६६

अत-तहरीम

मदनी १२ आयतें पारा २८
التحريم

सूरह अत-तहरीम (التحريم) पवित्र क़ुरआन का ६६ वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें १२ आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६६:१
يَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuلِمَक्योंlimaتُحَرِّمُआप हराम करते हैंtuḥarrimuمَآउसको जोأَحَلَّहलाल कियाaḥallaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَكَ ۖआपके लिएlakaتَبْتَغِىआप चाहते हैंtabtaghīمَرْضَاتَरज़ामन्दीmarḍātaأَزْوَٰجِكَ ۚअपनी बीवियों कीazwājikaوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun١
ऐ नबी! आप उस चीज़ को क्यों हराम करते हैं, जिसे अल्लाह ने आपके लिए हलाल किया है? आप अपनी पत्नियों की प्रसन्नता1 चाहते हैं? तथा अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
६६:२
قَدْतहक़ीक़qadفَرَضَमुक़र्रर कर दिया हैfaraḍaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumتَحِلَّةَखोलना (कफ़्फ़ारा)taḥillataأَيْمَـٰنِكُمْ ۚतुम्हारी क़समों काaymānikumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuمَوْلَىٰكُمْ ۖमौला है तुम्हाराmawlākumوَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلْعَلِيمُख़ूब इल्म वालाl-ʿalīmuٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वालाl-ḥakīmu٢
निश्चय अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारी क़समों का कफ़्फ़ारा1 निर्धारित कर दिया है। तथा अल्लाह तुम्हारा स्वामी है और वही सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
६६:३
وَإِذْऔर जबwa-idhأَسَرَّछुपा कर कीasarraٱلنَّبِىُّनबी नेl-nabiyuإِلَىٰtoilāبَعْضِतरफ़ बाज़baʿḍiأَزْوَٰجِهِۦअपनी बीवियों केazwājihiحَدِيثًۭاएक बातḥadīthanفَلَمَّاतो जबfalammāنَبَّأَتْउसने ख़बर दे दीnabba-atبِهِۦउसकीbihiوَأَظْهَرَهُऔर ज़ाहिर कर दिया उसेwa-aẓharahuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَيْهِउस परʿalayhiعَرَّفَउसने बता दियाʿarrafaبَعْضَهُۥबाज़ हिस्सा उसकाbaʿḍahuوَأَعْرَضَऔर उसने ऐराज़ कियाwa-aʿraḍaعَنۢ[of]ʿanبَعْضٍۢ ۖबाज़ सेbaʿḍinفَلَمَّاतो जबfalammāنَبَّأَهَاउसने ख़बर दी उसेnabba-ahāبِهِۦउस (बात) कीbihiقَالَتْवो कहने लगीqālatمَنْकिस नेmanأَنۢبَأَكَख़बर दी आपकोanba-akaهَـٰذَا ۖइसकीhādhāقَالَकहाqālaنَبَّأَنِىَख़बर दी मुझेnabba-aniyaٱلْعَلِيمُख़ूब इल्म वाले नेl-ʿalīmuٱلْخَبِيرُबहुत बाख़बर नेl-khabīru٣
और उस समय को याद करो, जब नबी ने अपनी किसी पत्नी से गोपनीय रूप से एक बात1 कही। फिर जब उस (पत्नी) ने वह बात बता दी और अल्लाह ने नबी को उससे अवगत कर दिया, तो नबी ने (उस पत्नी को) उसमें से कुछ बात बताई और कुछ टाल गए। फिर जब नबी ने उस पत्नी को इसके बारे में बताया, तो उसने कहा : यह आपको किसने बताया? आपने कहा : मूझे उस (अल्लाह) ने बताया, जो सब कुछ जानने वाला, सब की खबर रखने वाला है।
६६:४
