७५
अल-क़ियामा
القيامة
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ
साथ नाम
bis'mi
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
७५:१
لَآ
Nay
lā
Nay أُقْسِمُ नहीं मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
नहीं मैं क़सम खाता हूँ بِيَوْمِ दिन की biyawmi
दिन की ٱلْقِيَـٰمَةِ क़यामत के l-qiyāmati
क़यामत के ١ (1)
(1)
Nay أُقْسِمُ नहीं मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
नहीं मैं क़सम खाता हूँ بِيَوْمِ दिन की biyawmi
दिन की ٱلْقِيَـٰمَةِ क़यामत के l-qiyāmati
क़यामत के ١ (1)
(1)
मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन1 की।
७५:२
وَلَآ
और नहीं
walā
और नहीं أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ بِٱلنَّفْسِ नफ़्स की bil-nafsi
नफ़्स की ٱللَّوَّامَةِ मलामत करने वाले l-lawāmati
मलामत करने वाले ٢ (2)
(2)
और नहीं أُقْسِمُ मैं क़सम खाता हूँ uq'simu
मैं क़सम खाता हूँ بِٱلنَّفْسِ नफ़्स की bil-nafsi
नफ़्स की ٱللَّوَّامَةِ मलामत करने वाले l-lawāmati
मलामत करने वाले ٢ (2)
(2)
तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा1 करने वाली अंतरात्मा की।
७५:३
أَيَحْسَبُ
क्या समझता है
ayaḥsabu
क्या समझता है ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान أَلَّن कि हरगिज़ नहीं allan
कि हरगिज़ नहीं نَّجْمَعَ हम जमा करेंगे najmaʿa
हम जमा करेंगे عِظَامَهُۥ उसकी हड्डियाँ ʿiẓāmahu
उसकी हड्डियाँ ٣ (3)
(3)
क्या समझता है ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान أَلَّن कि हरगिज़ नहीं allan
कि हरगिज़ नहीं نَّجْمَعَ हम जमा करेंगे najmaʿa
हम जमा करेंगे عِظَامَهُۥ उसकी हड्डियाँ ʿiẓāmahu
उसकी हड्डियाँ ٣ (3)
(3)
क्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?
७५:४
بَلَىٰ
क्यों नहीं
balā
क्यों नहीं قَـٰدِرِينَ क़ादिर हैं qādirīna
क़ादिर हैं عَلَىٰٓ उस पर ʿalā
उस पर أَن कि an
कि نُّسَوِّىَ हम दुरुस्त कर दें nusawwiya
हम दुरुस्त कर दें بَنَانَهُۥ उसके पोर-पोर को banānahu
उसके पोर-पोर को ٤ (4)
(4)
क्यों नहीं قَـٰدِرِينَ क़ादिर हैं qādirīna
क़ादिर हैं عَلَىٰٓ उस पर ʿalā
उस पर أَن कि an
कि نُّسَوِّىَ हम दुरुस्त कर दें nusawwiya
हम दुरुस्त कर दें بَنَانَهُۥ उसके पोर-पोर को banānahu
उसके पोर-पोर को ٤ (4)
(4)
क्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।
७५:५
بَلْ
बल्कि
bal
बल्कि يُرِيدُ चाहता है yurīdu
चाहता है ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान لِيَفْجُرَ कि वो गुनाह करता रहे liyafjura
कि वो गुनाह करता रहे أَمَامَهُۥ अपने आगे भी amāmahu
अपने आगे भी ٥ (5)
(5)
बल्कि يُرِيدُ चाहता है yurīdu
चाहता है ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान لِيَفْجُرَ कि वो गुनाह करता रहे liyafjura
कि वो गुनाह करता रहे أَمَامَهُۥ अपने आगे भी amāmahu
अपने आगे भी ٥ (5)
(5)
बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी1 गुनाह करता रहे।
७५:६
يَسْـَٔلُ
वो पूछता है
yasalu
वो पूछता है أَيَّانَ कब है ayyāna
कब है يَوْمُ दिन yawmu
दिन ٱلْقِيَـٰمَةِ क़यामत का l-qiyāmati
क़यामत का ٦ (6)
(6)
वो पूछता है أَيَّانَ कब है ayyāna
कब है يَوْمُ दिन yawmu
दिन ٱلْقِيَـٰمَةِ क़यामत का l-qiyāmati
क़यामत का ٦ (6)
(6)
वह पूछता है कि क़ियामत का दिन कब होगा?
