६९

अल-हाक़्क़ा

मक्की ५२ आयतें पारा २९
الحاقة
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६९:१
ٱلْحَآقَّةُ हक़ होने वाली al-ḥāqatu
हक़ होने वाली
١ (1)
(1)
होकर रहने वाली।
६९:२
مَا क्या है
क्या है
ٱلْحَآقَّةُ हक़ होने वाली l-ḥāqatu
हक़ होने वाली
٢ (2)
(2)
क्या है वह होकर रहने वाली?
६९:३
وَمَآ और क्या wamā
और क्या
أَدْرَىٰكَ बताए आपको adrāka
बताए आपको
مَا क्या है
क्या है
ٱلْحَآقَّةُ हक़ होने वाली l-ḥāqatu
हक़ होने वाली
٣ (3)
(3)
और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?
६९:४
كَذَّبَتْ झुठलाया kadhabat
झुठलाया
ثَمُودُ समूद thamūdu
समूद
وَعَادٌۢ और आद ने waʿādun
और आद ने
بِٱلْقَارِعَةِ खटखटाने वाली को bil-qāriʿati
खटखटाने वाली को
٤ (4)
(4)
समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।
६९:५
فَأَمَّا तो रहे fa-ammā
तो रहे
ثَمُودُ समूद thamūdu
समूद
فَأُهْلِكُوا۟ पस वो हलाक किए गए fa-uh'likū
पस वो हलाक किए गए
بِٱلطَّاغِيَةِ हद से गुज़रने वाली से bil-ṭāghiyati
हद से गुज़रने वाली से
٥ (5)
(5)
फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।
६९:६
وَأَمَّا और रहे wa-ammā
और रहे
عَادٌۭ आद ʿādun
आद
فَأُهْلِكُوا۟ पस वो हलाक किए गए fa-uh'likū
पस वो हलाक किए गए
بِرِيحٍۢ हवा से birīḥin
हवा से
صَرْصَرٍ ठंडी यख़ ṣarṣarin
ठंडी यख़
عَاتِيَةٍۢ सरकश ʿātiyatin
सरकश
٦ (6)
(6)
और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।
६९:७
سَخَّرَهَا उसने मुसल्लत कर दिया उसे sakharahā
उसने मुसल्लत कर दिया उसे
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
سَبْعَ सात sabʿa
सात
لَيَالٍۢ रातें layālin
रातें
وَثَمَـٰنِيَةَ और आठ wathamāniyata
और आठ
أَيَّامٍ दिन ayyāmin
दिन
حُسُومًۭا मुसलसल ḥusūman
मुसलसल
فَتَرَى तो आप देखते fatarā
तो आप देखते
ٱلْقَوْمَ उन लोगों को l-qawma
उन लोगों को
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
صَرْعَىٰ पछाड़े हुए ṣarʿā
पछाड़े हुए
كَأَنَّهُمْ गोया कि वो ka-annahum
गोया कि वो
أَعْجَازُ तने हैं aʿjāzu
तने हैं
نَخْلٍ खजूर के दरख़्त के nakhlin
खजूर के दरख़्त के
خَاوِيَةٍۢ खोखले khāwiyatin
खोखले
٧ (7)
(7)
अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।1
६९:८
فَهَلْ तो क्या fahal
तो क्या
تَرَىٰ आप देखते हैं tarā
आप देखते हैं
لَهُم उनका lahum
उनका
مِّنۢ any min
any
بَاقِيَةٍۢ कोई बाक़ी बचा हुआ bāqiyatin
कोई बाक़ी बचा हुआ
٨ (8)
(8)
तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?
