४१

फ़ुस्सिलत

मक्की ५४ आयतें पारा २४
فصلت
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४१:१
حمٓ ح م hha-meem
ح م
١ (1)
(1)
ह़ा, मीम।
४१:२
تَنزِيلٌۭ नाज़िल करदा है tanzīlun
नाज़िल करदा है
مِّنَ from mina
from
ٱلرَّحْمَـٰنِ बहुत महरबान की तरफ़ से l-raḥmāni
बहुत महरबान की तरफ़ से
ٱلرَّحِيمِ जो निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
जो निहायत रहम करने वाला है
٢ (2)
(2)
(यह कुरआन) अत्यंत दयावान्, असीम दयालु की ओर से अवतरित हुआ है।
४१:३
كِتَـٰبٌۭ एक ऐसी किताब kitābun
एक ऐसी किताब
فُصِّلَتْ खोल कर बयान की गईं हैं fuṣṣilat
खोल कर बयान की गईं हैं
ءَايَـٰتُهُۥ आयात उसकी āyātuhu
आयात उसकी
قُرْءَانًا क़ुरआन है qur'ānan
क़ुरआन है
عَرَبِيًّۭا अर्बी ʿarabiyyan
अर्बी
لِّقَوْمٍۢ उन लोगों के लिए liqawmin
उन लोगों के लिए
يَعْلَمُونَ जो इल्म रखते हैं yaʿlamūna
जो इल्म रखते हैं
٣ (3)
(3)
(यह ऐसी) पुस्तक है, जिसकी आयतें खोलकर बयान की गई हैं। (यह) क़ुरआन अरबी (भाषा में) है, उन लोगों के लिए जो ज्ञान रखते हैं।
४१:४
بَشِيرًۭا ख़ुश ख़बरी देने वाला bashīran
ख़ुश ख़बरी देने वाला
وَنَذِيرًۭا और डराने वाला wanadhīran
और डराने वाला
فَأَعْرَضَ तो ऐराज़ किया fa-aʿraḍa
तो ऐराज़ किया
أَكْثَرُهُمْ उनके अक्सर ने aktharuhum
उनके अक्सर ने
فَهُمْ पस वो fahum
पस वो
لَا (do) not
(do) not
يَسْمَعُونَ नहीं वो सुनते yasmaʿūna
नहीं वो सुनते
٤ (4)
(4)
वह शुभ सूचना देने वाला तथा सचेत करने वाला है। लेकिन उनमें से अधिकतर ने (उससे) मुँह फेर लिया, तो वे सुनते ही नहीं।
४१:५
وَقَالُوا۟ और उन्होंने कहा waqālū
और उन्होंने कहा
قُلُوبُنَا दिल हमारे qulūbunā
दिल हमारे
فِىٓ (are) in
(are) in
أَكِنَّةٍۢ पर्दों में हैं akinnatin
पर्दों में हैं
مِّمَّا उससे जो mimmā
उससे जो
تَدْعُونَآ तुम पुकारते हो हमें tadʿūnā
तुम पुकारते हो हमें
إِلَيْهِ तरफ़ जिसके ilayhi
तरफ़ जिसके
وَفِىٓ and in wafī
and in
ءَاذَانِنَا और हमारे कानों में ādhāninā
और हमारे कानों में
وَقْرٌۭ एक बोझ है waqrun
एक बोझ है
وَمِنۢ and between us wamin
and between us
بَيْنِنَا और दर्मियान हमारे bayninā
और दर्मियान हमारे
وَبَيْنِكَ और दर्मियान तुम्हारे wabaynika
और दर्मियान तुम्हारे
حِجَابٌۭ हिजाब है ḥijābun
हिजाब है
فَٱعْمَلْ पस अमल करो fa-iʿ'mal
पस अमल करो
إِنَّنَا बेशक हम भी innanā
बेशक हम भी
عَـٰمِلُونَ अमल करने वाले हैं ʿāmilūna
अमल करने वाले हैं
٥ (5)
(5)
तथा उन्होंने1 कहा : हमारे दिल उससे पर्दों में हैं, जिसकी ओर आप हमें बुला रहे हैं तथा हमारे कानों में बोझ (बहरापन) है तथा हमारे और आपके बीच एक ओट है। अतः आप अपना काम करें और हम अपना काम कर रहे हैं।
४१:६
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
إِنَّمَآ बेशक innamā
बेशक
أَنَا۠ मैं anā
मैं
بَشَرٌۭ एक इन्सान हूँ basharun
एक इन्सान हूँ
مِّثْلُكُمْ तुम जैसा mith'lukum
तुम जैसा
يُوحَىٰٓ वही की जाती है yūḥā
वही की जाती है
إِلَىَّ मेरी तरफ़ ilayya
मेरी तरफ़
أَنَّمَآ बेशक annamā
बेशक
إِلَـٰهُكُمْ इलाह तुम्हारा ilāhukum
इलाह तुम्हारा
إِلَـٰهٌۭ इलाह है ilāhun
इलाह है
وَٰحِدٌۭ एक ही wāḥidun
एक ही
فَٱسْتَقِيمُوٓا۟ पस सीधे रहो fa-is'taqīmū
पस सीधे रहो
إِلَيْهِ तरफ़ उसके ilayhi
तरफ़ उसके
وَٱسْتَغْفِرُوهُ ۗ और बख़्शिश माँगो उससे wa-is'taghfirūhu
और बख़्शिश माँगो उससे
وَوَيْلٌۭ और हलाकत है wawaylun
और हलाकत है
لِّلْمُشْرِكِينَ मुशरिकों के लिए lil'mush'rikīna
मुशरिकों के लिए
٦ (6)
(6)
आप कह दें कि मैं तो तुम्हारे ही जैसा एक इनसान हूँ। मेरी ओर वह़्य की जाती है कि तुम्हारा पूज्य मात्र एक ही पूज्य है। अतः सीधे उसी की ओर एकाग्र रहो तथा उससे क्षमा माँगो और साझी ठहराने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
४१:७
ٱلَّذِينَ वो जो alladhīna
वो जो
لَا (do) not
(do) not
يُؤْتُونَ नहीं वो अदा करते yu'tūna
नहीं वो अदा करते
ٱلزَّكَوٰةَ ज़कात l-zakata
ज़कात
وَهُم और वो wahum
और वो
بِٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत के bil-ākhirati
आख़िरत के
هُمْ वो hum
वो
كَـٰفِرُونَ इन्कारी हैं kāfirūna
इन्कारी हैं
٧ (7)
(7)
जो ज़कात नहीं देते तथा वे आख़िरत का (भी) इनकार करते हैं।
४१:८
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जो alladhīna
वो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَعَمِلُوا۟ और उन्होंने अमल किए waʿamilū
और उन्होंने अमल किए
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ नेक l-ṣāliḥāti
नेक
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
أَجْرٌ अजर है ajrun
अजर है
غَيْرُ ना ghayru
ना
مَمْنُونٍۢ ख़त्म होने वाला mamnūnin
ख़त्म होने वाला
٨ (8)
(8)
निःसंदेह जो लोग ईमान लाए तथा अच्छे कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
४१:९
۞ قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
أَئِنَّكُمْ क्या बेशक तुम a-innakum
क्या बेशक तुम
لَتَكْفُرُونَ अलबत्ता तुम कुफ़्र करते हो latakfurūna
अलबत्ता तुम कुफ़्र करते हो
بِٱلَّذِى उसका जिसने bi-alladhī
उसका जिसने
خَلَقَ पैदा किया khalaqa
पैदा किया
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
فِى in
in
يَوْمَيْنِ दो दिन में yawmayni
दो दिन में
وَتَجْعَلُونَ और तुम बनाते हो watajʿalūna
और तुम बनाते हो
لَهُۥٓ उसके लिए lahu
उसके लिए
أَندَادًۭا ۚ कुछ शरीक andādan
कुछ शरीक
ذَٰلِكَ वो है dhālika
वो है
رَبُّ रब rabbu
रब
ٱلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहानों का l-ʿālamīna
तमाम जहानों का
٩ (9)
(9)
आप कह दें कि क्या तुम उस अस्तित्व का इनकार करते हो, जिसने धरती को दो दिनों में पैदा किया और उसके समकक्ष ठहराते हो? वह तो समस्त संसार का पालनहार है।
४१:१०
وَجَعَلَ और उसने गाड़ दिया wajaʿala
और उसने गाड़ दिया
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
رَوَٰسِىَ पहाड़ों को rawāsiya
पहाड़ों को
مِن above it min
above it
فَوْقِهَا उसके ऊपर से fawqihā
उसके ऊपर से
وَبَـٰرَكَ और बरकत डाली wabāraka
और बरकत डाली
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
وَقَدَّرَ और अंदाज़े से रखा waqaddara
और अंदाज़े से रखा
فِيهَآ उसमें fīhā
उसमें
أَقْوَٰتَهَا उसकी ग़िज़ाओं को aqwātahā
उसकी ग़िज़ाओं को
