६९
अल-हाक़्क़ा
الحاقة
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ
साथ नाम
bis'mi
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६९:१
ٱلْحَآقَّةُ
हक़ होने वाली
al-ḥāqatu
हक़ होने वाली ١ (1)
(1)
हक़ होने वाली ١ (1)
(1)
होकर रहने वाली।
६९:२
مَا
क्या है
mā
क्या है ٱلْحَآقَّةُ हक़ होने वाली l-ḥāqatu
हक़ होने वाली ٢ (2)
(2)
क्या है ٱلْحَآقَّةُ हक़ होने वाली l-ḥāqatu
हक़ होने वाली ٢ (2)
(2)
क्या है वह होकर रहने वाली?
६९:३
وَمَآ
और क्या
wamā
और क्या أَدْرَىٰكَ बताए आपको adrāka
बताए आपको مَا क्या है mā
क्या है ٱلْحَآقَّةُ हक़ होने वाली l-ḥāqatu
हक़ होने वाली ٣ (3)
(3)
और क्या أَدْرَىٰكَ बताए आपको adrāka
बताए आपको مَا क्या है mā
क्या है ٱلْحَآقَّةُ हक़ होने वाली l-ḥāqatu
हक़ होने वाली ٣ (3)
(3)
और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?
६९:४
كَذَّبَتْ
झुठलाया
kadhabat
झुठलाया ثَمُودُ समूद thamūdu
समूद وَعَادٌۢ और आद ने waʿādun
और आद ने بِٱلْقَارِعَةِ खटखटाने वाली को bil-qāriʿati
खटखटाने वाली को ٤ (4)
(4)
झुठलाया ثَمُودُ समूद thamūdu
समूद وَعَادٌۢ और आद ने waʿādun
और आद ने بِٱلْقَارِعَةِ खटखटाने वाली को bil-qāriʿati
खटखटाने वाली को ٤ (4)
(4)
समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।
६९:५
فَأَمَّا
तो रहे
fa-ammā
तो रहे ثَمُودُ समूद thamūdu
समूद فَأُهْلِكُوا۟ पस वो हलाक किए गए fa-uh'likū
पस वो हलाक किए गए بِٱلطَّاغِيَةِ हद से गुज़रने वाली से bil-ṭāghiyati
हद से गुज़रने वाली से ٥ (5)
(5)
तो रहे ثَمُودُ समूद thamūdu
समूद فَأُهْلِكُوا۟ पस वो हलाक किए गए fa-uh'likū
पस वो हलाक किए गए بِٱلطَّاغِيَةِ हद से गुज़रने वाली से bil-ṭāghiyati
हद से गुज़रने वाली से ٥ (5)
(5)
फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।
६९:६
وَأَمَّا
और रहे
wa-ammā
और रहे عَادٌۭ आद ʿādun
आद فَأُهْلِكُوا۟ पस वो हलाक किए गए fa-uh'likū
पस वो हलाक किए गए بِرِيحٍۢ हवा से birīḥin
हवा से صَرْصَرٍ ठंडी यख़ ṣarṣarin
ठंडी यख़ عَاتِيَةٍۢ सरकश ʿātiyatin
सरकश ٦ (6)
(6)
और रहे عَادٌۭ आद ʿādun
आद فَأُهْلِكُوا۟ पस वो हलाक किए गए fa-uh'likū
पस वो हलाक किए गए بِرِيحٍۢ हवा से birīḥin
हवा से صَرْصَرٍ ठंडी यख़ ṣarṣarin
ठंडी यख़ عَاتِيَةٍۢ सरकश ʿātiyatin
सरकश ٦ (6)
(6)
और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।
६९:७
سَخَّرَهَا
उसने मुसल्लत कर दिया उसे
sakharahā
उसने मुसल्लत कर दिया उसे عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर سَبْعَ सात sabʿa
सात لَيَالٍۢ रातें layālin
रातें وَثَمَـٰنِيَةَ और आठ wathamāniyata
और आठ أَيَّامٍ दिन ayyāmin
दिन حُسُومًۭا मुसलसल ḥusūman
मुसलसल فَتَرَى तो आप देखते fatarā
तो आप देखते ٱلْقَوْمَ उन लोगों को l-qawma
उन लोगों को فِيهَا उसमें fīhā
उसमें صَرْعَىٰ पछाड़े हुए ṣarʿā
पछाड़े हुए كَأَنَّهُمْ गोया कि वो ka-annahum
गोया कि वो أَعْجَازُ तने हैं aʿjāzu
तने हैं نَخْلٍ खजूर के दरख़्त के nakhlin
खजूर के दरख़्त के خَاوِيَةٍۢ खोखले khāwiyatin
खोखले ٧ (7)
(7)
उसने मुसल्लत कर दिया उसे عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर سَبْعَ सात sabʿa
सात لَيَالٍۢ रातें layālin
रातें وَثَمَـٰنِيَةَ और आठ wathamāniyata
और आठ أَيَّامٍ दिन ayyāmin
दिन حُسُومًۭا मुसलसल ḥusūman
मुसलसल فَتَرَى तो आप देखते fatarā
तो आप देखते ٱلْقَوْمَ उन लोगों को l-qawma
उन लोगों को فِيهَا उसमें fīhā
उसमें صَرْعَىٰ पछाड़े हुए ṣarʿā
पछाड़े हुए كَأَنَّهُمْ गोया कि वो ka-annahum
गोया कि वो أَعْجَازُ तने हैं aʿjāzu
तने हैं نَخْلٍ खजूर के दरख़्त के nakhlin
खजूर के दरख़्त के خَاوِيَةٍۢ खोखले khāwiyatin
खोखले ٧ (7)
(7)
अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।1
६९:८
فَهَلْ
तो क्या
fahal
तो क्या تَرَىٰ आप देखते हैं tarā
आप देखते हैं لَهُم उनका lahum
उनका مِّنۢ any min
any بَاقِيَةٍۢ कोई बाक़ी बचा हुआ bāqiyatin
कोई बाक़ी बचा हुआ ٨ (8)
(8)
तो क्या تَرَىٰ आप देखते हैं tarā
आप देखते हैं لَهُم उनका lahum
उनका مِّنۢ any min
any بَاقِيَةٍۢ कोई बाक़ी बचा हुआ bāqiyatin
कोई बाक़ी बचा हुआ ٨ (8)
(8)
तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?
