३०

अर-रूम

मक्की ६० आयतें पारा २१
الروم
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
३०:१
الٓمٓ ا ل م alif-lam-meem
ا ل م
١ (1)
(1)
अलिफ़, लाम, मीम।
३०:२
غُلِبَتِ मग़लूब हो गए ghulibati
मग़लूब हो गए
ٱلرُّومُ रूमी l-rūmu
रूमी
٢ (2)
(2)
रूमी पराजित हो गए।
३०:३
فِىٓ In
In
أَدْنَى (the) nearest adnā
(the) nearest
ٱلْأَرْضِ क़रीब की ज़मीन में l-arḍi
क़रीब की ज़मीन में
وَهُم और वो wahum
और वो
مِّنۢ after min
after
بَعْدِ बाद baʿdi
बाद
غَلَبِهِمْ अपने मग़लूब होने के ghalabihim
अपने मग़लूब होने के
سَيَغْلِبُونَ अनक़रीब वो ग़ालिब आ जाऐंगे sayaghlibūna
अनक़रीब वो ग़ालिब आ जाऐंगे
٣ (3)
(3)
निकटतम क्षेत्र में। और वे अपनी पराजय के बाद जल्द ही विजयी हो जाएँगे!
३०:४
فِى Within
Within
بِضْعِ a few biḍ'ʿi
a few
سِنِينَ ۗ चंद सालों में sinīna
चंद सालों में
لِلَّهِ अल्लाह ही के लिए है lillahi
अल्लाह ही के लिए है
ٱلْأَمْرُ हुक्म l-amru
हुक्म
مِن before min
before
قَبْلُ इससे पहले qablu
इससे पहले
وَمِنۢ and after wamin
and after
بَعْدُ ۚ और इसके बाद baʿdu
और इसके बाद
وَيَوْمَئِذٍۢ और उस दिन wayawma-idhin
और उस दिन
يَفْرَحُ ख़ुश हो जाऐंगे yafraḥu
ख़ुश हो जाऐंगे
ٱلْمُؤْمِنُونَ मोमिन l-mu'minūna
मोमिन
٤ (4)
(4)
कुछ वर्षों में। सारा मामला अल्लाह के अधिकार में है, पहले भी और बाद में भी। और उस दिन ईमान वाले प्रसन्न होंगे।
३०:५
بِنَصْرِ मदद से binaṣri
मदद से
ٱللَّهِ ۚ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
يَنصُرُ वो मदद करता है yanṣuru
वो मदद करता है
مَن जिसकी man
जिसकी
يَشَآءُ ۖ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
ٱلْعَزِيزُ बहुत ज़बरदस्त है l-ʿazīzu
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلرَّحِيمُ बहुत रहम करने वाला है l-raḥīmu
बहुत रहम करने वाला है
٥ (5)
(5)
अल्लाह की सहायता से। वह जिसकी चाहता है, सहायता करता है। वह सब पर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।
३०:६
وَعْدَ वादा है waʿda
वादा है
ٱللَّهِ ۖ अल्लाह का l-lahi
अल्लाह का
لَا (Does) not
(Does) not
يُخْلِفُ नहीं ख़िलाफ़ करता yukh'lifu
नहीं ख़िलाफ़ करता
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
وَعْدَهُۥ वादा अपना waʿdahu
वादा अपना
وَلَـٰكِنَّ लेकिन walākinna
लेकिन
أَكْثَرَ अक्सर akthara
अक्सर
ٱلنَّاسِ लोग l-nāsi
लोग
لَا (do) not
(do) not
يَعْلَمُونَ नहीं वो जानते yaʿlamūna
नहीं वो जानते
٦ (6)
(6)
यह अल्लाह का वादा है। अल्लाह अपने वादे1 के विरुद्ध नहीं करता। परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
३०:७
يَعْلَمُونَ वो जानते हैं yaʿlamūna
वो जानते हैं
ظَـٰهِرًۭا ज़ाहिर को ẓāhiran
ज़ाहिर को
مِّنَ of mina
of
ٱلْحَيَوٰةِ the life l-ḥayati
the life
ٱلدُّنْيَا दुनिया की ज़िन्दगी के l-dun'yā
दुनिया की ज़िन्दगी के
وَهُمْ और वो wahum
और वो
عَنِ about ʿani
about
ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत से l-ākhirati
आख़िरत से
هُمْ वो hum
वो
غَـٰفِلُونَ ग़ाफ़िल हैं ghāfilūna
ग़ाफ़िल हैं
٧ (7)
(7)
वे केवल दुनिया के जीवन के कुछ बाहरी स्वरूप1 को जानते हैं, और वे आख़िरत से बिलकुल गाफ़िल हैं।
३०:८
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَتَفَكَّرُوا۟ उन्होंने ग़ौरो फ़िक्र किया yatafakkarū
उन्होंने ग़ौरो फ़िक्र किया
فِىٓ within
within
أَنفُسِهِم ۗ अपने नफ़्सों में anfusihim
अपने नफ़्सों में
مَّا नहीं
नहीं
خَلَقَ पैदा किया khalaqa
पैदा किया
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ और ज़मीन को wal-arḍa
और ज़मीन को
وَمَا और जो कुछ wamā
और जो कुछ
بَيْنَهُمَآ दर्मियान है इन दोनों के baynahumā
दर्मियान है इन दोनों के
إِلَّا मगर illā
मगर
بِٱلْحَقِّ साथ हक़ के bil-ḥaqi
साथ हक़ के
وَأَجَلٍۢ और वक़्त wa-ajalin
और वक़्त
مُّسَمًّۭى ۗ मुक़र्रर के musamman
मुक़र्रर के
وَإِنَّ और बेशक wa-inna
और बेशक
كَثِيرًۭا बहुत से kathīran
बहुत से
مِّنَ of mina
of
ٱلنَّاسِ लोगों में से l-nāsi
लोगों में से
بِلِقَآئِ मुलाक़ात का biliqāi
मुलाक़ात का
رَبِّهِمْ अपने रब की rabbihim
अपने रब की
لَكَـٰفِرُونَ अलबत्ता इन्कार करने वाले हैं lakāfirūna
अलबत्ता इन्कार करने वाले हैं
٨ (8)
(8)
क्या उन लोगों ने अपने दिलों में विचार नहीं किया कि अल्लाह ने आकाशों और धरती को और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों1 को सत्य के साथ और एक निश्चित अवधि के लिए ही पैदा किया है?! और निःसंदेह बहुत-से लोग अपने पालनहार से मिलने का इनकार करते हैं।
३०:९
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَسِيرُوا۟ वो चले फिरे yasīrū
वो चले फिरे
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
فَيَنظُرُوا۟ तो वो देखते fayanẓurū
तो वो देखते
كَيْفَ कैसा kayfa
कैसा
كَانَ हुआ kāna
हुआ
عَـٰقِبَةُ अंजाम ʿāqibatu
अंजाम
ٱلَّذِينَ उनका जो alladhīna
उनका जो
مِن before them min
before them
قَبْلِهِمْ ۚ उनसे पहले थे qablihim
उनसे पहले थे
كَانُوٓا۟ थे वो kānū
थे वो
أَشَدَّ ज़्यादा शदीद ashadda
ज़्यादा शदीद
مِنْهُمْ उनसे min'hum
उनसे
قُوَّةًۭ क़ुव्वत में quwwatan
क़ुव्वत में
وَأَثَارُوا۟ और उन्होंने उधेड़ा था wa-athārū
और उन्होंने उधेड़ा था
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
وَعَمَرُوهَآ और उन्होंने आबाद किया था उसे waʿamarūhā
और उन्होंने आबाद किया था उसे
أَكْثَرَ ज़्यादा akthara
ज़्यादा
مِمَّا उससे जो mimmā
उससे जो
عَمَرُوهَا उन्होंने आबाद किया है उसे ʿamarūhā
उन्होंने आबाद किया है उसे
وَجَآءَتْهُمْ और आए उनके पास wajāathum
और आए उनके पास
رُسُلُهُم रसूल उनके rusuluhum
रसूल उनके
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ ۖ साथ वाज़ेह दलाइल के bil-bayināti
साथ वाज़ेह दलाइल के
فَمَا तो ना famā
तो ना
كَانَ था kāna
था
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لِيَظْلِمَهُمْ कि वो ज़ुल्म करता उन पर liyaẓlimahum
कि वो ज़ुल्म करता उन पर
وَلَـٰكِن और लेकिन walākin
और लेकिन
كَانُوٓا۟ थे वो kānū
थे वो
أَنفُسَهُمْ अपनी जानों पर anfusahum
अपनी जानों पर
يَظْلِمُونَ वो ज़ुल्म करते yaẓlimūna
वो ज़ुल्म करते
٩ (9)
(9)
