५४
अल-क़मर
القمر
सूरह अल-क़मर (القمر) पवित्र क़ुरआन का ५४ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ५५ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५४:१
ٱقْتَرَبَتِक़रीब आ गईiq'tarabatiٱلسَّاعَةُक़यामतl-sāʿatuوَٱنشَقَّऔर शक़ हो गयाwa-inshaqqaٱلْقَمَرُचाँदl-qamaru١
क़ियामत बहुत निकट आ गई1 और चाँद फट गया।
५४:२
وَإِنऔर अगरwa-inيَرَوْا۟वो देख लेंyarawءَايَةًۭकोई भी निशानीāyatanيُعْرِضُوا۟वो मुँह मोड़ जाते हैंyuʿ'riḍūوَيَقُولُوا۟और वो कहते हैंwayaqūlūسِحْرٌۭएक जादू हैsiḥ'runمُّسْتَمِرٌّۭजारीmus'tamirrun٢
और यदि वे कोई निशानी देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं कि (यह) एक जादू है जो समाप्त हो जाने वाला है।
५४:३
وَكَذَّبُوا۟और उन्होंने झुठलायाwakadhabūوَٱتَّبَعُوٓا۟और उन्होंने पैरवी कीwa-ittabaʿūأَهْوَآءَهُمْ ۚअपनी ख़्वाहिशात कीahwāahumوَكُلُّऔर हरwakulluأَمْرٍۢकाम काamrinمُّسْتَقِرٌّۭवक़्त मुक़र्रर हैmus'taqirrun٣
उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का पालन किया और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।
५४:४
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَآءَهُمआईं उनके पासjāahumمِّنَofminaٱلْأَنۢبَآءِकई ख़बरेंl-anbāiمَاwhereinmāفِيهِजिनमेंfīhiمُزْدَجَرٌकाफ़ी तंबीह हैmuz'dajarun٤
और निःसंदेह उनके पास ऐसी सूचनाएँ आ चुकी हैं, जिनमें डाँटडपट है।
५४:५
حِكْمَةٌۢहिकमत हैḥik'matunبَـٰلِغَةٌۭ ۖकामिलbālighatunفَمَاतो नाfamāتُغْنِकाम आएtugh'niٱلنُّذُرُडरावेl-nudhuru٥
पूर्णतया हिकमत है, फिर भी डरानेवाली चीज़ें काम नहीं आतीं।
५४:६
فَتَوَلَّतो मुँह फेर लीजिएfatawallaعَنْهُمْ ۘउनसेʿanhumيَوْمَजिस दिनyawmaيَدْعُपुकारेगाyadʿuٱلدَّاعِपुकारने वालाl-dāʿiإِلَىٰtoilāشَىْءٍۢतरफ़ एक चीज़shayinنُّكُرٍनागवार केnukurin٦
अतः आप उनसे मुँह फेर लें, जिस दिन पुकारने वाला एक अप्रिय चीज़1 की ओर पुकारेगा।
५४:७
خُشَّعًاझुकी हुई होंगीkhushaʿanأَبْصَـٰرُهُمْनिगाहें उनकीabṣāruhumيَخْرُجُونَवो निकलेंगेyakhrujūnaمِنَfromminaٱلْأَجْدَاثِक़ब्रों सेl-ajdāthiكَأَنَّهُمْगोया कि वोka-annahumجَرَادٌۭटिड्डियाँ हैंjarādunمُّنتَشِرٌۭफैली हुईंmuntashirun٧
उनकी आँखें झुकी होंगी। वे कब्रों से ऐसे निकलेंगे, जैसे वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हों।
५४:८
مُّهْطِعِينَदौड़ते होंगेmuh'ṭiʿīnaإِلَىtowardsilāٱلدَّاعِ ۖतरफ़ पुकारने वाले केl-dāʿiيَقُولُकहेंगेyaqūluٱلْكَـٰفِرُونَकाफ़िरl-kāfirūnaهَـٰذَاयेhādhāيَوْمٌदिन हैyawmunعَسِرٌۭबड़ा सख़्तʿasirun٨
वे बुलाने वाले की ओर तेज़ी से भाग रहे होंगे। काफ़िर कहेंगे : यह बड़ा कठिन दिन है।
५४:९
