५१

अज़-ज़ारियात

मक्की ६० आयतें पारा २६
الذاريات
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५१:१
وَٱلذَّٰرِيَـٰتِ क़सम है उन हवाओं की जो बिखेरने वाली हैं wal-dhāriyāti
क़सम है उन हवाओं की जो बिखेरने वाली हैं
ذَرْوًۭا उड़ा कर dharwan
उड़ा कर
١ (1)
(1)
क़सम है उन (हवाओं) की जो (धूल आदि) उड़ाने वाली हैं!
५१:२
فَٱلْحَـٰمِلَـٰتِ फिर उठाने वालियां हैं fal-ḥāmilāti
फिर उठाने वालियां हैं
وِقْرًۭا बोझ को wiq'ran
बोझ को
٢ (2)
(2)
फिर पानी का बड़ा भारी बोझ उठाने वाले बादलों की!
५१:३
فَٱلْجَـٰرِيَـٰتِ फिर चलने वालियां हैं fal-jāriyāti
फिर चलने वालियां हैं
يُسْرًۭا आसानी से yus'ran
आसानी से
٣ (3)
(3)
फिर आसानी से चलने वाली नावों की!
५१:४
فَٱلْمُقَسِّمَـٰتِ फिर तक़्सीम करने वालियां हैं fal-muqasimāti
फिर तक़्सीम करने वालियां हैं
أَمْرًا काम को amran
काम को
٤ (4)
(4)
फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!
५१:५
إِنَّمَا बेशक जो innamā
बेशक जो
تُوعَدُونَ तुम वादा किए जाते हो tūʿadūna
तुम वादा किए जाते हो
لَصَادِقٌۭ अलबत्ता सच्चा है laṣādiqun
अलबत्ता सच्चा है
٥ (5)
(5)
निःसंदेह जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह सत्य है।1
५१:६
وَإِنَّ और बेशक wa-inna
और बेशक
ٱلدِّينَ बदले(का दिन) l-dīna
बदले(का दिन)
لَوَٰقِعٌۭ अलबत्ता वाक़ेअ होने वाला है lawāqiʿun
अलबत्ता वाक़ेअ होने वाला है
٦ (6)
(6)
तथा निःसंदेह हिसाब अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।
५१:७
وَٱلسَّمَآءِ क़सम है आसमान की wal-samāi
क़सम है आसमान की
ذَاتِ full of dhāti
full of
ٱلْحُبُكِ रास्तों वाले l-ḥubuki
रास्तों वाले
٧ (7)
(7)
क़सम है रास्तों वाले आकाश की!
५१:८
إِنَّكُمْ बेशक तुम innakum
बेशक तुम
لَفِى (are) surely in lafī
(are) surely in
قَوْلٍۢ अलबत्ता एक बात में हो qawlin
अलबत्ता एक बात में हो
مُّخْتَلِفٍۢ मुख़्तलिफ़ mukh'talifin
मुख़्तलिफ़
٨ (8)
(8)
निःसंदेह तुम निश्चय एक विवादास्पद बात1 में पड़े हो।
५१:९
يُؤْفَكُ फेरा जाता है yu'faku
फेरा जाता है
عَنْهُ उससे ʿanhu
उससे
مَنْ जो man
जो
أُفِكَ फेरा गया ufika
फेरा गया
٩ (9)
(9)
उससे वही फेरा जाता है, जो (अल्लाह के ज्ञान में) फेर दिया गया है।
५१:१०
قُتِلَ मारे गए qutila
मारे गए
ٱلْخَرَّٰصُونَ अंदाज़े लगाने वाले l-kharāṣūna
अंदाज़े लगाने वाले
١٠ (10)
(10)
अटकल लगाने वाले मारे गए।
५१:११
ٱلَّذِينَ वो लोग जो alladhīna
वो लोग जो
هُمْ वो hum
वो
فِى (are) in
(are) in
غَمْرَةٍۢ ग़फ़्लत में ghamratin
ग़फ़्लत में
سَاهُونَ भूले हुए हैं sāhūna
भूले हुए हैं
١١ (11)
(11)
जो बड़ी ग़फ़लत में भूले हुए हैं।
५१:१२
يَسْـَٔلُونَ वो सवाल करते हैं yasalūna
वो सवाल करते हैं
أَيَّانَ कब होगा ayyāna
कब होगा
يَوْمُ दिन yawmu
दिन
ٱلدِّينِ बदले का l-dīni
बदले का
١٢ (12)
(12)
वे पूछते1 हैं कि बदले का दिन कब है?