और क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते उन लोगों का परिणाम कैसा हुआ, जो उनसे पहले थे? वे उनसे अधिक शक्तिशाली थे और उन्होंने धरती को जोता-बोया और उसे आबाद किया उससे अधिक जितना उन्होंने उसे आबाद किया था, और उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आए। तो अल्लाह ऐसा न था कि उनपर अत्याचार करे, लेकिन वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करते थे।
३०:१०
ثُمَّ फिर thumma
फिर
كَانَ हुआ kāna
हुआ
عَـٰقِبَةَ अंजाम ʿāqibata
अंजाम
ٱلَّذِينَ उनका जिन्होंने alladhīna
उनका जिन्होंने
أَسَـٰٓـُٔوا۟ बुराई की asāū
बुराई की
ٱلسُّوٓأَىٰٓ बहुत बुरा l-sūā
बहुत बुरा
أَن कि an
कि
كَذَّبُوا۟ उन्होंने झुठलाया kadhabū
उन्होंने झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِ (the) Signs biāyāti
(the) Signs
ٱللَّهِ अल्लाह की आयात को l-lahi
अल्लाह की आयात को
وَكَانُوا۟ और थे वो wakānū
और थे वो
بِهَا उनका bihā
उनका
يَسْتَهْزِءُونَ वो मज़ाक़ उड़ाते yastahziūna
वो मज़ाक़ उड़ाते
١٠ (10)
(10)
फिर जिन लोगों ने बुराई की, उनका बहुत ही बुरा अंत हुआ, इसलिए कि उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया और वे उनका उपहास करते थे।
३०:११
ٱللَّهُ अल्लाह al-lahu
अल्लाह
يَبْدَؤُا۟ वो इब्तिदा करता है yabda-u
वो इब्तिदा करता है
ٱلْخَلْقَ तख़लीक़ की l-khalqa
तख़लीक़ की
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يُعِيدُهُۥ वो एआदा करेगा उसका yuʿīduhu
वो एआदा करेगा उसका
ثُمَّ फिर thumma
फिर
إِلَيْهِ तरफ़ उसीके ilayhi
तरफ़ उसीके
تُرْجَعُونَ तुम लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम लौटाए जाओगे
١١ (11)
(11)
अल्लाह ही सृष्टि का आरंभ करता है। फिर वही उसे दोबारा पैदा करेगा। फिर तुम उसी की ओर लौटाए1 जाओगे।
३०:१२
وَيَوْمَ और जिस दिन wayawma
और जिस दिन
تَقُومُ क़ायम होगी taqūmu
क़ायम होगी
ٱلسَّاعَةُ क़यामत l-sāʿatu
क़यामत
يُبْلِسُ नाउम्मीद हो जाऐंगे yub'lisu
नाउम्मीद हो जाऐंगे
ٱلْمُجْرِمُونَ मुजरिम l-muj'rimūna
मुजरिम
١٢ (12)
(12)
और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, अपराधी निराश1 हो जाएँगे।
३०:१३
وَلَمْ और ना walam
और ना
يَكُن होंगे yakun
होंगे
لَّهُم उनके लिए lahum
उनके लिए
مِّن among min
among
شُرَكَآئِهِمْ उनके शरीकों में से shurakāihim
उनके शरीकों में से
شُفَعَـٰٓؤُا۟ कोई सिफ़ारिशी shufaʿāu
कोई सिफ़ारिशी
وَكَانُوا۟ और वो हो जाऐंगे wakānū
और वो हो जाऐंगे
بِشُرَكَآئِهِمْ अपने शरीकों का bishurakāihim
अपने शरीकों का
كَـٰفِرِينَ इन्कार करने वाले kāfirīna
इन्कार करने वाले
١٣ (13)
(13)
और उनके लिए उनके साझियों में से कोई सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे और वे अपने साझियों का इनकार करने वाले1 होंगे।
३०:१४
وَيَوْمَ और जिस दिन wayawma
और जिस दिन
تَقُومُ क़ायम होगी taqūmu
क़ायम होगी
ٱلسَّاعَةُ क़यामत l-sāʿatu
क़यामत
يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
يَتَفَرَّقُونَ वो मुतफ़र्रिक़ हो जाऐंगे yatafarraqūna
वो मुतफ़र्रिक़ हो जाऐंगे
١٤ (14)
(14)
और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, उस दिन वे अलग-अलग हो जाएँगे।
३०:१५
فَأَمَّا तो रहे fa-ammā
तो रहे
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
فَهُمْ तो वो fahum
तो वो
فِى in
in
رَوْضَةٍۢ एक बाग़ में rawḍatin
एक बाग़ में
يُحْبَرُونَ वो ख़ुश कर दिए जाऐंगे yuḥ'barūna
वो ख़ुश कर दिए जाऐंगे
١٥ (15)
(15)
फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, वे जन्नत में प्रसन्नमय रखे जाएँगे।
३०:१६
وَأَمَّا और रहे wa-ammā
और रहे
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
وَكَذَّبُوا۟ और झुटलाया wakadhabū
और झुटलाया
بِـَٔايَـٰتِنَا हमारी आयात को biāyātinā
हमारी आयात को
وَلِقَآئِ और मुलाक़ात को waliqāi
और मुलाक़ात को
ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत की l-ākhirati
आख़िरत की
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ तो यही लोग fa-ulāika
तो यही लोग
فِى in
in
ٱلْعَذَابِ अज़ाब में l-ʿadhābi
अज़ाब में
مُحْضَرُونَ हाज़िर रखे जाने वाले हैं muḥ'ḍarūna
हाज़िर रखे जाने वाले हैं
١٦ (16)
(16)
और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों और आख़िरत की मुलाक़ात को झुठलाया, वे यातना में उपस्थित किए जाएँगे।
३०:१७
فَسُبْحَـٰنَ पस तस्बीह है fasub'ḥāna
पस तस्बीह है
ٱللَّهِ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
حِينَ जब ḥīna
जब
تُمْسُونَ तुम शाम करते हो tum'sūna
तुम शाम करते हो
وَحِينَ और जब waḥīna
और जब
تُصْبِحُونَ तुम सुबह करते हो tuṣ'biḥūna
तुम सुबह करते हो
١٧ (17)
(17)
अतः तुम अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करो,जब तुम शाम करते हो और जब सुबह करते हो।
३०:१८
وَلَهُ और उसी के लिए है walahu
और उसी के लिए है
ٱلْحَمْدُ सब तारीफ़ l-ḥamdu
सब तारीफ़
فِى in
in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों में l-samāwāti
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ और ज़मीन में wal-arḍi
और ज़मीन में
وَعَشِيًّۭا और तीसरे पहर waʿashiyyan
और तीसरे पहर
وَحِينَ और जिस वक़्त waḥīna
और जिस वक़्त
تُظْهِرُونَ तुम ज़ोहर करते हो tuẓ'hirūna
तुम ज़ोहर करते हो
١٨ (18)
(18)
तथा उसी के लिए सब प्रशंसा है आकाशों एवं धरती में, और तीसरे पहर तथा जब तुम ज़ुहर के समय में प्रवेश करते हो।
३०:१९
يُخْرِجُ वो निकालता है yukh'riju
वो निकालता है
ٱلْحَىَّ ज़िन्दा को l-ḥaya
ज़िन्दा को
مِنَ from mina
from
ٱلْمَيِّتِ मुर्दा से l-mayiti
मुर्दा से
وَيُخْرِجُ और वो निकालता है wayukh'riju
और वो निकालता है
ٱلْمَيِّتَ मुर्दा को l-mayita
मुर्दा को
مِنَ from mina
from
ٱلْحَىِّ ज़िन्दा से l-ḥayi
ज़िन्दा से
وَيُحْىِ और वो ज़िन्दा करता है wayuḥ'yī
और वो ज़िन्दा करता है
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
بَعْدَ बाद baʿda
बाद
مَوْتِهَا ۚ उसकी मौत के mawtihā
उसकी मौत के
وَكَذَٰلِكَ और इसी तरह wakadhālika
और इसी तरह
تُخْرَجُونَ तुम निकाले जाओगे tukh'rajūna
तुम निकाले जाओगे
١٩ (19)
(19)
वह जीवित को मृत से निकालता1 है तथा मृत को जीवित से निकालता है और धरती को उसके मृत हो जाने के बाद जीवित करता है। और इसी प्रकार, तुम (भी) निकाले जाओगे।
३०:२०
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦٓ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
أَنْ कि an
कि
خَلَقَكُم उसने पैदा किया तुम्हें khalaqakum
