५१

अज़-ज़ारियात

मक्की ६० आयतें पारा २६
الذاريات

सूरह अज़-ज़ारियात (الذاريات) पवित्र क़ुरआन का ५१ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ६० आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५१:१
وَٱلذَّٰرِيَـٰتِक़सम है उन हवाओं की जो बिखेरने वाली हैंwal-dhāriyātiذَرْوًۭاउड़ा करdharwan١
क़सम है उन (हवाओं) की जो (धूल आदि) उड़ाने वाली हैं!
५१:२
فَٱلْحَـٰمِلَـٰتِफिर उठाने वालियां हैंfal-ḥāmilātiوِقْرًۭاबोझ कोwiq'ran٢
फिर पानी का बड़ा भारी बोझ उठाने वाले बादलों की!
५१:३
فَٱلْجَـٰرِيَـٰتِफिर चलने वालियां हैंfal-jāriyātiيُسْرًۭاआसानी सेyus'ran٣
फिर आसानी से चलने वाली नावों की!
५१:४
فَٱلْمُقَسِّمَـٰتِफिर तक़्सीम करने वालियां हैंfal-muqasimātiأَمْرًاकाम कोamran٤
फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!
५१:५
إِنَّمَاबेशक जोinnamāتُوعَدُونَतुम वादा किए जाते होtūʿadūnaلَصَادِقٌۭअलबत्ता सच्चा हैlaṣādiqun٥
निःसंदेह जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह सत्य है।1
५१:६
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلدِّينَबदले(का दिन)l-dīnaلَوَٰقِعٌۭअलबत्ता वाक़ेअ होने वाला हैlawāqiʿun٦
तथा निःसंदेह हिसाब अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।
५१:७
وَٱلسَّمَآءِक़सम है आसमान कीwal-samāiذَاتِfull ofdhātiٱلْحُبُكِरास्तों वालेl-ḥubuki٧
क़सम है रास्तों वाले आकाश की!
५१:८
إِنَّكُمْबेशक तुमinnakumلَفِى(are) surely inlafīقَوْلٍۢअलबत्ता एक बात में होqawlinمُّخْتَلِفٍۢमुख़्तलिफ़mukh'talifin٨
निःसंदेह तुम निश्चय एक विवादास्पद बात1 में पड़े हो।
५१:९
يُؤْفَكُफेरा जाता हैyu'fakuعَنْهُउससेʿanhuمَنْजोmanأُفِكَफेरा गयाufika٩
उससे वही फेरा जाता है, जो (अल्लाह के ज्ञान में) फेर दिया गया है।
५१:१०
قُتِلَमारे गएqutilaٱلْخَرَّٰصُونَअंदाज़े लगाने वालेl-kharāṣūna١٠
अटकल लगाने वाले मारे गए।
५१:११
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaهُمْवोhumفِى(are) inغَمْرَةٍۢग़फ़्लत मेंghamratinسَاهُونَभूले हुए हैंsāhūna١١
जो बड़ी ग़फ़लत में भूले हुए हैं।
५१:१२
يَسْـَٔلُونَवो सवाल करते हैंyasalūnaأَيَّانَकब होगाayyānaيَوْمُदिनyawmuٱلدِّينِबदले काl-dīni١٢
वे पूछते1 हैं कि बदले का दिन कब है?
