११४
अन-नास
الناس
सूरह अन-नास (الناس) पवित्र क़ुरआन का ११४ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ६ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
११४:१
قُلْकह दीजिएqulأَعُوذُमैं पनाह लेता हूँaʿūdhuبِرَبِّरब कीbirabbiٱلنَّاسِइन्सानों केl-nāsi١
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की।
११४:२
مَلِكِबादशाह कीmalikiٱلنَّاسِइन्सानों केl-nāsi٢
लोगों के बादशाह की।
११४:३
إِلَـٰهِइलाह कीilāhiٱلنَّاسِइन्सानों केl-nāsi٣
लोगों के सत्य पूज्य की।1
११४:४
مِنFromminشَرِّशर सेsharriٱلْوَسْوَاسِवसवसा डालने वाले केl-waswāsiٱلْخَنَّاسِबार-बार पलट कर आने वाले केl-khanāsi٤
वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से।
११४:५
ٱلَّذِىवो जोalladhīيُوَسْوِسُवसवसा डालता हैyuwaswisuفِىinfīصُدُورِसीनों मेंṣudūriٱلنَّاسِलोगों केl-nāsi٥
जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है।
११४:६
مِنَFromminaٱلْجِنَّةِजिन्नों में सेl-jinatiوَٱلنَّاسِऔर इन्सानों में सेwal-nāsi٦
जिन्नों और इनसानों में से।1
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