३०

अर-रूम

मक्की ६० आयतें पारा २१
الروم

सूरह अर-रूम (الروم) पवित्र क़ुरआन का ३० वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ६० आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
३०:१
الٓمٓا ل مalif-lam-meem١
अलिफ़, लाम, मीम।
३०:२
غُلِبَتِमग़लूब हो गएghulibatiٱلرُّومُरूमीl-rūmu٢
रूमी पराजित हो गए।
३०:३
فِىٓInأَدْنَى(the) nearestadnāٱلْأَرْضِक़रीब की ज़मीन मेंl-arḍiوَهُمऔर वोwahumمِّنۢafterminبَعْدِबादbaʿdiغَلَبِهِمْअपने मग़लूब होने केghalabihimسَيَغْلِبُونَअनक़रीब वो ग़ालिब आ जाऐंगेsayaghlibūna٣
निकटतम क्षेत्र में। और वे अपनी पराजय के बाद जल्द ही विजयी हो जाएँगे!
३०:४
فِىWithinبِضْعِa fewbiḍ'ʿiسِنِينَ ۗचंद सालों मेंsinīnaلِلَّهِअल्लाह ही के लिए हैlillahiٱلْأَمْرُहुक्मl-amruمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluوَمِنۢand afterwaminبَعْدُ ۚऔर इसके बादbaʿduوَيَوْمَئِذٍۢऔर उस दिनwayawma-idhinيَفْرَحُख़ुश हो जाऐंगेyafraḥuٱلْمُؤْمِنُونَमोमिनl-mu'minūna٤
कुछ वर्षों में। सारा मामला अल्लाह के अधिकार में है, पहले भी और बाद में भी। और उस दिन ईमान वाले प्रसन्न होंगे।
३०:५
بِنَصْرِमदद सेbinaṣriٱللَّهِ ۚअल्लाह कीl-lahiيَنصُرُवो मदद करता हैyanṣuruمَنजिसकीmanيَشَآءُ ۖवो चाहता हैyashāuوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्त हैl-ʿazīzuٱلرَّحِيمُबहुत रहम करने वाला हैl-raḥīmu٥
अल्लाह की सहायता से। वह जिसकी चाहता है, सहायता करता है। वह सब पर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।
३०:६
وَعْدَवादा हैwaʿdaٱللَّهِ ۖअल्लाह काl-lahiلَا(Does) notيُخْلِفُनहीं ख़िलाफ़ करताyukh'lifuٱللَّهُअल्लाहl-lahuوَعْدَهُۥवादा अपनाwaʿdahuوَلَـٰكِنَّलेकिनwalākinnaأَكْثَرَअक्सरaktharaٱلنَّاسِलोगl-nāsiلَا(do) notيَعْلَمُونَनहीं वो जानतेyaʿlamūna٦
यह अल्लाह का वादा है। अल्लाह अपने वादे1 के विरुद्ध नहीं करता। परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
३०:७
يَعْلَمُونَवो जानते हैंyaʿlamūnaظَـٰهِرًۭاज़ाहिर कोẓāhiranمِّنَofminaٱلْحَيَوٰةِthe lifel-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया की ज़िन्दगी केl-dun'yāوَهُمْऔर वोwahumعَنِaboutʿaniٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत सेl-ākhiratiهُمْवोhumغَـٰفِلُونَग़ाफ़िल हैंghāfilūna٧
वे केवल दुनिया के जीवन के कुछ बाहरी स्वरूप1 को जानते हैं, और वे आख़िरत से बिलकुल गाफ़िल हैं।
३०:८
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَتَفَكَّرُوا۟उन्होंने ग़ौरो फ़िक्र कियाyatafakkarūفِىٓwithinأَنفُسِهِم ۗअपने नफ़्सों मेंanfusihimمَّاनहींخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَمَاऔर जो कुछwamāبَيْنَهُمَآदर्मियान है इन दोनों केbaynahumāإِلَّاमगरillāبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَأَجَلٍۢऔर वक़्तwa-ajalinمُّسَمًّۭى ۗमुक़र्रर केmusammanوَإِنَّऔर बेशकwa-innaكَثِيرًۭاबहुत सेkathīranمِّنَofminaٱلنَّاسِलोगों में सेl-nāsiبِلِقَآئِमुलाक़ात काbiliqāiرَبِّهِمْअपने रब कीrabbihimلَكَـٰفِرُونَअलबत्ता इन्कार करने वाले हैंlakāfirūna٨
क्या उन लोगों ने अपने दिलों में विचार नहीं किया कि अल्लाह ने आकाशों और धरती को और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों1 को सत्य के साथ और एक निश्चित अवधि के लिए ही पैदा किया है?! और निःसंदेह बहुत-से लोग अपने पालनहार से मिलने का इनकार करते हैं।
३०:९
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَسِيرُوا۟वो चले फिरेyasīrūفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَيَنظُرُوا۟तो वो देखतेfayanẓurūكَيْفَकैसाkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअंजामʿāqibatuٱلَّذِينَउनका जोalladhīnaمِنbefore themminقَبْلِهِمْ ۚउनसे पहले थेqablihimكَانُوٓا۟थे वोkānūأَشَدَّज़्यादा शदीदashaddaمِنْهُمْउनसेmin'humقُوَّةًۭक़ुव्वत मेंquwwatanوَأَثَارُوا۟और उन्होंने उधेड़ा थाwa-athārūٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaوَعَمَرُوهَآऔर उन्होंने आबाद किया था उसेwaʿamarūhāأَكْثَرَज़्यादाaktharaمِمَّاउससे जोmimmāعَمَرُوهَاउन्होंने आबाद किया है उसेʿamarūhāوَجَآءَتْهُمْऔर आए उनके पासwajāathumرُسُلُهُمरसूल उनकेrusuluhumبِٱلْبَيِّنَـٰتِ ۖसाथ वाज़ेह दलाइल केbil-bayinātiفَمَاतो नाfamāكَانَथाkānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِيَظْلِمَهُمْकि वो ज़ुल्म करता उन परliyaẓlimahumوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinكَانُوٓا۟थे वोkānūأَنفُسَهُمْअपनी जानों परanfusahumيَظْلِمُونَवो ज़ुल्म करतेyaẓlimūna٩
