२९

अल-अनकबूत

मक्की ६९ आयतें पारा २०
العنكبوت
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
२९:१
الٓمٓ ا ل م alif-lam-meem
ا ل م
١ (1)
(1)
अलिफ़, लाम, मीम।
२९:२
أَحَسِبَ क्या समझ लिया है aḥasiba
क्या समझ लिया है
ٱلنَّاسُ लोगों ने l-nāsu
लोगों ने
أَن कि an
कि
يُتْرَكُوٓا۟ वो छोड़ दिए जाऐंगे yut'rakū
वो छोड़ दिए जाऐंगे
أَن ये कि an
ये कि
يَقُولُوٓا۟ वो कह दें yaqūlū
वो कह दें
ءَامَنَّا ईमान लाए हम āmannā
ईमान लाए हम
وَهُمْ और वो wahum
और वो
لَا will not be tested
will not be tested
يُفْتَنُونَ ना वो आज़माए जाऐंगे yuf'tanūna
ना वो आज़माए जाऐंगे
٢ (2)
(2)
क्या लोगों ने यह समझ लिया है कि वे केवल यह कहने पर छोड़ दिए जाएँगे कि "हम ईमान लाए" और उनकी परीक्षा न ली जाएगी?
२९:३
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
فَتَنَّا आज़माया हमने fatannā
आज़माया हमने
ٱلَّذِينَ उनको जो alladhīna
उनको जो
مِن (were) before them min
(were) before them
قَبْلِهِمْ ۖ उनसे पहले थे qablihim
उनसे पहले थे
فَلَيَعْلَمَنَّ पस अलबत्ता ज़रूर जान लेगा falayaʿlamanna
पस अलबत्ता ज़रूर जान लेगा
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
ٱلَّذِينَ उन लोगों को जिन्होंने alladhīna
उन लोगों को जिन्होंने
صَدَقُوا۟ सच कहा ṣadaqū
सच कहा
وَلَيَعْلَمَنَّ और अलबत्ता वो ज़रूर जान लेगा walayaʿlamanna
और अलबत्ता वो ज़रूर जान लेगा
ٱلْكَـٰذِبِينَ झूठों को l-kādhibīna
झूठों को
٣ (3)
(3)
हालाँकि निःसंदेह हमने उन लोगों की परीक्षा ली जो इनसे पहले थे। अतः अल्लाह उन लोगों को अवश्य जान लेगा जिन्होंने सच कहा, तथा वह उन लोगों को (भी) अवश्य जान लेगा जो झूठे हैं।
२९:४
أَمْ या am
या
حَسِبَ समझ लिया ḥasiba
समझ लिया
ٱلَّذِينَ उन लोगों ने जो alladhīna
उन लोगों ने जो
يَعْمَلُونَ अमल करते हैं yaʿmalūna
अमल करते हैं
ٱلسَّيِّـَٔاتِ बुरे l-sayiāti
बुरे
أَن कि an
कि
يَسْبِقُونَا ۚ वो सबक़त ले जाऐंगे हमसे yasbiqūnā
वो सबक़त ले जाऐंगे हमसे
سَآءَ कितना बुरा है sāa
कितना बुरा है
مَا जो
जो
يَحْكُمُونَ वो फ़ैसला कर रहे हैं yaḥkumūna
वो फ़ैसला कर रहे हैं
٤ (4)
(4)
या उन लोगों ने जो बुरे काम करते हैं, यह समझ लिया है कि वे हमसे बचकर निकल जाएँगे? बुरा है जो वे निर्णय कर रहे हैं।
२९:५
مَن जो कोई man
जो कोई
كَانَ हो kāna
हो
يَرْجُوا۟ उम्मीद रखता yarjū
उम्मीद रखता
لِقَآءَ (for the) meeting liqāa
(for the) meeting
ٱللَّهِ अल्लाह से मुलाक़ात की l-lahi
अल्लाह से मुलाक़ात की
فَإِنَّ तो बेशक fa-inna
तो बेशक
أَجَلَ मुक़र्ररह वक़्त ajala
मुक़र्ररह वक़्त
ٱللَّهِ अल्लाह का l-lahi
अल्लाह का
لَـَٔاتٍۢ ۚ अलबत्ता आने वाला है laātin
अलबत्ता आने वाला है
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
ٱلسَّمِيعُ ख़ूब सुनने वाला है l-samīʿu
ख़ूब सुनने वाला है
ٱلْعَلِيمُ ख़ूब जानने वाला है l-ʿalīmu
ख़ूब जानने वाला है
٥ (5)
(5)
जो अल्लाह से मिलने1 की आशा रखता हो, तो निःसंदेह अल्लाह का नियत समय2 अवश्य आने वाला है। और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने3 वाला है।
२९:६
وَمَن और जो कोई waman
और जो कोई
جَـٰهَدَ जिहाद करे jāhada
जिहाद करे
فَإِنَّمَا तो बेशक fa-innamā
तो बेशक
يُجَـٰهِدُ वो जिहाद करता है yujāhidu
वो जिहाद करता है
لِنَفْسِهِۦٓ ۚ अपने नफ़्स के लिए linafsihi
अपने नफ़्स के लिए
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
لَغَنِىٌّ अलबत्ता बहुत बेनियाज़ है laghaniyyun
अलबत्ता बहुत बेनियाज़ है
عَنِ of ʿani
of
ٱلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहान वालों से l-ʿālamīna
तमाम जहान वालों से
٦ (6)
(6)
और जो व्यक्ति संघर्ष करता है, तो वह अपने ही लिए संघर्ष करता है। निश्चय अल्लाह सारे संसार से बड़ा बेपरवाह है।
२९:७
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
لَنُكَفِّرَنَّ अलबत्ता हम ज़रूर दूर कर देंगे lanukaffiranna
अलबत्ता हम ज़रूर दूर कर देंगे
عَنْهُمْ उनसे ʿanhum
उनसे
سَيِّـَٔاتِهِمْ बुराइयाँ उनकी sayyiātihim
बुराइयाँ उनकी
وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ और अलबत्ता हम ज़रूर बदला देंगे उन्हें walanajziyannahum
और अलबत्ता हम ज़रूर बदला देंगे उन्हें
أَحْسَنَ बेहतरीन aḥsana
बेहतरीन
ٱلَّذِى उसका जो alladhī
उसका जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَعْمَلُونَ वो अमल करते yaʿmalūna
वो अमल करते
٧ (7)
(7)
तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, निश्चय हम उनसे उनकी बुराइयाँ अवश्य दूर कर देंगे तथा निश्चय उन्हें उस कार्य का उत्तम बदला अवश्य देंगे जो वे किया करते थे।
२९:८
وَوَصَّيْنَا और ताकीद की हमने wawaṣṣaynā
और ताकीद की हमने
ٱلْإِنسَـٰنَ इन्सान को l-insāna
इन्सान को
بِوَٰلِدَيْهِ अपने वालिदैन के साथ biwālidayhi
अपने वालिदैन के साथ
حُسْنًۭا ۖ भलाई (करने) की ḥus'nan
भलाई (करने) की
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
جَـٰهَدَاكَ वो दोनों ज़ोर डालें तुम पर jāhadāka
वो दोनों ज़ोर डालें तुम पर
لِتُشْرِكَ ताकि तुम शरीक करो litush'rika
ताकि तुम शरीक करो
بِى मेरे साथ
मेरे साथ
مَا उसको जो
उसको जो
لَيْسَ नहीं है laysa
नहीं है
لَكَ तुम्हें laka
तुम्हें
بِهِۦ जिसका bihi
जिसका
عِلْمٌۭ कोई इल्म ʿil'mun
कोई इल्म
فَلَا तो ना falā
तो ना
تُطِعْهُمَآ ۚ तुम इताअत करो उन दोनों की tuṭiʿ'humā
तुम इताअत करो उन दोनों की
إِلَىَّ मेरी ही तरफ़ ilayya
मेरी ही तरफ़
مَرْجِعُكُمْ लौटना है तुम्हारा marjiʿukum
लौटना है तुम्हारा
فَأُنَبِّئُكُم तो मैं बताऊँगा तुम्हें fa-unabbi-ukum
तो मैं बताऊँगा तुम्हें
بِمَا वो जो bimā
वो जो
كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम
تَعْمَلُونَ तुम अमल किया करते taʿmalūna
तुम अमल किया करते
٨ (8)
(8)
और हमने मनुष्य को अपने माँ-बाप के साथ भलाई करने की ताकीद1 की है और यदि वे तुझपर ज़ोर डालें कि तू मेरे साथ उस चीज़ को साझी ठहराए, जिसका तुझको कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात न मान।2 तुम्हें मेरी ओर ही लौटकर आना है। फिर मैं तुम्हें बताऊँगा जो तुम किया करते थे।
२९:९
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
لَنُدْخِلَنَّهُمْ अलबत्ता हम ज़रूर दाख़िल करेंगे उन्हें lanud'khilannahum
अलबत्ता हम ज़रूर दाख़िल करेंगे उन्हें
فِى among
among
ٱلصَّـٰلِحِينَ नेक लोगों में l-ṣāliḥīna
नेक लोगों में
٩ (9)
(9)
और जो लोग ईमान लाए तथा अच्छे कर्म किए, हम उन्हें अवश्य सदाचारियों में सम्मिलित करेंगे।
२९:१०
وَمِنَ And of wamina
And of
ٱلنَّاسِ और लोगों में से कोई है l-nāsi
और लोगों में से कोई है
مَن जो man
जो
يَقُولُ कहता है yaqūlu
कहता है
ءَامَنَّا ईमान लाए हम āmannā
ईमान लाए हम
بِٱللَّهِ अल्लाह पर bil-lahi
अल्लाह पर
فَإِذَآ फिर जब fa-idhā
फिर जब
أُوذِىَ वो अज़ियत दिया जाता है ūdhiya
वो अज़ियत दिया जाता है
فِى in
in
ٱللَّهِ अल्लाह (की राह) में l-lahi
अल्लाह (की राह) में
جَعَلَ वो बना लेता है jaʿala
वो बना लेता है
فِتْنَةَ आज़माइश को fit'nata
आज़माइश को
ٱلنَّاسِ लोगों की l-nāsi
लोगों की
كَعَذَابِ as (the) punishment kaʿadhābi
as (the) punishment
ٱللَّهِ अल्लाह के आज़ाब की तरह l-lahi
अल्लाह के आज़ाब की तरह
وَلَئِن और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
جَآءَ आ गई jāa
आ गई
نَصْرٌۭ मदद naṣrun
मदद
مِّن from min
from
رَّبِّكَ आपके रब की तरफ़ से rabbika
आपके रब की तरफ़ से
لَيَقُولُنَّ अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे layaqūlunna
अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
كُنَّا थे हम kunnā
थे हम
مَعَكُمْ ۚ साथ तुम्हारे maʿakum
साथ तुम्हारे
أَوَلَيْسَ क्या भला नहीं awalaysa
क्या भला नहीं
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
بِأَعْلَمَ ख़ूब जानता bi-aʿlama
ख़ूब जानता
بِمَا उसे जो bimā
उसे जो
فِى (is) in
(is) in
صُدُورِ सीनों में है ṣudūri
सीनों में है
ٱلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहान वालों के l-ʿālamīna
तमाम जहान वालों के
١٠ (10)
(10)
और लोगों में से कुछ ऐसे हैं, जो कहते हैं : हम अल्लाह पर ईमान लाए। फिर जब अल्लाह के मामले में उसे सताया जए, तो लोगों के सताने को अल्लाह की यातना के समान समझ लेता है। और निश्चय यदि आपके पालनहार की ओर से कोई सहायता आ जाए, तो निश्चय ज़रूर कहेंगे : हम तो तुम्हारे साथ थे। और क्या अल्लाह उसे अधिक जानने वाला नहीं, जो सारे संसार के दिलों में है?