६९:९
وَجَآءَ
और आया
wajāa
और आया فِرْعَوْنُ फ़िरऔन fir'ʿawnu
फ़िरऔन وَمَن और जो waman
और जो قَبْلَهُۥ उससे पहले थे qablahu
उससे पहले थे وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ और उलट जानो वाली बस्तियाँ wal-mu'tafikātu
और उलट जानो वाली बस्तियाँ بِٱلْخَاطِئَةِ साथ गुनाह के bil-khāṭi-ati
साथ गुनाह के ٩ (9)
(9)
और आया فِرْعَوْنُ फ़िरऔन fir'ʿawnu
फ़िरऔन وَمَن और जो waman
और जो قَبْلَهُۥ उससे पहले थे qablahu
उससे पहले थे وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ और उलट जानो वाली बस्तियाँ wal-mu'tafikātu
और उलट जानो वाली बस्तियाँ بِٱلْخَاطِئَةِ साथ गुनाह के bil-khāṭi-ati
साथ गुनाह के ٩ (9)
(9)
और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।
६९:१०
فَعَصَوْا۟
तो उन्होंने नाफ़रमानी की
faʿaṣaw
तो उन्होंने नाफ़रमानी की رَسُولَ रसूल की rasūla
रसूल की رَبِّهِمْ अपने रब के rabbihim
अपने रब के فَأَخَذَهُمْ तो उसने पकड़ लिया उन्हें fa-akhadhahum
तो उसने पकड़ लिया उन्हें أَخْذَةًۭ पकड़ना akhdhatan
पकड़ना رَّابِيَةً सख़्त rābiyatan
सख़्त ١٠ (10)
(10)
तो उन्होंने नाफ़रमानी की رَسُولَ रसूल की rasūla
रसूल की رَبِّهِمْ अपने रब के rabbihim
अपने रब के فَأَخَذَهُمْ तो उसने पकड़ लिया उन्हें fa-akhadhahum
तो उसने पकड़ लिया उन्हें أَخْذَةًۭ पकड़ना akhdhatan
पकड़ना رَّابِيَةً सख़्त rābiyatan
सख़्त ١٠ (10)
(10)
उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।
६९:११
إِنَّا
बेशक हम
innā
बेशक हम لَمَّا जब lammā
जब طَغَا तुग़यानी की ṭaghā
तुग़यानी की ٱلْمَآءُ पानी ने l-māu
पानी ने حَمَلْنَـٰكُمْ सवार किया हमने तुम्हें ḥamalnākum
सवार किया हमने तुम्हें فِى in fī
in ٱلْجَارِيَةِ कश्ती में l-jāriyati
कश्ती में ١١ (11)
(11)
बेशक हम لَمَّا जब lammā
जब طَغَا तुग़यानी की ṭaghā
तुग़यानी की ٱلْمَآءُ पानी ने l-māu
पानी ने حَمَلْنَـٰكُمْ सवार किया हमने तुम्हें ḥamalnākum
सवार किया हमने तुम्हें فِى in fī
in ٱلْجَارِيَةِ कश्ती में l-jāriyati
कश्ती में ١١ (11)
(11)
निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव1 में सवार किया।
६९:१२
لِنَجْعَلَهَا
ताकि हम बना दें उसे
linajʿalahā
ताकि हम बना दें उसे لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए تَذْكِرَةًۭ याददिहानी tadhkiratan
याददिहानी وَتَعِيَهَآ और याद रखे उसे wataʿiyahā
और याद रखे उसे أُذُنٌۭ कान udhunun
कान وَٰعِيَةٌۭ याद रखने वाला wāʿiyatun
याद रखने वाला ١٢ (12)
(12)
ताकि हम बना दें उसे لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए تَذْكِرَةًۭ याददिहानी tadhkiratan
याददिहानी وَتَعِيَهَآ और याद रखे उसे wataʿiyahā
और याद रखे उसे أُذُنٌۭ कान udhunun
कान وَٰعِيَةٌۭ याद रखने वाला wāʿiyatun
याद रखने वाला ١٢ (12)
(12)
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।
६९:१३
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
फिर जब نُفِخَ फूँक दिया जाएगा nufikha
फूँक दिया जाएगा فِى in fī
in ٱلصُّورِ सूर में l-ṣūri
सूर में نَفْخَةٌۭ फूँकना nafkhatun
फूँकना وَٰحِدَةٌۭ एक ही बार wāḥidatun
एक ही बार ١٣ (13)
(13)
फिर जब نُفِخَ फूँक दिया जाएगा nufikha
फूँक दिया जाएगा فِى in fī
in ٱلصُّورِ सूर में l-ṣūri
सूर में نَفْخَةٌۭ फूँकना nafkhatun
