५४

अल-क़मर

मक्की ५५ आयतें पारा २७
القمر
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५४:१
ٱقْتَرَبَتِ क़रीब आ गई iq'tarabati
क़रीब आ गई
ٱلسَّاعَةُ क़यामत l-sāʿatu
क़यामत
وَٱنشَقَّ और शक़ हो गया wa-inshaqqa
और शक़ हो गया
ٱلْقَمَرُ चाँद l-qamaru
चाँद
١ (1)
(1)
क़ियामत बहुत निकट आ गई1 और चाँद फट गया।
५४:२
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
يَرَوْا۟ वो देख लें yaraw
वो देख लें
ءَايَةًۭ कोई भी निशानी āyatan
कोई भी निशानी
يُعْرِضُوا۟ वो मुँह मोड़ जाते हैं yuʿ'riḍū
वो मुँह मोड़ जाते हैं
وَيَقُولُوا۟ और वो कहते हैं wayaqūlū
और वो कहते हैं
سِحْرٌۭ एक जादू है siḥ'run
एक जादू है
مُّسْتَمِرٌّۭ जारी mus'tamirrun
जारी
٢ (2)
(2)
और यदि वे कोई निशानी देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं कि (यह) एक जादू है जो समाप्त हो जाने वाला है।
५४:३
وَكَذَّبُوا۟ और उन्होंने झुठलाया wakadhabū
और उन्होंने झुठलाया
وَٱتَّبَعُوٓا۟ और उन्होंने पैरवी की wa-ittabaʿū
और उन्होंने पैरवी की
أَهْوَآءَهُمْ ۚ अपनी ख़्वाहिशात की ahwāahum
अपनी ख़्वाहिशात की
وَكُلُّ और हर wakullu
और हर
أَمْرٍۢ काम का amrin
काम का
مُّسْتَقِرٌّۭ वक़्त मुक़र्रर है mus'taqirrun
वक़्त मुक़र्रर है
٣ (3)
(3)
उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का पालन किया और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।
५४:४
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
جَآءَهُم आईं उनके पास jāahum
आईं उनके पास
مِّنَ of mina
of
ٱلْأَنۢبَآءِ कई ख़बरें l-anbāi
कई ख़बरें
مَا wherein
wherein
فِيهِ जिनमें fīhi
जिनमें
مُزْدَجَرٌ काफ़ी तंबीह है muz'dajarun
काफ़ी तंबीह है
٤ (4)
(4)
और निःसंदेह उनके पास ऐसी सूचनाएँ आ चुकी हैं, जिनमें डाँटडपट है।
५४:५
حِكْمَةٌۢ हिकमत है ḥik'matun
हिकमत है
بَـٰلِغَةٌۭ ۖ कामिल bālighatun
कामिल
فَمَا तो ना famā
तो ना
تُغْنِ काम आए tugh'ni
काम आए
ٱلنُّذُرُ डरावे l-nudhuru
डरावे
٥ (5)
(5)
पूर्णतया हिकमत है, फिर भी डरानेवाली चीज़ें काम नहीं आतीं।
५४:६
فَتَوَلَّ तो मुँह फेर लीजिए fatawalla
तो मुँह फेर लीजिए
عَنْهُمْ ۘ उनसे ʿanhum
उनसे
يَوْمَ जिस दिन yawma
जिस दिन
يَدْعُ पुकारेगा yadʿu
पुकारेगा
ٱلدَّاعِ पुकारने वाला l-dāʿi
पुकारने वाला
إِلَىٰ to ilā
to
شَىْءٍۢ तरफ़ एक चीज़ shayin
तरफ़ एक चीज़
نُّكُرٍ नागवार के nukurin
नागवार के
٦ (6)
(6)
अतः आप उनसे मुँह फेर लें, जिस दिन पुकारने वाला एक अप्रिय चीज़1 की ओर पुकारेगा।
५४:७
خُشَّعًا झुकी हुई होंगी khushaʿan
झुकी हुई होंगी
أَبْصَـٰرُهُمْ निगाहें उनकी abṣāruhum
निगाहें उनकी
يَخْرُجُونَ वो निकलेंगे yakhrujūna
वो निकलेंगे
مِنَ from mina
from
ٱلْأَجْدَاثِ क़ब्रों से l-ajdāthi
क़ब्रों से