७५:७
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
फिर जब بَرِقَ चौंधिया जाऐंगी bariqa
चौंधिया जाऐंगी ٱلْبَصَرُ आँखें l-baṣaru
आँखें ٧ (7)
(7)
फिर जब بَرِقَ चौंधिया जाऐंगी bariqa
चौंधिया जाऐंगी ٱلْبَصَرُ आँखें l-baṣaru
आँखें ٧ (7)
(7)
तो जब आँख चौंधिया जाएगी।
७५:८
وَخَسَفَ
और बेनूर हो जाएगा
wakhasafa
और बेनूर हो जाएगा ٱلْقَمَرُ चाँद l-qamaru
चाँद ٨ (8)
(8)
और बेनूर हो जाएगा ٱلْقَمَرُ चाँद l-qamaru
चाँद ٨ (8)
(8)
और चाँद को ग्रहण लग जाएगा।
७५:९
وَجُمِعَ
और जमा कर दिए जाऐंगे
wajumiʿa
और जमा कर दिए जाऐंगे ٱلشَّمْسُ सूरज l-shamsu
सूरज وَٱلْقَمَرُ और चाँद wal-qamaru
और चाँद ٩ (9)
(9)
और जमा कर दिए जाऐंगे ٱلشَّمْسُ सूरज l-shamsu
सूरज وَٱلْقَمَرُ और चाँद wal-qamaru
और चाँद ٩ (9)
(9)
और सूर्य और चाँद एकत्र1 कर दिए जाएँगे।
७५:१०
يَقُولُ
कहेगा
yaqūlu
कहेगा ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान يَوْمَئِذٍ उस दिन yawma-idhin
उस दिन أَيْنَ कहाँ है ayna
कहाँ है ٱلْمَفَرُّ फ़रार की जगह l-mafaru
फ़रार की जगह ١٠ (10)
(10)
कहेगा ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान يَوْمَئِذٍ उस दिन yawma-idhin
उस दिन أَيْنَ कहाँ है ayna
कहाँ है ٱلْمَفَرُّ फ़रार की जगह l-mafaru
फ़रार की जगह ١٠ (10)
(10)
उस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?
७५:११
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
kallā
हरगिज़ नहीं لَا (There is) no lā
(There is) no وَزَرَ नहीं कोई जाएपनाह wazara
नहीं कोई जाएपनाह ١١ (11)
(11)
हरगिज़ नहीं لَا (There is) no lā
(There is) no وَزَرَ नहीं कोई जाएपनाह wazara
नहीं कोई जाएपनाह ١١ (11)
(11)
कदापि नहीं, शरण लेने का स्थान कोई नहीं।
७५:१२
إِلَىٰ
To
ilā
To رَبِّكَ तरफ़ आपके रब के rabbika
तरफ़ आपके रब के يَوْمَئِذٍ उस दिन yawma-idhin
उस दिन ٱلْمُسْتَقَرُّ ठिकाना है l-mus'taqaru
ठिकाना है ١٢ (12)
(12)
To رَبِّكَ तरफ़ आपके रब के rabbika
तरफ़ आपके रब के يَوْمَئِذٍ उस दिन yawma-idhin
उस दिन ٱلْمُسْتَقَرُّ ठिकाना है l-mus'taqaru
ठिकाना है ١٢ (12)
(12)
उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर लौटकर जाना है।
७५:१३
يُنَبَّؤُا۟
ख़बर दिया जाएगा
yunabba-u
ख़बर दिया जाएगा ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान يَوْمَئِذٍۭ उस दिन yawma-idhin
उस दिन بِمَا उसकी जो bimā
उसकी जो قَدَّمَ उसने आगे भेजा qaddama
उसने आगे भेजा وَأَخَّرَ और उसने पीछे छोड़ा wa-akhara
और उसने पीछे छोड़ा ١٣ (13)
(13)
ख़बर दिया जाएगा ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान يَوْمَئِذٍۭ उस दिन yawma-idhin