फूँकना وَٰحِدَةٌۭ एक ही बार wāḥidatun
एक ही बार ١٣ (13)
(13)
फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।
६९:१४
وَحُمِلَتِ
और उठाई जाएगी
waḥumilati
और उठाई जाएगी ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन وَٱلْجِبَالُ और पहाड़ wal-jibālu
और पहाड़ فَدُكَّتَا तो दोनों रेज़ा-रेज़ा कर दिए जाऐंगे fadukkatā
तो दोनों रेज़ा-रेज़ा कर दिए जाऐंगे دَكَّةًۭ रेज़ा-रेज़ा किए जाना dakkatan
रेज़ा-रेज़ा किए जाना وَٰحِدَةًۭ एक ही बार wāḥidatan
एक ही बार ١٤ (14)
(14)
और उठाई जाएगी ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन وَٱلْجِبَالُ और पहाड़ wal-jibālu
और पहाड़ فَدُكَّتَا तो दोनों रेज़ा-रेज़ा कर दिए जाऐंगे fadukkatā
तो दोनों रेज़ा-रेज़ा कर दिए जाऐंगे دَكَّةًۭ रेज़ा-रेज़ा किए जाना dakkatan
रेज़ा-रेज़ा किए जाना وَٰحِدَةًۭ एक ही बार wāḥidatan
एक ही बार ١٤ (14)
(14)
और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।1
६९:१५
فَيَوْمَئِذٍۢ
तो उस दिन
fayawma-idhin
तो उस दिन وَقَعَتِ वाक़ेअ हो जाएगी waqaʿati
वाक़ेअ हो जाएगी ٱلْوَاقِعَةُ वाक़ेअ होने वाली l-wāqiʿatu
वाक़ेअ होने वाली ١٥ (15)
(15)
तो उस दिन وَقَعَتِ वाक़ेअ हो जाएगी waqaʿati
वाक़ेअ हो जाएगी ٱلْوَاقِعَةُ वाक़ेअ होने वाली l-wāqiʿatu
वाक़ेअ होने वाली ١٥ (15)
(15)
तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
६९:१६
وَٱنشَقَّتِ
और फट जाएगा
wa-inshaqqati
और फट जाएगा ٱلسَّمَآءُ आसमान l-samāu
आसमान فَهِىَ तो वो fahiya
तो वो يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन وَاهِيَةٌۭ कमज़ोर होगा wāhiyatun
कमज़ोर होगा ١٦ (16)
(16)
और फट जाएगा ٱلسَّمَآءُ आसमान l-samāu
आसमान فَهِىَ तो वो fahiya
तो वो يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन وَاهِيَةٌۭ कमज़ोर होगा wāhiyatun
कमज़ोर होगा ١٦ (16)
(16)
तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।
६९:१७
وَٱلْمَلَكُ
और फ़रिश्ते
wal-malaku
और फ़रिश्ते عَلَىٰٓ (will be) on ʿalā
(will be) on أَرْجَآئِهَا ۚ उसके किनारों पर होंगे arjāihā
उसके किनारों पर होंगे وَيَحْمِلُ और उठाऐंगे wayaḥmilu
और उठाऐंगे عَرْشَ अर्श ʿarsha
अर्श رَبِّكَ आपके रब का rabbika
आपके रब का فَوْقَهُمْ अपने ऊपर fawqahum
अपने ऊपर يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन ثَمَـٰنِيَةٌۭ आठ (फ़रिश्ते ) thamāniyatun
आठ (फ़रिश्ते ) ١٧ (17)
(17)
और फ़रिश्ते عَلَىٰٓ (will be) on ʿalā
(will be) on أَرْجَآئِهَا ۚ उसके किनारों पर होंगे arjāihā
उसके किनारों पर होंगे وَيَحْمِلُ और उठाऐंगे wayaḥmilu
और उठाऐंगे عَرْشَ अर्श ʿarsha
अर्श رَبِّكَ आपके रब का rabbika
आपके रब का فَوْقَهُمْ अपने ऊपर fawqahum
अपने ऊपर يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन ثَمَـٰنِيَةٌۭ आठ (फ़रिश्ते ) thamāniyatun
आठ (फ़रिश्ते ) ١٧ (17)
(17)
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।
६९:१८
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
yawma-idhin
उस दिन تُعْرَضُونَ तुम पेश किए जाओगे tuʿ'raḍūna
तुम पेश किए जाओगे لَا not lā
not تَخْفَىٰ ना छुप सकेगी takhfā
ना छुप सकेगी مِنكُمْ तुम से minkum
तुम से خَافِيَةٌۭ कोई छुपने वाली khāfiyatun
कोई छुपने वाली ١٨ (18)
(18)
उस दिन تُعْرَضُونَ तुम पेश किए जाओगे tuʿ'raḍūna