كَأَنَّهُمْ गोया कि वो ka-annahum
गोया कि वो
جَرَادٌۭ टिड्डियाँ हैं jarādun
टिड्डियाँ हैं
مُّنتَشِرٌۭ फैली हुईं muntashirun
फैली हुईं
٧ (7)
(7)
उनकी आँखें झुकी होंगी। वे कब्रों से ऐसे निकलेंगे, जैसे वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हों।
५४:८
مُّهْطِعِينَ दौड़ते होंगे muh'ṭiʿīna
दौड़ते होंगे
إِلَى towards ilā
towards
ٱلدَّاعِ ۖ तरफ़ पुकारने वाले के l-dāʿi
तरफ़ पुकारने वाले के
يَقُولُ कहेंगे yaqūlu
कहेंगे
ٱلْكَـٰفِرُونَ काफ़िर l-kāfirūna
काफ़िर
هَـٰذَا ये hādhā
ये
يَوْمٌ दिन है yawmun
दिन है
عَسِرٌۭ बड़ा सख़्त ʿasirun
बड़ा सख़्त
٨ (8)
(8)
वे बुलाने वाले की ओर तेज़ी से भाग रहे होंगे। काफ़िर कहेंगे : यह बड़ा कठिन दिन है।
५४:९
۞ كَذَّبَتْ झुठलाया kadhabat
झुठलाया
قَبْلَهُمْ उनसे पहले qablahum
उनसे पहले
قَوْمُ क़ौमे qawmu
क़ौमे
نُوحٍۢ नूह ने nūḥin
नूह ने
فَكَذَّبُوا۟ तो उन्होंने झुठलाया fakadhabū
तो उन्होंने झुठलाया
عَبْدَنَا हमारे बन्दे को ʿabdanā
हमारे बन्दे को
وَقَالُوا۟ और उन्होंने कहा waqālū
और उन्होंने कहा
مَجْنُونٌۭ मजनून है majnūnun
मजनून है
وَٱزْدُجِرَ और वो झिड़क दिया गया wa-uz'dujira
और वो झिड़क दिया गया
٩ (9)
(9)
इनसे पहले नूह़ की जाति ने झुठलाया। तो उन्होंने हमारे बंदे को झुठलाया और कहा कि वह पागल है और उसे झिड़क दिया गया।
५४:१०
فَدَعَا तो उसने पुकारा fadaʿā
तो उसने पुकारा
رَبَّهُۥٓ अपने रब को rabbahu
अपने रब को
أَنِّى बेशक मैं annī
बेशक मैं
مَغْلُوبٌۭ मग़लूब हूँ maghlūbun
मग़लूब हूँ
فَٱنتَصِرْ पस तू इन्तिक़ाम ले fa-intaṣir
पस तू इन्तिक़ाम ले
١٠ (10)
(10)
तो उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह मैं विवश हूँ, अतः तू बदला ले।
५४:११
فَفَتَحْنَآ तो खोल दिए हमने fafataḥnā
तो खोल दिए हमने
أَبْوَٰبَ दरवाज़े abwāba
दरवाज़े
ٱلسَّمَآءِ आसमान के l-samāi
आसमान के
بِمَآءٍۢ साथ एक पानी bimāin
साथ एक पानी
مُّنْهَمِرٍۢ ख़ूब बरसने वाले के mun'hamirin
ख़ूब बरसने वाले के
١١ (11)
(11)
तो हमने ज़ोर से बरसने वाले पानी के साथ आकाश के द्वार खोल दिए।
५४:१२
وَفَجَّرْنَا और फाड़ दिया हमने wafajjarnā
और फाड़ दिया हमने
ٱلْأَرْضَ ज़मीन से l-arḍa
ज़मीन से
عُيُونًۭا चश्मों को ʿuyūnan
चश्मों को
فَٱلْتَقَى पस मिल गया fal-taqā
पस मिल गया
ٱلْمَآءُ पानी l-māu
पानी
عَلَىٰٓ for ʿalā
for
أَمْرٍۢ एक काम पर amrin
एक काम पर
قَدْ तहक़ीक़ qad
तहक़ीक़
قُدِرَ जो मुक़द्दर हो चुका था qudira
जो मुक़द्दर हो चुका था
١٢ (12)
(12)
तथा हमने धरती को स्रोतों के साथ फाड़ दिया, तो सारा जल एक साथ मिल गया, उस कार्य के लिए जो नियत हो चुका था।
५४:१३
وَحَمَلْنَـٰهُ और सवार किया हमने उसे waḥamalnāhu
और सवार किया हमने उसे
عَلَىٰ on ʿalā
on
ذَاتِ (ark) made of planks dhāti