उसने पैदा किया तुम्हें
مِّن from min
from
تُرَابٍۢ मिट्टी से turābin
मिट्टी से
ثُمَّ फिर thumma
फिर
إِذَآ यकायक idhā
यकायक
أَنتُم तुम antum
तुम
بَشَرٌۭ इन्सान हो basharun
इन्सान हो
تَنتَشِرُونَ तुम फैलते चले जारहे हो tantashirūna
तुम फैलते चले जारहे हो
٢٠ (20)
(20)
और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर एकाएक तुम मनुष्य हो, जो फैल रहे हो।
३०:२१
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦٓ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
أَنْ कि an
कि
خَلَقَ उसने पैदा किए khalaqa
उसने पैदा किए
لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
مِّنْ from min
from
أَنفُسِكُمْ तुम्हारे नफ़्सों से anfusikum
तुम्हारे नफ़्सों से
أَزْوَٰجًۭا जोड़े azwājan
जोड़े
لِّتَسْكُنُوٓا۟ ताकि तुम सुकून पाओ litaskunū
ताकि तुम सुकून पाओ
إِلَيْهَا उनकी तरफ़ ilayhā
उनकी तरफ़
وَجَعَلَ और उसने डाल दी wajaʿala
और उसने डाल दी
بَيْنَكُم दर्मियान तुम्हारे baynakum
दर्मियान तुम्हारे
مَّوَدَّةًۭ मुहब्बत mawaddatan
मुहब्बत
وَرَحْمَةً ۚ और रहमत waraḥmatan
और रहमत
إِنَّ बेशक inna
बेशक
فِى in
in
ذَٰلِكَ इसमें dhālika
इसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ अलबत्ता निशानियाँ हैं laāyātin
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يَتَفَكَّرُونَ जो ग़ौरो फ़िक्र करते हैं yatafakkarūna
जो ग़ौरो फ़िक्र करते हैं
٢١ (21)
(21)
तथा उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्ही में से जोड़े पैदा किए, ताकि तुम उनके पास शांति प्राप्त करो। तथा उसने तुम्हारे बीच प्रेम और दया रख दी। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशाननियाँ हैं, जो सोच-विचार करते हैं।
३०:२२
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦ और उसकी निशानियों में से हैं āyātihi
और उसकी निशानियों में से हैं
خَلْقُ पैदाइश khalqu
पैदाइश
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ और ज़मीन की wal-arḍi
और ज़मीन की
وَٱخْتِلَـٰفُ और इख़्तिलाफ़ wa-ikh'tilāfu
और इख़्तिलाफ़
أَلْسِنَتِكُمْ तुम्हारी ज़बानों का alsinatikum
तुम्हारी ज़बानों का
وَأَلْوَٰنِكُمْ ۚ और तुम्हारे रंगों का wa-alwānikum
और तुम्हारे रंगों का
إِنَّ बेशक inna
बेशक
فِى in
in
ذَٰلِكَ इस में dhālika
इस में
لَـَٔايَـٰتٍۢ अलबत्ता निशानियाँ हैं laāyātin
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّلْعَـٰلِمِينَ इल्म वालों के लिए lil'ʿālimīna
इल्म वालों के लिए
٢٢ (22)
(22)
तथा उसकी निशानियों में से आकाशों और धरती को पैदा करना तथा तुम्हारी भाषाओं और तुम्हारे रंगों का अलग-अलग होना है। निःसंदेह इसमें ज्ञान रखने वालों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ1 है।
३०:२३
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
مَنَامُكُم सोना तुम्हारा manāmukum
सोना तुम्हारा
بِٱلَّيْلِ रात bi-al-layli
रात
وَٱلنَّهَارِ और दिन को wal-nahāri
और दिन को
وَٱبْتِغَآؤُكُم और तलाश करना तुम्हारा wa-ib'tighāukum
और तलाश करना तुम्हारा
مِّن of min
of
فَضْلِهِۦٓ ۚ उसके फ़ज़ल से faḍlihi
उसके फ़ज़ल से
إِنَّ यक़ीनन inna
यक़ीनन
فِى in
in
ذَٰلِكَ इसमें dhālika
इसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ अलबत्ता निशानियाँ हैं laāyātin
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يَسْمَعُونَ जो सुनते हैं yasmaʿūna
जो सुनते हैं
٢٣ (23)
(23)
तथा उसकी निशानियों में से तुम्हारा रात और दिन को सोना और तुम्हारा उसके अनुग्रह को तलाश करना है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो सुनते हैं।
३०:२४
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
يُرِيكُمُ कि वो दिखाता है तुम्हें yurīkumu
कि वो दिखाता है तुम्हें
ٱلْبَرْقَ बिजली l-barqa
बिजली
خَوْفًۭا ख़ौफ़ khawfan
ख़ौफ़
وَطَمَعًۭا और उम्मीद से waṭamaʿan
और उम्मीद से
وَيُنَزِّلُ और वो उतारता है wayunazzilu
और वो उतारता है
مِنَ from mina
from
ٱلسَّمَآءِ आसमान से l-samāi
आसमान से
مَآءًۭ पानी māan
पानी
فَيُحْىِۦ फिर वो ज़िन्दा करता है fayuḥ'yī
फिर वो ज़िन्दा करता है
بِهِ साथ इसके bihi
साथ इसके
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
بَعْدَ बाद baʿda
बाद
مَوْتِهَآ ۚ उसकी मौत के mawtihā
उसकी मौत के
إِنَّ यक़ीनन inna
यक़ीनन
فِى in
in
ذَٰلِكَ इसमें dhālika
इसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ अलबत्ता निशानियाँ हैं laāyātin
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يَعْقِلُونَ जो अक़्ल रखते हैं yaʿqilūna
जो अक़्ल रखते हैं
٢٤ (24)
(24)
और उसकी निशानियों में से (यह भी) है कि वह तुम्हें भय और आशा के लिए बिजली दिखाता है और आकाश से पानी उतारता है, फिर उसके द्वारा धरती को उसके मृत हो जाने के बाद जीवित कर देता है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो समझते हैं।
३०:२५
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦٓ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
أَن कि an
कि
تَقُومَ क़ायम हैं taqūma
क़ायम हैं
ٱلسَّمَآءُ आसमान l-samāu
आसमान
وَٱلْأَرْضُ और ज़मीन wal-arḍu
और ज़मीन
بِأَمْرِهِۦ ۚ उसके हुक्म से bi-amrihi
उसके हुक्म से
ثُمَّ फिर thumma
फिर
إِذَا जब idhā
जब
دَعَاكُمْ वो पुकारेगा तुम्हें daʿākum
वो पुकारेगा तुम्हें
دَعْوَةًۭ एक ही बार पुकारना daʿwatan
एक ही बार पुकारना
مِّنَ from mina
from
ٱلْأَرْضِ ज़मीन से l-arḍi
ज़मीन से
إِذَآ यकायक idhā
यकायक
أَنتُمْ तुम antum
तुम
تَخْرُجُونَ तुम निकल आओगे takhrujūna
तुम निकल आओगे
٢٥ (25)
(25)
और उसकी निशानियों में से है कि आकाश तथा धरती उसके आदेश से स्थापित हैं। फिर जब वह तुम्हें धरती में से एक ही बार पुकारेगा, तो सहसा तुम (बाहर) निकल आओगे।
३०:२६
وَلَهُۥ और उसी के लिए है walahu
और उसी के लिए है
مَن जो कोई man
जो कोई
فِى (is) in
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों में l-samāwāti
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ ۖ और ज़मीन में है wal-arḍi
और ज़मीन में है
كُلٌّۭ सब kullun
सब
لَّهُۥ उसी के लिए lahu
उसी के लिए
قَـٰنِتُونَ फ़रमाबरदार हैं qānitūna
फ़रमाबरदार हैं
٢٦ (26)
(26)
और आकाशों और धरती में जो भी है, उसी का है। सब उसी के आज्ञाकारी हैं।
३०:२७
وَهُوَ और वो ही है wahuwa
और वो ही है
ٱلَّذِى जो alladhī
