६७

अल-मुल्क

मक्की ३० आयतें पारा २९
الملك

सूरह अल-मुल्क (الملك) पवित्र क़ुरआन का ६७ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ३० आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६७:१
تَبَـٰرَكَबहुत बाबरकत हैtabārakaٱلَّذِىवो जोalladhīبِيَدِهِउसी के हाथ में हैbiyadihiٱلْمُلْكُबादशाहतl-mul'kuوَهُوَऔर वोwahuwaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun١
बहुत बरकत वाला है वह (अल्लाह) जिसके हाथ में सारा राज्य है और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान् है।
६७:२
ٱلَّذِىवो जिसनेalladhīخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلْمَوْتَमौतl-mawtaوَٱلْحَيَوٰةَऔर ज़िन्दगी कोwal-ḥayataلِيَبْلُوَكُمْताकि वो आज़माए तुम्हेंliyabluwakumأَيُّكُمْकौन तुम में सेayyukumأَحْسَنُज़्यादा अच्छा हैaḥsanuعَمَلًۭا ۚअमल मेंʿamalanوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्त हैl-ʿazīzuٱلْغَفُورُबहुत बख़्शने वाला हैl-ghafūru٢
जिसने मृत्यु तथा जीवन को पैदा किया, ताकि तुम्हारा परीक्षण करे कि तुम में किसका कर्म अधिक अच्छा है? तथा वही प्रभुत्वशाली, अति क्षमावान् है।1
६७:३
ٱلَّذِىवो जिसनेalladhīخَلَقَपैदा किएkhalaqaسَبْعَसातsabʿaسَمَـٰوَٰتٍۢआसमानsamāwātinطِبَاقًۭا ۖऊपर तलेṭibāqanمَّاनहींتَرَىٰतुम देखोगेtarāفِىinخَلْقِतख़लीक़ मेंkhalqiٱلرَّحْمَـٰنِरहमान कीl-raḥmāniمِنanyminتَفَـٰوُتٍۢ ۖकोई ख़ललtafāwutinفَٱرْجِعِफिर लौटाओfa-ir'jiʿiٱلْبَصَرَनिगाह कोl-baṣaraهَلْक्याhalتَرَىٰतुम देखते होtarāمِنanyminفُطُورٍۢकोई शिगाफ़fuṭūrin٣
जिसने ऊपर-तले सात आकाश बनाए। तुम अत्यंत दयावान् की रचना में कोई असंगति नहीं देखोगे। फिर पुनः देखो, क्या तुम्हें कोई दरार दिखाई देता है?
६७:४
ثُمَّफिरthummaٱرْجِعِलौटाओir'jiʿiٱلْبَصَرَनिगाह कोl-baṣaraكَرَّتَيْنِबार-बारkarratayniيَنقَلِبْलौट आएगीyanqalibإِلَيْكَतेरी तरफ़ilaykaٱلْبَصَرُनिगाहl-baṣaruخَاسِئًۭاज़लील हो करkhāsi-anوَهُوَऔर वोwahuwaحَسِيرٌۭथकी हुई होगीḥasīrun٤
फिर बार-बार निगाह दौड़ाओ। निगाह असफल होकर तुम्हारी ओर पलट आएगी और वह थकी हुई होगी।
६७:५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadزَيَّنَّاमुज़य्यन किया हमनेzayyannāٱلسَّمَآءَआसमान कोl-samāaٱلدُّنْيَاदुनिया केl-dun'yāبِمَصَـٰبِيحَसाथ चिराग़ों केbimaṣābīḥaوَجَعَلْنَـٰهَاऔर बनाया हमने उन्हेंwajaʿalnāhāرُجُومًۭاमारने की चीज़rujūmanلِّلشَّيَـٰطِينِ ۖशैतानों के लिएlilshayāṭīniوَأَعْتَدْنَاऔर तैयार कर रखा है हमनेwa-aʿtadnāلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابَअज़ाबʿadhābaٱلسَّعِيرِभड़कती आग काl-saʿīri٥
और निःसंदेह हमने (धरती से) निकटतम आकाश को दीपों से सजाया है तथा हमने उन्हें शैतानों1 को मार भगाने का साधन बनाया है और हमने उनके लिए भड़कती हुई आग की यातना तैयार कर रखी है।
