१५
अल-हिज्र
الحجر
सूरह अल-हिज्र (الحجر) पवित्र क़ुरआन का १५ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ९९ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१५:१
الٓر ۚअलिफ़ लाम राalif-lam-raتِلْكَयेtil'kaءَايَـٰتُआयात हैंāyātuٱلْكِتَـٰبِकिताब कीl-kitābiوَقُرْءَانٍۢand Quranwaqur'āninمُّبِينٍۢऔर क़ुरआन वाज़ेह कीmubīnin١
अलिफ़, लाम, रा। ये किताब और स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं।
१५:२
رُّبَمَاकभीrubamāيَوَدُّचाहेंगेyawadduٱلَّذِينَवो लोग जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلَوْकाशlawكَانُوا۟वो होतेkānūمُسْلِمِينَमुसलमानmus'limīna٢
(एक समय आएगा कि) काफ़िर चाहेंगे कि काश वे (दुनिया में) मुसलमान होते!
१५:३
ذَرْهُمْछोड़ दीजिए उन्हेंdharhumيَأْكُلُوا۟वो खाऐंyakulūوَيَتَمَتَّعُوا۟और मज़े उड़ाऐंwayatamattaʿūوَيُلْهِهِمُऔर ग़ाफ़िल रखे उन्हेंwayul'hihimuٱلْأَمَلُ ۖउम्मीदl-amaluفَسَوْفَपस अनक़रीबfasawfaيَعْلَمُونَवो जान लेंगेyaʿlamūna٣
(ऐ नबी!) आप उन्हें छोड़ दें। वे खाएँ और लाभ उठाएँ, तथा (लंबी) आशा उन्हें ग़ाफ़िल रखे, फिर शीघ्र ही जान लेंगे।1
१५:४
وَمَآऔर नहींwamāأَهْلَكْنَاहलाक कियाahlaknāمِنanyminقَرْيَةٍकिसी बस्ती कोqaryatinإِلَّاमगरillāوَلَهَاजबकि उसके लिएwalahāكِتَابٌۭलिखा हुआ हैkitābunمَّعْلُومٌۭमालूम (वक़्त)maʿlūmun٤
और हमने जिस बस्ती को भी नष्ट किया, उसका एक निर्धारित समय था।
१५:५
مَّاनहींmāتَسْبِقُसबक़त करती/आगे बढ़तीtasbiquمِنْanyminأُمَّةٍकोई उम्मतummatinأَجَلَهَاअपने मुक़र्रर वक़्त सेajalahāوَمَاऔर नाwamāيَسْتَـْٔخِرُونَवो पीछे रह सकती हैyastakhirūna٥
कोई जाति अपने नियत समय से न आगे बढ़ती है और न वे पीछे रहते हैं।
१५:६
وَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūيَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلَّذِىवो शख़्सalladhīنُزِّلَउतारा गयाnuzzilaعَلَيْهِजिस परʿalayhiٱلذِّكْرُज़िक्र (क़ुरआन)l-dhik'ruإِنَّكَयक़ीनन तूinnakaلَمَجْنُونٌۭअलबत्ता मजनून हैlamajnūnun٦
तथा उन (काफ़िरों) ने कहा : ऐ वह व्यक्ति जिसपर स्मरण (क़ुरआन) अवतरित किया गया है, निःसंदेह तू तो पागल है।
१५:७
لَّوْWhylawمَاक्यों नहींmāتَأْتِينَاतू लाया हमारे पासtatīnāبِٱلْمَلَـٰٓئِكَةِफ़रिश्तों कोbil-malāikatiإِنअगरinكُنتَहै तूkuntaمِنَofminaٱلصَّـٰدِقِينَसच्चों में सेl-ṣādiqīna٧
यदि तू सच्चों में से है, तो हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आता?
१५:८
مَاनहींmāنُنَزِّلُहम उतारा करतेnunazziluٱلْمَلَـٰٓئِكَةَफ़रिश्तों कोl-malāikataإِلَّاमगरillāبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَمَاऔर नहींwamāكَانُوٓا۟होते वोkānūإِذًۭاतबidhanمُّنظَرِينَमोहलत दिए गएmunẓarīna٨
हम फ़रिश्तों को सत्य के साथ ही उतारते हैं और उस समय उन्हें कोई मोहलत नहीं दी जाती।
१५:९
إِنَّاबेशक हमinnāنَحْنُहम ही नेnaḥnuنَزَّلْنَاनाज़िल किया हमनेnazzalnāٱلذِّكْرَज़िक्र (क़ुरआन)l-dhik'raوَإِنَّاऔर बेशक हम हीwa-innāلَهُۥउसकीlahuلَحَـٰفِظُونَअलबत्ता हिफ़ज़त करने वाले हैंlaḥāfiẓūna٩
निःसंदेह हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारी है और निःसंदेह हम ही इसकी अवश्य रक्षा करने वाले1 हैं।
१५:१०
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजे हमनेarsalnāمِنbefore youminقَبْلِكَआपसे पहले (रसूल)qablikaفِىinfīشِيَعِगिरोहों मेंshiyaʿiٱلْأَوَّلِينَपहले लोगों केl-awalīna١٠
और निःसंदेह हमने आपसे पहले विगत समुदायों के समूहों में रसूल भेजे हैं।
१५:११
وَمَاऔर नहींwamāيَأْتِيهِمआया उनके पासyatīhimمِّنanyminرَّسُولٍकोई रसूलrasūlinإِلَّاमगरillāكَانُوا۟थे वोkānūبِهِۦउसकाbihiيَسْتَهْزِءُونَवो मज़ाक़ उड़ातेyastahziūna١١
और उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका मज़ाक उड़ाया करते थे।
