४०

ग़ाफ़िर

मक्की ८५ आयतें पारा २४
غافر

सूरह ग़ाफ़िर (غافر) पवित्र क़ुरआन का ४० वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ८५ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४०:१
حمٓح مhha-meem١
ह़ा, मीम।
४०:२
تَنزِيلُनाज़िल करना हैtanzīluٱلْكِتَـٰبِकिताब काl-kitābiمِنَ(is) fromminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiٱلْعَزِيزِजो बहुत ज़बरदस्त हैl-ʿazīziٱلْعَلِيمِख़ूब इल्म वाला हैl-ʿalīmi٢
इस पुस्तक का अवतरण अति प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले अल्लाह की ओर से है।
४०:३
غَافِرِबख़्शने वाला हैghāfiriٱلذَّنۢبِगुनाह काl-dhanbiوَقَابِلِऔर क़ुबूल करने वाल हैwaqābiliٱلتَّوْبِतौबा काl-tawbiشَدِيدِसख़्तshadīdiٱلْعِقَابِसज़ा देने वालाl-ʿiqābiذِىOwner (of) the abundancedhīٱلطَّوْلِ ۖबड़े फ़ज़ल वाला हैl-ṭawliلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَ ۖवो हीhuwaإِلَيْهِतरफ़ उसी केilayhiٱلْمَصِيرُलौटना हैl-maṣīru٣
जो पाप क्षमा करने वाला और तौबा स्वीकार करने वाला, कठोर दंड देने वाला, बड़ा अनुग्रहशील है। उसके सिवा कोई (सच्चा) पूज्य नहीं। उसी की ओर (सबको) जाना है।
४०:४
مَاनहींيُجَـٰدِلُझगड़ा करतेyujādiluفِىٓconcerningءَايَـٰتِआयात मेंāyātiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiإِلَّاमगरillāٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūفَلَاतो नाfalāيَغْرُرْكَधोखे में डाले आपकोyaghrur'kaتَقَلُّبُهُمْचलना फिरना उनकाtaqallubuhumفِىinٱلْبِلَـٰدِशहरों मेंl-bilādi٤
अल्लाह की आयतों के बारे में केवल वही लोग झगड़ा करते हैं, जो काफ़िर हैं। अतः आपको उनका नगरों में चलना-फिरना धोखे में न डाले।
४०:५
كَذَّبَتْझुठलायाkadhabatقَبْلَهُمْउनसे पहलेqablahumقَوْمُक़ौमेqawmuنُوحٍۢनूह नेnūḥinوَٱلْأَحْزَابُऔर गिरोहों नेwal-aḥzābuمِنۢafter themminبَعْدِهِمْ ۖबाद उनकेbaʿdihimوَهَمَّتْऔर इरादा कियाwahammatكُلُّहरkulluأُمَّةٍۭउम्मत नेummatinبِرَسُولِهِمْअपने रसूल काbirasūlihimلِيَأْخُذُوهُ ۖताकि वो पकड़ें उसेliyakhudhūhuوَجَـٰدَلُوا۟और उन्होंने झगड़ा कियाwajādalūبِٱلْبَـٰطِلِसाथ बातिल केbil-bāṭiliلِيُدْحِضُوا۟ताकि वो ख़त्म (ज़ाइल)कर देंliyud'ḥiḍūبِهِसाथ उसकेbihiٱلْحَقَّहक़ कोl-ḥaqaفَأَخَذْتُهُمْ ۖतो पकड़ लिया मैं ने उन्हेंfa-akhadhtuhumفَكَيْفَतो कैसीfakayfaكَانَथीkānaعِقَابِसज़ा मेरीʿiqābi٥
इनसे पहले नूह की जाति ने झुठलाया तथा उनके बाद के (दूसरे) समूहों ने भी (झुठलाया)। और प्रत्येक समुदाय के लोगों ने इरादा किया कि अपने रसूल को पकड़ लें। तथा उन्होंने असत्य के साथ झगड़ा किया ताकि उसके द्वारा सत्य को ग़लत ठहरा दें। अंततः मैंने उन्हें पकड़ लिया। तो मेरी सज़ा कैसी थी?
४०:६
وَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaحَقَّتْसाबित हो गईḥaqqatكَلِمَتُबातkalimatuرَبِّكَआपके रब कीrabbikaعَلَىagainstʿalāٱلَّذِينَऊपर उनके जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوٓا۟कुफ़्र कियाkafarūأَنَّهُمْकि यक़ीनन वोannahumأَصْحَـٰبُसाथी हैंaṣḥābuٱلنَّارِआग केl-nāri٦
और इसी प्रकार आपके पालनहार की बात उन लोगों पर सिद्ध हो गई, जिन्होंने कुफ़्र किया कि वे जहन्नम वाले हैं।
४०:७
ٱلَّذِينَवो (फ़रिश्ते )जोalladhīnaيَحْمِلُونَउठाए हुए हैंyaḥmilūnaٱلْعَرْشَअर्श कोl-ʿarshaوَمَنْऔर जोwamanحَوْلَهُۥउसके इर्द-गिर्द हैंḥawlahuيُسَبِّحُونَवो तस्बीह कर रहे हैंyusabbiḥūnaبِحَمْدِसाथ तारीफ़ केbiḥamdiرَبِّهِمْअपने रब कीrabbihimوَيُؤْمِنُونَऔर वो ईमान रखते हैंwayu'minūnaبِهِۦउस परbihiوَيَسْتَغْفِرُونَऔर वो बख़्शिश माँगते हैंwayastaghfirūnaلِلَّذِينَउनके लिए जोlilladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūرَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāوَسِعْتَघेर रखा है तू नेwasiʿ'taكُلَّहरkullaشَىْءٍۢचीज़ कोshayinرَّحْمَةًۭरहमतraḥmatanوَعِلْمًۭاऔर इल्म सेwaʿil'manفَٱغْفِرْपस बख़्श देfa-igh'firلِلَّذِينَउनको जिन्होंनेlilladhīnaتَابُوا۟तौबा कीtābūوَٱتَّبَعُوا۟और उन्होंने पैरवी कीwa-ittabaʿūسَبِيلَكَतेरे रास्ते कीsabīlakaوَقِهِمْऔर बचा उन्हेंwaqihimعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaٱلْجَحِيمِजहन्नम केl-jaḥīmi٧
जो (फ़रिश्ते) अर्श (सिंहासन) को उठाए हुए हैं और जो उसके आस-पास हैं, वे अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करते हैं, तथा उसपर ईमान रखते हैं, और उन लोगों के लिए क्षमा याचना करते हैं1 जो ईमान लाए। (वे कहते हैं :) ऐ हमारे पालनहार! तूने हर चीज़ को (अपनी) दया और ज्ञान से घेर रखा है। अतः उन लोगों को क्षमा कर दे, जिन्होंने तौबा की और तेरे मार्ग का अनुसरण किया, तथा उन्हें भड़कती हुई आग की यातना से बचा।
४०:८
رَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāوَأَدْخِلْهُمْऔर दाख़िल कर उन्हेंwa-adkhil'humجَنَّـٰتِबाग़ात मेंjannātiعَدْنٍहमेशगी केʿadninٱلَّتِىवो जोallatīوَعَدتَّهُمْवादा किया था तू ने उनसेwaʿadttahumوَمَنऔर जो कोईwamanصَلَحَनेक हुएṣalaḥaمِنْamongminءَابَآئِهِمْउनके आबा ओ अजदाद में सेābāihimوَأَزْوَٰجِهِمْऔर उनकी बीवियोंwa-azwājihimوَذُرِّيَّـٰتِهِمْ ۚऔर उनकी औलादों में सेwadhurriyyātihimإِنَّكَबेशक तूinnakaأَنتَतू ही हैantaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वालाl-ḥakīmu٨
ऐ हमारे पालनहार! तथा उन्हें उन स्थायी जन्नतों में दाखिल कर, जिनका तूने उनसे वादा किया है। तथा उनके सदाचारी बाप-दादाओं, पत्नियों और संतानों को भी। निःसंदेह तू प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
४०:९
وَقِهِمُऔर बचा उन्हेंwaqihimuٱلسَّيِّـَٔاتِ ۚबुराइयों सेl-sayiātiوَمَنऔर जिसेwamanتَقِतू बचा लेगाtaqiٱلسَّيِّـَٔاتِबुराइयों सेl-sayiātiيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinفَقَدْपस तहक़ीक़faqadرَحِمْتَهُۥ ۚरहम किया तू ने उस परraḥim'tahuوَذَٰلِكَऔर यही हैwadhālikaهُوَवोhuwaٱلْفَوْزُकामयाबीl-fawzuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu٩
तथा उन्हें बुराइयों (के दुष्परिणाम) से सुरक्षित रख। और जिसे तूने उस दिन बुराइयों के दुष्परिणाम से सुरक्षित रखा, तो निश्चय ही तूने उसपर दया की। और यही बड़ी सफलता है।
४०:१०
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūيُنَادَوْنَवो पुकारे जाऐंगेyunādawnaلَمَقْتُयक़ीनन नाराज़गीlamaqtuٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiأَكْبَرُज़्यादा बड़ी हैakbaruمِنthanminمَّقْتِكُمْतुम्हारी नाराज़गी सेmaqtikumأَنفُسَكُمْअपने आप परanfusakumإِذْजबidhتُدْعَوْنَतुम बुलाए जाते थेtud'ʿawnaإِلَىtoilāٱلْإِيمَـٰنِतरफ़ ईमान केl-īmāniفَتَكْفُرُونَतो तुम इन्कार करते थेfatakfurūna١٠
निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्हें (क़ियामत के दिन) पुकारकर कहा जाएगा कि अल्लाह का क्रोध तुमपर उससे अधिक था, जितना तुम्हें आज अपने ऊपर क्रोध आ रहा है, जब तुम संसार में ईमान की ओर बुलाए1 जाते थे, तो तुम इनकार कर देते थे।
४०:११
قَالُوا۟वो कहेंगेqālūرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāأَمَتَّنَاमौत दी तू ने हमेंamattanāٱثْنَتَيْنِदो बारith'natayniوَأَحْيَيْتَنَاऔर ज़िन्दगी बख़्शी तू ने हमेंwa-aḥyaytanāٱثْنَتَيْنِदो बारith'natayniفَٱعْتَرَفْنَاतो एतराफ़ कर लिया हमनेfa-iʿ'tarafnāبِذُنُوبِنَاअपने गुनाहों काbidhunūbināفَهَلْतो क्या हैfahalإِلَىٰtoilāخُرُوجٍۢतरफ़ निकलने केkhurūjinمِّنanyminسَبِيلٍۢकोई रास्ताsabīlin١١
वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! तूने हमें दो बार मारा1 तथा दो बार जीवित किया। अब हमने अपने पापों को स्वीकार किया। तो क्या (यहाँ से) निकलने का कोई रास्ता है?
