२१

अल-अम्बिया

मक्की ११२ आयतें पारा १७
الأنبياء

सूरह अल-अम्बिया (الأنبياء) पवित्र क़ुरआन का २१ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ११२ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
२१:१
ٱقْتَرَبَक़रीब आ गयाiq'tarabaلِلنَّاسِलोगों के लिएlilnnāsiحِسَابُهُمْहिसाब उनकाḥisābuhumوَهُمْऔर वोwahumفِى(are) inغَفْلَةٍۢग़फ़्लत मेंghaflatinمُّعْرِضُونَऐराज़ करने वाले हैंmuʿ'riḍūna١
लोगों के लिए उनका हिसाब1 बहुत निकट आ गया और वे बड़ी लापरवाही में मुँह फेरने वाले हैं।
२१:२
مَاनहींيَأْتِيهِمआता उनके पासyatīhimمِّنofminذِكْرٍۢकोई ज़िक्रdhik'rinمِّنfromminرَّبِّهِمउनके रब की तरफ़ सेrabbihimمُّحْدَثٍनयाmuḥ'dathinإِلَّاमगरillāٱسْتَمَعُوهُवो सुनते हैं उसेis'tamaʿūhuوَهُمْजब कि वोwahumيَلْعَبُونَवो खैल रहे होते हैंyalʿabūna٢
उनके पालनहार की ओर से उनके पास कोई नया उपदेश1 नहीं आता, परंतु वे उसे हँसी-खेल करते हुए बड़ी कठिनाई से सुनते हैं।
२१:३
لَاهِيَةًۭग़ाफ़िल हैंlāhiyatanقُلُوبُهُمْ ۗदिल उनकेqulūbuhumوَأَسَرُّوا۟और चुपके-चुपके कीwa-asarrūٱلنَّجْوَىसरगोशीl-najwāٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوا۟ज़ुल्म कियाẓalamūهَلْनहींhalهَـٰذَآयेhādhāإِلَّاमगरillāبَشَرٌۭएक इन्सानbasharunمِّثْلُكُمْ ۖतुम्हारे जैसाmith'lukumأَفَتَأْتُونَक्या फिर तुम आते होafatatūnaٱلسِّحْرَजादू कोl-siḥ'raوَأَنتُمْजब कि तुमwa-antumتُبْصِرُونَतुम देखते होtub'ṣirūna٣
उनके दिल पूरी तरह ग़ाफ़िल होते हैं। और उन लोगों ने चुपके-चुपके कानाफूसी की जिन्होंने अत्याचार किया था, कि यह (नबी) तो तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है, तो क्या तुम जादू के पास आते हो, हालाँकि तुम देख रहे हो?
२१:४
قَالَकहाqālaرَبِّىरब मेराrabbīيَعْلَمُजानता हैyaʿlamuٱلْقَوْلَहर बात कोl-qawlaفِىinٱلسَّمَآءِआसमान मेंl-samāiوَٱلْأَرْضِ ۖऔर ज़मीन मेंwal-arḍiوَهُوَऔर वोwahuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वाला हैl-samīʿuٱلْعَلِيمُख़ूब जानने वाला हैl-ʿalīmu٤
उस (रसूल) ने कहा : मेरा पालनहार आकाश और धरती की हर बात को जानता है और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
२१:५
بَلْबल्किbalقَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūأَضْغَـٰثُपरेशानaḍghāthuأَحْلَـٰمٍۭख़्वाब हैंaḥlāminبَلِबल्किbaliٱفْتَرَىٰهُउसने गढ़ लिया है उसेif'tarāhuبَلْबल्किbalهُوَवोhuwaشَاعِرٌۭशायर हैshāʿirunفَلْيَأْتِنَاपस चाहिए कि लाए हमारे पासfalyatināبِـَٔايَةٍۢकोई निशानीbiāyatinكَمَآजैसा किkamāأُرْسِلَभेजे गएur'silaٱلْأَوَّلُونَपहले (रसूल)l-awalūna٥
बल्कि उन्होंने (क़ुरआन के बारे में) कहा : यह1 सपनों की उलझी हुई बातें हैं, बल्कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है, बल्कि वह कवि है! अतः उसे चाहिए कि हमारे पास कोई निशानी लाए, जैसे पहले के रसूल (निशानियों के साथ) भेजे गए थे।
२१:६
مَآनहींءَامَنَتْईमान लाई थीāmanatقَبْلَهُمउनसे पहलेqablahumمِّنanyminقَرْيَةٍकोई बस्तीqaryatinأَهْلَكْنَـٰهَآ ۖहलाक कर दिया हमने जिसेahlaknāhāأَفَهُمْक्या फिर वोafahumيُؤْمِنُونَवो ईमान लाऐंगेyu'minūna٦
इनसे पहले कोई बस्ती, जिसे हमने विनष्ट किया, ईमान1 नहीं लाई। तो क्या ये ईमान ले आएँगे?
२१:७
وَمَآऔर नहींwamāأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāقَبْلَكَआपसे पहलेqablakaإِلَّاमगरillāرِجَالًۭاमर्दों कोrijālanنُّوحِىٓहम वही करते थेnūḥīإِلَيْهِمْ ۖतरफ़ उनकेilayhimفَسْـَٔلُوٓا۟पस पूछ लोfasalūأَهْلَ(the) peopleahlaٱلذِّكْرِअहले ज़िक्र सेl-dhik'riإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumلَا(do) notتَعْلَمُونَनहीं तुम जानतेtaʿlamūna٧
और (ऐ नबी!) हमने आपसे पहले पुरुषों ही को रसूल बनाकर भेजे, जिनकी ओर हम वह़्य (प्रकाशना) करते थे। अतः तुम ज़िक्र (किताब) वालों1 से पूछ लो, यदि तुम (स्वयं) नहीं जानते हो।
२१:८
وَمَاऔर नहींwamāجَعَلْنَـٰهُمْबनाए हमने उनकेjaʿalnāhumجَسَدًۭاऐसे जिस्मjasadanلَّاnotيَأْكُلُونَकि ना वो खाते होंyakulūnaٱلطَّعَامَखानाl-ṭaʿāmaوَمَاऔर नाwamāكَانُوا۟थे वोkānūخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वालेkhālidīna٨
तथा हमने उन्हें ऐसे शरीर (वाले) नहीं बनाए थे, जो खाना न खाते हों और न वे हमेशा रहने वाले थे।1
२१:९
ثُمَّफिरthummaصَدَقْنَـٰهُمُसच्चा किया हमने उसेṣadaqnāhumuٱلْوَعْدَवादाl-waʿdaفَأَنجَيْنَـٰهُمْपस निजात दी हमने उन्हेंfa-anjaynāhumوَمَنऔर जिसेwamanنَّشَآءُहमने चाहाnashāuوَأَهْلَكْنَاऔर हलाक कर दिया हमनेwa-ahlaknāٱلْمُسْرِفِينَहद से बढ़ने वालों कोl-mus'rifīna٩
फिर हमने उनसे किए हुए वादे को सच कर दिखाया। तो हमने उन्हें बचा लिया और उसे भी जिसे हम चाहते थे। और हमने हद से बढ़ने वालों को नष्ट कर दिया।
२१:१०
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadأَنزَلْنَآनाज़िल की हमनेanzalnāإِلَيْكُمْतरफ़ तुम्हारेilaykumكِتَـٰبًۭاएक किताबkitābanفِيهِजिसमेंfīhiذِكْرُكُمْ ۖज़िक्र है तुम्हाराdhik'rukumأَفَلَاक्या फिर नहींafalāتَعْقِلُونَतुम अक़्ल से काम लेतेtaʿqilūna١٠
निःसंदेह हमने तुम्हारी ओर एक किताब (क़ुरआन) उतारी है, जिसमें तुम्हारा सम्मान है। तो क्या तुम नहीं समझते?