۞ كَذَّبَتْझुठलायाkadhabatقَبْلَهُمْउनसे पहलेqablahumقَوْمُक़ौमेqawmuنُوحٍۢनूह नेnūḥinفَكَذَّبُوا۟तो उन्होंने झुठलायाfakadhabūعَبْدَنَاहमारे बन्दे कोʿabdanāوَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūمَجْنُونٌۭमजनून हैmajnūnunوَٱزْدُجِرَऔर वो झिड़क दिया गयाwa-uz'dujira٩
इनसे पहले नूह़ की जाति ने झुठलाया। तो उन्होंने हमारे बंदे को झुठलाया और कहा कि वह पागल है और उसे झिड़क दिया गया।
५४:१०
فَدَعَاतो उसने पुकाराfadaʿāرَبَّهُۥٓअपने रब कोrabbahuأَنِّىबेशक मैंannīمَغْلُوبٌۭमग़लूब हूँmaghlūbunفَٱنتَصِرْपस तू इन्तिक़ाम लेfa-intaṣir١٠
तो उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह मैं विवश हूँ, अतः तू बदला ले।
५४:११
فَفَتَحْنَآतो खोल दिए हमनेfafataḥnāأَبْوَٰبَदरवाज़ेabwābaٱلسَّمَآءِआसमान केl-samāiبِمَآءٍۢसाथ एक पानीbimāinمُّنْهَمِرٍۢख़ूब बरसने वाले केmun'hamirin١١
तो हमने ज़ोर से बरसने वाले पानी के साथ आकाश के द्वार खोल दिए।
५४:१२
وَفَجَّرْنَاऔर फाड़ दिया हमनेwafajjarnāٱلْأَرْضَज़मीन सेl-arḍaعُيُونًۭاचश्मों कोʿuyūnanفَٱلْتَقَىपस मिल गयाfal-taqāٱلْمَآءُपानीl-māuعَلَىٰٓforʿalāأَمْرٍۢएक काम परamrinقَدْतहक़ीक़qadقُدِرَजो मुक़द्दर हो चुका थाqudira١٢
तथा हमने धरती को स्रोतों के साथ फाड़ दिया, तो सारा जल एक साथ मिल गया, उस कार्य के लिए जो नियत हो चुका था।
५४:१३
وَحَمَلْنَـٰهُऔर सवार किया हमने उसेwaḥamalnāhuعَلَىٰonʿalāذَاتِ(ark) made of planksdhātiأَلْوَٰحٍۢऊपर तख़्तों वाली केalwāḥinوَدُسُرٍۢऔर मेख़ों वाली केwadusurin١٣
और हमने उसे तख़्तों और कीलों वाली (नाव) पर सवार कर दिया।
५४:१४
تَجْرِىजो चल रही थीtajrīبِأَعْيُنِنَاहमारी निगाहों के सामनेbi-aʿyunināجَزَآءًۭबदला थाjazāanلِّمَنउसका जिसकाlimanكَانَथाkānaكُفِرَइन्कार किया गयाkufira١٤
जो हमारी आँखों के सामने चल रही थी, उसका बदला लेने के लिए जिसका इनकार किया गया था।
५४:१५
وَلَقَدऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadتَّرَكْنَـٰهَآछोड़ दिया हमने उसेtaraknāhāءَايَةًۭएक निशानी (बनाकर)āyatanفَهَلْतो क्या हैfahalمِنanyminمُّدَّكِرٍۢकोई नसीहत पकड़ने वालाmuddakirin١٥
और निःसंदेह हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ा, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:१६
فَكَيْفَतो कैसाfakayfaكَانَथाkānaعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīوَنُذُرِऔर डराना मेराwanudhuri١٦
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:१७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadيَسَّرْنَاआसान कर दिया हमनेyassarnāٱلْقُرْءَانَक़ुरान कोl-qur'ānaلِلذِّكْرِनसीहत के लिएlildhik'riفَهَلْतो क्या हैfahalمِنanyminمُّدَّكِرٍۢकोई नसीहत पकड़ने वालाmuddakirin١٧
