६८
अल-क़लम
القلم
सूरह अल-क़लम (القلم) पवित्र क़ुरआन का ६८ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ५२ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
Bookmarks (0)
No bookmarks yet. Click the bookmark icon next to any ayah to save it.
बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६८:१
نٓ ۚنnoonوَٱلْقَلَمِक़सम है क़लम कीwal-qalamiوَمَاऔर उसकी जोwamāيَسْطُرُونَवो लिखते हैंyasṭurūna١
नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी1 जो वे लिखते हैं।
६८:२
مَآनहीं हैंmāأَنتَआपantaبِنِعْمَةِनेअमत सेbiniʿ'matiرَبِّكَअपने रब कीrabbikaبِمَجْنُونٍۢकोई मजनूनbimajnūnin٢
आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।
६८:३
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaلَكَआपके लिएlakaلَأَجْرًاयक़ीनन अजर हैla-ajranغَيْرَनाghayraمَمْنُونٍۢख़त्म होने वालाmamnūnin٣
तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।
६८:४
وَإِنَّكَऔर बेशक आपwa-innakaلَعَلَىٰsurely (are)laʿalāخُلُقٍ(of) a moral characterkhuluqinعَظِيمٍۢयक़ीनन बुलन्द अख़लाक़ पर हैंʿaẓīmin٤
तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।
६८:५
فَسَتُبْصِرُपस अनक़रीब आप देखेंगेfasatub'ṣiruوَيُبْصِرُونَऔर वो भी देखेंगेwayub'ṣirūna٥
अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।
६८:६
بِأَييِّكُمُकौन तुम में सेbi-ayyikumuٱلْمَفْتُونُफ़ितने में डाला हुआ हैl-maftūnu٦
कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।
६८:७
إِنَّबेशकinnaرَبَّكَरब आपकाrabbakaهُوَवोhuwaأَعْلَمُज़्यादा जानता हैaʿlamuبِمَنउसे जोbimanضَلَّभटक गयाḍallaعَنfromʿanسَبِيلِهِۦउसके रास्ते सेsabīlihiوَهُوَऔर वोwahuwaأَعْلَمُज़्यादा जानता हैaʿlamuبِٱلْمُهْتَدِينَहिदायत पाने वालों कोbil-muh'tadīna٧
निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।
६८:८
فَلَاपस नाfalāتُطِعِआप इताअत कीजिएtuṭiʿiٱلْمُكَذِّبِينَझुठलाने वालों कीl-mukadhibīna٨
अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।
६८:९
وَدُّوا۟वो चाहते हैंwaddūلَوْकाशlawتُدْهِنُआप ढीले पड़ेंtud'hinuفَيُدْهِنُونَतो वो भी ढीले पड़जाऐंfayud'hinūna٩
वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी1 करें।
६८:१०
وَلَاऔर नाwalāتُطِعْआप इताअत कीजिएtuṭiʿكُلَّहरkullaحَلَّافٍۢबहुत क़समें खाने वालेḥallāfinمَّهِينٍनिहायत हक़ीर कीmahīnin١٠
और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।1
६८:११
هَمَّازٍۢबड़ा ही ऐब-जोhammāzinمَّشَّآءٍۭबहुत चलने वालाmashāinبِنَمِيمٍۢसाथ चुग़ल ख़ोरी केbinamīmin١١
जो बहुत ग़ीबत करने वाला, चुग़ली में बहुत दौड़-धूप करने वाला है।
६८:१२
مَّنَّاعٍۢबहुत रोकने वालाmannāʿinلِّلْخَيْرِभलाई काlil'khayriمُعْتَدٍहद से बढ़ने वालाmuʿ'tadinأَثِيمٍसख़्त गुनाहगारathīmin١٢
भलाई को बहुत रोकने वाला, हद से बढ़ने वाला, घोर पापी है।
६८:१३
عُتُلٍّۭबदमिज़ाजʿutullinبَعْدَबादbaʿdaذَٰلِكَइसकेdhālikaزَنِيمٍबेनसब हैzanīmin١٣
क्रूर है, इसके उपरांत हरामज़ादा (वर्णसंकर) है।
६८:१४
أَنकिanكَانَहै वोkānaذَاa possessordhāمَالٍۢमाल वालाmālinوَبَنِينَऔर बेटों वालाwabanīna١٤
इस कारण कि वह धन और बेटों वाला है।
६८:१५
