५
अल-माइदा
المائدة
सूरह अल-माइदा (المائدة) पवित्र क़ुरआन का ५ वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें १२० आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
५:१
يَـٰٓأَيُّهَاOyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūأَوْفُوا۟पूरा करोawfūبِٱلْعُقُودِ ۚअहदो पैमान कोbil-ʿuqūdiأُحِلَّتْहलाल कर दिए गएuḥillatلَكُمतुम्हारे लिएlakumبَهِيمَةُचौपाएbahīmatuٱلْأَنْعَـٰمِमवेशियों केl-anʿāmiإِلَّاसिवायillāمَاउनके जोmāيُتْلَىٰपढ़े जाऐंगेyut'lāعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumغَيْرَनाghayraمُحِلِّىहलाल करने वाले होmuḥillīٱلصَّيْدِशिकार कोl-ṣaydiوَأَنتُمْजबकि तुमwa-antumحُرُمٌ ۗ(हालत) ऐहराम में होḥurumunإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَحْكُمُवो फ़ैसला करता हैyaḥkumuمَاजोmāيُرِيدُवो चाहता हैyurīdu١
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! प्रतिज्ञाओं (अनुबंधों)1 को पूरा करो। तुम्हारे लिए चौपाए जानवर (मवेशी) ह़लाल किए गए हैं, सिवाय उनके जो तुमपर पढ़े जाएँगे, इस हाल में कि शिकार को हलाल जानने वाले न हो, जबकि तुम एह़राम2 की हालत में हो। बेशक अल्लाह फैसला करता है जो चाहता है।
५:२
يَـٰٓأَيُّهَاOyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتُحِلُّوا۟ना तुम हलाल करोtuḥillūشَعَـٰٓئِرَनिशानियों कोshaʿāiraٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiوَلَاऔर नाwalāٱلشَّهْرَमाहेl-shahraٱلْحَرَامَहराम कोl-ḥarāmaوَلَاऔर नाwalāٱلْهَدْىَक़ुर्बानी के जानवर कोl-hadyaوَلَاऔर नाwalāٱلْقَلَـٰٓئِدَपट्टे वाले जानवरों कोl-qalāidaوَلَآऔर नाwalāءَآمِّينَइरादा करने वालों कोāmmīnaٱلْبَيْتَ(to) the Housel-baytaٱلْحَرَامَबैतुल हराम काl-ḥarāmaيَبْتَغُونَजो चाहते हैंyabtaghūnaفَضْلًۭاफ़ज़लfaḍlanمِّنofminرَّبِّهِمْअपने रब की तरफ़ सेrabbihimوَرِضْوَٰنًۭا ۚऔर रज़ामन्दीwariḍ'wānanوَإِذَاऔर जबwa-idhāحَلَلْتُمْहलाल हो जाओ तुमḥalaltumفَٱصْطَادُوا۟ ۚतो शिकार करो (अगर तुम चाहो)fa-iṣ'ṭādūوَلَاऔर नाwalāيَجْرِمَنَّكُمْआमादा करे तुम्हेंyajrimannakumشَنَـَٔانُदुश्मनीshanaānuقَوْمٍकिसी क़ौम कीqawminأَنकिanصَدُّوكُمْउन्होंने रोका तुम्हेंṣaddūkumعَنِfromʿaniٱلْمَسْجِدِAl-Masjidl-masjidiٱلْحَرَامِमस्जिदे हराम सेl-ḥarāmiأَنकिanتَعْتَدُوا۟ ۘतुम ज़्यादती करोtaʿtadūوَتَعَاوَنُوا۟और तआवुन करोwataʿāwanūعَلَىinʿalāٱلْبِرِّनेकी परl-biriوَٱلتَّقْوَىٰ ۖऔर तक़वा परwal-taqwāوَلَاऔर नाwalāتَعَاوَنُوا۟तुम तआवुन करोtaʿāwanūعَلَىinʿalāٱلْإِثْمِगुनाह परl-ith'miوَٱلْعُدْوَٰنِ ۚऔर ज़्यादती परwal-ʿud'wāniوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَ ۖअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaشَدِيدُसख़्तshadīduٱلْعِقَابِसज़ा वाला हैl-ʿiqābi٢
ऐ ईमान वालो! अल्लाह की निशानियों1 का अनादर न करो, न सम्मानित महीने2 का, न ह़रम की क़ुर्बानी का, न पट्टे वाले जानवरों का, और न उन लोगों का जो अपने पालनहार के अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता की खोज में सम्मानित घर (काबा) की ओर जा रहे हों। और जब एह़राम खोल दो, तो शिकार करो। और किसी गिरोह की दुश्मनी, इस कारण कि उन्होंने तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका था, तुम्हें इस बात पर न उभारे कि अत्याचार करने लगो। तथा नेकी और परहेज़गारी पर एक-दूसरे का सहयोग करो और पाप तथा अत्याचार पर एक-दूसरे की सहायता न करो। और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है।
५:३
حُرِّمَتْहराम किया गयाḥurrimatعَلَيْكُمُतुम परʿalaykumuٱلْمَيْتَةُमुर्दारl-maytatuوَٱلدَّمُऔर ख़ूनwal-damuوَلَحْمُऔर गोश्तwalaḥmuٱلْخِنزِيرِख़िन्ज़ीर काl-khinzīriوَمَآऔर जोwamāأُهِلَّपुकारा गयाuhillaلِغَيْرِवास्ते ग़ैरlighayriٱللَّهِअल्लाह केl-lahiبِهِۦउसकोbihiوَٱلْمُنْخَنِقَةُऔर गला घुटकर मरने वालीwal-mun'khaniqatuوَٱلْمَوْقُوذَةُऔर चोट लगकर मरने वालीwal-mawqūdhatuوَٱلْمُتَرَدِّيَةُऔर बुलन्दी से गिर कर मरने वालीwal-mutaradiyatuوَٱلنَّطِيحَةُऔर सींग लग कर मरने वालीwal-naṭīḥatuوَمَآऔर जिसेwamāأَكَلَखा जाएakalaٱلسَّبُعُदरिन्दाl-sabuʿuإِلَّاमगरillāمَاजिसकोmāذَكَّيْتُمْज़िबह कर लिया तुमनेdhakkaytumوَمَاऔर जोwamāذُبِحَज़िबह किया गयाdhubiḥaعَلَىonʿalāٱلنُّصُبِआस्तानों परl-nuṣubiوَأَنऔर ये किwa-anتَسْتَقْسِمُوا۟तुम क़िस्मत मालूम करोtastaqsimūبِٱلْأَزْلَـٰمِ ۚतीरों/पाँसों के ज़रिएbil-azlāmiذَٰلِكُمْये सबdhālikumفِسْقٌ ۗगुनाह (के काम) हैंfis'qunٱلْيَوْمَआज के दिनl-yawmaيَئِسَमायूस हो गएya-isaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنofminدِينِكُمْतुम्हारे दीन सेdīnikumفَلَاतो नाfalāتَخْشَوْهُمْतुम डरो उनसेtakhshawhumوَٱخْشَوْنِ ۚऔर डरो मुझसेwa-ikh'shawniٱلْيَوْمَआज के दिनl-yawmaأَكْمَلْتُमुकम्मल कर दिया मैंनेakmaltuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumدِينَكُمْदीन तुम्हाराdīnakumوَأَتْمَمْتُऔर तमाम कर दी मैंनेwa-atmamtuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumنِعْمَتِىनेअमत अपनीniʿ'matīوَرَضِيتُऔर पसंद कर लिया मैंनेwaraḍītuلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلْإِسْلَـٰمَइस्लाम कोl-is'lāmaدِينًۭا ۚबतौर दीनdīnanفَمَنِतो जो कोईfamaniٱضْطُرَّमजबूर किया गयाuḍ'ṭurraفِىbyfīمَخْمَصَةٍभूख मेंmakhmaṣatinغَيْرَ(and) notghayraمُتَجَانِفٍۢनहीं माइल होने वालाmutajānifinلِّإِثْمٍۢ ۙतरफ़ गुनाह केli-ith'minفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٣
तुमपर ह़राम किया गया है मुर्दार, (बहता हुआ) रक्त, सूअर का माँस और वह जिसपर (ज़बह करते समय) अल्लाह के अलावा का नाम पुकारा जाए, तथा गला घुटने वाला जानवर, और जिसे चोट लगी हो, तथा गिरने वाला और जिसे सींग लगा हो और जिसे दरिंदे ने खाया हो, परंतु जो तुम (इनमें से) ज़बह2 कर लो। और जो थानों पर ज़बह किया गया हो और यह कि तुम तीरों के साथ भाग्य मालूम करो। यह सब (अल्लाह की) अवज्ञा है। आज वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, तुम्हारे धर्म से निराश3 हो गए। तो तुम उनसे न डरो, केवल मुझसे डरो। आज4 मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म परिपूर्ण कर दिया, तथा तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के तौर पर पसंद कर लिया। फिर जो व्यक्ति भूख की किसी सूरत में मजूबर कर दिया जाए, इस हाल में कि किसी पाप की ओर झुकाव रखने वाला न हो, तो निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
५:४
يَسْـَٔلُونَكَवो सवाल करते हैं आपसेyasalūnakaمَاذَآक्या कुछmādhāأُحِلَّहलाल किया गयाuḥillaلَهُمْ ۖउनके लिएlahumقُلْकह दीजिएqulأُحِلَّहलाल की गईंuḥillaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلطَّيِّبَـٰتُ ۙपाकीज़ा चीज़ेंl-ṭayibātuوَمَاऔर जोwamāعَلَّمْتُمसिखाया तुमनेʿallamtumمِّنَofminaٱلْجَوَارِحِशिकारी जानवरों कोl-jawāriḥiمُكَلِّبِينَशिकार की तालीम देने वालेmukallibīnaتُعَلِّمُونَهُنَّतुम सिखाते हो उन्हेंtuʿallimūnahunnaمِمَّاउसमें से जोmimmāعَلَّمَكُمُसिखाया तुम्हेंʿallamakumuٱللَّهُ ۖअल्लाह नेl-lahuفَكُلُوا۟तो खाओfakulūمِمَّآउसमें से जोmimmāأَمْسَكْنَवो रोक रखेंamsaknaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumوَٱذْكُرُوا۟और ज़िक्र करोwa-udh'kurūٱسْمَनामis'maٱللَّهِअल्लाह काl-lahiعَلَيْهِ ۖउस परʿalayhiوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَ ۚअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaسَرِيعُजल्द लेने वाला हैsarīʿuٱلْحِسَابِहिसाबl-ḥisābi٤
वे आपसे पूछते हैं कि उनके लिए क्या हलाल किया गया है? आप कह दें कि तुम्हारे लिए अच्छी पवित्र चीजें हलाल की गई हैं। और शिकारी जानवरों में से जो तुमने सधाए हैं, (जिन्हें तुम) शिकारी बनाने वाले हो, उन्हें उसमें से सिखाते हो जो अल्लाह ने तुम्हें सिखाया है। तो उसमें से खाओ जो (शिकार) वे तुम्हारे लिए रोक रखें, और उसपर अल्लाह का नाम1 लो। तथा अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
५:५
ٱلْيَوْمَआज के दिनal-yawmaأُحِلَّहलाल कर दी गईंuḥillaلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلطَّيِّبَـٰتُ ۖपाकीज़ा चीज़ेंl-ṭayibātuوَطَعَامُऔर खानाwaṭaʿāmuٱلَّذِينَउनका जोalladhīnaأُوتُوا۟दिए गएūtūٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaحِلٌّۭहलाल हैḥillunلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumوَطَعَامُكُمْऔर खाना तुम्हाराwaṭaʿāmukumحِلٌّۭहलाल हैḥillunلَّهُمْ ۖउनके लिएlahumوَٱلْمُحْصَنَـٰتُऔर पाक दामन औरतेंwal-muḥ'ṣanātuمِنَfromminaٱلْمُؤْمِنَـٰتِमोमिन औरतों में सेl-mu'minātiوَٱلْمُحْصَنَـٰتُऔर पाक दामन औरतेंwal-muḥ'ṣanātuمِنَfromminaٱلَّذِينَउनमें से जोalladhīnaأُوتُوا۟दिए गएūtūٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaمِنfromminقَبْلِكُمْतुमसे पहलेqablikumإِذَآजबidhāءَاتَيْتُمُوهُنَّदे दो तुम उन्हेंātaytumūhunnaأُجُورَهُنَّमहर उनकेujūrahunnaمُحْصِنِينَनिकाह में लाने वालेmuḥ'ṣinīnaغَيْرَnotghayraمُسَـٰفِحِينَना बदकारी करने वालेmusāfiḥīnaوَلَاऔर नाwalāمُتَّخِذِىٓबनाने वालेmuttakhidhīأَخْدَانٍۢ ۗछुपे दोस्तakhdāninوَمَنऔर जो कोईwamanيَكْفُرْकुफ़्र करेगाyakfurبِٱلْإِيمَـٰنِसाथ ईमान केbil-īmāniفَقَدْपस तहक़ीक़faqadحَبِطَज़ाया हो गयाḥabiṭaعَمَلُهُۥअमल उसकाʿamaluhuوَهُوَऔर वोwahuwaفِىinfīٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiمِنَ(will be) amongminaٱلْخَـٰسِرِينَख़सारा पाने वालों में से होगाl-khāsirīna٥
आज तुम्हारे लिए अच्छी पवित्र चीज़ें हलाल कर दी गईं और उन लोगों का खाना तुम्हारे लिए हलाल है जिन्हें किताब दी गई, और तुम्हारा खाना उनके लिए हलाल है, और ईमान वाली औरतों में से पाक-दामन औरतें तथा उन लोगों की पाक-दामन औरतें जिन्हें तुमसे पहले किताब दी गई, जब तुम उन्हें उनके महर दे दो, इस हाल में कि तुम विवाह में लाने वाले हो, व्यभिचार करने वाले नहीं और न चोरी-छिपे याराना करने वाले। और जो ईमान से इनकार करे, तो निश्चय उसका कर्म व्यर्थ हो गया तथा वह आख़िरत में घाटा उठाने वालों में से है।
५:६
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِذَاजबidhāقُمْتُمْखड़े हो तुमqum'tumإِلَىforilāٱلصَّلَوٰةِतरफ़ नमाज़ केl-ṣalatiفَٱغْسِلُوا۟तो धो लो तुमfa-igh'silūوُجُوهَكُمْअपने चेहरों कोwujūhakumوَأَيْدِيَكُمْऔर अपने हाथों केwa-aydiyakumإِلَىtillilāٱلْمَرَافِقِकोहनियों तकl-marāfiqiوَٱمْسَحُوا۟और मसह कर लोwa-im'saḥūبِرُءُوسِكُمْअपने सरों काbiruūsikumوَأَرْجُلَكُمْऔर अपने पाँवों को (धो लो)wa-arjulakumإِلَىtillilāٱلْكَعْبَيْنِ ۚटख़नों तकl-kaʿbayniوَإِنऔर अगरwa-inكُنتُمْहो तुमkuntumجُنُبًۭاहालते जनाबत मेंjunubanفَٱطَّهَّرُوا۟ ۚतो ख़ूब पाक हो जाओfa-iṭṭahharūوَإِنऔर अगरwa-inكُنتُمहो तुमkuntumمَّرْضَىٰٓबीमारmarḍāأَوْयाawعَلَىٰonʿalāسَفَرٍकिसी सफ़र परsafarinأَوْयाawجَآءَआयाjāaأَحَدٌۭकोई एकaḥadunمِّنكُمतुम में सेminkumمِّنَfromminaٱلْغَآئِطِक़ज़ा-ए-हाजत सेl-ghāiṭiأَوْयाawلَـٰمَسْتُمُछुआ हो तुमनेlāmastumuٱلنِّسَآءَऔरतों कोl-nisāaفَلَمْफिर नाfalamتَجِدُوا۟तुम पाओtajidūمَآءًۭपानीmāanفَتَيَمَّمُوا۟तो तयम्मुम कर लोfatayammamūصَعِيدًۭاमिट्टीṣaʿīdanطَيِّبًۭاपाक सेṭayyibanفَٱمْسَحُوا۟फिर मसह करोfa-im'saḥūبِوُجُوهِكُمْअपने चेहरों काbiwujūhikumوَأَيْدِيكُمऔर अपने हाथों काwa-aydīkumمِّنْهُ ۚउससेmin'huمَاनहींmāيُرِيدُचाहताyurīduٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِيَجْعَلَकि वो कर देliyajʿalaعَلَيْكُمतुम परʿalaykumمِّنْanyminحَرَجٍۢकोई तंगीḥarajinوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinيُرِيدُवो चाहता हैyurīduلِيُطَهِّرَكُمْकि वो पाक कर दे तुम्हेंliyuṭahhirakumوَلِيُتِمَّऔर ताकि वो पूरा कर देwaliyutimmaنِعْمَتَهُۥअपनी नेअमत कोniʿ'matahuعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتَشْكُرُونَतुम शुक्र अदा करोtashkurūna٦
ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ के लिए उठो, तो अपने चेहरों को और अपने हाथों को कुहनियों समेत धो लो और अपने सिरों का मसह़1 करो तथा अपने पाँवों को टखनों समेत (धो लो)। और यदि तुम जनाबत2 की हालत में हो, तो स्नान कर लो। तथा यदि तुम बीमार हो, अथवा यात्रा में हो, अथवा तुममें से कोई शौचकर्म से आया हो, अथवा तुमने स्त्रियों से सहवास किया हो, फिर कोई पानी न पाओ, तो पाक मिट्टी का क़सद करो और उससे अपने चेहरों तथा हाथों पर मसह 3कर लो। अल्लाह नहीं चाहता कि तुमपर कोई तंगी करे। लेकिन वह चाहता है कि तुम्हें पाक करे और ताकि अपनी नेमत तुमपर पूरी करे, ताकि तुम शुक्र करो।
५:७
وَٱذْكُرُوا۟और याद करोwa-udh'kurūنِعْمَةَनेअमत कोniʿ'mataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiعَلَيْكُمْजो तुम पर हैʿalaykumوَمِيثَـٰقَهُऔर उसका पुख़्ता अहदwamīthāqahuٱلَّذِىवो जोalladhīوَاثَقَكُمउसने तुमसे अहद लियाwāthaqakumبِهِۦٓसाथ उसकेbihiإِذْजबidhقُلْتُمْकहा तुमनेqul'tumسَمِعْنَاसुना हमनेsamiʿ'nāوَأَطَعْنَا ۖऔर इताअत की हमनेwa-aṭaʿnāوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَ ۚअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعَلِيمٌۢख़ूब जानने वाला हैʿalīmunبِذَاتِof whatbidhātiٱلصُّدُورِसीनों वाले (भेद)l-ṣudūri٧
तथा अपने ऊपर अल्लाह की नेमत याद करो और उसका वह वचन जो उसने तुमसे दृढ़ रूप से लिया है, जब तुमने कहा था : "हमने सुना और हमने मान लिया" तथा अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह सीनों की बात को भली-भाँति जानने वाला है।
५:८
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūكُونُوا۟हो जाओ तुमkūnūقَوَّٰمِينَक़ायम रहने वालेqawwāmīnaلِلَّهِअल्लाह के लिएlillahiشُهَدَآءَगवाहshuhadāaبِٱلْقِسْطِ ۖसाथ इन्साफ़ केbil-qis'ṭiوَلَاऔर नाwalāيَجْرِمَنَّكُمْहरगिज़ आमादा करे तुम्हेंyajrimannakumشَنَـَٔانُदुश्मनीshanaānuقَوْمٍकिसी क़ौम कीqawminعَلَىٰٓइस परʿalāأَلَّاकि नाallāتَعْدِلُوا۟ ۚतुम अदल करोगेtaʿdilūٱعْدِلُوا۟अदल करोiʿ'dilūهُوَवोhuwaأَقْرَبُज़्यादा क़रीब हैaqrabuلِلتَّقْوَىٰ ۖतक़वा केlilttaqwāوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَ ۚअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaخَبِيرٌۢख़ूब ख़बर रखने वाला हैkhabīrunبِمَاउसकी जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūna٨
ऐ ईमान वालो! अल्लाह के लिए मज़बूती से क़ायम रहने वाले, न्याय के साथ गवाही देने वाले बन जाओ। तथा किसी समूह की शत्रुता तुम्हें इस बात पर हरगिज़ न उभारे कि तुम न्याय न करो। न्याय करो, यह तक़्वा (अल्लाह से डरने) के अधिक निकट1 है, और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह उससे भली-भाँति अवगत है जो तुम करते हो।
५:९
وَعَدَवादा कियाwaʿadaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلَّذِينَउनसे जोalladhīnaءَامَنُوا۟जो ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِ ۙनेकl-ṣāliḥātiلَهُمउनके लिएlahumمَّغْفِرَةٌۭमग़फ़िरतmaghfiratunوَأَجْرٌऔर अजर हैwa-ajrunعَظِيمٌۭबहुत बड़ाʿaẓīmun٩