२९:११
وَلَيَعْلَمَنَّ और अलबत्ता ज़रूर जान लेगा walayaʿlamanna
और अलबत्ता ज़रूर जान लेगा
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
ٱلَّذِينَ उनको जो alladhīna
उनको जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَلَيَعْلَمَنَّ और अलबत्ता वो ज़रूर जान लेगा walayaʿlamanna
और अलबत्ता वो ज़रूर जान लेगा
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ मुनाफ़िक़ों को l-munāfiqīna
मुनाफ़िक़ों को
١١ (11)
(11)
और निश्चय अल्लाह उन लोगों को अवश्य जान लेगा, जो ईमान लाए तथा निश्चय उन्हें भी अवश्य जान लेगा, जो मुनाफ़िक़ हैं।
२९:१२
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱلَّذِينَ उन लोगों ने जिन्होंने alladhīna
उन लोगों ने जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
لِلَّذِينَ उन लोगों से जो lilladhīna
उन लोगों से जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
ٱتَّبِعُوا۟ पैरवी कर ittabiʿū
पैरवी कर
سَبِيلَنَا हमारे रास्ते की sabīlanā
हमारे रास्ते की
وَلْنَحْمِلْ और हम ज़रूर उठा लेंगे walnaḥmil
और हम ज़रूर उठा लेंगे
خَطَـٰيَـٰكُمْ ख़ताऐं तुम्हारी khaṭāyākum
ख़ताऐं तुम्हारी
وَمَا हालाँकि नहीं wamā
हालाँकि नहीं
هُم वो hum
वो
بِحَـٰمِلِينَ उठाने वाले biḥāmilīna
उठाने वाले
مِنْ of min
of
خَطَـٰيَـٰهُم उनकी ख़ताओं में से khaṭāyāhum
उनकी ख़ताओं में से
مِّن any min
any
شَىْءٍ ۖ कोई चीज़ shayin
कोई चीज़
إِنَّهُمْ बेशक वो innahum
बेशक वो
لَكَـٰذِبُونَ अलबत्ता झूठे हैं lakādhibūna
अलबत्ता झूठे हैं
١٢ (12)
(12)
और काफ़िरों ने उन लोगों से कहा जो ईमान लाए कि तुम हमारे पथ पर चलो और हम तुम्हारे पापों का बोझ उठा लेंगे। हालाँकि वे कदापि उनके पापों में से कुछ भी उठाने वाले नहीं हैं। बेशक वे निश्चय झूठे हैं।
२९:१३
وَلَيَحْمِلُنَّ और अलबत्ता वो ज़रूर उठाऐंगे walayaḥmilunna
और अलबत्ता वो ज़रूर उठाऐंगे
أَثْقَالَهُمْ बोझ अपने athqālahum
बोझ अपने
وَأَثْقَالًۭا और कई बोझ wa-athqālan
और कई बोझ
مَّعَ साथ maʿa
साथ
أَثْقَالِهِمْ ۖ अपने बोझों के athqālihim
अपने बोझों के
وَلَيُسْـَٔلُنَّ और अलबत्ता वो ज़रूर पूछे जाऐंगे walayus'alunna
और अलबत्ता वो ज़रूर पूछे जाऐंगे
يَوْمَ दिन yawma
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ क़यामत के l-qiyāmati
क़यामत के
عَمَّا उस चीज़ के बारे में जो ʿammā
उस चीज़ के बारे में जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَفْتَرُونَ वो गढ़ा करते yaftarūna
वो गढ़ा करते
١٣ (13)
(13)
और निश्चय वे अवश्य अपने बोझ उठाएँगे और अपने बोझों के साथ कई और1 बोझ भी। और निश्चय वे क़ियामत के दिन उसके बारे में अवश्य पूछे जाएँगे, जो वे झूठ गढ़ा करते थे।
२९:१४
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
أَرْسَلْنَا भेजा हमने arsalnā
भेजा हमने
نُوحًا नूह को nūḥan
नूह को
إِلَىٰ to ilā
to
قَوْمِهِۦ तरफ़ उसकी क़ौम के qawmihi
तरफ़ उसकी क़ौम के
فَلَبِثَ तो वो रहा falabitha
तो वो रहा
فِيهِمْ उनमें fīhim
उनमें
أَلْفَ एक हज़ार alfa
एक हज़ार
سَنَةٍ साल sanatin
साल
إِلَّا मगर illā
मगर
خَمْسِينَ पचास khamsīna
पचास
عَامًۭا साल (कम) ʿāman
साल (कम)
فَأَخَذَهُمُ तो पकड़ लिया उन्हें fa-akhadhahumu
तो पकड़ लिया उन्हें
ٱلطُّوفَانُ तूफ़ान ने l-ṭūfānu
तूफ़ान ने
وَهُمْ जबकि वे wahum
जबकि वे
ظَـٰلِمُونَ ज़ालिम थे ẓālimūna
ज़ालिम थे
١٤ (14)
(14)
और निःसंदेह हमने1 नूह़ को उसकी जाति की ओर भेजा, तो वह उनके बीच पचास वर्ष कम हज़ार वर्ष2 रहा। फिर उन्हें तूफ़ान ने पकड़ लिया इस स्थिति में कि वे अत्याचारी थे।
२९:१५
فَأَنجَيْنَـٰهُ तो निजात दी हमने उसे fa-anjaynāhu
तो निजात दी हमने उसे
وَأَصْحَـٰبَ and (the) people wa-aṣḥāba
and (the) people
ٱلسَّفِينَةِ और कश्ती वालों को l-safīnati
और कश्ती वालों को
وَجَعَلْنَـٰهَآ और बना दिया हमने उसे wajaʿalnāhā
और बना दिया हमने उसे
ءَايَةًۭ एक निशानी āyatan
एक निशानी
لِّلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहान वालों के लिए lil'ʿālamīna
तमाम जहान वालों के लिए
١٥ (15)
(15)
फिर हमने उसे और नाव वालों को बचा लिया और उस (नाव) को सारे संसार के लिए एक निशानी बना दिया।
२९:१६
وَإِبْرَٰهِيمَ और इब्राहीम को wa-ib'rāhīma
और इब्राहीम को
إِذْ जब idh
जब
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
لِقَوْمِهِ अपनी क़ौम से liqawmihi
अपनी क़ौम से
ٱعْبُدُوا۟ इबादत करो uʿ'budū
इबादत करो
ٱللَّهَ अल्लाह की l-laha
अल्लाह की
وَٱتَّقُوهُ ۖ और डरो उससे wa-ittaqūhu
और डरो उससे
ذَٰلِكُمْ ये dhālikum
ये
خَيْرٌۭ बेहतर है khayrun
बेहतर है
لَّكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
إِن अगर in
अगर
كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम
تَعْلَمُونَ तुम जानते taʿlamūna
तुम जानते
١٦ (16)
(16)
तथा इबराहीम को (याद करो) जब उसने अपनी जाति से कहा : अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानते हो।
२९:१७
إِنَّمَا बेशक innamā
बेशक
تَعْبُدُونَ तुम इबादत करते हो taʿbudūna
तुम इबादत करते हो
مِن besides min
besides
دُونِ सिवाए dūni
सिवाए
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
أَوْثَـٰنًۭا कुछ बुतों की awthānan
कुछ बुतों की
وَتَخْلُقُونَ और तुम गढ़ते हो watakhluqūna
और तुम गढ़ते हो
إِفْكًا ۚ झूट if'kan
झूट
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जिनकी alladhīna
वो जिनकी
تَعْبُدُونَ तुम इबादत करते हो taʿbudūna
तुम इबादत करते हो
مِن besides min
besides
دُونِ सिवाए dūni
सिवाए
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
لَا (do) not
(do) not
يَمْلِكُونَ नहीं वो मालिक हो सकते yamlikūna
नहीं वो मालिक हो सकते
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
رِزْقًۭا रिज़्क़ के riz'qan
रिज़्क़ के
فَٱبْتَغُوا۟ पस तलाश करो fa-ib'taghū
पस तलाश करो
عِندَ from ʿinda
from
ٱللَّهِ अल्लाह के पास l-lahi
अल्लाह के पास
ٱلرِّزْقَ रिज़्क़ l-riz'qa
रिज़्क़
وَٱعْبُدُوهُ और इबादत करो उसकी wa-uʿ'budūhu
और इबादत करो उसकी
وَٱشْكُرُوا۟ और शुक्र अदा करो wa-ush'kurū
और शुक्र अदा करो
لَهُۥٓ ۖ उसका lahu
उसका
إِلَيْهِ तरफ़ उसी के ilayhi
तरफ़ उसी के
تُرْجَعُونَ तुम लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम लौटाए जाओगे
١٧ (17)
(17)
तुम अल्लाह के सिवा कुछ मूर्तियों ही की तो पूजा करते हो और तुम घोर झूठ गढ़ते हो। निःसंदेह अल्लाह के सिवा जिनकी तुम पूजा करते हो, वे तुम्हारे लिए किसी रोज़ी के मालिक नहीं हैं। अतः तुम अल्लाह के पास ही रोज़ी तलाश करो और उसकी इबादत करो और उसका शुक्र करो। तुम उसी की तरफ़ लौटाए जाओगे।
२९:१८
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
تُكَذِّبُوا۟ तुम झुठलाते हो tukadhibū
तुम झुठलाते हो
فَقَدْ पस तहक़ीक़ faqad
पस तहक़ीक़
كَذَّبَ झुठलाया kadhaba
झुठलाया
أُمَمٌۭ उम्मतों ने umamun
उम्मतों ने
مِّن before you min
before you
قَبْلِكُمْ ۖ जो तुम से पहले थीं qablikum
जो तुम से पहले थीं
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
عَلَى (is) on ʿalā
(is) on
ٱلرَّسُولِ रसूल पर l-rasūli
रसूल पर
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلْبَلَـٰغُ पहुँचा देना l-balāghu
पहुँचा देना
ٱلْمُبِينُ वाज़ेह तौर पर l-mubīnu
वाज़ेह तौर पर
١٨ (18)
(18)
और यदि तुम झुठलाते हो, तो तुमसे पहले (भी) बहुत-से समुदायों ने झुठलाया है और रसूल का दायित्व1 स्पष्ट रूप से पहुँचा देने के सिवा कुछ नहीं है।
२९:१९
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा
كَيْفَ किस तरह kayfa
किस तरह
يُبْدِئُ इब्तिदा करता है yub'di-u
इब्तिदा करता है
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
ٱلْخَلْقَ मख़लूक़ की l-khalqa
मख़लूक़ की
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يُعِيدُهُۥٓ ۚ वो एआदा करेगा उसका yuʿīduhu
वो एआदा करेगा उसका
