१११
अल-मसद
المسد
सूरह अल-मसद (المسد) पवित्र क़ुरआन का १११ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ५ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
१११:१
تَبَّتْटूट गएtabbatيَدَآदोनों हाथyadāأَبِى(of) Abuabīلَهَبٍۢअबू लहब केlahabinوَتَبَّऔर वो हलाक हुआwatabba١
अबू लहब के दोनों हाथ नाश हो जाएँ! और वह (स्वयं) विनष्ट हो गया।1
१११:२
مَآनाmāأَغْنَىٰकाम आयाaghnāعَنْهُउसेʿanhuمَالُهُۥमाल उसकाmāluhuوَمَاऔर जोwamāكَسَبَउसने कमायाkasaba٢
उसका धन तथा जो कुछ उसने कमाया था, उसके काम नहीं आया।
१११:३
سَيَصْلَىٰअनक़रीब वो जलेगाsayaṣlāنَارًۭاआग मेंnāranذَاتَofdhātaلَهَبٍۢशोले वालीlahabin٣
जल्द ही वह लपट वाली आग में दाख़िल होगा।1
१११:४
وَٱمْرَأَتُهُۥऔर उसकी बीवीwa-im'ra-atuhuحَمَّالَةَउठाने वालीḥammālataٱلْحَطَبِलकड़ी के गठ्ठे कोl-ḥaṭabi٤
तथा उसकी पत्नी (भी जहन्नम में जाएगी), जो ईंधन उठाने वाली है।
१११:५
فِىInfīجِيدِهَاउसकी गर्दन मेंjīdihāحَبْلٌۭरस्सी होगीḥablunمِّنofminمَّسَدٍۭबटी हुईmasadin٥
उसकी गर्दन में मज़बूत बटी हुई रस्सी होगी।1
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