४०:१२
ذَٰلِكُمये तुम्हारा(अंजाम)dhālikumبِأَنَّهُۥٓइस लिए किbi-annahuإِذَاजबidhāدُعِىَपुकारा जाताduʿiyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuوَحْدَهُۥअकेले उसी कोwaḥdahuكَفَرْتُمْ ۖइन्कार करते थे तुमkafartumوَإِنऔर अगरwa-inيُشْرَكْशरीक ठहराया जाताyush'rakبِهِۦसाथ उसकेbihiتُؤْمِنُوا۟ ۚतो तुम मान जातेtu'minūفَٱلْحُكْمُपस फ़ैसलाfal-ḥuk'muلِلَّهِअल्लाह ही के लिए हैlillahiٱلْعَلِىِّजो बहुत बुलन्द हैl-ʿaliyiٱلْكَبِيرِबहुत बड़ा हैl-kabīri١٢
तुम्हें यह (यातना) इस कारण है कि जब अकेले अल्लाह को पुकारा जाता था, तो तुम इनकार कर देते थे। और यदि उसके साथ साझी ठहराया जाता, तो तुम मान लेते थे। अतः अब फ़ैसला अल्लाह के अधिकार में है, जो सर्वोच्च, बड़ा महान है।
४०:१३
هُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىजोalladhīيُرِيكُمْदिखाता है तुम्हेंyurīkumءَايَـٰتِهِۦनिशानियाँ अपनीāyātihiوَيُنَزِّلُऔर उतारता हैwayunazziluلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiرِزْقًۭا ۚरिज़्क़riz'qanوَمَاऔर नहींwamāيَتَذَكَّرُनसीहत पकड़ताyatadhakkaruإِلَّاमगरillāمَنवो जोmanيُنِيبُवो रुजूअ करता हैyunību١٣
वही है जो तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है, तथा तुम्हारे लिए आकाश से रोज़ी उतारता है, और शिक्षा तो केवल वही ग्रहण करता है, जो (उसकी ओर) लौटता है।
४०:१४
فَٱدْعُوا۟पस पुकारोfa-id'ʿūٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaمُخْلِصِينَख़ालिस करने वाले हो करmukh'liṣīnaلَهُउसी के लिएlahuٱلدِّينَदीन कोl-dīnaوَلَوْऔर अगरचेwalawكَرِهَनापसंद करेंkarihaٱلْكَـٰفِرُونَकाफ़िरl-kāfirūna١٤
अतः तुम अल्लाह को, उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए पुकारो, यद्यपि काफ़िरों को बुरा लगे।
४०:१५
رَفِيعُबुलन्दrafīʿuٱلدَّرَجَـٰتِदर्जों वाला हैl-darajātiذُوOwner (of) the Thronedhūٱلْعَرْشِअर्श वाला हैl-ʿarshiيُلْقِىवो डालता हैyul'qīٱلرُّوحَवही कोl-rūḥaمِنْofminأَمْرِهِۦअपने हुक्म सेamrihiعَلَىٰuponʿalāمَنजिस परmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuمِنْofminعِبَادِهِۦअपने बन्दों में सेʿibādihiلِيُنذِرَताकि वो डराएliyundhiraيَوْمَदिन सेyawmaٱلتَّلَاقِमुलाक़ात केl-talāqi١٥
वह उच्च श्रेणियों वाला, अर्श का स्वामी है। वह अपने आदेश से, अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, वह़्य1 (प्रकाशना) उतारता है, ताकि वह मिलने के दिन से सचेत करे।
४०:१६
يَوْمَजिस दिनyawmaهُمवोhumبَـٰرِزُونَ ۖज़ाहिर होंगेbārizūnaلَاनाيَخْفَىٰछुपी होगीyakhfāعَلَىfromʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiمِنْهُمْउन कीmin'humشَىْءٌۭ ۚकोई चीज़shayonلِّمَنِकिस के लिए हैlimaniٱلْمُلْكُबादशाहतl-mul'kuٱلْيَوْمَ ۖआज के दिनl-yawmaلِلَّهِअल्लाह ही के लिए हैlillahiٱلْوَٰحِدِजो एक हैl-wāḥidiٱلْقَهَّارِसब पर ग़ालिब हैl-qahāri١٦
जिस दिन वे (अपने पालनहार के सामने) प्रकट होंगे। अल्लाह से उनकी कोई चीज़ छिपी न होगी। (अल्लाह पूछेगा :) आज1 किसका राज्य है? (फिर खुद ही फरमाएगा :) अकेले अल्लाह का, जो सब पर प्रभुत्वशाली है।
४०:१७
ٱلْيَوْمَआज के दिनal-yawmaتُجْزَىٰबदला दिया जाएगाtuj'zāكُلُّहरkulluنَفْسٍۭनफ़्स कोnafsinبِمَاउसका जोbimāكَسَبَتْ ۚउसने कमाई कीkasabatلَاNoظُلْمَनहीं कोई ज़ुल्म होगाẓul'maٱلْيَوْمَ ۚआज के दिनl-yawmaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaسَرِيعُजल्द लेने वाला हैsarīʿuٱلْحِسَابِहिसाबl-ḥisābi١٧
आज प्रत्येक प्राणी को उसके किए का बदला दिया जाएगा। आज कोई अत्याचार नहीं होगा। निःसंदेह अल्लाह अति शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
४०:१८
وَأَنذِرْهُمْऔर आप डराऐं उन्हेंwa-andhir'humيَوْمَउस दिन सेyawmaٱلْـَٔازِفَةِजो क़रीब आ लगा हैl-āzifatiإِذِजबidhiٱلْقُلُوبُदिलl-qulūbuلَدَىक़रीब(होंगे)ladāٱلْحَنَاجِرِहलक़ केl-ḥanājiriكَـٰظِمِينَ ۚग़म से भरे हुएkāẓimīnaمَاनहींلِلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों के लिएlilẓẓālimīnaمِنْanyminحَمِيمٍۢकोई गहरा दोस्तḥamīminوَلَاऔर नाwalāشَفِيعٍۢकोई सिफ़ारिशीshafīʿinيُطَاعُजिस की बात मानी जाएyuṭāʿu١٨
तथा आप उन्हें निकट आने वाले (क़ियामत के) दिन से सावधान कर दें, जब शोक से भरे हुए दिल गले को आ पहुँचेंगे। अत्याचारियों का न कोई मित्र होगा, न कोई सिफ़ारिशी जिसकी बात मानी जाए।
४०:१९
يَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuخَآئِنَةَख़यानतkhāinataٱلْأَعْيُنِआँखों कीl-aʿyuniوَمَاऔर जो कुछwamāتُخْفِىछुपाते हैंtukh'fīٱلصُّدُورُसीनेl-ṣudūru١٩
वह आँखों की चोरी तथा सीने की छिपाई हुई बातों को जानता है।
४०:२०
وَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَقْضِىवो फ़ैसला करता हैyaqḍīبِٱلْحَقِّ ۖसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَٱلَّذِينَऔर जिन्हेंwa-alladhīnaيَدْعُونَवो पुकारते हैंyadʿūnaمِنbesides Himminدُونِهِۦउसके सिवाdūnihiلَاnotيَقْضُونَनहीं वो फ़ैसला करतेyaqḍūnaبِشَىْءٍ ۗकिसी चीज़ काbishayinإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो ही हैhuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वालाl-samīʿuٱلْبَصِيرُख़ूब देखने वालाl-baṣīru٢٠
अल्लाह ही सत्य (न्याय) के साथ निर्णय करता है तथा जिन्हें वे अल्लाह के अतिरिक्त पुकारते हैं, वे किसी भी चीज़ का निर्णय नहीं करते। निःसंदेह अल्लाह ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
४०:२१
۞ أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَسِيرُوا۟वो चले फिरेyasīrūفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَيَنظُرُوا۟तो वो देखतेfayanẓurūكَيْفَकिस तरहkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअंजामʿāqibatuٱلَّذِينَउनका जोalladhīnaكَانُوا۟थेkānūمِنbefore themminقَبْلِهِمْ ۚउनसे पहलेqablihimكَانُوا۟थे वोkānūهُمْवोhumأَشَدَّज़्यादा शदीदashaddaمِنْهُمْउनसेmin'humقُوَّةًۭक़ुव्वत मेंquwwatanوَءَاثَارًۭاऔर आसार मेंwaāthāranفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَأَخَذَهُمُपस पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhahumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuبِذُنُوبِهِمْबवजह उनके गुनाहों केbidhunūbihimوَمَاऔर नाwamāكَانَथाkānaلَهُمउनके लिएlahumمِّنَagainstminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiمِنanyminوَاقٍۢकोई बचाने वालाwāqin٢١
क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं, ताकि देखते कि उन लोगों का परिणाम कैसा रहा, जो इनसे पहले थे? वे इनसे अधिक शक्तिशाली थे तथा धरती में इनसे अधिक चिह्न भी छोड़ गए। तो अल्लाह ने उन्हें उनके पापों के कारण पकड़ लिया और उन्हें अल्लाह से बचाने वाला कोई न था।
४०:२२
ذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمْबवजह उसके कि वोbi-annahumكَانَتथेkānatتَّأْتِيهِمْआते उनके पासtatīhimرُسُلُهُمरसूल उनकेrusuluhumبِٱلْبَيِّنَـٰتِसाथ वाज़ेह दलाइल केbil-bayinātiفَكَفَرُوا۟तो उन्होंने इन्कार कियाfakafarūفَأَخَذَهُمُफिर पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhahumuٱللَّهُ ۚअल्लाह नेl-lahuإِنَّهُۥबेशक वोinnahuقَوِىٌّۭबहुत क़ुव्वत वाला हैqawiyyunشَدِيدُसख़्तshadīduٱلْعِقَابِसज़ा वाला हैl-ʿiqābi٢٢