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
عَلَى for ʿalā
for
ٱللَّهِ अल्लाह पर l-lahi
अल्लाह पर
يَسِيرٌۭ बहुत आसान है yasīrun
बहुत आसान है
١٩ (19)
(19)
क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह किस प्रकार सृष्टि का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराएगा? निश्चय ही यह अल्लाह के लिए अत्यंत सरल है।
२९:२०
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
سِيرُوا۟ चलो-फिरो sīrū
चलो-फिरो
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
فَٱنظُرُوا۟ फिर देखो fa-unẓurū
फिर देखो
كَيْفَ किस तरह kayfa
किस तरह
بَدَأَ उसने इब्तिदा की bada-a
उसने इब्तिदा की
ٱلْخَلْقَ ۚ मख़लूक़ की l-khalqa
मख़लूक़ की
ثُمَّ फिर thumma
फिर
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
يُنشِئُ वो उठाएगा yunshi-u
वो उठाएगा
ٱلنَّشْأَةَ उठाना l-nashata
उठाना
ٱلْـَٔاخِرَةَ ۚ आख़िरी बार l-ākhirata
आख़िरी बार
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
كُلِّ हर kulli
हर
شَىْءٍۢ चीज़ के shayin
चीज़ के
قَدِيرٌۭ ख़ूब क़ुदरत रखना वाला है qadīrun
ख़ूब क़ुदरत रखना वाला है
٢٠ (20)
(20)
कह दें : धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि उसने किस प्रकार सृष्टि का आरंभ किया? फिर अल्लाह ही दूसरी बार पैदा1 करेगा। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु पर सर्वशक्तिमान है।
२९:२१
يُعَذِّبُ वो अज़ाब देता है yuʿadhibu
वो अज़ाब देता है
مَن जिसे man
जिसे
يَشَآءُ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
وَيَرْحَمُ और वो रहम करता है wayarḥamu
और वो रहम करता है
مَن जिस पर man
जिस पर
يَشَآءُ ۖ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
وَإِلَيْهِ और उसी की तरफ़ wa-ilayhi
और उसी की तरफ़
تُقْلَبُونَ तुम लौटाए जाओगे tuq'labūna
तुम लौटाए जाओगे
٢١ (21)
(21)
वह जिसे चाहता है, दंड देता है और जिसपर चाहता है दया करता है, और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
२९:२२
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَنتُم तुम antum
तुम
بِمُعْجِزِينَ आजिज़ करने वाले bimuʿ'jizīna
आजिज़ करने वाले
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
وَلَا और ना walā
और ना
فِى in
in
ٱلسَّمَآءِ ۖ आसमान में l-samāi
आसमान में
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
مِّن besides min
besides
دُونِ सिवाए dūni
सिवाए
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
مِن any min
any
وَلِىٍّۢ कोई दोस्त waliyyin
कोई दोस्त
وَلَا और ना walā
और ना
نَصِيرٍۢ कोई मददगार naṣīrin
कोई मददगार
٢٢ (22)
(22)
और न तुम किसी भी तरह धरती में विवश करने वाले हो और न आकाश में, और न अल्लाह के अलावा तुम्हारा कोई दोस्त है और न कोई मददगार।
२९:२३
وَٱلَّذِينَ और वो जिन्होंने wa-alladhīna
और वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
بِـَٔايَـٰتِ in (the) Signs biāyāti
in (the) Signs
ٱللَّهِ अल्लाह की आयात का l-lahi
अल्लाह की आयात का
وَلِقَآئِهِۦٓ और उसकी मुलाक़ात का waliqāihi
और उसकी मुलाक़ात का
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही लोग हैं ulāika
यही लोग हैं
يَئِسُوا۟ जो मायूस हो गए ya-isū
जो मायूस हो गए
مِن of min
of
رَّحْمَتِى मेरी रहमत से raḥmatī
मेरी रहमत से
وَأُو۟لَـٰٓئِكَ और यही लग हैं wa-ulāika
और यही लग हैं
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
عَذَابٌ अज़ाब है ʿadhābun
अज़ाब है
أَلِيمٌۭ दर्दनाक alīmun
दर्दनाक
٢٣ (23)
(23)
तथा जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों और उससे मिलने का इनकार किया, वे मेरी दया से निराश हो गए हैं और वही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक यातना है।
२९:२४
فَمَا तो ना famā
तो ना
كَانَ था kāna
था
جَوَابَ जवाब jawāba
जवाब
قَوْمِهِۦٓ उसकी क़ौम का qawmihi
उसकी क़ौम का
إِلَّآ मगर illā
मगर
أَن ये कि an
ये कि
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
ٱقْتُلُوهُ क़त्ल कर दो उसे uq'tulūhu
क़त्ल कर दो उसे
أَوْ या aw
या
حَرِّقُوهُ जला डालो उसे ḥarriqūhu
जला डालो उसे
فَأَنجَىٰهُ तो निजात दी उसे fa-anjāhu
तो निजात दी उसे
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
مِنَ from mina
from
ٱلنَّارِ ۚ आग से l-nāri
आग से
إِنَّ बेशक inna
बेशक
فِى in
in
ذَٰلِكَ इसमें dhālika
इसमें
لَـَٔايَـٰتٍۢ अलबत्ता निशानियाँ हैं laāyātin
अलबत्ता निशानियाँ हैं
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يُؤْمِنُونَ जो ईमान लाते हैं yu'minūna
जो ईमान लाते हैं
٢٤ (24)
(24)
फिर उस (इबराहीम) की जाति का उत्तर बस यही था कि उन्होंने कहा कि इसे क़त्ल कर दो, या इसे जला दो। तो अल्लाह ने उसे आग से बचा लिया। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं जो ईमान रखते हैं।
२९:२५
وَقَالَ और उसने कहा waqāla
और उसने कहा
إِنَّمَا बेशक innamā
बेशक
ٱتَّخَذْتُم बना लिया तुमने ittakhadhtum
बना लिया तुमने
مِّن besides min
besides
دُونِ सिवाए dūni
सिवाए
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
أَوْثَـٰنًۭا बुतों को awthānan
बुतों को
مَّوَدَّةَ मोहब्बत का ज़रिया mawaddata
मोहब्बत का ज़रिया
بَيْنِكُمْ आपस में baynikum
आपस में
فِى in
in
ٱلْحَيَوٰةِ ज़िन्दगी में l-ḥayati
ज़िन्दगी में
ٱلدُّنْيَا ۖ दुनिया की l-dun'yā
दुनिया की
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يَوْمَ दिन yawma
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ क़यामत के l-qiyāmati
क़यामत के
يَكْفُرُ इन्कार करेगा yakfuru
इन्कार करेगा
بَعْضُكُم बाज़ तुम्हारा baʿḍukum
बाज़ तुम्हारा
بِبَعْضٍۢ बाज़ का bibaʿḍin
बाज़ का
وَيَلْعَنُ और लानत करेगा wayalʿanu
और लानत करेगा
بَعْضُكُم बाज़ तुम्हारा baʿḍukum
बाज़ तुम्हारा
بَعْضًۭا बाज़ को baʿḍan
बाज़ को
وَمَأْوَىٰكُمُ और ठिकाना तुम्हारा wamawākumu
और ठिकाना तुम्हारा
ٱلنَّارُ आग है l-nāru
आग है
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
مِّن any min
any
نَّـٰصِرِينَ कोई मददगार nāṣirīna
कोई मददगार
٢٥ (25)
(25)
और उसने कहा : बात यही है कि तुमने अल्लाह के सिवा मूर्तियाँ बना रखी हैं, दुनिया के जीवन में पारस्परिक दोस्ती के कारण। फिर क़ियामत के दिन तुम एक-दूसरे का इनकार करोगे तथा तुम एक-दूसरे पर ला'नत करोगे। और तुम्हारा ठिकाना आग ही है और तुम्हारे लिए कोई मदद करने वाले नहीं।
२९:२६
۞ فَـَٔامَنَ तो ईमान लाया faāmana
तो ईमान लाया
لَهُۥ उस पर lahu
उस पर
لُوطٌۭ ۘ लूत lūṭun
लूत
وَقَالَ और उसने कहा waqāla
और उसने कहा
إِنِّى बेशक innī
बेशक
مُهَاجِرٌ हिजरत करने वाला हूँ muhājirun
हिजरत करने वाला हूँ
إِلَىٰ to ilā
to
رَبِّىٓ ۖ तरफ़ अपने रब के rabbī
तरफ़ अपने रब के
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلْعَزِيزُ बहुत ज़बरदस्त l-ʿazīzu
बहुत ज़बरदस्त
ٱلْحَكِيمُ ख़ूब हिकमत वाला है l-ḥakīmu
ख़ूब हिकमत वाला है
٢٦ (26)
(26)
तो लूत1 उसपर ईमान ले आया। और उस (इबराहीम) ने कहा : निःसंदेह मैं अपने रब2 की ओर हिजरत करने वाला हूँ। निश्चय वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
२९:२७
وَوَهَبْنَا और अता कर दिया हमने wawahabnā
और अता कर दिया हमने
لَهُۥٓ उसे lahu
उसे
إِسْحَـٰقَ इस्हाक़ is'ḥāqa
इस्हाक़
وَيَعْقُوبَ और याक़ूब wayaʿqūba
और याक़ूब
وَجَعَلْنَا और रख दी हमने wajaʿalnā
और रख दी हमने
فِى in
in
ذُرِّيَّتِهِ उसकी औलाद में dhurriyyatihi
उसकी औलाद में
ٱلنُّبُوَّةَ नुबूव्वत l-nubuwata
नुबूव्वत
وَٱلْكِتَـٰبَ और किताब wal-kitāba
और किताब
وَءَاتَيْنَـٰهُ और अता किया हमने उसे waātaynāhu
और अता किया हमने उसे
أَجْرَهُۥ अजर उसका ajrahu
अजर उसका
فِى in
in
ٱلدُّنْيَا ۖ दुनिया में l-dun'yā
दुनिया में
وَإِنَّهُۥ और बेशक वो wa-innahu
और बेशक वो
فِى in
in
ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत में l-ākhirati
आख़िरत में
لَمِنَ (is) surely, among lamina
(is) surely, among
ٱلصَّـٰلِحِينَ अलबत्ता सालेह लोगों में से है l-ṣāliḥīna
अलबत्ता सालेह लोगों में से है
٢٧ (27)
(27)
और हमने उसे इसह़ाक़ तथा याक़ूब प्रदान किया। तथा हमने उसकी संतान में नुबुव्वत तथा किताब रख दी। और हमने उसे दुनिया में उसका बदला दिया और निःसंदेह वह आख़िरत में निश्चय नेक लोगों में से है।
२९:२८
وَلُوطًا और लूत को walūṭan
और लूत को
إِذْ जब idh
जब
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
لِقَوْمِهِۦٓ अपनी क़ौम से liqawmihi
अपनी क़ौम से
إِنَّكُمْ बेशक तुम innakum
बेशक तुम
لَتَأْتُونَ अलबत्ता तुम आते हो latatūna
अलबत्ता तुम आते हो
ٱلْفَـٰحِشَةَ बेहयाई को l-fāḥishata
बेहयाई को
مَا नहीं
नहीं
سَبَقَكُم सबक़त की तुम पर sabaqakum
सबक़त की तुम पर
بِهَا साथ इसके bihā
साथ इसके
مِنْ any min
any
أَحَدٍۢ किसी एक ने aḥadin
किसी एक ने
مِّنَ from mina
from
ٱلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहान वालों में से l-ʿālamīna
तमाम जहान वालों में से
٢٨ (28)
(28)
तथा लूत को (याद करो) जब उसने अपनी जाति से कहा : तुम तो वह निर्लज्जता का कार्य करते हो, जो तुमसे पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया।
२९:२९
أَئِنَّكُمْ क्या बेशक तुम a-innakum
क्या बेशक तुम
لَتَأْتُونَ अलबत्ता तुम आते हो latatūna
अलबत्ता तुम आते हो
ٱلرِّجَالَ मर्दों को l-rijāla
मर्दों को
وَتَقْطَعُونَ और तुम काटते हो wataqṭaʿūna
और तुम काटते हो
ٱلسَّبِيلَ रास्ते l-sabīla
रास्ते
وَتَأْتُونَ और तुम आते हो watatūna
और तुम आते हो
فِى in
in
نَادِيكُمُ अपनी मजलिसों में nādīkumu
अपनी मजलिसों में
ٱلْمُنكَرَ ۖ बुरे कामों को l-munkara
बुरे कामों को
فَمَا तो ना famā
तो ना
كَانَ था kāna
था
جَوَابَ जवाब jawāba
जवाब
قَوْمِهِۦٓ उसकी क़ौम का qawmihi
उसकी क़ौम का
إِلَّآ मगर illā
मगर
أَن ये कि an
ये कि
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
ٱئْتِنَا ले आ हम पर i'tinā
ले आ हम पर
بِعَذَابِ अज़ाब biʿadhābi
अज़ाब
ٱللَّهِ अल्लाह का l-lahi
अल्लाह का
إِن अगर in
अगर
كُنتَ है तू kunta
है तू
مِنَ of mina
of
ٱلصَّـٰدِقِينَ सच्चों में से l-ṣādiqīna
सच्चों में से
٢٩ (29)
(29)
क्या तुम सचमुच पुरुषों के पास जाते हो और (यात्रियों का) रास्ता काटते हो तथा अपनी सभा में बुरे काम करते हो? तो उसकी जाति का उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा : हम पर अल्लाह की यातना ले आ, यदि तू सच्चा है।
२९:३०
قَالَ कहा qāla
कहा
رَبِّ ऐ मेरे रब rabbi
ऐ मेरे रब
ٱنصُرْنِى मदद फ़रमा मेरी unṣur'nī
मदद फ़रमा मेरी
عَلَى ऊपर ʿalā
ऊपर
ٱلْقَوْمِ इन लोगों के l-qawmi
इन लोगों के
ٱلْمُفْسِدِينَ जो मुफ़सिद हैं l-muf'sidīna
जो मुफ़सिद हैं
٣٠ (30)
(30)
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इन बिगाड़ पैदा करने वाले लोगों के विरुद्ध मेरी सहायता कर।
२९:३१
وَلَمَّا और जब walammā
और जब
جَآءَتْ आए jāat
आए
رُسُلُنَآ भेजे हुए(फ़रिश्ते)हमारे rusulunā
भेजे हुए(फ़रिश्ते)हमारे
إِبْرَٰهِيمَ इब्राहीम के पास ib'rāhīma
इब्राहीम के पास
بِٱلْبُشْرَىٰ ख़ुशख़बरी लेकर bil-bush'rā
ख़ुशख़बरी लेकर
قَالُوٓا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
مُهْلِكُوٓا۟ हलाक करने वाले हैं muh'likū
हलाक करने वाले हैं
أَهْلِ रहने वालों को ahli
रहने वालों को
هَـٰذِهِ इस hādhihi
इस
ٱلْقَرْيَةِ ۖ बस्ती के l-qaryati
बस्ती के
إِنَّ बेशक inna
बेशक
أَهْلَهَا इसके रहने वाले ahlahā
इसके रहने वाले
كَانُوا۟ हैं वो kānū
हैं वो
ظَـٰلِمِينَ ज़ालिम ẓālimīna
ज़ालिम
٣١ (31)
(31)
और जब हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) इबराहीम के पास शुभ-सूचना लेकर आए, तो उन्होंने कहा : निश्चय हम इस बस्ती के वासियों को विनष्ट करने वाले हैं। निःसंदेह इसके निवासी अत्याचारी रहे हैं।
२९:३२
قَالَ इब्राहीम ने कहा qāla
इब्राहीम ने कहा
إِنَّ बेशक inna
बेशक
فِيهَا इसमें fīhā
इसमें
لُوطًۭا ۚ लूत है lūṭan
लूत है
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
نَحْنُ हम naḥnu
हम
أَعْلَمُ ज़्यादा जानते हैं aʿlamu
ज़्यादा जानते हैं
بِمَن उसे जो biman
उसे जो
فِيهَا ۖ इस में है fīhā
इस में है
لَنُنَجِّيَنَّهُۥ अलबत्ता हम ज़रूर निजात देंगे उसे lanunajjiyannahu
अलबत्ता हम ज़रूर निजात देंगे उसे
وَأَهْلَهُۥٓ और उसके घर वालों को wa-ahlahu
और उसके घर वालों को
إِلَّا सिवाए illā
सिवाए
ٱمْرَأَتَهُۥ उसकी बीवी के im'ra-atahu
उसकी बीवी के
كَانَتْ है वो kānat
है वो
مِنَ (is) of mina
(is) of
ٱلْغَـٰبِرِينَ पीछे रहने वालों में से l-ghābirīna
पीछे रहने वालों में से
٣٢ (32)
(32)
उसने कहा : उसमें तो लूत है। उन्होंने कहा : हम उसे अधिक जानने वाले हैं, जो उसमें है। निश्चय हम उसे और उसके घर वालों को अवश्य बचा लेंगे, सिवाय उसकी पत्नी के। वह पीछे रहने वालों में से है।
२९:३३
وَلَمَّآ और जब walammā
और जब
أَن ये कि an
ये कि
جَآءَتْ आ गए jāat
आ गए
رُسُلُنَا भेजे हुए(फ़रिश्ते)हमारे rusulunā
भेजे हुए(फ़रिश्ते)हमारे
لُوطًۭا लूत के पास lūṭan
लूत के पास
سِىٓءَ वो परेशान हुआ sīa
वो परेशान हुआ
بِهِمْ उनसे bihim
उनसे
وَضَاقَ और वो तंग हुआ waḍāqa
और वो तंग हुआ
بِهِمْ उनसे bihim
उनसे
ذَرْعًۭا दिल में dharʿan
दिल में
وَقَالُوا۟ और उन्होंने कहा waqālū
और उन्होंने कहा
لَا (Do) not
(Do) not
تَخَفْ ना तुम डरो takhaf
ना तुम डरो
وَلَا और ना walā
और ना
تَحْزَنْ ۖ तुम ग़म करो taḥzan
तुम ग़म करो
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
مُنَجُّوكَ निजात देने वाले हैं तुझे munajjūka
निजात देने वाले हैं तुझे
وَأَهْلَكَ और तेरे घर वालों को wa-ahlaka
और तेरे घर वालों को
إِلَّا सिवाए illā
सिवाए
ٱمْرَأَتَكَ तेरी बीवी के im'ra-ataka
तेरी बीवी के
كَانَتْ है वो kānat
है वो
مِنَ (is) of mina
(is) of
ٱلْغَـٰبِرِينَ पीछे रहने वालों में से l-ghābirīna
पीछे रहने वालों में से
٣٣ (33)
(33)
और जब हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) लूत के पास आए, तो वह उनके आने से उदास हुआ और उनके कारण उसका मन व्याकुल1 हो गया। और उन्होंने कहा : न डरो और न शोक करो। निःसंदेह हम तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को बचाने वाले हैं, सिवाय तुम्हारी पत्नी के, वह पीछो रह जाने वालों में से है।
२९:३४
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
مُنزِلُونَ नाज़िल करने वाले हैं munzilūna
नाज़िल करने वाले हैं
عَلَىٰٓ ऊपर ʿalā
ऊपर
أَهْلِ रहने वालों के ahli
रहने वालों के
هَـٰذِهِ इस hādhihi
इस
ٱلْقَرْيَةِ बस्ती के l-qaryati
बस्ती के
رِجْزًۭا एक अज़ाब rij'zan
एक अज़ाब
مِّنَ from mina
from
ٱلسَّمَآءِ आसमान से l-samāi
आसमान से
بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَفْسُقُونَ वो नाफ़रमानी करते yafsuqūna
वो नाफ़रमानी करते
٣٤ (34)
(34)
निःसंदेह हम इस बस्ती वालों पर आकाश से एक यातना उतारने वाले हैं, इस कारण कि वे अवज्ञा किया करते थे।
२९:३५
وَلَقَد और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
تَّرَكْنَا छोड़ दी हमने taraknā
छोड़ दी हमने
مِنْهَآ इसमें min'hā
इसमें
ءَايَةًۢ एक निशानी āyatan
एक निशानी
بَيِّنَةًۭ खुली bayyinatan
खुली
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يَعْقِلُونَ जो अक़्ल रखते हैं yaʿqilūna
जो अक़्ल रखते हैं
٣٥ (35)
(35)
तथा निःसंदेह हमने उससे उन लोगों के लिए एक स्पष्ट निशानी छोड़ दी, जो समझ-बूझ रखते हैं।
२९:३६
وَإِلَىٰ और तरफ़ wa-ilā
और तरफ़
مَدْيَنَ मदयन के madyana
मदयन के
أَخَاهُمْ उनके भाई akhāhum
उनके भाई
شُعَيْبًۭا शुऐब को(भेजा) shuʿayban
शुऐब को(भेजा)
فَقَالَ तो उसने कहा faqāla
तो उसने कहा
يَـٰقَوْمِ ऐ मेरी क़ौम yāqawmi
ऐ मेरी क़ौम
ٱعْبُدُوا۟ इबादत करो uʿ'budū
इबादत करो
ٱللَّهَ अल्लाह की l-laha
अल्लाह की
