७१
नूह
نوح
सूरह नूह (نوح) पवित्र क़ुरआन का ७१ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें २८ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
७१:१
إِنَّآबेशक हमinnāأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāنُوحًاनूह कोnūḥanإِلَىٰtoilāقَوْمِهِۦٓतरफ़ उसकी क़ौम केqawmihiأَنْकिanأَنذِرْडराओandhirقَوْمَكَअपनी क़ौम कोqawmakaمِنfromminقَبْلِइससे क़ब्लqabliأَنकिanيَأْتِيَهُمْआए उनके पासyatiyahumعَذَابٌअज़ाबʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun١
निःसंदेह हमने नूह़ को उनकी जाति की ओर भेजा कि अपनी जाति को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनके पास दर्दनाक यातना आ जाए।
७१:२
قَالَउसने कहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiإِنِّىबेशक मैंinnīلَكُمْतुम्हारे लिएlakumنَذِيرٌۭडराने वाला हूँnadhīrunمُّبِينٌखुल्लम-खुल्लाmubīnun٢
उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से डराने वाला हूँ।
७१:३
أَنِये किaniٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَٱتَّقُوهُऔर डरो उससेwa-ittaqūhuوَأَطِيعُونِऔर इताअत करो मेरीwa-aṭīʿūni٣
कि अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो और मेरी बात मानो।
७१:४
يَغْفِرْवो बख़्श देगाyaghfirلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّن[of]minذُنُوبِكُمْतुम्हारे गुनाहों कोdhunūbikumوَيُؤَخِّرْكُمْऔर वो मोहलत देगा तुम्हेंwayu-akhir'kumإِلَىٰٓforilāأَجَلٍۢएक वक़्त तकajalinمُّسَمًّى ۚजो मुक़र्रर हैmusammanإِنَّबेशकinnaأَجَلَमुक़र्रर करदा वक़्तajalaٱللَّهِअल्लाह काl-lahiإِذَاजबidhāجَآءَवो आ जाता हैjāaلَاnotlāيُؤَخَّرُ ۖतो नहीं मुअख़्ख़र किया जाताyu-akharuلَوْअगरlawكُنتُمْहो तुमkuntumتَعْلَمُونَतुम जानतेtaʿlamūna٤
वह तुम्हारे लिए तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा तथा तुम्हें एक निर्धारित समय1 तक मोहलत देगा। निश्चय जब अल्लाह का निर्धारित समय आ जाता है, तो वह टाला नहीं जाता, काश कि तुम जानते होते।
७१:५
قَالَउसने कहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiإِنِّىबेशक मैंinnīدَعَوْتُपुकारा मैं नेdaʿawtuقَوْمِىअपनी क़ौम कोqawmīلَيْلًۭاरातlaylanوَنَهَارًۭاऔर दिनwanahāran٥
उसने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह मैंने अपनी जाति को रात-दिन बुलाया।
७१:६
فَلَمْतो नाfalamيَزِدْهُمْज़्यादा किया उन्हेंyazid'humدُعَآءِىٓमेरी पुकार नेduʿāīإِلَّاमगरillāفِرَارًۭاफ़रार मेंfirāran٦
तो मेरे बुलाने से ये लोग और ज़्यादा भागने लगे।
७१:७
