९
अत-तौबा
التوبة
सूरह अत-तौबा (التوبة) पवित्र क़ुरआन का ९ वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें १२९ आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।
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९:१
بَرَآءَةٌۭبَرَآءَةٌ है (ऐलान)barāatunمِّنَfromminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiوَرَسُولِهِۦٓऔर उसके रसूल (की तरफ़ से)warasūlihiإِلَىtoilāٱلَّذِينَतरफ़ उनके जिनसेalladhīnaعَـٰهَدتُّمमुआहिदा किया तुमनेʿāhadttumمِّنَfromminaٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकीन में सेl-mush'rikīna١
अल्लाह तथा उसके रसूल की ओर से, उन बहुदेववादियों से ज़िम्मेदारी से बरी होने की घोषणा है, जिनसे तुमने संधि की थी।1
९:२
فَسِيحُوا۟पस चलो फिरो तुमfasīḥūفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiأَرْبَعَةَचारarbaʿataأَشْهُرٍۢमहीनेashhurinوَٱعْلَمُوٓا۟और जान लोwa-iʿ'lamūأَنَّكُمْबेशक तुमannakumغَيْرُनहींghayruمُعْجِزِىआजिज़ करने वालेmuʿ'jizīٱللَّهِ ۙअल्लाह कोl-lahiوَأَنَّऔर बेशकwa-annaٱللَّهَअल्लाहl-lahaمُخْزِىरुस्वा करने वाला हैmukh'zīٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कोl-kāfirīna٢
तो (ऐ बहुदेववादियो!) ! तुम धरती में चार महीने चलो-फिरो, तथा जान लो कि निःसंदेह तुम अल्लाह को विवश करने वाले नहीं, और यह कि निश्चय अल्लाह काफ़िरों को अपमानित करने वाला है।
९:३
وَأَذَٰنٌۭऔर ऐलान हैwa-adhānunمِّنَfrom Allahminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiوَرَسُولِهِۦٓऔर उसके रसूल की तरफ़ सेwarasūlihiإِلَىtoilāٱلنَّاسِतरफ़ लोगों केl-nāsiيَوْمَदिनyawmaٱلْحَجِّ(of) the greater Pilgrimagel-ḥajiٱلْأَكْبَرِहज-ए-अकबर केl-akbariأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaبَرِىٓءٌۭबरी-उज़-ज़िम्मा हैbarīonمِّنَ[of]minaٱلْمُشْرِكِينَ ۙमुशरिकों सेl-mush'rikīnaوَرَسُولُهُۥ ۚऔर उसका रसूल भीwarasūluhuفَإِنफिर अगरfa-inتُبْتُمْतौबा कर लो तुमtub'tumفَهُوَतो वोfahuwaخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunلَّكُمْ ۖतुम्हारे लिएlakumوَإِنऔर अगरwa-inتَوَلَّيْتُمْमुँह फेरा तुमनेtawallaytumفَٱعْلَمُوٓا۟तो जान लोfa-iʿ'lamūأَنَّكُمْबेशक तुमannakumغَيْرُनहींghayruمُعْجِزِىआजिज़ करने वालेmuʿ'jizīٱللَّهِ ۗअल्लाह कोl-lahiوَبَشِّرِऔर ख़ुशख़बरी दे दीजिएwabashiriٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِعَذَابٍअज़ाबbiʿadhābinأَلِيمٍदर्दनाक कीalīmin٣
तथा अल्लाह और उसके रसूल की ओर से, महा हज्ज1 के दिन, स्पष्ट घोषणा है कि अल्लाह बहुदेववादियों (मुश्रिकों) से अलग है तथा उसका रसूल भी। फिर यदि तुम तौबा कर लो, तो वह तुम्हारे लिए उत्तम है, और यदि तुम मुँह मोड़ो, तो जान लो कि निश्चय तुम अल्लाह को विवश करने वाले नहीं, और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्हें दुखदायी यातना की शुभ सूचना दे दो।
९:४
إِلَّاसिवायillāٱلَّذِينَउनके जिनसेalladhīnaعَـٰهَدتُّمमुआहिदा किया तुमनेʿāhadttumمِّنَamongminaٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकीन में सेl-mush'rikīnaثُمَّफिरthummaلَمْनहींlamيَنقُصُوكُمْउन्होंने कमी की तुमसेyanquṣūkumشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَلَمْऔर ना हीwalamيُظَـٰهِرُوا۟उन्होंने पुश्त पनाही कीyuẓāhirūعَلَيْكُمْतुम्हारे ख़िलाफ़ʿalaykumأَحَدًۭاकिसी कीaḥadanفَأَتِمُّوٓا۟तो पूरा करोfa-atimmūإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimعَهْدَهُمْअहद उनकेʿahdahumإِلَىٰtillilāمُدَّتِهِمْ ۚउनकी मुद्दत तकmuddatihimإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيُحِبُّवो पसंद करता हैyuḥibbuٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों कोl-mutaqīna٤
सिवाय उन मुश्रिकों के, जिनसे तुमने संधि की, फिर उन्होंने तुम्हारे साथ (संधि के पालन में) कोई कमी नहीं की और न तुम्हारे विरुद्ध किसी की सहायता की, तो उनके साथ उनकी संधि को उनकी अवधि तक पूरी करो। निश्चय अल्लाह डर रखने वालों से प्रेम करता है।
९:५
فَإِذَاफिर जबfa-idhāٱنسَلَخَगुज़र जाऐंinsalakhaٱلْأَشْهُرُमहीनेl-ashhuruٱلْحُرُمُहुरमत वालेl-ḥurumuفَٱقْتُلُوا۟तो क़त्ल करोfa-uq'tulūٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकों कोl-mush'rikīnaحَيْثُजहाँ कहींḥaythuوَجَدتُّمُوهُمْपाओ तुम उन्हेंwajadttumūhumوَخُذُوهُمْऔर पकड़ो उन्हेंwakhudhūhumوَٱحْصُرُوهُمْऔर घेरो उन्हेंwa-uḥ'ṣurūhumوَٱقْعُدُوا۟और बैठ जाओwa-uq'ʿudūلَهُمْउनके लिएlahumكُلَّहरkullaمَرْصَدٍۢ ۚघात परmarṣadinفَإِنफिर अगरfa-inتَابُوا۟और वो तौबा कर लेंtābūوَأَقَامُوا۟और वो क़ायम करेंwa-aqāmūٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَءَاتَوُا۟और वो अदा करेंwaātawūٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataفَخَلُّوا۟तो छोड़ दोfakhallūسَبِيلَهُمْ ۚरास्ता उनकाsabīlahumإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٥
अतः जब सम्मानित महीने बीत जाएँ, तो बहुदेववादियों (मुश्रिकों) को जहाँ पाओ, क़त्ल करो और उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो1 और उनके लिए हर घात की जगह बैठो। फिर यदि वे तौबा कर लें और नमाज़ क़ायम करें तथा ज़कात दें, तो उनका रास्ता छोड़ दो। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
९:६
وَإِنْऔर अगरwa-inأَحَدٌۭकोई एकaḥadunمِّنَofminaٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकीन में सेl-mush'rikīnaٱسْتَجَارَكَपनाह माँगे आपसेis'tajārakaفَأَجِرْهُतो पनाह दे दीजिए उसेfa-ajir'huحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيَسْمَعَवो सुन लेyasmaʿaكَلَـٰمَकलामkalāmaٱللَّهِअल्लाह काl-lahiثُمَّफिरthummaأَبْلِغْهُपहुँचा दीजिए उसेabligh'huمَأْمَنَهُۥ ۚउसके अमन की जगहmamanahuذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمْबवजह उसके कि वोbi-annahumقَوْمٌۭलोगqawmunلَّا(who) do not knowlāيَعْلَمُونَनहीं वो इल्म रखतेyaʿlamūna٦
और यदि मुश्रिकों में से कोई तुमसे शरण माँगे, तो उसे शरण दे दो, यहाँ तक कि वह अल्लाह की वाणी सुने। फिर उसे उसके सुरक्षित स्थान तक पहुँचा दो। यह इसलिए कि निःसंदेह वे ऐसे लोग हैं, जो ज्ञान नहीं रखते।
९:७
كَيْفَकिस तरहkayfaيَكُونُहो सकता हैyakūnuلِلْمُشْرِكِينَमुशरिकीन के लिएlil'mush'rikīnaعَهْدٌकोई अहदʿahdunعِندَwithʿindaٱللَّهِअल्लाह के नज़दीकl-lahiوَعِندَand withwaʿindaرَسُولِهِۦٓऔर उसके रसूल के नज़दीकrasūlihiإِلَّاसिवायillāٱلَّذِينَउनके जिनसेalladhīnaعَـٰهَدتُّمْमुआहिदा किया तुमनेʿāhadttumعِندَपासʿindaٱلْمَسْجِدِAl-Masjidl-masjidiٱلْحَرَامِ ۖमस्जिदे हराम केl-ḥarāmiفَمَاतो जब तकfamāٱسْتَقَـٰمُوا۟वो सीधे रहेंis'taqāmūلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفَٱسْتَقِيمُوا۟पस तुम भी सीधे रहोfa-is'taqīmūلَهُمْ ۚउनके लिएlahumإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيُحِبُّवो पसंद करता हैyuḥibbuٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों कोl-mutaqīna٧
इन मुश्रिकों (बहुदेववादियों) की अल्लाह और उसके रसूल के पास कोई संधि कैसे हो सकती है, सिवाय उनके जिनसे तुमने सम्मानित मस्जिद (काबा) के पास संधि की1 थी? तो जब तक वे तुम्हारे लिए (वचन पर) क़ायम रहें, तो तुम भी उनके लिए क़ायम रहो। निःसंदेह अल्लाह परहेज़गारों से प्रेम करता है।
९:८
كَيْفَकैसे (मुमकिन है)kayfaوَإِنजबकि अगरwa-inيَظْهَرُوا۟वो ग़लबा पा जाऐंyaẓharūعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumلَاthey do not regard (the ties)lāيَرْقُبُوا۟ना वो लिहाज़ करेंगेyarqubūفِيكُمْतुम्हारे मामले मेंfīkumإِلًّۭاकिसी क़राबत काillanوَلَاऔर नाwalāذِمَّةًۭ ۚकिसी मुआहिदे काdhimmatanيُرْضُونَكُمवो राज़ी करते हैं तुम्हेंyur'ḍūnakumبِأَفْوَٰهِهِمْअपने मुँहों सेbi-afwāhihimوَتَأْبَىٰऔर इन्कार करते हैंwatabāقُلُوبُهُمْदिल उनकेqulūbuhumوَأَكْثَرُهُمْऔर अक्सर उनकेwa-aktharuhumفَـٰسِقُونَफ़ासिक़ हैंfāsiqūna٨
(उन लोगों की संधि) कैसे संभव है, जबकि वे यदि तुमपर अधिकार पा जाएँ, तो तुम्हारे विषय में न किसी रिश्तेदारी का सम्मान करेंगे और न किसी वचन का। वे तुम्हें अपने मुखों से प्रसन्न करते हैं, जबकि उनके दिल इनकार करते हैं और उनमें से अधिकांश अवज्ञाकारी हैं।
९:९
ٱشْتَرَوْا۟उन्होंने बेच डालाish'tarawبِـَٔايَـٰتِ[with] the Verses of Allahbiāyātiٱللَّهِअल्लाह की आयात कोl-lahiثَمَنًۭاक़ीमतthamananقَلِيلًۭاथोड़ी मेंqalīlanفَصَدُّوا۟फिर उन्होंने रोकाfaṣaddūعَنfromʿanسَبِيلِهِۦٓ ۚउसके रास्ते सेsabīlihiإِنَّهُمْबेशक वोinnahumسَآءَकितना बुरा हैsāaمَاजोmāكَانُوا۟हैं वोkānūيَعْمَلُونَवो अमल कर रहे हैंyaʿmalūna٩
उन्होंने अल्लाह की आयतों के बदले थोड़ा-सा मूल्य ले लिया1, फिर उन्होंने अल्लाह की राह (इस्लाम) से रोका। निःसंदेह बुरा है, जो वे करते रहे हैं।
९:१०
لَاNotlāيَرْقُبُونَनहीं वो लिहाज़ करतेyarqubūnaفِىtowardsfīمُؤْمِنٍकिसी मोमिन (के बारे में)mu'mininإِلًّۭاकिसी क़राबत काillanوَلَاऔर नाwalāذِمَّةًۭ ۚकिसी मुआहिदे काdhimmatanوَأُو۟لَـٰٓئِكَऔर यही लोग हैंwa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْمُعْتَدُونَजो हद से बढ़ने वाले हैंl-muʿ'tadūna١٠
वे किसी ईमान वाले के बारे में न किसी रिश्तेदारी का सम्मान करते हैं और न किसी वचन का, और यही लोग सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।
९:११
فَإِنफिर अगरfa-inتَابُوا۟वो तौबा कर लेंtābūوَأَقَامُوا۟और वो क़ायम करेंwa-aqāmūٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَءَاتَوُا۟और वो अदा करेंwaātawūٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataفَإِخْوَٰنُكُمْतो भाई हैं तुम्हारेfa-ikh'wānukumفِىinfīٱلدِّينِ ۗदीन मेंl-dīniوَنُفَصِّلُऔर हम खोल-खोल कर बयान करते हैंwanufaṣṣiluٱلْـَٔايَـٰتِआयात कोl-āyātiلِقَوْمٍۢउन लोगों के लिएliqawminيَعْلَمُونَजो इल्म रखते हैंyaʿlamūna١١
अतः यदि वे तौबा कर लें और नमाज़ क़ायम करें और ज़कात दें, तो धर्म में तुम्हारे भाई हैं। और हम उन लोगों के लिए आयतें खोलकर बयान करते हैं, जो जानते हैं।
९:१२
وَإِنऔर अगरwa-inنَّكَثُوٓا۟वो तोड़ देंnakathūأَيْمَـٰنَهُمअपनी क़समेंaymānahumمِّنۢafterminبَعْدِबादbaʿdiعَهْدِهِمْअपने अहद करने केʿahdihimوَطَعَنُوا۟और वो तअन(ताना) करेंwaṭaʿanūفِى[in]fīدِينِكُمْतुम्हारे दीन मेंdīnikumفَقَـٰتِلُوٓا۟तो जंग करोfaqātilūأَئِمَّةَइमामों सेa-immataٱلْكُفْرِ ۙकुफ़्र केl-kuf'riإِنَّهُمْबेशक वोinnahumلَآnolāأَيْمَـٰنَनहीं हैं कोई क़समेंaymānaلَهُمْउनकीlahumلَعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيَنتَهُونَवो रुक जाऐंyantahūna١٢
और यदि वे अपने वचन के बाद अपनी क़समें तोड़ दें और तुम्हारे धर्म की निंदा करें, तो कुफ़्र के प्रमुखों से युद्ध करो। क्योंकि उनकी क़समों का कोई विश्वास नहीं। ताकि वे (अत्याचार से) रुक जाएँ।
९:१३
أَلَاक्या नहींalāتُقَـٰتِلُونَतुम जंग करोगेtuqātilūnaقَوْمًۭاऐसी क़ौम सेqawmanنَّكَثُوٓا۟जिन्होंने तोड़ दींnakathūأَيْمَـٰنَهُمْअपनी क़समेंaymānahumوَهَمُّوا۟और उन्होंने इरादा कियाwahammūبِإِخْرَاجِनिकालने काbi-ikh'rājiٱلرَّسُولِरसूल कोl-rasūliوَهُمहालाँकि वोwahumبَدَءُوكُمْउन्होंने इब्तिदा की थी तुमसेbadaūkumأَوَّلَfirstawwalaمَرَّةٍ ۚपहली मर्तबाmarratinأَتَخْشَوْنَهُمْ ۚक्या तुम डरते हो उनसेatakhshawnahumفَٱللَّهُतो अल्लाहfal-lahuأَحَقُّज़्यादा हक़दार हैaḥaqquأَنकिanتَخْشَوْهُतुम डरो उससेtakhshawhuإِنअगरinكُنتُمहो तुमkuntumمُّؤْمِنِينَईमान लाने वालेmu'minīna١٣
क्या तुम उन लोगों से नहीं लड़ोगे, जिन्होंने अपनी क़समें तोड़ दीं और रसूल को निकालने का इरादा किया, और उन्होंने ही तुमसे युद्ध का आरंभ किया है? क्या तुम उनसे डरते हो? तो अल्लाह अधिक हक़दार है कि तुम उससे डरो, यदि तुम ईमानवाले1 हो।
९:१४
قَـٰتِلُوهُمْजंग करो उनसेqātilūhumيُعَذِّبْهُمُअज़ाब देगा उन्हेंyuʿadhib'humuٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِأَيْدِيكُمْतुम्हारे लिएbi-aydīkumوَيُخْزِهِمْऔर वो रुस्वा करेगा उन्हेंwayukh'zihimوَيَنصُرْكُمْऔर वो मदद करेगा तुम्हारीwayanṣur'kumعَلَيْهِمْउनके ख़िलाफ़ʿalayhimوَيَشْفِऔर वो शिफ़ा बख़्शेगाwayashfiصُدُورَसीनों कोṣudūraقَوْمٍۢ(of) a peopleqawminمُّؤْمِنِينَमोमिन क़ौम केmu'minīna١٤
उनसे युद्ध करो, अल्लाह उन्हें तुम्हारे हाथों से सज़ा देगा और उन्हें अपमानित करेगा और उनके विरुद्ध तुम्हारी सहायता करेगा और ईमान वालों के दिलों को ठंडा करेगा।
९:१५
وَيُذْهِبْऔर वो ले जाएगाwayudh'hibغَيْظَग़ुस्साghayẓaقُلُوبِهِمْ ۗउनके दिलों काqulūbihimوَيَتُوبُऔर मेहरबान होगाwayatūbuٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىٰofʿalāمَنऊपर जिसकेmanيَشَآءُ ۗवो चाहेगाyashāuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunحَكِيمٌबहुत हिकमत वाला हैḥakīmun١٥
और उनके दिलों के क्रोध को दूर कर देगा और जिसकी चाहेगा, तौबा क़बूल करेगा और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:१६
أَمْक्याamحَسِبْتُمْगुमान किया तुमनेḥasib'tumأَنकिanتُتْرَكُوا۟तुम छोड़ दिए जाओगेtut'rakūوَلَمَّاहालाँकि अभी तक नहींwalammāيَعْلَمِजानाyaʿlamiٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaجَـٰهَدُوا۟जिहाद कियाjāhadūمِنكُمْतुम में सेminkumوَلَمْऔर नहींwalamيَتَّخِذُوا۟उन्होंने बनायाyattakhidhūمِنbesides Allahminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَلَاऔर नाwalāرَسُولِهِۦउसके रसूल केrasūlihiوَلَاऔर नाwalāٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों केl-mu'minīnaوَلِيجَةًۭ ۚकोई दिली दोस्तwalījatanوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuخَبِيرٌۢख़ूब ख़बर रखने वाला हैkhabīrunبِمَاउसकी जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūna١٦