अल्लाह ने उन लोगों से वादा किया है, जो ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए कि उनके लिए क्षमादान तथा बड़ा बदला है।
५:१०
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَكَذَّبُوا۟और उन्होंने झुठलायाwakadhabūبِـَٔايَـٰتِنَآहमारी आयात कोbiāyātināأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaأَصْحَـٰبُसाथीaṣḥābuٱلْجَحِيمِजहन्नम केl-jaḥīmi١٠
तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही भड़कती आग वाले हैं।
५:११
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūٱذْكُرُوا۟याद करोudh'kurūنِعْمَتَनेअमत कोniʿ'mataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiعَلَيْكُمْजो तुम पर हैʿalaykumإِذْजबidhهَمَّइरादा कियाhammaقَوْمٌएक क़ौम नेqawmunأَنकिanيَبْسُطُوٓا۟वो बढ़ाऐंyabsuṭūإِلَيْكُمْतरफ़ तुम्हारेilaykumأَيْدِيَهُمْहाथ अपनेaydiyahumفَكَفَّतो उसने रोक दिएfakaffaأَيْدِيَهُمْहाथ उनकेaydiyahumعَنكُمْ ۖतुमसेʿankumوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَ ۚअल्लाह सेl-lahaوَعَلَىAnd uponwaʿalāٱللَّهِऔर अल्लाह ही परl-lahiفَلْيَتَوَكَّلِपस चाहिए कि तवक्कल करेंfalyatawakkaliٱلْمُؤْمِنُونَईमान वालेl-mu'minūna١١
ऐ ईमान वालो! अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, जब कुछ लोगों ने इरादा किया कि तुम्हारी ओर अपने हाथ1 बढ़ाएँ, तो उसने उनके हाथों को तुमसे रोक दिया। तथा अल्लाह से डरो और ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
५:१२
۞ وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَخَذَलियाakhadhaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِيثَـٰقَपुख़्ता अहदmīthāqaبَنِىٓ(from the) Childrenbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल सेis'rāīlaوَبَعَثْنَاऔर मुक़र्रर किए हमनेwabaʿathnāمِنْهُمُउनमें सेmin'humuٱثْنَىْtwoith'nayعَشَرَबारहʿasharaنَقِيبًۭا ۖनिगरानnaqībanوَقَالَऔर कहाwaqālaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuإِنِّىबेशक मैंinnīمَعَكُمْ ۖसाथ हूँ तुम्हारेmaʿakumلَئِنْअलबत्ता अगरla-inأَقَمْتُمُक़ायम की तुमनेaqamtumuٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَءَاتَيْتُمُऔर दी तुमनेwaātaytumuٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataوَءَامَنتُمऔर ईमान लाए तुमwaāmantumبِرُسُلِىमेरे रसूलों परbirusulīوَعَزَّرْتُمُوهُمْऔर मदद की तुमने उनकीwaʿazzartumūhumوَأَقْرَضْتُمُऔर क़र्ज़ दिया तुमनेwa-aqraḍtumuٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaقَرْضًاक़र्ज़qarḍanحَسَنًۭاअच्छाḥasananلَّأُكَفِّرَنَّअलबत्ता मैं ज़रूर दूर कर दूँगाla-ukaffirannaعَنكُمْतुम सेʿankumسَيِّـَٔاتِكُمْबुराईयाँ तुम्हारीsayyiātikumوَلَأُدْخِلَنَّكُمْऔर अलबत्ता मैं ज़रूर दाख़िल करुँगाwala-ud'khilannakumجَنَّـٰتٍۢबाग़ात मेंjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُ ۚनहरेंl-anhāruفَمَنतो जिसनेfamanكَفَرَकुफ़्र कियाkafaraبَعْدَबादbaʿdaذَٰلِكَइसकेdhālikaمِنكُمْतुम में सेminkumفَقَدْतो तहक़ीक़faqadضَلَّवो भटक गयाḍallaسَوَآءَसीधेsawāaٱلسَّبِيلِरास्ते सेl-sabīli١٢
तथा निःसंदेह अल्लाह ने बनी इसराईल से दृढ़ वचन लिया और हमने उनमें से बारह प्रमुख नियुक्त किए। तथा अल्लाह ने फरमाया : निःसंदेह मैं तुम्हारे साथ हूँ, यदि तुमने नमाज़ क़ायम की और ज़कात अदा की और मेरे रसूलों पर ईमान लाए और उनका समर्थन किया तथा अल्लाह को अच्छा क़र्ज़1 दिया। तो निश्चय मैं तुमसे तुम्हारे पाप अवश्य क्षमा कर दूँगा और निश्चय तुम्हें ऐसे बाग़ों में अवश्य दाख़िल करूँगा, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। फिर जिसने इसके बाद तुममें से कुफ़्र किया, तो निश्चय वह सीधे रास्ते से भटक गया।
५:१३
فَبِمَاतो बवजहfabimāنَقْضِهِمउनके तोड़ने केnaqḍihimمِّيثَـٰقَهُمْअपने पुख़्ता अहद कोmīthāqahumلَعَنَّـٰهُمْलानत की हमने उन परlaʿannāhumوَجَعَلْنَاऔर कर दिया हमनेwajaʿalnāقُلُوبَهُمْउनके दिलों कोqulūbahumقَـٰسِيَةًۭ ۖसख़्तqāsiyatanيُحَرِّفُونَवो तब्दील कर देते हैंyuḥarrifūnaٱلْكَلِمَअलफ़ाज़ कोl-kalimaعَنfromʿanمَّوَاضِعِهِۦ ۙउनकी जगहों सेmawāḍiʿihiوَنَسُوا۟और वो भूल गए हैंwanasūحَظًّۭاबड़ा हिस्साḥaẓẓanمِّمَّاउसमें से जोmimmāذُكِّرُوا۟वो नसीहत किए गए थेdhukkirūبِهِۦ ۚजिसकीbihiوَلَاAnd notwalāتَزَالُऔर हमेशाtazāluتَطَّلِعُआप इत्तिला पाते रहते हैंtaṭṭaliʿuعَلَىٰofʿalāخَآئِنَةٍۢकिसी ना किसी ख़यानत परkhāinatinمِّنْهُمْउनकी तरफ़ सेmin'humإِلَّاमगरillāقَلِيلًۭاबहुत थोड़ेqalīlanمِّنْهُمْ ۖउनमें सेmin'humفَٱعْفُपस माफ़ कर दीजिएfa-uʿ'fuعَنْهُمْउन्हेंʿanhumوَٱصْفَحْ ۚऔर दरगुज़र कीजिएwa-iṣ'faḥإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيُحِبُّवो मोहब्बत करता हैyuḥibbuٱلْمُحْسِنِينَएहसान करने वालों सेl-muḥ'sinīna١٣
तो उनके अपने वचन को भंग करने ही के कारण, हमने उन्हें धिक्कार दिया और उनके दिलों को कठोर कर दिया कि वे शब्दों को उनके स्थानों से फेर देते1 हैं। तथा वे उसमें से एक हिस्सा भूल गए जिसकी उन्हें नसीहत की गई थी। और आपको हमेशा उनके किसी न किसी विश्वासघात का पता चलता रहेगा, सिवाय उनके थोड़े-से लोगों के। अतः आप उन्हें क्षमा कर दें और उन्हें जाने दें। निःसंदेह अल्लाह उपकार करने वालों से प्रेम करता है।
५:१४
وَمِنَAnd fromwaminaٱلَّذِينَऔर उनमें से जिन्होंनेalladhīnaقَالُوٓا۟कहाqālūإِنَّاबेशक हमinnāنَصَـٰرَىٰٓनस्रानी हैंnaṣārāأَخَذْنَاलिया हमनेakhadhnāمِيثَـٰقَهُمْपुख़्ता अहद उनकाmīthāqahumفَنَسُوا۟तो वो भूल गएfanasūحَظًّۭاएक हिस्साḥaẓẓanمِّمَّاउसमें से जोmimmāذُكِّرُوا۟वो नसीहत किए गए थेdhukkirūبِهِۦजिसकीbihiفَأَغْرَيْنَاतो डाल दिया हमनेfa-aghraynāبَيْنَهُمُदर्मियान उनकेbaynahumuٱلْعَدَاوَةَअदावतl-ʿadāwataوَٱلْبَغْضَآءَऔर बुग़्ज़ कोwal-baghḍāaإِلَىٰtillilāيَوْمِ(the) Dayyawmiٱلْقِيَـٰمَةِ ۚक़यामत के दिन तकl-qiyāmatiوَسَوْفَऔर अनक़रीबwasawfaيُنَبِّئُهُمُख़बर देगा उन्हेंyunabbi-uhumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِمَاउसकी जोbimāكَانُوا۟थे वोkānūيَصْنَعُونَवो करते/बनातेyaṣnaʿūna١٤
तथा जिन लोगों ने कहा कि हम ईसाई हैं, हमने उनसे (भी) दृढ़ वचन लिया, फिर वे उसका एक हिस्सा भूल गए जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था। अतः हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक के लिए दुश्मनी और द्वेष भड़का दिया। और शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उसकी ख़बर1 देगा, जो वे किया करते थे।
५:१५
يَـٰٓأَهْلَO Peopleyāahlaٱلْكِتَـٰبِऐ अहले किताबl-kitābiقَدْतहक़ीक़qadجَآءَكُمْआ गया तुम्हारे पासjāakumرَسُولُنَاरसूल हमाराrasūlunāيُبَيِّنُजो वाज़ेह करता हैyubayyinuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumكَثِيرًۭاबकसरतkathīranمِّمَّاउसमें से जोmimmāكُنتُمْथे तुमkuntumتُخْفُونَतुम छुपातेtukh'fūnaمِنَofminaٱلْكِتَـٰبِकिताब में सेl-kitābiوَيَعْفُوا۟और वो दरगुज़र करता हैwayaʿfūعَنofʿanكَثِيرٍۢ ۚबहुत सी (बातों) सेkathīrinقَدْतहक़ीक़qadجَآءَكُمआ गया तुम्हारे पासjāakumمِّنَfromminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiنُورٌۭएक नूरnūrunوَكِتَـٰبٌۭऔर किताबwakitābunمُّبِينٌۭवाज़ेहmubīnun١٥
ऐ किताब वालो! तुम्हारे पास हमारे रसूल1 आ गए हैं, जो तुम्हारे लिए उनमें से बहुत-सी बातें खोलकर बयान करते हैं, जिन्हें तुम किताब में से छिपाया करते थे और बहुत-सी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। निःसंदेह तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से एक प्रकाश तथा स्पष्ट पुस्तक (क़ुरआन) आई है।
५:१६
يَهْدِىहिदायत देता हैyahdīبِهِसाथ उसकेbihiٱللَّهُअल्लाहl-lahuمَنِउसको जोmaniٱتَّبَعَपैरवी करेittabaʿaرِضْوَٰنَهُۥउसकी रज़ामन्दी कीriḍ'wānahuسُبُلَरास्तों की (तरफ़)subulaٱلسَّلَـٰمِसलामती केl-salāmiوَيُخْرِجُهُمऔर वो निकालता है उन्हेंwayukh'rijuhumمِّنَfromminaٱلظُّلُمَـٰتِअंधेरों सेl-ẓulumātiإِلَىtoilāٱلنُّورِतरफ़ रोशनी केl-nūriبِإِذْنِهِۦअपने इज़्न सेbi-idh'nihiوَيَهْدِيهِمْऔर वो हिदायत देता है उन्हेंwayahdīhimإِلَىٰtoilāصِرَٰطٍۢतरफ़ रास्तेṣirāṭinمُّسْتَقِيمٍۢसीधे केmus'taqīmin١٦
जिसके द्वारा अल्लाह उन लोगों को शांति के मार्ग दिखाता है, जो उसकी प्रसन्नता के पीछे चलें। और उन्हें अपनी अनुमति से अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालता है और उन्हें सीधे रास्ते का मार्गदर्शन प्रदान करता है।
५:१७
لَّقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadكَفَرَकुफ़्र कियाkafaraٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaقَالُوٓا۟कहाqālūإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो हीhuwaٱلْمَسِيحُ(is) the Messiahl-masīḥuٱبْنُsonub'nuمَرْيَمَ ۚमसीह इब्ने मरियम हैmaryamaقُلْकह दीजिएqulفَمَنतो कौनfamanيَمْلِكُमालिक होगाyamlikuمِنَagainstminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiشَيْـًٔاकिसी चीज़ काshayanإِنْअगरinأَرَادَउसने इरादा कियाarādaأَنकिanيُهْلِكَवो हलाक कर देyuh'likaٱلْمَسِيحَthe Messiahl-masīḥaٱبْنَsonib'naمَرْيَمَमसीह इब्ने मरियम कोmaryamaوَأُمَّهُۥऔर उसकी माँ कोwa-ummahuوَمَنऔर जो भीwamanفِى(is) infīٱلْأَرْضِज़मीन में हैl-arḍiجَمِيعًۭا ۗसबके-सबकोjamīʿanوَلِلَّهِऔर अल्लाह ही के लिए हैwalillahiمُلْكُबादशाहतmul'kuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन कीwal-arḍiوَمَاऔर जो कुछwamāبَيْنَهُمَا ۚदर्मियान है उन दोनों केbaynahumāيَخْلُقُवो पैदा करता हैyakhluquمَاजोmāيَشَآءُ ۚवो चाहता हैyashāuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۭख़ूब क़ादिर हैqadīrun١٧
निश्चय वे लोग काफ़िर1 हो गए, जिन्होंने कहा कि निःसंदेह अल्लाह मरयम का पुत्र मसीह ही तो है। (ऐ नबी!) कह दें : यदि अल्लाह मसीह बिन मरयम और उसकी माता तथा धरती में मौजूद सभी लोगों को विनष्ट करना चाहे, तो कौन अल्लाह को रोकने का अधिकार रखता है? तथा अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती का राज्य है और उसकी भी जो उन दोनों के बीच है। वह पैदा करता है जो चाहता है तथा अल्लाह हर चीज़ का पूर्ण सामर्थ्य रखता है।
५:१८
وَقَالَتِऔर कहाwaqālatiٱلْيَهُودُयहूदl-yahūduوَٱلنَّصَـٰرَىٰऔर नसारा नेwal-naṣārāنَحْنُहमnaḥnuأَبْنَـٰٓؤُا۟बेटे हैंabnāuٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَأَحِبَّـٰٓؤُهُۥ ۚऔर उसके प्यारे हैंwa-aḥibbāuhuقُلْकह दीजिएqulفَلِمَफिर क्योंfalimaيُعَذِّبُكُمवो अज़ाब देता है तुम्हेंyuʿadhibukumبِذُنُوبِكُم ۖबवजह तुम्हारे गुनाहों केbidhunūbikumبَلْबल्किbalأَنتُمतुमantumبَشَرٌۭएक इन्सान होbasharunمِّمَّنْउनमें से जिन्हेंmimmanخَلَقَ ۚउसने पैदा कियाkhalaqaيَغْفِرُवो बख़्श देगाyaghfiruلِمَنजिसेlimanيَشَآءُवो चाहेगाyashāuوَيُعَذِّبُऔर वो अज़ाब देगाwayuʿadhibuمَنजिसेmanيَشَآءُ ۚवो चाहेगाyashāuوَلِلَّهِऔर अल्लाह ही के लिए हैwalillahiمُلْكُबादशाहतmul'kuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों कीl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन कीwal-arḍiوَمَاऔर जोwamāبَيْنَهُمَا ۖदर्मियान है उन दोनों केbaynahumāوَإِلَيْهِतरफ़ उसी केwa-ilayhiٱلْمَصِيرُलौटना हैl-maṣīru١٨
तथा यहूदियों और ईसाइयों ने कहा कि हम अल्लाह के पुत्र और उसके प्यारे हैं। आप कह दें : फिर वह तुम्हें तुम्हारे पापों के कारण सज़ा क्यों देता है? बल्कि तुम (भी) उसके पैदा किए हुए प्राणियों में से एक मनुष्य हो। वह जिसे चाहता है, क्षमा करता है और जिसे चाहता है, सज़ा देता है। तथा अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती का राज्य1 है और उसका भी जो उन दोनों के बीच है। और उसी की ओर लौटकर जाना है।
५:१९
يَـٰٓأَهْلَO Peopleyāahlaٱلْكِتَـٰبِऐ अहले किताबl-kitābiقَدْतहक़ीक़qadجَآءَكُمْआ गया तुम्हारे पासjāakumرَسُولُنَاरसूल हमाराrasūlunāيُبَيِّنُवो वाज़ेह करता हैyubayyinuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumعَلَىٰ[on]ʿalāفَتْرَةٍۢवक़्फ़े परfatratinمِّنَofminaٱلرُّسُلِरसूलों केl-rusuliأَنकिanتَقُولُوا۟तुम कहो (ना)taqūlūمَاनहींmāجَآءَنَاआया हमारे पासjāanāمِنۢanyminبَشِيرٍۢकोई ख़ुशखबरी देने वालाbashīrinوَلَاऔर नाwalāنَذِيرٍۢ ۖकोई डराने वालाnadhīrinفَقَدْपस तहक़ीक़faqadجَآءَكُمआ गया तुम्हारे पासjāakumبَشِيرٌۭख़ुशख़बरी देने वालाbashīrunوَنَذِيرٌۭ ۗऔर डराने वालाwanadhīrunوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun١٩
ऐ किताब वालो! निःसंदेह तुम्हारे पास हमारा रसूल1 आया है, जो तुम्हारे लिए खोलकर बयान करता है, रसूलों के एक अंतराल के बाद, ताकि तुम यह न कहो कि हमारे पास न कोई शुभ सूचना देने वाला आया और न डराने वाला। तो निश्चय तुम्हारे पास एक शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला आ चुका है। तथा अल्लाह हर चीज़ पर शक्ति रखने वाला है।
५:२०
وَإِذْऔर जबwa-idhقَالَकहाqālaمُوسَىٰमूसा नेmūsāلِقَوْمِهِۦअपनी क़ौम सेliqawmihiيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱذْكُرُوا۟याद करोudh'kurūنِعْمَةَनेअमतniʿ'mataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiعَلَيْكُمْजो तुम पर (हुई)ʿalaykumإِذْजबidhجَعَلَउसने बनाएjaʿalaفِيكُمْतुम मेंfīkumأَنۢبِيَآءَअम्बियाanbiyāaوَجَعَلَكُمऔर उसने बनाया तुम्हेंwajaʿalakumمُّلُوكًۭاबादशाहmulūkanوَءَاتَىٰكُمऔर उसने दिया तुम्हेंwaātākumمَّاवो जोmāلَمْनहींlamيُؤْتِउसने दियाyu'tiأَحَدًۭاकिसी एक कोaḥadanمِّنَfromminaٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों में सेl-ʿālamīna٢٠
तथा (याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, जब उसने तुममें नबी बनाए और तुम्हें बादशाह बना दिया तथा तुम्हें वह कुछ दिया, जो समस्त संसार में किसी को नहीं दिया।
५:२१
يَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱدْخُلُوا۟दाख़िल हो जाओud'khulūٱلْأَرْضَअरदेl-arḍaٱلْمُقَدَّسَةَमुक़द्दस मेंl-muqadasataٱلَّتِىवो जोallatīكَتَبَलिख दीkatabaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumوَلَاऔर नाwalāتَرْتَدُّوا۟तुम फिर जानाtartaddūعَلَىٰٓonʿalāأَدْبَارِكُمْअपनी पुश्तों परadbārikumفَتَنقَلِبُوا۟वरना तुम लौट जाओगेfatanqalibūخَـٰسِرِينَख़सारा पाने वाले होकरkhāsirīna٢١
ऐ मेरी जाति के लोगो! उस पवित्र धरती (बैतुल मक़दिस) में प्रवेश कर जाओ, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दी है और अपनी पीठों पर न फिर जाओ, अन्यथा घाटा उठाने वाले होकर लौटोगो।
५:२२