وَإِنِّىऔर बेशक मैंwa-innīكُلَّمَاजब कभीkullamāدَعَوْتُهُمْपुकारा मैं ने उन्हेंdaʿawtuhumلِتَغْفِرَताकि तू बख़्श देlitaghfiraلَهُمْउन्हेंlahumجَعَلُوٓا۟उन्होंने डाल लींjaʿalūأَصَـٰبِعَهُمْऊँगलियाँ अपनीaṣābiʿahumفِىٓinfīءَاذَانِهِمْअपने कानों मेंādhānihimوَٱسْتَغْشَوْا۟और उन्होंने ढाँप लिएwa-is'taghshawثِيَابَهُمْकपड़े अपनेthiyābahumوَأَصَرُّوا۟और उन्होंने इसरार कियाwa-aṣarrūوَٱسْتَكْبَرُوا۟और उन्होंने तकब्बुर कियाwa-is'takbarūٱسْتِكْبَارًۭاतकब्बुर करनाis'tik'bāran٧
और निःसंदेह मैंने जब भी उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डाल लीं तथा अपने कपड़े ओढ़ लिए1 और हठ दिखाया और बड़ा घमंड किया।
७१:८
ثُمَّफिरthummaإِنِّىबेशक मैंinnīدَعَوْتُهُمْपुकारा मैं ने उन्हेंdaʿawtuhumجِهَارًۭاबाआवाज़ बुलन्दjihāran٨
फिर निःसंदेह मैंने उन्हें खुल्ल-मखुल्ला बुलाया।
७१:९
ثُمَّफिरthummaإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَعْلَنتُऐलानिया कहा मैं नेaʿlantuلَهُمْउन्हेंlahumوَأَسْرَرْتُऔर राज़दाराना बात की मैं नेwa-asrartuلَهُمْउन्हेंlahumإِسْرَارًۭاऔर राज़दारना तौर परis'rāran٩
फिर निःसंदेह मैंने उन्हें उच्च स्वर में आमंत्रित किया और मैंने उन्हें चुपके-चुपके (भी) समझाया।
७१:१०
فَقُلْتُफिर कहा मैं नेfaqul'tuٱسْتَغْفِرُوا۟बख़्शिश माँगोis'taghfirūرَبَّكُمْअपने रब सेrabbakumإِنَّهُۥबेशक वोinnahuكَانَहै वोkānaغَفَّارًۭاबहुत बख़्शने वालाghaffāran١٠
तो मैंने कहा : अपने पालनहार से क्षमा माँगो। निःसंदेह वह बहुत क्षमा करने वाला है।
७१:११
يُرْسِلِवो भेजेगाyur'siliٱلسَّمَآءَआसमान कोl-samāaعَلَيْكُمतुम परʿalaykumمِّدْرَارًۭاख़ूब बरसने वालाmid'rāran١١
वह तुम पर मूसलाधार बारिश बरसाएगा।
७१:१२
وَيُمْدِدْكُمऔर वो मदद करेगा तुम्हारीwayum'did'kumبِأَمْوَٰلٍۢसाथ मालोंbi-amwālinوَبَنِينَऔर बेटों केwabanīnaوَيَجْعَلऔर वो बनाएगाwayajʿalلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumجَنَّـٰتٍۢबाग़ातjannātinوَيَجْعَلऔर वो बनाएगाwayajʿalلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumأَنْهَـٰرًۭاनहरेंanhāran١٢
और वह तुम्हें धन और बच्चों में वृद्धि प्रदान करेगा तथा तुम्हारे लिए बाग़ बना देगा और तुम्हारे लिए नहरें निकाल देगा।
७१:१३
مَّاक्या हैmāلَكُمْतुम्हेंlakumلَاnotlāتَرْجُونَनहीं तुम तवक़्क़ो रखतेtarjūnaلِلَّهِअल्लाह के लिएlillahiوَقَارًۭاकिसी वक़ार /अज़मत कीwaqāran١٣
तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की महिमा से नहीं डरते?
७१:१४
وَقَدْऔर तहक़ीक़waqadخَلَقَكُمْउसने पैदा किया तुम्हेंkhalaqakumأَطْوَارًاमुख़्तलिफ़ मरहलों मेंaṭwāran١٤
हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न चरणों1 में पैदा किया है।
७१:१५
أَلَمْक्या नहींalamتَرَوْا۟तुमने देखाtarawكَيْفَकिस तरहkayfaخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuسَبْعَसातsabʿaسَمَـٰوَٰتٍۢआसमानों कोsamāwātinطِبَاقًۭاऊपर तलेṭibāqan١٥
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस तरह ऊपर-तले सात आकाश बनाए?
