२७

अन-नम्ल

मक्की ९३ आयतें पारा १
النمل

सूरह अन-नम्ल (النمل) पवित्र क़ुरआन का २७ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ९३ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
२७:१
طسٓ ۚط سtta-seenتِلْكَयेtil'kaءَايَـٰتُआयात हैंāyātuٱلْقُرْءَانِक़ुरआन कीl-qur'āniوَكِتَابٍۢand a Bookwakitābinمُّبِينٍऔर वाज़ेह किताब कीmubīnin١
ता, सीन। ये क़ुरआन तथा स्पष्ट पुस्तक की आयतें हैं।
२७:२
هُدًۭىहिदायतhudanوَبُشْرَىٰऔर ख़ुशख़बरी हैwabush'rāلِلْمُؤْمِنِينَईमान लाने वालों के लिएlil'mu'minīna٢
ईमानवालों के लिए मार्गदर्शन तथा शुभ-सूचना हैं।
२७:३
ٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيُقِيمُونَक़ायम करते हैंyuqīmūnaٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَيُؤْتُونَऔर वो अदा करते हैंwayu'tūnaٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataوَهُمऔर वोwahumبِٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत परbil-ākhiratiهُمْवोhumيُوقِنُونَवो यक़ीन रखते हैंyūqinūna٣
जो नमाज़ स्थापित करते तथा ज़कात देते हैं और वही हैं, जो आख़िरत (परलोक) पर विश्वास रखते हैं।
२७:४
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaلَا(do) notيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūnaبِٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत परbil-ākhiratiزَيَّنَّاमुज़य्यन कर दिए हमनेzayyannāلَهُمْउनके लिएlahumأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahumفَهُمْतो वोfahumيَعْمَهُونَवो भटकते फिरते हैंyaʿmahūna٤
निःसंदेह जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया है। अतः वे भटकते फिरते है।
२७:५
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaلَهُمْउनके लिएlahumسُوٓءُबुराsūuٱلْعَذَابِअज़ाब हैl-ʿadhābiوَهُمْऔर वोwahumفِىinٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiهُمُवो हीhumuٱلْأَخْسَرُونَसबसे ज़्यादा ख़सारे वाले हैंl-akhsarūna٥
यही लोग हैं, जिनके लिए बुरी यातना है तथा आख़िरत में यही सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैं।
२७:६
وَإِنَّكَऔर बेशक आपwa-innakaلَتُلَقَّىअलबत्ता आप दिए जाते हैंlatulaqqāٱلْقُرْءَانَक़ुरआनl-qur'ānaمِنfrom [near]minلَّدُنْपास सेladunحَكِيمٍबहुत हिकमत वालेḥakīminعَلِيمٍबहुत इल्म वाले केʿalīmin٦
और निःसंदेह आपको क़ुरर्आन एक पूर्ण हिकमत वाले, सब कुछ जानने वाले की ओर से दिया जाता है।
२७:७
إِذْजबidhقَالَकहाqālaمُوسَىٰमूसा नेmūsāلِأَهْلِهِۦٓअपने घर वालों सेli-ahlihiإِنِّىٓबेशक मैंinnīءَانَسْتُदेखी है मैं नेānastuنَارًۭاएक आगnāranسَـَٔاتِيكُمअनक़रीब मैं लाऊँगा तुम्हारे पासsaātīkumمِّنْهَاउसमें सेmin'hāبِخَبَرٍकोई ख़बरbikhabarinأَوْयाawءَاتِيكُمमैं लाऊँगा तुम्हारे पासātīkumبِشِهَابٍۢएक अँगाराbishihābinقَبَسٍۢजलता हुआqabasinلَّعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتَصْطَلُونَतुम ताप सकोtaṣṭalūna٧
जब1 मूसा ने अपने घर वालों से कहा : निःसंदेह मैंने एक आग देखी है। मैं शीघ्र तुम्हारे पास उससे कोई समाचार लाऊँगा या तुम्हारे पास उससे सुलगाया हुआ अंगारा लेकर आऊँगा, ताकि तुम तापो।
२७:८
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَهَاवो आया उस (आग) के पासjāahāنُودِىَवो पुकारा गयाnūdiyaأَنۢकिanبُورِكَबरकत दिया गयाbūrikaمَنजोmanفِى(is) atٱلنَّارِआग में हैl-nāriوَمَنْऔर जोwamanحَوْلَهَاउसके इर्द-गिर्द हैḥawlahāوَسُبْحَـٰنَऔर पाक हैwasub'ḥānaٱللَّهِअल्लाहl-lahiرَبِّजो रब हैrabbiٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों काl-ʿālamīna٨
फिर जब वह उसके पास आया, तो उसे आवाज़ दी गई : बरकत वाला है, वह जो इस आग में है तथा जो इसके आस-पास है। और अल्लाह पवित्र है, जाे सारे संसारों का पालनहार है।
२७:९
يَـٰمُوسَىٰٓऐ मूसाyāmūsāإِنَّهُۥٓबेशकinnahuأَنَاमैं हीanāٱللَّهُइलाह हूँl-lahuٱلْعَزِيزُनिहायत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُबहुत हिकमत वालाl-ḥakīmu٩
ऐ मूसा! निःसंदेह तथ्य यह है कि मैं ही अल्लाह हूँ। जो सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
२७:१०
وَأَلْقِऔर डाल देwa-alqiعَصَاكَ ۚलाठी अपनीʿaṣākaفَلَمَّاतो जबfalammāرَءَاهَاउसने देखा उसेraāhāتَهْتَزُّकि वो हरकत करती हैtahtazzuكَأَنَّهَاगोया कि वोka-annahāجَآنٌّۭसाँप हैjānnunوَلَّىٰवो मुँह मोड़ गयाwallāمُدْبِرًۭاपीठ फेरते हुएmud'biranوَلَمْऔर नाwalamيُعَقِّبْ ۚउसने पीछे मुड़कर देखाyuʿaqqibيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsāلَا(Do) notتَخَفْना तुम डरोtakhafإِنِّىबेशक मैंinnīلَا(do) notيَخَافُनहीं डरा करतेyakhāfuلَدَىَّमेरे पासladayyaٱلْمُرْسَلُونَरसूलl-mur'salūna١٠
और अपनी लाठी फेंक दे । फिर जब उसने उसे देखा कि हिल रही है, जैसे वह कोई साँप हो, तो पीठ फेरकर भागा और पीछे न मुड़ा। ऐ मूसा! डरो मत, निःसंदेह मेरे पास रसूल नहीं डरते।
२७:११
إِلَّاमगरillāمَنजिसनेmanظَلَمَज़ुल्म कियाẓalamaثُمَّफिरthummaبَدَّلَउसने बदल दियाbaddalaحُسْنًۢاनेकी सेḥus'nanبَعْدَबादbaʿdaسُوٓءٍۢबुराई केsūinفَإِنِّىतो बेशक मैंfa-innīغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हूँghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हूँraḥīmun١١
परंतु जिसने अत्याचार किया, फिर बुराई के बाद उसे भलाई से बदल दिया, तो निःसंदेह मैं बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् हूँ।
२७:१२
وَأَدْخِلْऔर दाख़िल कर देwa-adkhilيَدَكَहाथ अपनाyadakaفِىintoجَيْبِكَअपने गिरेबान मेंjaybikaتَخْرُجْवो निकलेगाtakhrujبَيْضَآءَसफ़ेद /चमकता हुआbayḍāaمِنْwithoutminغَيْرِबग़ैरghayriسُوٓءٍۢ ۖमर्ज़ /तक्लीफ़ केsūinفِى(These are) amongتِسْعِninetis'ʿiءَايَـٰتٍनौ निशानियों में से हैंāyātinإِلَىٰtoilāفِرْعَوْنَतरफ़ फ़िरऔनfir'ʿawnaوَقَوْمِهِۦٓ ۚऔर उसकी क़ौम केwaqawmihiإِنَّهُمْबेशक वोinnahumكَانُوا۟हैं वोkānūقَوْمًۭاलोगqawmanفَـٰسِقِينَनाफ़रमानfāsiqīna١٢
और अपना हाथ अपने गरीबान में डाल। वह बिना किसी दोष के (चमकता हुआ) सफ़ेद निकलेगा; नौ निशानियों में से एक, फ़िरऔन तथा उसकी जाति की ओर। निःसंदेह वे अवज्ञाकारी लोग थे।
२७:१३
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَتْهُمْआ गईं उनके पासjāathumءَايَـٰتُنَاनिशानियाँ हमारीāyātunāمُبْصِرَةًۭवाज़ेहmub'ṣiratanقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūهَـٰذَاयेhādhāسِحْرٌۭजादू हैsiḥ'runمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun١٣
फिर जब हमारी निशानियाँ उनके पास आईं जो आँखें खोलने वाली थीं, तो उन्होंने कहा : यह खुला जादू है।
२७:१४
وَجَحَدُوا۟और उन्होंने इन्कार कियाwajaḥadūبِهَاउनकाbihāوَٱسْتَيْقَنَتْهَآहालाँकि यक़ीन कर लिया था उसकाwa-is'tayqanathāأَنفُسُهُمْउनके दिलों नेanfusuhumظُلْمًۭاज़ुल्मẓul'manوَعُلُوًّۭا ۚऔर सरकशी सेwaʿuluwwanفَٱنظُرْतो देखोfa-unẓurكَيْفَकिस तरहkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअनजामʿāqibatuٱلْمُفْسِدِينَफ़साद करने वालों काl-muf'sidīna١٤
तथा उन्होंने अत्याचार एवं अभिमान के कारण उनका इनकार कर दिया। हालाँकि उनके दिलों को उनका विश्वास हो चुका था। तो देखो कि बिगाड़ पैदा करने वालों का परिणाम कैसा हुआ?