فِىٓ in
in
أَرْبَعَةِ four arbaʿati
four
أَيَّامٍۢ चार दिनों में ayyāmin
चार दिनों में
سَوَآءًۭ बराबर/यक्साँ है sawāan
बराबर/यक्साँ है
لِّلسَّآئِلِينَ सवाल करने वालों के लिए lilssāilīna
सवाल करने वालों के लिए
١٠ (10)
(10)
तथा उस (धरती) में उसके ऊपर से पर्वत बनाए, तथा उसमें बरकत रख दी और उसमें उसके वासियों के आहार चार1 दिनों में निर्धारित किए, समान रूप2 से, प्रश्न करने वालों के लिए।
४१:११
ثُمَّ फिर thumma
फिर
ٱسْتَوَىٰٓ वो मुतवज्जा हुआ is'tawā
वो मुतवज्जा हुआ
إِلَى towards ilā
towards
ٱلسَّمَآءِ तरफ़ आसमान के l-samāi
तरफ़ आसमान के
وَهِىَ और वो wahiya
और वो
دُخَانٌۭ एक धुवाँ था dukhānun
एक धुवाँ था
فَقَالَ तो उसने कहा faqāla
तो उसने कहा
لَهَا उससे lahā
उससे
وَلِلْأَرْضِ और ज़मीन से walil'arḍi
और ज़मीन से
ٱئْتِيَا दोनों आ जाओ i'tiyā
दोनों आ जाओ
طَوْعًا ख़ुशी से ṭawʿan
ख़ुशी से
أَوْ या aw
या
كَرْهًۭا ना ख़ुशी से karhan
ना ख़ुशी से
قَالَتَآ दोनों ने कहा qālatā
दोनों ने कहा
أَتَيْنَا आ गए हम ataynā
आ गए हम
طَآئِعِينَ ख़ुश होकर ṭāiʿīna
ख़ुश होकर
١١ (11)
(11)
फिर उसने आकाश की ओर रुख़ किया, जबकि वह धुआँ था। तो उसने उससे और धरती से कहा : तुम दोनों आओ, स्वेच्छा से या मजबूरी से। दोनों ने कहा : हम स्वेच्छा से आ गए।
४१:१२
فَقَضَىٰهُنَّ तो उसने पूरा बना दिया उन्हें faqaḍāhunna
तो उसने पूरा बना दिया उन्हें
سَبْعَ सात sabʿa
सात
سَمَـٰوَاتٍۢ आसमान samāwātin
आसमान
فِى in
in
يَوْمَيْنِ दो दिनों में yawmayni
दो दिनों में
وَأَوْحَىٰ और उसने वही कर दिया wa-awḥā
और उसने वही कर दिया
فِى in
in
كُلِّ each kulli
each
سَمَآءٍ हर आसमान में samāin
हर आसमान में
أَمْرَهَا ۚ काम उसका amrahā
काम उसका
وَزَيَّنَّا और मुज़य्यन किया हमने wazayyannā
और मुज़य्यन किया हमने
ٱلسَّمَآءَ आसमान को l-samāa
आसमान को
ٱلدُّنْيَا दुनिया के l-dun'yā
दुनिया के
بِمَصَـٰبِيحَ साथ चिराग़ों के bimaṣābīḥa
साथ चिराग़ों के
وَحِفْظًۭا ۚ और हिफ़ाज़त के लिए waḥif'ẓan
और हिफ़ाज़त के लिए
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
تَقْدِيرُ अंदाज़ा है taqdīru
अंदाज़ा है
ٱلْعَزِيزِ बहुत ज़बरदस्त का l-ʿazīzi
बहुत ज़बरदस्त का
ٱلْعَلِيمِ ख़ूब इल्म वाले का l-ʿalīmi
ख़ूब इल्म वाले का
١٢ (12)
(12)
फिर उसने उन्हें दो दिनों में सात आकाश बना दिए और प्रत्येक आकाश में उससे संबंधित काम की वह़्य की। तथा हमने निकटतम (निचले) आकाश को दीपों (चमकदार सितारों) से सुशोभित किया, तथा (उनके द्वारा) उसको सुरक्षित कर दिया।1 यह अत्यंत प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले (अल्लाह) की योजना है।
४१:१३
فَإِنْ फिर अगर fa-in
फिर अगर
أَعْرَضُوا۟ वो मुँह मोड़ लें aʿraḍū
वो मुँह मोड़ लें
فَقُلْ तो कह दीजिए faqul
तो कह दीजिए
أَنذَرْتُكُمْ डराता हूँ मैं तुम्हें andhartukum
डराता हूँ मैं तुम्हें
صَـٰعِقَةًۭ बिजली की कड़क से ṣāʿiqatan
बिजली की कड़क से
مِّثْلَ मानिन्द mith'la
मानिन्द
صَـٰعِقَةِ बिजली की कड़क ṣāʿiqati
बिजली की कड़क
عَادٍۢ आद ʿādin
आद
وَثَمُودَ और समूद की wathamūda
और समूद की
١٣ (13)
(13)
फिर यदि वे विमुख हों, तो आप कह दें कि मैंने तुम्हें ऐसी कड़क (भयंकर यातना) से सावधान कर दिया है, जो आद और समूद की कड़क जैसी होगी।
४१:१४
إِذْ जब idh
जब
جَآءَتْهُمُ आए उनके पास jāathumu
आए उनके पास
ٱلرُّسُلُ कई रसूल l-rusulu
कई रसूल
مِنۢ from before them min
from before them
بَيْنِ from before them bayni
from before them
أَيْدِيهِمْ उनके आगे से aydīhim
उनके आगे से
وَمِنْ and from wamin
and from
خَلْفِهِمْ और उनके पीछे से khalfihim
और उनके पीछे से
أَلَّا कि ना allā
कि ना
تَعْبُدُوٓا۟ तुम इबादत करो taʿbudū
तुम इबादत करो
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱللَّهَ ۖ अल्लाह की l-laha
अल्लाह की
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
لَوْ अगर law
अगर
شَآءَ चाहता shāa
चाहता
رَبُّنَا रब हमारा rabbunā
रब हमारा
لَأَنزَلَ अलबत्ता वो उतार देता la-anzala
अलबत्ता वो उतार देता
مَلَـٰٓئِكَةًۭ फ़रिश्ते malāikatan
फ़रिश्ते
فَإِنَّا तो बेशक हम fa-innā
तो बेशक हम
بِمَآ उसका जो bimā
उसका जो
أُرْسِلْتُم भेजे गए हो तुम ur'sil'tum
भेजे गए हो तुम
بِهِۦ साथ उसके bihi
साथ उसके
كَـٰفِرُونَ इन्कार करने वाले हैं kāfirūna
इन्कार करने वाले हैं
١٤ (14)
(14)
जब उनके पास रसूल उनके आगे से तथा उनके पीछे से आए1 (और कहा) कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो। तो उन्होंने कहा : यदि हमारा पालनहार चाहता, तो किसी फ़रिश्ते को उतार देता।2 अतः जिस बात के साथ तुम भेजे गए हो, हम उसका इनकार करते हैं।
४१:१५
فَأَمَّا तो रहे fa-ammā
तो रहे
عَادٌۭ आद ʿādun
आद
فَٱسْتَكْبَرُوا۟ पस उन्होंने तकब्बुर किया fa-is'takbarū
पस उन्होंने तकब्बुर किया
فِى in
in
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में l-arḍi
ज़मीन में
بِغَيْرِ बग़ैर bighayri
बग़ैर
ٱلْحَقِّ हक़ के l-ḥaqi
हक़ के
وَقَالُوا۟ और उन्होंने कहा waqālū
और उन्होंने कहा
مَنْ कौन man
कौन
أَشَدُّ ज़्यादा शदीद है ashaddu
ज़्यादा शदीद है
مِنَّا हमसे minnā
हमसे
قُوَّةً ۖ क़ुव्वत में quwwatan
क़ुव्वत में
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा
أَنَّ बेशक anna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
ٱلَّذِى वो है जिसने alladhī
वो है जिसने
خَلَقَهُمْ पैदा किया उन्हें khalaqahum
पैदा किया उन्हें
هُوَ वो huwa
वो
أَشَدُّ ज़्यादा शदीद है ashaddu
ज़्यादा शदीद है
مِنْهُمْ उनसे min'hum
उनसे
قُوَّةًۭ ۖ क़ुव्वत में quwwatan
क़ुव्वत में
وَكَانُوا۟ और थे वो wakānū
और थे वो
بِـَٔايَـٰتِنَا हमारी आयात का biāyātinā
हमारी आयात का
يَجْحَدُونَ वो इन्कार करते yajḥadūna
वो इन्कार करते
١٥ (15)
(15)
फिर रहे आद समुदाय के लोग, तो उन्होंने धरती में नाहक़ अभिमान किया तथा कहने लगे : कौन शक्ति में हमसे बढ़कर है? क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह, जिसने उनको पैदा किया, वह शक्ति में उनसे बहुत बढ़कर है?! तथा वे हमारी आयतों का इनकार करते रहे।
४१:१६
فَأَرْسَلْنَا तो भेजी हमने fa-arsalnā
तो भेजी हमने
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
رِيحًۭا एक हवा rīḥan
एक हवा
صَرْصَرًۭا तुंद व तेज़ ṣarṣaran
