८०
अबसा
عبس
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ
साथ नाम
bis'mi
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
८०:१
عَبَسَ
उसने तेवरी चढ़ाई
ʿabasa
उसने तेवरी चढ़ाई وَتَوَلَّىٰٓ और उसने मुँह फेर लिया watawallā
और उसने मुँह फेर लिया ١ (1)
(1)
उसने तेवरी चढ़ाई وَتَوَلَّىٰٓ और उसने मुँह फेर लिया watawallā
और उसने मुँह फेर लिया ١ (1)
(1)
उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।
८०:२
أَن
कि
an
कि جَآءَهُ आया उसके पास jāahu
आया उसके पास ٱلْأَعْمَىٰ एक नाबीना l-aʿmā
एक नाबीना ٢ (2)
(2)
कि جَآءَهُ आया उसके पास jāahu
आया उसके पास ٱلْأَعْمَىٰ एक नाबीना l-aʿmā
एक नाबीना ٢ (2)
(2)
इस कारण कि उनके पास अंधा आया।
८०:३
وَمَا
और क्या चीज़
wamā
और क्या चीज़ يُدْرِيكَ बताए आपको yud'rīka
बताए आपको لَعَلَّهُۥ शायद कि वो laʿallahu
शायद कि वो يَزَّكَّىٰٓ वो पाक हो जाता yazzakkā
वो पाक हो जाता ٣ (3)
(3)
और क्या चीज़ يُدْرِيكَ बताए आपको yud'rīka
बताए आपको لَعَلَّهُۥ शायद कि वो laʿallahu
शायद कि वो يَزَّكَّىٰٓ वो पाक हो जाता yazzakkā
वो पाक हो जाता ٣ (3)
(3)
और आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।
८०:४
أَوْ
या
aw
या يَذَّكَّرُ वो नसीहत पकड़ता yadhakkaru
वो नसीहत पकड़ता فَتَنفَعَهُ तो फ़ायदा देती उसे fatanfaʿahu
तो फ़ायदा देती उसे ٱلذِّكْرَىٰٓ नसीहत l-dhik'rā
नसीहत ٤ (4)
(4)
या يَذَّكَّرُ वो नसीहत पकड़ता yadhakkaru
वो नसीहत पकड़ता فَتَنفَعَهُ तो फ़ायदा देती उसे fatanfaʿahu
तो फ़ायदा देती उसे ٱلذِّكْرَىٰٓ नसीहत l-dhik'rā
नसीहत ٤ (4)
(4)
या नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।
८०:५
أَمَّا
रहा
ammā
रहा مَنِ वो जो mani
वो जो ٱسْتَغْنَىٰ बेपरवाही करता है is'taghnā
बेपरवाही करता है ٥ (5)
(5)
रहा مَنِ वो जो mani
वो जो ٱسْتَغْنَىٰ बेपरवाही करता है is'taghnā
बेपरवाही करता है ٥ (5)
(5)
लेकिन जो बेपरवाह हो गया।
८०:६
فَأَنتَ
तो आप
fa-anta
तो आप لَهُۥ उसके लिए lahu
उसके लिए تَصَدَّىٰ आप तवज्जो करते हैं taṣaddā
आप तवज्जो करते हैं ٦ (6)
(6)
तो आप لَهُۥ उसके लिए lahu
उसके लिए تَصَدَّىٰ आप तवज्जो करते हैं taṣaddā
आप तवज्जो करते हैं ٦ (6)
(6)
तो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।
८०:७
وَمَا
हालाँकि नहीं
wamā
हालाँकि नहीं عَلَيْكَ आप पर(ज़िम्मेदारी ) ʿalayka
आप पर(ज़िम्मेदारी ) أَلَّا कि नहीं allā
कि नहीं يَزَّكَّىٰ वो पाक होता yazzakkā
वो पाक होता ٧ (7)
(7)
हालाँकि नहीं عَلَيْكَ आप पर(ज़िम्मेदारी ) ʿalayka
आप पर(ज़िम्मेदारी ) أَلَّا कि नहीं allā
कि नहीं يَزَّكَّىٰ वो पाक होता yazzakkā
वो पाक होता ٧ (7)
(7)
हालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।
८०:८
وَأَمَّا
और रहा
wa-ammā
और रहा مَن वो जो man
वो जो جَآءَكَ आया है आपके पास jāaka
आया है आपके पास يَسْعَىٰ कोशिश करता हुआ yasʿā
कोशिश करता हुआ ٨ (8)
(8)
और रहा مَن वो जो man
वो जो جَآءَكَ आया है आपके पास jāaka
आया है आपके पास يَسْعَىٰ कोशिश करता हुआ yasʿā
कोशिश करता हुआ ٨ (8)
(8)
लेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।
८०:९
وَهُوَ
और वो
wahuwa
और वो يَخْشَىٰ वो डरता है yakhshā
वो डरता है ٩ (9)