२७:१५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadءَاتَيْنَاदिया हमनेātaynāدَاوُۥدَदाऊदdāwūdaوَسُلَيْمَـٰنَऔर सुलैमान कोwasulaymānaعِلْمًۭا ۖइल्मʿil'manوَقَالَاऔर उन दोनों ने कहाwaqālāٱلْحَمْدُसब तारीफ़l-ḥamduلِلَّهِअल्लाह के लिए हैlillahiٱلَّذِىजिसनेalladhīفَضَّلَنَاफ़ज़ीलत दी हमेंfaḍḍalanāعَلَىٰoverʿalāكَثِيرٍۢअक्सरियत परkathīrinمِّنْofminعِبَادِهِअपने बन्दों में सेʿibādihiٱلْمُؤْمِنِينَजो ईमान लाने वाले हैंl-mu'minīna١٥
और निःसंदेह हमने दाऊद तथा सुलैमान को ज्ञान1 प्रदान किया और उन दोनों ने कहा : सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें अपने बहुत-से ईमानवाले बंदों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
२७:१६
وَوَرِثَऔर वारिस हुआwawarithaسُلَيْمَـٰنُसुलैमानsulaymānuدَاوُۥدَ ۖदाऊद काdāwūdaوَقَالَऔर उसने कहाwaqālaيَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّاسُलोगोl-nāsuعُلِّمْنَاसिखाए गए हमʿullim'nāمَنطِقَबोलीmanṭiqaٱلطَّيْرِपरिन्दों कीl-ṭayriوَأُوتِينَاऔर दिए गए हमwaūtīnāمِنfromminكُلِّहरkulliشَىْءٍ ۖचीज़ (ज़रूरत की)shayinإِنَّबेशकinnaهَـٰذَاयेhādhāلَهُوَअलबत्ता वोlahuwaٱلْفَضْلُफ़ज़ल हैl-faḍluٱلْمُبِينُवाज़ेहl-mubīnu١٦
और सुलैमान दाऊद का उत्तराधिकारी हुआ तथा उसने कहा : ऐ लोगो! हमें पक्षियों की बोली सिखाई गई तथा हमें हर चीज़ में से हिस्सा प्रदान किया गया है। निःसंदेह यह निश्चित रूप से स्पष्ट अनुग्रह है।
२७:१७
وَحُشِرَऔर इकट्ठा किए गएwaḥushiraلِسُلَيْمَـٰنَसुलैमान के लिएlisulaymānaجُنُودُهُۥउसके लश्करjunūduhuمِنَofminaٱلْجِنِّजिन्नों में सेl-jiniوَٱلْإِنسِऔर इन्सानोंwal-insiوَٱلطَّيْرِऔर परिन्दों में सेwal-ṭayriفَهُمْतो वोfahumيُوزَعُونَवो गिरोहों में तक़सीम किए जाते हैंyūzaʿūna١٧
तथा सुलैमान के लिए जिन्नों तथा इनसानों और पक्षियों में से उसकी सेनाएँ इकट्ठी की गईं, फिर उन्हें अलग-अलग बांटा जाता था।
२७:१८
حَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَآजबidhāأَتَوْا۟वो आएatawعَلَىٰtoʿalāوَادِवादी परwādiٱلنَّمْلِचींटीयों कीl-namliقَالَتْकहने लगीqālatنَمْلَةٌۭएक चींटीnamlatunيَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّمْلُचींटियोंl-namluٱدْخُلُوا۟दाख़िल हो जाओud'khulūمَسَـٰكِنَكُمْअपने घरों मेंmasākinakumلَاlest not crush youيَحْطِمَنَّكُمْना कुचल डालें तुम्हेंyaḥṭimannakumسُلَيْمَـٰنُसुलैमानsulaymānuوَجُنُودُهُۥऔर लश्कर उसकेwajunūduhuوَهُمْऔर वोwahumلَا(do) not perceiveيَشْعُرُونَवो शऊर ना रखते होंyashʿurūna١٨
यहाँ तक कि जब वे चींटियों की घाटी में पहुँचे, तो एक चींटी ने कहा : ऐ चींटियो! अपने घरों में प्रवेश कर जाओ। कहीं सुलैमान और उसकी सेनाएँ तुम्हें कुचल न डालें और वे अनजान हों।
२७:१९
فَتَبَسَّمَतो वो मुस्करा दियाfatabassamaضَاحِكًۭاहँसते हुएḍāḥikanمِّنatminقَوْلِهَاउसकी बात सेqawlihāوَقَالَऔर उसने कहाwaqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiأَوْزِعْنِىٓतौफ़ीक़ दे मुझेawziʿ'nīأَنْकिanأَشْكُرَमैं शुक्र अदा करूँashkuraنِعْمَتَكَतेरी नेअमत काniʿ'matakaٱلَّتِىٓवो जोallatīأَنْعَمْتَइनआम की तू नेanʿamtaعَلَىَّमुझ परʿalayyaوَعَلَىٰऔर ऊपरwaʿalāوَٰلِدَىَّमेरे वालिदैन केwālidayyaوَأَنْऔर ये किwa-anأَعْمَلَमैं अमल करूँaʿmalaصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanتَرْضَىٰهُतू राज़ी हो जाए जिससेtarḍāhuوَأَدْخِلْنِىऔर दाख़िल कर मुझेwa-adkhil'nīبِرَحْمَتِكَसाथ अपनी रहमत केbiraḥmatikaفِىamongعِبَادِكَअपने बन्दों मेंʿibādikaٱلصَّـٰلِحِينَजो नेक हैंl-ṣāliḥīna١٩
तो वह (सुलैमान) उसकी बात से हँसता हुआ मुसकुराया और उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर कि मैं तेरी उस ने'मत का शुक्र अदा करूँ, जो तूने मुझे तथा मेरे माता-पिता को प्रदान की है, और यह कि मैं अच्छा कार्य करूँ, जिसे तू पसंद करे और मुझे अपनी दया से अपने सदाचारी बंदों में शामिल कर ले।
२७:२०
وَتَفَقَّدَऔर उसने जायज़ा लियाwatafaqqadaٱلطَّيْرَपरिन्दों काl-ṭayraفَقَالَफिर कहाfaqālaمَاक्या हैلِىَमुझेliyaلَآnotأَرَىनहीं मैं देखताarāٱلْهُدْهُدَहुदहुद कोl-hud'hudaأَمْयाamكَانَहै वोkānaمِنَfromminaٱلْغَآئِبِينَग़ायब होने वालों में सेl-ghāibīna٢٠
और उसने पक्षियों का निरीक्षण किया, तो कहा : मुझे क्या है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा, या वह अनुपस्थि रहने वालों में से है?
