४७

मुहम्मद

मदनी ३८ आयतें पारा २६
محمد
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४७:१
ٱلَّذِينَ वो लोग जिन्होंने alladhīna
वो लोग जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
وَصَدُّوا۟ और उन्होंने रोका waṣaddū
और उन्होंने रोका
عَن from ʿan
from
سَبِيلِ (the) way of Allah sabīli
(the) way of Allah
ٱللَّهِ अल्लाह के रास्ते से l-lahi
अल्लाह के रास्ते से
أَضَلَّ उसने ज़ाए कर दिए aḍalla
उसने ज़ाए कर दिए
أَعْمَـٰلَهُمْ आमाल उनके aʿmālahum
आमाल उनके
١ (1)
(1)
जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह के मार्ग से रोका, उस (अल्लाह) ने उनके कर्मों को नष्ट कर दिया।
४७:२
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
وَءَامَنُوا۟ और वो ईमान लाए waāmanū
और वो ईमान लाए
بِمَا उस पर जो bimā
उस पर जो
نُزِّلَ नाज़िल किया गया nuzzila
नाज़िल किया गया
عَلَىٰ to ʿalā
to
مُحَمَّدٍۢ मुहम्मद पर muḥammadin
मुहम्मद पर
وَهُوَ और वो ही wahuwa
और वो ही
ٱلْحَقُّ हक़ है l-ḥaqu
हक़ है
مِن from min
from
رَّبِّهِمْ ۙ उनके रब की तरफ़ से rabbihim
उनके रब की तरफ़ से
كَفَّرَ उसने दूर कर दीं kaffara
उसने दूर कर दीं
عَنْهُمْ उनसे ʿanhum
उनसे
سَيِّـَٔاتِهِمْ बुराइयाँ उनकी sayyiātihim
बुराइयाँ उनकी
وَأَصْلَحَ और उसने दुरुस्त कर दिया wa-aṣlaḥa
और उसने दुरुस्त कर दिया
بَالَهُمْ हाल उनका bālahum
हाल उनका
٢ (2)
(2)
तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और उस पर ईमान लाए जो मुहम्मद पर उतारा गया और वही उनके रब की ओर से सत्य है, उसने उनसे उनके बुरे कर्मों को दूर कर दिया और उनके हाल को ठीक कर दिया।
४७:३
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
بِأَنَّ बवजह इसके कि bi-anna
बवजह इसके कि
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
ٱتَّبَعُوا۟ उन्होंने पैरवी की ittabaʿū
उन्होंने पैरवी की
ٱلْبَـٰطِلَ बातिल की l-bāṭila
बातिल की
وَأَنَّ और ये कि wa-anna
और ये कि
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
ٱتَّبَعُوا۟ उन्होंने पैरवी की ittabaʿū
उन्होंने पैरवी की
ٱلْحَقَّ हक़ की l-ḥaqa
हक़ की
مِن from min
from
رَّبِّهِمْ ۚ अपने रब की तरफ़ से rabbihim
अपने रब की तरफ़ से
كَذَٰلِكَ इसी तरह kadhālika
इसी तरह
يَضْرِبُ बयान करता है yaḍribu
बयान करता है
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لِلنَّاسِ लोगों के लिए lilnnāsi
लोगों के लिए
أَمْثَـٰلَهُمْ मिसालें उनकी amthālahum
मिसालें उनकी
٣ (3)
(3)
यह इसलिए कि निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्होंने असत्य का अनुसरण किया और निःसंदेह जो लोग ईमान लाए, उन्होंने अपने पालनहार की ओर से (आये हुए) सत्य का अनुसरण किया। इसी प्रकार अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है।1
४७:४
فَإِذَا फिर जब fa-idhā
फिर जब
لَقِيتُمُ मिलो तुम laqītumu
मिलो तुम
ٱلَّذِينَ उनसे जिन्होंने alladhīna
उनसे जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
فَضَرْبَ तो मारना है faḍarba
तो मारना है
ٱلرِّقَابِ गर्दनों का l-riqābi
गर्दनों का
حَتَّىٰٓ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
إِذَآ जब idhā
जब
أَثْخَنتُمُوهُمْ ख़ूब ख़ून रेज़ी कर चुको तुम उनकी athkhantumūhum
ख़ूब ख़ून रेज़ी कर चुको तुम उनकी
فَشُدُّوا۟ फिर मज़बूत बाँधो fashuddū
फिर मज़बूत बाँधो
ٱلْوَثَاقَ बन्धन l-wathāqa
बन्धन
فَإِمَّا फिर ख़्वाह fa-immā
फिर ख़्वाह
مَنًّۢا एहसान करो mannan
एहसान करो
بَعْدُ उसके बाद baʿdu
उसके बाद
وَإِمَّا और ख़्वाह wa-immā
और ख़्वाह
فِدَآءً फ़िदया लो fidāan
फ़िदया लो
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
تَضَعَ रख दे taḍaʿa
रख दे
ٱلْحَرْبُ जंग l-ḥarbu
जंग
أَوْزَارَهَا ۚ हथियार उपने awzārahā
हथियार उपने
ذَٰلِكَ ये है (हुक्म) dhālika
ये है (हुक्म)
وَلَوْ और अगर walaw
और अगर
يَشَآءُ चाहता yashāu
चाहता
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لَٱنتَصَرَ अलबत्ता वो बदला ले लेता la-intaṣara
अलबत्ता वो बदला ले लेता
مِنْهُمْ उनसे min'hum
उनसे
وَلَـٰكِن और लेकिन walākin
और लेकिन
لِّيَبْلُوَا۟ ताकि वो आज़माए liyabluwā
ताकि वो आज़माए
بَعْضَكُم तुम्हारे बाज़ को baʿḍakum
तुम्हारे बाज़ को
بِبَعْضٍۢ ۗ साथ बाज़ के bibaʿḍin
साथ बाज़ के
وَٱلَّذِينَ और वो लोग जो wa-alladhīna
और वो लोग जो
قُتِلُوا۟ मारे गए qutilū
मारे गए
فِى in
in
سَبِيلِ (the) way of Allah sabīli
(the) way of Allah
ٱللَّهِ अल्लाह के रास्ते में l-lahi
अल्लाह के रास्ते में
فَلَن तो हरगिज़ ना falan
तो हरगिज़ ना
يُضِلَّ वो ज़ाया करेगा yuḍilla
वो ज़ाया करेगा
أَعْمَـٰلَهُمْ आमाल उनके aʿmālahum
आमाल उनके
٤ (4)
(4)