जो
يَبْدَؤُا۟ इब्तिदा करता है yabda-u
इब्तिदा करता है
ٱلْخَلْقَ तख़लीक़ की l-khalqa
तख़लीक़ की
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يُعِيدُهُۥ वो एआदा करेगा उसका yuʿīduhu
वो एआदा करेगा उसका
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
أَهْوَنُ ज़्यादा आसान है ahwanu
ज़्यादा आसान है
عَلَيْهِ ۚ उस पर ʿalayhi
उस पर
وَلَهُ और उसी के लिए है walahu
और उसी के लिए है
ٱلْمَثَلُ मिसाल l-mathalu
मिसाल
ٱلْأَعْلَىٰ आला l-aʿlā
आला
فِى in
in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों में l-samāwāti
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ ۚ और ज़मीन में wal-arḍi
और ज़मीन में
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
ٱلْعَزِيزُ बहुत ज़बरदस्त है l-ʿazīzu
बहुत ज़बरदस्त है
ٱلْحَكِيمُ ख़ूब हिकमत वाला है l-ḥakīmu
ख़ूब हिकमत वाला है
٢٧ (27)
(27)
तथा वही है, जो उत्पत्ति का आरंभ करता है। फिर वही उसे पुनः पैदा करेगा। और यह उसके लिए अधिक सरल है। तथा आकाशों और धरती में सर्वोच्च गुण उसी का है। और वही प्रभुत्वशाली, हिकमत वाला है।
३०:२८
ضَرَبَ उसने बयान की ḍaraba
उसने बयान की
لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
مَّثَلًۭا एक मिसाल mathalan
एक मिसाल
مِّنْ from min
from
أَنفُسِكُمْ ۖ तुम्हारे नफ़्सों में से anfusikum
तुम्हारे नफ़्सों में से
هَل क्या हैं hal
क्या हैं
لَّكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
مِّن among min
among
مَّا उसमें से जो
उसमें से जो
مَلَكَتْ मालिक हैं malakat
मालिक हैं
أَيْمَـٰنُكُم दाऐं हाथ तुम्हारे aymānukum
दाऐं हाथ तुम्हारे
مِّن any min
any
شُرَكَآءَ कुछ शरीक shurakāa
कुछ शरीक
فِى in
in
مَا उसमें जो
उसमें जो
رَزَقْنَـٰكُمْ रिज़्क़ दिया हमने तुम्हें razaqnākum
रिज़्क़ दिया हमने तुम्हें
فَأَنتُمْ तो तुम fa-antum
तो तुम
فِيهِ उसमें fīhi
उसमें
سَوَآءٌۭ बराबर हो sawāon
बराबर हो
تَخَافُونَهُمْ तुम डरते हो उनसे takhāfūnahum
तुम डरते हो उनसे
كَخِيفَتِكُمْ जैसे डरना तुम्हारा kakhīfatikum
जैसे डरना तुम्हारा
أَنفُسَكُمْ ۚ अपने नफ़्सों (जैसों) से anfusakum
अपने नफ़्सों (जैसों) से
كَذَٰلِكَ इसी तरह kadhālika
इसी तरह
نُفَصِّلُ हम खोलकर बयान करते हैं nufaṣṣilu
हम खोलकर बयान करते हैं
ٱلْـَٔايَـٰتِ आयात l-āyāti
आयात
لِقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يَعْقِلُونَ जो अक़्ल रखते हैं yaʿqilūna
जो अक़्ल रखते हैं
٢٨ (28)
(28)
उसने तुम्हारे लिए स्वयं तुम्हीं में से एक उदाहरण पेश किया है। हमने जो रोज़ी तुम्हें प्रदान की है, क्या उसमें तुम्हारे1 दासों में से तुम्हारा कोई साझी है कि तुम उसमें समान हो, उनसे वैसे ही डरते हो, जैसे एक-दूसरे से डरते हो? इसी प्रकार हम उन लोगों के लिए आयतें खोल-खोलकर वर्णन करते हैं, जो समझ रखते हैं।
३०:२९
بَلِ बल्कि bali
बल्कि
ٱتَّبَعَ पैरवी की ittabaʿa
पैरवी की
ٱلَّذِينَ उन लोगों ने जिन्होंने alladhīna
उन लोगों ने जिन्होंने
ظَلَمُوٓا۟ ज़ुल्म किया ẓalamū
ज़ुल्म किया
أَهْوَآءَهُم अपनी ख़्वाहिशात की ahwāahum
अपनी ख़्वाहिशात की
بِغَيْرِ बग़ैर bighayri
बग़ैर
عِلْمٍۢ ۖ इल्म के ʿil'min
इल्म के
فَمَن तो कौन faman
तो कौन
يَهْدِى हिदायत दे सकता है yahdī
हिदायत दे सकता है
مَنْ उसको जिसे man
उसको जिसे
أَضَلَّ गुमराह कर दे aḍalla
गुमराह कर दे
ٱللَّهُ ۖ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए
مِّن any min
any
نَّـٰصِرِينَ मददगारों में से कोई nāṣirīna
मददगारों में से कोई
٢٩ (29)
(29)
बल्कि वे लोग जिन्होंने अत्याचार किया बिना किसी ज्ञान के अपनी इच्छाओं के पीछे चल पड़े।फिर उसे कौन मार्ग पर लाए, जिसे अल्लाह ने गुमराह कर दिया हो। और उनके लिए कोई सहायक नहीं है।
३०:३०
فَأَقِمْ पस क़ायम रखिए fa-aqim
पस क़ायम रखिए
وَجْهَكَ अपने चेहरे को wajhaka
अपने चेहरे को
لِلدِّينِ दीन के लिए lilddīni
दीन के लिए
حَنِيفًۭا ۚ यक्सू हो कर ḥanīfan
यक्सू हो कर
فِطْرَتَ फ़ितरत fiṭ'rata
फ़ितरत
ٱللَّهِ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
ٱلَّتِى वो जो allatī
वो जो
فَطَرَ उसने पैदा किया faṭara
उसने पैदा किया
ٱلنَّاسَ लोगों को l-nāsa
लोगों को
عَلَيْهَا ۚ उस पर ʿalayhā
उस पर
لَا No
No
تَبْدِيلَ नहीं (जाइज़) कोई तब्दीली tabdīla
नहीं (जाइज़) कोई तब्दीली
لِخَلْقِ ख़ल्क़ के लिए likhalqi
ख़ल्क़ के लिए
ٱللَّهِ ۚ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
ذَٰلِكَ यही है dhālika
यही है
ٱلدِّينُ दीन l-dīnu
दीन
ٱلْقَيِّمُ दुरुस्त l-qayimu
दुरुस्त
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
أَكْثَرَ अक्सर akthara
अक्सर
ٱلنَّاسِ लोग l-nāsi
लोग
لَا (do) not
(do) not
يَعْلَمُونَ नहीं वो इल्म रखते yaʿlamūna
नहीं वो इल्म रखते
٣٠ (30)
(30)
तो (ऐ नबी!) आप एकाग्र होकर अपने चेहरे को इस धर्म की ओर स्थापित करें। उस फ़ितरत पर जमे रहें, जिसपर1 अल्लाह ने लोगों को पैदा किया है। अल्लाह की रचना में कोई बदलाव नहीं हो सकता। यही सीधा धर्म है, लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते।2
३०:३१
۞ مُنِيبِينَ रुजूअ करने वाले (बनो) munībīna
रुजूअ करने वाले (बनो)
إِلَيْهِ तरफ़ उसके ilayhi
तरफ़ उसके
وَٱتَّقُوهُ और डरो उससे wa-ittaqūhu
और डरो उससे
وَأَقِيمُوا۟ और क़ायम करो wa-aqīmū
और क़ायम करो
ٱلصَّلَوٰةَ नमाज़ l-ṣalata
नमाज़
وَلَا और ना walā
और ना
تَكُونُوا۟ तुम हो जाओ takūnū
तुम हो जाओ
مِنَ of mina
of
ٱلْمُشْرِكِينَ मुशरिकों में से l-mush'rikīna
मुशरिकों में से
٣١ (31)
(31)
उसी (अल्लाह) की ओर पलटते हुए, और उससे डरो तथा नमाज़ क़ायम करो और मुश्रिकों में से न हो जाओ।
३०:३२
مِنَ Of mina
Of
ٱلَّذِينَ उन लोगों में से जिन्होंने alladhīna
उन लोगों में से जिन्होंने
فَرَّقُوا۟ फ़िरक़ा-फ़िरक़ा कर दिया farraqū
फ़िरक़ा-फ़िरक़ा कर दिया
دِينَهُمْ अपने दीन को dīnahum
अपने दीन को
وَكَانُوا۟ और हो गए वो wakānū
और हो गए वो
شِيَعًۭا ۖ गिरोह-गिरोह shiyaʿan
गिरोह-गिरोह
كُلُّ हर kullu
हर
حِزْبٍۭ गिरोह (के लोग) ḥiz'bin
गिरोह (के लोग)
بِمَا उस पर जो bimā
उस पर जो
لَدَيْهِمْ उनके पास है ladayhim
उनके पास है
فَرِحُونَ ख़ुश हैं fariḥūna
ख़ुश हैं
٣٢ (32)
(32)
उन लोगों में से जिन्होंने अपने धर्म को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, और कई गिरोह हो गए। प्रत्येक गिरोह उसी1 पर खुश है, जो उसके पास है।
