२३
अल-मुमिनून
المؤمنون
सूरह अल-मुमिनून (المؤمنون) पवित्र क़ुरआन का २३ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ११८ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
२३:१
قَدْयक़ीननqadأَفْلَحَफ़लाह पा गएaflaḥaٱلْمُؤْمِنُونَईमान लाने वालेl-mu'minūna١
निश्चय सफल हो गए ईमान वाले।
२३:२
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaهُمْवोhumفِىduringfīصَلَاتِهِمْअपनी नमाज़ मेंṣalātihimخَـٰشِعُونَख़ुशूअ करने वालेkhāshiʿūna٢
जो अपनी नमाज़ में विनम्रता अपनाने वाले हैं।
२३:३
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaهُمْवोhumعَنِfromʿaniٱللَّغْوِलग़्व बात सेl-laghwiمُعْرِضُونَऐराज़ करने वाले हैंmuʿ'riḍūna٣
और जो व्यर्थ चीज़ों1 से मुँह मोड़ने वाले हैं।
२३:४
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaهُمْवोhumلِلزَّكَوٰةِज़कात कोlilzzakatiفَـٰعِلُونَ(अदा) करने वाले हैंfāʿilūna٤
तथा जो ज़कात अदा करने वाले हैं।
२३:५
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaهُمْवोhumلِفُرُوجِهِمْअपनी शर्मगाहों कीlifurūjihimحَـٰفِظُونَहिफ़ाज़त करने वाले हैंḥāfiẓūna٥
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं।
२३:६
إِلَّاमगरillāعَلَىٰٓऊपरʿalāأَزْوَٰجِهِمْअपनी बीवियों केazwājihimأَوْयाawمَاजिनकेmāمَلَكَتْमालिक हुएmalakatأَيْمَـٰنُهُمْउनके दाऐं हाथaymānuhumفَإِنَّهُمْतो बेशक वोfa-innahumغَيْرُनहींghayruمَلُومِينَमलामत किए गएmalūmīna٦
सिवाय अपनी पत्नियों या उन महिलाओं के जो उनके स्वामित्व में हैं, तो निःसंदेह वे निंदित नहीं हैं।
२३:७
فَمَنِतो जो कोईfamaniٱبْتَغَىٰचाहेib'taghāوَرَآءَअलावाwarāaذَٰلِكَइसकेdhālikaفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْعَادُونَजो हद से गुज़रने वाले हैंl-ʿādūna٧
फिर जो इसके अलावा तलाश करे, तो वही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
२३:८
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaهُمْवोhumلِأَمَـٰنَـٰتِهِمْअपनी अमानतों कोli-amānātihimوَعَهْدِهِمْऔर अपने अहद कीwaʿahdihimرَٰعُونَनिगरानी करने वाले हैंrāʿūna٨
और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
२३:९
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaهُمْवोhumعَلَىٰoverʿalāصَلَوَٰتِهِمْअपनी नमाज़ों परṣalawātihimيُحَافِظُونَवो हिफ़ाज़त करते हैंyuḥāfiẓūna٩
तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं।
२३:१०
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaهُمُवोhumuٱلْوَٰرِثُونَजो वारिस हैंl-wārithūna١٠
यही लोग हैं, जो वारिस (उत्तराधिकारी) हैं।
२३:११
ٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيَرِثُونَवारिस होंगेyarithūnaٱلْفِرْدَوْسَफ़िरदौस केl-fir'dawsaهُمْवोhumفِيهَاउस मेंfīhāخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वाले हैंkhālidūna١١
जो फ़िरदौस1 के वारिस होंगे, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
२३:१२
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadخَلَقْنَاपैदा किया हमनेंkhalaqnāٱلْإِنسَـٰنَइन्सान कोl-insānaمِنfromminسُلَـٰلَةٍۢसत्त / निचोड़ सेsulālatinمِّنofminطِينٍۢमिट्टी केṭīnin١٢
और निःसंदेह हमने मनुष्य को तुच्छ मिट्टी के एक सार से पैदा किया।
२३:१३
ثُمَّफ़िरthummaجَعَلْنَـٰهُबनाया हमने उसेjaʿalnāhuنُطْفَةًۭनुत्फ़ाnuṭ'fatanفِىinfīقَرَارٍۢa resting placeqarārinمَّكِينٍۢएक महफ़ूज़ ठिकाने मेंmakīnin١٣
फिर हमने उसे वीर्य बनाकर एक सुरक्षित स्थान1 में रखा।
२३:१४
ثُمَّफिरthummaخَلَقْنَاबनाया हम नेkhalaqnāٱلنُّطْفَةَनुत्फ़े कोl-nuṭ'fataعَلَقَةًۭअल्क़ा/ जमा हुआ ख़ूनʿalaqatanفَخَلَقْنَاफ़िर बनाया हम नेfakhalaqnāٱلْعَلَقَةَजमे हुए ख़ून कोl-ʿalaqataمُضْغَةًۭमुदग़ा/ गोश्त की बेटीmuḍ'ghatanفَخَلَقْنَاफिर बनाया हम नेfakhalaqnāٱلْمُضْغَةَबोटी कोl-muḍ'ghataعِظَـٰمًۭاहड्डियाँʿiẓāmanفَكَسَوْنَاफिर पहनाया हम नेfakasawnāٱلْعِظَـٰمَहड्डियों कोl-ʿiẓāmaلَحْمًۭاगोश्तlaḥmanثُمَّफिरthummaأَنشَأْنَـٰهُउठाया हम ने उसेanshanāhuخَلْقًاमख़्लूक़khalqanءَاخَرَ ۚदूसरीākharaفَتَبَارَكَतो बहुत बाबरकत हैfatabārakaٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَحْسَنُजो सबसे अच्छा हैaḥsanuٱلْخَـٰلِقِينَपैदा करने वालों मेंl-khāliqīna١٤
फिर हमने उस वीर्य को एक जमा हुआ रक्त बनाया, फिर हमने उस जमे हुए रक्त को एक बोटी बनाया, फिर हमने उस बोटी को हड्डियाँ बनाया, फिर हमने उन हड्डियों को कुछ माँस पहनाया, फिर हमने उसे एक अन्य रूप में पैदा कर दिया। तो बहुत बरकत वाला है अल्लाह, जो बनाने वालों में सबसे अच्छा है।
२३:१५
ثُمَّफिरthummaإِنَّكُمबेशक तुमinnakumبَعْدَafterbaʿdaذَٰلِكَबाद इसकेdhālikaلَمَيِّتُونَज़रूर मरने वाले होlamayyitūna١٥
फिर निःसंदेह तुम इसके पश्चात् अवश्य मरने वाले हो।
२३:१६
ثُمَّफिरthummaإِنَّكُمْबेशक तुमinnakumيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiتُبْعَثُونَतुम उठाए जाओगेtub'ʿathūna١٦
फिर निःसंदेह तुम क़ियामत के दिन उठाए जाओगे।
२३:१७
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadخَلَقْنَاबनाए हम नेkhalaqnāفَوْقَكُمْतुम्हारे ऊपरfawqakumسَبْعَसातsabʿaطَرَآئِقَरास्तेṭarāiqaوَمَاऔर नहींwamāكُنَّاहैं हमkunnāعَنِofʿaniٱلْخَلْقِमख़्लूक़ सेl-khalqiغَـٰفِلِينَग़ाफ़िलghāfilīna١٧
और निःसंदेह हमने तुम्हारे ऊपर सात आकाश बनाए और हम कभी सृष्टि से ग़ाफ़िल1 नहीं।
२३:१८
وَأَنزَلْنَاऔर उतारा हम नेwa-anzalnāمِنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiمَآءًۢपानीmāanبِقَدَرٍۢसाथ एक अन्दाज़े केbiqadarinفَأَسْكَنَّـٰهُफिर ठहराया हम ने उसेfa-askannāhuفِىinfīٱلْأَرْضِ ۖज़मीन मेंl-arḍiوَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāعَلَىٰonʿalāذَهَابٍۭले जाने परdhahābinبِهِۦउसेbihiلَقَـٰدِرُونَअलबत्ता क़ादिर हैंlaqādirūna١٨
और हमने आकाश से एक अंदाज़े के साथ कुछ पानी उतारा, फिर उसे धरती में ठहराया और निश्चय हम उसे किसी भी तरह से ले जाने पर सामर्थ्यवान हैं।
२३:१९
فَأَنشَأْنَاफिर पैदा किया हम नेfa-anshanāلَكُمतुम्हारे लिएlakumبِهِۦसाथ उसकेbihiجَنَّـٰتٍۢबाग़ात कोjannātinمِّنof date-palmsminنَّخِيلٍۢखजूरों केnakhīlinوَأَعْنَـٰبٍۢऔर अंगूरों केwa-aʿnābinلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumفِيهَاइन मेंfīhāفَوَٰكِهُफल हैंfawākihuكَثِيرَةٌۭबहुत सेkathīratunوَمِنْهَاऔर इन में सेwamin'hāتَأْكُلُونَतुम खाते होtakulūna١٩
फिर हमने तुम्हारे लिए उस (पानी) के द्वारा खजूरों तथा अंगूरों के बाग़ पैदा किए। तुम्हारे लिए उनमें बहुत-से फल हैं और तुम उन्ही में से खाते हो।
२३:२०
وَشَجَرَةًۭऔर एक दरख़्तwashajaratanتَخْرُجُजो निकलता हैtakhrujuمِنfromminطُورِMount Sinaiṭūriسَيْنَآءَतूरे-सीना सेsaynāaتَنۢبُتُवो उगता हैtanbutuبِٱلدُّهْنِसाथ चिकनाई केbil-duh'niوَصِبْغٍۢऔर सालनwaṣib'ghinلِّلْـَٔاكِلِينَखाने वालों के लिएlil'ākilīna٢٠