५१:१३
يَوْمَउस रोज़yawmaهُمْवोhumعَلَىoverʿalāٱلنَّارِआग परl-nāriيُفْتَنُونَवो तपाए जाऐंगेyuf'tanūna١٣
जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे।
५१:१४
ذُوقُوا۟चखोdhūqūفِتْنَتَكُمْअज़ाब अपनाfit'natakumهَـٰذَاये हैhādhāٱلَّذِىवो जोalladhīكُنتُمथे तुमkuntumبِهِۦजिसेbihiتَسْتَعْجِلُونَतुम जल्दी तलब करतेtastaʿjilūna١٤
अपने फ़ितने (यातना) का मज़ा चखो, यही है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।
५१:१५
إِنَّबेशकinnaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगl-mutaqīnaفِى(will be) inجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinوَعُيُونٍऔर चश्मों में होंगेwaʿuyūnin١٥
निःसंदेह परहेज़गार लोग बाग़ों और जल स्रोतों में होंगे।
५१:१६
ءَاخِذِينَलेने वाले होंगेākhidhīnaمَآजोءَاتَىٰهُمْदेगा उन्हेंātāhumرَبُّهُمْ ۚरब उनकाrabbuhumإِنَّهُمْबेशक वोinnahumكَانُوا۟थे वोkānūقَبْلَक़ब्लqablaذَٰلِكَइसकेdhālikaمُحْسِنِينَनेकोकारmuḥ'sinīna١٦
जो कुछ उनका रब उन्हें देगा, उसे वे लेने वाले होंगे। निश्चय ही वे इससे पहले नेकी करने वाले थे।
५१:१७
كَانُوا۟थे वोkānūقَلِيلًۭاकम हीqalīlanمِّنَofminaٱلَّيْلِरात कोal-layliمَاजोيَهْجَعُونَवो सोते थेyahjaʿūna١٧
वे रात के बहुत थोड़े भाग में सोते थे।1
५१:१८
وَبِٱلْأَسْحَارِऔर सहरी के वक़्तwabil-asḥāriهُمْवोhumيَسْتَغْفِرُونَवो असतग़फ़ार करते थेyastaghfirūna١٨
तथा रात्रि की अंतिम घड़ियों1 में वे क्षमा याचना करते थे।
५१:१९
وَفِىٓAnd inwafīأَمْوَٰلِهِمْऔर उनके मालों मेंamwālihimحَقٌّۭहक़ थाḥaqqunلِّلسَّآئِلِवास्ते सवालीlilssāiliوَٱلْمَحْرُومِऔर महरूम केwal-maḥrūmi١٩
और उनके धनों में माँगने वाले तथा वंचित1 के लिए एक हक़ (हिस्सा) था।
५१:२०
وَفِىAnd inwafīٱلْأَرْضِऔर ज़मीन मेंl-arḍiءَايَـٰتٌۭनिशानियाँ हैंāyātunلِّلْمُوقِنِينَयक़ीन करने वालों के लिएlil'mūqinīna٢٠
तथा धरती में विश्वास करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
५१:२१
وَفِىٓAnd inwafīأَنفُسِكُمْ ۚऔर तुम्हारे नफ़्सों में भीanfusikumأَفَلَاक्या भला नहींafalāتُبْصِرُونَतुम देखतेtub'ṣirūna٢١
तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। तो क्या तुम नहीं देखते?
५१:२२
وَفِىAnd inwafīٱلسَّمَآءِऔर आसमान मेंl-samāiرِزْقُكُمْरिज़्क़ है तुम्हाराriz'qukumوَمَاऔर जोwamāتُوعَدُونَतुम वादा किए जाते होtūʿadūna٢٢
और आकाश ही में तुम्हारी रोज़ी1 है तथा वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है।
५१:२३
فَوَرَبِّपस क़सम है रब कीfawarabbiٱلسَّمَآءِआसमानl-samāiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन केwal-arḍiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَحَقٌّۭअलबत्ता हक़ हैlaḥaqqunمِّثْلَमानिन्दmith'laمَآउसके जोأَنَّكُمْबेशक तुमannakumتَنطِقُونَतुम बोलते होtanṭiqūna٢٣
सो क़सम है आकाश एवं धरती के पालनहार की! निःसंदेह यह बात निश्चित रूप से सत्य है, इस बात की तरह कि निःसंदेह तुम बोलते हो।1
५१:२४
هَلْक्याhalأَتَىٰكَआई आपके पासatākaحَدِيثُख़बरḥadīthuضَيْفِमेहमानों कीḍayfiإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम केib'rāhīmaٱلْمُكْرَمِينَजो मोअज़्ज़िज़ थेl-muk'ramīna٢٤
क्या आपके पास इबराहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना आई है?