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰمُوسَىٰٓऐ मूसाyāmūsāإِنَّबेशकinnaفِيهَاउसमेंfīhāقَوْمًۭاएक क़ौम हैqawmanجَبَّارِينَबड़े ज़बरदस्त लोगों कीjabbārīnaوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāلَنहरगिज़ नाlanنَّدْخُلَهَاहम दाख़िल होंगे उसमेंnadkhulahāحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيَخْرُجُوا۟वो निकल जाऐंyakhrujūمِنْهَاउससेmin'hāفَإِنफिर अगरfa-inيَخْرُجُوا۟वो निकल जाऐंyakhrujūمِنْهَاउससेmin'hāفَإِنَّاतो बेशक हमfa-innāدَٰخِلُونَदाख़िल होने वाले हैंdākhilūna٢٢
उन्होंने कहा : ऐ मूसा! उसमें बड़े बलवान लोग रहते हैं और निःसंदेह हम उसमें हरगिज़ प्रवेश न करेंगे, यहाँ तक कि वे उससे निकल जाएँ। यदि वे उससे निकल जाएँ, तो हम अवश्य प्रवेश करने वाले हैं।
५:२३
قَالَकहाqālaرَجُلَانِदो आदमियों नेrajulāniمِنَfromminaٱلَّذِينَउसमें से जोalladhīnaيَخَافُونَडरते थेyakhāfūnaأَنْعَمَइनाम किया थाanʿamaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَيْهِمَاउन दोनों परʿalayhimāٱدْخُلُوا۟दाख़िल हो जाओud'khulūعَلَيْهِمُउन परʿalayhimuٱلْبَابَदरवाज़े सेl-bābaفَإِذَاफिर जबfa-idhāدَخَلْتُمُوهُतुम दाख़िल हो जाओगे उसमेंdakhaltumūhuفَإِنَّكُمْतो बेशक तुमfa-innakumغَـٰلِبُونَ ۚग़ालिब आने वाले होghālibūnaوَعَلَىAnd uponwaʿalāٱللَّهِऔर अल्लाह ही परl-lahiفَتَوَكَّلُوٓا۟पस तुम तवक्कल करोfatawakkalūإِنअगरinكُنتُمहो तुमkuntumمُّؤْمِنِينَईमान लाने वालेmu'minīna٢٣
दो व्यक्तियों ने कहा, जो उन लोगों में से थे जो (अल्लाह से) डरते थे, जिनपर अल्लाह ने अनुग्रह किया था : तुम उनपर दरवाज़े में प्रवेश कर जाओ। जब तुम वहाँ प्रवेश कर गए, तो निश्चय तुम विजेता हो। तथा अल्लाह ही पर भरोसा करो, यदि तुम ईमान वाले हो।
५:२४
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūيَـٰمُوسَىٰٓऐ मूसाyāmūsāإِنَّاबेशक हमinnāلَنहरगिज़ नहींlanنَّدْخُلَهَآहम दाख़िल होंगे उसमेंnadkhulahāأَبَدًۭاकभी भीabadanمَّاformāدَامُوا۟जब तक वो रहेंगेdāmūفِيهَا ۖउसमेंfīhāفَٱذْهَبْपस जाओfa-idh'habأَنتَतुमantaوَرَبُّكَऔर रब तुम्हाराwarabbukaفَقَـٰتِلَآपस तुम दोनों जंग करोfaqātilāإِنَّاबेशक हमinnāهَـٰهُنَاयहींhāhunāقَـٰعِدُونَबैठने वाले हैंqāʿidūna٢٤
उन्होंने कहा : ऐ मूसा! निःसंदेह हम हरगिज़ उसमें कभी प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक वे उसमें मौजूद हैं। अतः तुम और तुम्हारा पालनहार जाओ। फिर तुम दोनों लड़ो, निःसंदेह हम यहीं बैठने वाले हैं।
५:२५
قَالَकहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiإِنِّىबेशक मैंinnīلَآ(do) notlāأَمْلِكُनहीं मैं मालिकamlikuإِلَّاमगरillāنَفْسِىअपने नफ़्स काnafsīوَأَخِى ۖऔर अपने भाई काwa-akhīفَٱفْرُقْपस जुदाई डाल देfa-uf'ruqبَيْنَنَاदर्मियान हमारेbaynanāوَبَيْنَऔर दर्मियानwabaynaٱلْقَوْمِउन लोगों केl-qawmiٱلْفَـٰسِقِينَजो फ़ासिक़ हैंl-fāsiqīna٢٥
उस (मूसा) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मैं अपने और अपने भाई के सिवा किसी पर कोई अधिकार नहीं रखता। अतः तू हमारे तथा इन अवज्ञाकारी लोगों के बीच अलगाव कर दे।
५:२६
قَالَफ़रमायाqālaفَإِنَّهَاपस बेशक वोfa-innahāمُحَرَّمَةٌहराम कर दी गईmuḥarramatunعَلَيْهِمْ ۛउन परʿalayhimأَرْبَعِينَचालीसarbaʿīnaسَنَةًۭ ۛसालsanatanيَتِيهُونَवो भटकते फिरेंगेyatīhūnaفِىinfīٱلْأَرْضِ ۚज़मीन मेंl-arḍiفَلَاपस नाfalāتَأْسَतुम अफ़सोस करोtasaعَلَىoverʿalāٱلْقَوْمِउन लोगों परl-qawmiٱلْفَـٰسِقِينَजो फ़ासिक़ हैंl-fāsiqīna٢٦
(अल्लाह ने) कहा : निःसंदेह वह (धरती) उनपर चालीस वर्षों के लिए हराम (वर्जित) कर दी गई। (इस दौरान) वे धरती में भटकते रहेंगे। अतः तुम इन अवज्ञाकारी लोगों पर शोक न करो।1
५:२७
۞ وَٱتْلُऔर पढ़िएwa-ut'luعَلَيْهِمْउन परʿalayhimنَبَأَख़बरnaba-aٱبْنَىْदो बेटों कीib'nayءَادَمَआदम केādamaبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiإِذْजबidhقَرَّبَاउन दोनों ने क़ुर्बानी कीqarrabāقُرْبَانًۭاक़ुर्बानी करनाqur'bānanفَتُقُبِّلَतो वो क़ुबूल कर ली गईfatuqubbilaمِنْfromminأَحَدِهِمَاउन दोनों में से एक सेaḥadihimāوَلَمْऔर नाwalamيُتَقَبَّلْवो क़ुबूल की गईyutaqabbalمِنَfromminaٱلْـَٔاخَرِदूसरे सेl-ākhariقَالَकहाqālaلَأَقْتُلَنَّكَ ۖअलबत्ता मैं ज़रूर क़त्ल करुँगा तुझेla-aqtulannakaقَالَकहाqālaإِنَّمَاबेशकinnamāيَتَقَبَّلُक़ुबूल करता हैyataqabbaluٱللَّهُअल्लाहl-lahuمِنَfromminaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों सेl-mutaqīna٢٧
तथा उन्हें आदम के दो बेटों1 का समाचार सच्चाई के साथ सुना दो, जब उन दोनों ने कुछ क़ुर्बानी प्रस्तुत की, तो उनमें से एक की स्वीकार कर ली गई और दूसरे की स्वीकार न की गई। उस (दूसरे) ने कहा : मैं तुझे अवश्य ही क़त्ल कर दूँगा। उसने उत्तर दिया : निःसंदेह अल्लाह डरने वालों ही से स्वीकार करता है।
५:२८
لَئِنۢअलबत्ता अगरla-inبَسَطتَबढ़ाया तूनेbasaṭtaإِلَىَّमेरी तरफ़ilayyaيَدَكَहाथ अपनाyadakaلِتَقْتُلَنِىताकि तू क़त्ल कर दे मुझेlitaqtulanīمَآनहींmāأَنَا۠मैंanāبِبَاسِطٍۢबढ़ाने वालाbibāsiṭinيَدِىَहाथ अपनाyadiyaإِلَيْكَतरफ़ तेरेilaykaلِأَقْتُلَكَ ۖताकि मैं क़त्ल कर दूँ तुझेli-aqtulakaإِنِّىٓबेशक मैंinnīأَخَافُमैं डरता हूँakhāfuٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaرَبَّजो रब हैrabbaٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों काl-ʿālamīna٢٨
यदि तूने मुझे मार डालने के लिए मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया1, तो मैं हरगिज़ अपना हाथ तेरी ओर इसलिए बढ़ाने वाला नहीं कि तुझे क़त्ल करूँ। निःसंदेह मैं अल्लाह से डरता हूँ, जो सारे संसार का पालनहार है।
५:२९
إِنِّىٓबेशक मैंinnīأُرِيدُमैं चाहता हूँurīduأَنकिanتَبُوٓأَतू पलटेtabūaبِإِثْمِىसाथ मेरे गुनाह केbi-ith'mīوَإِثْمِكَऔर अपने गुनाह केwa-ith'mikaفَتَكُونَफिर तू हो जाएगाfatakūnaمِنْamongminأَصْحَـٰبِसाथियों में सेaṣḥābiٱلنَّارِ ۚआग केl-nāriوَذَٰلِكَऔर येwadhālikaجَزَٰٓؤُا۟बदला हैjazāuٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों काl-ẓālimīna٢٩
मैं तो यह चाहता हूँ कि तू मेरे पाप और अपने पाप के साथ लौटे, फिर तू आग वालों में से हो जाए। और यही अत्याचारियों का बदला है।
५:३०
فَطَوَّعَتْतो आसान कर दियाfaṭawwaʿatلَهُۥउसके लिएlahuنَفْسُهُۥउसके नफ़्स नेnafsuhuقَتْلَक़त्ल करनाqatlaأَخِيهِअपने भाई काakhīhiفَقَتَلَهُۥतो उसने क़त्ल कर दिया उसेfaqatalahuفَأَصْبَحَपस वो हो गयाfa-aṣbaḥaمِنَofminaٱلْخَـٰسِرِينَख़सारा पाने वालों में सेl-khāsirīna٣٠
अंततः उसके मन ने उसके लिए अपने भाई की हत्या को सुसज्जित कर दिया, तो उसने उसे क़त्ल कर दिया, सो वह घाटा उठाने वालों में से हो गया।
५:३१
فَبَعَثَफिर भेजाfabaʿathaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuغُرَابًۭاएक कौआghurābanيَبْحَثُवो खोदता थाyabḥathuفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiلِيُرِيَهُۥताकि वो दिखाए उसेliyuriyahuكَيْفَकिस तरहkayfaيُوَٰرِىवो छुपाएyuwārīسَوْءَةَलाशsawataأَخِيهِ ۚअपने भाई कीakhīhiقَالَउसने कहाqālaيَـٰوَيْلَتَىٰٓहाय अफ़सोस मुझ परyāwaylatāأَعَجَزْتُक्या आजिज़ हुआ मैंaʿajaztuأَنْइससे (भी) किanأَكُونَमैं हो जाऊँakūnaمِثْلَमानिन्दmith'laهَـٰذَاइसhādhāٱلْغُرَابِकौए केl-ghurābiفَأُوَٰرِىَकि मैं छुपाऊँfa-uwāriyaسَوْءَةَलाशsawataأَخِى ۖअपने भाई कीakhīفَأَصْبَحَतो वो हो गयाfa-aṣbaḥaمِنَofminaٱلنَّـٰدِمِينَनादिम होने वालों में सेl-nādimīna٣١
फिर अल्लाह ने एक कौआ भेजा, जो भूमि कुरेदता था, ताकि उसे दिखाए कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। कहने लगा : हाय मेरा विनाश! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका कि अपने भाई का शव छिपा सकूँ। फिर वह लज्जित होने वालों में से हो गया।
५:३२
مِنْFromminأَجْلِबवजहajliذَٰلِكَउसकेdhālikaكَتَبْنَاलिख दिया हमनेkatabnāعَلَىٰonʿalāبَنِىٓ(the) Childrenbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल परis'rāīlaأَنَّهُۥकि बेशक वोannahuمَنजिसनेmanقَتَلَक़त्ल कियाqatalaنَفْسًۢاकिसी जान कोnafsanبِغَيْرِबग़ैरbighayriنَفْسٍकिसी जान केnafsinأَوْयाawفَسَادٍۢफ़साद करने केfasādinفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَكَأَنَّمَاतो गोया किfaka-annamāقَتَلَउसने क़त्ल कर दियाqatalaٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaجَمِيعًۭاसबके-सबकोjamīʿanوَمَنْऔर जिसनेwamanأَحْيَاهَاज़िन्दगी बचाई उसकीaḥyāhāفَكَأَنَّمَآतो गोया किfaka-annamāأَحْيَاउसने ज़िन्दा कियाaḥyāٱلنَّاسَलोगों कोl-nāsaجَمِيعًۭا ۚसबके-सबकोjamīʿanوَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadجَآءَتْهُمْआए उनके पासjāathumرُسُلُنَاरसूल हमारेrusulunāبِٱلْبَيِّنَـٰتِसाथ वाज़ेह निशानियों केbil-bayinātiثُمَّफिरthummaإِنَّबेशकinnaكَثِيرًۭاबहुत सेkathīranمِّنْهُمउनमें सेmin'humبَعْدَबादbaʿdaذَٰلِكَउसकेdhālikaفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiلَمُسْرِفُونَअलबत्ता ज़्यादती करने वाले हैंlamus'rifūna٣٢
इसी कारण, हमने बनी इसराईल पर लिख दिया1 कि निःसंदेह जिसने किसी प्राणी की किसी प्राणी के खून (के बदले) अथवा धरती में विद्रोह के बिना हत्या कर दी, तो मानो उसने सारे इनसानों की हत्या2 कर दी, और जिसने उसे जीवन प्रदान किया, तो मानो उसने सारे इनसानों को जीवन प्रदान किया। तथा निःसंदेह उनके पास हमारे रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आए। फिर निःसंदेह उनमें से बहुत से लोग उसके बाद भी धरती में निश्चय सीमा से आगे बढ़ने वाले हैं।
५:३३
إِنَّمَاबेशकinnamāجَزَٰٓؤُا۟बदलाjazāuٱلَّذِينَउनका जोalladhīnaيُحَارِبُونَजंग करते हैंyuḥāribūnaٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल सेwarasūlahuوَيَسْعَوْنَऔर वो दौड़ धूप करते हैंwayasʿawnaفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَسَادًاफ़साद के लिएfasādanأَنये किanيُقَتَّلُوٓا۟वो क़त्ल कर दिए जाऐंyuqattalūأَوْयाawيُصَلَّبُوٓا۟वो सूली चढ़ा दिए जाऐंyuṣallabūأَوْorawتُقَطَّعَया काट दिए जाऐंtuqaṭṭaʿaأَيْدِيهِمْहाथ उनकेaydīhimوَأَرْجُلُهُمऔर पाँव उनकेwa-arjuluhumمِّنْofminخِلَـٰفٍमुख़ालिफ़ सिम्त सेkhilāfinأَوْorawيُنفَوْا۟या वो निकाल दिए जाऐंyunfawمِنَfromminaٱلْأَرْضِ ۚउस ज़मीन सेl-arḍiذَٰلِكَयेdhālikaلَهُمْउनके लिएlahumخِزْىٌۭरुस्वाई हैkhiz'yunفِىinfīٱلدُّنْيَا ۖदुनिया मेंl-dun'yāوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumفِىinfīٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunعَظِيمٌबहुत बड़ाʿaẓīmun٣٣
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से जंग करते हैं तथा धरती में उपद्रव करने का प्रयास करते हैं, उनका दंड यही है कि उन्हें बुरी तरह क़त्ल कर दिया जाए, या उन्हें बुरी तरह सूली दी जाए, या उनके हाथ-पाँव विपरीत दिशाओं से बुरी तरह काट दिए जाएँ, या उन्हें (उस) देश से निकाल दिया जाए। यह उनके लिए दुनिया में अपमान है तथा आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।
५:३४
إِلَّاसिवायillāٱلَّذِينَउन लोगों के जोalladhīnaتَابُوا۟तौबा करेंtābūمِنfromminقَبْلِइससे क़ब्लqabliأَنकिanتَقْدِرُوا۟तुम क़ादिर हो जाओtaqdirūعَلَيْهِمْ ۖउन परʿalayhimفَٱعْلَمُوٓا۟तो जान लोfa-iʿ'lamūأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٣٤
परंतु जो लोग इससे पहले तौबा कर लें कि तुम उनपर क़ाबू पाओ, तो जान लो कि निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
५:३५
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūٱتَّقُوا۟डरोittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَٱبْتَغُوٓا۟और तलाश करोwa-ib'taghūإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiٱلْوَسِيلَةَवसीला/ज़रियाl-wasīlataوَجَـٰهِدُوا۟और जिहाद करोwajāhidūفِىinfīسَبِيلِهِۦउसके रास्ते मेंsabīlihiلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتُفْلِحُونَतुम फ़लाह पा जाओtuf'liḥūna٣٥
ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो और उसकी ओर निकटता1 तलाश करो तथा उसके मार्ग में जिहाद करो, ताकि तुम सफल हो जाओ।
५:३६
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلَوْअगरlawأَنَّबेशकannaلَهُمउनके लिए होlahumمَّاजो कुछmāفِى(is) infīٱلْأَرْضِज़मीन में हैl-arḍiجَمِيعًۭاसारे का साराjamīʿanوَمِثْلَهُۥऔर मानिन्द उसी केwamith'lahuمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuلِيَفْتَدُوا۟ताकि वो फ़िदया देंliyaftadūبِهِۦसाथ उसकेbihiمِنْfromminعَذَابِअज़ाब से (बचने के लिए)ʿadhābiيَوْمِदिनyawmiٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiمَاनाmāتُقُبِّلَवो क़ुबूल किया जाएगाtuqubbilaمِنْهُمْ ۖउनसेmin'humوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٣٦
निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में है और उतना ही उसके साथ और भी हो, ताकि वे यह सब कुछ क़ियामत के दिन की यातना से छुड़ौती के रूप मे दे दें, तो उनकी ओर से स्वीकार नहीं किया जाएगा और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
५:३७
يُرِيدُونَवो चाहेंगेyurīdūnaأَنकिanيَخْرُجُوا۟वो निकल जाऐंyakhrujūمِنَofminaٱلنَّارِआग सेl-nāriوَمَاऔर नहींwamāهُمवोhumبِخَـٰرِجِينَनिकलने वालेbikhārijīnaمِنْهَا ۖउससेmin'hāوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumعَذَابٌۭअज़ाब हैʿadhābunمُّقِيمٌۭक़ायम रहने वालाmuqīmun٣٧
वे चाहेंगे कि आग से निकल जाएँ, हालाँकि वे उससे हरगिज़ निकलने वाले नहीं और उनके लिए हमेशा रहने वाली यातना है।
५:३८
وَٱلسَّارِقُऔर चोर मर्दwal-sāriquوَٱلسَّارِقَةُऔर चोर औरतwal-sāriqatuفَٱقْطَعُوٓا۟पस काट दोfa-iq'ṭaʿūأَيْدِيَهُمَاहाथ उन दोनों केaydiyahumāجَزَآءًۢबदला हैjazāanبِمَاबवजह उसके जोbimāكَسَبَاउन दोनों ने कमायाkasabāنَكَـٰلًۭاइबरतनाक सज़ा हैnakālanمِّنَfromminaٱللَّهِ ۗअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَزِيزٌबहुत ज़बरदस्त हैʿazīzunحَكِيمٌۭख़ूब हिकमत वाला हैḥakīmun٣٨
और जो चोरी करने वाला (पुरुष) और जो चोरी करने वाली (स्त्री) है, सो दोनों के हाथ काट दो, उसके बदले में जो उन दोनों ने कमाया, अल्लाह की ओर से इबरत (भय)1 दिलाने के लिए। और अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
५:३९
فَمَنतो जो कोईfamanتَابَतौबा कर लेtābaمِنۢfromminبَعْدِबादbaʿdiظُلْمِهِۦअपने ज़ुल्म केẓul'mihiوَأَصْلَحَऔर वो इस्लाह कर लेwa-aṣlaḥaفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَتُوبُवो मेहरबान होगाyatūbuعَلَيْهِ ۗउस परʿalayhiإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٣٩
फिर जो व्यक्ति अपने अत्याचार (चोरी) के बाद तौबा कर ले और सुधार करे, तो निश्चय अल्लाह उसकी तौबा स्वीकार करेगा।1 निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
५:४०
أَلَمْक्या नहींalamتَعْلَمْआपने जानाtaʿlamأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَهُۥउसी के लिए हैlahuمُلْكُबादशाहतmul'kuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन कीwal-arḍiيُعَذِّبُवो अज़ाब देता हैyuʿadhibuمَنजिसेmanيَشَآءُवो चाहता हैyashāuوَيَغْفِرُऔर वो बख़्श देता हैwayaghfiruلِمَنजिसेlimanيَشَآءُ ۗवो चाहता हैyashāuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۭख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun٤٠