तुंद व तेज़
فِىٓ in
in
أَيَّامٍۢ (the) days ayyāmin
(the) days
نَّحِسَاتٍۢ नहूसत के दिनों में naḥisātin
नहूसत के दिनों में
لِّنُذِيقَهُمْ ताकि हम चखाऐं उन्हें linudhīqahum
ताकि हम चखाऐं उन्हें
عَذَابَ अज़ाब ʿadhāba
अज़ाब
ٱلْخِزْىِ रुस्वाई का l-khiz'yi
रुस्वाई का
فِى in
in
ٱلْحَيَوٰةِ ज़िन्दगी में l-ḥayati
ज़िन्दगी में
ٱلدُّنْيَا ۖ दुनिया की l-dun'yā
दुनिया की
وَلَعَذَابُ और यक़ीनन अज़ाब walaʿadhābu
और यक़ीनन अज़ाब
ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत का l-ākhirati
आख़िरत का
أَخْزَىٰ ۖ ज़्यादा रुस्वाकुन है akhzā
ज़्यादा रुस्वाकुन है
وَهُمْ और वो wahum
और वो
لَا will not be helped
will not be helped
يُنصَرُونَ ना वो मदद किए जाऐंगे yunṣarūna
ना वो मदद किए जाऐंगे
١٦ (16)
(16)
अंततः, हमने कुछ अशुभ दिनों में उनपर प्रचंड वायु भेज दी। ताकि हम उन्हें सांसारिक जीवन में अपमानकारी यातना चखाएँ और आख़िरत (परलोक) की यातना तो और अधिक अपमानकारी है। तथा उन्हें कोई सहायता नहीं दी जाएगी।
४१:१७
وَأَمَّا और रहे wa-ammā
और रहे
ثَمُودُ समूद thamūdu
समूद
فَهَدَيْنَـٰهُمْ तो हिदायत दी हमने उन्हें fahadaynāhum
तो हिदायत दी हमने उन्हें
فَٱسْتَحَبُّوا۟ तो उन्होंने पसंद किया fa-is'taḥabbū
तो उन्होंने पसंद किया
ٱلْعَمَىٰ अंधेपन को l-ʿamā
अंधेपन को
عَلَى over ʿalā
over
ٱلْهُدَىٰ हिदायत पर l-hudā
हिदायत पर
فَأَخَذَتْهُمْ तो पकड़ लिया उन्हें fa-akhadhathum
तो पकड़ लिया उन्हें
صَـٰعِقَةُ बिजली की कड़क ने ṣāʿiqatu
बिजली की कड़क ने
ٱلْعَذَابِ (of) the punishment l-ʿadhābi
(of) the punishment
ٱلْهُونِ ज़िल्लत वाले अज़ाब की l-hūni
ज़िल्लत वाले अज़ाब की
بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَكْسِبُونَ वो कमाई करते yaksibūna
वो कमाई करते
١٧ (17)
(17)
और रहे समूद समुदाय के लोग, तो हमने उन्हें सीधा मार्ग दिखाया, परंतु उन्होंने मार्गदर्शन की अपेक्षा अंधेपन को पसंद किया। अंततः उन्हें अपमानकारी यातना की कड़क ने पकड़ लिया, उसके कारण जो वे कमा रहे थे।
४१:१८
وَنَجَّيْنَا और निजात दी हमने wanajjaynā
और निजात दी हमने
ٱلَّذِينَ उन्हें जो alladhīna
उन्हें जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
وَكَانُوا۟ और थे वो wakānū
और थे वो
يَتَّقُونَ वो डरते yattaqūna
वो डरते
١٨ (18)
(18)
तथा हमने उन लोगों को बचा लिया, जो ईमान लाए और वे डरते थे।
४१:१९
وَيَوْمَ और जिस दिन wayawma
और जिस दिन
يُحْشَرُ इकट्ठे किए जाऐंगे yuḥ'sharu
इकट्ठे किए जाऐंगे
أَعْدَآءُ दुश्मन aʿdāu
दुश्मन
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
إِلَى to ilā
to
ٱلنَّارِ तरफ़ आग के l-nāri
तरफ़ आग के
فَهُمْ तो वो fahum
तो वो
يُوزَعُونَ वो रोके जाऐंगे yūzaʿūna
वो रोके जाऐंगे
١٩ (19)
(19)
और जिस दिन अल्लाह के शत्रुओं को एकत्रित कर जहन्नम की ओर लाया जाएगा, तो उन्हें पंक्तिबद्ध कर दिया जाएगा।
४१:२०
حَتَّىٰٓ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
إِذَا when idhā
when
مَا जैसे ही
जैसे ही
جَآءُوهَا वो आऐंगे उसके पास jāūhā
वो आऐंगे उसके पास
شَهِدَ गवाही देंगे shahida
गवाही देंगे
عَلَيْهِمْ ख़िलाफ़ उनके ʿalayhim
ख़िलाफ़ उनके
سَمْعُهُمْ कान उनके samʿuhum
कान उनके
وَأَبْصَـٰرُهُمْ और निगाहें उनकी wa-abṣāruhum
और निगाहें उनकी
وَجُلُودُهُم और जिल्दें उनकी wajulūduhum
और जिल्दें उनकी
بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَعْمَلُونَ वो अमल करते yaʿmalūna
वो अमल करते
٢٠ (20)
(20)
यहाँ तक कि जब वे उस (जहन्नम) के पास आ जाएँगे, तो उनके कान तथा उनकी आँखें और उनकी खालें उनके विरुद्ध उन कर्मों की गवाही देंगी, जो वे किया करते थे।
४१:२१
وَقَالُوا۟ और वो कहेंगे waqālū
और वो कहेंगे
لِجُلُودِهِمْ अपनी जिल्दों को lijulūdihim
अपनी जिल्दों को
لِمَ क्यों lima
क्यों
شَهِدتُّمْ गवाही दी तुमने shahidttum
गवाही दी तुमने
عَلَيْنَا ۖ ख़िलाफ़ हमारे ʿalaynā
ख़िलाफ़ हमारे
قَالُوٓا۟ वो कहेंगी qālū
वो कहेंगी
أَنطَقَنَا बुलवाया हमें anṭaqanā
बुलवाया हमें
ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने
ٱلَّذِىٓ वो जिसने alladhī
वो जिसने
أَنطَقَ बुलवाया anṭaqa
बुलवाया
كُلَّ हर kulla
हर
شَىْءٍۢ चीज़ को shayin
चीज़ को
وَهُوَ और वो ही है wahuwa
और वो ही है
خَلَقَكُمْ जिसने पैदा किया तुम्हें khalaqakum
जिसने पैदा किया तुम्हें
أَوَّلَ पहली awwala
पहली
مَرَّةٍۢ बार marratin
बार
وَإِلَيْهِ और तरफ़ उसी के wa-ilayhi
और तरफ़ उसी के
تُرْجَعُونَ तुम लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम लौटाए जाओगे
٢١ (21)
(21)
और वे अपनी खालों से कहेंगे : तुमने हमारे विरुद्ध क्यों गवाही दी? तो वे उत्तर देंगी : हमें उसी अल्लाह ने बोलने की शक्ति प्रदान की, जिसने प्रत्येक वस्तु को बोलने की शक्ति दी है। तथा उसी ने तुम्हें प्रथम बार पैदा किया और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
४१:२२
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम
تَسْتَتِرُونَ तुम छुपते (इस बात से) tastatirūna
तुम छुपते (इस बात से)
أَن कि an
कि
يَشْهَدَ गवाही देंगे yashhada
गवाही देंगे
عَلَيْكُمْ तुम पर ʿalaykum
तुम पर
سَمْعُكُمْ कान तुम्हारे samʿukum
कान तुम्हारे
وَلَآ और ना walā
और ना
أَبْصَـٰرُكُمْ आँखें तुम्हारी abṣārukum
आँखें तुम्हारी
وَلَا और ना walā
और ना
جُلُودُكُمْ जिल्दें तुम्हारी julūdukum
जिल्दें तुम्हारी
وَلَـٰكِن और लेकिन walākin
और लेकिन
ظَنَنتُمْ गुमान किया तुमने ẓanantum
गुमान किया तुमने
أَنَّ बेशक anna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
لَا (does) not
(does) not
يَعْلَمُ नहीं वो जानता yaʿlamu
नहीं वो जानता
كَثِيرًۭا बहुत कुछ kathīran
बहुत कुछ
مِّمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो
تَعْمَلُونَ तुम अमल करते हो taʿmalūna
तुम अमल करते हो
٢٢ (22)
(22)
तथा तुम (पाप करते समय) छिपते1 भी नहीं थे कि कहीं तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें और तुम्हारी खालें तुम्हारे विरुद्ध गवाही न दे दें। बल्कि, तुम यह समझते रहे कि अल्लाह उनमें से अधिकतर बातों को जानता ही नहीं, जो तुम करते हो।
४१:२३
وَذَٰلِكُمْ और ये wadhālikum
और ये
ظَنُّكُمُ गुमान तुम्हारा ẓannukumu
गुमान तुम्हारा
ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो
ظَنَنتُم गुमान किया तुमने ẓanantum
गुमान किया तुमने
بِرَبِّكُمْ अपने रब के बारे में birabbikum
अपने रब के बारे में
أَرْدَىٰكُمْ उसने हलाक कर दिया तुम्हें ardākum
उसने हलाक कर दिया तुम्हें
فَأَصْبَحْتُم तो हो गए तुम fa-aṣbaḥtum
तो हो गए तुम
مِّنَ of mina
of
ٱلْخَـٰسِرِينَ ख़सारा पाने वालों में से l-khāsirīna
ख़सारा पाने वालों में से
٢٣ (23)
(23)
तुम्हारी इसी दुर्भावना ने, जो तुमने अपने पालनहार के प्रति रखा, तुम्हें विनष्ट कर दिया और तुम घाटा उठाने वालों में से हो गए।
४१:२४
فَإِن फिर अगर fa-in
फिर अगर
يَصْبِرُوا۟ वो सब्र करें yaṣbirū
वो सब्र करें
فَٱلنَّارُ तो आग fal-nāru
तो आग
مَثْوًۭى ठिकाना है mathwan
ठिकाना है
لَّهُمْ ۖ उनके लिए lahum
उनके लिए
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
يَسْتَعْتِبُوا۟ वो माफ़ी तलब करेंगे yastaʿtibū
वो माफ़ी तलब करेंगे
فَمَا तो नहीं famā
तो नहीं
هُم वो hum
वो
مِّنَ (will be) of mina
(will be) of
ٱلْمُعْتَبِينَ उज़्र क़ुबूल किए जाने वालों में से l-muʿ'tabīna
उज़्र क़ुबूल किए जाने वालों में से
٢٤ (24)
(24)
अब यदि वे धैर्य रखें, तो भी जहन्नम ही उनका ठिकाना है। और यदि वे क्षमा माँगें, तो भी वे क्षमा नहीं किए जाएँगे।
४१:२५
۞ وَقَيَّضْنَا और मुक़र्रर किए हमने waqayyaḍnā
और मुक़र्रर किए हमने
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
قُرَنَآءَ कुछ साथी quranāa
कुछ साथी
فَزَيَّنُوا۟ तो उन्होंने ख़ुशनुमा बना दिया fazayyanū
तो उन्होंने ख़ुशनुमा बना दिया
لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए
مَّا जो कुछ
जो कुछ
بَيْنَ (was) before them bayna
(was) before them
أَيْدِيهِمْ उनके सामने था aydīhim
उनके सामने था
وَمَا और जो कुछ wamā
और जो कुछ
خَلْفَهُمْ उनके पीछे था khalfahum
उनके पीछे था
وَحَقَّ और साबित हो गई waḥaqqa
और साबित हो गई
عَلَيْهِمُ उन पर ʿalayhimu
उन पर
ٱلْقَوْلُ बात l-qawlu
बात
فِىٓ among
among
أُمَمٍۢ उम्मतों में umamin
उम्मतों में
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
خَلَتْ जो गुज़र चुकीं khalat
जो गुज़र चुकीं
مِن before them min
before them
قَبْلِهِم उनसे पहले qablihim
उनसे पहले
مِّنَ of mina
of
ٱلْجِنِّ जिन्नों में से l-jini
जिन्नों में से
وَٱلْإِنسِ ۖ और इन्सानों में से wal-insi
और इन्सानों में से
إِنَّهُمْ बेशक वो innahum
बेशक वो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
خَـٰسِرِينَ ख़सारा पाने वाले khāsirīna
ख़सारा पाने वाले
٢٥ (25)
(25)
और हमने उनके लिए कुछ साथी नियुक्त कर दिए, तो उन्होंने उनके अगले और पिछले कामों को उनके लिए शोभित बनाकर पेश किया। तथा उनपर भी जिन्नों और इनसानों के उन समूहों के साथ, जो उनसे पहले गुज़र चुके थे, अल्लाह (की यातना) का वादा सिद्ध हो गया। निश्चय ही वे घाटा उठाने वाले थे।
४१:२६
وَقَالَ और कहा waqāla
और कहा
ٱلَّذِينَ उन लोगों ने जिन्होंने alladhīna
उन लोगों ने जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
لَا (Do) not
(Do) not
تَسْمَعُوا۟ ना तुम सुनो tasmaʿū
ना तुम सुनो
لِهَـٰذَا इस lihādhā
इस
ٱلْقُرْءَانِ क़ुरआन को l-qur'āni
क़ुरआन को
وَٱلْغَوْا۟ और ग़ुल मचाओ wal-ghaw
और ग़ुल मचाओ
فِيهِ उसमें fīhi
उसमें
لَعَلَّكُمْ ताकि तुम laʿallakum
ताकि तुम
تَغْلِبُونَ तुम ग़ालिब आ जाओ taghlibūna
तुम ग़ालिब आ जाओ
٢٦ (26)
(26)
तथा काफ़िरों ने कहा1 कि इस क़ुरआन को न सुनो और (जब पढ़ा जाए तो) इसमें शोर करो। ताकि तुम प्रभावशाली रहो।
४१:२७
فَلَنُذِيقَنَّ पस अलबत्ता हम ज़रूर चखाऐंगे falanudhīqanna
पस अलबत्ता हम ज़रूर चखाऐंगे
ٱلَّذِينَ उनको जिन्होंने alladhīna
उनको जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
عَذَابًۭا अज़ाब ʿadhāban
अज़ाब
شَدِيدًۭا शदीद shadīdan
शदीद
وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ और अलबत्ता हम ज़रूर बदला देंगे उन्हें walanajziyannahum
और अलबत्ता हम ज़रूर बदला देंगे उन्हें
أَسْوَأَ बदतरीन aswa-a
बदतरीन
ٱلَّذِى उसका जो alladhī
उसका जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَعْمَلُونَ वो अमल करते yaʿmalūna
वो अमल करते
٢٧ (27)
(27)
अतः हम अवश्य ही उन लोगों को जो काफ़िर हो गए, कठोर यातना का मज़ा चखाएँगे, तथा निश्चय ही हम उन्हें उन दुष्कर्मों का बदला अवश्य देंगे, जो वे किया करते थे।
४१:२८
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
جَزَآءُ बदला है jazāu
बदला है
أَعْدَآءِ दुश्मनों का aʿdāi
दुश्मनों का
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلنَّارُ ۖ आग का l-nāru
आग का
لَهُمْ उनके लिए है lahum
उनके लिए है
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
دَارُ घर dāru
घर
ٱلْخُلْدِ ۖ हमेशगी का l-khul'di
हमेशगी का
جَزَآءًۢ बदला है jazāan
बदला है
بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
بِـَٔايَـٰتِنَا हमारी आयात का biāyātinā
हमारी आयात का
يَجْحَدُونَ वो इन्कार करते yajḥadūna
वो इन्कार करते
٢٨ (28)
(28)
यह अल्लाह के शत्रुओं का प्रतिकार जहन्नम है। उनके लिए उसी में स्थायी घर होगा। यह उसका बदला है, जो वे हमारी अयतों का इनकार किया करते थे।
४१:२९
وَقَالَ और कहेंगे waqāla
और कहेंगे
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
رَبَّنَآ ऐ हमारे रब rabbanā
ऐ हमारे रब
أَرِنَا दिखा हमें arinā
दिखा हमें
ٱلَّذَيْنِ वो दोनों जिन्होंने alladhayni
वो दोनों जिन्होंने
أَضَلَّانَا भटकाया हमें aḍallānā
भटकाया हमें
مِنَ of mina
of
ٱلْجِنِّ जिन्नों में से l-jini
जिन्नों में से
وَٱلْإِنسِ और इन्सानों में से wal-insi
और इन्सानों में से
نَجْعَلْهُمَا हम कर दें उन दोनों को najʿalhumā
हम कर दें उन दोनों को
تَحْتَ नीचे taḥta
नीचे
أَقْدَامِنَا अपने क़दमों के aqdāminā
अपने क़दमों के
لِيَكُونَا ताकि वो दोनों हो जाऐं liyakūnā
ताकि वो दोनों हो जाऐं
مِنَ of mina
of
ٱلْأَسْفَلِينَ सबसे निचलों में से l-asfalīna
सबसे निचलों में से
٢٩ (29)
(29)
तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहर! हमें जिन्नों और इनसानों में से वे लोग दिखा दे, जिन्होंने हमें गुमराह किया था, हम उन्हें अपने पैरों तले रौंद डालें। ताकि वे सबसे निचले लोगों में से हो जाएँ।
४१:३०
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