وَٱرْجُوا۟ और उम्मीद रखो wa-ir'jū
और उम्मीद रखो
ٱلْيَوْمَ the Day l-yawma
the Day
ٱلْـَٔاخِرَ आख़िरी दिन की l-ākhira
आख़िरी दिन की
وَلَا और ना walā
और ना
تَعْثَوْا۟ तुम फ़साद करो taʿthaw
तुम फ़साद करो
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
مُفْسِدِينَ मुफ़सिद बन कर muf'sidīna
मुफ़सिद बन कर
٣٦ (36)
(36)
तथा मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को (भेजा), तो उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो तथा आख़िरत के दिन1 की आशा रखो और धरती में बिगाड़ पैदा करने वाले बनकर उपद्रव न मचाओ।
२९:३७
فَكَذَّبُوهُ तो उन्होंने झुठला दिया उसे fakadhabūhu
तो उन्होंने झुठला दिया उसे
فَأَخَذَتْهُمُ तो पकड़ लिया उन्हें fa-akhadhathumu
तो पकड़ लिया उन्हें
ٱلرَّجْفَةُ एक ज़लज़ले ने l-rajfatu
एक ज़लज़ले ने
فَأَصْبَحُوا۟ तो सुबह की उन्होंने fa-aṣbaḥū
तो सुबह की उन्होंने
فِى in
in
دَارِهِمْ अपने घरों में dārihim
अपने घरों में
جَـٰثِمِينَ घुटनों के बल गिरने वाले jāthimīna
घुटनों के बल गिरने वाले
٣٧ (37)
(37)
तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अंततः उन्हें भूकंप ने पकड़ लिया, फिर वे अपने घरों में औंधे मुँह पड़े रह गए।
२९:३८
وَعَادًۭا और आद waʿādan
और आद
وَثَمُودَا۟ और समूद को (हलाक किया) wathamūdā
और समूद को (हलाक किया)
وَقَد और तहक़ीक़ waqad
और तहक़ीक़
تَّبَيَّنَ वाज़ेह हो गई (हालत) tabayyana
वाज़ेह हो गई (हालत)
لَكُم तुम पर lakum
तुम पर
مِّن from min
from
مَّسَـٰكِنِهِمْ ۖ उनके घरों से masākinihim
उनके घरों से
وَزَيَّنَ और मुज़य्यन कर दिए wazayyana
और मुज़य्यन कर दिए
لَهُمُ उनके लिए lahumu
उनके लिए
ٱلشَّيْطَـٰنُ शैतान ने l-shayṭānu
शैतान ने
أَعْمَـٰلَهُمْ आमाल उनके aʿmālahum
आमाल उनके
فَصَدَّهُمْ तो उसने रोक दिया उन्हें faṣaddahum
तो उसने रोक दिया उन्हें
عَنِ from ʿani
from
ٱلسَّبِيلِ रास्ते से l-sabīli
रास्ते से
وَكَانُوا۟ और थे वो wakānū
और थे वो
مُسْتَبْصِرِينَ बहुत देखने वाले / समझदार mus'tabṣirīna
बहुत देखने वाले / समझदार
٣٨ (38)
(38)
तथा हमने आद और समूद को भी विनष्ट कर दिया और उनके आवासों से तुम्हारे लिए (उनका विनाश) स्पष्ट हो चुका है। और शैतान ने उनके लिए उनके कर्मों को शोभनीय बना दिया था। अतः उसने उन्हें सीधे रास्ते से रोक दिया था, हालाँकि वे बहुत समझ-बूझ वाले थे।
२९:३९
وَقَـٰرُونَ और क़ारून waqārūna
और क़ारून
وَفِرْعَوْنَ और फ़िरऔन wafir'ʿawna
और फ़िरऔन
وَهَـٰمَـٰنَ ۖ और हामान wahāmāna
और हामान
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
جَآءَهُم आए उनके पास jāahum
आए उनके पास
مُّوسَىٰ मूसा mūsā
मूसा
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ साथ वाज़ेह निशानियों के bil-bayināti
साथ वाज़ेह निशानियों के
فَٱسْتَكْبَرُوا۟ तो उन्होंने तकब्बुर किया fa-is'takbarū
तो उन्होंने तकब्बुर किया
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
وَمَا और ना wamā
और ना
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
سَـٰبِقِينَ भाग जाने वाले (हमसे) sābiqīna
भाग जाने वाले (हमसे)
٣٩ (39)
(39)
तथा क़ारून और फ़िरऔन और हामान को (विनष्ट किया) और निःसंदेह उनके पास मूसा खुली निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने धरती में अभिमान किया और वे बच निकलने1 वाले न थे।
२९:४०
فَكُلًّا तो हर एक को fakullan
तो हर एक को
أَخَذْنَا पकड़ लिया हमने akhadhnā
पकड़ लिया हमने
بِذَنۢبِهِۦ ۖ बवजह उसके गुनाह के bidhanbihi
बवजह उसके गुनाह के
فَمِنْهُم तो उनमें से कोई है famin'hum
तो उनमें से कोई है
مَّنْ जो man
जो
أَرْسَلْنَا भेजी हमने arsalnā
भेजी हमने
عَلَيْهِ जिस पर ʿalayhi
जिस पर
حَاصِبًۭا पत्थरों की आँधी ḥāṣiban
पत्थरों की आँधी
وَمِنْهُم और उनमें से कोई है wamin'hum
और उनमें से कोई है
مَّنْ जो man
जो
أَخَذَتْهُ पकड़ लिया उसको akhadhathu
पकड़ लिया उसको
ٱلصَّيْحَةُ चिंघाड़ ने l-ṣayḥatu
चिंघाड़ ने
وَمِنْهُم और उनमें से कोई है wamin'hum
और उनमें से कोई है
مَّنْ जो man
जो
خَسَفْنَا धँसा दिया हमने khasafnā
धँसा दिया हमने
بِهِ साथ उसके bihi
साथ उसके
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
وَمِنْهُم और उनमें से कोई है wamin'hum
और उनमें से कोई है
مَّنْ जिसे man
जिसे
أَغْرَقْنَا ۚ ग़र्क़ कर दिया हमने aghraqnā
ग़र्क़ कर दिया हमने
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
كَانَ है kāna
है
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لِيَظْلِمَهُمْ कि वो ज़ुल्म करे उन पर liyaẓlimahum
कि वो ज़ुल्म करे उन पर
وَلَـٰكِن और लेकिन walākin
और लेकिन
كَانُوٓا۟ थे वो kānū
थे वो
أَنفُسَهُمْ अपनी ही जानों पर anfusahum
अपनी ही जानों पर
يَظْلِمُونَ वो ज़ुल्म करते yaẓlimūna
वो ज़ुल्म करते
٤٠ (40)
(40)
तो हमने हर एक को उसके पाप के कारण पकड़ लिया। फिर उनमें से कुछ पर हमने पथराव करने वाली हवा1 भेजी, और उनमें से कुछ को चीख2 ने पकड़ लिया, और उनमें से कुछ को हमने धरती में धँसा3 दिया और उनमें से कुछ को हमने डुबो4 दिया। तथा अल्लाह ऐसा नहीं था कि उनपर अत्याचार करे, परंतु वे स्वयं अपने आपपर अत्याचार करते थे।
२९:४१
مَثَلُ मिसाल mathalu
मिसाल
ٱلَّذِينَ उनकी जिन्होंने alladhīna
उनकी जिन्होंने
ٱتَّخَذُوا۟ बना लिए ittakhadhū
बना लिए
مِن besides min
besides
دُونِ सिवाए dūni
सिवाए
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
أَوْلِيَآءَ कुछ वली/ दोस्त awliyāa
कुछ वली/ दोस्त
كَمَثَلِ मानिन्द मिसाल kamathali
मानिन्द मिसाल
ٱلْعَنكَبُوتِ एक मकड़ी के है l-ʿankabūti
एक मकड़ी के है
ٱتَّخَذَتْ जिसने बना लिया ittakhadhat
जिसने बना लिया
بَيْتًۭا ۖ एक घर baytan
एक घर
وَإِنَّ और बेशक wa-inna
और बेशक
أَوْهَنَ सब से कमज़ोर awhana
सब से कमज़ोर
ٱلْبُيُوتِ घरों में l-buyūti
घरों में
لَبَيْتُ अलबत्ता घर है labaytu
अलबत्ता घर है
ٱلْعَنكَبُوتِ ۖ मकड़ी का l-ʿankabūti
मकड़ी का
لَوْ काश कि law
काश कि
كَانُوا۟ होते वो kānū
होते वो
يَعْلَمُونَ वो इल्म रखते yaʿlamūna
वो इल्म रखते
٤١ (41)
(41)
उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने अल्लाह के सिवा अन्य संरक्षक बना रखे हैं, मकड़ी के उदाहरण जैसा है, जिसने एक घर बनाया। हालाँकि, निःसंदेह सब घरों से कमज़ोर1 तो मकड़ी का घर है, अगर वे जानते होते।
२९:४२
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
مَا जिसे
जिसे
يَدْعُونَ वो पुकारते हैं yadʿūna
वो पुकारते हैं
مِن besides Him min
besides Him
دُونِهِۦ उसके सिवा dūnihi
उसके सिवा
مِن any min
any
شَىْءٍۢ ۚ किसी भी चीज़ को shayin
किसी भी चीज़ को
وَهُوَ और वो ही है wahuwa
और वो ही है
ٱلْعَزِيزُ बहुत ज़बरदस्त l-ʿazīzu
बहुत ज़बरदस्त
ٱلْحَكِيمُ ख़ूब हिकमत वाला l-ḥakīmu
ख़ूब हिकमत वाला
٤٢ (42)
(42)
निश्चय ही अल्लाह जानता है जिसे वे उसे छोड़कर पुकारते हैं कोई भी चीज़ हो, और वही सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
२९:४३
وَتِلْكَ और ये watil'ka
और ये
ٱلْأَمْثَـٰلُ मिसालें हैं l-amthālu
मिसालें हैं
نَضْرِبُهَا हम बयान करते हैं उन्हें naḍribuhā
हम बयान करते हैं उन्हें
لِلنَّاسِ ۖ लोगों के लिए lilnnāsi
लोगों के लिए
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
يَعْقِلُهَآ समझते उन्हें yaʿqiluhā
समझते उन्हें
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلْعَـٰلِمُونَ इल्म रखने वाले l-ʿālimūna
इल्म रखने वाले
٤٣ (43)
(43)
और ये उदाहरण हैं, जो हम लोगों के लिए प्रस्तुत करते हैं और इन्हें केवल जानने वाले ही समझते हैं।
२९:४४
خَلَقَ पैदा किया khalaqa
पैदा किया
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों को l-samāwāti
आसमानों को
وَٱلْأَرْضَ और ज़मीन को wal-arḍa
और ज़मीन को
بِٱلْحَقِّ ۚ साथ हक़ के bil-ḥaqi
साथ हक़ के
إِنَّ यक़ीनन inna
यक़ीनन
فِى in
in
ذَٰلِكَ इसमें dhālika
इसमें
