१४
इबराहीम
ابراهيم
सूरह इबराहीम (ابراهيم) पवित्र क़ुरआन का १४ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ५२ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१४:१
الٓر ۚअलिफ़ लाम राalif-lam-raكِتَـٰبٌएक किताब है (ये)kitābunأَنزَلْنَـٰهُनाज़िल किया हमने उसेanzalnāhuإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaلِتُخْرِجَताकि आप निकालेंlitukh'rijaٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaمِنَfromminaٱلظُّلُمَـٰتِअँधेरों सेl-ẓulumātiإِلَىtoilāٱلنُّورِतरफ़ रोशनी केl-nūriبِإِذْنِसाथ इज़्न केbi-idh'niرَبِّهِمْउनके रब केrabbihimإِلَىٰtoilāصِرَٰطِतरफ़ रास्तेṣirāṭiٱلْعَزِيزِबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīziٱلْحَمِيدِख़ूब तारीफ़ वाले केl-ḥamīdi١
अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। (यह क़ुरआन) एक पुस्तक है, जिसे हमने आपकी ओर अवतरित किया है; ताकि आप लोगों को, उनके पालनहार की अनुमति से, अंधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर ले आएँ, उस (अल्लाह) के रास्ते की ओर जो सब पर प्रभुत्वशाली, असीम प्रशंसा वाला है।
१४:२
ٱللَّهِअल्लाह केal-lahiٱلَّذِىवो ज़ातalladhīلَهُۥउसी के लिए हैlahuمَاजो कुछmāفِى(is) infīٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَاऔर जो कुछwamāفِى(is) infīٱلْأَرْضِ ۗज़मीन में हैl-arḍiوَوَيْلٌۭऔर हलाकत हैwawaylunلِّلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों के लिएlil'kāfirīnaمِنْfromminعَذَابٍۢthe punishmentʿadhābinشَدِيدٍसख़्त अज़ाब सेshadīdin٢
उस अल्लाह के (रास्ते की ओर) कि उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। तथा काफ़िरों के लिए कड़ी यातना के कारण बड़ा विनाश है।
१४:३
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيَسْتَحِبُّونَतरजीह देते हैyastaḥibbūnaٱلْحَيَوٰةَज़िन्दगी कोl-ḥayataٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāعَلَىthanʿalāٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत परl-ākhiratiوَيَصُدُّونَऔर वो रोकते हैंwayaṣuddūnaعَنfromʿanسَبِيلِ(the) Pathsabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते सेl-lahiوَيَبْغُونَهَاऔर वो तलाश करते हैं उसमेंwayabghūnahāعِوَجًا ۚटेढ़ापनʿiwajanأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaفِى[in]fīضَلَـٰلٍۭगुमराही मेंḍalālinبَعِيدٍۢदूर कीbaʿīdin٣
जो आख़िरत के मुक़ाबले में सांसारिक जीवन को बहुत अधिक पसंद करते हैं और अल्लाह के मार्ग से रोकते और उसमें टेढ़ ढूँढते हैं। ये लोग बहुत दूर की गुमराही में हैं।
१४:४
وَمَآऔर नहींwamāأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāمِنanyminرَّسُولٍकोई रसूलrasūlinإِلَّاमगरillāبِلِسَانِज़बान मेंbilisāniقَوْمِهِۦउसकी क़ौम कीqawmihiلِيُبَيِّنَताकि वो वाज़ेह करेliyubayyinaلَهُمْ ۖउनके लिएlahumفَيُضِلُّपस भटका देता हैfayuḍilluٱللَّهُअल्लाहl-lahuمَنजिसेmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuوَيَهْدِىऔर वो हिदायत देता हैwayahdīمَنजिसेmanيَشَآءُ ۚवो चाहता हैyashāuوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्त हैl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُबहुत हिकमत वाला हैl-ḥakīmu٤
और हमने कोई रसूल नहीं भेजा परंतु उसकी जाति की भाषा में, ताकि वह उनके लिए खोलकर बयान करे। फिर अल्लाह जिसे चाहता है, पथभ्रष्ट कर देता है और जिसे चाहता है, मार्गदर्शन प्रदान करता है। और वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
१४:५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāمُوسَىٰमूसा कोmūsāبِـَٔايَـٰتِنَآसाथ अपनी निशानियों केbiāyātināأَنْकिanأَخْرِجْनिकालोakhrijقَوْمَكَअपनी क़ौम कोqawmakaمِنَfromminaٱلظُّلُمَـٰتِअँधेरों सेl-ẓulumātiإِلَىtoilāٱلنُّورِतरफ़ रोशनी केl-nūriوَذَكِّرْهُمऔर याद दिलाओ उन्हेंwadhakkir'humبِأَيَّىٰمِof the daysbi-ayyāmiٱللَّهِ ۚअल्लाह के दिनों कीl-lahiإِنَّबेशकinnaفِىinfīذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّكُلِّवास्ते हरlikulliصَبَّارٍۢबहुत सब्र करने वालेṣabbārinشَكُورٍۢबहुत शुक्र करने वाले केshakūrin٥
और निःसंदेह हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कारों) के साथ भेजा कि अपनी जाति को अंधेरों से प्रकाश की ओर निकाल ला और उन्हें अल्लाह के दिन याद दिला। निःसंदेह इसमें हर ऐसे व्यक्ति के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो बहुत सब्र करने वाला, बहुत शुक्र करने वाला है।
१४:६
وَإِذْऔर जबwa-idhقَالَकहाqālaمُوسَىٰमूसा नेmūsāلِقَوْمِهِअपनी क़ौम सेliqawmihiٱذْكُرُوا۟याद करोudh'kurūنِعْمَةَनेअमतniʿ'mataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiعَلَيْكُمْतुम पर है (जो)ʿalaykumإِذْजबidhأَنجَىٰكُمउसने निजात दी तुम्हेंanjākumمِّنْfromminءَالِ(the) peopleāliفِرْعَوْنَआले फ़िरऔन सेfir'ʿawnaيَسُومُونَكُمْवो चखाते थे तुम्हेंyasūmūnakumسُوٓءَबुराsūaٱلْعَذَابِअज़ाबl-ʿadhābiوَيُذَبِّحُونَऔर वो ज़िबाह करते थेwayudhabbiḥūnaأَبْنَآءَكُمْतुम्हारे बेटों कोabnāakumوَيَسْتَحْيُونَऔर वो ज़िन्दा छोड़ देते थेwayastaḥyūnaنِسَآءَكُمْ ۚतुम्हारी औरतों कोnisāakumوَفِىAnd inwafīذَٰلِكُمऔर इसमेंdhālikumبَلَآءٌۭआज़माइश थीbalāonمِّنfromminرَّبِّكُمْतुम्हारे रब की तरफ़ सेrabbikumعَظِيمٌۭबहुत बड़ीʿaẓīmun٦