२१:११
وَكَمْऔर कितनी हीwakamقَصَمْنَاतोड़ कर रखदीं हमनेqaṣamnāمِنofminقَرْيَةٍۢबस्तियाँqaryatinكَانَتْथीं वोkānatظَالِمَةًۭज़ालिमẓālimatanوَأَنشَأْنَاऔर उठाया हमनेwa-anshanāبَعْدَهَاबाद इसकेbaʿdahāقَوْمًاक़ौमों कोqawmanءَاخَرِينَदूसरीākharīna١١
और हमने बहुत-सी बस्तियों को तोड़कर रख दिया, जो अत्याचारी थीं और हमने उनके बाद दूसरी जाति को पैदा कर दिया।
२१:१२
فَلَمَّآतो जबfalammāأَحَسُّوا۟उन्होंने महसूस कियाaḥassūبَأْسَنَآअज़ाब हमाराbasanāإِذَاअचानकidhāهُمवोhumمِّنْهَاउनसेmin'hāيَرْكُضُونَवो भागने लगेyarkuḍūna١٢
फिर जब उन्होंने हमारे अज़ाब को देख लिया, तो वे तुरंत वहाँ से भागने लगे।
२१:१३
لَاFlee notتَرْكُضُوا۟ना तुम भागोtarkuḍūوَٱرْجِعُوٓا۟और लौट आओwa-ir'jiʿūإِلَىٰtoilāمَآतरफ़ उसके जोأُتْرِفْتُمْऐश दिए गए तुमut'rif'tumفِيهِजिसमेंfīhiوَمَسَـٰكِنِكُمْऔर अपने घरों केwamasākinikumلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتُسْـَٔلُونَतुम पूछे जाओtus'alūna١٣
(तो उनसे उपहास के तौर पर कहा जाएगा :) भागो नहीं, और वापस चलो उन (जगहों) की ओर जिनमें तुम्हें खुशहाली दी गई थी और अपने घरों की ओर, ताकि तुमसे पूछा जाए।1
२१:१४
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰوَيْلَنَآहाय अफ़्सोस हम परyāwaylanāإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हमkunnāظَـٰلِمِينَज़ालिमẓālimīna١٤
उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम अत्याचारी थे।
२१:१५
فَمَاThen notfamāزَالَتतो मुसलसल रहीzālatتِّلْكَयहीtil'kaدَعْوَىٰهُمْपुकार उनकीdaʿwāhumحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāجَعَلْنَـٰهُمْबना दिया हमने उन्हेंjaʿalnāhumحَصِيدًاजड़ से कटी हुई खेतीḥaṣīdanخَـٰمِدِينَबुझी हुईkhāmidīna١٥
तो उनकी पुकार हमेशा यही रही, यहाँ तक कि हमने उन्हें कटे हुए, बुझे हुए बना दिया।
२१:१६
وَمَاऔर नहींwamāخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلسَّمَآءَआसमानl-samāaوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَمَاऔर जोwamāبَيْنَهُمَاइन दोनों के दर्मियान हैbaynahumāلَـٰعِبِينَखेलते हुएlāʿibīna١٦
तथा हमने आकाश और धरती को और जो कुछ उन दोनों के बीच है, खेलते हुए नहीं बनाया।
२१:१७
لَوْअगरlawأَرَدْنَآचाहते हमaradnāأَنकिanنَّتَّخِذَहम बना लेंnattakhidhaلَهْوًۭاकोई खेलlahwanلَّٱتَّخَذْنَـٰهُयक़ीनन बना लेते हम उसेla-ittakhadhnāhuمِنfromminلَّدُنَّآअपने पास सेladunnāإِنअगरinكُنَّاहोते हमkunnāفَـٰعِلِينَकरने वालेfāʿilīna١٧
यदि हम कोई खेल बनाना चाहते, तो निश्चय उसे अपने पास से बना1 लेते। (परंतु) हम ऐसा करने वाले नहीं हैं।
२१:१८
بَلْबल्किbalنَقْذِفُहम फेंकते हैंnaqdhifuبِٱلْحَقِّहक़ कोbil-ḥaqiعَلَىagainstʿalāٱلْبَـٰطِلِबातिल परl-bāṭiliفَيَدْمَغُهُۥपस वो सर तोड़ देता है उसकाfayadmaghuhuفَإِذَاतो यकायकfa-idhāهُوَवोhuwaزَاهِقٌۭ ۚज़ाइल हो जाता हैzāhiqunوَلَكُمُऔर तुम्हारे लिएwalakumuٱلْوَيْلُहलाकत हैl-wayluمِمَّاउससे जोmimmāتَصِفُونَतुम बयान करते होtaṣifūna١٨
बल्कि हम सत्य को असत्य पर फेंक मारते हैं, तो वह उसका सिर कुचल देता है, तो एकाएक वह मिटने वाला होता है। और तुम्हारे लिए उसके कारण विनाश है, जो तुम बयान करते हो।
२१:१९
وَلَهُۥऔर उसी के लिए हैwalahuمَنजोmanفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों मेंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۚऔर ज़मीन में हैwal-arḍiوَمَنْऔर जोwamanعِندَهُۥउसके पास हैंʿindahuلَاnotيَسْتَكْبِرُونَनहीं वो तकब्बुर करतेyastakbirūnaعَنْtoʿanعِبَادَتِهِۦउसकी इबादत सेʿibādatihiوَلَاऔर नाwalāيَسْتَحْسِرُونَवो थकते हैंyastaḥsirūna١٩
और उसी का है, जो कोई आकाशों तथा धरती में है। और जो (फ़रिश्ते) उसके पास हैं, वे न उसकी इबादत से अभिमान करते हैं और न ज़रा भर थकते हैं।
२१:२०
يُسَبِّحُونَवो तस्बीह करते हैंyusabbiḥūnaٱلَّيْلَरातal-laylaوَٱلنَّهَارَऔर दिनwal-nahāraلَاnotيَفْتُرُونَनहीं वो दम लेतेyafturūna٢٠
वे रात-दिन (अल्लाह की) पवित्रता का गान करते हैं, दम नहीं लेते।
२१:२१
أَمِक्याamiٱتَّخَذُوٓا۟उन्होंने बना लिए हैंittakhadhūءَالِهَةًۭकुछ इलाहālihatanمِّنَfromminaٱلْأَرْضِज़मीन सेl-arḍiهُمْकि वोhumيُنشِرُونَवो ज़िन्दा करेंगेyunshirūna٢١
क्या उन्होंने धरती से ऐसे पूज्य बना लिए हैं, जो मरे हुए लोगों को ज़िंदा कर सकते हैं?
२१:२२
لَوْअगरlawكَانَहोतेkānaفِيهِمَآउन दोनों मेंfīhimāءَالِهَةٌकुछ इलाहālihatunإِلَّاसिवाएillāٱللَّهُअल्लाह केl-lahuلَفَسَدَتَا ۚअलबत्ता वो दोनों बिगड़ जातेlafasadatāفَسُبْحَـٰنَपस पाक हैfasub'ḥānaٱللَّهِअल्लाहl-lahiرَبِّजो रब हैrabbiٱلْعَرْشِअर्श काl-ʿarshiعَمَّاउससे जोʿammāيَصِفُونَवो बयान करते हैंyaṣifūna٢٢
अगर उन दोनों में अल्लाह के सिवा कोई और पूज्य होते, तो वे दोनों अवश्य बिगड़1 जाते। अतः पवित्र है अल्लाह जो अर्श (सिंहासन) का मालिक है, उन चीज़ों से जो वे बयान करते हैं।
२१:२३
لَاNotيُسْـَٔلُनहीं वो पूछा जाताyus'aluعَمَّاउसके बारे में जोʿammāيَفْعَلُवो करता हैyafʿaluوَهُمْऔर वोwahumيُسْـَٔلُونَवो पूछे जाऐंगेyus'alūna٢٣
वह जो कुछ करता है, उससे (उसके बारे में) नहीं पूछा जाता, और उनसे पूछा जाता है।
२१:२४
أَمِयाamiٱتَّخَذُوا۟उन्होंने बना लिएittakhadhūمِنbesides Himminدُونِهِۦٓउसके सिवाdūnihiءَالِهَةًۭ ۖकुछ इलाहālihatanقُلْकह दीजिएqulهَاتُوا۟लाओhātūبُرْهَـٰنَكُمْ ۖदलील अपनीbur'hānakumهَـٰذَاयेhādhāذِكْرُज़िक्र हैdhik'ruمَنउनका जोmanمَّعِىَमेरे साथ हैंmaʿiyaوَذِكْرُऔर ज़िक्र हैwadhik'ruمَنउनका भी( जो)manقَبْلِى ۗमुझसे पहले थेqablīبَلْबल्किbalأَكْثَرُهُمْअकसर उनकेaktharuhumلَا(do) notيَعْلَمُونَनही वो जानतेyaʿlamūnaٱلْحَقَّ ۖहक़ कोl-ḥaqaفَهُمतो वोfahumمُّعْرِضُونَऐराज़ करने वाले हैंmuʿ'riḍūna٢٤
क्या उन्होंने उसके सिवा और भी पूज्य बना लिए हैं? (ऐ नबी!) आप कह दें कि अपना प्रमाण लाओ। यह मेरे साथ वालों की किताब (क़ुरआन) है, और ये मुझसे पहले के लोगों पर उतरने वाली किताबें1 हैं, (इनमें तुम्हारे लिए कोई प्रमाण नहीं है)। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग सत्य का ज्ञान नहीं रखते। इसी कारण, वे मुँह फेरने वाले हैं।
२१:२५
وَمَآऔर नहींwamāأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāمِنbefore youminقَبْلِكَआपसे पहलेqablikaمِنanyminرَّسُولٍकोई रसूलrasūlinإِلَّاमगरillāنُوحِىٓहमने वही कीnūḥīإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiأَنَّهُۥकि बैशक वोannahuلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّآमगरillāأَنَا۠मैं हीanāفَٱعْبُدُونِपस इबादत करो मेरीfa-uʿ'budūni٢٥
और हमने आपसे पहले जो भी रसूल भेजा, उसकी ओर यही वह़्य (प्रकाशना) करते थे कि मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं है। अतः मेरी ही इबादत करो।
२१:२६
وَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūٱتَّخَذَबना ली हैittakhadhaٱلرَّحْمَـٰنُरहमान नेl-raḥmānuوَلَدًۭا ۗऔलादwaladanسُبْحَـٰنَهُۥ ۚपाक है वोsub'ḥānahuبَلْबल्किbalعِبَادٌۭवो बन्दे हैंʿibādunمُّكْرَمُونَजो इज़्ज़त दिए गए हैंmuk'ramūna٢٦
और उन (मुश्रिकों) ने कहा कि 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) ने कोई संतान बना रखी है। वह (इससे) पवित्र है। बल्कि वे (फ़रिश्ते)1 सम्मानित बंदे हैं।
२१:२७
لَاNotيَسْبِقُونَهُۥनहीं वो आगे बढ़ते उससेyasbiqūnahuبِٱلْقَوْلِबात मेंbil-qawliوَهُمऔर वोwahumبِأَمْرِهِۦउसके हुक्म पर हीbi-amrihiيَعْمَلُونَवो अमल करते हैंyaʿmalūna٢٧
वे बात करने में उससे पहल नहीं करते और वे उसके आदेशानुसार ही काम करते हैं।
२१:२८
يَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजो कुछبَيْنَ(is) before thembaynaأَيْدِيهِمْउनके आगे हैaydīhimوَمَاऔर जो कुछwamāخَلْفَهُمْउनके पीछे हैkhalfahumوَلَاऔर नहींwalāيَشْفَعُونَवो शफ़ाअत करेंगेyashfaʿūnaإِلَّاमगरillāلِمَنِजिसके लिएlimaniٱرْتَضَىٰवो राज़ी होजाएir'taḍāوَهُمऔर वोwahumمِّنْfromminخَشْيَتِهِۦउसकी ख़शियत सेkhashyatihiمُشْفِقُونَडरने वाले हैंmush'fiqūna٢٨
वह जानता है, जो उनके सामने है और जो उनके पीछे है। और वे सिफ़ारिश नहीं करते, परंतु उसी के लिए जिसे वह पसंद1 करे। तथा वे उसी के भय से डरने वाले हैं।
२१:२९
۞ وَمَنऔर जो कोईwamanيَقُلْकहेyaqulمِنْهُمْउनमें सेmin'humإِنِّىٓबेशक मैंinnīإِلَـٰهٌۭइलाह हूँilāhunمِّنbesides Himminدُونِهِۦउसके सिवाdūnihiفَذَٰلِكَतो एसी सूरत मेंfadhālikaنَجْزِيهِहम बदले में देंगे उसेnajzīhiجَهَنَّمَ ۚजहन्नमjahannamaكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaنَجْزِىहम बदला देते हैंnajzīٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों कोl-ẓālimīna٢٩
और उनमें से जो यह कहे कि मैं अल्लाह के सिवा पूज्य हूँ, तो यही है जिसे हम जहन्नम की सज़ा देंगे। ऐसे ही हम ज़ालिमों को सज़ा देते हैं।
२१:३०
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَرَदेखाyaraٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوٓا۟कुफ़्र कियाkafarūأَنَّकि बेशकannaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीनwal-arḍaكَانَتَاथे वो दोनोंkānatāرَتْقًۭاमिले हुएratqanفَفَتَقْنَـٰهُمَا ۖतो जुदा-जुदा कर दिया हमने उन दोनों कोfafataqnāhumāوَجَعَلْنَاऔर बनाई हमनेwajaʿalnāمِنَfromminaٱلْمَآءِपानी सेl-māiكُلَّeverykullaشَىْءٍहर चीज़shayinحَىٍّ ۖज़िन्दाḥayyinأَفَلَاक्या फिर नहींafalāيُؤْمِنُونَवो ईमान लातेyu'minūna٣٠
क्या जिन लोगों ने कुफ़्र किया यह नहीं देखा कि आकाश और धरती दोनों मिले हुए1 थे, फिर हमने दोनों को अलग-अलग कर दिया, तथा हमने पानी से हर जीवित चीज़ को बनाया? तो क्या ये लोग ईमान नहीं लाते?