६९:९
وَجَآءَ और आया wajāa
और आया
فِرْعَوْنُ फ़िरऔन fir'ʿawnu
फ़िरऔन
وَمَن और जो waman
और जो
قَبْلَهُۥ उससे पहले थे qablahu
उससे पहले थे
وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ और उलट जानो वाली बस्तियाँ wal-mu'tafikātu
और उलट जानो वाली बस्तियाँ
بِٱلْخَاطِئَةِ साथ गुनाह के bil-khāṭi-ati
साथ गुनाह के
٩ (9)
(9)
और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।
६९:१०
فَعَصَوْا۟ तो उन्होंने नाफ़रमानी की faʿaṣaw
तो उन्होंने नाफ़रमानी की
رَسُولَ रसूल की rasūla
रसूल की
رَبِّهِمْ अपने रब के rabbihim
अपने रब के
فَأَخَذَهُمْ तो उसने पकड़ लिया उन्हें fa-akhadhahum
तो उसने पकड़ लिया उन्हें
أَخْذَةًۭ पकड़ना akhdhatan
पकड़ना
رَّابِيَةً सख़्त rābiyatan
सख़्त
١٠ (10)
(10)
उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।
६९:११
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
لَمَّا जब lammā
जब
طَغَا तुग़यानी की ṭaghā
तुग़यानी की
ٱلْمَآءُ पानी ने l-māu
पानी ने
حَمَلْنَـٰكُمْ सवार किया हमने तुम्हें ḥamalnākum
सवार किया हमने तुम्हें
فِى in
in
ٱلْجَارِيَةِ कश्ती में l-jāriyati
कश्ती में
١١ (11)
(11)
निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव1 में सवार किया।
६९:१२
لِنَجْعَلَهَا ताकि हम बना दें उसे linajʿalahā
ताकि हम बना दें उसे
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
تَذْكِرَةًۭ याददिहानी tadhkiratan
याददिहानी
وَتَعِيَهَآ और याद रखे उसे wataʿiyahā
और याद रखे उसे
أُذُنٌۭ कान udhunun
कान
وَٰعِيَةٌۭ याद रखने वाला wāʿiyatun
याद रखने वाला
١٢ (12)
(12)
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।
६९:१३
فَإِذَا फिर जब fa-idhā
फिर जब
نُفِخَ फूँक दिया जाएगा nufikha
फूँक दिया जाएगा
فِى in
in
ٱلصُّورِ सूर में l-ṣūri
सूर में
نَفْخَةٌۭ फूँकना nafkhatun
फूँकना
وَٰحِدَةٌۭ एक ही बार wāḥidatun
एक ही बार
١٣ (13)
(13)
फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।
६९:१४
وَحُمِلَتِ और उठाई जाएगी waḥumilati
और उठाई जाएगी
ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन
وَٱلْجِبَالُ और पहाड़ wal-jibālu
और पहाड़
فَدُكَّتَا तो दोनों रेज़ा-रेज़ा कर दिए जाऐंगे fadukkatā
तो दोनों रेज़ा-रेज़ा कर दिए जाऐंगे
دَكَّةًۭ रेज़ा-रेज़ा किए जाना dakkatan
रेज़ा-रेज़ा किए जाना
وَٰحِدَةًۭ एक ही बार wāḥidatan
एक ही बार
١٤ (14)
(14)
और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।1
६९:१५
فَيَوْمَئِذٍۢ तो उस दिन fayawma-idhin
तो उस दिन
وَقَعَتِ वाक़ेअ हो जाएगी waqaʿati
वाक़ेअ हो जाएगी
ٱلْوَاقِعَةُ वाक़ेअ होने वाली l-wāqiʿatu
वाक़ेअ होने वाली
١٥ (15)
(15)
तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
६९:१६
وَٱنشَقَّتِ और फट जाएगा wa-inshaqqati
और फट जाएगा
ٱلسَّمَآءُ आसमान l-samāu
आसमान
فَهِىَ तो वो fahiya
तो वो
يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
وَاهِيَةٌۭ कमज़ोर होगा wāhiyatun
कमज़ोर होगा
١٦ (16)
(16)
तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।
६९:१७
وَٱلْمَلَكُ और फ़रिश्ते wal-malaku
और फ़रिश्ते
عَلَىٰٓ (will be) on ʿalā
(will be) on
أَرْجَآئِهَا ۚ उसके किनारों पर होंगे arjāihā
उसके किनारों पर होंगे
وَيَحْمِلُ और उठाऐंगे wayaḥmilu
और उठाऐंगे
عَرْشَ अर्श ʿarsha
अर्श
رَبِّكَ आपके रब का rabbika
आपके रब का
فَوْقَهُمْ अपने ऊपर fawqahum
अपने ऊपर
يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
ثَمَـٰنِيَةٌۭ आठ (फ़रिश्ते ) thamāniyatun
आठ (फ़रिश्ते )
١٧ (17)
(17)
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।
६९:१८
يَوْمَئِذٍۢ उस दिन yawma-idhin
उस दिन
تُعْرَضُونَ तुम पेश किए जाओगे tuʿ'raḍūna
तुम पेश किए जाओगे
لَا not
not
تَخْفَىٰ ना छुप सकेगी takhfā
ना छुप सकेगी
مِنكُمْ तुम से minkum
तुम से
خَافِيَةٌۭ कोई छुपने वाली khāfiyatun
कोई छुपने वाली
١٨ (18)
(18)
उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।
६९:१९
فَأَمَّا तो रहा fa-ammā
तो रहा
مَنْ वो जो man
वो जो
أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया
كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी
بِيَمِينِهِۦ अपने दाऐं हाथ में biyamīnihi
अपने दाऐं हाथ में
فَيَقُولُ तो वो कहेगा fayaqūlu
तो वो कहेगा
هَآؤُمُ लो hāumu
लो
ٱقْرَءُوا۟ पढ़ो iq'raū
पढ़ो
كِتَـٰبِيَهْ किताब मेरी kitābiyah
किताब मेरी
١٩ (19)
(19)
फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।
६९:२०
إِنِّى बेशक मैं innī
बेशक मैं
ظَنَنتُ यक़ीन रखता था मैं ẓanantu
यक़ीन रखता था मैं
أَنِّى कि बेशक मैं annī
कि बेशक मैं
مُلَـٰقٍ मुलाक़ात करने वाला हूँ mulāqin
मुलाक़ात करने वाला हूँ
حِسَابِيَهْ अपने हिसाब से ḥisābiyah
अपने हिसाब से
٢٠ (20)
(20)
मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।
६९:२१
فَهُوَ तो वो fahuwa
तो वो
فِى (will be) in
(will be) in
عِيشَةٍۢ ज़िन्दगी में होगा ʿīshatin
ज़िन्दगी में होगा
رَّاضِيَةٍۢ दिल पसंद rāḍiyatin
दिल पसंद
٢١ (21)
(21)
चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।
६९:२२
فِى In
In
جَنَّةٍ a Garden jannatin
a Garden
عَالِيَةٍۢ बुलन्द जन्नत में ʿāliyatin
बुलन्द जन्नत में
٢٢ (22)
(22)
एक ऊँची जन्नत में।
६९:२३
قُطُوفُهَا फल जिसके quṭūfuhā
फल जिसके
دَانِيَةٌۭ क़रीब होंगे dāniyatun
क़रीब होंगे
٢٣ (23)
(23)
जिसके फल निकट होंगे।
६९:२४
كُلُوا۟ खाओ kulū
खाओ
وَٱشْرَبُوا۟ और पियो wa-ish'rabū
और पियो
هَنِيٓـًٔۢا मज़े से hanīan
मज़े से
بِمَآ बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो
أَسْلَفْتُمْ कर चुके तुम aslaftum
कर चुके तुम
فِى in
in
ٱلْأَيَّامِ दिनों में l-ayāmi
दिनों में
ٱلْخَالِيَةِ गुज़िशता l-khāliyati
गुज़िशता
٢٤ (24)
(24)
(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।
६९:२५
وَأَمَّا और रहा wa-ammā
और रहा
مَنْ वो जो man
वो जो
أُوتِىَ दिया गया ūtiya
दिया गया
كِتَـٰبَهُۥ किताब अपनी kitābahu
किताब अपनी
بِشِمَالِهِۦ अपने दाऐं हाथ में bishimālihi
अपने दाऐं हाथ में
فَيَقُولُ तो वो कहेगा fayaqūlu
तो वो कहेगा
يَـٰلَيْتَنِى ऐ काश कि मैं yālaytanī
ऐ काश कि मैं
لَمْ ना lam
ना
أُوتَ मैं दिया जाता ūta
मैं दिया जाता
كِتَـٰبِيَهْ किताब अपनी kitābiyah
किताब अपनी
٢٥ (25)
(25)
और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।
६९:२६
وَلَمْ और ना walam
और ना
أَدْرِ मैं जानता adri
मैं जानता
مَا क्या है
क्या है
حِسَابِيَهْ हिसाब मेरा ḥisābiyah
हिसाब मेरा
٢٦ (26)
(26)
तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
६९:२७
يَـٰلَيْتَهَا ऐ काश कि वो yālaytahā
ऐ काश कि वो
كَانَتِ होती वो kānati
होती वो
ٱلْقَاضِيَةَ फ़ैसलाकुन l-qāḍiyata
फ़ैसलाकुन
٢٧ (27)
(27)
ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली1 होती।
६९:२८
مَآ ना
ना
أَغْنَىٰ काम आया aghnā
काम आया