तथा जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, जब उसने तुम्हें फ़िरऔनियों से छुटकारा दिलाया, जो तुम्हें घोर यातना देते थे, तुम्हारे बेटों का बुरी तरह वध करते और तुम्हारी स्त्रियों को जीवित1 रखते थे। और इसमें तुम्हारे पालनहार की ओर से बहुत बड़ी आज़माइश थी।
१४:७
وَإِذْऔर जबwa-idhتَأَذَّنَआगाह कर दियाta-adhanaرَبُّكُمْतुम्हारे रब नेrabbukumلَئِنअलबत्ता अगरla-inشَكَرْتُمْशुक्र किया तुमनेshakartumلَأَزِيدَنَّكُمْ ۖअलबत्ता मैं ज़रूर ज़्यादा दूँगा तुम्हेंla-azīdannakumوَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inكَفَرْتُمْनाशुक्री की तुमनेkafartumإِنَّबेशकinnaعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīلَشَدِيدٌۭअलबत्ता सख़्त हैlashadīdun٧
तथा (याद करो) जब तुम्हारे पालनहार ने साफ घोषणा कर दी कि निःसंदेह यदि तुम शुक्र करोगे, तो मैं अवश्य ही तुम्हें अधिक दूँगा तथा निःसंदेह यदि तुम नाशुक्री करोगे, तो निःसंदेह मेरी यातना निश्चय बहुत कड़ी है।
१४:८
وَقَالَऔर कहाwaqālaمُوسَىٰٓमूसा नेmūsāإِنअगरinتَكْفُرُوٓا۟तुम नाशुक्री करोtakfurūأَنتُمْतुमantumوَمَنऔर जोwamanفِى(is) infīٱلْأَرْضِज़मीन में हैंl-arḍiجَمِيعًۭاसबके सबjamīʿanفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَغَنِىٌّअलबत्ता बहुत बेनियाज़ हैlaghaniyyunحَمِيدٌबहुत तारीफ़ वाला हैḥamīdun٨
और मूसा ने कहा : यदि तुम और वे लोग जो धरती में हैं, सब के सब कुफ़्र करो, तो निःसंदेह अल्लाह निश्चय बड़ा बेनियाज़1, असीम प्रशंसा वाला है।
१४:९
أَلَمْक्या नहींalamيَأْتِكُمْआई तुम्हारे पासyatikumنَبَؤُا۟ख़बरnaba-uٱلَّذِينَउन लोगों की जोalladhīnaمِن(were) before youminقَبْلِكُمْतुमसे पहले थेqablikumقَوْمِक़ौमेqawmiنُوحٍۢनूहnūḥinوَعَادٍۢऔर आदwaʿādinوَثَمُودَ ۛऔर समूद कीwathamūdaوَٱلَّذِينَऔर उनकी जोwa-alladhīnaمِنۢ(were) after themminبَعْدِهِمْ ۛउनके बाद थेbaʿdihimلَاNonelāيَعْلَمُهُمْनहीं जानता उन्हेंyaʿlamuhumإِلَّاमगरillāٱللَّهُ ۚअल्लाहl-lahuجَآءَتْهُمْआए उनके पासjāathumرُسُلُهُمरसूल उनकेrusuluhumبِٱلْبَيِّنَـٰتِसाथ वाज़ेह दलाइल केbil-bayinātiفَرَدُّوٓا۟तो उन्होंने फेर दियाfaraddūأَيْدِيَهُمْअपने हाथों कोaydiyahumفِىٓinfīأَفْوَٰهِهِمْअपने मुँहों मेंafwāhihimوَقَالُوٓا۟और कहाwaqālūإِنَّاबेशक हमinnāكَفَرْنَاइन्कार करते हैं हमkafarnāبِمَآउसका जोbimāأُرْسِلْتُمभेजे गए तुमur'sil'tumبِهِۦसाथ जिसकेbihiوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَفِى(are) surely inlafīشَكٍّۢअलबत्ता शक में हैंshakkinمِّمَّاइस चीज़ से जोmimmāتَدْعُونَنَآतुम बुलाते हो हमेंtadʿūnanāإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiمُرِيبٍۢजो बेचैन करने वाला हैmurībin٩
क्या तुम्हारे पास उन लोगों की ख़बर नहीं आई, जो तुमसे पहले थे; नूह़ की जाति की, तथा आद और समूद की और उन लोगों की जो उनके बाद थे, जिन्हें अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता? उनके रसूल उनके पास स्पष्ट निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने अपने हाथ अपने मुँहों में लौटा लिए1 और उन्होंने कहा : निःसंदेह हम उसे नहीं मानते, जिसके साथ तुम भेजे गए हो और निःसंदेह हम तो उसके बारे में जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, एक उलझन में डाल देने वाले संदेह में पड़े हुए हैं।
१४:१०
۞ قَالَتْकहाqālatرُسُلُهُمْउनके रसूलों नेrusuluhumأَفِىCan (there) be aboutafīٱللَّهِक्या अल्लाह के बारे मेंl-lahiشَكٌّۭशक हैshakkunفَاطِرِजो पैदा करने वाला हैfāṭiriٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۖऔर ज़मीन काwal-arḍiيَدْعُوكُمْवो बुलाता है तुम्हेंyadʿūkumلِيَغْفِرَताकि वो बख़्श देliyaghfiraلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّن[of]minذُنُوبِكُمْतुम्हारे गुनाहों कोdhunūbikumوَيُؤَخِّرَكُمْऔर वो मोहलत दे तुम्हेंwayu-akhirakumإِلَىٰٓforilāأَجَلٍۢa termajalinمُّسَمًّۭى ۚएक मुक़र्रर मुद्दत तकmusammanقَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūإِنْनहीं होinأَنتُمْतुमantumإِلَّاमगरillāبَشَرٌۭएक इन्सानbasharunمِّثْلُنَاहम जैसेmith'lunāتُرِيدُونَतुम चाहते होturīdūnaأَنकिanتَصُدُّونَاतुम रोको हमेंtaṣuddūnāعَمَّاउससे जोʿammāكَانَथेkānaيَعْبُدُइबादत करतेyaʿbuduءَابَآؤُنَاआबा ओ अजदाद हमारेābāunāفَأْتُونَاपस ले आओ हमारे पासfatūnāبِسُلْطَـٰنٍۢकोई दलीलbisul'ṭāninمُّبِينٍۢवाज़ेहmubīnin١٠
