२९
अल-अनकबूत
العنكبوت
सूरह अल-अनकबूत (العنكبوت) पवित्र क़ुरआन का २९ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ६९ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
२९:१
الٓمٓا ل مalif-lam-meem١
अलिफ़, लाम, मीम।
२९:२
أَحَسِبَक्या समझ लिया हैaḥasibaٱلنَّاسُलोगों नेl-nāsuأَنकिanيُتْرَكُوٓا۟वो छोड़ दिए जाऐंगेyut'rakūأَنये किanيَقُولُوٓا۟वो कह देंyaqūlūءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāوَهُمْऔर वोwahumلَاwill not be testedlāيُفْتَنُونَना वो आज़माए जाऐंगेyuf'tanūna٢
क्या लोगों ने यह समझ लिया है कि वे केवल यह कहने पर छोड़ दिए जाएँगे कि "हम ईमान लाए" और उनकी परीक्षा न ली जाएगी?
२९:३
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadفَتَنَّاआज़माया हमनेfatannāٱلَّذِينَउनको जोalladhīnaمِن(were) before themminقَبْلِهِمْ ۖउनसे पहले थेqablihimفَلَيَعْلَمَنَّपस अलबत्ता ज़रूर जान लेगाfalayaʿlamannaٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلَّذِينَउन लोगों को जिन्होंनेalladhīnaصَدَقُوا۟सच कहाṣadaqūوَلَيَعْلَمَنَّऔर अलबत्ता वो ज़रूर जान लेगाwalayaʿlamannaٱلْكَـٰذِبِينَझूठों कोl-kādhibīna٣
हालाँकि निःसंदेह हमने उन लोगों की परीक्षा ली जो इनसे पहले थे। अतः अल्लाह उन लोगों को अवश्य जान लेगा जिन्होंने सच कहा, तथा वह उन लोगों को (भी) अवश्य जान लेगा जो झूठे हैं।
२९:४
أَمْयाamحَسِبَसमझ लियाḥasibaٱلَّذِينَउन लोगों ने जोalladhīnaيَعْمَلُونَअमल करते हैंyaʿmalūnaٱلسَّيِّـَٔاتِबुरेl-sayiātiأَنकिanيَسْبِقُونَا ۚवो सबक़त ले जाऐंगे हमसेyasbiqūnāسَآءَकितना बुरा हैsāaمَاजोmāيَحْكُمُونَवो फ़ैसला कर रहे हैंyaḥkumūna٤
या उन लोगों ने जो बुरे काम करते हैं, यह समझ लिया है कि वे हमसे बचकर निकल जाएँगे? बुरा है जो वे निर्णय कर रहे हैं।
२९:५
مَنजो कोईmanكَانَहोkānaيَرْجُوا۟उम्मीद रखताyarjūلِقَآءَ(for the) meetingliqāaٱللَّهِअल्लाह से मुलाक़ात कीl-lahiفَإِنَّतो बेशकfa-innaأَجَلَमुक़र्ररह वक़्तajalaٱللَّهِअल्लाह काl-lahiلَـَٔاتٍۢ ۚअलबत्ता आने वाला हैlaātinوَهُوَऔर वोwahuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वाला हैl-samīʿuٱلْعَلِيمُख़ूब जानने वाला हैl-ʿalīmu٥
जो अल्लाह से मिलने1 की आशा रखता हो, तो निःसंदेह अल्लाह का नियत समय2 अवश्य आने वाला है। और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने3 वाला है।
२९:६
وَمَنऔर जो कोईwamanجَـٰهَدَजिहाद करेjāhadaفَإِنَّمَاतो बेशकfa-innamāيُجَـٰهِدُवो जिहाद करता हैyujāhiduلِنَفْسِهِۦٓ ۚअपने नफ़्स के लिएlinafsihiإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَغَنِىٌّअलबत्ता बहुत बेनियाज़ हैlaghaniyyunعَنِofʿaniٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों सेl-ʿālamīna٦
और जो व्यक्ति संघर्ष करता है, तो वह अपने ही लिए संघर्ष करता है। निश्चय अल्लाह सारे संसार से बड़ा बेपरवाह है।
२९:७
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiلَنُكَفِّرَنَّअलबत्ता हम ज़रूर दूर कर देंगेlanukaffirannaعَنْهُمْउनसेʿanhumسَيِّـَٔاتِهِمْबुराइयाँ उनकीsayyiātihimوَلَنَجْزِيَنَّهُمْऔर अलबत्ता हम ज़रूर बदला देंगे उन्हेंwalanajziyannahumأَحْسَنَबेहतरीनaḥsanaٱلَّذِىउसका जोalladhīكَانُوا۟थे वोkānūيَعْمَلُونَवो अमल करतेyaʿmalūna٧
तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, निश्चय हम उनसे उनकी बुराइयाँ अवश्य दूर कर देंगे तथा निश्चय उन्हें उस कार्य का उत्तम बदला अवश्य देंगे जो वे किया करते थे।
२९:८
وَوَصَّيْنَاऔर ताकीद की हमनेwawaṣṣaynāٱلْإِنسَـٰنَइन्सान कोl-insānaبِوَٰلِدَيْهِअपने वालिदैन के साथbiwālidayhiحُسْنًۭا ۖभलाई (करने) कीḥus'nanوَإِنऔर अगरwa-inجَـٰهَدَاكَवो दोनों ज़ोर डालें तुम परjāhadākaلِتُشْرِكَताकि तुम शरीक करोlitush'rikaبِىमेरे साथbīمَاउसको जोmāلَيْسَनहीं हैlaysaلَكَतुम्हेंlakaبِهِۦजिसकाbihiعِلْمٌۭकोई इल्मʿil'munفَلَاतो नाfalāتُطِعْهُمَآ ۚतुम इताअत करो उन दोनों कीtuṭiʿ'humāإِلَىَّमेरी ही तरफ़ilayyaمَرْجِعُكُمْलौटना है तुम्हाराmarjiʿukumفَأُنَبِّئُكُمतो मैं बताऊँगा तुम्हेंfa-unabbi-ukumبِمَاवो जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल किया करतेtaʿmalūna٨
और हमने मनुष्य को अपने माँ-बाप के साथ भलाई करने की ताकीद1 की है और यदि वे तुझपर ज़ोर डालें कि तू मेरे साथ उस चीज़ को साझी ठहराए, जिसका तुझको कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात न मान।2 तुम्हें मेरी ओर ही लौटकर आना है। फिर मैं तुम्हें बताऊँगा जो तुम किया करते थे।
२९:९
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiلَنُدْخِلَنَّهُمْअलबत्ता हम ज़रूर दाख़िल करेंगे उन्हेंlanud'khilannahumفِىamongfīٱلصَّـٰلِحِينَनेक लोगों मेंl-ṣāliḥīna٩
और जो लोग ईमान लाए तथा अच्छे कर्म किए, हम उन्हें अवश्य सदाचारियों में सम्मिलित करेंगे।
२९:१०
وَمِنَAnd ofwaminaٱلنَّاسِऔर लोगों में से कोई हैl-nāsiمَنजोmanيَقُولُकहता हैyaqūluءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiفَإِذَآफिर जबfa-idhāأُوذِىَवो अज़ियत दिया जाता हैūdhiyaفِىinfīٱللَّهِअल्लाह (की राह) मेंl-lahiجَعَلَवो बना लेता हैjaʿalaفِتْنَةَआज़माइश कोfit'nataٱلنَّاسِलोगों कीl-nāsiكَعَذَابِas (the) punishmentkaʿadhābiٱللَّهِअल्लाह के आज़ाब की तरहl-lahiوَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inجَآءَआ गईjāaنَصْرٌۭमददnaṣrunمِّنfromminرَّبِّكَआपके रब की तरफ़ सेrabbikaلَيَقُولُنَّअलबत्ता वो ज़रूर कहेंगेlayaqūlunnaإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हमkunnāمَعَكُمْ ۚसाथ तुम्हारेmaʿakumأَوَلَيْسَक्या भला नहींawalaysaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِأَعْلَمَख़ूब जानताbi-aʿlamaبِمَاउसे जोbimāفِى(is) infīصُدُورِसीनों में हैṣudūriٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों केl-ʿālamīna١٠
और लोगों में से कुछ ऐसे हैं, जो कहते हैं : हम अल्लाह पर ईमान लाए। फिर जब अल्लाह के मामले में उसे सताया जए, तो लोगों के सताने को अल्लाह की यातना के समान समझ लेता है। और निश्चय यदि आपके पालनहार की ओर से कोई सहायता आ जाए, तो निश्चय ज़रूर कहेंगे : हम तो तुम्हारे साथ थे। और क्या अल्लाह उसे अधिक जानने वाला नहीं, जो सारे संसार के दिलों में है?
