४२

अश-शूरा

मक्की ५३ आयतें पारा २५
الشورى

सूरह अश-शूरा (الشورى) पवित्र क़ुरआन का ४२ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ५३ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४२:१
حمٓح مhha-meem١
ह़ा, मीम।
४२:२
عٓسٓقٓع س قain-seen-qaf٢
ऐन, सीन, क़ाफ़।
४२:३
كَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيُوحِىٓवही करता हैyūḥīإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaوَإِلَىऔर तरफ़wa-ilāٱلَّذِينَउनके जोalladhīnaمِنbefore you minقَبْلِكَआपसे पहले थेqablikaٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْعَزِيزُजो बड़ा ज़बरदस्त हैl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वाला हैl-ḥakīmu٣
इसी प्रकार, आपकी ओर और आपसे पहले के नबियों की ओर, वह अल्लाह वह़्य (प्रकाशना)1 करता (रहा) है, जो सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
४२:४
لَهُۥउसी के लिए ही हैlahuمَاजोفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَاऔर जोwamāفِى(is) inٱلْأَرْضِ ۖज़मीन में हैl-arḍiوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْعَلِىُّबहुत बुलन्द हैl-ʿaliyuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ा हैl-ʿaẓīmu٤
उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है और वह सर्वोच्च, सबसे महान है।
४२:५
تَكَادُक़रीब है किtakāduٱلسَّمَـٰوَٰتُआसमानl-samāwātuيَتَفَطَّرْنَवो फट पड़ेंyatafaṭṭarnaمِنfromminفَوْقِهِنَّ ۚअपने ऊपर सेfawqihinnaوَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُऔर फ़रिश्तेwal-malāikatuيُسَبِّحُونَवो तस्बीह करते हैंyusabbiḥūnaبِحَمْدِसाथ तारीफ़ केbiḥamdiرَبِّهِمْअपने रब कीrabbihimوَيَسْتَغْفِرُونَऔर वो बख़्शिश माँगते हैंwayastaghfirūnaلِمَنउनके लिए जोlimanفِىonٱلْأَرْضِ ۗज़मीन में हैंl-arḍiأَلَآख़बरदारalāإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो ही हैhuwaٱلْغَفُورُबहुत बख़्शने वालाl-ghafūruٱلرَّحِيمُनिहायत रहम करने वालाl-raḥīmu٥
निकट है कि आकाश अपने ऊपर से फट1 पड़ें, और फ़रिश्ते अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ पवित्रता गान करते हैं तथा उनके लिए क्षमायाचना करते हैं, जो धरती में हैं। सुन लो! निःसंदेह अल्लाह ही अत्यंत क्षमा करने वाला, असीम दया करने वाला है।
४२:६
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaٱتَّخَذُوا۟बना लियाittakhadhūمِنbesidesminدُونِهِۦٓउसके सिवाdūnihiأَوْلِيَآءَहिमायती / दोस्तawliyāaٱللَّهُअल्लाहl-lahuحَفِيظٌख़ूब निगहबान हैḥafīẓunعَلَيْهِمْउन परʿalayhimوَمَآऔर नहींwamāأَنتَआपantaعَلَيْهِمउन परʿalayhimبِوَكِيلٍۢकोई ज़िम्मेदारbiwakīlin٦
तथा जिन लोगों ने अल्लाह के सिवा दूसरे संरक्षक बना लिए, अल्लाह उनपर निगरानी रखे हुए है और आप कदापि उनके उत्तरदायी1 नहीं हैं।
४२:७
وَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaأَوْحَيْنَآवही की हमनेawḥaynāإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaقُرْءَانًاक़ुरानqur'ānanعَرَبِيًّۭاअर्बीʿarabiyyanلِّتُنذِرَताकि आप डराऐंlitundhiraأُمَّ(the) motherummaٱلْقُرَىٰमक्का वालों कोl-qurāوَمَنْऔर उनको जोwamanحَوْلَهَاइर्द -गिर्द हैं उसकेḥawlahāوَتُنذِرَऔर आप डराऐंwatundhiraيَوْمَ(of the) Dayyawmaٱلْجَمْعِजमा होने के दिन सेl-jamʿiلَا(there is) noرَيْبَनहीं कोई शकraybaفِيهِ ۚउसमेंfīhiفَرِيقٌۭएक गिरोह ( होगा )farīqunفِى(will be) inٱلْجَنَّةِजन्नत मेंl-janatiوَفَرِيقٌۭऔर एक गिरोह (होगा)wafarīqunفِىinٱلسَّعِيرِदोज़ख़ मेंl-saʿīri٧
तथा इसी प्रकार, हमने आपकी ओर अरबी क़ुरआन की वह़्य (प्रकाशना) भेजी है, ताकि आप मक्का1 वासियों को और उसके आस-पास के लोगों को सावधान कर दें, और एकत्र होने के दिन2 से सचेत कर दें, जिसमें कोई संदेह नहीं। एक समूह जन्नत में तथा एक समूह भड़कती आग में होगा।
४२:८
وَلَوْऔर अगरwalawشَآءَचाहताshāaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَجَعَلَهُمْअलबत्ता वो बना देता उन्हेंlajaʿalahumأُمَّةًۭउम्मतummatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinيُدْخِلُवो दाख़िल करता हैyud'khiluمَنजिसेmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuفِىin (to)رَحْمَتِهِۦ ۚअपनी रहमत मेंraḥmatihiوَٱلظَّـٰلِمُونَऔर जो ज़ालिम हैंwal-ẓālimūnaمَاनहींلَهُمउनके लिएlahumمِّنanyminوَلِىٍّۢकोई दोस्तwaliyyinوَلَاऔर नाwalāنَصِيرٍकोई मददगारnaṣīrin٨
और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य उन्हें एक समुदाय1 बना देता। परंतु वह जिसे चाहता है अपनी रहमत में दाख़िल करता है और ज़ालिमों का न तो कोई दोस्त है और न कोई मददगार।
४२:९
