५२
अत-तूर
الطور
सूरह अत-तूर (الطور) पवित्र क़ुरआन का ५२ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ४९ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५२:१
وَٱلطُّورِक़सम है तूर कीwal-ṭūri١
क़सम है तूर1 (पर्वत) की!
५२:२
وَكِتَـٰبٍۢऔर किताबwakitābinمَّسْطُورٍۢलिखी हुई कीmasṭūrin٢
और एक पुस्तक{2] की जो लिखी हुई है!
५२:३
فِىInfīرَقٍّۢवर्क़ मेंraqqinمَّنشُورٍۢखुले हुएmanshūrin٣
ऐसे पन्ने में जो खुला हुआ है।
५२:४
وَٱلْبَيْتِऔर घर कीwal-baytiٱلْمَعْمُورِजो आबाद हैl-maʿmūri٤
तथा बैतुल-मा'मूर (आबाद घर)1 की!
५२:५
وَٱلسَّقْفِऔर छत कीwal-saqfiٱلْمَرْفُوعِजो ऊँची उठाई गई हैl-marfūʿi٥
तथा ऊँची उठाई हुई छत (आकाश) की!
५२:६
وَٱلْبَحْرِऔर समुन्दर कीwal-baḥriٱلْمَسْجُورِभड़काया हुआ हैl-masjūri٦
और लबालब भरे हुए समुद्र की!
५२:७
إِنَّबेशकinnaعَذَابَअज़ाबʿadhābaرَبِّكَआपके रब काrabbikaلَوَٰقِعٌۭयक़ीनन वाक़ेअ होने वाला हैlawāqiʿun٧
कि निश्चय आपके पालनहार की यातना अवश्चय घटित होने वाली है।
५२:८
مَّاनहींmāلَهُۥउसेlahuمِنकोईminدَافِعٍۢकोई दूर करने वालाdāfiʿin٨
उसे कोई टालने वाला नहीं।
५२:९
يَوْمَजिस दिनyawmaتَمُورُलरज़ेगाtamūruٱلسَّمَآءُआसमानl-samāuمَوْرًۭاसख़्त लरज़नाmawran٩
जिस दिन आकाश बुरी तरह डगमगाएगा।
५२:१०
وَتَسِيرُऔर चलेंगेwatasīruٱلْجِبَالُपहाड़l-jibāluسَيْرًۭاबहुत चलनाsayran١٠
तथा पर्वत बहुत तेज़ी से चलेंगे।
५२:११
فَوَيْلٌۭपस हलाकत हैfawaylunيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinلِّلْمُكَذِّبِينَझुटलाने वालों के लिएlil'mukadhibīna١١
तो उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ी तबाही है।
५२:१२
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaهُمْवोhumفِىinfīخَوْضٍۢबहस मेंkhawḍinيَلْعَبُونَवो खेल रहे हैंyalʿabūna١٢
जो व्यर्थ बातों में पड़े खेल रहे हैं।
५२:१३
يَوْمَजिस दिनyawmaيُدَعُّونَवो ढकेले जाऐंगेyudaʿʿūnaإِلَىٰ(in)toilāنَارِतरफ़ आग केnāriجَهَنَّمَजहन्नम कीjahannamaدَعًّاसख़्त ढकेले जानाdaʿʿan١٣
जिस दिन उन्हें ज़ोर से धक्का देकर जहन्नम की आग में धकेला जाएगा।
५२:१४
هَـٰذِهِये हैhādhihiٱلنَّارُआगl-nāruٱلَّتِىवो जोallatīكُنتُمथे तुमkuntumبِهَاउसकोbihāتُكَذِّبُونَतुम झुठलातेtukadhibūna١٤
यही है वह आग, जिसे तुम झुठलाते थे।
५२:१५
أَفَسِحْرٌक्या भला जादू हैafasiḥ'runهَـٰذَآयेhādhāأَمْयाamأَنتُمْतुमantumلَا(do) notlāتُبْصِرُونَनहीं तुम देखतेtub'ṣirūna١٥
तो क्या यह जादू है, या तुम नहीं देख रहे?