२९:११
وَلَيَعْلَمَنَّऔर अलबत्ता ज़रूर जान लेगाwalayaʿlamannaٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلَّذِينَउनको जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَلَيَعْلَمَنَّऔर अलबत्ता वो ज़रूर जान लेगाwalayaʿlamannaٱلْمُنَـٰفِقِينَमुनाफ़िक़ों कोl-munāfiqīna١١
और निश्चय अल्लाह उन लोगों को अवश्य जान लेगा, जो ईमान लाए तथा निश्चय उन्हें भी अवश्य जान लेगा, जो मुनाफ़िक़ हैं।
२९:१२
وَقَالَऔर कहाwaqālaٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلِلَّذِينَउन लोगों से जोlilladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūٱتَّبِعُوا۟पैरवी करittabiʿūسَبِيلَنَاहमारे रास्ते कीsabīlanāوَلْنَحْمِلْऔर हम ज़रूर उठा लेंगेwalnaḥmilخَطَـٰيَـٰكُمْख़ताऐं तुम्हारीkhaṭāyākumوَمَاहालाँकि नहींwamāهُمवोhumبِحَـٰمِلِينَउठाने वालेbiḥāmilīnaمِنْofminخَطَـٰيَـٰهُمउनकी ख़ताओं में सेkhaṭāyāhumمِّنanyminشَىْءٍ ۖकोई चीज़shayinإِنَّهُمْबेशक वोinnahumلَكَـٰذِبُونَअलबत्ता झूठे हैंlakādhibūna١٢
और काफ़िरों ने उन लोगों से कहा जो ईमान लाए कि तुम हमारे पथ पर चलो और हम तुम्हारे पापों का बोझ उठा लेंगे। हालाँकि वे कदापि उनके पापों में से कुछ भी उठाने वाले नहीं हैं। बेशक वे निश्चय झूठे हैं।
२९:१३
وَلَيَحْمِلُنَّऔर अलबत्ता वो ज़रूर उठाऐंगेwalayaḥmilunnaأَثْقَالَهُمْबोझ अपनेathqālahumوَأَثْقَالًۭاऔर कई बोझwa-athqālanمَّعَसाथmaʿaأَثْقَالِهِمْ ۖअपने बोझों केathqālihimوَلَيُسْـَٔلُنَّऔर अलबत्ता वो ज़रूर पूछे जाऐंगेwalayus'alunnaيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiعَمَّاउस चीज़ के बारे में जोʿammāكَانُوا۟थे वोkānūيَفْتَرُونَवो गढ़ा करतेyaftarūna١٣
और निश्चय वे अवश्य अपने बोझ उठाएँगे और अपने बोझों के साथ कई और1 बोझ भी। और निश्चय वे क़ियामत के दिन उसके बारे में अवश्य पूछे जाएँगे, जो वे झूठ गढ़ा करते थे।
२९:१४
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāنُوحًاनूह कोnūḥanإِلَىٰtoilāقَوْمِهِۦतरफ़ उसकी क़ौम केqawmihiفَلَبِثَतो वो रहाfalabithaفِيهِمْउनमेंfīhimأَلْفَएक हज़ारalfaسَنَةٍसालsanatinإِلَّاमगरillāخَمْسِينَपचासkhamsīnaعَامًۭاसाल (कम)ʿāmanفَأَخَذَهُمُतो पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhahumuٱلطُّوفَانُतूफ़ान नेl-ṭūfānuوَهُمْजबकि वेwahumظَـٰلِمُونَज़ालिम थेẓālimūna١٤
और निःसंदेह हमने1 नूह़ को उसकी जाति की ओर भेजा, तो वह उनके बीच पचास वर्ष कम हज़ार वर्ष2 रहा। फिर उन्हें तूफ़ान ने पकड़ लिया इस स्थिति में कि वे अत्याचारी थे।
२९:१५
فَأَنجَيْنَـٰهُतो निजात दी हमने उसेfa-anjaynāhuوَأَصْحَـٰبَand (the) peoplewa-aṣḥābaٱلسَّفِينَةِऔर कश्ती वालों कोl-safīnatiوَجَعَلْنَـٰهَآऔर बना दिया हमने उसेwajaʿalnāhāءَايَةًۭएक निशानीāyatanلِّلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों के लिएlil'ʿālamīna١٥
फिर हमने उसे और नाव वालों को बचा लिया और उस (नाव) को सारे संसार के लिए एक निशानी बना दिया।
२९:१६
وَإِبْرَٰهِيمَऔर इब्राहीम कोwa-ib'rāhīmaإِذْजबidhقَالَउसने कहाqālaلِقَوْمِهِअपनी क़ौम सेliqawmihiٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَٱتَّقُوهُ ۖऔर डरो उससेwa-ittaqūhuذَٰلِكُمْयेdhālikumخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumتَعْلَمُونَतुम जानतेtaʿlamūna١٦
तथा इबराहीम को (याद करो) जब उसने अपनी जाति से कहा : अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानते हो।
२९:१७
إِنَّمَاबेशकinnamāتَعْبُدُونَतुम इबादत करते होtaʿbudūnaمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiأَوْثَـٰنًۭاकुछ बुतों कीawthānanوَتَخْلُقُونَऔर तुम गढ़ते होwatakhluqūnaإِفْكًا ۚझूटif'kanإِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जिनकीalladhīnaتَعْبُدُونَतुम इबादत करते होtaʿbudūnaمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiلَا(do) notlāيَمْلِكُونَनहीं वो मालिक हो सकतेyamlikūnaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumرِزْقًۭاरिज़्क़ केriz'qanفَٱبْتَغُوا۟पस तलाश करोfa-ib'taghūعِندَfromʿindaٱللَّهِअल्लाह के पासl-lahiٱلرِّزْقَरिज़्क़l-riz'qaوَٱعْبُدُوهُऔर इबादत करो उसकीwa-uʿ'budūhuوَٱشْكُرُوا۟और शुक्र अदा करोwa-ush'kurūلَهُۥٓ ۖउसकाlahuإِلَيْهِतरफ़ उसी केilayhiتُرْجَعُونَतुम लौटाए जाओगेtur'jaʿūna١٧
तुम अल्लाह के सिवा कुछ मूर्तियों ही की तो पूजा करते हो और तुम घोर झूठ गढ़ते हो। निःसंदेह अल्लाह के सिवा जिनकी तुम पूजा करते हो, वे तुम्हारे लिए किसी रोज़ी के मालिक नहीं हैं। अतः तुम अल्लाह के पास ही रोज़ी तलाश करो और उसकी इबादत करो और उसका शुक्र करो। तुम उसी की तरफ़ लौटाए जाओगे।
२९:१८
وَإِنऔर अगरwa-inتُكَذِّبُوا۟तुम झुठलाते होtukadhibūفَقَدْपस तहक़ीक़faqadكَذَّبَझुठलायाkadhabaأُمَمٌۭउम्मतों नेumamunمِّنbefore youminقَبْلِكُمْ ۖजो तुम से पहले थींqablikumوَمَاऔर नहींwamāعَلَى(is) onʿalāٱلرَّسُولِरसूल परl-rasūliإِلَّاमगरillāٱلْبَلَـٰغُपहुँचा देनाl-balāghuٱلْمُبِينُवाज़ेह तौर परl-mubīnu١٨
और यदि तुम झुठलाते हो, तो तुमसे पहले (भी) बहुत-से समुदायों ने झुठलाया है और रसूल का दायित्व1 स्पष्ट रूप से पहुँचा देने के सिवा कुछ नहीं है।
२९:१९
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَرَوْا۟उन्होंने देखाyarawكَيْفَकिस तरहkayfaيُبْدِئُइब्तिदा करता हैyub'di-uٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْخَلْقَमख़लूक़ कीl-khalqaثُمَّफिरthummaيُعِيدُهُۥٓ ۚवो एआदा करेगा उसकाyuʿīduhuإِنَّबेशकinnaذَٰلِكَयेdhālikaعَلَىforʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiيَسِيرٌۭबहुत आसान हैyasīrun١٩
