैयार कर रखा है हमनेaʿtadnāلِلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों के लिएlil'kāfirīnaسَعِيرًۭاभड़कती हुई आग कोsaʿīran١٣
और जो व्यक्ति अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान न लाया, तो निश्चय हमने इनकार करने वालों के लिए दहकती हुई आग तैयार कर रखी है।
४८:१४
وَلِلَّهِऔर अल्लाह ही के लिए हैwalillahiمُلْكُबादशाहतmul'kuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन कीwal-arḍiيَغْفِرُवो बख़्श देगाyaghfiruلِمَنजिसेlimanيَشَآءُवो चाहेगाyashāuوَيُعَذِّبُऔर वो अज़ाब देगाwayuʿadhibuمَنजिसेmanيَشَآءُ ۚवो चाहेगाyashāuوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuغَفُورًۭاबहुत बख़्शने वालाghafūranرَّحِيمًۭاनिहायत रहम करने वालाraḥīman١٤
और आकाशों तथा धरती का राज्य अल्लाह ही के लिए है। वह जिसे चाहता है क्षमा कर देता है और जिसे चाहता है दंड देता है, और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
४८:१५
سَيَقُولُअनक़रीब कहेंगेsayaqūluٱلْمُخَلَّفُونَपीछे रहने वालेl-mukhalafūnaإِذَاजबidhāٱنطَلَقْتُمْचलोगे तुमinṭalaqtumإِلَىٰtowardsilāمَغَانِمَतरफ़ ग़नीमतों केmaghānimaلِتَأْخُذُوهَاताकि तुम ले सको उन्हेंlitakhudhūhāذَرُونَاछोड़ दो हमेंdharūnāنَتَّبِعْكُمْ ۖहम पीछे चलें तुम्हारेnattabiʿ'kumيُرِيدُونَवो चाहते हैyurīdūnaأَنकिanيُبَدِّلُوا۟वो बदल डालेंyubaddilūكَلَـٰمَकलामkalāmaٱللَّهِ ۚअल्लाह काl-lahiقُلकह दीजिएqulلَّنहरगिज़ नहींlanتَتَّبِعُونَاतुम पीछे आओगे हमारेtattabiʿūnāكَذَٰلِكُمْइसी तरहkadhālikumقَالَफ़रमायाqālaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِنbeforeminقَبْلُ ۖइससे पहलेqabluفَسَيَقُولُونَपस ज़रूर वो कहेंगेfasayaqūlūnaبَلْबल्किbalتَحْسُدُونَنَا ۚतुम हसद करते हो हम सेtaḥsudūnanāبَلْबल्किbalكَانُوا۟हैं वोkānūلَاnotlāيَفْقَهُونَनहीं वो समझतेyafqahūnaإِلَّاमगरillāقَلِيلًۭاबहुत कमqalīlan١٥
शीघ्र ही पीछे छोड़ दिए जाने वाले लोग कहेंगे, जब तुम कुछ ग़नीमतों को प्राप्त करने के लिए चलोगे : हमें छोड़ो कि हम तुम्हारे साथ चलें।1 वे चाहते हैं कि अल्लाह के वचन को बदल दें। आप कह दें : तुम हमारे साथ कभी नहीं जाओगे, इसी तरह अल्लाह ने पहले ही कह दिया है। तो वे अवश्य कहेंगे : बल्कि तुम हमसे जलते हो। बल्कि वे बहुत कम समझते हैं।
४८:१६
قُلकह दीजिएqulلِّلْمُخَلَّفِينَपीछे रहने वालों सेlil'mukhallafīnaمِنَofminaٱلْأَعْرَابِदेहाती /बदवियों में सेl-aʿrābiسَتُدْعَوْنَअनक़रीब तुम बुलाए जाओगेsatud'ʿawnaإِلَىٰtoilāقَوْمٍतरफ़ एक क़ौम केqawminأُو۟لِىpossessors of military mightulīبَأْسٍۢpossessors of military mightbasinشَدِيدٍۢसख़्त जंगजू/ लड़ने वालीshadīdinتُقَـٰتِلُونَهُمْतुम जंग करोगे उनसेtuqātilūnahumأَوْयाawيُسْلِمُونَ ۖवो मुसलमान हो जाऐंगेyus'limūnaفَإِنफिर अगरfa-inتُطِيعُوا۟तुम