२७:२१
لَأُعَذِّبَنَّهُۥअलबत्ता मैं ज़रूर सज़ा दूँगा उसेla-uʿadhibannahuعَذَابًۭاसज़ाʿadhābanشَدِيدًاशदीदshadīdanأَوْयाawلَأَا۟ذْبَحَنَّهُۥٓअलबत्ता मैं ज़रूर ज़िबह करूँगा उसेlaādh'baḥannahuأَوْयाawلَيَأْتِيَنِّىअलबत्ता वो ज़रूर लाए मेरे पासlayatiyannīبِسُلْطَـٰنٍۢकोई दलीलbisul'ṭāninمُّبِينٍۢवाज़ेहmubīnin٢١
निश्चय ही मैं उसे बहुत कठोर दंड दूँगा, या मैं अवश्य ही उसे ज़बह कर डालूँगा, या वह अवश्य ही मेरे पास कोई स्पष्ट तर्क लेकर आएगा।
२७:२२
فَمَكَثَतो वो ठहराfamakathaغَيْرَnotghayraبَعِيدٍۢथोड़ी देरbaʿīdinفَقَالَतो कहा (हुदहुद ने)faqālaأَحَطتُअहाता किया मैं नेaḥaṭtuبِمَاउसका जोbimāلَمْनहींlamتُحِطْआपने अहाता कियाtuḥiṭبِهِۦजिसकाbihiوَجِئْتُكَऔर लाया हूँ मैं आपके पासwaji'tukaمِنfromminسَبَإٍۭसबा सेsaba-inبِنَبَإٍۢएक ख़बरbinaba-inيَقِينٍयक़ीनीyaqīnin٢٢
फिर कुछ अधिक देर नहीं ठहरा कि उसने (आकर) कहा : मैं ऐसी बात से अवगत हुआ हूँ, जिससे आप अवगत नहीं हुए और मैं आपके पास 'सबा'1 से एक पक्की ख़बर लाया हूँ।
२७:२३
إِنِّىबेशक मैंinnīوَجَدتُّपाया मैं नेwajadttuٱمْرَأَةًۭएक औरत कोim'ra-atanتَمْلِكُهُمْवो हुक्मरानी करती है उन परtamlikuhumوَأُوتِيَتْऔर वो दी गई हैwaūtiyatمِنofminكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ ( ज़रूरत की )shayinوَلَهَاऔर उसके लिएwalahāعَرْشٌतख़्त हैʿarshunعَظِيمٌۭबहुत बड़ाʿaẓīmun٢٣
निःसंदेह मैंने एक महिला को पाया, जो उनपर शासन कर रही है तथा उसे हर चीज़ का हिस्सा दिया गया है और उसके पास एक बड़ा सिंहासन है।
२७:२४
وَجَدتُّهَاपाया मैं ने उसेwajadttuhāوَقَوْمَهَاऔर उसकी क़ौम कोwaqawmahāيَسْجُدُونَवो सजदा करते हैंyasjudūnaلِلشَّمْسِसूरज कोlilshamsiمِنinstead of Allahminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَزَيَّنَऔर मुज़य्यन कर दिएwazayyanaلَهُمُउनके लिएlahumuٱلشَّيْطَـٰنُशैतान नेl-shayṭānuأَعْمَـٰلَهُمْआमाल उनकेaʿmālahumفَصَدَّهُمْफिर उसने रोक दिया उन्हेंfaṣaddahumعَنِfromʿaniٱلسَّبِيلِ(सीधे) रास्ते सेl-sabīliفَهُمْपस वोfahumلَا(are) notيَهْتَدُونَनहीं वो हिदायत पातेyahtadūna٢٤
मैंने उसे तथा उसकी जाति को अल्लाह के सिवा सूर्य को सजदा करते हुए पाया और शैतान ने उनके कामों को उनके लिए शोभित कर दिया है। चुनाँचे उन्हें सुपथ से रोक दिया है। अतः वे मार्गदर्शन नहीं पाते।
२७:२५
أَلَّاये कि नहींallāيَسْجُدُوا۟वो सजदा करतेyasjudūلِلَّهِअल्लाह के लिएlillahiٱلَّذِىवो जोalladhīيُخْرِجُनिकालता हैyukh'rijuٱلْخَبْءَछुपी चीज़ कोl-khaba-aفِىinٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन मेंwal-arḍiوَيَعْلَمُऔर वो जानता हैwayaʿlamuمَاजो कुछتُخْفُونَतुम छुपाते होtukh'fūnaوَمَاऔर जो कुछwamāتُعْلِنُونَतुम ज़ाहिर करते होtuʿ'linūna٢٥
(शैतान ने उनके कामों को उनके लिए शोभित कर दिया है) ताकि वे उस अल्लाह को सजदा न करें, जो आकाशों तथा धरती में छिपी चीज़ों1 को निकालता है तथा वह जानता है जो तुम छिपाते हो और जो प्रकट करते हो।
२७:२६
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़ )ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَवो हीhuwaرَبُّरब हैrabbuٱلْعَرْشِअर्शेl-ʿarshiٱلْعَظِيمِ ۩‏अज़ीम काl-ʿaẓīmi٢٦
अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं, जो महान सिंहासन का रब है।
२७:२७
۞ قَالَउसने कहाqālaسَنَنظُرُअनक़रीब हम देखेंगेsananẓuruأَصَدَقْتَक्या सच कहा तू नेaṣadaqtaأَمْयाamكُنتَहै तूkuntaمِنَofminaٱلْكَـٰذِبِينَझूठों में सेl-kādhibīna٢٧
(सुलैमान ने) कहा : हम देखेंगे कि तूने सच कहा, या तू झूठों में से था।
२७:२८
ٱذْهَبले जाओidh'habبِّكِتَـٰبِىख़त मेराbikitābīهَـٰذَاयेhādhāفَأَلْقِهْफिर डाल दो उसेfa-alqihإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimثُمَّफिरthummaتَوَلَّहट जाओtawallaعَنْهُمْउनसेʿanhumفَٱنظُرْफिर देखोfa-unẓurمَاذَاक्या कुछmādhāيَرْجِعُونَवो जवाब देते हैंyarjiʿūna٢٨
मेरा यह पत्र लेकर जा और इसे उनकी ओर डाल दे। फिर उनसे अलग हटकर देख कि वे क्या जवाब देते हैं।
२७:२९
قَالَتْबोली (मलका)qālatيَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلْمَلَؤُا۟सरदारोl-mala-uإِنِّىٓबेशक मैंinnīأُلْقِىَडाला गयाul'qiyaإِلَىَّमेरी तरफ़ilayyaكِتَـٰبٌۭएक ख़तkitābunكَرِيمٌमुअज़्ज़िज़karīmun٢٩
उस (रानी) ने कहा : ऐ सरदारो! निःसंदेह मेरी ओर एक प्रतिष्ठित पत्र फेंका गया है।
२७:३०
إِنَّهُۥबेशक वोinnahuمِن(is) fromminسُلَيْمَـٰنَसुलैमान की तरफ़ से हैsulaymānaوَإِنَّهُۥऔर बेशक वोwa-innahuبِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह के हैl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बड़ा मेहरबान हैl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi٣٠
निःसंदेह वह सुलैमान की ओर से है और निःसंदेह वह अल्लाह के नाम से है, जो अत्यंत कृपाशील, असीम दयावान् है।
२७:३१
أَلَّاकि नाallāتَعْلُوا۟तुम सरकशी करोtaʿlūعَلَىَّमुझ परʿalayyaوَأْتُونِىऔर आ जाओ मेरे पासwatūnīمُسْلِمِينَफ़रमाबरदार बन करmus'limīna٣١
यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो तथा आज्ञाकारी होकर मेरे पास आ जाओ।
२७:३२
قَالَتْवो कहने लगीqālatيَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلْمَلَؤُا۟सरदारोl-mala-uأَفْتُونِىजवाब दो मुझेaftūnīفِىٓinأَمْرِىमेरे मामले मेंamrīمَاनहींكُنتُहूँ मैंkuntuقَاطِعَةًक़तई फ़ैसला करने वालीqāṭiʿatanأَمْرًاकिसी काम काamranحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāتَشْهَدُونِतुम मौजूद हो मेरे पासtashhadūni٣٢
उसने कहा : ऐ प्रमुखो! मुझे मेरे मामले में सही हल बताओ। मैं किसी मामले का फ़ैसला करने वाली नहीं, यहाँ तक तुम मेरे पास उपस्थित हो।
२७:३३
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūنَحْنُहमnaḥnuأُو۟لُوا۟(are) possessorsulūقُوَّةٍۢक़ुव्वत वाले हैंquwwatinوَأُو۟لُوا۟and possessorswa-ulūبَأْسٍۢऔर जंगजू हैंbasinشَدِيدٍۢसख़्तshadīdinوَٱلْأَمْرُऔर फ़ैसलाwal-amruإِلَيْكِतुम्हारी तरफ़ हैilaykiفَٱنظُرِىतो देखलो / ग़ौर कर लोfa-unẓurīمَاذَاक्याmādhāتَأْمُرِينَतुम हुक्म देती होtamurīna٣٣
उन्होंने कहा : हम बड़े पराक्रमी और प्रखर योद्धा हैं और मामला आपके हवाले है, सो देखे लें आप क्या आदेश देती हैं।
२७:३४
قَالَتْवो कहने लगीqālatإِنَّबेशकinnaٱلْمُلُوكَबादशाहl-mulūkaإِذَاजबidhāدَخَلُوا۟वो दाख़िल होते हैंdakhalūقَرْيَةًकिसी बस्ती मेंqaryatanأَفْسَدُوهَاवो तबाह कर देते हैं उसेafsadūhāوَجَعَلُوٓا۟और वो कर देते हैंwajaʿalūأَعِزَّةَ(the) most honorableaʿizzataأَهْلِهَآउसके मुअज़्ज़िज़ बाशिन्दों कोahlihāأَذِلَّةًۭ ۖज़लीलadhillatanوَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaيَفْعَلُونَये करेंगेyafʿalūna٣٤
उसने कहा : निःसंदेह राजा जब किसी बस्ती में प्रवेश करते हैं, तो उसे ख़राब कर देते हैं और उसके वासियों में से प्रतिष्ठित लोगों को अपमानित कर देते हैं। और इसी तरह ये करेंगे।
२७:३५
وَإِنِّىऔर बेशक मैंwa-innīمُرْسِلَةٌभेजने वाली हूँmur'silatunإِلَيْهِمतरफ़ उनकेilayhimبِهَدِيَّةٍۢएक हदियाbihadiyyatinفَنَاظِرَةٌۢफिर देखने वाली हूँfanāẓiratunبِمَसाथ किस चीज़ केbimaيَرْجِعُलौटते हैंyarjiʿuٱلْمُرْسَلُونَभेजे हुए (क़ासिद)l-mur'salūna٣٥
और निःसंदेह मैं उनकी ओर एक उपहार भेजने वाली हूँ। फिर देखती हूँ कि दूत क्या उत्तर लेकर आते हैं?