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:१८
كَذَّبَتْझुठलायाkadhabatعَادٌۭआद नेʿādunفَكَيْفَतो कैसाfakayfaكَانَथाkānaعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīوَنُذُرِऔर डराना मेराwanudhuri١٨
आद ने (भी) झुठलाया। तो कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:१९
إِنَّآबेशक हमinnāأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimرِيحًۭاएक हवाrīḥanصَرْصَرًۭاतुंद व तेज़ कोṣarṣaranفِىonfīيَوْمِएक दिन मेंyawmiنَحْسٍۢ(of) misfortunenaḥsinمُّسْتَمِرٍّۢमुसलसल नहूसत वालेmus'tamirrin١٩
निःसंदहे हमने एक निरंतर अशुभ दिन में उनपर एक तेज़ ठंडी हवा भेज दी।
५४:२०
تَنزِعُउखाड़ कर फेंक रही थीtanziʿuٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaكَأَنَّهُمْगोया कि वोka-annahumأَعْجَازُतने थेaʿjāzuنَخْلٍۢखजूर केnakhlinمُّنقَعِرٍۢजड़ से उखड़े हुएmunqaʿirin٢٠
वह लोगों को ऐसे उखाड़ फेंकती थी, जैसे वे उखड़े हुए खजूर के तने हों।
५४:२१
فَكَيْفَतो कैसाfakayfaكَانَथाkānaعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīوَنُذُرِऔर डराना मेराwanudhuri٢١
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:२२
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadيَسَّرْنَاआसान कर दिया हमनेyassarnāٱلْقُرْءَانَक़ुरआन कोl-qur'ānaلِلذِّكْرِनसीहत के लिएlildhik'riفَهَلْतो क्या हैfahalمِنanyminمُّدَّكِرٍۢकोई नसीहत पकड़ने वालाmuddakirin٢٢
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:२३
كَذَّبَتْझुठलायाkadhabatثَمُودُसमूद नेthamūduبِٱلنُّذُرِडराने वालों कोbil-nudhuri٢٣
समूद1 ने डराने वालों को झुठलाया।
५४:२४
فَقَالُوٓا۟तो उन्होंने कहाfaqālūأَبَشَرًۭاक्या एक आदमीabasharanمِّنَّاहम में सेminnāوَٰحِدًۭاअकेलाwāḥidanنَّتَّبِعُهُۥٓहम पैरवी करें उसकीnattabiʿuhuإِنَّآबेशक हमinnāإِذًۭاतबidhanلَّفِى(will be) surely inlafīضَلَـٰلٍۢअलबत्ता गुमराही में होंगेḍalālinوَسُعُرٍऔर जुनून मेंwasuʿurin٢٤
तो उन्होंने कहा : क्या हम अपने ही में से एक आदमी का अनुसरण करें? निश्चय ही हम उस समय बड़ी गुमराही और बावलेपन में होंगे।
५४:२५
أَءُلْقِىَक्या डाला गयाa-ul'qiyaٱلذِّكْرُज़िक्र /नसीहतl-dhik'ruعَلَيْهِउस परʿalayhiمِنۢfromminبَيْنِنَاहमारे दर्मियान सेbaynināبَلْबल्किbalهُوَवो हैhuwaكَذَّابٌसख़्त झूठाkadhābunأَشِرٌۭबहुत इतराने वालाashirun٢٥
क्या यह उपदेश हमारे बीच में से उसी पर उतारा गया है? बल्कि वह बड़ा झूठा है, अहंकारी है।
५४:२६
سَيَعْلَمُونَअनक़रीब वो जान लोंगेsayaʿlamūnaغَدًۭاकलghadanمَّنِकौन हैmaniٱلْكَذَّابُसख़्त झूठाl-kadhābuٱلْأَشِرُबहुत इतराने वालाl-ashiru٢٦
शीघ्र ही वे कल जान लेंगे कि बहुत झूठा, अहंकारी कौन है?