यह इस कारण हुआ कि उनके रसूल उनके पास खुली निशानियाँ लाते थे, तो उन्होंने इनकार किया। अंततः अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया। निःसंदेह वह बड़ा शक्तिशाली, कठोर दंड देने वाला है।
४०:२३
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāمُوسَىٰमूसा कोmūsāبِـَٔايَـٰتِنَاसाथ अपनी निशानियों केbiāyātināوَسُلْطَـٰنٍۢऔर दलीलwasul'ṭāninمُّبِينٍवाज़ेह केmubīnin٢٣
और हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कारों) तथा स्पष्ट तर्क के साथ भेजा।
४०:२४
إِلَىٰToilāفِرْعَوْنَतरफ़ फ़िरऔनfir'ʿawnaوَهَـٰمَـٰنَऔर हामानwahāmānaوَقَـٰرُونَऔर क़ारून केwaqārūnaفَقَالُوا۟तो उन्होंने कहाfaqālūسَـٰحِرٌۭजादूगर हैsāḥirunكَذَّابٌۭबहुत झूठाkadhābun٢٤
फ़िरऔन और (उसके मंत्री) हामान तथा क़ारून के पास। तो उन्होंने कहा : यह तो बड़ा झूठा जादूगर है।
४०:२५
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَهُمवो लाया उनके पासjāahumبِٱلْحَقِّहक़bil-ḥaqiمِنْfromminعِندِنَاहमारे पास सेʿindināقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūٱقْتُلُوٓا۟क़त्ल कर दोuq'tulūأَبْنَآءَबेटों कोabnāaٱلَّذِينَउनके जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuوَٱسْتَحْيُوا۟और ज़िन्दा रहने दोwa-is'taḥyūنِسَآءَهُمْ ۚउनकी औरतों कोnisāahumوَمَاऔर नहींwamāكَيْدُचालkayduٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कीl-kāfirīnaإِلَّاमगरillāفِىinضَلَـٰلٍۢगुमराही मेंḍalālin٢٥
फिर जब वह हमारी ओर से उनके पास सत्य लेकर आया, तो उन्होंने कहा : उसके साथ जो लोग ईमान लाए हैं, उनके बेटों को मार डालो और उनकी स्त्रियों को जीवित रहने दो। और काफ़िरों की चाल विफल ही हुआ करती है।1
४०:२६
وَقَالَऔर कहाwaqālaفِرْعَوْنُफ़िरऔन नेfir'ʿawnuذَرُونِىٓछोड़ दो मुझेdharūnīأَقْتُلْमैं क़त्ल करूँaqtulمُوسَىٰमूसा कोmūsāوَلْيَدْعُऔर चाहिए कि वो पुकारेwalyadʿuرَبَّهُۥٓ ۖअपने रब कोrabbahuإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَخَافُमैं डरता हूँakhāfuأَنकिanيُبَدِّلَवो बदल देगाyubaddilaدِينَكُمْतुम्हारे दीन कोdīnakumأَوْयाawأَنये किanيُظْهِرَवो फैला देगाyuẓ'hiraفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiٱلْفَسَادَफ़सादl-fasāda٢٦
और फ़िरऔन ने (अपने प्रमुखों से) कहा : मुझे छोड़ो, मैं मूसा को क़त्ल कर दूँ और उसे चाहिए कि अपने पालनहार को पुकारे। निःसंदेह मैं डरता हूँ कि वह तुम्हारे धर्म को बदल1 देगा या इस धरती (मिस्र) में बिगाड़ पैदा कर देगा।
४०:२७
وَقَالَऔर कहाwaqālaمُوسَىٰٓमूसा नेmūsāإِنِّىबेशक मैंinnīعُذْتُपनाह ली मैंनेʿudh'tuبِرَبِّىअपने रब कीbirabbīوَرَبِّكُمऔर तुम्हारे रब कीwarabbikumمِّنfromminكُلِّeverykulliمُتَكَبِّرٍۢहर तकब्बुर करने वाले सेmutakabbirinلَّاnotيُؤْمِنُजो नहीं ईमान रखताyu'minuبِيَوْمِदिन परbiyawmiٱلْحِسَابِहिसाब केl-ḥisābi٢٧
तथा मूसा ने कहा : निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की हर उस अहंकारी से शरण ली है, जो हिसाब के दिन पर ईमान नहीं रखता।
४०:२८
وَقَالَऔर कहाwaqālaرَجُلٌۭएक मर्दrajulunمُّؤْمِنٌۭमोमिन नेmu'minunمِّنْfromminءَالِ(the) familyāliفِرْعَوْنَआले फ़िरऔन में सेfir'ʿawnaيَكْتُمُजो छुपाता थाyaktumuإِيمَـٰنَهُۥٓईमान अपनाīmānahuأَتَقْتُلُونَक्या तुम क़त्ल कर दोगेataqtulūnaرَجُلًاएक आदमी कोrajulanأَنकिanيَقُولَवो कहता हैyaqūlaرَبِّىَमेरा रबrabbiyaٱللَّهُअल्लाह हैl-lahuوَقَدْहालाँकि तहक़ीक़waqadجَآءَكُمवो लाया है तुम्हारे पासjāakumبِٱلْبَيِّنَـٰتِवाज़ेह दलाइलbil-bayinātiمِنfromminرَّبِّكُمْ ۖतुम्हारे रब की तरफ़ सेrabbikumوَإِنऔर अगरwa-inيَكُहै वोyakuكَـٰذِبًۭاझूठाkādhibanفَعَلَيْهِतो उसी पर हैfaʿalayhiكَذِبُهُۥ ۖझूठ उसकाkadhibuhuوَإِنऔर अगरwa-inيَكُहै वोyakuصَادِقًۭاसच्चाṣādiqanيُصِبْكُمपहुँचेगा तुम्हेंyuṣib'kumبَعْضُबाजbaʿḍuٱلَّذِىवो जिसकाalladhīيَعِدُكُمْ ۖवो वादा करता है तुम सेyaʿidukumإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَا(does) notيَهْدِىनहीं वो हिदायत देताyahdīمَنْउसे जो होmanهُوَवोhuwaمُسْرِفٌۭहद से गुज़रने वालाmus'rifunكَذَّابٌۭसख़्त झूठाkadhābun٢٨
तथा फ़िरऔन के घराने के एक ईमानवाले व्यक्ति ने, जो अपना ईमान छिपा रहा था, कहा : क्या तुम एक व्यक्ति को केवल इसलिए मार डालना चाहते हो कि वह कहता है कि मेरा पालनहार अल्लाह है, जबकि वह तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से खुली निशानियाँ लेकर आया है? और यदि वह झूठा है, तो उसका झूठ उसी के ऊपर है और यदि वह सच्चा है, तो तुम्हें उस (यातना) का कुछ अंश पहुँचकर रहेगा, जिसका वह तुमसे वादा कर रहा है। निःसंदेह अल्लाह उसका मार्गदर्शन नहीं करता, जो उल्लंघनकारी, बहुत झूठा है।
४०:२९
يَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiلَكُمُतुम्हारे लिए हैlakumuٱلْمُلْكُबादशाहतl-mul'kuٱلْيَوْمَआजl-yawmaظَـٰهِرِينَकि ग़ालिब होẓāhirīnaفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَمَنफिर कौनfamanيَنصُرُنَاमदद करेगा हमारीyanṣurunāمِنۢfromminبَأْسِअज़ाब सेbasiٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِنअगरinجَآءَنَا ۚवो आ गया हमारे पासjāanāقَالَकहाqālaفِرْعَوْنُफ़िरऔन नेfir'ʿawnuمَآनहींأُرِيكُمْमैं दिखाता तुम्हेंurīkumإِلَّاमगरillāمَآजोأَرَىٰमैं देखता हूँarāوَمَآऔर नहींwamāأَهْدِيكُمْमैं दिखाता तुम्हेंahdīkumإِلَّاमगरillāسَبِيلَरास्ताsabīlaٱلرَّشَادِभलाई काl-rashādi٢٩
ऐ मेरी जाति के लोगो! आज तुम्हारा राज्य है। तुम धरती में प्रभावशाली हो। यदि अल्लाह की यातना हमपर आ जाए, तो उससे बचाने के लिए कौन हमारी मदद करेगा? फ़िरऔन ने कहा : मैं तुम सब को वही समझा रहा हूँ, जिसे मैं उचित समझता हूँ और मैं तुम्हें सीधी राह ही दिखा रहा हूँ।
४०:३०
وَقَالَऔर कहा उसनेwaqālaٱلَّذِىٓजोalladhīءَامَنَईमान लायाāmanaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَخَافُमैं डरता हूँakhāfuعَلَيْكُمतुम परʿalaykumمِّثْلَमानिन्दmith'laيَوْمِदिन केyawmiٱلْأَحْزَابِ(गुज़िश्ता) गिरोहों केl-aḥzābi٣٠
तथा जो व्यक्ति ईमान लाया था, उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुमपर (अगले) समुदायों के दिन जैसे (दिन)1 से डरता हूँ।
४०:३१
مِثْلَमानिन्दmith'laدَأْبِहालतdabiقَوْمِक़ौमेqawmiنُوحٍۢनूहnūḥinوَعَادٍۢऔर आदwaʿādinوَثَمُودَऔर समूदwathamūdaوَٱلَّذِينَऔर उनकी जोwa-alladhīnaمِنۢafter themminبَعْدِهِمْ ۚबाद थे उनकेbaʿdihimوَمَاऔर नहींwamāٱللَّهُअल्लाहl-lahuيُرِيدُवो इरादा रखताyurīduظُلْمًۭاज़ुल्म काẓul'manلِّلْعِبَادِबन्दों परlil'ʿibādi٣١
नूह की जाति, तथा आद और समूद और उनके बाद होने वाले लोगों की स्थिति के समान। तथा अल्लाह अपने बंदों पर अत्याचार नहीं चाहता।
४०:३२
وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَخَافُमैं डरता हूँakhāfuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumيَوْمَ(the) Dayyawmaٱلتَّنَادِएक दूसरे को पुकारने के दिन सेl-tanādi٣٢
तथा ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुमपर एक-दूसरे को पुकारने के दिन1 से डरता हूँ।
४०:३३
يَوْمَजिस दिनyawmaتُوَلُّونَतुम फिर जाओगेtuwallūnaمُدْبِرِينَपीठ फेरते हुएmud'birīnaمَاनहीं (होगा)لَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنَfromminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiمِنْanyminعَاصِمٍۢ ۗकोई बचाने वालाʿāṣiminوَمَنऔर जिसेwamanيُضْلِلِभटकादेyuḍ'liliٱللَّهُअल्लाहl-lahuفَمَاतो नहींfamāلَهُۥउसके लिएlahuمِنْanyminهَادٍۢकोई हिदायत देने वालाhādin٣٣
जिस दिन तुम पीठ फेरकर भागोगे। तुम्हें अल्लाह से कोई बचाने वाला न होगा। तथा जिसे अल्लाह राह से भटका दे, उसे राह दिखाने वाला कोई नहीं।
४०:३४
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَآءَكُمْआया तुम्हारे पासjāakumيُوسُفُयूसुफ़yūsufuمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluبِٱلْبَيِّنَـٰتِसाथ वाज़ेह दलाइल केbil-bayinātiفَمَاbut notfamāزِلْتُمْतो मुसलसल रहे तुमzil'tumفِىinشَكٍّۢशक मेंshakkinمِّمَّاउससे चीज़ से जोmimmāجَآءَكُمवो लाया तुम्हारे पासjāakumبِهِۦ ۖउसेbihiحَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāهَلَكَवो फ़ौत हो गयाhalakaقُلْتُمْकहा तुम नेqul'tumلَنहरगिज़ नहींlanيَبْعَثَभेजेगाyabʿathaٱللَّهُअल्लाहl-lahuمِنۢafter himminبَعْدِهِۦइसके बादbaʿdihiرَسُولًۭا ۚकिसी रसूल कोrasūlanكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيُضِلُّभटकाता हैyuḍilluٱللَّهُअल्लाहl-lahuمَنْउसे जोmanهُوَहो वोhuwaمُسْرِفٌۭहद से बढ़ने वालाmus'rifunمُّرْتَابٌशक में पड़ने वालाmur'tābun٣٤
तथा इससे पूर्व यूसुफ़ तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए, तो तुम उस चीज़ के बारे में बराबर संदेह में पड़े रहे, जो वह तुम्हारे पास लेकर आए। यहाँ तक कि जब वह मर गए, तो तुमने कहा कि अल्लाह उनके पश्चात् कोई रसूल1 हरगिज़ नहीं भेजेगा। इसी प्रकार अल्लाह उसे राह से भटका देता है, जो हद से बढ़ने वाला, संदेह करने वाला हो।
४०:३५
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيُجَـٰدِلُونَझगड़ते हैंyujādilūnaفِىٓconcerningءَايَـٰتِआयात मेंāyātiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiبِغَيْرِबग़ैरbighayriسُلْطَـٰنٍकिसी दलील केsul'ṭāninأَتَىٰهُمْ ۖजो आई हो उनके पासatāhumكَبُرَबड़ी हैkaburaمَقْتًاनाराज़गी की बातmaqtanعِندَनज़्दीकʿindaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَعِندَऔर नज़्दीकwaʿindaٱلَّذِينَउनके जोalladhīnaءَامَنُوا۟ ۚईमान लाएāmanūكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيَطْبَعُमुहर लगा देता हैyaṭbaʿuٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहर (उस शख़्स के)kulliقَلْبِदिल केqalbiمُتَكَبِّرٍۢजो तकब्बुर करने वाला हैmutakabbirinجَبَّارٍۢसरकश हैjabbārin٣٥
जो अल्लाह की आयतों के बारे में झगड़ते हैं, बिना किसी प्रमाण के, जो उनके पास आया हो। यह अल्लाह के निकट तथा उन लोगों के निकट, जो ईमान लाए हैं, बड़े क्रोध की बात है। इसी प्रकार, अल्लाह प्रत्येक अहंकारी अत्याचारी के दिल पर मुहर लगा देता है।
४०:३६
وَقَالَऔर कहाwaqālaفِرْعَوْنُफ़िरऔन नेfir'ʿawnuيَـٰهَـٰمَـٰنُऐ हामानyāhāmānuٱبْنِबनाib'niلِىमेरे लिएصَرْحًۭاएक बुलन्द इमारतṣarḥanلَّعَلِّىٓताकि मैंlaʿallīأَبْلُغُमैं पहुँच सकूँablughuٱلْأَسْبَـٰبَरास्तों परl-asbāba٣٦
तथा फ़िरऔन ने कहा : ऐ हामान! मेरे लिए एक उच्च भवन बनाओ, ताकि मैं मार्गों तक पहुँच सकूँ।
४०:३७
أَسْبَـٰبَरास्तों परasbābaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमान केl-samāwātiفَأَطَّلِعَफिर मैं झाँक कर देखूँfa-aṭṭaliʿaإِلَىٰٓatilāإِلَـٰهِतरफ़ इलाहilāhiمُوسَىٰमूसा केmūsāوَإِنِّىऔर बेशक मैंwa-innīلَأَظُنُّهُۥअलबत्ता मैं गुमान करता हूँ उसेla-aẓunnuhuكَـٰذِبًۭا ۚझूठाkādhibanوَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaزُيِّنَमुज़य्यन कर दिया गयाzuyyinaلِفِرْعَوْنَफ़िरऔन के लिएlifir'ʿawnaسُوٓءُबुराsūuعَمَلِهِۦअमल उसकाʿamalihiوَصُدَّऔर वो रोक दिया गयाwaṣuddaعَنِfromʿaniٱلسَّبِيلِ ۚरास्ते सेl-sabīliوَمَاऔर नहींwamāكَيْدُचालkayduفِرْعَوْنَफ़िरऔन कीfir'ʿawnaإِلَّاमगरillāفِىinتَبَابٍۢहलाकत मेंtabābin٣٧
आकाशों के मार्गों तक। फिर मैं मूसा के पूज्य को देख लूँ। और निश्चय ही मैं उसे झूठा समझता हूँ। इसी प्रकार, फ़िरऔन के लिए उसके बुरे कर्म को सुंदर बना दिया गया और उसे सत्य मार्ग से रोक दिया गया। और फ़िरऔन की चाल विनाश होकर रही।
४०:३८
وَقَالَऔर कहाwaqālaٱلَّذِىٓउसने जोalladhīءَامَنَईमान लायाāmanaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱتَّبِعُونِपैरवी करो मेरीittabiʿūniأَهْدِكُمْमैं दिखाऊँगा तुम्हेंahdikumسَبِيلَरास्ताsabīlaٱلرَّشَادِभलाई काl-rashādi٣٨
तथा जो व्यक्ति ईमान लाया था, उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मेरा अनुसरण करो, मैं तुम्हे भलाई का रास्ता दिखाऊँगा।
४०:३९
يَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiإِنَّمَاबेशकinnamāهَـٰذِهِयेhādhihiٱلْحَيَوٰةُज़िन्दगीl-ḥayatuٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāمَتَـٰعٌۭथोड़ा फ़ायदा हैmatāʿunوَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلْـَٔاخِرَةَआख़िरतl-ākhirataهِىَवो हीhiyaدَارُघर हैdāruٱلْقَرَارِक़रार काl-qarāri٣٩
ऐ मेरी जाति के लोगो! यह सांसारिक जीवन तो मात्र कुछ दिनों का लाभ है और निःसंदेह स्थायी निवास का स्थान तो आख़िरत ही है।
४०:४०
مَنْजिस नेmanعَمِلَअमल कियाʿamilaسَيِّئَةًۭबुराsayyi-atanفَلَاतो नाfalāيُجْزَىٰٓवो बदला दिया जाएगाyuj'zāإِلَّاमगरillāمِثْلَهَا ۖमानिन्द उसी केmith'lahāوَمَنْऔर जिसनेwamanعَمِلَअमल कियाʿamilaصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanمِّنofminذَكَرٍकोई मर्द होdhakarinأَوْयाawأُنثَىٰऔरतunthāوَهُوَजब कि वोwahuwaمُؤْمِنٌۭमोमिन होmu'minunفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaيَدْخُلُونَजो दाख़िल होंगेyadkhulūnaٱلْجَنَّةَजन्नत मेंl-janataيُرْزَقُونَवो रिज़्क़ दिए जाऐंगेyur'zaqūnaفِيهَاउसमेंfīhāبِغَيْرِबग़ैरbighayriحِسَابٍۢहिसाब केḥisābin٤٠
जिसने बुरा काम किया, उसे उसी के जैसा बदला दिया जाएगा तथा जिसने अच्छा काम किया, वह नर हो अथवा नारी, जबकि वह ईमान वाला (एकेश्वरवादी) हो, तो ऐसे लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे। वहाँ उन्हें बेहिसाब रोज़ी दी जाएगी।
४०:४१
۞ وَيَـٰقَوْمِऔर ऐ मेरी क़ौमwayāqawmiمَاक्या हैلِىٓमुझेأَدْعُوكُمْमैं बुलाता हूँ तुम्हेंadʿūkumإِلَىtoilāٱلنَّجَوٰةِतरफ़ निजात केl-najatiوَتَدْعُونَنِىٓऔर तुम बुलाते हो मुझेwatadʿūnanīإِلَىtoilāٱلنَّارِतरफ़ आग केl-nāri٤١
तथा ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या बात है कि मैं तुम्हें मुक्ति की ओर बुला रहा हूँ और तुम मुझे आग (नरक) की ओर बुला रहे हो?