१५:१२
كَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaنَسْلُكُهُۥहम दाख़िल करते हैं उसकोnaslukuhuفِىinfīقُلُوبِदिलों मेंqulūbiٱلْمُجْرِمِينَमुजरिमों केl-muj'rimīna١٢
इसी तरह हम यह1 (झुठलाने की प्रवृत्ति) अपराधियों के दिलों में डाल देते हैं।
१५:१३
لَاNotlāيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लाऐंगेyu'minūnaبِهِۦ ۖइस परbihiوَقَدْऔर तहक़ीक़waqadخَلَتْगुज़र चुकाkhalatسُنَّةُतरीक़ाsunnatuٱلْأَوَّلِينَपहलों काl-awalīna١٣
वे उसपर ईमान नहीं लाते। और प्रथम जातियों से यही परंपरा चली आ रही है।
१५:१४
وَلَوْऔर अगरwalawفَتَحْنَاखोलदें हमनेfataḥnāعَلَيْهِمउन परʿalayhimبَابًۭاकोई दरवाज़ाbābanمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiفَظَلُّوا۟तो शिरू होजाऐंfaẓallūفِيهِउसमेंfīhiيَعْرُجُونَवो चढ़तेyaʿrujūna١٤
और यदि हम उनपर आकाश का कोई द्वार खोल दें, फिर वे उसमें चढ़ते चले जाएँ।
१५:१५
لَقَالُوٓا۟अलबत्ता वो कहेंगेlaqālūإِنَّمَاबेशकinnamāسُكِّرَتْमदहोश करदी गई हैंsukkiratأَبْصَـٰرُنَاनिगाहें हमारीabṣārunāبَلْबल्किbalنَحْنُहम तोnaḥnuقَوْمٌۭलोग हैंqawmunمَّسْحُورُونَसहरज़दाmasḥūrūna١٥
तब भी निश्चय वे यही कहेंगे कि हमारी निगाहें बाँध दी गई हैं। बल्कि हमपर जादू कर दिया गया है।
१५:१६
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَعَلْنَاबनाए हमनेjaʿalnāفِىinfīٱلسَّمَآءِआसमान मेंl-samāiبُرُوجًۭاकई बुर्जburūjanوَزَيَّنَّـٰهَاऔर मुज़य्यन किया हमने उसेwazayyannāhāلِلنَّـٰظِرِينَदेखने वालों के लिएlilnnāẓirīna١٦
निःसंदेह हमने आकाश में कई बुर्ज (बड़े सितारे) बनाए हैं और उन्हें देखने वालों के लिए सुशोभित किया है।
१५:१७
وَحَفِظْنَـٰهَاऔर हिफ़ाज़त की हमने उसकीwaḥafiẓ'nāhāمِنfromminكُلِّeverykulliشَيْطَـٰنٍۢहर शैतान सेshayṭāninرَّجِيمٍजो मरदूद हैrajīmin١٧
और हमने उसे प्रत्येक धिक्कारे हुए शैतान से सुरक्षित किया है।
१५:१८
إِلَّاमगरillāمَنِजिसनेmaniٱسْتَرَقَचुरा लियाis'taraqaٱلسَّمْعَसुनी हुई बात कोl-samʿaفَأَتْبَعَهُۥतो पीछा करता है उसकाfa-atbaʿahuشِهَابٌۭएक शोलाshihābunمُّبِينٌۭचमकता हुआmubīnun١٨
परंतु जो (शैतान) चोरी-छिपे सुनना चाहे, तो एक स्पष्ट ज्वाला (उल्का) उसका पीछा1 करती है।
१५:१९
وَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaمَدَدْنَـٰهَاफैला दिया हमने उसेmadadnāhāوَأَلْقَيْنَاऔर डाले हमनेwa-alqaynāفِيهَاउसमेंfīhāرَوَٰسِىَपहाड़rawāsiyaوَأَنۢبَتْنَاऔर उगाई हमनेwa-anbatnāفِيهَاउसमेंfīhāمِنofminكُلِّहर तरह कीkulliشَىْءٍۢचीज़shayinمَّوْزُونٍۢमोज़ूं/मुनासिबmawzūnin١٩
और हमने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत डाल (गाड़) दिए और उसमें हर चीज़ निर्धारित मात्रा में उगाई।
१५:२०
وَجَعَلْنَاऔर बनाए हमनेwajaʿalnāلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفِيهَاउसमेंfīhāمَعَـٰيِشَअसबाबे मईशतmaʿāyishaوَمَنऔर उसके लिए (भी)wamanلَّسْتُمْनहीं हो तुमlastumلَهُۥजिसकेlahuبِرَٰزِقِينَराज़िक़birāziqīna٢٠
और हमने उसमें तुम्हारे लिए जीवन के संसाधन बना दिए। तथा उनके लिए (भी) जिन्हें तुम हरगिज़ रोज़ी देने वाले नहीं।
१५:२१
وَإِنऔर नहींwa-inمِّن(is) anyminشَىْءٍकोई चीज़shayinإِلَّاमगरillāعِندَنَاहमारे पासʿindanāخَزَآئِنُهُۥख़ज़ाने हैं उसकेkhazāinuhuوَمَاऔर नहींwamāنُنَزِّلُهُۥٓहम उतारते उसेnunazziluhuإِلَّاमगरillāبِقَدَرٍۢसाथ अंदाज़ेbiqadarinمَّعْلُومٍۢमालूम केmaʿlūmin٢١
और कोई चीज़ ऐसी नहीं है, जिसके ख़ज़ाने हमारे पास न हों। और हम उसे एक निश्चित मात्रा ही में उतारते हैं।
१५:२२
وَأَرْسَلْنَاऔर भेजा हमनेwa-arsalnāٱلرِّيَـٰحَहवाओं कोl-riyāḥaلَوَٰقِحَबारआवरlawāqiḥaفَأَنزَلْنَاफिर नाज़िल किया हमनेfa-anzalnāمِنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۭपानीmāanفَأَسْقَيْنَـٰكُمُوهُपस पिलाया हमने तुम्हें वोfa-asqaynākumūhuوَمَآऔर नहींwamāأَنتُمْहो तुमantumلَهُۥउसेlahuبِخَـٰزِنِينَज़ख़ीरा करने वालेbikhāzinīna٢٢
