६८
अल-क़लम
القلم
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ
साथ नाम
bis'mi
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६८:१
نٓ ۚ
ن
noon
ن وَٱلْقَلَمِ क़सम है क़लम की wal-qalami
क़सम है क़लम की وَمَا और उसकी जो wamā
और उसकी जो يَسْطُرُونَ वो लिखते हैं yasṭurūna
वो लिखते हैं ١ (1)
(1)
ن وَٱلْقَلَمِ क़सम है क़लम की wal-qalami
क़सम है क़लम की وَمَا और उसकी जो wamā
और उसकी जो يَسْطُرُونَ वो लिखते हैं yasṭurūna
वो लिखते हैं ١ (1)
(1)
नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी1 जो वे लिखते हैं।
६८:२
مَآ
नहीं हैं
mā
नहीं हैं أَنتَ आप anta
आप بِنِعْمَةِ नेअमत से biniʿ'mati
नेअमत से رَبِّكَ अपने रब की rabbika
अपने रब की بِمَجْنُونٍۢ कोई मजनून bimajnūnin
कोई मजनून ٢ (2)
(2)
नहीं हैं أَنتَ आप anta
आप بِنِعْمَةِ नेअमत से biniʿ'mati
नेअमत से رَبِّكَ अपने रब की rabbika
अपने रब की بِمَجْنُونٍۢ कोई मजनून bimajnūnin
कोई मजनून ٢ (2)
(2)
आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।
६८:३
وَإِنَّ
और बेशक
wa-inna
और बेशक لَكَ आपके लिए laka
आपके लिए لَأَجْرًا यक़ीनन अजर है la-ajran
यक़ीनन अजर है غَيْرَ ना ghayra
ना مَمْنُونٍۢ ख़त्म होने वाला mamnūnin
ख़त्म होने वाला ٣ (3)
(3)
और बेशक لَكَ आपके लिए laka
आपके लिए لَأَجْرًا यक़ीनन अजर है la-ajran
यक़ीनन अजर है غَيْرَ ना ghayra
ना مَمْنُونٍۢ ख़त्म होने वाला mamnūnin
ख़त्म होने वाला ٣ (3)
(3)
तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।
६८:४
وَإِنَّكَ
और बेशक आप
wa-innaka
और बेशक आप لَعَلَىٰ surely (are) laʿalā
surely (are) خُلُقٍ (of) a moral character khuluqin
(of) a moral character عَظِيمٍۢ यक़ीनन बुलन्द अख़लाक़ पर हैं ʿaẓīmin
यक़ीनन बुलन्द अख़लाक़ पर हैं ٤ (4)
(4)
और बेशक आप لَعَلَىٰ surely (are) laʿalā
surely (are) خُلُقٍ (of) a moral character khuluqin
(of) a moral character عَظِيمٍۢ यक़ीनन बुलन्द अख़लाक़ पर हैं ʿaẓīmin
यक़ीनन बुलन्द अख़लाक़ पर हैं ٤ (4)
(4)
तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।
६८:५
فَسَتُبْصِرُ
पस अनक़रीब आप देखेंगे
fasatub'ṣiru
पस अनक़रीब आप देखेंगे وَيُبْصِرُونَ और वो भी देखेंगे wayub'ṣirūna
और वो भी देखेंगे ٥ (5)
(5)
पस अनक़रीब आप देखेंगे وَيُبْصِرُونَ और वो भी देखेंगे wayub'ṣirūna
और वो भी देखेंगे ٥ (5)
(5)
अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।
६८:६
بِأَييِّكُمُ
कौन तुम में से
bi-ayyikumu
कौन तुम में से ٱلْمَفْتُونُ फ़ितने में डाला हुआ है l-maftūnu
फ़ितने में डाला हुआ है ٦ (6)
(6)
कौन तुम में से ٱلْمَفْتُونُ फ़ितने में डाला हुआ है l-maftūnu
फ़ितने में डाला हुआ है ٦ (6)
(6)
कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।
६८:७
إِنَّ
बेशक
inna
बेशक رَبَّكَ रब आपका rabbaka
रब आपका هُوَ वो huwa
वो أَعْلَمُ ज़्यादा जानता है aʿlamu
ज़्यादा जानता है بِمَن उसे जो biman
उसे जो ضَلَّ भटक गया ḍalla
भटक गया عَن from ʿan
from سَبِيلِهِۦ उसके रास्ते से sabīlihi
उसके रास्ते से وَهُوَ और वो wahuwa
और वो أَعْلَمُ ज़्यादा जानता है aʿlamu
ज़्यादा जानता है بِٱلْمُهْتَدِينَ हिदायत पाने वालों को bil-muh'tadīna
हिदायत पाने वालों को ٧ (7)
(7)
बेशक رَبَّكَ रब आपका rabbaka
रब आपका هُوَ वो huwa
वो أَعْلَمُ ज़्यादा जानता है aʿlamu
ज़्यादा जानता है بِمَن उसे जो biman
उसे जो ضَلَّ भटक गया ḍalla
भटक गया عَن from ʿan
from سَبِيلِهِۦ उसके रास्ते से sabīlihi
उसके रास्ते से وَهُوَ और वो wahuwa
और वो أَعْلَمُ ज़्यादा जानता है aʿlamu
ज़्यादा जानता है بِٱلْمُهْتَدِينَ हिदायत पाने वालों को bil-muh'tadīna
हिदायत पाने वालों को ٧ (7)
(7)
निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।
६८:८
فَلَا
पस ना
falā
पस ना تُطِعِ आप इताअत कीजिए tuṭiʿi
आप इताअत कीजिए ٱلْمُكَذِّبِينَ झुठलाने वालों की l-mukadhibīna
झुठलाने वालों की ٨ (8)
(8)
पस ना تُطِعِ आप इताअत कीजिए tuṭiʿi
आप इताअत कीजिए ٱلْمُكَذِّبِينَ झुठलाने वालों की l-mukadhibīna
झुठलाने वालों की ٨ (8)
(8)
अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।
६८:९
وَدُّوا۟
वो चाहते हैं
waddū
वो चाहते हैं لَوْ काश law
काश تُدْهِنُ आप ढीले पड़ें tud'hinu