७१:१६
وَجَعَلَऔर उसने बनायाwajaʿalaٱلْقَمَرَचाँद कोl-qamaraفِيهِنَّउनमेंfīhinnaنُورًۭاनूरnūranوَجَعَلَऔर उसने बनायाwajaʿalaٱلشَّمْسَसूरज कोl-shamsaسِرَاجًۭاचिराग़sirājan١٦
और उसने उनमें चाँद को प्रकाश बनाया और सूर्य को दीपक बनाया।
७१:१७
وَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuأَنۢبَتَكُمउसने उगाया तुम्हेंanbatakumمِّنَfromminaٱلْأَرْضِज़मीन सेl-arḍiنَبَاتًۭاउगानाnabātan١٧
और अल्लाह ही ने तुम्हें धरती1 से (विशेष ढंग से) उगाया।
७१:१८
ثُمَّफिरthummaيُعِيدُكُمْवो एआदा करेगा तुम्हाराyuʿīdukumفِيهَاउसमेंfīhāوَيُخْرِجُكُمْऔर वो निकालेगा तुम्हेंwayukh'rijukumإِخْرَاجًۭاनिकालनाikh'rājan١٨
फिर वह तुम्हें उसी में वापस ले जाएगा और तुम्हें (उसी से) निकालेगा।
७१:१९
وَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuجَعَلَउसने बनायाjaʿalaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaبِسَاطًۭاबिछौनाbisāṭan١٩
और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया।
७१:२०
لِّتَسْلُكُوا۟ताकि तुम चलोlitaslukūمِنْهَاउसकेmin'hāسُبُلًۭاरास्तों मेंsubulanفِجَاجًۭاजो कुशादा हैंfijājan٢٠
ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।
७१:२१
قَالَकहाqālaنُوحٌۭनूह नेnūḥunرَّبِّऐ मेरे रबrabbiإِنَّهُمْबेशक वोinnahumعَصَوْنِىउन्होंने नाफ़रमानी की मेरीʿaṣawnīوَٱتَّبَعُوا۟और उन्होंने पैरवी कीwa-ittabaʿūمَنउसकी जोmanلَّمْनहींlamيَزِدْهُज़्यादा किया जिसनेyazid'huمَالُهُۥउसके माल नेmāluhuوَوَلَدُهُۥٓऔर उसकी औलाद नेwawaladuhuإِلَّاमगरillāخَسَارًۭاख़सारे मेंkhasāran٢١
नूह ने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह उन्होंने मेरी अवज्ञा की और उसका1 अनुसरण किया, जिसके धन और संतान ने उसकी क्षति ही को बढ़ाया।
७१:२२
وَمَكَرُوا۟और उन्होंने चाल चलीwamakarūمَكْرًۭاएक चालmakranكُبَّارًۭاबहुत बड़ीkubbāran٢٢
और उन्होंने बहुत बड़ी चाल चली।
७१:२३
وَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūلَا(Do) notlāتَذَرُنَّहरगिज़ ना तुम छोड़ोtadharunnaءَالِهَتَكُمْअपने इलाहों कोālihatakumوَلَاऔर नाwalāتَذَرُنَّतुम हरगिज़ छोड़ोtadharunnaوَدًّۭاवद्द कोwaddanوَلَاऔर नाwalāسُوَاعًۭاसुवाअ कोsuwāʿanوَلَاऔर नाwalāيَغُوثَयग़ूसyaghūthaوَيَعُوقَऔर यऊक़wayaʿūqaوَنَسْرًۭاऔर नसर कोwanasran٢٣
और उन्होंने कहा : तुम अपने पूज्यों को कदापि न छोड़ना, और न कभी वद्द को छोड़ना, और न सुवाअ को और न यग़ूस और यऊक़ तथा नस्र1 को।
७१:२४