३०:३३
وَإِذَا और जब wa-idhā
और जब
مَسَّ पहुँचती है massa
पहुँचती है
ٱلنَّاسَ लोगों को l-nāsa
लोगों को
ضُرٌّۭ कोई तक्लीफ़ ḍurrun
कोई तक्लीफ़
دَعَوْا۟ वो पुकारते हैं daʿaw
वो पुकारते हैं
رَبَّهُم अपने रब को rabbahum
अपने रब को
مُّنِيبِينَ रुजूअ करने वाले बन कर munībīna
रुजूअ करने वाले बन कर
إِلَيْهِ तरफ़ उसके ilayhi
तरफ़ उसके
ثُمَّ फिर thumma
फिर
إِذَآ जब idhā
जब
أَذَاقَهُم वो चखाता है उन्हें adhāqahum
वो चखाता है उन्हें
مِّنْهُ अपनी तरफ़ से min'hu
अपनी तरफ़ से
رَحْمَةً रहमत raḥmatan
रहमत
إِذَا यकायक idhā
यकायक
فَرِيقٌۭ एक गिरोह (के लोग) farīqun
एक गिरोह (के लोग)
مِّنْهُم उनमें से min'hum
उनमें से
بِرَبِّهِمْ अपने रब के साथ birabbihim
अपने रब के साथ
يُشْرِكُونَ वो शरीक ठहराते हैं yush'rikūna
वो शरीक ठहराते हैं
٣٣ (33)
(33)
और जब लोगों को कोई कष्ट पहुँचता है, तो वे अपने पालनहार को, उसकी ओर लौटते हुए पुकारते हैं। फिर जब वह उन्हें अपनी ओर से कोई दया चखाता है, तो सहसा उनमें से एक समूह अपने पालनहार के साथ शिर्क करने लगता है।
३०:३४
لِيَكْفُرُوا۟ ताकि वो नाशुक्री करें liyakfurū
ताकि वो नाशुक्री करें
بِمَآ उसकी जो bimā
उसकी जो
ءَاتَيْنَـٰهُمْ ۚ अता किया हमने उन्हें ātaynāhum
अता किया हमने उन्हें
فَتَمَتَّعُوا۟ तो फ़ायदा उठा लो fatamattaʿū
तो फ़ायदा उठा लो
فَسَوْفَ पस अनक़रीब fasawfa
पस अनक़रीब
تَعْلَمُونَ तुम जान लोगे taʿlamūna
तुम जान लोगे
٣٤ (34)
(34)
ताकि वे उसके प्रति कृतघ्नता दिखाएँ, जो हमने उन्हें प्रदान किया है। तो तुम लाभ उठा लो, शीघ्र ही तुम्हें पता चल जाएगा।
३०:३५
أَمْ या am
या
أَنزَلْنَا उतारी हमने anzalnā
उतारी हमने
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
سُلْطَـٰنًۭا कोई दलील sul'ṭānan
कोई दलील
فَهُوَ तो वो fahuwa
तो वो
يَتَكَلَّمُ वो बताती है yatakallamu
वो बताती है
بِمَا उनको वो जो bimā
उनको वो जो
كَانُوا۟ हैं वो kānū
हैं वो
بِهِۦ साथ जिसके bihi
साथ जिसके
يُشْرِكُونَ वो शरीक ठहराते yush'rikūna
वो शरीक ठहराते
٣٥ (35)
(35)
क्या हमने उनपर कोई प्रमाण उतारा है कि वह उस चीज़ को (उचित) बताता है, जिसे वे अल्लाह के साथ साझी ठहराया1 करते थे।
३०:३६
وَإِذَآ और जब wa-idhā
और जब
أَذَقْنَا चखाते हैं हम adhaqnā
चखाते हैं हम
ٱلنَّاسَ लोगों को l-nāsa
लोगों को
رَحْمَةًۭ कोई रहमत raḥmatan
कोई रहमत
فَرِحُوا۟ वो ख़ुश होते हैं fariḥū
वो ख़ुश होते हैं
بِهَا ۖ उस पर bihā
उस पर
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
تُصِبْهُمْ पहुँचती है उन्हें tuṣib'hum
पहुँचती है उन्हें
سَيِّئَةٌۢ कोई बुराई sayyi-atun
कोई बुराई
بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
قَدَّمَتْ आगे भेजा qaddamat
आगे भेजा
أَيْدِيهِمْ उनके हाथों ने aydīhim
उनके हाथों ने
إِذَا यकायक idhā
यकायक
هُمْ वो hum
वो
يَقْنَطُونَ वो मायूस हो जाते हैं yaqnaṭūna
वो मायूस हो जाते हैं
٣٦ (36)
(36)
और जब हम लोगों को कोई दया चखाते हैं, तो वे उससे प्रसन्न हो जाते हैं, और अगर उन्हें उनकी करतूतों के कारण कोई विपत्ति पहुँचती है, तो वे सहसा निराश हो जाते हैं।
३०:३७
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा
أَنَّ बेशक anna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
يَبْسُطُ वो फैलाता है yabsuṭu
वो फैलाता है
ٱلرِّزْقَ रिज़्क़ l-riz'qa
रिज़्क़
لِمَن जिसके लिए liman
जिसके लिए
يَشَآءُ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
وَيَقْدِرُ ۚ और वो तंग करता है wayaqdiru
और वो तंग करता है
إِنَّ बेशक inna
बेशक
فِى in
in
ذَٰلِكَ इसमें dhālika
इसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ अलबत्ता निशानियाँ हैं laāyātin
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يُؤْمِنُونَ जो ईमान लाते हैं yu'minūna
जो ईमान लाते हैं
٣٧ (37)
(37)
क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी विस्तृत कर देता है, और जिसके लिए चाहता है, तंग कर देता है? निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो ईमान रखते हैं।
३०:३८
فَـَٔاتِ पस आप दीजिए faāti
पस आप दीजिए
ذَا the relative dhā
the relative
ٱلْقُرْبَىٰ क़राबतदार को l-qur'bā
क़राबतदार को
حَقَّهُۥ हक़ उसका ḥaqqahu
हक़ उसका
وَٱلْمِسْكِينَ और मिसकीन wal-mis'kīna
और मिसकीन
وَٱبْنَ and the wayfarer wa-ib'na
and the wayfarer
ٱلسَّبِيلِ ۚ और मुसाफ़िर को l-sabīli
और मुसाफ़िर को
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
خَيْرٌۭ बेहतर है khayrun
बेहतर है
لِّلَّذِينَ उनके लिए जो lilladhīna
उनके लिए जो
يُرِيدُونَ चाहते हैं yurīdūna
चाहते हैं
وَجْهَ चेहरा wajha
चेहरा
ٱللَّهِ ۖ अल्लाह का l-lahi
अल्लाह का
وَأُو۟لَـٰٓئِكَ और यही लोग हैं wa-ulāika
और यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلْمُفْلِحُونَ जो फ़लाह पाने वाले हैं l-muf'liḥūna
जो फ़लाह पाने वाले हैं
٣٨ (38)
(38)
अतः रिश्तेदार को उसका हक़ दो, तथा निर्धन और यात्री को (भी)। यह उन लोगों के लिए बेहतर है, जो अल्लाह का चेहरा चाहते हैं और वही सफल होने वाले हैं।
३०:३९
وَمَآ और जो कुछ wamā
और जो कुछ
ءَاتَيْتُم देते हो तुम ātaytum
देते हो तुम
مِّن for min
for
رِّبًۭا सूद में से riban
सूद में से
لِّيَرْبُوَا۟ ताकि वो बढ़ जाए liyarbuwā
ताकि वो बढ़ जाए
فِىٓ in
in
أَمْوَٰلِ मालों में amwāli
मालों में
ٱلنَّاسِ लोगों के l-nāsi
लोगों के
فَلَا पस नहीं falā
पस नहीं
يَرْبُوا۟ वो बढ़ता yarbū
वो बढ़ता
عِندَ with ʿinda
with
ٱللَّهِ ۖ अल्लाह के यहाँ l-lahi
अल्लाह के यहाँ
وَمَآ और जो कुछ wamā
और जो कुछ
ءَاتَيْتُم देते हो तुम ātaytum
देते हो तुम
مِّن of min
of
زَكَوٰةٍۢ ज़कात में से zakatin
ज़कात में से
تُرِيدُونَ तुम चाहते हो turīdūna
तुम चाहते हो
وَجْهَ चेहरा wajha
चेहरा
ٱللَّهِ अल्लाह का l-lahi
अल्लाह का
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ तो यही लोग हैं fa-ulāika
तो यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلْمُضْعِفُونَ जो दो गुना करने वाले हैं l-muḍ'ʿifūna
जो दो गुना करने वाले हैं
٣٩ (39)
(39)
और तुम ब्याज पर जो (उधार) देते हो, ताकि वह लोगों के धनों में मिलकर अधिक1 हो जाए, तो वह अल्लाह के यहाँ अधिक नहीं होता। तथा तुम अल्लाह का चेहरा चाहते हुए जो कुछ ज़कात से देते हो, तो वही लोग कई गुना बढ़ाने वाले हैं।
३०:४०
ٱللَّهُ अल्लाह al-lahu
अल्लाह
