२०

ता-हा

मक्की १३५ आयतें पारा १६
طه

सूरह ता-हा (طه) पवित्र क़ुरआन का २० वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें १३५ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
२०:१
طهط ہtta-ha١
ता, हा।
२०:२
مَآनहींأَنزَلْنَاनाज़िल किया हमनेanzalnāعَلَيْكَआप परʿalaykaٱلْقُرْءَانَक़ुरआनl-qur'ānaلِتَشْقَىٰٓकि आप मुसीबत में पड़ जाऐंlitashqā٢
हमने आपपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं अवतरित किया कि आप कष्ट में पड़ जाएँ।1
२०:३
إِلَّاमगरillāتَذْكِرَةًۭएक नसीहतtadhkiratanلِّمَنउसके लिए जोlimanيَخْشَىٰडरता होyakhshā٣
परंतु उसकी याददहानी (नसीहत) के लिए, जो डरता1 है।
२०:४
تَنزِيلًۭاनाज़िल करदा हैtanzīlanمِّمَّنْउसकी तरफ़ से जिसनेmimmanخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلْأَرْضَज़मीनl-arḍaوَٱلسَّمَـٰوَٰتِऔर आसमानों कोwal-samāwātiٱلْعُلَىजो बुलन्द हैंl-ʿulā٤
उसकी ओर से उतारा हुआ है, जिसने पृथ्वी और ऊँचे आकाशों को बनाया।।
२०:५
ٱلرَّحْمَـٰنُवो रहमान हैal-raḥmānuعَلَىoverʿalāٱلْعَرْشِजो अर्श परl-ʿarshiٱسْتَوَىٰबुलन्द हुआis'tawā٥
वह रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ।
२०:६
لَهُۥउसी के लिए हैlahuمَاजोفِى(is) inٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَاऔर जोwamāفِى(is) inٱلْأَرْضِज़मीन में हैl-arḍiوَمَاऔर जोwamāبَيْنَهُمَاदर्मियान है इन दोनों केbaynahumāوَمَاऔर जोwamāتَحْتَनीचे हैtaḥtaٱلثَّرَىٰगीली मिट्टी केl-tharā٦
उसी का1 है, जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है और जो उन दोनों के बीच है तथा जो गीली मिट्टी के नीचे है।
२०:७
وَإِنऔर अगरwa-inتَجْهَرْआप बुलन्द आवाज़ से करेंtajharبِٱلْقَوْلِबात कोbil-qawliفَإِنَّهُۥतो बेशक वोfa-innahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuٱلسِّرَّपोशीदा कोl-siraوَأَخْفَىऔर ज़्यादा ख़ुफ़िया कोwa-akhfā٧
यदि तुम उच्च स्वर में बात करो, तो वह गुप्त और उससे भी अधिक गुप्त बात को जानता है।
२०:८
ٱللَّهُअल्लाहal-lahuلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَ ۖवो हीhuwaلَهُउसी के लिए हैंlahuٱلْأَسْمَآءُनामl-asmāuٱلْحُسْنَىٰबहुत अच्छेl-ḥus'nā٨
अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं, सबसे अच्छे नाम उसी के हैं।
२०:९
وَهَلْऔर क्याwahalأَتَىٰكَआई आपके पासatākaحَدِيثُख़बरḥadīthuمُوسَىٰٓमूसा कीmūsā٩
और क्या (ऐ नबी!) आपके पास मूसा की ख़बर पहुँची?
२०:१०
إِذْजबidhرَءَاउसने देखीraāنَارًۭاआगnāranفَقَالَपस कहाfaqālaلِأَهْلِهِअपने घर वालों सेli-ahlihiٱمْكُثُوٓا۟ठहरोum'kuthūإِنِّىٓबेशक मैंinnīءَانَسْتُदेखी है मैंनेānastuنَارًۭاएक आगnāranلَّعَلِّىٓशायद कि मैंlaʿallīءَاتِيكُمमैं ले आऊँ तुम्हारे पासātīkumمِّنْهَاउसमें सेmin'hāبِقَبَسٍशोला/अंगाराbiqabasinأَوْयाawأَجِدُमैं पाऊँajiduعَلَىatʿalāٱلنَّارِउस आग परl-nāriهُدًۭىरहनुमाईhudan١٠
जब उसने एक आग देखी, तो अपने घरवालों से कहा : ठहरो, निःसंदेह मैंने एक आग देखी है, शायद मैं तुम्हारे पास उससे कोई अंगार लाे आऊँ, अथवा उस आग पर कोई मार्गदर्शन पा लूँ।1
२०:११
فَلَمَّآफिर जबfalammāأَتَىٰهَاवो आया उसके पासatāhāنُودِىَपुकारा गयाnūdiyaيَـٰمُوسَىٰٓऐ मूसाyāmūsā١١
फिर जब वह उसके पास आया तो उसे आवाज़ दी गई : ऐ मूसा!
२०:१२
إِنِّىٓबेशक मैंinnīأَنَا۠मैं हीanāرَبُّكَरब हूँ तुम्हाराrabbukaفَٱخْلَعْपस उतार दोfa-ikh'laʿنَعْلَيْكَ ۖअपने दोनों जूतेnaʿlaykaإِنَّكَबेशक तुमinnakaبِٱلْوَادِवादी में होbil-wādiٱلْمُقَدَّسِमुक़द्दसl-muqadasiطُوًۭىतुवा कीṭuwan١٢
निःसंदेह मैं ही तेरा पालनहार हूँ, अतः अपने दोनों जूते उतार दे, निःसंदेह तू पवित्र वादी “तुवा” में है।
२०:१३
وَأَنَاऔर मैंwa-anāٱخْتَرْتُكَचुन लिया मैंने तुझेikh'tartukaفَٱسْتَمِعْपस ग़ौर से सुनोfa-is'tamiʿلِمَاउसे जोlimāيُوحَىٰٓवही की जाती हैyūḥā١٣
और मैंने तुझे चुन1 लिया है। अतः ध्यान से सुन, जो वह़्य की जा रही है।
२०:१४
إِنَّنِىٓबेशक मैंinnanīأَنَاमैं हीanāٱللَّهُअल्लाह हूँl-lahuلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّآमगरillāأَنَا۠मैं हीanāفَٱعْبُدْنِىपस इबादत करो मेरीfa-uʿ'bud'nīوَأَقِمِऔर क़ायम करोwa-aqimiٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataلِذِكْرِىٓमेरी याद के लिएlidhik'rī١٤
निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तो मेरी ही इबादत कर तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ स्थापित कर।1
२०:१५
إِنَّबेशकinnaٱلسَّاعَةَक़यामतl-sāʿataءَاتِيَةٌआने वाली हैātiyatunأَكَادُक़रीब है कि मैंakāduأُخْفِيهَاमैं ख़ुफ़िया रखूँगा उसेukh'fīhāلِتُجْزَىٰताकि बदला दिया जाएlituj'zāكُلُّeverykulluنَفْسٍۭहर नफ़्सnafsinبِمَاउसका जोbimāتَسْعَىٰउसने कोशिश कीtasʿā١٥
निश्चय क़ियामत आने वाली है, मैं क़रीब हूँ कि उसे छिपाकर रखूँ। ताकि प्रत्येक प्राणी को उसका बदला दिया जाए, जो वह प्रयास करता है।
२०:१६
فَلَاपस नाfalāيَصُدَّنَّكَहरगिज़ रोके तुझेyaṣuddannakaعَنْهَاउससेʿanhāمَنवो जोmanلَّا(does) notيُؤْمِنُनहीं वो ईमान रखताyu'minuبِهَاउस परbihāوَٱتَّبَعَऔर वो पैरवी करता हैwa-ittabaʿaهَوَىٰهُअपनी ख़्वाहिशे नफ़्स कीhawāhuفَتَرْدَىٰवरना तू हलाक हो जाएगाfatardā١٦
अतः तुझे उससे वह व्यक्ति कहीं रोक न दे, जो उसपर ईमान (विश्वास) नहीं रखता और अपनी इच्छा के पालन में लगा है, अन्यथा तेरा नाश हो जाएगा।
२०:१७
وَمَاऔर क्या हैwamāتِلْكَयेtil'kaبِيَمِينِكَतेरे दाऐं हाथ मेंbiyamīnikaيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsā١٧
और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?
२०:१८
قَالَकहाqālaهِىَयेhiyaعَصَاىَमेरी लाठी/असा हैʿaṣāyaأَتَوَكَّؤُا۟मैं सहारा लेता हूँatawakka-uعَلَيْهَاइस परʿalayhāوَأَهُشُّऔर मैं पत्ते झाड़ता हूँwa-ahushuبِهَاसाथ इसकेbihāعَلَىٰforʿalāغَنَمِىअपनी बकरियों परghanamīوَلِىَऔर मेरे लिएwaliyaفِيهَاइसमेंfīhāمَـَٔارِبُफ़ायदे हैंmaāribuأُخْرَىٰकुछ दूसरेukh'rā١٨
उसने कहा : यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और मेरे लिए इसमें और भी कई ज़रूरतें हैं।
२०:१९
قَالَफ़रमायाqālaأَلْقِهَاडाल दो इसेalqihāيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsā١٩
फरमाया : इसे फेंक दे, ऐ मूसा!