إِذَاजबidhāتُتْلَىٰपढ़ी जाती हैंtut'lāعَلَيْهِउस परʿalayhiءَايَـٰتُنَاआयात हमारीāyātunāقَالَवो कहता हैqālaأَسَـٰطِيرُकहानियाँ हैंasāṭīruٱلْأَوَّلِينَपहलों कीl-awalīna١٥
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह पहले लोगों की (कल्पित) कहानियाँ हैं।
६८:१६
سَنَسِمُهُۥअनक़रीब हम दाग़ लगाऐंगे उसेsanasimuhuعَلَىonʿalāٱلْخُرْطُومِसूँढ(नाक) परl-khur'ṭūmi١٦
शीघ्र ही हम उसकी थूथन1 पर दाग़ लगाएँगे।
६८:१७
إِنَّاबेशक हमinnāبَلَوْنَـٰهُمْआज़माया हमने उन्हेंbalawnāhumكَمَاजैसा किkamāبَلَوْنَآआज़माया हमनेbalawnāأَصْحَـٰبَ(the) companionsaṣḥābaٱلْجَنَّةِबाग़ वालों कोl-janatiإِذْजबidhأَقْسَمُوا۟उन्होंने क़सम खाईaqsamūلَيَصْرِمُنَّهَاअलबत्ता वो ज़रूर काट लेंगे उसेlayaṣrimunnahāمُصْبِحِينَसुबह सवेरे हीmuṣ'biḥīna١٧
निःसंदेह हमने उन्हें परीक्षा में डाला1 है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने क़सम खाई कि भोर होते ही उसके फल अवश्य तोड़ लेंगे।
६८:१८
وَلَاऔर नहींwalāيَسْتَثْنُونَवो इस्तसना कर रहे थेyastathnūna١٨
और वे 'इन शा अल्लाह' नहीं कह रहे थे।
६८:१९
فَطَافَतो फिर गयाfaṭāfaعَلَيْهَاउस परʿalayhāطَآئِفٌۭएक फिरने वालाṭāifunمِّنfromminرَّبِّكَआपके रब की तरफ़ सेrabbikaوَهُمْऔर वोwahumنَآئِمُونَसो रहे थेnāimūna١٩
तो आपके पालनहार की ओर से उस (बाग़) पर एक यातना फिर गई, जबकि वे सोए हुए थे।
६८:२०
فَأَصْبَحَتْतो वो (बाग़) हो गयाfa-aṣbaḥatكَٱلصَّرِيمِजड़ कटी खेती के मानिन्दkal-ṣarīmi٢٠
तो वह अंधेरी रात जैसा (काला) हो गया।
६८:२१
فَتَنَادَوْا۟फिर वो एक दूसरे को पुकारने लगेfatanādawمُصْبِحِينَसुबह सवेरे हीmuṣ'biḥīna٢١
फिर उन्होंने भोर होते ही एक-दूसरे को पुकारा :
६८:२२
أَنِकिaniٱغْدُوا۟सुबह सवेरे चलोigh'dūعَلَىٰtoʿalāحَرْثِكُمْअपने खेत परḥarthikumإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰرِمِينَ(फल)तोड़ने वालेṣārimīna٢٢
कि अपने खेत पर सवेरे ही जा पहुँचो, यदि तुम फल तोड़ने वाले हो।
६८:२३
فَٱنطَلَقُوا۟तो वो चल दिएfa-inṭalaqūوَهُمْऔर वोwahumيَتَخَـٰفَتُونَवो चुपके-चुपके आपस में बातें कर रहे थेyatakhāfatūna٢٣
चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए चल दिए।
६८:२४
أَنकिanلَّاNotlāيَدْخُلَنَّهَاना हरगिज़ दाख़िल हो उसमेंyadkhulannahāٱلْيَوْمَआजl-yawmaعَلَيْكُمतुम परʿalaykumمِّسْكِينٌۭकोई मिसकीनmis'kīnun٢٤
कि आज उस (बाग़) में तुम्हारे पास कोई निर्धन1 हरगिज़ न आने पाए।
६८:२५
وَغَدَوْا۟और वो सुबह सवेरे निकलेwaghadawعَلَىٰwithʿalāحَرْدٍۢरोकने परḥardinقَـٰدِرِينَक़ादिर बनते हुएqādirīna٢٥
और वे सुबह-सुबह (यह सोचकर) निकले कि वे (निर्धनों को) रोकने में सक्षम हैं।
६८:२६
فَلَمَّاतो जबfalammāرَأَوْهَاउन्होंने देखा उसेra-awhāقَالُوٓا۟वो कहने लगेqālūإِنَّاबेशक हमinnāلَضَآلُّونَअलबत्ता रास्ता भूल गए हैंlaḍāllūna٢٦
फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा : निःसंदेह हम निश्चय रास्ता भूल गए हैं।
६८:२७
بَلْबल्किbalنَحْنُहमnaḥnuمَحْرُومُونَमहरूम कर दिए गए हैंmaḥrūmūna٢٧
बल्कि हम वंचित1 कर दिए गए हैं।
६८:२८
قَالَकहाqālaأَوْسَطُهُمْउनमें से बेहतर नेawsaṭuhumأَلَمْक्या नहींalamأَقُلमैं ने कहा थाaqulلَّكُمْतुम्हेंlakumلَوْلَاक्यों नहींlawlāتُسَبِّحُونَतुम तस्बीह करतेtusabbiḥūna٢٨
उनमें से बेहतर ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन क्यों नहीं करते?