५४:२७
إِنَّاबेशक हमinnāمُرْسِلُوا۟भेजने वाले हैंmur'silūٱلنَّاقَةِऊँटनी कोl-nāqatiفِتْنَةًۭबतौर आज़माइशfit'natanلَّهُمْउनके लिएlahumفَٱرْتَقِبْهُمْपस इन्तिज़ार करो उनकाfa-ir'taqib'humوَٱصْطَبِرْऔर सब्र करोwa-iṣ'ṭabir٢٧
निःसंदेह हम यह ऊँटनी उनकी परीक्षा के लिए भेजने वाले हैं। अतः उनकी प्रतीक्षा करो और ख़ूब धैर्य रखो।
५४:२८
وَنَبِّئْهُمْऔर आगाह कर दो उन्हेंwanabbi'humأَنَّबेशकannaٱلْمَآءَपानीl-māaقِسْمَةٌۢतक़सीम करदा हैqis'matunبَيْنَهُمْ ۖदर्मियान उनकेbaynahumكُلُّहर एक केkulluشِرْبٍۢपानी की बारीshir'binمُّحْتَضَرٌۭहाज़िर की गई हैmuḥ'taḍarun٢٨
और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। पीने की प्रत्येक बारी1 पर उपस्थित हुआ जाएगा।
५४:२९
فَنَادَوْا۟तो उन्होंने पुकाराfanādawصَاحِبَهُمْअपने साथी कोṣāḥibahumفَتَعَاطَىٰतो उसने पकड़ाfataʿāṭāفَعَقَرَफिर उसने कूँचें काट डालींfaʿaqara٢٩
तो उन्होंने अपने साथी को पुकारा। सो उसने (उसे) पकड़ा और उसका वध कर दिया।
५४:३०
فَكَيْفَफिर कैसाfakayfaكَانَथाkānaعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīوَنُذُرِऔर डराना मेराwanudhuri٣٠
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:३१
إِنَّآबेशक हमinnāأَرْسَلْنَاभेजी हमनेarsalnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimصَيْحَةًۭचिंघाड़ṣayḥatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanفَكَانُوا۟तो हो गए वोfakānūكَهَشِيمِमानिन्द रौंदी हुई बाड़ केkahashīmiٱلْمُحْتَظِرِबाड़ लगाने वाले कीl-muḥ'taẓiri٣١
हमने उनपर एक ही चिंघाड़ भेजी, तो वे बाड़ लगाने वाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह हो गए।
५४:३२
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadيَسَّرْنَاआसान कर दिया हमनेyassarnāٱلْقُرْءَانَक़ुरआन कोl-qur'ānaلِلذِّكْرِनसीहत के लिएlildhik'riفَهَلْतो क्या हैfahalمِنanyminمُّدَّكِرٍۢकोई नसीहत पकड़ने वालाmuddakirin٣٢
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:३३
كَذَّبَتْझुठलायाkadhabatقَوْمُक़ौमेqawmuلُوطٍۭलूत नेlūṭinبِٱلنُّذُرِडराने वालों कोbil-nudhuri٣٣
लूत की जाति ने डराने वालों को झुठला दिया।
५४:३४
إِنَّآबेशक हमinnāأَرْسَلْنَاभेजी हमनेarsalnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimحَاصِبًاपत्थरों की आँधीḥāṣibanإِلَّآसिवाएillāءَالَ(the) familyālaلُوطٍۢ ۖआले लूत केlūṭinنَّجَّيْنَـٰهُمनिजात दी हमने उन्हेंnajjaynāhumبِسَحَرٍۢसहर के वक़्तbisaḥarin٣٤
निःसंदेह हमने उनपर पत्थर बरसाने वाली एक हवा भेजी, सिवाय लूत के घरवालों के। उन्हें हमने भोर से कुछ पहले ही बचा लिया।
५४:३५
نِّعْمَةًۭबतौर इनआमniʿ'matanمِّنْfromminعِندِنَا ۚहमारे पास सेʿindināكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaنَجْزِىहम बदला देते हैंnajzīمَنउसे जोmanشَكَرَशुक्र अदा करेshakara٣٥
अपनी ओर से (विशेष) अनुग्रह करते हुए। इसी प्रकार हम उसे बदला देते हैं, जो धन्यवाद करे।
५४:३६