२०:२०
فَأَلْقَىٰهَاतो उसने डाल दिया उसेfa-alqāhāفَإِذَاतो अचानकfa-idhāهِىَवोhiyaحَيَّةٌۭसाँप थाḥayyatunتَسْعَىٰदौड़ता हुआtasʿā٢٠
तो उसने उसे फेंक दिया और सहसा वह एक साँप था, जो दोड़ रहा था।
२०:२१
قَالَफ़रमायाqālaخُذْهَاपकड़ लो इसेkhudh'hāوَلَاऔर नाwalāتَخَفْ ۖतुम डरोtakhafسَنُعِيدُهَاअनक़रीब हम लौटा देंगे इसेsanuʿīduhāسِيرَتَهَاइसकी हालत परsīratahāٱلْأُولَىٰपहलीl-ūlā٢١
फरमाया : इसे पकड़ ले और डर मत, जल्द ही हम इसे इसकी प्रथम स्थिति में लौटा देंगे।
२०:२२
وَٱضْمُمْऔर मिला लोwa-uḍ'mumيَدَكَअपने हाथ कोyadakaإِلَىٰtoilāجَنَاحِكَअपने बाज़ू (पहलू) के साथjanāḥikaتَخْرُجْवो निकलेगाtakhrujبَيْضَآءَसफ़ेद/रोशनbayḍāaمِنْwithout anyminغَيْرِबग़ैरghayriسُوٓءٍऐब केsūinءَايَةًनिशानीāyatanأُخْرَىٰदूसरीukh'rā٢٢
और अपना हाथ अपनी कांख (बग़ल) की ओर लगा दे, वह बिना किसी दोष के सफेद (चमकता हुआ) निकलेगा, जबकि यह एक और निशानी है।
२०:२३
لِنُرِيَكَताकि हम दिखाऐं तुझेlinuriyakaمِنْofminءَايَـٰتِنَاअपनी निशानियों सेāyātināٱلْكُبْرَىबड़ी-बड़ीl-kub'rā٢٣
ताकि हम तुझे अपनी कुछ बड़ी निशानियाँ दिखाएँ।
२०:२४
ٱذْهَبْजाओidh'habإِلَىٰtoilāفِرْعَوْنَतरफ़ फ़िरऔन केfir'ʿawnaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuطَغَىٰसरकश हो गया हैṭaghā٢٤
फ़िरऔन के पास जा, निश्चय वह सरकश हो गया है।
२०:२५
قَالَकहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱشْرَحْखोल देish'raḥلِىमेरे लिएصَدْرِىसीना मेराṣadrī٢٥
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे।
२०:२६
وَيَسِّرْऔर आसान कर देwayassirلِىٓमेरे लिएأَمْرِىकाम मेराamrī٢٦
तथा मेरे लिए मेरा काम सरल कर दे।
२०:२७
وَٱحْلُلْऔर खोल देwa-uḥ'lulعُقْدَةًۭगिरहʿuq'datanمِّنfromminلِّسَانِىमेरी ज़बान कीlisānī٢٧
और मेरी ज़बान की गाँठ खोल दे।
२०:२८
يَفْقَهُوا۟(ताकि) वो समझ जाऐंyafqahūقَوْلِىबात मेरीqawlī٢٨
ताकि वे मेरी बात समझ लें।
२०:२९
وَٱجْعَلऔर बना देwa-ij'ʿalلِّىमेरे लिएوَزِيرًۭاवज़ीर/मददगारwazīranمِّنْfromminأَهْلِىमेरे घर वालों में सेahlī٢٩
तथा मेरे लिए मेरे अपने घरवालों में से एक सहायकबना दे।
२०:३०
هَـٰرُونَहारूनhārūnaأَخِىमेरे भाई कोakhī٣٠
हारून को, जो मेरा भाई है।
२०:३१
ٱشْدُدْमज़बूत कर देush'dudبِهِۦٓसाथ इसकेbihiأَزْرِىक़ुव्वत/कमर मेरीazrī٣١
उसके साथ मेरी पीठ मज़बूत़ कर दे।
२०:३२
وَأَشْرِكْهُऔर शरीक कर दे इसेwa-ashrik'huفِىٓ[in]أَمْرِىमेरे काम मेंamrī٣٢
और उसे मेरे काम में शरीक कर दे।
२०:३३
كَىْताकिkayنُسَبِّحَكَहम तस्बीह करें तेरीnusabbiḥakaكَثِيرًۭاकसरत सेkathīran٣٣
ताकि हम तेरी बहुत ज़्यादा पवित्रता बयान करें।
२०:३४
وَنَذْكُرَكَऔर हम याद करें तुझेwanadhkurakaكَثِيرًاकसरत सेkathīran٣٤
तथा हम तुझे बहुत ज़्यादा याद करें।
२०:३५
إِنَّكَबेशक तूinnakaكُنتَतू ही हैkuntaبِنَاहमेंbināبَصِيرًۭاख़ूब देखने वालाbaṣīran٣٥
निःसंदेह तू हमेशा हमारी स्थिति को भली प्रकार देखने वाला है।
२०:३६
قَالَफ़रमायाqālaقَدْतहक़ीक़qadأُوتِيتَतू दे दिया गयाūtītaسُؤْلَكَसवाल अपनाsu'lakaيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsā٣٦
फरमाया : निःसंदेह तुझे दिया गया जो तूने माँगा, ऐ मूसा!
२०:३७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadمَنَنَّاएहसान किया था हमनेmanannāعَلَيْكَतुझ परʿalaykaمَرَّةًएक बारmarratanأُخْرَىٰٓऔर भीukh'rā٣٧
और निश्चय ही हमने तुझपर एक और बार भी उपकार किया।1
२०:३८
إِذْजबidhأَوْحَيْنَآवही (इल्हाम) की हमनेawḥaynāإِلَىٰٓtoilāأُمِّكَतरफ़ तेरी माँ केummikaمَاजोيُوحَىٰٓवही (इल्हाम) की जाती हैyūḥā٣٨
जब हमने तेरी माँ की ओर वह़्य की, जो वह़्य की जाती थी।
२०:३९
أَنِकिaniٱقْذِفِيهِडाल दे इसेiq'dhifīhiفِىinٱلتَّابُوتِताबूत मेंl-tābūtiفَٱقْذِفِيهِफिर डाल दे उसेfa-iq'dhifīhiفِىinٱلْيَمِّदरिया मेंl-yamiفَلْيُلْقِهِफिर ज़रूर डाल देगा उसेfalyul'qihiٱلْيَمُّदरियाl-yamuبِٱلسَّاحِلِसाहिल परbil-sāḥiliيَأْخُذْهُपकड़ लेगा उसेyakhudh'huعَدُوٌّۭदुश्मनʿaduwwunلِّىमेराوَعَدُوٌّۭऔर दुश्मनwaʿaduwwunلَّهُۥ ۚउसकाlahuوَأَلْقَيْتُऔर डाल दी मैंनेwa-alqaytuعَلَيْكَतुझ परʿalaykaمَحَبَّةًۭमोहब्बतmaḥabbatanمِّنِّىअपनी तरफ़ सेminnīوَلِتُصْنَعَऔर ताकि तू परवरिश किया जाएwalituṣ'naʿaعَلَىٰunderʿalāعَيْنِىٓमेरी आँखों के सामनेʿaynī٣٩
यह कि तू इसे ताबूत (संदूक़) में रख दे, फिर उसे नदी में डाल दे, फिर नदी उसे किनारे पर डाल दे, उसे मेरा एक शत्रु और उसका शत्रु उठा लेगा1 और मैंने तुझपर अपनी ओर से एक प्रेम2 डाल दिया और ताकि तेरा पालन-पोषण मेरी आँखों के सामने किया जाए।
२०:४०
إِذْजबidhتَمْشِىٓचलती थीtamshīأُخْتُكَबहन तेरीukh'tukaفَتَقُولُफिर वो कहती थीfataqūluهَلْक्याhalأَدُلُّكُمْमैं रहनुमाई करुँ तुम्हारीadullukumعَلَىٰ[to]ʿalāمَنउस पर जोmanيَكْفُلُهُۥ ۖकिफ़ालत करेगा इसकीyakfuluhuفَرَجَعْنَـٰكَतो लौटा दिया हमने तुझेfarajaʿnākaإِلَىٰٓtoilāأُمِّكَतरफ़ तेरी माँ केummikaكَىْthatkayتَقَرَّताकि ठन्डी होtaqarraعَيْنُهَاआँख उसकीʿaynuhāوَلَاऔर नाwalāتَحْزَنَ ۚवो ग़म करेtaḥzanaوَقَتَلْتَऔर क़त्ल किया था तूनेwaqataltaنَفْسًۭاएक जान कोnafsanفَنَجَّيْنَـٰكَतो निजात दी हमने तुझेfanajjaynākaمِنَfromminaٱلْغَمِّग़म सेl-ghamiوَفَتَنَّـٰكَऔर आज़माया था हमने तुझेwafatannākaفُتُونًۭا ۚख़ूब आज़मानाfutūnanفَلَبِثْتَफिर ठहरा रहा तूfalabith'taسِنِينَकई सालsinīnaفِىٓwithأَهْلِ(the) peopleahliمَدْيَنَअहले मदयन मेंmadyanaثُمَّफिरthummaجِئْتَआ गया तूji'taعَلَىٰatʿalāقَدَرٍۢमुकर्रर अंदाज़े परqadarinيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsā٤٠
जब तेरी बहन1 चल रही थी और कह रही थी : क्या मैं तुम्हें उसका पता बता दूँ, जो इसका पालन-पोषण करे? फिर हमने तुझे तेरी माँ के पास लौटा दिया, ताकि उसकी आँख ठंडी हो और वह शोक न करे। तथा तूने एक आदमी को मार डाला2, तो हमने तुझे दुःखसे बचा लिया और हमने तुम्हारी अच्छी तरह से परीक्षा ली। फिर तू कई वर्ष मदयन वालों के बीच ठहरा रहा, फिर तू एक निश्चित अनुमान पर आया, ऐ मूसा!
२०:४१
وَٱصْطَنَعْتُكَऔर चुन लिया मैंने तुझेwa-iṣ'ṭanaʿtukaلِنَفْسِىअपने लिएlinafsī٤١
और मैंने तुझे विशेष रूप से अपने लिए बनाया है।
२०:४२
ٱذْهَبْजाओidh'habأَنتَतुमantaوَأَخُوكَऔर भाई तुम्हाराwa-akhūkaبِـَٔايَـٰتِىसाथ मेरी निशानियों केbiāyātīوَلَاऔर नाwalāتَنِيَاतुम दोनों सुस्ती करनाtaniyāفِىinذِكْرِىमेरी याद मेंdhik'rī٤٢
तू और तेरा भाई मेरी निशानियाँ लेकर जाओ और मुझे याद करने में आलस्य न करो।
२०:४३
ٱذْهَبَآदोनों जाओidh'habāإِلَىٰtoilāفِرْعَوْنَतरफ़ फ़िरऔन केfir'ʿawnaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuطَغَىٰसरकश हो गया हैṭaghā٤٣
तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ, निःसंदेह वह सरकश हो गया है।
२०:४४
فَقُولَاपस दोनों कहोfaqūlāلَهُۥउसेlahuقَوْلًۭاबातqawlanلَّيِّنًۭاनर्मlayyinanلَّعَلَّهُۥशायद कि वोlaʿallahuيَتَذَكَّرُवो नसीहत पकड़ेyatadhakkaruأَوْयाawيَخْشَىٰवो डर जाएyakhshā٤٤
तो उससे कोमल बात करो, आशा है कि वह उपदेश ग्रहण करे, या (अल्लाह से) डर जाए।
२०:४५
قَالَاदोनों ने कहाqālāرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāإِنَّنَاबेशक हमinnanāنَخَافُहम डरते हैंnakhāfuأَنकिanيَفْرُطَवो ज़्यादती करेगाyafruṭaعَلَيْنَآहम परʿalaynāأَوْयाawأَنये किanيَطْغَىٰवो सरकशी करेगाyaṭghā٤٥
दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! निश्चय ह डरते हैं कि वह हमपर अत्याचार करेगा, या हद से बढ़ जाएगा।
२०:४६
قَالَफ़रमायाqālaلَا(Do) notتَخَافَآ ۖना तुम दोनों डरोtakhāfāإِنَّنِىबेशक मैंinnanīمَعَكُمَآसाथ हूँ तुम दोनों केmaʿakumāأَسْمَعُमैं सुन रहा हूँasmaʿuوَأَرَىٰऔर मैं देख रहा हूँwa-arā٤٦
फरमाया : डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ, सब कुछ सुन रहा हूँ और सब कुछ देख रहा हूँ।
२०:४७
فَأْتِيَاهُपस दोनों जाओ उसके पासfatiyāhuفَقُولَآफिर दोनों कहोfaqūlāإِنَّاबेशक हमinnāرَسُولَاरसूल हैंrasūlāرَبِّكَतेरे रब केrabbikaفَأَرْسِلْपस भेज देfa-arsilمَعَنَاसाथ हमारेmaʿanāبَنِىٓ(the) Children of Israelbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल कोis'rāīlaوَلَاऔर नाwalāتُعَذِّبْهُمْ ۖतो अज़ाब दे उन्हेंtuʿadhib'humقَدْतहक़ीक़qadجِئْنَـٰكَलाए हैं हम तेरे पासji'nākaبِـَٔايَةٍۢनिशानीbiāyatinمِّنfromminرَّبِّكَ ۖतेरे रब की तरफ़ सेrabbikaوَٱلسَّلَـٰمُऔर सलाम हैwal-salāmuعَلَىٰonʿalāمَنِउस पर जोmaniٱتَّبَعَपैरवी करेittabaʿaٱلْهُدَىٰٓहिदायत कीl-hudā٤٧
अतः तुम दोनों उसके पास जाओ और कहो : हम तेरे पालनहार के रसूल हैं। अतः तू हमारे साथ बनी इसराईल को भेज दे और उन्हें यातना न दे, निश्चय हम तेरे पास तेरे पालनहार की ओर से एक निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए, जो मार्गदर्शन का अनुसरण करे।
२०:४८
إِنَّاबेशक हमinnāقَدْतहक़ीक़qadأُوحِىَवही की गईūḥiyaإِلَيْنَآतरफ़ हमारेilaynāأَنَّकि बेशकannaٱلْعَذَابَअज़ाब हैl-ʿadhābaعَلَىٰ(will be) onʿalāمَنउस पर जोmanكَذَّبَझुठलाएkadhabaوَتَوَلَّىٰऔर मुँह मोड़ेwatawallā٤٨
निःसंदेह हमारी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है कि निश्चय ही यातना उसके लिए है, जिसने झुठलाया और मुँह फेरा।
२०:४९
قَالَउसने कहाqālaفَمَنफिर कौन हैfamanرَّبُّكُمَاरब तुम दोनों काrabbukumāيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsā٤٩
उसने कहा : तुम दोनों का पालनहार कौन है, ऐ मूसा!?