और हमने बादलों को पानी से गर्भित करने वाली हवाओं को भेजा, फिर हमने आकाश से पानी उतारा, और उसे तुम्हें पिलाया, तथा तुम हरगिज़ उसे संग्रह करने वाले नहीं।
१५:२३
وَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَنَحْنُयक़ीनन हम हीlanaḥnuنُحْىِۦहम ज़िन्दा करते हैंnuḥ'yīوَنُمِيتُऔर हम मौत देते हैंwanumītuوَنَحْنُऔर हम हीwanaḥnuٱلْوَٰرِثُونَवारिस हैंl-wārithūna٢٣
तथा निःसंदेह हम ही जीवित करते और मारते हैं और हम ही (सबके) उत्तराधिकारी हैं।
१५:२४
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadعَلِمْنَاजान लिया हमनेʿalim'nāٱلْمُسْتَقْدِمِينَआगे बढ़ने वालों कोl-mus'taqdimīnaمِنكُمْतुम में सेminkumوَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadعَلِمْنَاजान लिया हमनेʿalim'nāٱلْمُسْتَـْٔخِرِينَपीछे रहने वालों कोl-mus'takhirīna٢٤
तथा निःसंदेह हम तुम्हारे पहले लोगों को भी जानते हैं, और बाद में आने वालों को भी जानते हैं।
१५:२५
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaرَبَّكَरब आपकाrabbakaهُوَवोhuwaيَحْشُرُهُمْ ۚवो इकट्ठा करेगा उन्हेंyaḥshuruhumإِنَّهُۥबेशक वो ही हैinnahuحَكِيمٌबहुत हिक्मत वालाḥakīmunعَلِيمٌۭख़ूब इल्म वालाʿalīmun٢٥
और निःसंदेह आपका पालनहार ही उन्हें इकट्ठा1 करेगा। निश्चय वह पूर्ण हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
१५:२६
وَلَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़walaqadخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلْإِنسَـٰنَइंसान कोl-insānaمِن(out) ofminصَلْصَـٰلٍۢखनकती मिट्टी सेṣalṣālinمِّنْfromminحَمَإٍۢकीचड़ सेḥama-inمَّسْنُونٍۢबदबूदारmasnūnin٢٦
और निःसंदेह हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है।
१५:२७
وَٱلْجَآنَّऔर जिन्न कोwal-jānaخَلَقْنَـٰهُपैदा किया हमने उसेkhalaqnāhuمِنbeforeminقَبْلُइससे क़ब्लqabluمِنfromminنَّارِfirenāriٱلسَّمُومِआग की लपट सेl-samūmi٢٧
और इससे पहले जिन्नों को हमने धुँआ रहित अति गर्म आग से पैदा किया।
१५:२८
وَإِذْऔर जबwa-idhقَالَफ़रमायाqālaرَبُّكَआपके रब नेrabbukaلِلْمَلَـٰٓئِكَةِफ़रिश्तों सेlil'malāikatiإِنِّىबेशक मैंinnīخَـٰلِقٌۢपैदा करने वाला हूँkhāliqunبَشَرًۭاएक इन्सानbasharanمِّن(out) ofminصَلْصَـٰلٍۢखनकती मिट्टी सेṣalṣālinمِّنْfromminحَمَإٍۢकीचड़ सेḥama-inمَّسْنُونٍۢबदबूदारmasnūnin٢٨
और (याद करो) जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा : मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करने वाला हूँ।
१५:२९
فَإِذَاफिर जबfa-idhāسَوَّيْتُهُۥदुरुस्त कर दूँ मैं उसेsawwaytuhuوَنَفَخْتُऔर फूँक दूँ मैंwanafakhtuفِيهِउसमेंfīhiمِنofminرُّوحِىअपनी रूह सेrūḥīفَقَعُوا۟तो गिर पड़नाfaqaʿūلَهُۥउसके लिएlahuسَـٰجِدِينَसजदा करते हुएsājidīna٢٩
तो जब मैं उसे पूरा बना लूँ और उसमें अपनी रूह़ फूँक दूँ, तो तुम उसके आगे सजदा करते हुए गिर जाओ।1
१५:३०
فَسَجَدَतो सजदा कियाfasajadaٱلْمَلَـٰٓئِكَةُफ़रिश्तों नेl-malāikatuكُلُّهُمْसबके सबनेkulluhumأَجْمَعُونَइकट्ठेajmaʿūna٣٠
तो सब के सब फ़रिश्तों ने सजदा किया।
१५:३१
إِلَّآसिवायillāإِبْلِيسَइबलीस केib'līsaأَبَىٰٓउसने इन्कार कियाabāأَنकिanيَكُونَहो वोyakūnaمَعَसाथmaʿaٱلسَّـٰجِدِينَसजदा करने वालों केl-sājidīna٣١
सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया।
१५:३२
قَالَफ़रमायाqālaيَـٰٓإِبْلِيسُऐ इब्लीसyāib'līsuمَاक्या हैmāلَكَतुझेlakaأَلَّاकि नहींallāتَكُونَहुआ तूtakūnaمَعَwithmaʿaٱلسَّـٰجِدِينَसाथ सजदा करने वालों केl-sājidīna٣٢
अल्लाह ने पूछा : ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों में शामिल नहीं हुआॽ
१५:३३