५१:१३
يَوْمَ उस रोज़ yawma
उस रोज़
هُمْ वो hum
वो
عَلَى over ʿalā
over
ٱلنَّارِ आग पर l-nāri
आग पर
يُفْتَنُونَ वो तपाए जाऐंगे yuf'tanūna
वो तपाए जाऐंगे
١٣ (13)
(13)
जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे।
५१:१४
ذُوقُوا۟ चखो dhūqū
चखो
فِتْنَتَكُمْ अज़ाब अपना fit'natakum
अज़ाब अपना
هَـٰذَا ये है hādhā
ये है
ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो
كُنتُم थे तुम kuntum
थे तुम
بِهِۦ जिसे bihi
जिसे
تَسْتَعْجِلُونَ तुम जल्दी तलब करते tastaʿjilūna
तुम जल्दी तलब करते
١٤ (14)
(14)
अपने फ़ितने (यातना) का मज़ा चखो, यही है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।
५१:१५
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلْمُتَّقِينَ मुत्तक़ी लोग l-mutaqīna
मुत्तक़ी लोग
فِى (will be) in
(will be) in
جَنَّـٰتٍۢ बाग़ात में jannātin
बाग़ात में
وَعُيُونٍ और चश्मों में होंगे waʿuyūnin
और चश्मों में होंगे
١٥ (15)
(15)
निःसंदेह परहेज़गार लोग बाग़ों और जल स्रोतों में होंगे।
५१:१६
ءَاخِذِينَ लेने वाले होंगे ākhidhīna
लेने वाले होंगे
مَآ जो
जो
ءَاتَىٰهُمْ देगा उन्हें ātāhum
देगा उन्हें
رَبُّهُمْ ۚ रब उनका rabbuhum
रब उनका
إِنَّهُمْ बेशक वो innahum
बेशक वो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
قَبْلَ क़ब्ल qabla
क़ब्ल
ذَٰلِكَ इसके dhālika
इसके
مُحْسِنِينَ नेकोकार muḥ'sinīna
नेकोकार
١٦ (16)
(16)
जो कुछ उनका रब उन्हें देगा, उसे वे लेने वाले होंगे। निश्चय ही वे इससे पहले नेकी करने वाले थे।
५१:१७
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
قَلِيلًۭا कम ही qalīlan
कम ही
مِّنَ of mina
of
ٱلَّيْلِ रात को al-layli
रात को
مَا जो
जो
يَهْجَعُونَ वो सोते थे yahjaʿūna
वो सोते थे
١٧ (17)
(17)
वे रात के बहुत थोड़े भाग में सोते थे।1
५१:१८
وَبِٱلْأَسْحَارِ और सहरी के वक़्त wabil-asḥāri
और सहरी के वक़्त
هُمْ वो hum
वो
يَسْتَغْفِرُونَ वो असतग़फ़ार करते थे yastaghfirūna
वो असतग़फ़ार करते थे
١٨ (18)
(18)
तथा रात्रि की अंतिम घड़ियों1 में वे क्षमा याचना करते थे।
५१:१९
وَفِىٓ And in wafī
And in
أَمْوَٰلِهِمْ और उनके मालों में amwālihim
और उनके मालों में
حَقٌّۭ हक़ था ḥaqqun
हक़ था
لِّلسَّآئِلِ वास्ते सवाली lilssāili
वास्ते सवाली
وَٱلْمَحْرُومِ और महरूम के wal-maḥrūmi
और महरूम के
١٩ (19)
(19)
और उनके धनों में माँगने वाले तथा वंचित1 के लिए एक हक़ (हिस्सा) था।
५१:२०
وَفِى And in wafī
And in
ٱلْأَرْضِ और ज़मीन में l-arḍi
और ज़मीन में
ءَايَـٰتٌۭ निशानियाँ हैं āyātun
निशानियाँ हैं
لِّلْمُوقِنِينَ यक़ीन करने वालों के लिए lil'mūqinīna
यक़ीन करने वालों के लिए
٢٠ (20)
(20)
तथा धरती में विश्वास करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
५१:२१
وَفِىٓ And in wafī
And in
أَنفُسِكُمْ ۚ और तुम्हारे नफ़्सों में भी anfusikum
और तुम्हारे नफ़्सों में भी
أَفَلَا क्या भला नहीं afalā
क्या भला नहीं
تُبْصِرُونَ तुम देखते tub'ṣirūna
तुम देखते
٢١ (21)
(21)
तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। तो क्या तुम नहीं देखते?