وَقَدْऔर तहक़ीक़waqadأَضَلُّوا۟उन्होंने भटका दियाaḍallūكَثِيرًۭا ۖकसीर तादाद कोkathīranوَلَاऔर नाwalāتَزِدِतू ज़्यादा करtazidiٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों कोl-ẓālimīnaإِلَّاमगरillāضَلَـٰلًۭاगुमराही मेंḍalālan٢٤
और निश्चय उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तथा तू अत्याचारियों की पथभ्रष्टता1 ही में वृद्धि कर।
७१:२५
مِّمَّاबवजहmimmāخَطِيٓـَٔـٰتِهِمْअपनी ख़ताओं केkhaṭīātihimأُغْرِقُوا۟वो ग़र्क़ किए गएugh'riqūفَأُدْخِلُوا۟फिर वो दाख़िल किए गएfa-ud'khilūنَارًۭاआग मेंnāranفَلَمْफिर नाfalamيَجِدُوا۟उन्होंने पायाyajidūلَهُمअपने लिएlahumمِّنfromminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiأَنصَارًۭاकोई मददगारanṣāran٢٥
वे अपने पापों के कारण डुबो1 दिए गए, फिर जहन्नम में डाल दिए गए, तो उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने लिए कोई मदद करने वाले नहीं पाए।
७१:२६
وَقَالَऔर कहाwaqālaنُوحٌۭनूह नेnūḥunرَّبِّऐ मेरे रबrabbiلَا(Do) notlāتَذَرْना तू छोड़tadharعَلَىonʿalāٱلْأَرْضِज़मीन परl-arḍiمِنَanyminaٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों में सेl-kāfirīnaدَيَّارًاकोई बसने वालाdayyāran٢٦
तथा नूह़ ने कहा : ऐ मेरे रब! धरती पर (इन) काफ़िरों में से कोई रहने वाला न छोड़।
७१:२७
إِنَّكَबेशक तूinnakaإِنअगरinتَذَرْهُمْतू छोड़ देगा उन्हेंtadharhumيُضِلُّوا۟वो भटका देंगेyuḍillūعِبَادَكَतेरे बन्दों कोʿibādakaوَلَاऔर नाwalāيَلِدُوٓا۟वो जन्म देंगेyalidūإِلَّاमगरillāفَاجِرًۭاफ़ाजिर कोfājiranكَفَّارًۭاसख़्त मुन्कर कोkaffāran٢٧
निःसंदेह यदि तू उन्हें छोड़े रखेगा, तो वे तेरे बंदों को पथभ्रष्ट करेंगे और दुराचारी एवं सख़्त काफ़िर ही को जन्म देंगे।
७१:२८
رَّبِّऐ मेरे रबrabbiٱغْفِرْबख़्श देigh'firلِىमुझेlīوَلِوَٰلِدَىَّऔर मेरे वालिदैन कोwaliwālidayyaوَلِمَنऔर उसे भी जोwalimanدَخَلَदाख़िल होdakhalaبَيْتِىَमेरे घर मेंbaytiyaمُؤْمِنًۭاईमान लाकरmu'minanوَلِلْمُؤْمِنِينَऔर मोमिन मर्दों कोwalil'mu'minīnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتِऔर मोमिन औरतों कोwal-mu'minātiوَلَاऔर नाwalāتَزِدِतू ज़्यादा करtazidiٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों कोl-ẓālimīnaإِلَّاमगरillāتَبَارًۢاहलाकत मेंtabāran٢٨
ऐ मेरे पालनहार! मुझे क्षमा करे दे, तथा मेरे माता-पिता को, और (हर) उस व्यक्ति को जो मेरे घर में मोमिन बन कर प्रवेश करे, तथा ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को। और अत्याचारियों को विनाश के सिवाय किसी चीज़ में न बढ़ा।
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