५२:१६
ٱصْلَوْهَاजलो उसमेंiṣ'lawhāفَٱصْبِرُوٓا۟पस सब्र करोfa-iṣ'birūأَوْयाawلَا(do) notlāتَصْبِرُوا۟ना तुम सब्र करोtaṣbirūسَوَآءٌबराबर हैsawāonعَلَيْكُمْ ۖतुम परʿalaykumإِنَّمَاबेशकinnamāتُجْزَوْنَतुम बदला दिए जाते होtuj'zawnaمَاउसका जोmāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna١٦
इसमें प्रवेश कर जाओ। फिर सब्र करो या सब्र न करो, तुम्हारे लिए बराबर है। तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
५२:१७
إِنَّबेशकinnaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगl-mutaqīnaفِى(will be) infīجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinوَنَعِيمٍۢऔर नेअमतों में होंगेwanaʿīmin١٧
निःसंदेह डरने वाले लोग बागों और बड़ी नेमत में हैं।
५२:१८
فَـٰكِهِينَमज़े करने वाले होंगेfākihīnaبِمَآसाथ उसके जोbimāءَاتَىٰهُمْअता किया उन्हेंātāhumرَبُّهُمْउनके रब नेrabbuhumوَوَقَىٰهُمْऔर बचा लेगा उन्हेंwawaqāhumرَبُّهُمْरब उनकाrabbuhumعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaٱلْجَحِيمِजहन्नम केl-jaḥīmi١٨
उसका आनंद लेने वाले हैं जो उनके रब ने उन्हें दिया और उनके रब ने उन्हें दहकती हुई आग की यातना से बचा लिया।
५२:१९
كُلُوا۟खाओkulūوَٱشْرَبُوا۟और पियोwa-ish'rabūهَنِيٓـًٔۢاमज़े सेhanīanبِمَاबवजह उसके जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna١٩
मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।
५२:२०
مُتَّكِـِٔينَतकिया लगाए हुए होंगेmuttakiīnaعَلَىٰonʿalāسُرُرٍۢतख़्तों परsururinمَّصْفُوفَةٍۢ ۖक़तार में रखे हुएmaṣfūfatinوَزَوَّجْنَـٰهُمऔर ब्याह देंगे हम उन्हेंwazawwajnāhumبِحُورٍसाथ गोरी औरतों केbiḥūrinعِينٍۢबड़ी आँखों वालीʿīnin٢٠
पंक्तिबद्ध तख़्तों पर तकिया लगाए हुए होंगे और हमने उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर दिया, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली हैं।
५२:२१
وَٱلَّذِينَऔर वो लोग जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَٱتَّبَعَتْهُمْऔर पैरवी की उनकीwa-ittabaʿathumذُرِّيَّتُهُمउनकी औलाद नेdhurriyyatuhumبِإِيمَـٰنٍसाथ ईमान केbiīmāninأَلْحَقْنَاमिला देंगे हमalḥaqnāبِهِمْसाथ उनकेbihimذُرِّيَّتَهُمْउनकी औलाद कोdhurriyyatahumوَمَآऔर नाwamāأَلَتْنَـٰهُمकमी करेंगे हम उनसेalatnāhumمِّنْofminعَمَلِهِمउनके अमल में सेʿamalihimمِّن(in) anyminشَىْءٍۢ ۚकुछ भीshayinكُلُّहरkulluٱمْرِئٍۭशख़्सim'ri-inبِمَاबवजह उसके जोbimāكَسَبَउसने कमाई कीkasabaرَهِينٌۭरेहन/गिरवी हैrahīnun٢١
और जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने ईमान के साथ उनका अनुसरण किया, हम उनकी संतान को उनके साथ मिला देंगे तथा उनके कर्मों में उनसे कुछ भी कम न करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले में जो उसने कमाया, गिरवी1 रखा हुआ है।
५२:२२
وَأَمْدَدْنَـٰهُمऔर हम दिए चले जाऐंगे उन्हेंwa-amdadnāhumبِفَـٰكِهَةٍۢफलbifākihatinوَلَحْمٍۢऔर गोश्तwalaḥminمِّمَّاउसमें से जोmimmāيَشْتَهُونَवो ख़्वाहिश करेंगेyashtahūna٢٢
तथा हम उन्हें और अधिक फल और मांस देंगे उसमें से जो वे चाहेंगे।
५२:२३