२०:५०
قَالَकहाqālaرَبُّنَاहमारा रबrabbunāٱلَّذِىٓवो है जिसनेalladhīأَعْطَىٰअता कीaʿṭāكُلَّ(to) everykullaشَىْءٍहर चीज़ कोshayinخَلْقَهُۥसूरत उसकीkhalqahuثُمَّफिरthummaهَدَىٰरहनुमाई कीhadā٥٠
(मूसा ने) कहा : हमारा पालनहार वह है, जिसने हर चीज़ को उसका आकार और रूप दिया, फिर रास्ता दिखाया।1
२०:५१
قَالَकहाqālaفَمَاपस क्याfamāبَالُहाल हैbāluٱلْقُرُونِक़ौमों काl-qurūniٱلْأُولَىٰपहलीl-ūlā٥١
उसने कहा : अच्छा, तो पहले ज़माने के लोगों का क्या हाल है?
२०:५२
قَالَकहाqālaعِلْمُهَاइल्म उनकाʿil'muhāعِندَपास हैʿindaرَبِّىमेरे रब केrabbīفِىinكِتَـٰبٍۢ ۖएक किताब मेंkitābinلَّاNotيَضِلُّनहीं भटकताyaḍilluرَبِّىमेरा रबrabbīوَلَاऔर नाwalāيَنسَىवो भूलता हैyansā٥٢
(मूसा ने) कहा : उनका ज्ञान मेरे रब के पास एक किताब में है, मेरा रब न भटकता है और न भूलता है।1
२०:५३
ٱلَّذِىवो जिसनेalladhīجَعَلَबनायाjaʿalaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْأَرْضَज़मीन कोl-arḍaمَهْدًۭاबिछौनाmahdanوَسَلَكَऔर उसने जारी कियाwasalakaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفِيهَاउसमेंfīhāسُبُلًۭاरास्तों कोsubulanوَأَنزَلَऔर उसने उताराwa-anzalaمِنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۭपानीmāanفَأَخْرَجْنَاफिर निकालीं हमनेfa-akhrajnāبِهِۦٓसाथ उसकेbihiأَزْوَٰجًۭاकई अक़सामazwājanمِّنofminنَّبَاتٍۢपोधौं में सेnabātinشَتَّىٰमुख़्तलिफ़shattā٥٣
वही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को बिछौना बनाया और उसमें तुम्हारे लिए रास्ते बनाए और आसमान से कुछ पानी उतारा, फिर हमने उसके द्वारा विभिन्न पौधों की कई क़िस्में निकालीं।
२०:५४
كُلُوا۟खाओkulūوَٱرْعَوْا۟और चराओwa-ir'ʿawأَنْعَـٰمَكُمْ ۗअपने मवेशियों कोanʿāmakumإِنَّबेशकinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّأُو۟لِىfor possessorsli-ulīٱلنُّهَىٰअक़्ल वालों के लिएl-nuhā٥٤
खाओ और अपने चौपायों को चराओ, निःसंदेह इसमें बुद्धि वाले लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं।
२०:५५
۞ مِنْهَاइसी सेmin'hāخَلَقْنَـٰكُمْपैदा किया हमने तुम्हेंkhalaqnākumوَفِيهَاऔर इसी मेंwafīhāنُعِيدُكُمْहम लौटाऐंगे तुम्हेंnuʿīdukumوَمِنْهَاऔर इसी में सेwamin'hāنُخْرِجُكُمْहम निकालेंगे तुम्हेंnukh'rijukumتَارَةًtimetāratanأُخْرَىٰदूसरी मर्तबाukh'rā٥٥
इसी से हमने तुम्हें पैदा किया और इसी में हम तुम्हें लौटाएँगे और इसी से हम तुम्हें एक बार फिर1 निकालेंगे।
२०:५६
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرَيْنَـٰهُदिखाईं हमने उसेaraynāhuءَايَـٰتِنَاनिशानियाँ अपनीāyātināكُلَّهَاसारी की सारीkullahāفَكَذَّبَतो उसे झुठला दियाfakadhabaوَأَبَىٰऔर इन्कार कियाwa-abā٥٦
और निःसंदेह हमने उसे अपनी सब निशानियाँ दिखाईं, तो उसने झुठलाया और इनकार किया।
२०:५७
قَالَउसने कहाqālaأَجِئْتَنَاक्या आया है तू हमारे पासaji'tanāلِتُخْرِجَنَاताकि तू निकाले हमेंlitukh'rijanāمِنْofminأَرْضِنَاहमारी ज़मीन सेarḍināبِسِحْرِكَसाथ अपने जादू केbisiḥ'rikaيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsā٥٧
उसने कहा : क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमें हमारी धरती से अपने जादू के द्वारा निकाल दे, ऐ मूसा!?
२०:५८
فَلَنَأْتِيَنَّكَपस अलबत्ता हम ज़रूर लाऐंगे तेरे पासfalanatiyannakaبِسِحْرٍۢजादूbisiḥ'rinمِّثْلِهِۦऐसा हीmith'lihiفَٱجْعَلْपस मुक़र्रर करfa-ij'ʿalبَيْنَنَاदर्मियान हमारेbaynanāوَبَيْنَكَऔर दर्मियान अपनेwabaynakaمَوْعِدًۭاवादे का वक़्तmawʿidanلَّاnotنُخْلِفُهُۥनहीं हम ख़िलाफ़ करेंगे उससेnukh'lifuhuنَحْنُहमnaḥnuوَلَآऔर नाwalāأَنتَतुमantaمَكَانًۭاएक जगह होmakānanسُوًۭىहमवारsuwan٥٨
तो हम भी अवश्य तेरे पास ऐसा ही जादू लाएँगे, अतः तू हमारे और अपने बीच वादे का एक समय निर्धारित कर दे, कि न हम उसके ख़िलाफ़ हों और न तू, ऐसी जगह जो बराबर हो।
२०:५९
قَالَकहाqālaمَوْعِدُكُمْवादे का वक़्त तुम्हाराmawʿidukumيَوْمُदिन हैyawmuٱلزِّينَةِज़ीनत (जशन) काl-zīnatiوَأَنऔर ये किwa-anيُحْشَرَइकट्ठे किए जाऐंगेyuḥ'sharaٱلنَّاسُलोगl-nāsuضُحًۭىचाश्त के वक़्तḍuḥan٥٩
(मूसा ने) कहा : तुम्हारे वादे का समय उत्सव का दिन1 है तथा यह कि लोग दिन चढ़े इकट्ठे हो जाएँ।
२०:६०
فَتَوَلَّىٰतो पलटाfatawallāفِرْعَوْنُफ़िरऔनfir'ʿawnuفَجَمَعَफिर उसने जमा कीfajamaʿaكَيْدَهُۥचाल अपनीkaydahuثُمَّफिरthummaأَتَىٰआ गयाatā٦٠
फिर फ़िरऔन वापस लौटा, उसने अपने सारे हथकंडे जुटाए, फिर आ गया।
२०:६१
قَالَकहाqālaلَهُمउन्हेंlahumمُّوسَىٰमूसा नेmūsāوَيْلَكُمْअफ़सोस तुम परwaylakumلَا(Do) notتَفْتَرُوا۟ना तुम गढ़ोtaftarūعَلَىagainstʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiكَذِبًۭاझूठkadhibanفَيُسْحِتَكُمवरना वो फ़ना कर देगा तुम्हेंfayus'ḥitakumبِعَذَابٍۢ ۖसाथ अज़ाब केbiʿadhābinوَقَدْऔर तहक़ीक़waqadخَابَवो नामुराद हुआkhābaمَنِजिसनेmaniٱفْتَرَىٰगढ़ लिया झूठif'tarā٦١
मूसा ने उन (जादूगरों) से कहा : तुम्हारा विनाश हो! अल्लाह पर कोई झूठ मत गढ़ना, नहीं तो वह तुम्हें यातना देकर नष्ट कर देगा और निश्चय विफल हुआ, जिसने झूठ गढ़ा।
२०:६२
فَتَنَـٰزَعُوٓا۟तो वो झगड़ने लगेfatanāzaʿūأَمْرَهُمअपने मामले मेंamrahumبَيْنَهُمْआपस मेंbaynahumوَأَسَرُّوا۟और उन्होंने चुपके-चुपके कीwa-asarrūٱلنَّجْوَىٰसरगोशीl-najwā٦٢
तो वे अपने मामले में आपस में मतभेद करने लगे1 और उन्होंने चुपके-चुपके कानाफूसी की।
२०:६३
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūإِنْयक़ीननinهَـٰذَٰنِये दोनोंhādhāniلَسَـٰحِرَٰنِअलबत्ता जादूगर हैंlasāḥirāniيُرِيدَانِवो दोनों चाहते हैंyurīdāniأَنकिanيُخْرِجَاكُمवो दोनों निकाल दें तुम्हेंyukh'rijākumمِّنْofminأَرْضِكُمतुम्हारी ज़मीन सेarḍikumبِسِحْرِهِمَاसाथ अपने जादू केbisiḥ'rihimāوَيَذْهَبَاऔर वो दोनों ले जाऐंwayadhhabāبِطَرِيقَتِكُمُतुम्हारे तरीक़े कोbiṭarīqatikumuٱلْمُثْلَىٰजो इन्तिहाई मिसाली हैl-muth'lā٦٣
(कुछ ने) कहा : निःसंदेह ये दोनों जादूगर हैं, वे अपने जादू द्वारा तुम्हें तुम्हारे भूभाग से निकाल देना चाहते हैं और तुम्हारे सबसे अच्छे रास्ते (आदर्श प्रणाली) को समाप्त कर देना चाहते हैं।
२०:६४
فَأَجْمِعُوا۟तो जमा करोfa-ajmiʿūكَيْدَكُمْचाल अपनीkaydakumثُمَّफिरthummaٱئْتُوا۟आ जाओi'tūصَفًّۭا ۚसफ़ बनाकरṣaffanوَقَدْऔर तहक़ीक़waqadأَفْلَحَफ़लाह पा गयाaflaḥaٱلْيَوْمَआजl-yawmaمَنِवो जोmaniٱسْتَعْلَىٰग़ालिब हुआis'taʿlā٦٤
अतः तुम अपने उपाय को मज़बूत कर लो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आ जाओ और निश्चय आज वही सफल होगा, जो हावी रहेगा।
२०:६५
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰمُوسَىٰٓऐ मूसाyāmūsāإِمَّآया तोimmāأَنये किanتُلْقِىَतुम डालोtul'qiyaوَإِمَّآऔर याwa-immāأَنये किanنَّكُونَहों हमnakūnaأَوَّلَपहलेawwalaمَنْजोmanأَلْقَىٰडालेंalqā٦٥
उन्होंने कहा : ऐ मूसा! या तो तुम फेंको या यह कि हम पहले फेंकने वाले हो जाएँ।
२०:६६
قَالَकहाqālaبَلْबल्किbalأَلْقُوا۟ ۖतुम डालोalqūفَإِذَاतो यकायकfa-idhāحِبَالُهُمْरस्सियाँ उनकीḥibāluhumوَعِصِيُّهُمْऔर लाठियाँ उनकीwaʿiṣiyyuhumيُخَيَّلُख़्याल डाला गयाyukhayyaluإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiمِنbyminسِحْرِهِمْउनके जादू की वजह सेsiḥ'rihimأَنَّهَاकि बेशक वोannahāتَسْعَىٰवो दौड़ रही हैंtasʿā٦٦