६७:६
وَلِلَّذِينَऔर उनके लिए जिन्होंनेwalilladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِرَبِّهِمْसाथ अपने रब केbirabbihimعَذَابُअज़ाब हैʿadhābuجَهَنَّمَ ۖजहन्नम काjahannamaوَبِئْسَऔर कितना बुरा हैwabi'saٱلْمَصِيرُठिकानाl-maṣīru٦
और उन लोगों के लिए जिन्होंने अपने पालनहार का इनकार किया, जहन्नम की यातना है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
६७:७
إِذَآजबidhāأُلْقُوا۟वो डाले जाऐंगेul'qūفِيهَاउसमेंfīhāسَمِعُوا۟वो सुनेंगेsamiʿūلَهَاउसकाlahāشَهِيقًۭاचिल्लाना/ दहाड़नाshahīqanوَهِىَऔर वोwahiyaتَفُورُजोश खा रही होगीtafūru٧
जब वे उसमें फेंके जाएँगे, तो उसकी दहाड़ सुनेंगे और वह उबल रहा होगा।
६७:८
تَكَادُक़रीब है किtakāduتَمَيَّزُवो फट जाएtamayyazuمِنَfromminaٱلْغَيْظِ ۖग़ज़ब सेl-ghayẓiكُلَّمَآजब भीkullamāأُلْقِىَडाली जाएगीul'qiyaفِيهَاउसमेंfīhāفَوْجٌۭकोई जमाअतfawjunسَأَلَهُمْपूछेंगे उनसेsa-alahumخَزَنَتُهَآनिगरान उनकेkhazanatuhāأَلَمْक्या नहींalamيَأْتِكُمْआया था तुम्हारे पासyatikumنَذِيرٌۭकोई डराने वालाnadhīrun٨
क़रीब होगा कि वह क्रोध से फट जाए। जब भी कोई समूह उसमें फेंका जाएगा, तो उसके प्रहरी उनसे पूछेंगे : क्या तुम्हारे पास कोई सावधान करने वाला नहीं आया?
६७:९
قَالُوا۟वो कहेंगेqālūبَلَىٰक्यों नहींbalāقَدْतहक़ीक़qadجَآءَنَاआया हमारे पासjāanāنَذِيرٌۭडराने वालाnadhīrunفَكَذَّبْنَاतो झुठला दिया हमनेfakadhabnāوَقُلْنَاऔर कहा हमनेwaqul'nāمَاनहींنَزَّلَनाज़िल कीnazzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِنanyminشَىْءٍकोई चीज़shayinإِنْनहींinأَنتُمْतुमantumإِلَّاमगरillāفِىinضَلَـٰلٍۢगुमराही मेंḍalālinكَبِيرٍۢबहुत बड़ीkabīrin٩
वे कहेंगे : क्यों नहीं, निश्चय हमारे पास सावधान करने वाला आया था। पर, हमने झुठला दिया और हमने कहा कि अल्लाह ने कुछ नहीं उतारा है। तुम तो बहुत बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो।
६७:१०
وَقَالُوا۟और वो कहेंगेwaqālūلَوْअगरlawكُنَّاहोते हमkunnāنَسْمَعُहम सुनतेnasmaʿuأَوْयाawنَعْقِلُहम समझतेnaʿqiluمَاनाكُنَّاहोते हमkunnāفِىٓamongأَصْحَـٰبِसाथियों मेंaṣḥābiٱلسَّعِيرِभड़कती आग केl-saʿīri١٠
तथा वे कहेंगे : यदि हम सुनते होते या समझते होते, तो भड़कती हुई आग वालों में न होते।
६७:११
فَٱعْتَرَفُوا۟तो वो ऐतराफ़ करेंगेfa-iʿ'tarafūبِذَنۢبِهِمْअपने गुनाह काbidhanbihimفَسُحْقًۭاतो दूरी(लानत) हैfasuḥ'qanلِّأَصْحَـٰبِसाथियों को लिएli-aṣḥābiٱلسَّعِيرِभड़कती आग केl-saʿīri١١
इस तरह, वे अपने पाप को स्वीकार करेंगे। तो दूरी1 है भड़कती हुई आग वालों के लिए।
६७:१२
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيَخْشَوْنَडरते हैंyakhshawnaرَبَّهُمअपने रब सेrabbahumبِٱلْغَيْبِग़ायबानाbil-ghaybiلَهُمउनके लिए हैlahumمَّغْفِرَةٌۭबख़्शिशmaghfiratunوَأَجْرٌۭऔर अजरwa-ajrunكَبِيرٌۭबहुत बड़ाkabīrun١٢