४०:४२
تَدْعُونَنِىतुम बुलाते हो मुझेtadʿūnanīلِأَكْفُرَकि मैं कुफ़्र करूँli-akfuraبِٱللَّهِसाथ अल्लाह केbil-lahiوَأُشْرِكَऔर मैं शरीक ठहराऊँwa-ush'rikaبِهِۦसाथ उसकेbihiمَاउसको जोلَيْسَनहीं हैlaysaلِىमुझेبِهِۦउसकाbihiعِلْمٌۭकोई इल्मʿil'munوَأَنَا۠और मैंwa-anāأَدْعُوكُمْमैं बुलाता हूँ तुम्हेंadʿūkumإِلَىतरफ़ilāٱلْعَزِيزِबहुत ज़बरदस्त केl-ʿazīziٱلْغَفَّـٰرِबहुत बख़्शने वाले केl-ghafāri٤٢
तुम मुझे इस बात की ओर बुला रहे हो कि मैं अल्लाह के साथ कुफ़्र करूँ और उसके साथ उसे साझी ठहराऊँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं, तथा मैं तुम्हें प्रभुत्वशाली, अत्यंत क्षमाशील (अल्लाह) की ओर बुला रहा हूँ।
४०:४३
لَاNoجَرَمَनहीं कोई शकjaramaأَنَّمَاबेशकannamāتَدْعُونَنِىٓतुम बुलाते हो मुझेtadʿūnanīإِلَيْهِजिसकी तरफ़ilayhiلَيْسَनहीं हैlaysaلَهُۥउसके लिएlahuدَعْوَةٌۭकोई पुकारा जानाdaʿwatunفِىinٱلدُّنْيَاदुनिया मेंl-dun'yāوَلَاऔर नाwalāفِىinٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiوَأَنَّऔर बेशकwa-annaمَرَدَّنَآपलटना हमाराmaraddanāإِلَى(is) toilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह के हैl-lahiوَأَنَّऔर बेशकwa-annaٱلْمُسْرِفِينَजो हद से बढ़ने वाले हैंl-mus'rifīnaهُمْवो ही हैंhumأَصْحَـٰبُसाथीaṣḥābuٱلنَّارِआग केl-nāri٤٣
निःसंदेह तुम जिसकी ओर मुझे बुला रहे हो, वह न तो दुनिया में पुकारे जाने के योग्य1 है और न आख़िरत में। तथा यह कि निश्चय हमारा लौटना अल्लाह की ओर है और यह कि निश्चय हद से आगे बढ़ने वाले ही, आग में रहने वाले हैं।
४०:४४
فَسَتَذْكُرُونَपस अनक़रीब तुम याद करोगेfasatadhkurūnaمَآजोأَقُولُमैं कह रहा हूँaqūluلَكُمْ ۚतुम्हेंlakumوَأُفَوِّضُऔर मैं सुपुर्द करता हूँwa-ufawwiḍuأَمْرِىٓमामला अपनाamrīإِلَىtoilāٱللَّهِ ۚतरफ़ अल्लाह केl-lahiإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaبَصِيرٌۢख़ूब देखने वाला हैbaṣīrunبِٱلْعِبَادِबन्दों कोbil-ʿibādi٤٤
तो जो कुछ मैं तुमसे कह रहा हूँ, शीघ्र ही तुम उसे याद करोगे। तथा मैं अपना मामला अल्लाह के हवाले करता हूँ। निःसंदेह अल्लाह बंदों को देख रहा है।
४०:४५
فَوَقَىٰهُपस बचा लिया उसेfawaqāhuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuسَيِّـَٔاتِबुराइयों सेsayyiātiمَاउसकी जोمَكَرُوا۟ ۖउन्होंने मकर कियाmakarūوَحَاقَऔर घेर लियाwaḥāqaبِـَٔالِ(the) peoplebiāliفِرْعَوْنَआले फ़िरऔन कोfir'ʿawnaسُوٓءُबुरेsūuٱلْعَذَابِअज़ाब नेl-ʿadhābi٤٥
तो अल्लाह ने उसे उनकी चालों की बुराइयों से बचा लिया और फ़िरऔनियों को बुरी यातना ने घेर लिया।
४०:४६
ٱلنَّارُआग केal-nāruيُعْرَضُونَवो पेश किए जाते हैंyuʿ'raḍūnaعَلَيْهَاउस परʿalayhāغُدُوًّۭاसुब्हghuduwwanوَعَشِيًّۭا ۖऔर शामwaʿashiyyanوَيَوْمَऔर जिस दिनwayawmaتَقُومُक़ायम होगीtaqūmuٱلسَّاعَةُक़यामतl-sāʿatuأَدْخِلُوٓا۟(कहा जाएगा)कि दाख़िल करोadkhilūءَالَ(the) peopleālaفِرْعَوْنَआले फ़िरऔन कोfir'ʿawnaأَشَدَّशदीद तरीनashaddaٱلْعَذَابِअज़ाब मेंl-ʿadhābi٤٦
वे1 सुबह और शाम आग पर प्रस्तुत किए जाते हैं, तथा जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, (तो आदेश होगा) कि फ़िरऔनियों को सबसे कठोर यातना में डाल दो।
४०:४७
وَإِذْऔर जबwa-idhيَتَحَآجُّونَवो बाहम झाड़ेंगेyataḥājjūnaفِىinٱلنَّارِआग मेंl-nāriفَيَقُولُतो कहेंगेfayaqūluٱلضُّعَفَـٰٓؤُا۟कमज़ोर लोगl-ḍuʿafāuلِلَّذِينَउनसे जिन्होंनेlilladhīnaٱسْتَكْبَرُوٓا۟तकब्बुर किया थाis'takbarūإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हमkunnāلَكُمْतुम्हारेlakumتَبَعًۭاताबेअ/ पैरवी करने वालेtabaʿanفَهَلْतो क्याfahalأَنتُمतुमantumمُّغْنُونَदूर करने वाले होmugh'nūnaعَنَّاहमसेʿannāنَصِيبًۭاकुछ हिस्साnaṣībanمِّنَofminaٱلنَّارِआग सेl-nāri٤٧
तथा (याद करो) जब वे नरक में आपस में झगड़ा करेंगे, तो कमज़ोर लोग बड़ा बनने वाले लोगों से कहेंगे : हम (दुनिया में) तुम्हारे अनुयायी थे। तो क्या तुम हमसे आग का कुछ भाग हटा सकते हो?