और क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते उन लोगों का परिणाम कैसा हुआ, जो उनसे पहले थे? वे उनसे अधिक शक्तिशाली थे और उन्होंने धरती को जोता-बोया और उसे आबाद किया उससे अधिक जितना उन्होंने उसे आबाद किया था, और उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आए। तो अल्लाह ऐसा न था कि उनपर अत्याचार करे, लेकिन वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करते थे।
३०:१०
ثُمَّफिरthummaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةَअंजामʿāqibataٱلَّذِينَउनका जिन्होंनेalladhīnaأَسَـٰٓـُٔوا۟बुराई कीasāūٱلسُّوٓأَىٰٓबहुत बुराl-sūāأَنकिanكَذَّبُوا۟उन्होंने झुठलायाkadhabūبِـَٔايَـٰتِ(the) Signsbiāyātiٱللَّهِअल्लाह की आयात कोl-lahiوَكَانُوا۟और थे वोwakānūبِهَاउनकाbihāيَسْتَهْزِءُونَवो मज़ाक़ उड़ातेyastahziūna١٠
फिर जिन लोगों ने बुराई की, उनका बहुत ही बुरा अंत हुआ, इसलिए कि उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया और वे उनका उपहास करते थे।
३०:११
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuيَبْدَؤُا۟वो इब्तिदा करता हैyabda-uٱلْخَلْقَतख़लीक़ कीl-khalqaثُمَّफिरthummaيُعِيدُهُۥवो एआदा करेगा उसकाyuʿīduhuثُمَّफिरthummaإِلَيْهِतरफ़ उसीकेilayhiتُرْجَعُونَतुम लौटाए जाओगेtur'jaʿūna١١
अल्लाह ही सृष्टि का आरंभ करता है। फिर वही उसे दोबारा पैदा करेगा। फिर तुम उसी की ओर लौटाए1 जाओगे।
३०:१२
وَيَوْمَऔर जिस दिनwayawmaتَقُومُक़ायम होगीtaqūmuٱلسَّاعَةُक़यामतl-sāʿatuيُبْلِسُनाउम्मीद हो जाऐंगेyub'lisuٱلْمُجْرِمُونَमुजरिमl-muj'rimūna١٢
और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, अपराधी निराश1 हो जाएँगे।
३०:१३
وَلَمْऔर नाwalamيَكُنहोंगेyakunلَّهُمउनके लिएlahumمِّنamongminشُرَكَآئِهِمْउनके शरीकों में सेshurakāihimشُفَعَـٰٓؤُا۟कोई सिफ़ारिशीshufaʿāuوَكَانُوا۟और वो हो जाऐंगेwakānūبِشُرَكَآئِهِمْअपने शरीकों काbishurakāihimكَـٰفِرِينَइन्कार करने वालेkāfirīna١٣
और उनके लिए उनके साझियों में से कोई सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे और वे अपने साझियों का इनकार करने वाले1 होंगे।
३०:१४
وَيَوْمَऔर जिस दिनwayawmaتَقُومُक़ायम होगीtaqūmuٱلسَّاعَةُक़यामतl-sāʿatuيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinيَتَفَرَّقُونَवो मुतफ़र्रिक़ हो जाऐंगेyatafarraqūna١٤
और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, उस दिन वे अलग-अलग हो जाएँगे।
३०:१५
فَأَمَّاतो रहेfa-ammāٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiفَهُمْतो वोfahumفِىinرَوْضَةٍۢएक बाग़ मेंrawḍatinيُحْبَرُونَवो ख़ुश कर दिए जाऐंगेyuḥ'barūna١٥
फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, वे जन्नत में प्रसन्नमय रखे जाएँगे।
३०:१६
وَأَمَّاऔर रहेwa-ammāٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَكَذَّبُوا۟और झुटलायाwakadhabūبِـَٔايَـٰتِنَاहमारी आयात कोbiāyātināوَلِقَآئِऔर मुलाक़ात कोwaliqāiٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत कीl-ākhiratiفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोगfa-ulāikaفِىinٱلْعَذَابِअज़ाब मेंl-ʿadhābiمُحْضَرُونَहाज़िर रखे जाने वाले हैंmuḥ'ḍarūna١٦
और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों और आख़िरत की मुलाक़ात को झुठलाया, वे यातना में उपस्थित किए जाएँगे।
३०:१७
فَسُبْحَـٰنَपस तस्बीह हैfasub'ḥānaٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiحِينَजबḥīnaتُمْسُونَतुम शाम करते होtum'sūnaوَحِينَऔर जबwaḥīnaتُصْبِحُونَतुम सुबह करते होtuṣ'biḥūna١٧
अतः तुम अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करो,जब तुम शाम करते हो और जब सुबह करते हो।
३०:१८
وَلَهُऔर उसी के लिए हैwalahuٱلْحَمْدُसब तारीफ़l-ḥamduفِىinٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन मेंwal-arḍiوَعَشِيًّۭاऔर तीसरे पहरwaʿashiyyanوَحِينَऔर जिस वक़्तwaḥīnaتُظْهِرُونَतुम ज़ोहर करते होtuẓ'hirūna١٨
तथा उसी के लिए सब प्रशंसा है आकाशों एवं धरती में, और तीसरे पहर तथा जब तुम ज़ुहर के समय में प्रवेश करते हो।
३०:१९
يُخْرِجُवो निकालता हैyukh'rijuٱلْحَىَّज़िन्दा कोl-ḥayaمِنَfromminaٱلْمَيِّتِमुर्दा सेl-mayitiوَيُخْرِجُऔर वो निकालता हैwayukh'rijuٱلْمَيِّتَमुर्दा कोl-mayitaمِنَfromminaٱلْحَىِّज़िन्दा सेl-ḥayiوَيُحْىِऔर वो ज़िन्दा करता हैwayuḥ'yīٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaبَعْدَबादbaʿdaمَوْتِهَا ۚउसकी मौत केmawtihāوَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaتُخْرَجُونَतुम निकाले जाओगेtukh'rajūna١٩