निःसंदेह जो लोग अपने रब से बिन देखे डरते हैं, उनके लिए क्षमा तथा बड़ा प्रतिफल है।1
६७:१३
وَأَسِرُّوا۟और छुपाओwa-asirrūقَوْلَكُمْबात अपनीqawlakumأَوِयाawiٱجْهَرُوا۟ज़ाहिर करोij'harūبِهِۦٓ ۖउसेbihiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuعَلِيمٌۢख़ूब जानने वाला हैʿalīmunبِذَاتِof what (is in)bidhātiٱلصُّدُورِसीनों वाले(भेद)l-ṣudūri١٣
और तुम अपनी बात छिपाओ या उसे ज़ोर से कहो, निश्चय वह सीनों के भेदों को भी जानता है।
६७:१४
أَلَاक्या नहींalāيَعْلَمُवो जानेगाyaʿlamuمَنْजिसनेmanخَلَقَपैदा कियाkhalaqaوَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱللَّطِيفُबहुत बारीक बीनl-laṭīfuٱلْخَبِيرُख़ूब बाख़बरl-khabīru١٤
क्या वह नहीं जानेगा जिसने पैदा किया?! जबकि वह सूक्ष्मदर्शी1, पूर्ण ख़बर रखने वाला है।
६७:१५
هُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىजिसनेalladhīجَعَلَबनायाjaʿalaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaذَلُولًۭاताबेअdhalūlanفَٱمْشُوا۟पस चलोfa-im'shūفِىinمَنَاكِبِهَاउसके अतराफ़ मेंmanākibihāوَكُلُوا۟और खाओwakulūمِنofminرِّزْقِهِۦ ۖउसके रिज़्क़ में सेriz'qihiوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसी केwa-ilayhiٱلنُّشُورُदोबारा उठना हैl-nushūru١٥
वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को वशीभूत कर दिया, अतः उसके रास्तों में चलो-फिरो तथा उसकी प्रदान की हुई रोज़ी में से खाओ। और उसी की ओर तुम्हें फिर जीवित हो कर जाना है।
६७:१६
ءَأَمِنتُمक्या बेख़ौफ़ हो गए तुमa-amintumمَّنउससे जोmanفِى(is) inٱلسَّمَآءِआसमान में हैl-samāiأَنकिanيَخْسِفَवो धँसा देyakhsifaبِكُمُतुम्हेंbikumuٱلْأَرْضَज़मीन मेंl-arḍaفَإِذَاतो अचानकfa-idhāهِىَवोhiyaتَمُورُवो लरज़ने लगेtamūru١٦
क्या तुम उससे निर्भय हो गए हो, जो आकाश में है कि वह तुम्हें धरती में धँसा दे, फिर वह अचानक काँपने लगे?
६७:१७
أَمْक्याamأَمِنتُمबेख़ौफ़ हो गए तुमamintumمَّنउससे जोmanفِى(is) inٱلسَّمَآءِआसमान में हैl-samāiأَنकिanيُرْسِلَवो भेजेyur'silaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumحَاصِبًۭا ۖपत्थरों की आँधीḥāṣibanفَسَتَعْلَمُونَपस अनक़रीब तुम जान लोगेfasataʿlamūnaكَيْفَकैसा थाkayfaنَذِيرِडराना मेराnadhīri١٧
अथवा तुम उससे निर्भय हो गए हो, जो आकाश में है कि वह तुम पर पत्थर बरसा दे, फिर तुम जान लोगे कि मेरा डराना कैसा है?
६७:१८
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadكَذَّبَझुठलायाkadhabaٱلَّذِينَउन लोगों ने जोalladhīnaمِنfromminقَبْلِهِمْउनसे पहले थेqablihimفَكَيْفَतो कैसाfakayfaكَانَथाkānaنَكِيرِअज़ाब मेराnakīri١٨
तथा निश्चय इनसे पहले के लोग1 भी झुठला चुके हैं, फिर किस तरह था मेरा इनकार?
