६०
अल-मुम्तहिना
الممتحنة
सूरह अल-मुम्तहिना (الممتحنة) पवित्र क़ुरआन का ६० वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें १३ आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६०:१
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتَتَّخِذُوا۟ना तुम बनाओtattakhidhūعَدُوِّىमेरे दुश्मनोंʿaduwwīوَعَدُوَّكُمْऔर अपने दुश्मनों कwaʿaduwwakumأَوْلِيَآءَदोस्तawliyāaتُلْقُونَतुम डालते होtul'qūnaإِلَيْهِمतरफ़ उनकेilayhimبِٱلْمَوَدَّةِदोस्ती (का पैग़ाम)bil-mawadatiوَقَدْहालाँकि तहक़ीक़waqadكَفَرُوا۟उन्होंने इन्कार कियाkafarūبِمَاउसका जोbimāجَآءَكُمआया तुम्हारे पासjāakumمِّنَofminaٱلْحَقِّहक़ में सेl-ḥaqiيُخْرِجُونَवो निकालते हैंyukh'rijūnaٱلرَّسُولَरसूल कोl-rasūlaوَإِيَّاكُمْ ۙऔर तुम्हेंwa-iyyākumأَنकिanتُؤْمِنُوا۟तुम ईमान लाए होtu'minūبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiرَبِّكُمْजो रब है तुम्हाराrabbikumإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumخَرَجْتُمْनिकले तुमkharajtumجِهَـٰدًۭاजिहाद के लिएjihādanفِىinfīسَبِيلِىमेरे रास्ते मेंsabīlīوَٱبْتِغَآءَऔर चाहने कोwa-ib'tighāaمَرْضَاتِى ۚरज़ामन्दी मेरीmarḍātīتُسِرُّونَतुम छुपा कर भेजते होtusirrūnaإِلَيْهِمतरफ़ उनकेilayhimبِٱلْمَوَدَّةِदोस्ती (का पैग़ाम)bil-mawadatiوَأَنَا۠और मैंwa-anāأَعْلَمُख़ूब जानता हूँaʿlamuبِمَآउसे जोbimāأَخْفَيْتُمْछुपाया तुमनेakhfaytumوَمَآऔर जोwamāأَعْلَنتُمْ ۚज़ाहिर किया तुमनेaʿlantumوَمَنऔर जो कोईwamanيَفْعَلْهُकरेगा उसेyafʿalhuمِنكُمْतुम में सेminkumفَقَدْतो तहक़ीक़faqadضَلَّवो भटक गयाḍallaسَوَآءَसीधेsawāaٱلسَّبِيلِरास्ते सेl-sabīli١
ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! मेरे शत्रुओं तथा अपने शत्रुओं को मित्र न बनाओ। तुम उनकी ओर मैत्री1 का संदेश भेजते हो, हालाँकि निश्चय उन्होंने उस सत्य का इनकार किया है, जो तुम्हारे पास आया है। वे रसूल को तथा तुमको इस कारण निकालते हैं कि तुम अपने पालनहार अल्लाह पर ईमान लाए हो। यदि तुम मेरी राह में जिहाद के लिए और मेरी प्रसन्नता तलाश करने के लिए निकले हो (तो ऐसा मत करो)। तुम गुप्त रूप से उनकी ओर मैत्री का संदेश भेजते हो, हालाँकि मैं अधिक जानने वाला हूँ, जो कुछ तुमने छिपाया और जो तुमने ज़ाहिर किया। तथा तुममें से जो भी ऐसा करेगा, तो निश्चय वह सीधे रास्ते से भटक गया।
६०:२
إِنअगरinيَثْقَفُوكُمْवो पा लें तुम्हेंyathqafūkumيَكُونُوا۟होंगे वोyakūnūلَكُمْतुम्हारेlakumأَعْدَآءًۭदुश्मनaʿdāanوَيَبْسُطُوٓا۟और वो दराज़ करेंगेwayabsuṭūإِلَيْكُمْतरफ़ तुम्हारेilaykumأَيْدِيَهُمْहाथ अपनेaydiyahumوَأَلْسِنَتَهُمऔर ज़बानें अपनीwa-alsinatahumبِٱلسُّوٓءِसाथ बुराई केbil-sūiوَوَدُّوا۟और वो चाहेंगेwawaddūلَوْकाशlawتَكْفُرُونَतुम कुफ़्र करोtakfurūna٢