उनके रसूलों ने कहा : क्या अल्लाह के बारे में कोई संदेह है, जो आकाशों तथा धरती का पैदा करने वाला है? वह तुम्हें इसलिए बुलाता1 है कि तुम्हारे लिए तुम्हारे कुछ पाप क्षमा कर दे और तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक अवसर दे।2 उन्होंने कहा : तुम तो हमारे ही जैसे इनसान हो। तुम चाहते हो कि हमें उससे रोक दो, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा करते थे। तो तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण लाओ।
१४:११
قَالَتْकहाqālatلَهُمْउन्हेंlahumرُسُلُهُمْउनके रसूलों नेrusuluhumإِنनहीं हैंinنَّحْنُहमnaḥnuإِلَّاमगरillāبَشَرٌۭएक इन्सानbasharunمِّثْلُكُمْतुम जैसेmith'lukumوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَمُنُّएहसान करता हैyamunnuعَلَىٰonʿalāمَنजिस परmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuمِنْofminعِبَادِهِۦ ۖअपने बन्दों में सेʿibādihiوَمَاऔर नहींwamāكَانَहै (मुमकिन)kānaلَنَآहमारे लिएlanāأَنकिanنَّأْتِيَكُمहम ले आऐं तुम्हारे पासnatiyakumبِسُلْطَـٰنٍकोई दलीलbisul'ṭāninإِلَّاमगरillāبِإِذْنِby the permission of Allahbi-idh'niٱللَّهِ ۚअल्लाह के इज़्न सेl-lahiوَعَلَىAnd uponwaʿalāٱللَّهِऔर अल्लाह ही परl-lahiفَلْيَتَوَكَّلِपस चाहिए कि तवक्कल करेंfalyatawakkaliٱلْمُؤْمِنُونَईमान लाने वालेl-mu'minūna١١
उनके रसूलों ने उनसे कहा : हम तो तुम्हारे जैसे इनसान ही हैं, परन्तु अल्लाह अपने बंदों में से जिसपर चाहे, उपकार करता है। और हमारे लिए कभी संभव नहीं कि अल्लाह की अनुमति के बिना तुम्हारे पास कोई प्रमाण ले आएँ और ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए।
१४:१२
وَمَاऔर क्या हैwamāلَنَآहमेंlanāأَلَّاकि नाallāنَتَوَكَّلَहम तवक्कल करेंnatawakkalaعَلَىuponʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiوَقَدْहालाँकि तहक़ीक़waqadهَدَىٰنَاहिदायत दी उसने हमेंhadānāسُبُلَنَا ۚहमारे रास्तों कीsubulanāوَلَنَصْبِرَنَّऔर अलबत्ता हम ज़रूर सब्र करेंगेwalanaṣbirannaعَلَىٰonʿalāمَآउस पर जोmāءَاذَيْتُمُونَا ۚअज़ियत दे रहे हो तुम हमेंādhaytumūnāوَعَلَىAnd uponwaʿalāٱللَّهِऔर अल्लाह ही परl-lahiفَلْيَتَوَكَّلِपस चाहिए कि तवक्कल करेंfalyatawakkaliٱلْمُتَوَكِّلُونَतवक्कल करने वालेl-mutawakilūna١٢
और हमें क्या है कि हम अल्लाह पर भरोसा न करें, हालाँकि उसने हमें हमारे मार्ग दिखा दिए? और हम अवश्य उसपर धैर्य से काम लेंगे, जो तुम हमें कष्ट पहुँचाओगे। और भरोसा करने वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
१४:१३
وَقَالَऔर कहाwaqālaٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلِرُسُلِهِمْअपने रसूलों कोlirusulihimلَنُخْرِجَنَّكُمअलबत्ता हम ज़रूर निकाल देंगे तुम्हेंlanukh'rijannakumمِّنْofminأَرْضِنَآअपनी ज़मीन सेarḍināأَوْयाawلَتَعُودُنَّअलबत्ता तुम ज़रूर लौटोगेlataʿūdunnaفِىtofīمِلَّتِنَا ۖहमारी मिल्लत मेंmillatināفَأَوْحَىٰٓतो वही कीfa-awḥāإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimرَبُّهُمْउनके रब नेrabbuhumلَنُهْلِكَنَّअलबत्ता हम ज़रूर हलाक कर देंगेlanuh'likannaٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों कोl-ẓālimīna١٣
और काफ़िरों ने अपने रसूलों से कहा : हम अवश्य तुम्हें अपने भू-भाग से निकाल देंगे, या अवश्य तुम हमारे पंथ में वापस आओगे। तो उनके पालनहार ने उनकी ओर वह़्य की कि निश्चय हम इन अत्याचारियों को अवश्य विनष्ट कर देंगे।
१४:१४
وَلَنُسْكِنَنَّكُمُऔर अलबत्ता हम ज़रूर आबाद कर देंगे तुम्हेंwalanus'kinannakumuٱلْأَرْضَज़मीन मेंl-arḍaمِنۢafter themminبَعْدِهِمْ ۚबाद इनकेbaʿdihimذَٰلِكَयेdhālikaلِمَنْउसके लिए है जोlimanخَافَडरेkhāfaمَقَامِىमेरे सामने खड़ा होने सेmaqāmīوَخَافَऔर वो डरेwakhāfaوَعِيدِमेरी वईद सेwaʿīdi١٤
और निश्चय उनके बाद हम तुम्हें उस धरती में अवश्य बसा देंगे। यह उसके लिए है, जो मेरे समक्ष खड़ा होने से डरा1 तथा मेरी चेतावनी से डरा।
१४:१५
وَٱسْتَفْتَحُوا۟और उन्होंने फ़ैसला चाहाwa-is'taftaḥūوَخَابَऔर नामुराद हुआwakhābaكُلُّहरkulluجَبَّارٍसरकशjabbārinعَنِيدٍۢइनाद रखने वालाʿanīdin١٥
और उन (रसूलों) ने विजय की प्रार्थना की और प्रत्येक सरकश, हठधर्मी असफल हो गया।
१४:१६
مِّنof himminوَرَآئِهِۦउसके आगेwarāihiجَهَنَّمُजहन्नम हैjahannamuوَيُسْقَىٰऔर वो पिलाया जाएगाwayus'qāمِنofminمَّآءٍۢपानी में सेmāinصَدِيدٍۢपीप वालेṣadīdin١٦
उसके आगे जहन्नम है और उसे पीप का पानी पिलाया जाएगा।
१४:१७
يَتَجَرَّعُهُۥवो घूँट-घूँट पियेगा उसेyatajarraʿuhuوَلَاऔर नहींwalāيَكَادُवो क़रीब होगाyakāduيُسِيغُهُۥकि वो निगल सके उसेyusīghuhuوَيَأْتِيهِऔर आएगी उसके पासwayatīhiٱلْمَوْتُमौतl-mawtuمِنfromminكُلِّeverykulliمَكَانٍۢहर जगह सेmakāninوَمَاऔर नहीं (होगा)wamāهُوَवोhuwaبِمَيِّتٍۢ ۖमरने वालाbimayyitinوَمِنAnd ahead of himwaminوَرَآئِهِۦऔर उसके आगेwarāihiعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunغَلِيظٌۭसख़्तghalīẓun١٧
वह उसे कठिनाई से घूँट-घूँट पिएगा और उसे गले से न उतार सकेगा। और उसके पास मृत्यु प्रत्येक स्थान से आएगी। हालाँकि वह किसी प्रकार मरने वाला नहीं। और उसके सामने एक कठोर यातना है।