वह जीवित को मृत से निकालता1 है तथा मृत को जीवित से निकालता है और धरती को उसके मृत हो जाने के बाद जीवित करता है। और इसी प्रकार, तुम (भी) निकाले जाओगे।
३०:२०
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦٓऔर उसकी निशानियों में से हैāyātihiأَنْकिanخَلَقَكُمउसने पैदा किया तुम्हेंkhalaqakumمِّنfromminتُرَابٍۢमिट्टी सेturābinثُمَّफिरthummaإِذَآयकायकidhāأَنتُمतुमantumبَشَرٌۭइन्सान होbasharunتَنتَشِرُونَतुम फैलते चले जारहे होtantashirūna٢٠
और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर एकाएक तुम मनुष्य हो, जो फैल रहे हो।
३०:२१
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦٓऔर उसकी निशानियों में से हैāyātihiأَنْकिanخَلَقَउसने पैदा किएkhalaqaلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْfromminأَنفُسِكُمْतुम्हारे नफ़्सों सेanfusikumأَزْوَٰجًۭاजोड़ेazwājanلِّتَسْكُنُوٓا۟ताकि तुम सुकून पाओlitaskunūإِلَيْهَاउनकी तरफ़ilayhāوَجَعَلَऔर उसने डाल दीwajaʿalaبَيْنَكُمदर्मियान तुम्हारेbaynakumمَّوَدَّةًۭमुहब्बतmawaddatanوَرَحْمَةً ۚऔर रहमतwaraḥmatanإِنَّबेशकinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيَتَفَكَّرُونَजो ग़ौरो फ़िक्र करते हैंyatafakkarūna٢١
तथा उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्ही में से जोड़े पैदा किए, ताकि तुम उनके पास शांति प्राप्त करो। तथा उसने तुम्हारे बीच प्रेम और दया रख दी। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशाननियाँ हैं, जो सोच-विचार करते हैं।
३०:२२
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦऔर उसकी निशानियों में से हैंāyātihiخَلْقُपैदाइशkhalquٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन कीwal-arḍiوَٱخْتِلَـٰفُऔर इख़्तिलाफ़wa-ikh'tilāfuأَلْسِنَتِكُمْतुम्हारी ज़बानों काalsinatikumوَأَلْوَٰنِكُمْ ۚऔर तुम्हारे रंगों काwa-alwānikumإِنَّबेशकinnaفِىinذَٰلِكَइस मेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّلْعَـٰلِمِينَइल्म वालों के लिएlil'ʿālimīna٢٢
तथा उसकी निशानियों में से आकाशों और धरती को पैदा करना तथा तुम्हारी भाषाओं और तुम्हारे रंगों का अलग-अलग होना है। निःसंदेह इसमें ज्ञान रखने वालों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ1 है।
३०:२३
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦऔर उसकी निशानियों में से हैāyātihiمَنَامُكُمसोना तुम्हाराmanāmukumبِٱلَّيْلِरातbi-al-layliوَٱلنَّهَارِऔर दिन कोwal-nahāriوَٱبْتِغَآؤُكُمऔर तलाश करना तुम्हाराwa-ib'tighāukumمِّنofminفَضْلِهِۦٓ ۚउसके फ़ज़ल सेfaḍlihiإِنَّयक़ीननinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيَسْمَعُونَजो सुनते हैंyasmaʿūna٢٣
तथा उसकी निशानियों में से तुम्हारा रात और दिन को सोना और तुम्हारा उसके अनुग्रह को तलाश करना है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो सुनते हैं।
३०:२४
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦऔर उसकी निशानियों में से हैāyātihiيُرِيكُمُकि वो दिखाता है तुम्हेंyurīkumuٱلْبَرْقَबिजलीl-barqaخَوْفًۭاख़ौफ़khawfanوَطَمَعًۭاऔर उम्मीद सेwaṭamaʿanوَيُنَزِّلُऔर वो उतारता हैwayunazziluمِنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۭपानीmāanفَيُحْىِۦफिर वो ज़िन्दा करता हैfayuḥ'yīبِهِसाथ इसकेbihiٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaبَعْدَबादbaʿdaمَوْتِهَآ ۚउसकी मौत केmawtihāإِنَّयक़ीननinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيَعْقِلُونَजो अक़्ल रखते हैंyaʿqilūna٢٤
और उसकी निशानियों में से (यह भी) है कि वह तुम्हें भय और आशा के लिए बिजली दिखाता है और आकाश से पानी उतारता है, फिर उसके द्वारा धरती को उसके मृत हो जाने के बाद जीवित कर देता है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो समझते हैं।
३०:२५
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦٓऔर उसकी निशानियों में से हैāyātihiأَنकिanتَقُومَक़ायम हैंtaqūmaٱلسَّمَآءُआसमानl-samāuوَٱلْأَرْضُऔर ज़मीनwal-arḍuبِأَمْرِهِۦ ۚउसके हुक्म सेbi-amrihiثُمَّफिरthummaإِذَاजबidhāدَعَاكُمْवो पुकारेगा तुम्हेंdaʿākumدَعْوَةًۭएक ही बार पुकारनाdaʿwatanمِّنَfromminaٱلْأَرْضِज़मीन सेl-arḍiإِذَآयकायकidhāأَنتُمْतुमantumتَخْرُجُونَतुम निकल आओगेtakhrujūna٢٥
और उसकी निशानियों में से है कि आकाश तथा धरती उसके आदेश से स्थापित हैं। फिर जब वह तुम्हें धरती में से एक ही बार पुकारेगा, तो सहसा तुम (बाहर) निकल आओगे।
३०:२६
وَلَهُۥऔर उसी के लिए हैwalahuمَنजो कोईmanفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۖऔर ज़मीन में हैwal-arḍiكُلٌّۭसबkullunلَّهُۥउसी के लिएlahuقَـٰنِتُونَफ़रमाबरदार हैंqānitūna٢٦