(ark) made of planks
أَلْوَٰحٍۢ ऊपर तख़्तों वाली के alwāḥin
ऊपर तख़्तों वाली के
وَدُسُرٍۢ और मेख़ों वाली के wadusurin
और मेख़ों वाली के
١٣ (13)
(13)
और हमने उसे तख़्तों और कीलों वाली (नाव) पर सवार कर दिया।
५४:१४
تَجْرِى जो चल रही थी tajrī
जो चल रही थी
بِأَعْيُنِنَا हमारी निगाहों के सामने bi-aʿyuninā
हमारी निगाहों के सामने
جَزَآءًۭ बदला था jazāan
बदला था
لِّمَن उसका जिसका liman
उसका जिसका
كَانَ था kāna
था
كُفِرَ इन्कार किया गया kufira
इन्कार किया गया
١٤ (14)
(14)
जो हमारी आँखों के सामने चल रही थी, उसका बदला लेने के लिए जिसका इनकार किया गया था।
५४:१५
وَلَقَد और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
تَّرَكْنَـٰهَآ छोड़ दिया हमने उसे taraknāhā
छोड़ दिया हमने उसे
ءَايَةًۭ एक निशानी (बनाकर) āyatan
एक निशानी (बनाकर)
فَهَلْ तो क्या है fahal
तो क्या है
مِن any min
any
مُّدَّكِرٍۢ कोई नसीहत पकड़ने वाला muddakirin
कोई नसीहत पकड़ने वाला
١٥ (15)
(15)
और निःसंदेह हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ा, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:१६
فَكَيْفَ तो कैसा fakayfa
तो कैसा
كَانَ था kāna
था
عَذَابِى अज़ाब मेरा ʿadhābī
अज़ाब मेरा
وَنُذُرِ और डराना मेरा wanudhuri
और डराना मेरा
١٦ (16)
(16)
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:१७
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
يَسَّرْنَا आसान कर दिया हमने yassarnā
आसान कर दिया हमने
ٱلْقُرْءَانَ क़ुरान को l-qur'āna
क़ुरान को
لِلذِّكْرِ नसीहत के लिए lildhik'ri
नसीहत के लिए
فَهَلْ तो क्या है fahal
तो क्या है
مِن any min
any
مُّدَّكِرٍۢ कोई नसीहत पकड़ने वाला muddakirin
कोई नसीहत पकड़ने वाला
١٧ (17)
(17)
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:१८
كَذَّبَتْ झुठलाया kadhabat
झुठलाया
عَادٌۭ आद ने ʿādun
आद ने
فَكَيْفَ तो कैसा fakayfa
तो कैसा
كَانَ था kāna
था
عَذَابِى अज़ाब मेरा ʿadhābī
अज़ाब मेरा
وَنُذُرِ और डराना मेरा wanudhuri
और डराना मेरा
١٨ (18)
(18)
आद ने (भी) झुठलाया। तो कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:१९
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
أَرْسَلْنَا भेजा हमने arsalnā
भेजा हमने
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
رِيحًۭا एक हवा rīḥan
एक हवा
صَرْصَرًۭا तुंद व तेज़ को ṣarṣaran
तुंद व तेज़ को
فِى on
on
يَوْمِ एक दिन में yawmi
एक दिन में
نَحْسٍۢ (of) misfortune naḥsin
(of) misfortune
مُّسْتَمِرٍّۢ मुसलसल नहूसत वाले mus'tamirrin
मुसलसल नहूसत वाले
١٩ (19)
(19)
निःसंदहे हमने एक निरंतर अशुभ दिन में उनपर एक तेज़ ठंडी हवा भेज दी।
५४:२०
تَنزِعُ उखाड़ कर फेंक रही थी tanziʿu
