७०

अल-मआरिज

मक्की ४४ आयतें पारा २९
المعارج
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
७०:१
سَأَلَ सवाल किया sa-ala
सवाल किया
سَآئِلٌۢ सवाल करने वाले ने sāilun
सवाल करने वाले ने
بِعَذَابٍۢ उस अज़ाब का biʿadhābin
उस अज़ाब का
وَاقِعٍۢ जो वाक़ेअ होने वाला है wāqiʿin
जो वाक़ेअ होने वाला है
١ (1)
(1)
एक माँगने वाले1 ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।
७०:२
لِّلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों के लिए lil'kāfirīna
काफ़िरों के लिए
لَيْسَ नहीं है laysa
नहीं है
لَهُۥ उसे lahu
उसे
دَافِعٌۭ कोई दफ़ा करने वाला dāfiʿun
कोई दफ़ा करने वाला
٢ (2)
(2)
काफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।
७०:३
مِّنَ From mina
From
ٱللَّهِ अल्लाह की तरफ़ से l-lahi
अल्लाह की तरफ़ से
ذِى Owner dhī
Owner
ٱلْمَعَارِجِ जो उरूज वाला है l-maʿāriji
जो उरूज वाला है
٣ (3)
(3)
ऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।
७०:४
تَعْرُجُ चढ़ते हैं taʿruju
चढ़ते हैं
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ फ़रिश्ते l-malāikatu
फ़रिश्ते
وَٱلرُّوحُ और रूह wal-rūḥu
और रूह
إِلَيْهِ तरफ़ उसके ilayhi
तरफ़ उसके
فِى in
in
يَوْمٍۢ एक दिन में yawmin
एक दिन में
كَانَ है kāna
है
مِقْدَارُهُۥ मिक़दार जिसकी miq'dāruhu
मिक़दार जिसकी
خَمْسِينَ पचास khamsīna
पचास
أَلْفَ हज़ार alfa
हज़ार
سَنَةٍۢ साल sanatin
साल
٤ (4)
(4)
फ़रिश्ते और रूह1 उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।
७०:५
فَٱصْبِرْ पस सब्र कीजिए fa-iṣ'bir
पस सब्र कीजिए
صَبْرًۭا सब्र ṣabran
सब्र
جَمِيلًا जमील/ ख़ूबसूरत jamīlan
जमील/ ख़ूबसूरत
٥ (5)
(5)
अतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।
७०:६
إِنَّهُمْ बेशक वो innahum
बेशक वो
يَرَوْنَهُۥ वो देखते हैं उसे yarawnahu
वो देखते हैं उसे
بَعِيدًۭا बहुत दूर baʿīdan
बहुत दूर
٦ (6)
(6)
निःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।
७०:७
وَنَرَىٰهُ और हम देखते हैं उसे wanarāhu
और हम देखते हैं उसे
قَرِيبًۭا बहुत क़रीब qarīban
बहुत क़रीब
٧ (7)
(7)
और हम उसे निकट देख रहे हैं।
७०:८
يَوْمَ जिस दिन yawma
जिस दिन
تَكُونُ होगा takūnu
होगा
ٱلسَّمَآءُ आसमान l-samāu
आसमान
كَٱلْمُهْلِ तेल की तलछट की तरह kal-muh'li
तेल की तलछट की तरह
٨ (8)
(8)
जिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।
७०:९
وَتَكُونُ और होंगे watakūnu
और होंगे
ٱلْجِبَالُ पहाड़ l-jibālu
पहाड़
كَٱلْعِهْنِ धुनकी हुई रूई की तरह kal-ʿih'ni
धुनकी हुई रूई की तरह
٩ (9)
(9)
और पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।1
७०:१०
وَلَا और ना walā
और ना
يَسْـَٔلُ पूछेगा yasalu
पूछेगा
حَمِيمٌ कोई गहरा दोस्त ḥamīmun
कोई गहरा दोस्त
حَمِيمًۭا किसी गहरे दोस्त को ḥamīman
किसी गहरे दोस्त को
١٠ (10)
(10)
और कोई मित्र किसी मित्र को नहीं पूछेगा।
७०:११
يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ वो दिखाए जाऐंगे उन्हें yubaṣṣarūnahum
वो दिखाए जाऐंगे उन्हें
يَوَدُّ चाहेगा yawaddu
चाहेगा
ٱلْمُجْرِمُ मुजरिम l-muj'rimu
मुजरिम
لَوْ काश law
काश
يَفْتَدِى वो फ़िदये में दे दे yaftadī
वो फ़िदये में दे दे
مِنْ from min
from
عَذَابِ अज़ाब से (बचने के लिए) ʿadhābi
अज़ाब से (बचने के लिए)
يَوْمِئِذٍۭ उस दिन के yawmi-idhin
उस दिन के
بِبَنِيهِ अपने बेटों को bibanīhi
अपने बेटों को
١١ (11)
(11)
हालाँकि वे उन्हें दिखाए जा रहे होंगे। अपराधी चाहेगा कि काश उस दिन की यातना से बचने के लिए छुड़ौती में दे दे अपने बेटों को।
७०:१२
وَصَـٰحِبَتِهِۦ और अपनी बीवी को waṣāḥibatihi
और अपनी बीवी को
وَأَخِيهِ और अपने भाई को wa-akhīhi
और अपने भाई को
١٢ (12)
(12)
तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।
७०:१३
وَفَصِيلَتِهِ और अपने कुनबे को wafaṣīlatihi
और अपने कुनबे को
ٱلَّتِى वो जो allatī
वो जो
تُـْٔوِيهِ वो पनाह देता था उसे tu'wīhi
वो पनाह देता था उसे
١٣ (13)
(13)
तथा अपने परिवार (कुटुंब) को, जो उसे शरण देता था।
७०:१४
وَمَن और जो waman
और जो
فِى (is) on
(is) on
ٱلْأَرْضِ ज़मीन में है l-arḍi
ज़मीन में है
جَمِيعًۭا सब के सब को jamīʿan
सब के सब को
ثُمَّ फिर thumma
फिर
يُنجِيهِ वो निजात दिला दे उसे yunjīhi
वो निजात दिला दे उसे
١٤ (14)
(14)
और उन सभी लोगों1 को जो धरती में हैं। फिर अपने आपको बचा ले।
७०:१५
كَلَّآ ۖ हरगिज़ नहीं kallā
हरगिज़ नहीं
إِنَّهَا बेशक वो innahā
बेशक वो
لَظَىٰ शोले वाली आग है laẓā
शोले वाली आग है
١٥ (15)
(15)
कदापि नहीं! निःसंदेह वह (जहन्नम) भड़कने वाली आग है।
७०:१६
نَزَّاعَةًۭ खींचने वाली है nazzāʿatan
खींचने वाली है
لِّلشَّوَىٰ मुँह की खाल को lilshawā
मुँह की खाल को
١٦ (16)
(16)
जो खाल उधेड़ देने वाली है।
७०:१७
تَدْعُوا۟ वो पुकारेगी tadʿū
वो पुकारेगी
مَنْ उसे जिसने man
उसे जिसने
أَدْبَرَ पीठ फेरी adbara
पीठ फेरी
وَتَوَلَّىٰ और उसने मुँह मोड़ा watawallā
और उसने मुँह मोड़ा
١٧ (17)
(17)
वह उसे पुकारेगी, जिसने पीठ फेरी1 और मुँह मोड़ा।
७०:१८
وَجَمَعَ और उसने जमा किया wajamaʿa
और उसने जमा किया
فَأَوْعَىٰٓ फिर उसने समेट कर रखा fa-awʿā
फिर उसने समेट कर रखा
١٨ (18)
(18)
तथा (धन) एकत्र किया और संभाल कर रखा।
७०:१९
۞ إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلْإِنسَـٰنَ इन्सान l-insāna
इन्सान
خُلِقَ वो पैदा किया गया khuliqa
वो पैदा किया गया
هَلُوعًا थुड़दिला halūʿan
थुड़दिला
١٩ (19)
(19)
निःसंदेह मनुष्य बहुत अधीर बनाया गया है।
७०:२०
إِذَا जब idhā
जब
مَسَّهُ पहुँचती है उसे massahu
पहुँचती है उसे
ٱلشَّرُّ तक्लीफ़ l-sharu
तक्लीफ़
جَزُوعًۭا बहुत जज़ा-फ़ज़ा करने वाला है jazūʿan
बहुत जज़ा-फ़ज़ा करने वाला है
٢٠ (20)
(20)
जब उसे कष्ट पहुँचता है, तो बहुत घबरा जाने वाला है।
७०:२१
وَإِذَا और जब wa-idhā
और जब
مَسَّهُ पहुँचती है उसे massahu
पहुँचती है उसे
ٱلْخَيْرُ भलाई l-khayru
भलाई