और आकाशों और धरती में जो भी है, उसी का है। सब उसी के आज्ञाकारी हैं।
३०:२७
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजोalladhīيَبْدَؤُا۟इब्तिदा करता हैyabda-uٱلْخَلْقَतख़लीक़ कीl-khalqaثُمَّफिरthummaيُعِيدُهُۥवो एआदा करेगा उसकाyuʿīduhuوَهُوَऔर वोwahuwaأَهْوَنُज़्यादा आसान हैahwanuعَلَيْهِ ۚउस परʿalayhiوَلَهُऔर उसी के लिए हैwalahuٱلْمَثَلُमिसालl-mathaluٱلْأَعْلَىٰआलाl-aʿlāفِىinٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन मेंwal-arḍiوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्त हैl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वाला हैl-ḥakīmu٢٧
तथा वही है, जो उत्पत्ति का आरंभ करता है। फिर वही उसे पुनः पैदा करेगा। और यह उसके लिए अधिक सरल है। तथा आकाशों और धरती में सर्वोच्च गुण उसी का है। और वही प्रभुत्वशाली, हिकमत वाला है।
३०:२८
ضَرَبَउसने बयान कीḍarabaلَكُمतुम्हारे लिएlakumمَّثَلًۭاएक मिसालmathalanمِّنْfromminأَنفُسِكُمْ ۖतुम्हारे नफ़्सों में सेanfusikumهَلक्या हैंhalلَّكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنamongminمَّاउसमें से जोمَلَكَتْमालिक हैंmalakatأَيْمَـٰنُكُمदाऐं हाथ तुम्हारेaymānukumمِّنanyminشُرَكَآءَकुछ शरीकshurakāaفِىinمَاउसमें जोرَزَقْنَـٰكُمْरिज़्क़ दिया हमने तुम्हेंrazaqnākumفَأَنتُمْतो तुमfa-antumفِيهِउसमेंfīhiسَوَآءٌۭबराबर होsawāonتَخَافُونَهُمْतुम डरते हो उनसेtakhāfūnahumكَخِيفَتِكُمْजैसे डरना तुम्हाराkakhīfatikumأَنفُسَكُمْ ۚअपने नफ़्सों (जैसों) सेanfusakumكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaنُفَصِّلُहम खोलकर बयान करते हैंnufaṣṣiluٱلْـَٔايَـٰتِआयातl-āyātiلِقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيَعْقِلُونَजो अक़्ल रखते हैंyaʿqilūna٢٨
उसने तुम्हारे लिए स्वयं तुम्हीं में से एक उदाहरण पेश किया है। हमने जो रोज़ी तुम्हें प्रदान की है, क्या उसमें तुम्हारे1 दासों में से तुम्हारा कोई साझी है कि तुम उसमें समान हो, उनसे वैसे ही डरते हो, जैसे एक-दूसरे से डरते हो? इसी प्रकार हम उन लोगों के लिए आयतें खोल-खोलकर वर्णन करते हैं, जो समझ रखते हैं।
३०:२९
بَلِबल्किbaliٱتَّبَعَपैरवी कीittabaʿaٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوٓا۟ज़ुल्म कियाẓalamūأَهْوَآءَهُمअपनी ख़्वाहिशात कीahwāahumبِغَيْرِबग़ैरbighayriعِلْمٍۢ ۖइल्म केʿil'minفَمَنतो कौनfamanيَهْدِىहिदायत दे सकता हैyahdīمَنْउसको जिसेmanأَضَلَّगुमराह कर देaḍallaٱللَّهُ ۖअल्लाहl-lahuوَمَاऔर नहींwamāلَهُمउनके लिएlahumمِّنanyminنَّـٰصِرِينَमददगारों में से कोईnāṣirīna٢٩
बल्कि वे लोग जिन्होंने अत्याचार किया बिना किसी ज्ञान के अपनी इच्छाओं के पीछे चल पड़े।फिर उसे कौन मार्ग पर लाए, जिसे अल्लाह ने गुमराह कर दिया हो। और उनके लिए कोई सहायक नहीं है।
३०:३०
فَأَقِمْपस क़ायम रखिएfa-aqimوَجْهَكَअपने चेहरे कोwajhakaلِلدِّينِदीन के लिएlilddīniحَنِيفًۭا ۚयक्सू हो करḥanīfanفِطْرَتَफ़ितरतfiṭ'rataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiٱلَّتِىवो जोallatīفَطَرَउसने पैदा कियाfaṭaraٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaعَلَيْهَا ۚउस परʿalayhāلَاNoتَبْدِيلَनहीं (जाइज़) कोई तब्दीलीtabdīlaلِخَلْقِख़ल्क़ के लिएlikhalqiٱللَّهِ ۚअल्लाह कीl-lahiذَٰلِكَयही हैdhālikaٱلدِّينُदीनl-dīnuٱلْقَيِّمُदुरुस्तl-qayimuوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَअक्सरaktharaٱلنَّاسِलोगl-nāsiلَا(do) notيَعْلَمُونَनहीं वो इल्म रखतेyaʿlamūna٣٠
तो (ऐ नबी!) आप एकाग्र होकर अपने चेहरे को इस धर्म की ओर स्थापित करें। उस फ़ितरत पर जमे रहें, जिसपर1 अल्लाह ने लोगों को पैदा किया है। अल्लाह की रचना में कोई बदलाव नहीं हो सकता। यही सीधा धर्म है, लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते।2
३०:३१
۞ مُنِيبِينَरुजूअ करने वाले (बनो)munībīnaإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiوَٱتَّقُوهُऔर डरो उससेwa-ittaqūhuوَأَقِيمُوا۟और क़ायम करोwa-aqīmūٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَلَاऔर नाwalāتَكُونُوا۟तुम हो जाओtakūnūمِنَofminaٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकों में सेl-mush'rikīna٣١
उसी (अल्लाह) की ओर पलटते हुए, और उससे डरो तथा नमाज़ क़ायम करो और मुश्रिकों में से न हो जाओ।
३०:३२
مِنَOfminaٱلَّذِينَउन लोगों में से जिन्होंनेalladhīnaفَرَّقُوا۟फ़िरक़ा-फ़िरक़ा कर दियाfarraqūدِينَهُمْअपने दीन कोdīnahumوَكَانُوا۟और हो गए वोwakānūشِيَعًۭا ۖगिरोह-गिरोहshiyaʿanكُلُّहरkulluحِزْبٍۭगिरोह (के लोग)ḥiz'binبِمَاउस पर जोbimāلَدَيْهِمْउनके पास हैladayhimفَرِحُونَख़ुश हैंfariḥūna٣٢