तथा वह वृक्ष भी जो 'तूर सैना' (पर्वत) से निकलता है, जो तेल लेकर उगता है तथा खाने वालों के लिए एक तरह का सालन भी।
२३:२१
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفِىinfīٱلْأَنْعَـٰمِमवेशियों मेंl-anʿāmiلَعِبْرَةًۭ ۖअलबत्ता इबरत/ सबक़ हैlaʿib'ratanنُّسْقِيكُمहम पिलाते हैं तुम्हेंnus'qīkumمِّمَّاउस से जोmimmāفِى(is) infīبُطُونِهَاउनके पेटों में हैbuṭūnihāوَلَكُمْऔर तुम्हारे लिएwalakumفِيهَاउन मेंfīhāمَنَـٰفِعُफ़ायदे हैंmanāfiʿuكَثِيرَةٌۭबहुत सेkathīratunوَمِنْهَاऔर उन में सेwamin'hāتَأْكُلُونَतुम खाते होtakulūna٢١
और निःसंदेह तुम्हारे लिए चौपायों में निश्चय बड़ी शिक्षा है। हम तुम्हें उसमें से जो उनके पेटों में1 है, पिलाते हैं। तथा तुम्हारे लिए उनके अंदर बहुत-से लाभ हैं और उनमें से कुछ को तुम खाते हो।
२३:२२
وَعَلَيْهَاऔर उन परwaʿalayhāوَعَلَىand onwaʿalāٱلْفُلْكِऔर कश्तियों परl-ful'kiتُحْمَلُونَतुम सवार किए जाते होtuḥ'malūna٢٢
तथा उनपर और नावों पर तुम सवार किए जाते हो।
२३:२३
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāنُوحًاनूह कोnūḥanإِلَىٰtoilāقَوْمِهِۦतरफ़ उसकी क़ौम केqawmihiفَقَالَतो उसने कहाfaqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaمَاनहींmāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْ(is) anyminإِلَـٰهٍकोई इलाह ( बरहक़)ilāhinغَيْرُهُۥٓ ۖउसके सिवाghayruhuأَفَلَاक्या फिर नहींafalāتَتَّقُونَतुम डरतेtattaqūna٢٣
तथा निःसंदेह हमने नूह़1 को उसकी जाति की ओर भेजा। तो उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम डरते नहीं?
२३:२४
فَقَالَतो कहाfaqālaٱلْمَلَؤُا۟सरदारों नेl-mala-uٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنamongminقَوْمِهِۦउसकी क़ौम में सेqawmihiمَاनहींmāهَـٰذَآयेhādhāإِلَّاमगरillāبَشَرٌۭएक इन्सानbasharunمِّثْلُكُمْतुम्हारे जैसाmith'lukumيُرِيدُजो चाहता हैyurīduأَنकिanيَتَفَضَّلَवो फ़ज़ीलत हासिल कर लेyatafaḍḍalaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumوَلَوْऔर अगरwalawشَآءَचाहताshāaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَأَنزَلَअलबत्ता वो उतारताla-anzalaمَلَـٰٓئِكَةًۭफ़रिश्तेmalāikatanمَّاनहींmāسَمِعْنَاसुना हमनेsamiʿ'nāبِهَـٰذَاइस बात कोbihādhāفِىٓfromfīءَابَآئِنَاअपने आबा ओ अजदाद मेंābāināٱلْأَوَّلِينَपहलेl-awalīna٢٤
तो उनकी जाति के उन प्रमुखों ने कहा, जिन्होंने कुफ़्र किया : यह तो तुम्हारे ही जैसा एक मनुष्य है। जो चाहता है कि तुमपर वरीयता प्राप्त कर ले। और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य कोई फ़रिश्ते उतार देता। हमने यह1 अपने पहले बाप-दादा में नहीं सुना।
२३:२५
إِنْनहींinهُوَवोhuwaإِلَّاमगरillāرَجُلٌۢएक शख़्सrajulunبِهِۦजिस कोbihiجِنَّةٌۭजुनून हैjinnatunفَتَرَبَّصُوا۟तो इन्तज़ार करोfatarabbaṣūبِهِۦसाथ उसकेbihiحَتَّىٰuntilḥattāحِينٍۢएक वक़्त तकḥīnin٢٥
यह तो बस एक उन्मादग्रस्त व्यक्ति है। अतः एक समय तक इसके बारे में प्रतीक्षा करो।
२३:२६
قَالَकहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱنصُرْنِىमदद फ़रमा मेरीunṣur'nīبِمَاउस वजह से जोbimāكَذَّبُونِउन्होंने झुठलाया मुझेkadhabūni٢٦
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी मदद कर, इसलिए कि इन्होंने मुझे झुठलाया है।
२३:२७
فَأَوْحَيْنَآपस वही की हम नेfa-awḥaynāإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiأَنِकिaniٱصْنَعِबनाiṣ'naʿiٱلْفُلْكَकश्तीl-ful'kaبِأَعْيُنِنَاहमारी निगाहों के सामनेbi-aʿyunināوَوَحْيِنَاऔर हमारी वही के मुताबिक़wawaḥyināفَإِذَاफिर जबfa-idhāجَآءَआ जाएjāaأَمْرُنَاहुक्म हमाराamrunāوَفَارَऔर जोश मारेwafāraٱلتَّنُّورُ ۙतन्नूरl-tanūruفَٱسْلُكْतो दाख़िल कर लेfa-us'lukفِيهَاउस मेंfīhāمِنofminكُلٍّۢहर क़िस्म केkullinزَوْجَيْنِजोड़े (नर व मादा)zawjayniٱثْنَيْنِदोनोंith'nayniوَأَهْلَكَऔर अपने अहलो अयाल कोwa-ahlakaإِلَّاमगरillāمَنजोmanسَبَقَपहले हो चुकीsabaqaعَلَيْهِउस परʿalayhiٱلْقَوْلُबातl-qawluمِنْهُمْ ۖउनमें सेmin'humوَلَاऔर नाwalāتُخَـٰطِبْنِىतुम बात करना मुझसेtukhāṭib'nīفِىconcerningfīٱلَّذِينَउनके मामले में जिन्होंनेalladhīnaظَلَمُوٓا۟ ۖज़ुल्म कियाẓalamūإِنَّهُمबेशक वोinnahumمُّغْرَقُونَग़र्क़ किए जाने वाले हैंmugh'raqūna٢٧
तो हमने उसकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की कि हमारी आँखों के सामने और हमारी वह़्य के अनुसार नौका बना। फिर जब हमारा आदेश आ जाए तथा तन्नूर उबल पड़े, तो प्रत्येक जीव का जोड़ा नर और मादा तथा अपने परिवार वालों को उसमें सवार कर ले, उनमें से उसके सिवाय जिसके बारे में पहले निर्णय हो चुका है। और मुझसे उनके बारे में बात न करना, जिन्होंने अत्याचार किया है। निश्चय वे डुबोए जाने वाले हैं।
२३:२८
فَإِذَاफिर जबfa-idhāٱسْتَوَيْتَसवार हो जाओ तुमis'tawaytaأَنتَतुमantaوَمَنऔर जोwamanمَّعَكَतुम्हारे साथ हैंmaʿakaعَلَى[on]ʿalāٱلْفُلْكِकश्ती परl-ful'kiفَقُلِतो कहनाfaquliٱلْحَمْدُसब तारीफ़l-ḥamduلِلَّهِअल्लाह के लिए हैlillahiٱلَّذِىजिस नेalladhīنَجَّىٰنَاनिजात दी हमेंnajjānāمِنَfromminaٱلْقَوْمِउन लोगों सेl-qawmiٱلظَّـٰلِمِينَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimīna٢٨
फिर जब तू और जो तेरे साथ हैं, नाव पर बैठ जाओ, तो कह : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें अत्याचारी लोगों से छुटकारा दिया।
२३:२९
وَقُلऔर कहनाwaqulرَّبِّऐ मेरे रबrabbiأَنزِلْنِىउतार मुझेanzil'nīمُنزَلًۭاउतारने की जगहmunzalanمُّبَارَكًۭاबाबरकतmubārakanوَأَنتَऔर तूwa-antaخَيْرُबेहतर हैkhayruٱلْمُنزِلِينَसब उतारने वालों सेl-munzilīna٢٩
तथा तू कह : ऐ मेरे पालनहार! मुझे बरकत वाली जगह उतार और तू सब उतारने वालों से उत्तम है।
२३:३०
إِنَّबेशकinnaفِىinfīذَٰلِكَइस मेंdhālikaلَـَٔايَـٰتٍۢअलबत्ता निशानियाँ हैंlaāyātinوَإِنऔर बेशकwa-inكُنَّاहैं हमkunnāلَمُبْتَلِينَअलबत्ता आज़माने वालेlamub'talīna٣٠
निःसंदेह इसमें निश्चय कई निशानियाँ हैं तथा निःसंदेह हम निश्चय परीक्षा लेने वाले1 हैं।
२३:३१
ثُمَّफिरthummaأَنشَأْنَاउठाए हमनेanshanāمِنۢafter themminبَعْدِهِمْबाद उनकेbaʿdihimقَرْنًاलोगqarnanءَاخَرِينَदूसरेākharīna٣١
फिर हमने उनके पश्चात् दूसरे समुदाय को पैदा किया।
२३:३२
فَأَرْسَلْنَاतो भेजा हमनेfa-arsalnāفِيهِمْउन मेंfīhimرَسُولًۭاएक रसूलrasūlanمِّنْهُمْउन्हीं में सेmin'humأَنِकिaniٱعْبُدُوا۟इबादत करोuʿ'budūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaمَاनहींmāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنْ(is) anyminإِلَـٰهٍकोई इलाह( बरहक़)ilāhinغَيْرُهُۥٓ ۖउसके सिवाghayruhuأَفَلَاक्या फिर नहींafalāتَتَّقُونَतुम डरतेtattaqūna٣٢
फिर हमने उनके अंदर उन्हीं में से एक रसूल भेजा कि अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम डरते नहीं?
