४७

मुहम्मद

मदनी ३८ आयतें पारा २६
محمد

सूरह मुहम्मद (محمد) पवित्र क़ुरआन का ४७ वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें ३८ आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४७:१
ٱلَّذِينَवो लोग जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَصَدُّوا۟और उन्होंने रोकाwaṣaddūعَنfromʿanسَبِيلِ(the) way of Allahsabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते सेl-lahiأَضَلَّउसने ज़ाए कर दिएaḍallaأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahum١
जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह के मार्ग से रोका, उस (अल्लाह) ने उनके कर्मों को नष्ट कर दिया।
४७:२
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiوَءَامَنُوا۟और वो ईमान लाएwaāmanūبِمَاउस पर जोbimāنُزِّلَनाज़िल किया गयाnuzzilaعَلَىٰtoʿalāمُحَمَّدٍۢमुहम्मद परmuḥammadinوَهُوَऔर वो हीwahuwaٱلْحَقُّहक़ हैl-ḥaquمِنfromminرَّبِّهِمْ ۙउनके रब की तरफ़ सेrabbihimكَفَّرَउसने दूर कर दींkaffaraعَنْهُمْउनसेʿanhumسَيِّـَٔاتِهِمْबुराइयाँ उनकीsayyiātihimوَأَصْلَحَऔर उसने दुरुस्त कर दियाwa-aṣlaḥaبَالَهُمْहाल उनकाbālahum٢
तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और उस पर ईमान लाए जो मुहम्मद पर उतारा गया और वही उनके रब की ओर से सत्य है, उसने उनसे उनके बुरे कर्मों को दूर कर दिया और उनके हाल को ठीक कर दिया।
४७:३
ذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّबवजह इसके किbi-annaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūٱتَّبَعُوا۟उन्होंने पैरवी कीittabaʿūٱلْبَـٰطِلَबातिल कीl-bāṭilaوَأَنَّऔर ये किwa-annaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūٱتَّبَعُوا۟उन्होंने पैरवी कीittabaʿūٱلْحَقَّहक़ कीl-ḥaqaمِنfromminرَّبِّهِمْ ۚअपने रब की तरफ़ सेrabbihimكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيَضْرِبُबयान करता हैyaḍribuٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِلنَّاسِलोगों के लिएlilnnāsiأَمْثَـٰلَهُمْमिसालें उनकीamthālahum٣
यह इसलिए कि निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्होंने असत्य का अनुसरण किया और निःसंदेह जो लोग ईमान लाए, उन्होंने अपने पालनहार की ओर से (आये हुए) सत्य का अनुसरण किया। इसी प्रकार अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है।1
४७:४
فَإِذَاफिर जबfa-idhāلَقِيتُمُमिलो तुमlaqītumuٱلَّذِينَउनसे जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūفَضَرْبَतो मारना हैfaḍarbaٱلرِّقَابِगर्दनों काl-riqābiحَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَآजबidhāأَثْخَنتُمُوهُمْख़ूब ख़ून रेज़ी कर चुको तुम उनकीathkhantumūhumفَشُدُّوا۟फिर मज़बूत बाँधोfashuddūٱلْوَثَاقَबन्धनl-wathāqaفَإِمَّاफिर ख़्वाहfa-immāمَنًّۢاएहसान करोmannanبَعْدُउसके बादbaʿduوَإِمَّاऔर ख़्वाहwa-immāفِدَآءًफ़िदया लोfidāanحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāتَضَعَरख देtaḍaʿaٱلْحَرْبُजंगl-ḥarbuأَوْزَارَهَا ۚहथियार उपनेawzārahāذَٰلِكَये है (हुक्म)dhālikaوَلَوْऔर अगरwalawيَشَآءُचाहताyashāuٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَٱنتَصَرَअलबत्ता वो बदला ले लेताla-intaṣaraمِنْهُمْउनसेmin'humوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinلِّيَبْلُوَا۟ताकि वो आज़माएliyabluwāبَعْضَكُمतुम्हारे बाज़ कोbaʿḍakumبِبَعْضٍۢ ۗसाथ बाज़ केbibaʿḍinوَٱلَّذِينَऔर वो लोग जोwa-alladhīnaقُتِلُوا۟मारे गएqutilūفِىinسَبِيلِ(the) way of Allahsabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiفَلَنतो हरगिज़ नाfalanيُضِلَّवो ज़ाया करेगाyuḍillaأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahum٤