अतः जब तुम काफ़िरों से मुठभेड़ करो, तो गरदनें मारना है, यहाँ तक कि जब उन्हें अच्छी तरह से क़त्ल कर चुको, तो (उन्हें) कसकर बाँध लो। फिर बाद में या तो उपकार करना है और या छुड़ौती लेना। यहाँ तक कि युद्ध अपने हथियार रख दे।1 यही (अल्लाह का आदेश) है। और यदि अल्लाह चाहे, तो अवश्य उनसे बदला ले। किंतु (यह आदेश इसलिए दिया) ताकि तुममें से कुछ की कुछ के साथ परीक्षा ले। और जो लोग अल्लाह की राह में मारे गए, तो वह (अल्लाह) उनके कर्मों को कदापि व्यर्थ नहीं करेगा।
४७:५
سَيَهْدِيهِمْ ज़रूर वो रहनुमाई करेगा उनकी sayahdīhim
ज़रूर वो रहनुमाई करेगा उनकी
وَيُصْلِحُ और वो दुरूस्त कर देगा wayuṣ'liḥu
और वो दुरूस्त कर देगा
بَالَهُمْ हाल उनके bālahum
हाल उनके
٥ (5)
(5)
वह उनका मार्गदर्शन करेगा और उनकी स्थिति सुधार देगा।
४७:६
وَيُدْخِلُهُمُ और वो दाख़िल करेगा उन्हें wayud'khiluhumu
और वो दाख़िल करेगा उन्हें
ٱلْجَنَّةَ उस जन्नत में l-janata
उस जन्नत में
عَرَّفَهَا उसने पहचान करा दी जिसकी ʿarrafahā
उसने पहचान करा दी जिसकी
لَهُمْ उनको lahum
उनको
٦ (6)
(6)
और उन्हें उस जन्नत में दाखिल करेगा, जिससे वह उन्हें परिचित करा चुका है।
४७:७
يَـٰٓأَيُّهَا O you who believe yāayyuhā
O you who believe
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
إِن अगर in
अगर
تَنصُرُوا۟ तुम मदद करोगे tanṣurū
तुम मदद करोगे
ٱللَّهَ अल्लाह की l-laha
अल्लाह की
يَنصُرْكُمْ वो मदद करेगा तुम्हारी yanṣur'kum
वो मदद करेगा तुम्हारी
وَيُثَبِّتْ और वो जमा देगा wayuthabbit
और वो जमा देगा
أَقْدَامَكُمْ तुम्हारे क़दमों को aqdāmakum
तुम्हारे क़दमों को
٧ (7)
(7)
ऐ ईमान वालो! यदि तुम अल्लाह (के धर्म) की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे क़दम जमा देगा।
४७:८
وَٱلَّذِينَ और वो लोग जिन्होंने wa-alladhīna
और वो लोग जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
فَتَعْسًۭا पस तबाही है fataʿsan
पस तबाही है
لَّهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
وَأَضَلَّ और उसने ज़ाया कर दिए wa-aḍalla
और उसने ज़ाया कर दिए
أَعْمَـٰلَهُمْ आमाल उनके aʿmālahum
आमाल उनके
٨ (8)
(8)
और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, तो उनके लिए विनाश है और उसने उनके कर्मों को व्यर्थ कर दिया।
४७:९
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
بِأَنَّهُمْ बवजह उसके कि वो bi-annahum
बवजह उसके कि वो
كَرِهُوا۟ उन्होंने नापसंद किया karihū
उन्होंने नापसंद किया
مَآ जो
जो
أَنزَلَ नाज़िल किया anzala
नाज़िल किया
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
فَأَحْبَطَ तो उसने बरबाद कर दिए fa-aḥbaṭa
तो उसने बरबाद कर दिए
أَعْمَـٰلَهُمْ आमाल उनके aʿmālahum
आमाल उनके
٩ (9)
(9)
यह इसलिए कि उन्होंने उस चीज़ को नापसंद किया, जिसे अल्लाह ने उतारा, तो उसने उनके कर्म अकारथ कर दिए।1
४७:१०
۞ أَفَلَمْ क्या फिर नहीं afalam
क्या फिर नहीं
يَسِيرُوا۟ वो चले फिरे yasīrū
वो चले फिरे
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
فَيَنظُرُوا۟ तो वो देखते fayanẓurū
तो वो देखते
كَيْفَ किस तरह kayfa
किस तरह
كَانَ हुआ kāna
हुआ
عَـٰقِبَةُ अंजाम ʿāqibatu
अंजाम
ٱلَّذِينَ उन लोगों का जो alladhīna
उन लोगों का जो
مِن before them min
before them
قَبْلِهِمْ ۚ उनसे पहले थे qablihim
उनसे पहले थे
دَمَّرَ हलाकत डाली dammara
हलाकत डाली
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
عَلَيْهِمْ ۖ उन पर ʿalayhim
उन पर
وَلِلْكَـٰفِرِينَ और काफ़िरों के लिए walil'kāfirīna
और काफ़िरों के लिए
أَمْثَـٰلُهَا उस जैसी (सज़ाऐं )हैं amthāluhā
उस जैसी (सज़ाऐं )हैं
١٠ (10)
(10)
तो क्या ये लोग धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ जो इनसे पहले थे? अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया और इन काफ़िरों के लिए भी इसी के समान (यातनाएँ) हैं।
४७:११
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
بِأَنَّ बवजह उसके कि bi-anna
बवजह उसके कि
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
مَوْلَى मददगार है mawlā
मददगार है
ٱلَّذِينَ उन लोगों का जो alladhīna
उन लोगों का जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَأَنَّ और बेशक wa-anna
और बेशक
ٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िर l-kāfirīna
काफ़िर
لَا (there is) no
(there is) no
مَوْلَىٰ नहीं कोई मददगार mawlā
नहीं कोई मददगार
لَهُمْ उनका lahum
उनका
١١ (11)
(11)
यह इसलिए कि निःसंदेह अल्लाह उन लोगों का संरक्षक है जो ईमान लाए और इसलिए कि निःसंदेह काफ़िरों का कोई संरक्षक नहीं।1
४७:१२
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
يُدْخِلُ वो दाख़िल करेगा yud'khilu
वो दाख़िल करेगा
ٱلَّذِينَ उन लोगों को जो alladhīna
उन लोगों को जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
جَنَّـٰتٍۢ बाग़ात में jannātin
बाग़ात में
تَجْرِى बहती हैं tajrī
बहती हैं
مِن from min
from
تَحْتِهَا उनके नीचे से taḥtihā
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ नहरें l-anhāru