२७:३६
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَवो आयाjāaسُلَيْمَـٰنَसुलैमान के पासsulaymānaقَالَउसने कहाqālaأَتُمِدُّونَنِक्या तुम मदद देते हो मुझेatumiddūnaniبِمَالٍۢसाथ माल केbimālinفَمَآतो जोfamāءَاتَىٰنِۦَअता किया मुझेātāniyaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunمِّمَّآउससे जोmimmāءَاتَىٰكُمउसने अता किया तुम्हेंātākumبَلْबल्किbalأَنتُمतुम हीantumبِهَدِيَّتِكُمْसाथ अपने हदिये केbihadiyyatikumتَفْرَحُونَतुम ख़ुश होते होtafraḥūna٣٦
तो जब वह (दूत) सुलैमान के पास आया, तो उसने कहा : क्या तुम धन से मेरी सहायता करते हो? तो जो कुछ अल्लाह ने मुझे दिया है, वह उससे बेहतर है जो उसने तुम्हें दिया है, बल्कि तुम ही लोग अपने उपहारों पर खुश होते हो।
२७:३७
ٱرْجِعْलौट जाओir'jiʿإِلَيْهِمْउनकी तरफ़ilayhimفَلَنَأْتِيَنَّهُمपस अलबत्ता हम ज़रूर लाऐंगे उनके पासfalanatiyannahumبِجُنُودٍۢऐसे लश्करों कोbijunūdinلَّاnotقِبَلَनहीं कोई मुक़ाबलाqibalaلَهُمउनके लिएlahumبِهَاउनकाbihāوَلَنُخْرِجَنَّهُمऔर अलबत्ता हम ज़रूर निकाल देंगे उन्हेंwalanukh'rijannahumمِّنْهَآउससेmin'hāأَذِلَّةًۭज़लील करकेadhillatanوَهُمْइस हाल में कि वोwahumصَـٰغِرُونَख़्वार होंगेṣāghirūna٣٧
उनके पास वापस जाओ, अब हम अवश्य उनके पास ऐसी सेनाएँ लेकर आएँगे, जिनका वे सामना नहीं कर सकेंगे और हम अवश्य उन्हें उस (बस्ती) से इस तरह अपमानित करके निकाल देंगे कि वे तुच्छ होंगे।
२७:३८
قَالَकहाqālaيَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلْمَلَؤُا۟सरदारोl-mala-uأَيُّكُمْकौन तुम में सेayyukumيَأْتِينِىलाएगा मेरे पासyatīnīبِعَرْشِهَاतख़्त उसकाbiʿarshihāقَبْلَइससे पहलेqablaأَنकिanيَأْتُونِىवो आ जाऐं मेरे पासyatūnīمُسْلِمِينَफ़रमाबरदार बन करmus'limīna٣٨
(सुलैमान ने) कहा : ऐ प्रमुखो! तुममें से कौन उसका सिंहासन मेरे पास लेकर आएगा1, इससे पहले कि वे आज्ञाकारी होकर मेरे पास आएँ।
२७:३९
قَالَकहाqālaعِفْرِيتٌۭएक देव नेʿif'rītunمِّنَofminaٱلْجِنِّजिन्नों में सेl-jiniأَنَا۠मैंanāءَاتِيكَमैं ले आऊँगा आपके पासātīkaبِهِۦउसेbihiقَبْلَइससे पहलेqablaأَنकिanتَقُومَआप खड़े होंtaqūmaمِنfromminمَّقَامِكَ ۖअपनी जगह सेmaqāmikaوَإِنِّىऔर बेशक मैंwa-innīعَلَيْهِइस परʿalayhiلَقَوِىٌّअलबत्ता क़ुव्वत रखने वालाlaqawiyyunأَمِينٌۭबहुत अमानतदार हूँamīnun٣٩
जिन्नों में से एक शक्तिशाली शरारती कहने लगा : मैं उसे आपके पास ले आऊँगा, इससे पूर्व कि आप अपने स्थान से उठें और निःसंदेह मैं इसकी निश्चय पूरी शक्ति रखने वाला, अमानतदार हूँ।
२७:४०
قَالَकहाqālaٱلَّذِىउसनेalladhīعِندَهُۥजिसके पासʿindahuعِلْمٌۭइल्म थाʿil'munمِّنَofminaٱلْكِتَـٰبِकिताब काl-kitābiأَنَا۠मैंanāءَاتِيكَमैं ले आऊँगा आपके पासātīkaبِهِۦउसेbihiقَبْلَइससे पहलेqablaأَنकिanيَرْتَدَّलौटेyartaddaإِلَيْكَआपकी तरफ़ilaykaطَرْفُكَ ۚनज़र आपकीṭarfukaفَلَمَّاफिर जबfalammāرَءَاهُउसने देखा उसेraāhuمُسْتَقِرًّاरखा हुआmus'taqirranعِندَهُۥअपने पासʿindahuقَالَउसने कहाqālaهَـٰذَاयेhādhāمِن(is) fromminفَضْلِफ़ज़ल से हैfaḍliرَبِّىमेरे रब केrabbīلِيَبْلُوَنِىٓताकि वो आज़माए मुझेliyabluwanīءَأَشْكُرُक्या मैं शुक्र करता हूँa-ashkuruأَمْयाamأَكْفُرُ ۖमैं नाशुक्री करता हूँakfuruوَمَنऔर जिसनेwamanشَكَرَशुक्र कियाshakaraفَإِنَّمَاतो यक़ीननfa-innamāيَشْكُرُवो शुक्र करेगाyashkuruلِنَفْسِهِۦ ۖअपने ही लिएlinafsihiوَمَنऔर जिसनेwamanكَفَرَकुफ़्र कियाkafaraفَإِنَّचो यक़ीननfa-innaرَبِّىमेरा रबrabbīغَنِىٌّۭबहुत बेनियाज़ हैghaniyyunكَرِيمٌۭनिहायत इज़्ज़त वाला हैkarīmun٤٠
जिसके पास पुस्तक का ज्ञान था, उसने कहा : मैं उसे आपके पास इससे पहले ले आता हूँ कि आपकी पलक झपके। और जब उसने उसे अपने पास रखा हुआ देखा, तो कहा : यह मेरे पालनहार का अनुग्रह है, ताकि मेरी परीक्षा ले कि मैं शुक्र अदा करता हूँ या नाशुक्री करता हूँ। और जिसने शुक्र किया, तो वह अपने ही लिए शुक्र करता है तथा जिसने नाशुक्री की, तो निश्चय मेरा पालनहार बहुत बेनियाज़, अत्यंत उदार है।
२७:४१
قَالَउसने कहाqālaنَكِّرُوا۟अनजाना कर दोnakkirūلَهَاउसके लिएlahāعَرْشَهَاतख़्त उसकाʿarshahāنَنظُرْहम देखते हैंnanẓurأَتَهْتَدِىٓक्या वो हिदायत पाती हैatahtadīأَمْयाamتَكُونُहोती है वोtakūnuمِنَofminaٱلَّذِينَउन में से जोalladhīnaلَاare not guidedيَهْتَدُونَनहीं वो हिदायत पातेyahtadūna٤١
(सुलैमान ने) कहा : उसके लिए उसके सिंहासन का रंग-रूप बदल दो। ताकि हम देखें क्या वह राह पा लेती है या उनमें से होती है, जो राह नहीं पाते।
२७:४२
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَتْवो आ गईjāatقِيلَकहा गयाqīlaأَهَـٰكَذَاक्या इसी तरह का हैahākadhāعَرْشُكِ ۖतख़्त तेराʿarshukiقَالَتْवो बोलीqālatكَأَنَّهُۥगोया कि वोka-annahuهُوَ ۚवो ही हैhuwaوَأُوتِينَاऔर दिए गए थे हमwaūtīnāٱلْعِلْمَइल्मl-ʿil'maمِنbefore herminقَبْلِهَاइससे पहले हीqablihāوَكُنَّاऔर थे हमwakunnāمُسْلِمِينَफ़रमाबरदारmus'limīna٤٢
फिर जब वह आई, तो उससे कहा गया : क्या तेरा सिंहासन ऐसा ही है? उसने कहा : यह तो मानो वही है, और हमें इससे पहले ज्ञान दिया गया था, और हम आज्ञाकारी थे।
२७:४३
وَصَدَّهَاऔर रोक रखा था उसेwaṣaddahāمَاजिसकीكَانَتथी वोkānatتَّعْبُدُवो इबादत करतीtaʿbuduمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِ ۖअल्लाह केl-lahiإِنَّهَاबेशक वोinnahāكَانَتْथी वोkānatمِنfromminقَوْمٍۢक़ौम सेqawminكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कीkāfirīna٤٣
और उसे (ईमान से) उस चीज़ ने रोक रखा था, जिसकी वह अल्लाह के सिवा इबादत कर रही थी। निःसंदेह वह काफ़िर लोगों में से थी।
२७:४४
قِيلَकहा गयाqīlaلَهَاउसेlahāٱدْخُلِىदाख़िल हो जाओud'khulīٱلصَّرْحَ ۖमहल मेंl-ṣarḥaفَلَمَّاतो जबfalammāرَأَتْهُउसने देखा उसेra-athuحَسِبَتْهُवो समझी उसेḥasibathuلُجَّةًۭगहरा पानीlujjatanوَكَشَفَتْऔर उसने खोल दींwakashafatعَن[on]ʿanسَاقَيْهَا ۚपिंडलियाँ अपनीsāqayhāقَالَउसने कहाqālaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuصَرْحٌۭमहल हैṣarḥunمُّمَرَّدٌۭचिकनाmumarradunمِّنofminقَوَارِيرَ ۗ(बनाया गया) शीशों सेqawārīraقَالَتْवो कहने लगीqālatرَبِّऐ मेरे रबrabbiإِنِّىबेशक मैंinnīظَلَمْتُज़ुल्म किया मैं नेẓalamtuنَفْسِىअपनी जान परnafsīوَأَسْلَمْتُऔर इस्लाम ले आई मैंwa-aslamtuمَعَसाथmaʿaسُلَيْمَـٰنَसुलैमान केsulaymānaلِلَّهِअल्लाह के लिएlillahiرَبِّजो रब हैrabbiٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों काl-ʿālamīna٤٤
उससे कहा गया : इस महल में प्रवेश कर जाओ। तो जब उसने उसे देखा, तो उसे गहरा पानी समझा और अपनी दोनों पिंडलियाँ से कपड़ा उठा लिया। (सुलैमान ने) कहा : यह तो शीशे से मढ़ा हुआ चिकना महल है। उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मैंने अपने प्राण1 पर अत्याचार किया है और (अब) मैं सुलैमान के साथ सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के लिए आज्ञाकारिणी हो गई।
२७:४५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीकwalaqadأَرْسَلْنَآभेजा हमनेarsalnāإِلَىٰtoilāثَمُودَतरफ़ समूद केthamūdaأَخَاهُمْउनके भाईakhāhumصَـٰلِحًاसालेह कोṣāliḥanأَنِकिaniٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaفَإِذَاतो यकायकfa-idhāهُمْवोhumفَرِيقَانِदो फ़रीक़ हो करfarīqāniيَخْتَصِمُونَवो झगड़ रहे थेyakhtaṣimūna٤٥
और निःसंदेह हमने समूद की ओर उनके भाई सालेह़ को भेजा कि तुम सब अल्लाह की इबादत करो, तो अचानक वे दो समूहों में बंटकर झगड़ने लगे।
२७:४६
قَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiلِمَक्योंlimaتَسْتَعْجِلُونَतुम जल्दी माँगते होtastaʿjilūnaبِٱلسَّيِّئَةِबुराई कोbil-sayi-atiقَبْلَक़ब्लqablaٱلْحَسَنَةِ ۖभलाई सेl-ḥasanatiلَوْلَاक्यों नहींlawlāتَسْتَغْفِرُونَतुम बख़्शिश माँगतेtastaghfirūnaٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتُرْحَمُونَतुम रहम किए जाओtur'ḥamūna٤٦
(सालेह ने) कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम भलाई से पहले बुराई1 क्यों जल्दी माँगते हो? तुम अल्लाह से क्षमा क्यों नहीं माँगते, ताकि तुम पर दया की जाए?