عَنِّى मुझे ʿannī
मुझे
مَالِيَهْ ۜ माल मेरा māliyah
माल मेरा
٢٨ (28)
(28)
मेरा धन मेरे किसी काम न आया।
६९:२९
هَلَكَ हलाक हो गई halaka
हलाक हो गई
عَنِّى मुझसे ʿannī
मुझसे
سُلْطَـٰنِيَهْ सलतनत मेरी sul'ṭāniyah
सलतनत मेरी
٢٩ (29)
(29)
मेरी सत्ता1 मुझसे जाती रही।
६९:३०
خُذُوهُ पकड़ो उसे khudhūhu
पकड़ो उसे
فَغُلُّوهُ फिर तौक़ पहनाओ उसे faghullūhu
फिर तौक़ पहनाओ उसे
٣٠ (30)
(30)
(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।
६९:३१
ثُمَّ फिर thumma
फिर
ٱلْجَحِيمَ जहन्नम में l-jaḥīma
जहन्नम में
صَلُّوهُ झोंको उसे ṣallūhu
झोंको उसे
٣١ (31)
(31)
फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।
६९:३२
ثُمَّ फिर thumma
फिर
فِى into
into
سِلْسِلَةٍۢ एक ज़ंजीर में sil'silatin
एक ज़ंजीर में
ذَرْعُهَا पैमाइश जिसकी dharʿuhā
पैमाइश जिसकी
سَبْعُونَ सत्तर sabʿūna
सत्तर
ذِرَاعًۭا गज़ है dhirāʿan
गज़ है
فَٱسْلُكُوهُ पस दाख़िल करो उसे fa-us'lukūhu
पस दाख़िल करो उसे
٣٢ (32)
(32)
फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।
६९:३३
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
كَانَ था वो kāna
था वो
لَا not
not
يُؤْمِنُ ना वो ईमान रखता yu'minu
ना वो ईमान रखता
بِٱللَّهِ अल्लाह पर bil-lahi
अल्लाह पर
ٱلْعَظِيمِ जो अज़मत वाला है l-ʿaẓīmi
जो अज़मत वाला है
٣٣ (33)
(33)
निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।
६९:३४
وَلَا और ना walā
और ना
يَحُضُّ वो तरग़ीब देता था yaḥuḍḍu
वो तरग़ीब देता था
عَلَىٰ on ʿalā
on
طَعَامِ खाना (खिलाने)पर ṭaʿāmi
खाना (खिलाने)पर
ٱلْمِسْكِينِ मिसकीन को l-mis'kīni
मिसकीन को
٣٤ (34)
(34)
तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।
६९:३५
فَلَيْسَ तो नहीं है falaysa
तो नहीं है
لَهُ उसके लिए lahu
उसके लिए
ٱلْيَوْمَ आज l-yawma
आज
هَـٰهُنَا यहाँ hāhunā
यहाँ
حَمِيمٌۭ कोई गहरा दोस्त ḥamīmun
कोई गहरा दोस्त
٣٥ (35)
(35)
अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।
६९:३६
وَلَا और ना walā
और ना
طَعَامٌ कोई खाना ṭaʿāmun
कोई खाना
إِلَّا मगर illā
मगर
مِنْ from min
from
غِسْلِينٍۢ ज़ख़्मों के धोवन का ghis'līnin
ज़ख़्मों के धोवन का
٣٦ (36)
(36)
और न पीप के सिवा कोई भोजन है।
६९:३७
لَّا Not
Not
يَأْكُلُهُۥٓ नहीं खाऐंगे उसे yakuluhu
नहीं खाऐंगे उसे
إِلَّا मगर illā
मगर
ٱلْخَـٰطِـُٔونَ ख़ताकार l-khāṭiūna
ख़ताकार
٣٧ (37)
(37)
जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।
६९:३८
فَلَآ पस नहीं falā
पस नहीं
أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ
بِمَا उसकी जो bimā
उसकी जो
تُبْصِرُونَ तुम देखते हो tub'ṣirūna
तुम देखते हो
٣٨ (38)
(38)
मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।
६९:३९
وَمَا और जो wamā
और जो
لَا not
not
تُبْصِرُونَ नहीं तुम देखते tub'ṣirūna
नहीं तुम देखते
٣٩ (39)
(39)
तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।
६९:४०
إِنَّهُۥ बेशक ये innahu
बेशक ये
لَقَوْلُ यक़ीनन क़ौल है laqawlu
यक़ीनन क़ौल है
رَسُولٍۢ एक पयामबर rasūlin
एक पयामबर
كَرِيمٍۢ मोअज़्ज़िज़ का karīmin
मोअज़्ज़िज़ का
٤٠ (40)
(40)
निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल1 का कथन है।
६९:४१
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
هُوَ ये huwa
ये
بِقَوْلِ क़ौल biqawli
क़ौल
شَاعِرٍۢ ۚ किसी शायर का shāʿirin
किसी शायर का
قَلِيلًۭا little qalīlan