उस दिन بِمَا उसकी जो bimā
उसकी जो قَدَّمَ उसने आगे भेजा qaddama
उसने आगे भेजा وَأَخَّرَ और उसने पीछे छोड़ा wa-akhara
और उसने पीछे छोड़ा ١٣ (13)
(13)
उस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।1
७५:१४
بَلِ
बल्कि
bali
बल्कि ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान عَلَىٰ against ʿalā
against نَفْسِهِۦ अपने नफ़्स पर nafsihi
अपने नफ़्स पर بَصِيرَةٌۭ ख़ूब नज़र रखने वाला है baṣīratun
ख़ूब नज़र रखने वाला है ١٤ (14)
(14)
बल्कि ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान عَلَىٰ against ʿalā
against نَفْسِهِۦ अपने नफ़्स पर nafsihi
अपने नफ़्स पर بَصِيرَةٌۭ ख़ूब नज़र रखने वाला है baṣīratun
ख़ूब नज़र रखने वाला है ١٤ (14)
(14)
बल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह1 है।
७५:१५
وَلَوْ
और अगरचे
walaw
और अगरचे أَلْقَىٰ वो डाले alqā
वो डाले مَعَاذِيرَهُۥ मआज़रतें अपनी maʿādhīrahu
मआज़रतें अपनी ١٥ (15)
(15)
और अगरचे أَلْقَىٰ वो डाले alqā
वो डाले مَعَاذِيرَهُۥ मआज़रतें अपनी maʿādhīrahu
मआज़रतें अपनी ١٥ (15)
(15)
अगरचे वह अपने बहाने पेश करे।
७५:१६
لَا
Not
lā
Not تُحَرِّكْ ना आप हरकत दीजिए tuḥarrik
ना आप हरकत दीजिए بِهِۦ साथ उसके bihi
साथ उसके لِسَانَكَ अपनी ज़बान को lisānaka
अपनी ज़बान को لِتَعْجَلَ ताकि आप जल्दी (याद) करें litaʿjala
ताकि आप जल्दी (याद) करें بِهِۦٓ उसको bihi
उसको ١٦ (16)
(16)
Not تُحَرِّكْ ना आप हरकत दीजिए tuḥarrik
ना आप हरकत दीजिए بِهِۦ साथ उसके bihi
साथ उसके لِسَانَكَ अपनी ज़बान को lisānaka
अपनी ज़बान को لِتَعْجَلَ ताकि आप जल्दी (याद) करें litaʿjala
ताकि आप जल्दी (याद) करें بِهِۦٓ उसको bihi
उसको ١٦ (16)
(16)
(ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ1, ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।
७५:१७
إِنَّ
बेशक
inna
बेशक عَلَيْنَا हम पर ही है ʿalaynā
हम पर ही है جَمْعَهُۥ जमा करना उसका jamʿahu
जमा करना उसका وَقُرْءَانَهُۥ और पढ़ना उसका waqur'ānahu
और पढ़ना उसका ١٧ (17)
(17)
बेशक عَلَيْنَا हम पर ही है ʿalaynā
हम पर ही है جَمْعَهُۥ जमा करना उसका jamʿahu
जमा करना उसका وَقُرْءَانَهُۥ और पढ़ना उसका waqur'ānahu
और पढ़ना उसका ١٧ (17)
(17)
निःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।
७५:१८
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
फिर जब قَرَأْنَـٰهُ पढ़ें हम उसे qaranāhu
पढ़ें हम उसे فَٱتَّبِعْ तो पैरवी कीजिए आप fa-ittabiʿ
तो पैरवी कीजिए आप قُرْءَانَهُۥ उसके पढ़ने की qur'ānahu
उसके पढ़ने की ١٨ (18)
(18)