२१:३१
وَجَعَلْنَاऔर बनाया हमनेwajaʿalnāفِىinٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiرَوَٰسِىَपहाड़ों कोrawāsiyaأَنकिanتَمِيدَवो ढुलक (ना) जाएtamīdaبِهِمْसाथ उनकेbihimوَجَعَلْنَاऔर बनाए हमनेwajaʿalnāفِيهَاउसमेंfīhāفِجَاجًۭاकुशादाfijājanسُبُلًۭاरास्तेsubulanلَّعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيَهْتَدُونَवो राह पा जाऐंyahtadūna٣١
और हमने धरती में पर्वत बना दिए, ताकि वह उनके साथ हिलने-डुलने1 न लगे और उसमें चौड़े रास्ते बना दिए, ताकि वे मार्ग पाएँ।
२१:३२
وَجَعَلْنَاऔर बनाया हमनेwajaʿalnāٱلسَّمَآءَआसमान कोl-samāaسَقْفًۭاछतsaqfanمَّحْفُوظًۭا ۖमहफ़ूज़maḥfūẓanوَهُمْऔर वोwahumعَنْfromʿanءَايَـٰتِهَاउसकी निशानियों सेāyātihāمُعْرِضُونَमूँह मोड़ने वाले हैंmuʿ'riḍūna٣٢
और हमने आकाश को एक संरक्षित छत बनाया। और वे उसकी निशानियों से मुँह फेरने वाले हैं।
२१:३३
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजिसनेalladhīخَلَقَबनायाkhalaqaٱلَّيْلَरातal-laylaوَٱلنَّهَارَऔर दिन कोwal-nahāraوَٱلشَّمْسَऔर सूरजwal-shamsaوَٱلْقَمَرَ ۖऔर चाँद कोwal-qamaraكُلٌّۭसब के सबkullunفِىinفَلَكٍۢमदार में (अपने)falakinيَسْبَحُونَवो तैरते हैंyasbaḥūna٣٣
और वही है, जिसने रात और दिन, तथा सूरज और चाँद बनाए। सब एक-एक कक्षा में तैर रहे हैं।1
२१:३४
وَمَاऔर नहींwamāجَعَلْنَاबनाई हमनेjaʿalnāلِبَشَرٍۢकिसी इन्सान के लिएlibasharinمِّنbefore youminقَبْلِكَआपसे पहलेqablikaٱلْخُلْدَ ۖहमेशगीl-khul'daأَفَإِي۟نक्या फिर अगरafa-inمِّتَّआप फ़ौत होगएmittaفَهُمُतो वोfahumuٱلْخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वालेl-khālidūna٣٤
और (ऐ नबी!) हमने आपसे पहले किसी मनुष्य के लिए अमरता नहीं रखी। फिर क्या अगर आप मर1 गए, तो ये सदैव रहने वाले हैं?
२१:३५
كُلُّEverykulluنَفْسٍۢहर नफ़्सnafsinذَآئِقَةُचखने वाला हैdhāiqatuٱلْمَوْتِ ۗमौत कोl-mawtiوَنَبْلُوكُمऔर हम मुब्तिला करते हैं तुम्हेंwanablūkumبِٱلشَّرِّसाथ बुराईbil-shariوَٱلْخَيْرِऔर भलाई केwal-khayriفِتْنَةًۭ ۖआज़माने के लिएfit'natanوَإِلَيْنَاऔर हमारी ही तरफ़wa-ilaynāتُرْجَعُونَतुम लौटाए जाओगेtur'jaʿūna٣٥
हर जीव को मौत का स्वाद चखना है। और हम अच्छी तथा बुरी परिस्थितियों से तुम्हारी परीक्षा करते हैं तथा तुम हमारी ही ओर लौटाए जाओगे।
२१:३६
وَإِذَاऔर जबwa-idhāرَءَاكَदेखते हैं आपकोraākaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوٓا۟कुफ़्र कियाkafarūإِنनहींinيَتَّخِذُونَكَवो बनाते आपकाyattakhidhūnakaإِلَّاमगरillāهُزُوًاमज़ाक़huzuwanأَهَـٰذَاक्या ये हैahādhāٱلَّذِىवो जोalladhīيَذْكُرُज़िक्र करता हैyadhkuruءَالِهَتَكُمْतुम्हारे इलाहों काālihatakumوَهُمहालाँकि वोwahumبِذِكْرِज़िक्र सेbidhik'riٱلرَّحْمَـٰنِरहमान केl-raḥmāniهُمْवोhumكَـٰفِرُونَइन्कारी हैंkāfirūna٣٦
तथा जब काफ़िर आपको देखते हैं, तो आपको उपहास बना लेते हैं। (वे कहते हैं :) क्या यही है, जो तुम्हारे पूज्यों की चर्चा करता है? जबकि वे स्वयं 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) के ज़िक्र1 का इनकार करने वाले हैं।
२१:३७
خُلِقَपैदा किया गयाkhuliqaٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuمِنْofminعَجَلٍۢ ۚउजलत (के ख़मीर) सेʿajalinسَأُو۟رِيكُمْअनक़रीब मैं दिखाऊँगा तुम्हेंsa-urīkumءَايَـٰتِىअपनी निशानियाँāyātīفَلَاपस नाfalāتَسْتَعْجِلُونِतुम जल्दी माँगो मुझसेtastaʿjilūni٣٧
इनसान जन्मजात जल्दबाज़ है। मैं शीघ्र तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाऊँगा। अतः तुम मुझसे जल्दी की माँग न करो।
२१:३८
وَيَقُولُونَऔर वो कहते हैंwayaqūlūnaمَتَىٰकब हैmatāهَـٰذَاयेhādhāٱلْوَعْدُवादाl-waʿduإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٣٨
तथा वे कहते हैं : यह वादा1 कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
२१:३९
لَوْअगरlawيَعْلَمُजानलेंyaʿlamuٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūحِينَजिस वक़्तḥīnaلَا(when) notيَكُفُّونَना वो रोक सकेंगेyakuffūnaعَنfromʿanوُجُوهِهِمُअपने चहरों सेwujūhihimuٱلنَّارَआग कोl-nāraوَلَاऔर नाwalāعَنfromʿanظُهُورِهِمْअपनी पुश्तों सेẓuhūrihimوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيُنصَرُونَवो मदद किए जाऐंगेyunṣarūna٣٩
यदि ये काफ़िर लोग उस समय को जान लें, जब वे न अपने चेहरों से आग को रोक सकेंगे और न अपनी पीठों से और न उनकी सहायता की जाएगी। (तो यातना के लिए जल्दी न मचाएँ)।
२१:४०
بَلْबल्किbalتَأْتِيهِمवो आ जाएगी उनके पासtatīhimبَغْتَةًۭअचानकbaghtatanفَتَبْهَتُهُمْतो वो मबहूत/हैरान कर देगी उन्हेंfatabhatuhumفَلَاतो नाfalāيَسْتَطِيعُونَवो इस्तिताअत रखते होंगेyastaṭīʿūnaرَدَّهَاउसको रद करने कीraddahāوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيُنظَرُونَवो मोहलत दिए जाऐंगेyunẓarūna٤٠
बल्कि वह उनपर अचानक आएगी, तो उन्हें आश्चर्यचकित कर देगी। फिर वे न उसे फेर सकेंगे और न उन्हें मोहलत दी जाएगी।
२१:४१
وَلَقَدِअलबत्ता तहक़ीक़walaqadiٱسْتُهْزِئَमज़ाक़ उड़ाया गयाus'tuh'zi-aبِرُسُلٍۢकई रसूलों काbirusulinمِّنbefore youminقَبْلِكَआपसे पहलेqablikaفَحَاقَतो घेर लियाfaḥāqaبِٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेbi-alladhīnaسَخِرُوا۟मज़ाक़ उड़ायाsakhirūمِنْهُمउनमें सेmin'humمَّاउसने जोكَانُوا۟थे वोkānūبِهِۦजिसकाbihiيَسْتَهْزِءُونَवो मज़ाक उड़ातेyastahziūna٤١
निःसंदेह आपसे पहले कई रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया गया, तो उनमें से जिन लोगों ने मज़ाक उड़ाया, उन्हें उसी चीज़1 ने घेर लिया, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे।
२१:४२
قُلْकह दीजिएqulمَنकौनmanيَكْلَؤُكُمनिग्हबानी कर रहा है तुम्हारीyakla-ukumبِٱلَّيْلِरातbi-al-layliوَٱلنَّهَارِऔर दिन कोwal-nahāriمِنَfromminaٱلرَّحْمَـٰنِ ۗरहमान सेl-raḥmāniبَلْबल्किbalهُمْवोhumعَنfromʿanذِكْرِज़िक्र सेdhik'riرَبِّهِمअपने रब केrabbihimمُّعْرِضُونَऐराज़ करने वाले हैंmuʿ'riḍūna٤٢
आप पूछिए कि कौन है जो रात और दिन में 'रहमान' से1 तुम्हारी रक्षा करता है? बल्कि वे अपने पालनहार की याद से मुँह फेरने वाले हैं।
२१:४३
أَمْयाamلَهُمْउनके लिएlahumءَالِهَةٌۭकुछ इलाह हैंālihatunتَمْنَعُهُمजो बचाते हैं उन्हेंtamnaʿuhumمِّنfromminدُونِنَا ۚहमारे सिवाdūnināلَاNotيَسْتَطِيعُونَनहीं वो इस्तिताअत रखतेyastaṭīʿūnaنَصْرَमदद कीnaṣraأَنفُسِهِمْअपनी जानों कीanfusihimوَلَاऔर नाwalāهُمवोhumمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāيُصْحَبُونَवो साथ दिए जाते हैंyuṣ'ḥabūna٤٣
क्या उनके कुछ पूज्य हैं, जो उन्हें हमारी यातना से बचाते हैं? वे न तो खुद अपनी सहायता कर सकते हैं और न हमारी यातना से उन्हें बचाया जाता है।
२१:४४
بَلْबल्किbalمَتَّعْنَاफायदा दिया हमनेmattaʿnāهَـٰٓؤُلَآءِउन लोगों कोhāulāiوَءَابَآءَهُمْऔर उनके आबाओ अजदाद कोwaābāahumحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāطَالَलम्बी होगईṭālaعَلَيْهِمُउन परʿalayhimuٱلْعُمُرُ ۗउम्रl-ʿumuruأَفَلَاक्या फिर नहींafalāيَرَوْنَवो देखतेyarawnaأَنَّاकि बेशक हमannāنَأْتِىहम आते हैंnatīٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaنَنقُصُهَاहम घटाते हैं उसेnanquṣuhāمِنْfromminأَطْرَافِهَآ ۚउसके किनारों सेaṭrāfihāأَفَهُمُक्या फिर वोafahumuٱلْغَـٰلِبُونَग़ालिब आने वाले हैंl-ghālibūna٤٤
बल्कि हमने इन (काफ़िरों) को और इनके बाप-दादों को जीवन की सुख-सुविधाएँ प्रदान कीं, यहाँ तक कि उनपर लंबा समय बीत गया। तो क्या वे देखते नहीं कि हम धरती को उसके किनारों से कम करते आ रहे हैं? तो क्या वही प्रभावी रहने वाले हैं?