तुम पेश किए जाओगे لَا not lā
not تَخْفَىٰ ना छुप सकेगी takhfā
ना छुप सकेगी مِنكُمْ तुम से minkum
तुम से خَافِيَةٌۭ कोई छुपने वाली khāfiyatun
कोई छुपने वाली ١٨ (18)
(18)
उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।
६९:१९
فَأَمَّا
तो रहा
fa-ammā
तो रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी بِيَمِينِهِۦ अपने दाऐं हाथ में biyamīnihi
अपने दाऐं हाथ में فَيَقُولُ तो वो कहेगा fayaqūlu
तो वो कहेगा هَآؤُمُ लो hāumu
लो ٱقْرَءُوا۟ पढ़ो iq'raū
पढ़ो كِتَـٰبِيَهْ किताब मेरी kitābiyah
किताब मेरी ١٩ (19)
(19)
तो रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी بِيَمِينِهِۦ अपने दाऐं हाथ में biyamīnihi
अपने दाऐं हाथ में فَيَقُولُ तो वो कहेगा fayaqūlu
तो वो कहेगा هَآؤُمُ लो hāumu
लो ٱقْرَءُوا۟ पढ़ो iq'raū
पढ़ो كِتَـٰبِيَهْ किताब मेरी kitābiyah
किताब मेरी ١٩ (19)
(19)
फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।
६९:२०
إِنِّى
बेशक मैं
innī
बेशक मैं ظَنَنتُ यक़ीन रखता था मैं ẓanantu
यक़ीन रखता था मैं أَنِّى कि बेशक मैं annī
कि बेशक मैं مُلَـٰقٍ मुलाक़ात करने वाला हूँ mulāqin
मुलाक़ात करने वाला हूँ حِسَابِيَهْ अपने हिसाब से ḥisābiyah
अपने हिसाब से ٢٠ (20)
(20)
बेशक मैं ظَنَنتُ यक़ीन रखता था मैं ẓanantu
यक़ीन रखता था मैं أَنِّى कि बेशक मैं annī
कि बेशक मैं مُلَـٰقٍ मुलाक़ात करने वाला हूँ mulāqin
मुलाक़ात करने वाला हूँ حِسَابِيَهْ अपने हिसाब से ḥisābiyah
अपने हिसाब से ٢٠ (20)
(20)
मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।
६९:२१
فَهُوَ
तो वो
fahuwa
तो वो فِى (will be) in fī
(will be) in عِيشَةٍۢ ज़िन्दगी में होगा ʿīshatin
ज़िन्दगी में होगा رَّاضِيَةٍۢ दिल पसंद rāḍiyatin
दिल पसंद ٢١ (21)
(21)
तो वो فِى (will be) in fī
(will be) in عِيشَةٍۢ ज़िन्दगी में होगा ʿīshatin
ज़िन्दगी में होगा رَّاضِيَةٍۢ दिल पसंद rāḍiyatin
दिल पसंद ٢١ (21)
(21)
चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।
६९:२२
فِى
In
fī
In جَنَّةٍ a Garden jannatin
a Garden عَالِيَةٍۢ बुलन्द जन्नत में ʿāliyatin
बुलन्द जन्नत में ٢٢ (22)
(22)
In جَنَّةٍ a Garden jannatin
a Garden عَالِيَةٍۢ बुलन्द जन्नत में ʿāliyatin
बुलन्द जन्नत में ٢٢ (22)
(22)
एक ऊँची जन्नत में।
६९:२३
قُطُوفُهَا
फल जिसके
quṭūfuhā
फल जिसके دَانِيَةٌۭ क़रीब होंगे dāniyatun
क़रीब होंगे ٢٣ (23)
(23)
फल जिसके دَانِيَةٌۭ क़रीब होंगे dāniyatun
क़रीब होंगे ٢٣ (23)
(23)
जिसके फल निकट होंगे।
६९:२४
كُلُوا۟
खाओ
kulū
खाओ وَٱشْرَبُوا۟ और पियो wa-ish'rabū
और पियो هَنِيٓـًٔۢا मज़े से hanīan
मज़े से بِمَآ बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो أَسْلَفْتُمْ कर चुके तुम aslaftum
कर चुके तुम فِى in fī
in ٱلْأَيَّامِ दिनों में l-ayāmi
दिनों में ٱلْخَالِيَةِ गुज़िशता l-khāliyati
गुज़िशता ٢٤ (24)
(24)
खाओ وَٱشْرَبُوا۟ और पियो wa-ish'rabū
और पियो هَنِيٓـًٔۢا मज़े से hanīan
मज़े से بِمَآ बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो أَسْلَفْتُمْ कर चुके तुम aslaftum
कर चुके तुम فِى in fī
in ٱلْأَيَّامِ दिनों में l-ayāmi
दिनों में ٱلْخَالِيَةِ गुज़िशता l-khāliyati
गुज़िशता ٢٤ (24)
(24)
(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।