(मूसा ने) कहा : बल्कि तुम्हीं फेंको। फिर उनकी रस्सियाँ तथा लाठियाँ, उसकी कल्पना में आता था कि उनके जादू के कारण सचमुच दौड़ रही हैं।
२०:६७
فَأَوْجَسَतो महसूस कियाfa-awjasaفِىinنَفْسِهِۦअपने दिल मेंnafsihiخِيفَةًۭख़ौफ़ कोkhīfatanمُّوسَىٰमूसा नेmūsā٦٧
तो मूसा ने अपने मन में एक डर महसूस किया।1
२०:६८
قُلْنَاकहा हमनेqul'nāلَا(Do) notتَخَفْना तुम डरोtakhafإِنَّكَबेशक तुमinnakaأَنتَतुम हीantaٱلْأَعْلَىٰग़ालिब (रहोगे)l-aʿlā٦٨
हमने कहा : डरो मत, निश्चित रूप से तू ही प्रबल होगा।
२०:६९
وَأَلْقِऔर डाल दोwa-alqiمَاउसको जोفِى(is) inيَمِينِكَतुम्हारे दाऐं हाथ में हैyamīnikaتَلْقَفْवो निगल जाएगाtalqafمَاउसको जोصَنَعُوٓا۟ ۖउन्होंने बनायाṣanaʿūإِنَّمَاबेशकinnamāصَنَعُوا۟जो उन्होंने बनायाṣanaʿūكَيْدُचाल हैkayduسَـٰحِرٍۢ ۖएक जादूगर कीsāḥirinوَلَاऔर नहींwalāيُفْلِحُफ़लाह पा सकताyuf'liḥuٱلسَّاحِرُजादूगरl-sāḥiruحَيْثُजहाँ कहींḥaythuأَتَىٰवो आएatā٦٩
और फेंक दे, जो तेरे दाहिने हाथ में है, वह निगल जाएगा जो कुछ उन्होंने रचा है। निःसंदेह उन्होंने जो कुछ रचा है, वह जादूगर की चाल है और जादूगर जहाँ भी आए, सफल नहीं होता।
२०:७०
فَأُلْقِىَतो गिरा दिए गएfa-ul'qiyaٱلسَّحَرَةُजादूगरl-saḥaratuسُجَّدًۭاसजदे मेंsujjadanقَالُوٓا۟कहने लगेqālūءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِرَبِّरब परbirabbiهَـٰرُونَहारूनhārūnaوَمُوسَىٰऔर मूसा केwamūsā٧٠
फिर जादूगर सजदे में गिर गए, उन्होंने कहा : हम हारून और मूसा के रब पर ईमान लाए।
२०:७१
قَالَकहा (फ़िरऔन) नेqālaءَامَنتُمْईमान ले आए तुमāmantumلَهُۥइस परlahuقَبْلَइससे पहलेqablaأَنْकिanءَاذَنَमैं इजाज़त दूँādhanaلَكُمْ ۖतुम्हेंlakumإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَكَبِيرُكُمُअलबत्ताlakabīrukumuٱلَّذِىजिसनेalladhīعَلَّمَكُمُसिखाया तुम्हेंʿallamakumuٱلسِّحْرَ ۖजादूl-siḥ'raفَلَأُقَطِّعَنَّतो अलबत्ता मैं ज़रूर काट डालूँगाfala-uqaṭṭiʿannaأَيْدِيَكُمْतुम्हारे हाथों कोaydiyakumوَأَرْجُلَكُمऔर तुम्हारे पाँवों कोwa-arjulakumمِّنْofminخِلَـٰفٍۢमुख़ालिफ़ (सिम्त) सेkhilāfinوَلَأُصَلِّبَنَّكُمْऔर अलबत्ता मैं ज़रूर सूली चढ़ाऊँगा तुम्हेंwala-uṣallibannakumفِىonجُذُوعِतनों परjudhūʿiٱلنَّخْلِखजूर के दरख़्त केl-nakhliوَلَتَعْلَمُنَّऔर अलबत्ता तुम ज़रूर जान लोगेwalataʿlamunnaأَيُّنَآकौन सा हम में सेayyunāأَشَدُّज़्यादा सख़्त हैashadduعَذَابًۭاसज़ा देने मेंʿadhābanوَأَبْقَىٰऔर ज़्यादा बाक़ी रहने वालाwa-abqā٧١
उसने कहा : तुम उसपर ईमान ले आए इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ? निश्चय ही यह तुम्हारा बड़ा है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। इसलिए निश्चित रूप से मैं तुम्हारे हाथ और तुम्हारे पैर विपरीत दिशा1 से बुरी तरह काट दूँगा, और अवश्य ही तुम्हें खजूर के तनों पर सूली दूँगा तथा निश्चय ही तुम अवश्य जान लोगे कि हममें से कौन अधिक कठोर एवं स्थायी यातना देने वाला है।
२०:७२
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūلَنहरगिज़ नहींlanنُّؤْثِرَكَहम तरजीह देंगे तुझेnu'thirakaعَلَىٰoverʿalāمَاउस पर जोجَآءَنَاआ गया हमारे पासjāanāمِنَofminaٱلْبَيِّنَـٰتِखुली निशानियों में सेl-bayinātiوَٱلَّذِىऔर उस पर जिसनेwa-alladhīفَطَرَنَا ۖपैदा किया हमेंfaṭaranāفَٱقْضِपस तू फ़ैसला कर देfa-iq'ḍiمَآजोأَنتَतूantaقَاضٍ ۖफ़ैसला करने वाला हैqāḍinإِنَّمَاबेशकinnamāتَقْضِىतू फ़ैसला कर सकता हैtaqḍīهَـٰذِهِइसीhādhihiٱلْحَيَوٰةَlifel-ḥayataٱلدُّنْيَآदुनिया की ज़िन्दगी काl-dun'yā٧٢
उन्होंने कहा : हम तुझे कदापि तरजीह नहीं देंगे उन स्पष्ट तर्कों पर जो हमारे पास आए हैं और उसपर, जिसने हमें पैदा किया है। अतः फैसला कर, जो तू फ़ैसला करने वाला है। तू केवल इस दुनिया के जीवन का फ़ैसला कर सकता है।
२०:७३
إِنَّآबेशक हमinnāءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِرَبِّنَاअपने रब परbirabbināلِيَغْفِرَताकि वो बख़्श देliyaghfiraلَنَاहमारे लिएlanāخَطَـٰيَـٰنَاख़ताऐं हमारीkhaṭāyānāوَمَآऔर उसे जोwamāأَكْرَهْتَنَاमजबूर किया हमें तूनेakrahtanāعَلَيْهِउस परʿalayhiمِنَofminaٱلسِّحْرِ ۗजादू की वजह सेl-siḥ'riوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunوَأَبْقَىٰٓऔर बाक़ी रहने वाला हैwa-abqā٧٣
निःसंदेह हम अपने पालनहार पर ईमान लाए हैं, ताकि वह हमारे लिए हमारे पापों और जादू के उन कामों को क्षमा कर दे, जो तूने हमें करने के लिए मजबूर किया है और अल्लाह सर्वोत्तम और सदा रहने वाला है।1
२०:७४
إِنَّهُۥबेशक वोinnahuمَنजोmanيَأْتِआएगाyatiرَبَّهُۥअपने रब के पासrabbahuمُجْرِمًۭاमुजरिम होकरmuj'rimanفَإِنَّतो बेशकfa-innaلَهُۥउसके लिएlahuجَهَنَّمَजहन्नम हैjahannamaلَاNotيَمُوتُना वो मरेगाyamūtuفِيهَاउसमेंfīhāوَلَاऔर नाwalāيَحْيَىٰवो ज़िन्दा रहेगाyaḥyā٧٤
निःसंदेह तथ्य यह है कि जो अपने पालनहार के पास अपराधी बनकर आएगा, तो निश्चित रूप से उसी के लिए नरक है, जिसमें न वह मरेगा और न जिएगा।
२०:७५
وَمَنऔर जोwamanيَأْتِهِۦआएगा उसके पासyatihiمُؤْمِنًۭاमोमिन होकरmu'minanقَدْतहक़ीक़qadعَمِلَउसने अमल किएʿamilaٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaلَهُمُउनके लिएlahumuٱلدَّرَجَـٰتُदर्जे हैंl-darajātuٱلْعُلَىٰबुलँदl-ʿulā٧٥
तथा जो उसके पास मोमिन बनकर आएगा कि उसने अच्छे कर्म किए होंगे, तो यही लोग हैं जिनके लिए सर्वोच्च पद हैं।
२०:७६
جَنَّـٰتُबाग़ातjannātuعَدْنٍۢहमेशगी केʿadninتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَا ۚउनमेंfīhāوَذَٰلِكَऔर येwadhālikaجَزَآءُबदला हैjazāuمَنउसका जोmanتَزَكَّىٰपाकीज़गी इख़्तियार करेtazakkā٧٦
स्थायी निवास के बाग़, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, उनमें हमेशा के लिए रहने वाले हैं और यह उसका प्रतिफल है, जो पवित्र हुआ।
२०:७७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَوْحَيْنَآवही की हमनेawḥaynāإِلَىٰtoilāمُوسَىٰٓतरफ़ मूसा केmūsāأَنْकिanأَسْرِले चलो रात कोasriبِعِبَادِىमेरे बन्दों कोbiʿibādīفَٱضْرِبْपस बना लोfa-iḍ'ribلَهُمْउनके लिएlahumطَرِيقًۭاएक रास्ताṭarīqanفِىinٱلْبَحْرِसमुन्दर मेंl-baḥriيَبَسًۭاख़ुश्कyabasanلَّاnotتَخَـٰفُना तुझे ख़ौफ़ होगाtakhāfuدَرَكًۭاपा लेने काdarakanوَلَاऔर नाwalāتَخْشَىٰतू डरेगाtakhshā٧٧
और निश्चय ही हमने मूसा की ओर वह़्य की कि मेरे बंदो को रातों-रात ले जा, फिर उनके लिए समुद्र में एक सूखा मार्ग बना, न तू पकड़े जाने से भय खाएगा और न डरेगा।
२०:७८
فَأَتْبَعَهُمْतो पीछा किया उनकाfa-atbaʿahumفِرْعَوْنُफ़िरऔन नेfir'ʿawnuبِجُنُودِهِۦसाथ अपने लश्करों केbijunūdihiفَغَشِيَهُمतो ढाँप लिया उन्हेंfaghashiyahumمِّنَfromminaٱلْيَمِّसमुन्दर सेl-yamiمَاजिसनेغَشِيَهُمْढाँप लिया उन्हेंghashiyahum٧٨
फिर फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया, तो उन्हें समुद्र से उस चीज़ ने ढाँप लिया जिसने उन्हें ढाँप लिया।
२०:७९
وَأَضَلَّऔर भटका दियाwa-aḍallaفِرْعَوْنُफ़िरऔन नेfir'ʿawnuقَوْمَهُۥअपनी क़ौम कोqawmahuوَمَاऔर नाwamāهَدَىٰरहनुमाई कीhadā٧٩
और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को गुमराह किया और उन्हें सीधे रास्ते पर न चलाया।
२०:८०