५१:२२
وَفِى And in wafī
And in
ٱلسَّمَآءِ और आसमान में l-samāi
और आसमान में
رِزْقُكُمْ रिज़्क़ है तुम्हारा riz'qukum
रिज़्क़ है तुम्हारा
وَمَا और जो wamā
और जो
تُوعَدُونَ तुम वादा किए जाते हो tūʿadūna
तुम वादा किए जाते हो
٢٢ (22)
(22)
और आकाश ही में तुम्हारी रोज़ी1 है तथा वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है।
५१:२३
فَوَرَبِّ पस क़सम है रब की fawarabbi
पस क़सम है रब की
ٱلسَّمَآءِ आसमान l-samāi
आसमान
وَٱلْأَرْضِ और ज़मीन के wal-arḍi
और ज़मीन के
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
لَحَقٌّۭ अलबत्ता हक़ है laḥaqqun
अलबत्ता हक़ है
مِّثْلَ मानिन्द mith'la
मानिन्द
مَآ उसके जो
उसके जो
أَنَّكُمْ बेशक तुम annakum
बेशक तुम
تَنطِقُونَ तुम बोलते हो tanṭiqūna
तुम बोलते हो
٢٣ (23)
(23)
सो क़सम है आकाश एवं धरती के पालनहार की! निःसंदेह यह बात निश्चित रूप से सत्य है, इस बात की तरह कि निःसंदेह तुम बोलते हो।1
५१:२४
هَلْ क्या hal
क्या
أَتَىٰكَ आई आपके पास atāka
आई आपके पास
حَدِيثُ ख़बर ḥadīthu
ख़बर
ضَيْفِ मेहमानों की ḍayfi
मेहमानों की
إِبْرَٰهِيمَ इब्राहीम के ib'rāhīma
इब्राहीम के
ٱلْمُكْرَمِينَ जो मोअज़्ज़िज़ थे l-muk'ramīna
जो मोअज़्ज़िज़ थे
٢٤ (24)
(24)
क्या आपके पास इबराहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना आई है?
५१:२५
إِذْ जब idh
जब
دَخَلُوا۟ वो दाख़िल हुए dakhalū
वो दाख़िल हुए
عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर
فَقَالُوا۟ तो उन्होंने कहा faqālū
तो उन्होंने कहा
سَلَـٰمًۭا ۖ सलाम हो salāman
सलाम हो
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
سَلَـٰمٌۭ सलाम हो salāmun
सलाम हो
قَوْمٌۭ लोग हो qawmun
लोग हो
مُّنكَرُونَ अजनबी munkarūna
अजनबी
٢٥ (25)
(25)
जब वे उसके पास आए, तो उन्होंने सलाम कहा। उसने कहा : सलाम हो। कुछ अपरिचित लोग हैं।
५१:२६
فَرَاغَ फिर वो गया farāgha
फिर वो गया
إِلَىٰٓ to ilā
to
أَهْلِهِۦ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihi
तरफ़ अपने घर वालों के
فَجَآءَ पस वो ले आया fajāa
पस वो ले आया
بِعِجْلٍۢ एक बछड़ा (भुना हुआ) biʿij'lin
एक बछड़ा (भुना हुआ)
سَمِينٍۢ मोटा ताज़ा samīnin
मोटा ताज़ा
٢٦ (26)
(26)
फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया। फिर एक मोटा-ताज़ा (भुना हुआ) बछड़ा ले आया।
५१:२७
فَقَرَّبَهُۥٓ फिर उसने क़रीब किया उसे faqarrabahu
फिर उसने क़रीब किया उसे
إِلَيْهِمْ तरफ़ उनके ilayhim
तरफ़ उनके
قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
أَلَا क्या नहीं alā
क्या नहीं
تَأْكُلُونَ तुम खाते takulūna
तुम खाते
٢٧ (27)
(27)
फिर उसे उनके सामने रख दिया। कहा : क्या तुम नहीं खाते?