أَمِयाamiٱتَّخَذُوا۟उन्होंने बना रखे हैंittakhadhūمِنbesides Himminدُونِهِۦٓउसके सिवाdūnihiأَوْلِيَآءَ ۖकारसाज़awliyāaفَٱللَّهُपस अल्लाहfal-lahuهُوَवो ही हैhuwaٱلْوَلِىُّकारसाज़l-waliyuوَهُوَऔर वोwahuwaيُحْىِवो ज़िन्दा करेगाyuḥ'yīٱلْمَوْتَىٰमुर्दों कोl-mawtāوَهُوَऔर वोwahuwaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun٩
या उन्होंने उसके सिवा अन्य संरक्षक बना रखे हैं? सो अल्लाह ही वास्तविक संरक्षक है और वही मुर्दों को जीवित करेगा और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।1
४२:१०
وَمَاऔर जो भीwamāٱخْتَلَفْتُمْइख़्तिलाफ़ किया तुमनेikh'talaftumفِيهِउसमेंfīhiمِنofminشَىْءٍۢकिसी चीज़ सेshayinفَحُكْمُهُۥٓतो फ़ैसला उसकाfaḥuk'muhuإِلَى(is) toilāٱللَّهِ ۚतरफ़ अल्लाह के हैl-lahiذَٰلِكُمُये हैdhālikumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuرَبِّىरब मेराrabbīعَلَيْهِउसी परʿalayhiتَوَكَّلْتُतवक्कल किया मैं नेtawakkaltuوَإِلَيْهِऔर उसका की तरफ़wa-ilayhiأُنِيبُमैं रुजूअ करता हूँunību١٠
और तुम जिस चीज़ के बारे में भी मतभेद करो, उसका निर्णय अल्लाह की ओर है।1 वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया है तथा उसी की ओर मैं लौटता हूँ।
४२:११
فَاطِرُपैदा करने वालाfāṭiruٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन काwal-arḍiجَعَلَउसने बनाएjaʿalaلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْfromminأَنفُسِكُمْतुम्हारे नफ़्सों सेanfusikumأَزْوَٰجًۭاजोड़ेazwājanوَمِنَand amongwaminaٱلْأَنْعَـٰمِऔर मवेशियों सेl-anʿāmiأَزْوَٰجًۭا ۖजोड़ेazwājanيَذْرَؤُكُمْवो फैलाता है तुम्हेंyadhra-ukumفِيهِ ۚउसमेंfīhiلَيْسَनहीं हैlaysaكَمِثْلِهِۦउसकी मानिन्दkamith'lihiشَىْءٌۭ ۖकोई चीज़shayonوَهُوَऔर वोwahuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वाला हैl-samīʿuٱلْبَصِيرُख़ूब देखने वाला हैl-baṣīru١١
(वह) आकाशों तथा धरती का रचयिता है। उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी अपनी ही जाति से जोड़े बनाए तथा पशुओं से भी जोड़े। वह तुम्हें इसमें फैलाता है। उसके जैसी1 कोई चीज़ नहीं और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
४२:१२
لَهُۥउसी के लिए हैंlahuمَقَالِيدُकुंजियाँmaqālīduٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۖऔर ज़मीन कीwal-arḍiيَبْسُطُवो फैलाता हैyabsuṭuٱلرِّزْقَरिज़्क़l-riz'qaلِمَنजिसके लिएlimanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuوَيَقْدِرُ ۚऔर वो तंग कर देता हैwayaqdiruإِنَّهُۥबेशक वोinnahuبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ कोshayinعَلِيمٌۭख़ूब जानने वाला हैʿalīmun١٢
आकाशों तथा धरती की कुंजियाँ उसी के पास हैं। वह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग कर देता है। निःसंदेह वह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है।1
४२:१३
۞ شَرَعَउसने मुक़र्रर कियाsharaʿaلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنَofminaٱلدِّينِदीन में सेl-dīniمَاवो जोوَصَّىٰउसने वसीयत कीwaṣṣāبِهِۦउसकीbihiنُوحًۭاनूह कोnūḥanوَٱلَّذِىٓऔर वो जोwa-alladhīأَوْحَيْنَآवही की हमनेawḥaynāإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaوَمَاऔर वो जोwamāوَصَّيْنَاवसीयत की हमनेwaṣṣaynāبِهِۦٓउसकीbihiإِبْرَٰهِيمَइब्राहीमib'rāhīmaوَمُوسَىٰऔर मूसाwamūsāوَعِيسَىٰٓ ۖऔर ईसा कोwaʿīsāأَنْकिanأَقِيمُوا۟क़ायम करोaqīmūٱلدِّينَदीन कोl-dīnaوَلَاऔर नाwalāتَتَفَرَّقُوا۟तुम तफ़रक़ा डालोtatafarraqūفِيهِ ۚउसमेंfīhiكَبُرَबड़ा ( भारी ) हैkaburaعَلَىonʿalāٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकों परl-mush'rikīnaمَاजोتَدْعُوهُمْतुम बुलाते हो उन्हेंtadʿūhumإِلَيْهِ ۚतरफ़ उसकेilayhiٱللَّهُअल्लाहl-lahuيَجْتَبِىٓवो चुन लेता हैyajtabīإِلَيْهِअपनी तरफ़ilayhiمَنजिसेmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuوَيَهْدِىٓऔर वो हिदायत देता हैwayahdīإِلَيْهِअपनी तरफ़ilayhiمَنउसे जोmanيُنِيبُरुजूअ करता हैyunību١٣
उसने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित1 किया है, जिसका आदेश उसने नूह़ को दिया और जिसकी वह़्य हमने आपकी ओर की, तथा जिसका आदेश हमने इबराहीम तथा मूसा और ईसा को दिया, यह कि इस धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ। बहुदेववादियों पर वह बात भारी है जिसकी ओर आप उन्हें बुलाते हैं। अल्लाह जिसे चाहता है, अपने लिए चुन लेता है और अपनी ओर मार्ग उसी को दिखाता है, जो उसकी ओर लौटता है।
४२:१४
وَمَاऔर नहींwamāتَفَرَّقُوٓا۟उन्होंने तफ़रक़ा डालाtafarraqūإِلَّاमगरillāمِنۢafterminبَعْدِबाद उसकेbaʿdiمَاजोجَآءَهُمُआ गया उनके पासjāahumuٱلْعِلْمُइल्मl-ʿil'muبَغْيًۢاसरकशी की वजह सेbaghyanبَيْنَهُمْ ۚआपस मेंbaynahumوَلَوْلَاऔर अगर ना होतीwalawlāكَلِمَةٌۭएक बातkalimatunسَبَقَتْजो पहले गुज़र चुकीsabaqatمِنfromminرَّبِّكَआपके रब की तरफ़ सेrabbikaإِلَىٰٓforilāأَجَلٍۢएक वक़्त तकajalinمُّسَمًّۭىमुक़र्ररmusammanلَّقُضِىَअलबत्ता फ़ैसला कर दिया जाताlaquḍiyaبَيْنَهُمْ ۚदर्मियान उनकेbaynahumوَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaأُورِثُوا۟वारिस बनाए गएūrithūٱلْكِتَـٰبَकिताब केl-kitābaمِنۢafter themminبَعْدِهِمْउनके बादbaʿdihimلَفِى(are) surely inlafīشَكٍّۢअलबत्ता शक में हैंshakkinمِّنْهُउसकी तरफ़ सेmin'huمُرِيبٍۢजो बेचैन करने वाला हैmurībin١٤