قَالُوا۟ कहा qālū
कहा
رَبُّنَا रब हमारा rabbunā
रब हमारा
ٱللَّهُ अल्लाह है l-lahu
अल्लाह है
ثُمَّ फिर thumma
फिर
ٱسْتَقَـٰمُوا۟ उन्होंने इस्तिक़ामत इख़्तियार की is'taqāmū
उन्होंने इस्तिक़ामत इख़्तियार की
تَتَنَزَّلُ उतरते हैं tatanazzalu
उतरते हैं
عَلَيْهِمُ उन पर ʿalayhimu
उन पर
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ फ़रिश्ते l-malāikatu
फ़रिश्ते
أَلَّا कि ना allā
कि ना
تَخَافُوا۟ तुम डरो takhāfū
तुम डरो
وَلَا और ना walā
और ना
تَحْزَنُوا۟ तुम ग़म करो taḥzanū
तुम ग़म करो
وَأَبْشِرُوا۟ और ख़ुश हो जाओ wa-abshirū
और ख़ुश हो जाओ
بِٱلْجَنَّةِ साथ जन्नत के bil-janati
साथ जन्नत के
ٱلَّتِى वो जो allatī
वो जो
كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम
تُوعَدُونَ तुम वादा दिए जाते tūʿadūna
तुम वादा दिए जाते
٣٠ (30)
(30)
निःसंदेह जिन लोगों ने कहा : हमारा पालनहार केवल अल्लाह है, फिर उसपर मज़बूती से जमे रहे1, उनपर फ़रिश्ते उतरते2 हैं कि भय न करो और न शोकाकुल हो तथा उस जन्नत से खुश हो जाओ, जिसका तुमसे वादा किया जाता था।
४१:३१
نَحْنُ हम naḥnu
हम
أَوْلِيَآؤُكُمْ दोस्त हैं तुम्हारे awliyāukum
दोस्त हैं तुम्हारे
فِى in
in
ٱلْحَيَوٰةِ ज़िन्दगी में l-ḥayati
ज़िन्दगी में
ٱلدُّنْيَا दुनिया की l-dun'yā
दुनिया की
وَفِى and in wafī
and in
ٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ और आख़िरत में l-ākhirati
और आख़िरत में
وَلَكُمْ और तुम्हारे लिए walakum
और तुम्हारे लिए
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
مَا वो है जो
वो है जो
تَشْتَهِىٓ चाहेंगे tashtahī
चाहेंगे
أَنفُسُكُمْ नफ़्स तुम्हारे anfusukum
नफ़्स तुम्हारे
وَلَكُمْ और तुम्हारे लिए walakum
और तुम्हारे लिए
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
مَا वो है जो
वो है जो
تَدَّعُونَ तुम तलब करोगे taddaʿūna
तुम तलब करोगे
٣١ (31)
(31)
हम सांसारिक जीवन में भी तुम्हारे सहायक हैं तथा आख़िरत में भी,और तुम्हारे लिए उस (जन्नत) में वह कुछ है, जो तुम्हारे दिल चाहेंगे तथा उसमें तुम्हारे लिए वह कुछ है, जिसकी तुम माँग करोगे।
४१:३२
نُزُلًۭا महमानी है nuzulan
महमानी है
مِّنْ from min
from
غَفُورٍۢ बहुत बख़्शने वाले की तरफ़ से ghafūrin
बहुत बख़्शने वाले की तरफ़ से
رَّحِيمٍۢ निहायत रहम करने वाले की raḥīmin
निहायत रहम करने वाले की
٣٢ (32)
(32)
(यह) अति क्षमाशील, असीम दयावान् की ओर से आतिथ्य है।
४१:३३
وَمَنْ और कौन waman
और कौन
أَحْسَنُ ज़्यादा अच्छा है aḥsanu
ज़्यादा अच्छा है
قَوْلًۭا बात में qawlan
बात में
مِّمَّن उससे जो mimman
उससे जो
دَعَآ बुलाए daʿā
बुलाए
إِلَى to ilā
to
ٱللَّهِ तरफ़ अल्लाह के l-lahi
तरफ़ अल्लाह के
وَعَمِلَ और वो अमल करे waʿamila
और वो अमल करे
صَـٰلِحًۭا नेक ṣāliḥan
नेक
وَقَالَ और वो कहे waqāla
और वो कहे
إِنَّنِى बेशक मैं innanī
बेशक मैं
مِنَ of mina
of
ٱلْمُسْلِمِينَ मुसलमानों में से हूँ l-mus'limīna
मुसलमानों में से हूँ
٣٣ (33)
(33)
और उस व्यक्ति से अच्छी बात किसकी हो सकती है, जिसने अल्लाह की ओर बुलाया तथा सत्कर्म किया और कहा : निःसंदेह मैं मुसलमानों (आज्ञाकारियों) में से हूँ।
४१:३४
وَلَا और नहीं walā
और नहीं
تَسْتَوِى बराबर हो सकती tastawī
बराबर हो सकती
ٱلْحَسَنَةُ नेकी l-ḥasanatu
नेकी
وَلَا और ना walā
और ना
ٱلسَّيِّئَةُ ۚ बुराई l-sayi-atu
बुराई
ٱدْفَعْ दूर कीजिए id'faʿ
दूर कीजिए
بِٱلَّتِى साथ उस (तरीक़े )के जो bi-allatī
साथ उस (तरीक़े )के जो
هِىَ वो hiya
वो
أَحْسَنُ सबसे अच्छा है aḥsanu
सबसे अच्छा है
فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक
ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो
بَيْنَكَ दर्मियान आपके baynaka
दर्मियान आपके
وَبَيْنَهُۥ और दर्मियान उसके wabaynahu
और दर्मियान उसके
عَدَٰوَةٌۭ अदावत है ʿadāwatun
अदावत है
كَأَنَّهُۥ गोया कि वो ka-annahu
गोया कि वो
وَلِىٌّ दोस्त है waliyyun
दोस्त है
حَمِيمٌۭ निहायत गहरा ḥamīmun
निहायत गहरा
٣٤ (34)
(34)
भलाई और बुराई बराबर नहीं हो सकते। आप बुराई को ऐसे तरीक़े से दूर करें जो सर्वोत्तम हो। तो सहसा वह व्यक्ति जिसके और आपके बीच बैर है, ऐसा हो जाएगा मानो वह हार्दिक मित्र है।1
४१:३५
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
يُلَقَّىٰهَآ डाला जाता उसे yulaqqāhā
डाला जाता उसे
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلَّذِينَ उन पर जिन्होंने alladhīna
उन पर जिन्होंने
صَبَرُوا۟ सब्र किया ṣabarū
सब्र किया
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
يُلَقَّىٰهَآ डाला जाता उसे yulaqqāhā
डाला जाता उसे
إِلَّا मगर illā
मगर
ذُو (to the) owner dhū
(to the) owner
حَظٍّ (of) fortune ḥaẓẓin
(of) fortune
عَظِيمٍۢ बड़े नसीब वाले पर ʿaẓīmin
बड़े नसीब वाले पर
٣٥ (35)
(35)
और यह गुण उन्हीं लोगों को प्राप्त होता है, जो धैर्य से काम लेते हैं तथा यह उसी को प्राप्त होता है, जो बड़ा भाग्यशाली हो।
४१:३६
وَإِمَّا और अगर wa-immā
और अगर
يَنزَغَنَّكَ वसवसा आए आपको yanzaghannaka
वसवसा आए आपको
مِنَ from mina
from
ٱلشَّيْطَـٰنِ शैतान की तरफ़ से l-shayṭāni
शैतान की तरफ़ से
نَزْغٌۭ कोई वसवसा nazghun
कोई वसवसा
فَٱسْتَعِذْ पस पनाह माँग लीजिए fa-is'taʿidh
पस पनाह माँग लीजिए
بِٱللَّهِ ۖ अल्लाह की bil-lahi
अल्लाह की
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلسَّمِيعُ ख़ूब सुनने वाला l-samīʿu
ख़ूब सुनने वाला
ٱلْعَلِيمُ ख़ूब जानने वाला l-ʿalīmu
ख़ूब जानने वाला
٣٦ (36)
(36)
और यदि शैतान आपको उकसाए, तो अल्लाह से शरण माँगिए। निःसंदेह वह सब कुछ सुनने वाला, जानने वाला है।
४१:३७
وَمِنْ And of wamin
And of
ءَايَـٰتِهِ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
ٱلَّيْلُ रात al-laylu
रात
وَٱلنَّهَارُ और दिन wal-nahāru
और दिन
وَٱلشَّمْسُ और सूरज wal-shamsu
और सूरज
وَٱلْقَمَرُ ۚ और चाँद wal-qamaru
और चाँद
لَا (Do) not
(Do) not
تَسْجُدُوا۟ ना तुम सजदा करो tasjudū
ना तुम सजदा करो
لِلشَّمْسِ सूरज को lilshamsi
सूरज को
وَلَا और ना walā
और ना
لِلْقَمَرِ चाँद को lil'qamari
चाँद को
وَٱسْجُدُوا۟ बल्कि सजदा करो wa-us'judū
बल्कि सजदा करो
لِلَّهِ अल्लाह ही को lillahi
अल्लाह ही को
ٱلَّذِى वो जिस ने alladhī
वो जिस ने
