८०

अबसा

मक्की ४२ आयतें पारा ३०
عبس
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
८०:१
عَبَسَ उसने तेवरी चढ़ाई ʿabasa
उसने तेवरी चढ़ाई
وَتَوَلَّىٰٓ और उसने मुँह फेर लिया watawallā
और उसने मुँह फेर लिया
١ (1)
(1)
उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।
८०:२
أَن कि an
कि
جَآءَهُ आया उसके पास jāahu
आया उसके पास
ٱلْأَعْمَىٰ एक नाबीना l-aʿmā
एक नाबीना
٢ (2)
(2)
इस कारण कि उनके पास अंधा आया।
८०:३
وَمَا और क्या चीज़ wamā
और क्या चीज़
يُدْرِيكَ बताए आपको yud'rīka
बताए आपको
لَعَلَّهُۥ शायद कि वो laʿallahu
शायद कि वो
يَزَّكَّىٰٓ वो पाक हो जाता yazzakkā
वो पाक हो जाता
٣ (3)
(3)
और आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।
८०:४
أَوْ या aw
या
يَذَّكَّرُ वो नसीहत पकड़ता yadhakkaru
वो नसीहत पकड़ता
فَتَنفَعَهُ तो फ़ायदा देती उसे fatanfaʿahu
तो फ़ायदा देती उसे
ٱلذِّكْرَىٰٓ नसीहत l-dhik'rā
नसीहत
٤ (4)
(4)
या नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।
८०:५
أَمَّا रहा ammā
रहा
مَنِ वो जो mani
वो जो
ٱسْتَغْنَىٰ बेपरवाही करता है is'taghnā
बेपरवाही करता है
٥ (5)
(5)
लेकिन जो बेपरवाह हो गया।
८०:६
فَأَنتَ तो आप fa-anta
तो आप
لَهُۥ उसके लिए lahu
उसके लिए
تَصَدَّىٰ आप तवज्जो करते हैं taṣaddā
आप तवज्जो करते हैं
٦ (6)
(6)
तो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।
८०:७
وَمَا हालाँकि नहीं wamā
हालाँकि नहीं
عَلَيْكَ आप पर(ज़िम्मेदारी ) ʿalayka
आप पर(ज़िम्मेदारी )
أَلَّا कि नहीं allā
कि नहीं
يَزَّكَّىٰ वो पाक होता yazzakkā
वो पाक होता
٧ (7)
(7)
हालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।
८०:८
وَأَمَّا और रहा wa-ammā
और रहा
مَن वो जो man
वो जो
جَآءَكَ आया है आपके पास jāaka
आया है आपके पास
يَسْعَىٰ कोशिश करता हुआ yasʿā
कोशिश करता हुआ
٨ (8)
(8)
लेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।
८०:९
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
يَخْشَىٰ वो डरता है yakhshā
वो डरता है
٩ (9)
(9)
और वह डर (भी) रहा है।
८०:१०
فَأَنتَ तो आप fa-anta
तो आप
عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे
تَلَهَّىٰ आप बेरुख़ी बरतते हैं talahhā
आप बेरुख़ी बरतते हैं
١٠ (10)
(10)
तो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।1
८०:११
كَلَّآ हरगिज़ नहीं kallā
हरगिज़ नहीं
إِنَّهَا बेशक वो innahā
बेशक वो
تَذْكِرَةٌۭ एक नसीहत है tadhkiratun
एक नसीहत है
١١ (11)
(11)
ऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।
८०:१२
فَمَن तो जो कोई faman
तो जो कोई
شَآءَ चाहे shāa
चाहे
ذَكَرَهُۥ नसीहत हासिल करे उससे dhakarahu
नसीहत हासिल करे उससे
١٢ (12)
(12)
अतः जो चाहे, उसे याद करे।
८०:१३
فِى In
In
صُحُفٍۢ सहीफ़ों में है ṣuḥufin
सहीफ़ों में है
مُّكَرَّمَةٍۢ इज़्ज़त दिए गए mukarramatin
इज़्ज़त दिए गए
١٣ (13)
(13)
(यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।
८०:१४
مَّرْفُوعَةٍۢ बुलन्द मरतबा marfūʿatin
बुलन्द मरतबा
مُّطَهَّرَةٍۭ निहायत पाकीज़ा muṭahharatin
निहायत पाकीज़ा
١٤ (14)
(14)
जो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।
८०:१५
بِأَيْدِى हाथों में है bi-aydī
हाथों में है
سَفَرَةٍۢ लिखने वालों के safaratin
लिखने वालों के
١٥ (15)
(15)
ऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।
८०:१६
كِرَامٍۭ मुअज़्ज़िज़ kirāmin
मुअज़्ज़िज़
بَرَرَةٍۢ नेकोकार bararatin
नेकोकार
١٦ (16)
(16)
जो माननीय और नेक हैं।1
८०:१७
قُتِلَ मारा जाए qutila
मारा जाए
ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान
مَآ how
how
أَكْفَرَهُۥ किस क़दर नाशुक्रा है वो akfarahu
किस क़दर नाशुक्रा है वो
١٧ (17)
(17)
सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
८०:१८
مِنْ From min
From
أَىِّ what ayyi
what
شَىْءٍ किस चीज़ से shayin
किस चीज़ से
خَلَقَهُۥ उसने पैदा किया उसे khalaqahu
उसने पैदा किया उसे
١٨ (18)
(18)
(अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?