नहरें
وَٱلَّذِينَ और वो जिन्होंने wa-alladhīna
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
يَتَمَتَّعُونَ वो फ़ायदा उठाते हैं yatamattaʿūna
वो फ़ायदा उठाते हैं
وَيَأْكُلُونَ और वो खाते हैं wayakulūna
और वो खाते हैं
كَمَا जैसा कि kamā
जैसा कि
تَأْكُلُ खाते है takulu
खाते है
ٱلْأَنْعَـٰمُ जानवर l-anʿāmu
जानवर
وَٱلنَّارُ और आग wal-nāru
और आग
مَثْوًۭى ठिकाना है mathwan
ठिकाना है
لَّهُمْ उनका lahum
उनका
١٢ (12)
(12)
निश्चय अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे फ़ायदा उठाते और खाते हैं, जैसे पशु खाते हैं और आग उनके लिए रहने की जगह है।
४७:१३
وَكَأَيِّن और कितनी ही waka-ayyin
और कितनी ही
مِّن of min
of
قَرْيَةٍ बस्तियाँ qaryatin
बस्तियाँ
هِىَ वो hiya
वो
أَشَدُّ ज़्यादा शदीद थीं ashaddu
ज़्यादा शदीद थीं
قُوَّةًۭ क़ुव्वत में quwwatan
क़ुव्वत में
مِّن than min
than
قَرْيَتِكَ आपकी बस्ती से qaryatika
आपकी बस्ती से
ٱلَّتِىٓ वो जिसने allatī
वो जिसने
أَخْرَجَتْكَ निकाल दिया आपको akhrajatka
निकाल दिया आपको
أَهْلَكْنَـٰهُمْ हलाक किया हमने उन्हें ahlaknāhum
हलाक किया हमने उन्हें
فَلَا पस ना था falā
पस ना था
نَاصِرَ कोई मदद करने वाला nāṣira
कोई मदद करने वाला
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
١٣ (13)
(13)
तथा कितनी ही बस्तियाँ हैं, जो आपकी उस बस्ती से अधिक शक्तिशाली थीं, जिसने आपको निकाल दिया, हमने उन्हें नष्ट कर दिया, फिर कोई उनका सहायक न था।
४७:१४
أَفَمَن क्या भला जो afaman
क्या भला जो
كَانَ हो kāna
हो
عَلَىٰ on ʿalā
on
بَيِّنَةٍۢ ऊपर एक वाज़ेह दलील के bayyinatin
ऊपर एक वाज़ेह दलील के
مِّن from min
from
رَّبِّهِۦ अपने रब की तरफ़ से rabbihi
अपने रब की तरफ़ से
كَمَن मानिन्द उसके हो सकता है जो kaman
मानिन्द उसके हो सकता है जो
زُيِّنَ मुज़य्यन कर दिए गए हों zuyyina
मुज़य्यन कर दिए गए हों
لَهُۥ उसके लिए lahu
उसके लिए
سُوٓءُ बुरे sūu
बुरे
عَمَلِهِۦ अमल उसके ʿamalihi
अमल उसके
وَٱتَّبَعُوٓا۟ और उन्होंने पैरवी की wa-ittabaʿū
और उन्होंने पैरवी की
أَهْوَآءَهُم अपनी ख़्वाहिशात की ahwāahum
अपनी ख़्वाहिशात की
١٤ (14)
(14)
तो क्या वह व्यक्ति जो अपने रब की ओर से एक स्पष्ट तर्क पर है, उस व्यक्ति के समान है, जिसके लिए उसके बुरे कर्मों को सुंदर बना दिया गया और उसने अपनी इच्छाओं का पालन किया?
४७:१५
مَّثَلُ मिसाल mathalu
मिसाल
ٱلْجَنَّةِ उस जन्नत की l-janati
उस जन्नत की
ٱلَّتِى वो जो allatī
वो जो
وُعِدَ वादा दिए गए wuʿida
वादा दिए गए
ٱلْمُتَّقُونَ ۖ मुत्तक़ी लोग l-mutaqūna
मुत्तक़ी लोग
فِيهَآ उसमें fīhā
उसमें
أَنْهَـٰرٌۭ नहरें है anhārun
नहरें है
مِّن of min
of
مَّآءٍ पानी की māin
पानी की
غَيْرِ ना ghayri
ना
ءَاسِنٍۢ बदलने वाले āsinin
बदलने वाले
وَأَنْهَـٰرٌۭ और नहरें हैं wa-anhārun
और नहरें हैं
مِّن of min
of
لَّبَنٍۢ दूध की labanin
दूध की
لَّمْ ना lam
ना
يَتَغَيَّرْ तब्दील होगा yataghayyar
तब्दील होगा
طَعْمُهُۥ मज़ा जिसका ṭaʿmuhu
मज़ा जिसका
وَأَنْهَـٰرٌۭ और नहरें हैं wa-anhārun
और नहरें हैं
مِّنْ of min
of
خَمْرٍۢ शराब की khamrin
शराब की
لَّذَّةٍۢ बाइसे लज़्ज़त हैं ladhatin
बाइसे लज़्ज़त हैं
لِّلشَّـٰرِبِينَ पीने वालों के लिए lilshāribīna
पीने वालों के लिए
وَأَنْهَـٰرٌۭ और नहरें हैं wa-anhārun
और नहरें हैं
مِّنْ of min
of
عَسَلٍۢ शहद की ʿasalin
शहद की
مُّصَفًّۭى ۖ ख़ूब साफ़ किया हुआ muṣaffan
ख़ूब साफ़ किया हुआ
وَلَهُمْ और उनके लिए हैं walahum
और उनके लिए हैं
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
مِن of min
of
كُلِّ हर क़िस्म के kulli
हर क़िस्म के
ٱلثَّمَرَٰتِ फल l-thamarāti
फल
وَمَغْفِرَةٌۭ और बख़्शिश wamaghfiratun
और बख़्शिश
مِّن from min
from
رَّبِّهِمْ ۖ उनके रब की तरफ़ से rabbihim
उनके रब की तरफ़ से
كَمَنْ मानिन्द उसके हो सकता है जो kaman
मानिन्द उसके हो सकता है जो
هُوَ वो huwa
वो
خَـٰلِدٌۭ हमेशा रहने वाला है khālidun
हमेशा रहने वाला है
فِى in
in
ٱلنَّارِ आग में l-nāri
आग में
وَسُقُوا۟ और वो पिलाए जाऐंगे wasuqū
और वो पिलाए जाऐंगे
مَآءً पानी māan
पानी
حَمِيمًۭا खौलता हुआ ḥamīman
खौलता हुआ
فَقَطَّعَ तो वो काट देगा faqaṭṭaʿa
तो वो काट देगा
أَمْعَآءَهُمْ आँतें उनकी amʿāahum
आँतें उनकी
١٥ (15)
(15)
उस जन्नत की विशेषता, जिसका वादा परहेज़गारों से किया गया है, यह है कि उसमें कई नहरें ऐसे पानी की हैं जो खराब होने वाला नहीं, और कई नहरें दूध की हैं जिनका स्वाद नहीं बदला, और कई नहरें शराब की हैं जो पीने वालों के लिए स्वादिष्ट है, और कई नहरें ख़ूब साफ़ किए हुए शहद की हैं। और उनके लिए उसमें हर प्रकार के फल और उनके पालनहार की ओर से बड़ी क्षमा है। (क्या ये परहेज़गार) उनके समान हैं, जो सदैव आग (जहन्नम) में रहने वाले हैं तथा जिन्हें खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा, जो उनकी आँतों के टुकड़े-टुकड़े कर देगा?
