६९

अल-हाक़्क़ा

मक्की ५२ आयतें पारा २९
الحاقة

सूरह अल-हाक़्क़ा (الحاقة) पवित्र क़ुरआन का ६९ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ५२ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६९:१
ٱلْحَآقَّةُहक़ होने वालीal-ḥāqatu١
होकर रहने वाली।
६९:२
مَاक्या हैٱلْحَآقَّةُहक़ होने वालीl-ḥāqatu٢
क्या है वह होकर रहने वाली?
६९:३
وَمَآऔर क्याwamāأَدْرَىٰكَबताए आपकोadrākaمَاक्या हैٱلْحَآقَّةُहक़ होने वालीl-ḥāqatu٣
और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?
६९:४
كَذَّبَتْझुठलायाkadhabatثَمُودُसमूदthamūduوَعَادٌۢऔर आद नेwaʿādunبِٱلْقَارِعَةِखटखटाने वाली कोbil-qāriʿati٤
समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।
६९:५
فَأَمَّاतो रहेfa-ammāثَمُودُसमूदthamūduفَأُهْلِكُوا۟पस वो हलाक किए गएfa-uh'likūبِٱلطَّاغِيَةِहद से गुज़रने वाली सेbil-ṭāghiyati٥
फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।
६९:६
وَأَمَّاऔर रहेwa-ammāعَادٌۭआदʿādunفَأُهْلِكُوا۟पस वो हलाक किए गएfa-uh'likūبِرِيحٍۢहवा सेbirīḥinصَرْصَرٍठंडी यख़ṣarṣarinعَاتِيَةٍۢसरकशʿātiyatin٦
और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।
६९:७
سَخَّرَهَاउसने मुसल्लत कर दिया उसेsakharahāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimسَبْعَसातsabʿaلَيَالٍۢरातेंlayālinوَثَمَـٰنِيَةَऔर आठwathamāniyataأَيَّامٍदिनayyāminحُسُومًۭاमुसलसलḥusūmanفَتَرَىतो आप देखतेfatarāٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaفِيهَاउसमेंfīhāصَرْعَىٰपछाड़े हुएṣarʿāكَأَنَّهُمْगोया कि वोka-annahumأَعْجَازُतने हैंaʿjāzuنَخْلٍखजूर के दरख़्त केnakhlinخَاوِيَةٍۢखोखलेkhāwiyatin٧
अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।1
६९:८
فَهَلْतो क्याfahalتَرَىٰआप देखते हैंtarāلَهُمउनकाlahumمِّنۢanyminبَاقِيَةٍۢकोई बाक़ी बचा हुआbāqiyatin٨
तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?
६९:९
وَجَآءَऔर आयाwajāaفِرْعَوْنُफ़िरऔनfir'ʿawnuوَمَنऔर जोwamanقَبْلَهُۥउससे पहले थेqablahuوَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُऔर उलट जानो वाली बस्तियाँwal-mu'tafikātuبِٱلْخَاطِئَةِसाथ गुनाह केbil-khāṭi-ati٩
और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।
६९:१०
فَعَصَوْا۟तो उन्होंने नाफ़रमानी कीfaʿaṣawرَسُولَरसूल कीrasūlaرَبِّهِمْअपने रब केrabbihimفَأَخَذَهُمْतो उसने पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhahumأَخْذَةًۭपकड़नाakhdhatanرَّابِيَةًसख़्तrābiyatan١٠
उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।
६९:११
إِنَّاबेशक हमinnāلَمَّاजबlammāطَغَاतुग़यानी कीṭaghāٱلْمَآءُपानी नेl-māuحَمَلْنَـٰكُمْसवार किया हमने तुम्हेंḥamalnākumفِىinٱلْجَارِيَةِकश्ती मेंl-jāriyati١١
निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव1 में सवार किया।
६९:१२