५१:२८
فَأَوْجَسَ तो उसने महसूस किया fa-awjasa
तो उसने महसूस किया
مِنْهُمْ उनसे min'hum
उनसे
خِيفَةًۭ ۖ ख़ौफ़ khīfatan
ख़ौफ़
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
لَا (Do) not
(Do) not
تَخَفْ ۖ ना तुम डरो takhaf
ना तुम डरो
وَبَشَّرُوهُ और उन्होंने ख़ुशख़बरी दी उसे wabasharūhu
और उन्होंने ख़ुशख़बरी दी उसे
بِغُلَـٰمٍ एक लड़के bighulāmin
एक लड़के
عَلِيمٍۢ बहुत इल्म वाले की ʿalīmin
बहुत इल्म वाले की
٢٨ (28)
(28)
तो उसने उनसे दिल में डर महसूस किया। उन्होंने कहा : डरो नहीं। और उन्होंने उसे एक बहुत ही ज्ञानी पुत्र की शुभ-सूचना दी।
५१:२९
فَأَقْبَلَتِ तो आगे बढ़ी fa-aqbalati
तो आगे बढ़ी
ٱمْرَأَتُهُۥ बीवी उसकी im'ra-atuhu
बीवी उसकी
فِى with
with
صَرَّةٍۢ एक चीख़ के साथ ṣarratin
एक चीख़ के साथ
فَصَكَّتْ तो उसने हाथ मारा faṣakkat
तो उसने हाथ मारा
وَجْهَهَا अपने चेहरे पर wajhahā
अपने चेहरे पर
وَقَالَتْ और वो कहने लगी waqālat
और वो कहने लगी
عَجُوزٌ बुढ़िया ʿajūzun
बुढ़िया
عَقِيمٌۭ बाँझ ʿaqīmun
बाँझ
٢٩ (29)
(29)
यह सुनकर उसकी पत्नी चिल्लाती हुई आगे आई, तो उसने अपना चेहरा पीट लिया और बोली : बूढ़ी बाँझ!
५१:३०
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
كَذَٰلِكِ इसी तरह होगा kadhāliki
इसी तरह होगा
قَالَ फ़रमाया है qāla
फ़रमाया है
رَبُّكِ ۖ तेरे रब ने rabbuki
तेरे रब ने
إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلْحَكِيمُ ख़ूब हिकमत वाला l-ḥakīmu
ख़ूब हिकमत वाला
ٱلْعَلِيمُ बहुत इल्म वाला l-ʿalīmu
बहुत इल्म वाला
٣٠ (30)
(30)
उन्होंने कहा : तेरे पालनहार ने ऐसे ही फरमाया है। निश्चय वही पूर्ण हिकमत वाला, अत्यंत ज्ञानी है।
५१:३१
۞ قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा
فَمَا तो क्या famā
तो क्या
خَطْبُكُمْ मामला है तुम्हारा khaṭbukum
मामला है तुम्हारा
أَيُّهَا O messengers ayyuhā
O messengers
ٱلْمُرْسَلُونَ ऐ भेजे जाने वालो(फ़रिश्तो) l-mur'salūna
ऐ भेजे जाने वालो(फ़रिश्तो)
٣١ (31)
(31)
उसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?