४०:४८
قَالَकहेंगेqālaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaٱسْتَكْبَرُوٓا۟तकब्बुर किया थाis'takbarūإِنَّاबेशक हमinnāكُلٌّۭसब हीkullunفِيهَآउस में हैंfīhāإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaقَدْतहक़ीक़qadحَكَمَफ़ैसला कर चुका हैḥakamaبَيْنَदर्मियानbaynaٱلْعِبَادِबन्दों केl-ʿibādi٤٨
वे बड़ा बनने वाले लोग कहेंगे : निःसंदेह हम सब इसी में हैं। निश्चय ही अल्लाह ने बंदों के बीच निर्णय कर दिया है।
४०:४९
وَقَالَऔर कहेंगेwaqālaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaفِىinٱلنَّارِआग में (होंगे)l-nāriلِخَزَنَةِदर्बानों सेlikhazanatiجَهَنَّمَजहन्नम केjahannamaٱدْعُوا۟दुआ करोid'ʿūرَبَّكُمْअपने रब सेrabbakumيُخَفِّفْवो हल्का कर देyukhaffifعَنَّاहमसेʿannāيَوْمًۭاएक दिनyawmanمِّنَofminaٱلْعَذَابِअज़ाब सेl-ʿadhābi٤٩
तथा जो लोग आग में होंगे, वे जहन्नम के रक्षकों से कहेंगे : अपने पालनहार से प्रार्थना करो कि वह हमसे एक दिन तो कुछ यातना हल्की कर दे।
४०:५०
قَالُوٓا۟वो कहेंगेqālūأَوَلَمْक्या भला नहींawalamتَكُथेtakuتَأْتِيكُمْआए तुम्हारे पासtatīkumرُسُلُكُمरसूल तुम्हारेrusulukumبِٱلْبَيِّنَـٰتِ ۖसाथ वाज़ेह दलाइल केbil-bayinātiقَالُوا۟वो कहेंगेqālūبَلَىٰ ۚक्यों नहींbalāقَالُوا۟वो कहेंगेqālūفَٱدْعُوا۟ ۗपस तुम दुआ करोfa-id'ʿūوَمَاऔर नहींwamāدُعَـٰٓؤُا۟दुआduʿāuٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कीl-kāfirīnaإِلَّاमगरillāفِىinضَلَـٰلٍगुमराही मेंḍalālin٥٠
जहन्नम के रक्षक कहेंगे : क्या तुम्हारे पास, तुम्हारे रसूल, स्पष्ट प्रमाण लेकर नहीं आए थे? काफ़िर लोग कहेंगे : क्यों नहीं? रक्षकगण कहेंगे : तो तुम ही प्रार्थना करो। और काफ़िरों की प्रार्थना व्यर्थ ही होगी।
४०:५१
إِنَّاबेशक हमinnāلَنَنصُرُअलबत्ता हम मदद करते हैंlananṣuruرُسُلَنَاअपने रसूलों कीrusulanāوَٱلَّذِينَऔर उनकी जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए हैंāmanūفِىinٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी मेंl-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāوَيَوْمَऔर जिस दिनwayawmaيَقُومُखड़े होंगेyaqūmuٱلْأَشْهَـٰدُगवाहl-ashhādu٥١
निःसंदेह हम अपने रसूलों की और उन लोगों की जो ईमान लाए, सांसारिक जीवन में भी अवश्य सहायता करते हैं तथा उस दिन1 भी (करेंगे) जब साक्षी खड़े होंगे।
४०:५२
يَوْمَजिस दिनyawmaلَاnotيَنفَعُना नफ़ा देगीyanfaʿuٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों कोl-ẓālimīnaمَعْذِرَتُهُمْ ۖमाज़रत उनकीmaʿdhiratuhumوَلَهُمُऔर उनके लिए हैwalahumuٱللَّعْنَةُलाअनतl-laʿnatuوَلَهُمْऔर उनके लिए हैwalahumسُوٓءُबदतरीनsūuٱلدَّارِघरl-dāri٥٢
जिस दिन अत्याचारियों को उनका बहाना (सफ़ाई देना) कोई लाभ नहीं देगा तथा उनके लिए धिक्कार है और उनके लिए बुरा घर है।
४०:५३
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadءَاتَيْنَاदी हमनेātaynāمُوسَىमूसा कोmūsāٱلْهُدَىٰहिदायतl-hudāوَأَوْرَثْنَاऔर वारिस बनाया हमनेwa-awrathnāبَنِىٓ(the) Children of Israelbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल कोis'rāīlaٱلْكِتَـٰبَकिताब काl-kitāba٥٣
तथा हमने मूसा को मार्गदर्शन प्रदान किया और इसराईल की संतान को पुस्तक (तौरात) का उत्तराधिकारी बनाया।
४०:५४
هُدًۭىजो हिदायतhudanوَذِكْرَىٰऔर नसीहत थीwadhik'rāلِأُو۟لِىfor thoseli-ulīٱلْأَلْبَـٰبِअक़्ल वालों के लिएl-albābi٥٤
जो बुद्धि वालों के लिए मार्गदर्शन तथा उपदेश थी।
४०:५५
فَٱصْبِرْपस सब्र कीजिएfa-iṣ'birإِنَّबेशकinnaوَعْدَवादाwaʿdaٱللَّهِअल्लाह काl-lahiحَقٌّۭसच्चा हैḥaqqunوَٱسْتَغْفِرْऔर बख़्शिश तलब कीजिएwa-is'taghfirلِذَنۢبِكَअपने गुनाह कीlidhanbikaوَسَبِّحْऔर तस्बीह कीजिएwasabbiḥبِحَمْدِसाथ हम्द केbiḥamdiرَبِّكَअपने रब कीrabbikaبِٱلْعَشِىِّशाम के वक़्तbil-ʿashiyiوَٱلْإِبْكَـٰرِऔर सुब्ह के वक़्तwal-ib'kāri٥٥
अतः (ऐ नबी!) आप धैर्य रखें। निःसंदेह अल्लाह का वचन1 सत्य है। तथा अपने पापों2 की क्षमा माँगें और सायंकाल तथा प्रातःकाल अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करते रहें।
४०:५६
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيُجَـٰدِلُونَझगड़ते हैंyujādilūnaفِىٓconcerningءَايَـٰتِआयात मेंāyātiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiبِغَيْرِबग़ैरbighayriسُلْطَـٰنٍकिसी दलील केsul'ṭāninأَتَىٰهُمْ ۙजो आई हो उनके पासatāhumإِنनहींinفِى(is) inصُدُورِهِمْउनके सीनों मेंṣudūrihimإِلَّاमगरillāكِبْرٌۭबड़ाईkib'runمَّاनहींهُمवोhumبِبَـٰلِغِيهِ ۚपहुँचने वाले उसेbibālighīhiفَٱسْتَعِذْपस पनाह तलब कीजिएfa-is'taʿidhبِٱللَّهِ ۖअल्लाह कीbil-lahiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuهُوَवो ही हैhuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वालाl-samīʿuٱلْبَصِيرُख़ूब देखने वालाl-baṣīru٥٦
निःसंदेह जो लोग बिना किसी प्रमाण के, जो उनके पास आया हो1, अल्लाह की आयतों के बारे में झगड़ते हैं, उनके दिलों में बड़ाई के सिवा कुछ नहीं है, जिस तक वे पहुँचने वाले नहीं हैं। अतः आप अल्लाह की शरण लें। निःसंदेह वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
४०:५७
لَخَلْقُयक़ीनन पैदा करनाlakhalquٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन काwal-arḍiأَكْبَرُज़्यादा बड़ा हैakbaruمِنْthanminخَلْقِपैदा करने सेkhalqiٱلنَّاسِइन्सानों केl-nāsiوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَअक्सरaktharaٱلنَّاسِलोगl-nāsiلَا(do) notيَعْلَمُونَनहीं वो इल्म रखतेyaʿlamūna٥٧
निश्चय ही आकाशों तथा धरती को पैदा करना, मनुष्य को पैदा करने से अधिक बड़ा (कार्य) है। परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।1
४०:५८
وَمَاऔर नहींwamāيَسْتَوِىबराबर हो सकतेyastawīٱلْأَعْمَىٰअंधाl-aʿmāوَٱلْبَصِيرُऔर देखने वालाwal-baṣīruوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiوَلَاऔर नाwalāٱلْمُسِىٓءُ ۚबदकारl-musīuقَلِيلًۭاकितना कमqalīlanمَّا(is) whatتَتَذَكَّرُونَतुम नसीहत पकड़ते होtatadhakkarūna٥٨
तथा अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं हो सकते। तथा जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, वे और बुरा कर्म करने वाला बराबर नहीं हो सकते। तुम (बहुत) कम ही शिक्षा ग्रहण करते हो।
४०:५९
إِنَّबेशकinnaٱلسَّاعَةَक़यामतl-sāʿataلَـَٔاتِيَةٌۭअलबत्ता आने वाली हैlaātiyatunلَّاnoرَيْبَनहीं कोई शकraybaفِيهَاउसमेंfīhāوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَअक्सरaktharaٱلنَّاسِलोगl-nāsiلَا(do) notيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान रखतेyu'minūna٥٩
निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन अधिकतर लोग ईमान नहीं लाते।
४०:६०
وَقَالَऔर कहाwaqālaرَبُّكُمُतुम्हारे रब नेrabbukumuٱدْعُونِىٓदुआ करो मुझसेid'ʿūnīأَسْتَجِبْमैं क़ुबूल करूँगाastajibلَكُمْ ۚतुम्हारे लिएlakumإِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيَسْتَكْبِرُونَतकब्बुर करते हैyastakbirūnaعَنْtoʿanعِبَادَتِىमेरी इबादत सेʿibādatīسَيَدْخُلُونَअनक़रीब वो दाख़िल होंगेsayadkhulūnaجَهَنَّمَजहन्नम मेंjahannamaدَاخِرِينَज़लील व ख़्वार हो करdākhirīna٦٠
तथा तुम्हारे पालनहार ने कहा है : तुम मुझे पुकारो। मैं तुम्हारी प्रार्थना1 स्वीकार करूँगा। निःसंदेह जो लोग मेरी इबादत से अहंकार करते हैं, वे शीघ्र ही अपमानित होकर जहन्नम में प्रवेश करेंगे।
४०:६१
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىवो है जिसनेalladhīجَعَلَबनायाjaʿalaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلَّيْلَरात कोal-laylaلِتَسْكُنُوا۟ताकि तुम सुकून पाओlitaskunūفِيهِउसमेंfīhiوَٱلنَّهَارَऔर दिन कोwal-nahāraمُبْصِرًا ۚरौशनmub'ṣiranإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَذُو(is) Full (of) Bountyladhūفَضْلٍअलबत्ता फ़ज़ल वाला हैfaḍlinعَلَىtoʿalāٱلنَّاسِलोगों परl-nāsiوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَअक्सरaktharaٱلنَّاسِलोगl-nāsiلَا(do) notيَشْكُرُونَनहीं वो शुक्र करतेyashkurūna٦١
अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए रात बनाई, ताकि तुम उसमें विश्राम करो तथा दिन को प्रकाशमान बनाया।1 निःसंदेह अल्लाह लोगों पर बड़ा अनुग्रह वाला है। लेकिन अधिकतर लोग आभार प्रकट नहीं करते।
४०:६२
ذَٰلِكُمُये हैdhālikumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuرَبُّكُمْरब तुम्हाराrabbukumخَـٰلِقُपैदा करने वालाkhāliquكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ काshayinلَّآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़ )ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَ ۖवो हीhuwaفَأَنَّىٰतो क्हाँ सेfa-annāتُؤْفَكُونَतुम फेरे जाते होtu'fakūna٦٢
यही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है, प्रत्येक वस्तु का रचयिता, उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। फिर तुम कहाँ बहकाए जाते हो?