फिर जब قَرَأْنَـٰهُ पढ़ें हम उसे qaranāhu
पढ़ें हम उसे فَٱتَّبِعْ तो पैरवी कीजिए आप fa-ittabiʿ
तो पैरवी कीजिए आप قُرْءَانَهُۥ उसके पढ़ने की qur'ānahu
उसके पढ़ने की ١٨ (18)
(18)
अतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।
७५:१९
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर إِنَّ बेशक inna
बेशक عَلَيْنَا हमारे ही ज़िम्मे है ʿalaynā
हमारे ही ज़िम्मे है بَيَانَهُۥ उसे बयान करना bayānahu
उसे बयान करना ١٩ (19)
(19)
फिर إِنَّ बेशक inna
बेशक عَلَيْنَا हमारे ही ज़िम्मे है ʿalaynā
हमारे ही ज़िम्मे है بَيَانَهُۥ उसे बयान करना bayānahu
उसे बयान करना ١٩ (19)
(19)
फिर निःसंदेह उसे स्पषट करना हमारे ही ज़िम्मे है।
७५:२०
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
kallā
हरगिज़ नहीं بَلْ बल्कि bal
बल्कि تُحِبُّونَ तुम पसंद करते हो tuḥibbūna
तुम पसंद करते हो ٱلْعَاجِلَةَ जल्द मिलने वाली (दुनिया) को l-ʿājilata
जल्द मिलने वाली (दुनिया) को ٢٠ (20)
(20)
हरगिज़ नहीं بَلْ बल्कि bal
बल्कि تُحِبُّونَ तुम पसंद करते हो tuḥibbūna
तुम पसंद करते हो ٱلْعَاجِلَةَ जल्द मिलने वाली (दुनिया) को l-ʿājilata
जल्द मिलने वाली (दुनिया) को ٢٠ (20)
(20)
कदापि नहीं1, बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।
७५:२१
وَتَذَرُونَ
और तुम छोड़ देते हो
watadharūna
और तुम छोड़ देते हो ٱلْـَٔاخِرَةَ आख़िरत को l-ākhirata
आख़िरत को ٢١ (21)
(21)
और तुम छोड़ देते हो ٱلْـَٔاخِرَةَ आख़िरत को l-ākhirata
आख़िरत को ٢١ (21)
(21)
और बाद में आने वाली (आख़िरत) को छोड़ देते हो।
७५:२२
وُجُوهٌۭ
कुछ चेहरे
wujūhun
कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍۢ उस रोज़ yawma-idhin
उस रोज़ نَّاضِرَةٌ तरो ताज़ा होंगे nāḍiratun
तरो ताज़ा होंगे ٢٢ (22)
(22)
कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍۢ उस रोज़ yawma-idhin
उस रोज़ نَّاضِرَةٌ तरो ताज़ा होंगे nāḍiratun
तरो ताज़ा होंगे ٢٢ (22)
(22)
उस दिन कई चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।
७५:२३
إِلَىٰ
Towards
ilā
Towards رَبِّهَا अपने रब की तरफ़ rabbihā
अपने रब की तरफ़ نَاظِرَةٌۭ देखने वाले nāẓiratun
देखने वाले ٢٣ (23)
(23)
Towards رَبِّهَا अपने रब की तरफ़ rabbihā
अपने रब की तरफ़ نَاظِرَةٌۭ देखने वाले nāẓiratun
देखने वाले ٢٣ (23)
(23)
अपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।
७५:२४
وَوُجُوهٌۭ
और कुछ चेहरे
wawujūhun
और कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍۭ उस रोज़ yawma-idhin
उस रोज़ بَاسِرَةٌۭ बेरौनक़ होंगे bāsiratun
बेरौनक़ होंगे ٢٤ (24)
(24)
