९०
अल-बलद
البلد
सूरह अल-बलद (البلد) पवित्र क़ुरआन का ९० वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें २० आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
९०:१
لَآNaylāأُقْسِمُनहीं मैं क़सम खाता हूँuq'simuبِهَـٰذَاby thisbihādhāٱلْبَلَدِइस शहर कीl-baladi١
मैं इस नगर (मक्का) की क़सम खाता हूँ!
९०:२
وَأَنتَऔर आपwa-antaحِلٌّۢमुक़ीम हैंḥillunبِهَـٰذَاin thisbihādhāٱلْبَلَدِइस शहर मेंl-baladi٢
तथा तुम्हारे लिए इस नगर में लड़ाई हलाल होने वाली है।
९०:३
وَوَالِدٍۢक़सम है वालिद कीwawālidinوَمَاऔर जिसेwamāوَلَدَउसने जन्म दियाwalada٣
तथा क़सम है पिता तथा उसकी संतान की!
९०:४
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلْإِنسَـٰنَइन्सान कोl-insānaفِى(to be) infīكَبَدٍमशक़्क़त मेंkabadin٤
निःसंदेह हमने मनुष्य को बड़ी कठिनाई में पैदा किया है।
९०:५
أَيَحْسَبُक्या वो समझता हैayaḥsabuأَنकिanلَّنहरगिज़ नहींlanيَقْدِرَक़ादिर होगाyaqdiraعَلَيْهِउस परʿalayhiأَحَدٌۭकोई एकaḥadun٥
क्या वह समझता है कि उसपर कभी किसी का वश नहीं चलेगा?
९०:६
يَقُولُवो कहता हैyaqūluأَهْلَكْتُहलाक कर दिया मैं नेahlaktuمَالًۭاमालmālanلُّبَدًاढेरोंlubadan٦
वह कहता है कि मैंने ढेर सारा धन ख़र्च कर दिया।
९०:७
أَيَحْسَبُक्या वो समझता हैayaḥsabuأَنकिanلَّمْनहींlamيَرَهُۥٓदेखा उसेyarahuأَحَدٌकिसी एक नेaḥadun٧
क्या वह समझता है कि उसे किसी ने नहीं देखा?
९०:८
أَلَمْक्या नहींalamنَجْعَلहमने बनाईंnajʿalلَّهُۥउसके लिएlahuعَيْنَيْنِदो आँखेंʿaynayni٨
क्या हमने उसके लिए दो आँखें नहीं बनाईं?
९०:९
وَلِسَانًۭاऔर एक ज़बानwalisānanوَشَفَتَيْنِऔर दो होंटwashafatayni٩
तथा एक ज़बान और दो होंठ (नहीं बनाए)?
९०:१०
وَهَدَيْنَـٰهُऔर दिखाए हमने उसेwahadaynāhuٱلنَّجْدَيْنِदो रास्तेl-najdayni١٠
और हमने उसे दोनों मार्ग दिखा दिए?!
९०:११
فَلَاपस नाfalāٱقْتَحَمَवो दाख़िल हुआiq'taḥamaٱلْعَقَبَةَघाटी मेंl-ʿaqabata١١
परंतु उसने दुर्लभ घाटी में प्रवेश ही नहीं किया।
९०:१२
وَمَآऔर क्या चीज़wamāأَدْرَىٰكَबताए आपकोadrākaمَاकि क्या हैmāٱلْعَقَبَةُवो घाटीl-ʿaqabatu١٢
और तुम्हें किस चीज़ ने ज्ञात कराया कि वह दुर्लभ 'घाटी' क्या है?
९०:१३
فَكُّआज़ाद करनाfakkuرَقَبَةٍएक गर्दन काraqabatin١٣
(वह) गर्दन छुड़ाना है।
९०:१४
أَوْयाawإِطْعَـٰمٌۭखाना खिलानाiṭ'ʿāmunفِىinfīيَوْمٍۢएक दिन मेंyawminذِىofdhīمَسْغَبَةٍۢभूख वालेmasghabatin١٤
या किसी भूख वाले दिन में खाना खिलाना है।
९०:१५
يَتِيمًۭاकिसी यतीमyatīmanذَاofdhāمَقْرَبَةٍक़राबत वाले कोmaqrabatin١٥
किसी रिश्तेदार अनाथ को।
९०:१६
أَوْयाawمِسْكِينًۭاकिसी मिसकीनmis'kīnanذَاindhāمَتْرَبَةٍۢख़ाक नशीन कोmatrabatin١٦
या मिट्टी में लथड़े हुए निर्धन को।1
९०:१७
ثُمَّफिरthummaكَانَहो वोkānaمِنَofminaٱلَّذِينَउनमें से जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَتَوَاصَوْا۟और उन्होंने एक दूसरे को तलक़ीन कीwatawāṣawبِٱلصَّبْرِसब्र कीbil-ṣabriوَتَوَاصَوْا۟और एक दूसरे को तलक़ीन कीwatawāṣawبِٱلْمَرْحَمَةِरहम करने कीbil-marḥamati١٧
फिर वह उन लोगों में से हो, जो ईमान लाए और एक-दूसरे को धैर्य रखने की सलाह दी और एक-दूसरे को दया करने की सलाह दी।
९०:१८
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaأَصْحَـٰبُ(are the) companionsaṣḥābuٱلْمَيْمَنَةِदाऐं हाथ वालेl-maymanati١٨
यही लोग दाहिने हाथ वाले (सौभाग्यशाली) हैं।
९०:१९
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِـَٔايَـٰتِنَاहमारी आयात के साथbiāyātināهُمْवो हैंhumأَصْحَـٰبُ(are the) companionsaṣḥābuٱلْمَشْـَٔمَةِबाऐं हाथ वालेl-mashamati١٩
और जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, वही लोग बाएँ हाथ वाले (दुर्भाग्यशाली) हैं।
९०:२०
عَلَيْهِمْउन परʿalayhimنَارٌۭआग होगीnārunمُّؤْصَدَةٌۢबन्द की हुईmu'ṣadatun٢٠
उनपर (हर ओर से) बंद की हुई आग होगी।
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