यदि वे तुम्हें पा जाएँ, तो तुम्हारे दुश्मन होंगे तथा अपने हाथ और अपनी ज़बानें तुम्हारी ओर बुराई के साथ बढ़ाएँगे और चाहेंगे कि तुम काफ़िर हो जाओ।
६०:३
لَنहरगिज़ नहींlanتَنفَعَكُمْफ़ायदा देंगी तुम्हेंtanfaʿakumأَرْحَامُكُمْरिश्तेदारियाँ तुम्हारीarḥāmukumوَلَآऔर नाwalāأَوْلَـٰدُكُمْ ۚऔलाद तुम्हारीawlādukumيَوْمَदिनyawmaٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmatiيَفْصِلُवो फ़ैसला करेगाyafṣiluبَيْنَكُمْ ۚदर्मियान तुम्हारेbaynakumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuبِمَاउस जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaبَصِيرٌۭख़ूब देखने वाला हैbaṣīrun٣
क़ियामत के दिन हरगिज़ न तुम्हारी नातेदारियाँ तुम्हें लाभ पहुँचाएँगी और न तुम्हारी संतान। वह तुम्हारे बीच जुदाई डाल देगा। और अल्लाह उसे जो तुम कर रहे हो ख़ूब देखने वाला है।
६०:४
قَدْतहक़ीक़qadكَانَتْहैkānatلَكُمْतुम्हारे लिएlakumأُسْوَةٌनमूनाus'watunحَسَنَةٌۭअच्छाḥasanatunفِىٓinfīإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम मेंib'rāhīmaوَٱلَّذِينَऔर उन लोगों में जोwa-alladhīnaمَعَهُۥٓउसके साथ थेmaʿahuإِذْजबidhقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūلِقَوْمِهِمْअपनी क़ौम सेliqawmihimإِنَّاबेशक हमinnāبُرَءَٰٓؤُا۟बेज़ार हैंburaāuمِنكُمْतुम सेminkumوَمِمَّاऔर उनसे जिन्हेंwamimmāتَعْبُدُونَतुम पूजते होtaʿbudūnaمِنfromminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiكَفَرْنَاइन्कार किया हमनेkafarnāبِكُمْतुम्हाराbikumوَبَدَاऔर ज़ाहिर हो गईwabadāبَيْنَنَاदर्मियान हमारेbaynanāوَبَيْنَكُمُऔर दर्मियान तुम्हारेwabaynakumuٱلْعَدَٰوَةُअदावतl-ʿadāwatuوَٱلْبَغْضَآءُऔर बुग़्ज़wal-baghḍāuأَبَدًاहमेशा के लिएabadanحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāتُؤْمِنُوا۟तुम ईमान लाओtu'minūبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَحْدَهُۥٓअकेले उसी परwaḥdahuإِلَّاमगरillāقَوْلَकहनाqawlaإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम काib'rāhīmaلِأَبِيهِअपने वालिद सेli-abīhiلَأَسْتَغْفِرَنَّअलबत्ता मैं ज़रूर बख़्शिश माँगूँगाla-astaghfirannaلَكَतेरे लिएlakaوَمَآऔर नहींwamāأَمْلِكُमैं मालिकamlikuلَكَतेरे लिएlakaمِنَfromminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiمِنofminشَىْءٍۢ ۖकिसी चीज़ काshayinرَّبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāعَلَيْكَतुझ पर हीʿalaykaتَوَكَّلْنَاतवक्कुल किया हमनेtawakkalnāوَإِلَيْكَऔर तरफ़ तेरे हीwa-ilaykaأَنَبْنَاरुजूअ किया हमनेanabnāوَإِلَيْكَऔर तरफ़ तेरे हीwa-ilaykaٱلْمَصِيرُलौटना हैl-maṣīru٤