उखाड़ कर फेंक रही थी
ٱلنَّاسَ लोगों को l-nāsa
लोगों को
كَأَنَّهُمْ गोया कि वो ka-annahum
गोया कि वो
أَعْجَازُ तने थे aʿjāzu
तने थे
نَخْلٍۢ खजूर के nakhlin
खजूर के
مُّنقَعِرٍۢ जड़ से उखड़े हुए munqaʿirin
जड़ से उखड़े हुए
٢٠ (20)
(20)
वह लोगों को ऐसे उखाड़ फेंकती थी, जैसे वे उखड़े हुए खजूर के तने हों।
५४:२१
فَكَيْفَ तो कैसा fakayfa
तो कैसा
كَانَ था kāna
था
عَذَابِى अज़ाब मेरा ʿadhābī
अज़ाब मेरा
وَنُذُرِ और डराना मेरा wanudhuri
और डराना मेरा
٢١ (21)
(21)
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:२२
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
يَسَّرْنَا आसान कर दिया हमने yassarnā
आसान कर दिया हमने
ٱلْقُرْءَانَ क़ुरआन को l-qur'āna
क़ुरआन को
لِلذِّكْرِ नसीहत के लिए lildhik'ri
नसीहत के लिए
فَهَلْ तो क्या है fahal
तो क्या है
مِن any min
any
مُّدَّكِرٍۢ कोई नसीहत पकड़ने वाला muddakirin
कोई नसीहत पकड़ने वाला
٢٢ (22)
(22)
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:२३
كَذَّبَتْ झुठलाया kadhabat
झुठलाया
ثَمُودُ समूद ने thamūdu
समूद ने
بِٱلنُّذُرِ डराने वालों को bil-nudhuri
डराने वालों को
٢٣ (23)
(23)
समूद1 ने डराने वालों को झुठलाया।
५४:२४
فَقَالُوٓا۟ तो उन्होंने कहा faqālū
तो उन्होंने कहा
أَبَشَرًۭا क्या एक आदमी abasharan
क्या एक आदमी
مِّنَّا हम में से minnā
हम में से
وَٰحِدًۭا अकेला wāḥidan
अकेला
نَّتَّبِعُهُۥٓ हम पैरवी करें उसकी nattabiʿuhu
हम पैरवी करें उसकी
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
إِذًۭا तब idhan
तब
لَّفِى (will be) surely in lafī
(will be) surely in
ضَلَـٰلٍۢ अलबत्ता गुमराही में होंगे ḍalālin
अलबत्ता गुमराही में होंगे
وَسُعُرٍ और जुनून में wasuʿurin
और जुनून में
٢٤ (24)
(24)
तो उन्होंने कहा : क्या हम अपने ही में से एक आदमी का अनुसरण करें? निश्चय ही हम उस समय बड़ी गुमराही और बावलेपन में होंगे।
५४:२५
أَءُلْقِىَ क्या डाला गया a-ul'qiya
क्या डाला गया
ٱلذِّكْرُ ज़िक्र /नसीहत l-dhik'ru
ज़िक्र /नसीहत
عَلَيْهِ उस पर ʿalayhi
उस पर
مِنۢ from min
from
بَيْنِنَا हमारे दर्मियान से bayninā
हमारे दर्मियान से
بَلْ बल्कि bal
बल्कि
هُوَ वो है huwa
वो है
كَذَّابٌ सख़्त झूठा kadhābun
सख़्त झूठा
أَشِرٌۭ बहुत इतराने वाला ashirun
बहुत इतराने वाला
٢٥ (25)
(25)
क्या यह उपदेश हमारे बीच में से उसी पर उतारा गया है? बल्कि वह बड़ा झूठा है, अहंकारी है।
५४:२६
سَيَعْلَمُونَ अनक़रीब वो जान लोंगे sayaʿlamūna
अनक़रीब वो जान लोंगे
غَدًۭا कल ghadan
कल
مَّنِ कौन है mani
कौन है
ٱلْكَذَّابُ सख़्त झूठा l-kadhābu
सख़्त झूठा
ٱلْأَشِرُ बहुत इतराने वाला l-ashiru
बहुत इतराने वाला
٢٦ (26)
(26)
शीघ्र ही वे कल जान लेंगे कि बहुत झूठा, अहंकारी कौन है?