قَالَउसने कहाqālaلَمْनहींlamأَكُنहूँ मैंakunلِّأَسْجُدَकि मैं सजदा करूँli-asjudaلِبَشَرٍऐसे इन्सान कोlibasharinخَلَقْتَهُۥबनाया तूने उसेkhalaqtahuمِن(out) ofminصَلْصَـٰلٍۢखनकती मिट्टी सेṣalṣālinمِّنْfromminحَمَإٍۢकीचड़ सेḥama-inمَّسْنُونٍۢबदबूदारmasnūnin٣٣
उसने कहा : मैं ऐसा नहीं कि एक मनुष्य को सजदा करूँ, जिसे तूने सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया है।
१५:३४
قَالَफ़रमायाqālaفَٱخْرُجْपस निकल जाfa-ukh'rujمِنْهَاइससेmin'hāفَإِنَّكَपस बेशक तूfa-innakaرَجِيمٌۭमरदूद हैrajīmun٣٤
अल्लाह ने कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। क्योंकि निश्चय तू धिक्कारा हुआ है।
१५:३५
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaعَلَيْكَतुझ परʿalaykaٱللَّعْنَةَलानत हैl-laʿnataإِلَىٰtillilāيَوْمِ(the) Dayyawmiٱلدِّينِबदले के दिन तकl-dīni٣٥
और निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक धिक्कार है।
१५:३६
قَالَवो बोलाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiفَأَنظِرْنِىٓपस मोहलत दे मुझेfa-anẓir'nīإِلَىٰtillilāيَوْمِउस दिन तकyawmiيُبْعَثُونَवो सब उठाए जाऐंगे (कि)yub'ʿathūna٣٦
उस (इबलीस) ने कहा1 : ऐ मेरे पालनहार! तो फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे, जब वे (पुनः जीवित कर) उठाए जाएँगे।
१५:३७
قَالَफ़रमायाqālaفَإِنَّكَपस बेशक तूfa-innakaمِنَ(are) ofminaٱلْمُنظَرِينَमोहलत दिए जाने वालों में से हैl-munẓarīna٣٧
(अल्लाह ने) कहा : तू निःसंदेह मोहलत दिए गए लोगों में से है।
१५:३८
إِلَىٰTillilāيَوْمِउस दिन तकyawmiٱلْوَقْتِवक़्त (जिस का)l-waqtiٱلْمَعْلُومِमालूम/मुक़र्रर हैl-maʿlūmi٣٨
ज्ञात समय के दिन तक।
१५:३९
قَالَउसने कहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiبِمَآबवजह उसके जोbimāأَغْوَيْتَنِىबेराह किया तूने मुझेaghwaytanīلَأُزَيِّنَنَّअलबत्ता मैं ज़रूर मुज़य्यन कर दूँ गाla-uzayyinannaلَهُمْउनके लिएlahumفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَلَأُغْوِيَنَّهُمْऔर अलबत्ता मैं ज़रूर बहकाऊँगा उनकोwala-ugh'wiyannahumأَجْمَعِينَसबके सबकोajmaʿīna٣٩
वह बोला : ऐ मेरे पालनहार! चूँकि तूने मुझे पथभ्रष्ट किया है, मैं अवश्य ही उनके लिए धरती में (पाप को) सुशोभित करूँगा और उन सभी को पथभ्रष्ट कर दूँगा।
१५:४०
إِلَّاसिवायillāعِبَادَكَतेरे बन्दों केʿibādakaمِنْهُمُउनमें सेmin'humuٱلْمُخْلَصِينَजो चुने हुए हैंl-mukh'laṣīna٤٠
सिवाय तेरे उनमें से चुने हुए बंदों के।
१५:४१
قَالَफ़रमायाqālaهَـٰذَاयेhādhāصِرَٰطٌरास्ता हैṣirāṭunعَلَىَّमुझ तकʿalayyaمُسْتَقِيمٌसीधाmus'taqīmun٤١
(अल्लाह ने) कहा : यह रास्ता है जो मुझ तक सीधा है।
१५:४२
إِنَّबेशकinnaعِبَادِىमेर बन्देʿibādīلَيْسَनहींlaysaلَكَतेरे लिएlakaعَلَيْهِمْउन परʿalayhimسُلْطَـٰنٌकोई ज़ोरsul'ṭānunإِلَّاमगरillāمَنِजोmaniٱتَّبَعَكَपैरवी करे तेरीittabaʿakaمِنَofminaٱلْغَاوِينَबहके हुओं में सेl-ghāwīna٤٢
निःसंदेह मेरे बंदों पर तेरा कोई वश नहीं1, परंतु जो बहके हुए लोगों में से तेरे पीछे चले।
१५:४३
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaجَهَنَّمَजहन्नमjahannamaلَمَوْعِدُهُمْअलबत्ता उनके वादे की जगह हैlamawʿiduhumأَجْمَعِينَसबके सबकीajmaʿīna٤٣
और निश्चय ही उन सब के वादा की जगह जहन्नम है।
१५:४४
لَهَاउसकेlahāسَبْعَةُसातsabʿatuأَبْوَٰبٍۢदरवाज़े हैंabwābinلِّكُلِّवास्ते हरlikulliبَابٍۢदरवाज़े केbābinمِّنْهُمْउनमें सेmin'humجُزْءٌۭएक हिस्सा हैjuz'onمَّقْسُومٌतक़सीम शुदाmaqsūmun٤٤
उस (जहन्नम) के सात द्वार हैं। और प्रत्येक द्वार के लिए उन (इबलीस के अनुयायियों) का एक विभाजित भाग1 है।
१५:४५
إِنَّबेशकinnaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगl-mutaqīnaفِى(will be) infīجَنَّـٰتٍۢबाग़ों में होंगेjannātinوَعُيُونٍऔर चश्मों मेंwaʿuyūnin٤٥
निःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।
१५:४६
ٱدْخُلُوهَاदाख़िल हो जाओ इनमेंud'khulūhāبِسَلَـٰمٍसाथ सलामती केbisalāminءَامِنِينَअमन में रहने वालेāminīna٤٦
(उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।
१५:४७
وَنَزَعْنَاऔर निकाल देंगे हमwanazaʿnāمَاजो भीmāفِى(is) infīصُدُورِهِمउनके सीनों में हैṣudūrihimمِّنْofminغِلٍّकोई कीनाghillinإِخْوَٰنًاभाई-भाई बनकरikh'wānanعَلَىٰonʿalāسُرُرٍۢतख़्तों परsururinمُّتَقَـٰبِلِينَआमने-सामने (होंगे)mutaqābilīna٤٧
और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।
१५:४८
لَاNotlāيَمَسُّهُمْना छुएगी उन्हेंyamassuhumفِيهَاउनमेंfīhāنَصَبٌۭकोई थकावटnaṣabunوَمَاऔर नाwamāهُمवोhumمِّنْهَاउनसेmin'hāبِمُخْرَجِينَनिकाले जाऐंगेbimukh'rajīna٤٨
न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।
१५:४९
۞ نَبِّئْख़बर दे दीजिएnabbiعِبَادِىٓमेर बन्दों कोʿibādīأَنِّىٓबेशक मैंannīأَنَاमैं ही हूँanāٱلْغَفُورُबहुत बख़्शने वालाl-ghafūruٱلرَّحِيمُबहुत रहम करने वालाl-raḥīmu٤٩
(ऐ नबी!) आप मेरे बंदों को सूचित कर दें कि निःसंदेह मैं ही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान्1 हूँ।
१५:५०
وَأَنَّऔर बेशकwa-annaعَذَابِىअज़ाब मेराʿadhābīهُوَवो हीhuwaٱلْعَذَابُअज़ाब हैl-ʿadhābuٱلْأَلِيمُदर्दनाकl-alīmu٥٠
और यह भी कि निःसंदेह मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है।
१५:५१
وَنَبِّئْهُمْऔर ख़बर दे दीजिए उन्हेंwanabbi'humعَنaboutʿanضَيْفِमेहमानों कीḍayfiإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम केib'rāhīma٥١
और आप उन्हें इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के अतिथियों के बारे में सूचित कर दें।
१५:५२
إِذْजबidhدَخَلُوا۟वो दाख़िल हुएdakhalūعَلَيْهِउस परʿalayhiفَقَالُوا۟तो उन्होंने कहाfaqālūسَلَـٰمًۭاसलाम (हो तुम पर)salāmanقَالَउसने कहाqālaإِنَّاबेशक हमinnāمِنكُمْतुमसेminkumوَجِلُونَख़ौफ़ज़दा हैंwajilūna٥٢
जब वे इबराहीम के पास आए, तो उन्होंने सलाम किया। उसने कहा : हमें तो तुमसे डर लग रहा है।
१५:५३
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūلَا(Do) notlāتَوْجَلْना तुम डरोtawjalإِنَّاबेशक हमinnāنُبَشِّرُكَहम ख़ुशख़बरी देते हैं तुझेnubashirukaبِغُلَـٰمٍएक लड़के कीbighulāminعَلِيمٍۢबहुत इल्म वालेʿalīmin٥٣
उन्होंने कहा : डरिए नहीं, निःसंदेह हम आपको एक ज्ञानी बालक की शुभ सूचना देते हैं।
१५:५४
قَالَउसने कहाqālaأَبَشَّرْتُمُونِىक्या ख़ुशख़बरी देते हो तुम मुझेabashartumūnīعَلَىٰٓबावजूद इसकेʿalāأَنकिanمَّسَّنِىَपहूँच चुका मुझेmassaniyaٱلْكِبَرُबुढ़ापाl-kibaruفَبِمَपस किस चीज़ कीfabimaتُبَشِّرُونَतुम ख़ुशख़बरी देते होtubashirūna٥٤
उसने कहा : क्या तुम मुझे इस बुढ़ापे के आ जाने के उपरांत शुभ सूचना दे रहे हो? तो तुम किस आधार पर यह शुभ सूचना दे रहे होॽ
१५:५५
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūبَشَّرْنَـٰكَख़ुशख़बरी दी है हमने तुझेbasharnākaبِٱلْحَقِّहक़ कीbil-ḥaqiفَلَاपस नाfalāتَكُنतुम होtakunمِّنَofminaٱلْقَـٰنِطِينَमायूस होने वालों में सेl-qāniṭīna٥٥
उन्होंने कहा : हमने आपको सच्ची शुभ सूचना दी है। अतः आप निराश होने वालों में से न हों।
१५:५६
قَالَउसने कहाqālaوَمَنऔर कौनwamanيَقْنَطُमायूस हो सकता हैyaqnaṭuمِنofminرَّحْمَةِरहमत सेraḥmatiرَبِّهِۦٓअपने रब कीrabbihiإِلَّاसिवायillāٱلضَّآلُّونَगुमराह लोगों केl-ḍālūna٥٦
(इबराहीम अलैहिस्सलाम ने) कहा : और पथभ्रष्टों के सिवा अपने पालनहार की दया से कौन निराश होता है।
१५:५७
قَالَउसने कहाqālaفَمَاतो क्याfamāخَطْبُكُمْमामला है तुम्हाराkhaṭbukumأَيُّهَاऐayyuhāٱلْمُرْسَلُونَभेजे हुओ (फ़रिश्तो)l-mur'salūna٥٧
उसने कहा : ऐ भेजे हुए फ़रिश्तो! तुम्हारा अभियान क्या है?