और वे1 लोग आपस की ज़िद के कारण इसके पश्चात् अलग-अलग हुए कि उनके पास ज्ञान आ चुका था। तथा यदि वह बात न होती जो आपके पालनहार की ओर से एक निश्चित समय के लिए पहले तय2 हो चुकी, तो अवश्य उनके बीच निर्णय कर दिया जाता। और निःसंदेह वे लोग जो उनके पश्चात् पुस्तक के उत्तराधिकारी बनाए3 गए, वे इस (क़ुरआन) के बारे में दुविधा में डालने वाले संदेह में पड़े हैं।
४२:१५
فَلِذَٰلِكَतो इसी ( दीन) के लिएfalidhālikaفَٱدْعُ ۖपस दावत दीजिएfa-ud'ʿuوَٱسْتَقِمْऔर क़ायम रहिएwa-is'taqimكَمَآजैसा किkamāأُمِرْتَ ۖहुक्म दिए गए आपumir'taوَلَاऔर नाwalāتَتَّبِعْआप पैरवी कीजिएtattabiʿأَهْوَآءَهُمْ ۖउनकी ख़्वाहिशात कीahwāahumوَقُلْऔर कह दीजिएwaqulءَامَنتُईमान लाया मैंāmantuبِمَآउस पर जोbimāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِنofminكِتَـٰبٍۢ ۖकिताब सेkitābinوَأُمِرْتُऔर हुक्म दिया गया है मुझेwa-umir'tuلِأَعْدِلَकि मैं अदल करूँli-aʿdilaبَيْنَكُمُ ۖदर्मियान तुम्हारेbaynakumuٱللَّهُअल्लाह हीl-lahuرَبُّنَاरब है हमाराrabbunāوَرَبُّكُمْ ۖऔर रब तुम्हाराwarabbukumلَنَآहमारे लिएlanāأَعْمَـٰلُنَاआमाल हमारेaʿmālunāوَلَكُمْऔर तुम्हारे लिएwalakumأَعْمَـٰلُكُمْ ۖआमाल तुम्हारेaʿmālukumلَا(There is) noحُجَّةَनहीं कोई झगड़ाḥujjataبَيْنَنَاदर्मियान हमारेbaynanāوَبَيْنَكُمُ ۖऔर दर्मियान तुम्हारेwabaynakumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuيَجْمَعُवो जमा कर देगाyajmaʿuبَيْنَنَا ۖहमें आपस मेंbaynanāوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसी केwa-ilayhiٱلْمَصِيرُलौटना हैl-maṣīru١٥
अतः आप लोगों को इसी (धर्म) की ओर बुलाएँ और (उसपर) जमें रहें, जैसाकि आपको आदेश दिया गया है और उनकी इच्छाओं का पालन न करें, तथा कह दें कि अल्लाह ने जो भी किताब उतारी1 है मैं उसपर ईमान लाया। तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं तुम्हारे बीच न्याय करूँ। अल्लाह ही हमारा पालनहार तथा तुम्हारा पालनहार है। हमारे लिए हमारे कर्म हैं तथा तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। हमारे और तुम्हारे बीच कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह हम सभी को एकत्र करेगा तथा उसी की ओर लौटकर जाना है।2
४२:१६
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaيُحَآجُّونَझगड़ते हैंyuḥājjūnaفِىconcerningٱللَّهِअल्लाह के बारे मेंl-lahiمِنۢafterminبَعْدِबाद उसकेbaʿdiمَاजोٱسْتُجِيبَक़ुबूल कर लिया गयाus'tujībaلَهُۥउसी के लिएlahuحُجَّتُهُمْहुज्जत /दलील उनकीḥujjatuhumدَاحِضَةٌज़ायल होने वाली हैdāḥiḍatunعِندَनज़दीकʿindaرَبِّهِمْउनके रब केrabbihimوَعَلَيْهِمْऔर उन परwaʿalayhimغَضَبٌۭग़ज़ब हैghaḍabunوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumعَذَابٌۭअज़ाब हैʿadhābunشَدِيدٌसख़्तshadīdun١٦
तथा जो लोग अल्लाह के (धर्म के) बारे में झगड़ते हैं, इसके पश्चात कि उसे1 स्वीकार कर लिया गया, उनका तर्क उनके रब के यहाँ बातिल (व्यर्थ) है, तथा उनपर बड़ा प्रकोप है और उनके लिए बुहत कड़ी यातना है।
४२:१७
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىٓवो है जिसनेalladhīأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱلْكِتَـٰبَकिताब कोl-kitābaبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَٱلْمِيزَانَ ۗऔर मीज़ान कोwal-mīzānaوَمَاऔर क्या चीज़wamāيُدْرِيكَबताए आपकोyud'rīkaلَعَلَّशायद किlaʿallaٱلسَّاعَةَक़यामतl-sāʿataقَرِيبٌۭक़रीब होqarībun١٧
अल्लाह ही है जिसने सत्य के साथ यह पुस्तक उतारी तथा तराज़ू1 भी, और आपको क्या चीज़ सूचित करती है शायद कि क़ियामत क़रीब हो।
४२:१८
يَسْتَعْجِلُजल्दी माँगते हैyastaʿjiluبِهَاउसेbihāٱلَّذِينَवो जोalladhīnaلَا(do) notيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūnaبِهَا ۖउस परbihāوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए हैंāmanūمُشْفِقُونَडरने वाले हैंmush'fiqūnaمِنْهَاउससेmin'hāوَيَعْلَمُونَऔर वो इल्म रखते हैंwayaʿlamūnaأَنَّهَاकि बेशक वोannahāٱلْحَقُّ ۗहक़ हैl-ḥaquأَلَآख़बरदारalāإِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيُمَارُونَझगड़ते हैंyumārūnaفِىconcerningٱلسَّاعَةِक़यामत के बारे मेंl-sāʿatiلَفِى(are) certainly inlafīضَلَـٰلٍۭअलबत्ता गुमराही में हैंḍalālinبَعِيدٍदूर कीbaʿīdin١٨
