८४
अल-इंशिक़ाक़
الإنشقاق
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ
साथ नाम
bis'mi
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
८४:१
إِذَا
जब
idhā
जब ٱلسَّمَآءُ आसमान l-samāu
आसमान ٱنشَقَّتْ फट जाऐगा inshaqqat
फट जाऐगा ١ (1)
(1)
जब ٱلسَّمَآءُ आसमान l-samāu
आसमान ٱنشَقَّتْ फट जाऐगा inshaqqat
फट जाऐगा ١ (1)
(1)
जब आकाश फट जाएगा।
८४:२
وَأَذِنَتْ
और वो कान लगाए हुए है
wa-adhinat
और वो कान लगाए हुए है لِرَبِّهَا अपने रब के लिए lirabbihā
अपने रब के लिए وَحُقَّتْ और वो हक़ दिया गया है waḥuqqat
और वो हक़ दिया गया है ٢ (2)
(2)
और वो कान लगाए हुए है لِرَبِّهَا अपने रब के लिए lirabbihā
अपने रब के लिए وَحُقَّتْ और वो हक़ दिया गया है waḥuqqat
और वो हक़ दिया गया है ٢ (2)
(2)
और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगा और यही उसके योग्य है।
८४:३
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
और जब ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन مُدَّتْ फैला दी जाएगी muddat
फैला दी जाएगी ٣ (3)
(3)
और जब ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन مُدَّتْ फैला दी जाएगी muddat
फैला दी जाएगी ٣ (3)
(3)
तथा जब धरती फैला दी जाएगी।
८४:४
وَأَلْقَتْ
और वो डाल देगी
wa-alqat
और वो डाल देगी مَا जो कुछ mā
जो कुछ فِيهَا उसमें है fīhā
उसमें है وَتَخَلَّتْ और वो ख़ाली हो जाएगी watakhallat
और वो ख़ाली हो जाएगी ٤ (4)
(4)
और वो डाल देगी مَا जो कुछ mā
जो कुछ فِيهَا उसमें है fīhā
उसमें है وَتَخَلَّتْ और वो ख़ाली हो जाएगी watakhallat
और वो ख़ाली हो जाएगी ٤ (4)
(4)
और जो कुछ उसके भीतर है, उसे निकाल बाहर फेंक देगी और खाली हो जाएगी।
८४:५
وَأَذِنَتْ
और वो कान लगाए हुए है
wa-adhinat
और वो कान लगाए हुए है لِرَبِّهَا अपने रब के लिए lirabbihā
अपने रब के लिए وَحُقَّتْ और वो हक़ दी गई है waḥuqqat
और वो हक़ दी गई है ٥ (5)
(5)
और वो कान लगाए हुए है لِرَبِّهَا अपने रब के लिए lirabbihā
अपने रब के लिए وَحُقَّتْ और वो हक़ दी गई है waḥuqqat
और वो हक़ दी गई है ٥ (5)
(5)
और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगी और यही उसके योग्य है।1
८४:६
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
yāayyuhā
ऐ ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान إِنَّكَ बेशक तू innaka
बेशक तू كَادِحٌ मेहनत करने वाला है kādiḥun
मेहनत करने वाला है إِلَىٰ to ilā
to رَبِّكَ तरफ़ अपने रब के rabbika
तरफ़ अपने रब के كَدْحًۭا सख़्त मेहनत kadḥan
सख़्त मेहनत فَمُلَـٰقِيهِ फिर मिलने वाला है उससे famulāqīhi
फिर मिलने वाला है उससे ٦ (6)
(6)
ऐ ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान إِنَّكَ बेशक तू innaka
बेशक तू كَادِحٌ मेहनत करने वाला है kādiḥun
मेहनत करने वाला है إِلَىٰ to ilā
to رَبِّكَ तरफ़ अपने रब के rabbika
तरफ़ अपने रब के كَدْحًۭا सख़्त मेहनत kadḥan