(9)
और वो يَخْشَىٰ वो डरता है yakhshā
वो डरता है ٩ (9)
(9)
और वह डर (भी) रहा है।
८०:१०
فَأَنتَ
तो आप
fa-anta
तो आप عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे تَلَهَّىٰ आप बेरुख़ी बरतते हैं talahhā
आप बेरुख़ी बरतते हैं ١٠ (10)
(10)
तो आप عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे تَلَهَّىٰ आप बेरुख़ी बरतते हैं talahhā
आप बेरुख़ी बरतते हैं ١٠ (10)
(10)
तो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।1
८०:११
كَلَّآ
हरगिज़ नहीं
kallā
हरगिज़ नहीं إِنَّهَا बेशक वो innahā
बेशक वो تَذْكِرَةٌۭ एक नसीहत है tadhkiratun
एक नसीहत है ١١ (11)
(11)
हरगिज़ नहीं إِنَّهَا बेशक वो innahā
बेशक वो تَذْكِرَةٌۭ एक नसीहत है tadhkiratun
एक नसीहत है ١١ (11)
(11)
ऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।
८०:१२
فَمَن
तो जो कोई
faman
तो जो कोई شَآءَ चाहे shāa
चाहे ذَكَرَهُۥ नसीहत हासिल करे उससे dhakarahu
नसीहत हासिल करे उससे ١٢ (12)
(12)
तो जो कोई شَآءَ चाहे shāa
चाहे ذَكَرَهُۥ नसीहत हासिल करे उससे dhakarahu
नसीहत हासिल करे उससे ١٢ (12)
(12)
अतः जो चाहे, उसे याद करे।
८०:१३
فِى
In
fī
In صُحُفٍۢ सहीफ़ों में है ṣuḥufin
सहीफ़ों में है مُّكَرَّمَةٍۢ इज़्ज़त दिए गए mukarramatin
इज़्ज़त दिए गए ١٣ (13)
(13)
In صُحُفٍۢ सहीफ़ों में है ṣuḥufin
सहीफ़ों में है مُّكَرَّمَةٍۢ इज़्ज़त दिए गए mukarramatin
इज़्ज़त दिए गए ١٣ (13)
(13)
(यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।
८०:१४
مَّرْفُوعَةٍۢ
बुलन्द मरतबा
marfūʿatin
बुलन्द मरतबा مُّطَهَّرَةٍۭ निहायत पाकीज़ा muṭahharatin
निहायत पाकीज़ा ١٤ (14)
(14)
बुलन्द मरतबा مُّطَهَّرَةٍۭ निहायत पाकीज़ा muṭahharatin
निहायत पाकीज़ा ١٤ (14)
(14)
जो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।
८०:१५
بِأَيْدِى
हाथों में है
bi-aydī
हाथों में है سَفَرَةٍۢ लिखने वालों के safaratin
लिखने वालों के ١٥ (15)
(15)
हाथों में है سَفَرَةٍۢ लिखने वालों के safaratin
लिखने वालों के ١٥ (15)
(15)
ऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।
८०:१६
كِرَامٍۭ
मुअज़्ज़िज़
kirāmin
मुअज़्ज़िज़ بَرَرَةٍۢ नेकोकार bararatin
नेकोकार ١٦ (16)
(16)
मुअज़्ज़िज़ بَرَرَةٍۢ नेकोकार bararatin
नेकोकार ١٦ (16)
(16)
जो माननीय और नेक हैं।1
८०:१७
قُتِلَ
मारा जाए
qutila
मारा जाए ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान مَآ how mā
how أَكْفَرَهُۥ किस क़दर नाशुक्रा है वो akfarahu
किस क़दर नाशुक्रा है वो ١٧ (17)
(17)
मारा जाए ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान مَآ how mā
how أَكْفَرَهُۥ किस क़दर नाशुक्रा है वो akfarahu
किस क़दर नाशुक्रा है वो ١٧ (17)
(17)
सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
८०:१८
مِنْ
From
min
From أَىِّ what ayyi
what شَىْءٍ किस चीज़ से shayin
किस चीज़ से خَلَقَهُۥ उसने पैदा किया उसे khalaqahu
उसने पैदा किया उसे ١٨ (18)
(18)
From أَىِّ what ayyi
what شَىْءٍ किस चीज़ से shayin
किस चीज़ से خَلَقَهُۥ उसने पैदा किया उसे khalaqahu
उसने पैदा किया उसे ١٨ (18)
(18)
(अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?