يَـٰبَنِىٓO Children of Israelyābanīإِسْرَٰٓءِيلَऐ बनी इस्राईलis'rāīlaقَدْतहक़ीक़qadأَنجَيْنَـٰكُمनिजात दी हमने तुम्हेंanjaynākumمِّنْfromminعَدُوِّكُمْतुम्हारे दुश्मन सेʿaduwwikumوَوَٰعَدْنَـٰكُمْऔर वादा किया हमने तुमसेwawāʿadnākumجَانِبَon (the) sidejānibaٱلطُّورِ(of) the Mountl-ṭūriٱلْأَيْمَنَतूर की दाईं जानिब काl-aymanaوَنَزَّلْنَاऔर उतारा हमनेwanazzalnāعَلَيْكُمُतुम परʿalaykumuٱلْمَنَّमन्नl-manaوَٱلسَّلْوَىٰऔर सलवाwal-salwā٨٠
ऐ बनी इसराईल! निःसंदेह हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं से छुड़ाया और तुम्हें पर्वत के दाहिनी ओर1 का वचन दिया और तुमपर 'मन्न' और 'सल्वा' उतारा।2
२०:८१
كُلُوا۟खाओkulūمِنofminطَيِّبَـٰتِपाकीज़ा चीज़ों में सेṭayyibātiمَاजोرَزَقْنَـٰكُمْरिज़्क़ दिया हमने तुम्हेंrazaqnākumوَلَاऔर नाwalāتَطْغَوْا۟तुम सरकशी करोtaṭghawفِيهِइसमेंfīhiفَيَحِلَّवरना उतरेगाfayaḥillaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumغَضَبِى ۖग़ज़ब मेराghaḍabīوَمَنऔर वो जोwamanيَحْلِلْउतरेyaḥlilعَلَيْهِजिस परʿalayhiغَضَبِىग़ज़ब मेराghaḍabīفَقَدْतो तहक़ीक़faqadهَوَىٰवो हलाक हो गयाhawā٨١
खाओ उन पवित्र चीज़ों में से, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं तथा उनमें हद से न बढ़ो। अन्यथा तुमपर मेरा प्रकोप उतरेगा और जिसपर मेरा प्रकोप उतरा, तो निश्चय उसका सर्वनाश हो गया।
२०:८२
وَإِنِّىऔर बेशक मैंwa-innīلَغَفَّارٌۭअलबत्ता बहुत बख़्शने वाला हूँlaghaffārunلِّمَنउसे जिसनेlimanتَابَतौबा कीtābaوَءَامَنَऔर वो ईमान लायाwaāmanaوَعَمِلَऔर उसने अमल किएwaʿamilaصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanثُمَّफिरthummaٱهْتَدَىٰवो हिदायत पर रहाih'tadā٨٢
और निःसंदेह मैं निश्चय उसको बहुत क्षमा करने वाला हूँ, जो तौबा करे और ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, फिर सीधे मार्ग पर चले।
२०:८३
۞ وَمَآऔर क्या चीज़wamāأَعْجَلَكَजल्दी ले आई तुझेaʿjalakaعَنfromʿanقَوْمِكَतेरी क़ौम सेqawmikaيَـٰمُوسَىٰऐ मूसाyāmūsā٨٣
और तुझे तेरी जाति से जल्दी क्या चीज़ ले आई ऐ मूसा!?
२०:८४
قَالَकहाqālaهُمْवोhumأُو۟لَآءِसब लोगulāiعَلَىٰٓuponʿalāأَثَرِىमेरे नक़्शे क़दम पर हैंatharīوَعَجِلْتُऔर जल्दी की मैंनेwaʿajil'tuإِلَيْكَतरफ़ तेरेilaykaرَبِّऐ मेरे रबrabbiلِتَرْضَىٰताकि तू राज़ी हो जाएlitarḍā٨٤
उसने कहा : वे मेरे पीछे ही हैं और मैं तेरी ओर जल्दी आ गया, ऐ मेरे पालनहार! ताकि तू प्रसन्न हो जाए।
२०:८५
قَالَफ़रमायाqālaفَإِنَّاपस बेशक हमनेfa-innāقَدْतहक़ीक़qadفَتَنَّاआज़माइश में डाला हमनेfatannāقَوْمَكَतेरी क़ौम कोqawmakaمِنۢafter youminبَعْدِكَतेरे बादbaʿdikaوَأَضَلَّهُمُऔर भटका दिया उन्हेंwa-aḍallahumuٱلسَّامِرِىُّसामरी नेl-sāmiriyu٨٥
(अल्लाह ने) फरमाया : तो निश्चय हमने तेरे पीछे तेरी जाति के लोगों को परीक्षा में डाल दिया है और सामिरी ने उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया है।
२०:८६
فَرَجَعَपस पलटाfarajaʿaمُوسَىٰٓमूसाmūsāإِلَىٰtoilāقَوْمِهِۦतरफ़ अपनी कौम केqawmihiغَضْبَـٰنَसख़्त ग़ज़बनाकghaḍbānaأَسِفًۭا ۚग़मगीन होकरasifanقَالَकहाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiأَلَمْक्या नहींalamيَعِدْكُمْवादा किया था तुमसेyaʿid'kumرَبُّكُمْतुम्हारे रब नेrabbukumوَعْدًاवादाwaʿdanحَسَنًا ۚअच्छाḥasananأَفَطَالَक्या फिर तवील हो गईafaṭālaعَلَيْكُمُतुम परʿalaykumuٱلْعَهْدُवो मुद्दतl-ʿahduأَمْयाamأَرَدتُّمْचाहा तुमनेaradttumأَنकिanيَحِلَّउतरेyaḥillaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumغَضَبٌۭग़ज़बghaḍabunمِّنofminرَّبِّكُمْतुम्हारे रब की तरफ़ सेrabbikumفَأَخْلَفْتُمतो ख़िलाफ़ किया तुमनेfa-akhlaftumمَّوْعِدِىमेरे वादे केmawʿidī٨٦
फिर मूसा ग़ुस्से से भरा हुआ, खेद में डूबा हुआ अपनी जाति की ओर वापस आया। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुम्हारे रब ने तुम्हें अच्छा वादा नहीं दिया था? तो क्या वह अवधि तुम पर लंबी हो गई, या तुमने चाहा कि तुमपर तुम्हारे रब का कोई प्रकोप उतरे? तो तुमने मेरा वादा3 तोड़ दिया।
२०:८७
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūمَآनहींأَخْلَفْنَاख़िलाफ़ किया हमनेakhlafnāمَوْعِدَكَतेरे वादे केmawʿidakaبِمَلْكِنَاअपने इख़्तियार सेbimalkināوَلَـٰكِنَّاबल्कि हमwalākinnāحُمِّلْنَآउठवाए गए हमḥummil'nāأَوْزَارًۭاबोझawzāranمِّنfromminزِينَةِज़ेवर में सेzīnatiٱلْقَوْمِलोगों केl-qawmiفَقَذَفْنَـٰهَاतो फेंक दिया हमने उन्हेंfaqadhafnāhāفَكَذَٰلِكَफिर इसी तरहfakadhālikaأَلْقَىडाल दियाalqāٱلسَّامِرِىُّसामरी नेl-sāmiriyu٨٧
उन्होंने कहा : हमने अपने अधिकार से आपके वचन का उल्लंघन नहीं किया, लेकिन लोगों1 के गहनों का कुछ बोझ हमपर लाद दिया गया था, तो हमने उन्हें फेंक2 दिया और ऐसे ही सामिरी3 ने फेंक दिया।
२०:८८
فَأَخْرَجَफिर उसने निकालाfa-akhrajaلَهُمْउनके लिएlahumعِجْلًۭاएक बछड़ाʿij'lanجَسَدًۭاमुजस्समjasadanلَّهُۥजिसकी थीlahuخُوَارٌۭगाय की आवाज़khuwārunفَقَالُوا۟तो उन्होंने कहाfaqālūهَـٰذَآयहीhādhāإِلَـٰهُكُمْइलाह है तुम्हाराilāhukumوَإِلَـٰهُऔर इलाहwa-ilāhuمُوسَىٰमूसा काmūsāفَنَسِىَपस वो भूल गयाfanasiya٨٨
फिर उसने1 उनके लिए एक बछड़ा निकाला, जो मात्र शरीर था, जिसकी गाय की सी आवाज़ थी। तो उन्होंने कहा : यही तुम्हारा पूज्य तथा मूसा का पूज्य है, सो वह भूल गया है।
२०:८९
أَفَلَاक्या फिर नहींafalāيَرَوْنَवो देखतेyarawnaأَلَّاकि बेशक नहींallāيَرْجِعُवो लौटाताyarjiʿuإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimقَوْلًۭاबात कोqawlanوَلَاऔर नहींwalāيَمْلِكُवो इख़्तियार रखताyamlikuلَهُمْउनके लिएlahumضَرًّۭاकिसी नुक़सान काḍarranوَلَاऔर नाwalāنَفْعًۭاकिसी नफ़ा काnafʿan٨٩
तो क्या वे देखते नहीं कि वह न उनकी किसी बात का उत्तर देता है और न वह उनके किसी नुक़सान का मालिक है और न किसी लाभ का।1
२०:९०
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadقَالَकहाqālaلَهُمْउन्हेंlahumهَـٰرُونُहारून नेhārūnuمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiإِنَّمَاबेशकinnamāفُتِنتُمआज़माइश में डाले गए तुमfutintumبِهِۦ ۖइसके ज़रिएbihiوَإِنَّऔर बेशकwa-innaرَبَّكُمُरब तुम्हाराrabbakumuٱلرَّحْمَـٰنُरहमान हैl-raḥmānuفَٱتَّبِعُونِىपस पैरवी करो मेरीfa-ittabiʿūnīوَأَطِيعُوٓا۟और इताअत करोwa-aṭīʿūأَمْرِىमेरे हुक्म कीamrī٩٠
और निःसंदेह हारून उनसे पहले ही कह चुका था : ऐ मेरी जाति के लोगो! बात यह है कि इसके द्वारा तुम्हारी परीक्षा की गई है और निश्चय तुम्हारा पालनहार रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) ही है। अतः मेरा अनुसरण करो तथा मेरे आदेश का पालन करो।
२०:९१
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūلَنNeverlanنَّبْرَحَहम तो हमेशा रहेंगेnabraḥaعَلَيْهِइस परʿalayhiعَـٰكِفِينَजम कर बैठने वालेʿākifīnaحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيَرْجِعَलौट आएyarjiʿaإِلَيْنَاतरफ हमारेilaynāمُوسَىٰमूसाmūsā٩١
उन्होंने कहा : हम इसी पर जमें बैठे रहेंगे, यहाँ तक कि मूसा हमारे पास वापस आ जाए।
२०:९२
قَالَकहाqālaيَـٰهَـٰرُونُऐ हारूनyāhārūnuمَاकिस चीज़ नेمَنَعَكَमना किया तुझेmanaʿakaإِذْजबidhرَأَيْتَهُمْदेखा तूने उन्हेंra-aytahumضَلُّوٓا۟कि वो भटक गए हैंḍallū٩٢
(मूसा ने) कहा : ऐ हारून! तुझे किस बात ने रोका, जब तूने उन्हें देखा कि वे पथभ्रष्ट हो गए हैं?