مَنُوعًا बहुत रोकने वाला है manūʿan
बहुत रोकने वाला है
٢١ (21)
(21)
और जब उसे भलाई मिलती है, तो बहुत रोकने वाला है।
७०:२२
إِلَّا सिवाए illā
सिवाए
ٱلْمُصَلِّينَ नमाज़ियों के l-muṣalīna
नमाज़ियों के
٢٢ (22)
(22)
सिवाय नमाज़ियों के।
७०:२३
ٱلَّذِينَ वो जो alladhīna
वो जो
هُمْ वो hum
वो
عَلَىٰ at ʿalā
at
صَلَاتِهِمْ अपनी नमाज़ों पर ṣalātihim
अपनी नमाज़ों पर
دَآئِمُونَ दवाम /हमेशगी इख़्तियार करने वाले हैं dāimūna
दवाम /हमेशगी इख़्तियार करने वाले हैं
٢٣ (23)
(23)
जो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।
७०:२४
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
فِىٓ in
in
أَمْوَٰلِهِمْ मालों में उनके amwālihim
मालों में उनके
حَقٌّۭ हक़ है ḥaqqun
हक़ है
مَّعْلُومٌۭ मालूम/ मुक़र्रर maʿlūmun
मालूम/ मुक़र्रर
٢٤ (24)
(24)
और जिनके धन में एक निश्चित भाग है।
७०:२५
لِّلسَّآئِلِ वास्ते सवाली lilssāili
वास्ते सवाली
وَٱلْمَحْرُومِ और महरूम के wal-maḥrūmi
और महरूम के
٢٥ (25)
(25)
माँगने वाले तथा वंचित1 के लिए।
७०:२६
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
يُصَدِّقُونَ तस्दीक़ करते हैं yuṣaddiqūna
तस्दीक़ करते हैं
بِيَوْمِ दिन की biyawmi
दिन की
ٱلدِّينِ बदले के l-dīni
बदले के
٢٦ (26)
(26)
और जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।
७०:२७
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
هُم वो hum
वो
مِّنْ of min
of
عَذَابِ अज़ाब से ʿadhābi
अज़ाब से
رَبِّهِم अपने रब के rabbihim
अपने रब के
مُّشْفِقُونَ डरने वाले हैं mush'fiqūna
डरने वाले हैं
٢٧ (27)
(27)
और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।
७०:२८
إِنَّ बेशक inna
बेशक
عَذَابَ अज़ाब ʿadhāba
अज़ाब
رَبِّهِمْ उनके रब का rabbihim
उनके रब का
غَيْرُ नहीं है ghayru
नहीं है
مَأْمُونٍۢ बेख़ौफ़ होने की चीज़ mamūnin
बेख़ौफ़ होने की चीज़
٢٨ (28)
(28)
निश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।
७०:२९
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
هُمْ वो hum
वो
لِفُرُوجِهِمْ अपनी शर्मगाहों की lifurūjihim
अपनी शर्मगाहों की
حَـٰفِظُونَ हिफ़ाज़त करने वाले हैं ḥāfiẓūna
हिफ़ाज़त करने वाले हैं
٢٩ (29)
(29)
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।
७०:३०
إِلَّا सिवाए illā
सिवाए
عَلَىٰٓ from ʿalā
from
أَزْوَٰجِهِمْ अपनी बीवियों के azwājihim
अपनी बीवियों के
أَوْ या aw
या
مَا जिनके
जिनके
مَلَكَتْ मालिक हुए malakat
मालिक हुए
أَيْمَـٰنُهُمْ दाऐं हाथ उनके aymānuhum
दाऐं हाथ उनके
فَإِنَّهُمْ तो बेशक वो fa-innahum
तो बेशक वो
غَيْرُ नहीं ghayru
नहीं
مَلُومِينَ मलामत किए जाने वाले malūmīna
मलामत किए जाने वाले
٣٠ (30)
(30)
सिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों1 से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।
७०:३१
فَمَنِ फिर जो कोई famani
फिर जो कोई
ٱبْتَغَىٰ तलाश करे ib'taghā
