५३

अन-नज्म

मक्की ६२ आयतें पारा २७
النجم

सूरह अन-नज्म (النجم) पवित्र क़ुरआन का ५३ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ६२ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५३:१
وَٱلنَّجْمِक़सम है सितारे कीwal-najmiإِذَاजबidhāهَوَىٰवो गिरेhawā١
क़सम है तारे की जब वह गिरे!
५३:२
مَاनहींضَلَّराह भूलाḍallaصَاحِبُكُمْसाथी तुम्हाराṣāḥibukumوَمَاऔर ना हीwamāغَوَىٰवो बहकाghawā٢
तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।
५३:३
وَمَاऔर नहींwamāيَنطِقُवो बोलताyanṭiquعَنِfromʿaniٱلْهَوَىٰٓख़्वाहिशे नफ़्स सेl-hawā٣
और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।
५३:४
إِنْनहींinهُوَवोhuwaإِلَّاमगरillāوَحْىٌۭएक वहीwaḥyunيُوحَىٰजो वही की जाती हैyūḥā٤
वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।
५३:५
عَلَّمَهُۥसिखाया उसेʿallamahuشَدِيدُबहुत ज़बरदस्तshadīduٱلْقُوَىٰक़ुव्वत वाले नेl-quwā٥
उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते)1 ने सिखाया है।
५३:६
ذُوPossessor of soundnessdhūمِرَّةٍۢजो बड़ा ज़ोर आवर हैmirratinفَٱسْتَوَىٰफेर वो सीधा खड़ा हो गयाfa-is'tawā٦
जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।
५३:७
وَهُوَऔर वोwahuwaبِٱلْأُفُقِकिनारे पर थाbil-ufuqiٱلْأَعْلَىٰबुलन्दl-aʿlā٧
जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।
५३:८
ثُمَّफिरthummaدَنَاवो क़रीब हुआdanāفَتَدَلَّىٰपस वो उतर आयाfatadallā٨
फिर वह निकट हुआ और उतर आया।
५३:९
فَكَانَतो वो हो गयाfakānaقَابَबक़द्रqābaقَوْسَيْنِदो कमानों केqawsayniأَوْयाawأَدْنَىٰउससे ज़्यादा क़रीबadnā٩
फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।
५३:१०
فَأَوْحَىٰٓतो उसने वही पहुँचाईfa-awḥāإِلَىٰtoilāعَبْدِهِۦउस(अल्लाह) के बन्दे की तरफ़ʿabdihiمَآजोأَوْحَىٰउसने वही पहुँचाईawḥā١٠
फिर उसने अल्लाह के बंदे1 की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।
५३:११
مَاनहींكَذَبَझूठ बोलाkadhabaٱلْفُؤَادُदिल नेl-fuāduمَاजो कुछرَأَىٰٓउसने देखाraā١١
दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।
५३:१२
أَفَتُمَـٰرُونَهُۥक्या फिर तुम झगड़ते हो उससेafatumārūnahuعَلَىٰaboutʿalāمَاऊपर उसके जोيَرَىٰवो देखता हैyarā١٢
फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?
५३:१३
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadرَءَاهُउसने देखा उसेraāhuنَزْلَةًएक बार उतरतेnazlatanأُخْرَىٰऔर भीukh'rā١٣
हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।
५३:१४
عِندَपासʿindaسِدْرَةِ(the) Lote Treesid'ratiٱلْمُنتَهَىٰसिदरतुल मुन्तहा केl-muntahā١٤
सिदरतुल-मुनतहा'1 के पास।
५३:१५
عِندَهَاउसी के पास हैʿindahāجَنَّةُ(is the) Gardenjannatuٱلْمَأْوَىٰٓजन्नतुल मावाl-mawā١٥
उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।
५३:१६
إِذْजबidhيَغْشَىछा रहा थाyaghshāٱلسِّدْرَةَबेरी के दरख़्त परl-sid'rataمَاजो कुछيَغْشَىٰछा रहा थाyaghshā١٦
जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।1
५३:१७
مَاनाزَاغَकजी कीzāghaٱلْبَصَرُनिगाह नेl-baṣaruوَمَاऔर नाwamāطَغَىٰवो हद से बढ़ीṭaghā١٧
न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।
५३:१८
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadرَأَىٰउसने देखींraāمِنْofminءَايَـٰتِनिशानियाँāyātiرَبِّهِअपने रब कीrabbihiٱلْكُبْرَىٰٓबड़ी-बड़ीl-kub'rā١٨
निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ1 देखीं।
५३:१९
أَفَرَءَيْتُمُक्या फिर देखा तुमनेafara-aytumuٱللَّـٰتَलातl-lātaوَٱلْعُزَّىٰऔर उज़्ज़ा कोwal-ʿuzā١٩
फिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।
५३:२०
وَمَنَوٰةَऔर मनातwamanataٱلثَّالِثَةَतीसरीl-thālithataٱلْأُخْرَىٰٓएक और कोl-ukh'rā٢٠
तथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?