निश्चय तुम्हारे लिए इबराहीम तथा उनके साथियों में एक अच्छा आदर्श है। जब उन्होंने अपनी जाति से कहा : निःसंदेह हम तुमसे और उन सभी चीज़ों से बरी हैं, जिन्हें तुम अल्लाह के अतिरिक्त पूजते हो। हम तुम्हें नहीं मानते और हमारे बीच तथा तुम्हारे बीच दुश्मनी और घृणा सदा के लिए प्रकट हो चुकी है, यहाँ तक कि तुम अकेले अल्लाह पर ईमान ले आओ। परंतु इबराहीम का अपने पिता से यह कहना (तुम्हारे लिए आदर्श नहीं) कि मैं अवश्य तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करूँगा1 और मैं अल्लाह के सामने तुम्हारे लिए कुछ अधिकार नहीं रखता। ऐ हमारे पालनहार! हमने तुझी पर भरोसा किया और तेरी ही ओर लौटे और तेरी ही ओर लौटकर आना है।
६०:५
رَبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāلَا(do) notlāتَجْعَلْنَاना तू बना हमेंtajʿalnāفِتْنَةًۭफ़ितना / आज़माइशfit'natanلِّلَّذِينَउनके लिए जिन्होंनेlilladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūوَٱغْفِرْऔर बख़्शदेwa-igh'firلَنَاहमेंlanāرَبَّنَآ ۖऐ हमारे रबrabbanāإِنَّكَबेशक तूinnakaأَنتَतू ही हैantaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلْحَكِيمُख़ूब हिकमत वालाl-ḥakīmu٥
ऐ हमारे पालनहार! हमें काफ़िरों के लिए परीक्षण1 न बना और ऐ हमारे पालनहार! हमें क्षमा कर दे। निश्चय तू ही प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
६०:६
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadكَانَहैkānaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفِيهِمْउनमेंfīhimأُسْوَةٌनमूनाus'watunحَسَنَةٌۭअच्छाḥasanatunلِّمَنउसके लिए जोlimanكَانَहो वोkānaيَرْجُوا۟वो उम्मीद रखताyarjūٱللَّهَअल्लाह (से मुलाक़ात ) कीl-lahaوَٱلْيَوْمَand the Daywal-yawmaٱلْـَٔاخِرَ ۚऔर आख़िरी दिन कीl-ākhiraوَمَنऔर जो कोईwamanيَتَوَلَّमुँह मोड़ जाएyatawallaفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो ही हैhuwaٱلْغَنِىُّबहुत बेनियाज़l-ghaniyuٱلْحَمِيدُख़ूब तारीफ़ वालाl-ḥamīdu٦
निःसंदेह तुम्हारे लिए उनके अंदर एक अच्छा आदर्श है, उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस की आशा रखता है। और जो कोई मुँह फेरे, तो निश्चय अल्लाह बेनियाज़, हर प्रकार की प्रशंसा के योग्य है।
६०:७
۞ عَسَىउम्मीद हैʿasāٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَنकिanيَجْعَلَवो डाल देyajʿalaبَيْنَكُمْदर्मियान तुम्हारेbaynakumوَبَيْنَऔर दर्मियानwabaynaٱلَّذِينَउनके जिनसेalladhīnaعَادَيْتُمअदावत रखते हो तुमʿādaytumمِّنْهُمउनमें सेmin'humمَّوَدَّةًۭ ۚदोस्तीmawaddatanوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuقَدِيرٌۭ ۚख़ूब क़ुदरत वाला हैqadīrunوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٧