إِنअगरinتَتُوبَآतुम दोनों तौबा करोtatūbāإِلَىtoilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह केl-lahiفَقَدْपस तहक़ीक़faqadصَغَتْझुक पड़े हैंṣaghatقُلُوبُكُمَا ۖदिल तुम दोनों केqulūbukumāوَإِنऔर अगरwa-inتَظَـٰهَرَاतुम एक दूसरे की मदद करोगीtaẓāharāعَلَيْهِउसके ख़िलाफ़ʿalayhiفَإِنَّपस बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवोhuwaمَوْلَىٰهُमौला है उसकाmawlāhuوَجِبْرِيلُऔर जिबराईलwajib'rīluوَصَـٰلِحُऔर नेकwaṣāliḥuٱلْمُؤْمِنِينَ ۖमोमिनीनl-mu'minīnaوَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُऔर फ़रिश्तेwal-malāikatuبَعْدَबादbaʿdaذَٰلِكَउसकेdhālikaظَهِيرٌमददगार हैंẓahīrun٤
यदि तुम दोनों1 अल्लाह के समक्ष तौबा करो, क्योंकि निश्चय तुम दोनों के दिल झुक गए हैं। और यदि तुम उनके विरुद्ध एक-दूसरे की सहायता करोगी, तो निःसंदेह अल्लाह उनका सहायक है तथा जिब्रील और सदाचारी ईमान वाले और इसके बाद समस्त फ़रिश्ते (उनके) सहायक हैं।
६६:५
عَسَىٰउम्मीद हैʿasāرَبُّهُۥٓरब उसकाrabbuhuإِنअगरinطَلَّقَكُنَّवो तलाक़ दे दे तुम्हेंṭallaqakunnaأَنकिanيُبْدِلَهُۥٓवो बदल कर दे दे उसेyub'dilahuأَزْوَٰجًاबीवियाँazwājanخَيْرًۭاबेहतरkhayranمِّنكُنَّतुम सेminkunnaمُسْلِمَـٰتٍۢमुसलमानmus'limātinمُّؤْمِنَـٰتٍۢमोमिनmu'minātinقَـٰنِتَـٰتٍۢइताअत गुज़ारqānitātinتَـٰٓئِبَـٰتٍतौबा गुज़ारtāibātinعَـٰبِدَٰتٍۢइबादत गुज़ारʿābidātinسَـٰٓئِحَـٰتٍۢरोज़ा दारsāiḥātinثَيِّبَـٰتٍۢशौहर दीदाthayyibātinوَأَبْكَارًۭاऔर कुवारियाँwa-abkāran٥
यदि वह (नबी) तुम्हें तलाक़ दे दें, तो निकट है कि उनका पालनहार तुम्हारे बदले में उन्हें तुमसे बेहतर पत्नियाँ प्रदान कर दे, जो इस्लाम वालियाँ, ईमान वालियाँ, आज्ञापालन करने वालियाँ, तौबा करने वालियाँ, इबादत करने वालियाँ, रोज़ा रखने वालियाँ, पहले से शादीशुदा तथा कुँवारियाँ हों।
६६:६
يَـٰٓأَيُّهَاOyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūقُوٓا۟बचाओأَنفُسَكُمْअपने आपकोanfusakumوَأَهْلِيكُمْऔर अपने घर वालों कोwa-ahlīkumنَارًۭاऐसी आग सेnāranوَقُودُهَاईंधन होगा उसकाwaqūduhāٱلنَّاسُलोगl-nāsuوَٱلْحِجَارَةُऔर पत्थरwal-ḥijāratuعَلَيْهَاउस परʿalayhāمَلَـٰٓئِكَةٌफ़रिश्ते हैंmalāikatunغِلَاظٌۭसख़्तghilāẓunشِدَادٌۭज़बरदस्तshidādunلَّاnotيَعْصُونَनहीं वो नाफ़रमानी करतेyaʿṣūnaٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaمَآउसमें जिसकाأَمَرَهُمْउसने हुक्म दिया उन्हेंamarahumوَيَفْعَلُونَऔर वो करते हैंwayafʿalūnaمَاजिसकाيُؤْمَرُونَवो हुक्म दिए जाते हैंyu'marūna٦
ऐ ईमान वालो! अपने आपको और अपने घर वालों को उस आग से बचाओ1 जिसका ईंधन मनुष्य और पत्थर हैं। जिसपर कठोर दिल, बलशाली फ़रिश्ते नियुक्त हैं। जो अल्लाह उन्हें आदेश दे, उसकी अवज्ञा नहीं करते तथा वे वही करते हैं, जिसका उन्हें आदेश दिया जाता है।
६६:७
يَـٰٓأَيُّهَاOyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلَا(Do) notتَعْتَذِرُوا۟ना तुम मअज़रत करोtaʿtadhirūٱلْيَوْمَ ۖआज के दिनl-yawmaإِنَّمَاबेशकinnamāتُجْزَوْنَतुम बदला दिए जा रहे होtuj'zawnaمَاउसका जोكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna٧