क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह किस प्रकार सृष्टि का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराएगा? निश्चय ही यह अल्लाह के लिए अत्यंत सरल है।
२९:२०
قُلْकह दीजिएqulسِيرُوا۟चलो-फिरोsīrūفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَٱنظُرُوا۟फिर देखोfa-unẓurūكَيْفَकिस तरहkayfaبَدَأَउसने इब्तिदा कीbada-aٱلْخَلْقَ ۚमख़लूक़ कीl-khalqaثُمَّफिरthummaٱللَّهُअल्लाहl-lahuيُنشِئُवो उठाएगाyunshi-uٱلنَّشْأَةَउठानाl-nashataٱلْـَٔاخِرَةَ ۚआख़िरी बारl-ākhirataإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत रखना वाला हैqadīrun٢٠
कह दें : धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि उसने किस प्रकार सृष्टि का आरंभ किया? फिर अल्लाह ही दूसरी बार पैदा1 करेगा। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु पर सर्वशक्तिमान है।
२९:२१
يُعَذِّبُवो अज़ाब देता हैyuʿadhibuمَنजिसेmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuوَيَرْحَمُऔर वो रहम करता हैwayarḥamuمَنजिस परmanيَشَآءُ ۖवो चाहता हैyashāuوَإِلَيْهِऔर उसी की तरफ़wa-ilayhiتُقْلَبُونَतुम लौटाए जाओगेtuq'labūna٢١
वह जिसे चाहता है, दंड देता है और जिसपर चाहता है दया करता है, और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
२९:२२
وَمَآऔर नहींwamāأَنتُمतुमantumبِمُعْجِزِينَआजिज़ करने वालेbimuʿ'jizīnaفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَلَاऔर नाwalāفِىinfīٱلسَّمَآءِ ۖआसमान मेंl-samāiوَمَاऔर नहींwamāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمِنanyminوَلِىٍّۢकोई दोस्तwaliyyinوَلَاऔर नाwalāنَصِيرٍۢकोई मददगारnaṣīrin٢٢
और न तुम किसी भी तरह धरती में विवश करने वाले हो और न आकाश में, और न अल्लाह के अलावा तुम्हारा कोई दोस्त है और न कोई मददगार।
२९:२३
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِـَٔايَـٰتِin (the) Signsbiāyātiٱللَّهِअल्लाह की आयात काl-lahiوَلِقَآئِهِۦٓऔर उसकी मुलाक़ात काwaliqāihiأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaيَئِسُوا۟जो मायूस हो गएya-isūمِنofminرَّحْمَتِىमेरी रहमत सेraḥmatīوَأُو۟لَـٰٓئِكَऔर यही लग हैंwa-ulāikaلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٢٣
तथा जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों और उससे मिलने का इनकार किया, वे मेरी दया से निराश हो गए हैं और वही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक यातना है।
२९:२४
فَمَاतो नाfamāكَانَथाkānaجَوَابَजवाबjawābaقَوْمِهِۦٓउसकी क़ौम काqawmihiإِلَّآमगरillāأَنये किanقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūٱقْتُلُوهُक़त्ल कर दो उसेuq'tulūhuأَوْयाawحَرِّقُوهُजला डालो उसेḥarriqūhuفَأَنجَىٰهُतो निजात दी उसेfa-anjāhuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِنَfromminaٱلنَّارِ ۚआग सेl-nāriإِنَّबेशकinnaفِىinfīذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيُؤْمِنُونَजो ईमान लाते हैंyu'minūna٢٤
फिर उस (इबराहीम) की जाति का उत्तर बस यही था कि उन्होंने कहा कि इसे क़त्ल कर दो, या इसे जला दो। तो अल्लाह ने उसे आग से बचा लिया। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं जो ईमान रखते हैं।
२९:२५
وَقَالَऔर उसने कहाwaqālaإِنَّمَاबेशकinnamāٱتَّخَذْتُمबना लिया तुमनेittakhadhtumمِّنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiأَوْثَـٰنًۭاबुतों कोawthānanمَّوَدَّةَमोहब्बत का ज़रियाmawaddataبَيْنِكُمْआपस मेंbaynikumفِىinfīٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी मेंl-ḥayatiٱلدُّنْيَا ۖदुनिया कीl-dun'yāثُمَّफिरthummaيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiيَكْفُرُइन्कार करेगाyakfuruبَعْضُكُمबाज़ तुम्हाराbaʿḍukumبِبَعْضٍۢबाज़ काbibaʿḍinوَيَلْعَنُऔर लानत करेगाwayalʿanuبَعْضُكُمबाज़ तुम्हाराbaʿḍukumبَعْضًۭاबाज़ कोbaʿḍanوَمَأْوَىٰكُمُऔर ठिकाना तुम्हाराwamawākumuٱلنَّارُआग हैl-nāruوَمَاऔर नहींwamāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنanyminنَّـٰصِرِينَकोई मददगारnāṣirīna٢٥
और उसने कहा : बात यही है कि तुमने अल्लाह के सिवा मूर्तियाँ बना रखी हैं, दुनिया के जीवन में पारस्परिक दोस्ती के कारण। फिर क़ियामत के दिन तुम एक-दूसरे का इनकार करोगे तथा तुम एक-दूसरे पर ला'नत करोगे। और तुम्हारा ठिकाना आग ही है और तुम्हारे लिए कोई मदद करने वाले नहीं।
२९:२६
۞ فَـَٔامَنَतो ईमान लायाfaāmanaلَهُۥउस परlahuلُوطٌۭ ۘलूतlūṭunوَقَالَऔर उसने कहाwaqālaإِنِّىबेशकinnīمُهَاجِرٌहिजरत करने वाला हूँmuhājirunإِلَىٰtoilāرَبِّىٓ ۖतरफ़ अपने रब केrabbīإِنَّهُۥबेशक वोinnahuهُوَवो ही हैhuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वाला हैl-ḥakīmu٢٦
तो लूत1 उसपर ईमान ले आया। और उस (इबराहीम) ने कहा : निःसंदेह मैं अपने रब2 की ओर हिजरत करने वाला हूँ। निश्चय वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
२९:२७
وَوَهَبْنَاऔर अता कर दिया हमनेwawahabnāلَهُۥٓउसेlahuإِسْحَـٰقَइस्हाक़is'ḥāqaوَيَعْقُوبَऔर याक़ूबwayaʿqūbaوَجَعَلْنَاऔर रख दी हमनेwajaʿalnāفِىinfīذُرِّيَّتِهِउसकी औलाद मेंdhurriyyatihiٱلنُّبُوَّةَनुबूव्वतl-nubuwataوَٱلْكِتَـٰبَऔर किताबwal-kitābaوَءَاتَيْنَـٰهُऔर अता किया हमने उसेwaātaynāhuأَجْرَهُۥअजर उसकाajrahuفِىinfīٱلدُّنْيَا ۖदुनिया मेंl-dun'yāوَإِنَّهُۥऔर बेशक वोwa-innahuفِىinfīٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiلَمِنَ(is) surely, amonglaminaٱلصَّـٰلِحِينَअलबत्ता सालेह लोगों में से हैl-ṣāliḥīna٢٧
और हमने उसे इसह़ाक़ तथा याक़ूब प्रदान किया। तथा हमने उसकी संतान में नुबुव्वत तथा किताब रख दी। और हमने उसे दुनिया में उसका बदला दिया और निःसंदेह वह आख़िरत में निश्चय नेक लोगों में से है।