يَتَنَـٰزَعُونَवो एक दूसरे से छीना-झपटी करेंगेyatanāzaʿūnaفِيهَاउसमेंfīhāكَأْسًۭاजामे शराब परkasanلَّاnolāلَغْوٌۭना कोई बेहूदा गोई होगीlaghwunفِيهَاउसमेंfīhāوَلَاऔर नाwalāتَأْثِيمٌۭकोई गुनाह(की बात)tathīmun٢٣
वे उसमें एक-दूसरे से मदिरा का प्याला लेंगे, जिसमें न कोई व्यर्थ बात होगी और न गुनाह में डालना।
५२:२४
۞ وَيَطُوفُऔर घूम रहे होंगेwayaṭūfuعَلَيْهِمْउन परʿalayhimغِلْمَانٌۭनौउम्र ख़ादिमghil'mānunلَّهُمْउनके लिएlahumكَأَنَّهُمْगोया कि वोka-annahumلُؤْلُؤٌۭमोती हैंlu'lu-onمَّكْنُونٌۭछुपाए हुएmaknūnun٢٤
तथा उनके आस-पास चक्कर लगाते रहेंगे उन्हीं के बच्चे, जैसे वे छुपाए हुए मोती हों।
५२:२५
وَأَقْبَلَऔर मुतावज्जह होंगेwa-aqbalaبَعْضُهُمْबाज़ उनकेbaʿḍuhumعَلَىٰtoʿalāبَعْضٍۢबाज़ परbaʿḍinيَتَسَآءَلُونَवो एक दूसरे से सवाल करेंगेyatasāalūna٢٥
और वे एक-दूसरे की ओर मुतवज्जह होकर आपस में सवाल करेंगे।
५२:२६
قَالُوٓا۟वो कहेंगेqālūإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हमkunnāقَبْلُइससे पहलेqabluفِىٓamongfīأَهْلِنَاअपन घर वालों मेंahlināمُشْفِقِينَडरने वालेmush'fiqīna٢٦
वे कहेंगे : निःसंदेह हम इससे पहले1 अपने घरवालों में डरने वाले थे।
५२:२७
فَمَنَّपस एहसान कियाfamannaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَيْنَاहम परʿalaynāوَوَقَىٰنَاऔर उसने बचा लिया हमेंwawaqānāعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaٱلسَّمُومِलू/ निहायत गर्म हवा केl-samūmi٢٧
तो अल्लाह ने हमपर उपकार किया और हमें विषैली लू की यातना से बचा लिया।
५२:२८
إِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हमkunnāمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluنَدْعُوهُ ۖहम पुकारते उसकोnadʿūhuإِنَّهُۥबेशक वोinnahuهُوَवो ही हैhuwaٱلْبَرُّबहुत एहसान करने वालाl-baruٱلرَّحِيمُनिहायत रहम करने वालाl-raḥīmu٢٨
निःसंदेह हम इससे पहले1 ही उसे पुकारा करते थे। निश्चय वही तो अति परोपकारी, अत्यंत दयावान् है।
५२:२९
فَذَكِّرْपस नसीहत कीजिएfadhakkirفَمَآपस नहींfamāأَنتَआपantaبِنِعْمَتِफ़ज़ल सेbiniʿ'matiرَبِّكَअपने रब केrabbikaبِكَاهِنٍۢकोई काहिनbikāhininوَلَاऔर नाwalāمَجْنُونٍमजनूनmajnūnin٢٩
अतः आप नसीहत करें। क्योंकि अपने पालनहार के अनुग्रह से आप न तो काहिन हैं और न ही पागल।1
५२:३०
أَمْयाamيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaشَاعِرٌۭएक शायर हैshāʿirunنَّتَرَبَّصُहम इन्तिज़ार कर रहें हैंnatarabbaṣuبِهِۦउसके बारे मेंbihiرَيْبَa misfortune of timeraybaٱلْمَنُونِगर्दिशे ज़माना (मौत) काl-manūni٣٠
या वे कहते है कि यह एक कवि है जिसपर हम ज़माने की घटनाओं का इंतज़ार करते हैं?
५२:३१
قُلْकह दीजिएqulتَرَبَّصُوا۟इन्तिज़ार करोtarabbaṣūفَإِنِّىपस बेशक मैंfa-innīمَعَكُمसाथ तुम्हारेmaʿakumمِّنَamongminaٱلْمُتَرَبِّصِينَइन्तिज़ार करने वालों में से हूँl-mutarabiṣīna٣١
आप कह दें कि तुम प्रतीक्षा करते रहो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।
५२:३२
أَمْयाamتَأْمُرُهُمْहुक्म देती हैं उन्हेंtamuruhumأَحْلَـٰمُهُمअक़्लें उनकीaḥlāmuhumبِهَـٰذَآ ۚउसकाbihādhāأَمْयाamهُمْवोhumقَوْمٌۭलोग हैंqawmunطَاغُونَसरकशṭāghūna٣٢
क्या उन्हें उनकी बुद्धियाँ इस बात का आदेश देती हैं, ये वे स्वयं ही सरकश लोग हैं?