इताअत करोगेtuṭīʿūيُؤْتِكُمُदेगा तुम्हेंyu'tikumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَجْرًاअजरajranحَسَنًۭا ۖअच्छाḥasananوَإِنऔर अगरwa-inتَتَوَلَّوْا۟तुम मुँह मोड़ गएtatawallawكَمَاजैसा किkamāتَوَلَّيْتُمतुमने मुँह मोड़ा थाtawallaytumمِّنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluيُعَذِّبْكُمْवो अज़ाब देगा तुम्हेंyuʿadhib'kumعَذَابًاअज़ाबʿadhābanأَلِيمًۭاदर्दनाकalīman١٦
आप पीछे रह जाने वाले बद्दुओं से कह दें : जल्द ही तुम एक भयंकर युद्ध करने वाली जाति (से युद्ध) की ओर1 बुलाए जाओगे। तुम उनसे युद्ध करोगे, या वे मुसलमान बन जाएँगे। फिर यदि तुम आज्ञा का पालन करोगे, तो अल्लाह तुम्हें उत्तम प्रतिफल प्रदान करेगा और यदि तुम फिर जाओगे, जैसे तुम इससे पहले फिर गए थे, तो वह तुम्हें दर्दनाक यातना देगा।
४८:१७
لَّيْسَनहीं हैlaysaعَلَىuponʿalāٱلْأَعْمَىٰअंधे परl-aʿmāحَرَجٌۭकोई गुनाहḥarajunوَلَاऔर नाwalāعَلَىonʿalāٱلْأَعْرَجِलंगड़े परl-aʿrajiحَرَجٌۭकोई गुनाहḥarajunوَلَاऔर नाwalāعَلَىonʿalāٱلْمَرِيضِमरीज़ परl-marīḍiحَرَجٌۭ ۗकोई गुनाहḥarajunوَمَنऔर जो कोईwamanيُطِعِइताअत करेगाyuṭiʿiٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल कीwarasūlahuيُدْخِلْهُवो दाख़िल करेगा उसेyud'khil'huجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُ ۖनहरेंl-anhāruوَمَنऔर जो कोईwamanيَتَوَلَّमुँह फेरेगाyatawallaيُعَذِّبْهُवो अज़ाब देगा उसेyuʿadhib'huعَذَابًاअज़ाबʿadhābanأَلِيمًۭاदर्दनाकalīman١٧
न अंधे पर कोई दोष1 है और न लंगड़े पर कोई दोष है और न रोगी पर कोई दोष है। तथा जो अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, वह उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। और जो मुँह फेरेगा, वह उसे दर्दनाक यातना देगा।
४८:१८
۞ لَّقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadرَضِىَराज़ी हो गयाraḍiyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَنِwithʿaniٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों सेl-mu'minīnaإِذْजबidhيُبَايِعُونَكَवो बैअत कर रहे थे आपसेyubāyiʿūnakaتَحْتَनीचेtaḥtaٱلشَّجَرَةِदरख़्त केl-shajaratiفَعَلِمَतो उसने जान लियाfaʿalimaمَاजोmāفِى(was) infīقُلُوبِهِمْउनके दिलों में थाqulūbihimفَأَنزَلَतो उसने उतारीfa-anzalaٱلسَّكِينَةَसकीनत /तस्कीनl-sakīnataعَلَيْهِمْउन परʿalayhimوَأَثَـٰبَهُمْऔर अता की उन्हेंwa-athābahumفَتْحًۭاफ़तहfatḥanقَرِيبًۭاक़रीबीqarīban١٨
निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों से प्रसन्न हो गया, जब वे वृक्ष के नीचे आपसे बैअत कर रहे थे। तो उसने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था। अतः उनपर शांति उतार दी और उन्हें बदले में एक निकट विजय1 प्रदान की।
४८:१९