८०:१९
مِن From min
From
نُّطْفَةٍ एक नुत्फ़े से nuṭ'fatin
एक नुत्फ़े से
خَلَقَهُۥ उसने पैदा किया उसे khalaqahu
उसने पैदा किया उसे
فَقَدَّرَهُۥ फिर उसने तक़दीर मुक़र्रर की उसकी faqaddarahu
फिर उसने तक़दीर मुक़र्रर की उसकी
١٩ (19)
(19)
एक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।
८०:२०
ثُمَّ फिर thumma
फिर
ٱلسَّبِيلَ रास्ता l-sabīla
रास्ता
يَسَّرَهُۥ उसने आसान किया उसका yassarahu
उसने आसान किया उसका
٢٠ (20)
(20)
फिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।
८०:२१
ثُمَّ फिर thumma
फिर
أَمَاتَهُۥ उसने मौत दी उसे amātahu
उसने मौत दी उसे
فَأَقْبَرَهُۥ फिर उसने क़ब्र दी उसे fa-aqbarahu
फिर उसने क़ब्र दी उसे
٢١ (21)
(21)
फिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।
८०:२२
ثُمَّ फिर thumma
फिर
إِذَا जब idhā
जब
شَآءَ वो चाहेगा shāa
वो चाहेगा
أَنشَرَهُۥ वो उठा खड़ा करेगा उसे ansharahu
वो उठा खड़ा करेगा उसे
٢٢ (22)
(22)
फिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।
८०:२३
كَلَّا हरगिज़ नहीं kallā
हरगिज़ नहीं
لَمَّا अभी तक नहीं lammā
अभी तक नहीं
يَقْضِ उसने पूरा किया yaqḍi
उसने पूरा किया
مَآ जो
जो
أَمَرَهُۥ उसने हुक्म दिया था उसे amarahu
उसने हुक्म दिया था उसे
٢٣ (23)
(23)
हरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।1
८०:२४
فَلْيَنظُرِ पस चाहिए कि देखे falyanẓuri
पस चाहिए कि देखे
ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान
إِلَىٰ at ilā
at
طَعَامِهِۦٓ तरफ़ अपने खाने के ṭaʿāmihi
तरफ़ अपने खाने के
٢٤ (24)
(24)
अतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।
८०:२५
اَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम
صَبَبْنَا उँडेला हमने ṣababnā
उँडेला हमने
ٱلْمَآءَ पानी l-māa
पानी
صَبًّۭا ख़ूब उँडेलना ṣabban
ख़ूब उँडेलना
٢٥ (25)
(25)
कि हमने ख़ूब पानी बरसाया।
८०:२६
ثُمَّ फिर thumma
फिर
شَقَقْنَا फाड़ी हमने shaqaqnā
फाड़ी हमने
ٱلْأَرْضَ ज़मीन l-arḍa
ज़मीन
شَقًّۭا ख़ूब फाड़ना shaqqan
ख़ूब फाड़ना
٢٦ (26)
(26)
फिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।
८०:२७
فَأَنۢبَتْنَا फिर उगाया हमने fa-anbatnā
फिर उगाया हमने
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
حَبًّۭا ग़ल्ला ḥabban
ग़ल्ला
٢٧ (27)
(27)
फिर हमने उसमें अनाज उगाया।
८०:२८
وَعِنَبًۭا और उंगूर waʿinaban
और उंगूर
وَقَضْبًۭا और तरकारी waqaḍban
और तरकारी
٢٨ (28)
(28)
तथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।
८०:२९
وَزَيْتُونًۭا और ज़ैतून wazaytūnan
और ज़ैतून
وَنَخْلًۭا और खजूर wanakhlan
और खजूर
٢٩ (29)
(29)
तथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।
८०:३०
وَحَدَآئِقَ और बाग़ात waḥadāiqa
और बाग़ात
غُلْبًۭا घने ghul'ban
घने
٣٠ (30)
(30)
तथा घने बाग़।
८०:३१
وَفَـٰكِهَةًۭ और फल wafākihatan
और फल
وَأَبًّۭا और चारा wa-abban