४७:१६
وَمِنْهُم और उनमें से कुछ हैं wamin'hum
और उनमें से कुछ हैं
مَّن जो man
जो
يَسْتَمِعُ ग़ौर से सुनते है yastamiʿu
ग़ौर से सुनते है
إِلَيْكَ आपको ilayka
आपको
حَتَّىٰٓ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
إِذَا जब idhā
जब
خَرَجُوا۟ वो निकलते हैं kharajū
वो निकलते हैं
مِنْ from min
from
عِندِكَ आपके पास से ʿindika
आपके पास से
قَالُوا۟ वो कहते हैं qālū
वो कहते हैं
لِلَّذِينَ उन लोगों से जो lilladhīna
उन लोगों से जो
أُوتُوا۟ दिए गए ūtū
दिए गए
ٱلْعِلْمَ इल्म l-ʿil'ma
इल्म
مَاذَا क्या कुछ mādhā
क्या कुछ
قَالَ उसने कहा था qāla
उसने कहा था
ءَانِفًا ۚ अभी ānifan
अभी
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही वो लोग हैं ulāika
यही वो लोग हैं
ٱلَّذِينَ जो alladhīna
जो
طَبَعَ मोहर लगा दी ṭabaʿa
मोहर लगा दी
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
عَلَىٰ upon ʿalā
upon
قُلُوبِهِمْ उनके दिलों पर qulūbihim
उनके दिलों पर
وَٱتَّبَعُوٓا۟ और उन्होंने पैरवी की wa-ittabaʿū
और उन्होंने पैरवी की
أَهْوَآءَهُمْ अपनी ख़्वाहिशात की ahwāahum
अपनी ख़्वाहिशात की
١٦ (16)
(16)
तथा उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं, जो आपकी ओर कान लगाते हैं, यहाँ तक कि जब वे आपके पास से निकलते हैं, तो उन लोगों से जिन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है, कहते हैं कि उसने अभी क्या1 कहा? यही लोग हैं, जिनके दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी और उन्होंने अपनी इच्छाओं का पालन किया।
४७:१७
وَٱلَّذِينَ और वो जिन्होंने wa-alladhīna
और वो जिन्होंने
ٱهْتَدَوْا۟ हिदायत पाई ih'tadaw
हिदायत पाई
زَادَهُمْ उसने ज़्यादा किया उन्हें zādahum
उसने ज़्यादा किया उन्हें
هُدًۭى हिदायत में hudan
हिदायत में
وَءَاتَىٰهُمْ और उसने दिया उन्हें waātāhum
और उसने दिया उन्हें
تَقْوَىٰهُمْ तक़्वा उनका taqwāhum
तक़्वा उनका
١٧ (17)
(17)
और वे लोगों जिन्होंने मार्गदर्शन अपनाया, उसने उन्हें हिदायत में बढ़ा दिया और उन्हें उनका तक़वा प्रदान किया।
४७:१८
فَهَلْ तो नहीं fahal
तो नहीं
يَنظُرُونَ वो इन्तिज़ार करते yanẓurūna
वो इन्तिज़ार करते
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلسَّاعَةَ क़यामत का l-sāʿata
क़यामत का
أَن कि an
कि
تَأْتِيَهُم वो आ जाए उनके पास tatiyahum
वो आ जाए उनके पास
بَغْتَةًۭ ۖ अचानक baghtatan
अचानक
فَقَدْ तो तहक़ीक़ faqad
तो तहक़ीक़
جَآءَ आ चुकीं jāa
आ चुकीं
أَشْرَاطُهَا ۚ अलामात उसकी ashrāṭuhā
अलामात उसकी
فَأَنَّىٰ तो कहाँ से होगी fa-annā
तो कहाँ से होगी
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
إِذَا जब idhā
जब
جَآءَتْهُمْ आ जाएगी उनके पास jāathum
आ जाएगी उनके पास
ذِكْرَىٰهُمْ नसीहत उनकी dhik'rāhum
नसीहत उनकी
١٨ (18)
(18)
तो वे किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं सिवाय क़ियामत के कि वह उनपर अचानक आ जाए? तो निश्चय उसकी निशानियाँ1 आ चुकी हैं, फिर जब वह उनके पास आ जाएगी, तो उनके लिए नसीहत ग्रहण करना कैसे संभव होगा?