ٱلَّذِى वो है जिसने alladhī
वो है जिसने
خَلَقَكُمْ पैदा किया तुम्हें khalaqakum
पैदा किया तुम्हें
ثُمَّ फिर thumma
फिर
رَزَقَكُمْ उसने रिज़्क़ दिया तुम्हें razaqakum
उसने रिज़्क़ दिया तुम्हें
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يُمِيتُكُمْ वो मौत देगा तुम्हें yumītukum
वो मौत देगा तुम्हें
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يُحْيِيكُمْ ۖ वो ज़िन्दा करेगा तुम्हें yuḥ'yīkum
वो ज़िन्दा करेगा तुम्हें
هَلْ क्या है hal
क्या है
مِن any min
any
شُرَكَآئِكُم तुम्हारे शरीकों में से कोई shurakāikum
तुम्हारे शरीकों में से कोई
مَّن जो man
जो
يَفْعَلُ करे yafʿalu
करे
مِن of min
of
ذَٰلِكُم इसमें से dhālikum
इसमें से
مِّن any min
any
شَىْءٍۢ ۚ कोई चीज़ shayin
कोई चीज़
سُبْحَـٰنَهُۥ पाक है वो sub'ḥānahu
पाक है वो
وَتَعَـٰلَىٰ और वो बुलन्दतर है wataʿālā
और वो बुलन्दतर है
عَمَّا उससे जो ʿammā
उससे जो
يُشْرِكُونَ वो शरीक ठहराते हैं yush'rikūna
वो शरीक ठहराते हैं
٤٠ (40)
(40)
अल्लाह वह (अस्तित्व) है, जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हें जीविका प्रदान की, फिर तुम्हें मृत्यु देगा, फिर तुम्हें जीवित करेगा।1 क्या तुम्हारे साझियों में से कोई है, जो इन कामों में से कुछ भी कर सके? वह पवित्र है और सर्वोच्च है, उनके साझी बनाने से।
३०:४१
ظَهَرَ ज़ाहिर हो गया ẓahara
ज़ाहिर हो गया
ٱلْفَسَادُ फ़साद l-fasādu
फ़साद
فِى in
in
ٱلْبَرِّ ख़ुश्की में l-bari
ख़ुश्की में
وَٱلْبَحْرِ और समुन्दर में wal-baḥri
और समुन्दर में
بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
كَسَبَتْ कमाई की kasabat
कमाई की
أَيْدِى हाथों ने aydī
हाथों ने
ٱلنَّاسِ लोगों के l-nāsi
लोगों के
لِيُذِيقَهُم ताकि वो चखाए उन्हें liyudhīqahum
ताकि वो चखाए उन्हें
بَعْضَ बाज़ उसका baʿḍa
बाज़ उसका
ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो
عَمِلُوا۟ उन्होंने अमल किए ʿamilū
उन्होंने अमल किए
لَعَلَّهُمْ ताकि वो laʿallahum
ताकि वो
يَرْجِعُونَ वो लौट आऐं yarjiʿūna
वो लौट आऐं
٤١ (41)
(41)
जल और थल में लोगों के हाथों की कमाई के कारण बिगाड़ फैल गया1 है, ताकि वह (अल्लाह) उन्हें उनके कुछ कर्मों का मज़ा चखाए, ताकि वे बाज़ आ जाएँ।
३०:४२
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
سِيرُوا۟ चलो फिरो sīrū
चलो फिरो
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
فَٱنظُرُوا۟ फिर देखो fa-unẓurū
फिर देखो
كَيْفَ कैसा kayfa
कैसा
كَانَ हुआ kāna
हुआ
عَـٰقِبَةُ अंजाम ʿāqibatu
अंजाम
ٱلَّذِينَ उनका जो alladhīna
उनका जो
مِن (were) before min
(were) before
قَبْلُ ۚ (इनसे) पहले थे qablu
(इनसे) पहले थे
كَانَ थे kāna
थे
أَكْثَرُهُم अक्सर उनके aktharuhum
अक्सर उनके
مُّشْرِكِينَ मुशरिक mush'rikīna
मुशरिक
٤٢ (42)
(42)
आप कह दें कि धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि उन लोगों का अंत कैसा रहा, जो इनसे पहले थे। उनमें अधिकतर मुश्रिक थे।
३०:४३
فَأَقِمْ तो क़ायम रखिए fa-aqim
तो क़ायम रखिए
وَجْهَكَ चेहरा अपना wajhaka
चेहरा अपना
لِلدِّينِ to the religion lilddīni
to the religion
ٱلْقَيِّمِ दुरुस्त दीन के लिए l-qayimi
दुरुस्त दीन के लिए
مِن before min
before
قَبْلِ इससे पहले qabli
इससे पहले
أَن कि an
कि
يَأْتِىَ आ जाए yatiya
आ जाए
يَوْمٌۭ वो दिन yawmun
वो दिन
لَّا not
not
مَرَدَّ नहीं कोई टलना maradda
नहीं कोई टलना
لَهُۥ उसके लिए lahu
उसके लिए
مِنَ from mina
from
ٱللَّهِ ۖ अल्लाह की तरफ़ से l-lahi
अल्लाह की तरफ़ से
يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
يَصَّدَّعُونَ वो जुदा-जुदा हो जाऐंगे yaṣṣaddaʿūna
वो जुदा-जुदा हो जाऐंगे
٤٣ (43)
(43)
अतः आप अपना चेहरा सीधे धर्म पर स्थापित रखें, इससे पहले कि वह दिन आ जाए, जिसे अल्लाह की ओर से टलना नहीं है। उस दिन लोग अलग-अलग1 हो जाएँगे।
३०:४४
مَن जिसने man
जिसने
كَفَرَ कुफ़्र किया kafara
कुफ़्र किया
فَعَلَيْهِ तोउसी पर है faʿalayhi
तोउसी पर है
كُفْرُهُۥ ۖ कुफ़्र उसका kuf'ruhu
कुफ़्र उसका
وَمَنْ और जिसने waman
और जिसने
عَمِلَ अमल किया ʿamila
अमल किया
صَـٰلِحًۭا नेक ṣāliḥan
नेक
فَلِأَنفُسِهِمْ तो अपने ही नफ़्सों के लिए fali-anfusihim
तो अपने ही नफ़्सों के लिए
يَمْهَدُونَ वो राह हमवार कर रहे हैं yamhadūna
वो राह हमवार कर रहे हैं
٤٤ (44)
(44)
जिसने कुफ़्र किया, उसके कुफ़्र का नुकसान उसी पर है, और जिसने सत्कर्म किया, तो वे अपने ही लिए (आराम का) साधन जुटा रहे हैं।
३०:४५
لِيَجْزِىَ ताकि वो बदला दे liyajziya
ताकि वो बदला दे
ٱلَّذِينَ उनको जो alladhīna
उनको जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
مِن (out) of min
(out) of
فَضْلِهِۦٓ ۚ अपने फ़ज़ल से faḍlihi
अपने फ़ज़ल से
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
لَا (does) not
(does) not
يُحِبُّ नहीं वो पसंद करता yuḥibbu
नहीं वो पसंद करता
ٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों को l-kāfirīna
काफ़िरों को
٤٥ (45)
(45)
ताकि वह (अल्लाह) अपने अनुग्रह से उन लोगों को बदला दे, जो ईमान लाए और उन्होंने सत्कर्म किए। निःसंदेह वह काफ़िरों से प्रेम नहीं करता।
३०:४६
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦٓ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
أَن कि an
कि
يُرْسِلَ वो भेजता है yur'sila
वो भेजता है
ٱلرِّيَاحَ हवाऐं l-riyāḥa
हवाऐं
مُبَشِّرَٰتٍۢ ख़ुशख़बरी देने वालियाँ mubashirātin
ख़ुशख़बरी देने वालियाँ
وَلِيُذِيقَكُم और ताकि वो चखाए तुम्हें waliyudhīqakum
और ताकि वो चखाए तुम्हें
مِّن of min
of
رَّحْمَتِهِۦ अपनी रहमत से raḥmatihi
अपनी रहमत से
وَلِتَجْرِىَ और ताकि चलें walitajriya
और ताकि चलें
ٱلْفُلْكُ कश्तियाँ l-ful'ku
कश्तियाँ
بِأَمْرِهِۦ उसके हुक्म से bi-amrihi
उसके हुक्म से
وَلِتَبْتَغُوا۟ और ताकि तुम तलाश करो walitabtaghū
और ताकि तुम तलाश करो
مِن of min
of
فَضْلِهِۦ उसके फ़ज़ल में से faḍlihi
उसके फ़ज़ल में से
وَلَعَلَّكُمْ और ताकि तुम walaʿallakum
और ताकि तुम
تَشْكُرُونَ तुम शुक्र अदा करो tashkurūna
तुम शुक्र अदा करो
٤٦ (46)
(46)
और उसकी निशानियों में से है कि वह शुभ सूचना देने वाली हवाएँ भेजता है, और ताकि तुम्हें अपनी दया (वर्षा) चखाए, और ताकि उसके आदेश से नावें चलें, और ताकि तुम उसका अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो, और ताकि तुम आभार प्रकट करो।