لَـَٔايَةًۭ अलबत्ता एक निशानी है laāyatan
अलबत्ता एक निशानी है
لِّلْمُؤْمِنِينَ ईमान लाने वालों के लिए lil'mu'minīna
ईमान लाने वालों के लिए
٤٤ (44)
(44)
अल्लाह ने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया। निःसंदेह इसमें ईमान वालों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।1
२९:४५
ٱتْلُ तिलावत कीजिए ut'lu
तिलावत कीजिए
مَآ जो
जो
أُوحِىَ वही किया गया ūḥiya
वही किया गया
إِلَيْكَ आपकी तरफ़ ilayka
आपकी तरफ़
مِنَ of mina
of
ٱلْكِتَـٰبِ किताब में से l-kitābi
किताब में से
وَأَقِمِ और क़ायम कीजिए wa-aqimi
और क़ायम कीजिए
ٱلصَّلَوٰةَ ۖ नमाज़ l-ṣalata
नमाज़
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلصَّلَوٰةَ नमाज़ l-ṣalata
नमाज़
تَنْهَىٰ रोकती है tanhā
रोकती है
عَنِ from ʿani
from
ٱلْفَحْشَآءِ बेहयाई से l-faḥshāi
बेहयाई से
وَٱلْمُنكَرِ ۗ और बुराई से wal-munkari
और बुराई से
وَلَذِكْرُ और अलबत्ता ज़िक्र waladhik'ru
और अलबत्ता ज़िक्र
ٱللَّهِ अल्लाह का l-lahi
अल्लाह का
أَكْبَرُ ۗ सबसे बड़ा है akbaru
सबसे बड़ा है
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
مَا जो कुछ
जो कुछ
تَصْنَعُونَ तुम करते हो taṣnaʿūna
तुम करते हो
٤٥ (45)
(45)
आप उस पुस्तक को पढ़ें, जो आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है तथा नमाज़ क़ायम करें। निःसंदेह नमाज़ निर्लज्जता और बुराई से रोकती है। और निश्चय अल्लाह का स्मरण सबसे बड़ा है और अल्लाह जानता है1, जो कुछ तुम करते हो।
२९:४६
۞ وَلَا और ना walā
और ना
تُجَـٰدِلُوٓا۟ तुम झगड़ा करो tujādilū
तुम झगड़ा करो
أَهْلَ (with the) People of the Book ahla
(with the) People of the Book
ٱلْكِتَـٰبِ अहले किताब से l-kitābi
अहले किताब से
إِلَّا मगर illā
मगर
بِٱلَّتِى उस तरीक़े से जो bi-allatī
उस तरीक़े से जो
هِىَ वो hiya
वो
أَحْسَنُ सबसे अच्छा है aḥsanu
सबसे अच्छा है
إِلَّا सिवाए illā
सिवाए
ٱلَّذِينَ उनके जिन्होंने alladhīna
उनके जिन्होंने
ظَلَمُوا۟ ज़ुल्म किया ẓalamū
ज़ुल्म किया
مِنْهُمْ ۖ उनमें से min'hum
उनमें से
وَقُولُوٓا۟ और कहो waqūlū
और कहो
ءَامَنَّا ईमान लाए हम āmannā
ईमान लाए हम
بِٱلَّذِىٓ उस पर जो bi-alladhī
उस पर जो
أُنزِلَ नाज़िल किया गया unzila
नाज़िल किया गया
إِلَيْنَا हमारी तरफ़ ilaynā
हमारी तरफ़
وَأُنزِلَ और नाज़िल किया गया wa-unzila
और नाज़िल किया गया
إِلَيْكُمْ तुम्हारी तरफ़ ilaykum
तुम्हारी तरफ़
وَإِلَـٰهُنَا और इलाह हमारा wa-ilāhunā
और इलाह हमारा
وَإِلَـٰهُكُمْ और इलाह तुम्हारा wa-ilāhukum
और इलाह तुम्हारा
وَٰحِدٌۭ एक ही है wāḥidun
एक ही है
وَنَحْنُ और हम wanaḥnu
और हम
لَهُۥ उसी के lahu
उसी के
مُسْلِمُونَ फ़रमाबरदार हैं mus'limūna
फ़रमाबरदार हैं
٤٦ (46)
(46)
और तुम किताब वालों1 से केवल ऐसे तरीक़े से वाद-विवाद करो, जो सबसे उत्तम हो, सिवाय उन लोगों के जिन्होंने उनमें से ज़ुल्म किया। तथा तुम कहो : हम ईमान लाए उसपर, जो हमारी ओर उतारा गया और तुम्हारी ओर उतारा गया, तथा हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य एक ही है2 और हम उसी के आज्ञाकारी हैं।3
२९:४७
وَكَذَٰلِكَ और इसी तरह wakadhālika
और इसी तरह
أَنزَلْنَآ नाज़िल की हमने anzalnā
नाज़िल की हमने
إِلَيْكَ तरफ़ आपके ilayka
तरफ़ आपके
ٱلْكِتَـٰبَ ۚ किताब l-kitāba
किताब
فَٱلَّذِينَ पस वो लोग जो fa-alladhīna
पस वो लोग जो
ءَاتَيْنَـٰهُمُ दी हमने उन्हें ātaynāhumu
दी हमने उन्हें
ٱلْكِتَـٰبَ किताब l-kitāba
किताब
يُؤْمِنُونَ वो ईमान लाते हैं yu'minūna
वो ईमान लाते हैं
بِهِۦ ۖ उस पर bihi
उस पर
وَمِنْ And among wamin
And among
هَـٰٓؤُلَآءِ और उनमें से भी हैं hāulāi
और उनमें से भी हैं
مَن जो man
जो
يُؤْمِنُ ईमान लाते हैं yu'minu
ईमान लाते हैं
بِهِۦ ۚ इस पर bihi
इस पर
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
يَجْحَدُ इन्कार करते yajḥadu
इन्कार करते
بِـَٔايَـٰتِنَآ हमारी आयात का biāyātinā
हमारी आयात का
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلْكَـٰفِرُونَ जो काफ़िर हैं l-kāfirūna
जो काफ़िर हैं
٤٧ (47)
(47)
और इसी प्रकार, हमने आपकी ओर यह पुस्तक उतारी है। तो जिन लोगों को हमने (आपसे पहले) पुस्तक प्रदान की है, वे इसपर ईमान लाते हैं।1 और इन (मुश्रिकों) में से भी कुछ2 ऐसे हैं, जो इस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं। और हमारी आयतों का इनकार वही लोग करते हैं, जो काफ़िर हैं।
२९:४८
وَمَا और ना wamā
और ना
كُنتَ थे आप kunta
थे आप
تَتْلُوا۟ आप पढ़ते tatlū
आप पढ़ते
مِن before it min
before it
قَبْلِهِۦ इससे पहले qablihi
इससे पहले
مِن any min
any
كِتَـٰبٍۢ कोई किताब kitābin
कोई किताब
وَلَا और ना walā
और ना
تَخُطُّهُۥ आप लिखते थे उसे takhuṭṭuhu
आप लिखते थे उसे
بِيَمِينِكَ ۖ अपने दाऐं हाथ से biyamīnika
अपने दाऐं हाथ से
إِذًۭا तब idhan
तब
لَّٱرْتَابَ अलबत्ता शक में पड़ जाते la-ir'tāba
अलबत्ता शक में पड़ जाते
ٱلْمُبْطِلُونَ बातिल परस्त l-mub'ṭilūna
बातिल परस्त
٤٨ (48)
(48)
और आप इससे पहले न कोई पुस्तक पढ़ते थे और न उसे अपने दाहिने हाथ से लिखते थे। (यदि ऐसा होता) तो असत्यवादी अवश्य संदेह करते।1
२९:४९
بَلْ बल्कि bal
बल्कि
هُوَ वो huwa
वो
ءَايَـٰتٌۢ आयात हैं āyātun
आयात हैं
بَيِّنَـٰتٌۭ वाज़ेह bayyinātun
वाज़ेह
فِى in
in
صُدُورِ सीनों में ṣudūri
सीनों में
ٱلَّذِينَ उन लोगों के जो alladhīna
उन लोगों के जो
أُوتُوا۟ दिए गए ūtū
दिए गए
ٱلْعِلْمَ ۚ इल्म l-ʿil'ma
इल्म
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
يَجْحَدُ इन्कार करते yajḥadu
इन्कार करते
بِـَٔايَـٰتِنَآ हमारी आयात का biāyātinā
हमारी आयात का
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلظَّـٰلِمُونَ जो ज़ालिम हैं l-ẓālimūna
जो ज़ालिम हैं
٤٩ (49)
(49)
बल्कि यह (क़ुरआन) स्पष्ट आयतें हैं, उन लोगों के सीनों में जिन्हें ज्ञान दिया गया है तथा हमारी आयतों का इनकार वही लोग करते हैं, जो अत्याचारी हैं।
२९:५०
وَقَالُوا۟ और उन्होंने कहा waqālū
और उन्होंने कहा
لَوْلَآ क्यों नहीं lawlā
क्यों नहीं
أُنزِلَ उतारी गईं unzila
उतारी गईं
عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर
ءَايَـٰتٌۭ निशानियाँ āyātun
निशानियाँ
مِّن from min
from
رَّبِّهِۦ ۖ उसके रब की तरफ़ से rabbihi
उसके रब की तरफ़ से
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
إِنَّمَا बेशक innamā
बेशक
ٱلْـَٔايَـٰتُ निशानियाँ l-āyātu
निशानियाँ
عِندَ पास हैं ʿinda
पास हैं
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
وَإِنَّمَآ और बेशक wa-innamā
और बेशक
أَنَا۠ मैं तो anā
मैं तो
نَذِيرٌۭ डराने वाला हूँ nadhīrun
डराने वाला हूँ
مُّبِينٌ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला
٥٠ (50)
(50)
तथा उन्होंने कहा : उसपर उसके पालनहार की ओर से निशानियाँ क्यों नहीं उतारी गईं? आप कह दें : निशानियाँ तो अल्लाह ही के पास1 हैं और मैं तो केवल स्पष्ट रूप से सावधान करने वाला हूँ।
२९:५१
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَكْفِهِمْ काफ़ी उन्हें yakfihim
काफ़ी उन्हें
أَنَّآ बेशक हम annā
बेशक हम
أَنزَلْنَا नाज़िल की हमने anzalnā
नाज़िल की हमने
عَلَيْكَ आप पर ʿalayka
आप पर
ٱلْكِتَـٰبَ किताब l-kitāba
किताब
يُتْلَىٰ जो पढ़ी जाती है yut'lā
जो पढ़ी जाती है
عَلَيْهِمْ ۚ उन पर ʿalayhim
उन पर
إِنَّ बेशक inna
बेशक
فِى in
in
ذَٰلِكَ इस में dhālika
इस में
لَرَحْمَةًۭ अलबत्ता रहमत laraḥmatan
अलबत्ता रहमत
وَذِكْرَىٰ और नसीहत है wadhik'rā
और नसीहत है
لِقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يُؤْمِنُونَ जो ईमान लाते हैं yu'minūna
जो ईमान लाते हैं
٥١ (51)
(51)
क्या उनके लिए यह पर्याप्त नहीं है कि हमने आपपर यह पुस्तक (क़ुरआन) उतारी, जो उनके सामने पढ़ी जाती है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बड़ी दया और उपदेश है, जो ईमान रखते हैं।
२९:५२