५१:२५
إِذْजबidhدَخَلُوا۟वो दाख़िल हुएdakhalūعَلَيْهِउस परʿalayhiفَقَالُوا۟तो उन्होंने कहाfaqālūسَلَـٰمًۭا ۖसलाम होsalāmanقَالَउसने कहाqālaسَلَـٰمٌۭसलाम होsalāmunقَوْمٌۭलोग होqawmunمُّنكَرُونَअजनबीmunkarūna٢٥
जब वे उसके पास आए, तो उन्होंने सलाम कहा। उसने कहा : सलाम हो। कुछ अपरिचित लोग हैं।
५१:२६
فَرَاغَफिर वो गयाfarāghaإِلَىٰٓtoilāأَهْلِهِۦतरफ़ अपने घर वालों केahlihiفَجَآءَपस वो ले आयाfajāaبِعِجْلٍۢएक बछड़ा (भुना हुआ)biʿij'linسَمِينٍۢमोटा ताज़ाsamīnin٢٦
फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया। फिर एक मोटा-ताज़ा (भुना हुआ) बछड़ा ले आया।
५१:२७
فَقَرَّبَهُۥٓफिर उसने क़रीब किया उसेfaqarrabahuإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimقَالَउसने कहाqālaأَلَاक्या नहींalāتَأْكُلُونَतुम खातेtakulūna٢٧
फिर उसे उनके सामने रख दिया। कहा : क्या तुम नहीं खाते?
५१:२८
فَأَوْجَسَतो उसने महसूस कियाfa-awjasaمِنْهُمْउनसेmin'humخِيفَةًۭ ۖख़ौफ़khīfatanقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūلَا(Do) notتَخَفْ ۖना तुम डरोtakhafوَبَشَّرُوهُऔर उन्होंने ख़ुशख़बरी दी उसेwabasharūhuبِغُلَـٰمٍएक लड़केbighulāminعَلِيمٍۢबहुत इल्म वाले कीʿalīmin٢٨
तो उसने उनसे दिल में डर महसूस किया। उन्होंने कहा : डरो नहीं। और उन्होंने उसे एक बहुत ही ज्ञानी पुत्र की शुभ-सूचना दी।
५१:२९
فَأَقْبَلَتِतो आगे बढ़ीfa-aqbalatiٱمْرَأَتُهُۥबीवी उसकीim'ra-atuhuفِىwithصَرَّةٍۢएक चीख़ के साथṣarratinفَصَكَّتْतो उसने हाथ माराfaṣakkatوَجْهَهَاअपने चेहरे परwajhahāوَقَالَتْऔर वो कहने लगीwaqālatعَجُوزٌबुढ़ियाʿajūzunعَقِيمٌۭबाँझʿaqīmun٢٩
यह सुनकर उसकी पत्नी चिल्लाती हुई आगे आई, तो उसने अपना चेहरा पीट लिया और बोली : बूढ़ी बाँझ!
५१:३०
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūكَذَٰلِكِइसी तरह होगाkadhālikiقَالَफ़रमाया हैqālaرَبُّكِ ۖतेरे रब नेrabbukiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuهُوَवो ही हैhuwaٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वालाl-ḥakīmuٱلْعَلِيمُबहुत इल्म वालाl-ʿalīmu٣٠
उन्होंने कहा : तेरे पालनहार ने ऐसे ही फरमाया है। निश्चय वही पूर्ण हिकमत वाला, अत्यंत ज्ञानी है।
५१:३१
۞ قَالَउसने कहाqālaفَمَاतो क्याfamāخَطْبُكُمْमामला है तुम्हाराkhaṭbukumأَيُّهَاO messengersayyuhāٱلْمُرْسَلُونَऐ भेजे जाने वालो(फ़रिश्तो)l-mur'salūna٣١
उसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?