अतः जब तुम काफ़िरों से मुठभेड़ करो, तो गरदनें मारना है, यहाँ तक कि जब उन्हें अच्छी तरह से क़त्ल कर चुको, तो (उन्हें) कसकर बाँध लो। फिर बाद में या तो उपकार करना है और या छुड़ौती लेना। यहाँ तक कि युद्ध अपने हथियार रख दे।1 यही (अल्लाह का आदेश) है। और यदि अल्लाह चाहे, तो अवश्य उनसे बदला ले। किंतु (यह आदेश इसलिए दिया) ताकि तुममें से कुछ की कुछ के साथ परीक्षा ले। और जो लोग अल्लाह की राह में मारे गए, तो वह (अल्लाह) उनके कर्मों को कदापि व्यर्थ नहीं करेगा।
४७:५
سَيَهْدِيهِمْज़रूर वो रहनुमाई करेगा उनकीsayahdīhimوَيُصْلِحُऔर वो दुरूस्त कर देगाwayuṣ'liḥuبَالَهُمْहाल उनकेbālahum٥
वह उनका मार्गदर्शन करेगा और उनकी स्थिति सुधार देगा।
४७:६
وَيُدْخِلُهُمُऔर वो दाख़िल करेगा उन्हेंwayud'khiluhumuٱلْجَنَّةَउस जन्नत मेंl-janataعَرَّفَهَاउसने पहचान करा दी जिसकीʿarrafahāلَهُمْउनकोlahum٦
और उन्हें उस जन्नत में दाखिल करेगा, जिससे वह उन्हें परिचित करा चुका है।
४७:७
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِنअगरinتَنصُرُوا۟तुम मदद करोगेtanṣurūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaيَنصُرْكُمْवो मदद करेगा तुम्हारीyanṣur'kumوَيُثَبِّتْऔर वो जमा देगाwayuthabbitأَقْدَامَكُمْतुम्हारे क़दमों कोaqdāmakum٧
ऐ ईमान वालो! यदि तुम अल्लाह (के धर्म) की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे क़दम जमा देगा।
४७:८
وَٱلَّذِينَऔर वो लोग जिन्होंनेwa-alladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūفَتَعْسًۭاपस तबाही हैfataʿsanلَّهُمْउनके लिएlahumوَأَضَلَّऔर उसने ज़ाया कर दिएwa-aḍallaأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahum٨
और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, तो उनके लिए विनाश है और उसने उनके कर्मों को व्यर्थ कर दिया।
४७:९
ذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمْबवजह उसके कि वोbi-annahumكَرِهُوا۟उन्होंने नापसंद कियाkarihūمَآजोأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفَأَحْبَطَतो उसने बरबाद कर दिएfa-aḥbaṭaأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahum٩
यह इसलिए कि उन्होंने उस चीज़ को नापसंद किया, जिसे अल्लाह ने उतारा, तो उसने उनके कर्म अकारथ कर दिए।1
४७:१०
۞ أَفَلَمْक्या फिर नहींafalamيَسِيرُوا۟वो चले फिरेyasīrūفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَيَنظُرُوا۟तो वो देखतेfayanẓurūكَيْفَकिस तरहkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअंजामʿāqibatuٱلَّذِينَउन लोगों का जोalladhīnaمِنbefore themminقَبْلِهِمْ ۚउनसे पहले थेqablihimدَمَّرَहलाकत डालीdammaraٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَيْهِمْ ۖउन परʿalayhimوَلِلْكَـٰفِرِينَऔर काफ़िरों के लिएwalil'kāfirīnaأَمْثَـٰلُهَاउस जैसी (सज़ाऐं )हैंamthāluhā١٠
तो क्या ये लोग धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ जो इनसे पहले थे? अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया और इन काफ़िरों के लिए भी इसी के समान (यातनाएँ) हैं।
४७:११
ذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّबवजह उसके किbi-annaٱللَّهَअल्लाहl-lahaمَوْلَىमददगार हैmawlāٱلَّذِينَउन लोगों का जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَأَنَّऔर बेशकwa-annaٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरl-kāfirīnaلَا(there is) noمَوْلَىٰनहीं कोई मददगारmawlāلَهُمْउनकाlahum١١
यह इसलिए कि निःसंदेह अल्लाह उन लोगों का संरक्षक है जो ईमान लाए और इसलिए कि निःसंदेह काफ़िरों का कोई संरक्षक नहीं।1