आप ढीले पड़ें فَيُدْهِنُونَ तो वो भी ढीले पड़जाऐं fayud'hinūna
तो वो भी ढीले पड़जाऐं ٩ (9)
(9)
वो चाहते हैं لَوْ काश law
काश تُدْهِنُ आप ढीले पड़ें tud'hinu
आप ढीले पड़ें فَيُدْهِنُونَ तो वो भी ढीले पड़जाऐं fayud'hinūna
तो वो भी ढीले पड़जाऐं ٩ (9)
(9)
वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी1 करें।
६८:१०
وَلَا
और ना
walā
और ना تُطِعْ आप इताअत कीजिए tuṭiʿ
आप इताअत कीजिए كُلَّ हर kulla
हर حَلَّافٍۢ बहुत क़समें खाने वाले ḥallāfin
बहुत क़समें खाने वाले مَّهِينٍ निहायत हक़ीर की mahīnin
निहायत हक़ीर की ١٠ (10)
(10)
और ना تُطِعْ आप इताअत कीजिए tuṭiʿ
आप इताअत कीजिए كُلَّ हर kulla
हर حَلَّافٍۢ बहुत क़समें खाने वाले ḥallāfin
बहुत क़समें खाने वाले مَّهِينٍ निहायत हक़ीर की mahīnin
निहायत हक़ीर की ١٠ (10)
(10)
और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।1
६८:११
هَمَّازٍۢ
बड़ा ही ऐब-जो
hammāzin
बड़ा ही ऐब-जो مَّشَّآءٍۭ बहुत चलने वाला mashāin
बहुत चलने वाला بِنَمِيمٍۢ साथ चुग़ल ख़ोरी के binamīmin
साथ चुग़ल ख़ोरी के ١١ (11)
(11)
बड़ा ही ऐब-जो مَّشَّآءٍۭ बहुत चलने वाला mashāin
बहुत चलने वाला بِنَمِيمٍۢ साथ चुग़ल ख़ोरी के binamīmin
साथ चुग़ल ख़ोरी के ١١ (11)
(11)
जो बहुत ग़ीबत करने वाला, चुग़ली में बहुत दौड़-धूप करने वाला है।
६८:१२
مَّنَّاعٍۢ
बहुत रोकने वाला
mannāʿin
बहुत रोकने वाला لِّلْخَيْرِ भलाई का lil'khayri
भलाई का مُعْتَدٍ हद से बढ़ने वाला muʿ'tadin
हद से बढ़ने वाला أَثِيمٍ सख़्त गुनाहगार athīmin
सख़्त गुनाहगार ١٢ (12)
(12)
बहुत रोकने वाला لِّلْخَيْرِ भलाई का lil'khayri
भलाई का مُعْتَدٍ हद से बढ़ने वाला muʿ'tadin
हद से बढ़ने वाला أَثِيمٍ सख़्त गुनाहगार athīmin
सख़्त गुनाहगार ١٢ (12)
(12)
भलाई को बहुत रोकने वाला, हद से बढ़ने वाला, घोर पापी है।
६८:१३
عُتُلٍّۭ
बदमिज़ाज
ʿutullin
बदमिज़ाज بَعْدَ बाद baʿda
बाद ذَٰلِكَ इसके dhālika
इसके زَنِيمٍ बेनसब है zanīmin
बेनसब है ١٣ (13)
(13)
बदमिज़ाज بَعْدَ बाद baʿda
बाद ذَٰلِكَ इसके dhālika
इसके زَنِيمٍ बेनसब है zanīmin
बेनसब है ١٣ (13)
(13)
क्रूर है, इसके उपरांत हरामज़ादा (वर्णसंकर) है।
६८:१४
أَن
कि
an
कि كَانَ है वो kāna
है वो ذَا a possessor dhā
a possessor مَالٍۢ माल वाला mālin
माल वाला وَبَنِينَ और बेटों वाला wabanīna
और बेटों वाला ١٤ (14)
(14)
कि كَانَ है वो kāna
है वो ذَا a possessor dhā
a possessor مَالٍۢ माल वाला mālin
माल वाला وَبَنِينَ और बेटों वाला wabanīna
और बेटों वाला ١٤ (14)
(14)
इस कारण कि वह धन और बेटों वाला है।
६८:१५
إِذَا
जब
idhā
जब تُتْلَىٰ पढ़ी जाती हैं tut'lā
पढ़ी जाती हैं عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर ءَايَـٰتُنَا आयात हमारी āyātunā
आयात हमारी قَالَ वो कहता है qāla
वो कहता है أَسَـٰطِيرُ कहानियाँ हैं asāṭīru
कहानियाँ हैं ٱلْأَوَّلِينَ पहलों की l-awalīna
पहलों की ١٥ (15)
(15)
जब تُتْلَىٰ पढ़ी जाती हैं tut'lā
पढ़ी जाती हैं عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर ءَايَـٰتُنَا आयात हमारी āyātunā
आयात हमारी قَالَ वो कहता है qāla
वो कहता है أَسَـٰطِيرُ कहानियाँ हैं asāṭīru
कहानियाँ हैं ٱلْأَوَّلِينَ पहलों की l-awalīna
पहलों की ١٥ (15)
(15)
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह पहले लोगों की (कल्पित) कहानियाँ हैं।
६८:१६
سَنَسِمُهُۥ
अनक़रीब हम दाग़ लगाऐंगे उसे
sanasimuhu
अनक़रीब हम दाग़ लगाऐंगे उसे عَلَى on ʿalā
on ٱلْخُرْطُومِ सूँढ(नाक) पर l-khur'ṭūmi
सूँढ(नाक) पर ١٦ (16)
(16)
अनक़रीब हम दाग़ लगाऐंगे उसे عَلَى on ʿalā
on ٱلْخُرْطُومِ सूँढ(नाक) पर l-khur'ṭūmi
सूँढ(नाक) पर ١٦ (16)
(16)
शीघ्र ही हम उसकी थूथन1 पर दाग़ लगाएँगे।
६८:१७
إِنَّا
बेशक हम
innā
बेशक हम بَلَوْنَـٰهُمْ आज़माया हमने उन्हें balawnāhum
आज़माया हमने उन्हें كَمَا जैसा कि kamā
जैसा कि بَلَوْنَآ आज़माया हमने balawnā
आज़माया हमने أَصْحَـٰبَ (the) companions aṣḥāba
(the) companions ٱلْجَنَّةِ बाग़ वालों को l-janati
बाग़ वालों को إِذْ जब idh
जब أَقْسَمُوا۟ उन्होंने क़सम खाई aqsamū
उन्होंने क़सम खाई لَيَصْرِمُنَّهَا अलबत्ता वो ज़रूर काट लेंगे उसे layaṣrimunnahā
अलबत्ता वो ज़रूर काट लेंगे उसे مُصْبِحِينَ सुबह सवेरे ही muṣ'biḥīna