२३:३३
وَقَالَऔर कहाwaqālaٱلْمَلَأُसरदारों नेl-mala-uمِنofminقَوْمِهِउस की क़ौम सेqawmihiٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَكَذَّبُوا۟और झुठलायाwakadhabūبِلِقَآءِमुलाक़ात कोbiliqāiٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत कीl-ākhiratiوَأَتْرَفْنَـٰهُمْऔर ख़ुशहाली दी हमने उन्हेंwa-atrafnāhumفِىinfīٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी मेंl-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāمَاनहींmāهَـٰذَآयेhādhāإِلَّاमगरillāبَشَرٌۭएक इन्सानbasharunمِّثْلُكُمْतुम्हारे जैसाmith'lukumيَأْكُلُवो खाता हैyakuluمِمَّاउस से जोmimmāتَأْكُلُونَतुम खाते होtakulūnaمِنْهُजिससेmin'huوَيَشْرَبُऔर वो पीता हैwayashrabuمِمَّاउस से जोmimmāتَشْرَبُونَतुम पीते होtashrabūna٣٣
और उसकी जाति के उन प्रमुखों ने, जिन्होंने कुफ़्र किया और आख़िरत की भेंट को झुठलाया, तथा हमने उन्हें सांसारिक जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान कर रखी थी, कहा : यह तो बस तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है। जो उसमें से खाता है, जिसमें से तुम खाते हो और उसमें से पीता है, जो तुम पीते हो।
२३:३४
وَلَئِنْऔर अलबत्ता अगरwala-inأَطَعْتُمइताअत की तुम नेaṭaʿtumبَشَرًۭاएक इन्सान कीbasharanمِّثْلَكُمْअपने जैसेmith'lakumإِنَّكُمْयक़ीनन तुमinnakumإِذًۭاतब होगेidhanلَّخَـٰسِرُونَअलबत्ता ख़सारा पाने वालेlakhāsirūna٣٤
और निःसंदेह यदि तुमने अपने ही जैसे एक मनुष्य का कहना मान लिया, तो निश्चय तुम उस समय अवश्य घाटा उठाने वाले होगे।
२३:३५
أَيَعِدُكُمْक्या वो वादा देता है तुम्हेंayaʿidukumأَنَّكُمْकि बेशक तुमannakumإِذَاजबidhāمِتُّمْमर जाओगे तुमmittumوَكُنتُمْऔर हो जाओगे तुमwakuntumتُرَابًۭاमिट्टीturābanوَعِظَـٰمًاऔर हड्डियाँwaʿiẓāmanأَنَّكُمबेशक तुमannakumمُّخْرَجُونَनिकाले जाने वाले होmukh'rajūna٣٥
क्या यह तुमसे वादा करता है कि जब तुम मर गए और धूल तथा हड्डियाँ बन गए, तो तुम निकाले जाने वाले हो?
२३:३६
۞ هَيْهَاتَबहुत दूर हैhayhātaهَيْهَاتَबहुत दूर हैhayhātaلِمَاवो जोlimāتُوعَدُونَतुम वादा दिए जा रहे होtūʿadūna٣٦
दूरी है, दूरी है उसके लिए जिसका तुमसे वादा किया जाता है।
२३:३७
إِنْनहींinهِىَयेhiyaإِلَّاमगरillāحَيَاتُنَاज़िन्दगी हमारीḥayātunāٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāنَمُوتُहम मरते हैंnamūtuوَنَحْيَاऔर हम जीते हैंwanaḥyāوَمَاऔर नहींwamāنَحْنُहमnaḥnuبِمَبْعُوثِينَउठाए जाने वालेbimabʿūthīna٣٧
यह (जीवन) तो बस हमारा सांसारिक जीवन है। हम (यहीं) मरते और जीते हैं। और हम कभी उठाए जाने वाले नहीं।
२३:३८
إِنْनहींinهُوَवोhuwaإِلَّاमगरillāرَجُلٌएक मर्दrajulunٱفْتَرَىٰउसने गढ़ लियाif'tarāعَلَىaboutʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiكَذِبًۭاझूठkadhibanوَمَاऔर नहींwamāنَحْنُहमnaḥnuلَهُۥउसेlahuبِمُؤْمِنِينَमानने वालेbimu'minīna٣٨
यह तो बस एक व्यक्ति है, जिसने अल्लाह पर एक झूठ गढ़ लिया है और हम कदापि उसे मानने वाले नहीं हैं।
२३:३९
قَالَकहाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱنصُرْنِىमदद कर मेरीunṣur'nīبِمَاबवजह उसके जोbimāكَذَّبُونِउन्होंने झुठलाया मुझेkadhabūni٣٩
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी मदद कर, इसलिए कि इन्होंने मुझे झुठलाया है।
२३:४०
قَالَकहाqālaعَمَّاइस(मुद्दत) में जोʿammāقَلِيلٍۢथोड़ी हैqalīlinلَّيُصْبِحُنَّअलबत्ता वो ज़रूर हो जाऐंगेlayuṣ'biḥunnaنَـٰدِمِينَनादिमnādimīna٤٠
(अल्लाह ने) कहा : बहुत ही कम समय में ये अवश्य पछताएँगे।
२३:४१
فَأَخَذَتْهُمُतो पकड़ लिया उन्हेंfa-akhadhathumuٱلصَّيْحَةُचिंघाड़ नेl-ṣayḥatuبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiفَجَعَلْنَـٰهُمْतो कर दिया हमने उन्हेंfajaʿalnāhumغُثَآءًۭ ۚकूड़ा-करकटghuthāanفَبُعْدًۭاतो दूरी हैfabuʿ'danلِّلْقَوْمِउन लोगों के लिएlil'qawmiٱلظَّـٰلِمِينَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimīna٤١
अन्ततः उन्हें चीख़ ने सत्य के साथ आ पकड़ा। तो हमने उन्हें कूड़ा-कर्कट बना दिया। तो दूरी हो अत्याचारियों के लिए।
२३:४२
ثُمَّफिरthummaأَنشَأْنَاउठाईं हमनेanshanāمِنۢafter themminبَعْدِهِمْउनके बादbaʿdihimقُرُونًاक़ौमेंqurūnanءَاخَرِينَदूसरीākharīna٤٢
फिर हमने उनके पश्चात् कई और युग के लोगों को पैदा किया।
२३:४३
مَاनाmāتَسْبِقُआगे बढ़ सकती हैtasbiquمِنْanyminأُمَّةٍकोई उम्मतummatinأَجَلَهَاअपने मुक़र्रर वक़्त सेajalahāوَمَاऔर नाwamāيَسْتَـْٔخِرُونَवो पीछे रह सकतीyastakhirūna٤٣
कोई समुदाय अपने निश्चित समय से न आगे बढ़ता है और न वे पीछे रहते हैं।1
२३:४४
ثُمَّफिरthummaأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāرُسُلَنَاअपने रसूलों कोrusulanāتَتْرَا ۖपै- दर- पैtatrāكُلَّEvery timekullaمَاजब कभीmāجَآءَआयाjāaأُمَّةًۭकिसी उम्मत मेंummatanرَّسُولُهَاरसूल उसकाrasūluhāكَذَّبُوهُ ۚउन्होंने झुठला दिया उसेkadhabūhuفَأَتْبَعْنَاतो पीछे लाए हमfa-atbaʿnāبَعْضَهُمउनके बाज़ कोbaʿḍahumبَعْضًۭاबाज़ केbaʿḍanوَجَعَلْنَـٰهُمْऔर बना दिया हमने उन्हेंwajaʿalnāhumأَحَادِيثَ ۚक़िस्से कहानियाँaḥādīthaفَبُعْدًۭاतो दूरी हैfabuʿ'danلِّقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminلَّاnotlāيُؤْمِنُونَजो नहीं ईमान लातेyu'minūna٤٤
फिर हमने अपने रसूल निरंतर भेजे। जब कभी किसी समुदाय के पास उसका रसूल आया, तो उसके लोगों ने उसे झुठला दिया। तो हमने उनमें से कुछ को कुछ के पीछे चलता किया1 और उन्हें कहानियाँ बना दिया। तो दूरी हो उन लोगों के लिए, जो ईमान नहीं लाते।
२३:४५