और कुछ चेहरे يَوْمَئِذٍۭ उस रोज़ yawma-idhin
उस रोज़ بَاسِرَةٌۭ बेरौनक़ होंगे bāsiratun
बेरौनक़ होंगे ٢٤ (24)
(24)
और कई चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।
७५:२५
تَظُنُّ
वो समझ रहे होंगे
taẓunnu
वो समझ रहे होंगे أَن कि an
कि يُفْعَلَ किया जाएगा yuf'ʿala
किया जाएगा بِهَا साथ उनके bihā
साथ उनके فَاقِرَةٌۭ कमर तोड़ देने वाला fāqiratun
कमर तोड़ देने वाला ٢٥ (25)
(25)
वो समझ रहे होंगे أَن कि an
कि يُفْعَلَ किया जाएगा yuf'ʿala
किया जाएगा بِهَا साथ उनके bihā
साथ उनके فَاقِرَةٌۭ कमर तोड़ देने वाला fāqiratun
कमर तोड़ देने वाला ٢٥ (25)
(25)
उन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।
७५:२६
كَلَّآ
हरगिज़ नहीं
kallā
हरगिज़ नहीं إِذَا जब idhā
जब بَلَغَتِ पहुँच जाएगी balaghati
पहुँच जाएगी ٱلتَّرَاقِىَ (जान) हलक़ को l-tarāqiya
(जान) हलक़ को ٢٦ (26)
(26)
हरगिज़ नहीं إِذَا जब idhā
जब بَلَغَتِ पहुँच जाएगी balaghati
पहुँच जाएगी ٱلتَّرَاقِىَ (जान) हलक़ को l-tarāqiya
(जान) हलक़ को ٢٦ (26)
(26)
कदापि नहीं1, जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।
७५:२७
وَقِيلَ
और कह दिया जाएगा
waqīla
और कह दिया जाएगा مَنْ ۜ कौन है man
कौन है رَاقٍۢ झाड़ फ़ूँक करने वाला rāqin
झाड़ फ़ूँक करने वाला ٢٧ (27)
(27)
और कह दिया जाएगा مَنْ ۜ कौन है man
कौन है رَاقٍۢ झाड़ फ़ूँक करने वाला rāqin
झाड़ फ़ूँक करने वाला ٢٧ (27)
(27)
और कहा जाएगा : कौन है झाड़-फूँक करने वाला?
७५:२८
وَظَنَّ
और वो समझ लेगा
waẓanna
और वो समझ लेगा أَنَّهُ कि बेशक वो annahu
कि बेशक वो ٱلْفِرَاقُ जुदाई का वक़्त है l-firāqu
जुदाई का वक़्त है ٢٨ (28)
(28)
और वो समझ लेगा أَنَّهُ कि बेशक वो annahu
कि बेशक वो ٱلْفِرَاقُ जुदाई का वक़्त है l-firāqu
जुदाई का वक़्त है ٢٨ (28)
(28)
और उसे विश्वास हो जाएगा कि यह (संसार से) जुदाई का समय है।
७५:२९
وَٱلْتَفَّتِ
और लिपट जाएगी
wal-tafati
और लिपट जाएगी ٱلسَّاقُ पिंडली l-sāqu
पिंडली بِٱلسَّاقِ साथ पिंडली के bil-sāqi
साथ पिंडली के ٢٩ (29)
(29)
और लिपट जाएगी ٱلسَّاقُ पिंडली l-sāqu
पिंडली بِٱلسَّاقِ साथ पिंडली के bil-sāqi
साथ पिंडली के ٢٩ (29)
(29)
और पिंडली, पिंडली1 के साथ लिपट जाएगी।
७५:३०
إِلَىٰ
To
ilā
To رَبِّكَ आपके रब ही की तरफ़ rabbika
आपके रब ही की तरफ़ يَوْمَئِذٍ उस रोज़ yawma-idhin
उस रोज़ ٱلْمَسَاقُ रवानगी है l-masāqu
रवानगी है ٣٠ (30)
(30)
To رَبِّكَ आपके रब ही की तरफ़ rabbika
आपके रब ही की तरफ़ يَوْمَئِذٍ उस रोज़ yawma-idhin
उस रोज़ ٱلْمَسَاقُ रवानगी है l-masāqu
रवानगी है ٣٠ (30)
(30)
उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर जाना है।