२९:२८
وَلُوطًاऔर लूत कोwalūṭanإِذْजबidhقَالَउसने कहाqālaلِقَوْمِهِۦٓअपनी क़ौम सेliqawmihiإِنَّكُمْबेशक तुमinnakumلَتَأْتُونَअलबत्ता तुम आते होlatatūnaٱلْفَـٰحِشَةَबेहयाई कोl-fāḥishataمَاनहींmāسَبَقَكُمसबक़त की तुम परsabaqakumبِهَاसाथ इसकेbihāمِنْanyminأَحَدٍۢकिसी एक नेaḥadinمِّنَfromminaٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों में सेl-ʿālamīna٢٨
तथा लूत को (याद करो) जब उसने अपनी जाति से कहा : तुम तो वह निर्लज्जता का कार्य करते हो, जो तुमसे पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया।
२९:२९
أَئِنَّكُمْक्या बेशक तुमa-innakumلَتَأْتُونَअलबत्ता तुम आते होlatatūnaٱلرِّجَالَमर्दों कोl-rijālaوَتَقْطَعُونَऔर तुम काटते होwataqṭaʿūnaٱلسَّبِيلَरास्तेl-sabīlaوَتَأْتُونَऔर तुम आते होwatatūnaفِىinfīنَادِيكُمُअपनी मजलिसों मेंnādīkumuٱلْمُنكَرَ ۖबुरे कामों कोl-munkaraفَمَاतो नाfamāكَانَथाkānaجَوَابَजवाबjawābaقَوْمِهِۦٓउसकी क़ौम काqawmihiإِلَّآमगरillāأَنये किanقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūٱئْتِنَاले आ हम परi'tināبِعَذَابِअज़ाबbiʿadhābiٱللَّهِअल्लाह काl-lahiإِنअगरinكُنتَहै तूkuntaمِنَofminaٱلصَّـٰدِقِينَसच्चों में सेl-ṣādiqīna٢٩
क्या तुम सचमुच पुरुषों के पास जाते हो और (यात्रियों का) रास्ता काटते हो तथा अपनी सभा में बुरे काम करते हो? तो उसकी जाति का उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा : हम पर अल्लाह की यातना ले आ, यदि तू सच्चा है।
२९:३०
قَالَकहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱنصُرْنِىमदद फ़रमा मेरीunṣur'nīعَلَىऊपरʿalāٱلْقَوْمِइन लोगों केl-qawmiٱلْمُفْسِدِينَजो मुफ़सिद हैंl-muf'sidīna٣٠
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इन बिगाड़ पैदा करने वाले लोगों के विरुद्ध मेरी सहायता कर।
२९:३१
وَلَمَّاऔर जबwalammāجَآءَتْआएjāatرُسُلُنَآभेजे हुए(फ़रिश्ते)हमारेrusulunāإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम के पासib'rāhīmaبِٱلْبُشْرَىٰख़ुशख़बरी लेकरbil-bush'rāقَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūإِنَّاबेशक हमinnāمُهْلِكُوٓا۟हलाक करने वाले हैंmuh'likūأَهْلِरहने वालों कोahliهَـٰذِهِइसhādhihiٱلْقَرْيَةِ ۖबस्ती केl-qaryatiإِنَّबेशकinnaأَهْلَهَاइसके रहने वालेahlahāكَانُوا۟हैं वोkānūظَـٰلِمِينَज़ालिमẓālimīna٣١
और जब हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) इबराहीम के पास शुभ-सूचना लेकर आए, तो उन्होंने कहा : निश्चय हम इस बस्ती के वासियों को विनष्ट करने वाले हैं। निःसंदेह इसके निवासी अत्याचारी रहे हैं।
२९:३२
قَالَइब्राहीम ने कहाqālaإِنَّबेशकinnaفِيهَاइसमेंfīhāلُوطًۭا ۚलूत हैlūṭanقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūنَحْنُहमnaḥnuأَعْلَمُज़्यादा जानते हैंaʿlamuبِمَنउसे जोbimanفِيهَا ۖइस में हैfīhāلَنُنَجِّيَنَّهُۥअलबत्ता हम ज़रूर निजात देंगे उसेlanunajjiyannahuوَأَهْلَهُۥٓऔर उसके घर वालों कोwa-ahlahuإِلَّاसिवाएillāٱمْرَأَتَهُۥउसकी बीवी केim'ra-atahuكَانَتْहै वोkānatمِنَ(is) ofminaٱلْغَـٰبِرِينَपीछे रहने वालों में सेl-ghābirīna٣٢
उसने कहा : उसमें तो लूत है। उन्होंने कहा : हम उसे अधिक जानने वाले हैं, जो उसमें है। निश्चय हम उसे और उसके घर वालों को अवश्य बचा लेंगे, सिवाय उसकी पत्नी के। वह पीछे रहने वालों में से है।
२९:३३
وَلَمَّآऔर जबwalammāأَنये किanجَآءَتْआ गएjāatرُسُلُنَاभेजे हुए(फ़रिश्ते)हमारेrusulunāلُوطًۭاलूत के पासlūṭanسِىٓءَवो परेशान हुआsīaبِهِمْउनसेbihimوَضَاقَऔर वो तंग हुआwaḍāqaبِهِمْउनसेbihimذَرْعًۭاदिल मेंdharʿanوَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūلَا(Do) notlāتَخَفْना तुम डरोtakhafوَلَاऔर नाwalāتَحْزَنْ ۖतुम ग़म करोtaḥzanإِنَّاबेशक हमinnāمُنَجُّوكَनिजात देने वाले हैं तुझेmunajjūkaوَأَهْلَكَऔर तेरे घर वालों कोwa-ahlakaإِلَّاसिवाएillāٱمْرَأَتَكَतेरी बीवी केim'ra-atakaكَانَتْहै वोkānatمِنَ(is) ofminaٱلْغَـٰبِرِينَपीछे रहने वालों में सेl-ghābirīna٣٣
और जब हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) लूत के पास आए, तो वह उनके आने से उदास हुआ और उनके कारण उसका मन व्याकुल1 हो गया। और उन्होंने कहा : न डरो और न शोक करो। निःसंदेह हम तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को बचाने वाले हैं, सिवाय तुम्हारी पत्नी के, वह पीछो रह जाने वालों में से है।
२९:३४
إِنَّاबेशक हमinnāمُنزِلُونَनाज़िल करने वाले हैंmunzilūnaعَلَىٰٓऊपरʿalāأَهْلِरहने वालों केahliهَـٰذِهِइसhādhihiٱلْقَرْيَةِबस्ती केl-qaryatiرِجْزًۭاएक अज़ाबrij'zanمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiبِمَاबवजह उसके जोbimāكَانُوا۟थे वोkānūيَفْسُقُونَवो नाफ़रमानी करतेyafsuqūna٣٤
निःसंदेह हम इस बस्ती वालों पर आकाश से एक यातना उतारने वाले हैं, इस कारण कि वे अवज्ञा किया करते थे।
२९:३५
وَلَقَدऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadتَّرَكْنَاछोड़ दी हमनेtaraknāمِنْهَآइसमेंmin'hāءَايَةًۢएक निशानीāyatanبَيِّنَةًۭखुलीbayyinatanلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيَعْقِلُونَजो अक़्ल रखते हैंyaʿqilūna٣٥
तथा निःसंदेह हमने उससे उन लोगों के लिए एक स्पष्ट निशानी छोड़ दी, जो समझ-बूझ रखते हैं।
२९:३६
وَإِلَىٰऔर तरफ़wa-ilāمَدْيَنَमदयन केmadyanaأَخَاهُمْउनके भाईakhāhumشُعَيْبًۭاशुऐब को(भेजा)shuʿaybanفَقَالَतो उसने कहाfaqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَٱرْجُوا۟और उम्मीद रखोwa-ir'jūٱلْيَوْمَthe Dayl-yawmaٱلْـَٔاخِرَआख़िरी दिन कीl-ākhiraوَلَاऔर नाwalāتَعْثَوْا۟तुम फ़साद करोtaʿthawفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiمُفْسِدِينَमुफ़सिद बन करmuf'sidīna٣٦