४७:१२
إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيُدْخِلُवो दाख़िल करेगाyud'khiluٱلَّذِينَउन लोगों को जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُ ۖनहरेंl-anhāruوَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūيَتَمَتَّعُونَवो फ़ायदा उठाते हैंyatamattaʿūnaوَيَأْكُلُونَऔर वो खाते हैंwayakulūnaكَمَاजैसा किkamāتَأْكُلُखाते हैtakuluٱلْأَنْعَـٰمُजानवरl-anʿāmuوَٱلنَّارُऔर आगwal-nāruمَثْوًۭىठिकाना हैmathwanلَّهُمْउनकाlahum١٢
निश्चय अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे फ़ायदा उठाते और खाते हैं, जैसे पशु खाते हैं और आग उनके लिए रहने की जगह है।
४७:१३
وَكَأَيِّنऔर कितनी हीwaka-ayyinمِّنofminقَرْيَةٍबस्तियाँqaryatinهِىَवोhiyaأَشَدُّज़्यादा शदीद थींashadduقُوَّةًۭक़ुव्वत मेंquwwatanمِّنthanminقَرْيَتِكَआपकी बस्ती सेqaryatikaٱلَّتِىٓवो जिसनेallatīأَخْرَجَتْكَनिकाल दिया आपकोakhrajatkaأَهْلَكْنَـٰهُمْहलाक किया हमने उन्हेंahlaknāhumفَلَاपस ना थाfalāنَاصِرَकोई मदद करने वालाnāṣiraلَهُمْउनके लिएlahum١٣
तथा कितनी ही बस्तियाँ हैं, जो आपकी उस बस्ती से अधिक शक्तिशाली थीं, जिसने आपको निकाल दिया, हमने उन्हें नष्ट कर दिया, फिर कोई उनका सहायक न था।
४७:१४
أَفَمَنक्या भला जोafamanكَانَहोkānaعَلَىٰonʿalāبَيِّنَةٍۢऊपर एक वाज़ेह दलील केbayyinatinمِّنfromminرَّبِّهِۦअपने रब की तरफ़ सेrabbihiكَمَنमानिन्द उसके हो सकता है जोkamanزُيِّنَमुज़य्यन कर दिए गए होंzuyyinaلَهُۥउसके लिएlahuسُوٓءُबुरेsūuعَمَلِهِۦअमल उसकेʿamalihiوَٱتَّبَعُوٓا۟और उन्होंने पैरवी कीwa-ittabaʿūأَهْوَآءَهُمअपनी ख़्वाहिशात कीahwāahum١٤
तो क्या वह व्यक्ति जो अपने रब की ओर से एक स्पष्ट तर्क पर है, उस व्यक्ति के समान है, जिसके लिए उसके बुरे कर्मों को सुंदर बना दिया गया और उसने अपनी इच्छाओं का पालन किया?
४७:१५
مَّثَلُमिसालmathaluٱلْجَنَّةِउस जन्नत कीl-janatiٱلَّتِىवो जोallatīوُعِدَवादा दिए गएwuʿidaٱلْمُتَّقُونَ ۖमुत्तक़ी लोगl-mutaqūnaفِيهَآउसमेंfīhāأَنْهَـٰرٌۭनहरें हैanhārunمِّنofminمَّآءٍपानी कीmāinغَيْرِनाghayriءَاسِنٍۢबदलने वालेāsininوَأَنْهَـٰرٌۭऔर नहरें हैंwa-anhārunمِّنofminلَّبَنٍۢदूध कीlabaninلَّمْनाlamيَتَغَيَّرْतब्दील होगाyataghayyarطَعْمُهُۥमज़ा जिसकाṭaʿmuhuوَأَنْهَـٰرٌۭऔर नहरें हैंwa-anhārunمِّنْofminخَمْرٍۢशराब कीkhamrinلَّذَّةٍۢबाइसे लज़्ज़त हैंladhatinلِّلشَّـٰرِبِينَपीने वालों के लिएlilshāribīnaوَأَنْهَـٰرٌۭऔर नहरें हैंwa-anhārunمِّنْofminعَسَلٍۢशहद कीʿasalinمُّصَفًّۭى ۖख़ूब साफ़ किया हुआmuṣaffanوَلَهُمْऔर उनके लिए हैंwalahumفِيهَاउसमेंfīhāمِنofminكُلِّहर क़िस्म केkulliٱلثَّمَرَٰتِफलl-thamarātiوَمَغْفِرَةٌۭऔर बख़्शिशwamaghfiratunمِّنfromminرَّبِّهِمْ ۖउनके रब की तरफ़ सेrabbihimكَمَنْमानिन्द उसके हो सकता है जोkamanهُوَवोhuwaخَـٰلِدٌۭहमेशा रहने वाला हैkhālidunفِىinٱلنَّارِआग मेंl-nāriوَسُقُوا۟और वो पिलाए जाऐंगेwasuqūمَآءًपानीmāanحَمِيمًۭاखौलता हुआḥamīmanفَقَطَّعَतो वो काट देगाfaqaṭṭaʿaأَمْعَآءَهُمْआँतें उनकीamʿāahum١٥
उस जन्नत की विशेषता, जिसका वादा परहेज़गारों से किया गया है, यह है कि उसमें कई नहरें ऐसे पानी की हैं जो खराब होने वाला नहीं, और कई नहरें दूध की हैं जिनका स्वाद नहीं बदला, और कई नहरें शराब की हैं जो पीने वालों के लिए स्वादिष्ट है, और कई नहरें ख़ूब साफ़ किए हुए शहद की हैं। और उनके लिए उसमें हर प्रकार के फल और उनके पालनहार की ओर से बड़ी क्षमा है। (क्या ये परहेज़गार) उनके समान हैं, जो सदैव आग (जहन्नम) में रहने वाले हैं तथा जिन्हें खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा, जो उनकी आँतों के टुकड़े-टुकड़े कर देगा?