२७:४७
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūٱطَّيَّرْنَاबुरा शगून लिया हमनेiṭṭayyarnāبِكَतुझसेbikaوَبِمَنऔर उनसे जोwabimanمَّعَكَ ۚसाथ हैं तेरेmaʿakaقَالَकहाqālaطَـٰٓئِرُكُمْबदशगूनी तुम्हारीṭāirukumعِندَ(is) withʿindaٱللَّهِ ۖअल्लाह के पास हैl-lahiبَلْबल्किbalأَنتُمْतुमantumقَوْمٌۭऐसे लोग होqawmunتُفْتَنُونَतुम आज़माए जा रहे होtuf'tanūna٤٧
उन्होंने कहा : हमने तुमपर तथा तुम्हारे साथियों पर अपशकुन पाया है। (सालेह़ ने) कहा : तुम्हारा अपशकुन अल्लाह के पास1 है, बल्कि तुम ऐसे लोग हो जिनकी परीक्षा ली जा रही है।
२७:४८
وَكَانَऔर थेwakānaفِىinٱلْمَدِينَةِशहर मेंl-madīnatiتِسْعَةُनौtis'ʿatuرَهْطٍۢगिरोहrahṭinيُفْسِدُونَवो फ़साद करते थेyuf'sidūnaفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَلَاऔर नाwalāيُصْلِحُونَवो इस्लाह करते थेyuṣ'liḥūna٤٨
और उस नगर में नौ (9) लोग थे, जो धरती में उत्पात मचाते थे और सुधार नहीं करते थे।
२७:४९
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūتَقَاسَمُوا۟आपस में क़सम खाओtaqāsamūبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiلَنُبَيِّتَنَّهُۥअलबत्ता हम ज़रूर रात को हमला करेंगे उस परlanubayyitannahuوَأَهْلَهُۥऔर उसके घर वालों परwa-ahlahuثُمَّफिरthummaلَنَقُولَنَّअलबत्ता हम ज़रूर कहेंगेlanaqūlannaلِوَلِيِّهِۦउसके सरपरस्त सेliwaliyyihiمَاनहींشَهِدْنَاमौजूद थे हमshahid'nāمَهْلِكَहलाकत के वक़्तmahlikaأَهْلِهِۦउसके ख़ानदान कीahlihiوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَصَـٰدِقُونَअलबत्ता सच्चे हैंlaṣādiqūna٤٩
उन्होंने कहा : आपस में अल्लाह की क़सम खाओ कि हम अवश्य ही उसपर और उसके परिवार पर रात में हमला करेंगे, फिर हम अवश्य ही उसके वारिस (उत्तराधिकारी) से कह देंगे : हम उसके परिवार की मृत्यु के समय मौजूद नहीं थे। और निःसंदेह हम अवश्य सच्चे हैं।
२७:५०
وَمَكَرُوا۟और उन्होंने चाल चलीwamakarūمَكْرًۭاएक चालmakranوَمَكَرْنَاऔर तदबीर की हमनेwamakarnāمَكْرًۭاएक तदबीरmakranوَهُمْऔर वोwahumلَا(did) notيَشْعُرُونَना वो शऊर रखते थेyashʿurūna٥٠
और उन्होंने एक चाल चली और हमने भी एक चाल चली और वे सोचते तक न थे।
२७:५१
فَٱنظُرْपस देखिएfa-unẓurكَيْفَकैसाkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअंजामʿāqibatuمَكْرِهِمْउनकी चाल काmakrihimأَنَّاबेशक हमannāدَمَّرْنَـٰهُمْतबाह कर दिया हमने उन्हेंdammarnāhumوَقَوْمَهُمْऔर उनकी क़ौम कोwaqawmahumأَجْمَعِينَसब के सबकोajmaʿīna٥١
तो देखो उनकी चाल का परिणाम कैसा हुआ कि निःसंदेह हमने उन्हें और उनकी क़ौम, सबको विनष्ट कर दिया।
२७:५२
فَتِلْكَतो येfatil'kaبُيُوتُهُمْउनके घर हैंbuyūtuhumخَاوِيَةًۢगिरे हुएkhāwiyatanبِمَاबवजह उसके जोbimāظَلَمُوٓا۟ ۗउन्होंने ज़ुल्म कियाẓalamūإِنَّयक़ीननinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَةًۭअलबत्ता एक निशानी हैlaāyatanلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيَعْلَمُونَजो इल्म रखते हैंyaʿlamūna٥٢
तो ये हैं उनके घर, उनके ज़ुल्म के कारण गिर हुए। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय एक निशानी है, जो ज्ञान रखते हैं।
२७:५३
وَأَنجَيْنَاऔर निजात दी हमनेwa-anjaynāٱلَّذِينَउन्हें जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَكَانُوا۟और थे वोwakānūيَتَّقُونَवो डरतेyattaqūna٥٣
तथा हमने उन लोगों को बचा लिया, जो ईमान लाए और डरते रहे थे।
२७:५४
وَلُوطًاऔर लूत कोwalūṭanإِذْजबidhقَالَउसने कहाqālaلِقَوْمِهِۦٓअपनी क़ौम सेliqawmihiأَتَأْتُونَक्या तुम आते होatatūnaٱلْفَـٰحِشَةَबेहयाई कोl-fāḥishataوَأَنتُمْहालाँकि तुमwa-antumتُبْصِرُونَतुम देखते होtub'ṣirūna٥٤
तथा (हमने) लूत को (भेजा), जब उसने अपनी जाति के लोगों से कहा : क्या तुम अश्लील काम करते हो, जबकि तुम देखते हो?
२७:५५
أَئِنَّكُمْक्या बेशक तुमa-innakumلَتَأْتُونَअलबत्ता तुम आते होlatatūnaٱلرِّجَالَमर्दों के पासl-rijālaشَهْوَةًۭशहवत के लिएshahwatanمِّنinstead ofminدُونِअलावाdūniٱلنِّسَآءِ ۚऔरतों केl-nisāiبَلْबल्किbalأَنتُمْतुमantumقَوْمٌۭएक क़ौम होqawmunتَجْهَلُونَतुम जिहालत बरतते होtajhalūna٥٥
क्या तुम सचमुच स्त्रियों को छोड़कर वासनावश पुरुषों के पास आते हो? बल्कि तुम बड़े ही नासमझ लोग हो।
२७:५६
۞ فَمَاतो नाfamāكَانَथाkānaجَوَابَजवाबjawābaقَوْمِهِۦٓउसकी क़ौम काqawmihiإِلَّآमगरillāأَنये किanقَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūأَخْرِجُوٓا۟निकाल दोakhrijūءَالَ(the) familyālaلُوطٍۢआले लूत कोlūṭinمِّنfromminقَرْيَتِكُمْ ۖअपनी बस्ती सेqaryatikumإِنَّهُمْबेशक वोinnahumأُنَاسٌۭलोगunāsunيَتَطَهَّرُونَवो बहुत पाकबाज़ बनते हैंyataṭahharūna٥٦
तो उसकी जाति के लोगों का उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा : लूत के घरवालों को अपनी बस्ती से निकाल दो। निःसंदेह ये ऐसे लोग हैं जो बड़े पाक-साफ़ बनते हैं।
२७:५७
فَأَنجَيْنَـٰهُतो निजात दी हमने उसेfa-anjaynāhuوَأَهْلَهُۥٓऔर उसके घर वालों कोwa-ahlahuإِلَّاसिवाएillāٱمْرَأَتَهُۥउसकी बीवी केim'ra-atahuقَدَّرْنَـٰهَاमुक़द्दर कर दिया हमने उसेqaddarnāhāمِنَ(to be) ofminaٱلْغَـٰبِرِينَपीछे रहने वालों में सेl-ghābirīna٥٧
तो हमने उसे तथा उसके घरवालों को बचा लिया, सिवाय उसकी बीवी के। हमने उसे पीछे रह जाने वालों में तय कर दिया था।
२७:५८
وَأَمْطَرْنَاऔर बरसाई हमनेwa-amṭarnāعَلَيْهِمउन परʿalayhimمَّطَرًۭا ۖएक बारिशmaṭaranفَسَآءَतो बहुत बुरी थीfasāaمَطَرُबारिशmaṭaruٱلْمُنذَرِينَडराए जाने वालों कीl-mundharīna٥٨
और हमने उनपर भारी वर्षा बरसाई। तो बुरी बारिश थी उन लोगों के लिए जो डराए गए थे।
२७:५९
قُلِकह दीजिएquliٱلْحَمْدُसब तारीफ़l-ḥamduلِلَّهِअल्लाह के लिए हैlillahiوَسَلَـٰمٌऔर सलाम हैwasalāmunعَلَىٰuponʿalāعِبَادِهِउसके उन बन्दों परʿibādihiٱلَّذِينَजिन्हेंalladhīnaٱصْطَفَىٰٓ ۗउसने चुन लियाiṣ'ṭafāءَآللَّهُक्या अल्लाहāllahuخَيْرٌबेहतर हैkhayrunأَمَّاया जिन्हेंammāيُشْرِكُونَवो शरीक ठहराते हैंyush'rikūna٥٩
आप कह दें: सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है और सलाम है उसके उन बंदों पर, जिन्हें उसने चुन लिया। क्या अल्लाह बेहतर है, या वे जिन्हें ये साझी ठहराते हैं?