४७:१९
فَٱعْلَمْ तो जान लीजिए fa-iʿ'lam
तो जान लीजिए
أَنَّهُۥ बेशक annahu
बेशक
لَآ नहीं
नहीं
إِلَـٰهَ कोई इलाह (बरहक़) ilāha
कोई इलाह (बरहक़)
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
وَٱسْتَغْفِرْ और बख़्शिश माँगिए wa-is'taghfir
और बख़्शिश माँगिए
لِذَنۢبِكَ अपने क़ुसूर के लिए lidhanbika
अपने क़ुसूर के लिए
وَلِلْمُؤْمِنِينَ और मोमिन मर्दों के लिए walil'mu'minīna
और मोमिन मर्दों के लिए
وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ ۗ और मोमिन औरतों के लिए wal-mu'mināti
और मोमिन औरतों के लिए
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
مُتَقَلَّبَكُمْ चलना-फिरना तुम्हारा mutaqallabakum
चलना-फिरना तुम्हारा
وَمَثْوَىٰكُمْ और ठिकाना तुम्हारा wamathwākum
और ठिकाना तुम्हारा
١٩ (19)
(19)
अतः जान लें कि निःसंदेह तथ्य यह है कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, तथा अपने पापों के लिए क्षमा1 माँगें और ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों के लिए भी, और अल्लाह तुम्हारे चलने-फिरने और तुम्हारे ठहरने को जानता है।
४७:२०
وَيَقُولُ और कहते हैं wayaqūlu
और कहते हैं
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
لَوْلَا क्यों नहीं lawlā
क्यों नहीं
نُزِّلَتْ नाज़िल की गई nuzzilat
नाज़िल की गई
سُورَةٌۭ ۖ कोई सूरत sūratun
कोई सूरत
فَإِذَآ फिर जब fa-idhā
फिर जब
أُنزِلَتْ नाज़िल की जाती है unzilat
नाज़िल की जाती है
سُورَةٌۭ कोई सूरत sūratun
कोई सूरत
مُّحْكَمَةٌۭ मोहकम muḥ'kamatun
मोहकम
وَذُكِرَ और ज़िक्र किया जाता है wadhukira
और ज़िक्र किया जाता है
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
ٱلْقِتَالُ ۙ जंग का l-qitālu
जंग का
رَأَيْتَ आप देखेंगे ra-ayta
आप देखेंगे
ٱلَّذِينَ उन लोगों को alladhīna
उन लोगों को
فِى in
in
قُلُوبِهِم जिनके दिलों में qulūbihim
जिनके दिलों में
مَّرَضٌۭ बीमारी है maraḍun
बीमारी है
يَنظُرُونَ वो देख रहे होंगे yanẓurūna
वो देख रहे होंगे
إِلَيْكَ आपकी तरफ़ ilayka
आपकी तरफ़
نَظَرَ (जैसे) देखना naẓara
(जैसे) देखना
ٱلْمَغْشِىِّ उसका ग़शी तारी हो गई हो l-maghshiyi
उसका ग़शी तारी हो गई हो
عَلَيْهِ जिस पर ʿalayhi
जिस पर
مِنَ from mina
from
ٱلْمَوْتِ ۖ मौत की वजह से l-mawti
मौत की वजह से
فَأَوْلَىٰ तो तबाही/हलाकत है fa-awlā
तो तबाही/हलाकत है
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
٢٠ (20)
(20)
तथा जो लोग ईमान लाए, वे कहते हैं कि कोई सूरत क्यों नहीं उतारी गई (जिसमें युद्ध का उल्लेख हो)? फिर जब कोई मोहकम (दृढ़) सूरत उतारी जाती है और उसमें युद्ध का उल्लेख होता है, तो आप उन लोगों को देखेंगे जिनके दिलों में बीमारी है, वे आपकी ओर इस तरह देखेंगे, जैसे वह आदमी देखता है, जिसपर मौत की बेहोशी छा गई हो। तो उनके लिए उत्तम है।
४७:२१
طَاعَةٌۭ इताअत करना ṭāʿatun
इताअत करना
وَقَوْلٌۭ और बात कहना waqawlun
और बात कहना
مَّعْرُوفٌۭ ۚ भली(बेहतर है) maʿrūfun
भली(बेहतर है)
فَإِذَا फिर जब fa-idhā
फिर जब
عَزَمَ पुख़्ता हो जाए ʿazama
पुख़्ता हो जाए
ٱلْأَمْرُ हुक्म(जंग का) l-amru
हुक्म(जंग का)
فَلَوْ फिर अगर falaw
फिर अगर
صَدَقُوا۟ वो सच्चे रहें ṣadaqū
वो सच्चे रहें
ٱللَّهَ अल्लाह से l-laha
अल्लाह से
لَكَانَ अलबत्ता होगा lakāna
अलबत्ता होगा
خَيْرًۭا बेहतर khayran
बेहतर
لَّهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
٢١ (21)
(21)
आज्ञा का पालन करना और अच्छी बात कहना, फिर जब आज्ञा आवश्यक हो जाए, तो यदि वे अल्लाह के प्रति सच्चे रहें, तो निश्चय ही यह उनके लिए बेहतर है।
४७:२२
فَهَلْ तो क्या fahal
तो क्या
عَسَيْتُمْ उम्मीद है तुमसे ʿasaytum
उम्मीद है तुमसे
إِن कि अगर in
कि अगर
تَوَلَّيْتُمْ हाकिम बन जाओ तुम tawallaytum
हाकिम बन जाओ तुम
أَن ये कि an
ये कि
تُفْسِدُوا۟ तुम फ़साद करो tuf'sidū
तुम फ़साद करो
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
وَتُقَطِّعُوٓا۟ और तुम काटो watuqaṭṭiʿū
और तुम काटो
أَرْحَامَكُمْ अपने रिश्तों को arḥāmakum
अपने रिश्तों को
٢٢ (22)
(22)
फिर निश्चय तुम निकट हो, यदि तुम मुँह फेर लो1, कि तुम धरती में बिगाड़ पैदा करो और अपने संबंधों को पूरी तरह से काट दो।
४७:२३
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही वो लोग हैं ulāika
यही वो लोग हैं
ٱلَّذِينَ जो alladhīna
जो
لَعَنَهُمُ लानत की उन पर laʿanahumu
लानत की उन पर
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
فَأَصَمَّهُمْ फिर उसने बहरा कर दिया उन्हें fa-aṣammahum
फिर उसने बहरा कर दिया उन्हें
وَأَعْمَىٰٓ और उसने अंधा कर दिया wa-aʿmā
और उसने अंधा कर दिया
أَبْصَـٰرَهُمْ उनकी आँखों को abṣārahum
उनकी आँखों को
٢٣ (23)
(23)
यही वे लोग हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से दूर कर दिया। अतः उन्हें बहरा बना दिया और उनकी आँखें अंधी कर दीं।1
४७:२४
أَفَلَا क्या भला नहीं afalā
क्या भला नहीं
يَتَدَبَّرُونَ वो ग़ौरो फ़िक्र करते yatadabbarūna
वो ग़ौरो फ़िक्र करते
ٱلْقُرْءَانَ क़ुरान में l-qur'āna
क़ुरान में
أَمْ या am
या
عَلَىٰ upon ʿalā
upon
قُلُوبٍ दिलों पर qulūbin
दिलों पर
أَقْفَالُهَآ उनके ताले हैं aqfāluhā
उनके ताले हैं
٢٤ (24)
(24)
तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?