४७:१६
وَمِنْهُمऔर उनमें से कुछ हैंwamin'humمَّنजोmanيَسْتَمِعُग़ौर से सुनते हैyastamiʿuإِلَيْكَआपकोilaykaحَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāخَرَجُوا۟वो निकलते हैंkharajūمِنْfromminعِندِكَआपके पास सेʿindikaقَالُوا۟वो कहते हैंqālūلِلَّذِينَउन लोगों से जोlilladhīnaأُوتُوا۟दिए गएūtūٱلْعِلْمَइल्मl-ʿil'maمَاذَاक्या कुछmādhāقَالَउसने कहा थाqālaءَانِفًا ۚअभीānifanأُو۟لَـٰٓئِكَयही वो लोग हैंulāikaٱلَّذِينَजोalladhīnaطَبَعَमोहर लगा दीṭabaʿaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَىٰuponʿalāقُلُوبِهِمْउनके दिलों परqulūbihimوَٱتَّبَعُوٓا۟और उन्होंने पैरवी कीwa-ittabaʿūأَهْوَآءَهُمْअपनी ख़्वाहिशात कीahwāahum١٦
तथा उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं, जो आपकी ओर कान लगाते हैं, यहाँ तक कि जब वे आपके पास से निकलते हैं, तो उन लोगों से जिन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है, कहते हैं कि उसने अभी क्या1 कहा? यही लोग हैं, जिनके दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी और उन्होंने अपनी इच्छाओं का पालन किया।
४७:१७
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaٱهْتَدَوْا۟हिदायत पाईih'tadawزَادَهُمْउसने ज़्यादा किया उन्हेंzādahumهُدًۭىहिदायत मेंhudanوَءَاتَىٰهُمْऔर उसने दिया उन्हेंwaātāhumتَقْوَىٰهُمْतक़्वा उनकाtaqwāhum١٧
और वे लोगों जिन्होंने मार्गदर्शन अपनाया, उसने उन्हें हिदायत में बढ़ा दिया और उन्हें उनका तक़वा प्रदान किया।
४७:१८
فَهَلْतो नहींfahalيَنظُرُونَवो इन्तिज़ार करतेyanẓurūnaإِلَّاमगरillāٱلسَّاعَةَक़यामत काl-sāʿataأَنकिanتَأْتِيَهُمवो आ जाए उनके पासtatiyahumبَغْتَةًۭ ۖअचानकbaghtatanفَقَدْतो तहक़ीक़faqadجَآءَआ चुकींjāaأَشْرَاطُهَا ۚअलामात उसकीashrāṭuhāفَأَنَّىٰतो कहाँ से होगीfa-annāلَهُمْउनके लिएlahumإِذَاजबidhāجَآءَتْهُمْआ जाएगी उनके पासjāathumذِكْرَىٰهُمْनसीहत उनकीdhik'rāhum١٨
तो वे किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं सिवाय क़ियामत के कि वह उनपर अचानक आ जाए? तो निश्चय उसकी निशानियाँ1 आ चुकी हैं, फिर जब वह उनके पास आ जाएगी, तो उनके लिए नसीहत ग्रहण करना कैसे संभव होगा?
