८०
अबसा
عبس
सूरह अबसा (عبس) पवित्र क़ुरआन का ८० वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ४२ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
८०:१
عَبَسَउसने तेवरी चढ़ाईʿabasaوَتَوَلَّىٰٓऔर उसने मुँह फेर लियाwatawallā١
उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।
८०:२
أَنकिanجَآءَهُआया उसके पासjāahuٱلْأَعْمَىٰएक नाबीनाl-aʿmā٢
इस कारण कि उनके पास अंधा आया।
८०:३
وَمَاऔर क्या चीज़wamāيُدْرِيكَबताए आपकोyud'rīkaلَعَلَّهُۥशायद कि वोlaʿallahuيَزَّكَّىٰٓवो पाक हो जाताyazzakkā٣
और आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।
८०:४
أَوْयाawيَذَّكَّرُवो नसीहत पकड़ताyadhakkaruفَتَنفَعَهُतो फ़ायदा देती उसेfatanfaʿahuٱلذِّكْرَىٰٓनसीहतl-dhik'rā٤
या नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।
८०:५
أَمَّاरहाammāمَنِवो जोmaniٱسْتَغْنَىٰबेपरवाही करता हैis'taghnā٥
लेकिन जो बेपरवाह हो गया।
८०:६
فَأَنتَतो आपfa-antaلَهُۥउसके लिएlahuتَصَدَّىٰआप तवज्जो करते हैंtaṣaddā٦
तो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।
८०:७
وَمَاहालाँकि नहींwamāعَلَيْكَआप पर(ज़िम्मेदारी )ʿalaykaأَلَّاकि नहींallāيَزَّكَّىٰवो पाक होताyazzakkā٧
हालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।
८०:८
وَأَمَّاऔर रहाwa-ammāمَنवो जोmanجَآءَكَआया है आपके पासjāakaيَسْعَىٰकोशिश करता हुआyasʿā٨
लेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।
८०:९
وَهُوَऔर वोwahuwaيَخْشَىٰवो डरता हैyakhshā٩
और वह डर (भी) रहा है।
८०:१०
فَأَنتَतो आपfa-antaعَنْهُउससेʿanhuتَلَهَّىٰआप बेरुख़ी बरतते हैंtalahhā١٠
तो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।1
८०:११
كَلَّآहरगिज़ नहींkallāإِنَّهَاबेशक वोinnahāتَذْكِرَةٌۭएक नसीहत हैtadhkiratun١١
ऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।
८०:१२
فَمَنतो जो कोईfamanشَآءَचाहेshāaذَكَرَهُۥनसीहत हासिल करे उससेdhakarahu١٢
अतः जो चाहे, उसे याद करे।
८०:१३
فِىInfīصُحُفٍۢसहीफ़ों में हैṣuḥufinمُّكَرَّمَةٍۢइज़्ज़त दिए गएmukarramatin١٣
(यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।
८०:१४
مَّرْفُوعَةٍۢबुलन्द मरतबाmarfūʿatinمُّطَهَّرَةٍۭनिहायत पाकीज़ाmuṭahharatin١٤
जो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।
८०:१५
بِأَيْدِىहाथों में हैbi-aydīسَفَرَةٍۢलिखने वालों केsafaratin١٥
ऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।
८०:१६
كِرَامٍۭमुअज़्ज़िज़kirāminبَرَرَةٍۢनेकोकारbararatin١٦
जो माननीय और नेक हैं।1
८०:१७
قُتِلَमारा जाएqutilaٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuمَآhowmāأَكْفَرَهُۥकिस क़दर नाशुक्रा है वोakfarahu١٧
सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
८०:१८
مِنْFromminأَىِّwhatayyiشَىْءٍकिस चीज़ सेshayinخَلَقَهُۥउसने पैदा किया उसेkhalaqahu١٨
(अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?