१५:५८
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūإِنَّآबेशक हमinnāأُرْسِلْنَآभेजे गए हमur'sil'nāإِلَىٰtoilāقَوْمٍۢतरफ़ उन लोगों केqawminمُّجْرِمِينَजो मुजरिम हैंmuj'rimīna٥٨
उन्होंने उत्तर दिया : निःसंदेह हम एक अपराधी जाति की ओर भेजे गए हैं।
१५:५९
إِلَّآसिवायillāءَالَthe familyālaلُوطٍआले लूत केlūṭinإِنَّاबेशक हमinnāلَمُنَجُّوهُمْअलबत्ता निजात देने वाले हैं उनकोlamunajjūhumأَجْمَعِينَसबके सबकोajmaʿīna٥٩
लूत के घर वालों के सिवा। निश्चय हम उन सभी को अवश्य बचा लेने वाले हैं।
१५:६०
إِلَّاसिवायillāٱمْرَأَتَهُۥउसकी वीवी केim'ra-atahuقَدَّرْنَآ ۙमुक़द्दर करदिया हमनेqaddarnāإِنَّهَاबेशक वोinnahāلَمِنَ(is) surely oflaminaٱلْغَـٰبِرِينَअलबत्ता पीछे रहने वालों में से हैl-ghābirīna٦٠
परंतु लूत की पत्नी, हमने नियत कर दिया है कि निःसंदेह वह निश्चय ही पीछे रह जाने वालों में से है।
१५:६१
فَلَمَّاतो जबfalammāجَآءَआगएjāaءَالَ(to the) familyālaلُوطٍआले लूत (के पास)lūṭinٱلْمُرْسَلُونَभेजे हुए (फरिश्ते)l-mur'salūna٦١
फिर जब लूत के घर वालों के पास भेजे हुए (फ़रिश्ते) आए।
१५:६२
قَالَउसने कहाqālaإِنَّكُمْबेशक तुमinnakumقَوْمٌۭएक क़ौम होqawmunمُّنكَرُونَअजनबीmunkarūna٦٢
तो उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : तुम तो अपरिचित लोग हो।
१५:६३
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūبَلْबल्किbalجِئْنَـٰكَलाए हैं हम तेरे पासji'nākaبِمَاवो जोbimāكَانُوا۟थे वोkānūفِيهِजिसमेंfīhiيَمْتَرُونَवो शक करतेyamtarūna٦٣
उन्होंने कहा : (डरो नहीं) बल्कि हम तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आए हैं, जिसमें वे संदेह किया करते थे।
१५:६४
وَأَتَيْنَـٰكَऔर लाए हैं हम तेरे पासwa-ataynākaبِٱلْحَقِّहक़ कोbil-ḥaqiوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَصَـٰدِقُونَअलबत्ता सच्चे हैंlaṣādiqūna٦٤
और हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं और निःसंदेह हम निश्चय सच्चे हैं।
१५:६५
فَأَسْرِपस ले चलोfa-asriبِأَهْلِكَअपने घर वालों कोbi-ahlikaبِقِطْعٍۢएक हिस्से मेंbiqiṭ'ʿinمِّنَofminaٱلَّيْلِरात केal-layliوَٱتَّبِعْऔर चलते चलोwa-ittabiʿأَدْبَـٰرَهُمْपीछे उनकेadbārahumوَلَاऔर नाwalāيَلْتَفِتْपीछे मुड़कर देखेyaltafitمِنكُمْतुम में सेminkumأَحَدٌۭकोई एक भीaḥadunوَٱمْضُوا۟और चलते जाओwa-im'ḍūحَيْثُजहाँ काḥaythuتُؤْمَرُونَतुम हुक्म दिए जाते होtu'marūna٦٥
अतः तुम अपने घर वालों को लेकर रात के किसी हिस्से में निकल जाओ और खुद उनके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई मुड़कर न देखे। तथा चले जाओ, जहाँ तुम्हें आदेश दिया जाता है।
१५:६६
وَقَضَيْنَآऔर फ़ैसला पहुँचा दिया हमनेwaqaḍaynāإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiذَٰلِكَउसdhālikaٱلْأَمْرَमामले काl-amraأَنَّबेशकannaدَابِرَजड़dābiraهَـٰٓؤُلَآءِउन लोगों कीhāulāiمَقْطُوعٌۭकाटदी जाएगीmaqṭūʿunمُّصْبِحِينَजबकि वो सुबह करने वाले होंगेmuṣ'biḥīna٦٦
और हमने उसकी ओर इस बात की वह़्य कर दी कि इन लोगों की जड़ सुबह होते ही काट दी जाने वाली है।
१५:६७
وَجَآءَऔर आगएwajāaأَهْلُ(the) peopleahluٱلْمَدِينَةِशहर वालेl-madīnatiيَسْتَبْشِرُونَख़ुशियाँ मनाते हुएyastabshirūna٦٧
और उस नगर वाले इस हाल में आए कि बहुत खुश हो रहे थे।1
१५:६८
قَالَकह (लूत ने)qālaإِنَّबेशकinnaهَـٰٓؤُلَآءِये लोगhāulāiضَيْفِىमेहमान हैं मेरेḍayfīفَلَاपस नाfalāتَفْضَحُونِतुम रुस्वा करो मुझेtafḍaḥūni٦٨
उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये लोग तो मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे अपमानित न करो।
१५:६९
وَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَلَاऔर नाwalāتُخْزُونِतुम ज़लील करो मुझेtukh'zūni٦٩
तथा अल्लाह से डरो और मुझे अपमानित न करो।
१५:७०
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūأَوَلَمْक्या भला नहींawalamنَنْهَكَहमने रोका था तुझेnanhakaعَنِfromʿaniٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों सेl-ʿālamīna٧٠
उन्होंने कहा : क्या हमने तुम्हें विश्व वासियों (को अतिथि बनाने) से मना1 नहीं किया?