२०:९३
أَلَّاकि नाallāتَتَّبِعَنِ ۖतू पैरवी करे मेरीtattabiʿaniأَفَعَصَيْتَक्या फिर नाफ़रमानी की तू नेafaʿaṣaytaأَمْرِىमेरे हुक्म कीamrī٩٣
कि तू मेरा अनुसरण न करे? तो क्या तूने मेरे आदेश की अवहेलना की?
२०:९४
قَالَकहाqālaيَبْنَؤُمَّऐ मेरी माँ के बेटेyabna-ummaلَا(Do) notتَأْخُذْना तुम पकड़ोtakhudhبِلِحْيَتِىमेरी दाढ़ी कोbiliḥ'yatīوَلَاऔर नाwalāبِرَأْسِىٓ ۖमेरे सर कोbirasīإِنِّىबेशक मैंinnīخَشِيتُडरा मैंkhashītuأَنकिanتَقُولَतुम कहोगेtaqūlaفَرَّقْتَतफ़रक़ा डाल दिया तूनेfarraqtaبَيْنَदर्मियानbaynaبَنِىٓ(the) Children of Israelbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल केis'rāīlaوَلَمْऔर नाwalamتَرْقُبْतुम ने इन्तिज़ार कियाtarqubقَوْلِىमेरी बात काqawlī٩٤
उसने कहा : ऐ मेरी माँ के बेटे! न मेरी दाढ़ी पकड़ और न मेरा सिर। मैं तो इससे डरा कि तू कहेगा : तूने बनी इसराईल में फूट डाल दी और मेरी बात की प्रतीक्षा नहीं की।
२०:९५
قَالَकहाqālaفَمَاतो क्या हैfamāخَطْبُكَमामला तेराkhaṭbukaيَـٰسَـٰمِرِىُّऐ सामरीyāsāmiriyyu٩٥
(मूसा ने) कहा : तो ऐ सामिरी! तोरा मामला क्या है?
२०:९६
قَالَउसने कहाqālaبَصُرْتُदेखा मैंनेbaṣur'tuبِمَاउसे जोbimāلَمْनहींlamيَبْصُرُوا۟उन्होंने देखाyabṣurūبِهِۦजिसेbihiفَقَبَضْتُपस मुट्ठी भर ली मैंनेfaqabaḍtuقَبْضَةًۭएक मुट्ठीqabḍatanمِّنْfromminأَثَرِनक़्शे क़दम सेathariٱلرَّسُولِरसूल केl-rasūliفَنَبَذْتُهَاतो डाल दिया मैंने उसेfanabadhtuhāوَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaسَوَّلَتْअच्छा करके दिखायाsawwalatلِىमेरे लिएنَفْسِىमेरे नफ़्स नेnafsī٩٦
उसने कहा : मैंने वह चीज़ देखी, जो इन लोगों नहीं देखी, तो मैंने रसूल के पदचिह्न से एक मुट्ठी उठाली, फिर मैंने उसे डाल दिया और मेरे दिल ने इसी तरह करना मेरे लिए सुसज्जित कर दिया।1
२०:९७
قَالَकहाqālaفَٱذْهَبْपस जाओfa-idh'habفَإِنَّतो बेशकfa-innaلَكَतेरे लिए हैlakaفِىinٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी मेंl-ḥayatiأَنये किanتَقُولَतू कहता रहेtaqūlaلَا(Do) notمِسَاسَ ۖना छूनाmisāsaوَإِنَّऔर बेशकwa-innaلَكَतेरे लिएlakaمَوْعِدًۭاवादा का एक वक़्त मुक़र्रर हैmawʿidanلَّنहरगिज़ नाlanتُخْلَفَهُۥ ۖतू पीछे छोड़ा जाएगा इससेtukh'lafahuوَٱنظُرْऔर देखwa-unẓurإِلَىٰٓatilāإِلَـٰهِكَतरफ़ अपने इलाह केilāhikaٱلَّذِىवो जोalladhīظَلْتَरहा तूẓaltaعَلَيْهِउस परʿalayhiعَاكِفًۭا ۖजम कर बैठने वालाʿākifanلَّنُحَرِّقَنَّهُۥअलबत्ता हम ज़रूर जला डालेंगे उसेlanuḥarriqannahuثُمَّफिरthummaلَنَنسِفَنَّهُۥअलबत्ता हम ज़रूर बिखेर देंगे उसेlanansifannahuفِىinٱلْيَمِّदरिया मेंl-yamiنَسْفًاबिखेर देनाnasfan٩٧
(मूसा ने) कहा : "बस चला जा, निःसंदेह तेरे लिए जीवन भर यह है कि तू कहता रहे : मुझे स्पर्श न करना।1 और निःसंदेह तेरे लिए एक और भी वादा2 है, जो तुझसे कदापि न टलेगा। तथा अपने पूज्य को देख, जिसका तू पुजारी बना रहा, निश्चय हम उसे अवश्य अच्छी तरह जलाएँगे, फिर निश्चय ही उसे समुद्र में अच्छी तरह से उड़ा देंगे।
२०:९८
إِنَّمَآबेशकinnamāإِلَـٰهُكُمُइलाह तुम्हाराilāhukumuٱللَّهُअल्लाह हैl-lahuٱلَّذِىवो जोalladhīلَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَ ۚवो हीhuwaوَسِعَउसने घेर रखा हैwasiʿaكُلَّहरkullaشَىْءٍचीज़ कोshayinعِلْمًۭاइल्म सेʿil'man٩٨
तुम्हारा पूज्य तो अल्लाह ही है, जिसके अलावा कोई पूज्य नहीं, उसने हर चीज को ज्ञान से घेर रखा है।
२०:९९
كَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaنَقُصُّहम बयान करते हैंnaquṣṣuعَلَيْكَआप परʿalaykaمِنْfromminأَنۢبَآءِकुछ ख़बरेंanbāiمَاवो जोقَدْतहक़ीक़qadسَبَقَ ۚगुज़र चुकींsabaqaوَقَدْऔर तहक़ीक़waqadءَاتَيْنَـٰكَदिया हमने आपकोātaynākaمِنfromminلَّدُنَّاअपने पास सेladunnāذِكْرًۭاज़िक्रdhik'ran٩٩
इसी प्रकार हम आपको कुछ ऐसी ख़बरें सुनाते हैं जो गुज़र चुकी हैं और निःसंदेह हमने आपको अपनी तरफ़ से एक नसीहत प्रदान की है।
२०:१००
مَّنْजिसनेmanأَعْرَضَमुँह मोड़ाaʿraḍaعَنْهُउससेʿanhuفَإِنَّهُۥतो बेशक वोfa-innahuيَحْمِلُवो उठाएगाyaḥmiluيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiوِزْرًاएक भारी बोझwiz'ran١٠٠
जो उससे मुँह फेरेगा, तो निश्चय ही वह क़ियामत के दिन एक भारी1 बोझ उठाएगा।
२०:१०१
خَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهِ ۖउसमेंfīhiوَسَآءَऔर बहुत बुरा हैwasāaلَهُمْउनके लिएlahumيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiحِمْلًۭاबोझ उठानाḥim'lan١٠١
वे उसमें हमेशा रहने वाले होंगे और क़ियामत के दिन वह उनके लिए बुरा बोझ होगा।
२०:१०२
يَوْمَजिस दिनyawmaيُنفَخُफूँका जाएगाyunfakhuفِىinٱلصُّورِ ۚसूर मेंl-ṣūriوَنَحْشُرُऔर हम इकट्ठा करेंगेwanaḥshuruٱلْمُجْرِمِينَमुजरिमों कोl-muj'rimīnaيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinزُرْقًۭاनीली आँखों वालेzur'qan١٠٢
जिस दिन सूर1 में फूँका जाएगा और हम अपराधियों को उस दिन इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि नीली आँखों वाले होंगे।
२०:१०३
يَتَخَـٰفَتُونَवो सरगोशियाँ करेंगेyatakhāfatūnaبَيْنَهُمْआपस मेंbaynahumإِنनहींinلَّبِثْتُمْठहरे तुमlabith'tumإِلَّاमगरillāعَشْرًۭاदस (दिन)ʿashran١٠٣
वे आपस में चुपके-चुपके कह रहे होंगे, तुम (संसार में) दस दिन के सिवा नहीं ठहरे।
२०:१०४
نَّحْنُहमnaḥnuأَعْلَمُज़्यादा जानते हैंaʿlamuبِمَاउसे जोbimāيَقُولُونَवो कहेंगेyaqūlūnaإِذْजबidhيَقُولُकहेगाyaqūluأَمْثَلُهُمْसबसे मिसाली उनकाamthaluhumطَرِيقَةًतरीक़ा/रविश मेंṭarīqatanإِنनहींinلَّبِثْتُمْठहरे हमlabith'tumإِلَّاमगरillāيَوْمًۭاएक दिनyawman١٠٤
हम अधिक जानने वाले हैं जो कुछ वे कह रहे होंगे, जब उनका सबसे समझदार व्यक्ति कह रहा होगा कि तुम केवल एक दिन ठहरे हो।
२०:१०५
وَيَسْـَٔلُونَكَऔर वो सवाल करते हैं आपसेwayasalūnakaعَنِaboutʿaniٱلْجِبَالِपहाड़ों के बारे मेंl-jibāliفَقُلْतो कह दीजिएfaqulيَنسِفُهَاबिखेर देगा उन्हेंyansifuhāرَبِّىमेरा रबrabbīنَسْفًۭاबिखेर देनाnasfan١٠٥
वे आपसे पहाड़ों के विषय में पूछते हैं। आप कह दें कि मेरा पालनहार उन्हें उड़ाकर तितर-बितर कर देगा।
२०:१०६
فَيَذَرُهَاपस वो छोड़ देगा उस (ज़मीन) कोfayadharuhāقَاعًۭاमैदानqāʿanصَفْصَفًۭاचटियल बनाकरṣafṣafan١٠٦
फिर धरती को एक समतल मैदान बनाकर छोड़ेगा।
२०:१०७
لَّاNotتَرَىٰना तुम देखोगेtarāفِيهَاउसमेंfīhāعِوَجًۭاकोई टेढ़ापनʿiwajanوَلَآऔर नाwalāأَمْتًۭاकोई टीलाamtan١٠٧