८०:१९
مِنFromminنُّطْفَةٍएक नुत्फ़े सेnuṭ'fatinخَلَقَهُۥउसने पैदा किया उसेkhalaqahuفَقَدَّرَهُۥफिर उसने तक़दीर मुक़र्रर की उसकीfaqaddarahu١٩
एक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।
८०:२०
ثُمَّफिरthummaٱلسَّبِيلَरास्ताl-sabīlaيَسَّرَهُۥउसने आसान किया उसकाyassarahu٢٠
फिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।
८०:२१
ثُمَّफिरthummaأَمَاتَهُۥउसने मौत दी उसेamātahuفَأَقْبَرَهُۥफिर उसने क़ब्र दी उसेfa-aqbarahu٢١
फिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।
८०:२२
ثُمَّफिरthummaإِذَاजबidhāشَآءَवो चाहेगाshāaأَنشَرَهُۥवो उठा खड़ा करेगा उसेansharahu٢٢
फिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।
८०:२३
كَلَّاहरगिज़ नहींkallāلَمَّاअभी तक नहींlammāيَقْضِउसने पूरा कियाyaqḍiمَآजोmāأَمَرَهُۥउसने हुक्म दिया था उसेamarahu٢٣
हरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।1
८०:२४
فَلْيَنظُرِपस चाहिए कि देखेfalyanẓuriٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuإِلَىٰatilāطَعَامِهِۦٓतरफ़ अपने खाने केṭaʿāmihi٢٤
अतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।
८०:२५
اَنَّاबेशक हमannāصَبَبْنَاउँडेला हमनेṣababnāٱلْمَآءَपानीl-māaصَبًّۭاख़ूब उँडेलनाṣabban٢٥
कि हमने ख़ूब पानी बरसाया।
८०:२६
ثُمَّफिरthummaشَقَقْنَاफाड़ी हमनेshaqaqnāٱلْأَرْضَज़मीनl-arḍaشَقًّۭاख़ूब फाड़नाshaqqan٢٦
फिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।
८०:२७
فَأَنۢبَتْنَاफिर उगाया हमनेfa-anbatnāفِيهَاउसमेंfīhāحَبًّۭاग़ल्लाḥabban٢٧
फिर हमने उसमें अनाज उगाया।
८०:२८
وَعِنَبًۭاऔर उंगूरwaʿinabanوَقَضْبًۭاऔर तरकारीwaqaḍban٢٨
तथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।
८०:२९
وَزَيْتُونًۭاऔर ज़ैतूनwazaytūnanوَنَخْلًۭاऔर खजूरwanakhlan٢٩
तथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।
८०:३०
وَحَدَآئِقَऔर बाग़ातwaḥadāiqaغُلْبًۭاघनेghul'ban٣٠
तथा घने बाग़।
८०:३१
وَفَـٰكِهَةًۭऔर फलwafākihatanوَأَبًّۭاऔर चाराwa-abban٣١
तथा फल और चारा।
८०:३२
مَّتَـٰعًۭاफ़ायदे की चीज़ें हैंmatāʿanلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumوَلِأَنْعَـٰمِكُمْऔर तुम्हारे मवेशियों के लिएwali-anʿāmikum٣٢
तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।1
८०:३३
فَإِذَاतो जबfa-idhāجَآءَتِआ जाएगीjāatiٱلصَّآخَّةُकान बहरा कर देने वाली सख़्त आवाज़l-ṣākhatu٣٣
तो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।
८०:३४
يَوْمَउस दिनyawmaيَفِرُّभागेगाyafirruٱلْمَرْءُइन्सानl-maruمِنْfromminأَخِيهِअपने भाई सेakhīhi٣٤
जिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।
८०:३५
وَأُمِّهِۦऔर अपनी माँ सेwa-ummihiوَأَبِيهِऔर अपने बाप सेwa-abīhi٣٥
तथा अपनी माता और अपने पिता (से)।
८०:३६
وَصَـٰحِبَتِهِۦऔर अपनी बीवी सेwaṣāḥibatihiوَبَنِيهِऔर अपने बेटों सेwabanīhi٣٦
तथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।
८०:३७
لِكُلِّवास्ते हरlikulliٱمْرِئٍۢशख़्स केim'ri-inمِّنْهُمْउनमें सेmin'humيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinشَأْنٌۭऐसी हालत होगीshanunيُغْنِيهِजो बेपरवा कर देगी उसेyugh'nīhi٣٧
उस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।
८०:३८
وُجُوهٌۭकुछ चेहरेwujūhunيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinمُّسْفِرَةٌۭरौशन होंगेmus'firatun٣٨
उस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।
८०:३९
ضَاحِكَةٌۭहँसते होंगेḍāḥikatunمُّسْتَبْشِرَةٌۭख़ुशख़बरी पाने वाले होंगेmus'tabshiratun٣٩
हँसते हुए, प्रसन्न होंगे।
८०:४०
وَوُجُوهٌۭऔर कुछ चेहरेwawujūhunيَوْمَئِذٍउस दिनyawma-idhinعَلَيْهَاउन परʿalayhāغَبَرَةٌۭग़ुबार होगाghabaratun٤٠
तथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।
८०:४१
تَرْهَقُهَاछा रही होगी उन परtarhaquhāقَتَرَةٌस्याहीqataratun٤١
उनपर कालिमा छाई होगी।
८०:४२
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaهُمُवोhumuٱلْكَفَرَةُजो काफ़िर हैंl-kafaratuٱلْفَجَرَةُफ़ाजिर हैंl-fajaratu٤٢
वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।1
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