५४:२७
إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम
مُرْسِلُوا۟ भेजने वाले हैं mur'silū
भेजने वाले हैं
ٱلنَّاقَةِ ऊँटनी को l-nāqati
ऊँटनी को
فِتْنَةًۭ बतौर आज़माइश fit'natan
बतौर आज़माइश
لَّهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
فَٱرْتَقِبْهُمْ पस इन्तिज़ार करो उनका fa-ir'taqib'hum
पस इन्तिज़ार करो उनका
وَٱصْطَبِرْ और सब्र करो wa-iṣ'ṭabir
और सब्र करो
٢٧ (27)
(27)
निःसंदेह हम यह ऊँटनी उनकी परीक्षा के लिए भेजने वाले हैं। अतः उनकी प्रतीक्षा करो और ख़ूब धैर्य रखो।
५४:२८
وَنَبِّئْهُمْ और आगाह कर दो उन्हें wanabbi'hum
और आगाह कर दो उन्हें
أَنَّ बेशक anna
बेशक
ٱلْمَآءَ पानी l-māa
पानी
قِسْمَةٌۢ तक़सीम करदा है qis'matun
तक़सीम करदा है
بَيْنَهُمْ ۖ दर्मियान उनके baynahum
दर्मियान उनके
كُلُّ हर एक के kullu
हर एक के
شِرْبٍۢ पानी की बारी shir'bin
पानी की बारी
مُّحْتَضَرٌۭ हाज़िर की गई है muḥ'taḍarun
हाज़िर की गई है
٢٨ (28)
(28)
और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। पीने की प्रत्येक बारी1 पर उपस्थित हुआ जाएगा।
५४:२९
فَنَادَوْا۟ तो उन्होंने पुकारा fanādaw
तो उन्होंने पुकारा
صَاحِبَهُمْ अपने साथी को ṣāḥibahum
अपने साथी को
فَتَعَاطَىٰ तो उसने पकड़ा fataʿāṭā
तो उसने पकड़ा
فَعَقَرَ फिर उसने कूँचें काट डालीं faʿaqara
फिर उसने कूँचें काट डालीं
٢٩ (29)
(29)
तो उन्होंने अपने साथी को पुकारा। सो उसने (उसे) पकड़ा और उसका वध कर दिया।
५४:३०
فَكَيْفَ फिर कैसा fakayfa
फिर कैसा
كَانَ था kāna
था
عَذَابِى अज़ाब मेरा ʿadhābī
अज़ाब मेरा
وَنُذُرِ और डराना मेरा wanudhuri
और डराना मेरा
٣٠ (30)
(30)
फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
५४:३१
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
أَرْسَلْنَا भेजी हमने arsalnā
भेजी हमने
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
صَيْحَةًۭ चिंघाड़ ṣayḥatan
चिंघाड़
وَٰحِدَةًۭ एक ही wāḥidatan
एक ही
فَكَانُوا۟ तो हो गए वो fakānū
तो हो गए वो
كَهَشِيمِ मानिन्द रौंदी हुई बाड़ के kahashīmi
मानिन्द रौंदी हुई बाड़ के
ٱلْمُحْتَظِرِ बाड़ लगाने वाले की l-muḥ'taẓiri
बाड़ लगाने वाले की
٣١ (31)
(31)
हमने उनपर एक ही चिंघाड़ भेजी, तो वे बाड़ लगाने वाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह हो गए।
५४:३२
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
يَسَّرْنَا आसान कर दिया हमने yassarnā
आसान कर दिया हमने
ٱلْقُرْءَانَ क़ुरआन को l-qur'āna
क़ुरआन को
لِلذِّكْرِ नसीहत के लिए lildhik'ri
नसीहत के लिए
فَهَلْ तो क्या है fahal
तो क्या है
مِن any min
any
مُّدَّكِرٍۢ कोई नसीहत पकड़ने वाला muddakirin
कोई नसीहत पकड़ने वाला
٣٢ (32)
(32)
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:३३
كَذَّبَتْ झुठलाया kadhabat
झुठलाया
قَوْمُ क़ौमे qawmu
क़ौमे
لُوطٍۭ लूत ने lūṭin
लूत ने
بِٱلنُّذُرِ डराने वालों को bil-nudhuri
डराने वालों को
٣٣ (33)
(33)
लूत की जाति ने डराने वालों को झुठला दिया।