४७:२५
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
ٱرْتَدُّوا۟ फिर गए ir'taddū
फिर गए
عَلَىٰٓ on ʿalā
on
أَدْبَـٰرِهِم अपनी पुश्तों पर adbārihim
अपनी पुश्तों पर
مِّنۢ after min
after
بَعْدِ बाद उसके baʿdi
बाद उसके
مَا जो
जो
تَبَيَّنَ वाज़ेह हो गई tabayyana
वाज़ेह हो गई
لَهُمُ उनके लिए lahumu
उनके लिए
ٱلْهُدَى ۙ हिदायत l-hudā
हिदायत
ٱلشَّيْطَـٰنُ शैतान ने l-shayṭānu
शैतान ने
سَوَّلَ आरास्ता कर दिया sawwala
आरास्ता कर दिया
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
وَأَمْلَىٰ और (अल्लाह ने)ढील दी wa-amlā
और (अल्लाह ने)ढील दी
لَهُمْ उन्हें lahum
उन्हें
٢٥ (25)
(25)
निःसंदेह जो लोग अपनी पीठों के बल फिर गए, इसके बाद कि उनके लिए सीधा रास्ता स्पष्ट हो गया, शैतान ने उनके लिए (उनके कार्य को) सुशोभित कर दिया और उन्हें लंबी आशा दिलाई।
४७:२६
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
بِأَنَّهُمْ बवजह उसके कि वो bi-annahum
बवजह उसके कि वो
قَالُوا۟ वो कहते हैं qālū
वो कहते हैं
لِلَّذِينَ उनको जिन्होंने lilladhīna
उनको जिन्होंने
كَرِهُوا۟ नापसंद किया karihū
नापसंद किया
مَا उस चीज़ को जो
उस चीज़ को जो
نَزَّلَ नाज़िल की nazzala
नाज़िल की
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
سَنُطِيعُكُمْ अनक़रीब हम इताअत करेंगे तुम्हारी sanuṭīʿukum
अनक़रीब हम इताअत करेंगे तुम्हारी
فِى in
in
بَعْضِ part baʿḍi
part
ٱلْأَمْرِ ۖ बाज़ कामों में l-amri
बाज़ कामों में
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
إِسْرَارَهُمْ राज़ उनके is'rārahum
राज़ उनके
٢٦ (26)
(26)
यह इसलिए कि उन्होंने, उन लोगों से जिन्होंने उसे नापसंद किया जो अल्लाह ने उतारा है, कहा कि हम कुछ मामलों में तुम्हारी बात मानेंगे और अल्लाह उनके छिपाने को जानता है।
४७:२७
فَكَيْفَ तो क्या होगा fakayfa
तो क्या होगा
إِذَا जब idhā
जब
تَوَفَّتْهُمُ फ़ौत करेंगे उन्हें tawaffathumu
फ़ौत करेंगे उन्हें
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ फ़रिश्ते l-malāikatu
फ़रिश्ते
يَضْرِبُونَ वो मारेंगे yaḍribūna
वो मारेंगे
وُجُوهَهُمْ उनके चेहरों को wujūhahum
उनके चेहरों को
وَأَدْبَـٰرَهُمْ और उनकी पीठों को wa-adbārahum
और उनकी पीठों को
٢٧ (27)
(27)
तो क्या हाल होगा जब फ़रिश्ते उनके प्राण निकालेंगे, उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारते होंगे।
४७:२८
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
بِأَنَّهُمُ बवजह उसके कि वो bi-annahumu
बवजह उसके कि वो
ٱتَّبَعُوا۟ उन्होंने पैरवी की ittabaʿū
उन्होंने पैरवी की
مَآ उसकी जिसने
उसकी जिसने
أَسْخَطَ ग़ुस्सा दिलाया askhaṭa
ग़ुस्सा दिलाया
ٱللَّهَ अल्लाह को l-laha
अल्लाह को
وَكَرِهُوا۟ और उन्होंने नापसंद किया wakarihū
और उन्होंने नापसंद किया
رِضْوَٰنَهُۥ उसकी रज़ा को riḍ'wānahu
उसकी रज़ा को
فَأَحْبَطَ तो उसने ज़ाया कर दिए fa-aḥbaṭa
तो उसने ज़ाया कर दिए
أَعْمَـٰلَهُمْ आमाल उनके aʿmālahum
आमाल उनके
٢٨ (28)
(28)
यह इस कारण कि निःसंदेह उन्होंने उसका अनुसरण किया जिसने अल्लाह को क्रोधित कर दिया और उसकी प्रसन्नता को बुरा जाना, तो उसने उनके कर्मों को नष्ट कर दिया।1
४७:२९
أَمْ या am
या
حَسِبَ समझा है ḥasiba
समझा है
ٱلَّذِينَ उन लोगों ने alladhīna
उन लोगों ने
فِى in
in
قُلُوبِهِم जिनके दिलों में qulūbihim
जिनके दिलों में
مَّرَضٌ बीमारी है maraḍun
बीमारी है
أَن कि an
कि
لَّن हरगिज़ नहीं lan
हरगिज़ नहीं
يُخْرِجَ निकालेगा yukh'rija
निकालेगा
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
أَضْغَـٰنَهُمْ कीने उनके aḍghānahum
कीने उनके
٢٩ (29)
(29)
या उन लोगों ने जिनके दिलों में कोई बीमारी है, यह समझ रखा है कि अल्लाह उनके द्वेष कभी प्रकट नहीं करेगा?