५१:३२
قَالُوٓا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
أُرْسِلْنَآ भेजे गए हम ur'sil'nā
भेजे गए हम
إِلَىٰ to ilā
to
قَوْمٍۢ तरफ़ उन लोगों के qawmin
तरफ़ उन लोगों के
مُّجْرِمِينَ जो मुजरिम हैं muj'rimīna
जो मुजरिम हैं
٣٢ (32)
(32)
उन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।
५१:३३
لِنُرْسِلَ ताकि हम भेजें linur'sila
ताकि हम भेजें
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
حِجَارَةًۭ पत्थर ḥijāratan
पत्थर
مِّن of min
of
طِينٍۢ मिट्टी के ṭīnin
मिट्टी के
٣٣ (33)
(33)
ताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।
५१:३४
مُّسَوَّمَةً निशानज़दा musawwamatan
निशानज़दा
عِندَ by your Lord ʿinda
by your Lord
رَبِّكَ तेरे रब के यहाँ से rabbika
तेरे रब के यहाँ से
لِلْمُسْرِفِينَ हद से बढ़ने वालों के लिए lil'mus'rifīna
हद से बढ़ने वालों के लिए
٣٤ (34)
(34)
जो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित1 हैं।
५१:३५
فَأَخْرَجْنَا तो निकाल लिया हमने fa-akhrajnā
तो निकाल लिया हमने
مَن जो कोई man
जो कोई
كَانَ था kāna
था
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
مِنَ of mina
of
ٱلْمُؤْمِنِينَ मोमिनों में से l-mu'minīna
मोमिनों में से
٣٥ (35)
(35)
फिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।
५१:३६
فَمَا तो ना famā
तो ना
وَجَدْنَا पाया हमने wajadnā
पाया हमने
فِيهَا उसमें fīhā
उसमें
غَيْرَ सिवाए ghayra
सिवाए
بَيْتٍۢ एक घर के baytin
एक घर के
مِّنَ of mina
of
ٱلْمُسْلِمِينَ मुसलमानों में से l-mus'limīna
मुसलमानों में से
٣٦ (36)
(36)
तो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर1 के सिवा कोई और नहीं पाया।
५१:३७
وَتَرَكْنَا और छोड़ दी हमने wataraknā
और छोड़ दी हमने
فِيهَآ उसमें fīhā
उसमें
ءَايَةًۭ एक निशानी āyatan
एक निशानी
لِّلَّذِينَ उन लोगों के लिए जो lilladhīna
उन लोगों के लिए जो
يَخَافُونَ डरते हैं yakhāfūna
डरते हैं
ٱلْعَذَابَ अज़ाब l-ʿadhāba
अज़ाब
ٱلْأَلِيمَ दर्दनाक से l-alīma
दर्दनाक से
٣٧ (37)
(37)
तथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।
५१:३८
وَفِى And in wafī
And in
مُوسَىٰٓ और मूसा में(निशानी है) mūsā
और मूसा में(निशानी है)
إِذْ जब idh
जब
أَرْسَلْنَـٰهُ भेजा हमने उसे arsalnāhu
भेजा हमने उसे
إِلَىٰ to ilā
to
فِرْعَوْنَ तरफ़ फ़िरऔन के fir'ʿawna
तरफ़ फ़िरऔन के
بِسُلْطَـٰنٍۢ साथ दलील bisul'ṭānin
साथ दलील
مُّبِينٍۢ खुली के mubīnin
खुली के
٣٨ (38)
(38)
तथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।
५१:३९
فَتَوَلَّىٰ तो उसने मुँह मोड़ लिया fatawallā
तो उसने मुँह मोड़ लिया
بِرُكْنِهِۦ बवजह अपनी क़ुव्वत के biruk'nihi
बवजह अपनी क़ुव्वत के
وَقَالَ और वो कहने लगा waqāla
और वो कहने लगा
سَـٰحِرٌ जादूगर है sāḥirun
जादूगर है
أَوْ या aw
या
مَجْنُونٌۭ मजनून majnūnun
मजनून
٣٩ (39)
(39)
तो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
५१:४०
فَأَخَذْنَـٰهُ तो पकड़ लिया हमने उसे fa-akhadhnāhu
तो पकड़ लिया हमने उसे