५३:२१
أَلَكُمُक्या तुम्हारे लिए हैंalakumuٱلذَّكَرُलड़केl-dhakaruوَلَهُऔर उसके लिए हैंwalahuٱلْأُنثَىٰलड़कियाँl-unthā٢١
क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?
५३:२२
تِلْكَयेtil'kaإِذًۭاतबidhanقِسْمَةٌۭएक तक़सीम हैqis'matunضِيزَىٰٓना इन्साफ़ी कीḍīzā٢٢
तब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।
५३:२३
إِنْनहींinهِىَवोhiyaإِلَّآमगरillāأَسْمَآءٌۭकुछ नाम हैंasmāonسَمَّيْتُمُوهَآनाम रखे तुमने उनकेsammaytumūhāأَنتُمْतुमनेantumوَءَابَآؤُكُمऔर तुम्हारे आबा ओ अजदाद नेwaābāukumمَّآनहींأَنزَلَनाज़िल कीanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuبِهَاउनकीbihāمِنanyminسُلْطَـٰنٍ ۚकोई दलीलsul'ṭāninإِنनहींinيَتَّبِعُونَवो पैरवी करतेyattabiʿūnaإِلَّاमगरillāٱلظَّنَّगुमान कीl-ẓanaوَمَاऔर उसकी जोwamāتَهْوَىख़्वाहिश करते हैंtahwāٱلْأَنفُسُ ۖनफ़्सl-anfusuوَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَآءَهُمआई उनके पासjāahumمِّنfromminرَّبِّهِمُउनके रब की तरफ़ सेrabbihimuٱلْهُدَىٰٓहिदायतl-hudā٢٣
ये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल1 के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।
५३:२४
أَمْक्या हैamلِلْإِنسَـٰنِइन्सान कोlil'insāniمَاजोتَمَنَّىٰवो तमन्ना करेtamannā٢٤
क्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?
५३:२५
فَلِلَّهِतो अल्लाह ही के लिए हैfalillahiٱلْـَٔاخِرَةُआख़िरतl-ākhiratuوَٱلْأُولَىٰऔर पहली (दुनिया)wal-ūlā٢٥
(नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।
५३:२६
۞ وَكَمऔर कितने हीwakamمِّنofminمَّلَكٍۢफ़रिश्ते हैंmalakinفِىinٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiلَاnotتُغْنِىना काम आएगीtugh'nīشَفَـٰعَتُهُمْसिफ़ारिश उनकीshafāʿatuhumشَيْـًٔاकुछ भीshayanإِلَّاमगरillāمِنۢafterminبَعْدِइसके बादbaʿdiأَنकिanيَأْذَنَइजाज़त देyadhanaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِمَنजिसके लिएlimanيَشَآءُवो चाहेyashāuوَيَرْضَىٰٓऔर वो राज़ी हो जाएwayarḍā٢٦
और आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।1
५३:२७
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaلَا(do) notيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūnaبِٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत परbil-ākhiratiلَيُسَمُّونَअलबत्ता वो नाम रखते हैंlayusammūnaٱلْمَلَـٰٓئِكَةَफ़रिश्तों केl-malāikataتَسْمِيَةَनामtasmiyataٱلْأُنثَىٰऔरतों जैसेl-unthā٢٧
निःसंदेह वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे फ़रिश्तों के नाम औरतों के नामों की तरह रखते हैं।
५३:२८
وَمَاऔर नहींwamāلَهُمउन्हेंlahumبِهِۦउसकाbihiمِنْanyminعِلْمٍ ۖकोई इल्मʿil'minإِنनहींinيَتَّبِعُونَवो पैरवी करतेyattabiʿūnaإِلَّاमगरillāٱلظَّنَّ ۖगुमान कीl-ẓanaوَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلظَّنَّगुमानl-ẓanaلَا(does) notيُغْنِىनहीं वो काम आताyugh'nīمِنَagainstminaٱلْحَقِّहक़ के (मुक़ाबले पर)l-ḥaqiشَيْـًۭٔاकुछ भीshayan٢٨
हालाँकि उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान के पीछे चल रहे हैं। और निःसंदेह अनुमान सच्चाई की तुलना में किसी काम नहीं आता।