२१:४५
قُلْकह दीजिएqulإِنَّمَآबेशकinnamāأُنذِرُكُمमैं डराता हूँ तुम्हेंundhirukumبِٱلْوَحْىِ ۚसाथ वही केbil-waḥyiوَلَاऔर नहींwalāيَسْمَعُसुना करतेyasmaʿuٱلصُّمُّबहरेl-ṣumuٱلدُّعَآءَपुकार कोl-duʿāaإِذَاwhenidhāمَاजब कभीيُنذَرُونَवो डराए जाते हैंyundharūna٤٥
(ऐ नबी!) आप कह दें कि मैं तो तुम्हें केवल वह़्य के साथ डराता हूँ। और बहरे पुकार को नहीं सुनते, जब कभी डराए जाते हैं।
२१:४६
وَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inمَّسَّتْهُمْछू जाएmassathumنَفْحَةٌۭएक झोंकाnafḥatunمِّنْofminعَذَابِअज़ाब सेʿadhābiرَبِّكَआपके रब केrabbikaلَيَقُولُنَّअलबत्ता वो ज़रूर कहेंगेlayaqūlunnaيَـٰوَيْلَنَآहाय अफ़सोस हम परyāwaylanāإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हम हीkunnāظَـٰلِمِينَज़लिमẓālimīna٤٦
और निश्चय यदि उन्हें आपके पालनहार की तनिक यातना भी छू जाए, तो अवश्य पुकार उठेंगे : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही अत्याचारी1 थे।
२१:४७
وَنَضَعُऔर हम रख देंगेwanaḍaʿuٱلْمَوَٰزِينَतराज़ूl-mawāzīnaٱلْقِسْطَइन्साफ़ वालेl-qis'ṭaلِيَوْمِदिनliyawmiٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiفَلَاतो नाfalāتُظْلَمُज़ुल्म किया जाएगाtuẓ'lamuنَفْسٌۭकिसी नफ़्स परnafsunشَيْـًۭٔا ۖकुछ भीshayanوَإِنऔर अगरचेwa-inكَانَहो वोkānaمِثْقَالَबराबरmith'qālaحَبَّةٍۢदानेḥabbatinمِّنْofminخَرْدَلٍराई केkhardalinأَتَيْنَاहम ले आऐंगेataynāبِهَا ۗउसेbihāوَكَفَىٰऔर काफ़ी हैंwakafāبِنَاहमbināحَـٰسِبِينَहिसाब लेने वालेḥāsibīna٤٧
और हम क़ियामत के दिन न्याय के तराज़ू1 रखेंगे। फिर किसी पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं किया जाएगा। और अगर राई के एक दाने के बराबर (भी किसी का) कर्म होगा, तो हम उसे ले आएँगे। और हम हिसाब लेने वाले काफ़ी हैं।
२१:४८
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadءَاتَيْنَاदिया हमनेātaynāمُوسَىٰमूसाmūsāوَهَـٰرُونَऔर हारून कोwahārūnaٱلْفُرْقَانَफ़ुरक़ानl-fur'qānaوَضِيَآءًۭऔर रौशनीwaḍiyāanوَذِكْرًۭاऔर ज़िक्रwadhik'ranلِّلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों के लिएlil'muttaqīna٤٨
और निःसंदेह हमने मूसा तथा हारून को सत्य एवं असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़, तथा प्रकाश और तक़्वा वालों के लिए उपदेश प्रदान किया।
२१:४९
ٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيَخْشَوْنَडरते हैंyakhshawnaرَبَّهُمअपने रब सेrabbahumبِٱلْغَيْبِग़ायबाना तौर परbil-ghaybiوَهُمऔर वोwahumمِّنَofminaٱلسَّاعَةِक़यामत सेl-sāʿatiمُشْفِقُونَडरने वाले हैंmush'fiqūna٤٩
जो अपने पालनहार से बिन देखे डरते हैं और वे क़ियामत से भयभीत रहने वाले हैं।
२१:५०
وَهَـٰذَاऔर ये हैwahādhāذِكْرٌۭज़िक्रdhik'runمُّبَارَكٌबाबरकतmubārakunأَنزَلْنَـٰهُ ۚनाज़िल किया हमने उसेanzalnāhuأَفَأَنتُمْक्या फिर तुमafa-antumلَهُۥउसकाlahuمُنكِرُونَइन्कार करने वाले होmunkirūna٥٠
और यह (क़ुरआन) एक बरकत वाला उपदेश है, जिसे हमने उतारा है। तो क्या तुम इसके इनकारी हो?
२१:५१
۞ وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadءَاتَيْنَآदी हमनेātaynāإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम कोib'rāhīmaرُشْدَهُۥसमझ बूझ उसकीrush'dahuمِنbeforeminقَبْلُइससे क़ब्लqabluوَكُنَّاऔर थे हमwakunnāبِهِۦउसेbihiعَـٰلِمِينَजानने वालेʿālimīna٥١
और निःसंदेह हमने इससे पहले इबराहीम को उसकी समझ-बूझ प्रदान की थी और हम उससे भली-भाँति अवगत थे।
२१:५२
إِذْजबidhقَالَउसने कहाqālaلِأَبِيهِअपने बाप सेli-abīhiوَقَوْمِهِۦऔर अपनी क़ौम सेwaqawmihiمَاक्या हैंهَـٰذِهِयेhādhihiٱلتَّمَاثِيلُमूर्तियाँl-tamāthīluٱلَّتِىٓवो जोallatīأَنتُمْतुमantumلَهَاउनके लिएlahāعَـٰكِفُونَजम कर बैठने वाले होʿākifūna٥٢
जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : ये प्रतिमाएँ (मूर्तियाँ) क्या हैं, जिनकी पूजा में तुम लगे हुए हो?
२१:५३
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūوَجَدْنَآपाया हमनेwajadnāءَابَآءَنَاअपने आबा ओ अजदाद कोābāanāلَهَاउनकीlahāعَـٰبِدِينَइबादत करने वालेʿābidīna٥٣
उन्होंने कहा : हमने अपने बाप-दादा को इन्हीं की पूजा करने वाला पाया है।
२१:५४
قَالَउसने कहाqālaلَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadكُنتُمْहो तुमkuntumأَنتُمْतुमantumوَءَابَآؤُكُمْऔर आबा ओ अजदाद तुम्हारेwaābāukumفِى(were) inضَلَـٰلٍۢगुमराही मेंḍalālinمُّبِينٍۢखुलीmubīnin٥٤
उस (इबराहीम) ने कहा : निश्चय तुम और तुम्हारे बाप-दादा खुली गुमराही में रहे हो।
२१:५५
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūأَجِئْتَنَاक्या तू लाया है हमारे पासaji'tanāبِٱلْحَقِّहक़ कोbil-ḥaqiأَمْयाamأَنتَतूantaمِنَ(are) ofminaٱللَّـٰعِبِينَदिल्लगी करने वालों में से हैl-lāʿibīna٥٥
उन्होंने कहा : क्या तुम हमारे पास सत्य लाए हो या (हमसे) दिल-लगी कर रहे हो?