४७:१९
فَٱعْلَمْतो जान लीजिएfa-iʿ'lamأَنَّهُۥबेशकannahuلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāٱللَّهُअल्लाहl-lahuوَٱسْتَغْفِرْऔर बख़्शिश माँगिएwa-is'taghfirلِذَنۢبِكَअपने क़ुसूर के लिएlidhanbikaوَلِلْمُؤْمِنِينَऔर मोमिन मर्दों के लिएwalil'mu'minīnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ ۗऔर मोमिन औरतों के लिएwal-mu'minātiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمُتَقَلَّبَكُمْचलना-फिरना तुम्हाराmutaqallabakumوَمَثْوَىٰكُمْऔर ठिकाना तुम्हाराwamathwākum١٩
अतः जान लें कि निःसंदेह तथ्य यह है कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, तथा अपने पापों के लिए क्षमा1 माँगें और ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों के लिए भी, और अल्लाह तुम्हारे चलने-फिरने और तुम्हारे ठहरने को जानता है।
४७:२०
وَيَقُولُऔर कहते हैंwayaqūluٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūلَوْلَاक्यों नहींlawlāنُزِّلَتْनाज़िल की गईnuzzilatسُورَةٌۭ ۖकोई सूरतsūratunفَإِذَآफिर जबfa-idhāأُنزِلَتْनाज़िल की जाती हैunzilatسُورَةٌۭकोई सूरतsūratunمُّحْكَمَةٌۭमोहकमmuḥ'kamatunوَذُكِرَऔर ज़िक्र किया जाता हैwadhukiraفِيهَاउसमेंfīhāٱلْقِتَالُ ۙजंग काl-qitāluرَأَيْتَआप देखेंगेra-aytaٱلَّذِينَउन लोगों कोalladhīnaفِىinقُلُوبِهِمजिनके दिलों मेंqulūbihimمَّرَضٌۭबीमारी हैmaraḍunيَنظُرُونَवो देख रहे होंगेyanẓurūnaإِلَيْكَआपकी तरफ़ilaykaنَظَرَ(जैसे) देखनाnaẓaraٱلْمَغْشِىِّउसका ग़शी तारी हो गई होl-maghshiyiعَلَيْهِजिस परʿalayhiمِنَfromminaٱلْمَوْتِ ۖमौत की वजह सेl-mawtiفَأَوْلَىٰतो तबाही/हलाकत हैfa-awlāلَهُمْउनके लिएlahum٢٠
तथा जो लोग ईमान लाए, वे कहते हैं कि कोई सूरत क्यों नहीं उतारी गई (जिसमें युद्ध का उल्लेख हो)? फिर जब कोई मोहकम (दृढ़) सूरत उतारी जाती है और उसमें युद्ध का उल्लेख होता है, तो आप उन लोगों को देखेंगे जिनके दिलों में बीमारी है, वे आपकी ओर इस तरह देखेंगे, जैसे वह आदमी देखता है, जिसपर मौत की बेहोशी छा गई हो। तो उनके लिए उत्तम है।
४७:२१
طَاعَةٌۭइताअत करनाṭāʿatunوَقَوْلٌۭऔर बात कहनाwaqawlunمَّعْرُوفٌۭ ۚभली(बेहतर है)maʿrūfunفَإِذَاफिर जबfa-idhāعَزَمَपुख़्ता हो जाएʿazamaٱلْأَمْرُहुक्म(जंग का)l-amruفَلَوْफिर अगरfalawصَدَقُوا۟वो सच्चे रहेंṣadaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaلَكَانَअलबत्ता होगाlakānaخَيْرًۭاबेहतरkhayranلَّهُمْउनके लिएlahum٢١
आज्ञा का पालन करना और अच्छी बात कहना, फिर जब आज्ञा आवश्यक हो जाए, तो यदि वे अल्लाह के प्रति सच्चे रहें, तो निश्चय ही यह उनके लिए बेहतर है।
४७:२२
فَهَلْतो क्याfahalعَسَيْتُمْउम्मीद है तुमसेʿasaytumإِنकि अगरinتَوَلَّيْتُمْहाकिम बन जाओ तुमtawallaytumأَنये किanتُفْسِدُوا۟तुम फ़साद करोtuf'sidūفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَتُقَطِّعُوٓا۟और तुम काटोwatuqaṭṭiʿūأَرْحَامَكُمْअपने रिश्तों कोarḥāmakum٢٢
फिर निश्चय तुम निकट हो, यदि तुम मुँह फेर लो1, कि तुम धरती में बिगाड़ पैदा करो और अपने संबंधों को पूरी तरह से काट दो।
४७:२३
أُو۟لَـٰٓئِكَयही वो लोग हैंulāikaٱلَّذِينَजोalladhīnaلَعَنَهُمُलानत की उन परlaʿanahumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفَأَصَمَّهُمْफिर उसने बहरा कर दिया उन्हेंfa-aṣammahumوَأَعْمَىٰٓऔर उसने अंधा कर दियाwa-aʿmāأَبْصَـٰرَهُمْउनकी आँखों कोabṣārahum٢٣
यही वे लोग हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से दूर कर दिया। अतः उन्हें बहरा बना दिया और उनकी आँखें अंधी कर दीं।1
४७:२४
أَفَلَاक्या भला नहींafalāيَتَدَبَّرُونَवो ग़ौरो फ़िक्र करतेyatadabbarūnaٱلْقُرْءَانَक़ुरान मेंl-qur'ānaأَمْयाamعَلَىٰuponʿalāقُلُوبٍदिलों परqulūbinأَقْفَالُهَآउनके ताले हैंaqfāluhā٢٤
तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?