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
كَفَىٰ काफ़ी है kafā
काफ़ी है
بِٱللَّهِ अल्लाह bil-lahi
अल्लाह
بَيْنِى दर्मियान मेरे baynī
दर्मियान मेरे
وَبَيْنَكُمْ और दर्मियान तुम्हारे wabaynakum
और दर्मियान तुम्हारे
شَهِيدًۭا ۖ गवाह shahīdan
गवाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
مَا जो कुछ
जो कुछ
فِى (is) in
(is) in
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों में l-samāwāti
आसमानों में
وَٱلْأَرْضِ ۗ और ज़मीन में है wal-arḍi
और ज़मीन में है
وَٱلَّذِينَ और वो लोग जो wa-alladhīna
और वो लोग जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
بِٱلْبَـٰطِلِ बातिल पर bil-bāṭili
बातिल पर
وَكَفَرُوا۟ और उन्होंने कुफ़्र किया wakafarū
और उन्होंने कुफ़्र किया
بِٱللَّهِ साथ अल्लाह के bil-lahi
साथ अल्लाह के
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही लोग हैं ulāika
यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلْخَـٰسِرُونَ जो ख़सारा पाने वाले हैं l-khāsirūna
जो ख़सारा पाने वाले हैं
٥٢ (52)
(52)
आप कह दें : अल्लाह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह के रूप में काफ़ी1 है। वह जानता है, जो कुछ आकाशों और धरती में है। तथा जो लोग असत्य पर ईमान लाए और उन्होंने अल्लाह का इनकार किया, वही घाटा उठाने वाले हैं।
२९:५३
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ और वो जल्दी माँगते हैं आपसे wayastaʿjilūnaka
और वो जल्दी माँगते हैं आपसे
بِٱلْعَذَابِ ۚ अज़ाब bil-ʿadhābi
अज़ाब
وَلَوْلَآ और अगर ना होती walawlā
और अगर ना होती
أَجَلٌۭ मुद्दत ajalun
मुद्दत
مُّسَمًّۭى मुक़र्रर musamman
मुक़र्रर
لَّجَآءَهُمُ अलबत्ता आ जाता उनके पास lajāahumu
अलबत्ता आ जाता उनके पास
ٱلْعَذَابُ अज़ाब l-ʿadhābu
अज़ाब
وَلَيَأْتِيَنَّهُم और अलबत्ता वो ज़रूर आएगा उनके पास walayatiyannahum
और अलबत्ता वो ज़रूर आएगा उनके पास
بَغْتَةًۭ अचानक baghtatan
अचानक
وَهُمْ इस हाल में कि wahum
इस हाल में कि
لَا (do) not
(do) not
يَشْعُرُونَ वो शऊर ना रखते होंगे yashʿurūna
वो शऊर ना रखते होंगे
٥٣ (53)
(53)
और वे1 आपसे यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं। और यदि (उसका) एक नियत समय न होता, तो उनपर यातना अवश्य आ जाती। और निश्चय वह उनपर अचानक आएगी और उन्हें ख़बर तक न होगी।
२९:५४
يَسْتَعْجِلُونَكَ वो जल्दी माँगते हैं आपसे yastaʿjilūnaka
वो जल्दी माँगते हैं आपसे
بِٱلْعَذَابِ अज़ाब bil-ʿadhābi
अज़ाब
وَإِنَّ और बेशक wa-inna
और बेशक
جَهَنَّمَ जहन्नम jahannama
जहन्नम
لَمُحِيطَةٌۢ अलबत्ता घेरने वाली है lamuḥīṭatun
अलबत्ता घेरने वाली है
بِٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों को bil-kāfirīna
काफ़िरों को
٥٤ (54)
(54)
वे आपसे यातना के लिए जल्दी मचा1 रहे है, हालाँकि निःसंदेह जहन्नम निश्चय काफ़िरों को घेरने वाला2 है।
२९:५५
يَوْمَ जिस दिन yawma
जिस दिन
يَغْشَىٰهُمُ ढाँप लेगा उन्हें yaghshāhumu
ढाँप लेगा उन्हें
ٱلْعَذَابُ अज़ाब l-ʿadhābu
अज़ाब
مِن from min
from
فَوْقِهِمْ उनके ऊपर से fawqihim
उनके ऊपर से
وَمِن and from wamin
and from
تَحْتِ और नीचे से taḥti
और नीचे से
أَرْجُلِهِمْ उनके पाँव के arjulihim
उनके पाँव के
وَيَقُولُ और वो फ़रमाएगा wayaqūlu
और वो फ़रमाएगा
ذُوقُوا۟ चखो dhūqū
चखो
مَا जो
जो
كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम
تَعْمَلُونَ तुम अमल करते taʿmalūna
तुम अमल करते
٥٥ (55)
(55)
जिस दिन यातना उन्हें उनके ऊपर से और उनके पाँव के नीचे से ढाँप लेगी और अल्लाह कहेगा : चखो उसका मज़ा जो तुम किया करते थे।
२९:५६
يَـٰعِبَادِىَ ऐ मेरे बन्दों yāʿibādiya
ऐ मेरे बन्दों
ٱلَّذِينَ वो जो alladhīna
वो जो
ءَامَنُوٓا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
إِنَّ बेशक inna
बेशक
أَرْضِى मेरी ज़मीन arḍī
मेरी ज़मीन
وَٰسِعَةٌۭ वसीअ है wāsiʿatun
वसीअ है
فَإِيَّـٰىَ पस सिर्फ़ मेरी ही fa-iyyāya
पस सिर्फ़ मेरी ही
فَٱعْبُدُونِ पस तुम इबादत करो मेरी fa-uʿ'budūni
पस तुम इबादत करो मेरी
٥٦ (56)
(56)
ऐ मेरे बंदो जो ईमान लाए हो! निःसंदेह मेरी धरती विशाल है। अतः तुम मेरी ही इबादत1 करो।
२९:५७
كُلُّ हर kullu
हर
نَفْسٍۢ नफ़्स nafsin
नफ़्स
ذَآئِقَةُ चखने वाला है dhāiqatu
चखने वाला है
ٱلْمَوْتِ ۖ मौत को l-mawti
मौत को
ثُمَّ फिर thumma
फिर
إِلَيْنَا तरफ़ हमारे ही ilaynā
तरफ़ हमारे ही
تُرْجَعُونَ तुम सब लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम सब लौटाए जाओगे
٥٧ (57)
(57)
प्रत्येक प्राणी मौत का स्वाद चखने वाला है, फिर तुम हमारी ही ओर लौटाए1 जाओगे।
२९:५८
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
لَنُبَوِّئَنَّهُم अलबत्ता हम ज़रूर ठिकाना देंगे उन्हें lanubawwi-annahum
अलबत्ता हम ज़रूर ठिकाना देंगे उन्हें
مِّنَ in mina
in
ٱلْجَنَّةِ जन्नत के l-janati
जन्नत के
غُرَفًۭا बालाख़ाने ghurafan
बालाख़ाने
تَجْرِى बहती होंगी tajrī
बहती होंगी
مِن from min
from
تَحْتِهَا उनके नीचे से taḥtihā
उनके नीचे से
ٱلْأَنْهَـٰرُ नहरें l-anhāru
नहरें
خَـٰلِدِينَ हमेशा रहने वाले हैं khālidīna
हमेशा रहने वाले हैं
فِيهَا ۚ उनमें fīhā
उनमें
نِعْمَ कितना अच्छा है niʿ'ma
कितना अच्छा है
أَجْرُ अजर ajru
अजर
ٱلْعَـٰمِلِينَ अमल करने वालों का l-ʿāmilīna
अमल करने वालों का
٥٨ (58)
(58)
तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, हम उन्हें अवश्य ही जन्नत के ऊँचे भवनों में जगह देंगे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, वे उनमें सदावासी होंगे। यह उन कर्म करने वालों का क्या ही अच्छा बदला है!
२९:५९
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
صَبَرُوا۟ सब्र किया ṣabarū
सब्र किया
وَعَلَىٰ and upon waʿalā
and upon
رَبِّهِمْ और अपने रब पर ही rabbihim
और अपने रब पर ही
يَتَوَكَّلُونَ वो तवक्कल करते हैं yatawakkalūna
वो तवक्कल करते हैं
٥٩ (59)
(59)
जिन्होंने धैर्य से काम लिया तथा अपने पालनहार ही पर भरोसा रखते हैं।
२९:६०
وَكَأَيِّن और कितने ही waka-ayyin
और कितने ही
مِّن of min
of
دَآبَّةٍۢ जानदार हैं dābbatin
जानदार हैं
لَّا (does) not
(does) not
تَحْمِلُ नहीं वो उठाते taḥmilu
नहीं वो उठाते
رِزْقَهَا रिज़्क़ अपना riz'qahā
रिज़्क़ अपना
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
يَرْزُقُهَا रिज़्क़ देता है उन्हें yarzuquhā
रिज़्क़ देता है उन्हें
وَإِيَّاكُمْ ۚ और तुम्हें भी wa-iyyākum
और तुम्हें भी
وَهُوَ और वो ही है wahuwa
और वो ही है
ٱلسَّمِيعُ ख़ूब सुनने वाला l-samīʿu
ख़ूब सुनने वाला
ٱلْعَلِيمُ ख़ूब जानने वाला l-ʿalīmu
ख़ूब जानने वाला
٦٠ (60)
(60)
कितने ही जीव हैं, जो अपनी रोज़ी नहीं उठा सकते।1 अल्लाह ही उन्हें रोज़ी देता है और तुम्हें भी! और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
२९:६१
وَلَئِن और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
سَأَلْتَهُم पूछें आप उनसे sa-altahum
पूछें आप उनसे
مَّنْ किस ने man
किस ने
خَلَقَ पैदा किया khalaqa
पैदा किया
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों
وَٱلْأَرْضَ और ज़मीन को wal-arḍa
और ज़मीन को
وَسَخَّرَ और उसने मुसख़्ख़र किया wasakhara
और उसने मुसख़्ख़र किया
ٱلشَّمْسَ सूरज l-shamsa
सूरज
وَٱلْقَمَرَ और चाँद को wal-qamara
और चाँद को
لَيَقُولُنَّ अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे layaqūlunna
अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे
ٱللَّهُ ۖ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
فَأَنَّىٰ तो कहाँ से fa-annā
तो कहाँ से
يُؤْفَكُونَ वो फेरे जाते हैं yu'fakūna
वो फेरे जाते हैं
٦١ (61)
(61)
और निश्चय यदि आप उनसे पूछें कि आकाशों और धरती को किसने पैदा किया और (किसने) सूर्य और चाँद को वशीभूत किया? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। तो फिर वे कहाँ बहकाए जा रहे हैं?