२१:५६
قَالَकहाqālaبَلबल्किbalرَّبُّكُمْरब तुम्हाराrabbukumرَبُّरब हैrabbuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन काwal-arḍiٱلَّذِىजिसनेalladhīفَطَرَهُنَّपैदा किया है उन्हेंfaṭarahunnaوَأَنَا۠और मैंwa-anāعَلَىٰऊपरʿalāذَٰلِكُمइसकेdhālikumمِّنَofminaٱلشَّـٰهِدِينَगवाहों में से हूँl-shāhidīna٥٦
उसने कहा : बल्कि तुम्हारा पालनहार आकाशों तथा धरती का पालनहार है, जिसने उन्हें पैदा किया है और मैं इसकी गवाही देने वालों में से हूँ।
२१:५७
وَتَٱللَّهِऔर क़सम अल्लाह कीwatal-lahiلَأَكِيدَنَّअलबत्ता मैं ज़रूर चाल चलूँगाla-akīdannaأَصْنَـٰمَكُمतुम्हारे बुतों सेaṣnāmakumبَعْدَइसके बादbaʿdaأَنकिanتُوَلُّوا۟तुम चले जाओगेtuwallūمُدْبِرِينَपीठ फेर करmud'birīna٥٧
और अल्लाह की क़सम! मैं अवश्य ही तुम्हारी मूर्तियों का गुप्त उपाय करूँगा, इसके बाद कि तुम पीठ फेरकर चले जाओगे।
२१:५८
فَجَعَلَهُمْतो उसने कर दिया उन्हेंfajaʿalahumجُذَٰذًاटुकड़े-टुकड़ेjudhādhanإِلَّاसिवाएillāكَبِيرًۭاएक बड़े केkabīranلَّهُمْउनकेlahumلَعَلَّهُمْशायद की वोlaʿallahumإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiيَرْجِعُونَवो रुजूअ करेंyarjiʿūna٥٨
फिर उसने उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर दिया, सिवाय उनके एक बड़े के, ताकि वे उसकी ओर लौटें।
२१:५९
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūمَنकिस नेmanفَعَلَकिया हैfaʿalaهَـٰذَاयेhādhāبِـَٔالِهَتِنَآसाथ हमारे इलाहों केbiālihatināإِنَّهُۥयक़ीनन वोinnahuلَمِنَ(is) oflaminaٱلظَّـٰلِمِينَअलबत्ता ज़ालिमों में से हैl-ẓālimīna٥٩
उन्होंने कहा : हमारे पूज्यों के साथ यह किसने किया है? निःसंदेह वह निश्चय अत्याचारियों में से है!
२१:६०
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūسَمِعْنَاसुना हमनेsamiʿ'nāفَتًۭىएक नौजवान कोfatanيَذْكُرُهُمْवो ज़िक्र करता था उनकाyadhkuruhumيُقَالُकहा जाता हैyuqāluلَهُۥٓउसेlahuإِبْرَٰهِيمُइब्राहीमib'rāhīmu٦٠
लोगों ने कहा : हमने एक नवयुवक को उनकी चर्चा करते हुए सुना है, जिसे इबराहीम कहा जाता है।
२१:६१
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūفَأْتُوا۟पस लाओfatūبِهِۦउसेbihiعَلَىٰٓbeforeʿalāأَعْيُنِआँखों के सामनेaʿyuniٱلنَّاسِलोगों कीl-nāsiلَعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيَشْهَدُونَवो गवाह हो जाऐंyashhadūna٦١
उन्होंने कहा : उसे लोगों की आँखों के सामने लाओ, ताकि वे गवाह हो जाएँ।
२१:६२
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūءَأَنتَक्या तुमa-antaفَعَلْتَकिया तुमनेfaʿaltaهَـٰذَاयेhādhāبِـَٔالِهَتِنَاसाथ हमारे इलाहों केbiālihatināيَـٰٓإِبْرَٰهِيمُऐ इब्राहीमyāib'rāhīmu٦٢
उन्होंने पूछा : ऐ इबराहीम! क्या तूने ही हमारे पूज्यों के साथ यह किया है?
२१:६३
قَالَउसने कहाqālaبَلْबल्किbalفَعَلَهُۥकिया है उसेfaʿalahuكَبِيرُهُمْउनके बड़ेkabīruhumهَـٰذَاउसनेhādhāفَسْـَٔلُوهُمْपस पूछो उनसेfasalūhumإِنअगरinكَانُوا۟हैं वोkānūيَنطِقُونَवो बोलतेyanṭiqūna٦٣
उसने कहा : बल्कि यह उनके इस बड़े ने किया है। अतः उन्हीं से पूछ लो, यदि वे बोलते हैं?
२१:६४
فَرَجَعُوٓا۟तो वो पलटेfarajaʿūإِلَىٰٓtoilāأَنفُسِهِمْतरफ़ अपने दिलों केanfusihimفَقَالُوٓا۟तो उन्होंने कहाfaqālūإِنَّكُمْबेशक तुमinnakumأَنتُمُतुम हीantumuٱلظَّـٰلِمُونَज़ालिम होl-ẓālimūna٦٤
फिर उन्होंने अपने मन में विचार किया और कहने लगे : निश्चय तुम खुद ही अत्याचारी हो।
२१:६५
ثُمَّफिरthummaنُكِسُوا۟वो औंधे कर दिए गएnukisūعَلَىٰonʿalāرُءُوسِهِمْअपने सरों परruūsihimلَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadعَلِمْتَजानता है तूʿalim'taمَاनहींهَـٰٓؤُلَآءِहैं येhāulāiيَنطِقُونَबोलतेyanṭiqūna٦٥
फिर वे अपने सिरों के बल औंधे कर दिए गए1, (और बोले :) निःसंदेह तू जानता है कि ये बोलते नहीं।
२१:६६
قَالَउसने कहाqālaأَفَتَعْبُدُونَक्या भला तुम इबादत करते होafataʿbudūnaمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمَاउनकी जोلَا(does) notيَنفَعُكُمْनहीं वो नफ़ा देते तुम्हेंyanfaʿukumشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَلَاऔर नाwalāيَضُرُّكُمْवो नुक़्सान दे सकते हैं तुम्हेंyaḍurrukum٦٦
(इबराहीम ने) कहा : फिर क्या तुम अल्लाह को छोड़ उस चीज़ की इबादत करते हो, जो न तुम्हें कुछ लाभ पहुँचाती है और न तुम्हें हानि पहुँचाती है?
२१:६७
أُفٍّۢउफ़ हैuffinلَّكُمْतुम परlakumوَلِمَاऔर जिनकीwalimāتَعْبُدُونَतुम इबादत करते होtaʿbudūnaمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِ ۖअल्लाह केl-lahiأَفَلَاक्या भला नहींafalāتَعْقِلُونَतुम अक़्ल से काम लेतेtaʿqilūna٦٧
तुफ़ है तुमपर और उनपर जिनकी तुम अल्लाह को छोड़कर इबादत करते हो। तो क्या तुम समझते नहीं?
२१:६८
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūحَرِّقُوهُजला डालो इसेḥarriqūhuوَٱنصُرُوٓا۟और मदद करोwa-unṣurūءَالِهَتَكُمْअपने इलाहों कीālihatakumإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumفَـٰعِلِينَकरने वालेfāʿilīna٦٨
उन्होंने कहा : इसे जला दो तथा अपने पूज्यों की सहायता करो, अगर तुम कुछ करने वाले हो।
२१:६९
قُلْنَاकहा हमनेqul'nāيَـٰنَارُऐ आगyānāruكُونِىहो जाkūnīبَرْدًۭاठंडीbardanوَسَلَـٰمًاऔर सलामती( वाली)wasalāmanعَلَىٰٓforʿalāإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम परib'rāhīma٦٩
हमने कहा : ऐ आग! तू इबराहीम पर ठंडक और सुरक्षा सुरक्षा बन जा।
२१:७०
وَأَرَادُوا۟और उन्होंने इरादा कियाwa-arādūبِهِۦसाथ उसकेbihiكَيْدًۭاचाल चलने काkaydanفَجَعَلْنَـٰهُمُतो बना दिया हमने उन्हेंfajaʿalnāhumuٱلْأَخْسَرِينَसब से ज़्यादा ख़सारा पाने वालाl-akhsarīna٧٠
और उन्होंने उसके साथ एक चाल का इरादा किया, तो हमने उन्हीं को अत्यंत घाटे वाला कर दिया।
२१:७१
وَنَجَّيْنَـٰهُऔर निजात दी हमने उसेwanajjaynāhuوَلُوطًاऔर लूत कोwalūṭanإِلَىtoilāٱلْأَرْضِतरफ़ उस ज़मीन केl-arḍiٱلَّتِىवो जोallatīبَـٰرَكْنَاबरकत रखी हमनेbāraknāفِيهَاउसमेंfīhāلِلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों के लिएlil'ʿālamīna٧١
और हम उसे (इबराहीम को) और लूत1 को बचाकर उस भूमि2 की ओर ले गए, जिसमें हमने संसार वालों के लिए बरकत रखी।
२१:७२
وَوَهَبْنَاऔर अता किया हमनेwawahabnāلَهُۥٓउसेlahuإِسْحَـٰقَइस्हाक़is'ḥāqaوَيَعْقُوبَऔर याक़ूबwayaʿqūbaنَافِلَةًۭ ۖमज़ीदnāfilatanوَكُلًّۭاऔर सब कोwakullanجَعَلْنَاबनाया हमनेjaʿalnāصَـٰلِحِينَसालेह/नेकṣāliḥīna٧٢
और हमने उन्हें इसहाक़ प्रदान किया और उसके अतिरिक्त याक़ूब भी। और हमने हर एक को नेक बनाया।
२१:७३
وَجَعَلْنَـٰهُمْऔर बनाया हमने उन्हेंwajaʿalnāhumأَئِمَّةًۭइमामa-immatanيَهْدُونَवो रहनुमाई करते थेyahdūnaبِأَمْرِنَاहमारे हुक्म सेbi-amrināوَأَوْحَيْنَآऔर वही की हमनेwa-awḥaynāإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimفِعْلَकरने कोfiʿ'laٱلْخَيْرَٰتِभलाइयाँl-khayrātiوَإِقَامَऔर क़ायम करनाwa-iqāmaٱلصَّلَوٰةِनमाज़ काl-ṣalatiوَإِيتَآءَऔर अदा करनाwaītāaٱلزَّكَوٰةِ ۖज़कात काl-zakatiوَكَانُوا۟और थे वोwakānūلَنَاहमारे लिएlanāعَـٰبِدِينَइबादत गुज़ारʿābidīna٧٣