८०:१९
مِن
From
min
From نُّطْفَةٍ एक नुत्फ़े से nuṭ'fatin
एक नुत्फ़े से خَلَقَهُۥ उसने पैदा किया उसे khalaqahu
उसने पैदा किया उसे فَقَدَّرَهُۥ फिर उसने तक़दीर मुक़र्रर की उसकी faqaddarahu
फिर उसने तक़दीर मुक़र्रर की उसकी ١٩ (19)
(19)
From نُّطْفَةٍ एक नुत्फ़े से nuṭ'fatin
एक नुत्फ़े से خَلَقَهُۥ उसने पैदा किया उसे khalaqahu
उसने पैदा किया उसे فَقَدَّرَهُۥ फिर उसने तक़दीर मुक़र्रर की उसकी faqaddarahu
फिर उसने तक़दीर मुक़र्रर की उसकी ١٩ (19)
(19)
एक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।
८०:२०
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर ٱلسَّبِيلَ रास्ता l-sabīla
रास्ता يَسَّرَهُۥ उसने आसान किया उसका yassarahu
उसने आसान किया उसका ٢٠ (20)
(20)
फिर ٱلسَّبِيلَ रास्ता l-sabīla
रास्ता يَسَّرَهُۥ उसने आसान किया उसका yassarahu
उसने आसान किया उसका ٢٠ (20)
(20)
फिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।
८०:२१
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर أَمَاتَهُۥ उसने मौत दी उसे amātahu
उसने मौत दी उसे فَأَقْبَرَهُۥ फिर उसने क़ब्र दी उसे fa-aqbarahu
फिर उसने क़ब्र दी उसे ٢١ (21)
(21)
फिर أَمَاتَهُۥ उसने मौत दी उसे amātahu
उसने मौत दी उसे فَأَقْبَرَهُۥ फिर उसने क़ब्र दी उसे fa-aqbarahu
फिर उसने क़ब्र दी उसे ٢١ (21)
(21)
फिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।
८०:२२
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर إِذَا जब idhā
जब شَآءَ वो चाहेगा shāa
वो चाहेगा أَنشَرَهُۥ वो उठा खड़ा करेगा उसे ansharahu
वो उठा खड़ा करेगा उसे ٢٢ (22)
(22)
फिर إِذَا जब idhā
जब شَآءَ वो चाहेगा shāa
वो चाहेगा أَنشَرَهُۥ वो उठा खड़ा करेगा उसे ansharahu
वो उठा खड़ा करेगा उसे ٢٢ (22)
(22)
फिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।
८०:२३
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
kallā
हरगिज़ नहीं لَمَّا अभी तक नहीं lammā
अभी तक नहीं يَقْضِ उसने पूरा किया yaqḍi
उसने पूरा किया مَآ जो mā
जो أَمَرَهُۥ उसने हुक्म दिया था उसे amarahu
उसने हुक्म दिया था उसे ٢٣ (23)
(23)
हरगिज़ नहीं لَمَّا अभी तक नहीं lammā
अभी तक नहीं يَقْضِ उसने पूरा किया yaqḍi
उसने पूरा किया مَآ जो mā
जो أَمَرَهُۥ उसने हुक्म दिया था उसे amarahu
उसने हुक्म दिया था उसे ٢٣ (23)
(23)
हरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।1
८०:२४
فَلْيَنظُرِ
पस चाहिए कि देखे
falyanẓuri
पस चाहिए कि देखे ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान إِلَىٰ at ilā
at طَعَامِهِۦٓ तरफ़ अपने खाने के ṭaʿāmihi
तरफ़ अपने खाने के ٢٤ (24)
(24)
पस चाहिए कि देखे ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान إِلَىٰ at ilā
at طَعَامِهِۦٓ तरफ़ अपने खाने के ṭaʿāmihi
तरफ़ अपने खाने के ٢٤ (24)
(24)
अतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।
८०:२५
اَنَّا
बेशक हम
annā
बेशक हम صَبَبْنَا उँडेला हमने ṣababnā
उँडेला हमने ٱلْمَآءَ पानी l-māa
पानी صَبًّۭا ख़ूब उँडेलना ṣabban
ख़ूब उँडेलना ٢٥ (25)
(25)
बेशक हम صَبَبْنَا उँडेला हमने ṣababnā