५३:२९
فَأَعْرِضْतो ऐराज़ कीजिएfa-aʿriḍعَنउससेʿanمَّنजोmanتَوَلَّىٰमुँह मोड़ेtawallāعَنfromʿanذِكْرِنَاहमारे ज़िक्र सेdhik'rināوَلَمْऔर नाwalamيُرِدْवो चाहेyuridإِلَّاमगरillāٱلْحَيَوٰةَज़िन्दगीl-ḥayataٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yā٢٩
अतः आप उससे मुँह फेर लें, जिसने हमारी नसीहत से मुँह मोड़ लिया और जिसने दुनिया के जीवन के सिवा कुछ नहीं चाहा।
५३:३०
ذَٰلِكَयहीdhālikaمَبْلَغُهُمइन्तिहा है उनकीmablaghuhumمِّنَofminaٱلْعِلْمِ ۚइल्म मेंl-ʿil'miإِنَّबेशकinnaرَبَّكَरब आपकाrabbakaهُوَवोhuwaأَعْلَمُज़्यादा जानता हैaʿlamuبِمَنउसे जोbimanضَلَّभटक गयाḍallaعَنfromʿanسَبِيلِهِۦउसके रास्ते सेsabīlihiوَهُوَऔर वोwahuwaأَعْلَمُज़्यादा जानता हैaʿlamuبِمَنِउसे जोbimaniٱهْتَدَىٰहिदायत पा गयाih'tadā٣٠
यही उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका पालनहार ही उसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी ज़्यादा जानने वाला है, जो सीधे मार्ग पर चला।
५३:३१
وَلِلَّهِऔर अल्लाह ही के लिए हैwalillahiمَاजो कुछفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَاऔर जो कुछwamāفِى(is) inٱلْأَرْضِज़मीन में हैl-arḍiلِيَجْزِىَताकि वो बदला देliyajziyaٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaأَسَـٰٓـُٔوا۟बुरा कियाasāūبِمَاबवजह उसके जोbimāعَمِلُوا۟उन्होंने अमल किएʿamilūوَيَجْزِىَऔर वो बदला देwayajziyaٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaأَحْسَنُوا۟अच्छा कियाaḥsanūبِٱلْحُسْنَىसाथ भलाई केbil-ḥus'nā٣١
तथा जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे, और भलाई करने वालों को अच्छा बदला दे।
५३:३२
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيَجْتَنِبُونَइज्तिनाब करते हैंyajtanibūnaكَبَـٰٓئِرَकबीराkabāiraٱلْإِثْمِगुनाहों सेl-ith'miوَٱلْفَوَٰحِشَऔर बेहयाई सेwal-fawāḥishaإِلَّاसिवाएillāٱللَّمَمَ ۚछोटे गुनाहों केl-lamamaإِنَّबेशकinnaرَبَّكَरब आपकाrabbakaوَٰسِعُवसीअwāsiʿuٱلْمَغْفِرَةِ ۚमग़्फ़िरत वाला हैl-maghfiratiهُوَवोhuwaأَعْلَمُज़्यादा जानता हैaʿlamuبِكُمْतुम्हेंbikumإِذْजबidhأَنشَأَكُمउसने पैदा किया तुम्हेंansha-akumمِّنَfromminaٱلْأَرْضِज़मीन सेl-arḍiوَإِذْऔर जबwa-idhأَنتُمْतुमantumأَجِنَّةٌۭजनीन थेajinnatunفِىinبُطُونِपेटों मेंbuṭūniأُمَّهَـٰتِكُمْ ۖअपनी माओं केummahātikumفَلَاपस नाfalāتُزَكُّوٓا۟तुम पाक ठहराओtuzakkūأَنفُسَكُمْ ۖअपने नफ़्सों कोanfusakumهُوَवोhuwaأَعْلَمُज़्यादा जानता हैaʿlamuبِمَنِउसे जिसनेbimaniٱتَّقَىٰٓतक़्वा इख़्तियार कियाittaqā٣٢
वे लोग जो बड़े गुनाहों तथा अश्लील कार्यों1 से दूर रहते हैं, सिवाय कुछ छोटे गुनाहों के। निःसंदेह आपका पालनहार बड़ा क्षमा करने वाला है। वह तुम्हें अधिक जानने वाला है जब उसने तुम्हें धरती2 से पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में बच्चे थे। अतः अपनी पवित्रता का दावा मत करो, वह उसे ज़्यादा जानने वाला है जो वास्तव में परहेज़गार है।
५३:३३
أَفَرَءَيْتَक्या भला देखा आपनेafara-aytaٱلَّذِىउसे जोalladhīتَوَلَّىٰमुँह मोड़ गयाtawallā٣٣
फिर क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया?