और हमने उन्हें ऐसे अग्रणी (पेशवा) बनाया, जो हमारे आदेशानुसार (लोगों को) सही राह दिखाते थे। और हमने उनकी ओर नेक कार्य करने, नमाज़ क़ायम करने और ज़कात देने की वह़्य (प्रकाशना) की। और वे केवल हमारी इबादत करने वाले थे।
२१:७४
وَلُوطًاऔर लूतwalūṭanءَاتَيْنَـٰهُअता किया हमने उसेātaynāhuحُكْمًۭاहुक्मḥuk'manوَعِلْمًۭاऔर इल्मwaʿil'manوَنَجَّيْنَـٰهُऔर निजात दी हमनेwanajjaynāhuمِنَfromminaٱلْقَرْيَةِउस बस्ती सेl-qaryatiٱلَّتِىवो जोallatīكَانَتथीkānatتَّعْمَلُवो करतीtaʿmaluٱلْخَبَـٰٓئِثَ ۗख़बीस कामl-khabāithaإِنَّهُمْयक़ीनन वोinnahumكَانُوا۟थे वोkānūقَوْمَलोगqawmaسَوْءٍۢबुरेsawinفَـٰسِقِينَफ़ासिक़fāsiqīna٧٤
और लूत को हमने निर्णय शक्ति और ज्ञान दिया और उसे उस बस्ती से बचा लिया, जो गंदे काम किया करती थी। निश्चय वे बुरे, अवज्ञा करने वाले लोग थे।
२१:७५
وَأَدْخَلْنَـٰهُऔर दाख़िल किया हमने उसेwa-adkhalnāhuفِىintoرَحْمَتِنَآ ۖअपनी रहमत मेंraḥmatināإِنَّهُۥयक़ीनन वोinnahuمِنَ(was) ofminaٱلصَّـٰلِحِينَनेक लोगों में से थाl-ṣāliḥīna٧٥
और हमने उन्हें अपनी दया में दाख़िल कर लिया। निःसंदेह वह सदाचारियों में से थे।
२१:७६
وَنُوحًاऔर नूहwanūḥanإِذْजबidhنَادَىٰउसने पुकाराnādāمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluفَٱسْتَجَبْنَاतो दुआ क़ुबूल कर ली हमनेfa-is'tajabnāلَهُۥउसकीlahuفَنَجَّيْنَـٰهُतो निजात दी हमने उसेfanajjaynāhuوَأَهْلَهُۥऔर उसके घर वालों कोwa-ahlahuمِنَfromminaٱلْكَرْبِकर्ब/दुख सेl-karbiٱلْعَظِيمِबहुत बड़ेl-ʿaẓīmi٧٦
तथा नूह को (याद करो) जब उन्होंने इससे पहले (अल्लाह को) पुकारा, तो हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली, फिर उन्हें और उनके घर वालों को बड़े कष्ट से बचा लिया।
२१:७७
وَنَصَرْنَـٰهُऔर मदद की हमने उसकीwanaṣarnāhuمِنَfromminaٱلْقَوْمِउन लोगों के मुक़ाबले मेंl-qawmiٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaكَذَّبُوا۟झुठलायाkadhabūبِـَٔايَـٰتِنَآ ۚहमारी आयात कोbiāyātināإِنَّهُمْबेशक वोinnahumكَانُوا۟थे वोkānūقَوْمَलोगqawmaسَوْءٍۢबुरेsawinفَأَغْرَقْنَـٰهُمْतो ग़र्क़ कर दिया हमने उनकोfa-aghraqnāhumأَجْمَعِينَसब के सब कोajmaʿīna٧٧
और हमने उन लोगों के विरुद्ध उनकी मदद की, जिन्होंने हमारी निशानियों को झुठलाया। निःसंदेह वे बुरे लोग थे। अतः हमने उन सभी को डुबो दिया।
२१:७८
وَدَاوُۥدَऔर दाऊदwadāwūdaوَسُلَيْمَـٰنَऔर सुलैमानwasulaymānaإِذْजबidhيَحْكُمَانِवो दोनों फ़ैसला कर रहे थेyaḥkumāniفِىconcerningٱلْحَرْثِखेत के मामले मेंl-ḥarthiإِذْजबidhنَفَشَتْरात को चर लिया थाnafashatفِيهِउसमेंfīhiغَنَمُबकरियों नेghanamuٱلْقَوْمِक़ौम कीl-qawmiوَكُنَّاऔर थे हमwakunnāلِحُكْمِهِمْउनके फ़ैसले कोliḥuk'mihimشَـٰهِدِينَदेखने वालेshāhidīna٧٨
तथा दाऊद और सुलैमान को (याद करो), जब वे दोनों खेत के विषय में निर्णय कर रहे थे, जब रात के समय उसमें अन्य लोगों की बकरियाँ फैल गईं थीं, और हम उनके निर्णय के समय उपस्थित थे।
२१:७९
فَفَهَّمْنَـٰهَاपस समझा दिया हमने ये(फ़ैसला)fafahhamnāhāسُلَيْمَـٰنَ ۚसुलैमान कोsulaymānaوَكُلًّاऔर हर एक कोwakullanءَاتَيْنَاदिया हमनेātaynāحُكْمًۭاहुक्मḥuk'manوَعِلْمًۭا ۚऔर इल्मwaʿil'manوَسَخَّرْنَاऔर मुसख़्ख़र किए हमनेwasakharnāمَعَसाथmaʿaدَاوُۥدَदाऊद केdāwūdaٱلْجِبَالَपहाड़l-jibālaيُسَبِّحْنَवो तस्बीह करते थेyusabbiḥ'naوَٱلطَّيْرَ ۚऔर परिन्दे ( भी )wal-ṭayraوَكُنَّاऔर थे हम हीwakunnāفَـٰعِلِينَकरने वालेfāʿilīna٧٩
तो हमने वह (निर्णय) सुलैमान1 को समझा दिया। और हमने हर एक को हुक्म (नुबुव्वत या निर्णय-शक्ति) और ज्ञान प्रदान किया। और हमने पहाड़ों को दाऊद के अधीन कर दिया, जो (अल्लाह की) पवित्रता का गान करते थे, तथा पक्षियों को भी। और हम ही (इस कार्य के) करने वाले थे।
२१:८०
وَعَلَّمْنَـٰهُऔर सिखाया हमने उसेwaʿallamnāhuصَنْعَةَबनानाṣanʿataلَبُوسٍۢलिबास काlabūsinلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumلِتُحْصِنَكُمताकि वो बचाए तुम्हेंlituḥ'ṣinakumمِّنۢfromminبَأْسِكُمْ ۖतुम्हारी जंग सेbasikumفَهَلْतो क्याfahalأَنتُمْतुमantumشَـٰكِرُونَशुक्र गुज़ार होshākirūna٨٠
तथा हमने उन्हें (दाऊद को) तुम्हारे लिए कवच बनाना सिखाया, ताकि वह तुम्हारी लड़ाई से तुम्हारी रक्षा करे। तो क्या तुम शुक्रिया अदा करने वाले हो?
२१:८१
وَلِسُلَيْمَـٰنَऔर सुलैमान के लिएwalisulaymānaٱلرِّيحَहवा (मुसख़्ख़र की)l-rīḥaعَاصِفَةًۭतुंदो तेज़ चलने वालीʿāṣifatanتَجْرِىवो चलती थीtajrīبِأَمْرِهِۦٓउसके हुक्म सेbi-amrihiإِلَىtoilāٱلْأَرْضِतरफ़ उस ज़मीन केl-arḍiٱلَّتِىवो जोallatīبَـٰرَكْنَاबरकत रखी हमनेbāraknāفِيهَا ۚजिस मेंfīhāوَكُنَّاऔर थे हमwakunnāبِكُلِّof everybikulliشَىْءٍहर चीज़ कोshayinعَـٰلِمِينَजानने वालेʿālimīna٨١
और तेज़ चलने वाली हवा को सुलैमान के अधीन कर दिया, जो उसके आदेश1 से उस धरती की ओर चलती थी, जिसमें हमने बरकत रखी और हम हर चीज़ को जानने वाले थे।
२१:८२
وَمِنَAnd ofwaminaٱلشَّيَـٰطِينِऔर कुछ शयातीनl-shayāṭīniمَنजोmanيَغُوصُونَग़ोता लगाते थेyaghūṣūnaلَهُۥउसके लिएlahuوَيَعْمَلُونَऔर वो करते थेwayaʿmalūnaعَمَلًۭاकुछ कामʿamalanدُونَअलावाdūnaذَٰلِكَ ۖउसकेdhālikaوَكُنَّاऔर थे हम हीwakunnāلَهُمْउनकीlahumحَـٰفِظِينَनिगरानी करने वालेḥāfiẓīna٨٢
और कई शैतान (उनके अधीन कर दिए गए थे), जो उनके लिए ग़ोता लगाते1 थे तथा इसके अलावा काम (भी) करते थे। और हम ही उनके निरीक्षक2 थे।
२१:८३
۞ وَأَيُّوبَऔर अय्यूबwa-ayyūbaإِذْजबidhنَادَىٰपुकारा उसनेnādāرَبَّهُۥٓअपने रब कोrabbahuأَنِّىकि बेशक मैंannīمَسَّنِىَपहुँची है मुझेmassaniyaٱلضُّرُّतक्लीफ़l-ḍuruوَأَنتَऔर तूwa-antaأَرْحَمُसबसे ज़्यादा रहम वाला हैarḥamuٱلرَّٰحِمِينَसब रहम करने वालों सेl-rāḥimīna٨٣
तथा अय्यूब (की कहानी) को (याद करो), जब उन्होंने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह मुझे कष्ट पहुँची है और तू दया करने वालों में सबसे अधिक दयावान् है।
२१:८४
فَٱسْتَجَبْنَاतो दुआ क़ुबूल कर ली हमनेfa-is'tajabnāلَهُۥउसकीlahuفَكَشَفْنَاतो दूर कर दी हमनेfakashafnāمَاजो कुछبِهِۦउसेbihiمِنofminضُرٍّۢ ۖतक्लीफ़ थीḍurrinوَءَاتَيْنَـٰهُऔर दिए हमने उसेwaātaynāhuأَهْلَهُۥअहल व अयाल उसकेahlahuوَمِثْلَهُمऔर उनकी मानिन्दwamith'lahumمَّعَهُمْसाथ उसकेmaʿahumرَحْمَةًۭबतौर ए रहमतraḥmatanمِّنْfrom Ourselvesminعِندِنَاअपने पास सेʿindināوَذِكْرَىٰऔर नसीहतwadhik'rāلِلْعَـٰبِدِينَइबादत करने वालों के लिएlil'ʿābidīna٨٤