५४:३४
إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम
أَرْسَلْنَا भेजी हमने arsalnā
भेजी हमने
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
حَاصِبًا पत्थरों की आँधी ḥāṣiban
पत्थरों की आँधी
إِلَّآ सिवाए illā
सिवाए
ءَالَ (the) family āla
(the) family
لُوطٍۢ ۖ आले लूत के lūṭin
आले लूत के
نَّجَّيْنَـٰهُم निजात दी हमने उन्हें najjaynāhum
निजात दी हमने उन्हें
بِسَحَرٍۢ सहर के वक़्त bisaḥarin
सहर के वक़्त
٣٤ (34)
(34)
निःसंदेह हमने उनपर पत्थर बरसाने वाली एक हवा भेजी, सिवाय लूत के घरवालों के। उन्हें हमने भोर से कुछ पहले ही बचा लिया।
५४:३५
نِّعْمَةًۭ बतौर इनआम niʿ'matan
बतौर इनआम
مِّنْ from min
from
عِندِنَا ۚ हमारे पास से ʿindinā
हमारे पास से
كَذَٰلِكَ इसी तरह kadhālika
इसी तरह
نَجْزِى हम बदला देते हैं najzī
हम बदला देते हैं
مَن उसे जो man
उसे जो
شَكَرَ शुक्र अदा करे shakara
शुक्र अदा करे
٣٥ (35)
(35)
अपनी ओर से (विशेष) अनुग्रह करते हुए। इसी प्रकार हम उसे बदला देते हैं, जो धन्यवाद करे।
५४:३६
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
أَنذَرَهُم उसने डराया उन्हें andharahum
उसने डराया उन्हें
بَطْشَتَنَا हमारी पकड़ से baṭshatanā
हमारी पकड़ से
فَتَمَارَوْا۟ तो उन्होंने शक किया fatamāraw
तो उन्होंने शक किया
بِٱلنُّذُرِ डरावों पर bil-nudhuri
डरावों पर
٣٦ (36)
(36)
और निःसंदेह उसने उन्हें हमारी पकड़ से डराया, तो उन्होंने डराने में संदेह किया।
५४:३७
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
رَٰوَدُوهُ उन्होंने फुसलाना चाहा उसे rāwadūhu
उन्होंने फुसलाना चाहा उसे
عَن they demanded from him ʿan
they demanded from him
ضَيْفِهِۦ उसके मेहमानों के बारे में ḍayfihi
उसके मेहमानों के बारे में
فَطَمَسْنَآ तो मिटा दीं हमने faṭamasnā
तो मिटा दीं हमने
أَعْيُنَهُمْ आँखें उनकी aʿyunahum
आँखें उनकी
فَذُوقُوا۟ तो चखो fadhūqū
तो चखो
عَذَابِى अज़ाब मेरा ʿadhābī
अज़ाब मेरा
وَنُذُرِ और डराना मेरा wanudhuri
और डराना मेरा
٣٧ (37)
(37)
और निःसंदेह उन्होंने उसे उसके अतिथियों से बहकाने1 का प्रयास किया, तो हमने उनकी आँखें मेट दीं। अतः मेरी यातना और मेरी चेतावनी का मज़ा चखो।
५४:३८
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
صَبَّحَهُم सुबह की उन पर ṣabbaḥahum
सुबह की उन पर
بُكْرَةً सुबह सवेरे buk'ratan
सुबह सवेरे
عَذَابٌۭ एक अज़ाब ʿadhābun
एक अज़ाब
مُّسْتَقِرٌّۭ मुसलसल ने mus'taqirrun
मुसलसल ने
٣٨ (38)
(38)
और निःसंदेह सुबह सवेरे ही उनपर एक न टलने वाली यातना आ पहुँची।
५४:३९
فَذُوقُوا۟ तो चखो fadhūqū
तो चखो
عَذَابِى अज़ाब मेरा ʿadhābī
अज़ाब मेरा
وَنُذُرِ और डराना मेरा wanudhuri
और डराना मेरा
٣٩ (39)
(39)
अतः मेरे अज़ाब और मेरे डराने का स्वाद चखो।
५४:४०
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
يَسَّرْنَا आसान कर दिया हमने yassarnā
आसान कर दिया हमने
ٱلْقُرْءَانَ क़ुरआन को l-qur'āna
क़ुरआन को
لِلذِّكْرِ नसीहत के लिए lildhik'ri
नसीहत के लिए