उँडेला हमने ٱلْمَآءَ पानी l-māa
पानी صَبًّۭا ख़ूब उँडेलना ṣabban
ख़ूब उँडेलना ٢٥ (25)
(25)
कि हमने ख़ूब पानी बरसाया।
८०:२६
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर شَقَقْنَا फाड़ी हमने shaqaqnā
फाड़ी हमने ٱلْأَرْضَ ज़मीन l-arḍa
ज़मीन شَقًّۭا ख़ूब फाड़ना shaqqan
ख़ूब फाड़ना ٢٦ (26)
(26)
फिर شَقَقْنَا फाड़ी हमने shaqaqnā
फाड़ी हमने ٱلْأَرْضَ ज़मीन l-arḍa
ज़मीन شَقًّۭا ख़ूब फाड़ना shaqqan
ख़ूब फाड़ना ٢٦ (26)
(26)
फिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।
८०:२७
فَأَنۢبَتْنَا
फिर उगाया हमने
fa-anbatnā
फिर उगाया हमने فِيهَا उसमें fīhā
उसमें حَبًّۭا ग़ल्ला ḥabban
ग़ल्ला ٢٧ (27)
(27)
फिर उगाया हमने فِيهَا उसमें fīhā
उसमें حَبًّۭا ग़ल्ला ḥabban
ग़ल्ला ٢٧ (27)
(27)
फिर हमने उसमें अनाज उगाया।
८०:२८
وَعِنَبًۭا
और उंगूर
waʿinaban
और उंगूर وَقَضْبًۭا और तरकारी waqaḍban
और तरकारी ٢٨ (28)
(28)
और उंगूर وَقَضْبًۭا और तरकारी waqaḍban
और तरकारी ٢٨ (28)
(28)
तथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।
८०:२९
وَزَيْتُونًۭا
और ज़ैतून
wazaytūnan
और ज़ैतून وَنَخْلًۭا और खजूर wanakhlan
और खजूर ٢٩ (29)
(29)
और ज़ैतून وَنَخْلًۭا और खजूर wanakhlan
और खजूर ٢٩ (29)
(29)
तथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।
८०:३०
وَحَدَآئِقَ
और बाग़ात
waḥadāiqa
और बाग़ात غُلْبًۭا घने ghul'ban
घने ٣٠ (30)
(30)
और बाग़ात غُلْبًۭا घने ghul'ban
घने ٣٠ (30)
(30)
तथा घने बाग़।
८०:३१
وَفَـٰكِهَةًۭ
और फल
wafākihatan
और फल وَأَبًّۭا और चारा wa-abban
और चारा ٣١ (31)
(31)
और फल وَأَبًّۭا और चारा wa-abban
और चारा ٣١ (31)
(31)
तथा फल और चारा।
८०:३२
مَّتَـٰعًۭا
फ़ायदे की चीज़ें हैं
matāʿan
फ़ायदे की चीज़ें हैं لَّكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ और तुम्हारे मवेशियों के लिए wali-anʿāmikum
और तुम्हारे मवेशियों के लिए ٣٢ (32)
(32)
फ़ायदे की चीज़ें हैं لَّكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ और तुम्हारे मवेशियों के लिए wali-anʿāmikum
और तुम्हारे मवेशियों के लिए ٣٢ (32)
(32)
तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।1
८०:३३
فَإِذَا
तो जब
fa-idhā
तो जब جَآءَتِ आ जाएगी jāati
आ जाएगी ٱلصَّآخَّةُ कान बहरा कर देने वाली सख़्त आवाज़ l-ṣākhatu
कान बहरा कर देने वाली सख़्त आवाज़ ٣٣ (33)
(33)
तो जब جَآءَتِ आ जाएगी jāati
आ जाएगी ٱلصَّآخَّةُ कान बहरा कर देने वाली सख़्त आवाज़ l-ṣākhatu
कान बहरा कर देने वाली सख़्त आवाज़ ٣٣ (33)
(33)
तो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।
८०:३४
يَوْمَ
उस दिन
yawma
उस दिन يَفِرُّ भागेगा yafirru
भागेगा ٱلْمَرْءُ इन्सान l-maru
इन्सान مِنْ from min
from أَخِيهِ अपने भाई से akhīhi
अपने भाई से ٣٤ (34)
(34)
उस दिन يَفِرُّ भागेगा yafirru
भागेगा ٱلْمَرْءُ इन्सान l-maru
इन्सान مِنْ from min
from أَخِيهِ अपने भाई से akhīhi
अपने भाई से ٣٤ (34)
(34)
जिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।
८०:३५
وَأُمِّهِۦ
और अपनी माँ से
wa-ummihi