६९:२५
وَأَمَّا
और रहा
wa-ammā
और रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी بِشِمَالِهِۦ अपने दाऐं हाथ में bishimālihi
अपने दाऐं हाथ में فَيَقُولُ तो वो कहेगा fayaqūlu
तो वो कहेगा يَـٰلَيْتَنِى ऐ काश कि मैं yālaytanī
ऐ काश कि मैं لَمْ ना lam
ना أُوتَ मैं दिया जाता ūta
मैं दिया जाता كِتَـٰبِيَهْ किताब अपनी kitābiyah
किताब अपनी ٢٥ (25)
(25)
और रहा مَنْ वो जो man
वो जो أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी بِشِمَالِهِۦ अपने दाऐं हाथ में bishimālihi
अपने दाऐं हाथ में فَيَقُولُ तो वो कहेगा fayaqūlu
तो वो कहेगा يَـٰلَيْتَنِى ऐ काश कि मैं yālaytanī
ऐ काश कि मैं لَمْ ना lam
ना أُوتَ मैं दिया जाता ūta
मैं दिया जाता كِتَـٰبِيَهْ किताब अपनी kitābiyah
किताब अपनी ٢٥ (25)
(25)
और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।
६९:२६
وَلَمْ
और ना
walam
और ना أَدْرِ मैं जानता adri
मैं जानता مَا क्या है mā
क्या है حِسَابِيَهْ हिसाब मेरा ḥisābiyah
हिसाब मेरा ٢٦ (26)
(26)
और ना أَدْرِ मैं जानता adri
मैं जानता مَا क्या है mā
क्या है حِسَابِيَهْ हिसाब मेरा ḥisābiyah
हिसाब मेरा ٢٦ (26)
(26)
तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
६९:२७
يَـٰلَيْتَهَا
ऐ काश कि वो
yālaytahā
ऐ काश कि वो كَانَتِ होती वो kānati
होती वो ٱلْقَاضِيَةَ फ़ैसलाकुन l-qāḍiyata
फ़ैसलाकुन ٢٧ (27)
(27)
ऐ काश कि वो كَانَتِ होती वो kānati
होती वो ٱلْقَاضِيَةَ फ़ैसलाकुन l-qāḍiyata
फ़ैसलाकुन ٢٧ (27)
(27)
ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली1 होती।
६९:२८
مَآ
ना
mā
ना أَغْنَىٰ काम आया aghnā
काम आया عَنِّى मुझे ʿannī
मुझे مَالِيَهْ ۜ माल मेरा māliyah
माल मेरा ٢٨ (28)
(28)
ना أَغْنَىٰ काम आया aghnā
काम आया عَنِّى मुझे ʿannī
मुझे مَالِيَهْ ۜ माल मेरा māliyah
माल मेरा ٢٨ (28)
(28)
मेरा धन मेरे किसी काम न आया।
६९:२९
هَلَكَ
हलाक हो गई
halaka
हलाक हो गई عَنِّى मुझसे ʿannī
मुझसे سُلْطَـٰنِيَهْ सलतनत मेरी sul'ṭāniyah
सलतनत मेरी ٢٩ (29)
(29)
हलाक हो गई عَنِّى मुझसे ʿannī
मुझसे سُلْطَـٰنِيَهْ सलतनत मेरी sul'ṭāniyah
सलतनत मेरी ٢٩ (29)
(29)
मेरी सत्ता1 मुझसे जाती रही।
६९:३०
خُذُوهُ
पकड़ो उसे
khudhūhu
पकड़ो उसे فَغُلُّوهُ फिर तौक़ पहनाओ उसे faghullūhu
फिर तौक़ पहनाओ उसे ٣٠ (30)
(30)
पकड़ो उसे فَغُلُّوهُ फिर तौक़ पहनाओ उसे faghullūhu
फिर तौक़ पहनाओ उसे ٣٠ (30)
(30)
(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।
६९:३१
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर ٱلْجَحِيمَ जहन्नम में l-jaḥīma
जहन्नम में صَلُّوهُ झोंको उसे ṣallūhu
झोंको उसे ٣١ (31)
(31)
फिर ٱلْجَحِيمَ जहन्नम में l-jaḥīma
जहन्नम में صَلُّوهُ झोंको उसे ṣallūhu
झोंको उसे ٣١ (31)
(31)
फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।
६९:३२
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर فِى into fī
into سِلْسِلَةٍۢ एक ज़ंजीर में sil'silatin
एक ज़ंजीर में ذَرْعُهَا पैमाइश जिसकी dharʿuhā
पैमाइश जिसकी سَبْعُونَ सत्तर sabʿūna
सत्तर ذِرَاعًۭا गज़ है dhirāʿan
गज़ है فَٱسْلُكُوهُ पस दाख़िल करो उसे fa-us'lukūhu
पस दाख़िल करो उसे ٣٢ (32)
(32)
फिर فِى into fī
into سِلْسِلَةٍۢ एक ज़ंजीर में sil'silatin