सुबह सवेरे ही ١٧ (17)
(17)
बेशक हम بَلَوْنَـٰهُمْ आज़माया हमने उन्हें balawnāhum
आज़माया हमने उन्हें كَمَا जैसा कि kamā
जैसा कि بَلَوْنَآ आज़माया हमने balawnā
आज़माया हमने أَصْحَـٰبَ (the) companions aṣḥāba
(the) companions ٱلْجَنَّةِ बाग़ वालों को l-janati
बाग़ वालों को إِذْ जब idh
जब أَقْسَمُوا۟ उन्होंने क़सम खाई aqsamū
उन्होंने क़सम खाई لَيَصْرِمُنَّهَا अलबत्ता वो ज़रूर काट लेंगे उसे layaṣrimunnahā
अलबत्ता वो ज़रूर काट लेंगे उसे مُصْبِحِينَ सुबह सवेरे ही muṣ'biḥīna
सुबह सवेरे ही ١٧ (17)
(17)
निःसंदेह हमने उन्हें परीक्षा में डाला1 है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने क़सम खाई कि भोर होते ही उसके फल अवश्य तोड़ लेंगे।
६८:१८
وَلَا
और नहीं
walā
और नहीं يَسْتَثْنُونَ वो इस्तसना कर रहे थे yastathnūna
वो इस्तसना कर रहे थे ١٨ (18)
(18)
और नहीं يَسْتَثْنُونَ वो इस्तसना कर रहे थे yastathnūna
वो इस्तसना कर रहे थे ١٨ (18)
(18)
और वे 'इन शा अल्लाह' नहीं कह रहे थे।
६८:१९
فَطَافَ
तो फिर गया
faṭāfa
तो फिर गया عَلَيْهَا उस पर ʿalayhā
उस पर طَآئِفٌۭ एक फिरने वाला ṭāifun
एक फिरने वाला مِّن from min
from رَّبِّكَ आपके रब की तरफ़ से rabbika
आपके रब की तरफ़ से وَهُمْ और वो wahum
और वो نَآئِمُونَ सो रहे थे nāimūna
सो रहे थे ١٩ (19)
(19)
तो फिर गया عَلَيْهَا उस पर ʿalayhā
उस पर طَآئِفٌۭ एक फिरने वाला ṭāifun
एक फिरने वाला مِّن from min
from رَّبِّكَ आपके रब की तरफ़ से rabbika
आपके रब की तरफ़ से وَهُمْ और वो wahum
और वो نَآئِمُونَ सो रहे थे nāimūna
सो रहे थे ١٩ (19)
(19)
तो आपके पालनहार की ओर से उस (बाग़) पर एक यातना फिर गई, जबकि वे सोए हुए थे।
६८:२०
فَأَصْبَحَتْ
तो वो (बाग़) हो गया
fa-aṣbaḥat
तो वो (बाग़) हो गया كَٱلصَّرِيمِ जड़ कटी खेती के मानिन्द kal-ṣarīmi
जड़ कटी खेती के मानिन्द ٢٠ (20)
(20)
तो वो (बाग़) हो गया كَٱلصَّرِيمِ जड़ कटी खेती के मानिन्द kal-ṣarīmi
जड़ कटी खेती के मानिन्द ٢٠ (20)
(20)
तो वह अंधेरी रात जैसा (काला) हो गया।
६८:२१
فَتَنَادَوْا۟
फिर वो एक दूसरे को पुकारने लगे
fatanādaw
फिर वो एक दूसरे को पुकारने लगे مُصْبِحِينَ सुबह सवेरे ही muṣ'biḥīna
सुबह सवेरे ही ٢١ (21)
(21)
फिर वो एक दूसरे को पुकारने लगे مُصْبِحِينَ सुबह सवेरे ही muṣ'biḥīna
सुबह सवेरे ही ٢١ (21)
(21)
फिर उन्होंने भोर होते ही एक-दूसरे को पुकारा :
६८:२२
أَنِ
कि
ani
कि ٱغْدُوا۟ सुबह सवेरे चलो igh'dū
सुबह सवेरे चलो عَلَىٰ to ʿalā
to حَرْثِكُمْ अपने खेत पर ḥarthikum
अपने खेत पर إِن अगर in
अगर كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम صَـٰرِمِينَ (फल)तोड़ने वाले ṣārimīna
(फल)तोड़ने वाले ٢٢ (22)
(22)
कि ٱغْدُوا۟ सुबह सवेरे चलो igh'dū
सुबह सवेरे चलो عَلَىٰ to ʿalā
to حَرْثِكُمْ अपने खेत पर ḥarthikum
अपने खेत पर إِن अगर in
अगर كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम صَـٰرِمِينَ (फल)तोड़ने वाले ṣārimīna
(फल)तोड़ने वाले ٢٢ (22)
(22)
कि अपने खेत पर सवेरे ही जा पहुँचो, यदि तुम फल तोड़ने वाले हो।
६८:२३
فَٱنطَلَقُوا۟
तो वो चल दिए
fa-inṭalaqū
तो वो चल दिए وَهُمْ और वो wahum
और वो يَتَخَـٰفَتُونَ वो चुपके-चुपके आपस में बातें कर रहे थे yatakhāfatūna
वो चुपके-चुपके आपस में बातें कर रहे थे ٢٣ (23)
(23)
तो वो चल दिए وَهُمْ और वो wahum
और वो يَتَخَـٰفَتُونَ वो चुपके-चुपके आपस में बातें कर रहे थे yatakhāfatūna
वो चुपके-चुपके आपस में बातें कर रहे थे ٢٣ (23)
(23)
चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए चल दिए।
६८:२४
أَن
कि
an
कि لَّا Not lā
Not يَدْخُلَنَّهَا ना हरगिज़ दाख़िल हो उसमें yadkhulannahā
ना हरगिज़ दाख़िल हो उसमें ٱلْيَوْمَ आज l-yawma
आज عَلَيْكُم तुम पर ʿalaykum
तुम पर مِّسْكِينٌۭ कोई मिसकीन mis'kīnun
कोई मिसकीन ٢٤ (24)
(24)
कि لَّا Not lā
Not يَدْخُلَنَّهَا ना हरगिज़ दाख़िल हो उसमें yadkhulannahā
ना हरगिज़ दाख़िल हो उसमें ٱلْيَوْمَ आज l-yawma
आज عَلَيْكُم तुम पर ʿalaykum
तुम पर مِّسْكِينٌۭ कोई मिसकीन mis'kīnun
कोई मिसकीन ٢٤ (24)
(24)
कि आज उस (बाग़) में तुम्हारे पास कोई निर्धन1 हरगिज़ न आने पाए।
६८:२५
وَغَدَوْا۟
और वो सुबह सवेरे निकले
waghadaw
और वो सुबह सवेरे निकले عَلَىٰ with ʿalā