तो हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली।1 चुनाँचे उन्हें जो भी कष्ट था, उसे दूर कर दिया और हमने उन्हें उनके घर वाले तथा उनके साथ उनके समान (और) भी प्रदान किए। अपनी ओर से दया के रूप में और उन लोगों की याद-दहानी के लिए जो इबादत करने वाले हैं।
२१:८५
وَإِسْمَـٰعِيلَऔर इस्माइलwa-is'māʿīlaوَإِدْرِيسَऔर इदरीसwa-id'rīsaوَذَاand Dhul-Kiflwadhāٱلْكِفْلِ ۖऔर ज़ुल किफ़्लl-kif'liكُلٌّۭसबkullunمِّنَ(were) ofminaٱلصَّـٰبِرِينَसब्र करने वालों में से थेl-ṣābirīna٨٥
तथा इसमाईल, इदरीस और ज़ुल किफ़्ल को (याद करो)। हर एक धैर्यवानों में से था।
२१:८६
وَأَدْخَلْنَـٰهُمْऔर दाख़िल किया हमने उन्हेंwa-adkhalnāhumفِىinرَحْمَتِنَآ ۖअपनी रहमत मेंraḥmatināإِنَّهُمयक़ीनन वोinnahumمِّنَ(were) ofminaٱلصَّـٰلِحِينَसालेह लोगों में से थेl-ṣāliḥīna٨٦
और हमने उन्हें अपनी दया में दाख़िल कर लिया। निःसंदेह वे सदाचारियों में से थे।
२१:८७
وَذَاAnd Dhun-Nunwadhāٱلنُّونِऔर मछली वालाl-nūniإِذजबidhذَّهَبَवो चला गयाdhahabaمُغَـٰضِبًۭاग़ज़बनाक हो करmughāḍibanفَظَنَّतो उसने समझ लियाfaẓannaأَنकिanلَّنहरगिज़ नहींlanنَّقْدِرَहम क़ादिर होंगेnaqdiraعَلَيْهِउस परʿalayhiفَنَادَىٰतो उसने पुकाराfanādāفِىinٱلظُّلُمَـٰتِअँघेरों मेंl-ẓulumātiأَنकिanلَّآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़ )ilāhaإِلَّآमगरillāأَنتَतू हीantaسُبْحَـٰنَكَपाक है तूsub'ḥānakaإِنِّىबेशक मैंinnīكُنتُहूँ मैंkuntuمِنَofminaٱلظَّـٰلِمِينَज़लिमों में सेl-ẓālimīna٨٧
तथा मछली वाले1 (की कहानी याद करो), जब वह ग़ुस्से से भरा हुआ चला गया2 और उसने सोचा कि हम उसे तंगी में नहीं डालेंगे। अंततः उसने अंधेरों में पुकारा कि (ऐ अल्लाह!) तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तू पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में हो गया।3
२१:८८
فَٱسْتَجَبْنَاतो दुआ क़ुबूल कर ली हमनेfa-is'tajabnāلَهُۥउसकीlahuوَنَجَّيْنَـٰهُऔर निजात दी हमने उसेwanajjaynāhuمِنَfromminaٱلْغَمِّ ۚग़म सेl-ghamiوَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaنُـۨجِىहम निजात दिया करते हैंnunjīٱلْمُؤْمِنِينَईमान वालों कोl-mu'minīna٨٨
तो हमने उनकी दुआ क़बूल की तथा उन्हें शोक से मुक्त कर दिया। और इसी तरह हम ईमान वालों को बचा लिया करते हैं।
२१:८९
وَزَكَرِيَّآऔर ज़करियाwazakariyyāإِذْजबidhنَادَىٰउसने पुकाराnādāرَبَّهُۥअपने रब कोrabbahuرَبِّऐ मेरे रबrabbiلَا(Do) notتَذَرْنِىना तू छोड़ मुझेtadharnīفَرْدًۭاअकेलाfardanوَأَنتَऔर तू हीwa-antaخَيْرُबेहतर हैkhayruٱلْوَٰرِثِينَसब वारिसों मेंl-wārithīna٨٩
तथा ज़करिया को (याद करो), जब उन्होंने अपने पालनहार को पुकारा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे अकेला मत छोड़ और तू सब वारिसों से बेहतर है।
२१:९०
فَٱسْتَجَبْنَاतो दुआ क़ुबूल कर ली हमनेfa-is'tajabnāلَهُۥउसकीlahuوَوَهَبْنَاऔर अता किया हमनेwawahabnāلَهُۥउसेlahuيَحْيَىٰयहयाyaḥyāوَأَصْلَحْنَاऔर दुरुस्त कर दी हमनेwa-aṣlaḥnāلَهُۥउसके लिएlahuزَوْجَهُۥٓ ۚबीवी उसकीzawjahuإِنَّهُمْयक़ीनन वोinnahumكَانُوا۟थे वोkānūيُسَـٰرِعُونَवो जल्दी करतेyusāriʿūnaفِىinٱلْخَيْرَٰتِनेकियों मेंl-khayrātiوَيَدْعُونَنَاऔर वो पुकारते थे हमेंwayadʿūnanāرَغَبًۭاरग़बतraghabanوَرَهَبًۭا ۖऔर ख़ौफ़ सेwarahabanوَكَانُوا۟और थे वोwakānūلَنَاहमारे ही लिएlanāخَـٰشِعِينَख़ुशूअ करने वालेkhāshiʿīna٩٠
तो हमने उनकी दुआ क़बूल की और उन्हें यह़या प्रदान किया, और उनकी पत्नी को उनके लिए ठीक कर दिया। निःसंदेह वे नेकी के कामों में बहुत जल्दी करते थे और हमें आशा तथा भय के साथ पुकारते थे, और वे हमसे दीनतापूर्वक विनती करने वाले थे।
२१:९१
وَٱلَّتِىٓऔर उस औरत कोwa-allatīأَحْصَنَتْजिसने हिफ़ाज़त कीaḥṣanatفَرْجَهَاअपनी शर्मगाह कीfarjahāفَنَفَخْنَاतो फूँक दिया हमनेfanafakhnāفِيهَاउसमेंfīhāمِنofminرُّوحِنَاअपनी रूह सेrūḥināوَجَعَلْنَـٰهَاऔर बनाया हमने उसेwajaʿalnāhāوَٱبْنَهَآऔर उसके बेटे कोwa-ib'nahāءَايَةًۭएक निशानीāyatanلِّلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों के लिएlil'ʿālamīna٩١
तथा उस महिला (को याद करो) जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की, तो हमने उसमें अपनी रूह से फूँका तथा उसे और उसके पुत्र को संसार वालों के लिए एक बड़ी निशानी बना दिया।1
२१:९२
إِنَّयक़ीननinnaهَـٰذِهِۦٓयेhādhihiأُمَّتُكُمْउम्मत है तुम्हारीummatukumأُمَّةًۭउम्मतummatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanوَأَنَا۠और मैंwa-anāرَبُّكُمْरब हूँ तुम्हाराrabbukumفَٱعْبُدُونِपस इबादत करो मेरीfa-uʿ'budūni٩٢
निःसंदेह यह है तुम्हारी उम्मत (धर्म) जो एक ही उम्मत (धर्म)1 है, और मैं ही तुम्हारा पालनहार (पूज्य) हूँ। अतः मेरी इबादत करो।
२१:९३
وَتَقَطَّعُوٓا۟और उन्होंने टुकड़े-टुकड़े कर डालाwataqaṭṭaʿūأَمْرَهُمअपने काम (दीन ) कोamrahumبَيْنَهُمْ ۖआपस मेंbaynahumكُلٌّसब के सबkullunإِلَيْنَاतरफ़ हमारेilaynāرَٰجِعُونَलौटने वाले हैंrājiʿūna٩٣
और वे अपने धर्म के मामले में आपस में टुकड़े-टुकड़े हो गए। सब हमारी ही ओर लोटने वाले हैं।
२१:९४
فَمَنतो जो कोईfamanيَعْمَلْअमल करेगाyaʿmalمِنَ[of]minaٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकियों में सेl-ṣāliḥātiوَهُوَजबकि वोwahuwaمُؤْمِنٌۭमोमिन होmu'minunفَلَاतो नहींfalāكُفْرَانَकोई नाक़दरीkuf'rānaلِسَعْيِهِۦउसकी कोशिश कीlisaʿyihiوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَهُۥउसके लिएlahuكَـٰتِبُونَलिखने वाले हैंkātibūna٩٤
अतः जो व्यक्ति अच्छे काम करे और वह मोमिन हो, तो उसके प्रयास की उपेक्षा नहीं की जाएगी और निश्चय हम उसके लिए लिखने वाले हैं।
२१:९५
وَحَرَٰمٌऔर लाज़िम हैwaḥarāmunعَلَىٰuponʿalāقَرْيَةٍबस्ती (वालों ) परqaryatinأَهْلَكْنَـٰهَآहलाक कर दिया हमने जिसेahlaknāhāأَنَّهُمْकि बेशक वोannahumلَاnotيَرْجِعُونَनहीं वो लौटेंगेyarjiʿūna٩٥
तथा जिस बस्ती को हम विनष्ट1 कर दें, उसके लिए असंभव है कि वह फिर (संसार में) लौट आए।
२१:९६
حَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāفُتِحَتْखोले जाऐंगेfutiḥatيَأْجُوجُयाजूजyajūjuوَمَأْجُوجُऔर माजूजwamajūjuوَهُمऔर वोwahumمِّنfromminكُلِّeverykulliحَدَبٍۢहर बुलन्दी सेḥadabinيَنسِلُونَवो तेज़ चल पड़ेंगेyansilūna٩٦
यहाँ तक कि जब याजूज और माजूज1 खोल दिए जाएँगे और वे प्रत्येक ऊँची जगह से दौड़ते हुए आएँगे।
२१:९७
وَٱقْتَرَبَऔर क़रीब आ जाएगाwa-iq'tarabaٱلْوَعْدُवादाl-waʿduٱلْحَقُّसच्चाl-ḥaquفَإِذَاतो अचानकfa-idhāهِىَवोhiyaشَـٰخِصَةٌखली की खुली रह जाऐंगीshākhiṣatunأَبْصَـٰرُआँखेंabṣāruٱلَّذِينَउनकी जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūيَـٰوَيْلَنَاहाय अफ़सोस हम परyāwaylanāقَدْतहक़ीक़qadكُنَّاथे हमkunnāفِىinغَفْلَةٍۢग़फ़्लत मेंghaflatinمِّنْofminهَـٰذَاइससेhādhāبَلْबल्किbalكُنَّاथे हम हीkunnāظَـٰلِمِينَज़ालिमẓālimīna٩٧