१४:१८
مَّثَلُमिसालmathaluٱلَّذِينَउन लोगों की जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِرَبِّهِمْ ۖअपने रब सेbirabbihimأَعْمَـٰلُهُمْआमाल उनकेaʿmāluhumكَرَمَادٍउस राख की तरह हैंkaramādinٱشْتَدَّتْकि सख़्त चली होish'taddatبِهِउस परbihiٱلرِّيحُहवाl-rīḥuفِىinfīيَوْمٍएक दिन मेंyawminعَاصِفٍۢ ۖतेज़ हवा केʿāṣifinلَّاNolāيَقْدِرُونَना वो क़ुदरत रखेंगेyaqdirūnaمِمَّاउसमें से जोmimmāكَسَبُوا۟उन्होंने कमाई कीkasabūعَلَىٰonʿalāشَىْءٍۢ ۚकिसी चीज़ परshayinذَٰلِكَयही हैdhālikaهُوَवोhuwaٱلضَّلَـٰلُगुमराहीl-ḍalāluٱلْبَعِيدُदूर कीl-baʿīdu١٨
उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, उनके कार्य उस राख की तरह हैं, जिसपर आँधी वाले दिन में हवा बहुत प्रचंड चली। वे लोग अपने किए में से कुछ नहीं पा सकेंगे। यही (सत्य से) बहुत दूर की गुमराही है।
१४:१९
أَلَمْक्या नहींalamتَرَआपने देखाtaraأَنَّकि बेशकannaٱللَّهَअल्लाह नेl-lahaخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaبِٱلْحَقِّ ۚसाथ हक़ केbil-ḥaqiإِنअगरinيَشَأْवो चाहेyashaيُذْهِبْكُمْवो ले जाए तुम सबकोyudh'hib'kumوَيَأْتِऔर वो ले आएwayatiبِخَلْقٍۢकोई मख़लूक़bikhalqinجَدِيدٍۢनईjadīdin١٩
क्या तूने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाशों तथा धरती की रचना सत्य के साथ की है? यदि वह चाहे, तो तुम सब को ले जाए और एक नई रचना ले आए।
१४:२०
وَمَاऔर नहींwamāذَٰلِكَयेdhālikaعَلَىonʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiبِعَزِيزٍۢकुछ मुश्किलbiʿazīzin٢٠
और यह अल्लाह के लिए कुछ भी कठिन नहीं है।
१४:२१
وَبَرَزُوا۟और वो सामने होंगेwabarazūلِلَّهِअल्लाह केlillahiجَمِيعًۭاसबके सबjamīʿanفَقَالَतो कहेंगेfaqālaٱلضُّعَفَـٰٓؤُا۟कमज़ोर लोगl-ḍuʿafāuلِلَّذِينَउनसे जिन्होंनेlilladhīnaٱسْتَكْبَرُوٓا۟तकब्बुर कियाis'takbarūإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हमkunnāلَكُمْतुम्हारे लिएlakumتَبَعًۭاताबेअtabaʿanفَهَلْतो क्याfahalأَنتُمतुमantumمُّغْنُونَबचाने वाले होmugh'nūnaعَنَّاहमेंʿannāمِنْfromminعَذَابِअज़ाब सेʿadhābiٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمِنanythingminشَىْءٍۢ ۚकुछ भीshayinقَالُوا۟वो कहेंगेqālūلَوْअगरlawهَدَىٰنَاहिदायत देता हमेंhadānāٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَهَدَيْنَـٰكُمْ ۖअलबत्ता हिदायत करते हम तुम्हेंlahadaynākumسَوَآءٌयकसाँ/बराबर हैsawāonعَلَيْنَآहम परʿalaynāأَجَزِعْنَآख़्वाह जज़ा व फ़ज़ा करें हमajaziʿ'nāأَمْयाamصَبَرْنَاसब्र करें हमṣabarnāمَاनहीं हैmāلَنَاहमारे लिएlanāمِنanyminمَّحِيصٍۢकोई पनाहगाहmaḥīṣin٢١
और वे सब के सब अल्लाह के सामने पेश1 होंगे, तो कमज़ोर लोग उन लोगों से कहेंगे, जो बड़े बने हुए थे : निःसंदेह हम तुम्हारे अनुयायी थे, तो क्या तुम हमें अल्लाह की यातना से बचाने में कुछ भी काम आने वाले हो? वे कहेंगे : यदि अल्लाह ने हमें मार्ग दिखाया होता, तो हम तुम्हें अवश्य मार्ग दिखाते। अब हमारे लिए बराबर है कि हम व्याकुल हों, या हम धैर्य से काम लें। हमारे लिए भागने की कोई जगह नहीं है।
१४:२२
وَقَالَऔर कहेगाwaqālaٱلشَّيْطَـٰنُशैतानl-shayṭānuلَمَّاजबlammāقُضِىَफ़ैसला कर दिया जाएगाquḍiyaٱلْأَمْرُकाम काl-amruإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाह नेl-lahaوَعَدَكُمْवादा किया तुमसेwaʿadakumوَعْدَवादाwaʿdaٱلْحَقِّसच्चाl-ḥaqiوَوَعَدتُّكُمْऔर वादा किया मैंने तुमसेwawaʿadttukumفَأَخْلَفْتُكُمْ ۖतो ख़िलाफ़ किया मैंने तुमसेfa-akhlaftukumوَمَاऔर नाwamāكَانَथाkānaلِىَमेरे लिएliyaعَلَيْكُمतुम परʿalaykumمِّنanyminسُلْطَـٰنٍकोई ज़ोरsul'ṭāninإِلَّآमगरillāأَنये किanدَعَوْتُكُمْबुलाया मैंने तुम्हेंdaʿawtukumفَٱسْتَجَبْتُمْपस क़ुबूल कर लिया तुमनेfa-is'tajabtumلِى ۖमेरे लिएlīفَلَاपस नाfalāتَلُومُونِىतुम मलामत करो मुझेtalūmūnīوَلُومُوٓا۟बल्कि मलामत करोwalūmūأَنفُسَكُم ۖअपने नफ़्सों कोanfusakumمَّآनहींmāأَنَا۠मैंanāبِمُصْرِخِكُمْफ़रियाद रसी करने वाला तुम्हारीbimuṣ'rikhikumوَمَآऔर नाwamāأَنتُمतुमantumبِمُصْرِخِىَّ ۖफ़रियाद रसी करने वाले हो मेरीbimuṣ'rikhiyyaإِنِّىबेशक मैंinnīكَفَرْتُइन्कार किया मैंनेkafartuبِمَآउसका जोbimāأَشْرَكْتُمُونِशरीक ठहराया तुमने मुझेashraktumūniمِنbeforeminقَبْلُ ۗइससे पहलेqabluإِنَّबेशकinnaٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिम लोगl-ẓālimīnaلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٢٢
और जब निर्णय कर दिया1 जाएगा, तो शैतान कहेगा : निःसंदेह अल्लाह ने तुमसे सच्चा वादा किया था। और मैंने (भी) तुमसे वादा किया था, तो मैंने तुमसे वादाखिलाफ़ी की। और मेरा तुमपर कोई आधिपत्य नहीं था, सिवाय इसके कि मैंने तुम्हें (अपनी ओर) बुलाया, तो तुमने मेरी बात मान ली। अब मेरी निंदा न करो, बल्कि स्वयं अपनी निंदा करो। न मैं तुम्हारी फ़रयाद सुन सकता हूँ और न तुम मेरी फ़रयाद सुन सकते हो। निःसंदेह मैं उसका इनकार करता हूँ, जो तुमने इससे पहले2 मुझे साझी बनाया। निश्चय अत्याचारियों के लिए दर्दनाक यातना है।