१५:७१
قَالَउसने कहाqālaهَـٰٓؤُلَآءِयेhāulāiبَنَاتِىٓबेटियाँ हैं मेरीbanātīإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumفَـٰعِلِينَकरने वालेfāʿilīna٧١
उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये मेरी बेटियाँ हैं, यदि तुम कुछ करने वाले1 हो।
१५:७२
لَعَمْرُكَआपकी ज़िन्दगी की क़समlaʿamrukaإِنَّهُمْबेशक वोinnahumلَفِىwere inlafīسَكْرَتِهِمْअलबत्ता अपने नशे मेंsakratihimيَعْمَهُونَवो बहक रहे थेyaʿmahūna٧٢
ऐ नबी! आपकी आयु की क़सम! निःसंदेह वे निश्चय अपनी मस्ती में भटके फिरते थे।
१५:७३
فَأَخَذَتْهُمُतो पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhathumuٱلصَّيْحَةُएक चिंघाड़ नेl-ṣayḥatuمُشْرِقِينَसुरज तुलू होते वक़्तmush'riqīna٧٣
अंततः सूर्योदय के समय ही चिंघाड़ ने उन्हें पकड़ लिया।
१५:७४
فَجَعَلْنَاतो करदिया हमनेfajaʿalnāعَـٰلِيَهَاऊपर वाला उसकाʿāliyahāسَافِلَهَاनिचला उसकाsāfilahāوَأَمْطَرْنَاऔर बरसाए हमनेwa-amṭarnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimحِجَارَةًۭपत्थरḥijāratanمِّنofminسِجِّيلٍपकी हुई मिट्टी केsijjīlin٧٤
फिर हमने उस बस्ती के ऊपरी भाग को नीचे कर दिया और उनपर कंकड़ के पत्थर बरसाए।
१५:७५
إِنَّबेशकinnaفِىinfīذَٰلِكَउसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّلْمُتَوَسِّمِينَगहरी नज़र से देखने वालों के लिएlil'mutawassimīna٧٥
निःसंदेह इसमें सोच-विचार करने वालों1 के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
१५:७६
وَإِنَّهَاऔर बेशक वोwa-innahāلَبِسَبِيلٍۢअलबत्ता एसे रास्ते पर हैlabisabīlinمُّقِيمٍजो क़ायम हैmuqīmin٧٦
और निःसंदेह वह (बस्ती) एक सार्वजनिक1 मार्ग पर स्थित है।
१५:७७
إِنَّबेशकinnaفِىinfīذَٰلِكَउसमेंdhālikaلَـَٔايَةًۭअलबत्ता एक निशानी हैlaāyatanلِّلْمُؤْمِنِينَईमान वालों के लिएlil'mu'minīna٧٧
निःसंदेह इसमें ईमान वलों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।
१५:७८
وَإِنऔर बेशकwa-inكَانَथेkānaأَصْحَـٰبُ(the) companionsaṣḥābuٱلْأَيْكَةِऐका/जंगल वालेl-aykatiلَظَـٰلِمِينَअलबत्ता ज़ालिमlaẓālimīna٧٨
और निःसंदेह 'ऐका'1 वाले निश्चित रूप से अत्याचारी थे।
१५:७९
فَٱنتَقَمْنَاतो इन्तिक़ाम लिया हमनेfa-intaqamnāمِنْهُمْउनसेmin'humوَإِنَّهُمَاऔर बेशक वो दोनों हैंwa-innahumāلَبِإِمَامٍۢअलबत्ता रास्ते परlabi-imāminمُّبِينٍۢवाज़ेहmubīnin٧٩
तो हमने उनसे बदला लिया। और निःसंदेह वे दोनों1 (बस्तियाँ) स्पष्ट मार्ग पर हैं।
१५:८०
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadكَذَّبَझुठलायाkadhabaأَصْحَـٰبُ(the) companionsaṣḥābuٱلْحِجْرِहिज्र वालों नेl-ḥij'riٱلْمُرْسَلِينَरसूलों कोl-mur'salīna٨٠
तथा निःसंदेह ह़िज्र1 के रहने वालों ने (भी) रसूलों को झुठलाया।
१५:८१
وَءَاتَيْنَـٰهُمْऔर दीं हमने इन्हेंwaātaynāhumءَايَـٰتِنَاअपनी निशानियाँāyātināفَكَانُوا۟तो थे वोfakānūعَنْهَاउनसेʿanhāمُعْرِضِينَऐराज़ करने वालेmuʿ'riḍīna٨١
और हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दीं, तो वे उनसे मुँह फेरने वाले थे।
१५:८२
وَكَانُوا۟और थे वोwakānūيَنْحِتُونَवो तराशतेyanḥitūnaمِنَfromminaٱلْجِبَالِपहाड़ों सेl-jibāliبُيُوتًاघरों कोbuyūtanءَامِنِينَअमन से रहने वालेāminīna٨٢
और वे निर्भय होकर पर्वतों को काटकर घर बनाते थे।
१५:८३
فَأَخَذَتْهُمُतो पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhathumuٱلصَّيْحَةُचिंघाड़ नेl-ṣayḥatuمُصْبِحِينَजबकि वो सुबह करने वाले थेmuṣ'biḥīna٨٣
अंततः सुबह होते ही उन्हें चिंघाड़ ने पकड़ लिया।
१५:८४
فَمَآतो नाfamāأَغْنَىٰकाम आयाaghnāعَنْهُمउन्हेंʿanhumمَّاजो कुछmāكَانُوا۟थे वोkānūيَكْسِبُونَवो कमाई करतेyaksibūna٨٤
फिर उनके किसी काम न आया, जो वे कमाया करते थे।
१५:८५
وَمَاऔर नहींwamāخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَمَاऔर जोwamāبَيْنَهُمَآदर्मियान है इन दोनों केbaynahumāإِلَّاमगरillāبِٱلْحَقِّ ۗसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلسَّاعَةَक़यामतl-sāʿataلَـَٔاتِيَةٌۭ ۖज़रूर आनेवाली हैlaātiyatunفَٱصْفَحِपस दरगुज़र कीजिएfa-iṣ'faḥiٱلصَّفْحَदरगुज़र करनाl-ṣafḥaٱلْجَمِيلَख़ूबसूरती सेl-jamīla٨٥
और हमने आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों को सत्य के साथ पैदा किया है। और निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। अतः (ऐ नबी!) आप (उन्हें) भले तौर पर क्षमा कर दें।