३०:४७
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक
أَرْسَلْنَا भेजा हमने arsalnā
भेजा हमने
مِن before you min
before you
قَبْلِكَ आपसे पहले qablika
आपसे पहले
رُسُلًا कई रसूलों क rusulan
कई रसूलों क
إِلَىٰ to ilā
to
قَوْمِهِمْ तरफ़ उनकी क़ौम के qawmihim
तरफ़ उनकी क़ौम के
فَجَآءُوهُم तो वो लाए उनके पास fajāūhum
तो वो लाए उनके पास
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ वाज़ेह निशानियाँ bil-bayināti
वाज़ेह निशानियाँ
فَٱنتَقَمْنَا तो इन्तिक़ाम लिया हमने fa-intaqamnā
तो इन्तिक़ाम लिया हमने
مِنَ from mina
from
ٱلَّذِينَ उनसे जिन्होंने alladhīna
उनसे जिन्होंने
أَجْرَمُوا۟ ۖ जुर्म किया ajramū
जुर्म किया
وَكَانَ और है wakāna
और है
حَقًّا हक़ ḥaqqan
हक़
عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर
نَصْرُ मदद करना naṣru
मदद करना
ٱلْمُؤْمِنِينَ मोमिनों की l-mu'minīna
मोमिनों की
٤٧ (47)
(47)
निश्चय हमने आपसे पहले कई रसूल उनकी जातियों की ओर भेजे। तो वे उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए। फिर हमने उन लोगों से बदला लिया, जिन्होंने अपराध किया। और हमपर ईमान वालों की सहायता1 करना अनिवार्य था।
३०:४८
ٱللَّهُ अल्लाह al-lahu
अल्लाह
ٱلَّذِى वो है जो alladhī
वो है जो
يُرْسِلُ भेजता है yur'silu
भेजता है
ٱلرِّيَـٰحَ हवाओं को l-riyāḥa
हवाओं को
فَتُثِيرُ तो वो उठाती हैं fatuthīru
तो वो उठाती हैं
سَحَابًۭا बादल saḥāban
बादल
فَيَبْسُطُهُۥ फिर वो फैला देता है उसे fayabsuṭuhu
फिर वो फैला देता है उसे
فِى in
in
ٱلسَّمَآءِ आसमान में l-samāi
आसमान में
كَيْفَ जिस तरह kayfa
जिस तरह
يَشَآءُ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
وَيَجْعَلُهُۥ और वो कर देता है उसे wayajʿaluhu
और वो कर देता है उसे
كِسَفًۭا टुकड़ियों में kisafan
टुकड़ियों में
فَتَرَى तो आप देखते हैं fatarā
तो आप देखते हैं
ٱلْوَدْقَ बारिश को l-wadqa
बारिश को
يَخْرُجُ वो निकलती है yakhruju
वो निकलती है
مِنْ from min
from
خِلَـٰلِهِۦ ۖ उसके अन्दर से khilālihi
उसके अन्दर से
فَإِذَآ फिर जब fa-idhā
फिर जब
أَصَابَ वो पहुँचाता है aṣāba
वो पहुँचाता है
بِهِۦ उसे bihi
उसे
مَن जिसे man
जिसे
يَشَآءُ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
مِنْ of min
of
عِبَادِهِۦٓ अपने बन्दों में से ʿibādihi
अपने बन्दों में से
إِذَا यकायक idhā
यकायक
هُمْ वो hum
वो
يَسْتَبْشِرُونَ वो ख़ुश हो जाते हैं yastabshirūna
वो ख़ुश हो जाते हैं
٤٨ (48)
(48)
अल्लाह ही है, जो हवाओं को भेजता है। तो वे बादल उठाती हैं। फिर वह उसे जैसे चाहता है, आकाश में फैला देता है, और उसे टुकड़े-टुकड़े कर देता है। तो तुम वर्षा की बूँदों को उसके बीच से निकलते देखते हो। फिर जब वह उसे अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, बरसाता है, तो सहसा वे बहुत खुश हो जाते हैं।
३०:४९
وَإِن और बेशक wa-in
और बेशक
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
مِن before min
before
قَبْلِ इससे पहले qabli
इससे पहले
أَن कि an
कि
يُنَزَّلَ वो बरसाई जाए yunazzala
वो बरसाई जाए
عَلَيْهِم उन पर ʿalayhim
उन पर
مِّن [before it] min
[before it]
قَبْلِهِۦ इससे पहले ही qablihi
इससे पहले ही
لَمُبْلِسِينَ यक़ीनन मायूस होने वाले lamub'lisīna
यक़ीनन मायूस होने वाले
٤٩ (49)
(49)
हालाँकि निश्चय वे इससे पहले, उसके उनपर बरसाए जाने से पहले बहुत निराश थे।
३०:५०
فَٱنظُرْ तो देखो fa-unẓur
तो देखो
إِلَىٰٓ at ilā
at
ءَاثَـٰرِ तरफ़ आसार के āthāri
तरफ़ आसार के
رَحْمَتِ (of the) Mercy raḥmati
(of the) Mercy
ٱللَّهِ अल्लाह की रहमत के l-lahi
अल्लाह की रहमत के
كَيْفَ किस तरह kayfa
किस तरह
يُحْىِ वो ज़िन्दा करता है yuḥ'yī
वो ज़िन्दा करता है
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
بَعْدَ बाद baʿda
बाद
مَوْتِهَآ ۚ उसकी मौत के mawtihā
उसकी मौत के
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ذَٰلِكَ वो ही dhālika
वो ही
لَمُحْىِ अलबत्ता ज़िन्दा करने वाला है lamuḥ'yī
अलबत्ता ज़िन्दा करने वाला है
ٱلْمَوْتَىٰ ۖ मुर्दों को l-mawtā
मुर्दों को
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
كُلِّ हर kulli
हर
شَىْءٍۢ चीज़ के shayin
चीज़ के
قَدِيرٌۭ ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है qadīrun
ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
٥٠ (50)
(50)
तो आप अल्लाह की दया के संकेतों को देखें कि वह किस तरह धरती को उसके मृत हो जाने के पश्चात् जीवित करता है! निःसंदेह वही निश्चय मुर्दों को जीवित करने वाला है और वह हर चीज़ में पूरी तरह सक्षम है।
३०:५१
وَلَئِنْ और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
أَرْسَلْنَا भेजें हम arsalnā
भेजें हम
رِيحًۭا हवा को rīḥan
हवा को
فَرَأَوْهُ फिर वो देखें उस (खेती) को fara-awhu
फिर वो देखें उस (खेती) को
مُصْفَرًّۭا ज़र्द पड़ी हुई muṣ'farran
ज़र्द पड़ी हुई
لَّظَلُّوا۟ अलबत्ता लगें वो laẓallū
अलबत्ता लगें वो
مِنۢ after it min
after it
بَعْدِهِۦ बाद इसके baʿdihi
बाद इसके
يَكْفُرُونَ वो नाशुक्री करने yakfurūna
वो नाशुक्री करने
٥١ (51)
(51)
और निश्चय अगर हम कोई वायु भेजे, फिर वे उस (खेती) को पीली पड़ी हुई देखें, तो वे इसके बाद अवश्य नाशुक्री करने लगेंगे।
३०:५२
فَإِنَّكَ पस बेशक आप fa-innaka
पस बेशक आप
لَا (can) not
(can) not
تُسْمِعُ नहीं आप सुना सकते tus'miʿu
नहीं आप सुना सकते
ٱلْمَوْتَىٰ मुर्दों को l-mawtā
मुर्दों को
وَلَا और ना walā
और ना
تُسْمِعُ आप सुना सकते हैं tus'miʿu
आप सुना सकते हैं
ٱلصُّمَّ बहरों क l-ṣuma
बहरों क
ٱلدُّعَآءَ पुकार l-duʿāa
पुकार
إِذَا जब idhā
जब
وَلَّوْا۟ वो मुँह मोड़ जाऐं wallaw
वो मुँह मोड़ जाऐं
مُدْبِرِينَ पीठ फेरते हुए mud'birīna
पीठ फेरते हुए
٥٢ (52)
(52)
निःसंदेह आप मुर्दों1 को नहीं सुना सकते और न बहरों को (अपनी) पुकार सुना सकते हैं, जब वे पीठ फेरकर लौट जाएँ।
३०:५३
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَنتَ आप anta
आप
بِهَـٰدِ हिदायत देने वाले bihādi
हिदायत देने वाले
ٱلْعُمْىِ अँधों को l-ʿum'yi
अँधों को
عَن from ʿan
from
ضَلَـٰلَتِهِمْ ۖ उनकी गुमराही से ḍalālatihim
उनकी गुमराही से
إِن नहीं in
नहीं
تُسْمِعُ आप सुन सकते हैं tus'miʿu
आप सुन सकते हैं
إِلَّا मगर illā
मगर
مَن उसे जो man
उसे जो
يُؤْمِنُ ईमान रखता हो yu'minu