उसे वे लोग शीघ्र माँगते हैं, जो उसपर ईमान नहीं रखते, तथा वे लोग जो उसपर विश्वास रखते हैं, वे उससे डरने वाले हैं और जानते हैं कि निःसंदेह वह सत्य है। सुनो! निःसंदेह जो लोग क़ियामत के विषय में बहस (संदेह) करते हैं, निश्चय वे बहुत दूर की गुमराही में हैं।
४२:१९
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuلَطِيفٌۢबहुत महरबान हैlaṭīfunبِعِبَادِهِۦअपने बन्दों परbiʿibādihiيَرْزُقُवो रिज़्क़ देता हैyarzuquمَنजिसेmanيَشَآءُ ۖवो चाहता हैyashāuوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْقَوِىُّबहुत क़ुव्वत वाला हैl-qawiyuٱلْعَزِيزُख़ूब ग़लबे वाला हैl-ʿazīzu١٩
अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा दयालु है। वह जिसे चाहता है रोज़ी देता है और वही सर्वशक्तिमान, सब पर प्रभुत्वशाली है।
४२:२०
مَنजो कोईmanكَانَहैkānaيُرِيدُचाहताyurīduحَرْثَखेतीḥarthaٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत कीl-ākhiratiنَزِدْहम ज़्यादा कर देंगेnazidلَهُۥउसके लिएlahuفِىinحَرْثِهِۦ ۖउसकी खेती मेंḥarthihiوَمَنऔर जो कोईwamanكَانَहैkānaيُرِيدُचाहताyurīduحَرْثَखेतीḥarthaٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāنُؤْتِهِۦहम देते हैं उसेnu'tihiمِنْهَاउसमें सेmin'hāوَمَاऔर नहीं होगाwamāلَهُۥउसके लिएlahuفِىinٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiمِنanyminنَّصِيبٍकोई हिस्साnaṣībin٢٠
जो कोई आख़िरत की खेती1 चाहता है, हम उसके लिए उसकी खेती में बढ़ोतरी कर देंगे, और जो कोई दुनिया की खेती चाहता है, हम उसे उसमें से कुछ दे देंगे, और आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं होगा।
४२:२१
أَمْयाamلَهُمْउनके लिएlahumشُرَكَـٰٓؤُا۟कुछ शरीक हैंshurakāuشَرَعُوا۟उन्होंने मुक़र्रर कर दियाsharaʿūلَهُمउनके लिएlahumمِّنَofminaٱلدِّينِदीन में सेl-dīniمَاवो जोلَمْनहींlamيَأْذَنۢइजाज़त दीyadhanبِهِउसकीbihiٱللَّهُ ۚअल्लाह नेl-lahuوَلَوْلَاऔर अगर ना होतीwalawlāكَلِمَةُबातkalimatuٱلْفَصْلِफ़ैसले कीl-faṣliلَقُضِىَअलबत्ता फ़ैसला कर दिया जाताlaquḍiyaبَيْنَهُمْ ۗदर्मियान उनकेbaynahumوَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिम लोगl-ẓālimīnaلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٢١
या इन (मुश्रिकों) के कुछ ऐसे साझी1 हैं, जिन्होंने उनके लिए धर्म का एक ऐसा नियम निर्धारित किया है जिसकी अल्लाह ने अनुमति नहीं दी है? और यदि नियत की हुई बात न होती, तो अवश्य उनके बीच निर्णय कर दिया जाता तथा निश्चय ही अत्याचारियों के लिए दुखद यातना है।
४२:२२
تَرَىआप देखेंगेtarāٱلظَّـٰلِمِينَज़लिमों कोl-ẓālimīnaمُشْفِقِينَडरने वाले होंगेmush'fiqīnaمِمَّاउससे जोmimmāكَسَبُوا۟उन्होंने कमाई कीkasabūوَهُوَऔर वोwahuwaوَاقِعٌۢवाक़ेअ होने वाला हैwāqiʿunبِهِمْ ۗउन परbihimوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiفِى(will be) inرَوْضَاتِबाग़ों में होंगेrawḍātiٱلْجَنَّاتِ ۖजन्नतों केl-janātiلَهُمउनके लिए होगाlahumمَّاजोيَشَآءُونَवो चाहेंगेyashāūnaعِندَपासʿindaرَبِّهِمْ ۚउनके रब केrabbihimذَٰلِكَयहीdhālikaهُوَवोhuwaٱلْفَضْلُफ़ज़ल हैl-faḍluٱلْكَبِيرُबहुत बड़ाl-kabīru٢٢
आप अत्याचारियों को देखेंगे कि वे उससे डरने वाले होंगे जो उन्होंने कमाया, हालाँकि वह उनपर आकर रहने वाला है, तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वे जन्नतों के बागों में होंगे। उनके लिए जो कुछ भी वे चाहेंगे उनके रब के पास होगा। यही बहुत बड़ा अनुग्रह है।
४२:२३
ذَٰلِكَये वो ही हैdhālikaٱلَّذِىजिसकीalladhīيُبَشِّرُख़ुशख़बरी देता हैyubashiruٱللَّهُअल्लाहl-lahuعِبَادَهُअपने बन्दों कोʿibādahuٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِ ۗनेकl-ṣāliḥātiقُلकह दीजिएqulلَّآनहींأَسْـَٔلُكُمْमैं माँगता तुमसेasalukumعَلَيْهِइस परʿalayhiأَجْرًاकोई अजरajranإِلَّاसिवायillāٱلْمَوَدَّةَमुहब्बत केl-mawadataفِىamongٱلْقُرْبَىٰ ۗक़राबत दारी मेंl-qur'bāوَمَنऔर जो कोईwamanيَقْتَرِفْकमायेगाyaqtarifحَسَنَةًۭकोई नेकीḥasanatanنَّزِدْहम ज़्यादा कर देंगेnazidلَهُۥउसके लिएlahuفِيهَاउसमेंfīhāحُسْنًا ۚख़ूबी कोḥus'nanإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunشَكُورٌख़ूब क़द्रदान हैshakūrun٢٣
यही वह चीज़ है, जिसकी शुभ-सूचना अल्लाह अपने उन बंदों को देता है, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए। आप कह दें : मैं इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक नहीं माँगता, रिश्तेदारी के कारण प्रेम-भाव के सिवा।1 और जो कोई नेकी कमाएगा, हम उसके लिए उसमें अच्छाई की अभिवृद्धि करेंगे। निश्चय अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, अति गुण-ग्राहक है।
४२:२४
أَمْयाamيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaٱفْتَرَىٰउसने गढ़ लियाif'tarāعَلَىaboutʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiكَذِبًۭا ۖझूठkadhibanفَإِنफिर अगरfa-inيَشَإِचाहताyasha-iٱللَّهُअल्लाहl-lahuيَخْتِمْवो मुहर लगा देताyakhtimعَلَىٰ[over]ʿalāقَلْبِكَ ۗआपके दिल परqalbikaوَيَمْحُऔर जल्द मिटा देता हैwayamḥuٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْبَـٰطِلَबातिल कोl-bāṭilaوَيُحِقُّऔर वो हक़ कर दिखाता हैwayuḥiqquٱلْحَقَّहक़ कोl-ḥaqaبِكَلِمَـٰتِهِۦٓ ۚअपने कलमात सेbikalimātihiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuعَلِيمٌۢख़ूब जानने वाला हैʿalīmunبِذَاتِof whatbidhātiٱلصُّدُورِसीनों वाले (भेद)l-ṣudūri٢٤
या वे कहते हैं कि उसने अल्लाह पर झूठ गढ़ लिया है? तो यदि अल्लाह चाहे, तो आपके दिल पर मुहर लगा दे।1 और अल्लाह असत्य को मिटा देता है और सत्य को अपने शब्दों (प्रमाणों) द्वारा साबित कर देता है। निश्चय वह सीनों (दिलों) की बातों को ख़ूब जानने वाला है।
४२:२५
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजोalladhīيَقْبَلُक़ुबूल करता हैyaqbaluٱلتَّوْبَةَतौबाl-tawbataعَنْofʿanعِبَادِهِۦअपने बन्दों सेʿibādihiوَيَعْفُوا۟और वो दरगुज़र करता हैwayaʿfūعَنِ[of]ʿaniٱلسَّيِّـَٔاتِबुराइयों सेl-sayiātiوَيَعْلَمُऔर वो जानता हैwayaʿlamuمَاजोتَفْعَلُونَतुम करते होtafʿalūna٢٥
वही है, जो अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है और बुराइयों1 को माफ़ करता है और जो कुछ तुम करते हो, उसे जानता है।
४२:२६
وَيَسْتَجِيبُऔर वो (दुआ) क़ुबूल करता हैwayastajībuٱلَّذِينَउनकी जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiوَيَزِيدُهُمऔर वो ज़्यादा देता है उन्हेंwayazīduhumمِّنfromminفَضْلِهِۦ ۚअपने फ़ज़ल सेfaḍlihiوَٱلْكَـٰفِرُونَऔर जो काफ़िर हैंwal-kāfirūnaلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابٌۭअज़ाब हैʿadhābunشَدِيدٌۭशदीदshadīdun٢٦
और उन लोगों की प्रार्थना स्वीकार करता है, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए तथा उन्हें अपने अनुग्रह से अधिक प्रदान करता है और जो काफ़िर हैं उनके लिए कड़ी यातना है।
४२:२७
۞ وَلَوْऔर अगरwalawبَسَطَखोल देbasaṭaٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلرِّزْقَरिज़्क़ कोl-riz'qaلِعِبَادِهِۦअपने बन्दों के लिएliʿibādihiلَبَغَوْا۟अलबत्ता वो सरकशी करेंlabaghawفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinيُنَزِّلُवो उतारता हैyunazziluبِقَدَرٍۢसाथ एक अंदाज़े केbiqadarinمَّاजोيَشَآءُ ۚवो चाहता हैyashāuإِنَّهُۥबेशक वोinnahuبِعِبَادِهِۦअपने बन्दों सेbiʿibādihiخَبِيرٌۢख़ूब बाख़बर हैkhabīrunبَصِيرٌۭख़ूब देखने वाला हैbaṣīrun٢٧
और यदि अल्लाह अपने (सब) बंदों के लिए रोज़ी कुशादा कर देता, तो वे धरती में सरकशी1 करते। परंतु वह एक अनुमान से उतारता है, जितना चाहता है। निश्चय वह अपने बंदों से भली-भाँति अवगत, भली-भाँति देखने वाला है।
४२:२८
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजोalladhīيُنَزِّلُउतारता हैyunazziluٱلْغَيْثَबारिश कोl-ghaythaمِنۢafterminبَعْدِइसके बादbaʿdiمَاजोقَنَطُوا۟वो मायूस हो गएqanaṭūوَيَنشُرُऔर वो फैला देता हैwayanshuruرَحْمَتَهُۥ ۚअपनी रहमत कोraḥmatahuوَهُوَऔर वो हीwahuwaٱلْوَلِىُّमददगार हैl-waliyuٱلْحَمِيدُबहुत तारीफ़ वाला हैl-ḥamīdu٢٨
तथा वही है जो बारिश बरसाता है, इसके बाद कि वे निराश हो चुके होते हैं और अपनी दया फैला1 देता है और वही संरक्षक, सराहनीय है।
४२:२९
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِۦऔर उसकी निशानियों में से हैāyātihiخَلْقُपैदाइशkhalquٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन कीwal-arḍiوَمَاऔर जो भीwamāبَثَّउसने फैला दिएbathaفِيهِمَاइन दोनों मेंfīhimāمِنofminدَآبَّةٍۢ ۚकोई जानदारdābbatinوَهُوَऔर वोwahuwaعَلَىٰ(is) overʿalāجَمْعِهِمْउनके जमा करने परjamʿihimإِذَاजबidhāيَشَآءُवो चाहेyashāuقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun٢٩
तथा उसकी निशानियों में से आकाशों और धरती का पैदा करना है और वे प्राणी जो उसने उन दोनों में फैला रखे हैं, और वह उन्हें इकट्ठा करने में जब चाहे पूर्ण सक्षम है।
४२:३०
وَمَآऔर जो भीwamāأَصَـٰبَكُمपहुँची तुम्हेंaṣābakumمِّنofminمُّصِيبَةٍۢकोई मुसीबतmuṣībatinفَبِمَاपस बवजह उसके जोfabimāكَسَبَتْकमाई कीkasabatأَيْدِيكُمْतुम्हारे हाथों नेaydīkumوَيَعْفُوا۟और वो दरगुज़र करता हैwayaʿfūعَن[from]ʿanكَثِيرٍۢबहुत कुछ सेkathīrin٣٠
तथा जो भी विपत्ति तुम्हें पहुँची, वह उसके कारण है जो तुम्हारे हाथों ने कमाया। तथा वह बहुत-सी चीज़ों को क्षमा कर देता है।1
४२:३१
وَمَآऔर नहींwamāأَنتُمतुमantumبِمُعْجِزِينَआजिज़ करने वालेbimuʿ'jizīnaفِىinٱلْأَرْضِ ۖज़मीन मेंl-arḍiوَمَاऔर नहींwamāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنbesidesminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمِنanyminوَلِىٍّۢकोई दोस्तwaliyyinوَلَاऔर नाwalāنَصِيرٍۢकोई मददगारnaṣīrin٣١