وَمَغَانِمَऔर ग़नीमतेंwamaghānimaكَثِيرَةًۭबहुत सीkathīratanيَأْخُذُونَهَا ۗवो हासिल करेंगे जिन्हेंyakhudhūnahāوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَزِيزًاबहुत ज़बरदस्तʿazīzanحَكِيمًۭاबहुत हिकमत वालाḥakīman١٩
तथा बहुत-से ग़नीमत के धन, जिन्हें वे प्राप्त करेंगे और अल्लाह हमेशा से सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
४८:२०
وَعَدَكُمُवादा किया तुमसेwaʿadakumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمَغَانِمَग़नीमतों काmaghānimaكَثِيرَةًۭबहुत सीkathīratanتَأْخُذُونَهَاतुम हासिल करोगे जिन्हेंtakhudhūnahāفَعَجَّلَतो उसने जल्दी दीfaʿajjalaلَكُمْतुम्हेंlakumهَـٰذِهِۦयेhādhihiوَكَفَّऔर उसने रोक दिएwakaffaأَيْدِىَहाथaydiyaٱلنَّاسِलोगों कl-nāsiعَنكُمْतुम सेʿankumوَلِتَكُونَऔर ताकि वो हो जाएwalitakūnaءَايَةًۭएक निशानीāyatanلِّلْمُؤْمِنِينَमोमिनों के लिएlil'mu'minīnaوَيَهْدِيَكُمْऔर वो हिदायत दे तुम्हेंwayahdiyakumصِرَٰطًۭا(तरफ़) रास्तेṣirāṭanمُّسْتَقِيمًۭاसीधे केmus'taqīman٢٠
अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी ग़नीमतों का वादा किया है, जिन्हें तुम प्राप्त करोगे। फिर उसने तुम्हें यह जल्दी प्रदान कर दी। तथा लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए और ताकि1 यह ईमान वालों के लिए एक निशानी बन जाए और (ताकि) वह तुम्हें सीधी राह पर चलाए।
४८:२१
وَأُخْرَىٰऔर दूसरी (ग़नीमतें )wa-ukh'rāلَمْनहींlamتَقْدِرُوا۟तुम क़ादिर होtaqdirūعَلَيْهَاजिन परʿalayhāقَدْतहक़ीक़qadأَحَاطَघेर रखा हैaḥāṭaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuبِهَا ۚउन्हेंbihāوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرًۭاख़ूब क़ुदरत रखने वालाqadīran٢١
तथा कई अन्य (ग़नीमतों का भी), जिन्हें तुम प्राप्त करने में सक्षम नहीं हुए। निश्चय अल्लाह ने उन्हें घेर रखा है। तथा अल्लाह हमेशा से हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
४८:२२
وَلَوْऔर अगरwalawقَـٰتَلَكُمُजंग करते तुमसेqātalakumuٱلَّذِينَवो लोग जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلَوَلَّوُا۟अलबत्ता वो फेर लेतेlawallawūٱلْأَدْبَـٰرَपुश्तेंl-adbāraثُمَّफिरthummaلَاnotlāيَجِدُونَना वो पातेyajidūnaوَلِيًّۭاकोई दोस्तwaliyyanوَلَاऔर नाwalāنَصِيرًۭاकोई मददगारnaṣīran٢٢
और यदि काफ़िर1 लोग तुमसे युद्ध करते, तो अवश्य पीठ फेर जाते, फिर न उन्हें कोई समर्थक मिलेगा और न कोई सहायक।
४८:२३
سُنَّةَतरीक़ाsunnataٱللَّهِअल्लाह काl-lahiٱلَّتِىवो जोallatīقَدْतहक़ीक़qadخَلَتْवो गुज़र चुकाkhalatمِنbeforeminقَبْلُ ۖइससे पहलेqabluوَلَنऔर हरगिज़ नाwalanتَجِدَआप पाऐंगेtajidaلِسُنَّةِतरीक़े कोlisunnatiٱللَّهِअल्लाह केl-lahiتَبْدِيلًۭاबदलने वालाtabdīlan٢٣
अल्लाह के उस नियम के अनुसार जो पहले से चला आ रहा है, तथा आप अल्लाह के नियम में कदापि कोई बदलाव नहीं पाएँगे।