उन लोगों में से जिन्होंने अपने धर्म को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, और कई गिरोह हो गए। प्रत्येक गिरोह उसी1 पर खुश है, जो उसके पास है।
३०:३३
وَإِذَاऔर जबwa-idhāمَسَّपहुँचती हैmassaٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaضُرٌّۭकोई तक्लीफ़ḍurrunدَعَوْا۟वो पुकारते हैंdaʿawرَبَّهُمअपने रब कोrabbahumمُّنِيبِينَरुजूअ करने वाले बन करmunībīnaإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiثُمَّफिरthummaإِذَآजबidhāأَذَاقَهُمवो चखाता है उन्हेंadhāqahumمِّنْهُअपनी तरफ़ सेmin'huرَحْمَةًरहमतraḥmatanإِذَاयकायकidhāفَرِيقٌۭएक गिरोह (के लोग)farīqunمِّنْهُمउनमें सेmin'humبِرَبِّهِمْअपने रब के साथbirabbihimيُشْرِكُونَवो शरीक ठहराते हैंyush'rikūna٣٣
और जब लोगों को कोई कष्ट पहुँचता है, तो वे अपने पालनहार को, उसकी ओर लौटते हुए पुकारते हैं। फिर जब वह उन्हें अपनी ओर से कोई दया चखाता है, तो सहसा उनमें से एक समूह अपने पालनहार के साथ शिर्क करने लगता है।
३०:३४
لِيَكْفُرُوا۟ताकि वो नाशुक्री करेंliyakfurūبِمَآउसकी जोbimāءَاتَيْنَـٰهُمْ ۚअता किया हमने उन्हेंātaynāhumفَتَمَتَّعُوا۟तो फ़ायदा उठा लोfatamattaʿūفَسَوْفَपस अनक़रीबfasawfaتَعْلَمُونَतुम जान लोगेtaʿlamūna٣٤
ताकि वे उसके प्रति कृतघ्नता दिखाएँ, जो हमने उन्हें प्रदान किया है। तो तुम लाभ उठा लो, शीघ्र ही तुम्हें पता चल जाएगा।
३०:३५
أَمْयाamأَنزَلْنَاउतारी हमनेanzalnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimسُلْطَـٰنًۭاकोई दलीलsul'ṭānanفَهُوَतो वोfahuwaيَتَكَلَّمُवो बताती हैyatakallamuبِمَاउनको वो जोbimāكَانُوا۟हैं वोkānūبِهِۦसाथ जिसकेbihiيُشْرِكُونَवो शरीक ठहरातेyush'rikūna٣٥
क्या हमने उनपर कोई प्रमाण उतारा है कि वह उस चीज़ को (उचित) बताता है, जिसे वे अल्लाह के साथ साझी ठहराया1 करते थे।
३०:३६
وَإِذَآऔर जबwa-idhāأَذَقْنَاचखाते हैं हमadhaqnāٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaرَحْمَةًۭकोई रहमतraḥmatanفَرِحُوا۟वो ख़ुश होते हैंfariḥūبِهَا ۖउस परbihāوَإِنऔर अगरwa-inتُصِبْهُمْपहुँचती है उन्हेंtuṣib'humسَيِّئَةٌۢकोई बुराईsayyi-atunبِمَاबवजह उसके जोbimāقَدَّمَتْआगे भेजाqaddamatأَيْدِيهِمْउनके हाथों नेaydīhimإِذَاयकायकidhāهُمْवोhumيَقْنَطُونَवो मायूस हो जाते हैंyaqnaṭūna٣٦
और जब हम लोगों को कोई दया चखाते हैं, तो वे उससे प्रसन्न हो जाते हैं, और अगर उन्हें उनकी करतूतों के कारण कोई विपत्ति पहुँचती है, तो वे सहसा निराश हो जाते हैं।
३०:३७
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَرَوْا۟उन्होंने देखाyarawأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَبْسُطُवो फैलाता हैyabsuṭuٱلرِّزْقَरिज़्क़l-riz'qaلِمَنजिसके लिएlimanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuوَيَقْدِرُ ۚऔर वो तंग करता हैwayaqdiruإِنَّबेशकinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيُؤْمِنُونَजो ईमान लाते हैंyu'minūna٣٧
क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी विस्तृत कर देता है, और जिसके लिए चाहता है, तंग कर देता है? निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो ईमान रखते हैं।
३०:३८
فَـَٔاتِपस आप दीजिएfaātiذَاthe relativedhāٱلْقُرْبَىٰक़राबतदार कोl-qur'bāحَقَّهُۥहक़ उसकाḥaqqahuوَٱلْمِسْكِينَऔर मिसकीनwal-mis'kīnaوَٱبْنَand the wayfarerwa-ib'naٱلسَّبِيلِ ۚऔर मुसाफ़िर कोl-sabīliذَٰلِكَयेdhālikaخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunلِّلَّذِينَउनके लिए जोlilladhīnaيُرِيدُونَचाहते हैंyurīdūnaوَجْهَचेहराwajhaٱللَّهِ ۖअल्लाह काl-lahiوَأُو۟لَـٰٓئِكَऔर यही लोग हैंwa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْمُفْلِحُونَजो फ़लाह पाने वाले हैंl-muf'liḥūna٣٨
अतः रिश्तेदार को उसका हक़ दो, तथा निर्धन और यात्री को (भी)। यह उन लोगों के लिए बेहतर है, जो अल्लाह का चेहरा चाहते हैं और वही सफल होने वाले हैं।
३०:३९
وَمَآऔर जो कुछwamāءَاتَيْتُمदेते हो तुमātaytumمِّنforminرِّبًۭاसूद में सेribanلِّيَرْبُوَا۟ताकि वो बढ़ जाएliyarbuwāفِىٓinأَمْوَٰلِमालों मेंamwāliٱلنَّاسِलोगों केl-nāsiفَلَاपस नहींfalāيَرْبُوا۟वो बढ़ताyarbūعِندَwithʿindaٱللَّهِ ۖअल्लाह के यहाँl-lahiوَمَآऔर जो कुछwamāءَاتَيْتُمदेते हो तुमātaytumمِّنofminزَكَوٰةٍۢज़कात में सेzakatinتُرِيدُونَतुम चाहते होturīdūnaوَجْهَचेहराwajhaٱللَّهِअल्लाह काl-lahiفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْمُضْعِفُونَजो दो गुना करने वाले हैंl-muḍ'ʿifūna٣٩
और तुम ब्याज पर जो (उधार) देते हो, ताकि वह लोगों के धनों में मिलकर अधिक1 हो जाए, तो वह अल्लाह के यहाँ अधिक नहीं होता। तथा तुम अल्लाह का चेहरा चाहते हुए जो कुछ ज़कात से देते हो, तो वही लोग कई गुना बढ़ाने वाले हैं।