خَلَقَهُنَّ पैदा किया उन्हें khalaqahunna
पैदा किया उन्हें
إِن अगर in
अगर
كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम
إِيَّاهُ सिर्फ़ उसी की iyyāhu
सिर्फ़ उसी की
تَعْبُدُونَ तुम इबादत करते taʿbudūna
तुम इबादत करते
٣٧ (37)
(37)
तथा उसकी निशानियों में से रात और दिन तथा सूरज और चाँद हैं। तुम न तो सूरज को सजदा करो और न चाँद को, और उस अल्लाह को सजदा करो, जिसने उन्हें पैदा किया है, यदि तुम उसी (अल्लाह) की इबादत करते हो।1
४१:३८
فَإِنِ फिर अगर fa-ini
फिर अगर
ٱسْتَكْبَرُوا۟ वो तकब्बुर करें is'takbarū
वो तकब्बुर करें
فَٱلَّذِينَ तो वो जो fa-alladhīna
तो वो जो
عِندَ पास हैं ʿinda
पास हैं
رَبِّكَ आपके रब के rabbika
आपके रब के
يُسَبِّحُونَ वो तस्बीह करते हैं yusabbiḥūna
वो तस्बीह करते हैं
لَهُۥ उसकी lahu
उसकी
بِٱلَّيْلِ रात bi-al-layli
रात
وَٱلنَّهَارِ और दिन wal-nahāri
और दिन
وَهُمْ और वो wahum
और वो
لَا (do) not
(do) not
يَسْـَٔمُونَ ۩ नहीं वो उकताते yasamūna
नहीं वो उकताते
٣٨ (38)
(38)
फिर यदि वे अभिमान करें, तो जो (फ़रिश्ते) आपके पालनहार के पास हैं, वे रात दिन उसकी पवित्रता का वर्णन करते रहते हैं, और वे थकते नहीं हैं।
४१:३९
وَمِنْ And among wamin
And among
ءَايَـٰتِهِۦٓ और उसकी निशानियों में से है āyātihi
और उसकी निशानियों में से है
أَنَّكَ बेशक आप annaka
बेशक आप
تَرَى आप देखते हैं tarā
आप देखते हैं
ٱلْأَرْضَ ज़मीन को l-arḍa
ज़मीन को
خَـٰشِعَةًۭ दबी हुई khāshiʿatan
दबी हुई
فَإِذَآ फिर जब fa-idhā
फिर जब
أَنزَلْنَا उतारते हैं हम anzalnā
उतारते हैं हम
عَلَيْهَا उस पर ʿalayhā
उस पर
ٱلْمَآءَ पानी l-māa
पानी
ٱهْتَزَّتْ वो तरो ताज़ा हो जाती है ih'tazzat
वो तरो ताज़ा हो जाती है
وَرَبَتْ ۚ और वो उभर आती है warabat
और वो उभर आती है
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِىٓ वो जिसने alladhī
वो जिसने
أَحْيَاهَا ज़िन्दा किया उसे aḥyāhā
ज़िन्दा किया उसे
لَمُحْىِ अलबत्ता ज़िन्दा करने वाला है lamuḥ'yī
अलबत्ता ज़िन्दा करने वाला है
ٱلْمَوْتَىٰٓ ۚ मुर्दों को l-mawtā
मुर्दों को
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
كُلِّ हर kulli
हर
شَىْءٍۢ चीज़ के shayin
चीज़ के
قَدِيرٌ ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है qadīrun
ख़ूब क़ुदरत रखने वाला है
٣٩ (39)
(39)
तथा उसकी निशानियों में से है कि आप धरती को सूखी हुई (बंजर) देखते हैं। फिर जब हम उसपर बारिश बरसाते हैं, तो वह हरित हो जाती है और बढ़ने लगती है। निःसंदेह जिस (अल्लाह) ने उसे जीवित किया, वह मुर्दों को अवश्य जीवित करने वाला है। निःसंदेह वह हर चीज़ पर समार्थ्यवान् है।
४१:४०
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जो alladhīna
वो जो
يُلْحِدُونَ इल्हाद करते हैं yul'ḥidūna
इल्हाद करते हैं
فِىٓ [in]
[in]
ءَايَـٰتِنَا हमारी आयात में āyātinā
हमारी आयात में
لَا (are) not
(are) not
يَخْفَوْنَ नहीं वो छुप सकते yakhfawna
नहीं वो छुप सकते
عَلَيْنَآ ۗ हम पर ʿalaynā
हम पर
أَفَمَن क्या फिर वो जो afaman
क्या फिर वो जो
يُلْقَىٰ डाला जाएगा yul'qā
डाला जाएगा
فِى in
in
ٱلنَّارِ आग में l-nāri
आग में
خَيْرٌ बेहतर है khayrun
बेहतर है
أَم या am
या
مَّن वो जो man
वो जो
يَأْتِىٓ आएगा yatī
आएगा
ءَامِنًۭا अमन में āminan
अमन में
يَوْمَ दिन yawma
दिन
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ क़यामत के l-qiyāmati
क़यामत के
ٱعْمَلُوا۟ अमल करे iʿ'malū
अमल करे
مَا जो
जो
شِئْتُمْ ۖ चाहो तुम shi'tum
चाहो तुम
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
بِمَا उसे जो bimā
उसे जो
تَعْمَلُونَ तुम अमल करते हो taʿmalūna
तुम अमल करते हो
بَصِيرٌ ख़ूब देखने वाला है baṣīrun
ख़ूब देखने वाला है
٤٠ (40)
(40)
निःसंदेह जो लोग हमारी आयतों में टेढ़ापन अपनाते हैं, वे हमसे छिपे हुए नहीं हैं। तो क्या जो व्यक्ति आग में डाला जाएगा, वह उत्तम है अथवा जो क़ियामत के दिन निश्चिंत होकर आएगा? तुम जो चाहो करो। निःसंदेह, तुम जो कुछ करते हो, वह उसे ख़ूब देखने वाला है।1
४१:४१
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
بِٱلذِّكْرِ ज़िक्र (क़ुरआन)का bil-dhik'ri
ज़िक्र (क़ुरआन)का
لَمَّا जब lammā
जब
جَآءَهُمْ ۖ वो आया उनके पास jāahum
वो आया उनके पास
وَإِنَّهُۥ और बेशक वो wa-innahu
और बेशक वो
لَكِتَـٰبٌ अलबत्ता एक किताब है lakitābun
अलबत्ता एक किताब है
عَزِيزٌۭ बहुत ज़बरदस्त ʿazīzun
बहुत ज़बरदस्त
٤١ (41)
(41)
निःसंदेह जिन लोगों ने इस ज़िक्र (क़ुरआन) का इनकार किया, जब वह उनके पास आया, (वे विनष्ट होने वाले हैं)। और निःसंदेह यह एक प्रभुत्वशाली पुस्तक है।
४१:४२
لَّا Not
Not
يَأْتِيهِ नहीं आ सकता उस पर yatīhi
नहीं आ सकता उस पर
ٱلْبَـٰطِلُ बातिल l-bāṭilu
बातिल
مِنۢ from min
from
بَيْنِ before it bayni
before it
يَدَيْهِ उसके सामने से yadayhi
उसके सामने से
وَلَا और ना walā
और ना
مِنْ from min
from
خَلْفِهِۦ ۖ उसके पीछे से khalfihi
उसके पीछे से
تَنزِيلٌۭ नाज़िल करदा है tanzīlun
नाज़िल करदा है
مِّنْ from min
from
حَكِيمٍ हिकमत वाले की तरफ़ से ḥakīmin
हिकमत वाले की तरफ़ से
حَمِيدٍۢ बहुत तारीफ़ ḥamīdin
बहुत तारीफ़
٤٢ (42)
(42)
इसके पास झूठ न इसके आगे से आ सकता है और न इसके पीछे से। यह पूर्ण हिकमत वाले, सर्व प्रशंसित (अल्लाह) की ओर से अवतरित है।
४१:४३
مَّا नहीं
नहीं
يُقَالُ कहा जाता yuqālu
कहा जाता
لَكَ आपसे laka
आपसे
إِلَّا मगर illā
मगर
مَا वो जो
वो जो
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
قِيلَ कहा गया qīla
कहा गया
لِلرُّسُلِ रसूलों से lilrrusuli
रसूलों से
مِن before you min
before you
قَبْلِكَ ۚ आपसे पहले qablika
आपसे पहले
إِنَّ बेशक inna
बेशक
رَبَّكَ रब आपका rabbaka
रब आपका
لَذُو (is) Possessor ladhū
(is) Possessor
مَغْفِرَةٍۢ अलबत्ता बख़्शिश वाला है maghfiratin
अलबत्ता बख़्शिश वाला है
وَذُو and Possessor wadhū
and Possessor
عِقَابٍ और सज़ा देने वाला है ʿiqābin
और सज़ा देने वाला है
أَلِيمٍۢ दर्दनाक alīmin
दर्दनाक
٤٣ (43)
(43)
आपसे वही कहा जा रहा है, जो आपसे पहले के रसूलों से कहा जा चुका है।1 निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय बड़ी क्षमा वाला और बहुत दुःखदायी यातना वाला है।
४१:४४
وَلَوْ और अगर walaw
और अगर
جَعَلْنَـٰهُ बनाते हम उसे jaʿalnāhu
