१०३
अल-अस्र
العصر
सूरह अल-अस्र (العصر) पवित्र क़ुरआन का १०३ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ३ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१०३:१
وَٱلْعَصْرِक़सम है ज़माने कीwal-ʿaṣri١
अस्र के समय की क़सम!
१०३:२
إِنَّबेशकinnaٱلْإِنسَـٰنَइन्सानl-insānaلَفِى(is) surely, inlafīخُسْرٍयक़ीनन ख़सारे में हैkhus'rin٢
निःसंदेह इनसान घाटे में है।1
१०३:३
إِلَّاसिवाएillāٱلَّذِينَउन लोगों के जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiوَتَوَاصَوْا۟और एक दूसरे तो तलक़ीन कीwatawāṣawبِٱلْحَقِّहक़ कीbil-ḥaqiوَتَوَاصَوْا۟और एक दूसरे को तलक़ीन कीwatawāṣawبِٱلصَّبْرِसब्र कीbil-ṣabri٣
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए और एक-दूसरे को सत्य की ताकीद की और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की।1
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