६८:२९
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūسُبْحَـٰنَपाक हैsub'ḥānaرَبِّنَآरब हमाराrabbināإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हम हीkunnāظَـٰلِمِينَज़ालिमẓālimīna٢٩
उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अत्याचारी थे।
६८:३०
فَأَقْبَلَतो मुतावज्जा हुआfa-aqbalaبَعْضُهُمْबाज़ उनकाbaʿḍuhumعَلَىٰtoʿalāبَعْضٍۢबाज़ परbaʿḍinيَتَلَـٰوَمُونَआपस में मलामत करते हुएyatalāwamūna٣٠
फिर वे आपस में एक दूसरे को दोष देने लगे।
६८:३१
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰوَيْلَنَآहाय अफ़सोस हम परyāwaylanāإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हम हीkunnāطَـٰغِينَसरकशṭāghīna٣١
उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही सीमा का उल्लंघन करने वाले थे।
६८:३२
عَسَىٰउम्मीद हैʿasāرَبُّنَآरब हमाराrabbunāأَنकिanيُبْدِلَنَاवो बदल कर दे हमेंyub'dilanāخَيْرًۭاबेहतरkhayranمِّنْهَآइससेmin'hāإِنَّآबेशक हमinnāإِلَىٰtoilāرَبِّنَاतरफ़ अपने रब केrabbināرَٰغِبُونَरग़बत करने वाले हैंrāghibūna٣٢
आशा है कि हमारा पालनहार हमें बदले में इस (बाग़) से बेहतर प्रदान करेगा। निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं।
६८:३३
كَذَٰلِكَइसी तरह होता हैkadhālikaٱلْعَذَابُ ۖअज़ाबl-ʿadhābuوَلَعَذَابُऔर यक़ीनन अज़ाबwalaʿadhābuٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत काl-ākhiratiأَكْبَرُ ۚज़्यादा बड़ा हैakbaruلَوْकाशlawكَانُوا۟होते वोkānūيَعْلَمُونَवो जानतेyaʿlamūna٣٣
इसी तरह होती है यातना, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे जानते होते!
६८:३४
إِنَّबेशकinnaلِلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों के लिएlil'muttaqīnaعِندَपासʿindaرَبِّهِمْउनके रब केrabbihimجَنَّـٰتِबाग़ात हैंjannātiٱلنَّعِيمِनेअमतों वालेl-naʿīmi٣٤
निःसंदेह डरने वालों के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ हैं।
६८:३५
أَفَنَجْعَلُक्या भला हम कर देंगेafanajʿaluٱلْمُسْلِمِينَफ़रमाबरदारों कोl-mus'limīnaكَٱلْمُجْرِمِينَमुजरिमों की तरहkal-muj'rimīna٣٥
तो क्या हम आज्ञाकारियों1 को अपराध करने वालों की तरह कर देंगे?
६८:३६
مَاक्या हैmāلَكُمْतुम्हेंlakumكَيْفَकैसेkayfaتَحْكُمُونَतुम फ़ैसले करते होtaḥkumūna٣٦
तुम्हें क्या हुआ, तुम कैसे फ़ैसले करते हो?
६८:३७
أَمْयाamلَكُمْतुम्हारे पासlakumكِتَـٰبٌۭकोई किताब हैkitābunفِيهِजिसमेंfīhiتَدْرُسُونَतुम पढ़ते होtadrusūna٣٧
क्या तुम्हारे पास कोई पुस्तक है, जिसमें तुम पढ़ते हो?