सख़्त मेहनत فَمُلَـٰقِيهِ फिर मिलने वाला है उससे famulāqīhi
फिर मिलने वाला है उससे ٦ (6)
(6)
ऐ इनसान! निःसंदेह तू कठिन परिश्रम करते-करते अपने पालनहार की ओर जाने वाला है, फिर तू उससे मिलने वाला है।
८४:७
فَأَمَّا
तो रहा
fa-ammā
तो रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी بِيَمِينِهِۦ अपने दाऐं हाथ में biyamīnihi
अपने दाऐं हाथ में ٧ (7)
(7)
तो रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी بِيَمِينِهِۦ अपने दाऐं हाथ में biyamīnihi
अपने दाऐं हाथ में ٧ (7)
(7)
फिर जिस व्यक्ति को उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया।
८४:८
فَسَوْفَ
तो अनक़रीब
fasawfa
तो अनक़रीब يُحَاسَبُ वो हिसाब लिया जाएग yuḥāsabu
वो हिसाब लिया जाएग حِسَابًۭا हिसाब ḥisāban
हिसाब يَسِيرًۭا निहायत आसान yasīran
निहायत आसान ٨ (8)
(8)
तो अनक़रीब يُحَاسَبُ वो हिसाब लिया जाएग yuḥāsabu
वो हिसाब लिया जाएग حِسَابًۭا हिसाब ḥisāban
हिसाब يَسِيرًۭا निहायत आसान yasīran
निहायत आसान ٨ (8)
(8)
तो उसका आसान हिसाब लिया जाएगा।
८४:९
وَيَنقَلِبُ
और वो लौटेगा
wayanqalibu
और वो लौटेगा إِلَىٰٓ to ilā
to أَهْلِهِۦ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihi
तरफ़ अपने घर वालों के مَسْرُورًۭا मसरूर/ ख़ुश masrūran
मसरूर/ ख़ुश ٩ (9)
(9)
और वो लौटेगा إِلَىٰٓ to ilā
to أَهْلِهِۦ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihi
तरफ़ अपने घर वालों के مَسْرُورًۭا मसरूर/ ख़ुश masrūran
मसरूर/ ख़ुश ٩ (9)
(9)
तथा वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश लौटेगा।
८४:१०
وَأَمَّا
और रहा
wa-ammā
और रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी وَرَآءَ पीछे से warāa
पीछे से ظَهْرِهِۦ अपनी पुश्त के ẓahrihi
अपनी पुश्त के ١٠ (10)
(10)
और रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी وَرَآءَ पीछे से warāa
पीछे से ظَهْرِهِۦ अपनी पुश्त के ẓahrihi
अपनी पुश्त के ١٠ (10)
(10)
और लेकिन जिसे उसका कर्मपत्र उसकी पीठ के पीछे दिया गया।
८४:११
فَسَوْفَ
तो अनक़रीब
fasawfa
तो अनक़रीब يَدْعُوا۟ वो पुकारेगा yadʿū
वो पुकारेगा ثُبُورًۭا हलाकत को thubūran
हलाकत को ١١ (11)
(11)
तो अनक़रीब يَدْعُوا۟ वो पुकारेगा yadʿū
वो पुकारेगा ثُبُورًۭا हलाकत को thubūran
हलाकत को ١١ (11)
(11)
तो वह विनाश को पुकारेगा।
८४:१२
وَيَصْلَىٰ
और वो जलेगा
wayaṣlā
और वो जलेगा سَعِيرًا भड़कती आग में saʿīran
भड़कती आग में ١٢ (12)
(12)
और वो जलेगा سَعِيرًا भड़कती आग में saʿīran
भड़कती आग में ١٢ (12)
(12)
तथा जहन्नम में प्रवेश करेगा।
८४:१३
إِنَّهُۥ
बेशक वो
innahu
बेशक वो كَانَ था वो kāna
था वो فِىٓ among fī
among أَهْلِهِۦ अपने घर वालों में ahlihi
अपने घर वालों में مَسْرُورًا मसरूर /ख़ुश masrūran
मसरूर /ख़ुश ١٣ (13)
(13)
बेशक वो كَانَ था वो kāna
था वो فِىٓ among fī
among أَهْلِهِۦ अपने घर वालों में ahlihi