एक ज़ंजीर में ذَرْعُهَا पैमाइश जिसकी dharʿuhā
पैमाइश जिसकी سَبْعُونَ सत्तर sabʿūna
सत्तर ذِرَاعًۭا गज़ है dhirāʿan
गज़ है فَٱسْلُكُوهُ पस दाख़िल करो उसे fa-us'lukūhu
पस दाख़िल करो उसे ٣٢ (32)
(32)
फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।
६९:३३
إِنَّهُۥ
बेशक वो
innahu
बेशक वो كَانَ था वो kāna
था वो لَا not lā
not يُؤْمِنُ ना वो ईमान रखता yu'minu
ना वो ईमान रखता بِٱللَّهِ अल्लाह पर bil-lahi
अल्लाह पर ٱلْعَظِيمِ जो अज़मत वाला है l-ʿaẓīmi
जो अज़मत वाला है ٣٣ (33)
(33)
बेशक वो كَانَ था वो kāna
था वो لَا not lā
not يُؤْمِنُ ना वो ईमान रखता yu'minu
ना वो ईमान रखता بِٱللَّهِ अल्लाह पर bil-lahi
अल्लाह पर ٱلْعَظِيمِ जो अज़मत वाला है l-ʿaẓīmi
जो अज़मत वाला है ٣٣ (33)
(33)
निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।
६९:३४
وَلَا
और ना
walā
और ना يَحُضُّ वो तरग़ीब देता था yaḥuḍḍu
वो तरग़ीब देता था عَلَىٰ on ʿalā
on طَعَامِ खाना (खिलाने)पर ṭaʿāmi
खाना (खिलाने)पर ٱلْمِسْكِينِ मिसकीन को l-mis'kīni
मिसकीन को ٣٤ (34)
(34)
और ना يَحُضُّ वो तरग़ीब देता था yaḥuḍḍu
वो तरग़ीब देता था عَلَىٰ on ʿalā
on طَعَامِ खाना (खिलाने)पर ṭaʿāmi
खाना (खिलाने)पर ٱلْمِسْكِينِ मिसकीन को l-mis'kīni
मिसकीन को ٣٤ (34)
(34)
तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।
६९:३५
فَلَيْسَ
तो नहीं है
falaysa
तो नहीं है لَهُ उसके लिए lahu
उसके लिए ٱلْيَوْمَ आज l-yawma
आज هَـٰهُنَا यहाँ hāhunā
यहाँ حَمِيمٌۭ कोई गहरा दोस्त ḥamīmun
कोई गहरा दोस्त ٣٥ (35)
(35)
तो नहीं है لَهُ उसके लिए lahu
उसके लिए ٱلْيَوْمَ आज l-yawma
आज هَـٰهُنَا यहाँ hāhunā
यहाँ حَمِيمٌۭ कोई गहरा दोस्त ḥamīmun
कोई गहरा दोस्त ٣٥ (35)
(35)
अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।
६९:३६
وَلَا
और ना
walā
और ना طَعَامٌ कोई खाना ṭaʿāmun
कोई खाना إِلَّا मगर illā
मगर مِنْ from min
from غِسْلِينٍۢ ज़ख़्मों के धोवन का ghis'līnin
ज़ख़्मों के धोवन का ٣٦ (36)
(36)
और ना طَعَامٌ कोई खाना ṭaʿāmun
कोई खाना إِلَّا मगर illā
मगर مِنْ from min
from غِسْلِينٍۢ ज़ख़्मों के धोवन का ghis'līnin
ज़ख़्मों के धोवन का ٣٦ (36)
(36)
और न पीप के सिवा कोई भोजन है।
६९:३७
لَّا
Not
lā
Not يَأْكُلُهُۥٓ नहीं खाऐंगे उसे yakuluhu
नहीं खाऐंगे उसे إِلَّا मगर illā
मगर ٱلْخَـٰطِـُٔونَ ख़ताकार l-khāṭiūna
ख़ताकार ٣٧ (37)
(37)
Not يَأْكُلُهُۥٓ नहीं खाऐंगे उसे yakuluhu
नहीं खाऐंगे उसे إِلَّا मगर illā
मगर ٱلْخَـٰطِـُٔونَ ख़ताकार l-khāṭiūna
ख़ताकार ٣٧ (37)
(37)
जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।
६९:३८
فَلَآ
पस नहीं
falā
पस नहीं أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ بِمَا उसकी जो bimā
उसकी जो تُبْصِرُونَ तुम देखते हो tub'ṣirūna
तुम देखते हो ٣٨ (38)
(38)
पस नहीं أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ بِمَا उसकी जो bimā
उसकी जो تُبْصِرُونَ तुम देखते हो tub'ṣirūna
तुम देखते हो ٣٨ (38)
(38)
मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।
६९:३९
وَمَا
और जो
wamā
और जो لَا not lā
not تُبْصِرُونَ नहीं तुम देखते tub'ṣirūna
नहीं तुम देखते ٣٩ (39)
(39)
और जो لَا not lā
not تُبْصِرُونَ नहीं तुम देखते tub'ṣirūna
नहीं तुम देखते ٣٩ (39)
(39)
तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।
६९:४०
إِنَّهُۥ
बेशक ये
innahu
बेशक ये لَقَوْلُ यक़ीनन क़ौल है laqawlu
यक़ीनन क़ौल है رَسُولٍۢ एक पयामबर rasūlin
एक पयामबर كَرِيمٍۢ मोअज़्ज़िज़ का karīmin
मोअज़्ज़िज़ का ٤٠ (40)
(40)
बेशक ये لَقَوْلُ यक़ीनन क़ौल है laqawlu
यक़ीनन क़ौल है رَسُولٍۢ एक पयामबर rasūlin
एक पयामबर كَرِيمٍۢ मोअज़्ज़िज़ का karīmin
मोअज़्ज़िज़ का ٤٠ (40)
(40)
निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल1 का कथन है।
६९:४१
وَمَا
और नहीं
wamā
और नहीं هُوَ ये huwa
ये بِقَوْلِ क़ौल biqawli
क़ौल شَاعِرٍۢ ۚ किसी शायर का shāʿirin
किसी शायर का قَلِيلًۭا little qalīlan
little مَّا कितना कम mā
कितना कम تُؤْمِنُونَ तुम ईमान लाते हो tu'minūna
तुम ईमान लाते हो ٤١ (41)
(41)
और नहीं هُوَ ये huwa
ये بِقَوْلِ क़ौल biqawli
क़ौल شَاعِرٍۢ ۚ किसी शायर का shāʿirin
किसी शायर का قَلِيلًۭا little qalīlan
little مَّا कितना कम mā
कितना कम تُؤْمِنُونَ तुम ईमान लाते हो tu'minūna
तुम ईमान लाते हो ٤١ (41)
(41)
और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।
६९:४२
وَلَا
और ना ही
walā
और ना ही بِقَوْلِ क़ौल है biqawli
क़ौल है كَاهِنٍۢ ۚ किसी काहिन का kāhinin
किसी काहिन का قَلِيلًۭا little qalīlan
little مَّا कितना कम mā
कितना कम تَذَكَّرُونَ तुम नसीहत पकड़ते हो tadhakkarūna
तुम नसीहत पकड़ते हो ٤٢ (42)
(42)
और ना ही بِقَوْلِ क़ौल है biqawli
क़ौल है كَاهِنٍۢ ۚ किसी काहिन का kāhinin
किसी काहिन का قَلِيلًۭا little qalīlan
little مَّا कितना कम mā
कितना कम تَذَكَّرُونَ तुम नसीहत पकड़ते हो tadhakkarūna
तुम नसीहत पकड़ते हो ٤٢ (42)
(42)
और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।
६९:४३
تَنزِيلٌۭ
नाज़िल करदा
tanzīlun
नाज़िल करदा مِّن from min
from رَّبِّ रब की तरफ़ से rabbi
रब की तरफ़ से ٱلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहानों के l-ʿālamīna
तमाम जहानों के ٤٣ (43)
(43)
नाज़िल करदा مِّن from min
from رَّبِّ रब की तरफ़ से rabbi
रब की तरफ़ से ٱلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहानों के l-ʿālamīna
तमाम जहानों के ٤٣ (43)
(43)
(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।
६९:४४
وَلَوْ
और अगर
walaw
और अगर تَقَوَّلَ वो गढ़ लेता taqawwala
वो गढ़ लेता عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर بَعْضَ बाज़ baʿḍa
बाज़ ٱلْأَقَاوِيلِ बातें l-aqāwīli
बातें ٤٤ (44)
(44)
और अगर تَقَوَّلَ वो गढ़ लेता taqawwala
वो गढ़ लेता عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर بَعْضَ बाज़ baʿḍa
बाज़ ٱلْأَقَاوِيلِ बातें l-aqāwīli
बातें ٤٤ (44)
(44)
और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर1 लगाता।
६९:४५
لَأَخَذْنَا
अलबत्ता पकड़ लेते हम
la-akhadhnā
अलबत्ता पकड़ लेते हम مِنْهُ उसे min'hu
उसे بِٱلْيَمِينِ दाऐं हाथ से bil-yamīni
दाऐं हाथ से ٤٥ (45)
(45)
अलबत्ता पकड़ लेते हम مِنْهُ उसे min'hu
उसे بِٱلْيَمِينِ दाऐं हाथ से bil-yamīni
दाऐं हाथ से ٤٥ (45)
(45)
तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।
६९:४६
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर لَقَطَعْنَا अलबत्ता काट देते हम laqaṭaʿnā
अलबत्ता काट देते हम مِنْهُ उसकी min'hu