६८:३८
إِنَّकि बेशकinnaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفِيهِउसमेंfīhiلَمَاअलबत्ता वो है जोlamāتَخَيَّرُونَतुम पसंद करते होtakhayyarūna٣٨
(कि) निश्चय तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम पसंद करोगे?
६८:३९
أَمْयाamلَكُمْतुम्हारे लिएlakumأَيْمَـٰنٌक़समें हैंaymānunعَلَيْنَاहम परʿalaynāبَـٰلِغَةٌपहुँचने वालीbālighatunإِلَىٰtoilāيَوْمِ(the) Dayyawmiٱلْقِيَـٰمَةِ ۙक़यामत के दिन तकl-qiyāmatiإِنَّकि बेशकinnaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumلَمَاअलबत्ता वो है जोlamāتَحْكُمُونَतुम फ़ैसला करोगेtaḥkumūna٣٩
या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर क़समें हैं, जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहने वाली हैं कि तुम्हारे लिए निश्चय वही होगा, जो तुम निर्णय करोगे?
६८:४०
سَلْهُمْपूछिए उनसेsalhumأَيُّهُمकौन उनमें सेayyuhumبِذَٰلِكَउसकाbidhālikaزَعِيمٌज़ामिन हैzaʿīmun٤٠
आप उनसे पूछिए कि उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?
६८:४१
أَمْयाamلَهُمْउनके लिएlahumشُرَكَآءُकुछ शरीक हैंshurakāuفَلْيَأْتُوا۟पस चाहिए कि वो ले आऐंfalyatūبِشُرَكَآئِهِمْअपने शरीकों कोbishurakāihimإِنअगरinكَانُوا۟हैं वोkānūصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٤١
क्या उनके कोई साझी हैं? फिर तो वे अपने साझियों को ले आएँ1, यदि वे सच्चे हैं।
६८:४२
يَوْمَजिस दिनyawmaيُكْشَفُखोल दिया जाएगाyuk'shafuعَنfromʿanسَاقٍۢपिंडली सेsāqinوَيُدْعَوْنَऔर वो बुलाए जाऐंगेwayud'ʿawnaإِلَىtoilāٱلسُّجُودِतरफ़ सजदों केl-sujūdiفَلَاतो नाfalāيَسْتَطِيعُونَवो इस्तिताअत रखते होंगेyastaṭīʿūna٤٢
जिस दिन पिंडली खोल दी जाएगी और वे सजदा करने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे सजदा नहीं कर सकेंगे।1
६८:४३
خَـٰشِعَةًनीची होंगीkhāshiʿatanأَبْصَـٰرُهُمْनिगाहें उनकीabṣāruhumتَرْهَقُهُمْछा रही होगी उन परtarhaquhumذِلَّةٌۭ ۖज़िल्लतdhillatunوَقَدْऔर तहक़ीक़waqadكَانُوا۟थे वोkānūيُدْعَوْنَवो बुलाए जातेyud'ʿawnaإِلَىtoilāٱلسُّجُودِतरफ़ सजदों केl-sujūdiوَهُمْजब कि वोwahumسَـٰلِمُونَसही सलामत थेsālimūna٤٣
उनकी आँखें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। हालाँकि उन्हें (संसार में) सजदे की ओर बुलाया जाता था, जबकि वे भले-चंगे थे।
६८:४४
فَذَرْنِىपस छोड़ दो मुझेfadharnīوَمَنऔर उसे जोwamanيُكَذِّبُझुठलाता हैyukadhibuبِهَـٰذَاइसbihādhāٱلْحَدِيثِ ۖबात कोl-ḥadīthiسَنَسْتَدْرِجُهُمअनक़रीब हम आहिसता-आहिसता ले जाऐंगे उन्हेंsanastadrijuhumمِّنْfromminحَيْثُजहाँ सेḥaythuلَاnotlāيَعْلَمُونَना वो जानते होंगेyaʿlamūna٤٤
अतः आप मुझे तथा उसको छोड़ दें, जो इस वाणी (क़ुरआन) को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे (यातना की ओर) इस प्रकार ले जाएँगे1 कि वे जान भी न सकेंगे।
६८:४५
وَأُمْلِىऔर मैं मोहलत दे रहा हूँwa-um'līلَهُمْ ۚउन्हेंlahumإِنَّबेशकinnaكَيْدِىतदबीर मेरीkaydīمَتِينٌनिहायत मज़बूत हैmatīnun٤٥
और मैं उन्हें मोहलत (अवकाश) दूँगा।1 निश्चय मेरा उपाय बड़ा मज़बूत है।
६८:४६
أَمْयाamتَسْـَٔلُهُمْआप सवाल करते हैं उनसेtasaluhumأَجْرًۭاकिसी अजर काajranفَهُمतो वोfahumمِّنfromminمَّغْرَمٍۢतावान सेmaghraminمُّثْقَلُونَदबे जा रहे हैंmuth'qalūna٤٦
क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक1 माँगते हैं कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं?