५१:३२
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūإِنَّآबेशक हमinnāأُرْسِلْنَآभेजे गए हमur'sil'nāإِلَىٰtoilāقَوْمٍۢतरफ़ उन लोगों केqawminمُّجْرِمِينَजो मुजरिम हैंmuj'rimīna٣٢
उन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।
५१:३३
لِنُرْسِلَताकि हम भेजेंlinur'silaعَلَيْهِمْउन परʿalayhimحِجَارَةًۭपत्थरḥijāratanمِّنofminطِينٍۢमिट्टी केṭīnin٣٣
ताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।
५१:३४
مُّسَوَّمَةًनिशानज़दाmusawwamatanعِندَby your Lordʿindaرَبِّكَतेरे रब के यहाँ सेrabbikaلِلْمُسْرِفِينَहद से बढ़ने वालों के लिएlil'mus'rifīna٣٤
जो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित1 हैं।
५१:३५
فَأَخْرَجْنَاतो निकाल लिया हमनेfa-akhrajnāمَنजो कोईmanكَانَथाkānaفِيهَاउसमेंfīhāمِنَofminaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों में सेl-mu'minīna٣٥
फिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।
५१:३६
فَمَاतो नाfamāوَجَدْنَاपाया हमनेwajadnāفِيهَاउसमेंfīhāغَيْرَसिवाएghayraبَيْتٍۢएक घर केbaytinمِّنَofminaٱلْمُسْلِمِينَमुसलमानों में सेl-mus'limīna٣٦
तो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर1 के सिवा कोई और नहीं पाया।
५१:३७
وَتَرَكْنَاऔर छोड़ दी हमनेwataraknāفِيهَآउसमेंfīhāءَايَةًۭएक निशानीāyatanلِّلَّذِينَउन लोगों के लिए जोlilladhīnaيَخَافُونَडरते हैंyakhāfūnaٱلْعَذَابَअज़ाबl-ʿadhābaٱلْأَلِيمَदर्दनाक सेl-alīma٣٧
तथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।
५१:३८
وَفِىAnd inwafīمُوسَىٰٓऔर मूसा में(निशानी है)mūsāإِذْजबidhأَرْسَلْنَـٰهُभेजा हमने उसेarsalnāhuإِلَىٰtoilāفِرْعَوْنَतरफ़ फ़िरऔन केfir'ʿawnaبِسُلْطَـٰنٍۢसाथ दलीलbisul'ṭāninمُّبِينٍۢखुली केmubīnin٣٨
तथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।
५१:३९
فَتَوَلَّىٰतो उसने मुँह मोड़ लियाfatawallāبِرُكْنِهِۦबवजह अपनी क़ुव्वत केbiruk'nihiوَقَالَऔर वो कहने लगाwaqālaسَـٰحِرٌजादूगर हैsāḥirunأَوْयाawمَجْنُونٌۭमजनूनmajnūnun٣٩
तो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
५१:४०
فَأَخَذْنَـٰهُतो पकड़ लिया हमने उसेfa-akhadhnāhuوَجُنُودَهُۥऔर उसके लश्करों कोwajunūdahuفَنَبَذْنَـٰهُمْतो फ़ेंक दिया हमने उन्हेंfanabadhnāhumفِىintoٱلْيَمِّसमुन्दर मेंl-yamiوَهُوَऔर वोwahuwaمُلِيمٌۭमलामत ज़दा थाmulīmun٤٠
अंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।
५१:४१
وَفِىAnd inwafīعَادٍऔर आद में (निशानी है)ʿādinإِذْजबidhأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāعَلَيْهِمُउन परʿalayhimuٱلرِّيحَहवाl-rīḥaٱلْعَقِيمَबाँझ कोl-ʿaqīma٤١
तथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ1 हवा भेजी दी।
५१:४२
مَاनाتَذَرُउसने छोड़ाtadharuمِنanyminشَىْءٍकिसी चीज़ कोshayinأَتَتْवो आईatatعَلَيْهِजिस परʿalayhiإِلَّاमगरillāجَعَلَتْهُउसने कर दिया उसेjaʿalathuكَٱلرَّمِيمِबोसीदा हड्डी की तरहkal-ramīmi٤٢