little
مَّا कितना कम
कितना कम
تُؤْمِنُونَ तुम ईमान लाते हो tu'minūna
तुम ईमान लाते हो
٤١ (41)
(41)
और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।
६९:४२
وَلَا और ना ही walā
और ना ही
بِقَوْلِ क़ौल है biqawli
क़ौल है
كَاهِنٍۢ ۚ किसी काहिन का kāhinin
किसी काहिन का
قَلِيلًۭا little qalīlan
little
مَّا कितना कम
कितना कम
تَذَكَّرُونَ तुम नसीहत पकड़ते हो tadhakkarūna
तुम नसीहत पकड़ते हो
٤٢ (42)
(42)
और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।
६९:४३
تَنزِيلٌۭ नाज़िल करदा tanzīlun
नाज़िल करदा
مِّن from min
from
رَّبِّ रब की तरफ़ से rabbi
रब की तरफ़ से
ٱلْعَـٰلَمِينَ तमाम जहानों के l-ʿālamīna
तमाम जहानों के
٤٣ (43)
(43)
(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।
६९:४४
وَلَوْ और अगर walaw
और अगर
تَقَوَّلَ वो गढ़ लेता taqawwala
वो गढ़ लेता
عَلَيْنَا हम पर ʿalaynā
हम पर
بَعْضَ बाज़ baʿḍa
बाज़
ٱلْأَقَاوِيلِ बातें l-aqāwīli
बातें
٤٤ (44)
(44)
और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर1 लगाता।
६९:४५
لَأَخَذْنَا अलबत्ता पकड़ लेते हम la-akhadhnā
अलबत्ता पकड़ लेते हम
مِنْهُ उसे min'hu
उसे
بِٱلْيَمِينِ दाऐं हाथ से bil-yamīni
दाऐं हाथ से
٤٥ (45)
(45)
तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।
६९:४६
ثُمَّ फिर thumma
फिर
لَقَطَعْنَا अलबत्ता काट देते हम laqaṭaʿnā
अलबत्ता काट देते हम
مِنْهُ उसकी min'hu
उसकी
ٱلْوَتِينَ रगे जान l-watīna
रगे जान
٤٦ (46)
(46)
फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।
६९:४७
فَمَا तो ना होता famā
तो ना होता
مِنكُم तुम में से minkum
तुम में से
مِّنْ any min
any
أَحَدٍ कोई एक aḥadin
कोई एक
عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे
حَـٰجِزِينَ रोकने वाला ḥājizīna
रोकने वाला
٤٧ (47)
(47)
फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।
६९:४८
وَإِنَّهُۥ और बेशक वो wa-innahu
और बेशक वो
لَتَذْكِرَةٌۭ अलबत्ता एक नसीहत है latadhkiratun
अलबत्ता एक नसीहत है
لِّلْمُتَّقِينَ मुत्तक़ी लोगों के लिए lil'muttaqīna
मुत्तक़ी लोगों के लिए
٤٨ (48)
(48)
निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।
६९:४९
وَإِنَّا और बेशक हम wa-innā
और बेशक हम
لَنَعْلَمُ अलबत्ता हम जानते हैं lanaʿlamu
अलबत्ता हम जानते हैं
أَنَّ कि बेशक anna
कि बेशक
مِنكُم तुम में कुछ minkum
तुम में कुछ
مُّكَذِّبِينَ झुठलाने वाले हैं mukadhibīna
झुठलाने वाले हैं
٤٩ (49)
(49)
तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।
६९:५०
وَإِنَّهُۥ और बेशक वो wa-innahu
और बेशक वो
لَحَسْرَةٌ अलबत्ता हसरत है laḥasratun
अलबत्ता हसरत है
عَلَى upon ʿalā
upon
ٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों पर l-kāfirīna
काफ़िरों पर
٥٠ (50)
(50)
और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों1 के लिए पछतावे का कारण है।
६९:५१
وَإِنَّهُۥ और बेशक वो wa-innahu
और बेशक वो
لَحَقُّ अलबत्ता हक़ है laḥaqqu
अलबत्ता हक़ है
ٱلْيَقِينِ यक़ीनी l-yaqīni
यक़ीनी
٥١ (51)
(51)
और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।
६९:५२
فَسَبِّحْ पस तस्बीह कीजिए fasabbiḥ
पस तस्बीह कीजिए
بِٱسْمِ नाम की bi-is'mi
नाम की
رَبِّكَ अपने रब की rabbika
अपने रब की
ٱلْعَظِيمِ जो अज़मत वाला है l-ʿaẓīmi
जो अज़मत वाला है
٥٢ (52)
(52)
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।