وَجُنُودَهُۥ और उसके लश्करों को wajunūdahu
और उसके लश्करों को
فَنَبَذْنَـٰهُمْ तो फ़ेंक दिया हमने उन्हें fanabadhnāhum
तो फ़ेंक दिया हमने उन्हें
فِى into
into
ٱلْيَمِّ समुन्दर में l-yami
समुन्दर में
وَهُوَ और वो wahuwa
और वो
مُلِيمٌۭ मलामत ज़दा था mulīmun
मलामत ज़दा था
٤٠ (40)
(40)
अंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।
५१:४१
وَفِى And in wafī
And in
عَادٍ और आद में (निशानी है) ʿādin
और आद में (निशानी है)
إِذْ जब idh
जब
أَرْسَلْنَا भेजा हमने arsalnā
भेजा हमने
عَلَيْهِمُ उन पर ʿalayhimu
उन पर
ٱلرِّيحَ हवा l-rīḥa
हवा
ٱلْعَقِيمَ बाँझ को l-ʿaqīma
बाँझ को
٤١ (41)
(41)
तथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ1 हवा भेजी दी।
५१:४२
مَا ना
ना
تَذَرُ उसने छोड़ा tadharu
उसने छोड़ा
مِن any min
any
شَىْءٍ किसी चीज़ को shayin
किसी चीज़ को
أَتَتْ वो आई atat
वो आई
عَلَيْهِ जिस पर ʿalayhi
जिस पर
إِلَّا मगर illā
मगर
جَعَلَتْهُ उसने कर दिया उसे jaʿalathu
उसने कर दिया उसे
كَٱلرَّمِيمِ बोसीदा हड्डी की तरह kal-ramīmi
बोसीदा हड्डी की तरह
٤٢ (42)
(42)
वह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।
५१:४३
وَفِى And in wafī
And in
ثَمُودَ और समूद में (निशानी है) thamūda
और समूद में (निशानी है)
إِذْ जब idh
जब
قِيلَ कहा गया qīla
कहा गया
لَهُمْ उनसे lahum
उनसे
تَمَتَّعُوا۟ तुम फ़ायदा उठा लो tamattaʿū
तुम फ़ायदा उठा लो
حَتَّىٰ for ḥattā
for
حِينٍۢ एक वक़्त तक ḥīnin
एक वक़्त तक
٤٣ (43)
(43)
तथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।
५१:४४
فَعَتَوْا۟ तो उन्होंने सरकशी की faʿataw
तो उन्होंने सरकशी की
عَنْ against ʿan
against
أَمْرِ हुक्म से amri
हुक्म से
رَبِّهِمْ अपने रब के rabbihim
अपने रब के
فَأَخَذَتْهُمُ तो पकड़ लिया उन्हें fa-akhadhathumu
तो पकड़ लिया उन्हें
ٱلصَّـٰعِقَةُ बिजली की कड़क ने l-ṣāʿiqatu
बिजली की कड़क ने
وَهُمْ इस हाल में कि वो wahum
इस हाल में कि वो
يَنظُرُونَ वो देख रहे थे yanẓurūna
वो देख रहे थे
٤٤ (44)
(44)
फिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।
५१:४५
فَمَا तो ना famā
तो ना
ٱسْتَطَـٰعُوا۟ वो इस्तिताअत रखते थे is'taṭāʿū
वो इस्तिताअत रखते थे
مِن [of] min
[of]
قِيَامٍۢ खड़े होने की qiyāmin
खड़े होने की
وَمَا और ना wamā
और ना
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
مُنتَصِرِينَ बदला लेने वाले muntaṣirīna
बदला लेने वाले
٤٥ (45)
(45)
फिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।
५१:४६
وَقَوْمَ और क़ौमे waqawma
और क़ौमे
نُوحٍۢ नूह nūḥin
नूह
مِّن before min
before
قَبْلُ ۖ इससे क़ब्ल qablu
इससे क़ब्ल
إِنَّهُمْ बेशक वो innahum
बेशक वो
كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो
قَوْمًۭا लोग qawman
लोग
فَـٰسِقِينَ फ़ासिक़ fāsiqīna
फ़ासिक़
٤٦ (46)
(46)
तथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।1
५१:४७
وَٱلسَّمَآءَ और आसमान wal-samāa
और आसमान
بَنَيْنَـٰهَا बनाया हमने उसे banaynāhā
बनाया हमने उसे