३०:४०
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىवो है जिसनेalladhīخَلَقَكُمْपैदा किया तुम्हेंkhalaqakumثُمَّफिरthummaرَزَقَكُمْउसने रिज़्क़ दिया तुम्हेंrazaqakumثُمَّफिरthummaيُمِيتُكُمْवो मौत देगा तुम्हेंyumītukumثُمَّफिरthummaيُحْيِيكُمْ ۖवो ज़िन्दा करेगा तुम्हेंyuḥ'yīkumهَلْक्या हैhalمِنanyminشُرَكَآئِكُمतुम्हारे शरीकों में से कोईshurakāikumمَّنजोmanيَفْعَلُकरेyafʿaluمِنofminذَٰلِكُمइसमें सेdhālikumمِّنanyminشَىْءٍۢ ۚकोई चीज़shayinسُبْحَـٰنَهُۥपाक है वोsub'ḥānahuوَتَعَـٰلَىٰऔर वो बुलन्दतर हैwataʿālāعَمَّاउससे जोʿammāيُشْرِكُونَवो शरीक ठहराते हैंyush'rikūna٤٠
अल्लाह वह (अस्तित्व) है, जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हें जीविका प्रदान की, फिर तुम्हें मृत्यु देगा, फिर तुम्हें जीवित करेगा।1 क्या तुम्हारे साझियों में से कोई है, जो इन कामों में से कुछ भी कर सके? वह पवित्र है और सर्वोच्च है, उनके साझी बनाने से।
३०:४१
ظَهَرَज़ाहिर हो गयाẓaharaٱلْفَسَادُफ़सादl-fasāduفِىinٱلْبَرِّख़ुश्की मेंl-bariوَٱلْبَحْرِऔर समुन्दर मेंwal-baḥriبِمَاबवजह उसके जोbimāكَسَبَتْकमाई कीkasabatأَيْدِىहाथों नेaydīٱلنَّاسِलोगों केl-nāsiلِيُذِيقَهُمताकि वो चखाए उन्हेंliyudhīqahumبَعْضَबाज़ उसकाbaʿḍaٱلَّذِىवो जोalladhīعَمِلُوا۟उन्होंने अमल किएʿamilūلَعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيَرْجِعُونَवो लौट आऐंyarjiʿūna٤١
जल और थल में लोगों के हाथों की कमाई के कारण बिगाड़ फैल गया1 है, ताकि वह (अल्लाह) उन्हें उनके कुछ कर्मों का मज़ा चखाए, ताकि वे बाज़ आ जाएँ।
३०:४२
قُلْकह दीजिएqulسِيرُوا۟चलो फिरोsīrūفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَٱنظُرُوا۟फिर देखोfa-unẓurūكَيْفَकैसाkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअंजामʿāqibatuٱلَّذِينَउनका जोalladhīnaمِن(were) beforeminقَبْلُ ۚ(इनसे) पहले थेqabluكَانَथेkānaأَكْثَرُهُمअक्सर उनकेaktharuhumمُّشْرِكِينَमुशरिकmush'rikīna٤٢
आप कह दें कि धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि उन लोगों का अंत कैसा रहा, जो इनसे पहले थे। उनमें अधिकतर मुश्रिक थे।
३०:४३
فَأَقِمْतो क़ायम रखिएfa-aqimوَجْهَكَचेहरा अपनाwajhakaلِلدِّينِto the religionlilddīniٱلْقَيِّمِदुरुस्त दीन के लिएl-qayimiمِنbeforeminقَبْلِइससे पहलेqabliأَنकिanيَأْتِىَआ जाएyatiyaيَوْمٌۭवो दिनyawmunلَّاnotمَرَدَّनहीं कोई टलनाmaraddaلَهُۥउसके लिएlahuمِنَfromminaٱللَّهِ ۖअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinيَصَّدَّعُونَवो जुदा-जुदा हो जाऐंगेyaṣṣaddaʿūna٤٣
अतः आप अपना चेहरा सीधे धर्म पर स्थापित रखें, इससे पहले कि वह दिन आ जाए, जिसे अल्लाह की ओर से टलना नहीं है। उस दिन लोग अलग-अलग1 हो जाएँगे।
३०:४४
مَنजिसनेmanكَفَرَकुफ़्र कियाkafaraفَعَلَيْهِतोउसी पर हैfaʿalayhiكُفْرُهُۥ ۖकुफ़्र उसकाkuf'ruhuوَمَنْऔर जिसनेwamanعَمِلَअमल कियाʿamilaصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanفَلِأَنفُسِهِمْतो अपने ही नफ़्सों के लिएfali-anfusihimيَمْهَدُونَवो राह हमवार कर रहे हैंyamhadūna٤٤
जिसने कुफ़्र किया, उसके कुफ़्र का नुकसान उसी पर है, और जिसने सत्कर्म किया, तो वे अपने ही लिए (आराम का) साधन जुटा रहे हैं।
३०:४५
لِيَجْزِىَताकि वो बदला देliyajziyaٱلَّذِينَउनको जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiمِن(out) ofminفَضْلِهِۦٓ ۚअपने फ़ज़ल सेfaḍlihiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَا(does) notيُحِبُّनहीं वो पसंद करताyuḥibbuٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कोl-kāfirīna٤٥
ताकि वह (अल्लाह) अपने अनुग्रह से उन लोगों को बदला दे, जो ईमान लाए और उन्होंने सत्कर्म किए। निःसंदेह वह काफ़िरों से प्रेम नहीं करता।
३०:४६
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦٓऔर उसकी निशानियों में से हैāyātihiأَنकिanيُرْسِلَवो भेजता हैyur'silaٱلرِّيَاحَहवाऐंl-riyāḥaمُبَشِّرَٰتٍۢख़ुशख़बरी देने वालियाँmubashirātinوَلِيُذِيقَكُمऔर ताकि वो चखाए तुम्हेंwaliyudhīqakumمِّنofminرَّحْمَتِهِۦअपनी रहमत सेraḥmatihiوَلِتَجْرِىَऔर ताकि चलेंwalitajriyaٱلْفُلْكُकश्तियाँl-ful'kuبِأَمْرِهِۦउसके हुक्म सेbi-amrihiوَلِتَبْتَغُوا۟और ताकि तुम तलाश करोwalitabtaghūمِنofminفَضْلِهِۦउसके फ़ज़ल में सेfaḍlihiوَلَعَلَّكُمْऔर ताकि तुमwalaʿallakumتَشْكُرُونَतुम शुक्र अदा करोtashkurūna٤٦