४८:२४
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजिसनेalladhīكَفَّरोक दियाkaffaأَيْدِيَهُمْउनके हाथों कोaydiyahumعَنكُمْतुम सेʿankumوَأَيْدِيَكُمْऔर तुम्हारे हाथों कोwa-aydiyakumعَنْهُمउनसेʿanhumبِبَطْنِवादी मेंbibaṭniمَكَّةَमक्का कीmakkataمِنۢafterminبَعْدِउसके बादbaʿdiأَنْकिanأَظْفَرَكُمْउसने कामयाब किया तुम्हेंaẓfarakumعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِمَاउसे जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaبَصِيرًاख़ूब देखने वालाbaṣīran٢٤
तथा वही है जिसने मक्का की वादी में उनके हाथों को तुमसे तथा तुम्हारे हाथों को उनसे रोक दिया1, इसके बाद कि वह तुम्हें उनपर विजय दिला चुका था। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे हमेशा से खूब देखने वाला है।
४८:२५
هُمُवो ही हैंhumuٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَصَدُّوكُمْऔर उन्होंने रोका तुम्हेंwaṣaddūkumعَنِfromʿaniٱلْمَسْجِدِAl-Masjid Al-Haraaml-masjidiٱلْحَرَامِमस्जिदे हराम सेl-ḥarāmiوَٱلْهَدْىَऔर क़ुर्बानी के जानवरों कोwal-hadyaمَعْكُوفًاजो रोके हुए थेmaʿkūfanأَنकिanيَبْلُغَवो पहुँचेंyablughaمَحِلَّهُۥ ۚअपनी हलाल गाह कोmaḥillahuوَلَوْلَاऔर अगर ना होतेwalawlāرِجَالٌۭकुछ मर्दrijālunمُّؤْمِنُونَमोमिनmu'minūnaوَنِسَآءٌۭऔर औरतेंwanisāonمُّؤْمِنَـٰتٌۭमोमिनmu'minātunلَّمْनहींlamتَعْلَمُوهُمْतुम जानते उन्हेंtaʿlamūhumأَنकिanتَطَـُٔوهُمْतुम पामाल कर दोगे उन्हेंtaṭaūhumفَتُصِيبَكُمफिर पहुँचती तुम्हेंfatuṣībakumمِّنْهُمउन(की वजह) सेmin'humمَّعَرَّةٌۢकोई तक्लीफ़maʿarratunبِغَيْرِबग़ैरbighayriعِلْمٍۢ ۖइल्म केʿil'minلِّيُدْخِلَताकि दाख़िल करेliyud'khilaٱللَّهُअल्लाहl-lahuفِىtofīرَحْمَتِهِۦअपनी रहमत मेंraḥmatihiمَنजिसेmanيَشَآءُ ۚवो चाहेyashāuلَوْअगरlawتَزَيَّلُوا۟वो अलग हो गए होतेtazayyalūلَعَذَّبْنَاअलबत्ता अज़ाब देते हमlaʿadhabnāٱلَّذِينَउन लोगों को जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنْهُمْउनमें सेmin'humعَذَابًاअज़ाबʿadhābanأَلِيمًاदर्दनाकalīman٢٥
ये वही लोग हैं, जिन्होंने कुफ़्र किया और तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका तथा क़ुर्बानी के बंधे हुए जानवरों को भी इससे रोका कि वे अपने ज़बह होने के स्थान पर पहुँचें। और यदि यह बात न होती कि तुम कुछ मुसलमान पुरुषों तथा कुछ मुसलमान स्त्रियों को, जिन्हें तुम नहीं जानते, रौंद डालोगे, तो तुमपर अनजाने में उनके कारण दोष आ जाएगा1 (तो उनपर आक्रमण कर दिया जाता); ताकि अल्लाह जिसे चाहे, अपनी दया में दाख़िल करे। यदि वे (मुसलमान एवं काफ़िर) अलग-अगल हो गए होते, तो हम अवश्य उनमें से कुफ़्र करने वालों को दर्दनाक यातना देते।
४८:२६