६७:१९
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَرَوْا۟उन्होंने देखाyarawإِلَى[to]ilāٱلطَّيْرِतरफ़ परिन्दों केl-ṭayriفَوْقَهُمْअपने ऊपरfawqahumصَـٰٓفَّـٰتٍۢपर फैलाए हुएṣāffātinوَيَقْبِضْنَ ۚऔर वो समेट लेते हैंwayaqbiḍ'naمَاनहींيُمْسِكُهُنَّथामता उन्हेंyum'sikuhunnaإِلَّاमगरillāٱلرَّحْمَـٰنُ ۚरहमानl-raḥmānuإِنَّهُۥबेशक वोinnahuبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍۭचीज़ कोshayinبَصِيرٌख़ूब देखने वाला हैbaṣīrun١٩
क्या उन्होंने अपने ऊपर पंख फैलाते तथा समेटते हुए पक्षियों को नहीं देखे? अत्यंत दयावान् के सिवा कोई उन्हें थाम नहीं रहा होता। निःसंदेह वह प्रत्येक चीज़ को खूब देखने वाला है।
६७:२०
أَمَّنْया कौन हैammanهَـٰذَاवोhādhāٱلَّذِىजोalladhīهُوَवोhuwaجُندٌۭलश्कर होjundunلَّكُمْतुम्हाराlakumيَنصُرُكُمवो मदद करे तुम्हारीyanṣurukumمِّنfromminدُونِसिवाएdūniٱلرَّحْمَـٰنِ ۚरहमान केl-raḥmāniإِنِनहीं हैंiniٱلْكَـٰفِرُونَकाफ़िरl-kāfirūnaإِلَّاमगरillāفِىinغُرُورٍधोखे मेंghurūrin٢٠
या वह कौन है जो तुम्हारी सेना बनकर अल्लाह के विरुद्ध तुम्हारी सहायता करे? इनकार करने वाले तो मात्र धोखे में पड़े हैं।
६७:२१
أَمَّنْया कौन हैammanهَـٰذَاवोhādhāٱلَّذِىजोalladhīيَرْزُقُكُمْरिज़्क़ देगा तुम्हेंyarzuqukumإِنْअगरinأَمْسَكَवो रोक लेamsakaرِزْقَهُۥ ۚरिज़्क़ अपनाriz'qahuبَلबल्किbalلَّجُّوا۟वो अड़े हुए हैंlajjūفِىinعُتُوٍّۢसरकशी मेंʿutuwwinوَنُفُورٍऔर बिदकने मेंwanufūrin٢١
या वह कौन है जो तुम्हें रोज़ी दे, यदि वह अपनी रोज़ी रोक ले? बल्कि वे सरकशी तथा बिदकने पर अड़े हुए हैं।1
६७:२२
أَفَمَنक्या फिर जोafamanيَمْشِىचलता हैyamshīمُكِبًّاऔंधाmukibbanعَلَىٰonʿalāوَجْهِهِۦٓउपने चेहरे परwajhihiأَهْدَىٰٓज़्यादा हिदायत याफ़्ता हैahdāأَمَّنया जोammanيَمْشِىचलता हैyamshīسَوِيًّاसीधाsawiyyanعَلَىٰonʿalāصِرَٰطٍۢऊपर रास्तेṣirāṭinمُّسْتَقِيمٍۢसीधे केmus'taqīmin٢٢
तो क्या वह व्यक्ति जो अपने मुँह के बल उलटा होकर चलता है, अधिक मार्गदर्शन पर है या वह जो सीधा होकर सीधे मार्ग पर चलता है?
