१०१

अल-क़ारिआ

मक्की ११ आयतें पारा १
القارعة

सूरह अल-क़ारिआ (القارعة) पवित्र क़ुरआन का १०१ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ११ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१०१:१
ٱلْقَارِعَةُखटखटाने वालीal-qāriʿatu١
वह खड़खड़ा देने वाली।
१०१:२
مَاक्या है वोٱلْقَارِعَةُखटखटाने वालीl-qāriʿatu٢
क्या है वह खड़खड़ा देने वाली?
१०१:३
وَمَآऔर क्या चीज़wamāأَدْرَىٰكَबताए आपकोadrākaمَاकि क्या है वोٱلْقَارِعَةُखटखटाने वालीl-qāriʿatu٣
और तुम क्या जानो कि वह खड़खड़ा देने वाली क्या है?
१०१:४
يَوْمَजिस दिनyawmaيَكُونُहो जाऐंगेyakūnuٱلنَّاسُलोगl-nāsuكَٱلْفَرَاشِपरवानों की तरहkal-farāshiٱلْمَبْثُوثِबिखरे हुएl-mabthūthi٤
जिस दिन लोग बिखरे हुए पतिंगों की तरह हो जाएँगे।
१०१:५
وَتَكُونُऔर हो जाऐंगेwatakūnuٱلْجِبَالُपहाड़l-jibāluكَٱلْعِهْنِरंगीन रूई की तरहkal-ʿih'niٱلْمَنفُوشِधुनकी हुईl-manfūshi٥
और पर्वत धुने हुए रंगीन ऊन की तरह हो जाएँगे।1
१०१:६
فَأَمَّاतो रहाfa-ammāمَنवो जोmanثَقُلَتْभारी हुएthaqulatمَوَٰزِينُهُۥपलड़े उसकेmawāzīnuhu٦
तो जिसके पलड़े भारी हो गए,
१०१:७
فَهُوَतो वोfahuwaفِى(will be) inعِيشَةٍۢज़िन्दगी में होगाʿīshatinرَّاضِيَةٍۢपसंदीदाrāḍiyatin٧
तो वह संतोषजनक जीवन में होगा।
१०१:८
وَأَمَّاऔर रहाwa-ammāمَنْवो जोmanخَفَّتْहल्के हुएkhaffatمَوَٰزِينُهُۥपलड़े उसकेmawāzīnuhu٨
तथा जिसके पलड़े हल्के हो गए,
१०१:९
فَأُمُّهُۥतो उसी माँ(ठिकाना)fa-ummuhuهَاوِيَةٌۭहाविया(जहन्नम)होगीhāwiyatun٩
उसका ठिकाना 'हाविया' (गड्ढा) है।
१०१:१०
وَمَآऔर क्या चीज़wamāأَدْرَىٰكَबताए आपकोadrākaمَاwhatهِيَهْक्या है वोhiyah١٠
और तुम क्या जानो कि वह ('हाविया') क्या है?
१०१:११
نَارٌआग हैnārunحَامِيَةٌۢभड़कती हुईḥāmiyatun١١
वह एक बहुत गर्म आग है।1