तलाश करे
وَرَآءَ अलावा warāa
अलावा
ذَٰلِكَ उसके dhālika
उसके
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ तो यही लोग हैं fa-ulāika
तो यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلْعَادُونَ जो हद से बढ़ने वाले हैं l-ʿādūna
जो हद से बढ़ने वाले हैं
٣١ (31)
(31)
फिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
७०:३२
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
هُمْ वो hum
वो
لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ अपनी अमानतों की li-amānātihim
अपनी अमानतों की
وَعَهْدِهِمْ और अपने वादों की waʿahdihim
और अपने वादों की
رَٰعُونَ निगरानी करने वाले हैं rāʿūna
निगरानी करने वाले हैं
٣٢ (32)
(32)
और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
७०:३३
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
هُم वो hum
वो
بِشَهَـٰدَٰتِهِمْ अपनी गवाहियों पर bishahādātihim
अपनी गवाहियों पर
قَآئِمُونَ क़ायम रहने वाले हैं qāimūna
क़ायम रहने वाले हैं
٣٣ (33)
(33)
और जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।
७०:३४
وَٱلَّذِينَ और वो जो wa-alladhīna
और वो जो
هُمْ वो hum
वो
عَلَىٰ on ʿalā
on
صَلَاتِهِمْ अपनी नमाज़ों की ṣalātihim
अपनी नमाज़ों की
يُحَافِظُونَ वो हिफ़ाज़त करते हैं yuḥāfiẓūna
वो हिफ़ाज़त करते हैं
٣٤ (34)
(34)
तथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।
७०:३५
أُو۟لَـٰٓئِكَ यही लोग हैं ulāika
यही लोग हैं
فِى (will be) in
(will be) in
جَنَّـٰتٍۢ बाग़ों में jannātin
बाग़ों में
مُّكْرَمُونَ इज़्ज़त दिए जाने वाले muk'ramūna
इज़्ज़त दिए जाने वाले
٣٥ (35)
(35)
वही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।
७०:३६
فَمَالِ तो क्या है famāli
तो क्या है
ٱلَّذِينَ उन्हें जिन्होंने alladhīna
उन्हें जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
قِبَلَكَ आपकी तरफ़ qibalaka
आपकी तरफ़
مُهْطِعِينَ दौड़ते चले आने वाले हैं muh'ṭiʿīna
दौड़ते चले आने वाले हैं
٣٦ (36)
(36)
फिर इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे आपकी ओर दौड़े चले आ रहे है?
७०:३७
عَنِ On ʿani
On
ٱلْيَمِينِ दाऐं तरफ़ से l-yamīni
दाऐं तरफ़ से
وَعَنِ and on waʿani
and on
ٱلشِّمَالِ और बाऐं तरफ़ से l-shimāli
और बाऐं तरफ़ से
عِزِينَ गिरोह दर गिरोह ʿizīna
गिरोह दर गिरोह
٣٧ (37)
(37)
दाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।1
७०:३८
أَيَطْمَعُ क्या तमाअ रखता है ayaṭmaʿu
क्या तमाअ रखता है
كُلُّ हर kullu
हर
ٱمْرِئٍۢ शख़्स im'ri-in
शख़्स
مِّنْهُمْ उन में से min'hum
उन में से
أَن कि an
कि
يُدْخَلَ वो दाख़िल किया जाएगा yud'khala
वो दाख़िल किया जाएगा
جَنَّةَ जन्नत में jannata
जन्नत में
نَعِيمٍۢ नेअमतों वाली naʿīmin
नेअमतों वाली
٣٨ (38)
(38)
क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यह लालच रखता है कि उसे नेमत वाली जन्नत में दाखिल किया जाएगा?