और उसकी निशानियों में से है कि वह शुभ सूचना देने वाली हवाएँ भेजता है, और ताकि तुम्हें अपनी दया (वर्षा) चखाए, और ताकि उसके आदेश से नावें चलें, और ताकि तुम उसका अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो, और ताकि तुम आभार प्रकट करो।
३०:४७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीकwalaqadأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāمِنbefore youminقَبْلِكَआपसे पहलेqablikaرُسُلًاकई रसूलों कrusulanإِلَىٰtoilāقَوْمِهِمْतरफ़ उनकी क़ौम केqawmihimفَجَآءُوهُمतो वो लाए उनके पासfajāūhumبِٱلْبَيِّنَـٰتِवाज़ेह निशानियाँbil-bayinātiفَٱنتَقَمْنَاतो इन्तिक़ाम लिया हमनेfa-intaqamnāمِنَfromminaٱلَّذِينَउनसे जिन्होंनेalladhīnaأَجْرَمُوا۟ ۖजुर्म कियाajramūوَكَانَऔर हैwakānaحَقًّاहक़ḥaqqanعَلَيْنَاहम परʿalaynāنَصْرُमदद करनाnaṣruٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों कीl-mu'minīna٤٧
निश्चय हमने आपसे पहले कई रसूल उनकी जातियों की ओर भेजे। तो वे उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए। फिर हमने उन लोगों से बदला लिया, जिन्होंने अपराध किया। और हमपर ईमान वालों की सहायता1 करना अनिवार्य था।
३०:४८
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىवो है जोalladhīيُرْسِلُभेजता हैyur'siluٱلرِّيَـٰحَहवाओं कोl-riyāḥaفَتُثِيرُतो वो उठाती हैंfatuthīruسَحَابًۭاबादलsaḥābanفَيَبْسُطُهُۥफिर वो फैला देता है उसेfayabsuṭuhuفِىinٱلسَّمَآءِआसमान मेंl-samāiكَيْفَजिस तरहkayfaيَشَآءُवो चाहता हैyashāuوَيَجْعَلُهُۥऔर वो कर देता है उसेwayajʿaluhuكِسَفًۭاटुकड़ियों मेंkisafanفَتَرَىतो आप देखते हैंfatarāٱلْوَدْقَबारिश कोl-wadqaيَخْرُجُवो निकलती हैyakhrujuمِنْfromminخِلَـٰلِهِۦ ۖउसके अन्दर सेkhilālihiفَإِذَآफिर जबfa-idhāأَصَابَवो पहुँचाता हैaṣābaبِهِۦउसेbihiمَنजिसेmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuمِنْofminعِبَادِهِۦٓअपने बन्दों में सेʿibādihiإِذَاयकायकidhāهُمْवोhumيَسْتَبْشِرُونَवो ख़ुश हो जाते हैंyastabshirūna٤٨
अल्लाह ही है, जो हवाओं को भेजता है। तो वे बादल उठाती हैं। फिर वह उसे जैसे चाहता है, आकाश में फैला देता है, और उसे टुकड़े-टुकड़े कर देता है। तो तुम वर्षा की बूँदों को उसके बीच से निकलते देखते हो। फिर जब वह उसे अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, बरसाता है, तो सहसा वे बहुत खुश हो जाते हैं।
३०:४९
وَإِنऔर बेशकwa-inكَانُوا۟थे वोkānūمِنbeforeminقَبْلِइससे पहलेqabliأَنकिanيُنَزَّلَवो बरसाई जाएyunazzalaعَلَيْهِمउन परʿalayhimمِّن[before it]minقَبْلِهِۦइससे पहले हीqablihiلَمُبْلِسِينَयक़ीनन मायूस होने वालेlamub'lisīna٤٩
हालाँकि निश्चय वे इससे पहले, उसके उनपर बरसाए जाने से पहले बहुत निराश थे।
३०:५०
فَٱنظُرْतो देखोfa-unẓurإِلَىٰٓatilāءَاثَـٰرِतरफ़ आसार केāthāriرَحْمَتِ(of the) Mercyraḥmatiٱللَّهِअल्लाह की रहमत केl-lahiكَيْفَकिस तरहkayfaيُحْىِवो ज़िन्दा करता हैyuḥ'yīٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaبَعْدَबादbaʿdaمَوْتِهَآ ۚउसकी मौत केmawtihāإِنَّबेशकinnaذَٰلِكَवो हीdhālikaلَمُحْىِअलबत्ता ज़िन्दा करने वाला हैlamuḥ'yīٱلْمَوْتَىٰ ۖमुर्दों कोl-mawtāوَهُوَऔर वोwahuwaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun٥٠
तो आप अल्लाह की दया के संकेतों को देखें कि वह किस तरह धरती को उसके मृत हो जाने के पश्चात् जीवित करता है! निःसंदेह वही निश्चय मुर्दों को जीवित करने वाला है और वह हर चीज़ में पूरी तरह सक्षम है।
३०:५१
وَلَئِنْऔर अलबत्ता अगरwala-inأَرْسَلْنَاभेजें हमarsalnāرِيحًۭاहवा कोrīḥanفَرَأَوْهُफिर वो देखें उस (खेती) कोfara-awhuمُصْفَرًّۭاज़र्द पड़ी हुईmuṣ'farranلَّظَلُّوا۟अलबत्ता लगें वोlaẓallūمِنۢafter itminبَعْدِهِۦबाद इसकेbaʿdihiيَكْفُرُونَवो नाशुक्री करनेyakfurūna٥١
और निश्चय अगर हम कोई वायु भेजे, फिर वे उस (खेती) को पीली पड़ी हुई देखें, तो वे इसके बाद अवश्य नाशुक्री करने लगेंगे।
३०:५२
فَإِنَّكَपस बेशक आपfa-innakaلَا(can) notتُسْمِعُनहीं आप सुना सकतेtus'miʿuٱلْمَوْتَىٰमुर्दों कोl-mawtāوَلَاऔर नाwalāتُسْمِعُआप सुना सकते हैंtus'miʿuٱلصُّمَّबहरों कl-ṣumaٱلدُّعَآءَपुकारl-duʿāaإِذَاजबidhāوَلَّوْا۟वो मुँह मोड़ जाऐंwallawمُدْبِرِينَपीठ फेरते हुएmud'birīna٥٢
निःसंदेह आप मुर्दों1 को नहीं सुना सकते और न बहरों को (अपनी) पुकार सुना सकते हैं, जब वे पीठ फेरकर लौट जाएँ।
३०:५३
وَمَآऔर नहींwamāأَنتَआपantaبِهَـٰدِहिदायत देने वालेbihādiٱلْعُمْىِअँधों कोl-ʿum'yiعَنfromʿanضَلَـٰلَتِهِمْ ۖउनकी गुमराही सेḍalālatihimإِنनहींinتُسْمِعُआप सुन सकते हैंtus'miʿuإِلَّاमगरillāمَنउसे जोmanيُؤْمِنُईमान रखता होyu'minuبِـَٔايَـٰتِنَاहमारी आयात परbiāyātināفَهُمफिर वोfahumمُّسْلِمُونَफ़रमाबरदार होंmus'limūna٥٣