ثُمَّफिरthummaأَرْسَلْنَاभेजा हमनेarsalnāمُوسَىٰमूसा कोmūsāوَأَخَاهُऔर उसके भाईwa-akhāhuهَـٰرُونَहारून कोhārūnaبِـَٔايَـٰتِنَاसाथ अपनी निशानियों केbiāyātināوَسُلْطَـٰنٍۢऔर दलीलwasul'ṭāninمُّبِينٍवाज़ेह केmubīnin٤٥
फिर हमने मूसा तथा उसके भाई हारून को अपनी निशानियों तथा स्पष्ट तर्क के साथ भेजा।
२३:४६
إِلَىٰToilāفِرْعَوْنَतरफ़ फ़िरऔनfir'ʿawnaوَمَلَإِي۟هِۦऔर उसके सरदारों केwamala-ihiفَٱسْتَكْبَرُوا۟तो उन्होंने तकब्बुर कियाfa-is'takbarūوَكَانُوا۟और थे वोwakānūقَوْمًاलोगqawmanعَالِينَसरकशʿālīna٤٦
फ़िरऔन और उसके सरदारों की ओर। तो उन्होंने घमंड किया और वे सरकश लोग थे।
२३:४७
فَقَالُوٓا۟तो वो कहने लगेfaqālūأَنُؤْمِنُक्या हम ईमान लाऐंanu'minuلِبَشَرَيْنِदो इन्सानों परlibasharayniمِثْلِنَاअपने जैसेmith'lināوَقَوْمُهُمَاऔर क़ौम उन दोनों कीwaqawmuhumāلَنَاहमारे लिएlanāعَـٰبِدُونَताबेअदार हैʿābidūna٤٧
उन्होंने कहा : क्या हम अपने जैसे दो व्यक्तियों पर ईमान ले आएँ , जबकि उनके लोग हमारे दास हैं?
२३:४८
فَكَذَّبُوهُمَاतो उन्होंने झुठला दिया उन दोनों कोfakadhabūhumāفَكَانُوا۟तो हो गए वोfakānūمِنَofminaٱلْمُهْلَكِينَहलाक होने वालों में सेl-muh'lakīna٤٨
तो उन्होंने दोनों को झुठला दिया, तो वे विनष्ट किए गए लोगों में से हो गए।
२३:४९
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadءَاتَيْنَاदी हमनेātaynāمُوسَىमूसा कोmūsāٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaلَعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيَهْتَدُونَवो हिदायत पाऐंyahtadūna٤٩
और निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक1 प्रदान की, ताकि वे (लोग) मार्गदर्शन पा जाएँ।
२३:५०
وَجَعَلْنَاऔर बनाया हमनेwajaʿalnāٱبْنَ(the) sonib'naمَرْيَمَइब्ने मरियमmaryamaوَأُمَّهُۥٓऔर उसकी माँ कोwa-ummahuءَايَةًۭएक निशानीāyatanوَءَاوَيْنَـٰهُمَآऔर पनाह दी हमने उन दोनों कोwaāwaynāhumāإِلَىٰtoilāرَبْوَةٍۢतरफ़ बुलन्द जगह केrabwatinذَاتِof tranquilitydhātiقَرَارٍۢक़रार/सुकून वालीqarārinوَمَعِينٍۢऔर बहते चश्मे वालीwamaʿīnin٥٠
और हमने मरयम के पुत्र (ईसा) तथा उसकी माँ को महान निशानी बनाया तथा दोनों को एक ऊँची भूमि1 पर ठिकाना दिया, जो रहने के योग्य तथा प्रवाहित पानी वाली थी।
२३:५१
يَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلرُّسُلُपैग़म्बरोl-rusuluكُلُوا۟खाओkulūمِنَofminaٱلطَّيِّبَـٰتِपाकीज़ा चीज़ों में सेl-ṭayibātiوَٱعْمَلُوا۟और अमल करोwa-iʿ'malūصَـٰلِحًا ۖनेकṣāliḥanإِنِّىबेशक मैंinnīبِمَاउसे जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaعَلِيمٌۭख़ूब जानने वाला हूँʿalīmun٥١
ऐ रसूलो! पाक चीज़ों1 में से खाओ तथा अच्छे कर्म करो। निश्चय मैं उससे भली-भाँति अवगत हूँ, जो तुम करते हो।
२३:५२
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaهَـٰذِهِۦٓयेhādhihiأُمَّتُكُمْउम्मत तुम्हारीummatukumأُمَّةًۭउम्मत हैummatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanوَأَنَا۠और मैंwa-anāرَبُّكُمْरब हूँ तुम्हाराrabbukumفَٱتَّقُونِपस डरो मुझ सेfa-ittaqūni٥٢
और निःसंदेह यह तुम्हारा समुदाय (धर्म) एक ही समुदाय (धर्म) है और मैं तुम सबका पालनहार (पूज्य) हूँ। अतः मुझसे डरो।
२३:५३
فَتَقَطَّعُوٓا۟तो उन्होंने जुदा-जुदा कर लियाfataqaṭṭaʿūأَمْرَهُمमामला अपनाamrahumبَيْنَهُمْआपस मेंbaynahumزُبُرًۭا ۖटुकड़े-टुकड़े करकेzuburanكُلُّeachkulluحِزْبٍۭहर फ़रीक़/ गिरोह( के लोग)ḥiz'binبِمَاउस पर जोbimāلَدَيْهِمْउनके पास हैladayhimفَرِحُونَख़ुश हैंfariḥūna٥٣
फिर वे अपने मामले (धर्म) में परस्पर कई समूहों में विभाजित होकर टुकड़े-टुकड़े हो गए। प्रत्येक समूह के लोग उसी पर खुश हैं, जो उनके पास1 है।
२३:५४
فَذَرْهُمْतो छोड़ दीजिए उन्हेंfadharhumفِىinfīغَمْرَتِهِمْउनकी ग़फ़्लत मेंghamratihimحَتَّىٰuntilḥattāحِينٍएक वक़्त तकḥīnin٥٤
अतः (ऐ नबी!) आप उन्हें एक समय तक उनकी अचेतना में छोड़ दें।
२३:५५
أَيَحْسَبُونَक्या वो समझते हैंayaḥsabūnaأَنَّمَاकि बेशकannamāنُمِدُّهُمजो हम मदद दे रहे हैं उन्हेंnumidduhumبِهِۦसाथ किसी भी(चीज़) केbihiمِنofminمَّالٍۢमाल सेmālinوَبَنِينَऔर बेटों सेwabanīna٥٥
क्या वे समझते हैं कि हम धन और संतान में से जिन चीज़ों के साथ उनकी सहायता कर रहे हैं।
२३:५६
نُسَارِعُकि हम जल्दी कर रहे हैंnusāriʿuلَهُمْउनके लिएlahumفِىinfīٱلْخَيْرَٰتِ ۚभलाइयों मेंl-khayrātiبَلबल्किbalلَّاnotlāيَشْعُرُونَनहीं वो शऊर रखतेyashʿurūna٥٦
हम उन्हें भलाइयाँ देने में जल्दी कर रहे हैं? बल्कि वे नहीं समझते।1
२३:५७
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaهُمवोhumمِّنْfromminخَشْيَةِख़ौफ़ सेkhashyatiرَبِّهِمअपने रब केrabbihimمُّشْفِقُونَडरने वाले हैंmush'fiqūna٥٧
निःसंदेह वे लोग जो अपने पालनहार के भय से डरने वाले हैं।
२३:५८
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaهُمवोhumبِـَٔايَـٰتِआयात परbiāyātiرَبِّهِمْअपने रब कीrabbihimيُؤْمِنُونَवो ईमान लाते हैंyu'minūna٥٨
और वे जो अपने पालनहार की आयतों पर ईमान रखते हैं।
२३:५९
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaهُمवोhumبِرَبِّهِمْअपने रब के साथbirabbihimلَا(do) notlāيُشْرِكُونَनहीं वो शरीक करतेyush'rikūna٥٩
और वे जो अपने पालनहार का साझी नहीं बनाते।
२३:६०
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaيُؤْتُونَदेते हैंyu'tūnaمَآजो कुछmāءَاتَوا۟वो देते हैंātawوَّقُلُوبُهُمْजब कि दिल उनकेwaqulūbuhumوَجِلَةٌलरज़ते हैंwajilatunأَنَّهُمْकि बेशक वोannahumإِلَىٰtoilāرَبِّهِمْतरफ़ अपने रब केrabbihimرَٰجِعُونَलौटने वाले हैंrājiʿūna٦٠
और वे लोग कि जो कुछ भी दें, इस हाल में देते हैं कि उनके दिल डरने वाले होते हैं कि वे अपने पालनहार ही की ओर लौटने वाले हैं।
२३:६१
أُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaيُسَـٰرِعُونَजो जल्दी करते हैंyusāriʿūnaفِىinfīٱلْخَيْرَٰتِभलाइयों मेंl-khayrātiوَهُمْऔर वो हीwahumلَهَاउनके लिएlahāسَـٰبِقُونَसबक़त करने वाले हैंsābiqūna٦١
यही लोग हैं, जो भलाइयों में जल्दी करते हैं और यही लोग उनकी तरफ़ आगे बढ़ने वाले हैं।
२३:६२
وَلَاऔर नहींwalāنُكَلِّفُहम तकलीफ़ देतेnukallifuنَفْسًاकिसी नफ़्स कोnafsanإِلَّاमगरillāوُسْعَهَا ۖउसकी वुसअत के मुताबिक़wus'ʿahāوَلَدَيْنَاऔर हमारे पासwaladaynāكِتَـٰبٌۭएक किताब हैkitābunيَنطِقُजो बोलती हैyanṭiquبِٱلْحَقِّ ۚसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَهُمْऔर वोwahumلَا(will) notlāيُظْلَمُونَना वो ज़ुल्म किए जाऐंगेyuẓ'lamūna٦٢
और हम किसी प्राणी पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालते। तथा हमारे पास एक पुस्तक है, जो सत्य के साथ बोलती है। और उनपर अत्याचार नहीं किया1 जाएगा।
२३:६३
بَلْबल्किbalقُلُوبُهُمْदिल उनकेqulūbuhumفِى(are) infīغَمْرَةٍۢग़फ़्लत में हैंghamratinمِّنْoverminهَـٰذَاउस सेhādhāوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumأَعْمَـٰلٌۭकई आमाल हैंaʿmālunمِّنbesidesminدُونِअलावाdūniذَٰلِكَउसकेdhālikaهُمْवोhumلَهَاउन्हेंlahāعَـٰمِلُونَकरने वाले हैंʿāmilūna٦٣
बल्कि उनके दिल इससे अचेत हैं तथा इसके सिवा भी उनके कई काम हैं। वे उन्हीं को करने वाले हैं।
२३:६४
حَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَآजबidhāأَخَذْنَاपकड़ेंगे हमakhadhnāمُتْرَفِيهِمउनके ख़ुशहाल लोगों कोmut'rafīhimبِٱلْعَذَابِसाथ अज़ाब केbil-ʿadhābiإِذَاतब यकायकidhāهُمْवोhumيَجْـَٔرُونَवो चिल्लाने लगेंगेyajarūna٦٤
यहाँ तक कि जब हम उनके सुखी लोगों को यातना में पकड़ेंगे, तो वे बिलबिलाने लगेंगे।
२३:६५
لَا(Do) notlāتَجْـَٔرُوا۟ना तुम चिल्लाओtajarūٱلْيَوْمَ ۖआजl-yawmaإِنَّكُمबेशक तुमinnakumمِّنَّاहमसेminnāلَاnotlāتُنصَرُونَना तुम मदद किए जाओगेtunṣarūna٦٥
आज मत बिलबिलाओ। निःसंदेह तुम्हें हमारी ओर से कोई सहायता नहीं मिलेगी।
२३:६६
قَدْतहक़ीक़qadكَانَتْथींkānatءَايَـٰتِىमोरी आयातāyātīتُتْلَىٰपढ़ी जातींtut'lāعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumفَكُنتُمْतो थे तुमfakuntumعَلَىٰٓ(to) onʿalāأَعْقَـٰبِكُمْअपनी एड़ियों परaʿqābikumتَنكِصُونَतुम फिर जातेtankiṣūna٦٦
निःसंदेह मेरी आयतें तुम्हें सुनाई जाती थीं, तो तुम अपनी एड़ियों के बल फिर जाया करते थे।
२३:६७
مُسْتَكْبِرِينَतकब्बुर करते हुएmus'takbirīnaبِهِۦसाथ उसकेbihiسَـٰمِرًۭاरात को बातें करते हुएsāmiranتَهْجُرُونَतुम बेहूदा गोई करते थेtahjurūna٦٧
अभिमान करते हुए, रात को बातें करते हुए उसके बारे में अनर्थ बकते थे।
२३:६८
أَفَلَمْक्या भला नहींafalamيَدَّبَّرُوا۟उन्होंने ग़ौरो फ़िक्र कियाyaddabbarūٱلْقَوْلَकलाम मेंl-qawlaأَمْयाamجَآءَهُمआया है उनके पासjāahumمَّاजोmāلَمْनहींlamيَأْتِआयाyatiءَابَآءَهُمُउनके आबा ओ अजदाद के पासābāahumuٱلْأَوَّلِينَपहलेl-awalīna٦٨
तो क्या उन्होंने इस वाणी (क़ुरआन) पर विचार नहीं किया, अथवा उनके पास वह चीज़1 आई है, जो उनके पहले बाप-दादा के पास नहीं आई?
२३:६९
أَمْयाamلَمْनहींlamيَعْرِفُوا۟उन्होंने पहचानाyaʿrifūرَسُولَهُمْअपने रसूल कोrasūlahumفَهُمْतो वोfahumلَهُۥउसकेlahuمُنكِرُونَइन्कारी हैंmunkirūna٦٩
या उन्होंने अपने रसूल को नहीं पहचाना, इस कारण वे उसका इनकार कर रहे1 हैं?
२३:७०
أَمْयाamيَقُولُونَवो कहते हैंyaqūlūnaبِهِۦउसेbihiجِنَّةٌۢ ۚजुनून हैjinnatunبَلْबल्किbalجَآءَهُمवो लाया है उनके पासjāahumبِٱلْحَقِّहक़bil-ḥaqiوَأَكْثَرُهُمْऔर अक्सर उनकेwa-aktharuhumلِلْحَقِّहक़ कोlil'ḥaqqiكَـٰرِهُونَनापसंद करने वाले हैंkārihūna٧٠
या वे कहते हैं कि उसे कोई पागलपन हैं। बल्कि वह तो उनके पास सत्य लेकर आए हैं और उनमें से अधिकांश लोग सत्य को बुरा जानने वाले हैं।
२३:७१
وَلَوِऔर अगरwalawiٱتَّبَعَपैरवी करताittabaʿaٱلْحَقُّहक़l-ḥaquأَهْوَآءَهُمْउनकी ख़्वाहिशात कीahwāahumلَفَسَدَتِअलबत्ता बिगड़ जातेlafasadatiٱلسَّمَـٰوَٰتُआसमानl-samāwātuوَٱلْأَرْضُऔर ज़मीनwal-arḍuوَمَنऔर जो कोईwamanفِيهِنَّ ۚउनमें हैfīhinnaبَلْबल्किbalأَتَيْنَـٰهُمलाए हैं हम उनके पासataynāhumبِذِكْرِهِمْज़िक्र उनकाbidhik'rihimفَهُمْतो वोfahumعَنfromʿanذِكْرِهِمअपने ही ज़िक्र सेdhik'rihimمُّعْرِضُونَमुँह मोड़ने वाले हैंmuʿ'riḍūna٧١
और यदि सत्य उनकी इच्छाओं के पीछे चले, तो निश्चय सब आकाश और धरती और जो कोई उनमें है, सब बिगड़ जाएँ। बल्कि हम उनके पास उनकी नसीह़त लेकर आए हैं। ते वे अपनी नसीह़त से मुँह मोड़ने वाले हैं।
२३:७२
أَمْयाamتَسْـَٔلُهُمْआप सवाल करते हैं उनसेtasaluhumخَرْجًۭاमाल/अदायगी काkharjanفَخَرَاجُतो ख़िराज/अजरो सवाबfakharājuرَبِّكَआपके रब काrabbikaخَيْرٌۭ ۖबेहतर हैkhayrunوَهُوَऔर वोwahuwaخَيْرُबेहतर हैkhayruٱلرَّٰزِقِينَसब रिज़्क़ देने वालों सेl-rāziqīna٧٢
(ऐ नबी!) क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक माँग रहे हैं? तो आपके पालनहार का पारिश्रमिक उत्तम है और वह सब रोज़ी देने वालों से उत्तम है।
२३:७३
وَإِنَّكَऔर बेशक आपwa-innakaلَتَدْعُوهُمْअलबत्ता आप बुलाते हैं उन्हेंlatadʿūhumإِلَىٰtoilāصِرَٰطٍۢतरफ़ रास्तेṣirāṭinمُّسْتَقِيمٍۢसीधे केmus'taqīmin٧٣
निःसंदेह आप तो उन्हें सीधे रास्ते की ओर बुलाते हैं।
२३:७४
وَإِنَّऔर बेशकwa-innaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaلَا(do) notlāيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūnaبِٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत परbil-ākhiratiعَنِfromʿaniٱلصِّرَٰطِरास्ते सेl-ṣirāṭiلَنَـٰكِبُونَअलबत्ता हट जाने वाले हैंlanākibūna٧٤