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَنذَرَهُمउसने डराया उन्हेंandharahumبَطْشَتَنَاहमारी पकड़ सेbaṭshatanāفَتَمَارَوْا۟तो उन्होंने शक कियाfatamārawبِٱلنُّذُرِडरावों परbil-nudhuri٣٦
और निःसंदेह उसने उन्हें हमारी पकड़ से डराया, तो उन्होंने डराने में संदेह किया।
५४:३७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadرَٰوَدُوهُउन्होंने फुसलाना चाहा उसेrāwadūhuعَنthey demanded from himʿanضَيْفِهِۦउसके मेहमानों के बारे मेंḍayfihiفَطَمَسْنَآतो मिटा दीं हमनेfaṭamasnāأَعْيُنَهُمْआँखें उनकीaʿyunahumفَذُوقُوا۟तो चखोfadhūqūعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīوَنُذُرِऔर डराना मेराwanudhuri٣٧
और निःसंदेह उन्होंने उसे उसके अतिथियों से बहकाने1 का प्रयास किया, तो हमने उनकी आँखें मेट दीं। अतः मेरी यातना और मेरी चेतावनी का मज़ा चखो।
५४:३८
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadصَبَّحَهُمसुबह की उन परṣabbaḥahumبُكْرَةًसुबह सवेरेbuk'ratanعَذَابٌۭएक अज़ाबʿadhābunمُّسْتَقِرٌّۭमुसलसल नेmus'taqirrun٣٨
और निःसंदेह सुबह सवेरे ही उनपर एक न टलने वाली यातना आ पहुँची।
५४:३९
فَذُوقُوا۟तो चखोfadhūqūعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīوَنُذُرِऔर डराना मेराwanudhuri٣٩
अतः मेरे अज़ाब और मेरे डराने का स्वाद चखो।
५४:४०
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadيَسَّرْنَاआसान कर दिया हमनेyassarnāٱلْقُرْءَانَक़ुरआन कोl-qur'ānaلِلذِّكْرِनसीहत के लिएlildhik'riفَهَلْतो क्या हैfahalمِنanyminمُّدَّكِرٍۢकोई नसीहत पकड़ने वालाmuddakirin٤٠
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:४१
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَآءَआएjāaءَالَ(to the) peopleālaفِرْعَوْنَआले फ़िरऔन के पासfir'ʿawnaٱلنُّذُرُडराने वालेl-nudhuru٤١
तथा निःसंदेह फ़िरऔनियों के पास डराने वाले आए।
५४:४२
كَذَّبُوا۟उन्होंने झुठलायाkadhabūبِـَٔايَـٰتِنَاहमारी आयात कोbiāyātināكُلِّهَاसब के सबkullihāفَأَخَذْنَـٰهُمْतो पकड़ लिया हमने उन्हेंfa-akhadhnāhumأَخْذَपकड़नाakhdhaعَزِيزٍۢबहुत ज़बरदस्तʿazīzinمُّقْتَدِرٍइक़्तिदार वाले काmuq'tadirin٤٢
उन्होंने हमारी सब निशानियों को झुठला दिया, तो हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार सब पर प्रभुत्वशाली, सबसे शक्तिशाली पकड़ता है।
५४:४३
أَكُفَّارُكُمْक्या क़ुफ़्फ़ार तुम्हारेakuffārukumخَيْرٌۭबेहतर हैंkhayrunمِّنْthanminأُو۟لَـٰٓئِكُمْउन लोगों सेulāikumأَمْयाamلَكُمतुम्हारे लिएlakumبَرَآءَةٌۭकोई छुटकारा पाना हैbarāatunفِىinfīٱلزُّبُرِ(पहली) किताबों मेंl-zuburi٤٣
क्या तुम्हारे काफ़िर उन लोगों से बेहतर हैं, या तुम्हारे लिए (पहली) पुस्कतों में कोई मुक्ति लिखी हुई है?
५४:४४
أَمْयाamيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaنَحْنُहम हैंnaḥnuجَمِيعٌۭएक जमाअतjamīʿunمُّنتَصِرٌۭबदला लेने वालेmuntaṣirun٤٤
या वे कहते हैं कि हम एक जत्था हैं, जो बदला लेकर रहने वाले हैं?