بِأَيْي۟دٍۢ साथ क़ुव्वत के bi-aydin
साथ क़ुव्वत के
وَإِنَّا और बेशक हम wa-innā
और बेशक हम
لَمُوسِعُونَ अलबत्ता वुसअत देने वाले हैं lamūsiʿūna
अलबत्ता वुसअत देने वाले हैं
٤٧ (47)
(47)
तथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।
५१:४८
وَٱلْأَرْضَ और ज़मीन को wal-arḍa
और ज़मीन को
فَرَشْنَـٰهَا बिछाया हमने उसे farashnāhā
बिछाया हमने उसे
فَنِعْمَ तो कितने अच्छे faniʿ'ma
तो कितने अच्छे
ٱلْمَـٰهِدُونَ हमवार करने वाले हैं l-māhidūna
हमवार करने वाले हैं
٤٨ (48)
(48)
तथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।
५१:४९
وَمِن And of wamin
And of
كُلِّ every kulli
every
شَىْءٍ और हर चीज़ से shayin
और हर चीज़ से
خَلَقْنَا बनाए हमने khalaqnā
बनाए हमने
زَوْجَيْنِ जोड़े zawjayni
जोड़े
لَعَلَّكُمْ ताकि तुम laʿallakum
ताकि तुम
تَذَكَّرُونَ तुम नसीहत पकड़ो tadhakkarūna
तुम नसीहत पकड़ो
٤٩ (49)
(49)
तथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।
५१:५०
فَفِرُّوٓا۟ पस दौड़ो fafirrū
पस दौड़ो
إِلَى to ilā
to
ٱللَّهِ ۖ तरफ़ अल्लाह के l-lahi
तरफ़ अल्लाह के
إِنِّى बेशक मैं innī
बेशक मैं
لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
مِّنْهُ उसकी तरफ़ से min'hu
उसकी तरफ़ से
نَذِيرٌۭ डराने वाला हूँ nadhīrun
डराने वाला हूँ
مُّبِينٌۭ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला
٥٠ (50)
(50)
अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।
५१:५१
وَلَا और ना walā
और ना
تَجْعَلُوا۟ तुम बनाओ tajʿalū
तुम बनाओ
مَعَ साथ maʿa
साथ
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
إِلَـٰهًا इलाह ilāhan
इलाह
ءَاخَرَ ۖ कोई दूसरा ākhara
कोई दूसरा
إِنِّى बेशक मैं innī
बेशक मैं
لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
مِّنْهُ उसकी तरफ़ से min'hu
उसकी तरफ़ से
نَذِيرٌۭ डराने वाला हूँ nadhīrun
डराने वाला हूँ
مُّبِينٌۭ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला
٥١ (51)
(51)
और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।
५१:५२
كَذَٰلِكَ इसी तरह kadhālika
इसी तरह
مَآ नहीं
नहीं
أَتَى आया atā
आया
ٱلَّذِينَ उनके पास जो alladhīna
उनके पास जो
مِن before them min
before them
قَبْلِهِم उनसे पहले थे qablihim
उनसे पहले थे
مِّن any min
any
رَّسُولٍ कोई रसूल rasūlin
कोई रसूल
إِلَّا मगर illā
मगर
قَالُوا۟ उन्होंने कहा qālū
उन्होंने कहा
سَاحِرٌ जादूगर है sāḥirun
जादूगर है
أَوْ या aw
या
مَجْنُونٌ मजनून majnūnun
मजनून
٥٢ (52)
(52)
इसी प्रकार, उन लोगों के पास जो इनसे पहले थे, जब भी कोई रसूल आया, तो उन्होंने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
५१:५३
أَتَوَاصَوْا۟ क्या वो एक दूसरे को वसीयत करते हैं atawāṣaw
क्या वो एक दूसरे को वसीयत करते हैं
بِهِۦ ۚ इसकी bihi
इसकी
بَلْ बल्कि bal
बल्कि
هُمْ वो hum
वो
قَوْمٌۭ लोग हैं qawmun
लोग हैं
طَاغُونَ सरकश ṭāghūna
सरकश
٥٣ (53)
(53)
क्या उन्होंने एक-दूसरे को इस (बात) की वसीयत1 की है? बल्कि वे (स्वयं ही) सरकश लोग हैं।
५१:५४
فَتَوَلَّ पस मुँह मोड़ लीजिए fatawalla