अपने घर वालों में مَسْرُورًا मसरूर /ख़ुश masrūran
मसरूर /ख़ुश ١٣ (13)
(13)
निःसंदेह वह अपने घर वालों में बड़ा प्रसन्न था।
८४:१४
إِنَّهُۥ
बेशक वो
innahu
बेशक वो ظَنَّ वो समझता था ẓanna
वो समझता था أَن कि an
कि لَّن हरगिज़ नहीं lan
हरगिज़ नहीं يَحُورَ वो लौटेगा yaḥūra
वो लौटेगा ١٤ (14)
(14)
बेशक वो ظَنَّ वो समझता था ẓanna
वो समझता था أَن कि an
कि لَّن हरगिज़ नहीं lan
हरगिज़ नहीं يَحُورَ वो लौटेगा yaḥūra
वो लौटेगा ١٤ (14)
(14)
निश्चय उसने समझा था कि वह कभी (अल्लाह की ओर) वापस नहीं लौटेगा।
८४:१५
بَلَىٰٓ
क्यों नहीं
balā
क्यों नहीं إِنَّ बेशक inna
बेशक رَبَّهُۥ रब उसका rabbahu
रब उसका كَانَ था kāna
था بِهِۦ उसे bihi
उसे بَصِيرًۭا ख़ूब देखने वाला baṣīran
ख़ूब देखने वाला ١٥ (15)
(15)
क्यों नहीं إِنَّ बेशक inna
बेशक رَبَّهُۥ रब उसका rabbahu
रब उसका كَانَ था kāna
था بِهِۦ उसे bihi
उसे بَصِيرًۭا ख़ूब देखने वाला baṣīran
ख़ूब देखने वाला ١٥ (15)
(15)
क्यों नहीं, निश्चय उसका पालनहार उसे देख रहा था।1
८४:१६
فَلَآ
पस नहीं
falā
पस नहीं أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ بِٱلشَّفَقِ शफ़क़ की bil-shafaqi
शफ़क़ की ١٦ (16)
(16)
पस नहीं أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ بِٱلشَّفَقِ शफ़क़ की bil-shafaqi
शफ़क़ की ١٦ (16)
(16)
मैं क़सम खाता हूँ शफ़क़ (सूर्यास्त के बाद की लाली) की।
८४:१७
وَٱلَّيْلِ
और रात की
wa-al-layli
और रात की وَمَا और उसकी जिसे wamā
और उसकी जिसे وَسَقَ वो समेट ले wasaqa
वो समेट ले ١٧ (17)
(17)
और रात की وَمَا और उसकी जिसे wamā
और उसकी जिसे وَسَقَ वो समेट ले wasaqa
वो समेट ले ١٧ (17)
(17)
तथा रात की और उसकी जो कुछ वह एकत्रित करती है!
८४:१८
وَٱلْقَمَرِ
और चाँद की
wal-qamari
और चाँद की إِذَا जब idhā
जब ٱتَّسَقَ वो पूरा हो जाए ittasaqa
वो पूरा हो जाए ١٨ (18)
(18)
और चाँद की إِذَا जब idhā
जब ٱتَّسَقَ वो पूरा हो जाए ittasaqa
वो पूरा हो जाए ١٨ (18)
(18)
तथा चाँद की, जब वह पूरा हो जाता है।
८४:१९
لَتَرْكَبُنَّ
अलबत्ता तुम ज़रूर चढ़ते जाओगे
latarkabunna
अलबत्ता तुम ज़रूर चढ़ते जाओगे طَبَقًا एक दर्जे को ṭabaqan
एक दर्जे को عَن from ʿan
from طَبَقٍۢ दूसरे दर्जे से ṭabaqin
दूसरे दर्जे से ١٩ (19)
(19)
अलबत्ता तुम ज़रूर चढ़ते जाओगे طَبَقًا एक दर्जे को ṭabaqan
एक दर्जे को عَن from ʿan
from طَبَقٍۢ दूसरे दर्जे से ṭabaqin
दूसरे दर्जे से ١٩ (19)
(19)
तुम अवश्य एक अवस्था से दूसरी अवस्था में स्थानांतरित होते रहोगे।
८४:२०
فَمَا
पस क्या है
famā
पस क्या है لَهُمْ उन्हें lahum
उन्हें لَا not lā
not يُؤْمِنُونَ नहीं वो ईमान लाते yu'minūna
नहीं वो ईमान लाते ٢٠ (20)
(20)
पस क्या है لَهُمْ उन्हें lahum
उन्हें لَا not lā
not يُؤْمِنُونَ नहीं वो ईमान लाते yu'minūna
नहीं वो ईमान लाते ٢٠ (20)
(20)
फिर उन्हें क्या हो गया है कि वे ईमान नहीं लाते?