४०:६३
كَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيُؤْفَكُफेरे जाते हैंyu'fakuٱلَّذِينَवो जोalladhīnaكَانُوا۟हैं वोkānūبِـَٔايَـٰتِआयात सेbiāyātiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiيَجْحَدُونَवो इन्कार करतेyajḥadūna٦٣
इसी प्रकार वे लोग बहकाए जाते रहे हैं, जो अल्लाह की आयतों का इनकार किया करते थे।
४०:६४
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىवो है जिसनेalladhīجَعَلَबनायाjaʿalaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaقَرَارًۭاक़रार गाहqarāranوَٱلسَّمَآءَऔर आसमान कोwal-samāaبِنَآءًۭछतbināanوَصَوَّرَكُمْऔर उसने सूरतें बनाईं तुम्हारीwaṣawwarakumفَأَحْسَنَतो उसने अच्छी बनाईंfa-aḥsanaصُوَرَكُمْसूरतें तुम्हारीṣuwarakumوَرَزَقَكُمऔर उसने रिज़्क़ दिया तुम्हेंwarazaqakumمِّنَofminaٱلطَّيِّبَـٰتِ ۚपाकीज़ा चीज़ों सेl-ṭayibātiذَٰلِكُمُये हैdhālikumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuرَبُّكُمْ ۖरब तुम्हाराrabbukumفَتَبَارَكَपस बाबरकत हैfatabārakaٱللَّهُअल्लाहl-lahuرَبُّजो रब हैrabbuٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों काl-ʿālamīna٦٤
अल्लाह ही है, जिसने धरती को तुम्हारे लिए निवास स्थान तथा आकाश को छत बनाया और तुम्हारा रूप बनाया, तो सुंदर रूप बनाया, तथा तुम्हें पाकीज़ा चीज़ों से जीविका प्रदान की। वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है। तो सारे संसार का पालनहार अल्लाह बहुत बरकत वाला है।
४०:६५
هُوَवोhuwaٱلْحَىُّज़िन्दा हैl-ḥayuلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَवो हीhuwaفَٱدْعُوهُपस पुकारो उसेfa-id'ʿūhuمُخْلِصِينَख़ालिस करने वाले हो करmukh'liṣīnaلَهُउसी के लिएlahuٱلدِّينَ ۗदीन कोl-dīnaٱلْحَمْدُसब तारीफ़l-ḥamduلِلَّهِअल्लाह के लिए हैlillahiرَبِّजो रब हैrabbiٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों काl-ʿālamīna٦٥
वही जीवित है, उसके सिवा कोई (सच्चा) पूज्य नहीं। अतः उसी को पुकारो, उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए। सब प्रशंसा सारे संसारों के पालनहार, अल्लाह के लिए है।
४०:६६
۞ قُلْकह दीजिएqulإِنِّىबेशक मैंinnīنُهِيتُरोका गया हूँ मैंnuhītuأَنْकिanأَعْبُدَमैं इबादत करूँaʿbudaٱلَّذِينَउनकी जिन्हेंalladhīnaتَدْعُونَतुम पुकारते होtadʿūnaمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiلَمَّاजबकिlammāجَآءَنِىَआ गईं मेरे पासjāaniyaٱلْبَيِّنَـٰتُवाज़ेह निशानियाँl-bayinātuمِنfromminرَّبِّىमेरे रब की तरफ़ सेrabbīوَأُمِرْتُऔर हुक्म दिया गया है मुझेwa-umir'tuأَنْकिanأُسْلِمَमैं फ़रमाबरदार हो जाऊँus'limaلِرَبِّरब के लिएlirabbiٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों केl-ʿālamīna٦٦
आप कह दें : निःसंदेह मुझे इस बात से रोक दिया गया है कि मैं उनकी इबादत करूँ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, जबकि मेरे पास मेरे पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण आ गए। तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं सारे संसारों के पालनहार का आज्ञाकारी रहूँ।
४०:६७
هُوَवोhuwaٱلَّذِىवो ही है जिसनेalladhīخَلَقَكُمपैदा किया तुम्हेंkhalaqakumمِّنfromminتُرَابٍۢमिट्टी सेturābinثُمَّफिरthummaمِنfromminنُّطْفَةٍۢनुत्फ़े सेnuṭ'fatinثُمَّफिरthummaمِنْfromminعَلَقَةٍۢजमे हुए ख़ून सेʿalaqatinثُمَّफिरthummaيُخْرِجُكُمْवो निकालता है तुम्हेंyukh'rijukumطِفْلًۭاबच्चा (बनाकर)ṭif'lanثُمَّफिरthummaلِتَبْلُغُوٓا۟ताकि तुम पहुँच जाओlitablughūأَشُدَّكُمْअपनी जवानी कोashuddakumثُمَّफिरthummaلِتَكُونُوا۟ताकि तुम हो जाओlitakūnūشُيُوخًۭا ۚबूढ़ेshuyūkhanوَمِنكُمऔर तुम में सेwaminkumمَّنकोई है जोmanيُتَوَفَّىٰफ़ौत कर दिया जाता हैyutawaffāمِنbefore minقَبْلُ ۖउससे पहलेqabluوَلِتَبْلُغُوٓا۟और ताकि तुम पहुँचोwalitablughūأَجَلًۭاएक वक़्त कोajalanمُّسَمًّۭىमुक़र्ररmusammanوَلَعَلَّكُمْऔर ताकि तुमwalaʿallakumتَعْقِلُونَतुम अक़्ल से काम लोtaʿqilūna٦٧
वही है, जिसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य से, फिर जमे हुए रक्त से। फिर वह तुम्हें बच्चे के रूप में निकालता है। फिर (बड़ा करता है) ताकि तुम अपनी पूरी शक्ति को पहुँचो, फिर ताकि तुम बूढ़े हो जाओ, तथा तुममें कुछ इससे पहले ही मर जाते हैं। और (यह इसलिए होता है) ताकि तुम अपनी निश्चित आयु को पहुँच जाओ, तथा ताकि तुम समझो।1
४०:६८
هُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىजोalladhīيُحْىِۦज़िन्दा करता हैyuḥ'yīوَيُمِيتُ ۖऔर वो मौत देता हैwayumītuفَإِذَاफिर जबfa-idhāقَضَىٰٓवो फ़ैसला करता हैqaḍāأَمْرًۭاकिसी काम काamranفَإِنَّمَاतो बेशकfa-innamāيَقُولُवो कहता हैyaqūluلَهُۥउसेlahuكُنहो जाkunفَيَكُونُतो वो हो जाता हैfayakūnu٦٨
वही है जो जीवित करता है और मारता है। फिर जब वह किसी काम का निर्णय कर लेता है, तो उसे मात्र यह कहता है कि "हो जा", तो वह हो जाता है।
४०:६९
أَلَمْक्या नहींalamتَرَआपने देखाtaraإِلَى[to]ilāٱلَّذِينَतरफ़ उनके जोalladhīnaيُجَـٰدِلُونَझगड़ते हैंyujādilūnaفِىٓconcerningءَايَـٰتِआयात मेंāyātiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiأَنَّىٰकहाँ सेannāيُصْرَفُونَवो फेरे जाते हैंyuṣ'rafūna٦٩
क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जो अल्लाह की आयतों के बारे में झगड़ते1 हैं, वे कहाँ फेरे जा रहे हैं?
४०:७०
ٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَذَّبُوا۟झुठलायाkadhabūبِٱلْكِتَـٰبِकिताब कोbil-kitābiوَبِمَآऔर उसे जोwabimāأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāبِهِۦसाथ उसकेbihiرُسُلَنَا ۖअपने रसूलों कोrusulanāفَسَوْفَतो अनक़रीबfasawfaيَعْلَمُونَवो जान लेंगेyaʿlamūna٧٠
जिन्होंने पुस्तक को और जो कुछ हमने अपने रसूलों को देकर भेजा, उसे झुठला दिया। तो शीघ्र ही वे जान लेंगे।
४०:७१
إِذِजबidhiٱلْأَغْلَـٰلُतौक़ होंगेl-aghlāluفِىٓ(will be) aroundأَعْنَـٰقِهِمْउनकी गर्दनों मेंaʿnāqihimوَٱلسَّلَـٰسِلُऔर ज़नजीरें होंगीwal-salāsiluيُسْحَبُونَवो घसीटे जाऐंगेyus'ḥabūna٧١
जब उनके गले में तौक़ होंगे तथा (पैरों में) बेड़ियाँ होंगी, वे घसीटे जाएँगे।
४०:७२
فِىInٱلْحَمِيمِखौलते पानी मेंl-ḥamīmiثُمَّफिरthummaفِىinٱلنَّارِआग मेंl-nāriيُسْجَرُونَवो झोंके जाऐंगेyus'jarūna٧٢
खौलते पानी में (घसीटे जाएँगे)। फिर आग में झोंक दिए जाएँगे।
४०:७३
ثُمَّफिरthummaقِيلَकहा जाएगाqīlaلَهُمْउन्हेंlahumأَيْنَकहाँ हैंaynaمَاवो जिन्हेंكُنتُمْथे तुमkuntumتُشْرِكُونَतुम शरीक ठहरातेtush'rikūna٧٣
फिर उनसे कहा जाएगा : कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम साझी बनाया करते थे?