क्या तुमने समझ रखा है कि तुम यूँ ही छोड़ दिए जाओगे, हालाँकि अभी तक अल्लाह ने उन लोगों को नहीं जाना ही, जिन्होंने तुममें से जिहाद किया तथा अल्लाह और उसके रसूल और ईमान वालों के सिवाय किसी को भेदी मित्र नहीं बनाया? और अल्लाह उससे अच्छी तरह सूचित है, जो तुम कर रहे हो।
९:१७
مَاनहींmāكَانَहैkānaلِلْمُشْرِكِينَमुशरिकीन के लिएlil'mush'rikīnaأَنकिanيَعْمُرُوا۟वो आबाद करेंyaʿmurūمَسَـٰجِدَमस्जिदेंmasājidaٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiشَـٰهِدِينَशहादत देने वालेshāhidīnaعَلَىٰٓagainstʿalāأَنفُسِهِمअपने नफ़्सों परanfusihimبِٱلْكُفْرِ ۚकुफ़्र कीbil-kuf'riأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaحَبِطَتْज़ाया हो गएḥabiṭatأَعْمَـٰلُهُمْआमाल उनकेaʿmāluhumوَفِىand inwafīٱلنَّارِऔर आग मेंl-nāriهُمْवोhumخَـٰلِدُونَहमेशा रहने वाले हैंkhālidūna١٧
मुश्रिकों (बहुदेववादियों) के लिए योग्य नहीं कि वे अल्लाह की मस्जिदों को आबाद करें, जबकि वे स्वयं अपने विरुद्ध कुफ़्र की गवाही देने वाले हैं। ये वही हैं जिनके कर्म व्यर्थ हो गए और वे आग ही में सदा के लिए रहने वाले हैं।
९:१८
إِنَّمَاबेशकinnamāيَعْمُرُआबाद करता हैyaʿmuruمَسَـٰجِدَमस्जिदेंmasājidaٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiمَنْवो जोmanءَامَنَईमान लाएāmanaبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَٱلْيَوْمِand the Daywal-yawmiٱلْـَٔاخِرِऔर आख़िरी दिन परl-ākhiriوَأَقَامَऔर वो क़ायम करेwa-aqāmaٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَءَاتَىऔर वो अदा करेwaātāٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataوَلَمْऔर नाwalamيَخْشَवो डरेyakhshaإِلَّاसिवायillāٱللَّهَ ۖअल्लाह केl-lahaفَعَسَىٰٓतो उम्मीद हैfaʿasāأُو۟لَـٰٓئِكَये लोगulāikaأَنकिanيَكُونُوا۟वो होंगेyakūnūمِنَofminaٱلْمُهْتَدِينَहिदायत पाने वालों में सेl-muh'tadīna١٨
अल्लाह की मस्जिदें तो वही आबाद करता है, जो अल्लाह पर और अंतिम दिन (क़ियामत) पर ईमान लाया, तथा उसने नमाज़ क़ायम की और ज़कात दी और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरा। तो ये लोग आशा है कि मार्ग दर्शन पाने वालों में से होंगे।
९:१९
۞ أَجَعَلْتُمْक्या बना लिया तुमनेajaʿaltumسِقَايَةَपानी पिलानाsiqāyataٱلْحَآجِّहाजियों कोl-ḥājiوَعِمَارَةَऔर आबाद करनाwaʿimārataٱلْمَسْجِدِमस्जिदेl-masjidiٱلْحَرَامِहराम कोl-ḥarāmiكَمَنْमानिन्द उसके जोkamanءَامَنَईमान लायाāmanaبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَٱلْيَوْمِand the Daywal-yawmiٱلْـَٔاخِرِऔर आख़िरी दिन परl-ākhiriوَجَـٰهَدَऔर उसने जिहाद कियाwajāhadaفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِ ۚअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiلَاThey are not equallāيَسْتَوُۥنَनहीं वो बराबर हो सकतेyastawūnaعِندَnearʿindaٱللَّهِ ۗअल्लाह के नज़दीकl-lahiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaٱلظَّـٰلِمِينَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimīna١٩
क्या तुमने हाजियों को पानी पिलाना और मस्जिद-ए-हराम को आबाद करना, उसके जैसा बना दिया जो अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान लाया और उसने अल्लाह की राह में जिहाद किया? ये अल्लाह के यहाँ बराबर नहीं हैं तथा अल्लाह अत्याचारी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।
९:२०
ٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَهَاجَرُوا۟और उन्होंने हिजरत कीwahājarūوَجَـٰهَدُوا۟और उन्होंने जिहाद कियाwajāhadūفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiبِأَمْوَٰلِهِمْअपने मालों सेbi-amwālihimوَأَنفُسِهِمْऔर अपनी जानों सेwa-anfusihimأَعْظَمُज़्यादा बड़े हैंaʿẓamuدَرَجَةًदर्जे मेंdarajatanعِندَnearʿindaٱللَّهِ ۚअल्लाह के नज़दीकl-lahiوَأُو۟لَـٰٓئِكَऔर यही लोग हैंwa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْفَآئِزُونَजो कामयाब होने वाले हैंl-fāizūna٢٠
जो लोग ईमान लाए तथा हिजरत की और अल्लाह की राह में अपने धनों और अपने प्राणों के साथ जिहाद किया, अल्लाह के यहाँ पद में अधिक बड़े हैं और वही लोग सफल हैं।
९:२१
يُبَشِّرُهُمْख़ुशख़बरी देता है उन्हेंyubashiruhumرَبُّهُمरब उनकाrabbuhumبِرَحْمَةٍۢरहमत कीbiraḥmatinمِّنْهُअपनी तरफ़ सेmin'huوَرِضْوَٰنٍۢऔर रज़ामन्दी कीwariḍ'wāninوَجَنَّـٰتٍۢऔर बाग़ात कीwajannātinلَّهُمْउनके लिएlahumفِيهَاउनमेंfīhāنَعِيمٌۭनेअमतें हैंnaʿīmunمُّقِيمٌक़ायम रहने वालीmuqīmun٢١
उनका पालनहार उन्हें अपनी ओर से दया और प्रसन्नता तथा ऐसे बाग़ों की शुभ सूचना देता है, जिनमें उनके लिए शाश्वत आनंद है।
९:२२
خَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَآउनमेंfīhāأَبَدًا ۚहमेशा-हमेशाabadanإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعِندَهُۥٓउसके पासʿindahuأَجْرٌअजर हैajrunعَظِيمٌۭबहुत बड़ाʿaẓīmun٢٢
जिनमें वे हमेशा रहने वाले हैं। निःसंदेह अल्लाह ही के पास बड़ा बदला है।
९:२३
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notlāتَتَّخِذُوٓا۟ना तुम बनाओtattakhidhūءَابَآءَكُمْअपने आबा ओ अजदाद कोābāakumوَإِخْوَٰنَكُمْऔर अपने भाईयों कोwa-ikh'wānakumأَوْلِيَآءَदोस्तawliyāaإِنِअगरiniٱسْتَحَبُّوا۟वो तरजीह देंis'taḥabbūٱلْكُفْرَकुफ़्र कोl-kuf'raعَلَىoverʿalāٱلْإِيمَـٰنِ ۚईमान परl-īmāniوَمَنऔर जो कोईwamanيَتَوَلَّهُمदोस्त रखेगा उन्हेंyatawallahumمِّنكُمْतुम में सेminkumفَأُو۟لَـٰٓئِكَतो यही लोग हैंfa-ulāikaهُمُवोhumuٱلظَّـٰلِمُونَजो ज़ालिम हैंl-ẓālimūna٢٣
ऐ ईमान वालो! अपने बापों और अपने भाइयों को दोस्त न बनाओ, यदि वे ईमान की अपेक्षा कुफ़्र से प्रेम करें, और तुममें से जो व्यक्ति उनसे दोस्ती रखेगा, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
९:२४
قُلْकह दीजिएqulإِنअगरinكَانَहैंkānaءَابَآؤُكُمْआबा ओ अजदाद तुम्हारेābāukumوَأَبْنَآؤُكُمْऔर बेटे तुम्हारेwa-abnāukumوَإِخْوَٰنُكُمْऔर भाई तुम्हारेwa-ikh'wānukumوَأَزْوَٰجُكُمْऔर बीवियाँ तुम्हारीwa-azwājukumوَعَشِيرَتُكُمْऔर ख़ानदान तुम्हारेwaʿashīratukumوَأَمْوَٰلٌऔर मालwa-amwālunٱقْتَرَفْتُمُوهَاकमाया तुमने जिन्हेंiq'taraftumūhāوَتِجَـٰرَةٌۭऔर तिजारतwatijāratunتَخْشَوْنَतुम डरते होtakhshawnaكَسَادَهَاउसके मन्दा होने सेkasādahāوَمَسَـٰكِنُऔर घरwamasākinuتَرْضَوْنَهَآतुम पसंद करते हो जिन्हेंtarḍawnahāأَحَبَّज़्यादा महबूब हैंaḥabbaإِلَيْكُمतरफ़ तुम्हारेilaykumمِّنَthanminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiوَرَسُولِهِۦऔर उसके रसूल सेwarasūlihiوَجِهَادٍۢऔर जिहाद सेwajihādinفِىinfīسَبِيلِهِۦउसके रास्ते मेंsabīlihiفَتَرَبَّصُوا۟तो इन्तिज़ार करोfatarabbaṣūحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيَأْتِىَले आएyatiyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِأَمْرِهِۦ ۗफ़ैसला अपनाbi-amrihiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं वो हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaٱلْفَـٰسِقِينَजो फ़ासिक़ हैंl-fāsiqīna٢٤
(ऐ नबी!) कह दो कि यदि तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे और तुम्हारे भाई और तुम्हारी पत्नियाँ और तुम्हारे परिवार और (वे) धन जो तुमने कमाए हैं और (वह) व्यापार जिसके मंदा होने से तुम डरते हो तथा रहने के घर जिन्हें तुम पसंद करते हो, तुम्हें अल्लाह तथा उसके रसूल और अल्लाह की राह में जिहाद करने से अधिक प्रिय हैं, तो प्रतीक्षा करो, यहाँ तक कि अल्लाह अपना हुक्म ले आए और अल्लाह अवज्ञाकारियों को मार्ग नहीं दिखाता।
९:२५
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadنَصَرَكُمُमदद की तुम्हारीnaṣarakumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفِىinfīمَوَاطِنَजगहों मेंmawāṭinaكَثِيرَةٍۢ ۙबहुत सीkathīratinوَيَوْمَand (on the) daywayawmaحُنَيْنٍ ۙऔर हुनैन के दिनḥunayninإِذْजबidhأَعْجَبَتْكُمْभली लगी तुम्हेंaʿjabatkumكَثْرَتُكُمْकसरत तुम्हारीkathratukumفَلَمْपस नाfalamتُغْنِउसने फ़ायदा दियाtugh'niعَنكُمْतुम्हेंʿankumشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَضَاقَتْऔर तंग हो गईwaḍāqatعَلَيْكُمُतुम परʿalaykumuٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuبِمَاबावजूद उसके जोbimāرَحُبَتْकुशादा थीraḥubatثُمَّफिरthummaوَلَّيْتُمफिर गए तुमwallaytumمُّدْبِرِينَपीठ फेर करmud'birīna٢٥
निःसंदेह अल्लाह ने बहुत-से स्थानों पर तुम्हारी सहायता की तथा हुनैन1 के दिन भी, जब तुम्हारी बहुतायत ने तुम्हें आत्ममुग्ध बना दिया, फिर वह तुम्हारे कुछ काम न आई तथा तुमपर धरती अपने विस्तार के उपरांत तंग हो गई, फिर तुम पीठ फेरते हुए लौट गए।
९:२६
ثُمَّफिरthummaأَنزَلَउतारीanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuسَكِينَتَهُۥसकीनत अपनीsakīnatahuعَلَىٰonʿalāرَسُولِهِۦअपने रसूल परrasūlihiوَعَلَىand onwaʿalāٱلْمُؤْمِنِينَऔर मोमिनों परl-mu'minīnaوَأَنزَلَऔर उसने उतारेwa-anzalaجُنُودًۭاऐसे लश्करjunūdanلَّمْनहींlamتَرَوْهَاनहीं देखा तुमने उन्हेंtarawhāوَعَذَّبَऔर उसने अज़ाब दियाwaʿadhabaٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟ ۚकुफ़्र कियाkafarūوَذَٰلِكَऔर यही हैwadhālikaجَزَآءُबदलाjazāuٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों काl-kāfirīna٢٦
फिर अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमानवालों पर अपनी शांति उतारी, और ऐसी सेनाएँ उतारीं जिन्हें तुमने नहीं देखा1, और उन लोगों को दंड दिया जिन्होंने कुफ़्र किया, और यही काफ़िरों का बदला है।
९:२७
ثُمَّफिरthummaيَتُوبُमेहरबान होगाyatūbuٱللَّهُअल्लाहl-lahuمِنۢafterminبَعْدِबादbaʿdiذَٰلِكَइसकेdhālikaعَلَىٰforʿalāمَنजिस परmanيَشَآءُ ۗवो चाहेगाyashāuوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun٢٧
फिर इसके बाद अल्लाह जिसकी चाहेगा, तौबा क़बूल1 करेगा। और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
९:२८
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِنَّمَاबेशकinnamāٱلْمُشْرِكُونَमुशरिकीनl-mush'rikūnaنَجَسٌۭनापाक हैंnajasunفَلَاतो नाfalāيَقْرَبُوا۟वो क़रीब आऐंyaqrabūٱلْمَسْجِدَमस्जिदेl-masjidaٱلْحَرَامَहराम केl-ḥarāmaبَعْدَबादbaʿdaعَامِهِمْthis, their (final) yearʿāmihimهَـٰذَا ۚअपने इस साल केhādhāوَإِنْऔर अगरwa-inخِفْتُمْख़ौफ़ हो तुम्हेंkhif'tumعَيْلَةًۭमुफ़लिसी काʿaylatanفَسَوْفَतो अनक़रीबfasawfaيُغْنِيكُمُग़नी कर देगा तुम्हेंyugh'nīkumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuمِنfromminفَضْلِهِۦٓअपने फ़ज़ल सेfaḍlihiإِنअगरinشَآءَ ۚवो चाहेshāaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunحَكِيمٌۭबहत हिकमत वाला हैḥakīmun٢٨
ऐ ईमान लाने वालो! निःसंदेह बहुदेववादी अशुद्ध हैं। अतः वे इस वर्ष1 के बाद मस्जिद-ए-हराम के पास न आएँ। और यदि तुम किसी प्रकार की गरीबी से डरते2 हो, तो अल्लाह जल्द ही तुम्हें अपनी कृपा से समृद्ध करेगा, यदि उसने चाहा। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:२९
قَـٰتِلُوا۟जंग करोqātilūٱلَّذِينَउनसे जोalladhīnaلَاनहींlāيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान रखतेyu'minūnaبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَلَاऔर नाwalāبِٱلْيَوْمِin the Daybil-yawmiٱلْـَٔاخِرِआख़िरी दिन परl-ākhiriوَلَاऔर नहींwalāيُحَرِّمُونَवो हराम समझतेyuḥarrimūnaمَاजोmāحَرَّمَहराम कियाḥarramaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَرَسُولُهُۥऔर उसके रसूल नेwarasūluhuوَلَاऔर नहींwalāيَدِينُونَवो दीन बनातेyadīnūnaدِينَदीनेdīnaٱلْحَقِّहक़ कोl-ḥaqiمِنَfromminaٱلَّذِينَउनमें से जोalladhīnaأُوتُوا۟दिए गएūtūٱلْكِتَـٰبَकिताबl-kitābaحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيُعْطُوا۟वो दे देंyuʿ'ṭūٱلْجِزْيَةَजिज़याl-jiz'yataعَنwillinglyʿanيَدٍۢहाथ सेyadinوَهُمْइस हाल में कि वोwahumصَـٰغِرُونَज़लील होंṣāghirūna٢٩
(ऐ ईमान वालो!) उन किताब वालों से युद्ध करो, जो न अल्लाह पर ईमान रखते हैं और न अंतिम दिन (क़ियामत) पर, और न उसे हराम समझते हैं, जिसे अल्लाह और उसके रसूल ने हराम (वर्जित) किया है और न सत्धर्म को अपनाते हैं, यहाँ तक कि वे अपमानित होकर अपने हाथ से जिज़या दें।
९:३०
وَقَالَتِऔर कहाwaqālatiٱلْيَهُودُयहूद नेl-yahūduعُزَيْرٌउज़ैरʿuzayrunٱبْنُबेटे हैंub'nuٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَقَالَتِऔर कहाwaqālatiٱلنَّصَـٰرَىनसारा नेl-naṣārāٱلْمَسِيحُमसीहl-masīḥuٱبْنُबेटे हैंub'nuٱللَّهِ ۖअल्लाह केl-lahiذَٰلِكَयेdhālikaقَوْلُهُمबात है उनकीqawluhumبِأَفْوَٰهِهِمْ ۖउनके मुँहों सेbi-afwāhihimيُضَـٰهِـُٔونَवो नक़ल करते हैंyuḍāhiūnaقَوْلَबातqawlaٱلَّذِينَउनकी जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنbeforeminقَبْلُ ۚइससे पहलेqabluقَـٰتَلَهُمُहलाक करे उन्हेंqātalahumuٱللَّهُ ۚअल्लाहl-lahuأَنَّىٰकहाँ सेannāيُؤْفَكُونَवो फेरे जाते हैंyu'fakūna٣٠
तथा यहूदियों ने कहा कि उज़ैर अल्लाह का पुत्र है और ईसाइयों ने कहा कि मसीह अल्लाह का पुत्र है। ये उनके अपने मुँह की बातें हैं। वे उन लोगों जैसी बातें कर रहे हैं, जिन्होंने इनसे पहले कुफ़्र किया। उनपर अल्लाह की मार हो! वे कहाँ बहकाए जा रहे हैं?