८४:२१
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
और जब قُرِئَ पढ़ा जाता है quri-a
पढ़ा जाता है عَلَيْهِمُ उन पर ʿalayhimu
उन पर ٱلْقُرْءَانُ क़ुरआन l-qur'ānu
क़ुरआन لَا not lā
not يَسْجُدُونَ ۩ नहीं वो सजदा करते yasjudūna
नहीं वो सजदा करते ٢١ (21)
(21)
और जब قُرِئَ पढ़ा जाता है quri-a
पढ़ा जाता है عَلَيْهِمُ उन पर ʿalayhimu
उन पर ٱلْقُرْءَانُ क़ुरआन l-qur'ānu
क़ुरआन لَا not lā
not يَسْجُدُونَ ۩ नहीं वो सजदा करते yasjudūna
नहीं वो सजदा करते ٢١ (21)
(21)
और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, तो सजदा नहीं करते।1
८४:२२
بَلِ
बल्कि
bali
बल्कि ٱلَّذِينَ वो लोग जिन्होंने alladhīna
वो लोग जिन्होंने كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया يُكَذِّبُونَ वो झुठलाते हैं yukadhibūna
वो झुठलाते हैं ٢٢ (22)
(22)
बल्कि ٱلَّذِينَ वो लोग जिन्होंने alladhīna
वो लोग जिन्होंने كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया يُكَذِّبُونَ वो झुठलाते हैं yukadhibūna
वो झुठलाते हैं ٢٢ (22)
(22)
बल्कि जिन्होंने कुफ़्र किया, वे (उसे) झुठलाते हैं।
८४:२३
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
और अल्लाह أَعْلَمُ ख़ूब जानता है aʿlamu
ख़ूब जानता है بِمَا उसे जो bimā
उसे जो يُوعُونَ वो समेट रहे हैं yūʿūna
वो समेट रहे हैं ٢٣ (23)
(23)
और अल्लाह أَعْلَمُ ख़ूब जानता है aʿlamu
ख़ूब जानता है بِمَا उसे जो bimā
उसे जो يُوعُونَ वो समेट रहे हैं yūʿūna
वो समेट रहे हैं ٢٣ (23)
(23)
और अल्लाह सबसे अधिक जानने वाला है जो कुछ वे अपने भीतर रखते हैं।
८४:२४
فَبَشِّرْهُم
पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उन्हें
fabashir'hum
पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उन्हें بِعَذَابٍ अज़ाब की biʿadhābin
अज़ाब की أَلِيمٍ दर्दनाक alīmin
दर्दनाक ٢٤ (24)
(24)
पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उन्हें بِعَذَابٍ अज़ाब की biʿadhābin
अज़ाब की أَلِيمٍ दर्दनाक alīmin
दर्दनाक ٢٤ (24)
(24)
अतः उन्हें एक दर्दनाक यातना की शुभ सूचना दे दो।
८४:२५
إِلَّا
सिवाए
illā
सिवाए ٱلَّذِينَ उन लोगों के जो alladhīna
उन लोगों के जो ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए أَجْرٌ अजर है ajrun
अजर है غَيْرُ ना ghayru
ना مَمْنُونٍۭ ख़त्म होने वाला mamnūnin
ख़त्म होने वाला ٢٥ (25)
(25)
सिवाए ٱلَّذِينَ उन लोगों के जो alladhīna
उन लोगों के जो ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए أَجْرٌ अजर है ajrun
अजर है غَيْرُ ना ghayru
ना مَمْنُونٍۭ ख़त्म होने वाला mamnūnin
ख़त्म होने वाला ٢٥ (25)
(25)
परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए कभी न समाप्त होने वाला बदला है।1