निकट है कि अल्लाह तुम्हारे बीच तथा उन लोगों के बीच, जिनसे तुम उन (काफिरों) में से बैर रखते हो, मित्रता1 पैदा कर दे। और अल्लाह सर्वशक्तिमान् है तथा अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
६०:८
لَّاNotlāيَنْهَىٰكُمُनहीं रोकता तुम्हेंyanhākumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَنِfromʿaniٱلَّذِينَउन लोगों सेalladhīnaلَمْनहींlamيُقَـٰتِلُوكُمْउन्होंने जंग की तुमसेyuqātilūkumفِىinfīٱلدِّينِदीन के मामले मेंl-dīniوَلَمْऔर नहींwalamيُخْرِجُوكُمउन्होंने निकाला तुम्हेंyukh'rijūkumمِّنofminدِيَـٰرِكُمْतुम्हारे घरों सेdiyārikumأَنकिanتَبَرُّوهُمْतुम नेकी करो उनसेtabarrūhumوَتُقْسِطُوٓا۟और तुम इन्साफ़ करोwatuq'siṭūإِلَيْهِمْ ۚउनसेilayhimإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيُحِبُّवो पसंद करता हैyuḥibbuٱلْمُقْسِطِينَइन्साफ़ करने वालों कोl-muq'siṭīna٨
अल्लाह तुम्हें इससे नहीं रोकता कि तुम उन लोगों से अच्छा व्यवहार करो और उनके साथ न्याय करो, जिन्होंने तुमसे धर्म के विषय में युद्ध नहीं किया और न तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाला। निश्चय अल्लाह न्याय करने वालों1 से प्रेम करता है।
६०:९
إِنَّمَاबेशकinnamāيَنْهَىٰكُمُरोकता है तुम्हेंyanhākumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَنِfromʿaniٱلَّذِينَउनसे जिन्होंनेalladhīnaقَـٰتَلُوكُمْजंग की तुमसेqātalūkumفِىinfīٱلدِّينِदीन के मामले मेंl-dīniوَأَخْرَجُوكُمऔर उन्होंने निकाला तुम्हेंwa-akhrajūkumمِّنofminدِيَـٰرِكُمْतुम्हारे घरों सेdiyārikumوَظَـٰهَرُوا۟और उन्होंने एक दूसरे की मदद कीwaẓāharūعَلَىٰٓinʿalāإِخْرَاجِكُمْतुम्हारे निकालने परikh'rājikumأَنकिanتَوَلَّوْهُمْ ۚतुम दोस्ती करो उनसेtawallawhumوَمَنऔर जो कोईwamanيَتَوَلَّهُمْदोस्ती करेगा उनसेyatawallahumفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلظَّـٰلِمُونَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimūna٩
अल्लाह तो तुम्हें केवल उन लोगों से मैत्री रखने से रोकता है, जिन्होंने तुमसे धर्म के विषय में युद्ध किया तथा तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाला और तुम्हें निकालने में एक-दूसरे की सहायता की। और जो उनसे मैत्री करेगा, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
६०:१०
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِذَاजबidhāجَآءَكُمُआ जाऐं तुम्हारे पासjāakumuٱلْمُؤْمِنَـٰتُमोमिन औरतेंl-mu'minātuمُهَـٰجِرَٰتٍۢहिजरत करने वालियाँmuhājirātinفَٱمْتَحِنُوهُنَّ ۖतो इम्तिहान लो उनकाfa-im'taḥinūhunnaٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَعْلَمُख़ूब जानता हैaʿlamuبِإِيمَـٰنِهِنَّ ۖउनके ईमान कोbiīmānihinnaفَإِنْफिर अगरfa-inعَلِمْتُمُوهُنَّजान