ऐ काफ़िरो! आज बहाने न बनाओ। तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
६६:८
يَـٰٓأَيُّهَاOyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūتُوبُوٓا۟तौबा करोtūbūإِلَىtoilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह केl-lahiتَوْبَةًۭतौबाtawbatanنَّصُوحًاख़ालिसnaṣūḥanعَسَىٰउम्मीद हैʿasāرَبُّكُمْरब तुम्हाराrabbukumأَنकिanيُكَفِّرَवो दूर कर देगाyukaffiraعَنكُمْतुम सेʿankumسَيِّـَٔاتِكُمْबुराइयाँ तुम्हारीsayyiātikumوَيُدْخِلَكُمْऔर वो दाख़िल कर देगा तुम्हेंwayud'khilakumجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruيَوْمَजिस दिनyawmaلَاnotيُخْزِىना रुस्वा करेगाyukh'zīٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلنَّبِىَّनबी कोl-nabiyaوَٱلَّذِينَऔर उन्हें जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūمَعَهُۥ ۖसाथ उसकेmaʿahuنُورُهُمْनूर उनकाnūruhumيَسْعَىٰदौड़ता होगाyasʿāبَيْنَbeforebaynaأَيْدِيهِمْउनके आगेaydīhimوَبِأَيْمَـٰنِهِمْऔर उनके दाऐंwabi-aymānihimيَقُولُونَवो कहेंगेyaqūlūnaرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāأَتْمِمْतमाम कर देatmimلَنَاहमारे लिएlanāنُورَنَاनूर हमाराnūranāوَٱغْفِرْऔर बख़्श देwa-igh'firلَنَآ ۖहमेंlanāإِنَّكَबेशक तूinnakaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun٨
ऐ ईमान वालो! अल्लाह के आगे सच्ची तौबा1 करो। निकट है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दे तथा तुम्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। जिस दिन अल्लाह नबी को तथा उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं, अपमानित नहीं करेगा। उनका प्रकाश2 उनके आगे तथा उनके दाएँ दौड़ रहा होगा। वे कह रहे होंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे तथा हमें क्षमा कर दे। निःसंदेह तू हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
६६:९
يَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuجَـٰهِدِजिहाद कीजिएjāhidiٱلْكُفَّارَकाफ़िरों सेl-kufāraوَٱلْمُنَـٰفِقِينَऔर मुनाफ़िक़ों सेwal-munāfiqīnaوَٱغْلُظْऔर सख़्ती कीजिएwa-ugh'luẓعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimوَمَأْوَىٰهُمْऔर ठिकाना उनकाwamawāhumجَهَنَّمُ ۖजहन्नम हैjahannamuوَبِئْسَऔर कितनी बुरी हैwabi'saٱلْمَصِيرُलौटने की जगहl-maṣīru٩
ऐ नबी! काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद करें और उनपर सख़्ती करें1 और उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
६६:१०