५२:३३
أَمْयाamيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaتَقَوَّلَهُۥ ۚउसने गढ़ लिया उसेtaqawwalahuبَلबल्किbalلَّاnotlāيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūna٣٣
या वे कहते हैं कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है? बल्कि वे ईमान नहीं लाते।
५२:३४
فَلْيَأْتُوا۟पस चाहिए कि वो लाऐंfalyatūبِحَدِيثٍۢकोई बातbiḥadīthinمِّثْلِهِۦٓइस जैसीmith'lihiإِنअगरinكَانُوا۟हैं वोkānūصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٣٤
तो फिर वे इस (क़ुरआन) के समान एक ही बात बनाकर ले आएँ, यदि वे सच्चे हैं।
५२:३५
أَمْयाamخُلِقُوا۟वो पैदा किए गएkhuliqūمِنْofminغَيْرِबग़ैरghayriشَىْءٍकिसी चीज़ केshayinأَمْयाamهُمُवोhumuٱلْخَـٰلِقُونَपैदा करने वाले हैंl-khāliqūna٣٥
या वे बिना किसी चीज़ के1 पैदा हो गए हैं, या वे (स्वयं) पैदा करने वाले हैं?
५२:३६
أَمْयाamخَلَقُوا۟उन्होंने पैदा कियाkhalaqūٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَ ۚऔर ज़मीन कोwal-arḍaبَلबल्किbalلَّاnotlāيُوقِنُونَनहीं वो यक़ीन करतेyūqinūna٣٦
या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया है? बल्कि वे विश्वास ही नहीं करते।
५२:३७
أَمْयाamعِندَهُمْउनके पासʿindahumخَزَآئِنُख़ज़ाने हैंkhazāinuرَبِّكَआपके रब केrabbikaأَمْयाamهُمُवोhumuٱلْمُصَۣيْطِرُونَनिगहबान हैंl-muṣayṭirūna٣٧
या उनके पास आपके पालनहार के ख़ज़ाने हैं, या वही अधिकार चलाने वाले हैं?
५२:३८
أَمْयाamلَهُمْउनके लिएlahumسُلَّمٌۭकोई सीढ़ी हैsullamunيَسْتَمِعُونَवो ग़ौर से सुनते होंyastamiʿūnaفِيهِ ۖउसमें (चढ़ कर)fīhiفَلْيَأْتِपस चाहिए कि लाएfalyatiمُسْتَمِعُهُمउनका सुनने वालाmus'tamiʿuhumبِسُلْطَـٰنٍۢकोई दलीलbisul'ṭāninمُّبِينٍखुलीmubīnin٣٨
या उनके पास कोई सीढ़ी है, जिसपर वे अच्छी तरह सुन1 लेते हैं? तो उनके सुनने वाले को चाहिए कि वह कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करे।
५२:३९
أَمْयाamلَهُउसके लिए हैंlahuٱلْبَنَـٰتُबेटियाँl-banātuوَلَكُمُऔर तुम्हारे लिए हैंwalakumuٱلْبَنُونَबेटेl-banūna٣٩
या उस (अल्लाह) के लिए तो बेटियाँ है और तुम्हारे लिए बेटे?