४७:२५
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaٱرْتَدُّوا۟फिर गएir'taddūعَلَىٰٓonʿalāأَدْبَـٰرِهِمअपनी पुश्तों परadbārihimمِّنۢafterminبَعْدِबाद उसकेbaʿdiمَاजोتَبَيَّنَवाज़ेह हो गईtabayyanaلَهُمُउनके लिएlahumuٱلْهُدَى ۙहिदायतl-hudāٱلشَّيْطَـٰنُशैतान नेl-shayṭānuسَوَّلَआरास्ता कर दियाsawwalaلَهُمْउनके लिएlahumوَأَمْلَىٰऔर (अल्लाह ने)ढील दीwa-amlāلَهُمْउन्हेंlahum٢٥
निःसंदेह जो लोग अपनी पीठों के बल फिर गए, इसके बाद कि उनके लिए सीधा रास्ता स्पष्ट हो गया, शैतान ने उनके लिए (उनके कार्य को) सुशोभित कर दिया और उन्हें लंबी आशा दिलाई।
४७:२६
ذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمْबवजह उसके कि वोbi-annahumقَالُوا۟वो कहते हैंqālūلِلَّذِينَउनको जिन्होंनेlilladhīnaكَرِهُوا۟नापसंद कियाkarihūمَاउस चीज़ को जोنَزَّلَनाज़िल कीnazzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuسَنُطِيعُكُمْअनक़रीब हम इताअत करेंगे तुम्हारीsanuṭīʿukumفِىinبَعْضِpartbaʿḍiٱلْأَمْرِ ۖबाज़ कामों मेंl-amriوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuإِسْرَارَهُمْराज़ उनकेis'rārahum٢٦
यह इसलिए कि उन्होंने, उन लोगों से जिन्होंने उसे नापसंद किया जो अल्लाह ने उतारा है, कहा कि हम कुछ मामलों में तुम्हारी बात मानेंगे और अल्लाह उनके छिपाने को जानता है।
४७:२७
فَكَيْفَतो क्या होगाfakayfaإِذَاजबidhāتَوَفَّتْهُمُफ़ौत करेंगे उन्हेंtawaffathumuٱلْمَلَـٰٓئِكَةُफ़रिश्तेl-malāikatuيَضْرِبُونَवो मारेंगेyaḍribūnaوُجُوهَهُمْउनके चेहरों कोwujūhahumوَأَدْبَـٰرَهُمْऔर उनकी पीठों कोwa-adbārahum٢٧
तो क्या हाल होगा जब फ़रिश्ते उनके प्राण निकालेंगे, उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारते होंगे।
४७:२८
ذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمُबवजह उसके कि वोbi-annahumuٱتَّبَعُوا۟उन्होंने पैरवी कीittabaʿūمَآउसकी जिसनेأَسْخَطَग़ुस्सा दिलायाaskhaṭaٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaوَكَرِهُوا۟और उन्होंने नापसंद कियाwakarihūرِضْوَٰنَهُۥउसकी रज़ा कोriḍ'wānahuفَأَحْبَطَतो उसने ज़ाया कर दिएfa-aḥbaṭaأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahum٢٨
यह इस कारण कि निःसंदेह उन्होंने उसका अनुसरण किया जिसने अल्लाह को क्रोधित कर दिया और उसकी प्रसन्नता को बुरा जाना, तो उसने उनके कर्मों को नष्ट कर दिया।1
४७:२९
أَمْयाamحَسِبَसमझा हैḥasibaٱلَّذِينَउन लोगों नेalladhīnaفِىinقُلُوبِهِمजिनके दिलों मेंqulūbihimمَّرَضٌबीमारी हैmaraḍunأَنकिanلَّنहरगिज़ नहींlanيُخْرِجَनिकालेगाyukh'rijaٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَضْغَـٰنَهُمْकीने उनकेaḍghānahum٢٩
या उन लोगों ने जिनके दिलों में कोई बीमारी है, यह समझ रखा है कि अल्लाह उनके द्वेष कभी प्रकट नहीं करेगा?