ضَرَبَबयान कीḍarabaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمَثَلًۭاएक मिसालmathalanلِّلَّذِينَउनके लिए जिन्होंनेlilladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūٱمْرَأَتَ(the) wifeim'ra-ataنُوحٍۢनूह की बीवी कीnūḥinوَٱمْرَأَتَ(and the) wifewa-im'ra-ataلُوطٍۢ ۖऔर लूत की बीवी कीlūṭinكَانَتَاवो दोनों थींkānatāتَحْتَनीचेtaḥtaعَبْدَيْنِदो बन्दों केʿabdayniمِنْofminعِبَادِنَاहमारे बन्दों में सेʿibādināصَـٰلِحَيْنِजो दोनों नेक थेṣāliḥayniفَخَانَتَاهُمَاतो उन दोनों ने ख़ियानत कीfakhānatāhumāفَلَمْतो नाfalamيُغْنِيَاवो दोनों काम आ सकेyugh'niyāعَنْهُمَاउन दोनों केʿanhumāمِنَfromminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَقِيلَऔर कह दिया गयाwaqīlaٱدْخُلَاदोनों दाख़िल हो जाओud'khulāٱلنَّارَआग मेंl-nāraمَعَwithmaʿaٱلدَّٰخِلِينَसाथ दाख़िल होने वालों केl-dākhilīna١٠
अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जिन्होंने कुफ़्र किया, नूह की पत्नी तथा लूत की पत्नी का उदाहरण दिया है। वे दोनों हमारे बंदों में से दो नेक बंदों के विवाह में थीं। फिर उन दोनों (स्त्रियों) ने उनके साथ विश्वासघात1 किया। तो वे दोनों (रसूल) अल्लाह के यहाँ उनके कुछ काम न आए। तथा (दोनों स्त्रियों से) कहा गया : तुम दोनों जहन्नम में प्रवेश कर जाओ, प्रवेश करने वालों के साथ।
६६:११
وَضَرَبَऔर बयान कीwaḍarabaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمَثَلًۭاएक मिसालmathalanلِّلَّذِينَउनके लिए जोlilladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūٱمْرَأَتَ(the) wifeim'ra-ataفِرْعَوْنَफ़िरऔन की बीवी कीfir'ʿawnaإِذْजबidhقَالَتْउसने कहाqālatرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱبْنِबनाib'niلِىमेरे लिएعِندَكَअपने पासʿindakaبَيْتًۭاएक घरbaytanفِىinٱلْجَنَّةِजन्नत मेंl-janatiوَنَجِّنِىऔर निजात दे मुझेwanajjinīمِنfromminفِرْعَوْنَफ़िरऔन सेfir'ʿawnaوَعَمَلِهِۦऔर उसके अमल सेwaʿamalihiوَنَجِّنِىऔर निजात दे मुझेwanajjinīمِنَfromminaٱلْقَوْمِउन लोगों सेl-qawmiٱلظَّـٰلِمِينَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimīna١١
तथा अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जो ईमान लाए, फ़िरऔन की पत्नी का उदाहरण1 दिया है। जब उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए अपने पास जन्नत में एक घर बना तथा मुझे फ़िरऔन और उसके कर्म से बचा ले और मुझे अत्याचारी लोगों से छुटकारा दे।
६६:१२
وَمَرْيَمَऔर मरियमwamaryamaٱبْنَتَबेटीib'nataعِمْرَٰنَइमरान कीʿim'rānaٱلَّتِىٓवो जिसनेallatīأَحْصَنَتْमहफ़ूज़ रखाaḥṣanatفَرْجَهَاअपनी शर्मगाह कोfarjahāفَنَفَخْنَاतो फ़ूँक दिया हमनेfanafakhnāفِيهِउसमेंfīhiمِنofminرُّوحِنَاअपनी रूह सेrūḥināوَصَدَّقَتْऔर उसने तस्दीक़ कीwaṣaddaqatبِكَلِمَـٰتِकलमात कीbikalimātiرَبِّهَاअपने रब केrabbihāوَكُتُبِهِۦऔर उसकी किताबों कीwakutubihiوَكَانَتْऔर थी वोwakānatمِنَofminaٱلْقَـٰنِتِينَफ़रमाबरदारों में सेl-qānitīna١٢
तथा इमरान की बेटी मरयम का (उदाहरण प्रस्तुत किया है), जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की, तो हमने उसमें अपनी एक रूह़ फूँक दी तथा उसने अपने पालनहार की बातों और उसकी पुस्तकों की पुष्टि की और वह इबादत करने वालों में से थी।