९:३१
ٱتَّخَذُوٓا۟उन्होंने बना लियाittakhadhūأَحْبَارَهُمْअपने उलमा कोaḥbārahumوَرُهْبَـٰنَهُمْऔर अपने राहिबों कोwaruh'bānahumأَرْبَابًۭاरब (मुख़्तलिफ़)arbābanمِّنbesidesminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَٱلْمَسِيحَand the Messiahwal-masīḥaٱبْنَsonib'naمَرْيَمَऔर मसीह इब्ने मरियम कोmaryamaوَمَآहालाँकि नहींwamāأُمِرُوٓا۟वो हुक्म दिए गएumirūإِلَّاमगरillāلِيَعْبُدُوٓا۟ये कि वो इबादत करेंliyaʿbudūإِلَـٰهًۭاइलाह कीilāhanوَٰحِدًۭا ۖएक हीwāḥidanلَّآनहींlāإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَ ۚवो हीhuwaسُبْحَـٰنَهُۥपाक है वोsub'ḥānahuعَمَّاउससे जोʿammāيُشْرِكُونَवो शरीक ठहराते हैंyush'rikūna٣١
उन्होंने अपने विद्वानों और अपने दरवेशों को अल्लाह के सिवा रब बना1 लिया तथा मरयम के पुत्र मसीह को (भी)। हालाँकि, उन्हें इसके सिवा आदेश नहीं दिया गया था कि वे एक पूज्य की इबादत करें, उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। वह उससे पवित्र है, जो वे साझी बनाते हैं।
९:३२
يُرِيدُونَवो चाहते हैंyurīdūnaأَنकिanيُطْفِـُٔوا۟वो बुझा देंyuṭ'fiūنُورَनूरnūraٱللَّهِअल्लाह काl-lahiبِأَفْوَٰهِهِمْअपने मुँहों सेbi-afwāhihimوَيَأْبَىऔर इन्कार करता हैwayabāٱللَّهُअल्लाहl-lahuإِلَّآमगरillāأَنये कि वो इबादत करेंanيُتِمَّवो पूरा करेyutimmaنُورَهُۥअपने नूर कोnūrahuوَلَوْऔर अगरचेwalawكَرِهَनापसंद करेंkarihaٱلْكَـٰفِرُونَकाफ़िरl-kāfirūna٣٢
वे चाहते हैं कि अल्लाह के प्रकाश को अपने मुँह से से बुझा1 दें, हालाँकि अल्लाह अपने प्रकाश को पूरा किए बिना नहीं रहेगा, भले ही काफिरों को बुरा लगे।
९:३३
هُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىٓजिसनेalladhīأَرْسَلَभेजाarsalaرَسُولَهُۥअपने रसूल कोrasūlahuبِٱلْهُدَىٰसाथ हिदायतbil-hudāوَدِينِऔर दीनेwadīniٱلْحَقِّहक़ केl-ḥaqiلِيُظْهِرَهُۥताकि वो ग़ालिब कर दे उसेliyuẓ'hirahuعَلَىoverʿalāٱلدِّينِदीन परl-dīniكُلِّهِۦसबके सबkullihiوَلَوْऔर अगरचेwalawكَرِهَनापसंद करेंkarihaٱلْمُشْرِكُونَमुशरिकl-mush'rikūna٣٣
वही है जिसने अपने रसूल1 को मार्गदर्शन तथा सत्धर्म (इस्लाम) के साथ भेजा, ताकि उसे प्रत्येक धर्म पर प्रभुत्व प्रदान कर दे2, भले ही बहुदेववादियों को बुरा लगे।
९:३४
۞ يَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلَّذِينَलोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِنَّबेशकinnaكَثِيرًۭاबहुत सेkathīranمِّنَofminaٱلْأَحْبَارِउलमा में सेl-aḥbāriوَٱلرُّهْبَانِऔर राहिबों में सेwal-ruh'bāniلَيَأْكُلُونَअलबत्ता खाते हैंlayakulūnaأَمْوَٰلَमालamwālaٱلنَّاسِलोगों केl-nāsiبِٱلْبَـٰطِلِनाहक़bil-bāṭiliوَيَصُدُّونَऔर वो रोकते हैंwayaṣuddūnaعَنfromʿanسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِ ۗअल्लाह के रास्ते सेl-lahiوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaيَكْنِزُونَजमा करते हैंyaknizūnaٱلذَّهَبَसोनाl-dhahabaوَٱلْفِضَّةَऔर चाँदीwal-fiḍataوَلَاऔर नहींwalāيُنفِقُونَهَاवो ख़र्च करते उसेyunfiqūnahāفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiفَبَشِّرْهُمपस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उन्हेंfabashir'humبِعَذَابٍअज़ाबbiʿadhābinأَلِيمٍۢदर्दनाक कीalīmin٣٤
ऐ ईमान वालो! निःसंदेह बहुत-से विद्वान तथा दरवेश निश्चित रूप से लोगों का धन अवैध तरीके से खाते हैं और अल्लाह की राह से रोकते हैं। तथा जो लोग सोना-चाँदी एकत्र करके रखते हैं और उसे अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते, तो उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो।
९:३५
يَوْمَजिस दिनyawmaيُحْمَىٰतपाया जाएगाyuḥ'māعَلَيْهَاउस (माल) कोʿalayhāفِىinfīنَارِआग मेंnāriجَهَنَّمَजहन्नम कीjahannamaفَتُكْوَىٰफिर दाग़ी जाऐंगीfatuk'wāبِهَاसाथ उसकेbihāجِبَاهُهُمْपेशानियाँ उनकीjibāhuhumوَجُنُوبُهُمْऔर पहलू उनकेwajunūbuhumوَظُهُورُهُمْ ۖऔर पुश्तें उनकीwaẓuhūruhumهَـٰذَاये हैhādhāمَاजोmāكَنَزْتُمْजमा किया तुमनेkanaztumلِأَنفُسِكُمْअपने नफ़्सों के लिएli-anfusikumفَذُوقُوا۟पस मज़ा चखोfadhūqūمَاजोmāكُنتُمْथे तुमkuntumتَكْنِزُونَतुम जमा करतेtaknizūna٣٥
जिस दिन उसे जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, फिर उससे उनके माथों और उनके पहलुओं और उनकी पीठों को दागा जाएगा। (कहा जाएगा :) यही है, जो तुमने अपने लिए कोश बनाया था। तो (अब) उसका स्वाद चखो जो तुम कोश बनाया करते थे।
९:३६
إِنَّबेशकinnaعِدَّةَगिनतीʿiddataٱلشُّهُورِमहीनों कीl-shuhūriعِندَwithʿindaٱللَّهِअल्लाह के नज़दीकl-lahiٱثْنَا(is) twelveith'nāعَشَرَबारहʿasharaشَهْرًۭاमहीने हैshahranفِىinfīكِتَـٰبِ(the) ordinancekitābiٱللَّهِअल्लाह की किताब मेंl-lahiيَوْمَजिस दिनyawmaخَلَقَउसने पैदा कियाkhalaqaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों कोl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaمِنْهَآउनमें सेmin'hāأَرْبَعَةٌचारarbaʿatunحُرُمٌۭ ۚहुरमत वाले हैंḥurumunذَٰلِكَये हैdhālikaٱلدِّينُदीनl-dīnuٱلْقَيِّمُ ۚदुरुस्तl-qayimuفَلَاपस नाfalāتَظْلِمُوا۟तुम ज़ुल्म करोtaẓlimūفِيهِنَّइनमेंfīhinnaأَنفُسَكُمْ ۚअपने नफ़्सों परanfusakumوَقَـٰتِلُوا۟और जंग करोwaqātilūٱلْمُشْرِكِينَमुशरिकीन सेl-mush'rikīnaكَآفَّةًۭइकट्ठेkāffatanكَمَاजैसा किkamāيُقَـٰتِلُونَكُمْवो जंग करते हैं तुमसेyuqātilūnakumكَآفَّةًۭ ۚइकट्ठेkāffatanوَٱعْلَمُوٓا۟और जान लोwa-iʿ'lamūأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaمَعَसाथ हैmaʿaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों केl-mutaqīna٣٦
निःसंदेह अल्लाह के निकट महीनों की संख्या, अल्लाह की किताब में बारह महीने है, जिस दिन उसने आकाशों तथा धरती की रचना की। उनमें से चार महीने हुरमत1 वाले हैं। यही सीधा धर्म है। अतः इनमें अपने प्राणों पर अत्याचार2 न करो। तथा बहुदेववादियों से सब मिलकर युद्ध करो, जैसे वे तुमसे मिलकर युद्ध करते हैं, और जान लो कि निःसंदेह अल्लाह मुत्तक़ी लोगों के साथ है।
९:३७
إِنَّمَاबेशकinnamāٱلنَّسِىٓءُमहीनों को आगे पीछे करनाl-nasīuزِيَادَةٌۭज़्यादती हैziyādatunفِىinfīٱلْكُفْرِ ۖकुफ़्र मेंl-kuf'riيُضَلُّगुमराह किए जाते हैंyuḍalluبِهِसाथ उसकेbihiٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūيُحِلُّونَهُۥवो हलाल करते हैं उसेyuḥillūnahuعَامًۭاएक सालʿāmanوَيُحَرِّمُونَهُۥऔर हराम करते हैं उसेwayuḥarrimūnahuعَامًۭاएक सालʿāmanلِّيُوَاطِـُٔوا۟ताकि वो दुरुस्त कर लेंliyuwāṭiūعِدَّةَगिनतीʿiddataمَاउनकी जोmāحَرَّمَहराम ठहराएḥarramaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفَيُحِلُّوا۟पस वो हलाल करते हैंfayuḥillūمَاजोmāحَرَّمَहराम कियाḥarramaٱللَّهُ ۚअल्लाह नेl-lahuزُيِّنَमुज़य्यन कर दिए गएzuyyinaلَهُمْउनके लिएlahumسُوٓءُबुरेsūuأَعْمَـٰلِهِمْ ۗआमाल उनकेaʿmālihimوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaٱلْكَـٰفِرِينَजो काफ़िर हैंl-kāfirīna٣٧
तथ्य यह है कि महीनों को पीछे करना1 कुफ़्र में वृद्धि है, जिसके साथ वे लोग गुमराह किए जाते हैं जिन्होंने कुफ़्र किया। वे एक वर्ष उसे हलाल (वैध) कर लेते हैं और एक वर्ष उसे हराम (अवैध) कर लेते हैं। ताकि उन (महीनों) की गिनती पूरी कर लें, जो अल्लाह ने हराम किए हैं। फिर जो अल्लाह ने हराम (अवैध) किया है, उसे हलाल (वैध) कर लें। उनके बुरे काम उनके लिए सुंदर बना दिए गए हैं और अल्लाह काफ़िरों को सीधा रास्ता नहीं दिखाता।
९:३८
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūمَاक्या हैmāلَكُمْतुम्हेंlakumإِذَاजबidhāقِيلَकहा जाता हैqīlaلَكُمُतुमसेlakumuٱنفِرُوا۟निकलोinfirūفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiٱثَّاقَلْتُمْबोझल हो जाते हो तुमithāqaltumإِلَىtoilāٱلْأَرْضِ ۚतरफ़ ज़मीन केl-arḍiأَرَضِيتُمक्या राज़ी हो गए तुमaraḍītumبِٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी परbil-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāمِنَ(rather) thanminaٱلْـَٔاخِرَةِ ۚआख़िरत के (मुक़ाबले में)l-ākhiratiفَمَاतो नहींfamāمَتَـٰعُसामानmatāʿuٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी काl-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāفِىin (comparison to)fīٱلْـَٔاخِرَةِआख़िरत के (मुक़ाबले में)l-ākhiratiإِلَّاमगरillāقَلِيلٌबहुत थोड़ाqalīlun٣٨
ऐ ईमान वालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि अल्लाह की राह में निकलो, तो तुम धरती की ओर बहुत बोझल हो जाते हो? क्या तुम आख़िरत (परलोक) की तुलना में दुनिया के जीवन से खुश हो गए हो? तो दुनिया के जीवन का सामान आख़िरत के मुकाबले में बहुत थोड़ा है।1
९:३९
إِلَّاअगर नहींillāتَنفِرُوا۟तुम निकलोगेtanfirūيُعَذِّبْكُمْवो अज़ाब देगा तुम्हेंyuʿadhib'kumعَذَابًاअज़ाबʿadhābanأَلِيمًۭاदर्दनाकalīmanوَيَسْتَبْدِلْऔर वो बदल देगाwayastabdilقَوْمًاकोई क़ौमqawmanغَيْرَكُمْतुम्हारे अलावाghayrakumوَلَاऔर नहींwalāتَضُرُّوهُतुम ज़रर पहुँचा सकते उसेtaḍurrūhuشَيْـًۭٔا ۗकुछ भीshayanوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرٌख़ूब क़ुदरत रखने वाला हैqadīrun٣٩
यदि तुम नहीं निकलोगे, तो वह तुम्हें दर्दनाक यातना देगा और तुम्हारे स्थान पर दूसरे लोगों को ले आएगा और तुम उसे कोई हानि नहीं पहुँचा सकोगे। और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
९:४०
إِلَّاअगर नहींillāتَنصُرُوهُतुम मदद करोगे उसकीtanṣurūhuفَقَدْतो तहक़ीक़faqadنَصَرَهُमदद की उसकीnaṣarahuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuإِذْजबidhأَخْرَجَهُनिकाला उसेakhrajahuٱلَّذِينَउन लोगों ने जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūثَانِىَवो दूसरा (था)thāniyaٱثْنَيْنِदो मेंith'nayniإِذْwhenidhهُمَاजब वो दोनोंhumāفِى(were) infīٱلْغَارِग़ार में थेl-ghāriإِذْजबidhيَقُولُवो कह रहा थाyaqūluلِصَـٰحِبِهِۦअपने साथी सेliṣāḥibihiلَا(Do) notlāتَحْزَنْना तुम ग़म करोtaḥzanإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaمَعَنَا ۖहमारे साथ हैmaʿanāفَأَنزَلَतो उतारीfa-anzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuسَكِينَتَهُۥसकीनत अपनीsakīnatahuعَلَيْهِउस परʿalayhiوَأَيَّدَهُۥऔर उसने ताईद की उसकीwa-ayyadahuبِجُنُودٍۢऐसे लश्करों सेbijunūdinلَّمْनहींlamتَرَوْهَاतुमने देखा उन्हेंtarawhāوَجَعَلَऔर कर दियाwajaʿalaكَلِمَةَबात कोkalimataٱلَّذِينَउनकी जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūٱلسُّفْلَىٰ ۗपस्तl-suf'lāوَكَلِمَةُऔर बातwakalimatuٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiهِىَवो हीhiyaٱلْعُلْيَا ۗबुलन्द हैl-ʿul'yāوَٱللَّهُऔर है अल्लाहwal-lahuعَزِيزٌबहुत ज़बरदस्तʿazīzunحَكِيمٌखूब हिकमत वालाḥakīmun٤٠
यदि तुम उनकी सहायता न करो, तो निःसंदेह अल्लाह ने उनकी सहायता की, जब उन्हें उन लोगों ने निकाल दिया1 जिन्होंने कुफ़्र किया, जब वह दो में दूसरा थे, जब वे दोनों गुफा में थे, जब वह अपने साथी से कह रहे थे : शोकाकुल न हो। निःसंदेह अल्लाह हमारे साथ है।2 तो अल्लाह ने उनपर अपनी ओर से शांति उतार दी और उन्हें ऐसी सेनाओँ के साथ शक्ति प्रदान की, जिन्हें तुमने नहीं देखे और उन लोगों की बात नीची कर दी जिन्होंने कुफ़्र किया, और अल्लाह की बात ही सबसे ऊँची है और अल्लाह सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:४१
ٱنفِرُوا۟निकलोinfirūخِفَافًۭاहल्केkhifāfanوَثِقَالًۭاऔर बोझलwathiqālanوَجَـٰهِدُوا۟और जिहाद करोwajāhidūبِأَمْوَٰلِكُمْसाथ अपने मालोंbi-amwālikumوَأَنفُسِكُمْऔर अपने नफ़्सों केwa-anfusikumفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِ ۚअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiذَٰلِكُمْये बातdhālikumخَيْرٌۭबेहतर हैkhayrunلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumتَعْلَمُونَतुम जानतेtaʿlamūna٤١
हलके1 और बोझिल (हर स्थिति में) निकल पड़ो और अपने मालों और अपनी जानों के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानते हो।
९:४२
لَوْअगरlawكَانَहोताkānaعَرَضًۭاसामानʿaraḍanقَرِيبًۭاक़रीब काqarībanوَسَفَرًۭاऔर सफ़रwasafaranقَاصِدًۭاदर्मियानाqāṣidanلَّٱتَّبَعُوكَअलबत्ता वो पैरवी करते आपकीla-ittabaʿūkaوَلَـٰكِنۢऔर लेकिनwalākinبَعُدَتْदूर हो गईbaʿudatعَلَيْهِمُउन परʿalayhimuٱلشُّقَّةُ ۚमुसाफ़तl-shuqatuوَسَيَحْلِفُونَऔर अनक़रीब वो क़समें खाऐंगेwasayaḥlifūnaبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiلَوِअगरlawiٱسْتَطَعْنَاइस्तिताअत रखते हमis'taṭaʿnāلَخَرَجْنَاअलबत्ता निकलते हमlakharajnāمَعَكُمْसाथ तुम्हारेmaʿakumيُهْلِكُونَवो हलाक कर रहे हैंyuh'likūnaأَنفُسَهُمْअपने नफ़्सों कोanfusahumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُजानता हैyaʿlamuإِنَّهُمْबेशक वोinnahumلَكَـٰذِبُونَअलबत्ता झूठे हैंlakādhibūna٤٢
यदि शीघ्र मिलने वाल सामान और मध्यम यात्रा होती, तो वे अवश्य आपके पीछे चल पड़ते, लेकिन फ़ासला उनपर दूर पड़ गया। और जल्द ही वे अल्लाह की क़समें खाएँगे कि अगर हमारे पास ताकत होती, तो हम तुम्हारे साथ अवश्य निकलते। वे अपने आपको नष्ट कर रहे हैं और अल्लाह जानता है कि वे निश्चित रूप से झूठे हैं।
९:४३
عَفَاमाफ़ कर दियाʿafāٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَنكَआपकोʿankaلِمَक्योंlimaأَذِنتَइजाज़त दी आपनेadhintaلَهُمْउन्हेंlahumحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيَتَبَيَّنَज़ाहिर हो जातेyatabayyanaلَكَआपके लिएlakaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaصَدَقُوا۟सच कहाṣadaqūوَتَعْلَمَऔर आप जान लेतेwataʿlamaٱلْكَـٰذِبِينَझूठों कोl-kādhibīna٤٣
अल्लाह ने (ऐ नबी!) आपको क्षमा कर दिया, आपने उन्हें क्यों अनुमति दी, यहाँ तक कि आपके लिए वे लोग स्पष्ट हो जाते जिन्होंने सच कहा और आप झूठे लोगों को जान लेते।
९:४४
لَا(Would) not ask your permissionlāيَسْتَـْٔذِنُكَनहीं इजाज़त माँगते आपसेyastadhinukaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيُؤْمِنُونَईमान लाते हैंyu'minūnaبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَٱلْيَوْمِand the Daywal-yawmiٱلْـَٔاخِرِऔर आख़िरी दिन परl-ākhiriأَنकिanيُجَـٰهِدُوا۟वो जिहाद करेंyujāhidūبِأَمْوَٰلِهِمْसाथ अपने मालों केbi-amwālihimوَأَنفُسِهِمْ ۗऔर अपनी जानों केwa-anfusihimوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌۢख़ूब जानने वाला हैʿalīmunبِٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों केbil-mutaqīna٤٤
जो लोग अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं, वे आपसे अपने धनों और अपनी जानों के साथ जिहाद करने से अनुमति नहीं माँगते, और अल्लाह मुत्तक़ी लोगों को भली-भाँति जानने वाला है।
९:४५
إِنَّمَاबेशकinnamāيَسْتَـْٔذِنُكَइजाज़त माँगते हैं आपसेyastadhinukaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaلَا(do) notlāيُؤْمِنُونَनही वो ईमान रखतेyu'minūnaبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَٱلْيَوْمِand the Daywal-yawmiٱلْـَٔاخِرِऔर आख़िरी दिन परl-ākhiriوَٱرْتَابَتْऔर शक करते हैंwa-ir'tābatقُلُوبُهُمْदिल उनकेqulūbuhumفَهُمْपस वोfahumفِىinfīرَيْبِهِمْअपने शक मेंraybihimيَتَرَدَّدُونَवो मुतरदिद/हैरान हैंyataraddadūna٤٥
आपसे अनुमति केवल वही लोग माँगते हैं, जो अल्लाह तथा अंतिम दिन (आख़िरत) पर ईमान नहीं रखते और उनके दिल संदेह में पड़े हुए हैं। सो वे अपने संदेह में भ्रमित भटक रहे हैं।
९:४६