पस मुँह मोड़ लीजिए
عَنْهُمْ उनसे ʿanhum
उनसे
فَمَآ पस नहीं famā
पस नहीं
أَنتَ आप anta
आप
بِمَلُومٍۢ क़ाबिले मलामत bimalūmin
क़ाबिले मलामत
٥٤ (54)
(54)
अतः आप उनसे मुँह फेर लें। क्योंकि आपपर कोई दोष नहीं है।
५१:५५
وَذَكِّرْ और नसीहत कीजिए wadhakkir
और नसीहत कीजिए
فَإِنَّ पस बेशक fa-inna
पस बेशक
ٱلذِّكْرَىٰ नसीहत l-dhik'rā
नसीहत
تَنفَعُ वो फ़ायदा देती है tanfaʿu
वो फ़ायदा देती है
ٱلْمُؤْمِنِينَ मोमिनों को l-mu'minīna
मोमिनों को
٥٥ (55)
(55)
तथा आप नसीहत करें। क्योंकि निश्चय नसीहत ईमानवालों को लाभ देताी है।
५१:५६
وَمَا और नहीं wamā
और नहीं
خَلَقْتُ पैदा किया मैं ने khalaqtu
पैदा किया मैं ने
ٱلْجِنَّ जिन्नों l-jina
जिन्नों
وَٱلْإِنسَ और इन्सानों को wal-insa
और इन्सानों को
إِلَّا मगर illā
मगर
لِيَعْبُدُونِ इस लिए कि वो इबादत करें मेरी liyaʿbudūni
इस लिए कि वो इबादत करें मेरी
٥٦ (56)
(56)
और मैंने जिन्नों तथा मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें।
५१:५७
مَآ नहीं
नहीं
أُرِيدُ मैं चाहता urīdu
मैं चाहता
مِنْهُم उनसे min'hum
उनसे
مِّن any min
any
رِّزْقٍۢ कोई रिज़्क़ riz'qin
कोई रिज़्क़
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أُرِيدُ मैं चाहता urīdu
मैं चाहता
أَن कि an
कि
يُطْعِمُونِ वो खिलाऐ मुझे yuṭ'ʿimūni
वो खिलाऐ मुझे
٥٧ (57)
(57)
मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ।
५१:५८
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
هُوَ वो ही है huwa
वो ही है
ٱلرَّزَّاقُ ख़ूब रिज़्क़ देने वाला l-razāqu
ख़ूब रिज़्क़ देने वाला
ذُو Possessor dhū
Possessor
ٱلْقُوَّةِ क़ुव्वत वाला l-quwati
क़ुव्वत वाला
ٱلْمَتِينُ निहायत मज़बूत l-matīnu
निहायत मज़बूत
٥٨ (58)
(58)
निःसंदेह अल्लाह ही बहुत रोज़ी देनेवाला, बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत मज़बूत है।
५१:५९
فَإِنَّ तो बेशक fa-inna
तो बेशक
لِلَّذِينَ उनके लिए जिन्होंने lilladhīna
उनके लिए जिन्होंने
ظَلَمُوا۟ ज़ुल्म किया ẓalamū
ज़ुल्म किया
ذَنُوبًۭا हिस्सा है dhanūban
हिस्सा है
مِّثْلَ मानिन्द mith'la
मानिन्द
ذَنُوبِ हिस्से के dhanūbi
हिस्से के
أَصْحَـٰبِهِمْ उनके साथियों के aṣḥābihim
उनके साथियों के
فَلَا पस ना falā
पस ना
يَسْتَعْجِلُونِ वो जल्दी तलब करें मुझसे yastaʿjilūni
वो जल्दी तलब करें मुझसे
٥٩ (59)
(59)
अतः निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उनके साथियों के हिस्से की तरह (यातना का) एक हिस्सा है। सो वे मुझसे जल्दी न मचाएँ।
५१:६०
فَوَيْلٌۭ पस हलाकत है fawaylun
पस हलाकत है
لِّلَّذِينَ उनके लिए जिन्होंने lilladhīna
उनके लिए जिन्होंने
كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया
مِن from min
from
يَوْمِهِمُ उनके उस दिन से yawmihimu
उनके उस दिन से
ٱلَّذِى जिसका alladhī
जिसका
يُوعَدُونَ वो वादा दिए जाते हैं yūʿadūna
वो वादा दिए जाते हैं
٦٠ (60)
(60)
अतः इनकार करने वालों के लिए उनके उस दिन1 से बड़ा विनाश है, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।