क्या तुमने नहीं जाना कि निःसंदेह अल्लाह ही है जिसके पास आकाशों तथा धरती का राज्य है? वह जिसे चाहता है, दंड देता है और जिसे चाहता है, क्षमा कर देता है। तथा अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
५:४१
۞ يَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلرَّسُولُरसूलl-rasūluلَاLet notlāيَحْزُنكَना ग़मगीन करें आपकोyaḥzunkaٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيُسَـٰرِعُونَदौड़ धूप करते हैंyusāriʿūnaفِىin (to)fīٱلْكُفْرِकुफ़्र मेंl-kuf'riمِنَofminaٱلَّذِينَउन लोगों में से जोalladhīnaقَالُوٓا۟कहते हैंqālūءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِأَفْوَٰهِهِمْअपने मुँहों सेbi-afwāhihimوَلَمْहालाँकि नहींwalamتُؤْمِنईमान लाएtu'minقُلُوبُهُمْ ۛदिल उनकेqulūbuhumوَمِنَand fromwaminaٱلَّذِينَऔर उनमें से जोalladhīnaهَادُوا۟ ۛयहूदी बन गएhādūسَمَّـٰعُونَबहुत ज़्यादा सुनने वाले हैंsammāʿūnaلِلْكَذِبِझूठ कोlil'kadhibiسَمَّـٰعُونَबहुत ज़्यादा सुनने वाले हैंsammāʿūnaلِقَوْمٍfor peopleliqawminءَاخَرِينَदूसरी क़ौम के लिएākharīnaلَمْनहींlamيَأْتُوكَ ۖवो आए आपके पासyatūkaيُحَرِّفُونَवो बदल देते हैंyuḥarrifūnaٱلْكَلِمَअलफ़ाज़ कोl-kalimaمِنۢfromminبَعْدِबादbaʿdiمَوَاضِعِهِۦ ۖउनकी जगहें (मुक़र्रर होने के)mawāḍiʿihiيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaإِنْअगरinأُوتِيتُمْदिए जाओ तुमūtītumهَـٰذَاयेhādhāفَخُذُوهُतो ले लो उसेfakhudhūhuوَإِنऔर अगरwa-inلَّمْनाlamتُؤْتَوْهُतुम दिए जाओ उसेtu'tawhuفَٱحْذَرُوا۟ ۚपस बचोfa-iḥ'dharūوَمَنऔर वो जोwamanيُرِدِइरादा कर लेyuridiٱللَّهُअल्लाहl-lahuفِتْنَتَهُۥउसकी आज़माइश काfit'natahuفَلَنतो हरगिज़ नहींfalanتَمْلِكَआप मालिक हो सकतेtamlikaلَهُۥउसके लिएlahuمِنَagainstminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiشَيْـًٔا ۚकिसी चीज़ केshayanأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaلَمْनहींlamيُرِدِचाहाyuridiٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuأَنकिanيُطَهِّرَवो पाक करेyuṭahhiraقُلُوبَهُمْ ۚउनके दिलों कोqulūbahumلَهُمْउनके लिएlahumفِىinfīٱلدُّنْيَاदुनिया मेंl-dun'yāخِزْىٌۭ ۖरुस्वाई हैkhiz'yunوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumفِىinfīٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत मेंl-ākhiratiعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunعَظِيمٌۭबहुत बड़ाʿaẓīmun٤١
ऐ रसूल! वे लोग आपको शोकाकुल न करें, जो कुफ़्र में दौड़कर जाते हैं, उन लोगों में से जिन्होंने अपने मुँह से कहा कि हम ईमान लाए, हालाँकि उनके दिल ईमान नहीं लाए और उन लोगों में से जो यहूदी बने। बहुत सुनने वाले हैं झूठ को, बहुत सुनने वाले हैं दूसरे लोगों के लिए जो आपके पास नहीं आए, वे शब्दों को उनके स्थानों के बाद फेर देते हैं। वे कहते हैं : यदि तुम्हें यह दिया जाए तो ले लो, और यदि तुम्हें यह न दिया जाए, तो बचकर रहो। और जिसे अल्लाह अपनी परीक्षा में डालना चाहे, तो उसे (ऐ रसूल!) आप अल्लाह से बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकते। ये वे लोग हैं कि अल्लाह ने नहीं चाहा कि उनके दिलों को पवित्र करे। उनके लिए दुनिया में अपमान है और उनके लिए आख़िरत में बहुत बड़ी यातना1 है।
५:४२
سَمَّـٰعُونَबहुत ज़्यादा सुनने वाले हैंsammāʿūnaلِلْكَذِبِझूठ कोlil'kadhibiأَكَّـٰلُونَबहुत ज़्यादा खाने वाले हैंakkālūnaلِلسُّحْتِ ۚहराम कोlilssuḥ'tiفَإِنफिर अगरfa-inجَآءُوكَवो आऐं आपके पासjāūkaفَٱحْكُمतो फ़ैसला कीजिएfa-uḥ'kumبَيْنَهُمْदर्मियान उनकेbaynahumأَوْयाawأَعْرِضْऐराज़ कीजिएaʿriḍعَنْهُمْ ۖउनसेʿanhumوَإِنऔर अगरwa-inتُعْرِضْआप ऐराज़ करेंगेtuʿ'riḍعَنْهُمْउनसेʿanhumفَلَنतो हरगिज़ नहींfalanيَضُرُّوكَवो नुक़सान पहुँचा सकते आपकोyaḍurrūkaشَيْـًۭٔا ۖकुछ भीshayanوَإِنْऔर अगरwa-inحَكَمْتَफ़ैसला करें आपḥakamtaفَٱحْكُمतो फ़ैसला कीजिएfa-uḥ'kumبَيْنَهُمदर्मियान उनकेbaynahumبِٱلْقِسْطِ ۚसाथ इन्साफ़ केbil-qis'ṭiإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيُحِبُّवो मोहब्बत रखता हैyuḥibbuٱلْمُقْسِطِينَइन्साफ़ करने वालों सेl-muq'siṭīna٤٢
बहुत सुनने वाले हैं झूठ को, बहुत खाने वाले हैं हराम को। फिर यदि वे आपके पास आएँ, तो आप उनके बीच निर्णय करें या उनसे मुँह फेर लें, और यदि आप उनसे मुँह फेर लें, तो वे आपको हरगिज़ कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे और यदि आप निर्णय करें, तो उनके बीच न्याय के साथ निर्णय करें। निःसंदेह अल्लाह न्याय करने वालों से प्रेम करता है।
५:४३
وَكَيْفَऔर किस तरहwakayfaيُحَكِّمُونَكَवो मुन्सिफ़ बनाते हैं आपकोyuḥakkimūnakaوَعِندَهُمُहालाँकि उनके पासwaʿindahumuٱلتَّوْرَىٰةُतौरात हैl-tawrātuفِيهَاजिसमेंfīhāحُكْمُहुक्म हैḥuk'muٱللَّهِअल्लाह काl-lahiثُمَّफिरthummaيَتَوَلَّوْنَवो मुँह मोड़ जाते हैंyatawallawnaمِنۢfromminبَعْدِबादbaʿdiذَٰلِكَ ۚइसकेdhālikaوَمَآऔर नहींwamāأُو۟لَـٰٓئِكَये लोगulāikaبِٱلْمُؤْمِنِينَईमान लाने वालेbil-mu'minīna٤٣
और वे आपको कैसे न्यायकर्ता बनाते हैं, जबकि उनके पास तौरात है, जिसमें अल्लाह का हुक्म (मौजूद) है! फिर वे उसके पश्चात मुँह फेर लेते हैं। और ये लोग कदापि ईमान वाले नहीं।1
५:४४
إِنَّآबेशक हमinnāأَنزَلْنَاनाज़िल की हमनेanzalnāٱلتَّوْرَىٰةَतौरातl-tawrātaفِيهَاउसमेंfīhāهُدًۭىहिदायतhudanوَنُورٌۭ ۚऔर नूर थाwanūrunيَحْكُمُफ़ैसला करते थेyaḥkumuبِهَاसाथ उसकेbihāٱلنَّبِيُّونَअम्बियाl-nabiyūnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaأَسْلَمُوا۟इस्लाम लाए थेaslamūلِلَّذِينَउनके लिए जोlilladhīnaهَادُوا۟यहूदी बन गए थेhādūوَٱلرَّبَّـٰنِيُّونَऔर रब्बानी/रब वाले भीwal-rabāniyūnaوَٱلْأَحْبَارُऔर उलेमा/फ़ुक़्हा भीwal-aḥbāruبِمَاबवजह उसके जोbimāٱسْتُحْفِظُوا۟वो मुहाफ़िज़ बनाए गए थेus'tuḥ'fiẓūمِنofminكِتَـٰبِ(the) Bookkitābiٱللَّهِअल्लाह की किताब केl-lahiوَكَانُوا۟और थे वोwakānūعَلَيْهِउस परʿalayhiشُهَدَآءَ ۚगवाहshuhadāaفَلَاतो नाfalāتَخْشَوُا۟तुम डरोtakhshawūٱلنَّاسَलोगों सेl-nāsaوَٱخْشَوْنِऔर डरो मुझसेwa-ikh'shawniوَلَاऔर नाwalāتَشْتَرُوا۟तुम लोtashtarūبِـَٔايَـٰتِىबदले मेरी आयात केbiāyātīثَمَنًۭاक़ीमतthamananقَلِيلًۭا ۚथोड़ीqalīlanوَمَنऔर जोwamanلَّمْनाlamيَحْكُمफ़ैसला करेyaḥkumبِمَآउसके मुताबिक़ जोbimāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْكَـٰفِرُونَजो काफ़िर हैंl-kāfirūna٤٤
निःसंदेह हमने तौरात उतारी, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश था। उसके अनुसार वे नबी जो आज्ञाकारी थे उन लोगों के लिए फ़ैसला करते थे, जो यहूदी बने, तथा अल्लाह वाले और विद्वान लोग भी (उसी के अनुसार फ़ैसला करते थे)। क्योंकि वे अल्लाह की पुस्तक के रक्षक बनाए गए थे और वे उसके (सत्य होने के) गवाह थे। अतः तुम लोगों से न डरो, केवल मुझसे डरो और मेरी आयतों के बदले तनिक मूल्य न खरीदो। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग काफ़िर हैं।
५:४५
وَكَتَبْنَاऔर लिख दिया हमनेwakatabnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimفِيهَآउसमेंfīhāأَنَّबेशकannaٱلنَّفْسَजानl-nafsaبِٱلنَّفْسِबदले जान केbil-nafsiوَٱلْعَيْنَऔर आँखwal-ʿaynaبِٱلْعَيْنِबदले आँख केbil-ʿayniوَٱلْأَنفَऔर नाकwal-anfaبِٱلْأَنفِबदले नाक केbil-anfiوَٱلْأُذُنَऔर कानwal-udhunaبِٱلْأُذُنِबदले कान केbil-udhuniوَٱلسِّنَّऔर दाँतwal-sinaبِٱلسِّنِّबदले दाँत केbil-siniوَٱلْجُرُوحَऔर तमाम ज़ख़्मों का भीwal-jurūḥaقِصَاصٌۭ ۚबदला हैqiṣāṣunفَمَنतो जो कोईfamanتَصَدَّقَसदक़ा (माफ़) कर देtaṣaddaqaبِهِۦउसकोbihiفَهُوَतो वोfahuwaكَفَّارَةٌۭकफ़्फ़ारा होगाkaffāratunلَّهُۥ ۚउसके लिएlahuوَمَنऔर जो कोईwamanلَّمْनाlamيَحْكُمफ़ैसला करेyaḥkumبِمَآउसके मुताबिक़ जोbimāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلظَّـٰلِمُونَजो ज़लिम हैंl-ẓālimūna٤٥
और हमने उस (तौरात) में उन (यहूदियों) पर लिख दिया कि प्राण के बदले प्राण है और आँख के बदले आँख, नाक के बदले नाक, कान के बदले कान, दाँत के बदले दाँत1 तथा सभी घावों में बराबर बदला है। फिर जो इस (बदला) को दान (माफ़) कर दे, तो वह उसके (पापों के) लिए प्रायश्चित है। तथा जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
५:४६
وَقَفَّيْنَاऔर पीछे भेजा हमनेwaqaffaynāعَلَىٰٓonʿalāءَاثَـٰرِهِمउनके आसार परāthārihimبِعِيسَىIsabiʿīsāٱبْنِsonib'niمَرْيَمَईसा इब्ने मरियम कोmaryamaمُصَدِّقًۭاतसदीक़ करने वालाmuṣaddiqanلِّمَاउसकी जोlimāبَيْنَ(was) betweenbaynaيَدَيْهِपहले है इससेyadayhiمِنَofminaٱلتَّوْرَىٰةِ ۖतौरात में सेl-tawrātiوَءَاتَيْنَـٰهُऔर दी हमने उसेwaātaynāhuٱلْإِنجِيلَइन्जीलl-injīlaفِيهِउसमें थीfīhiهُدًۭىहिदायतhudanوَنُورٌۭऔर नूरwanūrunوَمُصَدِّقًۭاऔर तसदीक़ करने वालीwamuṣaddiqanلِّمَاउसकी जोlimāبَيْنَ(was) betweenbaynaيَدَيْهِपहले है इससेyadayhiمِنَofminaٱلتَّوْرَىٰةِतौरात में सेl-tawrātiوَهُدًۭىऔर हिदायतwahudanوَمَوْعِظَةًۭऔर नसीहतwamawʿiẓatanلِّلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों सेlil'muttaqīna٤٦
और हमने उनके पीछे उन्हीं के पद-चिन्हों पर मरयम के बेटे ईसा को भेजा, जो उससे पहले (उतरने वाली) तौरात की पुष्टि करने वाला था तथा हमने उसे इंजील प्रदान की, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश थी और वह उससे पूर्व (उतरने वाली किताब) तौरात की पुष्टि करने वाली थी तथा वह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सर्वथा मार्गदर्शन और उपदेश थी।
५:४७
وَلْيَحْكُمْऔर चाहिए कि फ़ैसला करेंwalyaḥkumأَهْلُ(the) Peopleahluٱلْإِنجِيلِअहले इन्जीलl-injīliبِمَآउसके मुताबिक़ जोbimāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفِيهِ ۚउसमेंfīhiوَمَنऔर जोwamanلَّمْनाlamيَحْكُمफ़ैसला करेyaḥkumبِمَآउसके मुताबिक़ जोbimāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْفَـٰسِقُونَजो फ़ासिक़ हैंl-fāsiqūna٤٧
और इंजील वालों को चाहिए कि उसी के अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने उसमें उतारा है। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे, जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग अवज्ञाकारी हैं।
५:४८
وَأَنزَلْنَآऔर नाज़िल की हमनेwa-anzalnāإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiمُصَدِّقًۭاतसदीक़ करने वालीmuṣaddiqanلِّمَاउसकी जोlimāبَيْنَ(was) beforebaynaيَدَيْهِपहले है इससेyadayhiمِنَofminaٱلْكِتَـٰبِकिताबों में सेl-kitābiوَمُهَيْمِنًاऔर निगहबान हैwamuhayminanعَلَيْهِ ۖउस परʿalayhiفَٱحْكُمपस फ़ैसला कीजिएfa-uḥ'kumبَيْنَهُمदर्मियान उनकेbaynahumبِمَآउसके मुताबिक़ जोbimāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُ ۖअल्लाह नेl-lahuوَلَاऔर नाwalāتَتَّبِعْआप पैरवी कीजिएtattabiʿأَهْوَآءَهُمْउनकी ख़्वाहिशात कीahwāahumعَمَّاउससे (हट कर) जोʿammāجَآءَكَआ गया आपके पासjāakaمِنَofminaٱلْحَقِّ ۚहक़ में सेl-ḥaqiلِكُلٍّۢहर एक के लिएlikullinجَعَلْنَاबनाया हमनेjaʿalnāمِنكُمْतुम में सेminkumشِرْعَةًۭएक रास्ताshir'ʿatanوَمِنْهَاجًۭا ۚऔर एक तरीक़ाwamin'hājanوَلَوْऔर अगरwalawشَآءَचाहताshāaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَجَعَلَكُمْअलबत्ता वो बना देता तुम्हेंlajaʿalakumأُمَّةًۭउम्मतummatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinلِّيَبْلُوَكُمْइस लिए कि वो आज़माए तुम्हेंliyabluwakumفِىinfīمَآउसमें जोmāءَاتَىٰكُمْ ۖउसने दिया तुम्हेंātākumفَٱسْتَبِقُوا۟पस सबक़त करो/आगे बढ़ोfa-is'tabiqūٱلْخَيْرَٰتِ ۚनेकियों मेंl-khayrātiإِلَىToilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह ही केl-lahiمَرْجِعُكُمْलौटना है तुम्हाराmarjiʿukumجَمِيعًۭاसबके-सबकाjamīʿanفَيُنَبِّئُكُمफिर वो बता देगा तुम्हेंfayunabbi-ukumبِمَاवो जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumفِيهِजिसमेंfīhiتَخْتَلِفُونَतुम इख़्तिलाफ़ करतेtakhtalifūna٤٨
और (ऐ नबी!) हमने आपकी ओर यह पुस्तक (क़ुरआन) सत्य के साथ उतारी, जो अपने पूर्व की पुस्तकों की पुष्टि करने वाली तथा उनकी संरक्षक1 है। अतः आप उनके बीच उसके अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने उतारा है, तथा आपके पास जो सत्य आया है, उससे मुँह मोड़कर उनकी इच्छाओं का पालन न करें। हमने तुममें से हर (समुदाय) के लिए एक शरीयत तथा एक मार्ग निर्धारित किया2 है। और यदि अल्लाह चाहता, तो तुम्हें एक समुदाय बना देता, लेकिन ताकि वह तुम्हारी उसमें परीक्षा ले, जो कुछ उसने तुम्हें दिया है। अतः भलाइयों में एक-दूसरे से आगे बढ़ो3, अल्लाह ही की ओर तुम सबको लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें बताएगा, जिन बातों में तुम मतभेद किया करते थे।
५:४९
وَأَنِऔर ये किwa-aniٱحْكُمफैसला कीजिएuḥ'kumبَيْنَهُمदर्मियान उनकेbaynahumبِمَآउसके मुताबिक़ जोbimāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَلَاऔर नाwalāتَتَّبِعْआप पैरवी कीजिएtattabiʿأَهْوَآءَهُمْउनकी ख़्वाहिशात कीahwāahumوَٱحْذَرْهُمْऔर मोहतात रहिए उनसेwa-iḥ'dharhumأَنकिanيَفْتِنُوكَवो फ़ितना में ना डालें आपकोyaftinūkaعَنۢfromʿanبَعْضِबाज़ (उस) सेbaʿḍiمَآजोmāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuإِلَيْكَ ۖतरफ़ आपकेilaykaفَإِنफिर अगरfa-inتَوَلَّوْا۟वो मुँह मोड़ जाऐंtawallawفَٱعْلَمْतो जान लीजिएfa-iʿ'lamأَنَّمَاबेशकannamāيُرِيدُचाहता हैyurīduٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَنकिanيُصِيبَهُمवो पहुँचाए उन्हें (मुसीबत)yuṣībahumبِبَعْضِबवजह बाज़bibaʿḍiذُنُوبِهِمْ ۗउनके गुनाहों केdhunūbihimوَإِنَّऔर बेशकwa-innaكَثِيرًۭاबहुत सेkathīranمِّنَofminaٱلنَّاسِलोगों में सेl-nāsiلَفَـٰسِقُونَअलबत्ता फ़ासिक़ हैंlafāsiqūna٤٩
तथा (ऐ नबी!) आप उनके बीच उसी के अनुसार निर्णय करें, जो अल्लाह ने उतारा है, और उनकी इच्छाओं का पालन न करें, तथा उनसे सावधान रहें कि वे आपको किसी ऐसे हुक्म से बहका दें, जो अल्लाह ने आपकी ओर उतारा है। फिर यदि वे फिर जाएँ, तो जान लें कि अल्लाह यही चाहता है कि उन्हें उनके कुछ पापों का दंड पहुँचाए। और निःसंदेह बहुत-से लोग निश्चय उल्लंघनकारी हैं।
५:५०
أَفَحُكْمَक्या फिर फ़ैसलाafaḥuk'maٱلْجَـٰهِلِيَّةِजाहिलियत काl-jāhiliyatiيَبْغُونَ ۚवो चाहते हैंyabghūnaوَمَنْऔर कौनwamanأَحْسَنُज़्यादा अच्छा हैaḥsanuمِنَthanminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiحُكْمًۭاफ़ैसला करने मेंḥuk'manلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيُوقِنُونَजो यक़ीन रखते हैंyūqinūna٥٠
फिर क्या वे जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामिक काल) का फ़ैसला चाहते हैं? और अल्लाह से बेहतर फ़ैसला करने वाला कौन है, उन लोगों के लिए जो विश्वास रखते हैं?