और निःसंदेह जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे सीधे रास्ते से हटने वाले हैं।
२३:७५
۞ وَلَوْऔर अगरwalawرَحِمْنَـٰهُمْरहम करें हम उन परraḥim'nāhumوَكَشَفْنَاऔर खोल दें हमwakashafnāمَاजोmāبِهِمउन्हें हैbihimمِّنofminضُرٍّۢतकलीफ़ में सेḍurrinلَّلَجُّوا۟अलबत्ता वो अड़े रहेंगेlalajjūفِىinfīطُغْيَـٰنِهِمْअपनी सरकशी मेंṭugh'yānihimيَعْمَهُونَभटकते हुएyaʿmahūna٧٥
और यदि हम उनपर दया करें और जिस कष्ट1 से वे पीड़ित हैं, उसे दूर कर दें, तो भी वे निश्चय अपनी सरकशी में दृढ़ता से बने रहेंगे इस हाल में कि भटक रहे होंगे।
२३:७६
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَخَذْنَـٰهُمपकड़ लिया हमने उन्हेंakhadhnāhumبِٱلْعَذَابِसाथ अज़ाब केbil-ʿadhābiفَمَاपस नाfamāٱسْتَكَانُوا۟उन्होंने आजिज़ी कीis'takānūلِرَبِّهِمْअपने रब के लिएlirabbihimوَمَاऔर नाwamāيَتَضَرَّعُونَवो गिड़गिड़ाएyataḍarraʿūna٧٦
और निःसंदेह हमने उन्हें यातना में (भी) पकड़ा। फिर भी वे न अपने पालनहार के आगे झुके और न गिड़गिड़ाते थे।
२३:७७
حَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāفَتَحْنَاखोल दिया हमनेfataḥnāعَلَيْهِمउन परʿalayhimبَابًۭاदरवाज़ाbābanذَاof a punishmentdhāعَذَابٍۢof a punishmentʿadhābinشَدِيدٍसख़्त अज़ाब वालाshadīdinإِذَاयकायकidhāهُمْवोhumفِيهِउसमेंfīhiمُبْلِسُونَमायूस होने वाले थेmub'lisūna٧٧
यहाँ तक कि जब हमने उनपर कोई कठोर यातना1 वाला द्वार खोल दिया, तो तुरंत वे उसमें निराश हो गए।2
२३:७८
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىٓजिसनेalladhīأَنشَأَपैदा किएansha-aلَكُمُतुम्हारे लिएlakumuٱلسَّمْعَकानl-samʿaوَٱلْأَبْصَـٰرَऔर आँखेंwal-abṣāraوَٱلْأَفْـِٔدَةَ ۚऔर दिलwal-afidataقَلِيلًۭاlittleqalīlanمَّاकितना कमmāتَشْكُرُونَतुम शुक्र अदा करते होtashkurūna٧٨
और वही है, जिसने तुम्हारे लिए कान तथा आँखें और दिल बनाए।1 तुम बहुत कम आभार प्रकट करते हो।
२३:७९
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजिसनेalladhīذَرَأَكُمْफैला दिया तुम्हेंdhara-akumفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसी केwa-ilayhiتُحْشَرُونَतुम इकट्ठे किए जाओगेtuḥ'sharūna٧٩
और वही है, जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और उसी की ओर तुम एकत्र किए जाओगे।
२३:८०
وَهُوَऔर वो ही हैwahuwaٱلَّذِىजोalladhīيُحْىِۦज़िन्दा करता हैyuḥ'yīوَيُمِيتُऔर वो मौत देता हैwayumītuوَلَهُऔर उसी के लिए हैwalahuٱخْتِلَـٰفُआगे पीछे आनाikh'tilāfuٱلَّيْلِरातal-layliوَٱلنَّهَارِ ۚऔर दिन काwal-nahāriأَفَلَاक्या फिर नहींafalāتَعْقِلُونَतुम अक़्ल से काम लेतेtaʿqilūna٨٠
तथा वही है, जो जीवित करता और मारता है और उसी के अधिकार में रात और दिन का बदलना है। तो क्या तुम नहीं समझते?
२३:८१
بَلْबल्किbalقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūمِثْلَमानिन्दmith'laمَاउसके जोmāقَالَकहा थाqālaٱلْأَوَّلُونَपहलों नेl-awalūna٨١
बल्कि उन्होंने वही बात कही, जो अगलों ने कही थी।
२३:८२
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūأَءِذَاक्या जबa-idhāمِتْنَاमर जाऐंगे हमmit'nāوَكُنَّاऔर हो जाऐंगे हमwakunnāتُرَابًۭاमिट्टीturābanوَعِظَـٰمًاऔर हड्डियाँwaʿiẓāmanأَءِنَّاक्या वाक़ई हमa-innāلَمَبْعُوثُونَअलबत्ता उठाए जाने वाले हैंlamabʿūthūna٨٢
उन्होंने कहा : क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
२३:८३
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadوُعِدْنَاवादा किए गए हमwuʿid'nāنَحْنُहमnaḥnuوَءَابَآؤُنَاऔर आबा ओ अजदाद हमारेwaābāunāهَـٰذَاइसकाhādhāمِنbeforeminقَبْلُइससे क़ब्लqabluإِنْनहींinهَـٰذَآयेhādhāإِلَّآमगरillāأَسَـٰطِيرُकहानियाँasāṭīruٱلْأَوَّلِينَपहलों कीl-awalīna٨٣
निःसंदेह यही वादा हमसे और इससे पहले हमारे बाप-दादा से किया गया। यह तो पहले लोगों की कहानियों के सिवा कुछ नहीं।
२३:८४
قُلकह दीजिएqulلِّمَنِकिस के लिए हैlimaniٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuوَمَنऔर जो कुछwamanفِيهَآइसमें हैfīhāإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumتَعْلَمُونَतु जानतेtaʿlamūna٨٤
(ऐ नबी!) उनसे कह दें : यह धरती और इसमें जो कोई भी है किसका है, यदि तुम जानते हो?
२३:८५
سَيَقُولُونَअनक़रीब वो कहेंगेsayaqūlūnaلِلَّهِ ۚअल्लाह ही के लिएlillahiقُلْकह दीजिएqulأَفَلَاक्या फिर नहींafalāتَذَكَّرُونَतुम नसीहत पकड़तेtadhakkarūna٨٥
वे कहेंगे : अल्लाह का है। आप कह दें : फिर क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?
२३:८६
قُلْकह दीजिएqulمَنकौनmanرَّبُّरब हैrabbuٱلسَّمَـٰوَٰتِ(of) the seven heavensl-samāwātiٱلسَّبْعِसात आसमानों काl-sabʿiوَرَبُّऔर रब हैwarabbuٱلْعَرْشِअर्शेl-ʿarshiٱلْعَظِيمِअज़ीम काl-ʿaẓīmi٨٦
आप पूछिए : सातों आकाशों का स्वामी तथा महान सिंहासन (अर्श) का स्वामी कौन है?
२३:८७
سَيَقُولُونَअनक़रीब वो कहेंगेsayaqūlūnaلِلَّهِ ۚअल्लाह ही के लिएlillahiقُلْकह दीजिएqulأَفَلَاक्या भला नहींafalāتَتَّقُونَतुम डरतेtattaqūna٨٧
वे कहेंगे : अल्लाह ही के लिए है। आप कह दें : फिर क्या तुम डरते नहीं?
२३:८८
قُلْकह दीजिएqulمَنۢकौन हैmanبِيَدِهِۦजिसके हाथ में हैbiyadihiمَلَكُوتُबादशाहतmalakūtuكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ कीshayinوَهُوَऔर वोwahuwaيُجِيرُवो पनाह देता हैyujīruوَلَاऔर नहींwalāيُجَارُपनाह दी जा सकतीyujāruعَلَيْهِउसके ख़िलाफ़ʿalayhiإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumتَعْلَمُونَतुम इल्म रखतेtaʿlamūna٨٨
आप उनसे कहिए : कौन है जिसके हाथ में हर चीज़ का अधिकार और वह शरण देता है और उसके मुक़ाबले में शरण नहीं दी जाती, यदि तुम जानते हो (तो बताओ)?