तथा मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को (भेजा), तो उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो तथा आख़िरत के दिन1 की आशा रखो और धरती में बिगाड़ पैदा करने वाले बनकर उपद्रव न मचाओ।
२९:३७
فَكَذَّبُوهُतो उन्होंने झुठला दिया उसेfakadhabūhuفَأَخَذَتْهُمُतो पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhathumuٱلرَّجْفَةُएक ज़लज़ले नेl-rajfatuفَأَصْبَحُوا۟तो सुबह की उन्होंनेfa-aṣbaḥūفِىinfīدَارِهِمْअपने घरों मेंdārihimجَـٰثِمِينَघुटनों के बल गिरने वालेjāthimīna٣٧
तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अंततः उन्हें भूकंप ने पकड़ लिया, फिर वे अपने घरों में औंधे मुँह पड़े रह गए।
२९:३८
وَعَادًۭاऔर आदwaʿādanوَثَمُودَا۟और समूद को (हलाक किया)wathamūdāوَقَدऔर तहक़ीक़waqadتَّبَيَّنَवाज़ेह हो गई (हालत)tabayyanaلَكُمतुम परlakumمِّنfromminمَّسَـٰكِنِهِمْ ۖउनके घरों सेmasākinihimوَزَيَّنَऔर मुज़य्यन कर दिएwazayyanaلَهُمُउनके लिएlahumuٱلشَّيْطَـٰنُशैतान नेl-shayṭānuأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahumفَصَدَّهُمْतो उसने रोक दिया उन्हेंfaṣaddahumعَنِfromʿaniٱلسَّبِيلِरास्ते सेl-sabīliوَكَانُوا۟और थे वोwakānūمُسْتَبْصِرِينَबहुत देखने वाले / समझदारmus'tabṣirīna٣٨
तथा हमने आद और समूद को भी विनष्ट कर दिया और उनके आवासों से तुम्हारे लिए (उनका विनाश) स्पष्ट हो चुका है। और शैतान ने उनके लिए उनके कर्मों को शोभनीय बना दिया था। अतः उसने उन्हें सीधे रास्ते से रोक दिया था, हालाँकि वे बहुत समझ-बूझ वाले थे।
२९:३९
وَقَـٰرُونَऔर क़ारूनwaqārūnaوَفِرْعَوْنَऔर फ़िरऔनwafir'ʿawnaوَهَـٰمَـٰنَ ۖऔर हामानwahāmānaوَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَآءَهُمआए उनके पासjāahumمُّوسَىٰमूसाmūsāبِٱلْبَيِّنَـٰتِसाथ वाज़ेह निशानियों केbil-bayinātiفَٱسْتَكْبَرُوا۟तो उन्होंने तकब्बुर कियाfa-is'takbarūفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَمَاऔर नाwamāكَانُوا۟थे वोkānūسَـٰبِقِينَभाग जाने वाले (हमसे)sābiqīna٣٩
तथा क़ारून और फ़िरऔन और हामान को (विनष्ट किया) और निःसंदेह उनके पास मूसा खुली निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने धरती में अभिमान किया और वे बच निकलने1 वाले न थे।
२९:४०
فَكُلًّاतो हर एक कोfakullanأَخَذْنَاपकड़ लिया हमनेakhadhnāبِذَنۢبِهِۦ ۖबवजह उसके गुनाह केbidhanbihiفَمِنْهُمतो उनमें से कोई हैfamin'humمَّنْजोmanأَرْسَلْنَاभेजी हमनेarsalnāعَلَيْهِजिस परʿalayhiحَاصِبًۭاपत्थरों की आँधीḥāṣibanوَمِنْهُمऔर उनमें से कोई हैwamin'humمَّنْजोmanأَخَذَتْهُपकड़ लिया उसकोakhadhathuٱلصَّيْحَةُचिंघाड़ नेl-ṣayḥatuوَمِنْهُمऔर उनमें से कोई हैwamin'humمَّنْजोmanخَسَفْنَاधँसा दिया हमनेkhasafnāبِهِसाथ उसकेbihiٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaوَمِنْهُمऔर उनमें से कोई हैwamin'humمَّنْजिसेmanأَغْرَقْنَا ۚग़र्क़ कर दिया हमनेaghraqnāوَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِيَظْلِمَهُمْकि वो ज़ुल्म करे उन परliyaẓlimahumوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinكَانُوٓا۟थे वोkānūأَنفُسَهُمْअपनी ही जानों परanfusahumيَظْلِمُونَवो ज़ुल्म करतेyaẓlimūna٤٠
तो हमने हर एक को उसके पाप के कारण पकड़ लिया। फिर उनमें से कुछ पर हमने पथराव करने वाली हवा1 भेजी, और उनमें से कुछ को चीख2 ने पकड़ लिया, और उनमें से कुछ को हमने धरती में धँसा3 दिया और उनमें से कुछ को हमने डुबो4 दिया। तथा अल्लाह ऐसा नहीं था कि उनपर अत्याचार करे, परंतु वे स्वयं अपने आपपर अत्याचार करते थे।
२९:४१
مَثَلُमिसालmathaluٱلَّذِينَउनकी जिन्होंनेalladhīnaٱتَّخَذُوا۟बना लिएittakhadhūمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiأَوْلِيَآءَकुछ वली/ दोस्तawliyāaكَمَثَلِमानिन्द मिसालkamathaliٱلْعَنكَبُوتِएक मकड़ी के हैl-ʿankabūtiٱتَّخَذَتْजिसने बना लियाittakhadhatبَيْتًۭا ۖएक घरbaytanوَإِنَّऔर बेशकwa-innaأَوْهَنَसब से कमज़ोरawhanaٱلْبُيُوتِघरों मेंl-buyūtiلَبَيْتُअलबत्ता घर हैlabaytuٱلْعَنكَبُوتِ ۖमकड़ी काl-ʿankabūtiلَوْकाश किlawكَانُوا۟होते वोkānūيَعْلَمُونَवो इल्म रखतेyaʿlamūna٤١
उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने अल्लाह के सिवा अन्य संरक्षक बना रखे हैं, मकड़ी के उदाहरण जैसा है, जिसने एक घर बनाया। हालाँकि, निःसंदेह सब घरों से कमज़ोर1 तो मकड़ी का घर है, अगर वे जानते होते।
२९:४२
إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजिसेmāيَدْعُونَवो पुकारते हैंyadʿūnaمِنbesides Himminدُونِهِۦउसके सिवाdūnihiمِنanyminشَىْءٍۢ ۚकिसी भी चीज़ कोshayinوَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वालाl-ḥakīmu٤٢
निश्चय ही अल्लाह जानता है जिसे वे उसे छोड़कर पुकारते हैं कोई भी चीज़ हो, और वही सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
२९:४३
وَتِلْكَऔर येwatil'kaٱلْأَمْثَـٰلُमिसालें हैंl-amthāluنَضْرِبُهَاहम बयान करते हैं उन्हेंnaḍribuhāلِلنَّاسِ ۖलोगों के लिएlilnnāsiوَمَاऔर नहींwamāيَعْقِلُهَآसमझते उन्हेंyaʿqiluhāإِلَّاमगरillāٱلْعَـٰلِمُونَइल्म रखने वालेl-ʿālimūna٤٣
और ये उदाहरण हैं, जो हम लोगों के लिए प्रस्तुत करते हैं और इन्हें केवल जानने वाले ही समझते हैं।
२९:४४
خَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों कोl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaبِٱلْحَقِّ ۚसाथ हक़ केbil-ḥaqiإِنَّयक़ीननinnaفِىinfīذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَةًۭअलबत्ता एक निशानी हैlaāyatanلِّلْمُؤْمِنِينَईमान लाने वालों के लिएlil'mu'minīna٤٤