७०:३९
كَلَّآ ۖ हरगिज़ नहीं kallā
हरगिज़ नहीं
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
خَلَقْنَـٰهُم पैदा किया हमने उन्हें khalaqnāhum
पैदा किया हमने उन्हें
مِّمَّا उससे जिसे mimmā
उससे जिसे
يَعْلَمُونَ वो जानते हैं yaʿlamūna
वो जानते हैं
٣٩ (39)
(39)
कदापि नहीं, निश्चय हमने उन्हें उस चीज़1 से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं।
७०:४०
فَلَآ पस नहीं falā
पस नहीं
أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ
بِرَبِّ रब की birabbi
रब की
ٱلْمَشَـٰرِقِ मशरिक़ों के l-mashāriqi
मशरिक़ों के
وَٱلْمَغَـٰرِبِ और मग़रिबों के wal-maghāribi
और मग़रिबों के
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
لَقَـٰدِرُونَ अलबत्ता क़ादिर हैं laqādirūna
अलबत्ता क़ादिर हैं
٤٠ (40)
(40)
तो मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) के रब की! निश्चय हम सक्षम हैं।
७०:४१
عَلَىٰٓ उस पर ʿalā
उस पर
أَن कि an
कि
نُّبَدِّلَ हम बदल दें nubaddila
हम बदल दें
خَيْرًۭا बेहतर khayran
बेहतर
مِّنْهُمْ उनसे min'hum
उनसे
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
نَحْنُ हम naḥnu
हम
بِمَسْبُوقِينَ नाकाम होने वाले bimasbūqīna
नाकाम होने वाले
٤١ (41)
(41)
कि उनके स्थान पर उनसे उत्तम लोग ले आएँ तथा हम विवश नहीं हैं।
७०:४२
فَذَرْهُمْ तो छोड़ दीजिए उन्हें fadharhum
तो छोड़ दीजिए उन्हें
يَخُوضُوا۟ वो बहस मुबाहिसा करें yakhūḍū
वो बहस मुबाहिसा करें
وَيَلْعَبُوا۟ और वो खेलते रहें wayalʿabū
और वो खेलते रहें
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
يُلَـٰقُوا۟ वो जा मिलें yulāqū
वो जा मिलें
يَوْمَهُمُ अपने उस दिन से yawmahumu
अपने उस दिन से
ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो
يُوعَدُونَ वो वादा किए जाते हैं yūʿadūna
वो वादा किए जाते हैं
٤٢ (42)
(42)
अतः आप उन्हें छोड़ दें कि वे व्यर्थ की बातों में लगे रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।
७०:४३
يَوْمَ जिस दिन yawma
जिस दिन
يَخْرُجُونَ वो निकलेंगे yakhrujūna
वो निकलेंगे
مِنَ from mina
from
ٱلْأَجْدَاثِ क़ब्रों से l-ajdāthi
क़ब्रों से
سِرَاعًۭا दौड़ते हुए sirāʿan
दौड़ते हुए
كَأَنَّهُمْ गोया कि वो ka-annahum
गोया कि वो
إِلَىٰ to ilā
to
نُصُبٍۢ तरफ़ आसतानों के nuṣubin
तरफ़ आसतानों के
يُوفِضُونَ वो दौड़ते हैं yūfiḍūna
वो दौड़ते हैं
٤٣ (43)
(43)
जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी से बाहर निकलेंगे, जैसे कि वे किसी निशान की ओर1 दौड़े जा रहे हैं।
७०:४४
خَـٰشِعَةً झुकी हुई होंगी khāshiʿatan
झुकी हुई होंगी
أَبْصَـٰرُهُمْ निगाहें उनकी abṣāruhum
निगाहें उनकी
تَرْهَقُهُمْ छा रही होगी उन पर tarhaquhum
छा रही होगी उन पर
ذِلَّةٌۭ ۚ ज़िल्लत dhillatun
ज़िल्लत
ذَٰلِكَ ये है dhālika
ये है
ٱلْيَوْمُ दिन l-yawmu
दिन
ٱلَّذِى जिसका alladhī
जिसका
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
يُوعَدُونَ वो वादा किए जाते yūʿadūna
वो वादा किए जाते
٤٤ (44)
(44)
उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यही वह दिन है जिसका उनसे वादा किया1 जाता था।