६८:४७
أَمْयाamعِندَهُمُउनके पासʿindahumuٱلْغَيْبُकोई ग़ैब हैl-ghaybuفَهُمْपस वोfahumيَكْتُبُونَवो लिख रहे हैंyaktubūna٤٧
अथवा उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है, तो वे लिख1 रहे हैं?
६८:४८
فَٱصْبِرْपस सब्र कीजिएfa-iṣ'birلِحُكْمِहुक्म के लिएliḥuk'miرَبِّكَअपने रब केrabbikaوَلَاऔर नाwalāتَكُنआप होंtakunكَصَاحِبِlike (the) companionkaṣāḥibiٱلْحُوتِमछली वाले की तरहl-ḥūtiإِذْजबidhنَادَىٰउसने पुकाराnādāوَهُوَइस हाल में कि वोwahuwaمَكْظُومٌۭग़म से भरा हुआ थाmakẓūmun٤٨
अतः अपने पालनहार के निर्णय तक धैर्य रखें और मछली वाले के समान1 न हो जाएँ, जब उसने (अल्लाह को) पुकारा, इस हाल में कि वह शोक से भरा हुआ था।
६८:४९
لَّوْلَآअगर ना (होती ये बात)lawlāأَنकिanتَدَٰرَكَهُۥपा लिया उसेtadārakahuنِعْمَةٌۭएक नेअमत नेniʿ'matunمِّنfromminرَّبِّهِۦउसके रब की तरफ़ सेrabbihiلَنُبِذَअलबत्ता वो फ़ेंक दिया जाताlanubidhaبِٱلْعَرَآءِचटियल मैदान मेंbil-ʿarāiوَهُوَऔर वोwahuwaمَذْمُومٌۭमज़म्मत ज़दा होताmadhmūmun٤٩
और यदि उसके पालनहार की अनुकंपा ने उसे संभाल न लिया होता, तो निश्चय वह चटियल मैदान में इस दशा में फेंक दिया जाता कि वह निंदित होता।
६८:५०
فَٱجْتَبَـٰهُतो चुन लिया उसेfa-ij'tabāhuرَبُّهُۥउसके रब नेrabbuhuفَجَعَلَهُۥतो उसने बना दिया उसेfajaʿalahuمِنَofminaٱلصَّـٰلِحِينَसालेह लोगों में सेl-ṣāliḥīna٥٠
फिर उसके पालनहार ने उसे चुन लिया और उसे सदाचारियों में से बना दिया।
६८:५१
وَإِنऔर बेशकwa-inيَكَادُक़रीब है किyakāduٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلَيُزْلِقُونَكَअलबत्ता वो फुसला देंगे आपकोlayuz'liqūnakaبِأَبْصَـٰرِهِمْअपनी निगाहों सेbi-abṣārihimلَمَّاजबlammāسَمِعُوا۟वो सुनते हैंsamiʿūٱلذِّكْرَज़िक्र कोl-dhik'raوَيَقُولُونَऔर वो कहते हैंwayaqūlūnaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَمَجْنُونٌۭअलबत्ता मजनून हैंlamajnūnun٥١
और वे लोग जिन्होंने इनकार किया, निश्चय क़रीब हैं कि वे अपनी निगाहों से (घूर घूरकर) आपको अवश्य ही फिसला देंगे, जब वे क़ुरआन को सुनते हैं और कहते हैं कि यह अवश्य ही दीवाना है।
६८:५२
وَمَاऔर नहीं हैwamāهُوَवोhuwaإِلَّاमगरillāذِكْرٌۭएक नसीहतdhik'runلِّلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों के लिएlil'ʿālamīna٥٢
हालाँकि वह सर्व संसार के लिए मात्र एक उपदेश1 है।
—
—
—
—
Loading…