ईमान रखता हो
بِـَٔايَـٰتِنَا हमारी आयात पर biāyātinā
हमारी आयात पर
فَهُم फिर वो fahum
फिर वो
مُّسْلِمُونَ फ़रमाबरदार हों mus'limūna
फ़रमाबरदार हों
٥٣ (53)
(53)
तथा आप अंधों को उनकी गुमारही से हटाकर सीधे मार्ग पर नहीं ला सकते। आप तो केवल उन्हीं को सुना सकते हैं, जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं। तो वही आज्ञाकारी हैं।
३०:५४
۞ ٱللَّهُ अल्लाह al-lahu
अल्लाह
ٱلَّذِى वो है जिसने alladhī
वो है जिसने
خَلَقَكُم पैदा किया तुम्हें khalaqakum
पैदा किया तुम्हें
مِّن from min
from
ضَعْفٍۢ कमज़ोरी से ḍaʿfin
कमज़ोरी से
ثُمَّ फिर thumma
फिर
جَعَلَ उसने बनाई jaʿala
उसने बनाई
مِنۢ after min
after
بَعْدِ बाद baʿdi
बाद
ضَعْفٍۢ कमज़ोरी के ḍaʿfin
कमज़ोरी के
قُوَّةًۭ क़ुव्वत quwwatan
क़ुव्वत
ثُمَّ फिर thumma
फिर
جَعَلَ उसने बनाई jaʿala
उसने बनाई
مِنۢ after min
after
بَعْدِ बाद baʿdi
बाद
قُوَّةٍۢ क़ुव्वत के quwwatin
क़ुव्वत के
ضَعْفًۭا कमज़ोरी ḍaʿfan
कमज़ोरी
وَشَيْبَةًۭ ۚ और बुढ़ापा washaybatan
और बुढ़ापा
يَخْلُقُ वो पैदा करता है yakhluqu
वो पैदा करता है
مَا जो
जो
يَشَآءُ ۖ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
وَهُوَ और वो ही है wahuwa
और वो ही है
ٱلْعَلِيمُ ख़ूब जानने वाला l-ʿalīmu
ख़ूब जानने वाला
ٱلْقَدِيرُ बहुत क़ुदरत रखने वाला l-qadīru
बहुत क़ुदरत रखने वाला
٥٤ (54)
(54)
अल्लाह वह है, जिसने तुम्हें कमज़ोरी (की स्थिति) से पैदा, फिर (बचपन की) कमज़ोरी के बाद शक्ति प्रदान की, फिर शक्ति के बाद कमज़ोरी और बुढ़ापा1 बना दिया। वह जो चाहता है, पैदा करता है। और वही सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
३०:५५
وَيَوْمَ और जिस दिन wayawma
और जिस दिन
تَقُومُ क़ायम होगी taqūmu
क़ायम होगी
ٱلسَّاعَةُ क़यामत l-sāʿatu
क़यामत
يُقْسِمُ क़समें खाऐंगे yuq'simu
क़समें खाऐंगे
ٱلْمُجْرِمُونَ मुजरिम l-muj'rimūna
मुजरिम
مَا नहीं
नहीं
لَبِثُوا۟ वो ठहरे labithū
वो ठहरे
غَيْرَ सिवाए ghayra
सिवाए
سَاعَةٍۢ ۚ एक घड़ी के sāʿatin
एक घड़ी के
كَذَٰلِكَ इसी तरह kadhālika
इसी तरह
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يُؤْفَكُونَ वो फेरे जाते yu'fakūna
वो फेरे जाते
٥٥ (55)
(55)
और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, अपराधी क़समें खाएँगें कि वे घड़ी भर1 से अधिक नहीं ठहरे। इसी तरह वे बहकाए जाते थे।
३०:५६
وَقَالَ और कहेंगे waqāla
और कहेंगे
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
أُوتُوا۟ दिए गए ūtū
दिए गए
ٱلْعِلْمَ इल्म l-ʿil'ma
इल्म
وَٱلْإِيمَـٰنَ और ईमान wal-īmāna
और ईमान
لَقَدْ अलबत्ता तहक़ीक़ laqad
अलबत्ता तहक़ीक़
لَبِثْتُمْ ठहरे रहे तुम labith'tum
ठहरे रहे तुम
فِى by
by
كِتَـٰبِ (the) Decree kitābi
(the) Decree
ٱللَّهِ अल्लाह की किताब में l-lahi
अल्लाह की किताब में
إِلَىٰ until ilā
until
يَوْمِ (the) Day yawmi
(the) Day
ٱلْبَعْثِ ۖ दोबारा उठने के दिन तक l-baʿthi
दोबारा उठने के दिन तक
فَهَـٰذَا तो ये है fahādhā
तो ये है
يَوْمُ दिन yawmu
दिन
ٱلْبَعْثِ दोबारा उठने का l-baʿthi
दोबारा उठने का
وَلَـٰكِنَّكُمْ और लेकिन तुम walākinnakum
और लेकिन तुम
كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम
لَا not
not
تَعْلَمُونَ ना तुम जानते taʿlamūna
ना तुम जानते
٥٦ (56)
(56)
तथा जिन लोगों को ज्ञान और ईमान दिया गया, वे कहेंगे कि तुम अल्लाह के लेख के अनुसार उठाए जाने के दिन तक ठहरे रहे। तो यह उठाए जाने का दिन है। लेकिन तुम नहीं जानते थे।
३०:५७
فَيَوْمَئِذٍۢ तो उस दिन fayawma-idhin
तो उस दिन
لَّا not
not
يَنفَعُ ना नफ़ा देगी yanfaʿu
ना नफ़ा देगी
ٱلَّذِينَ उनको जिन्होंने alladhīna
उनको जिन्होंने
ظَلَمُوا۟ ज़ुल्म किया ẓalamū
ज़ुल्म किया
مَعْذِرَتُهُمْ मअज़रत उनकी maʿdhiratuhum
मअज़रत उनकी
وَلَا और ना walā
और ना
هُمْ वो hum
वो
يُسْتَعْتَبُونَ वो तौबा तलब किए जाऐंगे yus'taʿtabūna
वो तौबा तलब किए जाऐंगे
٥٧ (57)
(57)
तो उस दिन, अत्याचारियों को उनका बहाना लाभ न देगा और न उनसे अल्लाह को खुश करने के लिए कहा जाएगा।
३०:५८
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
ضَرَبْنَا बयान की हमने ḍarabnā
बयान की हमने
لِلنَّاسِ लोगों के लिए lilnnāsi
लोगों के लिए
فِى in
in
هَـٰذَا this hādhā
this
ٱلْقُرْءَانِ इल क़ुरआन में l-qur'āni
इल क़ुरआन में
مِن of min
of
كُلِّ हर तरह की kulli
हर तरह की
مَثَلٍۢ ۚ मिसाल mathalin
मिसाल
وَلَئِن और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
جِئْتَهُم लाऐं आप उनके पास ji'tahum
लाऐं आप उनके पास
بِـَٔايَةٍۢ कोई निशानी biāyatin
कोई निशानी
لَّيَقُولَنَّ अलबत्ता ज़रूर कहेंगे layaqūlanna
अलबत्ता ज़रूर कहेंगे
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
كَفَرُوٓا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
إِنْ नहीं in
नहीं
أَنتُمْ हो तुम antum
हो तुम
إِلَّا मगर illā
मगर
مُبْطِلُونَ बातिल परस्त mub'ṭilūna
बातिल परस्त
٥٨ (58)
(58)
और निःसंदेह हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर तरह के उदाहरण बयान किए हैं और यदि आप उनके पास कोई निशानी लाएँ, तो निश्चय कुफ़्र करने वाले अवश्य कहेंगे कि तुम तो केवल मिथ्यावादी हो।
३०:५९
كَذَٰلِكَ इसी तरह kadhālika
इसी तरह
يَطْبَعُ मोहर लगा देता है yaṭbaʿu
मोहर लगा देता है
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
عَلَىٰ [on] ʿalā
[on]
قُلُوبِ दिलों पर qulūbi
दिलों पर
ٱلَّذِينَ उन लोगों के जो alladhīna
उन लोगों के जो
لَا (do) not
(do) not
يَعْلَمُونَ नहीं वो इल्म रखते yaʿlamūna
नहीं वो इल्म रखते
٥٩ (59)
(59)
इसी प्रकार, अल्लाह उन लोगों के दिलों पर मुहर लगा देता है, जो नहीं जानते।
३०:६०
فَٱصْبِرْ पस सब्र कीजिए fa-iṣ'bir
पस सब्र कीजिए
إِنَّ बेशक inna
बेशक
وَعْدَ वादा waʿda
वादा
ٱللَّهِ अल्लाह का l-lahi
अल्लाह का
حَقٌّۭ ۖ सच्चा है ḥaqqun
सच्चा है
وَلَا And (let) not walā
And (let) not
يَسْتَخِفَّنَّكَ और हरगिज़ ना हल्का पाऐं आपको yastakhiffannaka
और हरगिज़ ना हल्का पाऐं आपको
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
لَا (are) not
(are) not
يُوقِنُونَ नहीं वो यक़ीन रखते yūqinūna
नहीं वो यक़ीन रखते
٦٠ (60)
(60)
तो आप धैर्य से काम लें। निःसंदेह अल्लाह का वचन सत्य है और वे लोग आपको1 कदापि हल्का (अधीर) न कर दें, जो यक़ीन नहीं रखते।