१४:२३
وَأُدْخِلَऔर दाख़िल किए जाऐंगेwa-ud'khilaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَاउनमेंfīhāبِإِذْنِइज़्न सेbi-idh'niرَبِّهِمْ ۖअपने रब केrabbihimتَحِيَّتُهُمْदुआ- ए -मुलाक़ात उनकीtaḥiyyatuhumفِيهَاउनमेंfīhāسَلَـٰمٌसलाम (होगा)salāmun٢٣
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, उन्हें ऐसी जन्नतों में प्रवेश कराया जाएगा, जिनके (महलों और पेड़ों के) नीचे से नहरें बहती हैं। वे अपने पालनहार की अनुमति से उनमें हमेशा रहने वाले होंगे। उसमें उनका अभिवादन 'सलाम' से होगा।
१४:२४
أَلَمْक्या नहींalamتَرَआपने देखाtaraكَيْفَकिस तरहkayfaضَرَبَबयान कीḍarabaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمَثَلًۭاमिसालmathalanكَلِمَةًۭकलमाkalimatanطَيِّبَةًۭतय्यबा/पाकीज़ा कीṭayyibatanكَشَجَرَةٍۢमानिन्द दरख़्तkashajaratinطَيِّبَةٍपाकीज़ा केṭayyibatinأَصْلُهَاजड़ उसकीaṣluhāثَابِتٌۭमज़बूत हैthābitunوَفَرْعُهَاऔर शाख़ें उसकीwafarʿuhāفِى(are) infīٱلسَّمَآءِआसमान में हैंl-samāi٢٤
(ऐ नबी!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने एक पवित्र कलिमा1 का उदाहरण कैसे दिया (कि वह) एक पवित्र वृक्ष की तरह है, जिसकी जड़ (भूमि में) सुदृढ़ है और जिसकी शाखा आकाश में है?
१४:२५
تُؤْتِىٓवो देता हैtu'tīأُكُلَهَاफल अपनाukulahāكُلَّहरkullaحِينٍۭवक़्तḥīninبِإِذْنِइज़्न सेbi-idh'niرَبِّهَا ۗअपने रब केrabbihāوَيَضْرِبُऔर बयान करता हैwayaḍribuٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْأَمْثَالَमिसालेंl-amthālaلِلنَّاسِलोगों के लिएlilnnāsiلَعَلَّهُمْशायद कि वोlaʿallahumيَتَذَكَّرُونَवो नसीहत पकड़ेंyatadhakkarūna٢٥
वह अपने पालनहार की अनुमति से प्रत्येक समय अपना फल देता है। और अल्लाह लोगों के लिए उदाहरण देता है, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें।
१४:२६
وَمَثَلُऔर मिसालwamathaluكَلِمَةٍकलमाkalimatinخَبِيثَةٍۢख़बीसा/नापाक कीkhabīthatinكَشَجَرَةٍमानिन्द दरख़्तkashajaratinخَبِيثَةٍनापाक केkhabīthatinٱجْتُثَّتْजो उखाड़ा गयाuj'tuthatمِنfromminفَوْقِऊपर सेfawqiٱلْأَرْضِज़मीन केl-arḍiمَاनहींmāلَهَاउसके लिएlahāمِن(is) anyminقَرَارٍۢकोई क़रारqarārin٢٦
और बुरी1 बात का उदाहरण एक बुरे पेड़ की तरह है, जो धरती की सतह से उखाड़ लिया गया, जिसमें कोई स्थिरता नहीं है।
१४:२७
يُثَبِّتُसाबित रखता हैyuthabbituٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلَّذِينَउन लोगों को जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūبِٱلْقَوْلِसाथ बातbil-qawliٱلثَّابِتِमज़बूत केl-thābitiفِىinfīٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी मेंl-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāوَفِىand inwafīٱلْـَٔاخِرَةِ ۖऔर आख़िरत मेंl-ākhiratiوَيُضِلُّऔर भटकाता हैwayuḍilluٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلظَّـٰلِمِينَ ۚज़ालिमों कोl-ẓālimīnaوَيَفْعَلُऔर करता हैwayafʿaluٱللَّهُअल्लाहl-lahuمَاजोmāيَشَآءُवो चाहता हैyashāu٢٧
अल्लाह ईमान लाने वालों को दृढ़ बात1 के द्वारा दुनिया तथा आख़िरत में स्थिरता प्रदान करता है तथा अत्याचारियों को गुमराह कर देता है। और अल्लाह जो चाहता है, करता है।
१४:२८
۞ أَلَمْक्या नहींalamتَرَआपने देखाtaraإِلَى[to]ilāٱلَّذِينَतरफ़ उनके जिन्होंनेalladhīnaبَدَّلُوا۟बदल डालाbaddalūنِعْمَتَनेअमत कोniʿ'mataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiكُفْرًۭاकुफ़्र/नाशुक्री सेkuf'ranوَأَحَلُّوا۟और उन्होंने ला उताराwa-aḥallūقَوْمَهُمْअपनी क़ौम कोqawmahumدَارَघर मेंdāraٱلْبَوَارِहलाकत केl-bawāri٢٨
क्या आपने उन लोगों1 को नहीं देखा, जिन्होंने अल्लाह की नेमत को नाशुक्री से बदल दिया और अपनी जाति को विनाश के घर में ला उतारा।
१४:२९
جَهَنَّمَजहन्नम मेंjahannamaيَصْلَوْنَهَا ۖवो जलेंगे उसमेंyaṣlawnahāوَبِئْسَऔर कितना बुरा हैwabi'saٱلْقَرَارُठिकानाl-qarāru٢٩
(अर्थात्) जहन्नम में। वे उसमें प्रवेश करेंगे और वह बुरा ठिकाना है।
१४:३०
وَجَعَلُوا۟और उन्होंने बना लिएwajaʿalūلِلَّهِअल्लाह के लिएlillahiأَندَادًۭاकुछ शरीकandādanلِّيُضِلُّوا۟ताकि वो भटका देंliyuḍillūعَنfromʿanسَبِيلِهِۦ ۗउसके रास्ते सेsabīlihiقُلْकह दीजिएqulتَمَتَّعُوا۟तुम फ़ायदे उठा लोtamattaʿūفَإِنَّतो बेशकfa-innaمَصِيرَكُمْलौटना है तुम्हाराmaṣīrakumإِلَى(is) toilāٱلنَّارِतरफ़ आग केl-nāri٣٠
और उन्होंने अल्लाह के कुछ साझी बना लिए, ताकि उसके मार्ग से (लोगों को) पथभ्रष्ट करें। आप कह दें : लाभ उठा लो। फिर निःसंदेह तुम्हें आग की ओर लौटना है।
१४:३१
قُلकह दीजिएqulلِّعِبَادِىَमेरे बन्दों सेliʿibādiyaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūيُقِيمُوا۟वो क़ायम करेंyuqīmūٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَيُنفِقُوا۟और वो ख़र्च करेंwayunfiqūمِمَّاउसमें से जोmimmāرَزَقْنَـٰهُمْरिज़्क़ दिया हमने उन्हेंrazaqnāhumسِرًّۭاछुप करsirranوَعَلَانِيَةًۭऔर ज़ाहिरी तौर परwaʿalāniyatanمِّنbeforeminقَبْلِइससे पहलेqabliأَنकिanيَأْتِىَआ जाएyatiyaيَوْمٌۭवो दिनyawmunلَّاनहींlāبَيْعٌۭकोई तिजारतbayʿunفِيهِउस मेंfīhiوَلَاऔर नाwalāخِلَـٰلٌकोई दोस्तीkhilālun٣١