५३:३४
وَأَعْطَىٰऔर उसने दियाwa-aʿṭāقَلِيلًۭاथोड़ा साqalīlanوَأَكْدَىٰٓऔर उसने रोक लियाwa-akdā٣٤
और थोड़ा-सा दिया फिर रोक लिया।
५३:३५
أَعِندَهُۥक्या उसके पासaʿindahuعِلْمُइल्म हैʿil'muٱلْغَيْبِग़ैब काl-ghaybiفَهُوَतो वोfahuwaيَرَىٰٓवो देख रहा हैyarā٣٥
क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है? अतः वह देख रहा है।1
५३:३६
أَمْयाamلَمْनहींlamيُنَبَّأْवो ख़बर दिया गयाyunabbaبِمَاउसकी जोbimāفِى(was) inصُحُفِसहीफ़ों में हैṣuḥufiمُوسَىٰमूसा केmūsā٣٦
या उसे उन बातों की सूचना नहीं दी गई, जो मूसा के ग्रंथों में हैं?
५३:३७
وَإِبْرَٰهِيمَऔर इब्राहीम केwa-ib'rāhīmaٱلَّذِىजिसनेalladhīوَفَّىٰٓवफ़ा कीwaffā٣٧
और इबराहीम के (ग्रंथों में), जिसने (कर्तव्य) पूरा किया।
५३:३८
أَلَّاकि नाallāتَزِرُबोझ उठाएगीtaziruوَازِرَةٌۭकोई बोझ उठाने वालीwāziratunوِزْرَबोझwiz'raأُخْرَىٰकिसी दूसरे कीukh'rā٣٨
कि कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।
५३:३९
وَأَنऔर ये किwa-anلَّيْسَनहीं हैlaysaلِلْإِنسَـٰنِइन्सान के लिएlil'insāniإِلَّاमगरillāمَاजोسَعَىٰउसने कोशिश कीsaʿā٣٩
और यह कि मनुष्य के लिए केवल वही है, जिसके लिए उसने प्रयास किया।
५३:४०
وَأَنَّऔर ये किwa-annaسَعْيَهُۥकोशिश उसकीsaʿyahuسَوْفَअनक़रीबsawfaيُرَىٰवो देखी जाएगीyurā٤٠
और यह कि निश्चय उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।
५३:४१
ثُمَّफिरthummaيُجْزَىٰهُबदला दिया जाएगा उसेyuj'zāhuٱلْجَزَآءَबदलाl-jazāaٱلْأَوْفَىٰपूरा-पूराl-awfā٤١
फिर उसे उसका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा।
५३:४२
وَأَنَّऔर बेशकwa-annaإِلَىٰtoilāرَبِّكَआपके रब की तरफ़ हीrabbikaٱلْمُنتَهَىٰइन्तिहा हैl-muntahā٤٢
और यह कि निःसंदेह आपके पालनहार ही की ओर अंततः पहुँचना है।
५३:४३
وَأَنَّهُۥऔर बेशक वोwa-annahuهُوَवो ही हैhuwaأَضْحَكَजिसने हँसायाaḍḥakaوَأَبْكَىٰऔर उसने रुलायाwa-abkā٤٣
तथा यह कि निःसंदह वही है, जिसने हँसाया तथा रुलाया।
५३:४४
وَأَنَّهُۥऔर बेशक वोwa-annahuهُوَवो ही हैhuwaأَمَاتَजिसने मौत दीamātaوَأَحْيَاऔर उसने ज़िन्दा कियाwa-aḥyā٤٤
तथा यह कि निःसंदेह वही है, जिसने मृत्यु दी और जीवन दिया।
५३:४५
وَأَنَّهُۥऔर बेशक वो ही हैwa-annahuخَلَقَजिसने पैदा कियाkhalaqaٱلزَّوْجَيْنِजोड़ों कोl-zawjayniٱلذَّكَرَनरl-dhakaraوَٱلْأُنثَىٰऔर मादा कोwal-unthā٤٥
और यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।
५३:४६
مِنFromminنُّطْفَةٍनुत्फ़े सेnuṭ'fatinإِذَاजबidhāتُمْنَىٰवो टपकाया जाता हैtum'nā٤٦
एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।
५३:४७
وَأَنَّऔर बेशकwa-annaعَلَيْهِउसी के ज़िम्मे हैʿalayhiٱلنَّشْأَةَपैदाइशl-nashataٱلْأُخْرَىٰदूसरी मरतबाl-ukh'rā٤٧
और यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार1 पैदा करना है।
५३:४८
وَأَنَّهُۥऔर बेशक वोwa-annahuهُوَवो ही हैhuwaأَغْنَىٰजिसने ग़नी कियाaghnāوَأَقْنَىٰऔर उसने मालदार बनायाwa-aqnā٤٨
और यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।
५३:४९
وَأَنَّهُۥऔर बेशक वोwa-annahuهُوَवो ही हैhuwaرَبُّरबrabbuٱلشِّعْرَىٰशिअरा (सितारे) काl-shiʿ'rā٤٩
और यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा'' का रब है।
५३:५०
وَأَنَّهُۥٓऔर बेशक वो ही हैwa-annahuأَهْلَكَजिसने हलाक कियाahlakaعَادًاआदेʿādanٱلْأُولَىٰऊला कोl-ūlā٥٠
और यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद' को विनष्ट किया।
५३:५१
وَثَمُودَا۟और समूद कोwathamūdāفَمَآपस नाfamāأَبْقَىٰउसने बाक़ी छोड़ाabqā٥١
तथा समूद को, फिर (किसी को) बाक़ी न छोड़ा।
५३:५२
وَقَوْمَऔर क़ौमेwaqawmaنُوحٍۢनूह कोnūḥinمِّنbeforeminقَبْلُ ۖउससे क़ब्लqabluإِنَّهُمْबेशक वोinnahumكَانُوا۟थे वोkānūهُمْवोhumأَظْلَمَबहुत ज़ालिमaẓlamaوَأَطْغَىٰऔर ज़्यादा सरकशwa-aṭghā٥٢
तथा इनसे पहले नूह़ की जाति को। निःसंदेह वे बहुत ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे।
५३:५३
وَٱلْمُؤْتَفِكَةَऔर उलट जाने वाली बस्ती कोwal-mu'tafikataأَهْوَىٰउसने नीचे दे माराahwā٥٣
और उलट जाने वाली बस्ती1 को उसने उठाकर धरती पर दे मारा।
५३:५४
فَغَشَّىٰهَاतो ढाँप लिया उन्हेंfaghashāhāمَاजिसनेغَشَّىٰढाँपाghashā٥٤
तो ढाँप दिया1 उसे जिस चीज़ से ढाँपा।
५३:५५
فَبِأَىِّपस कौन सीfabi-ayyiءَالَآءِनेअमतों परālāiرَبِّكَअपने रब कीrabbikaتَتَمَارَىٰतुम शक करते होtatamārā٥٥
तो (ऐ इनसान!) तू अपने पालनहार की ने'मतों में से किस-किस में संदेह करेगा?
५३:५६
هَـٰذَاयेhādhāنَذِيرٌۭएक डराने वाला हैnadhīrunمِّنَfromminaٱلنُّذُرِडराने वालों में सेl-nudhuriٱلْأُولَىٰٓपहलेl-ūlā٥٦
यह1 पहले डराने वालों में से एक डराने वाला है।
५३:५७
أَزِفَتِनज़दीक आ गईazifatiٱلْـَٔازِفَةُनज़दीक आने वालीl-āzifatu٥٧
निकट आने वाली निकट आ गई।
५३:५८
لَيْسَनहींlaysaلَهَاउसके लिएlahāمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiكَاشِفَةٌकोई हटाने वालाkāshifatun٥٨
जिसे अल्लाह के सिवा कोई हटाने वाला नहीं।
५३:५९
أَفَمِنْक्या भलाafaminهَـٰذَاइसhādhāٱلْحَدِيثِबात सेl-ḥadīthiتَعْجَبُونَतुम ताअज्जुब करते होtaʿjabūna٥٩
तो क्या तुम इस बात पर आश्चर्य करते हो?
५३:६०
وَتَضْحَكُونَऔर तुम हँसते होwataḍḥakūnaوَلَاand (do) notwalāتَبْكُونَऔर नहीं तुम रोतेtabkūna٦٠
तथा हँसते हो और रोते नहीं हो?
५३:६१
وَأَنتُمْऔर तुमwa-antumسَـٰمِدُونَग़ाफ़िल होsāmidūna٦١
तथा तुम ग़ाफ़िल हो!
५३:६२
فَٱسْجُدُوا۟पस सजदा करोfa-us'judūلِلَّهِअल्लाह के लिएlillahiوَٱعْبُدُوا۟ ۩और इबादत करोwa-uʿ'budū٦٢
अतः अल्लाह को सजदा करो और उसी की इबादत1 करो।