और सच्चा वादा1 क़रीब आ जाएगा, तो अचानक यह होगा कि उन लोगों की आँखें खुली रह जाएँगी, जिन्होंने कुफ़्र किया। (वे कहेंगे :) हाय हमारा विनाश! निःसंदेह हम इससे ग़फ़लत में थे, बल्कि हम अत्याचारी थे।
२१:९८
إِنَّكُمْबेशक तुमinnakumوَمَاऔर जिनकीwamāتَعْبُدُونَतुम इबादत करते होtaʿbudūnaمِنbesides Allahminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiحَصَبُईंधन होंगेḥaṣabuجَهَنَّمَजहन्नम काjahannamaأَنتُمْतुमantumلَهَاउसी परlahāوَٰرِدُونَवारिद/दाख़िल होने वाले होwāridūna٩٨
निःसंदेह तुम और जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो, नरक का ईंधन हैं। तुम उसी में दाखिल होने वाले हो।
२१:९९
لَوْअगरlawكَانَहोतेkānaهَـٰٓؤُلَآءِयेhāulāiءَالِهَةًۭइलाहālihatanمَّاनाوَرَدُوهَا ۖवो वारिद होते उसमेंwaradūhāوَكُلٌّۭऔर सब के सबwakullunفِيهَاउसमेंfīhāخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वाले हैंkhālidūna٩٩
यदि ये पूज्य होते, तो उस (नरक) में प्रवेश न करते। और ये सब उसी में सदैव रहने वाले हैं।
२१:१००
لَهُمْउनके लिएlahumفِيهَاउसमेंfīhāزَفِيرٌۭचिल्लाना होगाzafīrunوَهُمْऔर वोwahumفِيهَاउसमेंfīhāلَاnotيَسْمَعُونَना वो सुनेंगेyasmaʿūna١٠٠
उनकी साँस चढ़ी होगी (तेज़ साँसें निकलेंगी) तथा वे उसमें (कुछ) नहीं सुन सकेंगे।
२१:१०१
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो लोगalladhīnaسَبَقَتْपहले तय हो गईsabaqatلَهُمउनके लिएlahumمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāٱلْحُسْنَىٰٓभलाईl-ḥus'nāأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaعَنْهَاउससेʿanhāمُبْعَدُونَदूर रखे जाने वालेmub'ʿadūna١٠١
निःसंदेह वे लोग जिनके लिए हमारी ओर से पहले भलाई का निर्णय हो चुका है, वे उससे दूर रखे गए होंगे।
२१:१०२
لَاNotيَسْمَعُونَनहीं वो सुनेंगेyasmaʿūnaحَسِيسَهَا ۖउसकी आहट कोḥasīsahāوَهُمْऔर वोwahumفِىinمَاउसमें जोٱشْتَهَتْख़्वाहिश करेंगेish'tahatأَنفُسُهُمْनफ़्स उनकेanfusuhumخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वाले हैंkhālidūna١٠٢
वे उस (जहन्नम) की आहट भी नहीं सुनेंगे, और वे अपनी मनचाही चीज़ों में सदा रहने वाले हैं।
२१:१०३
لَاNotيَحْزُنُهُمُना ग़मगीन करेगी उन्हेंyaḥzunuhumuٱلْفَزَعُघबराहटl-fazaʿuٱلْأَكْبَرُबड़ीl-akbaruوَتَتَلَقَّىٰهُمُऔर इस्तक़बाल करेंगे उनकाwatatalaqqāhumuٱلْمَلَـٰٓئِكَةُफ़रिश्तेl-malāikatuهَـٰذَاये हैhādhāيَوْمُكُمُदिन तुम्हाराyawmukumuٱلَّذِىवो जोalladhīكُنتُمْथे तुमkuntumتُوعَدُونَतुम वादा दिए जातेtūʿadūna١٠٣
उन्हें सबसे बड़ी घबराहट दुःखित नहीं करेगी, तथा फ़रिश्ते उनका स्वागत करेंगे (और कहेंगे :) यह है तुम्हारा वह दिन, जिसका तुम्हें वचन दिया जाता था।
२१:१०४
يَوْمَजिस दिनyawmaنَطْوِىहम लपेट देंगेnaṭwīٱلسَّمَآءَआसमान कोl-samāaكَطَىِّमानिन्द लपेटनाkaṭayyiٱلسِّجِلِّतूमार के (औराक़ को )l-sijiliلِلْكُتُبِ ۚकिताबों के लिएlil'kutubiكَمَاजैसा किkamāبَدَأْنَآइब्तिदा की हमनेbadanāأَوَّلَपहलीawwalaخَلْقٍۢपैदाइश कीkhalqinنُّعِيدُهُۥ ۚहम एआदा करेंगे उसकाnuʿīduhuوَعْدًاवादा हैwaʿdanعَلَيْنَآ ۚहमारे ज़िम्मेʿalaynāإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاहैं हमkunnāفَـٰعِلِينَकरने वालेfāʿilīna١٠٤
जिस दिन हम आकाश को पंजिका के पन्नों को लपेटने की तरह लपेट1 देंगे। जिस तरह हमने प्रथम सृष्टि का आरंभ किया, (उसी तरह) हम उसे लौटाएँगे।2 यह हमारे ज़िम्मे वादा है। निश्चय हम इसे पूरा करने वाले हैं।
२१:१०५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadكَتَبْنَاलिख दिया हमनेkatabnāفِىinٱلزَّبُورِज़बूर मेंl-zabūriمِنۢafterminبَعْدِafterbaʿdiٱلذِّكْرِबाद ज़िक्र केl-dhik'riأَنَّकि बेशकannaٱلْأَرْضَज़मीनl-arḍaيَرِثُهَاवारिस होंगे उसकेyarithuhāعِبَادِىَमेरे बन्देʿibādiyaٱلصَّـٰلِحُونَजो नेक हैंl-ṣāliḥūna١٠٥
तथा निःसंदेह हमने 'लौहे महफ़ूज़' (में लिखने) के बाद अवतरित पुस्तकों1 में लिख दिया कि धरती के उत्तराधिकारी मेरे सदाचारी बंदे होंगे।
२१:१०६
إِنَّबेशकinnaفِىinهَـٰذَاउसमेंhādhāلَبَلَـٰغًۭاअलबत्ता एक बड़ी ख़बर हैlabalāghanلِّقَوْمٍउस क़ौम के लिएliqawminعَـٰبِدِينَजो इबादत गुज़ार हैʿābidīna١٠٦
निःसंदेह इबादत करने वालों के लिए इसमें एक बड़ा संदेश है।
२१:१०७
وَمَآऔर नहींwamāأَرْسَلْنَـٰكَभेजा हमने आपकोarsalnākaإِلَّاमगरillāرَحْمَةًۭरहमत बना करraḥmatanلِّلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों के लिएlil'ʿālamīna١٠٧
और (ऐ नबी!) हमने आपको समस्त संसार के लिए दया1 बनाकर भेजा है।
२१:१०८
قُلْकह दीजिएqulإِنَّمَاकि बेशकinnamāيُوحَىٰٓवही की जाती हैyūḥāإِلَىَّमेरी तरफ़ilayyaأَنَّمَآबेशकannamāإِلَـٰهُكُمْइलाह तुम्हाराilāhukumإِلَـٰهٌۭइलाह हैilāhunوَٰحِدٌۭ ۖएक हीwāḥidunفَهَلْतो क्याfahalأَنتُمतुमantumمُّسْلِمُونَफ़रमांबरदार होmus'limūna١٠٨
(ऐ रसूल!) आप कह दें कि मेरी ओर केवल यही वह़्य की जाती है कि तुम्हारा पूज्य केवल एक ही पूज्य है। तो क्या तुम आज्ञाकारी1 बनते हो?
२१:१०९
فَإِنफिर अगरfa-inتَوَلَّوْا۟वो मुँह मोड़ लेंtawallawفَقُلْतो कह दीजिएfaqulءَاذَنتُكُمْख़बरदार कर दिया मैं ने तुम्हेंādhantukumعَلَىٰequallyʿalāسَوَآءٍۢ ۖयक्साँ तौर परsawāinوَإِنْऔर नहींwa-inأَدْرِىٓमैं जानताadrīأَقَرِيبٌक्या क़रीब हैaqarībunأَمयाamبَعِيدٌۭदूर हैbaʿīdunمَّاजोتُوعَدُونَतुम वादा दिए जाते होtūʿadūna١٠٩
फिर अगर वे मुँह फेरें, तो (ऐ रसूल!) आप कह दें कि मैंने तुम्हें इस प्रकार सावधान1 कर दिया है कि (हम और तुम इसकी जानकारी में) बराबर हैं। और मैं नहीं जानता कि जिस (यातना) का तुम्हें वचन दिया जा रहा है, वह क़रीब है अथवा दूर।
२१:११०
إِنَّهُۥबेशक वोinnahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuٱلْجَهْرَज़ाहिर कोl-jahraمِنَ[of]minaٱلْقَوْلِबात में सेl-qawliوَيَعْلَمُऔर वो जानता हैwayaʿlamuمَاउस को जोتَكْتُمُونَतुम छुपाते होtaktumūna١١٠
निःसंदेह वह ऊँची आवाज़ से कही हुई बात को जानता है और वह भी जानता है जो तुम छिपाते हो।
२१:१११
وَإِنْऔर नहींwa-inأَدْرِىमैं जानताadrīلَعَلَّهُۥशायद कि वोlaʿallahuفِتْنَةٌۭफ़ितना होfit'natunلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumوَمَتَـٰعٌऔर फ़ायदा उठानाwamatāʿunإِلَىٰforilāحِينٍۢएक मुद्दत तकḥīnin١١١
और मैं नहीं जानता शायद यह1 तुम्हारे लिए एक परीक्षा हो और एक समय तक कुछ लाभ उठाना हो।
२१:११२
قَـٰلَकहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱحْكُمफ़ैसला कर देuḥ'kumبِٱلْحَقِّ ۗसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَرَبُّنَاऔर रब तुम्हाराwarabbunāٱلرَّحْمَـٰنُरहमान हैl-raḥmānuٱلْمُسْتَعَانُजिससे मदद तलब की जाती हैl-mus'taʿānuعَلَىٰउस परʿalāمَاजोتَصِفُونَतुम बयान करते होtaṣifūna١١٢
उस (नबी) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! सत्य के साथ फ़ैसला कर दे। और हमारा पालनहार ही वह अत्यंत दयावान् है, जिससे उन बोतों पर सहायता माँगी जाती है, जो तुम बयान करते हो।