५:५१
۞ يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتَتَّخِذُوا۟ना तुम बनाओtattakhidhūٱلْيَهُودَयहूदl-yahūdaوَٱلنَّصَـٰرَىٰٓऔर नसारा कोwal-naṣārāأَوْلِيَآءَ ۘदोस्तawliyāaبَعْضُهُمْबाज़ उनकेbaʿḍuhumأَوْلِيَآءُदोस्त हैंawliyāuبَعْضٍۢ ۚबाज़ केbaʿḍinوَمَنऔर जो कोईwamanيَتَوَلَّهُمदोस्त बनाएगा उन्हेंyatawallahumمِّنكُمْतुम में सेminkumفَإِنَّهُۥपस बेशक वोfa-innahuمِنْهُمْ ۗउन्हीं में से हैंmin'humإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं वो हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaٱلظَّـٰلِمِينَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimīna٥١
ऐ ईमान वालो! तुम यहूदियों तथा ईसाइयों को मित्र न बनाओ। वे परस्पर एक-दूसरे के मित्र हैं। और तुममें से जो उन्हें मित्र बनाएगा, तो निश्चय वह उन्हीं में से है। निःसंदेह अल्लाह अत्याचारियों को मार्गदर्शन प्रदान नहीं करता।
५:५२
فَتَرَىफिर आप देखेंगेfatarāٱلَّذِينَउन्हेंalladhīnaفِىinfīقُلُوبِهِمदिलों में जिनकेqulūbihimمَّرَضٌۭबीमारी हैmaraḍunيُسَـٰرِعُونَवो दौड़ धूप करते हैंyusāriʿūnaفِيهِمْउनमेंfīhimيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaنَخْشَىٰٓहम डरते हैंnakhshāأَنकिanتُصِيبَنَاपहुँचेगी हमेंtuṣībanāدَآئِرَ ةٌۭ ۚकोई गर्दिश/मुसीबतdāiratunفَعَسَىतो उम्मीद हैfaʿasāٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَنकिanيَأْتِىَवो ले आएyatiyaبِٱلْفَتْحِफ़तहbil-fatḥiأَوْयाawأَمْرٍۢकोई हुक्मamrinمِّنْfromminعِندِهِۦअपनी तरफ़ सेʿindihiفَيُصْبِحُوا۟फिर वो हो जाऐंfayuṣ'biḥūعَلَىٰउस परʿalāمَآजोmāأَسَرُّوا۟उन्होंने छुपायाasarrūفِىٓwithinfīأَنفُسِهِمْअपने नफ़्सों मेंanfusihimنَـٰدِمِينَनादिमnādimīna٥٢
फिर (ऐ नबी!) आप उन लोगों को देखेंगे जिनके दिलों में एक रोग है कि वे दौड़कर उनमें जाते हैं। वे कहते हैं : हम डरते हैं कि हमपर कोई विपत्ति (न) आ जाए। तो निकट है कि अल्लाह विजय प्रदान कर दे या अपनी ओर से कोई और मामला (प्रकट कर दे)। फिर वे उसपर, जो उन्होंने अपने दिलों में छिपाया था, लज्जित हो जाएँ।
५:५३
وَيَقُولُऔर कहते हैंwayaqūluٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाएāmanūأَهَـٰٓؤُلَآءِक्या ये हैंahāulāiٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaأَقْسَمُوا۟क़समें खाईंaqsamūبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiجَهْدَपक्कीjahdaأَيْمَـٰنِهِمْ ۙक़समें अपनीaymānihimإِنَّهُمْकि बेशक वोinnahumلَمَعَكُمْ ۚअलबत्ता साथ हैं तुम्हारेlamaʿakumحَبِطَتْज़ाया हो गएḥabiṭatأَعْمَـٰلُهُمْआमाल उनकेaʿmāluhumفَأَصْبَحُوا۟पस वो हो गएfa-aṣbaḥūخَـٰسِرِينَख़सारा पाने वालेkhāsirīna٥٣
तथा ईमान वाले कहते हैं : क्या यही लोग हैं, जिन्होंने अपनी मज़बूत क़समें खाते हुए अल्लाह की क़सम खाई थी कि निःसंदेह वे निश्चय तुम्हारे साथ हैं। उनके कार्य नष्ट हो गए, अतः वे घाटा उठाने वाले हो गए।
५:५४
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūمَنजो कोईmanيَرْتَدَّफिर जाएगाyartaddaمِنكُمْतुम में सेminkumعَنfromʿanدِينِهِۦअपने दीन सेdīnihiفَسَوْفَतो अनक़रीबfasawfaيَأْتِىले आएगाyatīٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِقَوْمٍۢऐसे लोगbiqawminيُحِبُّهُمْवो मोहब्बत करेगा उनसेyuḥibbuhumوَيُحِبُّونَهُۥٓऔर वो मोहब्बत करेंगे उससेwayuḥibbūnahuأَذِلَّةٍबहुत नर्म (होंगे)adhillatinعَلَىtowardsʿalāٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों परl-mu'minīnaأَعِزَّةٍबहुत सख़्तaʿizzatinعَلَىtowardsʿalāٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों परl-kāfirīnaيُجَـٰهِدُونَवो जिहाद करेंगेyujāhidūnaفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiوَلَاऔर नाwalāيَخَافُونَवो डरेंगेyakhāfūnaلَوْمَةَमलामत सेlawmataلَآئِمٍۢ ۚमलामत करने वाले कीlāiminذَٰلِكَयेdhālikaفَضْلُफ़ज़ल हैfaḍluٱللَّهِअल्लाह काl-lahiيُؤْتِيهِवो देता है उसेyu'tīhiمَنजिसेmanيَشَآءُ ۚवो चाहता हैyashāuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuوَٰسِعٌवुसअत वाला हैwāsiʿunعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmun٥٤
ऐ ईमान वालो! तुममें से जो कोई अपने धर्म से फिर जाए, तो अल्लाह निकट ही ऐसे लोग लाएगा, जिनसे वह प्रेम करेगा और वे उससे प्रेम करेंगे। वे ईमान वालों के प्रति बहुत नरम तथा काफ़िरों के प्रति बहुत कठोर1 होंगे, अल्लाह की राह में जिहाद करेंगे और किसी निंदा करने वाले की निंदा से नहीं डरेंगे। यह अल्लाह का अनुग्रह है, वह उसे देता है जिसको चाहता है और अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
५:५५
إِنَّمَاबेशकinnamāوَلِيُّكُمُदोस्त तुम्हाराwaliyyukumuٱللَّهُअल्लाह हैl-lahuوَرَسُولُهُۥऔर उसका रसूलwarasūluhuوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيُقِيمُونَक़ायम करते हैंyuqīmūnaٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَيُؤْتُونَऔर वो देते हैंwayu'tūnaٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataوَهُمْऔर वोwahumرَٰكِعُونَरुकुअ करने वाले हैंrākiʿūna٥٥
तुम्हारे मित्र तो केवल अल्लाह और उसका रसूल तथा वे लोग हैं जो ईमान लाए, जो नमाज़ क़ायम करते और ज़कात देते हैं और वे (अल्लाह के आगे) झुकने वाले हैं।
५:५६
وَمَنऔर जो कोईwamanيَتَوَلَّदोस्ती करेगाyatawallaٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूलों सेwarasūlahuوَٱلَّذِينَऔर उनसे जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūفَإِنَّतो बेशकfa-innaحِزْبَगिरोहḥiz'baٱللَّهِअल्लाह काl-lahiهُمُवो हीhumuٱلْغَـٰلِبُونَग़ालिब आने वाले हैंl-ghālibūna٥٦
तथा जो कोई अल्लाह और उसके रसूल को और उन लोगों को दोस्त बनाए, जो ईमान लाए हैं, तो निश्चय अल्लाह का दल ही वे लोग हैं जो प्रभावी हैं।
५:५७
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتَتَّخِذُوا۟ना तुम बनाओtattakhidhūٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaٱتَّخَذُوا۟बना लियाittakhadhūدِينَكُمْतुम्हारे दीन कोdīnakumهُزُوًۭاमज़ाक़huzuwanوَلَعِبًۭاऔर खेलwalaʿibanمِّنَfromminaٱلَّذِينَउनमें से जोalladhīnaأُوتُوا۟दिए गएūtūٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaمِنfromminقَبْلِكُمْतुम से पहलेqablikumوَٱلْكُفَّارَऔर काफ़िरों कोwal-kufāraأَوْلِيَآءَ ۚदोस्तawliyāaوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaإِنअगरinكُنتُمहो तुमkuntumمُّؤْمِنِينَईमान लाने वालेmu'minīna٥٧
ऐ ईमान वालो! उन लोगों को जिन्होंने तुम्हारे धर्म को उपहास और खेल बना लिया, उन लोगों में से जिन्हें तुमसे पहले पुस्तक दी गई है और काफ़िरों को मित्र न बनाओ और अल्लाह से डरो, यदि तुम ईमान वाले हो।
५:५८
وَإِذَاऔर जबwa-idhāنَادَيْتُمْपुकारते हो तुमnādaytumإِلَىforilāٱلصَّلَوٰةِतरफ़ नमाज़ केl-ṣalatiٱتَّخَذُوهَاवो बना लेते हैं उसेittakhadhūhāهُزُوًۭاमज़ाक़huzuwanوَلَعِبًۭا ۚऔर खेलwalaʿibanذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمْबवजह उसके कि वोbi-annahumقَوْمٌۭऐसे लोग हैंqawmunلَّا(who do) notlāيَعْقِلُونَजो अक़्ल नहीं रखतेyaʿqilūna٥٨
और जब तुम नमाज़ के लिए पुकारते हो, तो वे उसे उपहास और खेल बना लेते हैं। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग हैं जो समझते नहीं।
५:५९
قُلْकह दीजिएqulيَـٰٓأَهْلَO Peopleyāahlaٱلْكِتَـٰبِऐ अहले किताबl-kitābiهَلْनहींhalتَنقِمُونَतुम बैर/दुश्मनी रखतेtanqimūnaمِنَّآहमसेminnāإِلَّآमगरillāأَنْये किanءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَمَآऔर जो कुछwamāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْنَاतरफ़ हमारेilaynāوَمَآऔर जो कुछwamāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaمِنfromminقَبْلُइससे पहलेqabluوَأَنَّऔर बेशकwa-annaأَكْثَرَكُمْअक्सर तुम्हारेaktharakumفَـٰسِقُونَफ़ासिक़ हैंfāsiqūna٥٩
(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ किताब वालो! तुम्हें हमारी केवल यह बात बुरी लगती है कि हम अल्लाह पर ईमान लाए और उसपर जो हमारी ओर उतारा गया और उसपर भी जो हमसे पहले उतारा गया और यह कि निःसंदेह तुममें से अधिकतर लोग अवज्ञाकारी हैं।
५:६०
قُلْकह दीजिएqulهَلْक्याhalأُنَبِّئُكُمमैं बताऊँ तुम्हेंunabbi-ukumبِشَرٍّۢबदतरbisharrinمِّنthanminذَٰلِكَउससेdhālikaمَثُوبَةًबदले के ऐतबार सेmathūbatanعِندَfromʿindaٱللَّهِ ۚअल्लाह के नज़दीकl-lahiمَنवो जोmanلَّعَنَهُलानत की हो उस परlaʿanahuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَغَضِبَऔर वो ग़ज़बनाक हुआwaghaḍibaعَلَيْهِउस परʿalayhiوَجَعَلَऔर उसने बनाएwajaʿalaمِنْهُمُउनमें सेmin'humuٱلْقِرَدَةَबन्दरl-qiradataوَٱلْخَنَازِيرَऔर ख़िन्ज़ीरwal-khanāzīraوَعَبَدَऔर जिसने बंदगी कीwaʿabadaٱلطَّـٰغُوتَ ۚताग़ूत कीl-ṭāghūtaأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोगulāikaشَرٌّۭबदतरीन हैंsharrunمَّكَانًۭاदर्जे मेंmakānanوَأَضَلُّऔर ज़्यादा भटके हुएwa-aḍalluعَنfromʿanسَوَآءِ(the) evensawāiٱلسَّبِيلِसीधे रास्ते सेl-sabīli٦٠
आप कह दें : क्या मैं तुम्हें अल्लाह के निकट इससे अधिक बुरा बदला वाले लोग बताऊँ, वे लोग जिनपर अल्लाह ने ला'नत की और जिनपर क्रोधित हुआ, और जिनमें से बंदर और सूअर बना दिए और जिन्होंने 'ताग़ूत' की पूजा की। ये लोग दर्जे में अधिक बुरे तथा सीधे मार्ग से अधिक भटके हुए हैं।
५:६१
وَإِذَاऔर जबwa-idhāجَآءُوكُمْवो आते हैं तुम्हारे पासjāūkumقَالُوٓا۟वो कहते हैंqālūءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāوَقَدहालाँकि तहक़ीक़waqadدَّخَلُوا۟वो दाख़िल हुए थेdakhalūبِٱلْكُفْرِसाथ कुफ़्र केbil-kuf'riوَهُمْऔर वोwahumقَدْयक़ीननqadخَرَجُوا۟वो निकल गएkharajūبِهِۦ ۚसाथ उसी केbihiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuأَعْلَمُज़्यादा जानता हैaʿlamuبِمَاउसको जोbimāكَانُوا۟थे वोkānūيَكْتُمُونَवो छुपातेyaktumūna٦١
और जब वे1 तुम्हारे पास आते हैं, तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, हालाँकि निश्चय वे कुफ़्र के साथ प्रवेश किए और निश्चय उसी के साथ वे निकल गए। तथा अल्लाह अधिक जानने वाला है, जो वे छिपाते थे।
५:६२
وَتَرَىٰऔर आप देखेंगेwatarāكَثِيرًۭاकसीर तादाद कोkathīranمِّنْهُمْउनमें सेmin'humيُسَـٰرِعُونَवो दौड़ धूप करते हैंyusāriʿūnaفِىintofīٱلْإِثْمِगुनाह मेंl-ith'miوَٱلْعُدْوَٰنِऔर ज़्यादती मेंwal-ʿud'wāniوَأَكْلِهِمُऔर अपने खाने मेंwa-aklihimuٱلسُّحْتَ ۚहराम कोl-suḥ'taلَبِئْسَअलबत्ता कितना बुरा हैlabi'saمَاजोmāكَانُوا۟थे वोkānūيَعْمَلُونَवो अमल करतेyaʿmalūna٦٢
तथा आप उनमें से बहुतों को देखेंगे कि वे पाप तथा अत्याचार और अपनी हरामख़ोरी में दौड़कर जाते हैं। निश्चय बहुत बुरा है, जो वे किया करते थे।
५:६३
لَوْلَاक्यों नहींlawlāيَنْهَىٰهُمُरोकते उन्हेंyanhāhumuٱلرَّبَّـٰنِيُّونَरब्बानी/रब वालेl-rabāniyūnaوَٱلْأَحْبَارُऔर उलेमाwal-aḥbāruعَنfromʿanقَوْلِهِمُउनके क़ौल सेqawlihimuٱلْإِثْمَगुनाह केl-ith'maوَأَكْلِهِمُऔर उनके खाने सेwa-aklihimuٱلسُّحْتَ ۚहराम कोl-suḥ'taلَبِئْسَअलबत्ता कितना बुरा हैlabi'saمَاजोmāكَانُوا۟थे वोkānūيَصْنَعُونَवो करते/बनातेyaṣnaʿūna٦٣
उन्हें अल्लाह वाले तथा विद्वान उनके झूठ कहने तथा उनके हराम खाने से क्यों नहीं रोकते? निश्चय बुरा है, जो वे किया करते थे।
५:६४
وَقَالَتِऔर कहाwaqālatiٱلْيَهُودُयहूद नेl-yahūduيَدُहाथyaduٱللَّهِअल्लाह काl-lahiمَغْلُولَةٌ ۚबँधा हुआ हैmaghlūlatunغُلَّتْबाँध दिए गएghullatأَيْدِيهِمْहाथ उनकेaydīhimوَلُعِنُوا۟और वो लानत किए गएwaluʿinūبِمَاबवजह उसके जोbimāقَالُوا۟ ۘउन्होंने कहाqālūبَلْबल्किbalيَدَاهُउसके दोनों हाथyadāhuمَبْسُوطَتَانِदोनों खुले हुए हैंmabsūṭatāniيُنفِقُवो ख़र्च करता हैyunfiquكَيْفَजिस तरहkayfaيَشَآءُ ۚवो चाहता हैyashāuوَلَيَزِيدَنَّऔर अलबत्ता वो ज़रूर ज़्यादा कर देगाwalayazīdannaكَثِيرًۭاकसीर तादाद कोkathīranمِّنْهُمउनमें सेmin'humمَّآजो कुछmāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaمِنfromminرَّبِّكَआपके रब की तरफ़ सेrabbikaطُغْيَـٰنًۭاसरकशी मेंṭugh'yānanوَكُفْرًۭا ۚऔर कुफ़्र मेंwakuf'ranوَأَلْقَيْنَاऔर डाल दी हमनेwa-alqaynāبَيْنَهُمُदर्मियान उनकेbaynahumuٱلْعَدَٰوَةَअदावतl-ʿadāwataوَٱلْبَغْضَآءَऔर बुग़्ज़wal-baghḍāaإِلَىٰtillilāيَوْمِ(the) Dayyawmiٱلْقِيَـٰمَةِ ۚक़यामत के दिन तकl-qiyāmatiكُلَّمَآजब कभीkullamāأَوْقَدُوا۟उन्होंने भड़काईawqadūنَارًۭاआगnāranلِّلْحَرْبِजंग के लिएlil'ḥarbiأَطْفَأَهَاबुझा दिया उसेaṭfa-ahāٱللَّهُ ۚअल्लाह नेl-lahuوَيَسْعَوْنَऔर वो दौड़ धूप करते हैंwayasʿawnaفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَسَادًۭا ۚफ़साद कीfasādanوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَا(does) notlāيُحِبُّनहीं वो पसंद करताyuḥibbuٱلْمُفْسِدِينَफ़साद करने वालों कोl-muf'sidīna٦٤
तथा यहूदियों ने कहा कि अल्लाह का हाथ बँधा1 हुआ है। उनके हाथ बाँधे गए और उनपर ला'नत की गई, उसके कारण जो उन्होंने कहा। बल्कि उसके दोनों हाथ खुले हुए हैं। वह जैसे चाहता है, खर्च करता है। और निश्चय जो कुछ (ऐ रसूल!) आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से उतारा गया है, वह उनमें से बहुत-से लोगों को सरकशी (उद्दंडता) और कुफ़्र में अवश्य बढ़ा देगा। तथा हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक शत्रुता और द्वेष डाल दिया। जब कभी वे लड़ाई की कोई आग भड़काते हैं, अल्लाह उसे बुझा2 देता है। तथा वे धरती में उपद्रव का प्रयास करते रहते हैं और अल्लाह उपद्रव करने वालों से प्रेम नहीं करता।
५:६५
وَلَوْऔर अगरwalawأَنَّबेशकannaأَهْلَ(the) Peopleahlaٱلْكِتَـٰبِअहले किताबl-kitābiءَامَنُوا۟ईमान लातेāmanūوَٱتَّقَوْا۟और तक़वा करतेwa-ittaqawلَكَفَّرْنَاअलबत्ता दूर कर देते हमlakaffarnāعَنْهُمْउनसेʿanhumسَيِّـَٔاتِهِمْबुराईयाँ उनकीsayyiātihimوَلَأَدْخَلْنَـٰهُمْऔर अलबत्ता हम दाख़िल करते उन्हेंwala-adkhalnāhumجَنَّـٰتِबाग़ों मेंjannātiٱلنَّعِيمِनेअमतों वालेl-naʿīmi٦٥
और यदि वास्तव में अह्ले किताब ईमान ले आते तथा (अल्लाह से) डरते, तो हम अवश्य उनकी बुराइयाँ उनसे दूर कर देते और उन्हें अवश्य नेमतों वाली जन्नतों में दाखिल करते।
५:६६
وَلَوْऔर अगरwalawأَنَّهُمْबेशक वोannahumأَقَامُوا۟क़ायम करतेaqāmūٱلتَّوْرَىٰةَतौरात कोl-tawrātaوَٱلْإِنجِيلَऔर इन्जील कोwal-injīlaوَمَآऔर जोwamāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْهِمतरफ़ उनकेilayhimمِّنfromminرَّبِّهِمْउनके रब की तरफ़ सेrabbihimلَأَكَلُوا۟अलबत्ता वो खातेla-akalūمِنfromminفَوْقِهِمْअपने ऊपर सेfawqihimوَمِنand fromwaminتَحْتِऔर नीचे सेtaḥtiأَرْجُلِهِم ۚअपने पाँव केarjulihimمِّنْهُمْउनमें सेmin'humأُمَّةٌۭएक गिरोहummatunمُّقْتَصِدَةٌۭ ۖमयाना रु हैmuq'taṣidatunوَكَثِيرٌۭऔर बहुत सेwakathīrunمِّنْهُمْउनमें सेmin'humسَآءَबहुत बुरा हैsāaمَاजोmāيَعْمَلُونَवो अमल करते हैंyaʿmalūna٦٦
तथा यदि वे वास्तव में तौरात और इंजील का पालन1 करते और उसका जो उनके पालनहार की तरफ़ से उनकी ओर उतारा गया है, तो निश्चय वे अपने ऊपर से तथा अपने पैरों के नीचे से2 खाते। उनमें से एक समूह मध्यम मार्ग पर है और उनमें से बहुत-से लोग जो कर रहे हैं, वह बहुत बुरा है।
५:६७
۞ يَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلرَّسُولُरसूलl-rasūluبَلِّغْपहुँचा दीजिएballighمَآजोmāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaمِنfromminرَّبِّكَ ۖआपके रब की तरफ़ सेrabbikaوَإِنऔर अगरwa-inلَّمْनाlamتَفْعَلْआपने किया (ऐसा)tafʿalفَمَاतो नहींfamāبَلَّغْتَपहुँचाया आपनेballaghtaرِسَالَتَهُۥ ۚपैग़ाम उसकाrisālatahuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْصِمُكَवो बचाएगा आपकोyaʿṣimukaمِنَfromminaٱلنَّاسِ ۗलोगों सेl-nāsiإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउस क़ौम कोl-qawmaٱلْكَـٰفِرِينَजो काफ़िर हैl-kāfirīna٦٧
ऐ रसूल! जो कुछ आपपर आपके पालनहार की ओर से उतारा गया है, उसे पहुँचा दें। और यदि आपने (ऐसा) न किया, तो आपने उसका संदेश नहीं पहुँचाया। और अल्लाह आपको लोगों से बचाएगा।2 निःसंदेह अल्लाह काफ़िर लोगों को मार्गदर्शन नहीं प्रदान करता।
५:६८
قُلْकह दीजिएqulيَـٰٓأَهْلَO Peopleyāahlaٱلْكِتَـٰبِऐ अहले किताबl-kitābiلَسْتُمْनहीं हो तुमlastumعَلَىٰonʿalāشَىْءٍकिसी चीज़ परshayinحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāتُقِيمُوا۟तुम क़ायम करोtuqīmūٱلتَّوْرَىٰةَतौरात कोl-tawrātaوَٱلْإِنجِيلَऔर इन्जील कोwal-injīlaوَمَآऔर जोwamāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْكُمतरफ़ तुम्हारेilaykumمِّنfromminرَّبِّكُمْ ۗतुम्हारे रब की तरफ़ सेrabbikumوَلَيَزِيدَنَّऔर अलबत्ता वो ज़रूर ज़्यादा कर देगाwalayazīdannaكَثِيرًۭاकसीर तादाद कोkathīranمِّنْهُمउनमें सेmin'humمَّآजो कुछmāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaمِنfromminرَّبِّكَआपके रब की तरफ़ सेrabbikaطُغْيَـٰنًۭاसरकशी मेंṭugh'yānanوَكُفْرًۭا ۖऔर कुफ़्र मेंwakuf'ranفَلَاपस नाfalāتَأْسَआप अफ़सोस कीजिएtasaعَلَىoverʿalāٱلْقَوْمِइस क़ौम परl-qawmiٱلْكَـٰفِرِينَजो काफ़िर हैl-kāfirīna٦٨
(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ अह्ले किताब! तुम किसी चीज़ पर नहीं हो, यहाँ तक कि तुम तौरात और इंजील को क़ायम करो1 और उसको जो तुम्हारी ओर तुम्हारे पालनहार की तरफ़ से उतारा गया है। तथा निश्चय जो कुछ आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से उतारा गया है, वह उनमें से बहुत से लोगों को उल्लंघन और कुफ़्र में अवश्य बढ़ा देगा। अतः आप काफ़िर लोगों पर दुखी न हों।
५:६९
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَٱلَّذِينَऔर जोwa-alladhīnaهَادُوا۟यहूदी बन गएhādūوَٱلصَّـٰبِـُٔونَऔर जो साबी हैंwal-ṣābiūnaوَٱلنَّصَـٰرَىٰऔर जो नसारा हैंwal-naṣārāمَنْजो कोईmanءَامَنَईमान लायाāmanaبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَٱلْيَوْمِand the Daywal-yawmiٱلْـَٔاخِرِऔर आख़िरी दिन परl-ākhiriوَعَمِلَऔर उसने अमल किएwaʿamilaصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanفَلَاतो नाfalāخَوْفٌकोई खौफ़ होगाkhawfunعَلَيْهِمْउन परʿalayhimوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيَحْزَنُونَवो ग़मगीन होंगेyaḥzanūna٦٩
निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और जो यहूदी बने, तथा साबी और ईसाई, जो भी अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाया और उसने अच्छा कर्म किया, तो उनपर न कोई डर है और न वे शोकाकुल1 होंगे।
५:७०