४७:३०
وَلَوْ और अगर walaw
और अगर
نَشَآءُ हम चाहें nashāu
हम चाहें
لَأَرَيْنَـٰكَهُمْ अलबत्ता दिखा दें हम आपको उन्हें la-araynākahum
अलबत्ता दिखा दें हम आपको उन्हें
فَلَعَرَفْتَهُم फिर अलबत्ता पहचान लें आप उन्हें falaʿaraftahum
फिर अलबत्ता पहचान लें आप उन्हें
بِسِيمَـٰهُمْ ۚ उनके चेहरों से bisīmāhum
उनके चेहरों से
وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ और अलबत्ता आप ज़रूर पहचान लेंगे उन्हें walataʿrifannahum
और अलबत्ता आप ज़रूर पहचान लेंगे उन्हें
فِى by
by
لَحْنِ अंदाज़/असलूब से laḥni
अंदाज़/असलूब से
ٱلْقَوْلِ ۚ गुफ़्तगू के l-qawli
गुफ़्तगू के
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
أَعْمَـٰلَكُمْ आमाल तुम्हारे aʿmālakum
आमाल तुम्हारे
٣٠ (30)
(30)
और (ऐ नबी!) यदि हम चाहें तो अवश्य आपको वे लोग दिखा दें, फिर निश्चय आप उन्हें उनकी निशानियों से पहचान लेंगे तथा आप उन्हें उनके बात करने के ढंग से अवश्य पहचान लेंगे। और अल्लाह तुम्हारे कामों को जानता है।
४७:३१
وَلَنَبْلُوَنَّكُمْ और अलबत्ता हम ज़रूर आज़माऐंगे तुम्हें walanabluwannakum
और अलबत्ता हम ज़रूर आज़माऐंगे तुम्हें
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
نَعْلَمَ हम जान लें naʿlama
हम जान लें
ٱلْمُجَـٰهِدِينَ मुजाहिदों को l-mujāhidīna
मुजाहिदों को
مِنكُمْ तुम में से minkum
तुम में से
وَٱلصَّـٰبِرِينَ और सब्र करने वालों को wal-ṣābirīna
और सब्र करने वालों को
وَنَبْلُوَا۟ और हम आज़माऐंगे wanabluwā
और हम आज़माऐंगे
أَخْبَارَكُمْ तुम्हारे हालात को akhbārakum
तुम्हारे हालात को
٣١ (31)
(31)
और हम अवश्य ही तुम्हारी परीक्षा लेंगे, यहाँ तक कि हम तुममें से जिहाद करने वालों और सब्र करने वालों को जान लें और तुम्हारी परिस्थितियों को परख लें।
४७:३२
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
وَصَدُّوا۟ और उन्होंने रोका waṣaddū
और उन्होंने रोका
عَن from ʿan
from
سَبِيلِ (the) way of Allah sabīli
(the) way of Allah
ٱللَّهِ अल्लाह के रास्ते से l-lahi
अल्लाह के रास्ते से
وَشَآقُّوا۟ और उन्होंने मुख़ालिफ़त की washāqqū
और उन्होंने मुख़ालिफ़त की
ٱلرَّسُولَ रसूल की l-rasūla
रसूल की
مِنۢ after min
after
بَعْدِ उसके बाद baʿdi
उसके बाद
مَا कि
कि
تَبَيَّنَ वाज़ेह हो चुकी tabayyana
वाज़ेह हो चुकी
لَهُمُ उनके लिए lahumu
उनके लिए
ٱلْهُدَىٰ हिदायत l-hudā
हिदायत
لَن हरगिज़ नहीं lan
हरगिज़ नहीं
يَضُرُّوا۟ वो नुक़्सान पहुँचा सकते yaḍurrū
वो नुक़्सान पहुँचा सकते
ٱللَّهَ अल्लाह को l-laha
अल्लाह को
شَيْـًۭٔا कुछ भी shayan
कुछ भी
وَسَيُحْبِطُ और अनक़रीब वो ज़ाया करदेगा wasayuḥ'biṭu
और अनक़रीब वो ज़ाया करदेगा
أَعْمَـٰلَهُمْ आमाल उनके aʿmālahum
आमाल उनके
٣٢ (32)
(32)
निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका तथा रसूल का विरोध किया, इसके पश्चात कि उनके लिए सीधा मार्ग स्पष्ट हो गया, वे कदापि अल्लाह का कोई नुक़सान नहीं करेंगे और जल्द ही वह उनके कर्मों को नष्ट कर देगा।
४७:३३
۞ يَـٰٓأَيُّهَا O you who believe yāayyuhā
O you who believe
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوٓا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
أَطِيعُوا۟ इताअत करो aṭīʿū
इताअत करो
ٱللَّهَ अल्लाह की l-laha
अल्लाह की
وَأَطِيعُوا۟ और इताअत करो wa-aṭīʿū
और इताअत करो
ٱلرَّسُولَ रसूल की l-rasūla
रसूल की
وَلَا और ना walā
और ना
تُبْطِلُوٓا۟ तुम बातिल करो tub'ṭilū
तुम बातिल करो
أَعْمَـٰلَكُمْ आमाल अपने aʿmālakum
आमाल अपने
٣٣ (33)
(33)
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो1 तथा अपने कर्मों को व्यर्थ न करो।
४७:३४
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
وَصَدُّوا۟ और उन्होंने रोका waṣaddū
और उन्होंने रोका
عَن from ʿan
from
سَبِيلِ (the) way sabīli
(the) way
ٱللَّهِ अल्लाह के रास्ते से l-lahi
अल्लाह के रास्ते से
ثُمَّ फिर thumma
फिर
مَاتُوا۟ वो मर गए mātū
वो मर गए
وَهُمْ इस हाल में कि वो wahum
इस हाल में कि वो
كُفَّارٌۭ काफ़िर थे kuffārun
काफ़िर थे
فَلَن तो हरगिज़ नहीं falan
तो हरगिज़ नहीं
يَغْفِرَ माफ़ करेगा yaghfira
माफ़ करेगा
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لَهُمْ उन्हें lahum
उन्हें