५२:४०
أَمْयाamتَسْـَٔلُهُمْआप माँगते हैं उनसेtasaluhumأَجْرًۭاकोई अजरajranفَهُمतो वोfahumمِّنfromminمَّغْرَمٍۢतावान सेmaghraminمُّثْقَلُونَबोझल हैंmuth'qalūna٤٠
या आप उनसे कोई पारिश्रमिक1 माँगते हैं? तो वे उस तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं।
५२:४१
أَمْयाamعِندَهُمُउनके पासʿindahumuٱلْغَيْبُग़ैब हैl-ghaybuفَهُمْतो वोfahumيَكْتُبُونَवो लिख रहे हैंyaktubūna٤١
या उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है? तो वे उसे लिखते1 रहते हैं।
५२:४२
أَمْयाamيُرِيدُونَवो इरादा करते हैंyurīdūnaكَيْدًۭا ۖएक चाल काkaydanفَٱلَّذِينَतो वो जिन्होंनेfa-alladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūهُمُवो हीhumuٱلْمَكِيدُونَचाल में आने वाले हैंl-makīdūna٤٢
या वे कोई चाल चलना चाहते हैं? तो जिन लोगों ने इनकार किया, वही चाल में आने वाले हैं।
५२:४३
أَمْयाamلَهُمْउनके लिएlahumإِلَـٰهٌकोई इलाह हैilāhunغَيْرُसिवाएghayruٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiسُبْحَـٰنَपाक हैsub'ḥānaٱللَّهِअल्लाहl-lahiعَمَّاउससे जोʿammāيُشْرِكُونَवो शरीक ठहराते हैंyush'rikūna٤٣
या उनका अल्लाह के सिवा कोई पूज्य है? पवित्र है अल्लाह उससे जो वे साझी ठहराते हैं।
५२:४४
وَإِنऔर अगरwa-inيَرَوْا۟वो देखेंyarawكِسْفًۭاकोई टुकड़ाkis'fanمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiسَاقِطًۭاगिरने वालाsāqiṭanيَقُولُوا۟वो कहेंगेyaqūlūسَحَابٌۭबादल हैंsaḥābunمَّرْكُومٌۭतह-ब-तहmarkūmun٤٤
और यदि वे आकाश से कोई टुकड़ा गिरता हुआ देख लें, तो कह देंगे कि यह परत दर परत बादल है।1
५२:४५
فَذَرْهُمْपस छोड़ दो उन्हेंfadharhumحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيُلَـٰقُوا۟वो जा मिलेंyulāqūيَوْمَهُمُअपने (उस) दिन सेyawmahumuٱلَّذِىवो जोalladhīفِيهِउसमेंfīhiيُصْعَقُونَवो बेहोश किए जाऐंगेyuṣ'ʿaqūna٤٥
अतः आप उन्हें छोड़ दें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन को जा मिलें, जिसमें1 वे बेहोश किए जाएँगे।
५२:४६
يَوْمَजिस दिनyawmaلَاnotlāيُغْنِىना काम आएगीyugh'nīعَنْهُمْउन्हेंʿanhumكَيْدُهُمْचाल उनकीkayduhumشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيُنصَرُونَवो मदद दिए जाऐंगेyunṣarūna٤٦
जिस दिन न तो उनकी चाल काम आएगी और न उनकी सहायता की जाएगी।
५२:४७
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaلِلَّذِينَउनके लिए जिन्होंनेlilladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūعَذَابًۭاएक अज़ाब हैʿadhābanدُونَअलावाdūnaذَٰلِكَउसकेdhālikaوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَهُمْअक्सर उनकेaktharahumلَا(do) notlāيَعْلَمُونَनहीं वो इल्म रखतेyaʿlamūna٤٧
तथा निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उस (आख़िरत) से पहले भी एक यातना1 है। परंतु उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते।
५२:४८
وَٱصْبِرْऔर सब्र कीजिएwa-iṣ'birلِحُكْمِहुक्म के लिएliḥuk'miرَبِّكَअपने रब केrabbikaفَإِنَّكَपस बेशक आपfa-innakaبِأَعْيُنِنَا ۖहमारी निगाहों के सामने हैंbi-aʿyunināوَسَبِّحْऔर तस्बीह कीजिएwasabbiḥبِحَمْدِसाथ तारीफ़ केbiḥamdiرَبِّكَअपने रब कीrabbikaحِينَजिस वक़्तḥīnaتَقُومُआप खड़े होते हैंtaqūmu٤٨
और (ऐ नबी!) आप अपने पालनहार का आदेश आने तक धैर्य रखें। निःसंदेह आप हमारी आँखों के सामने हैं। तथा जब आप उठें, तो अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें।
५२:४९
وَمِنَAnd ofwaminaٱلَّيْلِऔर रात कोal-layliفَسَبِّحْهُपस तस्बीह कीजिए उसकीfasabbiḥ'huوَإِدْبَـٰرَऔर पलटने के बादwa-id'bāraٱلنُّجُومِसितारों केl-nujūmi٤٩
तथा रात के कुछ भाग में फिर उसकी पवित्रता का वर्णन करें और सितारों के चले जाने के बाद भी।1
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