२७:६०
أَمَّنْया कौन है जिसनेammanخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَأَنزَلَऔर उसने उताराwa-anzalaلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۭपानीmāanفَأَنۢبَتْنَاफिर उगाए हमनेfa-anbatnāبِهِۦसाथ इसकेbihiحَدَآئِقَबाग़ातḥadāiqaذَاتَof beauty (and delight)dhātaبَهْجَةٍۢरौनक़ वालेbahjatinمَّاनाكَانَथाkānaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumأَنकिanتُنۢبِتُوا۟तुम उगा सकोtunbitūشَجَرَهَآ ۗदरख़्त उनकेshajarahāأَءِلَـٰهٌۭक्या है कोई इलाहa-ilāhunمَّعَसाथmaʿaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiبَلْबल्किbalهُمْवोhumقَوْمٌۭऐसे लोग हैंqawmunيَعْدِلُونَजो(अल्लाह के) बराबर क़रार देते हैंyaʿdilūna٦٠
(क्या वे साझीदार बेहतर हैं) या वह जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया और आकाश से तुम्हारे लिए पानी उतारा, फिर हमने उसके साथ शानदार बाग़ लगाए। तुम्हारे बस में नहीं था कि उनके वृक्ष उगाते। क्या अल्लाह के साथ कोई (अन्य) पूज्य है? बल्कि ये ऐसे लोग हैं जो रास्ते से हट रहे हैं।
२७:६१
أَمَّنया कौन है जिसनेammanجَعَلَबनायाjaʿalaٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaقَرَارًۭاजाए क़रारqarāranوَجَعَلَऔर उसने बनायाwajaʿalaخِلَـٰلَهَآदर्मियान उसकेkhilālahāأَنْهَـٰرًۭاनहरों कोanhāranوَجَعَلَऔर उसने बनायाwajaʿalaلَهَاउसके लिएlahāرَوَٰسِىَपहाड़ों कोrawāsiyaوَجَعَلَऔर उसने बनायाwajaʿalaبَيْنَदर्मियानbaynaٱلْبَحْرَيْنِदो समुन्दरों केl-baḥrayniحَاجِزًا ۗएक परदाḥājizanأَءِلَـٰهٌۭक्या है कोई इलाहa-ilāhunمَّعَसाथmaʿaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiبَلْबल्किbalأَكْثَرُهُمْअक्सर उनकेaktharuhumلَا(do) notيَعْلَمُونَनहीं वो इल्म रखतेyaʿlamūna٦١
(क्या वे साझीदार बेहतर हैं) या वह जिसने धरती को ठहरने का स्थान बनाया और उसके बीच नहरें बनाईं और उसके लिए पहाड़ बनाए और दो समुद्रों के बीच अवरोध बनाया? क्या अल्लाह के साथ कोई (अन्य) पूज्य है ? बल्कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
२७:६२
أَمَّنया कौन है जोammanيُجِيبُदुआ क़ुबूल करता हैyujībuٱلْمُضْطَرَّबेक़रार कीl-muḍ'ṭaraإِذَاजबidhāدَعَاهُवो दुआ करता है उससेdaʿāhuوَيَكْشِفُऔर वो दूर करता हैwayakshifuٱلسُّوٓءَतक्लीफ़l-sūaوَيَجْعَلُكُمْऔर वो बनाता है तुम्हेंwayajʿalukumخُلَفَآءَजानशीनkhulafāaٱلْأَرْضِ ۗज़मीन केl-arḍiأَءِلَـٰهٌۭक्या है कोई इलाहa-ilāhunمَّعَसाथmaʿaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiقَلِيلًۭاLittleqalīlanمَّاकितना कमتَذَكَّرُونَतुम नसीहत पकड़ते होtadhakkarūna٦٢
या वह जो व्याकुल की प्रार्थना स्वीकार करता है, जब वह उसे पुकारता है और दुखों को दूर करता है और तुम्हें धरती का उत्तराधिकारी बनाता है? क्या अल्लाह के साथ कोई (अन्य) पूज्य है? तुम बहुत कम उपदेश ग्रहण करते हो।
२७:६३
أَمَّنया कौन है जोammanيَهْدِيكُمْराह दिखाता है तुम्हेंyahdīkumفِىinظُلُمَـٰتِअँधेरों मेंẓulumātiٱلْبَرِّख़ुशकी केl-bariوَٱلْبَحْرِऔर समुन्दर केwal-baḥriوَمَنऔर कौन है जोwamanيُرْسِلُभेजता हैyur'siluٱلرِّيَـٰحَहवाओं कोl-riyāḥaبُشْرًۢاबतौरे ख़ुशख़बरीbush'ranبَيْنَbeforebaynaيَدَىْआगे-आगेyadayرَحْمَتِهِۦٓ ۗअपनी रहमत केraḥmatihiأَءِلَـٰهٌۭक्या है कोई इलाहa-ilāhunمَّعَसाथmaʿaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiتَعَـٰلَىबुलन्दतर हैtaʿālāٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَمَّاउससे जोʿammāيُشْرِكُونَवो शरीक ठहराते हैंyush'rikūna٦٣
या वह जो थल और समुद्र के अँधेरों में तुम्हारा मार्गदर्शन करता है तथा वह जो हवाओं को अपनी दया (वर्षा) से पहले शुभ-सूचना देने के लिए भेजता है? क्या अल्लाह के साथ कोई (और) पूज्य है? बहुत उच्च है अल्लाह उससे जो वे साझी ठहराते हैं।
२७:६४
أَمَّنया कौन है जोammanيَبْدَؤُا۟इब्तिदा करता हैyabda-uٱلْخَلْقَतख़्लीक़ कीl-khalqaثُمَّफिरthummaيُعِيدُهُۥवो एआदा करेगा उसकाyuʿīduhuوَمَنऔर कौन है जोwamanيَرْزُقُكُمरिज़्क़ देता है तुम्हेंyarzuqukumمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiوَٱلْأَرْضِ ۗऔर ज़मीन सेwal-arḍiأَءِلَـٰهٌۭक्या है कोई इलाहa-ilāhunمَّعَसाथmaʿaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiقُلْकह दीजिएqulهَاتُوا۟लाओhātūبُرْهَـٰنَكُمْदलील अपनीbur'hānakumإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٦٤
या वह जो सृष्टि का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराता है, और जो तुम्हें आकाश और धरती से जीविका देता है? क्या अल्लाह के साथ कोई (और) पूज्य है? कह दीजिए : लाओ अपना प्रमाण, यदि तुम सच्चे हो।1
२७:६५
قُلकह दीजिएqulلَّاNo (one)يَعْلَمُनहीं जानताyaʿlamuمَنजो कोईmanفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन में हैwal-arḍiٱلْغَيْبَग़ैब कोl-ghaybaإِلَّاसिवाएillāٱللَّهُ ۚअल्लाह केl-lahuوَمَاऔर नहींwamāيَشْعُرُونَवो शऊर रखतेyashʿurūnaأَيَّانَकि कबayyānaيُبْعَثُونَवो उठाए जाऐंगेyub'ʿathūna٦٥
आप कह दें : अल्लाह के सिवा, आकाशों और धरती में जो भी है, ग़ैब (परोक्ष की बात) नहीं जानता और वे नहीं जानते कि वे कब उठाये जाएँगे।
२७:६६
بَلِबल्किbaliٱدَّٰرَكَगुम हो गयाiddārakaعِلْمُهُمْइल्म उनकाʿil'muhumفِىofٱلْـَٔاخِرَةِ ۚआख़िरत के बारे मेंl-ākhiratiبَلْबल्किbalهُمْवोhumفِى(are) inشَكٍّۢशक में हैंshakkinمِّنْهَا ۖउस सेmin'hāبَلْबल्किbalهُمवोhumمِّنْهَاउससेmin'hāعَمُونَअँधे हैंʿamūna٦٦
बल्कि आख़िरत (परलोक) के विषय में उनका ज्ञान समाप्त हो गया है। बल्कि वे उसके बारे में संदेह में हैं। बल्कि वे उससे अंधे हैं।
२७:६७
وَقَالَऔर कहाwaqālaٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوٓا۟कुफ़्र कियाkafarūأَءِذَاक्या जबa-idhāكُنَّاहो जाऐंगे हमkunnāتُرَٰبًۭاमिट्टीturābanوَءَابَآؤُنَآऔर आबा ओ अजदाद हमारेwaābāunāأَئِنَّاक्या यक़ीनन हमa-innāلَمُخْرَجُونَज़रूर निकाले जाऐंगेlamukh'rajūna٦٧
और उन लोगों ने कहा जिन्होंने कुफ़्र किया : क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे और हमारे बाप-दादा भी, तो क्या सचमुच हम अवश्य निकाले1 जाने वाले हैं?
