१०१

अल-क़ारिआ

मक्की ११ आयतें पारा १
القارعة
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१०१:१
ٱلْقَارِعَةُ खटखटाने वाली al-qāriʿatu
खटखटाने वाली
١ (1)
(1)
वह खड़खड़ा देने वाली।
१०१:२
مَا क्या है वो
क्या है वो
ٱلْقَارِعَةُ खटखटाने वाली l-qāriʿatu
खटखटाने वाली
٢ (2)
(2)
क्या है वह खड़खड़ा देने वाली?
१०१:३
وَمَآ और क्या चीज़ wamā
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ बताए आपको adrāka
बताए आपको
مَا कि क्या है वो
कि क्या है वो
ٱلْقَارِعَةُ खटखटाने वाली l-qāriʿatu
खटखटाने वाली
٣ (3)
(3)
और तुम क्या जानो कि वह खड़खड़ा देने वाली क्या है?
१०१:४
يَوْمَ जिस दिन yawma
जिस दिन
يَكُونُ हो जाऐंगे yakūnu
हो जाऐंगे
ٱلنَّاسُ लोग l-nāsu
लोग
كَٱلْفَرَاشِ परवानों की तरह kal-farāshi
परवानों की तरह
ٱلْمَبْثُوثِ बिखरे हुए l-mabthūthi
बिखरे हुए
٤ (4)
(4)
जिस दिन लोग बिखरे हुए पतिंगों की तरह हो जाएँगे।
१०१:५
وَتَكُونُ और हो जाऐंगे watakūnu
और हो जाऐंगे
ٱلْجِبَالُ पहाड़ l-jibālu
पहाड़
كَٱلْعِهْنِ रंगीन रूई की तरह kal-ʿih'ni
रंगीन रूई की तरह
ٱلْمَنفُوشِ धुनकी हुई l-manfūshi
धुनकी हुई
٥ (5)
(5)
और पर्वत धुने हुए रंगीन ऊन की तरह हो जाएँगे।1
१०१:६
فَأَمَّا तो रहा fa-ammā
तो रहा
مَن वो जो man
वो जो
ثَقُلَتْ भारी हुए thaqulat
भारी हुए
مَوَٰزِينُهُۥ पलड़े उसके mawāzīnuhu
पलड़े उसके
٦ (6)
(6)
तो जिसके पलड़े भारी हो गए,
१०१:७
فَهُوَ तो वो fahuwa
तो वो
فِى (will be) in
(will be) in
عِيشَةٍۢ ज़िन्दगी में होगा ʿīshatin
ज़िन्दगी में होगा
رَّاضِيَةٍۢ पसंदीदा rāḍiyatin
पसंदीदा
٧ (7)
(7)
तो वह संतोषजनक जीवन में होगा।
१०१:८
وَأَمَّا और रहा wa-ammā
और रहा
مَنْ वो जो man
वो जो
خَفَّتْ हल्के हुए khaffat
हल्के हुए
مَوَٰزِينُهُۥ पलड़े उसके mawāzīnuhu
पलड़े उसके
٨ (8)
(8)
तथा जिसके पलड़े हल्के हो गए,
१०१:९
فَأُمُّهُۥ तो उसी माँ(ठिकाना) fa-ummuhu
तो उसी माँ(ठिकाना)
هَاوِيَةٌۭ हाविया(जहन्नम)होगी hāwiyatun
हाविया(जहन्नम)होगी
٩ (9)
(9)
उसका ठिकाना 'हाविया' (गड्ढा) है।
१०१:१०
وَمَآ और क्या चीज़ wamā
और क्या चीज़
أَدْرَىٰكَ बताए आपको adrāka
बताए आपको
مَا what
what
هِيَهْ क्या है वो hiyah
क्या है वो
١٠ (10)
(10)
और तुम क्या जानो कि वह ('हाविया') क्या है?
१०१:११
نَارٌ आग है nārun
आग है
حَامِيَةٌۢ भड़कती हुई ḥāmiyatun
भड़कती हुई
١١ (11)
(11)
वह एक बहुत गर्म आग है।1