فَهَلْ तो क्या है fahal
तो क्या है
مِن any min
any
مُّدَّكِرٍۢ कोई नसीहत पकड़ने वाला muddakirin
कोई नसीहत पकड़ने वाला
٤٠ (40)
(40)
और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
५४:४१
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
جَآءَ आए jāa
आए
ءَالَ (to the) people āla
(to the) people
فِرْعَوْنَ आले फ़िरऔन के पास fir'ʿawna
आले फ़िरऔन के पास
ٱلنُّذُرُ डराने वाले l-nudhuru
डराने वाले
٤١ (41)
(41)
तथा निःसंदेह फ़िरऔनियों के पास डराने वाले आए।
५४:४२
كَذَّبُوا۟ उन्होंने झुठलाया kadhabū
उन्होंने झुठलाया
بِـَٔايَـٰتِنَا हमारी आयात को biāyātinā
हमारी आयात को
كُلِّهَا सब के सब kullihā
सब के सब
فَأَخَذْنَـٰهُمْ तो पकड़ लिया हमने उन्हें fa-akhadhnāhum
तो पकड़ लिया हमने उन्हें
أَخْذَ पकड़ना akhdha
पकड़ना
عَزِيزٍۢ बहुत ज़बरदस्त ʿazīzin
बहुत ज़बरदस्त
مُّقْتَدِرٍ इक़्तिदार वाले का muq'tadirin
इक़्तिदार वाले का
٤٢ (42)
(42)
उन्होंने हमारी सब निशानियों को झुठला दिया, तो हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार सब पर प्रभुत्वशाली, सबसे शक्तिशाली पकड़ता है।
५४:४३
أَكُفَّارُكُمْ क्या क़ुफ़्फ़ार तुम्हारे akuffārukum
क्या क़ुफ़्फ़ार तुम्हारे
خَيْرٌۭ बेहतर हैं khayrun
बेहतर हैं
مِّنْ than min
than
أُو۟لَـٰٓئِكُمْ उन लोगों से ulāikum
उन लोगों से
أَمْ या am
या
لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
بَرَآءَةٌۭ कोई छुटकारा पाना है barāatun
कोई छुटकारा पाना है
فِى in
in
ٱلزُّبُرِ (पहली) किताबों में l-zuburi
(पहली) किताबों में
٤٣ (43)
(43)
क्या तुम्हारे काफ़िर उन लोगों से बेहतर हैं, या तुम्हारे लिए (पहली) पुस्कतों में कोई मुक्ति लिखी हुई है?
५४:४४
أَمْ या am
या
يَقُولُونَ वो कहते हैं yaqūlūna
वो कहते हैं
نَحْنُ हम हैं naḥnu
हम हैं
جَمِيعٌۭ एक जमाअत jamīʿun
एक जमाअत
مُّنتَصِرٌۭ बदला लेने वाले muntaṣirun
बदला लेने वाले
٤٤ (44)
(44)
या वे कहते हैं कि हम एक जत्था हैं, जो बदला लेकर रहने वाले हैं?
५४:४५
سَيُهْزَمُ अनक़रीब शिकस्त खा जाएगा sayuh'zamu
अनक़रीब शिकस्त खा जाएगा
ٱلْجَمْعُ जत्था l-jamʿu
जत्था
وَيُوَلُّونَ और वो फेर लेंगे wayuwallūna
और वो फेर लेंगे
ٱلدُّبُرَ पुश्तें l-dubura
पुश्तें
٤٥ (45)
(45)
शीध्र ही यह समूह पराजित कर दिया जाएगा और ये लोग पीठ दिखाकर भागेंगे।1
५४:४६
بَلِ बल्कि bali
बल्कि
ٱلسَّاعَةُ क़यामत l-sāʿatu
क़यामत
مَوْعِدُهُمْ उनके वादे का वक़्त है mawʿiduhum
उनके वादे का वक़्त है
وَٱلسَّاعَةُ और क़यामत wal-sāʿatu
और क़यामत
أَدْهَىٰ बहुत सख़्त है adhā
बहुत सख़्त है
وَأَمَرُّ और बहुत कड़वी wa-amarru
और बहुत कड़वी
٤٦ (46)
(46)
बल्कि क़यामत ही उनके वादे का समय है और क़ियामत कहीं बड़ी विपत्ति और अधिक कड़वी है।
५४:४७
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلْمُجْرِمِينَ मुजरिम लोग l-muj'rimīna
मुजरिम लोग
فِى (are) in
(are) in
ضَلَـٰلٍۢ गुमराही में हैं ḍalālin
गुमराही में हैं
وَسُعُرٍۢ और जुनून में wasuʿurin