with حَرْدٍۢ रोकने पर ḥardin
रोकने पर قَـٰدِرِينَ क़ादिर बनते हुए qādirīna
क़ादिर बनते हुए ٢٥ (25)
(25)
और वो सुबह सवेरे निकले عَلَىٰ with ʿalā
with حَرْدٍۢ रोकने पर ḥardin
रोकने पर قَـٰدِرِينَ क़ादिर बनते हुए qādirīna
क़ादिर बनते हुए ٢٥ (25)
(25)
और वे सुबह-सुबह (यह सोचकर) निकले कि वे (निर्धनों को) रोकने में सक्षम हैं।
६८:२६
فَلَمَّا
तो जब
falammā
तो जब رَأَوْهَا उन्होंने देखा उसे ra-awhā
उन्होंने देखा उसे قَالُوٓا۟ वो कहने लगे qālū
वो कहने लगे إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम لَضَآلُّونَ अलबत्ता रास्ता भूल गए हैं laḍāllūna
अलबत्ता रास्ता भूल गए हैं ٢٦ (26)
(26)
तो जब رَأَوْهَا उन्होंने देखा उसे ra-awhā
उन्होंने देखा उसे قَالُوٓا۟ वो कहने लगे qālū
वो कहने लगे إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम لَضَآلُّونَ अलबत्ता रास्ता भूल गए हैं laḍāllūna
अलबत्ता रास्ता भूल गए हैं ٢٦ (26)
(26)
फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा : निःसंदेह हम निश्चय रास्ता भूल गए हैं।
६८:२७
بَلْ
बल्कि
bal
बल्कि نَحْنُ हम naḥnu
हम مَحْرُومُونَ महरूम कर दिए गए हैं maḥrūmūna
महरूम कर दिए गए हैं ٢٧ (27)
(27)
बल्कि نَحْنُ हम naḥnu
हम مَحْرُومُونَ महरूम कर दिए गए हैं maḥrūmūna
महरूम कर दिए गए हैं ٢٧ (27)
(27)
बल्कि हम वंचित1 कर दिए गए हैं।
६८:२८
قَالَ
कहा
qāla
कहा أَوْسَطُهُمْ उनमें से बेहतर ने awsaṭuhum
उनमें से बेहतर ने أَلَمْ क्या नहीं alam
क्या नहीं أَقُل मैं ने कहा था aqul
मैं ने कहा था لَّكُمْ तुम्हें lakum
तुम्हें لَوْلَا क्यों नहीं lawlā
क्यों नहीं تُسَبِّحُونَ तुम तस्बीह करते tusabbiḥūna
तुम तस्बीह करते ٢٨ (28)
(28)
कहा أَوْسَطُهُمْ उनमें से बेहतर ने awsaṭuhum
उनमें से बेहतर ने أَلَمْ क्या नहीं alam
क्या नहीं أَقُل मैं ने कहा था aqul
मैं ने कहा था لَّكُمْ तुम्हें lakum
तुम्हें لَوْلَا क्यों नहीं lawlā
क्यों नहीं تُسَبِّحُونَ तुम तस्बीह करते tusabbiḥūna
तुम तस्बीह करते ٢٨ (28)
(28)
उनमें से बेहतर ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन क्यों नहीं करते?
६८:२९
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
उन्होंने कहा سُبْحَـٰنَ पाक है sub'ḥāna
पाक है رَبِّنَآ रब हमारा rabbinā
रब हमारा إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम كُنَّا थे हम ही kunnā
थे हम ही ظَـٰلِمِينَ ज़ालिम ẓālimīna
ज़ालिम ٢٩ (29)
(29)
उन्होंने कहा سُبْحَـٰنَ पाक है sub'ḥāna
पाक है رَبِّنَآ रब हमारा rabbinā
रब हमारा إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम كُنَّا थे हम ही kunnā
थे हम ही ظَـٰلِمِينَ ज़ालिम ẓālimīna
ज़ालिम ٢٩ (29)
(29)
उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अत्याचारी थे।
६८:३०
فَأَقْبَلَ
तो मुतावज्जा हुआ
fa-aqbala
तो मुतावज्जा हुआ بَعْضُهُمْ बाज़ उनका baʿḍuhum
बाज़ उनका عَلَىٰ to ʿalā
to بَعْضٍۢ बाज़ पर baʿḍin
बाज़ पर يَتَلَـٰوَمُونَ आपस में मलामत करते हुए yatalāwamūna
आपस में मलामत करते हुए ٣٠ (30)
(30)
तो मुतावज्जा हुआ بَعْضُهُمْ बाज़ उनका baʿḍuhum
बाज़ उनका عَلَىٰ to ʿalā
to بَعْضٍۢ बाज़ पर baʿḍin
बाज़ पर يَتَلَـٰوَمُونَ आपस में मलामत करते हुए yatalāwamūna
आपस में मलामत करते हुए ٣٠ (30)
(30)
फिर वे आपस में एक दूसरे को दोष देने लगे।
६८:३१
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
उन्होंने कहा يَـٰوَيْلَنَآ हाय अफ़सोस हम पर yāwaylanā
हाय अफ़सोस हम पर إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम كُنَّا थे हम ही kunnā
थे हम ही طَـٰغِينَ सरकश ṭāghīna
सरकश ٣١ (31)
(31)
उन्होंने कहा يَـٰوَيْلَنَآ हाय अफ़सोस हम पर yāwaylanā
हाय अफ़सोस हम पर إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम كُنَّا थे हम ही kunnā
थे हम ही طَـٰغِينَ सरकश ṭāghīna
सरकश ٣١ (31)
(31)
उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही सीमा का उल्लंघन करने वाले थे।
६८:३२
عَسَىٰ
उम्मीद है
ʿasā
उम्मीद है رَبُّنَآ रब हमारा rabbunā
रब हमारा أَن कि an
कि يُبْدِلَنَا वो बदल कर दे हमें yub'dilanā
वो बदल कर दे हमें خَيْرًۭا बेहतर khayran
बेहतर مِّنْهَآ इससे min'hā
इससे إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम إِلَىٰ to ilā