वह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।
५१:४३
وَفِىAnd inwafīثَمُودَऔर समूद में (निशानी है)thamūdaإِذْजबidhقِيلَकहा गयाqīlaلَهُمْउनसेlahumتَمَتَّعُوا۟तुम फ़ायदा उठा लोtamattaʿūحَتَّىٰforḥattāحِينٍۢएक वक़्त तकḥīnin٤٣
तथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।
५१:४४
فَعَتَوْا۟तो उन्होंने सरकशी कीfaʿatawعَنْagainstʿanأَمْرِहुक्म सेamriرَبِّهِمْअपने रब केrabbihimفَأَخَذَتْهُمُतो पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhathumuٱلصَّـٰعِقَةُबिजली की कड़क नेl-ṣāʿiqatuوَهُمْइस हाल में कि वोwahumيَنظُرُونَवो देख रहे थेyanẓurūna٤٤
फिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।
५१:४५
فَمَاतो नाfamāٱسْتَطَـٰعُوا۟वो इस्तिताअत रखते थेis'taṭāʿūمِن[of]minقِيَامٍۢखड़े होने कीqiyāminوَمَاऔर नाwamāكَانُوا۟थे वोkānūمُنتَصِرِينَबदला लेने वालेmuntaṣirīna٤٥
फिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।
५१:४६
وَقَوْمَऔर क़ौमेwaqawmaنُوحٍۢनूहnūḥinمِّنbeforeminقَبْلُ ۖइससे क़ब्लqabluإِنَّهُمْबेशक वोinnahumكَانُوا۟थे वोkānūقَوْمًۭاलोगqawmanفَـٰسِقِينَफ़ासिक़fāsiqīna٤٦
तथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।1
५१:४७
وَٱلسَّمَآءَऔर आसमानwal-samāaبَنَيْنَـٰهَاबनाया हमने उसेbanaynāhāبِأَيْي۟دٍۢसाथ क़ुव्वत केbi-aydinوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَمُوسِعُونَअलबत्ता वुसअत देने वाले हैंlamūsiʿūna٤٧
तथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।
५१:४८
وَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaفَرَشْنَـٰهَاबिछाया हमने उसेfarashnāhāفَنِعْمَतो कितने अच्छेfaniʿ'maٱلْمَـٰهِدُونَहमवार करने वाले हैंl-māhidūna٤٨
तथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।
५१:४९
وَمِنAnd ofwaminكُلِّeverykulliشَىْءٍऔर हर चीज़ सेshayinخَلَقْنَاबनाए हमनेkhalaqnāزَوْجَيْنِजोड़ेzawjayniلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتَذَكَّرُونَतुम नसीहत पकड़ोtadhakkarūna٤٩
तथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।
५१:५०
فَفِرُّوٓا۟पस दौड़ोfafirrūإِلَىtoilāٱللَّهِ ۖतरफ़ अल्लाह केl-lahiإِنِّىबेशक मैंinnīلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْهُउसकी तरफ़ सेmin'huنَذِيرٌۭडराने वाला हूँnadhīrunمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun٥٠
अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।
५१:५१
وَلَاऔर नाwalāتَجْعَلُوا۟तुम बनाओtajʿalūمَعَसाथmaʿaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِلَـٰهًاइलाहilāhanءَاخَرَ ۖकोई दूसराākharaإِنِّىबेशक मैंinnīلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْهُउसकी तरफ़ सेmin'huنَذِيرٌۭडराने वाला हूँnadhīrunمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun٥١
और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।
५१:५२
كَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaمَآनहींأَتَىआयाatāٱلَّذِينَउनके पास जोalladhīnaمِنbefore themminقَبْلِهِمउनसे पहले थेqablihimمِّنanyminرَّسُولٍकोई रसूलrasūlinإِلَّاमगरillāقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūسَاحِرٌजादूगर हैsāḥirunأَوْयाawمَجْنُونٌमजनूनmajnūnun٥٢
इसी प्रकार, उन लोगों के पास जो इनसे पहले थे, जब भी कोई रसूल आया, तो उन्होंने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
५१:५३
أَتَوَاصَوْا۟क्या वो एक दूसरे को वसीयत करते हैंatawāṣawبِهِۦ ۚइसकीbihiبَلْबल्किbalهُمْवोhumقَوْمٌۭलोग हैंqawmunطَاغُونَसरकशṭāghūna٥٣
क्या उन्होंने एक-दूसरे को इस (बात) की वसीयत1 की है? बल्कि वे (स्वयं ही) सरकश लोग हैं।
५१:५४
فَتَوَلَّपस मुँह मोड़ लीजिएfatawallaعَنْهُمْउनसेʿanhumفَمَآपस नहींfamāأَنتَआपantaبِمَلُومٍۢक़ाबिले मलामतbimalūmin٥٤
अतः आप उनसे मुँह फेर लें। क्योंकि आपपर कोई दोष नहीं है।
५१:५५
وَذَكِّرْऔर नसीहत कीजिएwadhakkirفَإِنَّपस बेशकfa-innaٱلذِّكْرَىٰनसीहतl-dhik'rāتَنفَعُवो फ़ायदा देती हैtanfaʿuٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों कोl-mu'minīna٥٥
तथा आप नसीहत करें। क्योंकि निश्चय नसीहत ईमानवालों को लाभ देताी है।
५१:५६
وَمَاऔर नहींwamāخَلَقْتُपैदा किया मैं नेkhalaqtuٱلْجِنَّजिन्नोंl-jinaوَٱلْإِنسَऔर इन्सानों कोwal-insaإِلَّاमगरillāلِيَعْبُدُونِइस लिए कि वो इबादत करें मेरीliyaʿbudūni٥٦
और मैंने जिन्नों तथा मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें।
५१:५७
مَآनहींأُرِيدُमैं चाहताurīduمِنْهُمउनसेmin'humمِّنanyminرِّزْقٍۢकोई रिज़्क़riz'qinوَمَآऔर नहींwamāأُرِيدُमैं चाहताurīduأَنकिanيُطْعِمُونِवो खिलाऐ मुझेyuṭ'ʿimūni٥٧
मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ।
५१:५८
إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो ही हैhuwaٱلرَّزَّاقُख़ूब रिज़्क़ देने वालाl-razāquذُوPossessordhūٱلْقُوَّةِक़ुव्वत वालाl-quwatiٱلْمَتِينُनिहायत मज़बूतl-matīnu٥٨
निःसंदेह अल्लाह ही बहुत रोज़ी देनेवाला, बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत मज़बूत है।
५१:५९
فَإِنَّतो बेशकfa-innaلِلَّذِينَउनके लिए जिन्होंनेlilladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūذَنُوبًۭاहिस्सा हैdhanūbanمِّثْلَमानिन्दmith'laذَنُوبِहिस्से केdhanūbiأَصْحَـٰبِهِمْउनके साथियों केaṣḥābihimفَلَاपस नाfalāيَسْتَعْجِلُونِवो जल्दी तलब करें मुझसेyastaʿjilūni٥٩
अतः निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उनके साथियों के हिस्से की तरह (यातना का) एक हिस्सा है। सो वे मुझसे जल्दी न मचाएँ।
५१:६०
فَوَيْلٌۭपस हलाकत हैfawaylunلِّلَّذِينَउनके लिए जिन्होंनेlilladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنfromminيَوْمِهِمُउनके उस दिन सेyawmihimuٱلَّذِىजिसकाalladhīيُوعَدُونَवो वादा दिए जाते हैंyūʿadūna٦٠
अतः इनकार करने वालों के लिए उनके उस दिन1 से बड़ा विनाश है, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।