५४:४५
سَيُهْزَمُअनक़रीब शिकस्त खा जाएगाsayuh'zamuٱلْجَمْعُजत्थाl-jamʿuوَيُوَلُّونَऔर वो फेर लेंगेwayuwallūnaٱلدُّبُرَपुश्तेंl-dubura٤٥
शीध्र ही यह समूह पराजित कर दिया जाएगा और ये लोग पीठ दिखाकर भागेंगे।1
५४:४६
بَلِबल्किbaliٱلسَّاعَةُक़यामतl-sāʿatuمَوْعِدُهُمْउनके वादे का वक़्त हैmawʿiduhumوَٱلسَّاعَةُऔर क़यामतwal-sāʿatuأَدْهَىٰबहुत सख़्त हैadhāوَأَمَرُّऔर बहुत कड़वीwa-amarru٤٦
बल्कि क़यामत ही उनके वादे का समय है और क़ियामत कहीं बड़ी विपत्ति और अधिक कड़वी है।
५४:४७
إِنَّबेशकinnaٱلْمُجْرِمِينَमुजरिम लोगl-muj'rimīnaفِى(are) infīضَلَـٰلٍۢगुमराही में हैंḍalālinوَسُعُرٍۢऔर जुनून मेंwasuʿurin٤٧
निश्चय अपराधी लोग बड़ी गुमराही और यातना में हैं।
५४:४८
يَوْمَजिस दिनyawmaيُسْحَبُونَवो घसीटे जाऐंगेyus'ḥabūnaفِىintofīٱلنَّارِआग मेंl-nāriعَلَىٰonʿalāوُجُوهِهِمْअपने चेहरों के बलwujūhihimذُوقُوا۟चखोdhūqūمَسَّछूनाmassaسَقَرَदोज़ख़ काsaqara٤٨
जिस दिन वे आग में अपने चेहरों के बल घसीटे जाएँगे। (कहा जाएगा :) जहन्नम की यातना का मज़ा चखो।
५४:४९
إِنَّاबेशक हमनेinnāكُلَّहरkullaشَىْءٍचीज़ कोshayinخَلَقْنَـٰهُपैदा किया हमने उसेkhalaqnāhuبِقَدَرٍۢसाथ एक अंदाज़े केbiqadarin٤٩
निःसंदेह हमने प्रत्येक वस्तु को एक अनुमान के साथ पैदा किया है।
५४:५०
وَمَآऔर नहींwamāأَمْرُنَآहुक्म हमाराamrunāإِلَّاमगरillāوَٰحِدَةٌۭएक ही बारwāḥidatunكَلَمْحٍۭमानिन्द झपकने केkalamḥinبِٱلْبَصَرِनिगाह कोbil-baṣari٥٠
और हमारा आदेश तो केवल एक बार होता है, जैसे आँख की एक झपक।1
५४:५१
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَهْلَكْنَآहलाक किया हमनेahlaknāأَشْيَاعَكُمْतुम्हारे गिरोहों कोashyāʿakumفَهَلْतो क्या हैfahalمِنanyminمُّدَّكِرٍۢकोई नसीहत पकड़ने वालाmuddakirin٥١
और निःसंदेह हमने तुम्हारे जैसे कई समूहों को विनष्ट कर दिया, तो क्या है कोई नसीहत हासिल करने वाला?
५४:५२
وَكُلُّऔर हरwakulluشَىْءٍۢचीज़shayinفَعَلُوهُउन्होंने किया जिसेfaʿalūhuفِى(is) infīٱلزُّبُرِसहीफ़ों में हैl-zuburi٥٢
और उन्होंने जो कुछ भी किया वह किताबों (कर्मपत्रों) में दर्ज है।1
५४:५३
وَكُلُّऔर हरwakulluصَغِيرٍۢछोटाṣaghīrinوَكَبِيرٍۢऔर बड़ाwakabīrinمُّسْتَطَرٌलिखा हुआ हैmus'taṭarun٥٣
और हर छोटी और बड़ी बात लिखी हुई है।
५४:५४
إِنَّबेशकinnaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगl-mutaqīnaفِى(will be) infīجَنَّـٰتٍۢबाग़ात में होंगेjannātinوَنَهَرٍۢऔर नहरों मेंwanaharin٥٤
निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वाले बाग़ो और नहरों में होंगे।
५४:५५
فِىInfīمَقْعَدِजगह मेंmaqʿadiصِدْقٍसच्चाई कीṣid'qinعِندَnearʿindaمَلِيكٍۢबादशाह के पासmalīkinمُّقْتَدِرٍۭजो इक़्तिदार वाला हैmuq'tadirin٥٥
सत्य की सभा में, महान बादशाह के पास, जो असीम शक्ति वाला है।
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