उसकी ٱلْوَتِينَ रगे जान l-watīna
रगे जान ٤٦ (46)
(46)
फिर لَقَطَعْنَا अलबत्ता काट देते हम laqaṭaʿnā
अलबत्ता काट देते हम مِنْهُ उसकी min'hu
उसकी ٱلْوَتِينَ रगे जान l-watīna
रगे जान ٤٦ (46)
(46)
फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।
६९:४७
فَمَا
तो ना होता
famā
तो ना होता مِنكُم तुम में से minkum
तुम में से مِّنْ any min
any أَحَدٍ कोई एक aḥadin
कोई एक عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे حَـٰجِزِينَ रोकने वाला ḥājizīna
रोकने वाला ٤٧ (47)
(47)
तो ना होता مِنكُم तुम में से minkum
तुम में से مِّنْ any min
any أَحَدٍ कोई एक aḥadin
कोई एक عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे حَـٰجِزِينَ रोकने वाला ḥājizīna
रोकने वाला ٤٧ (47)
(47)
फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।
६९:४८
وَإِنَّهُۥ
और बेशक वो
wa-innahu
और बेशक वो لَتَذْكِرَةٌۭ अलबत्ता एक नसीहत है latadhkiratun
अलबत्ता एक नसीहत है لِّلْمُتَّقِينَ मुत्तक़ी लोगों के लिए lil'muttaqīna
मुत्तक़ी लोगों के लिए ٤٨ (48)
(48)
और बेशक वो لَتَذْكِرَةٌۭ अलबत्ता एक नसीहत है latadhkiratun
अलबत्ता एक नसीहत है لِّلْمُتَّقِينَ मुत्तक़ी लोगों के लिए lil'muttaqīna
मुत्तक़ी लोगों के लिए ٤٨ (48)
(48)
निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।
६९:४९
وَإِنَّا
और बेशक हम
wa-innā
और बेशक हम لَنَعْلَمُ अलबत्ता हम जानते हैं lanaʿlamu
अलबत्ता हम जानते हैं أَنَّ कि बेशक anna
कि बेशक مِنكُم तुम में कुछ minkum
तुम में कुछ مُّكَذِّبِينَ झुठलाने वाले हैं mukadhibīna
झुठलाने वाले हैं ٤٩ (49)
(49)
और बेशक हम لَنَعْلَمُ अलबत्ता हम जानते हैं lanaʿlamu
अलबत्ता हम जानते हैं أَنَّ कि बेशक anna
कि बेशक مِنكُم तुम में कुछ minkum
तुम में कुछ مُّكَذِّبِينَ झुठलाने वाले हैं mukadhibīna
झुठलाने वाले हैं ٤٩ (49)
(49)
तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।
६९:५०
وَإِنَّهُۥ
और बेशक वो
wa-innahu
और बेशक वो لَحَسْرَةٌ अलबत्ता हसरत है laḥasratun
अलबत्ता हसरत है عَلَى upon ʿalā
upon ٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों पर l-kāfirīna
काफ़िरों पर ٥٠ (50)
(50)
और बेशक वो لَحَسْرَةٌ अलबत्ता हसरत है laḥasratun
अलबत्ता हसरत है عَلَى upon ʿalā
upon ٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों पर l-kāfirīna
काफ़िरों पर ٥٠ (50)
(50)
और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों1 के लिए पछतावे का कारण है।
६९:५१
وَإِنَّهُۥ
और बेशक वो
wa-innahu
और बेशक वो لَحَقُّ अलबत्ता हक़ है laḥaqqu
अलबत्ता हक़ है ٱلْيَقِينِ यक़ीनी l-yaqīni
यक़ीनी ٥١ (51)
(51)
और बेशक वो لَحَقُّ अलबत्ता हक़ है laḥaqqu
अलबत्ता हक़ है ٱلْيَقِينِ यक़ीनी l-yaqīni
यक़ीनी ٥١ (51)
(51)
और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।
६९:५२
فَسَبِّحْ
पस तस्बीह कीजिए
fasabbiḥ
पस तस्बीह कीजिए بِٱسْمِ नाम की bi-is'mi
नाम की رَبِّكَ अपने रब की rabbika
अपने रब की ٱلْعَظِيمِ जो अज़मत वाला है l-ʿaẓīmi
जो अज़मत वाला है ٥٢ (52)
(52)
पस तस्बीह कीजिए بِٱسْمِ नाम की bi-is'mi
नाम की رَبِّكَ अपने रब की rabbika
अपने रब की ٱلْعَظِيمِ जो अज़मत वाला है l-ʿaẓīmi
जो अज़मत वाला है ٥٢ (52)
(52)
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।