२७:६८
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadوُعِدْنَاवादा किए गए हमwuʿid'nāهَـٰذَاउसकाhādhāنَحْنُहमnaḥnuوَءَابَآؤُنَاऔर आबा ओ अजदाद हमारेwaābāunāمِنbeforeminقَبْلُइससे क़ब्लqabluإِنْनहींinهَـٰذَآयेhādhāإِلَّآमगरillāأَسَـٰطِيرُकहानियाँ हैंasāṭīruٱلْأَوَّلِينَपहलों कीl-awalīna٦٨
निश्चय इससे पहले हमसे यह वादा किया गया और हमारे बाप-दादा से भी, ये तो बस पहले लोगों की काल्पनिक कहानियाँ हैं।
२७:६९
قُلْकह दीजिएqulسِيرُوا۟चलो फिरोsīrūفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَٱنظُرُوا۟फिर देखोfa-unẓurūكَيْفَकिस तरहkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअंजामʿāqibatuٱلْمُجْرِمِينَमुजरिमों काl-muj'rimīna٦٩
कह दीजिए : धरती में चलो-फिरो, फिर देखो अपराधियों का परिणाम कैसा हुआ!
२७:७०
وَلَاऔर नाwalāتَحْزَنْआप ग़म कीजिएtaḥzanعَلَيْهِمْउन परʿalayhimوَلَاऔर नाwalāتَكُنआप होंtakunفِىinضَيْقٍۢतंगी मेंḍayqinمِّمَّاउससे जोmimmāيَمْكُرُونَवो चालें चल रहे हैंyamkurūna٧٠
और आप उनपर शोक न करें और न उससे किसी संकीर्णता में हों, जो वे चाल चलते हैं।
२७:७१
وَيَقُولُونَऔर वो कहते हैंwayaqūlūnaمَتَىٰकब होगाmatāهَـٰذَاयेhādhāٱلْوَعْدُवादाl-waʿduإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٧١
तथा वे कहते हैं : कब पूरा होगा यह वादा, यदि तुम सच्चे हो?
२७:७२
قُلْकह दीजिएqulعَسَىٰٓउम्मीद हैʿasāأَنकिanيَكُونَहो वोyakūnaرَدِفَपीछे आ लगेradifaلَكُمतुम्हारेlakumبَعْضُबाज़ / कुछ हिस्साbaʿḍuٱلَّذِىवो जोalladhīتَسْتَعْجِلُونَतुम जल्दी माँगते होtastaʿjilūna٧٢
आप कह दें : क़रीब है कि उसका कुछ भाग तुम्हारे पीछे आ पहुँचा हो, जो तुम जल्दी माँग रहे हो।
२७:७३
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaرَبَّكَरब आपकाrabbakaلَذُو(is) full of Bountyladhūفَضْلٍअलबत्ता फ़ज़ल वाला हैfaḍlinعَلَىforʿalāٱلنَّاسِलोगों परl-nāsiوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَهُمْअक्सर उनकेaktharahumلَا(are) notيَشْكُرُونَनहीं वो शुक्र करतेyashkurūna٧٣
तथा निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय लोगों पर बड़ा अनुग्रह करने वाला है। किंतु उनमें से अधिकतर लोग शुक्र नहीं करते।
२७:७४
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaرَبَّكَरब आपकाrabbakaلَيَعْلَمُअलबत्ता वो जानता हैlayaʿlamuمَاजो कुछتُكِنُّछुपाते हैंtukinnuصُدُورُهُمْसीने उनकेṣudūruhumوَمَاऔर जो कुछwamāيُعْلِنُونَवो ज़ाहिर करते हैंyuʿ'linūna٧٤
और निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय जानता है जो कुछ उनके सीने छिपाते हैं और जो कुछ वे प्रकट करते हैं।
२७:७५
وَمَاऔर नहींwamāمِنْany (thing)minغَآئِبَةٍۢकोई ग़ायब होने वालीghāibatinفِىinٱلسَّمَآءِआसमान मेंl-samāiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन मेंwal-arḍiإِلَّاमगरillāفِى(is) inكِتَـٰبٍۢएक किताब में हैkitābinمُّبِينٍवाज़ेहmubīnin٧٥
और आकाश तथा धरती में कोई छिपी चीज़ नहीं, परंतु वह एक स्पष्ट किताब1 में मौजूद है।
२७:७६
إِنَّबेशकinnaهَـٰذَاयेhādhāٱلْقُرْءَانَक़ुरानl-qur'ānaيَقُصُّबयान करता हैyaquṣṣuعَلَىٰtoʿalāبَنِىٓ(the) Childrenbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल परis'rāīlaأَكْثَرَअक्सर (बातें)aktharaٱلَّذِىवो जोalladhīهُمْवोhumفِيهِउनमेंfīhiيَخْتَلِفُونَवो इख़्तिलाफ़ करते हैंyakhtalifūna٧٦
निःसंदेह यह क़ुरआन इसराईल की संतान के सामने अधिकतर वे बातें वर्णन करता है, जिनमें वे मतभेद करते हैं।
२७:७७
وَإِنَّهُۥऔर बेशक वोwa-innahuلَهُدًۭىअलबत्ता हिदायत हैlahudanوَرَحْمَةٌۭऔर रहमत हैwaraḥmatunلِّلْمُؤْمِنِينَईमान लाने वालों के लिएlil'mu'minīna٧٧
और निःसंदेह वह निश्चय ईमान वालों के लिए सर्वथा मार्गदर्शन तथा दया है।
२७:७८
إِنَّबेशकinnaرَبَّكَरब आपकाrabbakaيَقْضِىवो फ़ैसला करेगाyaqḍīبَيْنَهُمदर्मियान उनकेbaynahumبِحُكْمِهِۦ ۚअपने हुक्म सेbiḥuk'mihiوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्त हैl-ʿazīzuٱلْعَلِيمُख़ूब इल्म वाला हैl-ʿalīmu٧٨
निःसंदेह आपका पालनहार1 उनके बीच अपने आदेश से निर्णय कर देगा तथा वही सब पर प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाला है।
२७:७९
فَتَوَكَّلْपस तवक्कल कीजिएfatawakkalعَلَىinʿalāٱللَّهِ ۖअल्लाह परl-lahiإِنَّكَऔर बेशक आपinnakaعَلَى(are) onʿalāٱلْحَقِّहक़ पर हैंl-ḥaqiٱلْمُبِينِवाज़ेहl-mubīni٧٩
अतः आप अल्लाह पर भरोसा करें। निश्चय आप स्पष्ट सत्य पर हैं।
२७:८०
إِنَّكَबेशक आपinnakaلَا(can) notتُسْمِعُनहीं आप सुना सकतेtus'miʿuٱلْمَوْتَىٰमुर्दों कोl-mawtāوَلَاऔर नहींwalāتُسْمِعُआप सुना सकतेtus'miʿuٱلصُّمَّबहरों कोl-ṣumaٱلدُّعَآءَपुकारl-duʿāaإِذَاजबidhāوَلَّوْا۟वो फिर जाऐंwallawمُدْبِرِينَपीठ फेर करmud'birīna٨٠
निःसंदेह आप मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते, जब वे पीठ फेरकर पलट जाएँ।1
२७:८१
وَمَآऔर नहींwamāأَنتَआपantaبِهَـٰدِىहिदायत देने वालेbihādīٱلْعُمْىِअँधों कोl-ʿum'yiعَنfromʿanضَلَـٰلَتِهِمْ ۖउनकी गुमराही सेḍalālatihimإِنनहींinتُسْمِعُआप सुना सकतेtus'miʿuإِلَّاमगरillāمَنउनको जोmanيُؤْمِنُईमान लाते हैंyu'minuبِـَٔايَـٰتِنَاहमारी आयात परbiāyātināفَهُمफिर वोfahumمُّسْلِمُونَफ़रमाबरदार हैंmus'limūna٨١
तथा न आप कभी अंधों को उनकी गुमारही से हटाकर सीधे मार्ग पर लाने वाले हैं। आप तो बस उन्हीं को सुना सकते हैं, जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं। सो वही आज्ञाकारी हैं।
२७:८२
۞ وَإِذَاऔर जबwa-idhāوَقَعَवाक़ेअ हो जाएगीwaqaʿaٱلْقَوْلُबातl-qawluعَلَيْهِمْउन परʿalayhimأَخْرَجْنَاनिकालेंगे हमakhrajnāلَهُمْउनके लिएlahumدَآبَّةًۭएक जानवरdābbatanمِّنَfromminaٱلْأَرْضِज़मीन सेl-arḍiتُكَلِّمُهُمْजो कलाम करेगा उनसेtukallimuhumأَنَّकि बेशकannaٱلنَّاسَलोगl-nāsaكَانُوا۟थे वोkānūبِـَٔايَـٰتِنَاहमारी आयात परbiāyātināلَاnotيُوقِنُونَना वो यक़ीन रखतेyūqinūna٨٢
और जब उनपर1 बात पूरी हो जाएगी, तो हम उनके लिए धरती से एक पशु निकालेंगे, जो उनसे बात करेगा2 कि निश्चय लोग हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे।
२७:८३
وَيَوْمَऔर जिस दिनwayawmaنَحْشُرُहम इकट्ठा करेंगेnaḥshuruمِنfromminكُلِّeverykulliأُمَّةٍۢहर उम्मत में सेummatinفَوْجًۭاएक फ़ौज कोfawjanمِّمَّنउनमें से जोmimmanيُكَذِّبُझुठलाते हैंyukadhibuبِـَٔايَـٰتِنَاहमारी आयात कोbiāyātināفَهُمْतो वोfahumيُوزَعُونَवो गिरोहों में तक़सीम किए जाऐंगेyūzaʿūna٨٣
तथा जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय में से उन लोगों का एक गिरोह एकत्र करेंगे, जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे, फिर उन्हें श्रेणियों में बांटा जाएगा।
२७:८४
حَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāجَآءُوवो आजाऐंगेjāūقَالَवो फ़रमाएगाqālaأَكَذَّبْتُمक्या झुठलाया तुम नेakadhabtumبِـَٔايَـٰتِىमेरी आयात कोbiāyātīوَلَمْहालाँकि नहींwalamتُحِيطُوا۟तुम ने अहाता किया थाtuḥīṭūبِهَاउनकाbihāعِلْمًاइल्म के ऐतबार सेʿil'manأَمَّاذَاया क्या कुछammādhāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna٨٤
यहाँ तक कि जब वे आ जाएँगे, तो (अल्लाह) फरमाएगा : क्या तुमने मेरी आयतों को झुठला दिया, हालाँकि तुमने उनका पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं किया था, या क्या था जो तुम किया करते थे?