२९:६२
ٱللَّهُ अल्लाह al-lahu
अल्लाह
يَبْسُطُ वो फैलाता देता है yabsuṭu
वो फैलाता देता है
ٱلرِّزْقَ रिज़्क़ को l-riz'qa
रिज़्क़ को
لِمَن जिसके लिए liman
जिसके लिए
يَشَآءُ वो चाहता है yashāu
वो चाहता है
مِنْ of min
of
عِبَادِهِۦ अपने बन्दों में से ʿibādihi
अपने बन्दों में से
وَيَقْدِرُ और वो तंग कर देता है wayaqdiru
और वो तंग कर देता है
لَهُۥٓ ۚ उसके लिए lahu
उसके लिए
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
بِكُلِّ हर bikulli
हर
شَىْءٍ चीज़ को shayin
चीज़ को
عَلِيمٌۭ ख़ूब जानने वाला है ʿalīmun
ख़ूब जानने वाला है
٦٢ (62)
(62)
अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है जीविका विस्तृत कर देता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ को अच्छी तरह जानने वाला है।
२९:६३
وَلَئِن और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
سَأَلْتَهُم पूछें आप उनसे sa-altahum
पूछें आप उनसे
مَّن किसने man
किसने
نَّزَّلَ नाज़िल किया nazzala
नाज़िल किया
مِنَ from mina
from
ٱلسَّمَآءِ आसमान से l-samāi
आसमान से
مَآءًۭ पानी māan
पानी
فَأَحْيَا फिर उसने ज़िन्दा किया fa-aḥyā
फिर उसने ज़िन्दा किया
بِهِ साथ उसके bihi
साथ उसके
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
مِنۢ after min
after
بَعْدِ बाद baʿdi
बाद
مَوْتِهَا उसकी मौत के mawtihā
उसकी मौत के
لَيَقُولُنَّ अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे layaqūlunna
अलबत्ता वो ज़रूर कहेंगे
ٱللَّهُ ۚ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
قُلِ कह दीजिए quli
कह दीजिए
ٱلْحَمْدُ सब तारीफ़ l-ḥamdu
सब तारीफ़
لِلَّهِ ۚ अल्लाह के लिए है lillahi
अल्लाह के लिए है
بَلْ बल्कि bal
बल्कि
أَكْثَرُهُمْ अक्सर उनके aktharuhum
अक्सर उनके
لَا (do) not
(do) not
يَعْقِلُونَ नहीं वो अक़्ल रखते yaʿqilūna
नहीं वो अक़्ल रखते
٦٣ (63)
(63)
और निश्चय यदि आप उनसे पूछें कि किसने आकाश से पानी उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को, उसके मुर्दा हो जाने के बाद जीवित किया? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कह दें कि सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं समझते।1
२९:६४
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
هَـٰذِهِ ये hādhihi
ये
ٱلْحَيَوٰةُ ज़िन्दगी l-ḥayatu
ज़िन्दगी
ٱلدُّنْيَآ दुनिया की l-dun'yā
दुनिया की
إِلَّا मगर illā
मगर
لَهْوٌۭ शुग़ल lahwun
शुग़ल
وَلَعِبٌۭ ۚ और खेल walaʿibun
और खेल
وَإِنَّ और बेशक wa-inna
और बेशक
ٱلدَّارَ घर l-dāra
घर
ٱلْـَٔاخِرَةَ आख़िरत का l-ākhirata
आख़िरत का
لَهِىَ अलबत्ता वो ही lahiya
अलबत्ता वो ही
ٱلْحَيَوَانُ ۚ ज़िन्दगी है l-ḥayawānu
ज़िन्दगी है
لَوْ काश law
काश
كَانُوا۟ होते वो kānū
होते वो
يَعْلَمُونَ वो इल्म रखते yaʿlamūna
वो इल्म रखते
٦٤ (64)
(64)
और दुनिया का यह जीवन1 केवल मनोरंजन और खेल है। और निःसंदेह आखिरत का घर ही निश्चय वास्तविक जीवन है, यदि वे जानते होते।
२९:६५
فَإِذَا फिर जब fa-idhā
फिर जब
رَكِبُوا۟ वो सवार होते हैं rakibū
वो सवार होते हैं
فِى [in]
[in]
ٱلْفُلْكِ कश्ती में l-ful'ki
कश्ती में
دَعَوُا۟ वो पुकारते हैं daʿawū
वो पुकारते हैं
ٱللَّهَ अल्लाह को l-laha
अल्लाह को
مُخْلِصِينَ ख़ालिस करने वाले हो कर mukh'liṣīna
ख़ालिस करने वाले हो कर
لَهُ उसके लिए lahu
उसके लिए
ٱلدِّينَ दीन को l-dīna
दीन को
فَلَمَّا तो जब falammā
तो जब
نَجَّىٰهُمْ वो निजात देता है उन्हें najjāhum
वो निजात देता है उन्हें
إِلَى to ilā
to
ٱلْبَرِّ तरफ़ ख़ुश्की के l-bari
तरफ़ ख़ुश्की के
إِذَا यकायक idhā
यकायक
هُمْ वो hum
वो
يُشْرِكُونَ वो शिर्क करने लगते हैं yush'rikūna
वो शिर्क करने लगते हैं
٦٥ (65)
(65)
फिर जब वे नाव पर सवार होते हैं, तो अल्लाह को, उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए, पुकारते हैं। फिर जब वह उन्हें बचाकर थल तक ले आता है, तो शिर्क करने लगते हैं।
२९:६६
لِيَكْفُرُوا۟ ताकि वो नाशुक्री करें liyakfurū
ताकि वो नाशुक्री करें
بِمَآ उसकी जो bimā
उसकी जो
ءَاتَيْنَـٰهُمْ दिया हमने उन्हें ātaynāhum
दिया हमने उन्हें
وَلِيَتَمَتَّعُوا۟ ۖ और ताकि वो फ़ायदा उठा लें waliyatamattaʿū
और ताकि वो फ़ायदा उठा लें
فَسَوْفَ पस अनक़रीब fasawfa
पस अनक़रीब
يَعْلَمُونَ वो जान लेंगे yaʿlamūna
वो जान लेंगे
٦٦ (66)
(66)
ताकि जो कुछ हमने उन्हें प्रदान किया है, उसकी नाशुक्री करें, और ताकि वे (जीवन का) लाभ उठाएँ। तो शीघ्र ही उन्हें पता चल जाएगा।
२९:६७
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा
أَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम
جَعَلْنَا बनाया हमने jaʿalnā
बनाया हमने
حَرَمًا हरम को ḥaraman
हरम को
ءَامِنًۭا अमन वाला āminan
अमन वाला
وَيُتَخَطَّفُ और उचक लिए जाते हैं wayutakhaṭṭafu
और उचक लिए जाते हैं
ٱلنَّاسُ लोग l-nāsu
लोग
مِنْ around them min
around them
حَوْلِهِمْ ۚ उनके इर्द-गिर्द से ḥawlihim
उनके इर्द-गिर्द से
أَفَبِٱلْبَـٰطِلِ क्या फिर बातिल पर afabil-bāṭili
क्या फिर बातिल पर
يُؤْمِنُونَ वो ईमान लाते हैं yu'minūna
वो ईमान लाते हैं
وَبِنِعْمَةِ और नेअमत का wabiniʿ'mati
और नेअमत का
ٱللَّهِ अल्लाह की l-lahi
अल्लाह की
يَكْفُرُونَ वो इन्कार करते हैं yakfurūna
वो इन्कार करते हैं
٦٧ (67)
(67)
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने (उनके लिए) एक सुरक्षित व शांतिमय हरम बनाया है, जबकि उनके आस-पास से लोग उचक लिए जाते हैं? तो क्या वे असत्य पर ईमान लाते हैं और अल्लाह की नेमत की नाशुक्री करते हैं?
२९:६८
وَمَنْ और कौन waman
और कौन
أَظْلَمُ बड़ा ज़ालिम है aẓlamu
बड़ा ज़ालिम है
مِمَّنِ उससे जो mimmani
उससे जो
ٱفْتَرَىٰ गढ़ ले if'tarā
गढ़ ले
عَلَى against ʿalā
against
ٱللَّهِ अल्लाह पर l-lahi
अल्लाह पर
كَذِبًا झूठ kadhiban
झूठ
أَوْ या aw
या
كَذَّبَ वो झुठलाए kadhaba
वो झुठलाए
بِٱلْحَقِّ हक़ को bil-ḥaqi
हक़ को
لَمَّا जब कि lammā
जब कि
جَآءَهُۥٓ ۚ वो आ जाए उसके पास jāahu
वो आ जाए उसके पास
أَلَيْسَ क्या नहीं है alaysa
क्या नहीं है
فِى in
in
جَهَنَّمَ जहन्नम में jahannama
जहन्नम में
مَثْوًۭى ठिकाना mathwan
ठिकाना
لِّلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों के लिए lil'kāfirīna
काफ़िरों के लिए
٦٨ (68)
(68)
तथा उससे अधिक अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े या जब सच उसके पास आ जाए, तो उसे झुठला दे? क्या (ऐसे) काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम में नहीं है?
२९:६९
وَٱلَّذِينَ और वो जिन्होंने wa-alladhīna
और वो जिन्होंने
جَـٰهَدُوا۟ जद्दो जहद की jāhadū
जद्दो जहद की
فِينَا हमारी (राह) में fīnā
हमारी (राह) में
لَنَهْدِيَنَّهُمْ अलबत्ता हम ज़रूर हिदायत देंगे उन्हें lanahdiyannahum
अलबत्ता हम ज़रूर हिदायत देंगे उन्हें
سُبُلَنَا ۚ अपने रास्तों की subulanā
अपने रास्तों की
وَإِنَّ और बेशक wa-inna
और बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
لَمَعَ अलबत्ता साथ है lamaʿa
अलबत्ता साथ है
ٱلْمُحْسِنِينَ एहसान करने वालों के l-muḥ'sinīna
एहसान करने वालों के
٦٩ (69)
(69)
तथा जिन लोगों ने हमारी ख़ातिर भरपूर प्रयास किया, हम अवश्य ही उन्हें अपने मार्ग दिखा देंगे1 और निःसंदेह अल्लाह सदाचारियों के साथ है।