۞ وَلَوْऔर अगरwalawأَرَادُوا۟वो इरादा करतेarādūٱلْخُرُوجَनिकलने काl-khurūjaلَأَعَدُّوا۟ज़रूर वो तैयार करतेla-aʿaddūلَهُۥउसके लिएlahuعُدَّةًۭसाज़ो सामानʿuddatanوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinكَرِهَनापसंद कियाkarihaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱنۢبِعَاثَهُمْउठना उनकाinbiʿāthahumفَثَبَّطَهُمْतो उसने रोक दिया उन्हेंfathabbaṭahumوَقِيلَऔर कहाwaqīlaٱقْعُدُوا۟बैठ जाओuq'ʿudūمَعَwithmaʿaٱلْقَـٰعِدِينَसाथ बैठने वालों केl-qāʿidīna٤٦
यदि वे निकलने का इरादा रखते, तो उसके लिए कुछ सामान अवश्य तैयार करते। लेकिन अल्लाह ने उनके उठने को नापसंद किया, तो उसने उन्हें रोक दिया। तथा कह दिया गया कि बैठने वालों के साथ बैठे रहो।
९:४७
لَوْअगरlawخَرَجُوا۟वो निकलतेkharajūفِيكُمतुम मेंfīkumمَّاनाmāزَادُوكُمْवो ज़्यादा करते तुम्हेंzādūkumإِلَّاमगरillāخَبَالًۭاख़राबी मेंkhabālanوَلَأَوْضَعُوا۟और अलबत्ता वो (घोड़े) दौड़ातेwala-awḍaʿūخِلَـٰلَكُمْदर्मियान तुम्हारेkhilālakumيَبْغُونَكُمُवो तलाश में रहते तुम मेंyabghūnakumuٱلْفِتْنَةَफ़ितने कीl-fit'nataوَفِيكُمْऔर तुम मेंwafīkumسَمَّـٰعُونَसुनने वाले (जासूस) हैंsammāʿūnaلَهُمْ ۗउनके लिएlahumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌۢख़ूब जानने वाला हैʿalīmunبِٱلظَّـٰلِمِينَज़ालिमों कोbil-ẓālimīna٤٧
यदि वे तुम्हारे साथ निकलते, तो तुम्हारे अंदर बिगाड़ के सिवा किसी और चीज़ की वृद्धि नहीं करते। और तुम्हारे बीच उपद्रव पैदा करने के लिए दौड़-धूप करते। और तुम्हारे अंदर कुछ लोग उनकी बातें कान लगाकर सुनने वाले हैं। और अल्लाह इन अत्याचारियों को भली-भाँति जानने वाला है।
९:४८
لَقَدِअलबत्ता तहक़ीक़laqadiٱبْتَغَوُا۟उन्होंने (डालना) चाहाib'taghawūٱلْفِتْنَةَफ़ितनाl-fit'nataمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluوَقَلَّبُوا۟और उलट-पुलट किएwaqallabūلَكَआपके लिएlakaٱلْأُمُورَमामलातl-umūraحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāجَآءَआ गयाjāaٱلْحَقُّहक़l-ḥaquوَظَهَرَऔर ज़ाहिर हो गयाwaẓaharaأَمْرُहुक्मamruٱللَّهِअल्लाह काl-lahiوَهُمْजबकि वोwahumكَـٰرِهُونَनापसंद करने वाले थेkārihūna٤٨
निःसंदेह उन्होंने इससे पहले भी उपद्रव मचाना चाहा तथा आपके लिए कई मामले उलट-पलट किए। यहाँ तक कि सत्य आ गया और अल्लाह का आदेश प्रबल हो गया। हालाँकि वे नापसंद करने वाले थे।
९:४९
وَمِنْهُمऔर उनमें से कोई हैwamin'humمَّنजोmanيَقُولُकहता हैyaqūluٱئْذَنइजाज़त दीजिएi'dhanلِّىमुझेlīوَلَاऔर नाwalāتَفْتِنِّىٓ ۚआप फ़ितने में डालिए मुझेtaftinnīأَلَاख़बरदारalāفِىinfīٱلْفِتْنَةِफ़ितने में तोl-fit'natiسَقَطُوا۟ ۗवो पड़ चुके हैंsaqaṭūوَإِنَّऔर बेशकwa-innaجَهَنَّمَजहन्नमjahannamaلَمُحِيطَةٌۢअलबत्ता घेरने वाली हैlamuḥīṭatunبِٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कोbil-kāfirīna٤٩
उनके अंदर ऐसा व्यक्ति भी है, जो कहता है कि आप मुझे अनुमति दे दें और मुझे फ़ितने में न डालें। सुन लो! वे फ़ितने ही में तो पड़े हुए हैं और निःसंदेह जहन्नम काफ़िरों को अवश्य घेरने वाली है।
९:५०
إِنअगरinتُصِبْكَपहुँचती है आपकोtuṣib'kaحَسَنَةٌۭकोई भलाईḥasanatunتَسُؤْهُمْ ۖवो बुरी लगती है उन्हेंtasu'humوَإِنऔर अगरwa-inتُصِبْكَपहुँचती है आपकोtuṣib'kaمُصِيبَةٌۭकोई मुसीबतmuṣībatunيَقُولُوا۟वो कहते हैंyaqūlūقَدْतहक़ीक़qadأَخَذْنَآसंभाल लिया हमनेakhadhnāأَمْرَنَاमामला अपनाamranāمِنbeforeminقَبْلُपहले सेqabluوَيَتَوَلَّوا۟और वो मुँह मोड़ जाते हैंwayatawallawوَّهُمْइस हाल में कि वोwahumفَرِحُونَख़ुश होने वाले हैंfariḥūna٥٠
यदि आपको कोई भलाई पहुँचती है, तो उन्हें बुरी लगती है और यदि आपपर कोई आपदा आती है, तो कहते हैं : हमने तो पहले ही अपना बचाव कर लिया था और ऐसी अवस्था में पलटते हैं कि वे बहुत प्रसन्न होते हैं।
९:५१
قُلकह दीजिएqulلَّنहरगिज़ नहींlanيُصِيبَنَآपहुँचेगा हमेंyuṣībanāإِلَّاमगर (वो ही)illāمَاजोmāكَتَبَलिख दियाkatabaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَنَاहमारे लिएlanāهُوَवोhuwaمَوْلَىٰنَا ۚमौला है हमाराmawlānāوَعَلَىAnd onwaʿalāٱللَّهِऔर अल्लाह ही परl-lahiفَلْيَتَوَكَّلِपस चाहिए कि तवक्कल करेंfalyatawakkaliٱلْمُؤْمِنُونَईमान लाने वालेl-mu'minūna٥١
आप कह दें : हमें कुछ भी नहीं पहुँचेगा सिवाय उसके जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दिया है। वही हमारा मालिक है और अल्लाह ही पर ईमान वालों को भरोसा करना चाहिए।
९:५२
قُلْकह दीजिएqulهَلْनहींhalتَرَبَّصُونَतुम इन्तिज़ार करतेtarabbaṣūnaبِنَآहमारे बारे मेंbināإِلَّآमगरillāإِحْدَىएक काiḥ'dāٱلْحُسْنَيَيْنِ ۖदो भलाईयों में सेl-ḥus'nayayniوَنَحْنُऔर हमwanaḥnuنَتَرَبَّصُहम इन्तिज़ार करते हैंnatarabbaṣuبِكُمْतुम्हारे बारे मेंbikumأَنकिanيُصِيبَكُمُपहुँचाए तुम्हेंyuṣībakumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِعَذَابٍۢकोई अज़ाबbiʿadhābinمِّنْfromminعِندِهِۦٓअपने पास सेʿindihiأَوْयाawبِأَيْدِينَا ۖहमारे हाथों सेbi-aydīnāفَتَرَبَّصُوٓا۟पस तुम इन्तिज़ार करोfatarabbaṣūإِنَّاबेशक हमinnāمَعَكُمसाथ तुम्हारेmaʿakumمُّتَرَبِّصُونَइन्तिज़ार करने वाले हैंmutarabbiṣūna٥٢
आप कह दें : तुम हमारे बारे में दो भलाइयों1 में से किसी एक के सिवा किसकी प्रतीक्षा कर रहे हो और हम तुम्हारे बारे में यह प्रतीक्षा कर रहे हैं कि अल्लाह तुम्हें अपने पास से यातना दे, या हमारे हाथों से। तो तुम प्रतीक्षा करो, निःसंदेह हम (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वाले हैं।
९:५३
قُلْकह दीजिएqulأَنفِقُوا۟ख़र्च करोanfiqūطَوْعًاख़ुशी सेṭawʿanأَوْयाawكَرْهًۭاनाख़ुशी सेkarhanلَّنहरगिज़ नहींlanيُتَقَبَّلَवो क़ुबूल किया जाएगाyutaqabbalaمِنكُمْ ۖतुम सेminkumإِنَّكُمْबेशक तुमinnakumكُنتُمْहो तुमkuntumقَوْمًۭاलोगqawmanفَـٰسِقِينَनाफ़रमानfāsiqīna٥٣
आप कह दें : तुम स्वेच्छापूर्वक दान करो अथवा अनिच्छापूर्वक, तुम्हारी ओर से हरगिज़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। निःसंदेह तुम हमेशा से अवज्ञाकारी लोग हो।
९:५४
وَمَاऔर नहींwamāمَنَعَهُمْमानेअ/रुकावट हुआ उनकेmanaʿahumأَنकिanتُقْبَلَक़ुबूल किए जाऐंtuq'balaمِنْهُمْउनसेmin'humنَفَقَـٰتُهُمْसदक़ात उनकेnafaqātuhumإِلَّآमगरillāأَنَّهُمْये कि वोannahumكَفَرُوا۟उन्होंने कुफ़्र कियाkafarūبِٱللَّهِसाथ अल्लाह केbil-lahiوَبِرَسُولِهِۦऔर साथ उसके रसूल केwabirasūlihiوَلَاऔर नहींwalāيَأْتُونَवो आतेyatūnaٱلصَّلَوٰةَनमाज़ कोl-ṣalataإِلَّاमगरillāوَهُمْइस हाल में कि वोwahumكُسَالَىٰसुस्त होते हैंkusālāوَلَاऔर नहींwalāيُنفِقُونَवो ख़र्च करतेyunfiqūnaإِلَّاमगरillāوَهُمْइस हाल में कि वोwahumكَـٰرِهُونَनापसंद करने वाले हैंkārihūna٥٤
और उनकी ख़र्च की हुई चीज़ों को स्वीकार करने से उन्हें इसके सिवा किसी चीज़ ने नहीं रोका कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया और वे नमाज़ के लिए आलसी होकर आते हैं तथा वे खर्च नहीं करते परंतु इस अवस्था में कि वे नाख़ुश होते हैं।
९:५५
فَلَاपस नाfalāتُعْجِبْكَताज्जुब में डालें आपकोtuʿ'jib'kaأَمْوَٰلُهُمْमाल उनकेamwāluhumوَلَآऔर नाwalāأَوْلَـٰدُهُمْ ۚऔलाद उनकीawlāduhumإِنَّمَاबेशकinnamāيُرِيدُचाहता हैyurīduٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِيُعَذِّبَهُمकि वो अज़ाब दे उन्हेंliyuʿadhibahumبِهَاसाथ उनकेbihāفِىinfīٱلْحَيَوٰةِज़िन्दगी मेंl-ḥayatiٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāوَتَزْهَقَऔर निकलेंwatazhaqaأَنفُسُهُمْजानें उनकीanfusuhumوَهُمْइस हाल में कि वोwahumكَـٰفِرُونَकाफ़िर होंkāfirūna٥٥
अतः आपको न उनके धन भले लगें और न उनकी संतान। अल्लाह तो यही चाहता है कि उन्हें इनके द्वारा सांसारिक जीवन में यातना दे और उनके प्राण इस दशा में निकलें कि वे काफ़िर हों।
९:५६
وَيَحْلِفُونَऔर वो कसमें खाते हैंwayaḥlifūnaبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiإِنَّهُمْबेशक वोinnahumلَمِنكُمْअलबत्ता तुम में से हैंlaminkumوَمَاहालाँकि नहींwamāهُمवोhumمِّنكُمْतुम में सेminkumوَلَـٰكِنَّهُمْऔर लेकिन वोwalākinnahumقَوْمٌۭऐसे लोग हैंqawmunيَفْرَقُونَजो डरते हैंyafraqūna٥٦
और वे (मुनाफ़िक़) अल्लाह की क़सम खाते हैं कि निःसंदेह वे अवश्य तुममें से हैं, हालाँकि वे तुममें से नहीं हैं, परंतु वे ऐसे लोग हैं जो डरते हैं।
९:५७
لَوْअगरlawيَجِدُونَवो पाऐंyajidūnaمَلْجَـًٔاकोई जाय पनाहmalja-anأَوْयाawمَغَـٰرَٰتٍकोई ग़ारmaghārātinأَوْयाawمُدَّخَلًۭاकोई घुस बैठने की जगहmuddakhalanلَّوَلَّوْا۟अलबत्ता वो मुड़ कर भाग जाऐंlawallawإِلَيْهِतरफ़ उसकेilayhiوَهُمْइस हाल में कि वोwahumيَجْمَحُونَवो सरपट दौड़ते हैंyajmaḥūna٥٧
यदि वे कोई शरण स्थल, या कोई गुफाएँ या घुसने की कोई जगह पा जाएँ, तो अवश्य ही वे बगटुट उसकी ओर लौट जाएँ।
९:५८
وَمِنْهُمऔर कुछ उनमें से हैंwamin'humمَّنजोmanيَلْمِزُكَइलज़ाम लगाते हैं आप परyalmizukaفِىconcerningfīٱلصَّدَقَـٰتِसदक़ात के बारे मेंl-ṣadaqātiفَإِنْफिर अगरfa-inأُعْطُوا۟वो दिए जाऐंuʿ'ṭūمِنْهَاउनमें सेmin'hāرَضُوا۟वो राज़ी हो जाते हैंraḍūوَإِنऔर अगरwa-inلَّمْनाlamيُعْطَوْا۟वो दिए जाऐंyuʿ'ṭawمِنْهَآउनमें सेmin'hāإِذَاतबidhāهُمْवोhumيَسْخَطُونَवो नाराज़ हो जाते हैंyaskhaṭūna٥٨
और उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं, जो सदक़ों के (वितरण के) बारे में आपपर दोष लगाता हैं। फिर यदि उन्हें उनमें से दे दिया जाए, तो प्रसन्न हो जाते हैं और यदि उन्हें उनमें से न दिया जाए, तो तुरंत वे क्रोधित हो जाते हैं।
९:५९
وَلَوْऔर काशwalawأَنَّهُمْये कि वोannahumرَضُوا۟वो राज़ी हो जातेraḍūمَآउस पर जोmāءَاتَىٰهُمُदिया उन्हेंātāhumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَرَسُولُهُۥऔर उसके रसूल नेwarasūluhuوَقَالُوا۟और वो कहतेwaqālūحَسْبُنَاकाफ़ी है हमेंḥasbunāٱللَّهُअल्लाहl-lahuسَيُؤْتِينَاअनक़रीब देगा हमेंsayu'tīnāٱللَّهُअल्लाहl-lahuمِنofminفَضْلِهِۦअपने फ़ज़ल सेfaḍlihiوَرَسُولُهُۥٓऔर उसका रसूल (भी)warasūluhuإِنَّآबेशक हमinnāإِلَىtoilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह केl-lahiرَٰغِبُونَरग़बत करने वाले हैंrāghibūna٥٩
और (कितना अच्छा होता) यदि वे उससे संतुष्ट हो जाते, जो अल्लाह और उसके रसूल ने उन्हें दिया और कहते कि हमारे लिए अल्लाह काफ़ी है। जल्द ही अल्लाह हमें अपनी कृपा से प्रदान करेगा तथा उसका रसूल भी। निःसंदेह हम अल्लाह ही की ओर रूचि रखने वाले हैं।
९:६०
۞ إِنَّمَاबेशकinnamāٱلصَّدَقَـٰتُसदक़ात तोl-ṣadaqātuلِلْفُقَرَآءِफ़ुक़रा के लिए हैंlil'fuqarāiوَٱلْمَسَـٰكِينِऔर मिस्कीनों के लिएwal-masākīniوَٱلْعَـٰمِلِينَऔर जो काम करने वाले हैंwal-ʿāmilīnaعَلَيْهَاउन परʿalayhāوَٱلْمُؤَلَّفَةِऔर उलफ़त दिलाए गएwal-mu-alafatiقُلُوبُهُمْदिल जिनकेqulūbuhumوَفِىand inwafīٱلرِّقَابِऔर गर्दनों (के आज़ाद) करने मेंl-riqābiوَٱلْغَـٰرِمِينَऔर क़र्ज़दारों (के लिए)wal-ghārimīnaوَفِىand inwafīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِऔर अल्लाह के रास्ते मेंl-lahiوَٱبْنِand the wayfarer wa-ib'niٱلسَّبِيلِ ۖऔर मुसाफ़िर/राहगीर (के लिए)l-sabīliفَرِيضَةًۭफ़रीज़ा हैfarīḍatanمِّنَfromminaٱللَّهِ ۗअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunحَكِيمٌۭख़ूब हिकमत वाला हैḥakīmun٦٠
ज़कात तो केवल फ़क़ीरों1 और मिस्कीनों के लिए और उसपर नियुक्त कार्यकर्ताओं2 के लिए तथा उनके लिए है जिनके दिलों को परचाना3 अभीष्ट हो, और दास मुक्त करने में और क़र्ज़दारों एवं तावान भरने वालों में और अल्लाह के मार्ग में तथा यात्रियों के लिए है। यह अल्लाह की ओर से एक दायित्व है4 और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:६१
وَمِنْهُمُऔर कुछ उनमें से हैंwamin'humuٱلَّذِينَजोalladhīnaيُؤْذُونَअज़ियत देते हैंyu'dhūnaٱلنَّبِىَّनबी कोl-nabiyaوَيَقُولُونَऔर वो कहते हैंwayaqūlūnaهُوَवोhuwaأُذُنٌۭ ۚकान हैंudhununقُلْकह दीजिएqulأُذُنُकान हैंudhunuخَيْرٍۢभलाई काkhayrinلَّكُمْतुम्हारे लिएlakumيُؤْمِنُवो ईमान रखता हैyu'minuبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَيُؤْمِنُऔर वो ऐतमाद करता हैwayu'minuلِلْمُؤْمِنِينَमोमिनों परlil'mu'minīnaوَرَحْمَةٌۭऔर रहमत हैwaraḥmatunلِّلَّذِينَउनके लिए जोlilladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūمِنكُمْ ۚतुम में सेminkumوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaيُؤْذُونَअज़ियत देते हैंyu'dhūnaرَسُولَ(the) Messengerrasūlaٱللَّهِअल्लाह के रसूल कोl-lahiلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٦١
तथा उन (मुनाफ़िक़ों) में से कुछ लोग ऐसे हैं जो नबी को दुःख देते हैं और कहते हैं कि वह तो निरा कान1 हैं! आप कह दें कि वह तुम्हारे लिए भलाई का कान हैं। वह अल्लाह पर विश्वास रखते हैं और ईमान वालों की बात का विश्वास करते हैं और तुममें से उन लोगों के लिए दया हैं, जो ईमान लाए हैं और जो लोग अल्लाह के रसूल को दुःख देते हैं, उनके लिए दर्दनाक यातना है।
९:६२
يَحْلِفُونَवो क़समें खाते हैंyaḥlifūnaبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiلَكُمْतुम्हारे लिएlakumلِيُرْضُوكُمْताकि वो राज़ी करें तुम्हेंliyur'ḍūkumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuوَرَسُولُهُۥٓऔर उसका रसूलwarasūluhuأَحَقُّज़्यादा हक़दार हैaḥaqquأَنकिanيُرْضُوهُवो राज़ी करें उसेyur'ḍūhuإِنअगरinكَانُوا۟हैं वोkānūمُؤْمِنِينَईमान लाने वालेmu'minīna٦٢
वे तुम्हारे समक्ष अल्लाह की क़सम खाते हैं, ताकि तुम्हें प्रसन्न करें। हालाँकि अल्लाह और उसके रसूल अधिक योग्य हैं कि वे उन्हें प्रसन्न करें, अगर वे ईमान वाले हैं।
९:६३
أَلَمْक्या नहींalamيَعْلَمُوٓا۟वो जानतेyaʿlamūأَنَّهُۥबेशक वोannahuمَنजोmanيُحَادِدِमुख़ालिफ़त करता हैyuḥādidiٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल कीwarasūlahuفَأَنَّतो बेशकfa-annaلَهُۥउसके लिएlahuنَارَआग हैnāraجَهَنَّمَजहन्नम कीjahannamaخَـٰلِدًۭاहमेशा रहने वाला हैkhālidanفِيهَا ۚउसमेंfīhāذَٰلِكَयेdhālikaٱلْخِزْىُरुस्वाई हैl-khiz'yuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu٦٣
क्या उन्होंने नहीं जाना कि जो अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करता है, तो निःसंदेह उसके लिए जहन्नम की आग है, जिसमें वह सदैव रहने वाला है। यह बहुत बड़ा अपमान है।
९:६४
يَحْذَرُडरते हैंyaḥdharuٱلْمُنَـٰفِقُونَमुनाफ़िक़l-munāfiqūnaأَنकिanتُنَزَّلَउतारी जाएtunazzalaعَلَيْهِمْउन परʿalayhimسُورَةٌۭकोई सूरतsūratunتُنَبِّئُهُمजो ख़बर दे उन्हेंtunabbi-uhumبِمَاउसकी जोbimāفِى(is) infīقُلُوبِهِمْ ۚउनके दिलों में हैqulūbihimقُلِकह दीजिएquliٱسْتَهْزِءُوٓا۟कि मज़ाक़ उड़ा लोis'tahziūإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaمُخْرِجٌۭज़ाहिर करने वाला हैmukh'rijunمَّاवो जिससेmāتَحْذَرُونَतुम डरते होtaḥdharūna٦٤
मुनाफ़िक़ों को इस बात का डर है कि उनपर1 कोई ऐसी सूरत न उतार दी जाए, जो उन्हें वे बातें बता दे जो इनके दिलों में हैं। आप कह दें : तुम मज़ाक़ उड़ाते रहो। निःसंदेह अल्लाह उन बातों को निकालने वाला है, जिनसे तुम डरते हो।
९:६५
وَلَئِنऔर अलबत्ता अगरwala-inسَأَلْتَهُمْपूछो तुम उनसेsa-altahumلَيَقُولُنَّअलबत्ता वो ज़रूर कहेंगेlayaqūlunnaإِنَّمَاबेशकinnamāكُنَّاथे हमkunnāنَخُوضُहम बहस कर रहेnakhūḍuوَنَلْعَبُ ۚऔर हम दिल्लगी करतेwanalʿabuقُلْकह दीजिएqulأَبِٱللَّهِक्या अल्लाह काabil-lahiوَءَايَـٰتِهِۦऔर उसकी आयात काwaāyātihiوَرَسُولِهِۦऔर उसके रसूल काwarasūlihiكُنتُمْथे तुमkuntumتَسْتَهْزِءُونَमज़ाक़ उड़ातेtastahziūna٦٥
निःसंदेह यदि आप1 उनसे पूछें, तो वे अवश्य ही कहेंगे : हम तो यूँ ही बातचीत और हँसी-मज़ाक़ कर रहे थे। आप कह दें : क्या तुम अल्लाह और उसकी आयतों और उसके रसूल के साथ मज़ाक कर रहे थे?