१५:८६
إِنَّबेशकinnaرَبَّكَरब आपकाrabbakaهُوَवो ही हैhuwaٱلْخَلَّـٰقُख़ूब पैदा करने वालाl-khalāquٱلْعَلِيمُख़ूब जानने वालाl-ʿalīmu٨٦
निःसंदेह आपका पालनहार ही हर चीज़ को पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
१५:८७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadءَاتَيْنَـٰكَदीं हमने आपकोātaynākaسَبْعًۭاसातsabʿanمِّنَofminaٱلْمَثَانِىदोहराई जाने वाली (आयात)l-mathānīوَٱلْقُرْءَانَऔर क़ुरआनेwal-qur'ānaٱلْعَظِيمَअज़ीमl-ʿaẓīma٨٧
तथा (ऐ नबी!) हमने आपको बार-बार दोहराई जाने वाली सात आयतें और महान क़ुरआन1 प्रदान किया है।
१५:८८
لَا(Do) notlāتَمُدَّنَّगरगिज़ ना आप दराज़ कीजिएtamuddannaعَيْنَيْكَअपनी दोनो आँखेंʿaynaykaإِلَىٰtowardsilāمَاतरफ़ उसके जोmāمَتَّعْنَاफ़ायदा दिया हमनेmattaʿnāبِهِۦٓसाथ जिसकेbihiأَزْوَٰجًۭاमुख़्तलिफ़ लोगों कोazwājanمِّنْهُمْउनमें सेmin'humوَلَاऔर नाwalāتَحْزَنْआप ग़म कीजिएtaḥzanعَلَيْهِمْउन परʿalayhimوَٱخْفِضْऔर झुका लीजिएwa-ikh'fiḍجَنَاحَكَबाज़ू अपनाjanāḥakaلِلْمُؤْمِنِينَमोमिनों के लिएlil'mu'minīna٨٨
आप उसकी ओर हरगिज़ न देखें, जो सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दे रखी है और न उनपर दुखी हों और ईमान वालों के लिए अपने बाज़ू झुका दें (यानी उनके लिए विनम्र रहें)।
१५:८९
وَقُلْऔर कह दीजिएwaqulإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَنَاमैं तोanāٱلنَّذِيرُडराने वाला हूँl-nadhīruٱلْمُبِينُखुल्लम-खुल्लाl-mubīnu٨٩
और कह दें कि निःसंदेह मैं तो खुल्लम-खुल्ला डराने1 वाला हूँ।
१५:९०
كَمَآजैसा किkamāأَنزَلْنَاनाज़िल किया हमनेanzalnāعَلَىonʿalāٱلْمُقْتَسِمِينَतक़सीम करने वालों परl-muq'tasimīna٩٠
जैसे कि हमने (अल्लाह की किताब को) विभाजित करने वालों1 पर (यातना) उतारी थी।
१५:९१
ٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaجَعَلُوا۟कर दियाjaʿalūٱلْقُرْءَانَक़ुरआन कोl-qur'ānaعِضِينَटुकड़े-टुकड़ेʿiḍīna٩١
जिन्होंने क़ुरआन को खंड-खंड कर दिया।1
१५:९२
فَوَرَبِّكَपस क़सम है आपके रब कीfawarabbikaلَنَسْـَٔلَنَّهُمْअलबत्ता हम ज़रूर सवाल करेंगे उनसेlanasalannahumأَجْمَعِينَसबके सबसेajmaʿīna٩٢
अतः आपके पालनहार की क़सम! हम उन सबसे अवश्य पूछेंगे।
१५:९३
عَمَّاउस चीज़ के बारे में जोʿammāكَانُوا۟थे वोkānūيَعْمَلُونَवो अमल करतेyaʿmalūna٩٣
उसके बारे में जो वे किया करते थे।
१५:९४
فَٱصْدَعْपस आप खुल्लम-खुल्ला सुना दीजिएfa-iṣ'daʿبِمَاजिसकाbimāتُؤْمَرُआप हुक्म दिए जाते होtu'maruوَأَعْرِضْऔर ऐराज़ कीजिएwa-aʿriḍعَنِfromʿaniٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकों सेl-mush'rikīna٩٤
अतः आपको जो आदेश दिया जा रहा है, उसका ऐलान कर दें और मुश्रिकों (अनेकेश्वरवादियो) से मुँह फेर लें।
१५:९५
إِنَّاबेशक हमinnāكَفَيْنَـٰكَकाफ़ी हैं हम आपकोkafaynākaٱلْمُسْتَهْزِءِينَमज़ाक़ उड़ाने वालों सेl-mus'tahziīna٩٥
निःसंदेह हम आपकी ओर से मज़ाक उड़ाने वालों के विरुद्ध काफ़ी हैं।
१५:९६
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيَجْعَلُونَबना लेते हैंyajʿalūnaمَعَसाथmaʿaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِلَـٰهًاइलाहilāhanءَاخَرَ ۚदूसराākharaفَسَوْفَपस अनक़रीबfasawfaيَعْلَمُونَवो जान लेंगेyaʿlamūna٩٦
जो अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बनाते हैं। तो उन्हें जल्द पता चल जाएगा।
१५:९७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadنَعْلَمُहम जानते हैंnaʿlamuأَنَّكَकि बेशक आपannakaيَضِيقُतंग होता हैyaḍīquصَدْرُكَसीना आपकाṣadrukaبِمَاबवजह उसके जोbimāيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūna٩٧
और निश्चय हम जानते हैं कि उनकी बातों से आपका सीना तंग होता है।
१५:९८
فَسَبِّحْपस तस्बीह कीजिएfasabbiḥبِحَمْدِसाथ हम्द केbiḥamdiرَبِّكَअपने रब कीrabbikaوَكُنऔर हो जाइएwakunمِّنَofminaٱلسَّـٰجِدِينَसजदा करने वालों में सेl-sājidīna٩٨
अतः आप अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करें और सजदा करने वालों में शामिल हो जाएँ।
१५:९९
وَٱعْبُدْऔर इबादत कीजिएwa-uʿ'budرَبَّكَअपने रब कीrabbakaحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيَأْتِيَكَआजाए आपके पासyatiyakaٱلْيَقِينُयक़ीन (मौत)l-yaqīnu٩٩
और अपने रब की इबादत करते रहें, यहाँ तक कि आपके पास यक़ीन (मौत) आ जाए।1
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