तुम उसमें कोई टेढ़ापन और नीच-ऊँच नहीं देखोगे।
२०:१०८
يَوْمَئِذٍۢजिस दिनyawma-idhinيَتَّبِعُونَवो पैरवी करेंगेyattabiʿūnaٱلدَّاعِىَपुकारने वाले कीl-dāʿiyaلَاnoعِوَجَनहीं कोई कजीʿiwajaلَهُۥ ۖजिसके लिएlahuوَخَشَعَتِऔर दब जाऐंगीwakhashaʿatiٱلْأَصْوَاتُआवाज़ेंl-aṣwātuلِلرَّحْمَـٰنِरहमान के लिएlilrraḥmāniفَلَاतो नाfalāتَسْمَعُतुम सुनोगेtasmaʿuإِلَّاसिवायillāهَمْسًۭاआहट केhamsan١٠٨
उस दिन वे पुकारने वाले का अनुसरण करेंगे, उसका अनुसरण करने से कोई विमुख नहीं होगा, और सभी आवाजें रहमान के लिए धीमी हो जाएँगी, फिर तुम एक बहुत ही धीमी आवाज के अलावा कुछ भी नहीं सुनोगे।
२०:१०९
يَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinلَّاnotتَنفَعُना फ़ायदा देगीtanfaʿuٱلشَّفَـٰعَةُशफ़ाअतl-shafāʿatuإِلَّاमगरillāمَنْउसकीmanأَذِنَइजाज़त देadhinaلَهُजिसेlahuٱلرَّحْمَـٰنُरहमानl-raḥmānuوَرَضِىَऔर वो पसंद करेwaraḍiyaلَهُۥउसके लिएlahuقَوْلًۭاबात कोqawlan١٠٩
उस दिन सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी, परंतु जिसके लिए रहमान अनुज्ञा दे और जिसके लिए वह बात करना पसंद करे।
२०:११०
يَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजोبَيْنَ(is) before thembaynaأَيْدِيهِمْउनके आगे हैaydīhimوَمَاऔर जोwamāخَلْفَهُمْउनके पीछे हैkhalfahumوَلَاऔर नहींwalāيُحِيطُونَवो अहाता कर सकतेyuḥīṭūnaبِهِۦउसकेbihiعِلْمًۭاइल्म काʿil'man١١٠
वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है और वे उसे अपने ज्ञान के घेरे में नहीं ला सकते।
२०:१११
۞ وَعَنَتِऔर झुक जाऐंगेwaʿanatiٱلْوُجُوهُचेहरेl-wujūhuلِلْحَىِّवास्ते ज़िन्दा रहने वालेlil'ḥayyiٱلْقَيُّومِ ۖक़ायम रहने वाले केl-qayūmiوَقَدْऔर तहक़ीक़waqadخَابَवो नामुराद हुआkhābaمَنْजिसनेmanحَمَلَउठायाḥamalaظُلْمًۭاज़ुल्म कोẓul'man١١١
तथा सभी चेहरे उस जीवित रहने वाले, क़ायम रखने वाले लिए झुक जाएँगे और निश्चय विफल हो गया, जिसने अत्याचार का बोझ1 उठाया।
२०:११२
وَمَنऔ जो कोईwamanيَعْمَلْअमल करेगाyaʿmalمِنَofminaٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकियों में सेl-ṣāliḥātiوَهُوَजबकि वोwahuwaمُؤْمِنٌۭमोमिन होmu'minunفَلَاतो नाfalāيَخَافُवो डरेगाyakhāfuظُلْمًۭاज़ुल्म सेẓul'manوَلَاऔर नाwalāهَضْمًۭاकिसी कमी/नुक़सान सेhaḍman١١٢
तथा जो व्यक्ति नेक काम करे और वह मोमिन हो, तो वह न किसी अत्याचार से डरेगा और न अधिकार हनन से।
२०:११३
وَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaأَنزَلْنَـٰهُनाज़िल किया हमने उसेanzalnāhuقُرْءَانًاक़ुरआनqur'ānanعَرَبِيًّۭاअरबीʿarabiyyanوَصَرَّفْنَاऔर फेर-फेर कर लाए हमwaṣarrafnāفِيهِउसमेंfīhiمِنَofminaٱلْوَعِيدِवईदों/तम्बीहात में सेl-waʿīdiلَعَلَّهُمْशायद की वोlaʿallahumيَتَّقُونَवो डर जाऐंyattaqūnaأَوْयाawيُحْدِثُवो पैदा कर देyuḥ'dithuلَهُمْउनके लिएlahumذِكْرًۭاकोई नसीहतdhik'ran١١٣
और इसी प्रकार हमने इसे अरबी क़ुरआन बनाकर अवतरित किया तथा इसमें चेतावनी की बातें विभिन्न प्रकार से वर्णन कीं, शायद कि वे डर जाएँ, अथवा यह उनके लिए कोई उपदेश पैदा कर दे।
२०:११४
فَتَعَـٰلَىपस बहुत बुलन्द हैfataʿālāٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْمَلِكُबादशाहl-malikuٱلْحَقُّ ۗहक़ीक़ीl-ḥaquوَلَاऔर नाwalāتَعْجَلْआप जल्दी करेंtaʿjalبِٱلْقُرْءَانِसाथ क़ुरआन केbil-qur'āniمِنbeforeminقَبْلِइससे पहलेqabliأَنकिanيُقْضَىٰٓपूरी की जाएyuq'ḍāإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaوَحْيُهُۥ ۖवही उसकीwaḥyuhuوَقُلऔर कह दीजिएwaqulرَّبِّऐ मेरे रबrabbiزِدْنِىज़्यादा कर दे मुझेzid'nīعِلْمًۭاइल्म मेंʿil'man١١٤
अतः सर्वोच्च है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है, और क़ुरआन को पढ़ने में जल्दी1 न करें, इससे पूर्व कि आपकी ओर उसकी वह़्य पूरी की जाए तथा कहें : ऐ मेरे पालनहार! मुझे ज्ञान में बढ़ा दे।
२०:११५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadعَهِدْنَآअहद लिया हमनेʿahid'nāإِلَىٰٓwithilāءَادَمَआदम सेādamaمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluفَنَسِىَतो वो भूल गयाfanasiyaوَلَمْऔर नहींwalamنَجِدْपाया हमनेnajidلَهُۥउसके लिएlahuعَزْمًۭاकोई अज़्मʿazman١١٥
और निःसंदेह हमने इससे पहले आदम को ताकीद की, फिर वह भूल गया और हमने उसमें कोई दृढ़ संकल्प नहीं पाया ।
२०:११६
وَإِذْऔर जबwa-idhقُلْنَاकहा हमनेqul'nāلِلْمَلَـٰٓئِكَةِफ़रिश्तों सेlil'malāikatiٱسْجُدُوا۟सजदा करोus'judūلِـَٔادَمَआदम कोliādamaفَسَجَدُوٓا۟तो उन्होंने सजदा कियाfasajadūإِلَّآसिवायillāإِبْلِيسَइब्लीस केib'līsaأَبَىٰउसने इन्कार कियाabā١١٦
तथा जब हमने फ़रिश्तों से कहा : आदम को सजदा करो। तो उन्होंने सजदा किया, सिवाय इबलीस के, उसने इनकार किया।
२०:११७
فَقُلْنَاतो कहा हमनेfaqul'nāيَـٰٓـَٔادَمُऐ आदमyāādamuإِنَّबेशकinnaهَـٰذَاयेhādhāعَدُوٌّۭदुश्मन हैʿaduwwunلَّكَतुम्हाराlakaوَلِزَوْجِكَऔर तुम्हारी बीवी काwalizawjikaفَلَاपस नाfalāيُخْرِجَنَّكُمَاवो हरगिज़ निकलवाए तुम दोनों कोyukh'rijannakumāمِنَfromminaٱلْجَنَّةِजन्नत सेl-janatiفَتَشْقَىٰٓवरना तुम मुसीबत में पड़ जाओगेfatashqā١١٧
तो हमने कहा : निःसंदेह यह तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का दुश्मन है, इसलिए कहीं तुम दोनों को जन्नत से न निकलवा दे कि तुम मुसीबत में पड़ जाओगे।
२०:११८
إِنَّबेशकinnaلَكَतुम्हारे लिए हैlakaأَلَّاये कि नाallāتَجُوعَतुम भूखे होगेtajūʿaفِيهَاउसमेंfīhāوَلَاऔर नाwalāتَعْرَىٰतुम उरयाँ होगेtaʿrā١١٨
निःसंदेह तुम्हारे लिए यह है कि तुम इसमें न भूखे होगे और न नग्न होगे।
२०:११९
وَأَنَّكَऔर बेशक तुमwa-annakaلَاnotتَظْمَؤُا۟ना तुम प्यासे होगेtaẓma-uفِيهَاउसमेंfīhāوَلَاऔर नाwalāتَضْحَىٰतुम्हें धूप लगेगीtaḍḥā١١٩
और यह कि निश्चय ही तुम इसमें न प्यासे होगे और न धूप खाओगा।
२०:१२०
فَوَسْوَسَपस वसवसा डालाfawaswasaإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiٱلشَّيْطَـٰنُशैतान नेl-shayṭānuقَالَकहाqālaيَـٰٓـَٔادَمُऐ आदमyāādamuهَلْक्याhalأَدُلُّكَमैं रहनुमाई करुँ तुम्हारीadullukaعَلَىٰtoʿalāشَجَرَةِदरख़्त परshajaratiٱلْخُلْدِहमेशगी केl-khul'diوَمُلْكٍۢऔर बादशाहत केwamul'kinلَّاnotيَبْلَىٰजो ना पुरानी होगीyablā١٢٠
तो शैतान ने उसके दिल में विचार डाला, कहने लगा : ऐ आदम! क्या मैं तुम्हें अनंत जीवन का वृक्ष और ऐसा राज्य दिखाऊँ जो कभी पुराना न हो?