और जुनून में
٤٧ (47)
(47)
निश्चय अपराधी लोग बड़ी गुमराही और यातना में हैं।
५४:४८
يَوْمَ जिस दिन yawma
जिस दिन
يُسْحَبُونَ वो घसीटे जाऐंगे yus'ḥabūna
वो घसीटे जाऐंगे
فِى into
into
ٱلنَّارِ आग में l-nāri
आग में
عَلَىٰ on ʿalā
on
وُجُوهِهِمْ अपने चेहरों के बल wujūhihim
अपने चेहरों के बल
ذُوقُوا۟ चखो dhūqū
चखो
مَسَّ छूना massa
छूना
سَقَرَ दोज़ख़ का saqara
दोज़ख़ का
٤٨ (48)
(48)
जिस दिन वे आग में अपने चेहरों के बल घसीटे जाएँगे। (कहा जाएगा :) जहन्नम की यातना का मज़ा चखो।
५४:४९
إِنَّا बेशक हमने innā
बेशक हमने
كُلَّ हर kulla
हर
شَىْءٍ चीज़ को shayin
चीज़ को
خَلَقْنَـٰهُ पैदा किया हमने उसे khalaqnāhu
पैदा किया हमने उसे
بِقَدَرٍۢ साथ एक अंदाज़े के biqadarin
साथ एक अंदाज़े के
٤٩ (49)
(49)
निःसंदेह हमने प्रत्येक वस्तु को एक अनुमान के साथ पैदा किया है।
५४:५०
وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं
أَمْرُنَآ हुक्म हमारा amrunā
हुक्म हमारा
إِلَّا मगर illā
मगर
وَٰحِدَةٌۭ एक ही बार wāḥidatun
एक ही बार
كَلَمْحٍۭ मानिन्द झपकने के kalamḥin
मानिन्द झपकने के
بِٱلْبَصَرِ निगाह को bil-baṣari
निगाह को
٥٠ (50)
(50)
और हमारा आदेश तो केवल एक बार होता है, जैसे आँख की एक झपक।1
५४:५१
وَلَقَدْ और अलबत्ता तहक़ीक़ walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़
أَهْلَكْنَآ हलाक किया हमने ahlaknā
हलाक किया हमने
أَشْيَاعَكُمْ तुम्हारे गिरोहों को ashyāʿakum
तुम्हारे गिरोहों को
فَهَلْ तो क्या है fahal
तो क्या है
مِن any min
any
مُّدَّكِرٍۢ कोई नसीहत पकड़ने वाला muddakirin
कोई नसीहत पकड़ने वाला
٥١ (51)
(51)
और निःसंदेह हमने तुम्हारे जैसे कई समूहों को विनष्ट कर दिया, तो क्या है कोई नसीहत हासिल करने वाला?
५४:५२
وَكُلُّ और हर wakullu
और हर
شَىْءٍۢ चीज़ shayin
चीज़
فَعَلُوهُ उन्होंने किया जिसे faʿalūhu
उन्होंने किया जिसे
فِى (is) in
(is) in
ٱلزُّبُرِ सहीफ़ों में है l-zuburi
सहीफ़ों में है
٥٢ (52)
(52)
और उन्होंने जो कुछ भी किया वह किताबों (कर्मपत्रों) में दर्ज है।1
५४:५३
وَكُلُّ और हर wakullu
और हर
صَغِيرٍۢ छोटा ṣaghīrin
छोटा
وَكَبِيرٍۢ और बड़ा wakabīrin
और बड़ा
مُّسْتَطَرٌ लिखा हुआ है mus'taṭarun
लिखा हुआ है
٥٣ (53)
(53)
और हर छोटी और बड़ी बात लिखी हुई है।
५४:५४
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلْمُتَّقِينَ मुत्तक़ी लोग l-mutaqīna
मुत्तक़ी लोग
فِى (will be) in
(will be) in
جَنَّـٰتٍۢ बाग़ात में होंगे jannātin
बाग़ात में होंगे
وَنَهَرٍۢ और नहरों में wanaharin
और नहरों में
٥٤ (54)
(54)
निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वाले बाग़ो और नहरों में होंगे।
५४:५५
فِى In
In
مَقْعَدِ जगह में maqʿadi
जगह में
صِدْقٍ सच्चाई की ṣid'qin
सच्चाई की
عِندَ near ʿinda
near
مَلِيكٍۢ बादशाह के पास malīkin
बादशाह के पास
مُّقْتَدِرٍۭ जो इक़्तिदार वाला है muq'tadirin
जो इक़्तिदार वाला है
٥٥ (55)
(55)
सत्य की सभा में, महान बादशाह के पास, जो असीम शक्ति वाला है।