अल्लाह ने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया। निःसंदेह इसमें ईमान वालों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।1
२९:४५
ٱتْلُतिलावत कीजिएut'luمَآजोmāأُوحِىَवही किया गयाūḥiyaإِلَيْكَआपकी तरफ़ilaykaمِنَofminaٱلْكِتَـٰبِकिताब में सेl-kitābiوَأَقِمِऔर क़ायम कीजिएwa-aqimiٱلصَّلَوٰةَ ۖनमाज़l-ṣalataإِنَّबेशकinnaٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataتَنْهَىٰरोकती हैtanhāعَنِfromʿaniٱلْفَحْشَآءِबेहयाई सेl-faḥshāiوَٱلْمُنكَرِ ۗऔर बुराई सेwal-munkariوَلَذِكْرُऔर अलबत्ता ज़िक्रwaladhik'ruٱللَّهِअल्लाह काl-lahiأَكْبَرُ ۗसबसे बड़ा हैakbaruوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजो कुछmāتَصْنَعُونَतुम करते होtaṣnaʿūna٤٥
आप उस पुस्तक को पढ़ें, जो आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है तथा नमाज़ क़ायम करें। निःसंदेह नमाज़ निर्लज्जता और बुराई से रोकती है। और निश्चय अल्लाह का स्मरण सबसे बड़ा है और अल्लाह जानता है1, जो कुछ तुम करते हो।
२९:४६
۞ وَلَاऔर नाwalāتُجَـٰدِلُوٓا۟तुम झगड़ा करोtujādilūأَهْلَ(with the) People of the Bookahlaٱلْكِتَـٰبِअहले किताब सेl-kitābiإِلَّاमगरillāبِٱلَّتِىउस तरीक़े से जोbi-allatīهِىَवोhiyaأَحْسَنُसबसे अच्छा हैaḥsanuإِلَّاसिवाएillāٱلَّذِينَउनके जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūمِنْهُمْ ۖउनमें सेmin'humوَقُولُوٓا۟और कहोwaqūlūءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِٱلَّذِىٓउस पर जोbi-alladhīأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْنَاहमारी तरफ़ilaynāوَأُنزِلَऔर नाज़िल किया गयाwa-unzilaإِلَيْكُمْतुम्हारी तरफ़ilaykumوَإِلَـٰهُنَاऔर इलाह हमाराwa-ilāhunāوَإِلَـٰهُكُمْऔर इलाह तुम्हाराwa-ilāhukumوَٰحِدٌۭएक ही हैwāḥidunوَنَحْنُऔर हमwanaḥnuلَهُۥउसी केlahuمُسْلِمُونَफ़रमाबरदार हैंmus'limūna٤٦
और तुम किताब वालों1 से केवल ऐसे तरीक़े से वाद-विवाद करो, जो सबसे उत्तम हो, सिवाय उन लोगों के जिन्होंने उनमें से ज़ुल्म किया। तथा तुम कहो : हम ईमान लाए उसपर, जो हमारी ओर उतारा गया और तुम्हारी ओर उतारा गया, तथा हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य एक ही है2 और हम उसी के आज्ञाकारी हैं।3
२९:४७
وَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaأَنزَلْنَآनाज़िल की हमनेanzalnāإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaٱلْكِتَـٰبَ ۚकिताबl-kitābaفَٱلَّذِينَपस वो लोग जोfa-alladhīnaءَاتَيْنَـٰهُمُदी हमने उन्हेंātaynāhumuٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaيُؤْمِنُونَवो ईमान लाते हैंyu'minūnaبِهِۦ ۖउस परbihiوَمِنْAnd amongwaminهَـٰٓؤُلَآءِऔर उनमें से भी हैंhāulāiمَنजोmanيُؤْمِنُईमान लाते हैंyu'minuبِهِۦ ۚइस परbihiوَمَاऔर नहींwamāيَجْحَدُइन्कार करतेyajḥaduبِـَٔايَـٰتِنَآहमारी आयात काbiāyātināإِلَّاमगरillāٱلْكَـٰفِرُونَजो काफ़िर हैंl-kāfirūna٤٧
और इसी प्रकार, हमने आपकी ओर यह पुस्तक उतारी है। तो जिन लोगों को हमने (आपसे पहले) पुस्तक प्रदान की है, वे इसपर ईमान लाते हैं।1 और इन (मुश्रिकों) में से भी कुछ2 ऐसे हैं, जो इस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं। और हमारी आयतों का इनकार वही लोग करते हैं, जो काफ़िर हैं।
२९:४८
وَمَاऔर नाwamāكُنتَथे आपkuntaتَتْلُوا۟आप पढ़तेtatlūمِنbefore itminقَبْلِهِۦइससे पहलेqablihiمِنanyminكِتَـٰبٍۢकोई किताबkitābinوَلَاऔर नाwalāتَخُطُّهُۥआप लिखते थे उसेtakhuṭṭuhuبِيَمِينِكَ ۖअपने दाऐं हाथ सेbiyamīnikaإِذًۭاतबidhanلَّٱرْتَابَअलबत्ता शक में पड़ जातेla-ir'tābaٱلْمُبْطِلُونَबातिल परस्तl-mub'ṭilūna٤٨
और आप इससे पहले न कोई पुस्तक पढ़ते थे और न उसे अपने दाहिने हाथ से लिखते थे। (यदि ऐसा होता) तो असत्यवादी अवश्य संदेह करते।1
२९:४९
بَلْबल्किbalهُوَवोhuwaءَايَـٰتٌۢआयात हैंāyātunبَيِّنَـٰتٌۭवाज़ेहbayyinātunفِىinfīصُدُورِसीनों मेंṣudūriٱلَّذِينَउन लोगों के जोalladhīnaأُوتُوا۟दिए गएūtūٱلْعِلْمَ ۚइल्मl-ʿil'maوَمَاऔर नहींwamāيَجْحَدُइन्कार करतेyajḥaduبِـَٔايَـٰتِنَآहमारी आयात काbiāyātināإِلَّاमगरillāٱلظَّـٰلِمُونَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimūna٤٩
बल्कि यह (क़ुरआन) स्पष्ट आयतें हैं, उन लोगों के सीनों में जिन्हें ज्ञान दिया गया है तथा हमारी आयतों का इनकार वही लोग करते हैं, जो अत्याचारी हैं।
२९:५०
وَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūلَوْلَآक्यों नहींlawlāأُنزِلَउतारी गईंunzilaعَلَيْهِउस परʿalayhiءَايَـٰتٌۭनिशानियाँāyātunمِّنfromminرَّبِّهِۦ ۖउसके रब की तरफ़ सेrabbihiقُلْकह दीजिएqulإِنَّمَاबेशकinnamāٱلْـَٔايَـٰتُनिशानियाँl-āyātuعِندَपास हैंʿindaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَإِنَّمَآऔर बेशकwa-innamāأَنَا۠मैं तोanāنَذِيرٌۭडराने वाला हूँnadhīrunمُّبِينٌखुल्लम-खुल्लाmubīnun٥٠
तथा उन्होंने कहा : उसपर उसके पालनहार की ओर से निशानियाँ क्यों नहीं उतारी गईं? आप कह दें : निशानियाँ तो अल्लाह ही के पास1 हैं और मैं तो केवल स्पष्ट रूप से सावधान करने वाला हूँ।
२९:५१
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَكْفِهِمْकाफ़ी उन्हेंyakfihimأَنَّآबेशक हमannāأَنزَلْنَاनाज़िल की हमनेanzalnāعَلَيْكَआप परʿalaykaٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaيُتْلَىٰजो पढ़ी जाती हैyut'lāعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimإِنَّबेशकinnaفِىinfīذَٰلِكَइस मेंdhālikaلَرَحْمَةًۭअलबत्ता रहमतlaraḥmatanوَذِكْرَىٰऔर नसीहत हैwadhik'rāلِقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيُؤْمِنُونَजो ईमान लाते हैंyu'minūna٥١