६७:२३
قُلْकह दीजिएqulهُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىٓजिसनेalladhīأَنشَأَكُمْपैदा किया तुम्हेंansha-akumوَجَعَلَऔर उसने बनाएwajaʿalaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلسَّمْعَकानl-samʿaوَٱلْأَبْصَـٰرَऔर आँखेंwal-abṣāraوَٱلْأَفْـِٔدَةَ ۖऔर दिलwal-afidataقَلِيلًۭاLittleqalīlanمَّاकितना कमتَشْكُرُونَतुम शुक्र अदा करते होtashkurūna٢٣
आप कह दें : वही है जिसने तुम्हें पैदा किया तथा तुम्हारे लिए कान तथा आँखें और दिल बनाए। तुम बहुत कम आभार प्रकट करते हो।
६७:२४
قُلْकह दीजिएqulهُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىजिसनेalladhīذَرَأَكُمْफैलाया तुम्हेंdhara-akumفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसी केwa-ilayhiتُحْشَرُونَतुम इकट्ठे किए जाओगेtuḥ'sharūna٢٤
आप कह दें : वही है जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और तुम उसी की ओर एकत्र1 किए जाओगे।
६७:२५
وَيَقُولُونَऔर वो कहते हैंwayaqūlūnaمَتَىٰकब होगाmatāهَـٰذَاयेhādhāٱلْوَعْدُवादाl-waʿduإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٢٥
तथा वे कहते हैं : (क़ियामत का) यह वचन कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
६७:२६
قُلْकह दीजिएqulإِنَّمَاबेशकinnamāٱلْعِلْمُइल्म (उसका)l-ʿil'muعِندَपास हैʿindaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَإِنَّمَآऔर बेशकwa-innamāأَنَا۠मैंanāنَذِيرٌۭडराने वाल हूँnadhīrunمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun٢٦
आप कह दें : इसका ज्ञान तो केवल अल्लाह के पास है। और मैं तो मात्र एक स्पष्ट डराने वाला हूँ।
६७:२७
فَلَمَّاफिर जबfalammāرَأَوْهُवो देख लेंगे उसेra-awhuزُلْفَةًۭनज़दीकzul'fatanسِيٓـَٔتْबिगड़ जाऐंगेsīatوُجُوهُचेहरेwujūhuٱلَّذِينَउनके जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَقِيلَऔर कह दिया जाएगाwaqīlaهَـٰذَاये हैhādhāٱلَّذِىवो जोalladhīكُنتُمथे तुमkuntumبِهِۦजिसकोbihiتَدَّعُونَतुम माँगा करतेtaddaʿūna٢٧
फिर जब वे उसे निकट देखेंगे, तो उन लोगों के चेहरे बिगड़ जाएँगे जिन्होंने इनकार किया और कहा जाएगा : यही है वह जो तुम माँगा करते थे।
६७:२८
قُلْकह दीजिएqulأَرَءَيْتُمْक्या देखा तुमनेara-aytumإِنْअगरinأَهْلَكَنِىَहलाक कर दे मुझेahlakaniyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuوَمَنऔर उसे जोwamanمَّعِىَमेरे साथ हैmaʿiyaأَوْयाawرَحِمَنَاवो रहम करे हम परraḥimanāفَمَنतो कौनfamanيُجِيرُपनाह देगाyujīruٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कोl-kāfirīnaمِنْfromminعَذَابٍअज़ाब सेʿadhābinأَلِيمٍۢदर्दनाकalīmin٢٨
आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि अल्लाह मुझे और उनको, जो मेरे साथ हैं, विनष्ट कर दे या हम पर दया करे, तो काफ़िरों को दर्दनाक यातना1 से कौन शरण देगा?
६७:२९
قُلْकह दीजिएqulهُوَवो हीhuwaٱلرَّحْمَـٰنُरहमान हैl-raḥmānuءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِهِۦउस परbihiوَعَلَيْهِऔर उसी परwaʿalayhiتَوَكَّلْنَا ۖतवक्कुल किया हमनेtawakkalnāفَسَتَعْلَمُونَपस अनक़रीब तुम जान लोगेfasataʿlamūnaمَنْकौन हैmanهُوَजोhuwaفِى(that is) inضَلَـٰلٍۢगुमराही में हैḍalālinمُّبِينٍۢखुली-खुलीmubīnin٢٩
आप कह दें : वही अत्यंत दयावान् है। हम उसपर ईमान लाए तथा हमने उसी पर भरोसा किया। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे कि वह कौन है जो खुली गुमराही में है।
६७:३०
قُلْकह दीजिएqulأَرَءَيْتُمْक्या देखा तुमनेara-aytumإِنْअगरinأَصْبَحَहो जाएaṣbaḥaمَآؤُكُمْपानी तुम्हाराmāukumغَوْرًۭاगहराghawranفَمَنतो कौन है जोfamanيَأْتِيكُمलाए तुम्हारे पासyatīkumبِمَآءٍۢपानीbimāinمَّعِينٍۭबहता हुआmaʿīnin٣٠
आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि तुम्हारा पानी गहराई में चला जाए, तो कौन है जो तुम्हारे पास बहता हुआ पानी लाएगा?