९:६६
لَا(Do) notlāتَعْتَذِرُوا۟ना तुम उज़र पेश करोtaʿtadhirūقَدْतहक़ीक़qadكَفَرْتُمकुफ़्र किया तुमनेkafartumبَعْدَबादbaʿdaإِيمَـٰنِكُمْ ۚअपने ईमान केīmānikumإِنअगरinنَّعْفُहम माफ़ कर देंnaʿfuعَن[on]ʿanطَآئِفَةٍۢएक गिरोह कोṭāifatinمِّنكُمْतुम में सेminkumنُعَذِّبْ(तो) हम अज़ाब देंगेnuʿadhibطَآئِفَةًۢएक गिरोह कोṭāifatanبِأَنَّهُمْबवजह उसके कि वोbi-annahumكَانُوا۟हैं वोkānūمُجْرِمِينَमुजरिमmuj'rimīna٦٦
तुम बहाने मत बनाओ, निःसंदेह तुमने अपने ईमान के बाद कुफ़्र किया। यदि हम तुममें से एक समूह को क्षमा कर दें, तो एक समूह को दंड देंगे, क्योंकि निश्चय ही वे अपराधी थे।
९:६७
ٱلْمُنَـٰفِقُونَमुनाफ़िक़ मर्दal-munāfiqūnaوَٱلْمُنَـٰفِقَـٰتُऔर मुनाफ़िक़ औरतेंwal-munāfiqātuبَعْضُهُمबाज़ उनकेbaʿḍuhumمِّنۢ(are) ofminبَعْضٍۢ ۚबाज़ से हैंbaʿḍinيَأْمُرُونَवो हुक्म देते हैंyamurūnaبِٱلْمُنكَرِबुराई काbil-munkariوَيَنْهَوْنَऔर वो रोकते हैंwayanhawnaعَنِwhatʿaniٱلْمَعْرُوفِभलाई सेl-maʿrūfiوَيَقْبِضُونَऔर वो बंद रखते हैंwayaqbiḍūnaأَيْدِيَهُمْ ۚअपने हाथों कोaydiyahumنَسُوا۟वो भूल गएnasūٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaفَنَسِيَهُمْ ۗतो उसने भुला दिया उन्हेंfanasiyahumإِنَّबेशकinnaٱلْمُنَـٰفِقِينَमुनफिक़l-munāfiqīnaهُمُवो हीhumuٱلْفَـٰسِقُونَफ़ासिक़/नाफ़रमान हैंl-fāsiqūna٦٧
मुनाफ़िक़ पुरुष और मुनाफिक़ स्त्रियाँ, वे सब एक-जैसे हैं। वे बुराई का आदेश देते हैं तथा भलाई से रोकते हैं और अपने हाथ बंद रखते1 हैं। वे अल्लाह को भूल गए, तो उसने उन्हें भुला2 दिया। निश्चय मुनाफ़िक़ लोग ही अवज्ञाकारी हैं।
९:६८
وَعَدَवादा कियाwaʿadaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلْمُنَـٰفِقِينَमुनाफ़िक़ मर्दों सेl-munāfiqīnaوَٱلْمُنَـٰفِقَـٰتِऔर मुनाफ़िक़ औरतों सेwal-munāfiqātiوَٱلْكُفَّارَऔर काफ़िरों सेwal-kufāraنَارَआग काnāraجَهَنَّمَजहन्नम कीjahannamaخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَا ۚउसमेंfīhāهِىَवो हीhiyaحَسْبُهُمْ ۚकाफ़ी है उन्हेंḥasbuhumوَلَعَنَهُمُऔर लानत की उन परwalaʿanahumuٱللَّهُ ۖअल्लाह नेl-lahuوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumعَذَابٌۭअज़ाब हैʿadhābunمُّقِيمٌۭक़ायम रहने वालाmuqīmun٦٨
अल्लाह ने मुनाफ़िक़ पुरुषों तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियों और काफ़िरों से जहन्नम की आग का वादा किया है, जिसमें वे हमेशा रहने वाले हैं। वही उनके लिए प्रयाप्त है। और अल्लाह ने उनपर ला'नत की और उनके लिए सदैव रहने वाली यातना है।
९:६९
كَٱلَّذِينَउन लोगों की तरह जोka-alladhīnaمِنbefore youminقَبْلِكُمْतुमसे पहले थेqablikumكَانُوٓا۟थे वोkānūأَشَدَّबहुत शदीदashaddaمِنكُمْतुम सेminkumقُوَّةًۭक़ुव्वत मेंquwwatanوَأَكْثَرَऔर ज़्यादा थेwa-aktharaأَمْوَٰلًۭاमाल मेंamwālanوَأَوْلَـٰدًۭاऔर औलाद मेंwa-awlādanفَٱسْتَمْتَعُوا۟पस उन्होंने फ़ायदा उठायाfa-is'tamtaʿūبِخَلَـٰقِهِمْअपने हिस्से सेbikhalāqihimفَٱسْتَمْتَعْتُمपस तुमने फ़ायदा उठायाfa-is'tamtaʿtumبِخَلَـٰقِكُمْअपने हिस्से सेbikhalāqikumكَمَاजिस तरहkamāٱسْتَمْتَعَफ़ायदा उठायाis'tamtaʿaٱلَّذِينَउन्होंने जोalladhīnaمِنbefore youminقَبْلِكُمजो तुमसे पहले थेqablikumبِخَلَـٰقِهِمْअपने हिस्से सेbikhalāqihimوَخُضْتُمْऔर बहस की तुमनेwakhuḍ'tumكَٱلَّذِىजिस तरहka-alladhīخَاضُوٓا۟ ۚउन्होंने बहस कीkhāḍūأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaحَبِطَتْज़ाया हो गएḥabiṭatأَعْمَـٰلُهُمْआमाल उनकेaʿmāluhumفِىinfīٱلدُّنْيَاदुनिया मेंl-dun'yāوَٱلْـَٔاخِرَةِ ۖऔर आख़िरत मेंwal-ākhiratiوَأُو۟لَـٰٓئِكَऔर यही लोग हैंwa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْخَـٰسِرُونَजो ख़सारा पाने वाले हैंl-khāsirūna٦٩
उन लोगों की तरह जो तुमसे पहले थे। वे शक्ति में तुमसे ज़्यादा मज़बूत तथा धन और संतान में तुमसे अधिक थे। तो उन्होंने अपने भाग का आनंद लिया। फिर तुमने अपने भाग का आनंद लिया, जैसे तुमसे पूर्व के लोगों ने आनंद लिया था और तुम (झूठ और असत्य के अंदर) घुसे, जैसे वे घुसे थे। यही लोग हैं, जिनके कर्म दुनिया एवं आखिरत में अकारथ हो गए और यही घाटा उठाने वाले लोग हैं।
९:७०
أَلَمْक्या नहींalamيَأْتِهِمْआई उनके पासyatihimنَبَأُख़बरnaba-uٱلَّذِينَउनकी जोalladhīnaمِن(were) before themminقَبْلِهِمْउनसे पहले थेqablihimقَوْمِ(the) peopleqawmiنُوحٍۢक़ौमे नूहnūḥinوَعَادٍۢऔर आदwaʿādinوَثَمُودَऔर समूदwathamūdaوَقَوْمِand (the) peoplewaqawmiإِبْرَٰهِيمَऔर कौमे इब्राहीमib'rāhīmaوَأَصْحَـٰبِand (the) companionswa-aṣḥābiمَدْيَنَऔर मदयन वालेmadyanaوَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتِ ۚऔर उल्टी हुई बस्तियों वालेwal-mu'tafikātiأَتَتْهُمْआए उनके पासatathumرُسُلُهُمरसूल उनकेrusuluhumبِٱلْبَيِّنَـٰتِ ۖसाथ वाज़ेह दलाइल केbil-bayinātiفَمَاपस नहींfamāكَانَहैkānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِيَظْلِمَهُمْकि वो ज़ुल्म करे उन परliyaẓlimahumوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinكَانُوٓا۟थे वोkānūأَنفُسَهُمْअपनी ही जानों परanfusahumيَظْلِمُونَवो ज़ुल्म करतेyaẓlimūna٧٠
क्या इनके पास उन लोगों की ख़बर नहीं आई, जो इनसे पहले थे? नूह़ की जाति और आद और समूद तथा इबराहीम की जाति और मदयन1 वाले और उलटी2 हुई बस्तियों के लोग? उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आए, तो अल्लाह ऐसा नहीं था कि उनपर अत्याचार करता, परंतु वे स्वयं अपने आप पर अत्याचार3 करते थे।
९:७१
وَٱلْمُؤْمِنُونَऔर मोमिन मर्दwal-mu'minūnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتُऔर मोमिन औरतेंwal-mu'minātuبَعْضُهُمْबाज़ उनकेbaʿḍuhumأَوْلِيَآءُदोस्त हैंawliyāuبَعْضٍۢ ۚबाज़ केbaʿḍinيَأْمُرُونَवो हुक्म देते हैंyamurūnaبِٱلْمَعْرُوفِभलाई काbil-maʿrūfiوَيَنْهَوْنَऔर वो रोकते हैंwayanhawnaعَنِfromʿaniٱلْمُنكَرِबुराई सेl-munkariوَيُقِيمُونَऔर वो क़ायम करते हैंwayuqīmūnaٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَيُؤْتُونَऔर वो अदा करते हैंwayu'tūnaٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataوَيُطِيعُونَऔर वो अताअत करते हैंwayuṭīʿūnaٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَرَسُولَهُۥٓ ۚऔर उसके रसूल कीwarasūlahuأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaسَيَرْحَمُهُمُज़रूर रहम करेगा उन परsayarḥamuhumuٱللَّهُ ۗअल्लाहl-lahuإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعَزِيزٌबहुत ज़बरदस्त हैʿazīzunحَكِيمٌۭख़ूब हिकमत वाला हैḥakīmun٧١
और ईमान वाले मर्द और ईमान वाली औरतें एक-दूसरे के दोस्त हैं, वे भलाई का हुक्म देते हैं और बुराई से मना करते हैं और नमाज़ क़ायम करते हैं और ज़कात देते हैं तथा अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करते हैं। यही लोग हैं जिनपर अल्लाह दया करेगा। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:७२
وَعَدَवादा कियाwaʿadaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों मर्दों सेl-mu'minīnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتِऔर मोमिन औरतों सेwal-mu'minātiجَنَّـٰتٍۢबाग़ात काjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَاउनमेंfīhāوَمَسَـٰكِنَऔर घरwamasākinaطَيِّبَةًۭपाकीज़ाṭayyibatanفِىinfīجَنَّـٰتِबाग़ात मेंjannātiعَدْنٍۢ ۚअदन केʿadninوَرِضْوَٰنٌۭऔर रज़ामन्दीwariḍ'wānunمِّنَofminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiأَكْبَرُ ۚसबसे बड़ी हैakbaruذَٰلِكَयहीdhālikaهُوَवोhuwaٱلْفَوْزُकामयाबी हैl-fawzuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu٧٢
अल्लाह ने ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों से ऐसे बाग़ों का वादा किया है जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदैव रहने वाले होंगे, और स्थायी बाग़ों में अच्छे आवासों का (वादा किया है)। और अल्लाह की ओर से थोड़ी-सी प्रसन्नता सबसे बड़ी है, यही तो बहुत बड़ी सफलता है।
९:७३
يَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuجَـٰهِدِजिहाद कीजिएjāhidiٱلْكُفَّارَकुफ़्फ़ारl-kufāraوَٱلْمُنَـٰفِقِينَऔर मुनाफ़िक़ीन सेwal-munāfiqīnaوَٱغْلُظْऔर सख़्ती कीजिएwa-ugh'luẓعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimوَمَأْوَىٰهُمْऔर ठिकाना उनकाwamawāhumجَهَنَّمُ ۖजहन्नम हैjahannamuوَبِئْسَऔर बहुत ही बुराwabi'saٱلْمَصِيرُठिकाना हैl-maṣīru٧٣
ऐ नबी! काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद करें और उनपर सख़्ती करें। और उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा लौटकर जाने का स्थान है।
९:७४
يَحْلِفُونَवो क़समें खाते हैंyaḥlifūnaبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiمَاनहींmāقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūوَلَقَدْहालाँकि अलबत्ता तहक़ीक़walaqadقَالُوا۟उन्होंने कहाqālūكَلِمَةَकलमाkalimataٱلْكُفْرِकुफ़्र काl-kuf'riوَكَفَرُوا۟और उन्होंने कुफ़्र कियाwakafarūبَعْدَबादbaʿdaإِسْلَـٰمِهِمْअपने इस्लाम केis'lāmihimوَهَمُّوا۟और उन्होंने इरादा कियाwahammūبِمَاउसका जोbimāلَمْनहींlamيَنَالُوا۟ ۚवो पा सकेyanālūوَمَاऔर नहींwamāنَقَمُوٓا۟उन्होंने इन्तिक़ाम लियाnaqamūإِلَّآमगरillāأَنْये किanأَغْنَىٰهُمُग़नी कर दिया उन्हेंaghnāhumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَرَسُولُهُۥऔर उसके रसूल नेwarasūluhuمِنofminفَضْلِهِۦ ۚअपने फ़ज़ल सेfaḍlihiفَإِنफिर अगरfa-inيَتُوبُوا۟वो तौबा कर लेंyatūbūيَكُहोगाyakuخَيْرًۭاबेहतरkhayranلَّهُمْ ۖउनके लिएlahumوَإِنऔर अगरwa-inيَتَوَلَّوْا۟वो मुँह मोड़ेंyatawallawيُعَذِّبْهُمُअज़ाब देगा उन्हेंyuʿadhib'humuٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَذَابًاअज़ाबʿadhābanأَلِيمًۭاदर्दनाकalīmanفِىinfīٱلدُّنْيَاदुनिया मेंl-dun'yāوَٱلْـَٔاخِرَةِ ۚऔर आख़िरत मेंwal-ākhiratiوَمَاऔर ना होगाwamāلَهُمْउनके लिएlahumفِىinfīٱلْأَرْضِज़मीन मेंl-arḍiمِنanyminوَلِىٍّۢकोई दोस्तwaliyyinوَلَاऔर नाwalāنَصِيرٍۢकोई मददगारnaṣīrin٧٤
वे अल्लाह की क़सम खाते हैं कि उन्होंने (यह) बात1 नहीं कही। हालाँकि निःसंदेह उन्होंने कुफ़्र की बात2 कही और अपने इस्लाम लाने के पश्चात् काफ़िर हो गए और उन्होंने उस चीज़ का इरादा किया, जो उन्हें नहीं मिली। और उन्होंने केवल इसका बदला लिया कि अल्लाह और उसके रसूल ने उन्हें अपने अनुग्रह से समृद्ध3 कर दिया। अब यदि वे तौबा कर लें, तो उनके लिए बेहतर होगा और अगर वे मुँह फेर लें, तो अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब देगा और उनका धरती पर न कोई दोस्त होगा और न कोई मददगार।
९:७५
۞ وَمِنْهُمऔर कुछ उनमें से वो हैंwamin'humمَّنْजिन्होंनेmanعَـٰهَدَअहद कियाʿāhadaٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaلَئِنْअलबत्ता अगरla-inءَاتَىٰنَاवो देगा हमेंātānāمِنofminفَضْلِهِۦअपने फ़ज़ल सेfaḍlihiلَنَصَّدَّقَنَّअलबत्ता हम ज़रूर सदक़ा करेंगेlanaṣṣaddaqannaوَلَنَكُونَنَّऔर अलबत्ता हम ज़रूर हो जाऐंगेwalanakūnannaمِنَamongminaٱلصَّـٰلِحِينَनेक लोगों में सेl-ṣāliḥīna٧٥
और उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने अल्लाह को वचन दिया कि निश्चय यदि उसने हमें अपने अनुग्रह से कुछ प्रदान किया, तो हम अवश्य दान करेंगे और निश्चित रूप से नेक लोगों में से हो जाएँगे।
९:७६
فَلَمَّآफिर जबfalammāءَاتَىٰهُمउसने दिया उन्हेंātāhumمِّنofminفَضْلِهِۦअपने फ़ज़ल सेfaḍlihiبَخِلُوا۟वो बुख़्ल करने लगेbakhilūبِهِۦसाथ उसकेbihiوَتَوَلَّوا۟और वो मुँह मोड़ गएwatawallawوَّهُمइस हाल में कि वोwahumمُّعْرِضُونَऐराज़ करने वाले थेmuʿ'riḍūna٧٦
फिर जब उसने उन्हें अपने अनुग्रह से कुछ प्रदान किया, तो उन्होंने उसमें कंजूसी की और विमुख होकर फिर गए।
९:७७
فَأَعْقَبَهُمْतो उसने सज़ा दी उन्हेंfa-aʿqabahumنِفَاقًۭاनिफ़ाक़ (डाल कर)nifāqanفِىinfīقُلُوبِهِمْउनके दिलों मेंqulūbihimإِلَىٰuntililāيَوْمِउस दिन तकyawmiيَلْقَوْنَهُۥवो मुलाक़ात करेंगे उससेyalqawnahuبِمَآबवजह उसके जोbimāأَخْلَفُوا۟उन्होंने ख़िलाफ़ कियाakhlafūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaمَاजिसकाmāوَعَدُوهُउन्होंने वादा किया था उससेwaʿadūhuوَبِمَاऔर बवजह उसके जोwabimāكَانُوا۟थे वोkānūيَكْذِبُونَवो झूठ बोलतेyakdhibūna٧٧
तो परिणाम यह हुआ कि उस (अल्लाह) ने उनके दिलों में उस दिन तक के लिए निफ़ाक़ डाल दिया, जब वे उससे मिलेंगे। क्योंकि उन्होंने अल्लाह से जो वादा किया था, उसका उल्लंघन किया और इसलिए कि वे झूठ बोलते थे।
९:७८
أَلَمْक्या नहींalamيَعْلَمُوٓا۟वो जानतेyaʿlamūأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaيَعْلَمُजानता हैyaʿlamuسِرَّهُمْराज़ उनकेsirrahumوَنَجْوَىٰهُمْऔर सरगोशियाँ उनकीwanajwāhumوَأَنَّऔर बेशकwa-annaٱللَّهَअल्लाहl-lahaعَلَّـٰمُख़ूब जानने वाला हैʿallāmuٱلْغُيُوبِग़ैबों कोl-ghuyūbi٧٨
क्या उन्हें नहीं मालूम कि निःसंदेह अल्लाह उनके भेद और उनकी कानाफूसी को अच्छी तरह जानता है और यह कि निःसंदेह अल्लाह परोक्ष की सभी बातों को भली-भाँति जानने वाला है?