२०:१२१
فَأَكَلَاतो दोनों ने खा लियाfa-akalāمِنْهَاउसमें सेmin'hāفَبَدَتْतो ज़ाहिर हो गईंfabadatلَهُمَاउन दोनों के लिएlahumāسَوْءَٰتُهُمَاशर्मगाहें उन दोनों कीsawātuhumāوَطَفِقَاand they beganwaṭafiqāيَخْصِفَانِऔर वो दोनों चिपकाने लगेyakhṣifāniعَلَيْهِمَاअपने ऊपरʿalayhimāمِنfromminوَرَقِपत्तों सेwaraqiٱلْجَنَّةِ ۚजन्नत केl-janatiوَعَصَىٰٓऔर नाफ़रमानी कीwaʿaṣāءَادَمُआदम नेādamuرَبَّهُۥअपने रब कीrabbahuفَغَوَىٰतो वो भटक गयाfaghawā١٢١
अंततः उन दोनों ने उसमें से खा लिया, तो उन दोनों के लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए और वे दोनों अपने ऊपर जन्नत के पत्ते चिपकाने लगे और आदम ने अपने रब की अवज्ञा की, तो वह भटक गया।
२०:१२२
ثُمَّफिरthummaٱجْتَبَـٰهُचुन लिया उसेij'tabāhuرَبُّهُۥउसके रब नेrabbuhuفَتَابَपस वो मेहरबान हुआfatābaعَلَيْهِउस परʿalayhiوَهَدَىٰऔर उसने हिदायत बख़्शीwahadā١٢٢
फिर उसके रब ने उसे चुन लिया, तो उसकी तौबा क़बूल कर ली और उसे मार्गदर्शन प्रदान किया।
२०:१२३
قَالَफ़रमायाqālaٱهْبِطَاदोनों उतर जाओih'biṭāمِنْهَاइससेmin'hāجَمِيعًۢا ۖइकट्ठेjamīʿanبَعْضُكُمْबाज़ तुम्हारेbaʿḍukumلِبَعْضٍबाज़ केlibaʿḍinعَدُوٌّۭ ۖदुश्मन हैंʿaduwwunفَإِمَّاफिर अगरfa-immāيَأْتِيَنَّكُمआ जाए तुम्हारे पासyatiyannakumمِّنِّىमेरी तरफ़ सेminnīهُدًۭىहिदायतhudanفَمَنِतो जिसनेfamaniٱتَّبَعَपैरवी कीittabaʿaهُدَاىَमेरी हिदायत कीhudāyaفَلَاतो नाfalāيَضِلُّवो भटकेगाyaḍilluوَلَاऔर नाwalāيَشْقَىٰवो मुसीबत में पड़ेगाyashqā١٢٣
फरमाया : तुम दोनों यहाँ से एक साथ उतर जाओ, तुम एक-दूसरे के शत्रु हो। फिर अगर कभी मेरी ओर से तुम्हारे पास कोई हिदायत आए, तो जो कोई मेरी हिदायत पर चला, तो न वह भटकेगा और न मुसीबत में पड़ेगा।
२०:१२४
وَمَنْऔर जिसनेwamanأَعْرَضَऐराज़ कियाaʿraḍaعَنfromʿanذِكْرِىमेरे ज़िक्र सेdhik'rīفَإِنَّतो बेशकfa-innaلَهُۥउसके लिएlahuمَعِيشَةًۭमईशत/गुज़रानmaʿīshatanضَنكًۭاतंगḍankanوَنَحْشُرُهُۥऔर हम उठाऐंगे उसेwanaḥshuruhuيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiأَعْمَىٰअँधाaʿmā١٢٤
तथा जिसने मेरी नसीहत से मुँह फेरा, तो निःसंदेह उसके लिए तंग1 जीवन है और हम उसे क़ियामत के दिन अंधा करके उठाएँगे।
२०:१२५
قَالَवो कहेगाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiلِمَक्योंlimaحَشَرْتَنِىٓउठाया तूने मुझेḥashartanīأَعْمَىٰअँधाaʿmāوَقَدْहालाँकि तहक़ीक़waqadكُنتُथा मैंkuntuبَصِيرًۭاदेखने वालाbaṣīran١٢٥
वह कहेगा : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे अंधा करके क्यों उठाया? हालाँकि, मैं तो देखने वाला था।
२०:१२६
قَالَवो फ़रमाएगाqālaكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaأَتَتْكَआई थीं तेरे पासatatkaءَايَـٰتُنَاआयात हमारीāyātunāفَنَسِيتَهَا ۖपस भूल गया तू उन्हेंfanasītahāوَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaٱلْيَوْمَआ जाए तुम्हारे पासl-yawmaتُنسَىٰतू भुलाया जाएगाtunsā١٢٦
(अल्लाह) फरमाएगा : इसी प्रकार तेरे पास हमारी आयतें आईं, तो तू उन्हें भूल गया और इसी प्रकार आज तू भुलाया जाएगा।
२०:१२७
وَكَذَٰلِكَऔर इसी तरहwakadhālikaنَجْزِىहम बदला देते हैंnajzīمَنْउसको जोmanأَسْرَفَहद से गुज़र जाएasrafaوَلَمْऔर नाwalamيُؤْمِنۢवो ईमान लाएyu'minبِـَٔايَـٰتِआयात परbiāyātiرَبِّهِۦ ۚअपने रब कीrabbihiوَلَعَذَابُऔर अलबत्ता अज़ाबwalaʿadhābuٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत काl-ākhiratiأَشَدُّज़्यादा शदीद हैashadduوَأَبْقَىٰٓऔर ज़्यादा बाक़ी रहने वालाwa-abqā١٢٧
तथा इसी प्रकार हम उस व्यक्ति को बदला देते हैं, जो हद से बढ़ जाए और अपने पालनहार की आयतों पर ईमान न लाए और निश्चय आख़िरत की यातना अधिक कठोर और अधिक स्थायी है।
२०:१२८
أَفَلَمْक्या फिर नहींafalamيَهْدِरहनुमाई कीyahdiلَهُمْउनकीlahumكَمْकि कितनी हीkamأَهْلَكْنَاहलाक कीं हमनेahlaknāقَبْلَهُمउनसे पहलेqablahumمِّنَofminaٱلْقُرُونِबस्तियाँl-qurūniيَمْشُونَवो चलते फिरते हैंyamshūnaفِىinمَسَـٰكِنِهِمْ ۗउनके घरों मेंmasākinihimإِنَّयक़ीननinnaفِىinذَٰلِكَइसमेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinلِّأُو۟لِىfor possessorsli-ulīٱلنُّهَىٰअक़्ल वालों के लिएl-nuhā١٢٨
फिर क्या इस बात ने उन्हें मार्गदर्शन नहीं दिया कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, जिनके घरों में वे चलते-फिरते हैं। निःसंदेह इसमें बुद्धियों वालों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं।
२०:१२९
وَلَوْلَاऔर अगर ना होतीwalawlāكَلِمَةٌۭएक बातkalimatunسَبَقَتْजो गुज़र चुकीsabaqatمِنfromminرَّبِّكَआप के रब की तरफ़ सेrabbikaلَكَانَअलबत्ता हो जाताlakānaلِزَامًۭاलाज़िम (अज़ाब)lizāmanوَأَجَلٌۭऔर वक़्त (अगर ना होता)wa-ajalunمُّسَمًّۭىमुकर्ररmusamman١٢٩
और यदि वह बात न होती जो तुम्हारे पालनहार की ओर से पहले निश्चित हो चुकी और एक नियत समय न होता, तो वही (अगले लोगों का अज़ाब) आवश्यक हो जाता।1
२०:१३०
فَٱصْبِرْपस सब्र कीजिएfa-iṣ'birعَلَىٰoverʿalāمَاउस पर जोيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaوَسَبِّحْऔर तस्बीह कीजिएwasabbiḥبِحَمْدِसाथ हम्द केbiḥamdiرَبِّكَअपने रब कीrabbikaقَبْلَपहलेqablaطُلُوعِ(the) risingṭulūʿiٱلشَّمْسِसूरज तुलूअ होने सेl-shamsiوَقَبْلَऔर पहलेwaqablaغُرُوبِهَا ۖउसके ग़ुरुब होने सेghurūbihāوَمِنْऔर कुछwaminءَانَآئِघड़ियाँānāiٱلَّيْلِरात कीal-layliفَسَبِّحْपस तस्बीह कीजिएfasabbiḥوَأَطْرَافَऔर किनारों परwa-aṭrāfaٱلنَّهَارِदिन केl-nahāriلَعَلَّكَताकि आपlaʿallakaتَرْضَىٰआप राज़ी हो जाऐंtarḍā١٣٠
अतः जो कुछ वे कहते हैं, उसपर सब्र करें तथा सूर्य उगने से पहले1 और उसके डूबने से पहले2 अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें, और रात की कुछ घड़ियों3 में भी पवित्रता बयान करें, और दिन के किनारों4 में, ताकि आप प्रसन्न हो जाएँ।
२०:१३१
وَلَاऔर नाwalāتَمُدَّنَّहरगिज़ आप दराज़ करेंtamuddannaعَيْنَيْكَअपनी दोनों आँखेंʿaynaykaإِلَىٰtowardsilāمَاतरफ़ उसके जोمَتَّعْنَاफ़ायदा दिया हमनेmattaʿnāبِهِۦٓसाथ इसकेbihiأَزْوَٰجًۭاमुख़्तलिफ़ लोगों कोazwājanمِّنْهُمْउनमें सेmin'humزَهْرَةَरौनक़ के लिएzahrataٱلْحَيَوٰةِ(of) the lifel-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया की ज़िन्दगी कीl-dun'yāلِنَفْتِنَهُمْताकि हम आज़माऐं उन्हेंlinaftinahumفِيهِ ۚउसमेंfīhiوَرِزْقُऔर रिज़्क़wariz'quرَبِّكَआपके रब काrabbikaخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunوَأَبْقَىٰऔर ज़्यादा बाक़ी रहने वालाwa-abqā١٣١
और अपनी आँखों को उन चीज़ों की ओर कदापि न उठाएँ जो हमने उनके1 विभिन्न प्रकार के लोगों को सांसारिक जीवन के लिए आभूषण के रूप में उपयोग करने के लिए दी हैं, ताकि हम उसमें उनकी परीक्षा लें, और आपके पालनहार का दिया2 हुआ सबसे अच्छा और सबसे अधिक स्थायी है।
२०:१३२
وَأْمُرْऔर हुक्म दीजिएwamurأَهْلَكَअपने घर वालों कोahlakaبِٱلصَّلَوٰةِनमाज़ काbil-ṣalatiوَٱصْطَبِرْऔर क़ायम रहिएwa-iṣ'ṭabirعَلَيْهَا ۖइस परʿalayhāلَاNotنَسْـَٔلُكَनहीं हम सवाल करते आपसेnasalukaرِزْقًۭا ۖकिसी रिज़्क़ काriz'qanنَّحْنُहमnaḥnuنَرْزُقُكَ ۗहम रिज़्क़ देते है आप कोnarzuqukaوَٱلْعَـٰقِبَةُऔर (अच्छा) अंजामwal-ʿāqibatuلِلتَّقْوَىٰतक़वा वालों के लिए हैlilttaqwā١٣٢
और आप अपने घरवालों को नमाज़ का आदेश दें और स्वयं भी उसपर स्थित रहें, हम आपसे कोई जीविका नहीं माँगते, हम ही आपको जीविका प्रदान करते हैं और अच्छा परिणाम परहेज़गारी का है।
२०:१३३
وَقَالُوا۟और वो कहते हैंwaqālūلَوْلَاक्यों नहींlawlāيَأْتِينَاवो लाता हमारे पासyatīnāبِـَٔايَةٍۢकोई निशानीbiāyatinمِّنfromminرَّبِّهِۦٓ ۚअपने रब की तरफ़ सेrabbihiأَوَلَمْक्या भला नहींawalamتَأْتِهِمआई उनके पासtatihimبَيِّنَةُवाज़ेह दलीलbayyinatuمَاजोفِى(was) inٱلصُّحُفِसहीफ़ों में हैl-ṣuḥufiٱلْأُولَىٰपहलेl-ūlā١٣٣
तथा उन्होंने कहा : यह हमारे पास अपने रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं लाता? और क्या उनके पास वह स्पष्ट प्रमाण नहीं आया जो पहली किताबों में है?
२०:१३४
وَلَوْऔर अगरwalawأَنَّآबेशक हमannāأَهْلَكْنَـٰهُمहलाक कर देते हम उन्हेंahlaknāhumبِعَذَابٍۢसाथ किसी अज़ाब केbiʿadhābinمِّنbefore himminقَبْلِهِۦइससे पहलेqablihiلَقَالُوا۟अलबत्ता वो कहतेlaqālūرَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāلَوْلَآक्यों नाlawlāأَرْسَلْتَभेजा तूनेarsaltaإِلَيْنَاतरफ़ हमारेilaynāرَسُولًۭاकोई रसूलrasūlanفَنَتَّبِعَतो हम पैरवी करतेfanattabiʿaءَايَـٰتِكَतेरी आयात कीāyātikaمِنbeforeminقَبْلِइससे पहलेqabliأَنकिanنَّذِلَّहम ज़लील होतेnadhillaوَنَخْزَىٰऔर हम रुस्वा होतेwanakhzā١٣٤
और यदि हम वास्तव में उन्हें इससे पहले किसी अज़ाब से विनष्ट कर देते, तो ये लोग अवश्य कहते : ऐ हमारे रब! तूने हमारी ओर कोई रसूल क्यों नहीं भेजा कि हम तेरी आयतों की पैरवी करते, इससे1 पहले कि हम ज़लील और रुसवा हों?
२०:१३५
قُلْकह दीजिएqulكُلٌّۭसबके सबkullunمُّتَرَبِّصٌۭइन्तिज़ार करने वाले हैंmutarabbiṣunفَتَرَبَّصُوا۟ ۖतो तुम भी इन्तिज़ार करोfatarabbaṣūفَسَتَعْلَمُونَपस अनक़रीब तुम जान लोगेfasataʿlamūnaمَنْकौनmanأَصْحَـٰبُसाथी हैंaṣḥābuٱلصِّرَٰطِरास्तेl-ṣirāṭiٱلسَّوِىِّसीधे केl-sawiyiوَمَنِऔर किसनेwamaniٱهْتَدَىٰहिदायत पाईih'tadā١٣٥
आप कह दें : हर एक प्रतीक्षारत है। अतः तुम (भी) प्रतीक्षा करो। फिर शीघ्र ही तुम जान लोगे कि सीधे मार्ग वाले कौन हैं और कौन है जिसे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।