٣٤ (34)
(34)
निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह के मार्ग से रोका, फिर वे काफ़िर ही रहते हुए मर गए, तो अल्लाह उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
४७:३५
فَلَا पस ना falā
पस ना
تَهِنُوا۟ तुम सुस्ती करो tahinū
तुम सुस्ती करो
وَتَدْعُوٓا۟ और (ना) तुम बुलाओ watadʿū
और (ना) तुम बुलाओ
إِلَى for ilā
for
ٱلسَّلْمِ तरफ़ सुलह के l-salmi
तरफ़ सुलह के
وَأَنتُمُ और तुम ही wa-antumu
और तुम ही
ٱلْأَعْلَوْنَ ग़ालिब रहने वाले हो l-aʿlawna
ग़ालिब रहने वाले हो
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
مَعَكُمْ साथ है तुम्हारे maʿakum
साथ है तुम्हारे
وَلَن और हरगिज़ ना walan
और हरगिज़ ना
يَتِرَكُمْ वो कम करेगा तुमसे yatirakum
वो कम करेगा तुमसे
أَعْمَـٰلَكُمْ आमाल तुम्हारे aʿmālakum
आमाल तुम्हारे
٣٥ (35)
(35)
अतः निर्बल न बनो और न सुलह1 के लिए बुलाओ और तुम ही सर्वोच्च हो और अल्लाह तुम्हारे साथ है और वह कभी भी तुम्हारे कामों को तुमसे कम न करेगा।
४७:३६
إِنَّمَا बेशक innamā
बेशक
ٱلْحَيَوٰةُ ज़िन्दगी l-ḥayatu
ज़िन्दगी
ٱلدُّنْيَا दुनिया की l-dun'yā
दुनिया की
لَعِبٌۭ खेल laʿibun
खेल
وَلَهْوٌۭ ۚ तमाशा है walahwun
तमाशा है
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
تُؤْمِنُوا۟ तुम ईमान ले आओ tu'minū
तुम ईमान ले आओ
وَتَتَّقُوا۟ और तुम तक़्वा करो watattaqū
और तुम तक़्वा करो
يُؤْتِكُمْ वो देगा तुम्हें yu'tikum
वो देगा तुम्हें
أُجُورَكُمْ अजर तुम्हारे ujūrakum
अजर तुम्हारे
وَلَا और ना walā
और ना
يَسْـَٔلْكُمْ वो तलब करेगा तुमसे yasalkum
वो तलब करेगा तुमसे
أَمْوَٰلَكُمْ माल तुम्हारे amwālakum
माल तुम्हारे
٣٦ (36)
(36)
सांसारिक जीवन तो केवल एक खेल और तमाशा है और यदि तुम ईमान लाओ और (अल्लाह से) डरते रहो, तो वह तुम्हें तुम्हारा प्रतिफल प्रदान करेगा और तुमसे तुम्हारा (सारा) धन नहीं माँगेगा।
४७:३७
إِن अगर in
अगर
يَسْـَٔلْكُمُوهَا वो तलब करे तुमसे उन्हें yasalkumūhā
वो तलब करे तुमसे उन्हें
فَيُحْفِكُمْ फिर वो इसरार करे तुमसे fayuḥ'fikum
फिर वो इसरार करे तुमसे
تَبْخَلُوا۟ तुम बुख़्ल करोगे tabkhalū
तुम बुख़्ल करोगे
وَيُخْرِجْ और वो ज़ाहिर कर देगा wayukh'rij
और वो ज़ाहिर कर देगा
أَضْغَـٰنَكُمْ कीने तुम्हारे aḍghānakum
कीने तुम्हारे
٣٧ (37)
(37)
यदि वह तुमसे उनकी माँग करे और तुमपर ज़ोर देकर माँगे, तो तुम कंजूसी करोगे और वह तुम्हारे द्वेष को प्रकट कर देगा।1
४७:३८
هَـٰٓأَنتُمْ सुनो तुम hāantum
सुनो तुम
هَـٰٓؤُلَآءِ वो लोग हो hāulāi
वो लोग हो
تُدْعَوْنَ तुम बुलाए जाते हो tud'ʿawna
तुम बुलाए जाते हो
لِتُنفِقُوا۟ कि तुम ख़र्च करो litunfiqū
कि तुम ख़र्च करो
فِى in
in
سَبِيلِ (the) way sabīli
(the) way
ٱللَّهِ अल्लाह के रास्ते में l-lahi
अल्लाह के रास्ते में
فَمِنكُم तो तुम में से कोई है faminkum
तो तुम में से कोई है
مَّن जो man
जो
يَبْخَلُ ۖ बुख़्ल करता है yabkhalu
बुख़्ल करता है
وَمَن और जो waman
और जो
يَبْخَلْ बुख़्ल करता है yabkhal
बुख़्ल करता है
فَإِنَّمَا तो बेशक वो fa-innamā
तो बेशक वो
يَبْخَلُ वो बुख़्ल करता है yabkhalu
वो बुख़्ल करता है
عَن from ʿan
from
نَّفْسِهِۦ ۚ अपने आपसे nafsihi
अपने आपसे
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
ٱلْغَنِىُّ बहुत ग़नी है l-ghaniyu
बहुत ग़नी है
وَأَنتُمُ और तुम wa-antumu
और तुम
ٱلْفُقَرَآءُ ۚ मोहताज हो l-fuqarāu
मोहताज हो
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
تَتَوَلَّوْا۟ तुम मुँह मोड़ोगे tatawallaw
तुम मुँह मोड़ोगे
يَسْتَبْدِلْ वो बदल लाएगा yastabdil
वो बदल लाएगा
قَوْمًا एक क़ौम को qawman
एक क़ौम को
غَيْرَكُمْ तुम्हारे सिवा ghayrakum
तुम्हारे सिवा
ثُمَّ फिर thumma
फिर
لَا not
not
يَكُونُوٓا۟ ना होंगे वो yakūnū
ना होंगे वो
أَمْثَـٰلَكُم तुम जैसे amthālakum
तुम जैसे
٣٨ (38)
(38)
सुनो! तुम वे लोग हो कि अल्लाह की राह में खर्च करने के लिए बुलाए जाते हो, तो तुममें से कुछ लोग कंजूसी करते हैं। हालाँकि जो कंजूसी करता है, वह अपने आप ही से कंजूसी1 करता है। और अल्लाह तो बेनियाज़ है, और तुम ही मोहताज हो। और यदि तुम फिर जाओगे, तो वह तुम्हारे स्थान पर तुम्हारे सिवा और लोगों को ले आएगा, फिर वे तुम्हारे जैसे नहीं होंगे।2