९:७९
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيَلْمِزُونَवो ताना देते हैंyalmizūnaٱلْمُطَّوِّعِينَख़ुशी से देने वालों कोl-muṭawiʿīnaمِنَofminaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों में सेl-mu'minīnaفِىconcerningfīٱلصَّدَقَـٰتِसदक़ात मेंl-ṣadaqātiوَٱلَّذِينَऔर उनको (भी) जोwa-alladhīnaلَاnotlāيَجِدُونَनहीं वो पातेyajidūnaإِلَّاसिवायillāجُهْدَهُمْअपनी मेहनत केjuh'dahumفَيَسْخَرُونَतो वो मज़ाक़ उड़ाते हैंfayaskharūnaمِنْهُمْ ۙउनकाmin'humسَخِرَमज़ाक़ उड़ाता हैsakhiraٱللَّهُअल्लाहl-lahuمِنْهُمْउनकाmin'humوَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumعَذَابٌअज़ाब हैʿadhābunأَلِيمٌदर्दनाकalīmun٧٩
वे लोग जो स्वेच्छापूर्वक दान देने वाले मोमिनों को, उनके दान के विषय में, ताना देते हैं तथा उन लोगों को (भी) जो अपनी मेहनत के सिवा कुछ नहीं पाते। तो वे (मुनाफ़िक़) उनका उपहास करते हैं। अल्लाह ने उनका उपहास किया1 और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
९:८०
ٱسْتَغْفِرْआप बख़्शिश माँगिएis'taghfirلَهُمْउनके लिएlahumأَوْयाawلَا(do) notlāتَسْتَغْفِرْना आप बख़्शिश माँगिएtastaghfirلَهُمْउनके लिएlahumإِنअगरinتَسْتَغْفِرْआप बख़्शिश माँगेंगेtastaghfirلَهُمْउनके लिएlahumسَبْعِينَसत्तरsabʿīnaمَرَّةًۭबारmarratanفَلَنपस हरगिज़ नाfalanيَغْفِرَमाफ़ करेगाyaghfiraٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَهُمْ ۚउन्हेंlahumذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمْबवजह उसके कि उन्होंनेbi-annahumكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِٱللَّهِअल्लाह काbil-lahiوَرَسُولِهِۦ ۗऔर उसके रसूल काwarasūlihiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaٱلْفَـٰسِقِينَजो फ़ासिक़ हैंl-fāsiqīna٨٠
(ऐ नबी!) आप उनके लिए क्षमा याचना करें, या उनके लिए क्षमा याचना न करें, यदि आप उनके लिए सत्तर बार क्षमा याचना करें, तो भी अल्लाह उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा। यह इस कारण कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया और अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों का मार्गदर्शन नहीं करता।
९:८१
فَرِحَख़ुश हो गएfariḥaٱلْمُخَلَّفُونَपीछे छोड़े जाने वालेl-mukhalafūnaبِمَقْعَدِهِمْअपने बैठ रहने परbimaqʿadihimخِلَـٰفَपीछेkhilāfaرَسُولِ(the) Messengerrasūliٱللَّهِअल्लाह के रसूल केl-lahiوَكَرِهُوٓا۟और उन्होंने नापसंद कियाwakarihūأَنकिanيُجَـٰهِدُوا۟वो जिहाद करेंyujāhidūبِأَمْوَٰلِهِمْसाथ अपने मालोंbi-amwālihimوَأَنفُسِهِمْऔर अपनी जानों केwa-anfusihimفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiوَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūلَا(Do) notlāتَنفِرُوا۟ना तुम निकलोtanfirūفِىinfīٱلْحَرِّ ۗगर्मी मेंl-ḥariقُلْकह दीजिएqulنَارُआगnāruجَهَنَّمَजहन्नम कीjahannamaأَشَدُّज़्यादा शदीद हैashadduحَرًّۭا ۚगर्मी के ऐतबार सेḥarranلَّوْकाश किlawكَانُوا۟होते वोkānūيَفْقَهُونَवो समझतेyafqahūna٨١
वे लोग जो पीछे छोड़ दिए1 गए, अल्लाह के रसूल के पीछे अपने बैठ रहने पर खुश हो गए और उन्होंने नापसंद किया कि अपने धनों और अपने प्राणों के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करें और उन्होंने (अन्य लोगों से) कहा कि गर्मी में मत निकलो। आप कह दें : जहन्नम की आग कहीं अधिक गर्म है। काश! वे समझते होते।
९:८२
فَلْيَضْحَكُوا۟पस चाहिए कि वो हँसेंfalyaḍḥakūقَلِيلًۭاबहुत थोड़ाqalīlanوَلْيَبْكُوا۟और चाहिए कि वो रोऐंwalyabkūكَثِيرًۭاबहुत ज़्यादाkathīranجَزَآءًۢबदला हैjazāanبِمَاबवजह उसके जोbimāكَانُوا۟थे वोkānūيَكْسِبُونَवो कमाई करतेyaksibūna٨٢
तो उन्हें चाहिए कि थोड़ा हँसें और बहुत अधिक रोएँ, उसके बदले जो वे कमाते रहे हैं।
९:८३
فَإِنफिर अगरfa-inرَّجَعَكَवापस लौटा लाए आपकोrajaʿakaٱللَّهُअल्लाहl-lahuإِلَىٰtoilāطَآئِفَةٍۢतरफ़ एक गिरोह केṭāifatinمِّنْهُمْअमन में सेmin'humفَٱسْتَـْٔذَنُوكَफिर वो इजाज़त तलब करें आपसेfa-is'tadhanūkaلِلْخُرُوجِनिकलने के लिएlil'khurūjiفَقُلपस कह दीजिएfaqulلَّنहरगिज़ नाlanتَخْرُجُوا۟तुम निकलोगेtakhrujūمَعِىَसाथ मेरेmaʿiyaأَبَدًۭاकभी भीabadanوَلَنऔर हरगिज़ नाwalanتُقَـٰتِلُوا۟तुम जंग करोगेtuqātilūمَعِىَसाथ मेरेmaʿiyaعَدُوًّا ۖदुश्मन सेʿaduwwanإِنَّكُمْबेशक तुमinnakumرَضِيتُمराज़ी हो गए तुमraḍītumبِٱلْقُعُودِबैठने परbil-quʿūdiأَوَّلَ(the) firstawwalaمَرَّةٍۢपहली बारmarratinفَٱقْعُدُوا۟पस बैठे रहोfa-uq'ʿudūمَعَwithmaʿaٱلْخَـٰلِفِينَसाथ पीछे रहने वालों केl-khālifīna٨٣
तो यदि अल्लाह आपको इन (मुनाफ़िक़ों) के किसी गिरोह की ओर वापस ले आए, फिर वे आपसे (युद्ध में) निकलने की अनुमति माँगें, तो आप कह दें : तुम मेरे साथ कभी नहीं निकलोगे और मेरे साथ मिलकर किसी शत्रु से नहीं लड़ोगे। निःसंदेह तुम प्रथम बार बैठे रहने पर प्रसन्न हुए, अतः पीछे रहने वालों के साथ बैठे रहो।
९:८४
وَلَاऔर नाwalāتُصَلِّआप नमाज़ पढ़िएtuṣalliعَلَىٰٓforʿalāأَحَدٍۢकिसी एक परaḥadinمِّنْهُمइनमें सेmin'humمَّاتَमर जाए (जो)mātaأَبَدًۭاकभी भीabadanوَلَاऔर नाwalāتَقُمْआप खड़े होंtaqumعَلَىٰbyʿalāقَبْرِهِۦٓ ۖउसकी क़ब्र परqabrihiإِنَّهُمْबेशक उन्होंनेinnahumكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِٱللَّهِअल्लाह सेbil-lahiوَرَسُولِهِۦऔर उसके रसूल सेwarasūlihiوَمَاتُوا۟और वो मर गएwamātūوَهُمْइस हाल में कि वोwahumفَـٰسِقُونَफ़ासिक़ थेfāsiqūna٨٤
और उनमें से जो कोई मर जाए, उसका कभी जनाज़ा न पढ़ना और न उसकी क़ब्र पर खड़े होना। निःसंदेह उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया और इस अवस्था में मरे कि वे अवज्ञाकारी थे।1
९:८५
وَلَاऔर नाwalāتُعْجِبْكَताज्जुब में डालें आपकोtuʿ'jib'kaأَمْوَٰلُهُمْमाल उनकेamwāluhumوَأَوْلَـٰدُهُمْ ۚऔर औलाद उनकीwa-awlāduhumإِنَّمَاबेशकinnamāيُرِيدُचाहता हैyurīduٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَنकिanيُعَذِّبَهُمवो अज़ाब दे उन्हेंyuʿadhibahumبِهَاसाथ उनकेbihāفِىinfīٱلدُّنْيَاदुनिया मेंl-dun'yāوَتَزْهَقَऔर निकलेंwatazhaqaأَنفُسُهُمْजानें उनकीanfusuhumوَهُمْइस हाल में कि वोwahumكَـٰفِرُونَकाफ़िर होंkāfirūna٨٥
और आपको उनके धन और उनकी संतान भले न लगें। अल्लाह तो यही चाहता है कि उन्हें इनके द्वारा सांसारिक जीवन में यातना दे और उनके प्राण इस हाल में निकलें कि वे काफ़िर हों।
९:८६
وَإِذَآऔर जबwa-idhāأُنزِلَتْउतारी जाती हैunzilatسُورَةٌकोई सूरतsūratunأَنْकिanءَامِنُوا۟ईमान लाओāminūبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَجَـٰهِدُوا۟और जिहाद करोwajāhidūمَعَसाथmaʿaرَسُولِهِउसके रसूल केrasūlihiٱسْتَـْٔذَنَكَइजाज़त माँगते हैं आपसेis'tadhanakaأُو۟لُوا۟(the) menulūٱلطَّوْلِवुसअत वालेl-ṭawliمِنْهُمْउनमें सेmin'humوَقَالُوا۟और वो कहते हैंwaqālūذَرْنَاछोड़ दीजिए हमेंdharnāنَكُنकि हम हो जाऐंnakunمَّعَwithmaʿaٱلْقَـٰعِدِينَसाथ बैठने वालों केl-qāʿidīna٨٦
तथा जब कोई सूरत उतारी जाती है कि अल्लाह पर ईमान लाओ तथा उसके रसूल के साथ मिलकर जिहाद करो, तो उनमें से धनवान लोग आपसे अनुमति माँगते हैं और कहते हैं : आप हमें छोड़ दें कि हम बैठने वालों के साथ हो जाएँ।
९:८७
رَضُوا۟वो राज़ी हो गएraḍūبِأَنकिbi-anيَكُونُوا۟वो होंyakūnūمَعَwithmaʿaٱلْخَوَالِفِसाथ पीछे रहने वालों केl-khawālifiوَطُبِعَऔर मोहर लगा दी गईwaṭubiʿaعَلَىٰ[on]ʿalāقُلُوبِهِمْउनके दिलों परqulūbihimفَهُمْपस वोfahumلَا(do) notlāيَفْقَهُونَनहीं वो समझतेyafqahūna٨٧
वे इसपर राज़ी हो गए कि पीछे रहने वाली स्त्रियों के साथ हो जाएँ और उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई। अतः वे नहीं समझते।
९:८८
لَـٰكِنِलेकिनlākiniٱلرَّسُولُरसूलl-rasūluوَٱلَّذِينَऔर वो लोग जोwa-alladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūمَعَهُۥसाथ उसकेmaʿahuجَـٰهَدُوا۟उन्होंने जिहाद कियाjāhadūبِأَمْوَٰلِهِمْसाथ अपने मालों केbi-amwālihimوَأَنفُسِهِمْ ۚऔर अपनी जानों केwa-anfusihimوَأُو۟لَـٰٓئِكَऔर यही लोग हैंwa-ulāikaلَهُمُजिनके लिएlahumuٱلْخَيْرَٰتُ ۖभलाईयाँ हैंl-khayrātuوَأُو۟لَـٰٓئِكَऔर यही लोग हैंwa-ulāikaهُمُवोhumuٱلْمُفْلِحُونَजो फ़लाह पाने वाले हैंl-muf'liḥūna٨٨
परंतु रसूल ने और उन लोगों ने जो उसके साथ ईमान लाए, अपने धनों और अपने प्राणों के साथ जिहाद किया और यही लोग हैं जिनके लिए सब भलाइयाँ हैं और यही सफल होने वाले हैं।
९:८९
أَعَدَّतैयार कर रखा हैaʿaddaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَهُمْउनके लिएlahumجَنَّـٰتٍۢबाग़ात कोjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīمِنfromminتَحْتِهَاउनके नीचे सेtaḥtihāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَا ۚउनमेंfīhāذَٰلِكَयही हैdhālikaٱلْفَوْزُकामयाबीl-fawzuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu٨٩
अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग़ तैयार कर रखे हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनमें हमेशा रहने वाले हैं। यही बहुत बड़ी सफलता है।
९:९०
وَجَآءَऔर आ गएwajāaٱلْمُعَذِّرُونَउज़र करने वालेl-muʿadhirūnaمِنَofminaٱلْأَعْرَابِबदवियों/देहातियों में सेl-aʿrābiلِيُؤْذَنَकि इजाज़त दी जाएliyu'dhanaلَهُمْउन्हेंlahumوَقَعَدَऔर बैठ गएwaqaʿadaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَذَبُوا۟झूठ बोलाkadhabūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَرَسُولَهُۥ ۚऔर उसके रसूल सेwarasūlahuسَيُصِيبُअनक़रीब पहुँचेगाsayuṣībuٱلَّذِينَउन्हें जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūمِنْهُمْउनमें सेmin'humعَذَابٌअज़ाबʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun٩٠
और देहातियों में से बहाना करने वाले लोग आए, ताकि उन्हें (युद्ध में शरीक न होने की) अनुमति दी जाए। तथा वे लोग (अपने घरों में) बैठ रहे, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल से झूठ बोला। उनमें से उन लोगों को जिन्होंने कुफ़्र किया, जल्द ही दर्दनाक यातना पहुँचेगी।
९:९१
لَّيْسَनहीं हैlaysaعَلَىonʿalāٱلضُّعَفَآءِज़ईफ़ों परl-ḍuʿafāiوَلَاऔर नाwalāعَلَىonʿalāٱلْمَرْضَىٰमरीज़ों परl-marḍāوَلَاऔर नाwalāعَلَىonʿalāٱلَّذِينَउन पर जोalladhīnaلَاnotlāيَجِدُونَनहीं वो पातेyajidūnaمَاवो (चीज़) जोmāيُنفِقُونَवो ख़र्च करेंyunfiqūnaحَرَجٌकोई हरजḥarajunإِذَاजबidhāنَصَحُوا۟वो ख़ैरख़्वाही करेंnaṣaḥūلِلَّهِवास्ते अल्लाह केlillahiوَرَسُولِهِۦ ۚऔर उसके रसूल केwarasūlihiمَاनहीं हैmāعَلَى(is) onʿalāٱلْمُحْسِنِينَएहसान करने वालों परl-muḥ'sinīnaمِنanyminسَبِيلٍۢ ۚकोई मुआख़ज़ाsabīlinوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭबहुत रहम करने वाला हैraḥīmun٩١
न तो कमज़ोरों पर कोई हर्ज (पाप) है और न बीमारों पर और न उन लोगों पर जो वह चीज़ नहीं पाते जो ख़र्च करें, जब वे अल्लाह और उसके रसूल के प्रति निष्ठावान हों। सत्कर्म करने वालों पर (आपत्ति का) का कोई रास्ता नहीं। और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
९:९२
وَلَاऔर नाwalāعَلَىonʿalāٱلَّذِينَउन पर जोalladhīnaإِذَاwhenidhāمَآजब भीmāأَتَوْكَवो आए आपके पासatawkaلِتَحْمِلَهُمْताकि आप सवार करें उन्हेंlitaḥmilahumقُلْتَकहा आपनेqul'taلَآNotlāأَجِدُनहीं मैं पाताajiduمَآवो जोmāأَحْمِلُكُمْमैं सवार करुँ तुम्हेंaḥmilukumعَلَيْهِजिस परʿalayhiتَوَلَّوا۟वो पलट गएtawallawوَّأَعْيُنُهُمْऔर आँखें उनकीwa-aʿyunuhumتَفِيضُबह रही थींtafīḍuمِنَ[of]minaٱلدَّمْعِआँसुओं सेl-damʿiحَزَنًاग़म की वजह सेḥazananأَلَّاकि नहींallāيَجِدُوا۟वो पातेyajidūمَاजोmāيُنفِقُونَवो ख़र्च कर सकेंyunfiqūna٩٢
और न उन लोगों पर (कोई पाप है) कि जब वे आपके पास आए, ताकि आप उनके लिए सवारी की व्यवस्था कर दें, आपने कहा मैं वह चीज़ नहीं पाता जिसपर तुम्हें सवार करूँ, तो वे इस हाल में वापस हुए कि उनकी आँखें आँसुओं से बह रही थीं1 इस शोक के कारण कि वे खर्च करने के लिए कुछ नहीं पाते।
९:९३
۞ إِنَّمَاबेशकinnamāٱلسَّبِيلُमुआख़ज़ा तोl-sabīluعَلَى(is) onʿalāٱلَّذِينَउन पर है जोalladhīnaيَسْتَـْٔذِنُونَكَइजाज़त तलब करते हैं आपसेyastadhinūnakaوَهُمْहालाँकि वोwahumأَغْنِيَآءُ ۚग़नी हैंaghniyāuرَضُوا۟वो राज़ी हो गएraḍūبِأَنकिbi-anيَكُونُوا۟हों वोyakūnūمَعَwithmaʿaٱلْخَوَالِفِसाथ पीछे रहने वालों केl-khawālifiوَطَبَعَऔर मोहर लगा दीwaṭabaʿaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَىٰ[on]ʿalāقُلُوبِهِمْउनके दिलों परqulūbihimفَهُمْपस वोfahumلَا(do) notlāيَعْلَمُونَनहीं वो जानतेyaʿlamūna٩٣
(आपत्ति का) का रास्ता तो केवल उन लोगों पर है, जो आपसे अनुमति माँगते हैं, हालाँकि वे मालदार हैं। वे इसपर राज़ी हो गए कि पीछे रहने वाली औरतों के साथ हो जाएँ और अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी, सो वे नहीं जानते।
९:९४
يَعْتَذِرُونَवो उज़र पेश करेंगेyaʿtadhirūnaإِلَيْكُمْतरफ़ तुम्हारेilaykumإِذَاजबidhāرَجَعْتُمْलौटोगे तुमrajaʿtumإِلَيْهِمْ ۚतरफ़ उनकेilayhimقُلकह दीजिएqulلَّا(Do) notlāتَعْتَذِرُوا۟ना तुम उज़र पेश करोtaʿtadhirūلَنहरगिज़ नहींlanنُّؤْمِنَहम ऐतबार करेंगेnu'minaلَكُمْतुम्हाराlakumقَدْतहक़ीक़qadنَبَّأَنَاबता दीं हमेंnabba-anāٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِنْofminأَخْبَارِكُمْ ۚबाज़ ख़बरें तुम्हारीakhbārikumوَسَيَرَىऔर अनक़रीब देखेगाwasayarāٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَمَلَكُمْअमल तुहाराʿamalakumوَرَسُولُهُۥऔर उसका रसूल (भी)warasūluhuثُمَّफिरthummaتُرَدُّونَतुम लौटाए जाओगेturaddūnaإِلَىٰtoilāعَـٰلِمِतरफ़ जानने वालेʿālimiٱلْغَيْبِग़ैबl-ghaybiوَٱلشَّهَـٰدَةِऔर हाज़िर केwal-shahādatiفَيُنَبِّئُكُمफिर वो बताएगा तुम्हेंfayunabbi-ukumبِمَاवो जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna٩٤
जब तुम उनकी ओर वापस जाओगे, तो वे तुम्हारे सामने बहाने पेश करेंगे। आप कह दें : हम तुम्हारा कभी विश्वास नहीं करेंगे, निःसंदेह अल्लाह हमें तुम्हारी कुछ ख़बरें बता चुका है, और जल्द ही अल्लाह तुम्हारे काम को देखेगा और उसका रसूल भी। फिर तुम हर परोक्षऔर प्रत्यक्ष चीज़ को जानने वाले की ओर लौटाए जाओगे। फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम करते रहे थे।
९:९५
سَيَحْلِفُونَअनक़रीब वो क़समें खाऐंगेsayaḥlifūnaبِٱللَّهِअल्लाह कीbil-lahiلَكُمْतुम्हारे लिएlakumإِذَاजबidhāٱنقَلَبْتُمْलौटोगे तुमinqalabtumإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimلِتُعْرِضُوا۟ताकि तुम ऐराज़ करोlituʿ'riḍūعَنْهُمْ ۖउनसेʿanhumفَأَعْرِضُوا۟तो ऐराज़ कर लोfa-aʿriḍūعَنْهُمْ ۖउनसेʿanhumإِنَّهُمْक्योंकि वोinnahumرِجْسٌۭ ۖगंदगी हैंrij'sunوَمَأْوَىٰهُمْऔर ठिकाना उनकाwamawāhumجَهَنَّمُजहन्नम हैjahannamuجَزَآءًۢबदला हैjazāanبِمَاउसका जोbimāكَانُوا۟हैं वोkānūيَكْسِبُونَवो कमाई करतेyaksibūna٩٥
शीघ्र ही जब तुम उनकी ओर वापस जाओगे, तो वे तुम्हारे सामने अल्लाह की क़समें खाएँगे, ताकि तुम उनसे ध्यान हटा लो। अतः उनकी उपेक्षा करो, निःसंदेह वे गंदे हैं और उनका ठिकाना जहन्नम है, उसके बदले जो वे कमाते रहे हैं।
९:९६
يَحْلِفُونَवो क़समें खाऐंगेyaḥlifūnaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumلِتَرْضَوْا۟ताकि तुम राज़ी हो जाओlitarḍawعَنْهُمْ ۖउनसेʿanhumفَإِنफिर अगरfa-inتَرْضَوْا۟तुम राज़ी हो भी जाओtarḍawعَنْهُمْउनसेʿanhumفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَا(is) not pleasedlāيَرْضَىٰनहीं वो राज़ी होताyarḍāعَنِwithʿaniٱلْقَوْمِउन लोगों सेl-qawmiٱلْفَـٰسِقِينَजो फ़ासिक़ हैंl-fāsiqīna٩٦