to رَبِّنَا तरफ़ अपने रब के rabbinā
तरफ़ अपने रब के رَٰغِبُونَ रग़बत करने वाले हैं rāghibūna
रग़बत करने वाले हैं ٣٢ (32)
(32)
उम्मीद है رَبُّنَآ रब हमारा rabbunā
रब हमारा أَن कि an
कि يُبْدِلَنَا वो बदल कर दे हमें yub'dilanā
वो बदल कर दे हमें خَيْرًۭا बेहतर khayran
बेहतर مِّنْهَآ इससे min'hā
इससे إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम إِلَىٰ to ilā
to رَبِّنَا तरफ़ अपने रब के rabbinā
तरफ़ अपने रब के رَٰغِبُونَ रग़बत करने वाले हैं rāghibūna
रग़बत करने वाले हैं ٣٢ (32)
(32)
आशा है कि हमारा पालनहार हमें बदले में इस (बाग़) से बेहतर प्रदान करेगा। निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं।
६८:३३
كَذَٰلِكَ
इसी तरह होता है
kadhālika
इसी तरह होता है ٱلْعَذَابُ ۖ अज़ाब l-ʿadhābu
अज़ाब وَلَعَذَابُ और यक़ीनन अज़ाब walaʿadhābu
और यक़ीनन अज़ाब ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत का l-ākhirati
आख़िरत का أَكْبَرُ ۚ ज़्यादा बड़ा है akbaru
ज़्यादा बड़ा है لَوْ काश law
काश كَانُوا۟ होते वो kānū
होते वो يَعْلَمُونَ वो जानते yaʿlamūna
वो जानते ٣٣ (33)
(33)
इसी तरह होता है ٱلْعَذَابُ ۖ अज़ाब l-ʿadhābu
अज़ाब وَلَعَذَابُ और यक़ीनन अज़ाब walaʿadhābu
और यक़ीनन अज़ाब ٱلْـَٔاخِرَةِ आख़िरत का l-ākhirati
आख़िरत का أَكْبَرُ ۚ ज़्यादा बड़ा है akbaru
ज़्यादा बड़ा है لَوْ काश law
काश كَانُوا۟ होते वो kānū
होते वो يَعْلَمُونَ वो जानते yaʿlamūna
वो जानते ٣٣ (33)
(33)
इसी तरह होती है यातना, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे जानते होते!
६८:३४
إِنَّ
बेशक
inna
बेशक لِلْمُتَّقِينَ मुत्तक़ी लोगों के लिए lil'muttaqīna
मुत्तक़ी लोगों के लिए عِندَ पास ʿinda
पास رَبِّهِمْ उनके रब के rabbihim
उनके रब के جَنَّـٰتِ बाग़ात हैं jannāti
बाग़ात हैं ٱلنَّعِيمِ नेअमतों वाले l-naʿīmi
नेअमतों वाले ٣٤ (34)
(34)
बेशक لِلْمُتَّقِينَ मुत्तक़ी लोगों के लिए lil'muttaqīna
मुत्तक़ी लोगों के लिए عِندَ पास ʿinda
पास رَبِّهِمْ उनके रब के rabbihim
उनके रब के جَنَّـٰتِ बाग़ात हैं jannāti
बाग़ात हैं ٱلنَّعِيمِ नेअमतों वाले l-naʿīmi
नेअमतों वाले ٣٤ (34)
(34)
निःसंदेह डरने वालों के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ हैं।
६८:३५
أَفَنَجْعَلُ
क्या भला हम कर देंगे
afanajʿalu
क्या भला हम कर देंगे ٱلْمُسْلِمِينَ फ़रमाबरदारों को l-mus'limīna
फ़रमाबरदारों को كَٱلْمُجْرِمِينَ मुजरिमों की तरह kal-muj'rimīna
मुजरिमों की तरह ٣٥ (35)
(35)
क्या भला हम कर देंगे ٱلْمُسْلِمِينَ फ़रमाबरदारों को l-mus'limīna
फ़रमाबरदारों को كَٱلْمُجْرِمِينَ मुजरिमों की तरह kal-muj'rimīna
मुजरिमों की तरह ٣٥ (35)
(35)
तो क्या हम आज्ञाकारियों1 को अपराध करने वालों की तरह कर देंगे?
६८:३६
مَا
क्या है
mā
क्या है لَكُمْ तुम्हें lakum
तुम्हें كَيْفَ कैसे kayfa
कैसे تَحْكُمُونَ तुम फ़ैसले करते हो taḥkumūna
तुम फ़ैसले करते हो ٣٦ (36)
(36)
क्या है لَكُمْ तुम्हें lakum
तुम्हें كَيْفَ कैसे kayfa
कैसे تَحْكُمُونَ तुम फ़ैसले करते हो taḥkumūna
तुम फ़ैसले करते हो ٣٦ (36)
(36)
तुम्हें क्या हुआ, तुम कैसे फ़ैसले करते हो?
६८:३७
أَمْ
या
am
या لَكُمْ तुम्हारे पास lakum
तुम्हारे पास كِتَـٰبٌۭ कोई किताब है kitābun
कोई किताब है فِيهِ जिसमें fīhi
जिसमें تَدْرُسُونَ तुम पढ़ते हो tadrusūna
तुम पढ़ते हो ٣٧ (37)
(37)
या لَكُمْ तुम्हारे पास lakum
तुम्हारे पास كِتَـٰبٌۭ कोई किताब है kitābun
कोई किताब है فِيهِ जिसमें fīhi
जिसमें تَدْرُسُونَ तुम पढ़ते हो tadrusūna
तुम पढ़ते हो ٣٧ (37)
(37)
क्या तुम्हारे पास कोई पुस्तक है, जिसमें तुम पढ़ते हो?
६८:३८
إِنَّ
कि बेशक
inna
कि बेशक لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए فِيهِ उसमें fīhi
उसमें لَمَا अलबत्ता वो है जो lamā
अलबत्ता वो है जो تَخَيَّرُونَ तुम पसंद करते हो takhayyarūna
तुम पसंद करते हो ٣٨ (38)
(38)
कि बेशक لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए فِيهِ उसमें fīhi
उसमें لَمَا अलबत्ता वो है जो lamā
अलबत्ता वो है जो تَخَيَّرُونَ तुम पसंद करते हो takhayyarūna
तुम पसंद करते हो ٣٨ (38)
(38)
(कि) निश्चय तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम पसंद करोगे?