२३:८९
سَيَقُولُونَअनक़रीब वो कहेंगेsayaqūlūnaلِلَّهِ ۚअल्लाह ही के लिएlillahiقُلْकह दीजिएqulفَأَنَّىٰतो कहाँ सेfa-annāتُسْحَرُونَतुम मसहूर किए जाते होtus'ḥarūna٨٩
वे बोल पड़ेंगे : अल्लाह के लिए है। आप कहिए : फिर तुम कहाँ से जादू1 किए जाते हो?
२३:९०
بَلْबल्किbalأَتَيْنَـٰهُمहम लाए हैं उनके पासataynāhumبِٱلْحَقِّहक़ कोbil-ḥaqiوَإِنَّهُمْऔर बेशक वोwa-innahumلَكَـٰذِبُونَअलबत्ता झूठे हैंlakādhibūna٩٠
बल्कि हम उनके पास पूर्ण सत्य लाए हैं और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।
२३:९१
مَاनहींmāٱتَّخَذَबनाईittakhadhaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِنanyminوَلَدٍۢकोई औलादwaladinوَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuمِنْanyminإِلَـٰهٍ ۚकोई इलाहilāhinإِذًۭاतबidhanلَّذَهَبَअलबत्ता ले जाताladhahabaكُلُّहरkulluإِلَـٰهٍۭइलाहilāhinبِمَاउसे जोbimāخَلَقَउसने पैदा कियाkhalaqaوَلَعَلَاऔर अलबत्ता चढ़ाई करताwalaʿalāبَعْضُهُمْबाज़ उनकाbaʿḍuhumعَلَىٰ[on]ʿalāبَعْضٍۢ ۚबाज़ परbaʿḍinسُبْحَـٰنَपाक हैsub'ḥānaٱللَّهِअल्लाहl-lahiعَمَّاउससे जोʿammāيَصِفُونَवो बयान करते हैंyaṣifūna٩١
अल्लाह ने न कोई संतान बनाई और न कभी उसके साथ कोई पूज्य था। उस समय अवश्य प्रत्येक पूज्य, जो कुछ उसने पैदा किया था, उसे लेकर चल देता और निश्चय उनमें से एक, दूसरे पर चढ़ाई कर देता। पवित्र है अल्लाह उससे, जो वे बयान करते हैं।
२३:९२
عَـٰلِمِजानने वाला हैʿālimiٱلْغَيْبِग़ैबl-ghaybiوَٱلشَّهَـٰدَةِऔर हाज़िर काwal-shahādatiفَتَعَـٰلَىٰपस वो बहुत बुलन्द हैfataʿālāعَمَّاउस से जोʿammāيُشْرِكُونَवो शरीक करते हैंyush'rikūna٩٢
वह परोक्ष (छिपे) तथा प्रत्यक्ष (खुले) को जानने वाला है। सो वह बहुत ऊँचा है उससे, जो वे साझी बनाते हैं।
२३:९३
قُلकह दीजिएqulرَّبِّऐ मेरे रबrabbiإِمَّاअगरimmāتُرِيَنِّىतू दिखाए मुझेturiyannīمَاजोmāيُوعَدُونَवो वादा किए जाते हैंyūʿadūna٩٣
(ऐ नबी!) आप दुआ करें : ऐ मेरे पालनहार! यदि तू कभी मुझे अवश्य ही वह (यातना) दिखाए, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।
२३:९४
رَبِّऐ मेरे रबrabbiفَلَاतो नाfalāتَجْعَلْنِىतू करना मुझेtajʿalnīفِىamongfīٱلْقَوْمِउन लोगों मेंl-qawmiٱلظَّـٰلِمِينَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimīna٩٤
तो ऐ मेरे पालनहार! मुझे उन अत्याचारी लोगों में शामिल न करना।
२३:९५
وَإِنَّاऔर बेशक हमwa-innāعَلَىٰٓइस( बात) परʿalāأَنकिanنُّرِيَكَहम दिखाऐं आपकोnuriyakaمَاजिसकाmāنَعِدُهُمْहम वादा कर रहे हैं उनसेnaʿiduhumلَقَـٰدِرُونَअलबत्ता क़ादिर हैंlaqādirūna٩٥
तथा निःसंदेह हम आपको वह (यातना) दिखाने में, जिसका हम उनसे वादा करते हैं, अवश्य सक्षम हैं।
२३:९६
ٱدْفَعْदूर कर दीजिएid'faʿبِٱلَّتِىउस (तरीक़े) सेbi-allatīهِىَवो (जो)hiyaأَحْسَنُज़्यादा अच्छा हैaḥsanuٱلسَّيِّئَةَ ۚबुराई कोl-sayi-ataنَحْنُहमnaḥnuأَعْلَمُख़ूब जानते हैंaʿlamuبِمَاउसे जोbimāيَصِفُونَवो बयान करते हैंyaṣifūna٩٦
(हे नबी!) आप बुराई को उस ढंग से दूर करें, जो सबसे उत्तम हो। हम अधिक जानने वाले हैं, जो कुछ वे बयान करते हैं।
२३:९७
وَقُلऔर कह दीजिएwaqulرَّبِّऐ मेरे रबrabbiأَعُوذُI seek refugeaʿūdhuبِكَमैं पनाह लेता हूँ तेरीbikaمِنْfromminهَمَزَٰتِवसवसों सेhamazātiٱلشَّيَـٰطِينِशैतानों केl-shayāṭīni٩٧
तथा आप दुआ करें : ऐ मेरे पालनहार! मैं शैतानों की उकसाहटों से तेरी शरण चाहता हूँ।
२३:९८
وَأَعُوذُAnd I seek refugewa-aʿūdhuبِكَऔर मैं पनाह लेता हूँ तेरीbikaرَبِّऐ मेरे रबrabbiأَنइस से किanيَحْضُرُونِवो हाज़िर हों मेरे पासyaḥḍurūni٩٨
तथा ऐ मेरे पालनहार! मैं इस बात से भी तेरी शरण माँगता हूँ कि वे मेरे पास आएँ।
२३:९९
حَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāجَآءَआ जाएगीjāaأَحَدَهُمُउनमें से एक कोaḥadahumuٱلْمَوْتُमौतl-mawtuقَالَकहेगाqālaرَبِّऐ मेरे रबrabbiٱرْجِعُونِवापस लौटा दो मुझेir'jiʿūni٩٩
यहाँ तक कि जब उनमें से किसी के पास मौत आती है, तो कहता है : ऐ मेरे पालनहार! मुझे (संसार में) वापस भेजो।1
२३:१००
لَعَلِّىٓताकि मैंlaʿallīأَعْمَلُमैं अमल करूँaʿmaluصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanفِيمَاउसमें जोfīmāتَرَكْتُ ۚछोड़ आया मैंtaraktuكَلَّآ ۚहरगिज़ नहींkallāإِنَّهَاबेशक वोinnahāكَلِمَةٌएक बात हैkalimatunهُوَवोhuwaقَآئِلُهَا ۖकहने वाला है उसेqāiluhāوَمِنand before themwaminوَرَآئِهِمऔर आगे उनकेwarāihimبَرْزَخٌबरज़ख़ हैbarzakhunإِلَىٰtillilāيَوْمِउस दिन तकyawmiيُبْعَثُونَवो सब उठाए जाऐंगेyub'ʿathūna١٠٠
ताकि मैं जो कुछ छोड़ आया हूँ, उसमें कोई नेक कार्य कर लूँ। हरगिज़ नहीं, यह तो मात्र एक बात है, जिसे वह कहने वाला1 है और उनके पीछे उस दिन तक जब वे (पुनः) उठाए जाएँगे, एक ओट2 है।
२३:१०१
فَإِذَاफिर जबfa-idhāنُفِخَफूँक मारी जाएगीnufikhaفِىinfīٱلصُّورِसूर मेंl-ṣūriفَلَآतो नहींfalāأَنسَابَरिश्तेदारियाँansābaبَيْنَهُمْदरमियान उनकेbaynahumيَوْمَئِذٍۢउस दिनyawma-idhinوَلَاऔर नाwalāيَتَسَآءَلُونَवो एक दूसरे से सवाल करेंगेyatasāalūna١٠١
फिर जब सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी, तो उस दिन1 उनके बीच न कोई रिश्ते-नाते होंगे और न वे एक-दूसरे को पूछेंगे।
२३:१०२
فَمَنतो जो कोईfamanثَقُلَتْभारी हुएthaqulatمَوَٰزِينُهُۥपलड़े उसकेmawāzīnuhuفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْمُفْلِحُونَजो फ़लाह पाने वाले हैंl-muf'liḥūna١٠٢
फिर जिसके पलड़े भारी हो गए, वही लोग सफल हैं।
२३:१०३
وَمَنْऔर जो कोई किwamanخَفَّتْहल्के हुएkhaffatمَوَٰزِينُهُۥपलड़े उसकेmawāzīnuhuفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaخَسِرُوٓا۟ख़सारे में डालाkhasirūأَنفُسَهُمْअपने आप कोanfusahumفِىinfīجَهَنَّمَजहन्नम मेंjahannamaخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वाले हैंkhālidūna١٠٣
और जिसके पलड़े हलके हो गए, तो वही लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला। जहन्नम ही में सदावासी होंगे।
२३:१०४
تَلْفَحُझुलसा देगीtalfaḥuوُجُوهَهُمُउनके चेहरों कोwujūhahumuٱلنَّارُआगl-nāruوَهُمْऔर वोwahumفِيهَاउसमेंfīhāكَـٰلِحُونَमुँह बिगाड़ने वाले होंगेkāliḥūna١٠٤
उनके चेहरों को आग झुलसाएगी तथा उसमें उनके जबड़े (झुलसकर) बाहर निकले होंगे।
२३:१०५
أَلَمْक्या नाalamتَكُنْथींtakunءَايَـٰتِىआयात मेरीāyātīتُتْلَىٰपढ़ी जातींtut'lāعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumفَكُنتُمतो थे तुमfakuntumبِهَاउन्हेंbihāتُكَذِّبُونَतुम झुठलातेtukadhibūna١٠٥
क्या मेरी आयतें तुमपर पढ़ी न जाती थीं, तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे?