बनाते हम उसे
قُرْءَانًا क़ुरआन qur'ānan
क़ुरआन
أَعْجَمِيًّۭا अजमी aʿjamiyyan
अजमी
لَّقَالُوا۟ अलबत्ता वो कहते laqālū
अलबत्ता वो कहते
لَوْلَا क्यों ना lawlā
क्यों ना
فُصِّلَتْ खोल कर बयान की गईं fuṣṣilat
खोल कर बयान की गईं
ءَايَـٰتُهُۥٓ ۖ आयात उसकी āyātuhu
आयात उसकी
ءَا۬عْجَمِىٌّۭ क्या अजमी (किताब) āʿ'jamiyyun
क्या अजमी (किताब)
وَعَرَبِىٌّۭ ۗ और अर्बी (रसूल) waʿarabiyyun
और अर्बी (रसूल)
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
هُوَ वो huwa
वो
لِلَّذِينَ उनके लिए जो lilladhīna
उनके लिए जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए
هُدًۭى हिदायत hudan
हिदायत
وَشِفَآءٌۭ ۖ और शिफ़ा है washifāon
और शिफ़ा है
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
لَا (do) not
(do) not
يُؤْمِنُونَ नहीं वो ईमान लाए yu'minūna
नहीं वो ईमान लाए
فِىٓ in
in
ءَاذَانِهِمْ उनके कानों में ādhānihim
उनके कानों में
وَقْرٌۭ बोझ है waqrun
बोझ है
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
عَمًى ۚ अंधापन है ʿaman
अंधापन है
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही लोग हैं ulāika
यही लोग हैं
يُنَادَوْنَ जो पुकारे जाते हैं yunādawna
जो पुकारे जाते हैं
مِن from min
from
مَّكَانٍۭ जगह से makānin
जगह से
بَعِيدٍۢ दूर की baʿīdin
दूर की
٤٤ (44)
(44)
और यदि हम इसे ग़ैर अरबी क़ुरआन बनाते, तो वे अवश्य कहते कि इसकी आयतें क्यों नहीं खोलकर बयान की गईं? क्या (पुस्तक) ग़ैर अरबी है और (नबी) अरबी? आप कह दीजिए : वह उन लोगों के लिए जो ईमान लाए, मार्गदर्शन और आरोग्य है, तथा जो लोग ईमान नहीं लाते, उनके कानों में बोझ है और यह उनके हक़ में अंधेपन का कारण है। वे लोग ऐसे हैं जो दूर स्थान से पुकारे जा रहे हैं।1
४१:४५
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
ءَاتَيْنَا दी हमने ātaynā
दी हमने
مُوسَى मूसा को mūsā
मूसा को
ٱلْكِتَـٰبَ किताब l-kitāba
किताब
فَٱخْتُلِفَ पस इख़्तिलाफ़ किया गया fa-ukh'tulifa
पस इख़्तिलाफ़ किया गया
فِيهِ ۗ उसमें fīhi
उसमें
وَلَوْلَا और अगर ना होती walawlā
और अगर ना होती
كَلِمَةٌۭ एक बात kalimatun
एक बात
سَبَقَتْ जो पहले हो चुकी sabaqat
जो पहले हो चुकी
مِن from min
from
رَّبِّكَ आपके रब की तरफ़ से rabbika
आपके रब की तरफ़ से
لَقُضِىَ अलबत्ता फ़ैसला कर दिया जाता laquḍiya
अलबत्ता फ़ैसला कर दिया जाता
بَيْنَهُمْ ۚ दर्मियान उनके baynahum
दर्मियान उनके
وَإِنَّهُمْ और बेशक वो wa-innahum
और बेशक वो
لَفِى surely (are) in lafī
surely (are) in
شَكٍّۢ अलबत्ता शक में हैं shakkin
अलबत्ता शक में हैं
مِّنْهُ उसकी तरफ़ से min'hu
उसकी तरफ़ से
مُرِيبٍۢ बेचैन करने वाले murībin
बेचैन करने वाले
٤٥ (45)
(45)
और हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की। तो उसमें मतभेद किया गया। और यदि आपके पालनहार की ओर से एक बात पहले ही से निर्धारित न होती1, तो उनके बीच अवश्य निर्णय कर दिया गया होता। और निःसंदेह वे उस (कुरआन) के बारे में असमंजस में डाल देने वाले संदेह में पड़े हुए हैं।
४१:४६
مَّنْ जिसने man
जिसने
عَمِلَ अमल किया ʿamila
अमल किया
صَـٰلِحًۭا नेक ṣāliḥan
नेक
فَلِنَفْسِهِۦ ۖ तो अपने ही लिए है falinafsihi
तो अपने ही लिए है
وَمَنْ और जिसने waman
और जिसने
أَسَآءَ बुरा किया asāa
बुरा किया
فَعَلَيْهَا ۗ तो उसी पर है faʿalayhā
तो उसी पर है
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
رَبُّكَ रब आपका rabbuka
रब आपका
بِظَلَّـٰمٍۢ कुछ भी ज़ुल्म करने वाला biẓallāmin
कुछ भी ज़ुल्म करने वाला
لِّلْعَبِيدِ बन्दों पर lil'ʿabīdi
बन्दों पर
٤٦ (46)
(46)
जो व्यक्ति अच्छा कर्म करेगा, तो वह अपने ही लाभ के लिए करेगा और जो बुरा कार्य करेगा, तो उसका दुष्परिणाम उसी पर होगा और आपका पालनहार बंदों पर तनिक भी अत्याचार करने वाला नहीं है।1
४१:४७
۞ إِلَيْهِ उसी की तरफ़ ilayhi
उसी की तरफ़
يُرَدُّ लौटाया जाता है yuraddu
लौटाया जाता है
عِلْمُ इल्म ʿil'mu
इल्म
ٱلسَّاعَةِ ۚ क़यामत का l-sāʿati
क़यामत का
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
تَخْرُجُ निकलता takhruju
निकलता
مِن any min
any
ثَمَرَٰتٍۢ फलों में से ( कोई फल) thamarātin
फलों में से ( कोई फल)
مِّنْ from min
from
أَكْمَامِهَا अपने ग़िलाफ़ों में से akmāmihā
अपने ग़िलाफ़ों में से
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
تَحْمِلُ हामिला होती taḥmilu
हामिला होती
مِنْ any min
any
أُنثَىٰ कोई मादा unthā
कोई मादा
وَلَا और ना walā
और ना
تَضَعُ वो जन्म देती है taḍaʿu
वो जन्म देती है
إِلَّا मगर illā
मगर
بِعِلْمِهِۦ ۚ उसके इल्म से biʿil'mihi
उसके इल्म से
وَيَوْمَ और जिस दिन wayawma
और जिस दिन
يُنَادِيهِمْ वो पुकारेगा उन्हें yunādīhim
वो पुकारेगा उन्हें
أَيْنَ कहाँ हैं ayna
कहाँ हैं
شُرَكَآءِى शरीक मेरे shurakāī
शरीक मेरे
قَالُوٓا۟ वो कहेंगे qālū
वो कहेंगे
ءَاذَنَّـٰكَ अर्ज़ कर चुके हम तुझसे ādhannāka
अर्ज़ कर चुके हम तुझसे
مَا नहीं है
नहीं है
مِنَّا हम में से minnā
हम में से
مِن any min
any
شَهِيدٍۢ कोई गवाह shahīdin
कोई गवाह
٤٧ (47)
(47)
क़ियामत का ज्ञान उसी (अल्लाह) की ओर लौटाया जाता है। तथा जो भी फल अपने गाभों से निकलते हैं और जो भी मादा गर्भ धारण करती है और बच्चा जनती है, सबका उसे ज्ञान है। और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा : कहाँ हैं मेरे साझी? वे कहेंगे : हमने तुझे स्पष्ट कर दिया है कि हममें से कोई (इसकी) गवाही देने वाला नहीं है।
४१:४८
وَضَلَّ और गुम हो जाऐंगे waḍalla
और गुम हो जाऐंगे
عَنْهُم उनसे ʿanhum
उनसे
مَّا जिन्हें
जिन्हें
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يَدْعُونَ वो पुकारते yadʿūna
वो पुकारते
مِن before min
before
قَبْلُ ۖ इससे पहले qablu
इससे पहले
وَظَنُّوا۟ और वो समझ लेंगे waẓannū
और वो समझ लेंगे
مَا नहीं है
नहीं है
لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए
مِّن any min
any
مَّحِيصٍۢ कोई जाए पनाह maḥīṣin
कोई जाए पनाह
٤٨ (48)
(48)
और वे उनसे ग़ायब हो जाएँगे, जिन्हें वे इससे पूर्व पुकारते थे। तथा उन्हें यह विश्वास हो जाएगा कि उनके लिए भागने की कोई जगह नहीं है।
४१:४९
لَّا (Does) not
(Does) not
يَسْـَٔمُ नहीं उक्ताता yasamu
नहीं उक्ताता
ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान
مِن of min
of
دُعَآءِ दुआ से duʿāi
दुआ से
ٱلْخَيْرِ भलाई की l-khayri
भलाई की
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
مَّسَّهُ पहुँचता है उसे massahu
पहुँचता है उसे
ٱلشَّرُّ शर l-sharu
शर
فَيَـُٔوسٌۭ तो निहायत मायूस fayaūsun
तो निहायत मायूस
قَنُوطٌۭ बहुत ना उम्मीद (हो जाता है) qanūṭun
बहुत ना उम्मीद (हो जाता है)
٤٩ (49)
(49)
मनुष्य भलाई माँगने से नहीं थकता और यदि उसे कोई बुराई पहुँच जाए, तो हताश और निराश1 हो जाता है।
४१:५०
وَلَئِنْ और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
أَذَقْنَـٰهُ चखाते हैं हम उसे adhaqnāhu
चखाते हैं हम उसे
رَحْمَةًۭ कोई रहमत raḥmatan
कोई रहमत
مِّنَّا अपनी तरफ़ से minnā
अपनी तरफ़ से
مِنۢ after min
after
بَعْدِ बाद baʿdi
बाद
ضَرَّآءَ तक्लीफ़ के ḍarrāa
तक्लीफ़ के
مَسَّتْهُ जो पहुँचती है उसे massathu
जो पहुँचती है उसे
لَيَقُولَنَّ अलबत्ता वो ज़रूर कहता है layaqūlanna
अलबत्ता वो ज़रूर कहता है
هَـٰذَا ये hādhā
ये
لِى मेरे लिए है
मेरे लिए है
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَظُنُّ मैं गुमान करता aẓunnu
मैं गुमान करता
ٱلسَّاعَةَ क़यामत को l-sāʿata
क़यामत को
قَآئِمَةًۭ क़ायम होने वाली qāimatan
क़ायम होने वाली
وَلَئِن और अलबत्ता अगर wala-in
और अलबत्ता अगर
رُّجِعْتُ लौटाया गया मैं rujiʿ'tu
लौटाया गया मैं
إِلَىٰ to ilā
to
رَبِّىٓ तरफ़ अपने रब के rabbī
तरफ़ अपने रब के
إِنَّ यक़ीनन inna
यक़ीनन
لِى मेरे लिए
मेरे लिए
عِندَهُۥ उसके पास ʿindahu
उसके पास
لَلْحُسْنَىٰ ۚ अलबत्ता भलाई है lalḥus'nā
अलबत्ता भलाई है
فَلَنُنَبِّئَنَّ पस अलबत्ता हम ज़रूर ख़बर देंगे falanunabbi-anna
पस अलबत्ता हम ज़रूर ख़बर देंगे
ٱلَّذِينَ उन्हें जिन्होंने alladhīna
उन्हें जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
بِمَا उसकी जो bimā
उसकी जो
عَمِلُوا۟ उन्होंने अमल किए ʿamilū
उन्होंने अमल किए
وَلَنُذِيقَنَّهُم और अलबत्ता हम ज़रूर चखाऐंगे उन्हें walanudhīqannahum
और अलबत्ता हम ज़रूर चखाऐंगे उन्हें
مِّنْ of min
of
عَذَابٍ a punishment ʿadhābin
a punishment
غَلِيظٍۢ सख़्त अज़ाब में से ghalīẓin
सख़्त अज़ाब में से
٥٠ (50)
(50)
और निश्चय यदि हम उसे, किसी तकलीफ़ के पश्चात् जो उसे पहुँची हो, अपनी रहमत का मज़ा चखाएँ, तो अवश्य कहेगा : यह मेरा हक़ है, और मैं नहीं समझता कि क़ियामत आने वाली है, और यदि मैं अपने पालनहार की ओर लौटाया गया, तो निश्चय ही मेरे लिए उसके पास अवश्य भलाई है। अतः हम निश्चय उन लोगों को जिन्होंने कुफ़्र किया अवश्य बता देंगे जो कुछ उन्होंने किया, तथा निश्चय हम उन्हें एक कठिन यातना अवश्य चखाएँगे।1
४१:५१
وَإِذَآ और जब wa-idhā
और जब
أَنْعَمْنَا इनआम करते हैं हम anʿamnā
इनआम करते हैं हम
عَلَى upon ʿalā
upon
ٱلْإِنسَـٰنِ इन्सान पर l-insāni
इन्सान पर
أَعْرَضَ वो ऐराज़ करता है aʿraḍa
वो ऐराज़ करता है
وَنَـَٔا और वो फेर लेता है wanaā
और वो फेर लेता है
بِجَانِبِهِۦ पहलू अपना bijānibihi
पहलू अपना
وَإِذَا और जब wa-idhā
और जब
مَسَّهُ पहुँचती है उसे massahu
पहुँचती है उसे
ٱلشَّرُّ तक्लीफ़ l-sharu
तक्लीफ़
فَذُو then (he is) full fadhū
then (he is) full
دُعَآءٍ तो दुआ करने वाला हो जाता है duʿāin
तो दुआ करने वाला हो जाता है
عَرِيضٍۢ लम्बी चौड़ी ʿarīḍin
लम्बी चौड़ी
٥١ (51)
(51)
और जब हम इनसान पर उपकार करते हैं, तो वह मुँह फेर लेता है और दूर हो जाता है। तथा जब उसे बुराई पहुँचती है, तो लंबी-चौड़ी दुआएँ करने वाला हो जाता है।
४१:५२
قُلْ कह दीजिए qul
कह दीजिए
أَرَءَيْتُمْ क्या ग़ौर किया तुमने ara-aytum
क्या ग़ौर किया तुमने
إِن अगर in
अगर
كَانَ है वो kāna
है वो
مِنْ from min
from
عِندِ from ʿindi
from
ٱللَّهِ अल्लाह की तरफ़ से l-lahi
अल्लाह की तरफ़ से
ثُمَّ फिर thumma
फिर
كَفَرْتُم कुफ़्र किया तुमने kafartum
कुफ़्र किया तुमने
بِهِۦ उसका bihi
उसका
مَنْ कौन man
कौन
أَضَلُّ ज़्यादा भटका हुआ है aḍallu
ज़्यादा भटका हुआ है
مِمَّنْ उससे जो mimman
उससे जो
هُوَ वो huwa
वो
فِى (is) in
(is) in
شِقَاقٍۭ मुख़ालफ़त में है shiqāqin
मुख़ालफ़त में है
بَعِيدٍۢ बहुत दूर की baʿīdin
बहुत दूर की
٥٢ (52)
(52)
आप कह दें : मुझे बतलाओ कि यदि यह (क़ुरआन) अल्लाह की ओर से हुआ, फ़िर तुमने उसका इनकार कर दिया, तो उससे अधिक भटका हुआ कौन होगा, जो बहुत दूर के विरोध में पड़ा हो?
४१:५३
سَنُرِيهِمْ अनक़रीब हम दिखाएँगे उन्हे sanurīhim
अनक़रीब हम दिखाएँगे उन्हे
ءَايَـٰتِنَا निशानियाँ अपनी āyātinā
निशानियाँ अपनी
فِى in
in
ٱلْـَٔافَاقِ आफ़ाक़ / अतराफ़ में l-āfāqi
आफ़ाक़ / अतराफ़ में
وَفِىٓ and in wafī
and in
أَنفُسِهِمْ और उनके नफ़्सों में anfusihim
और उनके नफ़्सों में
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
يَتَبَيَّنَ वाज़ेह हो जाएगा yatabayyana
वाज़ेह हो जाएगा
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
أَنَّهُ कि बेशक वो annahu
कि बेशक वो
ٱلْحَقُّ ۗ हक़ है l-ḥaqu
हक़ है
أَوَلَمْ क्या भला नहीं awalam
क्या भला नहीं
يَكْفِ काफ़ी yakfi
काफ़ी
بِرَبِّكَ आपका रब (उस पर) birabbika
आपका रब (उस पर)
أَنَّهُۥ कि बेशक वो annahu
कि बेशक वो
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
كُلِّ हर kulli
हर
شَىْءٍۢ चीज़ के shayin
चीज़ के
شَهِيدٌ ख़ूब गवाह है shahīdun
ख़ूब गवाह है
٥٣ (53)
(53)
शीघ्र ही हम उन्हें अपनी निशानियाँ संसार के किनारों में तथा स्वयं उनके भीतर दिखाएँगे, यहाँ तक कि उनके लिए स्पष्ट हो जाए कि निश्चय यही सत्य है।1 और क्या आपका पालनहार प्रयाप्त नहीं इस बात के लिए कि निःसंदेह वह चीज़ पर गवाह है?
४१:५४
أَلَآ ख़बरदार alā
ख़बरदार
إِنَّهُمْ बेशक वो innahum
बेशक वो
فِى (are) in
(are) in
مِرْيَةٍۢ शक में हैं mir'yatin
शक में हैं
مِّن about min
about
لِّقَآءِ मुलाक़ात से liqāi
मुलाक़ात से
رَبِّهِمْ ۗ अपने रब की rabbihim
अपने रब की
أَلَآ ख़बरदार alā
ख़बरदार
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
بِكُلِّ हर bikulli
हर
شَىْءٍۢ चीज़ का shayin
चीज़ का
مُّحِيطٌۢ एहाता करने वाला है muḥīṭun
एहाता करने वाला है
٥٤ (54)
(54)
सुन लो! निश्चय वे लोग अपने पालनहार से मिलने के विषय में संदेह में हैं। सुन लो! निश्चय वह (अल्लाह) प्रत्येक वस्तु को घेरे हुए है।