६८:३९
أَمْ
या
am
या لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए أَيْمَـٰنٌ क़समें हैं aymānun
क़समें हैं عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर بَـٰلِغَةٌ पहुँचने वाली bālighatun
पहुँचने वाली إِلَىٰ to ilā
to يَوْمِ (the) Day yawmi
(the) Day ٱلْقِيَـٰمَةِ ۙ क़यामत के दिन तक l-qiyāmati
क़यामत के दिन तक إِنَّ कि बेशक inna
कि बेशक لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए لَمَا अलबत्ता वो है जो lamā
अलबत्ता वो है जो تَحْكُمُونَ तुम फ़ैसला करोगे taḥkumūna
तुम फ़ैसला करोगे ٣٩ (39)
(39)
या لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए أَيْمَـٰنٌ क़समें हैं aymānun
क़समें हैं عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर بَـٰلِغَةٌ पहुँचने वाली bālighatun
पहुँचने वाली إِلَىٰ to ilā
to يَوْمِ (the) Day yawmi
(the) Day ٱلْقِيَـٰمَةِ ۙ क़यामत के दिन तक l-qiyāmati
क़यामत के दिन तक إِنَّ कि बेशक inna
कि बेशक لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए لَمَا अलबत्ता वो है जो lamā
अलबत्ता वो है जो تَحْكُمُونَ तुम फ़ैसला करोगे taḥkumūna
तुम फ़ैसला करोगे ٣٩ (39)
(39)
या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर क़समें हैं, जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहने वाली हैं कि तुम्हारे लिए निश्चय वही होगा, जो तुम निर्णय करोगे?
६८:४०
سَلْهُمْ
पूछिए उनसे
salhum
पूछिए उनसे أَيُّهُم कौन उनमें से ayyuhum
कौन उनमें से بِذَٰلِكَ उसका bidhālika
उसका زَعِيمٌ ज़ामिन है zaʿīmun
ज़ामिन है ٤٠ (40)
(40)
पूछिए उनसे أَيُّهُم कौन उनमें से ayyuhum
कौन उनमें से بِذَٰلِكَ उसका bidhālika
उसका زَعِيمٌ ज़ामिन है zaʿīmun
ज़ामिन है ٤٠ (40)
(40)
आप उनसे पूछिए कि उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?
६८:४१
أَمْ
या
am
या لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए شُرَكَآءُ कुछ शरीक हैं shurakāu
कुछ शरीक हैं فَلْيَأْتُوا۟ पस चाहिए कि वो ले आऐं falyatū
पस चाहिए कि वो ले आऐं بِشُرَكَآئِهِمْ अपने शरीकों को bishurakāihim
अपने शरीकों को إِن अगर in
अगर كَانُوا۟ हैं वो kānū
हैं वो صَـٰدِقِينَ सच्चे ṣādiqīna
सच्चे ٤١ (41)
(41)
या لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए شُرَكَآءُ कुछ शरीक हैं shurakāu
कुछ शरीक हैं فَلْيَأْتُوا۟ पस चाहिए कि वो ले आऐं falyatū
पस चाहिए कि वो ले आऐं بِشُرَكَآئِهِمْ अपने शरीकों को bishurakāihim
अपने शरीकों को إِن अगर in
अगर كَانُوا۟ हैं वो kānū
हैं वो صَـٰدِقِينَ सच्चे ṣādiqīna
सच्चे ٤١ (41)
(41)
क्या उनके कोई साझी हैं? फिर तो वे अपने साझियों को ले आएँ1, यदि वे सच्चे हैं।
६८:४२
يَوْمَ
जिस दिन
yawma
जिस दिन يُكْشَفُ खोल दिया जाएगा yuk'shafu
खोल दिया जाएगा عَن from ʿan
from سَاقٍۢ पिंडली से sāqin
पिंडली से وَيُدْعَوْنَ और वो बुलाए जाऐंगे wayud'ʿawna
और वो बुलाए जाऐंगे إِلَى to ilā
to ٱلسُّجُودِ तरफ़ सजदों के l-sujūdi
तरफ़ सजदों के فَلَا तो ना falā
तो ना يَسْتَطِيعُونَ वो इस्तिताअत रखते होंगे yastaṭīʿūna
वो इस्तिताअत रखते होंगे ٤٢ (42)
(42)
जिस दिन يُكْشَفُ खोल दिया जाएगा yuk'shafu
खोल दिया जाएगा عَن from ʿan
from سَاقٍۢ पिंडली से sāqin
पिंडली से وَيُدْعَوْنَ और वो बुलाए जाऐंगे wayud'ʿawna
और वो बुलाए जाऐंगे إِلَى to ilā
to ٱلسُّجُودِ तरफ़ सजदों के l-sujūdi
तरफ़ सजदों के فَلَا तो ना falā
तो ना يَسْتَطِيعُونَ वो इस्तिताअत रखते होंगे yastaṭīʿūna
वो इस्तिताअत रखते होंगे ٤٢ (42)
(42)
जिस दिन पिंडली खोल दी जाएगी और वे सजदा करने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे सजदा नहीं कर सकेंगे।1
६८:४३
خَـٰشِعَةً
नीची होंगी
khāshiʿatan
नीची होंगी أَبْصَـٰرُهُمْ निगाहें उनकी abṣāruhum
निगाहें उनकी تَرْهَقُهُمْ छा रही होगी उन पर tarhaquhum
छा रही होगी उन पर ذِلَّةٌۭ ۖ ज़िल्लत dhillatun
ज़िल्लत وَقَدْ और तहक़ीक़ waqad