(ऐ नबी!) मेरे उन बंदों से कह दो, जो ईमान लाए हैं कि वे नमाज़ क़ायम करें और उसमें से जो हमने उन्हें प्रदान किया है, छिपे और खुले ख़र्च करें, इससे पहले कि वह दिन आए, जिसमें न कोई क्रय-विक्रय होगा और न कोई मैत्री।
१४:३२
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuٱلَّذِىवो है जिसनेalladhīخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَأَنزَلَऔर उसने उताराwa-anzalaمِنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۭपानीmāanفَأَخْرَجَफिर उसने निकालाfa-akhrajaبِهِۦसाथ उसकेbihiمِنَofminaٱلثَّمَرَٰتِफलों में सेl-thamarātiرِزْقًۭاरिज़्क़riz'qanلَّكُمْ ۖतुम्हारे लिएlakumوَسَخَّرَऔर उसने मुसख़्ख़र कींwasakharaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْفُلْكَकश्तियाँl-ful'kaلِتَجْرِىَताकि वो चलेंlitajriyaفِىinfīٱلْبَحْرِसमुन्दर मेंl-baḥriبِأَمْرِهِۦ ۖउसके हुक्म सेbi-amrihiوَسَخَّرَऔर उसने मुसख़्ख़र कींwasakharaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْأَنْهَـٰرَनहरेंl-anhāra٣٢
अल्लाह वह है, जिसने आकाशों तथा धरती को पैदा किया, और आकाश से कुछ पानी उतारा, फिर उसके द्वारा तुम्हारे लिए फलों में से कुछ जीविका निकाली, और तुम्हारे लिए नौकाओं को वशीभूत कर दिया, ताकि वे सागर में उसके आदेश से चलें और तुम्हारे लिए नदियों को वशीभूत कर दिया।
१४:३३
وَسَخَّرَऔर उसने मुसख़्ख़र कियाwasakharaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلشَّمْسَसूरजl-shamsaوَٱلْقَمَرَऔर चाँद कोwal-qamaraدَآئِبَيْنِ ۖलगातार चलने वालेdāibayniوَسَخَّرَऔर उसने मुसख़्ख़र कियाwasakharaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلَّيْلَरातal-laylaوَٱلنَّهَارَऔर दिन कोwal-nahāra٣٣
तथा तुम्हारे लिए सूर्य और चाँद को वशीभूत कर दिया कि निरंतर चलने वाले हैं, तथा तुम्हारे लिए रात और दन को वशीभूत1 कर दिया।
१४:३४
وَءَاتَىٰكُمऔर उसने दी तुम्हेंwaātākumمِّنofminكُلِّहर वो चीज़kulliمَاजोmāسَأَلْتُمُوهُ ۚमाँगी तुमने उस सेsa-altumūhuوَإِنऔर अगरwa-inتَعُدُّوا۟तुम गिनने लगोtaʿuddūنِعْمَتَनेअमतेंniʿ'mataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiلَاnotlāتُحْصُوهَآ ۗनहीं तुम शुमार कर सकते उन्हेंtuḥ'ṣūhāإِنَّबेशकinnaٱلْإِنسَـٰنَइन्सानl-insānaلَظَلُومٌۭअलबत्ता बड़ा ज़ालिम हैlaẓalūmunكَفَّارٌۭबड़ा नाशुक्रा हैkaffārun٣٤
और तुम्हें हर उस चीज़ में से दिया, जो तुमने उससे माँगी।1 और यदि तुम अल्लाह की नेमत की गणना करो, तो उसकी गणना नहीं कर पाओगे। निःसंदेह मनुष्य निश्चय बड़ा अत्याचारी, बहुत नाशुक्रा है।
१४:३५
وَإِذْऔर जबwa-idhقَالَकहाqālaإِبْرَٰهِيمُइब्राहीम नेib'rāhīmuرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱجْعَلْबना देij'ʿalهَـٰذَاइसhādhāٱلْبَلَدَशहर कोl-baladaءَامِنًۭاअमन वालाāminanوَٱجْنُبْنِىऔर बचा ले मुझेwa-uj'nub'nīوَبَنِىَّऔर मेरी औलाद कोwabaniyyaأَن(इससे) किanنَّعْبُدَहम इबादत करेंnaʿbudaٱلْأَصْنَامَबुतों कीl-aṣnāma٣٥
तथा (याद करो) जब इबराहीम ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इस नगर (मक्का) को शांति एवं सुरक्षा वाला बना दे, तथा मुझे और मेरे बेटों को मूर्तियों की पूजा करने से बचा ले।
१४:३६
رَبِّऐ मेरे रबrabbiإِنَّهُنَّबेशक उन्होंनेinnahunnaأَضْلَلْنَगुमराह कर दियाaḍlalnaكَثِيرًۭاकसीर तादाद कोkathīranمِّنَamongminaٱلنَّاسِ ۖलोगों में सेl-nāsiفَمَنतो जो कोईfamanتَبِعَنِىपैरवी करे मेरीtabiʿanīفَإِنَّهُۥतो बेशक वोfa-innahuمِنِّى ۖमुझसे हैminnīوَمَنْऔर जो कोईwamanعَصَانِىनाफ़रमानी करे मेरीʿaṣānīفَإِنَّكَतो बेशक तू ही हैfa-innakaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वालाghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वालाraḥīmun٣٦
ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह इन्होंने बहुत-से लोगों को गुमराह कर दिया। अतः जो मेरे पीछे चला, वह मुझसे है और जिसने मेरी अवज्ञा की, तो निश्चय तू अत्यंत क्षमाशील, बड़ा दयावान् है।
१४:३७
رَّبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَسْكَنتُबसाया मैंनेaskantuمِن(some) ofminذُرِّيَّتِىअपनी कुछ औलाद कोdhurriyyatīبِوَادٍवादी मेंbiwādinغَيْرِबग़ैरghayriذِىwithdhīزَرْعٍखेती वालीzarʿinعِندَपासʿindaبَيْتِكَतेरे घर केbaytikaٱلْمُحَرَّمِहुरमत वालेl-muḥaramiرَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāلِيُقِيمُوا۟ताकि वो क़ायम करेंliyuqīmūٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataفَٱجْعَلْपस कर देfa-ij'ʿalأَفْـِٔدَةًۭदिलों कोafidatanمِّنَofminaٱلنَّاسِलोगों केl-nāsiتَهْوِىٓवो माइल होंtahwīإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimوَٱرْزُقْهُمऔर रिज़्क़ दे उन्हेंwa-ur'zuq'humمِّنَwithminaٱلثَّمَرَٰتِफलों में सेl-thamarātiلَعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيَشْكُرُونَवो शुक्र अदा करेंyashkurūna٣٧