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadأَخَذْنَاलिया हमनेakhadhnāمِيثَـٰقَपुख़्ता अहदmīthāqaبَنِىٓ(from the) Childrenbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल सेis'rāīlaوَأَرْسَلْنَآऔर भेजे हमनेwa-arsalnāإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimرُسُلًۭا ۖकई रसूलrusulanكُلَّمَاजब कभीkullamāجَآءَهُمْआया उनके पासjāahumرَسُولٌۢकोई रसूलrasūlunبِمَاसाथ उसके जोbimāلَاnotlāتَهْوَىٰٓनहीं चाहते थेtahwāأَنفُسُهُمْनफ़्स उनकेanfusuhumفَرِيقًۭاएक गिरोह कोfarīqanكَذَّبُوا۟उन्होंने झुठलायाkadhabūوَفَرِيقًۭاऔर एक गिरोह कोwafarīqanيَقْتُلُونَवो क़त्ल करते थेyaqtulūna٧٠
निःसंदेह हमने बनी इसराईल से दृढ़ वचन लिया तथा उनकी ओर कई रसूल भेजे। जब कभी कोई रसूल उनके पास वह चीज़ लेकर आया, जिसे उनके दिल नहीं चाहते थे, तो उन्होंने एक गिरोह को झुठला दिया तथा एक गिरोह को क़त्ल करते रहे।
५:७१
وَحَسِبُوٓا۟और उन्होंने समझाwaḥasibūأَلَّاकि नाallāتَكُونَहोगाtakūnaفِتْنَةٌۭकोई फ़ितनाfit'natunفَعَمُوا۟तो वो अन्धे हो गएfaʿamūوَصَمُّوا۟और वो बहरे हो गएwaṣammūثُمَّफिरthummaتَابَमेहरबान हुआtābaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَيْهِمْउन परʿalayhimثُمَّफिरthummaعَمُوا۟वो अन्धे हो गएʿamūوَصَمُّوا۟और बहरे हो गएwaṣammūكَثِيرٌۭअक्सरkathīrunمِّنْهُمْ ۚउनमें सेmin'humوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuبَصِيرٌۢख़ूब देखने वाला हैbaṣīrunبِمَاउसको जोbimāيَعْمَلُونَवो अमल करते हैंyaʿmalūna٧١
तथा उन्होंने सोचा कि कोई फ़ितना (परीक्षण या दंड) नहीं होगा, इसलिए वे अंधे और बहरे हो गए। फिर अल्लाह ने उन्हें क्षमा कर दिया। फिर उनमें से बहुत से अंधे और बहरे हो गए। तथा अल्लाह ख़ूब देखने वाला है, जो वे करते हैं।
५:७२
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadكَفَرَकुफ़्र कियाkafaraٱلَّذِينَउन लोगों नेalladhīnaقَالُوٓا۟जिन्होंने कहाqālūإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो हीhuwaٱلْمَسِيحُ(is) the Messiahl-masīḥuٱبْنُsonub'nuمَرْيَمَ ۖमसीह इब्ने मरियम हैmaryamaوَقَالَऔर कहा थाwaqālaٱلْمَسِيحُमसीह नेl-masīḥuيَـٰبَنِىٓO Childrenyābanīإِسْرَٰٓءِيلَऐ बनी इस्राईलis'rāīlaٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaرَبِّىजो रब है मेराrabbīوَرَبَّكُمْ ۖऔर रब है तुम्हाराwarabbakumإِنَّهُۥबेशक वोinnahuمَنजोmanيُشْرِكْशिर्क करेyush'rikبِٱللَّهِसाथ अल्लाह केbil-lahiفَقَدْतो तहक़ीक़faqadحَرَّمَहराम ठहरा दीḥarramaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَيْهِउस परʿalayhiٱلْجَنَّةَजन्नतl-janataوَمَأْوَىٰهُऔर ठिकाना उसकाwamawāhuٱلنَّارُ ۖआग हैl-nāruوَمَاऔर नहीं हैwamāلِلظَّـٰلِمِينَज़लिमों के लिएlilẓẓālimīnaمِنْanyminأَنصَارٍۢकोई मददगारanṣārin٧٢
निःसंदेह उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा कि निःसंदेह अल्लाह1 तो मरयम का बेटा मसीह ही है। जबकि मसीह ने कहा : ऐ बनी इसराईल! अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा पालनहार तथा तुम्हारा पालनहार है। निःसंदेह सच्चाई यह है कि जो भी अल्लाह के साथ साझी बनाए, तो निश्चय उसपर अल्लाह ने जन्नत हराम (वर्जित) कर दी और उसका ठिकाना आग (जहन्नम) है। तथा अत्याचारियों के लिए कोई मदद करने वाले नहीं।
५:७३
لَّقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadكَفَرَकुफ़्र कियाkafaraٱلَّذِينَउन लोगों नेalladhīnaقَالُوٓا۟जिन्होंने कहाqālūإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaثَالِثُतीसरा हैthālithuثَلَـٰثَةٍۢ ۘतीन काthalāthatinوَمَاऔर नहींwamāمِنْ[of]minإِلَـٰهٍकोई इलाह (बरहक़)ilāhinإِلَّآमगरillāإِلَـٰهٌۭइलाहilāhunوَٰحِدٌۭ ۚएक हीwāḥidunوَإِنऔर अगरwa-inلَّمْनाlamيَنتَهُوا۟वो बाज़ आएyantahūعَمَّاउससे जोʿammāيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaلَيَمَسَّنَّअलबत्ता ज़रूर पहुँचेगाlayamassannaٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنْهُمْउनमें सेmin'humعَذَابٌअज़ाबʿadhābunأَلِيمٌदर्दनाकalīmun٧٣
निःसंदेह उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा : निःसंदेह अल्लाह तीन में से तीसरा है! हालाँकि कोई भी पूज्य नहीं है, परंतु एक पूज्य। और यदि वे उससे नहीं रुके जो वे कहते हैं, तो निश्चय उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्हें अवश्य दर्दनाक यातना पहुँचेगी।
५:७४
أَفَلَاक्या भला नहींafalāيَتُوبُونَवो तौबा करेंगेyatūbūnaإِلَىtoilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह केl-lahiوَيَسْتَغْفِرُونَهُۥ ۚऔर वो बख़्शिश माँगेंगे उससेwayastaghfirūnahuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٧٤
तो क्या वे अल्लाह के समक्ष तौबा नहीं करते तथा उससे क्षमा याचना नहीं करते, और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
५:७५
مَّاनहींmāٱلْمَسِيحُ(is) the Messiahl-masīḥuٱبْنُsonub'nuمَرْيَمَमसीह इब्ने मरियमmaryamaإِلَّاमगरillāرَسُولٌۭएक रसूलrasūlunقَدْतहक़ीक़qadخَلَتْगुज़र चुकेkhalatمِنfromminقَبْلِهِउससे क़ब्लqablihiٱلرُّسُلُकई रसूलl-rusuluوَأُمُّهُۥऔर उसकी माँwa-ummuhuصِدِّيقَةٌۭ ۖबहुत सच्ची थीṣiddīqatunكَانَاथे वोkānāيَأْكُلَانِवो दोनों खाया करतेyakulāniٱلطَّعَامَ ۗखानाl-ṭaʿāmaٱنظُرْदेखिएunẓurكَيْفَकिस तरहkayfaنُبَيِّنُहम वाज़ेह करते हैंnubayyinuلَهُمُउनके लिएlahumuٱلْـَٔايَـٰتِआयातl-āyātiثُمَّफिरthummaٱنظُرْदेखिएunẓurأَنَّىٰकहाँ सेannāيُؤْفَكُونَवो फेरे जाते हैंyu'fakūna٧٥
मरयम का बेटा मसीह एक रसूल के सिवा कुछ नहीं। निश्चय उससे पहले बहुत-से रसूल गुज़र चुके और उसकी माँ सिद्दीक़ा (अत्यंत सच्ची) है। दोनों खाना खाया करते थे। देखो, हम उनके लिए किस तरह निशानियाँ स्पष्ट करते हैं। फिर देखो, वे किस तरह फेरे1 जाते हैं।
५:७६
قُلْकह दीजिएqulأَتَعْبُدُونَक्या तुम इबादत करते होataʿbudūnaمِنfromminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمَاउसकी जोmāلَاnotlāيَمْلِكُनहीं मिल्कियत रखताyamlikuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumضَرًّۭاकिसी नुक़सान काḍarranوَلَاऔर नाwalāنَفْعًۭا ۚकिसी नफ़ा केnafʿanوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuهُوَवो ही हैhuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वालाl-samīʿuٱلْعَلِيمُख़ूब जानने वालाl-ʿalīmu٧٦
आप कह दें : क्या तुम अल्लाह के सिवा उसकी इबादत करते हो, जो तुम्हारे लिए न किसी हानि का मालिक है और न लाभ का? तथा अल्लाह ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
५:७७
قُلْकह दीजिएqulيَـٰٓأَهْلَO Peopleyāahlaٱلْكِتَـٰبِऐ अहले किताबl-kitābiلَا(Do) notlāتَغْلُوا۟ना तुम ग़ुलुव करोtaghlūفِىinfīدِينِكُمْअपने दीन मेंdīnikumغَيْرَबग़ैरghayraٱلْحَقِّहक़ केl-ḥaqiوَلَاऔर नाwalāتَتَّبِعُوٓا۟तुम पैरवी करोtattabiʿūأَهْوَآءَख़्वाहिशात कीahwāaقَوْمٍۢएक क़ौम कीqawminقَدْतहक़ीक़qadضَلُّوا۟वो गुमराह हो गएḍallūمِنfromminقَبْلُउससे पहलेqabluوَأَضَلُّوا۟और उन्होंने गुमराह कियाwa-aḍallūكَثِيرًۭاकसीर तादाद कोkathīranوَضَلُّوا۟और वो भटक गएwaḍallūعَنfromʿanسَوَآءِ(the) rightsawāiٱلسَّبِيلِसीधे रास्ते सेl-sabīli٧٧
(ऐ नबी!) कह दो : ऐ अह्ले किताब! अपने धर्म में नाहक़ अतिशयोक्ति न करो1 और उन लोगों की इच्छाओं के पीछे न चलो, जो इससे पहले पथभ्रष्ट2 हुए और बहुतों को पथभ्रष्ट किया और सीधे मार्ग से भटक गए।
५:७८
لُعِنَलानत किए गएluʿinaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنۢfromminبَنِىٓ(the) Childrenbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल में सेis'rāīlaعَلَىٰbyʿalāلِسَانِज़बान परlisāniدَاوُۥدَदाऊद कीdāwūdaوَعِيسَىand Isawaʿīsāٱبْنِsonib'niمَرْيَمَ ۚऔर ईसा इब्ने मरियम कीmaryamaذَٰلِكَयेdhālikaبِمَاबवजह उसके जोbimāعَصَوا۟उन्होंने नाफ़रमानी कीʿaṣawوَّكَانُوا۟और थे वोwakānūيَعْتَدُونَवो हद से बढ़ जातेyaʿtadūna٧٨
बनी इसराईल में से जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनपर दाऊद तथा मरयम के बेटे ईसा की ज़बान पर ला'नत (धिक्कार)1 की गई। यह इस कारण कि उन्होंने अवज्ञा की तथा वे हद से आगे बढ़ते थे।
५:७९
كَانُوا۟थे वोkānūلَاnotlāيَتَنَاهَوْنَना वो रोकते एक दूसरे कोyatanāhawnaعَنfromʿanمُّنكَرٍۢकिसी बुराई सेmunkarinفَعَلُوهُ ۚवो करते थे जिसेfaʿalūhuلَبِئْسَअलबत्ता कितना बुरा हैlabi'saمَاजोmāكَانُوا۟थे वोkānūيَفْعَلُونَवो करतेyafʿalūna٧٩
वे एक-दूसरे को किसी बुराई से, जो उन्होंने की होती, रोकते न थे। निःसंदेह बहुत बुरा था, जो वे किया करते थे।1
५:८०
تَرَىٰआप देखेंगेtarāكَثِيرًۭاकसीर तादाद कोkathīranمِّنْهُمْउनमें सेmin'humيَتَوَلَّوْنَवो दोस्ती करते हैंyatawallawnaٱلَّذِينَउनसे जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟ ۚकुफ़्र कियाkafarūلَبِئْسَअलबत्ता कितना बुरा हैlabi'saمَاजोmāقَدَّمَتْआगे भेजाqaddamatلَهُمْउनके लिएlahumأَنفُسُهُمْउनके नफ़्सों नेanfusuhumأَنये किanسَخِطَनाराज़ हुआsakhiṭaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَيْهِمْउन परʿalayhimوَفِىand inwafīٱلْعَذَابِऔर अज़ाब मेंl-ʿadhābiهُمْवोhumخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वाले हैंkhālidūna٨٠
आप उनमें से बहुतेरे लोगों को देखेंगे कि वे उन लोगों से मित्रता रखते हैं, जिन्होंने कुफ़्र किया। निश्चय बुरा है जो उन्होंने अपने लिए आगे भेजा कि अल्लाह उनपर क्रुद्ध हो गया तथा यातना ही में वे हमेशा रहने वाले हैं।
५:८१
وَلَوْऔर अगरwalawكَانُوا۟होते वोkānūيُؤْمِنُونَवो ईमान लातेyu'minūnaبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَٱلنَّبِىِّऔर नबी परwal-nabiyiوَمَآऔर जो कुछwamāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَيْهِतरफ़ उनकेilayhiمَاनाmāٱتَّخَذُوهُمْवो बनाते उन्हेंittakhadhūhumأَوْلِيَآءَदोस्तawliyāaوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaكَثِيرًۭاबहुत सेkathīranمِّنْهُمْउनमें सेmin'humفَـٰسِقُونَनाफ़रमान हैंfāsiqūna٨١
और यदि वे अल्लाह और नबी पर और उसपर ईमान रखते होते जो उसकी ओर उतारा गया है, तो उन्हें मित्र न बनाते1, लेकिन उनमें से बहुत से अवज्ञाकारी हैं।
५:८२
۞ لَتَجِدَنَّअलबत्ता आप ज़रूर पाऐंगेlatajidannaأَشَدَّसबसे ज़्यादा सख़्तashaddaٱلنَّاسِलोगों में सेl-nāsiعَدَٰوَةًۭअदावत/दुश्मनी मेंʿadāwatanلِّلَّذِينَउन लोगों के लिए जोlilladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūٱلْيَهُودَयहूद कोl-yahūdaوَٱلَّذِينَऔर उनको जिन्होंनेwa-alladhīnaأَشْرَكُوا۟ ۖशिर्क कियाashrakūوَلَتَجِدَنَّऔर अलबत्ता आप ज़रूर पाऐंगेwalatajidannaأَقْرَبَهُمसबसे क़रीब उनमेंaqrabahumمَّوَدَّةًۭमोहब्बत मेंmawaddatanلِّلَّذِينَउनके लिए जोlilladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaقَالُوٓا۟कहाqālūإِنَّاबेशक हमinnāنَصَـٰرَىٰ ۚनसारा हैंnaṣārāذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّबवजह उसके किbi-annaمِنْهُمْउनमेंmin'humقِسِّيسِينَउलेमा हैंqissīsīnaوَرُهْبَانًۭاऔर राहिब हैंwaruh'bānanوَأَنَّهُمْऔर बेशक वोwa-annahumلَا(are) notlāيَسْتَكْبِرُونَनहीं वो तकब्बुर करतेyastakbirūna٨٢
(ऐ नबी!) निश्चय आप उन लोगों के लिए जो ईमान लाए हैं, सब लोगों से अधिक सख़्त दुश्मनी रखने वाले यहूदियों को तथा उन लोगों को पाएँगे, जिन्होंने शिर्क किया। तथा निश्चय आप उन लोगों के लिए जो ईमान लाए हैं, उनमें से मित्रता में सबसे निकट उनको पाएँगे, जिन्होंने कहा निःसंदेह हम ईसाई हैं। यह इसलिए कि निःसंदेह उनमें विद्वान तथा पादरी (उपासक) हैं और इसलिए कि निःसंदेह वे अभिमान1 नहीं करते।
५:८३
وَإِذَاऔर जबwa-idhāسَمِعُوا۟वो सुनते हैंsamiʿūمَآजोmāأُنزِلَनाज़िल किया गयाunzilaإِلَىtoilāٱلرَّسُولِतरफ़ रसूल केl-rasūliتَرَىٰٓआप देखते हैंtarāأَعْيُنَهُمْउनकी आँखों कोaʿyunahumتَفِيضُबह पड़ती हैंtafīḍuمِنَwithminaٱلدَّمْعِआँसुओं सेl-damʿiمِمَّاइस (वजह) से जोmimmāعَرَفُوا۟उन्होंने पहचान लियाʿarafūمِنَofminaٱلْحَقِّ ۖहक़ कोl-ḥaqiيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāفَٱكْتُبْنَاपस लिख दे हमेंfa-uk'tub'nāمَعَसाथmaʿaٱلشَّـٰهِدِينَशहादत देने वालों केl-shāhidīna٨٣
तथा जब वे उस (क़ुरआन) को सुनते हैं, जो रसूल की ओर उतारा गया है, तो आप देखते हैं कि उनकी आँखें आँसुओं से बह रही होती हैं, इस कारण कि उन्होंने सत्य को पहचान लिया। वे कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हम ईमान ले आए। अतः हमें (सत्य) की गवाही देने वालों के साथ लिख1 ले।
५:८४
وَمَاऔर क्या हैwamāلَنَاहमेंlanāلَاnotlāنُؤْمِنُकि ना हम ईमान लाऐंnu'minuبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَمَاऔर (उस पर) जोwamāجَآءَنَاआया हमारे पासjāanāمِنَfromminaٱلْحَقِّहक़ में सेl-ḥaqiوَنَطْمَعُऔर हम उम्मीद रखते हैंwanaṭmaʿuأَنकिanيُدْخِلَنَاदाख़िल करेगा हमेंyud'khilanāرَبُّنَاरब हमाराrabbunāمَعَसाथmaʿaٱلْقَوْمِउन लोगों केl-qawmiٱلصَّـٰلِحِينَजो सालेह हैंl-ṣāliḥīna٨٤
और हमें क्या है कि हम अल्लाह पर तथा उस सत्य पर ईमान न लाएँ, जो हमारे पास आया है? जबकि हम आशा रखते हैं कि हमारा पालनहार हमें सदाचारियों के साथ दाखिल कर लेगा।
५:८५
فَأَثَـٰبَهُمُपस बदले में दिया उन्हेंfa-athābahumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuبِمَاबवजह उसके जोbimāقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūجَنَّـٰتٍۢबाग़ात कोjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَا ۚउनमेंfīhāوَذَٰلِكَऔर येwadhālikaجَزَآءُबदला हैjazāuٱلْمُحْسِنِينَएहसान करने वालों काl-muḥ'sinīna٨٥
तो अल्लाह ने उनके यह कहने के बदले में उन्हें ऐसे बाग़ प्रदान किए, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदैव रहने वाले हैं तथा यही सत्कर्मियों का बदला है।
५:८६
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَكَذَّبُوا۟और उन्होंने झुठलायाwakadhabūبِـَٔايَـٰتِنَآहमारी आयात कोbiāyātināأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaأَصْحَـٰبُसाथीaṣḥābuٱلْجَحِيمِजहन्नम केl-jaḥīmi٨٦
तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही लोग भड़कती आग वाले हैं।
५:८७
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتُحَرِّمُوا۟ना तुम हराम करोtuḥarrimūطَيِّبَـٰتِपाकीज़ा चीज़ेंṭayyibātiمَآजोmāأَحَلَّहलाल कींaḥallaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumوَلَاऔर नाwalāتَعْتَدُوٓا۟ ۚतुम हद से तजावुज़ करोtaʿtadūإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَا(does) notlāيُحِبُّनहीं वो पसंद करताyuḥibbuٱلْمُعْتَدِينَहद से तजावुज़ करने वालों कोl-muʿ'tadīna٨٧
ऐ ईमान वालो! उन स्वच्छ पवित्र चीज़ों को, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल (वैध) की हैं, हराम (अवैध)1 न ठहराओ और सीमा से आगे न बढ़ो। निःसंदेह अल्लाह हद से आगे बढ़ने वालों2 से प्रेम नहीं करता।
५:८८
وَكُلُوا۟और खाओwakulūمِمَّاउसमें से जोmimmāرَزَقَكُمُरिज़्क़ दिया तुम्हेंrazaqakumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuحَلَـٰلًۭاहलालḥalālanطَيِّبًۭا ۚपाकीज़ाṭayyibanوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaٱلَّذِىٓवो जोalladhīأَنتُمतुमantumبِهِۦजिस परbihiمُؤْمِنُونَईमान रखते होmu'minūna٨٨
तथा अल्लाह ने तुम्हें जो कुछ दिया है, उसमें से हलाल, पवित्र (चीज़) खाओ और उस अल्लाह से डरो, जिसपर तुम ईमान रखते हो।
५:८९
لَاNotlāيُؤَاخِذُكُمُनहीं मुआख़ज़ा करता तुम्हाराyuākhidhukumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِٱللَّغْوِलग़्व परbil-laghwiفِىٓinfīأَيْمَـٰنِكُمْतुम्हारी क़समों मेंaymānikumوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinيُؤَاخِذُكُمवो मुआख़ज़ा करता है तुम्हाराyuākhidhukumبِمَاउन पर जोbimāعَقَّدتُّمُमज़बूत बाँधीं तुम नेʿaqqadttumuٱلْأَيْمَـٰنَ ۖक़समेंl-aymānaفَكَفَّـٰرَتُهُۥٓतो कफ़्फ़ारा है उसकाfakaffāratuhuإِطْعَامُखाना खिलानाiṭ'ʿāmuعَشَرَةِदसʿasharatiمَسَـٰكِينَमिस्कीनों कोmasākīnaمِنْofminأَوْسَطِऔसत दर्जे काawsaṭiمَاजोmāتُطْعِمُونَतुम खिलाते होtuṭ'ʿimūnaأَهْلِيكُمْअपने घर वालों कोahlīkumأَوْयाawكِسْوَتُهُمْकपड़े पहनाना उन्हेंkis'watuhumأَوْयाawتَحْرِيرُआज़ाद करनाtaḥrīruرَقَبَةٍۢ ۖएक गर्दन काraqabatinفَمَنपस जो कोईfamanلَّمْनाlamيَجِدْपाएyajidفَصِيَامُतो रोज़े रखना हैंfaṣiyāmuثَلَـٰثَةِतीनthalāthatiأَيَّامٍۢ ۚदिनों केayyāminذَٰلِكَयेdhālikaكَفَّـٰرَةُकफ़्फ़ारा हैkaffāratuأَيْمَـٰنِكُمْतुम्हारी क़समों काaymānikumإِذَاजबidhāحَلَفْتُمْ ۚक़सम खाओ तुमḥalaftumوَٱحْفَظُوٓا۟और हिफ़ाज़त किया करोwa-iḥ'faẓūأَيْمَـٰنَكُمْ ۚअपनी क़समों कीaymānakumكَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaيُبَيِّنُवाज़ेह करता हैyubayyinuٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَكُمْतुम्हारे लिएlakumءَايَـٰتِهِۦअपनी आयात कोāyātihiلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتَشْكُرُونَतुम शुक्र करोtashkurūna٨٩
अल्लाह तुम्हें तुम्हारी व्यर्थ क़समों1 पर नहीं पकड़ता, परंतु तुम्हें उसपर पकड़ता है जो तुमने पक्के इरादे से क़समें खाई हैं। तो उसका प्रायश्चित2 दस निर्धनों को भोजन कराना है, औसत दर्जे का, जो तुम अपने घर वालों को खिलाते हो, अथवा उन्हें कपड़े पहनाना, अथवा एक दास मुक्त करना। फिर जो न पाए, तो तीन दिन के रोज़े रखना है। यह तुम्हारी क़समों का प्रायश्चित है, जब तुम क़सम खा लो तथा अपनी क़समों की रक्षा करो। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतें (आदेश) खोलकर बयान करता है, ताकि तुम आभार व्यक्त करो।
५:९०
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِنَّمَاबेशकinnamāٱلْخَمْرُशराब (नशा)l-khamruوَٱلْمَيْسِرُऔर जुआwal-maysiruوَٱلْأَنصَابُऔर बुतwal-anṣābuوَٱلْأَزْلَـٰمُऔर फ़ाल के तीरwal-azlāmuرِجْسٌۭनापाक हैंrij'sunمِّنْfromminعَمَلِअमल से हैंʿamaliٱلشَّيْطَـٰنِशैतान केl-shayṭāniفَٱجْتَنِبُوهُपस बचो इससेfa-ij'tanibūhuلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتُفْلِحُونَतुम फ़लाह पाओtuf'liḥūna٩٠
ऐ ईमान वालो! बात यही है कि शराब1, जुआ, देवथान2 और फ़ाल निकालने के तीर3 सर्वथा गंदे और शैतानी कार्य हैं। अतः इनसे दूर रहो, ताकि तुम सफल हो।
५:९१
إِنَّمَاबेशकinnamāيُرِيدُचाहता हैyurīduٱلشَّيْطَـٰنُशैतानl-shayṭānuأَنकिanيُوقِعَवो डाल देyūqiʿaبَيْنَكُمُदर्मियान तुम्हारेbaynakumuٱلْعَدَٰوَةَअदावतl-ʿadāwataوَٱلْبَغْضَآءَऔर बुग़्ज़wal-baghḍāaفِىthroughfīٱلْخَمْرِबवजह शराब (नशे)l-khamriوَٱلْمَيْسِرِऔर जुए केwal-maysiriوَيَصُدَّكُمْऔर रोक दे तुम्हेंwayaṣuddakumعَنfromʿanذِكْرِज़िक्र सेdhik'riٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَعَنِand fromwaʿaniٱلصَّلَوٰةِ ۖऔर नमाज़ सेl-ṣalatiفَهَلْतो क्याfahalأَنتُمतुमantumمُّنتَهُونَबाज़ आने वाले होmuntahūna٩١
शैतान तो यही चाहता है कि शराब तथा जुए के द्वारा तुम्हारे बीच बैर तथा द्वेष डाल दे और तुम्हें अल्लाह के स्मरण तथा नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम रुकने वाले हो?