और तहक़ीक़ كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो يُدْعَوْنَ वो बुलाए जाते yud'ʿawna
वो बुलाए जाते إِلَى to ilā
to ٱلسُّجُودِ तरफ़ सजदों के l-sujūdi
तरफ़ सजदों के وَهُمْ जब कि वो wahum
जब कि वो سَـٰلِمُونَ सही सलामत थे sālimūna
सही सलामत थे ٤٣ (43)
(43)
नीची होंगी أَبْصَـٰرُهُمْ निगाहें उनकी abṣāruhum
निगाहें उनकी تَرْهَقُهُمْ छा रही होगी उन पर tarhaquhum
छा रही होगी उन पर ذِلَّةٌۭ ۖ ज़िल्लत dhillatun
ज़िल्लत وَقَدْ और तहक़ीक़ waqad
और तहक़ीक़ كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो يُدْعَوْنَ वो बुलाए जाते yud'ʿawna
वो बुलाए जाते إِلَى to ilā
to ٱلسُّجُودِ तरफ़ सजदों के l-sujūdi
तरफ़ सजदों के وَهُمْ जब कि वो wahum
जब कि वो سَـٰلِمُونَ सही सलामत थे sālimūna
सही सलामत थे ٤٣ (43)
(43)
उनकी आँखें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। हालाँकि उन्हें (संसार में) सजदे की ओर बुलाया जाता था, जबकि वे भले-चंगे थे।
६८:४४
فَذَرْنِى
पस छोड़ दो मुझे
fadharnī
पस छोड़ दो मुझे وَمَن और उसे जो waman
और उसे जो يُكَذِّبُ झुठलाता है yukadhibu
झुठलाता है بِهَـٰذَا इस bihādhā
इस ٱلْحَدِيثِ ۖ बात को l-ḥadīthi
बात को سَنَسْتَدْرِجُهُم अनक़रीब हम आहिसता-आहिसता ले जाऐंगे उन्हें sanastadrijuhum
अनक़रीब हम आहिसता-आहिसता ले जाऐंगे उन्हें مِّنْ from min
from حَيْثُ जहाँ से ḥaythu
जहाँ से لَا not lā
not يَعْلَمُونَ ना वो जानते होंगे yaʿlamūna
ना वो जानते होंगे ٤٤ (44)
(44)
पस छोड़ दो मुझे وَمَن और उसे जो waman
और उसे जो يُكَذِّبُ झुठलाता है yukadhibu
झुठलाता है بِهَـٰذَا इस bihādhā
इस ٱلْحَدِيثِ ۖ बात को l-ḥadīthi
बात को سَنَسْتَدْرِجُهُم अनक़रीब हम आहिसता-आहिसता ले जाऐंगे उन्हें sanastadrijuhum
अनक़रीब हम आहिसता-आहिसता ले जाऐंगे उन्हें مِّنْ from min
from حَيْثُ जहाँ से ḥaythu
जहाँ से لَا not lā
not يَعْلَمُونَ ना वो जानते होंगे yaʿlamūna
ना वो जानते होंगे ٤٤ (44)
(44)
अतः आप मुझे तथा उसको छोड़ दें, जो इस वाणी (क़ुरआन) को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे (यातना की ओर) इस प्रकार ले जाएँगे1 कि वे जान भी न सकेंगे।
६८:४५
وَأُمْلِى
और मैं मोहलत दे रहा हूँ
wa-um'lī
और मैं मोहलत दे रहा हूँ لَهُمْ ۚ उन्हें lahum
उन्हें إِنَّ बेशक inna
बेशक كَيْدِى तदबीर मेरी kaydī
तदबीर मेरी مَتِينٌ निहायत मज़बूत है matīnun
निहायत मज़बूत है ٤٥ (45)
(45)
और मैं मोहलत दे रहा हूँ لَهُمْ ۚ उन्हें lahum
उन्हें إِنَّ बेशक inna
बेशक كَيْدِى तदबीर मेरी kaydī
तदबीर मेरी مَتِينٌ निहायत मज़बूत है matīnun
निहायत मज़बूत है ٤٥ (45)
(45)
और मैं उन्हें मोहलत (अवकाश) दूँगा।1 निश्चय मेरा उपाय बड़ा मज़बूत है।
६८:४६
أَمْ
या
am
या تَسْـَٔلُهُمْ आप सवाल करते हैं उनसे tasaluhum
आप सवाल करते हैं उनसे أَجْرًۭا किसी अजर का ajran
किसी अजर का فَهُم तो वो fahum
तो वो مِّن from min
from مَّغْرَمٍۢ तावान से maghramin
तावान से مُّثْقَلُونَ दबे जा रहे हैं muth'qalūna
दबे जा रहे हैं ٤٦ (46)
(46)
या تَسْـَٔلُهُمْ आप सवाल करते हैं उनसे tasaluhum
आप सवाल करते हैं उनसे أَجْرًۭا किसी अजर का ajran
किसी अजर का فَهُم तो वो fahum
तो वो مِّن from min
from مَّغْرَمٍۢ तावान से maghramin
तावान से مُّثْقَلُونَ दबे जा रहे हैं muth'qalūna
दबे जा रहे हैं ٤٦ (46)
(46)
क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक1 माँगते हैं कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं?
६८:४७
أَمْ
या
am
या عِندَهُمُ उनके पास ʿindahumu
उनके पास ٱلْغَيْبُ कोई ग़ैब है l-ghaybu
कोई ग़ैब है فَهُمْ पस वो fahum
पस वो يَكْتُبُونَ वो लिख रहे हैं yaktubūna
वो लिख रहे हैं ٤٧ (47)
(47)
या عِندَهُمُ उनके पास ʿindahumu
उनके पास ٱلْغَيْبُ कोई ग़ैब है l-ghaybu
कोई ग़ैब है فَهُمْ पस वो fahum
पस वो يَكْتُبُونَ वो लिख रहे हैं yaktubūna
वो लिख रहे हैं ٤٧ (47)
(47)
अथवा उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है, तो वे लिख1 रहे हैं?