७५:३१
فَلَا
पस ना
falā
पस ना صَدَّقَ उसने तस्दीक़ की ṣaddaqa
उसने तस्दीक़ की وَلَا और ना walā
और ना صَلَّىٰ उसने नमाज़ पढ़ी ṣallā
उसने नमाज़ पढ़ी ٣١ (31)
(31)
पस ना صَدَّقَ उसने तस्दीक़ की ṣaddaqa
उसने तस्दीक़ की وَلَا और ना walā
और ना صَلَّىٰ उसने नमाज़ पढ़ी ṣallā
उसने नमाज़ पढ़ी ٣١ (31)
(31)
तो न उसने (सत्य को) माना और न नमाज़ पढ़ी।
७५:३२
وَلَـٰكِن
और लेकिन
walākin
और लेकिन كَذَّبَ उसने झुठलाया kadhaba
उसने झुठलाया وَتَوَلَّىٰ और उसने मुँह मोड़ लिया watawallā
और उसने मुँह मोड़ लिया ٣٢ (32)
(32)
और लेकिन كَذَّبَ उसने झुठलाया kadhaba
उसने झुठलाया وَتَوَلَّىٰ और उसने मुँह मोड़ लिया watawallā
और उसने मुँह मोड़ लिया ٣٢ (32)
(32)
लेकिन उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।
७५:३३
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर ذَهَبَ वो चला गया dhahaba
वो चला गया إِلَىٰٓ to ilā
to أَهْلِهِۦ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihi
तरफ़ अपने घर वालों के يَتَمَطَّىٰٓ अकड़ता हुआ yatamaṭṭā
अकड़ता हुआ ٣٣ (33)
(33)
फिर ذَهَبَ वो चला गया dhahaba
वो चला गया إِلَىٰٓ to ilā
to أَهْلِهِۦ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihi
तरफ़ अपने घर वालों के يَتَمَطَّىٰٓ अकड़ता हुआ yatamaṭṭā
अकड़ता हुआ ٣٣ (33)
(33)
फिर अकड़ता हुआ अपने परिजनों की ओर गया।
७५:३४
أَوْلَىٰ
अफ़सोस
awlā
अफ़सोस لَكَ तुझ पर laka
तुझ पर فَأَوْلَىٰ फिर अफ़सोस fa-awlā
फिर अफ़सोस ٣٤ (34)
(34)
अफ़सोस لَكَ तुझ पर laka
तुझ पर فَأَوْلَىٰ फिर अफ़सोस fa-awlā
फिर अफ़सोस ٣٤ (34)
(34)
तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
७५:३५
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर أَوْلَىٰ अफ़सोस awlā
अफ़सोस لَكَ तुझ पर laka
तुझ पर فَأَوْلَىٰٓ फिर अफ़सोस fa-awlā
फिर अफ़सोस ٣٥ (35)
(35)
फिर أَوْلَىٰ अफ़सोस awlā
अफ़सोस لَكَ तुझ पर laka
तुझ पर فَأَوْلَىٰٓ फिर अफ़सोस fa-awlā
फिर अफ़सोस ٣٥ (35)
(35)
फिर तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
७५:३६
أَيَحْسَبُ
क्या समझता है
ayaḥsabu
क्या समझता है ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान أَن कि an
कि يُتْرَكَ वो छोड़ दिया जाएगा yut'raka
वो छोड़ दिया जाएगा سُدًى बेकार sudan
बेकार ٣٦ (36)
(36)
क्या समझता है ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान l-insānu
इन्सान أَن कि an
कि يُتْرَكَ वो छोड़ दिया जाएगा yut'raka
वो छोड़ दिया जाएगा سُدًى बेकार sudan
बेकार ٣٦ (36)
(36)
क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?