लो तुम उन्हेंʿalim'tumūhunnaمُؤْمِنَـٰتٍۢईमान वालियाँmu'minātinفَلَاतो नाfalāتَرْجِعُوهُنَّतुम लौटाओ उन्हेंtarjiʿūhunnaإِلَىtoilāٱلْكُفَّارِ ۖतरफ़ कुफ़्फ़ार केl-kufāriلَاNotlāهُنَّना वोhunnaحِلٌّۭहलाल हैंḥillunلَّهُمْउनके लिएlahumوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيَحِلُّونَवो हलाल हो सकते हैंyaḥillūnaلَهُنَّ ۖउनके लिएlahunnaوَءَاتُوهُمऔर दो उन्हेंwaātūhumمَّآजोmāأَنفَقُوا۟ ۚउन्होंने ख़र्च कियाanfaqūوَلَاऔर नहींwalāجُنَاحَकोई गुनाहjunāḥaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumأَنकिanتَنكِحُوهُنَّतुम निकाह करो उनसेtankiḥūhunnaإِذَآजबidhāءَاتَيْتُمُوهُنَّदे चुको तुम उन्हेंātaytumūhunnaأُجُورَهُنَّ ۚमेहर उनकेujūrahunnaوَلَاऔर नाwalāتُمْسِكُوا۟तुम रोक कर रखोtum'sikūبِعِصَمِइस्मतेंbiʿiṣamiٱلْكَوَافِرِकाफ़िर औरतों कीl-kawāfiriوَسْـَٔلُوا۟और तुम माँग लोwasalūمَآजोmāأَنفَقْتُمْख़र्च किया तुमनेanfaqtumوَلْيَسْـَٔلُوا۟और चाहिए कि वो माँग लेंwalyasalūمَآजोmāأَنفَقُوا۟ ۚउन्होंने ख़र्च कियाanfaqūذَٰلِكُمْयेdhālikumحُكْمُफ़ैसला हैḥuk'muٱللَّهِ ۖअल्लाह काl-lahiيَحْكُمُवो फ़ैसला करता हैyaḥkumuبَيْنَكُمْ ۚदर्मियान तुम्हारेbaynakumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunحَكِيمٌۭख़ूब हिकमत वाला हैḥakīmun١٠
ऐ ईमान वालो! जब तुम्हारे पास ईमान वाली स्त्रियाँ हिजरत करके आएँ, तो उन्हें जाँच लिया करो। अल्लाह उनके ईमान को ज़्यादा जानने वाला है। फिर यदि वे तुम्हें ईमान वाली मालूम हों, तो उन्हें काफ़िरों की ओर वापस न करो।1 न ये स्त्रियाँ उन (काफ़िरों) के लिए हलाल हैं और न वे (काफ़िर) इनके लिए हलाल2 होंगे। और उन काफ़िरों ने जो खर्च किया है, वह उन्हें दे दो। तथा तुमपर कोई दोष नहीं है कि उनसे विवाह कर लो, जब उन्हें उनका महर दे दो। तथा तुम काफ़िर स्त्रियों के सतीत्व को रोक कर न रखो और जो तुमने ख़र्च किया है वह माँग लो। और वे (काफ़िर) भी माँग लें, जो उन्होंने खर्च किया है। यह अल्लाह का फैसला है। वह तुम्हारे बीच फैसला करता है। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
६०:११
وَإِنऔर अगरwa-inفَاتَكُمْरह जाए तुमसेfātakumشَىْءٌۭकोई चीज़ (मेहर)shayonمِّنْofminأَزْوَٰجِكُمْतुम्हारी बीवियों कीazwājikumإِلَىtoilāٱلْكُفَّارِतरफ़ कुफ़्फ़ार केl-kufāriفَعَاقَبْتُمْफिर तुम्हारी बारी आएfaʿāqabtumفَـَٔاتُوا۟तो दोfaātūٱلَّذِينَउन लोगों कोalladhīnaذَهَبَتْचली गईंdhahabatأَزْوَٰجُهُمबीवियाँ जिनकीazwājuhumمِّثْلَमानिन्द उसकेmith'laمَآजोmāأَنفَقُوا۟ ۚउन्होंने ख़र्च कियाanfaqūوَٱتَّقُوا۟और डरोwa-ittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaٱلَّذِىٓवो जो होalladhīأَنتُمतुमantumبِهِۦउस परbihiمُؤْمِنُونَईमान लाने वालेmu'minūna١١