क्या उनके लिए यह पर्याप्त नहीं है कि हमने आपपर यह पुस्तक (क़ुरआन) उतारी, जो उनके सामने पढ़ी जाती है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बड़ी दया और उपदेश है, जो ईमान रखते हैं।
२९:५२
قُلْकह दीजिएqulكَفَىٰकाफ़ी हैkafāبِٱللَّهِअल्लाहbil-lahiبَيْنِىदर्मियान मेरेbaynīوَبَيْنَكُمْऔर दर्मियान तुम्हारेwabaynakumشَهِيدًۭا ۖगवाहshahīdanيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजो कुछmāفِى(is) infīٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۗऔर ज़मीन में हैwal-arḍiوَٱلَّذِينَऔर वो लोग जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūبِٱلْبَـٰطِلِबातिल परbil-bāṭiliوَكَفَرُوا۟और उन्होंने कुफ़्र कियाwakafarūبِٱللَّهِसाथ अल्लाह केbil-lahiأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaهُمُवोhumuٱلْخَـٰسِرُونَजो ख़सारा पाने वाले हैंl-khāsirūna٥٢
आप कह दें : अल्लाह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह के रूप में काफ़ी1 है। वह जानता है, जो कुछ आकाशों और धरती में है। तथा जो लोग असत्य पर ईमान लाए और उन्होंने अल्लाह का इनकार किया, वही घाटा उठाने वाले हैं।
२९:५३
وَيَسْتَعْجِلُونَكَऔर वो जल्दी माँगते हैं आपसेwayastaʿjilūnakaبِٱلْعَذَابِ ۚअज़ाबbil-ʿadhābiوَلَوْلَآऔर अगर ना होतीwalawlāأَجَلٌۭमुद्दतajalunمُّسَمًّۭىमुक़र्ररmusammanلَّجَآءَهُمُअलबत्ता आ जाता उनके पासlajāahumuٱلْعَذَابُअज़ाबl-ʿadhābuوَلَيَأْتِيَنَّهُمऔर अलबत्ता वो ज़रूर आएगा उनके पासwalayatiyannahumبَغْتَةًۭअचानकbaghtatanوَهُمْइस हाल में किwahumلَا(do) notlāيَشْعُرُونَवो शऊर ना रखते होंगेyashʿurūna٥٣
और वे1 आपसे यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं। और यदि (उसका) एक नियत समय न होता, तो उनपर यातना अवश्य आ जाती। और निश्चय वह उनपर अचानक आएगी और उन्हें ख़बर तक न होगी।
२९:५४
يَسْتَعْجِلُونَكَवो जल्दी माँगते हैं आपसेyastaʿjilūnakaبِٱلْعَذَابِअज़ाबbil-ʿadhābiوَإِنَّऔर बेशकwa-innaجَهَنَّمَजहन्नमjahannamaلَمُحِيطَةٌۢअलबत्ता घेरने वाली हैlamuḥīṭatunبِٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कोbil-kāfirīna٥٤
वे आपसे यातना के लिए जल्दी मचा1 रहे है, हालाँकि निःसंदेह जहन्नम निश्चय काफ़िरों को घेरने वाला2 है।
२९:५५
يَوْمَजिस दिनyawmaيَغْشَىٰهُمُढाँप लेगा उन्हेंyaghshāhumuٱلْعَذَابُअज़ाबl-ʿadhābuمِنfromminفَوْقِهِمْउनके ऊपर सेfawqihimوَمِنand fromwaminتَحْتِऔर नीचे सेtaḥtiأَرْجُلِهِمْउनके पाँव केarjulihimوَيَقُولُऔर वो फ़रमाएगाwayaqūluذُوقُوا۟चखोdhūqūمَاजोmāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna٥٥
जिस दिन यातना उन्हें उनके ऊपर से और उनके पाँव के नीचे से ढाँप लेगी और अल्लाह कहेगा : चखो उसका मज़ा जो तुम किया करते थे।
२९:५६
يَـٰعِبَادِىَऐ मेरे बन्दोंyāʿibādiyaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِنَّबेशकinnaأَرْضِىमेरी ज़मीनarḍīوَٰسِعَةٌۭवसीअ हैwāsiʿatunفَإِيَّـٰىَपस सिर्फ़ मेरी हीfa-iyyāyaفَٱعْبُدُونِपस तुम इबादत करो मेरीfa-uʿ'budūni٥٦
ऐ मेरे बंदो जो ईमान लाए हो! निःसंदेह मेरी धरती विशाल है। अतः तुम मेरी ही इबादत1 करो।
२९:५७
كُلُّहरkulluنَفْسٍۢनफ़्सnafsinذَآئِقَةُचखने वाला हैdhāiqatuٱلْمَوْتِ ۖमौत कोl-mawtiثُمَّफिरthummaإِلَيْنَاतरफ़ हमारे हीilaynāتُرْجَعُونَतुम सब लौटाए जाओगेtur'jaʿūna٥٧
प्रत्येक प्राणी मौत का स्वाद चखने वाला है, फिर तुम हमारी ही ओर लौटाए1 जाओगे।
२९:५८
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiلَنُبَوِّئَنَّهُمअलबत्ता हम ज़रूर ठिकाना देंगे उन्हेंlanubawwi-annahumمِّنَinminaٱلْجَنَّةِजन्नत केl-janatiغُرَفًۭاबालाख़ानेghurafanتَجْرِىबहती होंगीtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَا ۚउनमेंfīhāنِعْمَकितना अच्छा हैniʿ'maأَجْرُअजरajruٱلْعَـٰمِلِينَअमल करने वालों काl-ʿāmilīna٥٨
तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, हम उन्हें अवश्य ही जन्नत के ऊँचे भवनों में जगह देंगे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, वे उनमें सदावासी होंगे। यह उन कर्म करने वालों का क्या ही अच्छा बदला है!
२९:५९
ٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaصَبَرُوا۟सब्र कियाṣabarūوَعَلَىٰand uponwaʿalāرَبِّهِمْऔर अपने रब पर हीrabbihimيَتَوَكَّلُونَवो तवक्कल करते हैंyatawakkalūna٥٩
जिन्होंने धैर्य से काम लिया तथा अपने पालनहार ही पर भरोसा रखते हैं।
२९:६०
وَكَأَيِّنऔर कितने हीwaka-ayyinمِّنofminدَآبَّةٍۢजानदार हैंdābbatinلَّا(does) notlāتَحْمِلُनहीं वो उठातेtaḥmiluرِزْقَهَاरिज़्क़ अपनाriz'qahāٱللَّهُअल्लाहl-lahuيَرْزُقُهَاरिज़्क़ देता है उन्हेंyarzuquhāوَإِيَّاكُمْ ۚऔर तुम्हें भीwa-iyyākumوَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वालाl-samīʿuٱلْعَلِيمُख़ूब जानने वालाl-ʿalīmu٦٠
कितने ही जीव हैं, जो अपनी रोज़ी नहीं उठा सकते।1 अल्लाह ही उन्हें रोज़ी देता है और तुम्हें भी! और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
२९:६१
وَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inسَأَلْتَهُمपूछें आप उनसेsa-altahumمَّنْकिस नेmanخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَسَخَّرَऔर उसने मुसख़्ख़र कियाwasakharaٱلشَّمْسَसूरजl-shamsaوَٱلْقَمَرَऔर चाँद कोwal-qamaraلَيَقُولُنَّअलबत्ता वो ज़रूर कहेंगेlayaqūlunnaٱللَّهُ ۖअल्लाह नेl-lahuفَأَنَّىٰतो कहाँ सेfa-annāيُؤْفَكُونَवो फेरे जाते हैंyu'fakūna٦١
और निश्चय यदि आप उनसे पूछें कि आकाशों और धरती को किसने पैदा किया और (किसने) सूर्य और चाँद को वशीभूत किया? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। तो फिर वे कहाँ बहकाए जा रहे हैं?