७५:३७
أَلَمْ
क्या नहीं
alam
क्या नहीं يَكُ था वो yaku
था वो نُطْفَةًۭ एक नुत्फ़ा nuṭ'fatan
एक नुत्फ़ा مِّن of min
of مَّنِىٍّۢ मनी का maniyyin
मनी का يُمْنَىٰ जो टपकाया जाता है yum'nā
जो टपकाया जाता है ٣٧ (37)
(37)
क्या नहीं يَكُ था वो yaku
था वो نُطْفَةًۭ एक नुत्फ़ा nuṭ'fatan
एक नुत्फ़ा مِّن of min
of مَّنِىٍّۢ मनी का maniyyin
मनी का يُمْنَىٰ जो टपकाया जाता है yum'nā
जो टपकाया जाता है ٣٧ (37)
(37)
क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?
७५:३८
ثُمَّ
फिर
thumma
फिर كَانَ हो गया वो kāna
हो गया वो عَلَقَةًۭ जमा हुआ ख़ून ʿalaqatan
जमा हुआ ख़ून فَخَلَقَ फिर उसने पैदा किया fakhalaqa
फिर उसने पैदा किया فَسَوَّىٰ फिर उसने दुरुस्त कर दिया fasawwā
फिर उसने दुरुस्त कर दिया ٣٨ (38)
(38)
फिर كَانَ हो गया वो kāna
हो गया वो عَلَقَةًۭ जमा हुआ ख़ून ʿalaqatan
जमा हुआ ख़ून فَخَلَقَ फिर उसने पैदा किया fakhalaqa
फिर उसने पैदा किया فَسَوَّىٰ फिर उसने दुरुस्त कर दिया fasawwā
फिर उसने दुरुस्त कर दिया ٣٨ (38)
(38)
फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।
७५:३९
فَجَعَلَ
फिर उसने बनाया
fajaʿala
फिर उसने बनाया مِنْهُ उससे min'hu
उससे ٱلزَّوْجَيْنِ जोड़ा l-zawjayni
जोड़ा ٱلذَّكَرَ मर्द l-dhakara
मर्द وَٱلْأُنثَىٰٓ और औरत wal-unthā
और औरत ٣٩ (39)
(39)
फिर उसने बनाया مِنْهُ उससे min'hu
उससे ٱلزَّوْجَيْنِ जोड़ा l-zawjayni
जोड़ा ٱلذَّكَرَ मर्द l-dhakara
मर्द وَٱلْأُنثَىٰٓ और औरत wal-unthā
और औरत ٣٩ (39)
(39)
फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।
७५:४०
أَلَيْسَ
क्या नहीं है
alaysa
क्या नहीं है ذَٰلِكَ वो dhālika
वो بِقَـٰدِرٍ क़ादिर biqādirin
क़ादिर عَلَىٰٓ उस पर ʿalā
उस पर أَن कि an
कि يُحْـِۧىَ वो ज़िन्दा कर दे yuḥ'yiya
वो ज़िन्दा कर दे ٱلْمَوْتَىٰ मुर्दों को l-mawtā
मुर्दों को ٤٠ (40)
(40)
क्या नहीं है ذَٰلِكَ वो dhālika
वो بِقَـٰدِرٍ क़ादिर biqādirin
क़ादिर عَلَىٰٓ उस पर ʿalā
उस पर أَن कि an
कि يُحْـِۧىَ वो ज़िन्दा कर दे yuḥ'yiya
वो ज़िन्दा कर दे ٱلْمَوْتَىٰ मुर्दों को l-mawtā
मुर्दों को ٤٠ (40)
(40)
क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?