لِنَجْعَلَهَاताकि हम बना दें उसेlinajʿalahāلَكُمْतुम्हारे लिएlakumتَذْكِرَةًۭयाददिहानीtadhkiratanوَتَعِيَهَآऔर याद रखे उसेwataʿiyahāأُذُنٌۭकानudhununوَٰعِيَةٌۭयाद रखने वालाwāʿiyatun١٢
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।
६९:१३
فَإِذَاफिर जबfa-idhāنُفِخَफूँक दिया जाएगाnufikhaفِىinٱلصُّورِसूर मेंl-ṣūriنَفْخَةٌۭफूँकनाnafkhatunوَٰحِدَةٌۭएक ही बारwāḥidatun١٣
फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।
६९:१४
وَحُمِلَتِऔर उठाई जाएगीwaḥumilatiٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuوَٱلْجِبَالُऔर पहाड़wal-jibāluفَدُكَّتَاतो दोनों रेज़ा-रेज़ा कर दिए जाऐंगेfadukkatāدَكَّةًۭरेज़ा-रेज़ा किए जानाdakkatanوَٰحِدَةًۭएक ही बारwāḥidatan١٤
और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।1
६९:१५
فَيَوْمَئِذٍۢतो उस दिनfayawma-idhinوَقَعَتِवाक़ेअ हो जाएगीwaqaʿatiٱلْوَاقِعَةُवाक़ेअ होने वालीl-wāqiʿatu١٥
तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
६९:१६
وَٱنشَقَّتِऔर फट जाएगाwa-inshaqqatiٱلسَّمَآءُआसमानl-samāuفَهِىَतो वोfahiyaيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinوَاهِيَةٌۭकमज़ोर होगाwāhiyatun١٦
तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।
६९:१७
وَٱلْمَلَكُऔर फ़रिश्तेwal-malakuعَلَىٰٓ(will be) onʿalāأَرْجَآئِهَا ۚउसके किनारों पर होंगेarjāihāوَيَحْمِلُऔर उठाऐंगेwayaḥmiluعَرْشَअर्शʿarshaرَبِّكَआपके रब काrabbikaفَوْقَهُمْअपने ऊपरfawqahumيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinثَمَـٰنِيَةٌۭआठ (फ़रिश्ते )thamāniyatun١٧
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।
६९:१८
يَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinتُعْرَضُونَतुम पेश किए जाओगेtuʿ'raḍūnaلَاnotتَخْفَىٰना छुप सकेगीtakhfāمِنكُمْतुम सेminkumخَافِيَةٌۭकोई छुपने वालीkhāfiyatun١٨
उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।
६९:१९
فَأَمَّاतो रहाfa-ammāمَنْवो जोmanأُوتِىَदिया गयाūtiyaكِتَـٰبَهُۥकिताब अपनीkitābahuبِيَمِينِهِۦअपने दाऐं हाथ मेंbiyamīnihiفَيَقُولُतो वो कहेगाfayaqūluهَآؤُمُलोhāumuٱقْرَءُوا۟पढ़ोiq'raūكِتَـٰبِيَهْकिताब मेरीkitābiyah١٩
फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।
६९:२०
إِنِّىबेशक मैंinnīظَنَنتُयक़ीन रखता था मैंẓanantuأَنِّىकि बेशक मैंannīمُلَـٰقٍमुलाक़ात करने वाला हूँmulāqinحِسَابِيَهْअपने हिसाब सेḥisābiyah٢٠
मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।
६९:२१
فَهُوَतो वोfahuwaفِى(will be) inعِيشَةٍۢज़िन्दगी में होगाʿīshatinرَّاضِيَةٍۢदिल पसंदrāḍiyatin٢١
चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।
६९:२२
فِىInجَنَّةٍa Gardenjannatinعَالِيَةٍۢबुलन्द जन्नत मेंʿāliyatin٢٢
एक ऊँची जन्नत में।
६९:२३
قُطُوفُهَاफल जिसकेquṭūfuhāدَانِيَةٌۭक़रीब होंगेdāniyatun٢٣
जिसके फल निकट होंगे।
६९:२४