और चारा
٣١ (31)
(31)
तथा फल और चारा।
८०:३२
مَّتَـٰعًۭا फ़ायदे की चीज़ें हैं matāʿan
फ़ायदे की चीज़ें हैं
لَّكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ और तुम्हारे मवेशियों के लिए wali-anʿāmikum
और तुम्हारे मवेशियों के लिए
٣٢ (32)
(32)
तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।1
८०:३३
فَإِذَا तो जब fa-idhā
तो जब
جَآءَتِ आ जाएगी jāati
आ जाएगी
ٱلصَّآخَّةُ कान बहरा कर देने वाली सख़्त आवाज़ l-ṣākhatu
कान बहरा कर देने वाली सख़्त आवाज़
٣٣ (33)
(33)
तो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।
८०:३४
يَوْمَ उस दिन yawma
उस दिन
يَفِرُّ भागेगा yafirru
भागेगा
ٱلْمَرْءُ इन्सान l-maru
इन्सान
مِنْ from min
from
أَخِيهِ अपने भाई से akhīhi
अपने भाई से
٣٤ (34)
(34)
जिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।
८०:३५
وَأُمِّهِۦ और अपनी माँ से wa-ummihi
और अपनी माँ से
وَأَبِيهِ और अपने बाप से wa-abīhi
और अपने बाप से
٣٥ (35)
(35)
तथा अपनी माता और अपने पिता (से)।
८०:३६
وَصَـٰحِبَتِهِۦ और अपनी बीवी से waṣāḥibatihi
और अपनी बीवी से
وَبَنِيهِ और अपने बेटों से wabanīhi
और अपने बेटों से
٣٦ (36)
(36)
तथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।
८०:३७
لِكُلِّ वास्ते हर likulli
वास्ते हर
ٱمْرِئٍۢ शख़्स के im'ri-in
शख़्स के
مِّنْهُمْ उनमें से min'hum
उनमें से
يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
شَأْنٌۭ ऐसी हालत होगी shanun
ऐसी हालत होगी
يُغْنِيهِ जो बेपरवा कर देगी उसे yugh'nīhi
जो बेपरवा कर देगी उसे
٣٧ (37)
(37)
उस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।
८०:३८
وُجُوهٌۭ कुछ चेहरे wujūhun
कुछ चेहरे
يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
مُّسْفِرَةٌۭ रौशन होंगे mus'firatun
रौशन होंगे
٣٨ (38)
(38)
उस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।
८०:३९
ضَاحِكَةٌۭ हँसते होंगे ḍāḥikatun
हँसते होंगे
مُّسْتَبْشِرَةٌۭ ख़ुशख़बरी पाने वाले होंगे mus'tabshiratun
ख़ुशख़बरी पाने वाले होंगे
٣٩ (39)
(39)
हँसते हुए, प्रसन्न होंगे।
८०:४०
وَوُجُوهٌۭ और कुछ चेहरे wawujūhun
और कुछ चेहरे
يَوْمَئِذٍ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
عَلَيْهَا उन पर ʿalayhā
उन पर
غَبَرَةٌۭ ग़ुबार होगा ghabaratun
ग़ुबार होगा
٤٠ (40)
(40)
तथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।
८०:४१
تَرْهَقُهَا छा रही होगी उन पर tarhaquhā
छा रही होगी उन पर
قَتَرَةٌ स्याही qataratun
स्याही
٤١ (41)
(41)
उनपर कालिमा छाई होगी।
८०:४२
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही लोग हैं ulāika
यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلْكَفَرَةُ जो काफ़िर हैं l-kafaratu
जो काफ़िर हैं
ٱلْفَجَرَةُ फ़ाजिर हैं l-fajaratu
फ़ाजिर हैं
٤٢ (42)
(42)
वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।1