ऐ हमारे पालनहार! निःसंदेह मैंने अपनी कुछ संतान को इस घाटी में, जो किसी खेती वाली नहीं, तेरे सम्मानित घर (काबा) के पास, बसाया है। ऐ हमारे पालनहार! ताकि वे नमाज़ क़ायम करें। अतः कुछ लोगों के दिलों को ऐसे कर दे कि उनकी ओर झुके रहें और उन्हें फलों से जीविका प्रदान कर, ताकि वे शुक्रिया अदा करें।
१४:३८
رَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāإِنَّكَबेशक तूinnakaتَعْلَمُतू जानता हैtaʿlamuمَاजो कुछmāنُخْفِىहम छुपाते हैंnukh'fīوَمَاऔर जो कुछwamāنُعْلِنُ ۗहम ज़ाहिर करते हैंnuʿ'linuوَمَاऔर नहींwamāيَخْفَىٰछुप सकतीyakhfāعَلَىfromʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiمِنanyminشَىْءٍۢकोई चीज़shayinفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَلَاऔर नाwalāفِىinfīٱلسَّمَآءِआसमान मेंl-samāi٣٨
ऐ हमारे पालनहार! निश्चय तू जानता है, जो हम छिपाते हैं और जो हम प्रकट करते हैं। और अल्लाह से कोई चीज़ नहीं छिपती धरती में और न आकाश में।
१४:३९
ٱلْحَمْدُसब तारीफ़al-ḥamduلِلَّهِअल्लाह के लिए हैlillahiٱلَّذِىवो जिसनेalladhīوَهَبَअता किएwahabaلِىमुझेlīعَلَىinʿalāٱلْكِبَرِबावजूद बुढ़ापे केl-kibariإِسْمَـٰعِيلَइस्माईलis'māʿīlaوَإِسْحَـٰقَ ۚऔर इसहाक़wa-is'ḥāqaإِنَّबेशकinnaرَبِّىमेरा रबrabbīلَسَمِيعُअलबत्ता ख़ूब सुनने वाला हैlasamīʿuٱلدُّعَآءِदुआ कोl-duʿāi٣٩
सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने मुझे बुढ़ापे के बावजूद (दो पुत्र) इसमाईल और इसहाक़ प्रदान किए। निःसंदेह मेरा पालनहार तो बहुत दुआ सुनने वाला है।
१४:४०
رَبِّऐ मेरे रबrabbiٱجْعَلْنِىबना मुझेij'ʿalnīمُقِيمَक़ायम करने वालाmuqīmaٱلصَّلَوٰةِनमाज़ काl-ṣalatiوَمِنand fromwaminذُرِّيَّتِى ۚऔर मेरी औलाद कोdhurriyyatīرَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāوَتَقَبَّلْऔर तू क़ुबूल कर लेwataqabbalدُعَآءِदुआ मेरीduʿāi٤٠
मेरे पालनहार! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना तथा मेरी संतान में से भी। ऐ हमारे पालनहार! और मेरी दुआ स्वीकार कर।
१४:४१
رَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāٱغْفِرْबख़्श देigh'firلِىमुझेlīوَلِوَٰلِدَىَّऔर मेरे वालिदैन कोwaliwālidayyaوَلِلْمُؤْمِنِينَऔर मोमिनों कोwalil'mu'minīnaيَوْمَजिस दिनyawmaيَقُومُक़ायम होगाyaqūmuٱلْحِسَابُहिसाबl-ḥisābu٤١
ऐ हमारे पालनहार! मुझे क्षमा कर दे तथा मेरे माता-पिता को और ईमान वालों को, जिस दिन हिसाब लिया जाएगा।
१४:४२
وَلَاऔर नाwalāتَحْسَبَنَّतुम हरगिज़ समझोtaḥsabannaٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaغَـٰفِلًاग़ाफ़िलghāfilanعَمَّاउससे जोʿammāيَعْمَلُअमल करते हैंyaʿmaluٱلظَّـٰلِمُونَ ۚज़ालिम लोगl-ẓālimūnaإِنَّمَاबेशकinnamāيُؤَخِّرُهُمْवो ढील दे रहा है उन्हेंyu-akhiruhumلِيَوْمٍۢउस दिन के लिएliyawminتَشْخَصُपथरा जाऐंगीtashkhaṣuفِيهِजिसमेंfīhiٱلْأَبْصَـٰرُनिगाहेंl-abṣāru٤٢
और तुम अल्लाह को उससे हरगिज़ असावधान न समझो, जो अत्याचारी लोग कर रहे हैं! वह तो उन्हें उस दिन1 के लिए विलंबित कर रहा है, जिस दिन आँखें खुली रह जाएँगी।
१४:४३
مُهْطِعِينَतेज़ी से दौड़ने वालेmuh'ṭiʿīnaمُقْنِعِىऊपर उठाए हुएmuq'niʿīرُءُوسِهِمْअपने सरों कोruūsihimلَاnotlāيَرْتَدُّनहीं लौटेगीyartadduإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimطَرْفُهُمْ ۖनिगाह उनकीṭarfuhumوَأَفْـِٔدَتُهُمْऔर दिल उनकेwa-afidatuhumهَوَآءٌۭख़ाली होंगेhawāon٤٣
इस हाल में कि वे तेज़ डौड़ने वाले, अपने सिर को ऊपर उठाने वाले होंगे। उनकी निगाह उनकी ओर नहीं लौटेगी और उनके दिल ख़ाली1 होंगे।
१४:४४
وَأَنذِرِऔर ख़बरदार कीजिएwa-andhiriٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaيَوْمَजिस दिनyawmaيَأْتِيهِمُआएगा उनके पासyatīhimuٱلْعَذَابُअज़ाबl-ʿadhābuفَيَقُولُतो कहेंगेfayaqūluٱلَّذِينَवो लोग जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāأَخِّرْنَآमोहलत दे हमेंakhir'nāإِلَىٰٓforilāأَجَلٍۢएक मुद्दत तकajalinقَرِيبٍۢक़रीब कीqarībinنُّجِبْहम क़ुबूल कर लेंnujibدَعْوَتَكَतेरी दावतdaʿwatakaوَنَتَّبِعِऔर हम पैरवी करेंwanattabiʿiٱلرُّسُلَ ۗरसूलों कीl-rusulaأَوَلَمْक्या नहींawalamتَكُونُوٓا۟थे तुमtakūnūأَقْسَمْتُمक़समें खाते तुमaqsamtumمِّنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluمَاनहीं हैmāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنanyminزَوَالٍۢकोई ज़वालzawālin٤٤
और (ऐ नबी!) लोगों को उस दिन से डराएँ, जब उनपर यातना आ जाएगी, तो वे लोग जिन्होंने अत्याचार किया, कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमें कुछ समय तक मोहलत दे दे, हम तेरा आमंत्रण स्वीकार करेंगे और रसूलों का अनुसरण करेंगे।(कहा जाएगा :) क्या तुमने इससे पहले क़समें नहीं खाई थीं कि तुम्हारे लिए कोई भी स्थानांतरण नहीं?