२७:८५
وَوَقَعَऔर वाक़ेअ हो जाएगीwawaqaʿaٱلْقَوْلُबातl-qawluعَلَيْهِمउन परʿalayhimبِمَاबवजह उसके जोbimāظَلَمُوا۟उन्होंने ज़ुल्म कियाẓalamūفَهُمْतो वोfahumلَا(will) notيَنطِقُونَना वो बोल सकेंगेyanṭiqūna٨٥
और उनपर (यातना की) बात सिद्ध हो जाएगी, उसके बदले जो उन्होंने अत्याचार किया, सो वे बोल न सकेंगे।
२७:८६
أَلَمْक्या नहींalamيَرَوْا۟उन्होंने देखाyarawأَنَّاबेशक हमannāجَعَلْنَاबनाया हमनेjaʿalnāٱلَّيْلَरात कोal-laylaلِيَسْكُنُوا۟ताकि वो सुकून पाऐंliyaskunūفِيهِउसमेंfīhiوَٱلنَّهَارَऔर दिन कोwal-nahāraمُبْصِرًا ۚरौशनmub'ṣiranإِنَّबेशकinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيُؤْمِنُونَजो ईमान लाते हैंyu'minūna٨٦
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने रात बनाई, ताकि वे उसमें आराम करें तथा दिन को प्रकाशमान1 (बनाया)। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो ईमान लाते हैं।
२७:८७
وَيَوْمَऔर जिस दिनwayawmaيُنفَخُफूँका जाऐगाyunfakhuفِى[in]ٱلصُّورِसूर मेंl-ṣūriفَفَزِعَतो घबरा जाऐगाfafaziʿaمَنजो कोईmanفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَنऔर जो कोईwamanفِى(is) inٱلْأَرْضِज़मीन में हैl-arḍiإِلَّاमगरillāمَنजिसेmanشَآءَचाहेshāaٱللَّهُ ۚअल्लाहl-lahuوَكُلٌّऔर सब के सबwakullunأَتَوْهُआऐंगे उसके पासatawhuدَٰخِرِينَज़लील हो करdākhirīna٨٧
और जिस दिन सूर (नरसिंघा) में फूँका1 जाएगा, तो जो भी आकाशों में है और जो भी धरती में है, घबरा जाएगा, सिवाय उसके जिसे अल्लाह चाहे। तथा वे सब उसके पास अपमानित होकर आएँगे।
२७:८८
وَتَرَىऔर आप देखते हैंwatarāٱلْجِبَالَपहाड़ों कोl-jibālaتَحْسَبُهَاआप समझते हैं उन्हेंtaḥsabuhāجَامِدَةًۭजामिदjāmidatanوَهِىَहालाँकि वोwahiyaتَمُرُّवो चलते हैंtamurruمَرَّचलनाmarraٱلسَّحَابِ ۚबादलों काl-saḥābiصُنْعَकारीगरी / सनअत हैṣun'ʿaٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiٱلَّذِىٓवो जिसनेalladhīأَتْقَنَमज़बूत बनायाatqanaكُلَّहरkullaشَىْءٍ ۚचीज़ कोshayinإِنَّهُۥबेशक वोinnahuخَبِيرٌۢख़ूब ख़बर रखने वाला हैkhabīrunبِمَاउसकी जोbimāتَفْعَلُونَतुम करते होtafʿalūna٨٨
और तुम पर्वतों को देखोगे, उन्हें समझोगे कि वे जमे हुए हैं, हालाँकि वे बादलों के चलने की तरह चल रहे होंगे, उस अल्लाह की कारीगरी से जिसने हर चीज़ को मज़बूत बनाया। निःसंदेह वह उससे भली-भाँति सूचित है जो तुम करते हो।
२७:८९
مَنजो कोईmanجَآءَलाएगाjāaبِٱلْحَسَنَةِनेकी कोbil-ḥasanatiفَلَهُۥतो उसके लिएfalahuخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunمِّنْهَاउससेmin'hāوَهُمऔर वोwahumمِّنfromminفَزَعٍۢघबराहट सेfazaʿinيَوْمَئِذٍउस दिनyawma-idhinءَامِنُونَअमन में होंगेāminūna٨٩
जो व्यक्ति नेकी1 लेकर आएगा, तो उसके लिए उससे उत्तम प्रतिफल है और ये लोग उस दिन के भय से सुरक्षित होंगे।
२७:९०
وَمَنऔर जो कोईwamanجَآءَलाएगाjāaبِٱلسَّيِّئَةِबुराई कोbil-sayi-atiفَكُبَّتْतो औंधे डाले जाऐंगेfakubbatوُجُوهُهُمْचेहरे उनकेwujūhuhumفِىinٱلنَّارِआग मेंl-nāriهَلْनहींhalتُجْزَوْنَतुम बदला दिए जाओगेtuj'zawnaإِلَّاमगरillāمَاउसका जोكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna٩٠
और जो बुराई लेकर आएगा, तो उनके चेहरे आग में औंधे डाले जाएँगे। तुम उसी का बदला दिए जाओगे, जो तुम किया करते थे।
२७:९१
إِنَّمَآबेशकinnamāأُمِرْتُहुक्म दिया गया है मुझेumir'tuأَنْकिanأَعْبُدَमैं इबादत करूँaʿbudaرَبَّरब कीrabbaهَـٰذِهِइसhādhihiٱلْبَلْدَةِशहर केl-baldatiٱلَّذِىवो जिसनेalladhīحَرَّمَهَاहराम ठहराया इसेḥarramahāوَلَهُۥऔर उसी के लिए हैwalahuكُلُّहरkulluشَىْءٍۢ ۖचीज़shayinوَأُمِرْتُऔर हुक्म दिया गया है मुझेwa-umir'tuأَنْकिanأَكُونَमैं हो जाऊँakūnaمِنَofminaٱلْمُسْلِمِينَफ़रमाबरदारों में सेl-mus'limīna٩١
मुझे तो बस यही आदेश दिया गया है कि मैं इस नगर (मक्का) के पालनहार की इबादत करूँ, जिसने इसे पवित्र (सम्मानित) बनाया है तथा उसी के लिए हर चीज़ है और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं आज्ञाकारियों में से हो जाऊँ।
२७:९२
وَأَنْऔर ये किwa-anأَتْلُوَا۟मैं तिलावत करूँatluwāٱلْقُرْءَانَ ۖक़ुरान कीl-qur'ānaفَمَنِतो जो कोईfamaniٱهْتَدَىٰहिदायत पा गयाih'tadāفَإِنَّمَاतो बेशकfa-innamāيَهْتَدِىवो हिदायत पाएगाyahtadīلِنَفْسِهِۦ ۖअपने नफ़्स के लिएlinafsihiوَمَنऔर जो कोईwamanضَلَّभटकाḍallaفَقُلْतो कह दीजिएfaqulإِنَّمَآबेशकinnamāأَنَا۠मैं तोanāمِنَofminaٱلْمُنذِرِينَडराने वालों में से हूँl-mundhirīna٩٢
तथा यह कि मैं क़ुरआन पढ़कर सुनाऊँ। फिर जो सीधी राह पर आया, वह अपने ही लिए राह पर आता है और जो गुमराह हुआ, तो आप कह दें कि मैं तो बस डराने वालों में से हूँ।
२७:९३
وَقُلِऔर कह दीजिएwaquliٱلْحَمْدُसब तारीफ़l-ḥamduلِلَّهِअल्लाह के लिए हैlillahiسَيُرِيكُمْअनक़रीब वो दिखाएगा तुम्हेंsayurīkumءَايَـٰتِهِۦअपनी निशानियाँāyātihiفَتَعْرِفُونَهَا ۚतो तुम पहचान लोगे उन्हेंfataʿrifūnahāوَمَاऔर नहींwamāرَبُّكَरब आपकाrabbukaبِغَـٰفِلٍग़ाफ़िलbighāfilinعَمَّاउससे जोʿammāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūna٩٣
तथा आप कह दें : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। वह जल्द ही तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाएगा, तो तुम उन्हें पहचान लोगे1 और तुम्हारा पालनहार उससे बेखबर नहीं है, जो कुछ तुम करते हो।