२३:१०६
قَالُوا۟वो कहेंगेqālūرَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāغَلَبَتْग़ालिब आ गईghalabatعَلَيْنَاहम परʿalaynāشِقْوَتُنَاबदबख़्ती हमारीshiq'watunāوَكُنَّاऔर थे हमwakunnāقَوْمًۭاलोगqawmanضَآلِّينَगुमराहḍāllīna١٠٦
वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमारा दुर्भाग्य हमपर प्रभावी हो गया1 और हम गुमराह लोग थे।
२३:१०७
رَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāأَخْرِجْنَاनिकाल देakhrij'nāمِنْهَاइस सेmin'hāفَإِنْफिर अगरfa-inعُدْنَاदोबारा करें हमʿud'nāفَإِنَّاतो बेशक हमfa-innāظَـٰلِمُونَज़ालिम होंगेẓālimūna١٠٧
ऐ हमारे पालनहार! हमें इससे निकाल ले। फिर यदि हम दोबारा ऐसा करें, तो निश्चय हम अत्याचारी होंगे।
२३:१०८
قَالَवो फ़रमाए गाqālaٱخْسَـُٔوا۟पड़े रहो फिटकारे हुएikh'saūفِيهَاउसी मेंfīhāوَلَاऔर नाwalāتُكَلِّمُونِतुम कलाम करो मुझसेtukallimūni١٠٨
वह (अल्लाह) कहेगा : इसी में अपमानित होकर पड़े रहो और मुझसे बात न करो।
२३:१०९
إِنَّهُۥबेशक वोinnahuكَانَथा वोkānaفَرِيقٌۭएक गिरोहfarīqunمِّنْofminعِبَادِىमेरे बन्दों में सेʿibādīيَقُولُونَवो कहते थेyaqūlūnaرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāءَامَنَّاईमान लाए हमāmannāفَٱغْفِرْपस बख़्श देfa-igh'firلَنَاहमेंlanāوَٱرْحَمْنَاऔर रहम फ़रमा हम परwa-ir'ḥamnāوَأَنتَऔर तूwa-antaخَيْرُबेहतर हैkhayruٱلرَّٰحِمِينَसब रहम करने वालों मेंl-rāḥimīna١٠٩
निःसंदेह मेरे बंदों में से कुछ लोग थे, जो कहते थे : ऐ हमारे पालनहार! हम ईमान ले आए। अतः तू हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर। और तू सब दया करने वालों से बेहतर है।
२३:११०
فَٱتَّخَذْتُمُوهُمْतो बना लिया तुमने उन्हेंfa-ittakhadhtumūhumسِخْرِيًّاमज़ाक़sikh'riyyanحَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāأَنسَوْكُمْउन्होंने भुलवा दिया तुम्हेंansawkumذِكْرِىज़िक्र मेराdhik'rīوَكُنتُمऔर थे तुमwakuntumمِّنْهُمْउनसेmin'humتَضْحَكُونَतुम हँसी किया करतेtaḍḥakūna١١٠
तो तुमने उन्हें मज़ाक़ बना लिया, यहाँ तक कि उन्होंने तुम्हें मेरी याद भुला दी और तुम उनसे हँसी किया करते थे।
२३:१११
إِنِّىबेशक मैंinnīجَزَيْتُهُمُबदला दिया मैंने उन्हेंjazaytuhumuٱلْيَوْمَआजl-yawmaبِمَاबवजह उसके जोbimāصَبَرُوٓا۟उन्होंने सब्र कियाṣabarūأَنَّهُمْबेशक वोannahumهُمُवो हीhumuٱلْفَآئِزُونَकामयाब होने वाले हैंl-fāizūna١١١
निःसंदेह आज मैंने उन्हें उनके धैर्य का यह बदला दिया है कि वही सफल हैं।
२३:११२
قَـٰلَवो फ़रमाएगाqālaكَمْकितनाkamلَبِثْتُمْठहरे तुमlabith'tumفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiعَدَدَगिनती मेंʿadadaسِنِينَसालों कीsinīna١١٢
वह (अल्लाह) कहेगा : तुम धरती पर कितने वर्षों तक रहे?
२३:११३
قَالُوا۟वो कहेंगेqālūلَبِثْنَاठहरे हमlabith'nāيَوْمًاएक दिनyawmanأَوْयाawبَعْضَकुछ हिस्साbaʿḍaيَوْمٍۢदिन काyawminفَسْـَٔلِपूछ लीजिएfasaliٱلْعَآدِّينَगिनने वालों सेl-ʿādīna١١٣
वे कहेंगे : हम एक दिन या दिन का कुछ भाग रहे। आप गणना करने वालों से पूछ लें।
२३:११४
قَـٰلَवो फ़रमाएगाqālaإِنनहींinلَّبِثْتُمْठहरे तुमlabith'tumإِلَّاमगरillāقَلِيلًۭا ۖबहुत थोड़ाqalīlanلَّوْकाशlawأَنَّكُمْकि बेशक तुमannakumكُنتُمْहोते तुमkuntumتَعْلَمُونَतुम जानतेtaʿlamūna١١٤
वह (अल्लाह) कहेगा : तुम नहीं रहे परंतु थोड़ा ही। काश कि तुमने जानते होते।1
२३:११५
أَفَحَسِبْتُمْक्या भला समझा था तुमनेafaḥasib'tumأَنَّمَاकि बेशकannamāخَلَقْنَـٰكُمْपैदा किया हमने तुम्हेंkhalaqnākumعَبَثًۭاबेकारʿabathanوَأَنَّكُمْऔर बेशक तुमwa-annakumإِلَيْنَاतरफ़ हमारेilaynāلَاnotlāتُرْجَعُونَना तुम लौटाए जाओगेtur'jaʿūna١١٥
तो क्या तुमने समझ रखा था कि हमने तुम्हें उद्देश्यहीन पैदा किया है और यह कि तुम हमारी ओर नहीं लौटाए1 जाओगे?
२३:११६
فَتَعَـٰلَىतो बहुत बुलन्द हैfataʿālāٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْمَلِكُबादशाहl-malikuٱلْحَقُّ ۖहक़ीक़ीl-ḥaquلَآनहींlāإِلَـٰهَकोई इलाह( बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَवो हीhuwaرَبُّरब हैrabbuٱلْعَرْشِअर्शेl-ʿarshiٱلْكَرِيمِकरीम काl-karīmi١١٦
तो बहुत ऊँचा है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है। उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, सम्मान वाले अर्श (सिंहासन) का रब है।
२३:११७
وَمَنऔर जोwamanيَدْعُपुकारेyadʿuمَعَसाथmaʿaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِلَـٰهًاइलाहilāhanءَاخَرَदूसराākharaلَاnolāبُرْهَـٰنَनहीं दलीलbur'hānaلَهُۥउसके लिएlahuبِهِۦउसकीbihiفَإِنَّمَاतो बेशकfa-innamāحِسَابُهُۥहिसाब है उसकाḥisābuhuعِندَपासʿindaرَبِّهِۦٓ ۚउसके रब केrabbihiإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَاnotlāيُفْلِحُनहीं वो फ़लाह पाऐंगेyuf'liḥuٱلْكَـٰفِرُونَजो काफ़िर हैंl-kāfirūna١١٧
और जो (भी) अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को पुकारे, जिसका उसके पास कोई प्रमाण नहीं, तो उसका हिसाब केवल उसके पालनहार के पास है। निःसंदेह काफ़िर लोग सफल नहीं होंगे।1
२३:११८
وَقُلऔर कह दीजिएwaqulرَّبِّऐ मेरे रबrabbiٱغْفِرْबख़्श देigh'firوَٱرْحَمْऔर रहम फ़रमाwa-ir'ḥamوَأَنتَऔर तूwa-antaخَيْرُबेहतर हैkhayruٱلرَّٰحِمِينَसब रहम करने वालों सेl-rāḥimīna١١٨
तथा आप प्रार्थना करें : ऐ मेरे पालनहार! क्षमा कर दे और दया कर, और तू सब दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है।
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