१
अल-फ़ातिहा
الفاتحة
सूरह अल-फ़ातिहा (الفاتحة) पवित्र क़ुरआन का १ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ७ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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१:१
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi١
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
१:२
ٱلْحَمْدُसब तारीफ़al-ḥamduلِلَّهِअल्लाह के लिए हैlillahiرَبِّजो रब हैrabbiٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों काl-ʿālamīna٢
हर प्रकार की प्रशंसा उस अल्लाह1 के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार2 है।
१:३
ٱلرَّحْمَـٰنِबहुत मेहरबान हैal-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi٣
जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला1 है।
१:४
مَـٰلِكِमालिक हैmālikiيَوْمِदिन काyawmiٱلدِّينِबदले केl-dīni٤
जो बदले1 के दिन का मालिक है।
१:५
إِيَّاكَसिर्फ़ तेरी हीiyyākaنَعْبُدُहम इबादत करते हैंnaʿbuduوَإِيَّاكَऔर सिर्फ़ तेरी हीwa-iyyākaنَسْتَعِينُहम मदद चाहते हैंnastaʿīnu٥
(ऐ अल्लाह!) हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से सहायता माँगते1 हैं।
१:६
ٱهْدِنَاहिदयत दे हमेंih'dināٱلصِّرَٰطَरास्तेl-ṣirāṭaٱلْمُسْتَقِيمَसीधे कीl-mus'taqīma٦
हमें सीधे मार्ग पर चला।
१:७
صِرَٰطَरास्ताṣirāṭaٱلَّذِينَउनकाalladhīnaأَنْعَمْتَइनाम किया तूनेanʿamtaعَلَيْهِمْजिन परʿalayhimغَيْرِनाghayriٱلْمَغْضُوبِउनका जो ग़ज़ब किया गयाl-maghḍūbiعَلَيْهِمْजिन परʿalayhimوَلَاऔर नाwalāٱلضَّآلِّينَउनका जो गुमराह हैंl-ḍālīna٧
उन लोगों का मार्ग, जिनपर तूने अनुग्रह किया।1 उनका नहीं, जिनपर तेरा प्रकोप2 हुआ और न ही उनका, जो गुमराह हैं।
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