तथा आप अंधों को उनकी गुमारही से हटाकर सीधे मार्ग पर नहीं ला सकते। आप तो केवल उन्हीं को सुना सकते हैं, जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं। तो वही आज्ञाकारी हैं।
३०:५४
۞ ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىवो है जिसनेalladhīخَلَقَكُمपैदा किया तुम्हेंkhalaqakumمِّنfromminضَعْفٍۢकमज़ोरी सेḍaʿfinثُمَّफिरthummaجَعَلَउसने बनाईjaʿalaمِنۢafterminبَعْدِबादbaʿdiضَعْفٍۢकमज़ोरी केḍaʿfinقُوَّةًۭक़ुव्वतquwwatanثُمَّफिरthummaجَعَلَउसने बनाईjaʿalaمِنۢafterminبَعْدِबादbaʿdiقُوَّةٍۢक़ुव्वत केquwwatinضَعْفًۭاकमज़ोरीḍaʿfanوَشَيْبَةًۭ ۚऔर बुढ़ापाwashaybatanيَخْلُقُवो पैदा करता हैyakhluquمَاजोيَشَآءُ ۖवो चाहता हैyashāuوَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلْعَلِيمُख़ूब जानने वालाl-ʿalīmuٱلْقَدِيرُबहुत क़ुदरत रखने वालाl-qadīru٥٤
अल्लाह वह है, जिसने तुम्हें कमज़ोरी (की स्थिति) से पैदा, फिर (बचपन की) कमज़ोरी के बाद शक्ति प्रदान की, फिर शक्ति के बाद कमज़ोरी और बुढ़ापा1 बना दिया। वह जो चाहता है, पैदा करता है। और वही सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
३०:५५
وَيَوْمَऔर जिस दिनwayawmaتَقُومُक़ायम होगीtaqūmuٱلسَّاعَةُक़यामतl-sāʿatuيُقْسِمُक़समें खाऐंगेyuq'simuٱلْمُجْرِمُونَमुजरिमl-muj'rimūnaمَاनहींلَبِثُوا۟वो ठहरेlabithūغَيْرَसिवाएghayraسَاعَةٍۢ ۚएक घड़ी केsāʿatinكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaكَانُوا۟थे वोkānūيُؤْفَكُونَवो फेरे जातेyu'fakūna٥٥
और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, अपराधी क़समें खाएँगें कि वे घड़ी भर1 से अधिक नहीं ठहरे। इसी तरह वे बहकाए जाते थे।
३०:५६
وَقَالَऔर कहेंगेwaqālaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaأُوتُوا۟दिए गएūtūٱلْعِلْمَइल्मl-ʿil'maوَٱلْإِيمَـٰنَऔर ईमानwal-īmānaلَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadلَبِثْتُمْठहरे रहे तुमlabith'tumفِىbyكِتَـٰبِ(the) Decreekitābiٱللَّهِअल्लाह की किताब मेंl-lahiإِلَىٰuntililāيَوْمِ(the) Dayyawmiٱلْبَعْثِ ۖदोबारा उठने के दिन तकl-baʿthiفَهَـٰذَاतो ये हैfahādhāيَوْمُदिनyawmuٱلْبَعْثِदोबारा उठने काl-baʿthiوَلَـٰكِنَّكُمْऔर लेकिन तुमwalākinnakumكُنتُمْथे तुमkuntumلَاnotتَعْلَمُونَना तुम जानतेtaʿlamūna٥٦
तथा जिन लोगों को ज्ञान और ईमान दिया गया, वे कहेंगे कि तुम अल्लाह के लेख के अनुसार उठाए जाने के दिन तक ठहरे रहे। तो यह उठाए जाने का दिन है। लेकिन तुम नहीं जानते थे।
३०:५७
فَيَوْمَئِذٍۢतो उस दिनfayawma-idhinلَّاnotيَنفَعُना नफ़ा देगीyanfaʿuٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūمَعْذِرَتُهُمْमअज़रत उनकीmaʿdhiratuhumوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيُسْتَعْتَبُونَवो तौबा तलब किए जाऐंगेyus'taʿtabūna٥٧
तो उस दिन, अत्याचारियों को उनका बहाना लाभ न देगा और न उनसे अल्लाह को खुश करने के लिए कहा जाएगा।
३०:५८
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadضَرَبْنَاबयान की हमनेḍarabnāلِلنَّاسِलोगों के लिएlilnnāsiفِىinهَـٰذَاthis hādhāٱلْقُرْءَانِइल क़ुरआन मेंl-qur'āniمِنofminكُلِّहर तरह कीkulliمَثَلٍۢ ۚमिसालmathalinوَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inجِئْتَهُمलाऐं आप उनके पासji'tahumبِـَٔايَةٍۢकोई निशानीbiāyatinلَّيَقُولَنَّअलबत्ता ज़रूर कहेंगेlayaqūlannaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوٓا۟कुफ़्र कियाkafarūإِنْनहींinأَنتُمْहो तुमantumإِلَّاमगरillāمُبْطِلُونَबातिल परस्तmub'ṭilūna٥٨
और निःसंदेह हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर तरह के उदाहरण बयान किए हैं और यदि आप उनके पास कोई निशानी लाएँ, तो निश्चय कुफ़्र करने वाले अवश्य कहेंगे कि तुम तो केवल मिथ्यावादी हो।
३०:५९
كَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيَطْبَعُमोहर लगा देता हैyaṭbaʿuٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىٰ[on]ʿalāقُلُوبِदिलों परqulūbiٱلَّذِينَउन लोगों के जोalladhīnaلَا(do) notيَعْلَمُونَनहीं वो इल्म रखतेyaʿlamūna٥٩
इसी प्रकार, अल्लाह उन लोगों के दिलों पर मुहर लगा देता है, जो नहीं जानते।
३०:६०
فَٱصْبِرْपस सब्र कीजिएfa-iṣ'birإِنَّबेशकinnaوَعْدَवादाwaʿdaٱللَّهِअल्लाह काl-lahiحَقٌّۭ ۖसच्चा हैḥaqqunوَلَاAnd (let) notwalāيَسْتَخِفَّنَّكَऔर हरगिज़ ना हल्का पाऐं आपकोyastakhiffannakaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaلَا(are) notيُوقِنُونَनहीं वो यक़ीन रखतेyūqinūna٦٠
तो आप धैर्य से काम लें। निःसंदेह अल्लाह का वचन सत्य है और वे लोग आपको1 कदापि हल्का (अधीर) न कर दें, जो यक़ीन नहीं रखते।