كُلُوا۟खाओkulūوَٱشْرَبُوا۟और पियोwa-ish'rabūهَنِيٓـًٔۢاमज़े सेhanīanبِمَآबवजह उसके जोbimāأَسْلَفْتُمْकर चुके तुमaslaftumفِىinٱلْأَيَّامِदिनों मेंl-ayāmiٱلْخَالِيَةِगुज़िशताl-khāliyati٢٤
(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।
६९:२५
وَأَمَّاऔर रहाwa-ammāمَنْवो जोmanأُوتِىَदिया गयाūtiyaكِتَـٰبَهُۥकिताब अपनीkitābahuبِشِمَالِهِۦअपने दाऐं हाथ मेंbishimālihiفَيَقُولُतो वो कहेगाfayaqūluيَـٰلَيْتَنِىऐ काश कि मैंyālaytanīلَمْनाlamأُوتَमैं दिया जाताūtaكِتَـٰبِيَهْकिताब अपनीkitābiyah٢٥
और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।
६९:२६
وَلَمْऔर नाwalamأَدْرِमैं जानताadriمَاक्या हैحِسَابِيَهْहिसाब मेराḥisābiyah٢٦
तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
६९:२७
يَـٰلَيْتَهَاऐ काश कि वोyālaytahāكَانَتِहोती वोkānatiٱلْقَاضِيَةَफ़ैसलाकुनl-qāḍiyata٢٧
ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली1 होती।
६९:२८
مَآनाأَغْنَىٰकाम आयाaghnāعَنِّىमुझेʿannīمَالِيَهْ ۜमाल मेराmāliyah٢٨
मेरा धन मेरे किसी काम न आया।
६९:२९
هَلَكَहलाक हो गईhalakaعَنِّىमुझसेʿannīسُلْطَـٰنِيَهْसलतनत मेरीsul'ṭāniyah٢٩
मेरी सत्ता1 मुझसे जाती रही।
६९:३०
خُذُوهُपकड़ो उसेkhudhūhuفَغُلُّوهُफिर तौक़ पहनाओ उसेfaghullūhu٣٠
(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।
६९:३१
ثُمَّफिरthummaٱلْجَحِيمَजहन्नम मेंl-jaḥīmaصَلُّوهُझोंको उसेṣallūhu٣١
फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।
६९:३२
ثُمَّफिरthummaفِىintoسِلْسِلَةٍۢएक ज़ंजीर मेंsil'silatinذَرْعُهَاपैमाइश जिसकीdharʿuhāسَبْعُونَसत्तरsabʿūnaذِرَاعًۭاगज़ हैdhirāʿanفَٱسْلُكُوهُपस दाख़िल करो उसेfa-us'lukūhu٣٢
फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।
६९:३३
إِنَّهُۥबेशक वोinnahuكَانَथा वोkānaلَاnotيُؤْمِنُना वो ईमान रखताyu'minuبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiٱلْعَظِيمِजो अज़मत वाला हैl-ʿaẓīmi٣٣
निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।
६९:३४
وَلَاऔर नाwalāيَحُضُّवो तरग़ीब देता थाyaḥuḍḍuعَلَىٰonʿalāطَعَامِखाना (खिलाने)परṭaʿāmiٱلْمِسْكِينِमिसकीन कोl-mis'kīni٣٤
तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।
६९:३५
فَلَيْسَतो नहीं हैfalaysaلَهُउसके लिएlahuٱلْيَوْمَआजl-yawmaهَـٰهُنَاयहाँhāhunāحَمِيمٌۭकोई गहरा दोस्तḥamīmun٣٥
अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।
६९:३६
وَلَاऔर नाwalāطَعَامٌकोई खानाṭaʿāmunإِلَّاमगरillāمِنْfromminغِسْلِينٍۢज़ख़्मों के धोवन काghis'līnin٣٦
और न पीप के सिवा कोई भोजन है।
६९:३७
لَّاNotيَأْكُلُهُۥٓनहीं खाऐंगे उसेyakuluhuإِلَّاमगरillāٱلْخَـٰطِـُٔونَख़ताकारl-khāṭiūna٣٧
जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।
६९:३८
فَلَآपस नहींfalāأُقْسِمُमैं क़सम खाता हूँuq'simuبِمَاउसकी जोbimāتُبْصِرُونَतुम देखते होtub'ṣirūna٣٨
मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।
६९:३९
وَمَاऔर जोwamāلَاnotتُبْصِرُونَनहीं तुम देखतेtub'ṣirūna٣٩
तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।
६९:४०
إِنَّهُۥबेशक येinnahuلَقَوْلُयक़ीनन क़ौल हैlaqawluرَسُولٍۢएक पयामबरrasūlinكَرِيمٍۢमोअज़्ज़िज़ काkarīmin٤٠
निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल1 का कथन है।
६९:४१
وَمَاऔर नहींwamāهُوَयेhuwaبِقَوْلِक़ौलbiqawliشَاعِرٍۢ ۚकिसी शायर काshāʿirinقَلِيلًۭاlittleqalīlanمَّاकितना कमتُؤْمِنُونَतुम ईमान लाते होtu'minūna٤١
और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।
६९:४२
وَلَاऔर ना हीwalāبِقَوْلِक़ौल हैbiqawliكَاهِنٍۢ ۚकिसी काहिन काkāhininقَلِيلًۭاlittleqalīlanمَّاकितना कमتَذَكَّرُونَतुम नसीहत पकड़ते होtadhakkarūna٤٢
और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।
६९:४३
تَنزِيلٌۭनाज़िल करदाtanzīlunمِّنfromminرَّبِّरब की तरफ़ सेrabbiٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों केl-ʿālamīna٤٣
(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।
६९:४४
وَلَوْऔर अगरwalawتَقَوَّلَवो गढ़ लेताtaqawwalaعَلَيْنَاहम परʿalaynāبَعْضَबाज़baʿḍaٱلْأَقَاوِيلِबातेंl-aqāwīli٤٤
और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर1 लगाता।
६९:४५
لَأَخَذْنَاअलबत्ता पकड़ लेते हमla-akhadhnāمِنْهُउसेmin'huبِٱلْيَمِينِदाऐं हाथ सेbil-yamīni٤٥
तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।
६९:४६
ثُمَّफिरthummaلَقَطَعْنَاअलबत्ता काट देते हमlaqaṭaʿnāمِنْهُउसकीmin'huٱلْوَتِينَरगे जानl-watīna٤٦
फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।
६९:४७
فَمَاतो ना होताfamāمِنكُمतुम में सेminkumمِّنْanyminأَحَدٍकोई एकaḥadinعَنْهُउससेʿanhuحَـٰجِزِينَरोकने वालाḥājizīna٤٧
फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।
६९:४८
وَإِنَّهُۥऔर बेशक वोwa-innahuلَتَذْكِرَةٌۭअलबत्ता एक नसीहत हैlatadhkiratunلِّلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों के लिएlil'muttaqīna٤٨
निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।
६९:४९
وَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَنَعْلَمُअलबत्ता हम जानते हैंlanaʿlamuأَنَّकि बेशकannaمِنكُمतुम में कुछminkumمُّكَذِّبِينَझुठलाने वाले हैंmukadhibīna٤٩
तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।
६९:५०
وَإِنَّهُۥऔर बेशक वोwa-innahuلَحَسْرَةٌअलबत्ता हसरत हैlaḥasratunعَلَىuponʿalāٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों परl-kāfirīna٥٠
और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों1 के लिए पछतावे का कारण है।
६९:५१
وَإِنَّهُۥऔर बेशक वोwa-innahuلَحَقُّअलबत्ता हक़ हैlaḥaqquٱلْيَقِينِयक़ीनीl-yaqīni٥١
और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।
६९:५२
فَسَبِّحْपस तस्बीह कीजिएfasabbiḥبِٱسْمِनाम कीbi-is'miرَبِّكَअपने रब कीrabbikaٱلْعَظِيمِजो अज़मत वाला हैl-ʿaẓīmi٥٢
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।