१०८
अल-कौसर
الكوثر
सूरह अल-कौसर (الكوثر) पवित्र क़ुरआन का १०८ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ३ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१०८:१
إِنَّآबेशक हमनेinnāأَعْطَيْنَـٰكَअता किया हमने आपकोaʿṭaynākaٱلْكَوْثَرَकौसरl-kawthara١
(ऐ नबी!) हमने आपको कौसर प्रदान किया है।1
१०८:२
فَصَلِّपस नमाज़ पढ़िएfaṣalliلِرَبِّكَअपने रब के लिएlirabbikaوَٱنْحَرْऔर क़ुर्बानी कीजिएwa-in'ḥar٢
तो आप अपने पालनहार ही के लिए नमाज़ पढ़ें तथा क़ुर्बानी करें।1
१०८:३
إِنَّबेशकinnaشَانِئَكَदुश्मन आपकाshāni-akaهُوَवो हीhuwaٱلْأَبْتَرُजड़ कटा हैl-abtaru٣
निःसंदेह आपका शत्रु ही बे नाम व निशान है।1
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