६८:४८
فَٱصْبِرْ
पस सब्र कीजिए
fa-iṣ'bir
पस सब्र कीजिए لِحُكْمِ हुक्म के लिए liḥuk'mi
हुक्म के लिए رَبِّكَ अपने रब के rabbika
अपने रब के وَلَا और ना walā
और ना تَكُن आप हों takun
आप हों كَصَاحِبِ like (the) companion kaṣāḥibi
like (the) companion ٱلْحُوتِ मछली वाले की तरह l-ḥūti
मछली वाले की तरह إِذْ जब idh
जब نَادَىٰ उसने पुकारा nādā
उसने पुकारा وَهُوَ इस हाल में कि वो wahuwa
इस हाल में कि वो مَكْظُومٌۭ ग़म से भरा हुआ था makẓūmun
ग़म से भरा हुआ था ٤٨ (48)
(48)
पस सब्र कीजिए لِحُكْمِ हुक्म के लिए liḥuk'mi
हुक्म के लिए رَبِّكَ अपने रब के rabbika
अपने रब के وَلَا और ना walā
और ना تَكُن आप हों takun
आप हों كَصَاحِبِ like (the) companion kaṣāḥibi
like (the) companion ٱلْحُوتِ मछली वाले की तरह l-ḥūti
मछली वाले की तरह إِذْ जब idh
जब نَادَىٰ उसने पुकारा nādā
उसने पुकारा وَهُوَ इस हाल में कि वो wahuwa
इस हाल में कि वो مَكْظُومٌۭ ग़म से भरा हुआ था makẓūmun
ग़म से भरा हुआ था ٤٨ (48)
(48)
अतः अपने पालनहार के निर्णय तक धैर्य रखें और मछली वाले के समान1 न हो जाएँ, जब उसने (अल्लाह को) पुकारा, इस हाल में कि वह शोक से भरा हुआ था।
६८:४९
لَّوْلَآ
अगर ना (होती ये बात)
lawlā
अगर ना (होती ये बात) أَن कि an
कि تَدَٰرَكَهُۥ पा लिया उसे tadārakahu
पा लिया उसे نِعْمَةٌۭ एक नेअमत ने niʿ'matun
एक नेअमत ने مِّن from min
from رَّبِّهِۦ उसके रब की तरफ़ से rabbihi
उसके रब की तरफ़ से لَنُبِذَ अलबत्ता वो फ़ेंक दिया जाता lanubidha
अलबत्ता वो फ़ेंक दिया जाता بِٱلْعَرَآءِ चटियल मैदान में bil-ʿarāi
चटियल मैदान में وَهُوَ और वो wahuwa
और वो مَذْمُومٌۭ मज़म्मत ज़दा होता madhmūmun
मज़म्मत ज़दा होता ٤٩ (49)
(49)
अगर ना (होती ये बात) أَن कि an
कि تَدَٰرَكَهُۥ पा लिया उसे tadārakahu
पा लिया उसे نِعْمَةٌۭ एक नेअमत ने niʿ'matun
एक नेअमत ने مِّن from min
from رَّبِّهِۦ उसके रब की तरफ़ से rabbihi
उसके रब की तरफ़ से لَنُبِذَ अलबत्ता वो फ़ेंक दिया जाता lanubidha
अलबत्ता वो फ़ेंक दिया जाता بِٱلْعَرَآءِ चटियल मैदान में bil-ʿarāi
चटियल मैदान में وَهُوَ और वो wahuwa
और वो مَذْمُومٌۭ मज़म्मत ज़दा होता madhmūmun
मज़म्मत ज़दा होता ٤٩ (49)
(49)
और यदि उसके पालनहार की अनुकंपा ने उसे संभाल न लिया होता, तो निश्चय वह चटियल मैदान में इस दशा में फेंक दिया जाता कि वह निंदित होता।
६८:५०
فَٱجْتَبَـٰهُ
तो चुन लिया उसे
fa-ij'tabāhu
तो चुन लिया उसे رَبُّهُۥ उसके रब ने rabbuhu
उसके रब ने فَجَعَلَهُۥ तो उसने बना दिया उसे fajaʿalahu
तो उसने बना दिया उसे مِنَ of mina
of ٱلصَّـٰلِحِينَ सालेह लोगों में से l-ṣāliḥīna
सालेह लोगों में से ٥٠ (50)
(50)
तो चुन लिया उसे رَبُّهُۥ उसके रब ने rabbuhu
उसके रब ने فَجَعَلَهُۥ तो उसने बना दिया उसे fajaʿalahu
तो उसने बना दिया उसे مِنَ of mina
of ٱلصَّـٰلِحِينَ सालेह लोगों में से l-ṣāliḥīna
सालेह लोगों में से ٥٠ (50)
(50)
फिर उसके पालनहार ने उसे चुन लिया और उसे सदाचारियों में से बना दिया।
६८:५१
وَإِن
और बेशक
wa-in
और बेशक يَكَادُ क़रीब है कि yakādu
क़रीब है कि ٱلَّذِينَ जिन्होंने alladhīna
जिन्होंने كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया لَيُزْلِقُونَكَ अलबत्ता वो फुसला देंगे आपको layuz'liqūnaka
अलबत्ता वो फुसला देंगे आपको بِأَبْصَـٰرِهِمْ अपनी निगाहों से bi-abṣārihim
अपनी निगाहों से لَمَّا जब lammā
जब سَمِعُوا۟ वो सुनते हैं samiʿū
वो सुनते हैं ٱلذِّكْرَ ज़िक्र को l-dhik'ra
ज़िक्र को وَيَقُولُونَ और वो कहते हैं wayaqūlūna
और वो कहते हैं إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो لَمَجْنُونٌۭ अलबत्ता मजनून हैं lamajnūnun
अलबत्ता मजनून हैं ٥١ (51)
(51)
और बेशक يَكَادُ क़रीब है कि yakādu
क़रीब है कि ٱلَّذِينَ जिन्होंने alladhīna
जिन्होंने كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया لَيُزْلِقُونَكَ अलबत्ता वो फुसला देंगे आपको layuz'liqūnaka
अलबत्ता वो फुसला देंगे आपको بِأَبْصَـٰرِهِمْ अपनी निगाहों से bi-abṣārihim
अपनी निगाहों से لَمَّا जब lammā
जब سَمِعُوا۟ वो सुनते हैं samiʿū
वो सुनते हैं ٱلذِّكْرَ ज़िक्र को l-dhik'ra
ज़िक्र को وَيَقُولُونَ और वो कहते हैं wayaqūlūna
और वो कहते हैं إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो لَمَجْنُونٌۭ अलबत्ता मजनून हैं lamajnūnun
अलबत्ता मजनून हैं ٥١ (51)
(51)
और वे लोग जिन्होंने इनकार किया, निश्चय क़रीब हैं कि वे अपनी निगाहों से (घूर घूरकर) आपको अवश्य ही फिसला देंगे, जब वे क़ुरआन को सुनते हैं और कहते हैं कि यह अवश्य ही दीवाना है।
६८:५२
وَمَا
और नहीं है
wamā
और नहीं है هُوَ वो huwa
वो إِلَّا मगर illā
मगर ذِكْرٌۭ एक नसीहत dhik'run
एक नसीहत لِّلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहान वालों के लिए lil'ʿālamīna
तमाम जहान वालों के लिए ٥٢ (52)
(52)
और नहीं है هُوَ वो huwa
वो إِلَّا मगर illā
मगर ذِكْرٌۭ एक नसीहत dhik'run
एक नसीहत لِّلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहान वालों के लिए lil'ʿālamīna
तमाम जहान वालों के लिए ٥٢ (52)
(52)
हालाँकि वह सर्व संसार के लिए मात्र एक उपदेश1 है।