और तुम धरती में (अल्लाह को) विवश करने वाले नहीं हो और न अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई संरक्षक है और न कोई सहायक।
४२:३२
وَمِنْAnd amongwaminءَايَـٰتِهِऔर उसकी निशानियों में से हैंāyātihiٱلْجَوَارِकश्तियाँl-jawāriفِىinٱلْبَحْرِसमुन्दर मेंl-baḥriكَٱلْأَعْلَـٰمِपहाड़ों की तरहkal-aʿlāmi٣٢
तथा उसकी निशानियों में से समुद्र में चलने वाले जहाज़ हैं, जो पहाड़ों के समान हैं।
४२:३३
إِنअगरinيَشَأْवो चाहेyashaيُسْكِنِवो साकिन कर देyus'kiniٱلرِّيحَहवा कोl-rīḥaفَيَظْلَلْنَतो वो रह जाऐंfayaẓlalnaرَوَاكِدَखड़ी हुईrawākidaعَلَىٰonʿalāظَهْرِهِۦٓ ۚउसकी पुश्त परẓahrihiإِنَّयक़ीननinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّكُلِّवास्ते हरlikulliصَبَّارٍۢबहुत सब्र करने वालेṣabbārinشَكُورٍबहुत शुक्र गुज़ार केshakūrin٣٣
यदि वह चाहे तो वायु को ठहरा दे, तो वे उसकी सतह पर खड़े रह जाएँ। निःसंदेह इसमें हर ऐसे व्यक्ति के लिए निश्चय कई निशानियाँ हैं जो बहुत धैर्यवान, बड़ा कृतज्ञ है।
४२:३४
أَوْयाawيُوبِقْهُنَّवो हलाक कर दे उन्हेंyūbiq'hunnaبِمَاबवजह इसके जोbimāكَسَبُوا۟उन्होंने कमाई कीkasabūوَيَعْفُऔर वो दरगुज़र कर देwayaʿfuعَن[from]ʿanكَثِيرٍۢबहुत सों सोkathīrin٣٤
या वह उन्हें उसके कारण विनष्ट1 कर दे जो उन्होंने कमाया और वह बहुत-से पापों को क्षमा कर देता है।
४२:३५
وَيَعْلَمَऔर (ताकि) जान लेंwayaʿlamaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيُجَـٰدِلُونَझगड़ते हैंyujādilūnaفِىٓconcerningءَايَـٰتِنَاहमारी आयात मेंāyātināمَاनहींلَهُمउनके लिएlahumمِّنanyminمَّحِيصٍۢकोई जाए पनाहmaḥīṣin٣٥
तथा वे लोग जान लें, जो हमारी आयतों में झगड़ते हैं कि उनके लिए भागने का कोई स्थान नहीं है।
४२:३६
فَمَآपस जो भीfamāأُوتِيتُمदिए गए हो तुमūtītumمِّنofminشَىْءٍۢकोई चीज़shayinفَمَتَـٰعُतो सामान हैfamatāʿuٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी काl-ḥayatiٱلدُّنْيَا ۖदुनिया कीl-dun'yāوَمَاऔर जोwamāعِندَपास हैʿindaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunوَأَبْقَىٰऔर ज़्यादा बाक़ी रहने वाला हैwa-abqāلِلَّذِينَउनके लिए जोlilladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَلَىٰand uponwaʿalāرَبِّهِمْऔर अपने रब पर हीrabbihimيَتَوَكَّلُونَवो तवक्कल करते हैyatawakkalūna٣٦
तुम्हें जो चीज़ भी दी गई है, वह सांसारिक जीवन का सामान है, तथा जो कुछ अल्लाह के पास है, वह उत्तम और स्थायी1 है, उन लोगों के लिए जो अल्लाह पर ईमान लाए तथा केवल अपने पालनहार पर भरोसा रखते हैं।
४२:३७
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaيَجْتَنِبُونَइजतिनाब करते हैंyajtanibūnaكَبَـٰٓئِرَकबीराkabāiraٱلْإِثْمِगुनाहों सेl-ith'miوَٱلْفَوَٰحِشَऔर बेहयाई के कामों सेwal-fawāḥishaوَإِذَاand whenwa-idhāمَاऔर जब भीغَضِبُوا۟वो ग़ज़बनाक होते हैghaḍibūهُمْवोhumيَغْفِرُونَवो माफ़ कर देते हैंyaghfirūna٣٧
तथा वे लोग जो बड़े पापों एवं निर्लज्जता के कामों से बचते हैं और जब भी गुस्सा आए तो माफ कर देते हैं।
४२:३८
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaٱسْتَجَابُوا۟लब्बैक कही (अपने रब की बात को)is'tajābūلِرَبِّهِمْअपने रब के लिएlirabbihimوَأَقَامُوا۟और उन्होंने क़ायम कीwa-aqāmūٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَأَمْرُهُمْऔर काम उनकाwa-amruhumشُورَىٰमश्वरा करना हैshūrāبَيْنَهُمْआपस मेंbaynahumوَمِمَّاऔर उसमें से जोwamimmāرَزَقْنَـٰهُمْरिज़्क़ दिया हमने उन्हेंrazaqnāhumيُنفِقُونَवो ख़र्च करते हैंyunfiqūna٣٨
तथा जिन लोगों ने अपने रब का हुक्म माना और नमाज़ क़ायम की और उनका काम आपस में परामर्श करना है1 और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं।
४२:३९
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaإِذَآजबidhāأَصَابَهُمُपहुँचती है उन्हेंaṣābahumuٱلْبَغْىُकोई ज़्यादतीl-baghyuهُمْवोhumيَنتَصِرُونَवो बदला लेते हैyantaṣirūna٣٩
और वे लोग कि जब उनपर अत्याचार होता है, तो वे बदला लेते हैं।
४२:४०
وَجَزَٰٓؤُا۟और बदलाwajazāuسَيِّئَةٍۢबुराई काsayyi-atinسَيِّئَةٌۭबुराई हैsayyi-atunمِّثْلُهَا ۖउसकी मसलmith'luhāفَمَنْपस जो कोईfamanعَفَاमाफ़ कर देʿafāوَأَصْلَحَऔर वो इस्लाह करेwa-aṣlaḥaفَأَجْرُهُۥतो अजर उसकाfa-ajruhuعَلَى(is) onʿalāٱللَّهِ ۚज़िम्मे है अल्लाह केl-lahiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَا(does) notيُحِبُّनहीं वो मुहब्बत करताyuḥibbuٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों सेl-ẓālimīna٤٠
और किसी बुराई का बदला उसी जैसी बुराई1 है। फिर जो क्षमा कर दे तथा सुधार कर ले, तो उसका प्रतिफल अल्लाह के ज़िम्मे है। निःसंदेह वह अत्याचारियों से प्रेम नहीं करता।
४२:४१
وَلَمَنِऔर अलबत्ता जो कोईwalamaniٱنتَصَرَबदला लेintaṣaraبَعْدَबादbaʿdaظُلْمِهِۦअपने (ऊपर) ज़ुल्म केẓul'mihiفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaمَاनहींعَلَيْهِمउन परʿalayhimمِّنanyminسَبِيلٍकोई मुआख़िज़ाsabīlin٤١
