९५
अत-तीन
التين
सूरह अत-तीन (التين) पवित्र क़ुरआन का ९५ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ८ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
९५:१
وَٱلتِّينِक़सम है इनजीर कीwal-tīniوَٱلزَّيْتُونِऔर ज़ैतून कीwal-zaytūni١
क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
९५:२
وَطُورِAnd (the) Mountwaṭūriسِينِينَऔर तूरे सीना कीsīnīna٢
एवं "तूरे सीनीन" की क़सम!
९५:३
وَهَـٰذَاऔर इसwahādhāٱلْبَلَدِशहर कीl-baladiٱلْأَمِينِअमन वाले कीl-amīni٣
और इस शान्ति वाले नगर की क़सम!
९५:४
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلْإِنسَـٰنَइन्सान कोl-insānaفِىٓinfīأَحْسَنِ(the) bestaḥsaniتَقْوِيمٍۢबेहतरीन साख़्त मेंtaqwīmin٤
निःसंदेह हमने इनसान को सबसे अच्छी संरचना में पैदा किया है।
९५:५
ثُمَّफिरthummaرَدَدْنَـٰهُलौटा दिया हमने उसेradadnāhuأَسْفَلَसबसे ज़्यादा निचलाasfalaسَـٰفِلِينَनिचलों सेsāfilīna٥
फिर हमने उसे सबसे नीची हालत की ओर लौटा दिया।
९५:६
إِلَّاसिवाएillāٱلَّذِينَउनके जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने असम किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiفَلَهُمْतो उनके लिएfalahumأَجْرٌअजर हैajrunغَيْرُनाghayruمَمْنُونٍۢख़त्म होने वालाmamnūnin٦
परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
९५:७
فَمَاतो क्या(आमादा करता है)famāيُكَذِّبُكَझुठलाने पर तुझेyukadhibukaبَعْدُबाद उसकेbaʿduبِٱلدِّينِबदले (के दिन) कोbil-dīni٧
फिर (ऐ मनुष्य) तुझे कौन-सी चीज़ बदले (के दिन) को झुठलाने पर आमादा करती है?
९५:८
أَلَيْسَक्या नहीं हैalaysaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِأَحْكَمِबड़ा हाकिमbi-aḥkamiٱلْحَـٰكِمِينَसब हाकिमों सेl-ḥākimīna٨
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?
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