إِذْजबidhجَعَلَरख लियाjaʿalaٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūفِىinfīقُلُوبِهِمُअपने दिलों मेंqulūbihimuٱلْحَمِيَّةَहमीयत(ज़िद) कोl-ḥamiyataحَمِيَّةَ(जैसे) हमीयतḥamiyyataٱلْجَـٰهِلِيَّةِजाहिलियत कीl-jāhiliyatiفَأَنزَلَतो नाज़िल कीfa-anzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuسَكِينَتَهُۥसकीनत अपनीsakīnatahuعَلَىٰuponʿalāرَسُولِهِۦअपने रसूल परrasūlihiوَعَلَىand uponwaʿalāٱلْمُؤْمِنِينَऔर मोमिनों परl-mu'minīnaوَأَلْزَمَهُمْऔर उसने लाज़िम कर दी उन परwa-alzamahumكَلِمَةَबातkalimataٱلتَّقْوَىٰतक़्वा कीl-taqwāوَكَانُوٓا۟और थे वोwakānūأَحَقَّज़्यादा हक़दारaḥaqqaبِهَاउसकेbihāوَأَهْلَهَا ۚऔर अहल उसकेwa-ahlahāوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ कोshayinعَلِيمًۭاख़ूब जानने वालाʿalīman٢٦
जब काफ़िरों ने अपने दिलों में हठ कर लिया, जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामी युग) का हठ, तो अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमान वालों पर अपनी शांति उतार दी और उन्हें परहेज़गारी की बात1 पर सुदृढ़ कर दिया। तथा वे उसके अधिक हक़दार और उसके योग्य थे। और अल्लाह सदैव हर चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
४८:२७
لَّقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadصَدَقَसच्ची ख़बर दीṣadaqaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuرَسُولَهُअपने रसूल कोrasūlahuٱلرُّءْيَاख़्वाब मेंl-ru'yāبِٱلْحَقِّ ۖसाथ हक़ केbil-ḥaqiلَتَدْخُلُنَّअलबत्ता तुम ज़रूर दाख़िल होगेlatadkhulunnaٱلْمَسْجِدَमस्जिदेl-masjidaٱلْحَرَامَहराम मेंl-ḥarāmaإِنअगरinشَآءَचाहाshāaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuءَامِنِينَअमन की हालत मेंāminīnaمُحَلِّقِينَमुंडवाए हुएmuḥalliqīnaرُءُوسَكُمْअपने सिरों कोruūsakumوَمُقَصِّرِينَऔर तरशवाए हुएwamuqaṣṣirīnaلَاnotlāتَخَافُونَ ۖनहीं तुम्हें ख़ौफ़ होगाtakhāfūnaفَعَلِمَतो उसने जान लियाfaʿalimaمَاजोmāلَمْनहींlamتَعْلَمُوا۟तुम जानते थेtaʿlamūفَجَعَلَतो उसने कर दीfajaʿalaمِنbesidesminدُونِअलावाdūniذَٰلِكَउसकेdhālikaفَتْحًۭاफ़तहfatḥanقَرِيبًاक़रीबीqarīban٢٧
निःसंदेह अल्लाह ने अपने रसूल को हक़ के साथ सच्चा सपना दिखाया कि यदि अल्लाह ने चाहा तो तुम अवश्य मस्जिदे-ह़राम में प्रवेश करोगे, सुरक्षित होकर, अपने सिर मुँडाते तथा बाल कतरवाते हुए, तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं होगा।1 तो उसने वह बात जान ली जो तुमने नहीं जानी। इसिलए उससे पहले एक निकट विजय2 रख दी।
४८:२८
هُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىٓजिसनेalladhīأَرْسَلَभेजाarsalaرَسُولَهُۥअपने रसूल कोrasūlahuبِٱلْهُدَىٰसाथ हिदायतbil-hudāوَدِينِand (the) religionwadīniٱلْحَقِّऔर दीने हक़ केl-ḥaqiلِيُظْهِرَهُۥताकि वो ग़ालिब कर देliyuẓ'hirahuعَلَىoverʿalāٱلدِّينِऊपर दीनl-dīniكُلِّهِۦ ۚतमाम उसकेkullihiوَكَفَىٰऔर काफ़ी हैwakafāبِٱللَّهِअल्लाहbil-lahiشَهِيدًۭاगवाहshahīdan٢٨
वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन तथा सत्य धर्म (इस्लाम) के साथ भेजा, ताकि उसे प्रत्येक धर्म पर प्रभुत्व प्रदान कर दे। और गवाह के तौर पर अल्लाह काफ़ी है।
४८:२९
مُّحَمَّدٌۭमोहम्मदmuḥammadunرَّسُولُरसूल हैंrasūluٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaمَعَهُۥٓसाथ हैं उनकेmaʿahuأَشِدَّآءُसख़्त हैंashiddāuعَلَىagainstʿalāٱلْكُفَّارِकाफ़िरों परl-kufāriرُحَمَآءُमेहरबान हैंruḥamāuبَيْنَهُمْ ۖआपस मेंbaynahumتَرَىٰهُمْआप देखेंगे उन्हेंtarāhumرُكَّعًۭاरुकूअ करते हुएrukkaʿanسُجَّدًۭاसजदा करते हुएsujjadanيَبْتَغُونَवो तलाश करते हैंyabtaghūnaفَضْلًۭاफ़ज़लfaḍlanمِّنَfrom Allahminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiوَرِضْوَٰنًۭا ۖऔर रज़ामंदीwariḍ'wānanسِيمَاهُمْअलामत उनकीsīmāhumفِى(is) onfīوُجُوهِهِمउनके चेहरों में हैwujūhihimمِّنْfromminأَثَرِ(the) traceathariٱلسُّجُودِ ۚसजदों के असर सेl-sujūdiذَٰلِكَये हैdhālikaمَثَلُهُمْमिसाल उनकीmathaluhumفِىinfīٱلتَّوْرَىٰةِ ۚतौरात मेंl-tawrātiوَمَثَلُهُمْऔर मिसाल उनकीwamathaluhumفِىinfīٱلْإِنجِيلِइन्जील मेंl-injīliكَزَرْعٍमानिन्द एक खेती केkazarʿinأَخْرَجَजिसने निकालीakhrajaشَطْـَٔهُۥकोंपल अपनीshaṭahuفَـَٔازَرَهُۥफिर उसने मज़बूत किया उसकोfaāzarahuفَٱسْتَغْلَظَफिर वो सख़्त हो गईfa-is'taghlaẓaفَٱسْتَوَىٰफिर वो खड़ी हो गईfa-is'tawāعَلَىٰuponʿalāسُوقِهِۦअपने तने परsūqihiيُعْجِبُवो ख़ुश करती हैyuʿ'jibuٱلزُّرَّاعَकाश्तकारों कोl-zurāʿaلِيَغِيظَताकि वो ग़ज़बनाक कर देliyaghīẓaبِهِمُउनके ज़रिएbihimuٱلْكُفَّارَ ۗकाफ़िरों कोl-kufāraوَعَدَवादा कियाwaʿadaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلَّذِينَउन लोगों से जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiمِنْهُمउनमें सेmin'humمَّغْفِرَةًۭबख़्शिश काmaghfiratanوَأَجْرًاऔर अजरwa-ajranعَظِيمًۢاबहुत बड़े काʿaẓīman٢٩
मुहम्मद1 अल्लाह के रसूल हैं और वे लोग जो उनके साथ हैं, काफ़िरों पर बहुत सख़्त हैं, आपस में बहुत दयालु हैं। तुम उन्हें रुकू' करते हुए, सजदा करते हुए, अल्लाह का अनुग्रह और (उसकी) प्रसन्नता तलाश करते हुए देखोगे। उनकी निशानी उनके चेहरों पर है, सजदों के चिह्न से। यह उनका विवरण तौरात में है। तथा इंजील में उनका विवरण उस खेती की तरह है, जिसने अपना अंकुर निकाला, फिर उसे प्रबल किया, फिर वह मोटा हो गया, फिर वह अपने तने पर सीधा खड़ा हो गया। वह किसानों को खुश करता है, ताकि उनके द्वारा काफिरों को गुस्सा दिलाए। अल्लाह ने उनमें से उन लोगों से, जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कर्म किए, बड़ी क्षमा तथा बहुत बड़े प्रतिफल का वादा किया है।
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