तथा जो अपने ऊपर अत्याचार होने के पश्चात् बदला ले ले, तो ये वे लोग हैं जिनपर कोई दोष नहीं।
४२:४२
إِنَّمَاबेशकinnamāٱلسَّبِيلُमुआख़िज़ा तोl-sabīluعَلَىagainstʿalāٱلَّذِينَउन पर है जोalladhīnaيَظْلِمُونَज़ुल्म करते हैyaẓlimūnaٱلنَّاسَलोगों परl-nāsaوَيَبْغُونَऔर वो बग़ावत करते हैwayabghūnaفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiبِغَيْرِबग़ैरbighayriٱلْحَقِّ ۚहक़ केl-ḥaqiأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٤٢
दोष तो केवल उन्हीं पर है, जो लोगों पर अत्याचार करते हैं और धरती पर बिना अधिकार के सरकशी करते हैं। यही लोग हैं जिनके लिए कष्टदायक यातना है।
४२:४३
وَلَمَنऔर अलबत्ता जिसनेwalamanصَبَرَसब्र कियाṣabaraوَغَفَرَऔर उसने माफ़ कर दियाwaghafaraإِنَّबेशकinnaذَٰلِكَयेdhālikaلَمِنْ(is) surely oflaminعَزْمِmatters of determinationʿazmiٱلْأُمُورِअलबत्ता हिम्मत के कामों में से हैl-umūri٤٣
और निःसंदेह जो सब्र करे तथा क्षमा कर दे, तो निःसदंहे यह निश्चय बड़े साहस के कामों में से है।1
४२:४४
وَمَنऔर जिसेwamanيُضْلِلِभटका देyuḍ'liliٱللَّهُअल्लाहl-lahuفَمَاतो नहींfamāلَهُۥउसके लिएlahuمِنanyminوَلِىٍّۢकोई करसाज़waliyyinمِّنۢafter Himminبَعْدِهِۦ ۗउसके बादbaʿdihiوَتَرَىऔर आप देखेंगेwatarāٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों कोl-ẓālimīnaلَمَّاजबlammāرَأَوُا۟वो देख लेंगेra-awūٱلْعَذَابَअज़ाबl-ʿadhābaيَقُولُونَवो कहेंगेyaqūlūnaهَلْक्या हैhalإِلَىٰ(there) forilāمَرَدٍّۢवापस लौटने की तरफ़maraddinمِّنanyminسَبِيلٍۢकोई रास्ताsabīlin٤٤
तथा जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, तो उसके बाद उसका कोई सहायक नहीं। तथा आप अत्याचारियों को देखेंगे कि जब वे यातना देखेंगे, तो कहेंगे : क्या वापसी का कोई रास्ता है?
४२:४५
وَتَرَىٰهُمْऔर आप देखेंगे उन्हेंwatarāhumيُعْرَضُونَवो पेश किए जाऐंगेyuʿ'raḍūnaعَلَيْهَاउस परʿalayhāخَـٰشِعِينَझुके हुएkhāshiʿīnaمِنَbyminaٱلذُّلِّज़िल्लत की वजह सेl-dhuliيَنظُرُونَवो देखेंगेyanẓurūnaمِنwithminطَرْفٍa glanceṭarfinخَفِىٍّۢ ۗझुकी आँख /कनअखियों सेkhafiyyinوَقَالَऔर कहेंगेwaqālaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाएāmanūإِنَّबेशकinnaٱلْخَـٰسِرِينَख़सारा पाने वालेl-khāsirīnaٱلَّذِينَवो हैं जिन्होंनेalladhīnaخَسِرُوٓا۟ख़सारे में डालाkhasirūأَنفُسَهُمْअपने नफ़्सों कोanfusahumوَأَهْلِيهِمْऔर अपने घर वालों कोwa-ahlīhimيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِ ۗक़यामत केl-qiyāmatiأَلَآख़बरदारalāإِنَّबेशकinnaٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिम लोगl-ẓālimīnaفِى(are) inعَذَابٍۢअज़ाब में होंगेʿadhābinمُّقِيمٍۢमुक़ीम /दाइमीmuqīmin٤٥
तथा आप उन्हें देखेंगे कि वे उस (आग) पर इस दशा में पेश किए जाएँगे कि अपमान से झुके हुए, छिपी आँखों से देख रहे होंगे। तथा ईमान वाले कहेंगे : वास्तव में, असल घाटा उठाने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने क़ियामत के दिन अपने आपको और अपने परिवार को घाटे में डाल दिया। सुन लो! निःसंदेह अत्याचारी लोग स्थायी यातना में होंगे।
४२:४६
وَمَاऔर नाwamāكَانَहोंगेkānaلَهُمउनके लिएlahumمِّنْanyminأَوْلِيَآءَकोई मददगारawliyāaيَنصُرُونَهُمजो मदद करें उनकीyanṣurūnahumمِّنbesidesminدُونِसिवायdūniٱللَّهِ ۗअल्लाह केl-lahiوَمَنऔर जिसेwamanيُضْلِلِभटका देyuḍ'liliٱللَّهُअल्लाहl-lahuفَمَاतो नहींfamāلَهُۥउसके लिएlahuمِنanyminسَبِيلٍकोई रास्ताsabīlin٤٦
तथा उनके कोई सहायक नहीं होंगे, जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी सहायता करें। और जिसे अल्लाह राह से भटका दे, फिर उसके लिए कोई मार्ग नहीं।
४२:४७
ٱسْتَجِيبُوا۟लब्बैक कहोis'tajībūلِرَبِّكُمअपने रब के लिएlirabbikumمِّنbeforeminقَبْلِइससे पहलेqabliأَنकिanيَأْتِىَआ जाएyatiyaيَوْمٌۭएक दिनyawmunلَّا(there is) noمَرَدَّनहीं कोई टलनाmaraddaلَهُۥउसके लिएlahuمِنَfromminaٱللَّهِ ۚअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiمَاनहींلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنanyminمَّلْجَإٍۢकोई जाए पनाहmalja-inيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinوَمَاऔर नहींwamāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنanyminنَّكِيرٍۢकोई इन्कार करनाnakīrin٤٧
अपने पालनहार का निमंत्रण स्वीकार करो, इससे पहले कि वह दिन आए, जिसे अल्लाह की ओर से टलना नहीं। उस दिन तुम्हारे लिए न कोई शरण स्थल होगा और न तुम्हारे लिए इनकार का कोई रास्ता होगा।
४२:४८