वे तुम्हारे लिए क़समें खाएँगे, ताकि तुम उनसे राज़ी हो जाओ। तो यदि तुम उनसे राज़ी हो जाओ, तो निःसंदेह अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों से राज़ी नहीं होता।
९:९७
ٱلْأَعْرَابُदेहाती/बदवीal-aʿrābuأَشَدُّज़्यादा सख़्त हैंashadduكُفْرًۭاकुफ़्रkuf'ranوَنِفَاقًۭاऔर निफ़ाक़ मेंwanifāqanوَأَجْدَرُऔर ज़्यादा लायक़ हैंwa-ajdaruأَلَّاकि नाallāيَعْلَمُوا۟वो जानेंyaʿlamūحُدُودَहुदूद कोḥudūdaمَآउसकी जोmāأَنزَلَनाज़िल कियाanzalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَىٰtoʿalāرَسُولِهِۦ ۗअपने रसूल परrasūlihiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunحَكِيمٌۭबहुत हिकमत वाला हैḥakīmun٩٧
देहाती1 अविश्वास तथा पाखंड में अधिक बढ़े हुए हैं और इस बात के अधिक योग्य हैं कि उन सीमाओं को न जानें, जो अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारी हैं, और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:९८
وَمِنَAnd amongwaminaٱلْأَعْرَابِऔर देहातियों/बदवियों में सेl-aʿrābiمَنकोई है जोmanيَتَّخِذُबना लेता हैyattakhidhuمَاउसे जोmāيُنفِقُवो ख़र्च करता हैyunfiquمَغْرَمًۭاतावानmaghramanوَيَتَرَبَّصُऔर वो इन्तिज़ार करता हैwayatarabbaṣuبِكُمُतुम्हारे बारे मेंbikumuٱلدَّوَآئِرَ ۚगर्दिशों काl-dawāiraعَلَيْهِمْउन पर हैʿalayhimدَآئِرَةُगर्दिशdāiratuٱلسَّوْءِ ۗबुरीl-sawiوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuسَمِيعٌखूब सुनने वाला हैsamīʿunعَلِيمٌۭख़ूब जानने वाला हैʿalīmun٩٨
देहातियों में कुछ ऐसे हैं कि जो कुछ ख़र्च करते हैं, उसे तावान समझते हैं और तुम्हारे लिए बुरे समय की प्रतीक्षा करते हैं। बुरा समय उन्हीं पर आए। और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
९:९९
وَمِنَBut amongwaminaٱلْأَعْرَابِऔर देहातियों/बदवियों में सेl-aʿrābiمَنकोई है जोmanيُؤْمِنُईमान रखता हैyu'minuبِٱللَّهِअल्लाह परbil-lahiوَٱلْيَوْمِand the Daywal-yawmiٱلْـَٔاخِرِऔर आख़िरी दिन परl-ākhiriوَيَتَّخِذُऔर वो बना लेता हैwayattakhidhuمَاउसे जोmāيُنفِقُवो ख़र्च करता हैyunfiquقُرُبَـٰتٍक़ुरबतों (का ज़रिया)qurubātinعِندَwithʿindaٱللَّهِअल्लाह के नज़दीकl-lahiوَصَلَوَٰتِऔर दुआओं काwaṣalawātiٱلرَّسُولِ ۚरसूल कीl-rasūliأَلَآख़बरदारalāإِنَّهَاबेशक वोinnahāقُرْبَةٌۭक़ुरबत (का ज़रिया) हैqur'batunلَّهُمْ ۚउनके लिएlahumسَيُدْخِلُهُمُअनक़रीब दाख़िल करेगा उन्हेंsayud'khiluhumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuفِىtofīرَحْمَتِهِۦٓ ۗअपनी रहमत मेंraḥmatihiإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌۭबहुत रहम करने वाला हैraḥīmun٩٩
और देहातियों में कुछ ऐसे हैं, जो अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान रखते हैं और जो कुछ ख़र्च करते हैं, उसे अल्लाह के यहाँ निकटता तथा रसूल की दुआओं (की प्राप्ति) का साधन समझते हैं। सुन लो! निःसंदेह यह उनके लिए निकटता का साधन है। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें अपनी दया में दाखिल करेगा। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, असीम दयावान् है।
९:१००
وَٱلسَّـٰبِقُونَऔर सबक़त करने वालेwal-sābiqūnaٱلْأَوَّلُونَसब से पहलेl-awalūnaمِنَamongminaٱلْمُهَـٰجِرِينَमुहाजिरीन में सेl-muhājirīnaوَٱلْأَنصَارِऔर अन्सार में सेwal-anṣāriوَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaٱتَّبَعُوهُمपैरवी की उनकीittabaʿūhumبِإِحْسَـٰنٍۢसाथ एहसान केbi-iḥ'sāninرَّضِىَराज़ी हो गयाraḍiyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَنْهُمْउनसेʿanhumوَرَضُوا۟और वो राज़ी हो गएwaraḍūعَنْهُउससेʿanhuوَأَعَدَّऔर उसने तैयार कर रखा हैwa-aʿaddaلَهُمْउनके लिएlahumجَنَّـٰتٍۢबाग़ात कोjannātinتَجْرِىबहती हैंtajrīتَحْتَهَاनीचे उनकेtaḥtahāٱلْأَنْهَـٰرُनहरेंl-anhāruخَـٰلِدِينَहमेशा रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَآउसमेंfīhāأَبَدًۭا ۚहमेशा-हमेशाabadanذَٰلِكَयही हैdhālikaٱلْفَوْزُकामयाबीl-fawzuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu١٠٠
तथा सबसे पहले (ईमान की ओर) आगे बढ़ने वाले मुहाजिरीन1 और अंसार और जिन लोगों ने नेकी के साथ उनका अनुसरण किया, अल्लाह उनसे प्रसन्न हो गया और वे उससे प्रसन्न हो गए तथा उसने उनके लिए ऐसी जन्नतें तैयार कर रखी हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनके अंदर हमेशा रहेंगे। यही बड़ी सफलता है।
९:१०१
وَمِمَّنْऔर उनमें से जोwamimmanحَوْلَكُمतुम्हारे आस पास हैंḥawlakumمِّنَofminaٱلْأَعْرَابِदेहातियों/बदवियों में सेl-aʿrābiمُنَـٰفِقُونَ ۖकुछ मुनाफ़िक़ हैंmunāfiqūnaوَمِنْand (also) fromwaminأَهْلِऔर कुछ रहने वालों में सेahliٱلْمَدِينَةِ ۖमदीना केl-madīnatiمَرَدُوا۟जो अड़ गए हैंmaradūعَلَىinʿalāٱلنِّفَاقِमुनाफ़िक़त परl-nifāqiلَاnotlāتَعْلَمُهُمْ ۖनहीं तुम जानते उन्हेंtaʿlamuhumنَحْنُहमnaḥnuنَعْلَمُهُمْ ۚजानते हैं उन्हेंnaʿlamuhumسَنُعَذِّبُهُمअनक़रीब हम अज़ाब देंगे उन्हेंsanuʿadhibuhumمَّرَّتَيْنِदो बारmarratayniثُمَّफिरthummaيُرَدُّونَवो लौटाए जाऐंगेyuraddūnaإِلَىٰtoilāعَذَابٍतरफ़ अज़ाबʿadhābinعَظِيمٍۢबहुत बड़े केʿaẓīmin١٠١
और तुम्हारे आस-पास जो देहाती हैं, उनमें से कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं और मदीना वालों में से भी, जो अपने निफ़ाक़ (पाखंड) पर जमे हुए हैं। आप उन्हें नहीं जानते, हम ही उन्हें जानते हैं। जल्द ही हम उन्हें दो बार1 यातना देंगे। फिर वे बहुत बड़ी यातना की ओर लौटाए जाएँगे।
९:१०२
وَءَاخَرُونَऔर कुछ दूसरेwaākharūnaٱعْتَرَفُوا۟जिन्होंने ऐतराफ़ कियाiʿ'tarafūبِذُنُوبِهِمْअपने गुनाहों काbidhunūbihimخَلَطُوا۟उन्होंने मिला दिएkhalaṭūعَمَلًۭاकुछ अमलʿamalanصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanوَءَاخَرَऔर दूसरेwaākharaسَيِّئًاबुरेsayyi-anعَسَىउम्मीद हैʿasāٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَنकिanيَتُوبَवो मेहरबान होyatūbaعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaغَفُورٌۭबहुत बख़्शने वाला हैghafūrunرَّحِيمٌनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun١٠٢
और कुछ अन्य लोग भी हैं, जिन्होंने अपने गुनाहों का इक़रार किया। उन्होंने कुछ काम अच्छे और कुछ दूसरे बुरे मिला दिए। निकट है कि अल्लाह उनपर फिर से दया करे। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
९:१०३
خُذْले लीजिएkhudhمِنْfromminأَمْوَٰلِهِمْउनके मालों में सेamwālihimصَدَقَةًۭसदक़ाṣadaqatanتُطَهِّرُهُمْआप पाक कीजिए उन्हेंtuṭahhiruhumوَتُزَكِّيهِمऔर आप तज़किया कीजिए उनकाwatuzakkīhimبِهَاसाथ उसकेbihāوَصَلِّऔर दुआए रहमत कीजिएwaṣalliعَلَيْهِمْ ۖउनके हक़ मेंʿalayhimإِنَّबेशकinnaصَلَوٰتَكَदुआ आपकीṣalatakaسَكَنٌۭसुकून का ज़रिया हैsakanunلَّهُمْ ۗउनके लिएlahumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuسَمِيعٌख़ूब सुनने वाला हैsamīʿunعَلِيمٌख़ूब जानने वाला हैʿalīmun١٠٣
आप उनके मालों में से दान लें, जिसके साथ आप उन्हें पवित्र और पाक-साफ़ करें, तथा उनके लिए दुआ करें। निःसंदेह आपकी दुआ उनके लिए शांति का कारण है और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
९:१०४
أَلَمْक्या नहींalamيَعْلَمُوٓا۟वो जानतेyaʿlamūأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो हीhuwaيَقْبَلُवो क़ुबूल करता हैyaqbaluٱلتَّوْبَةَतौबा कोl-tawbataعَنْfromʿanعِبَادِهِۦअपने बन्दों सेʿibādihiوَيَأْخُذُऔर वो ले लेता हैwayakhudhuٱلصَّدَقَـٰتِसदक़ातl-ṣadaqātiوَأَنَّऔर बेशकwa-annaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो ही हैhuwaٱلتَّوَّابُबहुत तौबा क़ुबूल करने वालाl-tawābuٱلرَّحِيمُनिहायत रहम करने वालाl-raḥīmu١٠٤
क्या वे नहीं जानते कि निःसंदेह अल्लाह ही अपने बंदों की तौबा क़बूल करता और सदक़े लेता है और यह कि निःसंदेह अल्लाह ही है जो बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
९:१०५
وَقُلِऔर कह दीजिएwaquliٱعْمَلُوا۟अमल करोiʿ'malūفَسَيَرَىपस अनक़रीब देखेगाfasayarāٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَمَلَكُمْअमल तुम्हाराʿamalakumوَرَسُولُهُۥऔर रसूल उसकाwarasūluhuوَٱلْمُؤْمِنُونَ ۖऔर अहले ईमान भीwal-mu'minūnaوَسَتُرَدُّونَऔर अनक़रीब तुम लौटाए जाओगोwasaturaddūnaإِلَىٰtoilāعَـٰلِمِतरफ़ जानने वालेʿālimiٱلْغَيْبِग़ैबl-ghaybiوَٱلشَّهَـٰدَةِऔर हाज़िर केwal-shahādatiفَيُنَبِّئُكُمफिर वो बताएगा तुम्हेंfayunabbi-ukumبِمَاवो जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna١٠٥
और कह दीजिए : तुम कर्म किए जाओ। जल्द ही अल्लाह तुम्हारे कर्मों को देखेगा, और उसके रसूल और ईमान वाले भी। और जल्द ही तुम हर परोक्ष और प्रत्यक्ष बात को जानने वाले की ओर लौटाए जाओगे। फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम किया करते थे
९:१०६
وَءَاخَرُونَऔर कुछ दूसरेwaākharūnaمُرْجَوْنَजो मुअख़्ख़र रखे गए हैंmur'jawnaلِأَمْرِहुक्म के लिएli-amriٱللَّهِअल्लाह केl-lahiإِمَّاख़्वाहimmāيُعَذِّبُهُمْवो अज़ाब दे उन्हेंyuʿadhibuhumوَإِمَّاऔर ख़्वाहwa-immāيَتُوبُवो मेहरबान होyatūbuعَلَيْهِمْ ۗउन परʿalayhimوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌख़ूब इल्म वाला हैʿalīmunحَكِيمٌۭबहुत हिकमत वाला हैḥakīmun١٠٦
और कुछ दूसरे लोग भी हैं, जिनका मामला अल्लाह का आदेश आने तक स्थगित1 है। या तो वह उन्हें यातना दे और या फिर उनकी तौबा क़बूल करे। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:१०७
وَٱلَّذِينَऔर वो जिन्होंनेwa-alladhīnaٱتَّخَذُوا۟बना लीittakhadhūمَسْجِدًۭاएक मस्जिदmasjidanضِرَارًۭاज़रर पहुँचाने के लिएḍirāranوَكُفْرًۭاऔर कुफ़्र के लिएwakuf'ranوَتَفْرِيقًۢاऔर जुदाई डालने के लिएwatafrīqanبَيْنَamongbaynaٱلْمُؤْمِنِينَदर्मियान ईमान वालों केl-mu'minīnaوَإِرْصَادًۭاऔर घात लगाने के लिएwa-ir'ṣādanلِّمَنْउस शख़्स के लिए जिसनेlimanحَارَبَजंग कीḥārabaٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल सेwarasūlahuمِنbeforeminقَبْلُ ۚइससे पहलेqabluوَلَيَحْلِفُنَّऔर अलबत्ता वो ज़रूर क़समें खाऐंगेwalayaḥlifunnaإِنْनहींinأَرَدْنَآइरादा किया था हमनेaradnāإِلَّاमगरillāٱلْحُسْنَىٰ ۖभलाई काl-ḥus'nāوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَشْهَدُवो गवाही देता हैyashhaduإِنَّهُمْबेशक वोinnahumلَكَـٰذِبُونَअलबत्ता झूठे हैंlakādhibūna١٠٧
तथा (मुनाफ़िक़ों में से) वे लोग भी हैं, जिन्होंने एक मस्जिद1 बनाई; ताकि (मुसलमानों को) हानि पहुँचाएँ, कुफ़्र करें, ईमान वालों के बीच फूट डालें तथा ऐसे व्यक्ति के लिए घात लगाने का ठिकाना बनाएँ, जो इससे पहले अल्लाह और उसके रसूल से युद्ध कर चुका2 है। तथा निश्चय वे अवश्य क़समें खाएँगे कि हमारा इरादा भलाई के सिवा और कुछ न था, और अल्लाह गवाही देता है कि निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।
९:१०८
لَا(Do) notlāتَقُمْना आप खड़े होंtaqumفِيهِउसमेंfīhiأَبَدًۭا ۚकभी भीabadanلَّمَسْجِدٌअलबत्ता मस्जिदlamasjidunأُسِّسَजिसकी बुनियाद रखी गईussisaعَلَىonʿalāٱلتَّقْوَىٰतक़वा परl-taqwāمِنْfromminأَوَّلِ(the) firstawwaliيَوْمٍपहले दिन सेyawminأَحَقُّज़्यादा हक़दार हैaḥaqquأَنकिanتَقُومَआप खड़े होंtaqūmaفِيهِ ۚउसमेंfīhiفِيهِउसमेंfīhiرِجَالٌۭकुछ लोग हैंrijālunيُحِبُّونَजो पसंद करते हैंyuḥibbūnaأَنकिanيَتَطَهَّرُوا۟ ۚवो पाक साफ़ रहेंyataṭahharūوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيُحِبُّवो पसंद करता हैyuḥibbuٱلْمُطَّهِّرِينَपाक साफ़ रहने वालों कोl-muṭahirīna١٠٨
उसमें कभी खड़े न होना। निश्चय वह मस्जिद1 जिसकी बुनियाद पहले दिन से परहेज़गारी पर रखी गई है, वह अधिक योग्य है कि आप उसमें खड़े हों। उसमें ऐसे लोग हैं, जो बहुत पाक-साफ़ रहना पसंद2 करते हैं और अल्लाह पाक-साफ़ रहने वालों से प्रेम करता है।
९:१०९
أَفَمَنْक्या भला जिसनेafamanأَسَّسَबुनियाद रखीassasaبُنْيَـٰنَهُۥअपनी इमारत कीbun'yānahuعَلَىٰonʿalāتَقْوَىٰतक़वा परtaqwāمِنَfromminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ सेl-lahiوَرِضْوَٰنٍऔर रज़ामंदी परwariḍ'wāninخَيْرٌबेहतर हैkhayrunأَمयाamمَّنْजिसनेmanأَسَّسَबुनियाद रखीassasaبُنْيَـٰنَهُۥअपनी इमारत कीbun'yānahuعَلَىٰonʿalāشَفَاएक किनारे परshafāجُرُفٍखाईjurufinهَارٍۢगिरने वाली केhārinفَٱنْهَارَतो वो ले गिरीfa-in'hāraبِهِۦउसेbihiفِىinfīنَارِआग मेंnāriجَهَنَّمَ ۗजहन्नम कीjahannamaوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَا(does) notlāيَهْدِىनहीं वो हिदायत देताyahdīٱلْقَوْمَउन लोगों कोl-qawmaٱلظَّـٰلِمِينَजो जालिम हैंl-ẓālimīna١٠٩
तो क्या वह व्यक्ति बेहतर है जिसने अपनी इमारत की नींव अल्लाह के डर और उसकी खुशी पर रखी, या वह जिसने अपनी इमारत की नींव एक गड्ढे के किनारे पर रखी जो ढहने वाला था? तो वह उसके साथ जहन्नम की आग में गिर पड़ा और अल्लाह ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता।
९:११०
لَاNotlāيَزَالُहमेशा रहेगीyazāluبُنْيَـٰنُهُمُइमारत उनकीbun'yānuhumuٱلَّذِىवो जोalladhīبَنَوْا۟उन्होंने बनाईbanawرِيبَةًۭशक का सबबrībatanفِىinfīقُلُوبِهِمْउनके दिलों मेंqulūbihimإِلَّآमगरillāأَنये किanتَقَطَّعَटुकड़े-टुकड़े हो जाऐंtaqaṭṭaʿaقُلُوبُهُمْ ۗदिल उनकेqulūbuhumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuعَلِيمٌख़ूब जानने वाला हैʿalīmunحَكِيمٌबहुत हिकमत वाला हैḥakīmun١١٠
उनका भवन जो उन्होंने बनाया है, उनके दिलों में हमेशा चिंता का स्रोत रहेगा, परंतु यह कि उनके दिलों के टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
९:१११
۞ إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाह नेl-lahaٱشْتَرَىٰख़रीद लींish'tarāمِنَfromminaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों सेl-mu'minīnaأَنفُسَهُمْजानें उनकीanfusahumوَأَمْوَٰلَهُمऔर माल उनकेwa-amwālahumبِأَنَّबवजह उसके किbi-annaلَهُمُउनके लिएlahumuٱلْجَنَّةَ ۚजन्नत हैl-janataيُقَـٰتِلُونَवो जंग करते हैंyuqātilūnaفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेl-lahiفَيَقْتُلُونَफिर वो मारते हैंfayaqtulūnaوَيُقْتَلُونَ ۖऔर वो मारे जाते हैंwayuq'talūnaوَعْدًاवादा हैwaʿdanعَلَيْهِउसके ज़िम्मेʿalayhiحَقًّۭاसच्चाḥaqqanفِىinfīٱلتَّوْرَىٰةِतौरात मेंl-tawrātiوَٱلْإِنجِيلِऔर इन्जीलwal-injīliوَٱلْقُرْءَانِ ۚऔर क़ुरआन मेंwal-qur'āniوَمَنْऔर कौनwamanأَوْفَىٰज़्यादा पूरा करने वाला हैawfāبِعَهْدِهِۦअपने अहद कोbiʿahdihiمِنَthanminaٱللَّهِ ۚअल्लाह सेl-lahiفَٱسْتَبْشِرُوا۟पस ख़ुशियाँ मनाओfa-is'tabshirūبِبَيْعِكُمُअपने सौदे परbibayʿikumuٱلَّذِىवो जोalladhīبَايَعْتُمसौदा किया तुमनेbāyaʿtumبِهِۦ ۚसाथ उसकेbihiوَذَٰلِكَऔर येwadhālikaهُوَवो ही हैhuwaٱلْفَوْزُकामयाबीl-fawzuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu١١١
निःसंदेह अल्लाह ने ईमान वालों के प्राणों तथा उनके धनों को इसके बदले ख़रीद लिया है कि निश्चय उनके लिए जन्नत है। वे अल्लाह की राह में युद्ध करते हैं, तो वे क़त्ल करते हैं और क़त्ल किए जाते हैं। यह तौरात और इंजील और क़ुरआन में उसके ज़िम्मे पक्का वादा है और अल्लाह से बढ़कर अपना वादा पूरा करने वाला कौन है? तो अपने उस सौदे पर प्रसन्न हो जाओ, जो तुमने उससे किया है और यही बहुत बड़ी सफलता है।
९:११२