२९:६२
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuيَبْسُطُवो फैलाता देता हैyabsuṭuٱلرِّزْقَरिज़्क़ कोl-riz'qaلِمَنजिसके लिएlimanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuمِنْofminعِبَادِهِۦअपने बन्दों में सेʿibādihiوَيَقْدِرُऔर वो तंग कर देता हैwayaqdiruلَهُۥٓ ۚउसके लिएlahuإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ कोshayinعَلِيمٌۭख़ूब जानने वाला हैʿalīmun٦٢
अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है जीविका विस्तृत कर देता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ को अच्छी तरह जानने वाला है।
२९:६३
وَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inسَأَلْتَهُمपूछें आप उनसेsa-altahumمَّنकिसनेmanنَّزَّلَनाज़िल कियाnazzalaمِنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۭपानीmāanفَأَحْيَاफिर उसने ज़िन्दा कियाfa-aḥyāبِهِसाथ उसकेbihiٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaمِنۢafterminبَعْدِबादbaʿdiمَوْتِهَاउसकी मौत केmawtihāلَيَقُولُنَّअलबत्ता वो ज़रूर कहेंगेlayaqūlunnaٱللَّهُ ۚअल्लाह नेl-lahuقُلِकह दीजिएquliٱلْحَمْدُसब तारीफ़l-ḥamduلِلَّهِ ۚअल्लाह के लिए हैlillahiبَلْबल्किbalأَكْثَرُهُمْअक्सर उनकेaktharuhumلَا(do) notlāيَعْقِلُونَनहीं वो अक़्ल रखतेyaʿqilūna٦٣
और निश्चय यदि आप उनसे पूछें कि किसने आकाश से पानी उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को, उसके मुर्दा हो जाने के बाद जीवित किया? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कह दें कि सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं समझते।1
२९:६४
وَمَاऔर नहींwamāهَـٰذِهِयेhādhihiٱلْحَيَوٰةُज़िन्दगीl-ḥayatuٱلدُّنْيَآदुनिया कीl-dun'yāإِلَّاमगरillāلَهْوٌۭशुग़लlahwunوَلَعِبٌۭ ۚऔर खेलwalaʿibunوَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلدَّارَघरl-dāraٱلْـَٔاخِرَةَआख़िरत काl-ākhirataلَهِىَअलबत्ता वो हीlahiyaٱلْحَيَوَانُ ۚज़िन्दगी हैl-ḥayawānuلَوْकाशlawكَانُوا۟होते वोkānūيَعْلَمُونَवो इल्म रखतेyaʿlamūna٦٤
और दुनिया का यह जीवन1 केवल मनोरंजन और खेल है। और निःसंदेह आखिरत का घर ही निश्चय वास्तविक जीवन है, यदि वे जानते होते।
२९:६५
فَإِذَاफिर जबfa-idhāرَكِبُوا۟वो सवार होते हैंrakibūفِى[in]fīٱلْفُلْكِकश्ती मेंl-ful'kiدَعَوُا۟वो पुकारते हैंdaʿawūٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaمُخْلِصِينَख़ालिस करने वाले हो करmukh'liṣīnaلَهُउसके लिएlahuٱلدِّينَदीन कोl-dīnaفَلَمَّاतो जबfalammāنَجَّىٰهُمْवो निजात देता है उन्हेंnajjāhumإِلَىtoilāٱلْبَرِّतरफ़ ख़ुश्की केl-bariإِذَاयकायकidhāهُمْवोhumيُشْرِكُونَवो शिर्क करने लगते हैंyush'rikūna٦٥
फिर जब वे नाव पर सवार होते हैं, तो अल्लाह को, उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए, पुकारते हैं। फिर जब वह उन्हें बचाकर थल तक ले आता है, तो शिर्क करने लगते हैं।
२९:६६
لِيَكْفُرُوا۟ताकि वो नाशुक्री करेंliyakfurūبِمَآउसकी जोbimāءَاتَيْنَـٰهُمْदिया हमने उन्हेंātaynāhumوَلِيَتَمَتَّعُوا۟ ۖऔर ताकि वो फ़ायदा उठा लेंwaliyatamattaʿūفَسَوْفَपस अनक़रीबfasawfaيَعْلَمُونَवो जान लेंगेyaʿlamūna٦٦
ताकि जो कुछ हमने उन्हें प्रदान किया है, उसकी नाशुक्री करें, और ताकि वे (जीवन का) लाभ उठाएँ। तो शीघ्र ही उन्हें पता चल जाएगा।
२९:६७
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَرَوْا۟उन्होंने देखाyarawأَنَّاबेशक हमannāجَعَلْنَاबनाया हमनेjaʿalnāحَرَمًاहरम कोḥaramanءَامِنًۭاअमन वालाāminanوَيُتَخَطَّفُऔर उचक लिए जाते हैंwayutakhaṭṭafuٱلنَّاسُलोगl-nāsuمِنْaround themminحَوْلِهِمْ ۚउनके इर्द-गिर्द सेḥawlihimأَفَبِٱلْبَـٰطِلِक्या फिर बातिल परafabil-bāṭiliيُؤْمِنُونَवो ईमान लाते हैंyu'minūnaوَبِنِعْمَةِऔर नेअमत काwabiniʿ'matiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiيَكْفُرُونَवो इन्कार करते हैंyakfurūna٦٧
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने (उनके लिए) एक सुरक्षित व शांतिमय हरम बनाया है, जबकि उनके आस-पास से लोग उचक लिए जाते हैं? तो क्या वे असत्य पर ईमान लाते हैं और अल्लाह की नेमत की नाशुक्री करते हैं?
२९:६८
وَمَنْऔर कौनwamanأَظْلَمُबड़ा ज़ालिम हैaẓlamuمِمَّنِउससे जोmimmaniٱفْتَرَىٰगढ़ लेif'tarāعَلَىagainstʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiكَذِبًاझूठkadhibanأَوْयाawكَذَّبَवो झुठलाएkadhabaبِٱلْحَقِّहक़ कोbil-ḥaqiلَمَّاजब किlammāجَآءَهُۥٓ ۚवो आ जाए उसके पासjāahuأَلَيْسَक्या नहीं हैalaysaفِىinfīجَهَنَّمَजहन्नम मेंjahannamaمَثْوًۭىठिकानाmathwanلِّلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों के लिएlil'kāfirīna٦٨
तथा उससे अधिक अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े या जब सच उसके पास आ जाए, तो उसे झुठला दे? क्या (ऐसे) काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम में नहीं है?
२९:६९
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaجَـٰهَدُوا۟जद्दो जहद कीjāhadūفِينَاहमारी (राह) मेंfīnāلَنَهْدِيَنَّهُمْअलबत्ता हम ज़रूर हिदायत देंगे उन्हेंlanahdiyannahumسُبُلَنَا ۚअपने रास्तों कीsubulanāوَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَمَعَअलबत्ता साथ हैlamaʿaٱلْمُحْسِنِينَएहसान करने वालों केl-muḥ'sinīna٦٩
तथा जिन लोगों ने हमारी ख़ातिर भरपूर प्रयास किया, हम अवश्य ही उन्हें अपने मार्ग दिखा देंगे1 और निःसंदेह अल्लाह सदाचारियों के साथ है।
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