४७:३०
وَلَوْऔर अगरwalawنَشَآءُहम चाहेंnashāuلَأَرَيْنَـٰكَهُمْअलबत्ता दिखा दें हम आपको उन्हेंla-araynākahumفَلَعَرَفْتَهُمफिर अलबत्ता पहचान लें आप उन्हेंfalaʿaraftahumبِسِيمَـٰهُمْ ۚउनके चेहरों सेbisīmāhumوَلَتَعْرِفَنَّهُمْऔर अलबत्ता आप ज़रूर पहचान लेंगे उन्हेंwalataʿrifannahumفِىbyلَحْنِअंदाज़/असलूब सेlaḥniٱلْقَوْلِ ۚगुफ़्तगू केl-qawliوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuأَعْمَـٰلَكُمْआमाल तुम्हारेaʿmālakum٣٠
और (ऐ नबी!) यदि हम चाहें तो अवश्य आपको वे लोग दिखा दें, फिर निश्चय आप उन्हें उनकी निशानियों से पहचान लेंगे तथा आप उन्हें उनके बात करने के ढंग से अवश्य पहचान लेंगे। और अल्लाह तुम्हारे कामों को जानता है।
४७:३१
وَلَنَبْلُوَنَّكُمْऔर अलबत्ता हम ज़रूर आज़माऐंगे तुम्हेंwalanabluwannakumحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāنَعْلَمَहम जान लेंnaʿlamaٱلْمُجَـٰهِدِينَमुजाहिदों कोl-mujāhidīnaمِنكُمْतुम में सेminkumوَٱلصَّـٰبِرِينَऔर सब्र करने वालों कोwal-ṣābirīnaوَنَبْلُوَا۟और हम आज़माऐंगेwanabluwāأَخْبَارَكُمْतुम्हारे हालात कोakhbārakum٣١
और हम अवश्य ही तुम्हारी परीक्षा लेंगे, यहाँ तक कि हम तुममें से जिहाद करने वालों और सब्र करने वालों को जान लें और तुम्हारी परिस्थितियों को परख लें।
४७:३२
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَصَدُّوا۟और उन्होंने रोकाwaṣaddūعَنfromʿanسَبِيلِ(the) way of Allahsabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते सेl-lahiوَشَآقُّوا۟और उन्होंने मुख़ालिफ़त कीwashāqqūٱلرَّسُولَरसूल कीl-rasūlaمِنۢafterminبَعْدِउसके बादbaʿdiمَاकिتَبَيَّنَवाज़ेह हो चुकीtabayyanaلَهُمُउनके लिएlahumuٱلْهُدَىٰहिदायतl-hudāلَنहरगिज़ नहींlanيَضُرُّوا۟वो नुक़्सान पहुँचा सकतेyaḍurrūٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَسَيُحْبِطُऔर अनक़रीब वो ज़ाया करदेगाwasayuḥ'biṭuأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahum٣٢
निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका तथा रसूल का विरोध किया, इसके पश्चात कि उनके लिए सीधा मार्ग स्पष्ट हो गया, वे कदापि अल्लाह का कोई नुक़सान नहीं करेंगे और जल्द ही वह उनके कर्मों को नष्ट कर देगा।
४७:३३
۞ يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūأَطِيعُوا۟इताअत करोaṭīʿūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَأَطِيعُوا۟और इताअत करोwa-aṭīʿūٱلرَّسُولَरसूल कीl-rasūlaوَلَاऔर नाwalāتُبْطِلُوٓا۟तुम बातिल करोtub'ṭilūأَعْمَـٰلَكُمْआमाल अपनेaʿmālakum٣٣
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो1 तथा अपने कर्मों को व्यर्थ न करो।
४७:३४
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَصَدُّوا۟और उन्होंने रोकाwaṣaddūعَنfromʿanسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते सेl-lahiثُمَّफिरthummaمَاتُوا۟वो मर गएmātūوَهُمْइस हाल में कि वोwahumكُفَّارٌۭकाफ़िर थेkuffārunفَلَنतो हरगिज़ नहींfalanيَغْفِرَमाफ़ करेगाyaghfiraٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَهُمْउन्हेंlahum٣٤
निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह के मार्ग से रोका, फिर वे काफ़िर ही रहते हुए मर गए, तो अल्लाह उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
४७:३५
فَلَاपस नाfalāتَهِنُوا۟तुम सुस्ती करोtahinūوَتَدْعُوٓا۟और (ना) तुम बुलाओwatadʿūإِلَىforilāٱلسَّلْمِतरफ़ सुलह केl-salmiوَأَنتُمُऔर तुम हीwa-antumuٱلْأَعْلَوْنَग़ालिब रहने वाले होl-aʿlawnaوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuمَعَكُمْसाथ है तुम्हारेmaʿakumوَلَنऔर हरगिज़ नाwalanيَتِرَكُمْवो कम करेगा तुमसेyatirakumأَعْمَـٰلَكُمْआमाल तुम्हारेaʿmālakum٣٥
अतः निर्बल न बनो और न सुलह1 के लिए बुलाओ और तुम ही सर्वोच्च हो और अल्लाह तुम्हारे साथ है और वह कभी भी तुम्हारे कामों को तुमसे कम न करेगा।
४७:३६
إِنَّمَاबेशकinnamāٱلْحَيَوٰةُज़िन्दगीl-ḥayatuٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāلَعِبٌۭखेलlaʿibunوَلَهْوٌۭ ۚतमाशा हैwalahwunوَإِنऔर अगरwa-inتُؤْمِنُوا۟तुम ईमान ले आओtu'minūوَتَتَّقُوا۟और तुम तक़्वा करोwatattaqūيُؤْتِكُمْवो देगा तुम्हेंyu'tikumأُجُورَكُمْअजर तुम्हारेujūrakumوَلَاऔर नाwalāيَسْـَٔلْكُمْवो तलब करेगा तुमसेyasalkumأَمْوَٰلَكُمْमाल तुम्हारेamwālakum٣٦
सांसारिक जीवन तो केवल एक खेल और तमाशा है और यदि तुम ईमान लाओ और (अल्लाह से) डरते रहो, तो वह तुम्हें तुम्हारा प्रतिफल प्रदान करेगा और तुमसे तुम्हारा (सारा) धन नहीं माँगेगा।
४७:३७
إِنअगरinيَسْـَٔلْكُمُوهَاवो तलब करे तुमसे उन्हेंyasalkumūhāفَيُحْفِكُمْफिर वो इसरार करे तुमसेfayuḥ'fikumتَبْخَلُوا۟तुम बुख़्ल करोगेtabkhalūوَيُخْرِجْऔर वो ज़ाहिर कर देगाwayukh'rijأَضْغَـٰنَكُمْकीने तुम्हारेaḍghānakum٣٧
यदि वह तुमसे उनकी माँग करे और तुमपर ज़ोर देकर माँगे, तो तुम कंजूसी करोगे और वह तुम्हारे द्वेष को प्रकट कर देगा।1
४७:३८
هَـٰٓأَنتُمْसुनो तुमhāantumهَـٰٓؤُلَآءِवो लोग होhāulāiتُدْعَوْنَतुम बुलाए जाते होtud'ʿawnaلِتُنفِقُوا۟कि तुम ख़र्च करोlitunfiqūفِىinسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiفَمِنكُمतो तुम में से कोई हैfaminkumمَّنजोmanيَبْخَلُ ۖबुख़्ल करता हैyabkhaluوَمَنऔर जोwamanيَبْخَلْबुख़्ल करता हैyabkhalفَإِنَّمَاतो बेशक वोfa-innamāيَبْخَلُवो बुख़्ल करता हैyabkhaluعَنfromʿanنَّفْسِهِۦ ۚअपने आपसेnafsihiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuٱلْغَنِىُّबहुत ग़नी हैl-ghaniyuوَأَنتُمُऔर तुमwa-antumuٱلْفُقَرَآءُ ۚमोहताज होl-fuqarāuوَإِنऔर अगरwa-inتَتَوَلَّوْا۟तुम मुँह मोड़ोगेtatawallawيَسْتَبْدِلْवो बदल लाएगाyastabdilقَوْمًاएक क़ौम कोqawmanغَيْرَكُمْतुम्हारे सिवाghayrakumثُمَّफिरthummaلَاnotيَكُونُوٓا۟ना होंगे वोyakūnūأَمْثَـٰلَكُمतुम जैसेamthālakum٣٨
सुनो! तुम वे लोग हो कि अल्लाह की राह में खर्च करने के लिए बुलाए जाते हो, तो तुममें से कुछ लोग कंजूसी करते हैं। हालाँकि जो कंजूसी करता है, वह अपने आप ही से कंजूसी1 करता है। और अल्लाह तो बेनियाज़ है, और तुम ही मोहताज हो। और यदि तुम फिर जाओगे, तो वह तुम्हारे स्थान पर तुम्हारे सिवा और लोगों को ले आएगा, फिर वे तुम्हारे जैसे नहीं होंगे।2