१४:४५
وَسَكَنتُمْऔर ठहरे रहे तुमwasakantumفِىinfīمَسَـٰكِنِघरों मेंmasākiniٱلَّذِينَउन लोगों के जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوٓا۟ज़ुल्म कियाẓalamūأَنفُسَهُمْअपनी जानों परanfusahumوَتَبَيَّنَऔर वाज़ेह हो गयाwatabayyanaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumكَيْفَकैसाkayfaفَعَلْنَاकिया हमने (सुलूक)faʿalnāبِهِمْसाथ उनकेbihimوَضَرَبْنَاऔर बयान कर दीं हमनेwaḍarabnāلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْأَمْثَالَमिसालेंl-amthāla٤٥
और तुम उन लोगों की बस्तियों में आबाद रहे, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया था और तुम्हारे लिए अच्छी तरह स्पष्ट हो गया कि हमने उनके साथ किस तरह किया? और हमने तुम्हारे लिए कई उदाहरण प्रस्तुत किए।
१४:४६
وَقَدْऔर तहक़ीक़waqadمَكَرُوا۟उन्होंने चाल चलीmakarūمَكْرَهُمْअपनी चालmakrahumوَعِندَऔर पास हैwaʿindaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمَكْرُهُمْउनकी चाल (का तोड़)makruhumوَإِنऔर नहींwa-inكَانَथीkānaمَكْرُهُمْचाल उनकीmakruhumلِتَزُولَकि टल जाऐंlitazūlaمِنْهُउससेmin'huٱلْجِبَالُपहाड़l-jibālu٤٦
और निःसंदेह उन्होंने अपना उपाय किया। और अल्लाह ही के पास1 उनका उपाय है। और उनका उपाय हरगिज़ ऐसा न था कि उससे पर्वत टल जाएँ।
१४:४७
فَلَاतो नाfalāتَحْسَبَنَّतुम हरगिज़ समझोtaḥsabannaٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaمُخْلِفَख़िलाफ़ करने वालाmukh'lifaوَعْدِهِۦअपने वादे काwaʿdihiرُسُلَهُۥٓ ۗअपने रसूलों सेrusulahuإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعَزِيزٌۭबहुत ज़बरदस्त हैʿazīzunذُوOwner (of) Retributiondhūٱنتِقَامٍۢइन्तिक़ाम लेने वाला हैintiqāmin٤٧
अतः आप हरगिज़ यह न समझें कि अल्लाह अपने रसूलों से किए हुए अपने वादे के विरुद्ध करने वाला है। निःसंदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला है।
१४:४८
يَوْمَजिस दिनyawmaتُبَدَّلُबदल दी जाएगीtubaddaluٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuغَيْرَसिवायghayraٱلْأَرْضِइस ज़मीन केl-arḍiوَٱلسَّمَـٰوَٰتُ ۖऔर आसमान (भी)wal-samāwātuوَبَرَزُوا۟और वो सामने आ जाऐंगेwabarazūلِلَّهِअल्लाह केlillahiٱلْوَٰحِدِजो अकेला हैl-wāḥidiٱلْقَهَّارِबहुत ज़बरदस्त हैl-qahāri٤٨
जिस दिन यह धरती अन्य धरती से बदल दी जाएगी और सब आकाश भी। तथा लोग अल्लाह के समक्ष1 प्रस्तुत होंगे, जो अकेला, सब पर प्रभुत्वशाली है।
१४:४९
وَتَرَىऔर आप देखेंगेwatarāٱلْمُجْرِمِينَमुजरिमों कोl-muj'rimīnaيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinمُّقَرَّنِينَजकड़े हुए होंगेmuqarranīnaفِىinfīٱلْأَصْفَادِबेड़ियों मेंl-aṣfādi٤٩
और आप अपराधियों को उस दिन ज़ंजीरों में एक-दूसरे के साथ जकड़े हुए देखेंगे।
१४:५०
سَرَابِيلُهُمकुर्ते उनकेsarābīluhumمِّنofminقَطِرَانٍۢतारकोल के होंगेqaṭirāninوَتَغْشَىٰऔर ढाँपे हुए होगीwataghshāوُجُوهَهُمُउनके चेहरों कोwujūhahumuٱلنَّارُआगl-nāru٥٠
उनके वस्त्र तारकोल के होंगे और उनके चेहरों को आग ढाँपे होगी।
१४:५१
لِيَجْزِىَताकि बदला देliyajziyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuكُلَّहरkullaنَفْسٍۢनफ़्स कोnafsinمَّاउसका जोmāكَسَبَتْ ۚउसने कमाई कीkasabatإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaسَرِيعُजल्द लेने वाला हैsarīʿuٱلْحِسَابِहिसाबl-ḥisābi٥١
ताकि अल्लाह प्रत्येक प्राणी को उसके किए का बदला दे। निःसंदेह अल्लाह शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
१४:५२
هَـٰذَاयेhādhāبَلَـٰغٌۭपैग़ाम हैbalāghunلِّلنَّاسِलोगों के लिएlilnnāsiوَلِيُنذَرُوا۟और ताकि वो डराए जाऐंwaliyundharūبِهِۦसाथ उसकेbihiوَلِيَعْلَمُوٓا۟और ताकि वो जान लेंwaliyaʿlamūأَنَّمَاबेशकannamāهُوَवोhuwaإِلَـٰهٌۭइलाह हैilāhunوَٰحِدٌۭएक हीwāḥidunوَلِيَذَّكَّرَऔर ताकि नसीहत पकड़ेंwaliyadhakkaraأُو۟لُوا۟menulūٱلْأَلْبَـٰبِअक़्ल वालेl-albābi٥٢
यह लोगों के लिए एक सूचना है और ताकि उन्हें इसके साथ डराया जाए और ताकि वे जान लें कि वही एक सत्य पूज्य है और ताकि बुद्धि वाले लोग शिक्षा ग्रहण करें।
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