और यदि तुम्हारी पत्नियों में से कोई काफ़िरों की ओर चली जाए, फिर तुम्हें बदले1 का अवसर मिल जाए, तो जिन लोगों की पत्नियाँ चली गई हैं, उन्हें उनके खर्च के बराबर दे दो। तथा अल्लाह से डरते रहो, जिसपर तुम ईमान रखते हो।
६०:१२
يَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuإِذَاजबidhāجَآءَكَआऐं आपके पासjāakaٱلْمُؤْمِنَـٰتُमोमिन औरतेंl-mu'minātuيُبَايِعْنَكَवो बैत करें आपसेyubāyiʿ'nakaعَلَىٰٓइस (बात) परʿalāأَنकिanلَّاnotlāيُشْرِكْنَनहीं वो शरीक ठहराऐंगीyush'rik'naبِٱللَّهِसाथ अल्लाह केbil-lahiشَيْـًۭٔاकिसी चीज़ कोshayanوَلَاऔर नाwalāيَسْرِقْنَवो चोरी करेंगीyasriq'naوَلَاऔर नाwalāيَزْنِينَवो ज़िना करेंगीyaznīnaوَلَاऔर नाwalāيَقْتُلْنَवो क़त्ल करेंगीyaqtul'naأَوْلَـٰدَهُنَّअपनी औलाद कोawlādahunnaوَلَاऔर नाwalāيَأْتِينَवो आऐंगीyatīnaبِبُهْتَـٰنٍۢकिसी बोहतान कोbibuh'tāninيَفْتَرِينَهُۥवो गढ़ लें जिसेyaftarīnahuبَيْنَदर्मियानbaynaأَيْدِيهِنَّअपने हाथोंaydīhinnaوَأَرْجُلِهِنَّऔर अपने पाँव केwa-arjulihinnaوَلَاऔर नाwalāيَعْصِينَكَवो नाफ़रमानी करेंगी आपकीyaʿṣīnakaفِىinfīمَعْرُوفٍۢ ۙकिसी मारूफ़ मेंmaʿrūfinفَبَايِعْهُنَّतो बैत कर लीजिए उनसेfabāyiʿ'hunnaوَٱسْتَغْفِرْऔर बख़्शिश माँगिएwa-is'taghfirلَهُنَّउनके लिएlahunnaٱللَّهَ ۖअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun١٢
ऐ नबी! जब आपके पास ईमान वाली स्त्रियाँ1 आएँ, जो आपसे इस बात पर 'बैअत' करें कि वे किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाएँगी और न चोरी करेंगी, न व्यभिचार करेंगी, न अपनी संतान को क़त्ल करेंगी, न कोई बोहतान (झूठा अभियोग) लगाएँगी जिसे उन्होंने अपने हाथों तथा पैरों के सामने गढ़ लिया हो और न किसी नेक काम में आपकी अवज्ञा करेंगी, तो आप उनसे 'बैअत' ले लें तथा उनके लिए अल्लाह से क्षमा की याचना करें। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
६०:१३
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتَتَوَلَّوْا۟ना तुम दोस्त बनाओtatawallawقَوْمًاऐसी क़ौम कोqawmanغَضِبَनाराज़ हुआghaḍibaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَيْهِمْजिन परʿalayhimقَدْतहक़ीक़qadيَئِسُوا۟वो मायूस हो गएya-isūمِنَofminaٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत सेl-ākhiratiكَمَاजैसा किkamāيَئِسَमायूस हुएya-isaٱلْكُفَّارُकाफ़िरl-kufāruمِنْofminأَصْحَـٰبِ(the) companionsaṣḥābiٱلْقُبُورِक़ब्रों वालों सेl-qubūri١٣
ऐ ईमान वालो! तुम उन लोगों को मित्र न बनाओ, जिनपर अल्लाह क्रोधित हुआ है। निश्चय वे आख़िरत1 से वैसे ही निराश हो चुके हैं, जैसे काफ़िर लोग क़ब्र वालों (के जीवित होने) से निराश हो चुके हैं।
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