और अपनी माँ से وَأَبِيهِ और अपने बाप से wa-abīhi
और अपने बाप से ٣٥ (35)
(35)
और अपनी माँ से وَأَبِيهِ और अपने बाप से wa-abīhi
और अपने बाप से ٣٥ (35)
(35)
तथा अपनी माता और अपने पिता (से)।
८०:३६
وَصَـٰحِبَتِهِۦ
और अपनी बीवी से
waṣāḥibatihi
और अपनी बीवी से وَبَنِيهِ और अपने बेटों से wabanīhi
और अपने बेटों से ٣٦ (36)
(36)
और अपनी बीवी से وَبَنِيهِ और अपने बेटों से wabanīhi
और अपने बेटों से ٣٦ (36)
(36)
तथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।
८०:३७
لِكُلِّ
वास्ते हर
likulli
वास्ते हर ٱمْرِئٍۢ शख़्स के im'ri-in
शख़्स के مِّنْهُمْ उनमें से min'hum
उनमें से يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन شَأْنٌۭ ऐसी हालत होगी shanun
ऐसी हालत होगी يُغْنِيهِ जो बेपरवा कर देगी उसे yugh'nīhi
जो बेपरवा कर देगी उसे ٣٧ (37)
(37)
वास्ते हर ٱمْرِئٍۢ शख़्स के im'ri-in
शख़्स के مِّنْهُمْ उनमें से min'hum
उनमें से يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन شَأْنٌۭ ऐसी हालत होगी shanun
ऐसी हालत होगी يُغْنِيهِ जो बेपरवा कर देगी उसे yugh'nīhi
जो बेपरवा कर देगी उसे ٣٧ (37)
(37)
उस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।
८०:३८
وُجُوهٌۭ
कुछ चेहरे
wujūhun
कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन مُّسْفِرَةٌۭ रौशन होंगे mus'firatun
रौशन होंगे ٣٨ (38)
(38)
कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन مُّسْفِرَةٌۭ रौशन होंगे mus'firatun
रौशन होंगे ٣٨ (38)
(38)
उस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।
८०:३९
ضَاحِكَةٌۭ
हँसते होंगे
ḍāḥikatun
हँसते होंगे مُّسْتَبْشِرَةٌۭ ख़ुशख़बरी पाने वाले होंगे mus'tabshiratun
ख़ुशख़बरी पाने वाले होंगे ٣٩ (39)
(39)
हँसते होंगे مُّسْتَبْشِرَةٌۭ ख़ुशख़बरी पाने वाले होंगे mus'tabshiratun
ख़ुशख़बरी पाने वाले होंगे ٣٩ (39)
(39)
हँसते हुए, प्रसन्न होंगे।
८०:४०
وَوُجُوهٌۭ
और कुछ चेहरे
wawujūhun
और कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍ उस दिन yawma-idhin
उस दिन عَلَيْهَا उन पर ʿalayhā
उन पर غَبَرَةٌۭ ग़ुबार होगा ghabaratun
ग़ुबार होगा ٤٠ (40)
(40)
और कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍ उस दिन yawma-idhin
उस दिन عَلَيْهَا उन पर ʿalayhā
उन पर غَبَرَةٌۭ ग़ुबार होगा ghabaratun
ग़ुबार होगा ٤٠ (40)
(40)
तथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।
८०:४१
تَرْهَقُهَا
छा रही होगी उन पर
tarhaquhā
छा रही होगी उन पर قَتَرَةٌ स्याही qataratun
स्याही ٤١ (41)
(41)
छा रही होगी उन पर قَتَرَةٌ स्याही qataratun
स्याही ٤١ (41)
(41)
उनपर कालिमा छाई होगी।
८०:४२
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग हैं
ulāika
यही लोग हैं هُمُ वो humu
वो ٱلْكَفَرَةُ जो काफ़िर हैं l-kafaratu
जो काफ़िर हैं ٱلْفَجَرَةُ फ़ाजिर हैं l-fajaratu
फ़ाजिर हैं ٤٢ (42)
(42)
यही लोग हैं هُمُ वो humu
वो ٱلْكَفَرَةُ जो काफ़िर हैं l-kafaratu
जो काफ़िर हैं ٱلْفَجَرَةُ फ़ाजिर हैं l-fajaratu
फ़ाजिर हैं ٤٢ (42)
(42)
वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।1