५:९२
وَأَطِيعُوا۟और इताअत करोwa-aṭīʿūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَأَطِيعُوا۟और इताअत करोwa-aṭīʿūٱلرَّسُولَरसूल कीl-rasūlaوَٱحْذَرُوا۟ ۚऔर डरोwa-iḥ'dharūفَإِنफिर अगरfa-inتَوَلَّيْتُمْमुँह मोड़ लिया तुमनेtawallaytumفَٱعْلَمُوٓا۟तो जान लोfa-iʿ'lamūأَنَّمَاबेशकannamāعَلَىٰuponʿalāرَسُولِنَاहमारे रसूल के ज़िम्मेrasūlināٱلْبَلَـٰغُपहुँचा देना हैl-balāghuٱلْمُبِينُखुल्लम-खुल्लाl-mubīnu٩٢
तथा अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और (अवज्ञा से) सावधान रहो। फिर यदि तुम विमुख हुए, तो जान लो कि हमारे रसूल पर केवल स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देना है।
५:९३
لَيْسَनहीं हैlaysaعَلَىonʿalāٱلَّذِينَऊपर उनके जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiجُنَاحٌۭकोई गुनाहjunāḥunفِيمَاउसमें जोfīmāطَعِمُوٓا۟उन्होंने खायाṭaʿimūإِذَاwhenidhāمَاजबmāٱتَّقَوا۟उन्होंने तक़वा कियाittaqawوَّءَامَنُوا۟और वो ईमान लाएwaāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiثُمَّफिरthummaٱتَّقَوا۟उन्होंने तक़वा कियाittaqawوَّءَامَنُوا۟और वो ईमान लाएwaāmanūثُمَّफिरthummaٱتَّقَوا۟उन्होंने तक़वा कियाittaqawوَّأَحْسَنُوا۟ ۗऔर उन्होंने नेक काम किएwa-aḥsanūوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيُحِبُّवो पसंद करता हैyuḥibbuٱلْمُحْسِنِينَनेक काम करने वालों कोl-muḥ'sinīna٩٣
उन लोगों पर जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कर्म किए, उसमें कोई पाप नहीं जो वे खा चुके, जबकि वे अल्लाह से डरे तथा ईमान लाए और सत्कर्म किए, फिर वे डरते रहे और ईमान पर स्थिर रहे, फिर वे अल्लाह से डरे और उन्होंने अच्छे कार्य किए और अल्लाह अच्छे कार्य करने वालों से प्रेम करता1 है।
५:९४
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَيَبْلُوَنَّكُمُअलबत्ता ज़रूर आज़माएगा तुम्हेंlayabluwannakumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِشَىْءٍۢसाथ एक चीज़ केbishayinمِّنَofminaٱلصَّيْدِशिकार में सेl-ṣaydiتَنَالُهُۥٓपा लेंगे उसेtanāluhuأَيْدِيكُمْहाथ तुम्हारेaydīkumوَرِمَاحُكُمْऔर नेज़े तुम्हारेwarimāḥukumلِيَعْلَمَताकि जान लेliyaʿlamaٱللَّهُअल्लाहl-lahuمَنकौनmanيَخَافُهُۥडरता है उस सेyakhāfuhuبِٱلْغَيْبِ ۚग़ायबाना तौर परbil-ghaybiفَمَنِतो जो कोईfamaniٱعْتَدَىٰज़्यादती करेiʿ'tadāبَعْدَafterbaʿdaذَٰلِكَबाद इसकेdhālikaفَلَهُۥतो उसके लिएfalahuعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٩٤
ऐ ईमान वालो! निश्चय अल्लाह शिकार में से किसी चीज़ के साथ तुम्हारी अवश्य परीक्षा लेगा, जिसपर तुम्हारे हाथ तथा भाले पहुँचते होंगे, ताकि अल्लाह जान ले कि कौन उससे बिन देखे डरता है। फिर जो उसके पश्चात सीमा से बढ़े, तो उसके लिए दर्दनाक यातना है।
५:९५
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتَقْتُلُوا۟ना तुम मारोtaqtulūٱلصَّيْدَशिकार कोl-ṣaydaوَأَنتُمْजब कि तुमwa-antumحُرُمٌۭ ۚएहराम में होḥurumunوَمَنऔर जिसनेwamanقَتَلَهُۥमारा उसेqatalahuمِنكُمतुम में सेminkumمُّتَعَمِّدًۭاजान बूझ करmutaʿammidanفَجَزَآءٌۭतो बदला हैfajazāonمِّثْلُमानिन्दmith'luمَاउसके जोmāقَتَلَउसने माराqatalaمِنَofminaٱلنَّعَمِचौपायों में सेl-naʿamiيَحْكُمُफ़ैसला करेंगेyaḥkumuبِهِۦउसकाbihiذَوَاtwo mendhawāعَدْلٍۢदो अदल वालेʿadlinمِّنكُمْतुम में सेminkumهَدْيًۢاबतौर क़ुर्बानी केhadyanبَـٰلِغَपहुँचने वालीbālighaٱلْكَعْبَةِकाबा तकl-kaʿbatiأَوْयाawكَفَّـٰرَةٌۭकफ़्फ़ारा हैkaffāratunطَعَامُखाना खिलानाṭaʿāmuمَسَـٰكِينَचंद मिस्कीनों काmasākīnaأَوْयाawعَدْلُबराबरʿadluذَٰلِكَउसकेdhālikaصِيَامًۭاरोज़े रखना हैṣiyāmanلِّيَذُوقَताकि वो चखेंliyadhūqaوَبَالَवबालwabālaأَمْرِهِۦ ۗअपने काम काamrihiعَفَاदरगुज़र कियाʿafāٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَمَّاउससे जोʿammāسَلَفَ ۚगुज़र चुकाsalafaوَمَنْऔर जो कोईwamanعَادَलौटाʿādaفَيَنتَقِمُतो इन्तिक़ाम लेगाfayantaqimuٱللَّهُअल्लाहl-lahuمِنْهُ ۗउससेmin'huوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَزِيزٌۭबहुत ज़बरदस्त हैʿazīzunذُوOwnerdhūٱنتِقَامٍइन्तिक़ाम लेने वाला हैintiqāmin٩٥
ऐ ईमान वालो! शिकार को न मारो1, जबकि तुम एहराम की स्थिति में हो। तथा तुममें से जो उसे जान-बूझकर मारे, तो चौपायों में से उसी जैसा बदला है जो उसने मारा है, जिसका निर्णय तुममें से दो न्यायप्रिय व्यक्ति करेंगे, जो क़ुर्बानी के रूप में काबा पहुँचने वाली है, या प्रायश्चित2 के रूप में निर्धनों को खाना खिलाना है, या उसके बराबर रोज़े रखने हैं, ताकि वह अपने किए का कष्ट चखे। अल्लाह ने क्षमा कर दिया जो कुछ हो चुका और जो फिर करे, तो अल्लाह उससे बदला लेगा और अल्लाह सबपर प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला है।
५:९६
أُحِلَّहलाल किया गया हैuḥillaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumصَيْدُशिकारṣayduٱلْبَحْرِसमुन्दर काl-baḥriوَطَعَامُهُۥऔर खाना उसकाwaṭaʿāmuhuمَتَـٰعًۭاफ़ायदामंद हैmatāʿanلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumوَلِلسَّيَّارَةِ ۖऔर क़ाफ़िले के लिएwalilssayyāratiوَحُرِّمَऔर हराम किया गयाwaḥurrimaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumصَيْدُशिकारṣayduٱلْبَرِّख़ुश्की काl-bariمَاasmāدُمْتُمْजब तक हो तुमdum'tumحُرُمًۭا ۗऐहराम मेंḥurumanوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaٱلَّذِىٓवो जोalladhīإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiتُحْشَرُونَतुम इकट्ठे किए जाओगेtuḥ'sharūna٩٦
तथा तुम्हारे लिए समुद्र (जल) का शिकार और उसका खाना1 हलाल कर दिया गया, तुम्हारे तथा यात्रियों के लाभ के लिए, तथा तुमपर भूमि का शिकार हराम कर दिया गया है जब तक तुम एहराम की स्थिति में रहो, और अल्लाह (की अवज्ञा) से डरो, जिसकी ओर तुम एकत्र किए जाओगे।
५:९७
۞ جَعَلَबनायाjaʿalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلْكَعْبَةَकाबा कोl-kaʿbataٱلْبَيْتَघरl-baytaٱلْحَرَامَहुरमत वालाl-ḥarāmaقِيَـٰمًۭاक़याम का ज़रियाqiyāmanلِّلنَّاسِलोगों के लिएlilnnāsiوَٱلشَّهْرَऔर माहेwal-shahraٱلْحَرَامَहराम कोl-ḥarāmaوَٱلْهَدْىَऔर क़ुर्बानी कोwal-hadyaوَٱلْقَلَـٰٓئِدَ ۚऔर पट्टे वाले जानवरों कोwal-qalāidaذَٰلِكَये (इसलिए)dhālikaلِتَعْلَمُوٓا۟ताकि तुम जान लोlitaʿlamūأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजो कुछmāفِى(is) infīٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों में हैl-samāwātiوَمَاऔर जो कुछwamāفِى(is) infīٱلْأَرْضِज़मीन में हैl-arḍiوَأَنَّऔर बेशकwa-annaٱللَّهَअल्लाहl-lahaبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ कोshayinعَلِيمٌख़ूब जानने वाला हैʿalīmun٩٧
अल्लाह ने सम्मानित घर काबा को लोगों के लिए स्थापना का साधन बनाया है तथा सम्मानित महीनों1 और (हज्ज की) क़ुर्बानी के जानवरों तथा गर्दन में पट्टे लगे हुए जानवरों को। यह इसलिए कि तुम जान लो कि निःसंदेह अल्लाह जानता है, जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, तथा यह कि निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है।
५:९८
ٱعْلَمُوٓا۟जान लोiʿ'lamūأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaشَدِيدُसख़्तshadīduٱلْعِقَابِसज़ा वाला हैl-ʿiqābiوَأَنَّऔर बेशकwa-annaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٩٨
जान लो! निःसंदेह अल्लाह बहुत कठोर दंड वाला है और निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
५:९९
مَّاनहीं हैmāعَلَىonʿalāٱلرَّسُولِरसूल परl-rasūliإِلَّاमगरillāٱلْبَلَـٰغُ ۗपहुँचा देनाl-balāghuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُजानता हैyaʿlamuمَاजोmāتُبْدُونَतुम ज़ाहिर करते होtub'dūnaوَمَاऔर जोwamāتَكْتُمُونَतुम छुपाते होtaktumūna٩٩
रसूल पर (संदेश) पहुँचा देने के सिवा कुछ नहीं और अल्लाह जानता है जो तुम प्रकट करते हो और जो छिपाते हो।
५:१००
قُلकह दीजिएqulلَّاNotlāيَسْتَوِىनहीं बराबर हो सकतेyastawīٱلْخَبِيثُनापाकl-khabīthuوَٱلطَّيِّبُऔर पाकwal-ṭayibuوَلَوْऔर अगरचेwalawأَعْجَبَكَअच्छी लगे तुम्हेंaʿjabakaكَثْرَةُकसरतkathratuٱلْخَبِيثِ ۚनापाक कीl-khabīthiفَٱتَّقُوا۟पस डरोfa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaيَـٰٓأُو۟لِىO menyāulīٱلْأَلْبَـٰبِऐ अक़्ल वालोl-albābiلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتُفْلِحُونَतुम फ़लाह पा जाओtuf'liḥūna١٠٠
(ऐ नबी!) कह दो कि अपवित्र (बुरी चीज़) तथा पवित्र (अच्छी चीज़) समान नहीं, चाहे अपवित्र (बुरी चीज़) की बहुतायत तुम्हें भली लगे। तो ऐ बुद्धि वालो! अल्लाह से डरो, ताकि तुम सफल हो जाओ।1
५:१०१
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगों जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتَسْـَٔلُوا۟ना तुम सवाल करोtasalūعَنْaboutʿanأَشْيَآءَऐसी चीज़ों के बारे मेंashyāaإِنअगरinتُبْدَवो ज़ाहिर कर दी जाऐंtub'daلَكُمْतुम्हारे लिएlakumتَسُؤْكُمْबुरी लगें तुम्हेंtasu'kumوَإِنऔर अगरwa-inتَسْـَٔلُوا۟तुम सवाल करोगेtasalūعَنْهَاउनके बारे मेंʿanhāحِينَजिस वक़्तḥīnaيُنَزَّلُनाज़िल किया जाता हैyunazzaluٱلْقُرْءَانُक़ुरआनl-qur'ānuتُبْدَवो ज़ाहिर कर दी जाऐंगीtub'daلَكُمْतुम्हारे लिएlakumعَفَاदरगुज़र कियाʿafāٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَنْهَا ۗउनसेʿanhāوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuغَفُورٌबहुत बख़्शने वालाghafūrunحَلِيمٌۭबहुत बुर्दबार हैḥalīmun١٠١
ऐ ईमान वालो! उन चीज़ों के विषय में प्रश्न न करो, जो यदि तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँ, तो तुम्हें बुरी लगें, तथा यदि तुम उनके विषय में उस समय प्रश्न करोगे, जब क़ुरआन उतारा जा रहा है, तो वे तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँगी। अल्लाह ने उन्हें क्षमा कर दिया और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत सहनशील1 है।
५:१०२
قَدْतहक़ीक़qadسَأَلَهَاसवाल किया था उनके बारे मेंsa-alahāقَوْمٌۭएक क़ौम नेqawmunمِّنfromminقَبْلِكُمْतुम से पहलेqablikumثُمَّफिरthummaأَصْبَحُوا۟वो हो गएaṣbaḥūبِهَاउनकाbihāكَـٰفِرِينَइन्कार करने वालेkāfirīna١٠٢
निःसंदेह तुमसे पहले कुछ लोगों ने ऐसी ही बातों के बारे में प्रश्न किया1, फिर वे इसके कारण काफ़िर हो गए।
५:१०३
مَاनहींmāجَعَلَबनायाjaʿalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِنۢofminبَحِيرَةٍۢकोई बहीरहbaḥīratinوَلَاऔर नाwalāسَآئِبَةٍۢकोई साएबाsāibatinوَلَاऔर नाwalāوَصِيلَةٍۢकोई वसीलाwaṣīlatinوَلَاand notwalāحَامٍۢ ۙऔर ना कोई हामḥāminوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūيَفْتَرُونَवो गढ़ लेते हैंyaftarūnaعَلَىagainstʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiٱلْكَذِبَ ۖझूठl-kadhibaوَأَكْثَرُهُمْऔर अक्सर उनकेwa-aktharuhumلَا(do) notlāيَعْقِلُونَनहीं वो अक़्ल रखतेyaʿqilūna١٠٣
अल्लाह ने कोई बह़ीरा, साइबा, वसीला और ह़ाम नियुक्त नहीं किया।1 परंतु जिन लोगों ने कुफ़्र किया वे अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं और उनमें से अधिकतर नहीं समझते।
५:१०४
وَإِذَاऔर जबwa-idhāقِيلَकहा जाता हैqīlaلَهُمْउन्हेंlahumتَعَالَوْا۟आओtaʿālawإِلَىٰतरफ़ilāمَآउसके जोmāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَإِلَىand towa-ilāٱلرَّسُولِऔर तरफ़ रसूल केl-rasūliقَالُوا۟वो कहते हैंqālūحَسْبُنَاकाफ़ी है हमेंḥasbunāمَاजोmāوَجَدْنَاपाया हमनेwajadnāعَلَيْهِउस परʿalayhiءَابَآءَنَآ ۚअपने आबा ओ अजदाद कोābāanāأَوَلَوْक्या भला अगरचेawalawكَانَहोंkānaءَابَآؤُهُمْआबा ओ अजदाद उनकेābāuhumلَا(were) notlāيَعْلَمُونَना वो इल्म रखतेyaʿlamūnaشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَلَاऔर नाwalāيَهْتَدُونَवो हिदायत याफ़्ता होंyahtadūna١٠٤
और जब उनसे कहा जाता है : आओ उसकी ओर जो अल्लाह ने उतारा है और रसूल की ओर, तो कहते हैं : हमें वही काफ़ी है, जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है। क्या अगरचे उनके बाप-दादा कुछ भी न जानते हों और न मार्गदर्शन पाते हों।
५:१०५
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūعَلَيْكُمْलाज़िम है तुम पर (बचाना)ʿalaykumأَنفُسَكُمْ ۖअपनी जानों कोanfusakumلَاNotlāيَضُرُّكُمना नुक़सान देगा तुम्हेंyaḍurrukumمَّنजोmanضَلَّभटक गयाḍallaإِذَاजबidhāٱهْتَدَيْتُمْ ۚहिदायत पा चुके तुमih'tadaytumإِلَىToilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह ही केl-lahiمَرْجِعُكُمْलौटना है तुम्हाराmarjiʿukumجَمِيعًۭاसब काjamīʿanفَيُنَبِّئُكُمफिर वो बता देगा तुम्हेंfayunabbi-ukumبِمَاवो जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna١٠٥
ऐ ईमान वालो! तुमपर अपनी चिंता अनिवार्य है। तुम्हें वह व्यक्ति हानि नहीं पहुँचाएगा, जो गुमराह हो गया, जब तुम मार्गदर्शन पा चुके। अल्लाह ही की ओर तुम सबको लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें बताएगा, जो कुछ तुम किया करते थे।1
५:१०६
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūشَهَـٰدَةُगवाही होshahādatuبَيْنِكُمْतुम्हारे दर्मियानbaynikumإِذَاजबidhāحَضَرَहाज़िर होḥaḍaraأَحَدَكُمُतुम में से किसी एक कोaḥadakumuٱلْمَوْتُमौतl-mawtuحِينَवक़्तḥīnaٱلْوَصِيَّةِवसीयत केl-waṣiyatiٱثْنَانِदोith'nāniذَوَاmendhawāعَدْلٍۢअदल वालों केʿadlinمِّنكُمْतुम में सेminkumأَوْयाawءَاخَرَانِदो औरākharāniمِنْfromminغَيْرِكُمْतुम्हारे अलावा सेghayrikumإِنْअगरinأَنتُمْतुमantumضَرَبْتُمْसफ़र कर रहे हो तुमḍarabtumفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiفَأَصَـٰبَتْكُمफिर पहुँचे तुम्हेंfa-aṣābatkumمُّصِيبَةُमुसीबतmuṣībatuٱلْمَوْتِ ۚमौत कीl-mawtiتَحْبِسُونَهُمَاतुम रोक लो उन दोनों कोtaḥbisūnahumāمِنۢfromminبَعْدِबादbaʿdiٱلصَّلَوٰةِनमाज़ केl-ṣalatiفَيُقْسِمَانِफिर वो दोनों क़समें खाऐंfayuq'simāniبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiإِنِअगरiniٱرْتَبْتُمْशक करो तुमir'tabtumلَاNotlāنَشْتَرِىना हम लेंगेnashtarīبِهِۦसाथ उसकेbihiثَمَنًۭاकोई क़ीमतthamananوَلَوْऔर अगरचेwalawكَانَहो वोkānaذَا(of)dhāقُرْبَىٰ ۙरिश्तेदारqur'bāوَلَاऔर नाwalāنَكْتُمُहम छुपाऐंगेnaktumuشَهَـٰدَةَगवाही कोshahādataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiإِنَّآबेशक हमinnāإِذًۭاतबidhanلَّمِنَ(will) surely (be) oflaminaٱلْـَٔاثِمِينَअलबत्ता गुनाहगारों में से होंगेl-āthimīna١٠٦
ऐ ईमान वालो! जब तुममें से किसी की मृत्यु आ पहुँचे, तो वसिय्यत1 के समय तुम्हारे बीच गवाही (के लिए) तुममें से दो न्यायप्रिय व्यक्ति हों या तुम्हारे ग़ैरों में से दूसरे दो व्यक्ति हों, यदि तुम धरती में यात्रा कर रहे हो, फिर तुम्हें मरण की आपदा आ पहुँचे। तुम उन दोनों को नमाज़ के बाद रोक लोगे, यदि तुम्हें (उनपर) संदेह हो। फिर वे दोनों अल्लाह की क़सम खाएँगे कि हम उसके साथ कोई मूल्य नहीं लेंगे, यद्यपि वह निकट का संबंधी हो और न हम अल्लाह की गवाही छिपाएँगे, निःसंदेह हम उस समय निश्चय पापियों में से होंगे।