ٱلتَّـٰٓئِبُونَजो तौबा करने वालेal-tāibūnaٱلْعَـٰبِدُونَइबादत करने वालेl-ʿābidūnaٱلْحَـٰمِدُونَहम्द करने वालेl-ḥāmidūnaٱلسَّـٰٓئِحُونَसियाहत करने वालेl-sāiḥūnaٱلرَّٰكِعُونَरुकू करने वालेl-rākiʿūnaٱلسَّـٰجِدُونَसजदा करने वालेl-sājidūnaٱلْـَٔامِرُونَहुक्म देने वालेl-āmirūnaبِٱلْمَعْرُوفِनेकी काbil-maʿrūfiوَٱلنَّاهُونَऔर रोकने वालेwal-nāhūnaعَنِ[on]ʿaniٱلْمُنكَرِबुराई सेl-munkariوَٱلْحَـٰفِظُونَऔर हिफ़ाज़त करने वाले हैंwal-ḥāfiẓūnaلِحُدُودِ(the) limitsliḥudūdiٱللَّهِ ۗअल्लाह की हुदूद कीl-lahiوَبَشِّرِऔर ख़ुशख़बरी दे दीजिएwabashiriٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों कोl-mu'minīna١١٢
(वे मोमिन) तौबा करने वाले, इबादत करने वाले, स्तुति करने वाले, रोज़ा रखने वाले, रुकू' करने वाले, सजदा करने वाले, भलाई का आदेश देने वाले, बुराई से रोकने वाले और अल्लाह की सीमाओं की रक्षा करने वाले हैं, और (ऐ नबी!) आप ऐसे मोमिनों को शुभ-सूचना दे दें।
९:११३
مَاनहींmāكَانَहै (लायक़)kānaلِلنَّبِىِّनबी केlilnnabiyyiوَٱلَّذِينَऔर उनकेwa-alladhīnaءَامَنُوٓا۟जो ईमान लाएāmanūأَنकिanيَسْتَغْفِرُوا۟वो बख़्शिश माँगेंyastaghfirūلِلْمُشْرِكِينَमुशरिकीन के लिएlil'mush'rikīnaوَلَوْऔर अगरचेwalawكَانُوٓا۟हों वोkānūأُو۟لِىnear of kinulīقُرْبَىٰक़राबत वालेqur'bāمِنۢafterminبَعْدِबाद इसकेbaʿdiمَاजोmāتَبَيَّنَवाज़ेह हो गयाtabayyanaلَهُمْउनके लिएlahumأَنَّهُمْकि बेशक वोannahumأَصْحَـٰبُसाथी हैंaṣḥābuٱلْجَحِيمِजहन्नम केl-jaḥīmi١١٣
नबी1 तथा ईमान वालों के लिए मुशरिकों के लिए क्षमा की प्रार्थना करना कदापि जायज़ नहीं है, भले ही वे रिश्तेदार ही क्यों न हों, जबकि उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि निश्चय वे जहन्नम में जाने वाले2 हैं।
९:११४
وَمَاऔर नाwamāكَانَथाkānaٱسْتِغْفَارُइस्तिग़फ़ार करनाis'tigh'fāruإِبْرَٰهِيمَइब्राहीम काib'rāhīmaلِأَبِيهِअपने बाप के लिएli-abīhiإِلَّاमगरillāعَنbecauseʿanمَّوْعِدَةٍۢएक वादे की वजह सेmawʿidatinوَعَدَهَآउसने वादा किया उसकाwaʿadahāإِيَّاهُउससेiyyāhuفَلَمَّاफिर जबfalammāتَبَيَّنَज़ाहिर हो गयाtabayyanaلَهُۥٓउसके लिएlahuأَنَّهُۥकि बेशक वोannahuعَدُوٌّۭदुश्मन हैʿaduwwunلِّلَّهِअल्लाह काlillahiتَبَرَّأَवो बेज़ार हो गयाtabarra-aمِنْهُ ۚउससेmin'huإِنَّबेशकinnaإِبْرَٰهِيمَइब्राहीमib'rāhīmaلَأَوَّٰهٌअलबत्ता बहुत आह वा ज़ारी करने वालाla-awwāhunحَلِيمٌۭबहुत बुर्दबार थाḥalīmun١١٤
और इबराहीम का अपने बाप के लिए क्षमा की प्रार्थना करना, केवल उस वादे1 के कारण था जो उसने उससे किया था, फिर जब उसके सामने स्पष्ट हो गया कि वह वास्तव में अल्लाह का शत्रु है, तो उसने अपने आपको उससे अलग कर लिया। निःसंदेह इबराहीम बड़ा कोमल हृदय, अत्यंत सहनशील था।
९:११५
وَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِيُضِلَّकि वो भटका देliyuḍillaقَوْمًۢاकिसी क़ौम कोqawmanبَعْدَबाद इसकेbaʿdaإِذْजबidhهَدَىٰهُمْउसने हिदायत दी उन्हेंhadāhumحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāيُبَيِّنَवो वाज़ेह कर देyubayyinaلَهُمउनके लिएlahumمَّاवो जिससेmāيَتَّقُونَ ۚवो बचेंyattaqūnaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ काshayinعَلِيمٌख़ूब इल्म रखने वाला हैʿalīmun١١٥
और अल्लाह कभी ऐसा नहीं कि किसी जाति को सीधा मार्ग दिखाने के बाद पथभ्रष्ट कर दे, जब तक उनके लिए वे बातें स्पष्ट न कर दे, जिनसे वे बचें। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।
९:११६
إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَهُۥउसी के लिए हैlahuمُلْكُबादशाहतmul'kuٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِ ۖऔर ज़मीन कीwal-arḍiيُحْىِۦवो ज़िन्दा करता हैyuḥ'yīوَيُمِيتُ ۚऔर वो मौत देता हैwayumītuوَمَاऔर नहींwamāلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنbesides Allahminدُونِसिवायdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiمِنanyminوَلِىٍّۢकोई दोस्तwaliyyinوَلَاऔर नाwalāنَصِيرٍۢकोई मददगारnaṣīrin١١٦
निःसंदेह अल्लाह ही है, जिसके अधिकार में आकाशों तथा धरती का राज्य है। वही जीवन देता और मारता है और तुम्हारे लिए अल्लाह के सिवा न कोई मित्र है और न कोई सहायक।
९:११७
لَّقَدअलबत्ता तहक़ीक़laqadتَّابَमेहरबान हुआtābaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىtoʿalāٱلنَّبِىِّनबी परl-nabiyiوَٱلْمُهَـٰجِرِينَऔर मुहाजिरीनwal-muhājirīnaوَٱلْأَنصَارِऔर अन्सार परwal-anṣāriٱلَّذِينَजिन्होंनेalladhīnaٱتَّبَعُوهُपैरवी की उसकीittabaʿūhuفِىinfīسَاعَةِघड़ी मेंsāʿatiٱلْعُسْرَةِतंगी कीl-ʿus'ratiمِنۢafterminبَعْدِबाद इसकेbaʿdiمَا[what]māكَادَजो क़रीब था किkādaيَزِيغُटेढ़े हो जातेyazīghuقُلُوبُदिलqulūbuفَرِيقٍۢएक गिरोह केfarīqinمِّنْهُمْउनमें सेmin'humثُمَّफिरthummaتَابَवो मेहरबान हुआtābaعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimإِنَّهُۥबेशक वोinnahuبِهِمْउन परbihimرَءُوفٌۭबहुत शफ़क़त करने वाला हैraūfunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun١١٧
निःसंदेह अल्लाह ने नबी तथा मुहाजिरों और अंसार की तौबा क़बूल कर ली, जिन्होंने तंगी के समय नबी का साथ दिया, इसके बाद कि उनमें से एक समूह के दिल क़रीब थे कि टेढ़े हो जाएँ। फिर उसने उनकी क्षमायाचना क़बूल कर ली। निश्चय वह उनके लिए अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
९:११८
وَعَلَىAnd onwaʿalāٱلثَّلَـٰثَةِऔर उन तीनों पर (भी)l-thalāthatiٱلَّذِينَजोalladhīnaخُلِّفُوا۟छोड़ दिए गएkhullifūحَتَّىٰٓयहाँ तक किḥattāإِذَاजबidhāضَاقَتْतंग हो गईḍāqatعَلَيْهِمُउन परʿalayhimuٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuبِمَاबावजूद इसकेbimāرَحُبَتْकि वो कुशादा थीraḥubatوَضَاقَتْऔर तंग हो गएwaḍāqatعَلَيْهِمْउन परʿalayhimأَنفُسُهُمْनफ़्स उनकेanfusuhumوَظَنُّوٓا۟और उन्होंने यक़ीन कर लियाwaẓannūأَنकिanلَّا(there is) nolāمَلْجَأَनहीं कोई जाए पनाहmalja-aمِنَfromminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiإِلَّآमगरillāإِلَيْهِतरफ़ उसी केilayhiثُمَّफिरthummaتَابَवो मेहरबान हुआtābaعَلَيْهِمْउन परʿalayhimلِيَتُوبُوٓا۟ ۚताकि वो तौबा करेंliyatūbūإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaهُوَवो ही हैhuwaٱلتَّوَّابُबहुत तौबा क़ुबूल करने वालाl-tawābuٱلرَّحِيمُनिहायत रहम करने वालाl-raḥīmu١١٨
तथा उन तीन1 लोगों की भी (तौबा क़बूल कर ली), जिनका मामला स्थगित कर दिया गया था, यहाँ तक कि जब धरती उनपर अपने विस्तार के बावजूद तंग हो गई और उनपर उनके प्राण संकीर्ण2 हो गए और उन्होंने यक़ीन कर लिया कि अल्लाह से भागकर उनके लिए कोई शरण लेने का स्थान नहीं, परंतु उसी की ओर। फिर उसने उनपर दया करते हुए उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी, ताकि वे तौबा करें। निश्चय अल्लाह ही है जो बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
९:११९
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūٱتَّقُوا۟डरोittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَكُونُوا۟और हो जाओwakūnūمَعَसाथmaʿaٱلصَّـٰدِقِينَसच्चे लोगों केl-ṣādiqīna١١٩
ऐ ईमान लाने वालो! अल्लाह से डरो तथा सच्चे लोगों के साथ हो जाओ।
९:१२०
مَاनाmāكَانَथाkānaلِأَهْلِ(for) the peopleli-ahliٱلْمَدِينَةِमदीना वालों के (लायक़)l-madīnatiوَمَنْऔर उनके जोwamanحَوْلَهُمउनके आस पास थेḥawlahumمِّنَofminaٱلْأَعْرَابِदेहातियों/बदवियों में सेl-aʿrābiأَنकिanيَتَخَلَّفُوا۟वो पीछे रह जाऐंyatakhallafūعَنafterʿanرَّسُولِthe Messengerrasūliٱللَّهِअल्लाह के रसूल सेl-lahiوَلَاऔर नाwalāيَرْغَبُوا۟कि वो रग़बत रखेंyarghabūبِأَنفُسِهِمْअपनी जानों कीbi-anfusihimعَنtoʿanنَّفْسِهِۦ ۚआपकी जान से (ज़्यादा)nafsihiذَٰلِكَयेdhālikaبِأَنَّهُمْबवजह इसके कि वोbi-annahumلَا(does) notlāيُصِيبُهُمْनहीं पहुँचती उन्हेंyuṣībuhumظَمَأٌۭकोई प्यासẓama-onوَلَاऔर नाwalāنَصَبٌۭकोई थकावटnaṣabunوَلَاऔर नाwalāمَخْمَصَةٌۭकोई भूखmakhmaṣatunفِىinfīسَبِيلِ(the) waysabīliٱللَّهِअल्लाह के रास्ते मेंl-lahiوَلَاऔर नहींwalāيَطَـُٔونَवो रौंदतेyaṭaūnaمَوْطِئًۭاकिसी जगह कोmawṭi-anيَغِيظُजो ग़ुस्सा दिलाएyaghīẓuٱلْكُفَّارَकुफ़्फ़ार कोl-kufāraوَلَاऔर नहींwalāيَنَالُونَवो हासिल करतेyanālūnaمِنْonminعَدُوٍّۢदुश्मन परʿaduwwinنَّيْلًاकोई कामयाबीnaylanإِلَّاमगरillāكُتِبَलिखा जाता हैkutibaلَهُمउनके लिएlahumبِهِۦसाथ उसकेbihiعَمَلٌۭअमलʿamalunصَـٰلِحٌ ۚनेकṣāliḥunإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaلَا(does) notlāيُضِيعُनहीं वो ज़ाया करताyuḍīʿuأَجْرَअजरajraٱلْمُحْسِنِينَनेको कारों काl-muḥ'sinīna١٢٠
मदीना के वासियों तथा उनके आस-पास के देहातियों को अधिकार नहीं था कि अल्लाह के रसूल से पीछे रहते और न यह कि अपने प्राणों को आपके प्राण से प्रिय समझते। यह इसलिए कि वे अल्लाह की राह में जो भी प्यास और थकान तथा भूख की तकलीफ़ उठाते हैं और जिस स्थान पर भी क़दम रखते हैं, जो काफ़िरों के क्रोध को भड़काए और किसी शत्रु के मुक़ाबले में जो भी सफलता प्राप्त करते हैं, तो उनके लिए, उसके बदले में एक सत्कर्म लिख दिया जाता है। निश्चय अल्लाह सत्कर्म करने वालों का कर्मफल व्यर्थ नहीं करता।
९:१२१
وَلَاऔर नहींwalāيُنفِقُونَवो ख़र्च करतेyunfiqūnaنَفَقَةًۭकोई ख़र्च करनाnafaqatanصَغِيرَةًۭछोटाṣaghīratanوَلَاऔर नाwalāكَبِيرَةًۭबड़ाkabīratanوَلَاऔर नहींwalāيَقْطَعُونَवो तय करतेyaqṭaʿūnaوَادِيًاकोई वादीwādiyanإِلَّاमगरillāكُتِبَलिखा जाता है (अजर)kutibaلَهُمْउनके लिएlahumلِيَجْزِيَهُمُताकि बदला दे उन्हेंliyajziyahumuٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَحْسَنَबहुत अच्छाaḥsanaمَاउसका जोmāكَانُوا۟थे वोkānūيَعْمَلُونَवो अमल करतेyaʿmalūna١٢١
और वे थोड़ा या अधिक, जो भी खर्च करते हैं और जो भी घाटी पार करते हैं, उसे उनके हक़ में लिख लिया जाता है, ताकि अल्लाह उन्हें उसका सबसे अच्छा बदला दे, जो वे किया करते थे।
९:१२२
۞ وَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaٱلْمُؤْمِنُونَमोमिनों के (लायक़)l-mu'minūnaلِيَنفِرُوا۟कि वो निकल पड़ेंliyanfirūكَآفَّةًۭ ۚसारे के सारेkāffatanفَلَوْلَاफिर क्यों नाfalawlāنَفَرَनिकलीnafaraمِنfromminكُلِّeverykulliفِرْقَةٍۢहर गिरोह सेfir'qatinمِّنْهُمْउनमें सेmin'humطَآئِفَةٌۭएक जमाअतṭāifatunلِّيَتَفَقَّهُوا۟ताकि वो समझ बूझ हासिल करेंliyatafaqqahūفِىinfīٱلدِّينِदीन मेंl-dīniوَلِيُنذِرُوا۟और ताकि वो डराऐंwaliyundhirūقَوْمَهُمْअपनी कौम कोqawmahumإِذَاजबidhāرَجَعُوٓا۟वो लौटेंrajaʿūإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimلَعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيَحْذَرُونَवो डरेंyaḥdharūna١٢٢
और संभव नहीं कि ईमान वाले सब के सब निकल पड़ें, तो उनके हर गिरोह में से कुछ लोग क्यों न निकले, ताकि वे धर्म में समझ हासिल करें और ताकि वे अपने लोगों को डराएँ, जब वे उनके पास वापस जाएँ, ताकि वे बच जाएँ।1
९:१२३
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūقَـٰتِلُوا۟जंग करोqātilūٱلَّذِينَउनसे जोalladhīnaيَلُونَكُمतुम्हारे आस पास हैंyalūnakumمِّنَofminaٱلْكُفَّارِकुफ़्फ़ार में सेl-kufāriوَلْيَجِدُوا۟और चाहिए के वो पाऐंwalyajidūفِيكُمْतुम मेंfīkumغِلْظَةًۭ ۚसख़्तीghil'ẓatanوَٱعْلَمُوٓا۟और जान लोwa-iʿ'lamūأَنَّबेशकannaٱللَّهَअल्लाहl-lahaمَعَसाथ हैmaʿaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगों केl-mutaqīna١٢٣
ऐ ईमान वलो! काफ़िरों में से जो तुम्हारे क़रीब हैं, उनसे लड़ो1 और ज़रूरी है कि वे तुममें कुछ सख्ती पाएँ और जान लो कि अल्लाह परहेज़गारों के साथ है।
९:१२४
وَإِذَاAnd wheneverwa-idhāمَآऔर जब भीmāأُنزِلَتْनाज़िल की जाती हैunzilatسُورَةٌۭकोई सूरतsūratunفَمِنْهُمतो उनमें से कोई हैfamin'humمَّنजोmanيَقُولُकहता हैyaqūluأَيُّكُمْकौन है तुम मेंayyukumزَادَتْهُज़्यादा किया उसकोzādathuهَـٰذِهِۦٓइस (सूरत) नेhādhihiإِيمَـٰنًۭا ۚईमान मेंīmānanفَأَمَّاतो रहेfa-ammāٱلَّذِينَवो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūفَزَادَتْهُمْतो उसने ज़्यादा कर दिया उन्हेंfazādathumإِيمَـٰنًۭاईमान मेंīmānanوَهُمْऔर वोwahumيَسْتَبْشِرُونَवो ख़ुश होते हैंyastabshirūna١٢٤
और जब भी कोई सूरत उतारी जाती है, तो इन (मुनाफ़िक़ों) में से कुछ लोग कहते हैं कि इसने तुममें से किसके ईमान को बढ़ायाॽ1 चुनाँचे जो लोग ईमान लाए, तो इसने उनके ईमान को बढ़ा दिया और वे बहुत खुश होते हैं।
९:१२५
وَأَمَّاऔर रहेwa-ammāٱلَّذِينَवो लोगalladhīnaفِىinfīقُلُوبِهِمदिलों में जिनकेqulūbihimمَّرَضٌۭमर्ज़ हैmaraḍunفَزَادَتْهُمْतो उसने ज़्यादा कर दिया उन्हेंfazādathumرِجْسًاनजासत मेंrij'sanإِلَىٰtoilāرِجْسِهِمْतरफ़ उनकी नजासत केrij'sihimوَمَاتُوا۟और वो मर गएwamātūوَهُمْइस हाल में कि वोwahumكَـٰفِرُونَकाफ़िर थेkāfirūna١٢٥
और रहे वे लोग जिनके दिलों में रोग है, तो उसने उनकी अशुद्धता पर अशुद्धता को और बढ़ा दिया और वे इस अवस्था में मरे कि वे काफ़िर थे।
९:१२६
أَوَلَاक्या भला नहींawalāيَرَوْنَवो देखतेyarawnaأَنَّهُمْकि बेशक वोannahumيُفْتَنُونَआज़माए जाते हैंyuf'tanūnaفِى[in]fīكُلِّeverykulliعَامٍۢहर साल मेंʿāminمَّرَّةًएक बारmarratanأَوْयाawمَرَّتَيْنِदो बारmarratayniثُمَّफिरthummaلَاnotlāيَتُوبُونَनहीं वो तौबा करतेyatūbūnaوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيَذَّكَّرُونَवो नसीहत पकड़ते हैंyadhakkarūna١٢٦
और क्या वे नहीं देखते कि निःसंदेह वे प्रत्येक वर्ष एक या दो बार आज़माए1 जाते हैं? फिर भी वे न तौबा करते हैं और न ही वे उपदेश ग्रहण करते हैं!
९:१२७
وَإِذَاAnd wheneverwa-idhāمَآऔर जब भीmāأُنزِلَتْनाज़िल की जाती हैunzilatسُورَةٌۭकोई सूरतsūratunنَّظَرَदेखता हैnaẓaraبَعْضُهُمْबाज़ उनकाbaʿḍuhumإِلَىٰtoilāبَعْضٍतरफ़ बाज़ केbaʿḍinهَلْक्याhalيَرَىٰكُمदेख रहा है तुम्हेंyarākumمِّنْanyminأَحَدٍۢकोई एकaḥadinثُمَّफिरthummaٱنصَرَفُوا۟ ۚवो फिर जाते हैंinṣarafūصَرَفَफेर दियाṣarafaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuقُلُوبَهُمउनके दिलों कोqulūbahumبِأَنَّهُمْबवजह इसके कि वोbi-annahumقَوْمٌۭऐसे लोग हैंqawmunلَّاnotlāيَفْقَهُونَनहीं वो समझतेyafqahūna١٢٧
और जब भी कोई सूरत उतारी जाती है, तो उनमें से कुछ एक-दूसरे की तरफ देखते हैं कि क्या तुम्हें कोई देख रहा है? फिर वे वापस पलट जाते हैं। अल्लाह ने उनके दिलों को फेर दिया है, क्योंकि निःसंदेह वे ऐसे लोग हैं जो नहीं समझते।
९:१२८
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadجَآءَكُمْआ गया तुम्हारे पासjāakumرَسُولٌۭएक रसूलrasūlunمِّنْfromminأَنفُسِكُمْतुम्हारे नफ़्सों में सेanfusikumعَزِيزٌगिराँ हैʿazīzunعَلَيْهِउस परʿalayhiمَا(is) whatmāعَنِتُّمْकि मशक़्कत में पड़ो तुमʿanittumحَرِيصٌहरीस हैḥarīṣunعَلَيْكُمतुम पर (भलाई का)ʿalaykumبِٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों परbil-mu'minīnaرَءُوفٌۭबहुत शफ़क़त करने वाला हैraūfunرَّحِيمٌۭनिहायत रहम करने वाला हैraḥīmun١٢٨
निःसंदेह तुम्हारे पास तुम्हीं में से एक रसूल आया है। तुम्हारा कठिनाई में पड़ना उसपर बहुत कठिन है। वह तुम्हारे कल्याण के लिए अति उत्सुक है, ईमान वालों के प्रति बहुत करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
९:१२९
فَإِنफिर अगरfa-inتَوَلَّوْا۟वो मुँह मोड़ेंtawallawفَقُلْतो कह दीजिएfaqulحَسْبِىَकाफ़ी है मुझेḥasbiyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuلَآनहींlāإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَ ۖवो हीhuwaعَلَيْهِइसी परʿalayhiتَوَكَّلْتُ ۖभरोसा किया मैंनेtawakkaltuوَهُوَऔर वोwahuwaرَبُّरब हैrabbuٱلْعَرْشِअर्शेl-ʿarshiٱلْعَظِيمِअज़ीम काl-ʿaẓīmi١٢٩
फिर यदि वे मुँह फेरें, तो कह दें कि मेरे लिए अल्लाह ही काफ़ी है। उसके सिवा कोई (वास्तविक) पूज्य नहीं, मैंने उसी पर भरोसा किया है, और वही बड़े अर्श का रब है।
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