४०:७४
مِنOther thanminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِ ۖअल्लाह केl-lahiقَالُوا۟वो कहेंगेqālūضَلُّوا۟वो गुम हो गएḍallūعَنَّاहमसेʿannāبَلबल्किbalلَّمْनाlamنَكُنथे हमnakunنَّدْعُوا۟हम पुकारतेnadʿūمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluشَيْـًۭٔا ۚकिसी भी चीज़ कोshayanكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيُضِلُّभटकाता हैyuḍilluٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कोl-kāfirīna٧٤
अल्लाह के सिवा? वे कहेंगे : वे हमसे गुम हो गए। बल्कि, हम इससे पहले किसी चीज़ को नहीं पुकारते थे। इसी प्रकार, अल्लाह काफ़िरों को गुमराह कर देता है।
४०:७५
ذَٰلِكُمये तुम्हारा (अंजाम)dhālikumبِمَاबवजह उसके जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَفْرَحُونَतुम ख़ुश होतेtafraḥūnaفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiبِغَيْرِबग़ैरbighayriٱلْحَقِّहक़ केl-ḥaqiوَبِمَاऔर बवजह उसके जोwabimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَمْرَحُونَतुम इतरातेtamraḥūna٧٥
यह यातना इसलिए है कि तुम धरती में नाहक़ बहुत प्रसन्न होते थे तथा इस कारण कि तुम अकड़ते फिरते थे।
४०:७६
ٱدْخُلُوٓا۟दाख़िल हो जाओud'khulūأَبْوَٰبَदरवाज़ों मेंabwābaجَهَنَّمَजहन्नम केjahannamaخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वालेkhālidīnaفِيهَا ۖउसमेंfīhāفَبِئْسَतो कितना बुरा हैfabi'saمَثْوَىठिकानाmathwāٱلْمُتَكَبِّرِينَतकब्बुर करने वालों काl-mutakabirīna٧٦
जहन्नम के द्वारों में प्रवेश कर जाओ, उसमें सदैव रहने वाले हो। अतः अभिमानियों का ठिकाना बहुत बुरा है।
४०:७७
فَٱصْبِرْपस सब्र कीजिएfa-iṣ'birإِنَّबेशकinnaوَعْدَवादाwaʿdaٱللَّهِअल्लाह काl-lahiحَقٌّۭ ۚसच्चा हैḥaqqunفَإِمَّاफिर अगरfa-immāنُرِيَنَّكَहम दिखाऐं आपकोnuriyannakaبَعْضَबाज़baʿḍaٱلَّذِىवो चीज़ जोalladhīنَعِدُهُمْहम वादा करते हैं उनसेnaʿiduhumأَوْयाawنَتَوَفَّيَنَّكَहम फ़ौत कर दें आपकोnatawaffayannakaفَإِلَيْنَاतो तरफ़ हमारे हीfa-ilaynāيُرْجَعُونَवो लौटाए जाऐंगेyur'jaʿūna٧٧
अतः आप धैर्य रखें। निःसंदेह अल्लाह का वादा सच्चा है। फिर यदि हम आपको उस (यातना) का कुछ भाग दिखा दें, जिसका हम उनसे वादा करते हैं या हम आपको (उससे पहले ही) मृत्यु दे दें, तो वे हमारी ही ओर लौटाए जाएँगे।1
४०:७८
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजे हमनेarsalnāرُسُلًۭاकई रसूलrusulanمِّنbefore youminقَبْلِكَआपसे पहलेqablikaمِنْهُمउनमें से बाज वो हैंmin'humمَّنजिन्हेंmanقَصَصْنَاबयान किया हमनेqaṣaṣnāعَلَيْكَआप परʿalaykaوَمِنْهُمऔर उनमें से बाज़ वो हैंwamin'humمَّنजिन्हेंmanلَّمْनहींlamنَقْصُصْहमने बयान कियाnaqṣuṣعَلَيْكَ ۗआप परʿalaykaوَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaلِرَسُولٍकिसी रसूल के लिएlirasūlinأَنकिanيَأْتِىَवो ले आएyatiyaبِـَٔايَةٍकोई निशानीbiāyatinإِلَّاमगरillāبِإِذْنِby (the) permissionbi-idh'niٱللَّهِ ۚअल्लाह के इज़्न सेl-lahiفَإِذَاफिर जबfa-idhāجَآءَआ गयाjāaأَمْرُहुक्मamruٱللَّهِअल्लाह काl-lahiقُضِىَफ़ैसला कर दिया गयाquḍiyaبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَخَسِرَऔर ख़सारे में पड़ गएwakhasiraهُنَالِكَउस वक़्तhunālikaٱلْمُبْطِلُونَअहले बातिलl-mub'ṭilūna٧٨
तथा (ऐ नबी!) हम आपसे पहले बहुत-से रसूलों को भेज चुके हैं, जिनमें से कुछ ऐसे हैं जिनका हाल हम आपसे वर्णन कर चुके हैं तथा उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनके हाल का वर्णन हमने आपसे नहीं किया है। तथा किसी रसूल के वश1 में यह नहीं था कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना कोई आयत (चमत्कार) ले आए। फिर जब अल्लाह का आदेश आ गया, तो सत्य के साथ निर्णय कर दिया गया और उस समय झूठे लोग घाटे में रहे।
४०:७९
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىवो है जिसनेalladhīجَعَلَबनाएjaʿalaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْأَنْعَـٰمَमवेशीl-anʿāmaلِتَرْكَبُوا۟ताकि तुम सवारी करोlitarkabūمِنْهَاउनमें से बाज़ परmin'hāوَمِنْهَاऔर उनमें से कुछwamin'hāتَأْكُلُونَतुम खाते होtakulūna٧٩
अल्लाह ही है, जिसने तुम्हारे लिए चौपाए बनाए, ताकि उनमें से कुछ पर तुम सवारी करो और उनमें से कुछ को तुम खाते हो।
४०:८०
وَلَكُمْऔर तुम्हारे लिएwalakumفِيهَاउनमेंfīhāمَنَـٰفِعُफ़ायदे हैंmanāfiʿuوَلِتَبْلُغُوا۟और ताकि तुम पहुँचोwalitablughūعَلَيْهَاउन परʿalayhāحَاجَةًۭहाजत कोḥājatanفِى(that is) inصُدُورِكُمْजो तुम्हारे सीनों में हैṣudūrikumوَعَلَيْهَاऔर उन परwaʿalayhāوَعَلَىand uponwaʿalāٱلْفُلْكِऔर कश्तियों परl-ful'kiتُحْمَلُونَतुम सवार किए जाते होtuḥ'malūna٨٠
तथा तुम्हारे लिए उनमें बहुत लाभ हैं। और ताकि उनपर सवार होकर तुम अपनी उस आवश्यकता तक पहुँचो, जो तुम्हारे दिलों में है। तथा उन (चौपायों) पर और नावों पर तुम सवार किए जाते हो।
४०:८१
وَيُرِيكُمْऔर वो दिखाता है तुम्हेंwayurīkumءَايَـٰتِهِۦनिशानियाँ अपनीāyātihiفَأَىَّपस कौन सीfa-ayyaءَايَـٰتِ(of the) Signsāyātiٱللَّهِअल्लाह की निशानियों काl-lahiتُنكِرُونَतुम इन्कार करोगेtunkirūna٨١
तथा वह तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है। तो तुम अल्लाह की किन-किन निशानियों का इनकार करोगे?
४०:८२
أَفَلَمْक्या भला नहींafalamيَسِيرُوا۟वो चले फिरेyasīrūفِىthroughٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَيَنظُرُوا۟तो वो देखतेfayanẓurūكَيْفَकैसाkayfaكَانَहुआkānaعَـٰقِبَةُअंजामʿāqibatuٱلَّذِينَउन लोगों का जोalladhīnaمِن(were) before themminقَبْلِهِمْ ۚउनसे पहले थेqablihimكَانُوٓا۟थे वोkānūأَكْثَرَअक्सरaktharaمِنْهُمْउनसेmin'humوَأَشَدَّऔर ज़्यादा शदीदwa-ashaddaقُوَّةًۭक़ुव्वत मेंquwwatanوَءَاثَارًۭاऔर आसार मेंwaāthāranفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَمَآपस नाfamāأَغْنَىٰकाम आयाaghnāعَنْهُمउन्हेंʿanhumمَّاजो कुछكَانُوا۟थे वोkānūيَكْسِبُونَवो कमाई करतेyaksibūna٨٢
तो क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं, ताकि देखते कि उन लोगों का परिणाम कैसा रहा, जो उनसे पहले गुज़र चुके हैं? वे (धन में) इनसे अधिक तथा शक्ति और धरती में (छोड़ी हुई) निशानियों1 में अधिक बढ़कर थे। किंतु वे जो कुछ कमाते थे, वह उनके कुछ काम न आया।
४०:८३
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَتْهُمْआए उनके पासjāathumرُسُلُهُمरसूल उनकेrusuluhumبِٱلْبَيِّنَـٰتِसाथ वाज़ेह दलाइल केbil-bayinātiفَرِحُوا۟तो वो ख़ुश हुएfariḥūبِمَاउस पर जोbimāعِندَهُمउनके पास थाʿindahumمِّنَofminaٱلْعِلْمِइल्म में सेl-ʿil'miوَحَاقَऔर घेर लियाwaḥāqaبِهِمउन्हेंbihimمَّاउसने जोكَانُوا۟थे वोkānūبِهِۦजिसकाbihiيَسْتَهْزِءُونَवो मज़ाक़ उड़ातेyastahziūna٨٣
फिर जब उनके रसूल उनके पास स्पष्ट प्रमाण लेकर आए, तो वे उस ज्ञान1 पर इतराने लगे, जो उनके पास था, और उन्हें उस (यातना) ने घेर लिया, जिसका वे उपहास कर रहे थे।
४०:८४
فَلَمَّاफिर जबfalammāرَأَوْا۟उन्होंने देखाra-awبَأْسَنَاअज़ाब हमाराbasanāقَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَحْدَهُۥअकेले उसी परwaḥdahuوَكَفَرْنَاऔर इन्कार किया हमनेwakafarnāبِمَاउनका जिन्हेंbimāكُنَّاथे हमkunnāبِهِۦसाथ उसकेbihiمُشْرِكِينَशरीक करतेmush'rikīna٨٤
फिर जब उन्होंने हमारी यातना देखी, तो कहने लगे : हम अल्लाह अकेले पर ईमान लाए, तथा उसका इनकार किया, जिसे हम उसका साझी बनाया करते थे।
४०:८५
فَلَمْपस नाfalamيَكُथाyakuيَنفَعُهُمْकि नफ़ा देता उन्हेंyanfaʿuhumإِيمَـٰنُهُمْईमान उनकाīmānuhumلَمَّاजबlammāرَأَوْا۟उन्होंने देखाra-awبَأْسَنَا ۖअज़ाब हमाराbasanāسُنَّتَतरीक़ा हैsunnataٱللَّهِअल्लाह काl-lahiٱلَّتِىवो जोallatīقَدْतहक़ीक़qadخَلَتْगुज़र चुकाkhalatفِىamongعِبَادِهِۦ ۖउसके बन्दों मेंʿibādihiوَخَسِرَऔर ख़सारे में पड़ गएwakhasiraهُنَالِكَउस वक़्तhunālikaٱلْكَـٰفِرُونَकाफ़िरl-kāfirūna٨٥
फिर यह न था कि जब उन्होंने हमारी यातना को देख लिया, तो उनका ईमान (लाना) उन्हें लाभ देता। यही अल्लाह की रीति है, जो उसके बंदों में गुज़र चुकी। और उस समय काफ़िर घाटे में पड़ गए।