فَإِنْफिर अगरfa-inأَعْرَضُوا۟वो ऐराज़ करेंaʿraḍūفَمَآतो नहींfamāأَرْسَلْنَـٰكَभेजा हमने आपकोarsalnākaعَلَيْهِمْउन परʿalayhimحَفِيظًا ۖनिगेहबान बना करḥafīẓanإِنْनहींinعَلَيْكَआपके ज़िम्मेʿalaykaإِلَّاमगरillāٱلْبَلَـٰغُ ۗपहुँचा देनाl-balāghuوَإِنَّآऔर बेशक हमwa-innāإِذَآजबidhāأَذَقْنَاचखाते हैं हमadhaqnāٱلْإِنسَـٰنَइन्सान कोl-insānaمِنَّاअपनी तरफ़ सेminnāرَحْمَةًۭकोई रहमतraḥmatanفَرِحَवो ख़ुश हो जाता हैfariḥaبِهَا ۖउस परbihāوَإِنऔर अगरwa-inتُصِبْهُمْपहुँचती है उन्हेंtuṣib'humسَيِّئَةٌۢकोई तक्लीफ़sayyi-atunبِمَاबवजह उसके जोbimāقَدَّمَتْआगे भेजाqaddamatأَيْدِيهِمْउनके हाथों नेaydīhimفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱلْإِنسَـٰنَइन्सानl-insānaكَفُورٌۭसख़्त नाशुक्रा हैkafūrun٤٨
फिर यदि वे मुँह फेर लें, तो हमने आपको उनपर कोई संरक्षक बनाकर नहीं भेजा। आपका दायित्व तो केवल (संदेश) पहुँचा देना है। और निःसंदेह जब हम मनुष्य को अपनी ओर से कोई दया चखाते हैं, तो वह उससे खुश हो जाता है, और यदि उनपर उसके कारण कोई विपत्ति आ पड़ती है, जो उनके हाथों ने आगे भेजा है, तो निःसंदेह मनुष्य बड़ा नाशुक्रा है।
४२:४९
لِّلَّهِअल्लाह ही के लिए हैlillahiمُلْكُबादशाहतmul'kuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन कीwal-arḍiيَخْلُقُवो पैदा करता हैyakhluquمَاजोيَشَآءُ ۚवो चाहता हैyashāuيَهَبُवो अता करता हैyahabuلِمَنजिसके लिएlimanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuإِنَـٰثًۭاलड़कियाँināthanوَيَهَبُऔर वो अता करता हैwayahabuلِمَنजिसके लिएlimanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuٱلذُّكُورَलड़केl-dhukūra٤٩
आकाशों तथा धरती का राज्य अल्लाह ही का है। वह जो चाहता है पैदा करता है, जिसे चाहता है बेटियाँ देता है और जिसे चाहता है बेटे देता है।
४२:५०
أَوْयाawيُزَوِّجُهُمْवो मिला- जुला कर देता है उन्हेंyuzawwijuhumذُكْرَانًۭاलड़केdhuk'rānanوَإِنَـٰثًۭا ۖऔर लड़कियाँwa-ināthanوَيَجْعَلُऔर वो बना देता हैwayajʿaluمَنजिसेmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuعَقِيمًا ۚबाँझʿaqīmanإِنَّهُۥबेशक वोinnahuعَلِيمٌۭख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत वाला हैqadīrun٥٠
या उन्हें बेटे-बेटियाँ1 मिलाकर देता है और जिसे चाहता है बाँझ कर देता है। निश्चय ही वह सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ की शक्ति रखने वाला है।
४२:५१
۞ وَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaلِبَشَرٍकिसी इन्सान के लिएlibasharinأَنकिanيُكَلِّمَهُकलाम करे उससेyukallimahuٱللَّهُअल्लाहl-lahuإِلَّاमगरillāوَحْيًاवही के तौरwaḥyanأَوْयाawمِنfromminوَرَآئِपीछे सेwarāiحِجَابٍपर्दे केḥijābinأَوْयाawيُرْسِلَवो भेजेyur'silaرَسُولًۭاकोई रसूल(फ़रिश्ता)rasūlanفَيُوحِىَतो वो वही पहुँचाता हैfayūḥiyaبِإِذْنِهِۦउसके इज़्न सेbi-idh'nihiمَاजोيَشَآءُ ۚवो चाहता हैyashāuإِنَّهُۥयक़ीनन वोinnahuعَلِىٌّबहुत बुलन्द हैʿaliyyunحَكِيمٌۭख़ूब हिकमत वाला हैḥakīmun٥١
और किसी मनुष्य के लिए संभव नहीं कि अल्लाह उससे बात करे, परंतु वह़्य1 के द्वारा, अथवा पर्दे के पीछे से, अथवा यह कि कोई दूत (फ़रिश्ता) भेजे, फिर वह उसकी अनुमति से वह़्य करे, जो कुछ वह चाहे। निःसंदेह वह सबसे ऊँचा, पूर्ण हिकमत वाला है।
४२:५२
وَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaأَوْحَيْنَآवही की हमनेawḥaynāإِلَيْكَआपकी तरफ़ilaykaرُوحًۭاएक रूह (क़ुरान ) कीrūḥanمِّنْbyminأَمْرِنَا ۚअपने हुक्म सेamrināمَاनाكُنتَथे आपkuntaتَدْرِىआप जानतेtadrīمَاक्या हैٱلْكِتَـٰبُकिताबl-kitābuوَلَاऔर नाwalāٱلْإِيمَـٰنُईमानl-īmānuوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinجَعَلْنَـٰهُबनाया हमने उसेjaʿalnāhuنُورًۭاऐसा नूरnūranنَّهْدِىहम हिदायत देते हैंnahdīبِهِۦसाथ उसकेbihiمَنजिसेmanنَّشَآءُहम चाहते हैंnashāuمِنْofminعِبَادِنَا ۚअपने बन्दों में सेʿibādināوَإِنَّكَऔर बेशक आपwa-innakaلَتَهْدِىٓअलबत्ता आप रहनुमाई करते हैंlatahdīإِلَىٰtoilāصِرَٰطٍۢतरफ़ रास्तेṣirāṭinمُّسْتَقِيمٍۢसीधे केmus'taqīmin٥٢
और इसी प्रकार हमने आपकी ओर अपने आदेश से एक रूह़ (क़ुरआन) की वह़्य की। आप नहीं जानते थे कि पुस्तक क्या है और न यह कि ईमान1 क्या है। परंतु हमने उसे एक ऐसा प्रकाश बनाया दिया है, जिसके द्वारा हम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, मार्ग दिखाते हैं। और निःसंदेह आप सीधी राह2 की ओर मार्गदर्शन करते हैं।
४२:५३
صِرَٰطِरास्ताṣirāṭiٱللَّهِअल्लाह काl-lahiٱلَّذِىवो जोalladhīلَهُۥउसका के लिए हैlahuمَاजो कुछفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَاऔर जो कुछwamāفِى(is) inٱلْأَرْضِ ۗज़मीन में हैl-arḍiأَلَآख़बरदारalāإِلَىToilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह ही केl-lahiتَصِيرُलौटते हैंtaṣīruٱلْأُمُورُतमाम मामलातl-umūru٥٣
उस अल्लाह की राह की ओर कि जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, उसी का है। सुनो! सभी मामले अल्लाह ही की ओर लौटते हैं।