५:१०७
فَإِنْफिर अगरfa-inعُثِرَइत्तिला हो जाएʿuthiraعَلَىٰٓउस परʿalāأَنَّهُمَاकि बेशक वो दोनोंannahumāٱسْتَحَقَّآवो मुस्तहिक़ हुए हैंis'taḥaqqāإِثْمًۭاगुनाह केith'manفَـَٔاخَرَانِपस दो दूसरेfaākharāniيَقُومَانِवो दोनों खड़े होंगेyaqūmāniمَقَامَهُمَاउन दोनों की जगहmaqāmahumāمِنَfromminaٱلَّذِينَउन लोगों में सेalladhīnaٱسْتَحَقَّहक़ साबित हो गयाis'taḥaqqaعَلَيْهِمُजिन परʿalayhimuٱلْأَوْلَيَـٰنِदो क़रीब तरीनl-awlayāniفَيُقْسِمَانِफिर वो दोनों क़समें खाऐंगेfayuq'simāniبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiلَشَهَـٰدَتُنَآअलबत्ता गवाही हमारीlashahādatunāأَحَقُّज़्यादा सच्ची हैaḥaqquمِنthanminشَهَـٰدَتِهِمَاउन दोनों की गवाही सेshahādatihimāوَمَاऔर नहींwamāٱعْتَدَيْنَآज़्यादती की हमनेiʿ'tadaynāإِنَّآबेशक हमinnāإِذًۭاतबidhanلَّمِنَ(will be) oflaminaٱلظَّـٰلِمِينَअलबत्ता ज़ालिमों में से होंगेl-ẓālimīna١٠٧
फिर यदि पता चले कि निःसंदेह वे दोनों (गवाह) किसी पाप के पात्र हुए हैं, तो उन दोनों के स्थान पर, दो अन्य गवाह खड़े हों, उनमें से जिनका हक़ दबाया गया है, जो (मरे हुए व्यक्ति के) अधिक निकट हों। फिर वे दोनों अल्लाह की क़समें खाएँ कि हमारी गवाही उन दोनों की गवाही से अधिक सच्ची है और हमने कोई ज़्यादती नहीं की। निःसंदेह हम उस समय निश्चय अत्याचारियों में से होंगे।
५:१०८
ذَٰلِكَयेdhālikaأَدْنَىٰٓज़्यादा क़रीब हैadnāأَنकिanيَأْتُوا۟वो लाऐंyatūبِٱلشَّهَـٰدَةِगवाही कोbil-shahādatiعَلَىٰinʿalāوَجْهِهَآउसके (असल) रुख़ परwajhihāأَوْयाawيَخَافُوٓا۟वो डरेंyakhāfūأَنकिanتُرَدَّरद्द कर दी जाऐंगीturaddaأَيْمَـٰنٌۢक़समें (उनकी)aymānunبَعْدَबादbaʿdaأَيْمَـٰنِهِمْ ۗउन (वुरसा) की क़समों केaymānihimوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَٱسْمَعُوا۟ ۗऔर सुनोwa-is'maʿūوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं वो हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaٱلْفَـٰسِقِينَजो फ़ासिक़ हैंl-fāsiqīna١٠٨
यह अधिक निकट है कि वे गवाही को उसके (वास्तविक) तरीक़े पर दें, अथवा इस बात से डरें कि (उनकी) क़समें उन (संबंधियों) की क़समों के बाद रद्द कर दी जाएँगी तथा अल्लाह से डरो और सुनो और अल्लाह अवज्ञाकारियों को मार्गदर्शन प्रदान नहीं करता।1
५:१०९
۞ يَوْمَजिस दिनyawmaيَجْمَعُजमा करेगाyajmaʿuٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلرُّسُلَरसूलों कोl-rusulaفَيَقُولُफिर कहेगाfayaqūluمَاذَآक्याmādhāأُجِبْتُمْ ۖजवाब दिए गए थे तुमujib'tumقَالُوا۟वो कहेंगेqālūلَا(There is) nolāعِلْمَनहीं कोई इल्मʿil'maلَنَآ ۖहमेंlanāإِنَّكَबेशक तूinnakaأَنتَतू ही हैantaعَلَّـٰمُखूब जानने वालाʿallāmuٱلْغُيُوبِग़ैबों काl-ghuyūbi١٠٩
जिस दिन अल्लाह रसूलों को एकत्र करेगा, फिर कहेगा : तुम्हें क्या उत्तर दिया गया? वे कहेंगे : हमें कोई ज्ञान नहीं।1 निःसंदेह तू ही छिपी बातों को ख़ूब जानने वाला है।
५:११०
إِذْजबidhقَالَफ़रमाएगाqālaٱللَّهُअल्लाहl-lahuيَـٰعِيسَىO Isayāʿīsāٱبْنَsonib'naمَرْيَمَऐ ईसा इब्ने मरियमmaryamaٱذْكُرْयाद करोudh'kurنِعْمَتِىमेरी नेअमत (जो)niʿ'matīعَلَيْكَतुझ पर हैʿalaykaوَعَلَىٰand uponwaʿalāوَٰلِدَتِكَऔर तेरी वालिदा परwālidatikaإِذْजबidhأَيَّدتُّكَताईद की मैंने तुम्हारीayyadttukaبِرُوحِwith (the) Spiritbirūḥiٱلْقُدُسِसाथ रूहुल क़ुदुस केl-qudusiتُكَلِّمُतू कलाम करता थाtukallimuٱلنَّاسَलोगों सेl-nāsaفِىinfīٱلْمَهْدِगहवारे मेंl-mahdiوَكَهْلًۭا ۖऔर अधेड़ उम्र मेंwakahlanوَإِذْऔर जबwa-idhعَلَّمْتُكَतालीम दी मैंने तुझेʿallamtukaٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaوَٱلْحِكْمَةَऔर हिकमतwal-ḥik'mataوَٱلتَّوْرَىٰةَऔर तौरातwal-tawrātaوَٱلْإِنجِيلَ ۖऔर इन्जील कीwal-injīlaوَإِذْऔर जबwa-idhتَخْلُقُतू बनाता थाtakhluquمِنَfromminaٱلطِّينِमिट्टी सेl-ṭīniكَهَيْـَٔةِमानिन्द शक्लkahayatiٱلطَّيْرِपरिन्दे कीl-ṭayriبِإِذْنِىमेरे इज़्न सेbi-idh'nīفَتَنفُخُफिर तू फूँक मारता थाfatanfukhuفِيهَاउस मेंfīhāفَتَكُونُफिर वो हो जाता थाfatakūnuطَيْرًۢاपरिन्दाṭayranبِإِذْنِى ۖमेरे इज़्न सेbi-idh'nīوَتُبْرِئُऔर तू अच्छा कर देता थाwatub'ri-uٱلْأَكْمَهَपैदाइशी अँधे कोl-akmahaوَٱلْأَبْرَصَऔर बर्स वाले कोwal-abraṣaبِإِذْنِى ۖमेरे इज़्न सेbi-idh'nīوَإِذْऔर जबwa-idhتُخْرِجُतू निकालता थाtukh'rijuٱلْمَوْتَىٰमुर्दों कोl-mawtāبِإِذْنِى ۖमेरे इज़्न सेbi-idh'nīوَإِذْऔर जबwa-idhكَفَفْتُरोका मैंनेkafaftuبَنِىٓ(the) Childrenbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल कोis'rāīlaعَنكَतुझसेʿankaإِذْजबidhجِئْتَهُمलाया तू उनके पासji'tahumبِٱلْبَيِّنَـٰتِवाज़ेह निशानियाँbil-bayinātiفَقَالَतो कहाfaqālaٱلَّذِينَउन्होंने जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنْهُمْउनमें सेmin'humإِنْनहीं हैinهَـٰذَآयेhādhāإِلَّاमगरillāسِحْرٌۭजादूsiḥ'runمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun١١٠
(तथा याद करो) जब अल्लाह कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! अपने ऊपर तथा अपनी माता के ऊपर मेरा अनुग्रह याद कर, जब मैंने पवित्रात्मा (जिबरील) द्वारा तेरी सहायता की। तू गोद (पालने) में तथा अधेड़ आयु में लोगों से बातें करता था। तथा जब मैंने तुझे किताब और हिकमत तथा तौरात और इंजील की शिक्षा दी। और जब तू मेरी अनुमति से मिट्टी से पक्षी की आकृति की तरह (रूप) बनाता था, फिर तू उसमें फूँक मारता तो वह मेरी अनुमति से पक्षी बन जाता था और तू जन्म से अंधे तथा कोढ़ी को मेरी अनुमति से स्वस्थ कर देता था और जब तू मुर्दों को मेरी अनुमति से निकाल (जीवित) खड़ा करता था। और जब मैंने बनी इसराईल को तुझसे रोका, जब तू उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आया, तो उनमें से कुफ़्र करने वालों ने कहा : यह तो स्पष्ट जादू के सिवा कुछ नहीं।
५:१११
وَإِذْऔर जबwa-idhأَوْحَيْتُवही की मैंनेawḥaytuإِلَىtoilāٱلْحَوَارِيِّـۧنَतरफ़ हवारियों केl-ḥawāriyīnaأَنْये किanءَامِنُوا۟ईमान लाओāminūبِىमुझ परbīوَبِرَسُولِىऔर मेरे रसूल परwabirasūlīقَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāوَٱشْهَدْऔर गवाह रहwa-ish'hadبِأَنَّنَاबेशक हमbi-annanāمُسْلِمُونَमुसलमान हैंmus'limūna١١١
तथा (याद कर) जब मैंने हवारियों के दिलों में यह बात डाल दी कि मुझपर तथा मेरे रसूल (ईसा) पर ईमान लाओ। उन्होंने कहा : हम ईमान लाए और तू गवाह रह कि हम आज्ञाकारी हैं।
५:११२
إِذْजबidhقَالَकहाqālaٱلْحَوَارِيُّونَहवारियों नेl-ḥawāriyūnaيَـٰعِيسَىO Isayāʿīsāٱبْنَsonib'naمَرْيَمَऐ ईसा इब्ने मरियमmaryamaهَلْक्याhalيَسْتَطِيعُइस्तिताअत रखता हैyastaṭīʿuرَبُّكَरब तेराrabbukaأَنकिanيُنَزِّلَवो उतारेyunazzilaعَلَيْنَاहम परʿalaynāمَآئِدَةًۭएक दस्तरख़्वानmāidatanمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِ ۖआसमान सेl-samāiقَالَउसने कहाqālaٱتَّقُوا۟डरोittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaإِنअगरinكُنتُمहो तुमkuntumمُّؤْمِنِينَमोमिनmu'minīna١١٢
जब हवारियों ने कहा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! क्या तेरा पालनहार यह कर सकता है कि हमपर आकाश से एक थाल (भोजन सहित दस्तर-ख़्वान) उतार दे? उस (ईसा) ने कहा : अल्लाह से डरो, यदि तुम ईमान वाले हो।
५:११३
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūنُرِيدُहम चाहते हैंnurīduأَنकिanنَّأْكُلَहम खाऐंnakulaمِنْهَاउससेmin'hāوَتَطْمَئِنَّऔर मुत्मईन हो जाऐंwataṭma-innaقُلُوبُنَاदिल हमारेqulūbunāوَنَعْلَمَऔर हम जान लेंwanaʿlamaأَنकिanقَدْतहक़ीक़qadصَدَقْتَنَاसच कहा तूने हम सेṣadaqtanāوَنَكُونَऔर हम हो जाऐंwanakūnaعَلَيْهَاउस परʿalayhāمِنَamongminaٱلشَّـٰهِدِينَगवाहों में सेl-shāhidīna١١٣
उन्होंने कहा : हम चाहते हैं कि उसमें से खाएँ और हमारे दिलों को संतोष हो जाए तथा हम जान लें कि निश्चय तूने हमसे सच कहा है और हम उसपर गवाहों में से हो जाएँ।
५:११४
قَالَकहाqālaعِيسَىIsaʿīsāٱبْنُsonub'nuمَرْيَمَईसा इब्ने मरियम नेmaryamaٱللَّهُمَّऐ अल्लाहl-lahumaرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāأَنزِلْउतारanzilعَلَيْنَاहम परʿalaynāمَآئِدَةًۭएक दस्तरख़्वानmāidatanمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiتَكُونُवो हो जाएtakūnuلَنَاहमारे लिएlanāعِيدًۭاईदʿīdanلِّأَوَّلِنَاवास्ते हमारे पहलों केli-awwalināوَءَاخِرِنَاऔर हमारे पिछलों केwaākhirināوَءَايَةًۭऔर एक निशानीwaāyatanمِّنكَ ۖतेरी तरफ़ सेminkaوَٱرْزُقْنَاऔर रिज़्क़ दे हमेंwa-ur'zuq'nāوَأَنتَऔर तूwa-antaخَيْرُबेहतर हैkhayruٱلرَّٰزِقِينَसब रिज़्क़ देने वालों सेl-rāziqīna١١٤
मरयम के पुत्र ईसा ने प्रार्थना की : ऐ अल्लाह! ऐ हमारे पालनहार! हम पर आकाश से एक थाल उतार, जो हमारे तथा हमारे पश्चात् के लोगों के लिए उत्सव (का दिन) बन जाए तथा तेरी ओर से एक निशानी (हो)। तथा हमें जीविका प्रदान कर, तू ही सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।
५:११५
قَالَफ़रमायाqālaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuإِنِّىबेशक मैंinnīمُنَزِّلُهَاनाज़िल करने वाला हूँ उसेmunazziluhāعَلَيْكُمْ ۖतुम परʿalaykumفَمَنतो जो कोईfamanيَكْفُرْकुफ़्र करेगाyakfurبَعْدُबाद उसकेbaʿduمِنكُمْतुम में सेminkumفَإِنِّىٓतो बेशक मैंfa-innīأُعَذِّبُهُۥमैं अज़ाब दूँगा उसेuʿadhibuhuعَذَابًۭاऐसा अज़ाबʿadhābanلَّآnotlāأُعَذِّبُهُۥٓनहीं मैं अज़ाब दूँगा वोuʿadhibuhuأَحَدًۭاकिसी एक कोaḥadanمِّنَamongminaٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहान वालों में सेl-ʿālamīna١١٥
अल्लाह ने कहा : निःसंदेह मैं उसे तुमपर उतारने1 वाला हूँ। फिर जो उसके बाद तुममें से कुफ़्र (अविश्वास) करेगा, तो निःसंदेह मैं उसे दंड दूँगा, ऐसा दंड कि संसार वासियों में से किसी को न दूँगा।
५:११६
وَإِذْऔर जबwa-idhقَالَफ़रमाएगाqālaٱللَّهُअल्लाहl-lahuيَـٰعِيسَىO Isayāʿīsāٱبْنَsonib'naمَرْيَمَऐ ईसा इब्ने मरियमmaryamaءَأَنتَक्या तूनेa-antaقُلْتَकहा था तूनेqul'taلِلنَّاسِलोगों सेlilnnāsiٱتَّخِذُونِىबना लो मुझेittakhidhūnīوَأُمِّىَऔर मेरी माँ कोwa-ummiyaإِلَـٰهَيْنِदो इलाहilāhayniمِنfromminدُونِसिवायdūniٱللَّهِ ۖअल्लाह केl-lahiقَالَवो कहेंगेqālaسُبْحَـٰنَكَपाक है तूsub'ḥānakaمَاनहींmāيَكُونُहैyakūnuلِىٓमेरे लिएlīأَنْकिanأَقُولَमैं कहूँ (वो बात)aqūlaمَاजिसकाmāلَيْسَनहीं हैlaysaلِىमुझेlīبِحَقٍّ ۚकोई हक़biḥaqqinإِنअगरinكُنتُथा मैंkuntuقُلْتُهُۥकहता मैं उसकोqul'tuhuفَقَدْतो तहक़ीक़faqadعَلِمْتَهُۥ ۚतू जान लेता उसेʿalim'tahuتَعْلَمُतू जानता हैtaʿlamuمَاजोmāفِى(is) infīنَفْسِىमेरे नफ़्स में हैnafsīوَلَآऔर नहींwalāأَعْلَمُमैं जानताaʿlamuمَاजोmāفِى(is) infīنَفْسِكَ ۚतेरे नफ़्स में हैnafsikaإِنَّكَबेशक तूinnakaأَنتَतू ही हैantaعَلَّـٰمُख़ूब जानने वालाʿallāmuٱلْغُيُوبِग़ैबों काl-ghuyūbi١١٦
तथा जब अल्लाह (क़ियामत के दिन) कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! क्या तुमने लोगों से कहा था कि मुझे तथा मेरी माँ को अल्लाह के अलावा दो पूज्य बना लो? वह कहेगा : तू पवित्र है, मुझसे यह कैसे हो सकता है कि ऐसी बात कहूँ, जिसका मुझे कोई अधिकार नहीं? यदि मैंने यह बात कही थी, तो निश्चय तूने उसे जान लिया। तू जानता है, जो मेरे मन में है और मैं नहीं जानता जो तेरे मन में है। निश्चय तू ही सब छिपी बातों (परोक्ष)) को बहुत ख़ूब जानने वाला है।
५:११७
مَاनहींmāقُلْتُकहा था मैंनेqul'tuلَهُمْउन्हेंlahumإِلَّاमगरillāمَآजोmāأَمَرْتَنِىहुक्म दिया तूने मुझेamartanīبِهِۦٓजिसकाbihiأَنِकिaniٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaرَبِّىजो रब है मेराrabbīوَرَبَّكُمْ ۚऔर रब है तुम्हाराwarabbakumوَكُنتُऔर था मैंwakuntuعَلَيْهِمْउन परʿalayhimشَهِيدًۭاगवाहshahīdanمَّاthatmāدُمْتُजब तक मैं रहाdum'tuفِيهِمْ ۖउनमेंfīhimفَلَمَّاफिर जबfalammāتَوَفَّيْتَنِىफ़ौत कर दिया तूने मुझेtawaffaytanīكُنتَथा तूkuntaأَنتَतू हीantaٱلرَّقِيبَनिगरानl-raqībaعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimوَأَنتَऔर तूwa-antaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinشَهِيدٌख़ूब गवाह हैshahīdun١١٧
मैंने उनसे उसके सिवा कुछ नहीं कहा, जिसका तूने मुझे आदेश दिया था कि अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। और मैं उनपर गवाह था, जब तक उनमें रहा, फिर जब तूने मुझे उठा लिया1, तो तू ही उनपर निरीक्षक था और तू हर चीज़ पर गवाह है।
५:११८
إِنअगरinتُعَذِّبْهُمْतू अज़ाब दे उन्हेंtuʿadhib'humفَإِنَّهُمْतो बेशक वोfa-innahumعِبَادُكَ ۖबन्दे हैं तेरेʿibādukaوَإِنऔर अगरwa-inتَغْفِرْतू बख़्श देtaghfirلَهُمْउन्हेंlahumفَإِنَّكَतो बेशक तूfa-innakaأَنتَतू ही हैantaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُबहुत हिकमत वालाl-ḥakīmu١١٨
यदि तू उन्हें दंड दे, तो निःसंदेह वे तेरे बंदे हैं और यदि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो निःसंदेह तू ही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
५:११९
قَالَफ़रमाएगाqālaٱللَّهُअल्लाहl-lahuهَـٰذَاयेhādhāيَوْمُदिन हैyawmuيَنفَعُनफ़ा देगाyanfaʿuٱلصَّـٰدِقِينَसच्चों कोl-ṣādiqīnaصِدْقُهُمْ ۚसच उनकाṣid'quhumلَهُمْउनके लिएlahumجَنَّـٰتٌۭबाग़ात हैंjannātunتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَآउनमेंfīhāأَبَدًۭا ۚअब्द तक /हमेशाabadanرَّضِىَराज़ी हो गयाraḍiyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَنْهُمْउनसेʿanhumوَرَضُوا۟और वो राज़ी हो गएwaraḍūعَنْهُ ۚउससेʿanhuذَٰلِكَयही हैdhālikaٱلْفَوْزُकामयाबीl-fawzuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu١١٩
अल्लाह कहेगा : यह वह दिन है कि सच्चों को उनका सच ही लाभ देगा। उन के लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, उनमें हमेशा-हमेशा के लिए रहने वाले हैं। अल्लाह उनसे प्रसन्न हो गया तथा वे अल्लाह से प्रसन्न हो गए, यही बहुत बड़ी सफलता है।
५:१२०
لِلَّهِअल्लाह ही के लिए हैlillahiمُلْكُबादशाहतmul'kuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों कीl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन कीwal-arḍiوَمَاऔर जो कुछwamāفِيهِنَّ ۚउनमें हैfīhinnaوَهُوَऔर वोwahuwaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌۢबहुत क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun١٢٠
आकाशों और धरती तथा जो कुछ उनमें है, उन सबका राज्य अल्लाह ही1 के लिए है और वह हर चीज़ पर शक्ति रखने वाला है।
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